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  • “मुंबई की ही हूं!” — Tamannaah Bhatia ने बताया, कैसे बॉलीवुड में खुद को साबित करना पड़ा

    “मुंबई की ही हूं!” — Tamannaah Bhatia ने बताया, कैसे बॉलीवुड में खुद को साबित करना पड़ा

    Tamannaah Bhatia ने अपने शुरुआती बॉलीवुड दिनों की मुश्किलों को याद किया। उन्होंने कहा कि भले ही वो मुंबई में पैदा हुईं, लेकिन इंडस्ट्री में लोगों को बार-बार बताना पड़ता था कि वो यहीं की हैं। जानिए कैसे साउथ और बॉलीवुड के बीच उन्होंने बैलेंस बनाया।

    मुंबई: एक्ट्रेस Tamannaah Bhatia ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि बॉलीवुड में शुरुआत करना उनके लिए आसान नहीं था। भले ही उनका जन्म और पढ़ाई मुंबई में हुई हो, लेकिन उन्हें लोगों को समझाना पड़ता था कि वो वास्तव में यहीं की हैं। साउथ फिल्मों में नाम कमाने के बाद, जब उन्होंने हिंदी फिल्मों की ओर रुख किया तो उन्हें “मुंबई की पहचान” साबित करनी पड़ी।

    🎥 साउथ सिनेमा में शुरुआत और भाषा की जद्दोजहद

    Filmfare को दिए इंटरव्यू में Tamannaah Bhatia ने बताया,

    “जब मैंने साउथ में काम शुरू किया, मैं बहुत छोटी थी। मुझे एहसास हुआ कि वहां काम करने के लिए भाषा सीखना और लोकल कल्चर को समझना बहुत जरूरी है।”

    उन्होंने कहा कि हर भाषा की अपनी बॉडी लैंग्वेज और एक्सप्रेशन होते हैं, जिन्हें उन्होंने स्थानीय लोगों से बात करके सीखा। इसी समझ ने उन्हें एक “पैन-इंडिया एक्ट्रेस” बनने में मदद की।

    🎭 बॉलीवुड में मुश्किल शुरुआत: “मुझे बताना पड़ता था कि मैं मुंबई की हूं”

    Tamannaah ने बताया कि साउथ फिल्मों में करीब 10-12 साल काम करने के बाद जब उन्होंने हिंदी फिल्मों में कदम रखा, तो शुरुआत में लोग उन्हें “बाहरी” मानते थे।

    “मेरे पास साउथ में बहुत स्ट्रॉन्ग फैन बेस था। जब मैंने हिंदी फिल्में करनी शुरू कीं, तब लोगों को बार-बार बताना पड़ता था कि मैं यहीं मुंबई से हूं।”

    उन्होंने कहा कि हिंदी फिल्मों से बचपन से जुड़ाव था क्योंकि वो मुंबई में पली-बढ़ी हैं और उन्होंने हिंदी फिल्में देखकर ही एक्टिंग का सपना देखा था।

    💫 दो दुनियाओं का बैलेंस बनाना — साउथ और बॉलीवुड दोनों में चमक

    Tamannaah ने बताया कि साउथ और हिंदी सिनेमा के बीच उन्होंने एक सही संतुलन (balance) बनाया।

    “अब मुझे दोनों इंडस्ट्री की संस्कृति समझ में आती है। मैंने दोनों की अच्छाइयाँ अपनाई हैं। यही कारण है कि मैं दोनों जगह काम करने में सहज महसूस करती हूँ।”

    उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों में काम करना उनके लिए एक सीखने वाला अनुभव रहा है, जिसने उन्हें बेहतर आर्टिस्ट बनाया।

    🌟 Tamannaah Bhatia का आत्मविश्वास और ग्रोथ जर्नी

    आज Tamannaah साउथ और बॉलीवुड दोनों में अपनी जगह बना चुकी हैं। वो कहती हैं कि हर भाषा, हर रोल उन्हें कुछ नया सिखाता है।

    “मैं खुद को किसी एक जगह तक सीमित नहीं करना चाहती। चाहे हिंदी हो या तमिल, तेलुगू — मुझे बस अच्छा काम करना है,” उन्होंने कहा।

    उनका यह आत्मविश्वास दिखाता है कि उन्होंने अपने करियर की हर मुश्किल को मजबूती से पार किया।


    FAQ सेक्शन

    Q1. Tamannaah Bhatia का जन्म कहाँ हुआ था?
    उनका जन्म और पढ़ाई मुंबई में हुई है। उन्होंने बचपन से ही एक्टिंग का सपना देखा था।

    Q2. उन्होंने साउथ सिनेमा में कब शुरुआत की थी?
    उन्होंने किशोरावस्था में साउथ फिल्मों से करियर शुरू किया और जल्द ही तमिल-तेलुगू सिनेमा की टॉप एक्ट्रेस बनीं।

    Q3. क्या Tamannaah Bhatia को बॉलीवुड में शुरुआत में मुश्किलें आईं?
    हाँ, उन्हें अपनी “मुंबई की पहचान” साबित करनी पड़ी क्योंकि लोग उन्हें साउथ की एक्ट्रेस मानते थे।

    Q4. अब Tamannaah किन फिल्मों में नज़र आ रही हैं?
    वो हाल में कई बॉलीवुड और साउथ फिल्मों में एक्टिव हैं, और OTT प्रोजेक्ट्स में भी काम कर रही हैं।

  • “उम्र नहीं, जुनून मायने रखता है” — Ajinkya Rahane ने चयन समिति को कड़ा संदेश दिया

    “उम्र नहीं, जुनून मायने रखता है” — Ajinkya Rahane ने चयन समिति को कड़ा संदेश दिया

    Mumbai के रणजी ट्रॉफी मैच में शतक लगाने के बाद Ajinkya Rahane ने अनुभव, चयन और संवाद की कमी पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने साफ कहा कि राष्ट्रीय टीम को उनकी जरूरत थी और चयन में उम्र को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।

    मुम्बई के लिये रणजी ट्रॉफी के गेम में शानदार शतक जमाने के बाद Ajinkya Rahane ने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं पर सवाल खड़े कर दिए। उनका कहना है कि उम्र केवल एक संख्या है—अगर खिलाड़ी अभी भी घरेलू क्रिकेट खेल रहा है, अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और लाल गेंद (टेस्ट क्रिकेट) के प्रति जुनून रखता है, तो उसे अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि टीम को ऑस्ट्रेलिया में श्रंखला हारते वक्त उनके अनुभव की जरूरत थी, लेकिन संवाद की कमी ने बात बिगाड़ दी।

    चयन पर तीखा निशाना: “उम्र नहीं, इरादा मायने रखता है”

    Ajinkya Rahane ने स्पष्ट कहा है कि चयन केवल उम्र के आधार पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा:

    “Age is just a number … अगर आपके पास अनुभव है, आप अब भी घरेलू क्रिकेट खेल रहे हैं, आपका इरादा और जुनून लाल गेंद के लिये है — तो चयनकर्ताओं को आपको ध्यान में रखना चाहिए।”
    उन्होंने आर्मी जैसे उदाहरण दिए कि कैसे अनुभव वाली हस्तियाँ भी देर से शामिल हुईं और काम किया।

    संवाद की कमी और चयनकर्ताओं से खिंचाई

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    Rahane ने यह भी कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि जब अनुभवी खिलाड़ियों को बाहर किया गया तब चयन प्रक्रिया में संवाद नहीं था। उन्होंने कहा:

    “Experienced player की तरह मुझे अधिक मौके मिलने चाहिए थे जब मैं वापस आया था। लेकिन संवाद नहीं था।”
    उन्होंने बताया कि टीम को ऑस्ट्रेलिया श्रृंखला में (Border‑Gavaskar Trophy 2024‑25) उनकी जरूरत थी और वो पूरी तरह तैयार थे।

    घरेलू क्रिकेट में सक्रियता और आत्मविश्वास

    Rahane ने यह भी बताया कि Selector अक्सर घर में कहता है कि “घरेलू क्रिकेट खेले बिना किसी को मौका नहीं मिलेगा” — और उन्होंने पिछले 4-5 वर्ष से लगातार घरेलू क्रिकेट खेला है।
    उन्होंने अपने शतक के बाद इस बात को उजागर किया कि उन्होंने मुंबई के लिए लगातार अच्छा किया है।

    युवा और अनुभव का संतुलन: टीम के लिए क्या सही?

    Rahane ने कहा कि टीम में सिर्फ नए खिलाड़ियों को रखना भी पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा:

    “हाँ, जवान खून ज़रूरी है, लेकिन अगर आपके पास अनुभव है तो टीम लाल-गेंद क्रिकेट में बेहतर प्रदर्शन करेगी।”
    उनका कहना है कि उच्च स्तर पर जब टीम में Rohit Sharma और Virat Kohli जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हों, तो टीम को अनुभव की कमी से नहीं जूझना चाहिए।

    संदेश युवा खिलाड़ियों के लिए: लगातार चलते रहो

    Rahane ने अपने साथी मुंबई टीम के युवा बल्लेबाज Sarfaraz Khan को भी सम्बोधित किया और कहा कि चयन न होने पर निराश नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा:

    “तुम्हें सिर नीचे रखकर रन बनाते रहना है। परिवार, टीम साथ है। बस controllables (कंट्रोल की जा सकने वाली चीजें) पर फोकस करो।”
    यह संदेश यह दर्शाता है कि उन्होंने चयन प्रक्रिया की चुनौती और उसमें निराशा को समझा है।


    निष्कर्ष

    Ajinkya Rahane ने हम सभी को याद दिलाया है कि क्रिकेट में सिर्फ उम्र मायने नहीं रखती—इरादा, जुनून, अनुभव और संवाद भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। चयनकर्ताओं को इस पॅरामीटर पर भी विचार करना चाहिए। वहीं खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन और मानसिक दृष्टिकोण पर ध्यान देना होगा।


    FAQ

    Q1. क्या उम्र के कारण Rahane अब टीम में नहीं हैं?
    उन्होंने खुद कहा है कि उन्हें लगता है कि उम्र को आधार बनाया गया है, जबकि उनका मानना है कि चयन में “इरादा” व “दृढ़ता” ज्यादा मायने रखते हैं।

    Q2. उन्होंने चयन समिति या चयन प्रणाली पर क्या टीका की है?
    हाँ—उन्होंने संवाद की कमी व चयन में अनुभवहीन खिलाड़ियों को प्राथमिकता देने पर सवाल उठाया है।

    Q3. क्या Rahane का शतक हाल में आया है?
    जी हाँ, उन्होंने मुम्बई के लिए रणजी ट्रॉफी के मैच में शानदार शतक बनाया।

    Q4. उनका संदेश युवाओं के लिए क्या है?
    युवा खिलाड़ियों को निराश नहीं होना, रन बनाते रहना और अपने नियंत्रण में रहने वाली चीजों पर फोकस करना चाहिए।

  • पुणे में झमाझम बारिश से हाईवे जाम, मुंबई में भी बादल छाए – 29 अक्टूबर तक बारिश के आसार

    पुणे में झमाझम बारिश से हाईवे जाम, मुंबई में भी बादल छाए – 29 अक्टूबर तक बारिश के आसार

    पुणे और मुंबई में रविवार को हुई भारी बारिश ने ट्रैफिक और जनजीवन को प्रभावित किया। मुंबई-बेंगलुरु हाईवे पर जाम लगा तो किसानों की फसलें भी बर्बाद हुईं। IMD ने 29 अक्टूबर तक हल्की बारिश की चेतावनी जारी की है।

    मुंबई: रविवार को पुणे और उसके आसपास के इलाकों में अचानक हुई भारी बारिश से शहर में ट्रैफिक जाम, फसल नुकसान और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मुंबई में भी बादल छाए रहे और कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बन रहे कम दबाव के क्षेत्र से महाराष्ट्र में 29 अक्टूबर तक बारिश बनी रह सकती है।

    पुणे में अनियोजित भारी बारिश, किसानों की फसलें बर्बाद

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    पुणे ट्रैफिक जाम की तस्वीर

    रविवार दोपहर से पुणे शहर और आसपास के इलाके जैसे सिंहगड, पानशेत, भोर और मुळशी में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई। यह बारिश पूरे दिन रुक-रुक कर चलती रही, जिससे सड़कों पर पानी भर गया और ट्रैफिक ठप हो गया।
    कई जगहों पर धान (paddy crops) और अन्य फसलों को बड़ा नुकसान हुआ। किसानों का कहना है कि सालभर की मेहनत कुछ ही घंटों की बारिश में बर्बाद हो गई।

    लॉन्ग-टेल कीवर्ड्स:

    • “पुणे में अनियोजित बारिश से फसल नुकसान”
    • “मुंबई-बेंगलुरु हाईवे पर ट्रैफिक जाम अपडेट”
    • “पुणे में बारिश कब तक होगी IMD अलर्ट”

    🚗 मुंबई-बेंगलुरु हाईवे पर लंबा जाम

    दिवाली की छुट्टियों के बाद रविवार को मुंबई और पुणे लौटने वालों की भीड़ हाईवे पर बढ़ गई। भारी बारिश ने यातायात को और बिगाड़ दिया।
    मुंबई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, बारिश के दौरान वाहन धीरे चलने से स्थिति और खराब हुई।

    🌦️ मुंबई में बादल छाए, कुछ इलाकों में बूंदाबांदी

    मुंबई शहर में रविवार को आसमान दिनभर बादलों से ढका रहा। ठाणे, दहिसर, अंधेरी और घाटकोपर जैसे इलाकों में हल्की बारिश की बूंदाबांदी दर्ज की गई।
    IMD (India Meteorological Department) के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बन रहे Low Pressure Area के कारण महाराष्ट्र के कई हिस्सों में 29 अक्टूबर तक हल्की बारिश जारी रह सकती है।

    🌪️ IMD का अनुमान: 27 अक्टूबर तक ‘मोंथा’ साइक्लोन बन सकता है

    मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में तेजी से विकसित हो रहा कम दबाव का क्षेत्र Cyclonic Storm ‘Montha’ का रूप ले सकता है।
    इससे दक्षिण भारत और महाराष्ट्र के मौसम पर अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।
    पुणे में दिन के तापमान में बढ़ोतरी और रात में ठंडक बनी हुई है, जिससे नमी और बिजली-गरज के साथ हल्की बारिश की संभावना बढ़ जाती है।

    🧑‍🌾 किसानों के लिए चिंता का विषय

    पुणे जिले के ग्रामीण इलाकों में अचानक हुई बारिश ने खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया।
    स्थानीय प्रशासन ने किसानों से कहा है कि वे फसल नुकसान का सर्वे करवाएं और मुआवजे के लिए कृषि विभाग में आवेदन करें।

    ⚠️ लोगों के लिए जरूरी सलाह

    • बारिश में ड्राइव करते समय गति नियंत्रित रखें।
    • हाईवे पर निकलने से पहले ट्रैफिक अपडेट चेक करें।
    • बिजली-गरज के समय खुले इलाकों में न जाएं।
    • खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1: पुणे में बारिश कब तक चलेगी?
    ➡️ मौसम विभाग के अनुसार, पुणे और आसपास के इलाकों में 29 अक्टूबर तक हल्की बारिश जारी रह सकती है।

    Q2: क्या मुंबई में भी भारी बारिश होगी?
    ➡️ मुंबई में फिलहाल सिर्फ हल्की बारिश और बादल छाए रहने के आसार हैं।

    Q3: किसानों को क्या करना चाहिए?
    ➡️ फसल नुकसान का तुरंत सर्वे करवाएं और कृषि विभाग से मुआवजे के लिए संपर्क करें।

    Q4: साइक्लोन ‘मोंथा’ का असर महाराष्ट्र पर होगा क्या?
    ➡️ सीधा असर नहीं, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से हल्की बारिश और नमी में बढ़ोतरी हो सकती है।

  • मुंबई पुलिस ने पालघर में MD ड्रग फैक्ट्री पकड़ी, एक गिरफ्तार; मास्टरमाइंड कर रहा था दुबई से ऑपरेट

    मुंबई पुलिस ने पालघर में MD ड्रग फैक्ट्री पकड़ी, एक गिरफ्तार; मास्टरमाइंड कर रहा था दुबई से ऑपरेट

    मुंबई पुलिस ने पालघर जिले के वसई में एमडी ड्रग फैक्ट्री पर छापा मारकर 7 किलो ड्रग और करोड़ों की केमिकल सामग्री जब्त की। मास्टरमाइंड दुबई में बैठा था।

    मुंबई: पालघर जिले के वसई इलाके में एक अवैध MD ड्रग (मेफेड्रोन) बनाने वाली फैक्ट्री का मुंबई पुलिस ने भंडाफोड़ किया है।
    पुलिस ने मौके से करीब 7 किलो MD ड्रग और बड़ी मात्रा में केमिकल्स व कच्चा माल बरामद किया है, जिसकी कीमत कई करोड़ रुपये बताई जा रही है।

    यह कार्रवाई शनिवार देर रात मुंबई पुलिस की ज़ोन 6 एंटी-नारकोटिक्स सेल और तिलक नगर पुलिस की संयुक्त टीम ने की।

    दुबई से चल रहा था रैकेट

    जांच में पुलिस को पता चला कि इस ड्रग फैक्ट्री के पीछे का मास्टरमाइंड दुबई में बैठा था, जो वहीं से पूरी सप्लाई चेन और नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था।
    पुलिस ने एक आरोपी को मौके से गिरफ्तार कर लिया है और बाकी फरार लोगों की तलाश जारी है।

    रशीद कंपाउंड में चल रहा था गोरखधंधा

    यह ड्रग फैक्ट्री वसई के पेल्हार इलाके के रशीद कंपाउंड में चल रही थी। यहां पर मेफेड्रोन ड्रग को अवैध तरीके से तैयार किया जा रहा था।
    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फैक्ट्री में रासायनिक मिश्रण और मिक्सिंग मशीनें लगी थीं, जिनका इस्तेमाल एमडी बनाने के लिए किया जाता था।

    एक अधिकारी ने बताया —

    “हमारी टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि पेल्हार में एक केमिकल यूनिट में एमडी ड्रग तैयार की जा रही है। छापा मारते ही पूरा सेटअप मिला — रिएक्टर, केमिकल्स, ड्रम्स और ड्रग तैयार अवस्था में।”

    जब्त की गई सामग्री की कीमत करोड़ों में

    पुलिस ने फैक्ट्री से 7 किलो मेफेड्रोन (MD ड्रग), भारी मात्रा में केमिकल्स और अन्य कच्चा माल जब्त किया है। बरामद माल की कीमत कई करोड़ रुपये बताई जा रही है।
    इस ऑपरेशन में पुलिस को अंदेशा है कि ड्रग्स मुंबई और आसपास के इलाकों में सप्लाई किए जा रहे थे, जिनका लिंक बड़े नेटवर्क से हो सकता है।

    जांच जारी, कई राज्यों तक फैला नेटवर्क

    मुंबई पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस रैकेट का नेटवर्क कितने राज्यों और देशों तक फैला हुआ है।
    मास्टरमाइंड दुबई से व्हाट्सएप और इंटरनेट कॉल्स के जरिए नेटवर्क चलाता था।
    पुलिस ने आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है और एनसीबी व अन्य एजेंसियों से भी संपर्क में है।

    मुंबई पुलिस की सख्त कार्रवाई

    पुलिस ने बताया कि इस साल अब तक मेफेड्रोन ड्रग से जुड़े कई केसों में कार्रवाई की जा चुकी है।
    मुंबई, ठाणे और पालघर इलाकों में ड्रग माफिया की सक्रियता बढ़ रही थी, जिसके चलते स्पेशल टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।


    FAQ Section

    Q1. पल्पघर में कब और कहां ड्रग फैक्ट्री पकड़ी गई?
    A. शनिवार देर रात वसई के पेल्हार इलाके के रशीद कंपाउंड में ड्रग फैक्ट्री पर छापा मारा गया।

    Q2. कितनी मात्रा में ड्रग जब्त हुई है?
    A. पुलिस ने करीब 7 किलो एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग और करोड़ों की कीमत का कच्चा माल जब्त किया है।

    Q3. इस केस में कौन गिरफ्तार हुआ है?
    A. एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मास्टरमाइंड दुबई से इस नेटवर्क को चला रहा था।

    Q4. कार्रवाई किसने की?
    A. मुंबई पुलिस की ज़ोन 6 एंटी-नारकोटिक्स सेल और तिलक नगर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की।

    Q5. क्या इस नेटवर्क के और लोग शामिल हैं?
    A. हां, पुलिस अन्य संदिग्धों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच कर रही है।

  • मुंबई डेवलपर्स ने BMC से मांगी राहत, प्रीमियम पेमेंट के लिए 10:10:80 फार्मूला पेश

    मुंबई डेवलपर्स ने BMC से मांगी राहत, प्रीमियम पेमेंट के लिए 10:10:80 फार्मूला पेश

    मुंबई के रियल एस्टेट डेवलपर्स ने BMC कमिश्नर भूषण गगरानी से मुलाकात कर प्रीमियम पेमेंट को 10:10:80 स्ट्रक्चर में करने का प्रस्ताव दिया। इस बैठक में CREDAI-MCHI, NAREDCO, BDA और PEATA जैसी प्रमुख संस्थाओं ने हिस्सा लिया।

    मुंबई: रियल एस्टेट डेवलपर्स की प्रमुख संस्थाओं — CREDAI-MCHI, NAREDCO, BDA और PEATA — ने 24 अक्टूबर को BMC प्रमुख भूषण गगरानी से मुलाकात की। इस दौरान डेवलपर्स ने मौजूदा प्रीमियम भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने के लिए 10:10:80 पेमेंट स्ट्रक्चर का सुझाव दिया। इस बैठक में डेवलपर्स ने कहा कि यह फार्मूला प्रोजेक्ट के कैश फ्लो के अनुसार पेमेंट को बैलेंस करेगा और रियल एस्टेट सेक्टर को राहत देगा।

    🏗️ क्या है 10:10:80 प्रीमियम पेमेंट स्ट्रक्चर?

    • डेवलपर्स ने प्रस्ताव रखा कि कुल प्रीमियम का 10% पेमेंट प्रोजेक्ट अप्रूवल के समय,
      10% कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (CC) पर,
      और बाकी 80% ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (OC) मिलने पर किया जाए।
    • इस मॉडल का उद्देश्य है कि डेवलपर्स पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम हो और पेमेंट्स प्रोजेक्ट की वास्तविक प्रगति के साथ जोड़े जाएँ।

    💰 वर्तमान प्रीमियम सिस्टम से क्यों हैं परेशान डेवलपर्स

    • फिलहाल डेवलपर्स को फंजिबल FSI, ओपन स्पेस डेफिशियेंसी, फायर सर्विस चार्ज, डेवलपमेंट सेस, और स्क्रूटनी फीस जैसी करीब 20 अलग-अलग प्रीमियम फीस देनी पड़ती हैं।
    • इनका भुगतान शुरुआती चरण में करना पड़ता है, जबकि तब तक प्रोजेक्ट से कोई राजस्व नहीं आता।
    • कई बार ये फीस 12% ब्याज दर पर डिफर्ड स्कीम के तहत दी जाती है, जिससे लागत और बढ़ जाती है।
    • डेवलपर्स का कहना है कि 10:10:80 फार्मूला न सिर्फ कैश फ्लो को मैच करेगा बल्कि BMC के लिए भी रेवेन्यू न्यूट्रल रहेगा।

    🏢 BMC की पहल: रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बनेगी स्टीयरिंग कमेटी

    • बैठक में BMC कमिश्नर भूषण गगरानी ने घोषणा की कि रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक स्टीयरिंग कमेटी बनाई जाएगी।
    • इसमें CREDAI-MCHI, NAREDCO, PEATA, BDA के प्रतिनिधि और BMC के विभिन्न विभागों के अधिकारी, जैसे फायर ऑफिस, शामिल होंगे।
    • कमेटी हर दो हफ्ते में बैठक करेगी, ताकि नीति संबंधी मुद्दों, डेवलपमेंट अड़चनों और प्रक्रियाओं पर चर्चा हो सके।
    • उप मुख्य अभियंता चंद्रशेखर उंडगे इस कमेटी की अध्यक्षता करेंगे, जबकि BMC प्रमुख भी महीने में एक बार बैठक में शामिल होंगे।

    🧩 डेवलपर्स की राय क्या है?

    CREDAI-MCHI अध्यक्ष सुखराज नाहर ने कहा,

    “10:10:80 प्रीमियम पेमेंट मॉडल एक फेयर और प्रैक्टिकल अप्रोच है, जिससे प्रोजेक्ट प्रोग्रेस के साथ पेमेंट्स को जोड़ा जा सकता है। इससे पारदर्शिता और संतुलन दोनों बढ़ेंगे।”

    CREDAI-MCHI सचिव ऋषि मेहता ने कहा,

    “रियल एस्टेट इंडस्ट्री मुंबई के विकास की रीढ़ है। BMC के साथ नियमित संवाद से नीति में सुधार और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी।”

    📘 क्या है ‘प्रीमियम’? (Premium Explained)

    • प्रीमियम वो चार्जेज हैं जो डेवलपर्स सिविक अथॉरिटी को अतिरिक्त निर्माण अधिकार या प्रोजेक्ट अप्रूवल के लिए देते हैं।
    • इनमें शामिल हैं:
    • फंजिबल FSI (Floor Space Index)
    • ओपन स्पेस डेफिशियेंसी फीस
    • फायर सर्विस चार्ज
    • कॉमन एरिया चार्ज (लॉबी, लिफ्ट, सीढ़ियाँ आदि के लिए)
    • मुंबई में प्रीमियम कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट का लगभग 20–30% तक हिस्सा होता है।

    📈 रियल एस्टेट इंडस्ट्री के लिए इसका मतलब क्या है?

    • यह प्रस्ताव लागू होने पर प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत कम होगी।
    • डेवलपर्स को वर्किंग कैपिटल मैनेज करने में मदद मिलेगी।
    • इससे नए प्रोजेक्ट्स को शुरू करने की गति बढ़ सकती है, जिससे मकान खरीदारों को भी अप्रत्यक्ष फायदा मिलेगा।

    FAQ सेक्शन

    Q1. 10:10:80 प्रीमियम स्ट्रक्चर क्यों ज़रूरी है?
    ➡️ यह मॉडल डेवलपर्स को प्रोजेक्ट के कैश फ्लो के अनुसार भुगतान करने की सुविधा देता है, जिससे आर्थिक दबाव घटता है।

    Q2. क्या इससे BMC का राजस्व प्रभावित होगा?
    ➡️ नहीं। CREDAI-MCHI के अनुसार यह रेवेन्यू न्यूट्रल है — यानी BMC को कोई नुकसान नहीं होगा।

    Q3. क्या स्टीयरिंग कमेटी के फैसले बाध्यकारी होंगे?
    ➡️ यह एक सलाहकार निकाय होगी, जो नीति सुधार और अड़चनों को हल करने के लिए सुझाव देगी।

    Q4. क्या इस प्रस्ताव को तुरंत लागू किया जाएगा?
    ➡️ फिलहाल यह प्रस्ताव स्तर पर है। BMC इसे समीक्षा के बाद नीतिगत रूप से लागू कर सकती है।

  • मुंबई हवाई अड्डे पर 154 विदेशी जीवों के साथ तस्कर गिरफ्तार

    मुंबई हवाई अड्डे पर 154 विदेशी जीवों के साथ तस्कर गिरफ्तार

    Chhatrapati Shivaji Maharaj International Airport-मुम्बई में थाईलैंड से आए यात्री के सामान में छिपाकर लाई गई 154 एक्सोटिक सरीसृप व जीवों के साथ एक महिला तस्कर को कस्टम्स ने गिरफ्तार किया। जानिए पूरा मामला, कानूनी कार्रवाई और जैव-विविधता पर असर।

    मुंबई: छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम विभाग ने थाईलैंड से आने वाली एक महिला यात्री को 154 विदेशी और दुर्लभ जीवों के साथ गिरफ्तार किया है। इन जीवों में सर्प, छिपकलियाँ, कछुए व अन्य शामिल थे। तस्करी के इस कथित प्रयास के तहत महिला को कस्टम्स एक्ट व वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है।

    मामला क्या है?

    • कस्टम विभाग के ज़ोन III टीम को मिली एक विशेष सूचना के आधार पर अड़ान से उतरते ही आरोपी यात्री की तलाशी ली गई।
    • उसकी सामान में मिले 154 विदेशी जीव थे — जिनमें कोर्न स्नेक्स, हॉगनोज़ स्नेक्स, बेअर्ड ड्रैगन, येलो एनाकॉन्डा आदि शामिल बताये गये।
    • बताया गया है कि ये जीव थाईलैंड से मुंबई लाए गए थे, तस्करी के उद्देश्य से।
    • इस कार्रवाई में कस्टम्स ने आरोपित महिला के खिलाफ Customs Act, 1962 तथा Wildlife (Protection) Act, 1972 के अंतर्गत मामला दर्ज किया है।

    तस्करी के तरीके एवं जीवों की संवेदनशीलता

    • रिपोर्ट्स बताती हैं कि इन जीवों को प्लास्टिक कंटेनरों में छिपाकर लगेज में रखा गया था, जो जानवरों के लिए अत्यंत खतरनाक पाया गया।
    • विशेषज्ञों के अनुसार, इन विदेशी प्रजातियों की भारत में मांग बढ़ रही है — विशेष कर पालतू जानवर के रूप में — जिससे तस्करी को बढ़ावा मिलता है।
    • उल्लेखनीय है कि कुछ जीव (जैसे एनाकॉन्डा) भारत की मूल जैव विविधता से बिलकुल अलग हैं, और उनके अवैध आयात से न सिर्फ जानवरों को पीड़ा होती है बल्कि घरेलू इकोसिस्टम पर भी असर पड़ सकता है।

    कानूनी और संरक्षण-प्रभाव

    • ये प्राणी अंतरराष्ट्रीय संधि Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora (CITES) के अंतर्गत आते हैं तथा बिना अनुमति आयात करना निषिद्ध है।
    • इन घटनाओं से पता चलता है कि भारत में वन्यजीव तस्करी बड़ी समस्या है — और ऐसे मामलों में सक्रिय निरोध व प्रवर्तन की आवश्यकता है।
    • पकड़े गए जीवों को अग्रिम तौर पर संरक्षण व स्वास्थ्य परीक्षण के लिए संबंधित एजेंसियों को सौंपा गया है — बाद में संभवतः उन्हें मूल देश वापस भेजा जाएगा।

    क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?

    • यह तस्करी का गंभीर संकेत है — 154 जीवों की संख्या इस तरह के मामलों में बहुत बड़ी है।
    • यह जैव-विविधता संरक्षण की चुनौतियों को दर्शाता है — विदेशी प्रजातियों का अवैध आयात स्थानीय इकोसिस्टम को अस्थिर कर सकता है।
    • यह दर्शाता है कि हवाई अड्डों पर सक्रिय निगरानी एवं गहरी जांच कितनी महत्वपूर्ण है।
    • साथ ही यह आम नागरिकों को सचेत करता है कि पालतू जानवर के लिए विदेशी जीवों की खपत सिर्फ नियम-विपरीत नहीं बल्कि जानवरों के हित में भी नहीं है।

    आगे क्या हो सकता है?

    • प्रवर्तन एजेंसियाँ तस्करी के स्रोत, नेटवर्क व मार्ग का पता लगायेंगी।
    • आरोपी के खिलाफ अभियोजन चल रहा है, कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
    • पकड़े गए जीवों की देखभाल व संभवतः देश वापसी की प्रक्रिया होगी।
    • इस तरह की घटनाओं के पुनरावृत्ति रोकने के लिए हवाई अड्डों पर और कड़ी जाँच-निगरानी की संभावना बढ़ेगी।

    Frequently Asked Questions (FAQ)

    Q1: क्या इतने विदेशी जीव लाना कानूनन पूरी तरह से निषिद्ध है?
    हाँ। इन जीवों में से बहुत सी प्रजातियाँ CITES की सूची में हैं और बिना अनुमति भारत में लाना कानूनी अपराध है।

    Q2: पकड़े गए जीवों के साथ क्या होगा?
    उनका स्वास्थ्य परीक्षण व देखभाल की जाएगी। फिर प्राधिकरणों के निर्देशानुसार संभवतः उन्हें मूल देश वापस भेजा जा सकता है।

    Q3: यदि कोई व्यक्ति इन जानवरों को पालतू के रूप में रखना चाहता है तो क्या कर सकता है?
    पालतू के रूप में जीव-प्रजातियों को रखने के लिए विशेष अनुमति चाहिए होती है। विदेशी प्रजातियों के लिए अधिक कड़े नियम होते हैं। बिना अनुमति रखना अपराध माना जा सकता है।

    Q4: इस तरह की तस्करी क्यों होती है?
    क्योंकि विदेशी और दुर्लभ जीवों की मांग पालतू बाजार में अधिक है, जिससे तस्करों को लाभ मिलता है। साथ ही जानवरों के लिए कम-सुरक्षित मार्ग व कम-कड़ी जाँच का फायदा मिलता है।

  • मुंबई में ब्रेकअप के बाद गर्लफ्रेंड पर हमला कर, कर ली खुदकुशी

    मुंबई में ब्रेकअप के बाद गर्लफ्रेंड पर हमला कर, कर ली खुदकुशी

    मुंबई के काला चौकी इलाके से एक दर्दनाक मामला सामने आया है। ब्रेकअप से परेशान युवक ने शक के चलते अपनी गर्लफ्रेंड पर हमला किया और फिर खुदकुशी कर ली। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    मुंबई: परेल के काला चौकी इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना ने सभी को चौंका दिया है।
    यहां एक युवक ने अपनी गर्लफ्रेंड पर चाकू से हमला किया और फिर खुद आत्महत्या कर ली
    जानकारी के मुताबिक, दोनों के बीच कुछ दिन पहले ब्रेकअप हुआ था और युवक को शक था कि उसकी गर्लफ्रेंड का किसी और से रिश्ता है।

    पुलिस ने फिलहाल मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घायल लड़की की हालत गंभीर बताई जा रही है जबकि युवक की मौत हो चुकी है।

    😔 ब्रेकअप के बाद बढ़ा शक, बना हत्या और सुसाइड का कारण

    पुलिस के अनुसार, आरोपी और उसकी गर्लफ्रेंड का करीब आठ दिन पहले ही ब्रेकअप हुआ था
    ब्रेकअप के बाद से युवक मानसिक रूप से परेशान था और इस पूरे मामले के लिए वह अपनी गर्लफ्रेंड को दोष दे रहा था।
    उसे लगता था कि उसकी गर्लफ्रेंड का किसी दूसरे शख्स से अफेयर चल रहा है।

    इसी शक में शुक्रवार सुबह वह लड़की से मिलने गया, लेकिन अपने साथ किचन का चाकू भी ले गया।
    दोनों के बीच बहस बढ़ी और आरोपी ने गुस्से में आकर गर्लफ्रेंड पर कई वार कर दिए

    🏥 अस्पताल में भर्ती, एक की मौत — एक की हालत नाजुक

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
    इलाज के दौरान आरोपी युवक की मौत हो गई, जबकि उसकी गर्लफ्रेंड गंभीर रूप से घायल है और डॉक्टरों की टीम उसकी जान बचाने की कोशिश कर रही है।

    पुलिस का कहना है कि घटनास्थल से खून से सना चाकू बरामद किया गया है और मामला आत्महत्या व हत्या के प्रयास के रूप में दर्ज किया गया है।

    🧠 रिश्तों में बढ़ती हिंसा पर उठे सवाल

    यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि रिश्तों में असहिष्णुता और मानसिक असंतुलन का भी संकेत है।
    पिछले कुछ महीनों में मुंबई, पुणे और ठाणे से ब्रेकअप के बाद आत्महत्या या हिंसा के कई केस सामने आए हैं।
    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता बेहद जरूरी है।

    ⚖️ पुलिस जांच जारी

    काला चौकी पुलिस ने बताया कि दोनों के मोबाइल और सोशल मीडिया चैट की जांच की जा रही है ताकि विवाद का असली कारण पता लगाया जा सके।
    फिलहाल लड़की का बयान नहीं लिया जा सका है क्योंकि वह अभी ICU में भर्ती है।


    ❓ FAQs

    Q1. यह घटना कहां की है?
    यह घटना मुंबई के काला चौकी इलाके की है।

    Q2. आरोपी ने हमला क्यों किया?
    आरोपी को शक था कि उसकी गर्लफ्रेंड का किसी और से रिश्ता है, और ब्रेकअप के बाद वह मानसिक रूप से परेशान था।

    Q3. क्या दोनों की मौत हो गई?
    नहीं, आरोपी की मौत हो गई है, लेकिन लड़की गंभीर रूप से घायल है और उसका इलाज जारी है।

    Q4. पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
    पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और घटना से जुड़े सभी साक्ष्य जुटा रही है।

    Q5. क्या यह मामला मानसिक तनाव से जुड़ा है?
    हाँ, शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी डिप्रेशन और शक के कारण यह कदम उठाया।

  • मुंबई के वकील ने NHRC से की शिकायत, कहा– “खतरनाक पटाखे बन गए ज़हर”

    मुंबई के वकील ने NHRC से की शिकायत, कहा– “खतरनाक पटाखे बन गए ज़हर”

    मुंबई के वकील हितेंद्र गांधी ने मानवाधिकार आयोग (NHRC) से मांग की है कि कार्बाइड आधारित खतरनाक पटाखों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि ये पटाखे लोगों की सेहत, पर्यावरण और जानवरों के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं।

    मुंबई: जाने-माने वकील हितेंद्र गांधी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को एक याचिका दाखिल की है जिसमें उन्होंने कार्बाइड बेस्ड (Carbide-Based) खतरनाक पटाखों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
    उनका कहना है कि ये पटाखे न सिर्फ लोगों की सेहत और पर्यावरण के लिए खतरनाक हैं, बल्कि जानवरों और बच्चों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन चुके हैं।

    गांधी ने NHRC से आग्रह किया है कि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय अध्ययन कराया जाए, सार्वजनिक एडवाइजरी जारी की जाए, और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कड़े कदम उठाए जाएं — ताकि दिवाली की धार्मिक भावना बनी रहे, पर सेहत और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

    🌫️ दिवाली के बाद बढ़ता प्रदूषण, बिगड़ती हवा की गुणवत्ता

    वकील की याचिका में कहा गया है कि सरकारी मॉनिटरिंग स्टेशन और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) हर साल दिवाली के बाद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक तत्वों में तेज़ उछाल दिखाते हैं।
    कई शहरों में दिवाली की रातों के बाद हवा की स्थिति “Very Poor” से “Severe” कैटेगरी तक पहुंच जाती है।

    हालांकि ग्रीन क्रैकर्स को लागू करने की सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पहले से मौजूद है, लेकिन वकील का कहना है कि अभी भी गैर-प्रमाणित और जहरीले पटाखे खुलेआम बिक रहे हैं

    🚫 “ग्रीन पटाखे” के बावजूद नहीं थमा जहरीले धुएं का असर

    हितेंद्र गांधी का कहना है कि “ग्रीन पटाखे” के नियमों के बावजूद गैर-लाइसेंसशुदा फायरवर्क्स और कार्बाइड बेस्ड पटाखों की बिक्री जारी है।
    इनसे निकलने वाला धुआं न सिर्फ इंसानों के लिए सांस संबंधी खतरे पैदा करता है बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और जानवरों पर भी सीधा असर डालता है।

    🐶 जानवरों पर भी गहरा असर

    याचिका में बताया गया है कि पशु कल्याण संस्थाएं और वेटरनरी क्लीनिक दिवाली के बाद घायल और डरे हुए जानवरों की संख्या में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज करते हैं।
    कई शहरों में सैकड़ों पालतू और आवारा जानवर धमाकों और धुएं के कारण घायल या भाग जाते हैं।
    यह स्थिति हर साल मानवता और करुणा की भावना को ठेस पहुंचाती है।

    💣 कार्बाइड गन — नया खतरा बनते “घरेलू बम”

    हितेंद्र गांधी ने अपनी याचिका में “कार्बाइड गन” या घरेलू विस्फोटक उपकरणों की भी चर्चा की है।
    इन गैरकानूनी और असुरक्षित पटाखों के कारण भोपाल से बेंगलुरु तक 130 से ज्यादा लोग, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

    इन “कार्बाइड गनों” के वीडियो सोशल मीडिया पर आसानी से मिल जाते हैं और कोई भी इन्हें घर पर बना सकता है।
    यह चलन अब सार्वजनिक सुरक्षा संकट (Public Safety Crisis) बन चुका है।

    ⚖️ “मानवाधिकार का उल्लंघन” – याचिका में गंभीर आरोप

    वकील ने कहा,

    “ये घटनाएं सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का सीधा हनन हैं — खासकर जीवन, स्वास्थ्य और गरिमा के अधिकार का।”

    उन्होंने आयोग से अपील की है कि NHRC सरकार को सिफारिश करे कि

    • कार्बाइड आधारित पटाखों पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लगाया जाए,
    • Explosives Act और अन्य नियमों को सख्ती से लागू किया जाए,
    • और इस मामले पर जागरूकता अभियान चलाया जाए ताकि उत्सव का असली प्रकाश जीवन और करुणा के साथ जुड़ा रहे।

    ❓FAQs

    Q1. किसने NHRC में याचिका दाखिल की है?
    मुंबई के वकील हितेंद्र गांधी ने यह याचिका दाखिल की है।

    Q2. याचिका में क्या मांग की गई है?
    कार्बाइड आधारित पटाखों पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध, और सुरक्षा नियमों की सख्त पालना की मांग की गई है।

    Q3. क्या “ग्रीन क्रैकर्स” से प्रदूषण कम हुआ है?
    नहीं, वकील का कहना है कि ग्रीन क्रैकर्स के बावजूद प्रदूषण स्तर में सुधार नहीं आया।

    Q4. जानवरों पर क्या असर पड़ता है?
    तेज धमाकों और धुएं से जानवर डर जाते हैं, कई घायल या भाग जाते हैं।

    Q5. “कार्बाइड गन” क्या है?
    यह एक असुरक्षित घरेलू विस्फोटक उपकरण है जो दिवाली में धमाके के लिए बनाया जाता है, और इससे कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।

  • विधायक सुनील प्रभु की मांग — आप्पापाडा से पोयसर नदी तक 13.4 मीटर चौड़ा DP रोड ‘वाइटल प्रोजेक्ट’ घोषित किया जाए

    विधायक सुनील प्रभु की मांग — आप्पापाडा से पोयसर नदी तक 13.4 मीटर चौड़ा DP रोड ‘वाइटल प्रोजेक्ट’ घोषित किया जाए

    दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की बड़ी समस्या को देखते हुए विधायक सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से आप्पापाडा नर्सिंग होम से पोयसर नदी तक के 13.4 मीटर चौड़े DP रोड को ‘वाइटल प्रोजेक्ट’ घोषित करने की मांग की है।

    मुंबई: मालाड़ पूर्व के दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र में आने वाले आप्पापाडा इलाके में सड़कों की चौड़ाई बहुत कम होने से रोज़ाना ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ रही है। नागरिकों को ऑफिस या काम के स्थान तक पहुँचने में काफी देरी होती है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए विधायक सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर आप्पापाडा नर्सिंग होम से पोयसर नदी तक के प्रस्तावित 13.4 मीटर चौड़े विकास नियोजन (DP) रोड को “वाइटल प्रोजेक्ट (Vital Project)” घोषित करने की मांग की है।

    🏙️ आप्पापाडा क्षेत्र में सड़कें संकरी, ट्रैफिक जाम आम

    दिंडोशी के आप्पापाडा, गोकुलनगर और आसपास के इलाकों में सड़कें बेहद संकरी हैं। पश्चिम द्रुतगती महामार्ग (Western Express Highway) से इन इलाकों की दूरी ज्यादा होने के कारण यहां ट्रैफिक जाम रोजमर्रा की समस्या बन चुकी है। इस कारण लोगों को समय पर ऑफिस या स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

    🏗️ समानांतर रोड से पश्चिम उपनगरों को मिलेगी राहत

    प्रभु ने कहा है कि बोरीवली और लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स जैसे इलाकों से जोड़ने वाला पश्चिम द्रुतगती महामार्ग के समानांतर रोड बेहद ज़रूरी है। इससे न सिर्फ ट्रैफिक लोड कम होगा बल्कि नागरिकों को वैकल्पिक मार्ग भी मिलेगा।

    🌊 पोयसर नदी पुनरुज्जीवन प्रकल्प भी इससे जुड़ा

    आप्पापाडा क्षेत्र में पोयसर नदी पुनरुज्जीवन प्रकल्प (Poisar River Rejuvenation Project) पहले से ही चल रहा है और इसे पहले से ही “वाइटल प्रोजेक्ट” घोषित किया गया है। लेकिन इस प्रकल्प के तहत बनने वाले सांडपानी प्रक्रिया संयंत्र (STP) और मलनिस्सारण वाहिनियां (Drainage pipelines) जैसे महत्वपूर्ण कार्य अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं, क्योंकि वहां तक पहुंचने के लिए सड़क (access road) उपलब्ध नहीं है।

    प्रभु का कहना है कि अगर 13.4 मीटर चौड़ा डीपी रोड तत्काल बनाया गया और उसे वाइटल प्रोजेक्ट घोषित किया गया, तो बीएमसी के इन अधूरे कामों को भी तेजी से पूरा किया जा सकेगा।

    🏛️ बीएमसी और सरकार से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद

    प्रभु ने मांग की है कि इस सड़क को प्राथमिकता (priority) पर लेकर इसे “वाइटल प्रोजेक्ट” घोषित किया जाए। इससे न केवल बीएमसी के कामों को गति मिलेगी, बल्कि आप्पापाडा और आसपास के क्षेत्रों में नागरिकों को लंबे समय से मिल रही ट्रैफिक की समस्या से भी राहत मिलेगी।


    ❓FAQs

    Q1. आप्पापाडा से पोयसर नदी तक की सड़क क्यों जरूरी है?
    इस क्षेत्र में सड़कें संकरी होने से भारी ट्रैफिक जाम लगता है। नया डीपी रोड बनने से ट्रैफिक का दबाव कम होगा और लोगों को सुगम आवागमन मिलेगा।

    Q2. इस रोड को ‘वाइटल प्रोजेक्ट’ घोषित करने की मांग किसने की है?
    दिंडोशी विधानसभा के आमदार सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर यह मांग की है।

    Q3. इससे बीएमसी के कौन-कौन से प्रोजेक्ट पूरे होंगे?
    पोयसर नदी पुनरुज्जीवन प्रकल्प, सांडपानी प्रक्रिया संयंत्र (STP), इंटरसेप्टर और ड्रेनेज पाइपलाइन जैसे कई अधूरे काम पूरे हो पाएंगे।

    Q4. यह रोड किस चौड़ाई का प्रस्तावित है?
    यह विकास नियोजन सड़क 13.4 मीटर चौड़ी प्रस्तावित है।

  • बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का बयान: दिव्यांगों को दिए गए “खराब ई-रिक्शा” की होगी जांच

    बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का बयान: दिव्यांगों को दिए गए “खराब ई-रिक्शा” की होगी जांच

    महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को आश्वासन दिया है कि वह दिव्यांग व्यक्तियों को दिए गए ई-रिक्शों की तकनीकी जांच करवाएगी। कई लाभार्थियों ने आरोप लगाया था कि सरकार की योजना के तहत मिले वाहन “खराब” और “असुरक्षित” हैं।

    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार के समाज कल्याण विभाग की एक योजना के तहत दिव्यांग लोगों को ई-रिक्शा (e-rickshaw) दिए गए थे ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
    लेकिन अब इन वाहनों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल उठ गए हैं।

    लगभग 115 दिव्यांग लाभार्थियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उन्हें जो ई-रिक्शे मिले हैं, वो “खराब हालत में” हैं और चलाने के लायक नहीं हैं।
    इन शिकायतों के बाद कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा — और अब सरकार ने कहा है कि वह तकनीकी जांच कराएगी और रिपोर्ट पेश करेगी।

    ⚙️ योजना की शुरुआत और खर्च

    इस योजना की शुरुआत 10 जून 2019 को समाज न्याय विभाग (Social Justice Department) के एक सरकारी निर्णय (GR) से हुई थी।
    इस योजना के तहत लगभग 800 ई-रिक्शे दिव्यांग व्यक्तियों को 20 करोड़ रुपये की लागत से बांटे गए थे।
    योजना का नाम था —
    “Green Energy Powered Environment-Friendly Mobile Shop for Disabled Persons to Become Self-Reliant”

    लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कई वाहन तकनीकी रूप से दोषपूर्ण हैं और इनमें सुरक्षा संबंधी खामियां हैं।

    🧑‍⚖️ कोर्ट में क्या हुआ?

    15 अक्टूबर को जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस संदीश डी. पाटिल की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।
    याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील असीम सरोदे और श्रिय आळवे ने कहा कि सरकार ने उन्हें “डिफेक्टिव” यानी खराब वाहन देकर उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।

    उन्होंने यह भी मांग की कि

    • एक स्वतंत्र जांच एजेंसी नियुक्त की जाए,
    • और सरकारी खरीद प्रक्रिया (procurement process) की जांच की जाए ताकि यह पता चल सके कि क्या ई-रिक्शा की खरीद में गड़बड़ी हुई थी।

    🏛️ सरकार और कंपनी का जवाब

    सरकार की ओर से एडिशनल गवर्नमेंट प्लीडर भूपेश सामंत ने कोर्ट को बताया कि
    Maharashtra State Handicapped Finance and Development Corporation (MSHFDC) हर जिले में एक तकनीकी अधिकारी नियुक्त करेगी जो इन ई-रिक्शों की जांच करेगा।

    वहीं, सप्लायर कंपनी Mac Auto India ने भी कहा कि वह सिर्फ इन 115 याचिकाकर्ताओं के नहीं, बल्कि सभी लाभार्थियों के वाहनों की मरम्मत या जांच करेगी।

    कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह तकनीकी रिपोर्ट नवंबर 19, 2025 तक पेश करे और इस पूरी जांच में सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट पूरा सहयोग करे।

    🔍 आरोप क्या हैं?

    • याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ई-रिक्शे कमज़ोर बॉडी और घटिया पार्ट्स से बने हैं।
    • कई वाहनों की बैटरी और मोटर कुछ ही महीनों में फेल हो गई।
    • सरकार ने बाजार मूल्य से अधिक दरों पर खरीदारी की है।
    • कोई बाद की सर्विस या मेंटेनेंस सपोर्ट नहीं दिया गया।

    📉 अदालत की टिप्पणी

    कोर्ट ने पहले ही 3 अक्टूबर को कहा था कि याचिकाकर्ताओं की शिकायतें गंभीर और सटीक लगती हैं।
    अब अदालत इस बात पर नज़र रखेगी कि सरकार और कंपनी जांच में पारदर्शिता बरतती है या नहीं।

    🪫 दिव्यांगों की पीड़ा

    दिव्यांग लोगों का कहना है कि ये ई-रिक्शे आजीविका का एकमात्र साधन हैं।
    “खराब वाहन” मिलने की वजह से उनकी रोज़मर्रा की कमाई ठप पड़ गई है।
    कई लोगों को कर्ज चुकाने में मुश्किल हो रही है क्योंकि उन्होंने वाहन पर लोन लिया था।


    🧾 FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. मामला किस बारे में है?
    ➡️ दिव्यांग लाभार्थियों को सरकार की योजना के तहत दिए गए ई-रिक्शे खराब निकले, जिस पर बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला चल रहा है।

    Q2. कितने लोगों ने याचिका दायर की है?
    ➡️ लगभग 115 दिव्यांग व्यक्तियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

    Q3. योजना कब शुरू हुई थी?
    ➡️ यह योजना 10 जून 2019 को समाज न्याय विभाग के आदेश से शुरू की गई थी।

    Q4. क्या सरकार ने जांच के लिए हामी भरी है?
    ➡️ हां, महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि वह सभी ई-रिक्शों की तकनीकी जांच करवाएगी।

    Q5. अगली सुनवाई कब होगी?
    ➡️ अगली सुनवाई 19 नवंबर 2025 को निर्धारित की गई है।