Category: Civic Issues

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  • BJP Dindoshi: दिंडोशी विधानसभा में ‘नमो नेत्र संजीवनी’ अभियान सफलतापूर्वक संपन्न

    BJP Dindoshi: दिंडोशी विधानसभा में ‘नमो नेत्र संजीवनी’ अभियान सफलतापूर्वक संपन्न

    दिंडोशी विधानसभा वार्ड क्र. 37 में पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर ‘नमो नेत्र संजीवनी’ अभियान के तहत भव्य नेत्र चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया।

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    मुंबई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में भाजपा की ओर से दिंडोशी विधानसभा (वा. क्र. 37) में ‘नमो नेत्र संजीवनी’ अभियान के तहत एक बड़े नेत्र चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। इस आयोजन का नेतृत्व नगरसेविका प्रतिभा हेमंत शिंदे और हेमंत शिंदे ने किया।
    इस कार्यक्रम में नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी आंखों की मुफ्त जांच करवाई।

    भाजपा नेताओं के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन

    इस नेत्र शिविर का आयोजन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा मुंबई अध्यक्ष एवं विधायक अमित साटम के मार्गदर्शन में किया गया।
    शिविर में भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधायक जैसे अतुल भातखळकर, रविंद्र चव्हाण, आशीष शेलार, प्रविण दरेकर, राजहंस सिंह, अभिजीत सावंत, ज्ञानमुर्ति शर्मा, संतोष मेढेकर, प्रतिक कर्पे, प्रीति साटम, डॉ. केयुर भाग्यश्री और स्वरुप प्रमाणिक प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

    नागरिकों की भारी भागीदारी

    शिविर में सैकड़ों नागरिकों ने अपनी आंखों की जांच करवाई। इस दौरान नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मरीजों की जांच की और जरूरत पड़ने पर आगे के इलाज की सलाह भी दी।
    लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम आम नागरिकों के लिए बेहद उपयोगी होते हैं।

    आयोजकों का आभार प्रदर्शन

    आयोजन को सफल बनाने के लिए कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर पूरा सहयोग दिया।
    शिविर संपन्न होने के बाद आयोजकों ने सभी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया।

    ‘नमो नेत्र संजीवनी’ अभियान का महत्व

    भाजपा की यह पहल सिर्फ स्वास्थ्य शिविर नहीं, बल्कि समाज सेवा और जनकल्याण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
    इस अभियान का उद्देश्य है –

    • आम जनता को नेत्र संबंधी बीमारियों की जांच उपलब्ध कराना
    • जरूरतमंदों को मुफ्त इलाज और सलाह देना
    • आंखों की देखभाल को लेकर जागरूकता फैलाना

    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. नमो नेत्र संजीवनी अभियान क्या है?
    👉 यह भाजपा की एक सामाजिक पहल है, जिसके जरिए आम लोगों के लिए मुफ्त नेत्र जांच शिविर आयोजित किए जाते हैं।

    Q2. दिंडोशी विधानसभा में यह शिविर कब आयोजित हुआ?
    👉 यह शिविर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित किया गया।

    Q3. शिविर में किसने नेतृत्व किया?
    👉 शिविर का नेतृत्व नगरसेविका प्रतिभा हेमंत शिंदे और हेमंत शिंदे ने किया।

    Q4. इस कार्यक्रम में कौन-कौन से नेता मौजूद थे?
    👉 भाजपा के कई बड़े नेता जैसे देवेंद्र फडणवीस, अमित साटम, आशीष शेलार, प्रविण दरेकर, अतुल भातखळकर और अन्य नेता मौजूद रहे।

    Q5. शिविर से नागरिकों को क्या लाभ हुआ?
    👉 नागरिकों ने मुफ्त में आंखों की जांच करवाई और डॉक्टरों से इलाज व देखभाल की सलाह भी पाई।

  • Jesus vs Krishna विवाद: दुर्गा पूजा पंडाल में क्यों बदल गई तस्वीर?

    Jesus vs Krishna विवाद: दुर्गा पूजा पंडाल में क्यों बदल गई तस्वीर?

    रांची के आर.आर. स्पोर्टिंग क्लब ने वेटिकन सिटी थीम पर पंडाल बनाया था। जीसस की तस्वीर लगाने पर विवाद बढ़ा और बाद में उसे भगवान कृष्ण की मूर्ति से बदल दिया गया।

    नैशनल डेस्क
    झारखंड: रांची में इस बार दुर्गा पूजा पंडाल का थीम वेटिकन सिटी रखा गया था। लेकिन पंडाल में लगी जीसस क्राइस्ट की तस्वीर को हटाकर वहां भगवान कृष्ण की प्रतिमा स्थापित कर दी गई।

    VHP का विरोध और आरोप

    विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इस पंडाल पर कड़ा ऐतराज जताया। संगठन का आरोप था कि यह कदम हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने और धर्मांतरण को बढ़ावा देने के इरादे से उठाया गया है।
    VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा:
    “अगर आयोजकों को इतना ही सेक्युलरिज़्म चाहिए तो वे चर्च या मदरसे के किसी प्रोग्राम में हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीर लगाकर दिखाएँ।”

    आयोजकों की सफाई

    पंडाल बनाने वाले आर.आर. स्पोर्टिंग क्लब के संरक्षक विक्की यादव ने कहा कि यह फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि समिति के सदस्यों ने आपसी सहमति से लिया।
    उन्होंने कहा:

    • हमारा मकसद सभी धर्मों को एक मंच पर लाना था।
    • यूरोपियन स्टाइल की मूर्तियाँ अब भी बाहर रखी गई हैं।
    • थीम का उद्देश्य शांति और भाईचारा बढ़ाना है।

    यादव ने यह भी कहा कि भारत अगर धार्मिक सद्भाव के लिए खड़ा है तो इसे कायम रहना चाहिए। उन्होंने पीएम मोदी के विदेश दौरों में चर्च विज़िट का उदाहरण भी दिया।

    थीम क्यों था खास?

    • क्लब पिछले 50 सालों से दुर्गा पूजा का आयोजन कर रहा है।
    • हर साल अलग थीम पर पंडाल तैयार होता है।
    • इस बार 2022 में कोलकाता के श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब द्वारा बनाए गए वेटिकन सिटी थीम से प्रेरणा ली गई थी।

    विवाद का असर

    हालांकि आयोजकों ने इसे धार्मिक सद्भाव का प्रतीक बताया, लेकिन विरोध और आरोपों की वजह से अंततः जीसस की तस्वीर हटाकर वहां भगवान कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करनी पड़ी।


    FAQs

    Q1: विवाद किस वजह से हुआ?
    👉 पंडाल में जीसस क्राइस्ट की तस्वीर लगाए जाने पर VHP ने आपत्ति जताई।

    Q2: तस्वीर की जगह क्या लगाया गया?
    👉 तस्वीर हटाकर वहां भगवान कृष्ण की प्रतिमा रखी गई।

    Q3: आयोजकों का क्या कहना है?
    👉 आयोजकों का कहना है कि यह निर्णय समिति ने मिलकर लिया और इसका मकसद धार्मिक सद्भाव दिखाना था।

    Q4: यह पंडाल किस क्लब ने बनाया था?
    👉 आर.आर. स्पोर्टिंग क्लब, रांची ने।

    Q5: थीम की प्रेरणा कहाँ से ली गई थी?
    👉 2022 में कोलकाता के श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब के वेटिकन सिटी थीम पंडाल से।

  • “राज ठाकरे की हत्या की साजिश नाकाम” – पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा का खुलासा

    “राज ठाकरे की हत्या की साजिश नाकाम” – पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा का खुलासा

    मुंबई पुलिस के पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे समय रहते उन्होंने राज ठाकरे की हत्या की साजिश का पर्दाफाश किया और उनकी जान बचाई।

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई: मुंबई पुलिस के पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने एक इंटरव्यू में दावा किया है कि उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे की हत्या की साजिश को नाकाम किया था।

    🎯 ‘कोंकण टूर’ के दौरान थी प्लानिंग

    शर्मा ने बताया कि रूटीन सर्विलांस के दौरान उन्हें यह जानकारी मिली कि राज ठाकरे को उनके आगामी कोंकण दौरे के दौरान निशाना बनाया जा सकता है। मामला बेहद गंभीर था, इसलिए उन्होंने तुरंत तत्कालीन जॉइंट पुलिस कमिश्नर मीरा बोरवणकर को अलर्ट किया।

    🚨 समय पर कार्रवाई से बची जान

    सूचना मिलते ही पुलिस ने राज ठाकरे को ब्रीफ किया और उन्हें दौरा रद्द करने की सलाह दी।
    👉 नतीजा यह रहा कि पूरा टूर कैंसिल हो गया और हत्या की साजिश नाकाम हो गई।

    🔫 पहले भी मिल चुकी थी धमकी

    प्रदीप शर्मा ने यह भी याद किया कि साल 2003 में मुलुंड ट्रेन ब्लास्ट केस की जांच के दौरान पाकिस्तानी और कश्मीरी आतंकियों ने बालासाहेब ठाकरे के मातोश्री निवास पर हमला करने की प्लानिंग की थी।
    शर्मा खुद उस एनकाउंटर का हिस्सा थे जिसमें तीन आतंकी ढेर हुए।

    👮‍♂️ पुलिस अधिकारियों की चुनौतियाँ

    प्रदीप शर्मा के मुताबिक, ऐसे मामलों में

    • विजिलेंस (निगरानी)
    • टाइमली इंटेलिजेंस
    • और सीनियर अफसरों के साथ कॉर्डिनेशन
      सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।

    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. राज ठाकरे पर हमला कब प्लान किया गया था?
    👉 प्रदीप शर्मा के मुताबिक, यह प्लानिंग उनके कोंकण दौरे के दौरान की गई थी।

    Q2. किसने साजिश का खुलासा किया?
    👉 मुंबई पुलिस के पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने सर्विलांस के दौरान यह जानकारी जुटाई।

    Q3. क्या पहले भी ठाकरे परिवार को धमकी मिली थी?
    👉 हाँ, 2003 में आतंकी संगठन ने बालासाहेब ठाकरे के मातोश्री निवास को टारगेट करने की साजिश रची थी।

    Q4. इस खुलासे का ज़िक्र कहाँ हुआ?
    👉 प्रदीप शर्मा ने यह खुलासा NDTV मराठी के इंटरव्यू में किया।

  • प्रशासन की उदासीनता पर भड़के विधायक सुनील प्रभु, विधानसभा अध्यक्ष को लिखी चिट्ठी

    प्रशासन की उदासीनता पर भड़के विधायक सुनील प्रभु, विधानसभा अध्यक्ष को लिखी चिट्ठी

    महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में विधायक सुनील प्रभु ने कपात सुझाव दिए थे, जिनका समय पर जवाब न मिलने पर उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को पत्र लिखकर प्रशासन की उदासीनता पर नाराज़गी जताई।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा के पावसाली (मानसून) अधिवेशन में शिवसेना विधायक सुनील प्रभु ने नियम 256 के तहत नगरविकास विभाग से जुड़े कुल 8 कटौती सुझाव पेश किए थे। ये सुझाव मालाड पूर्व दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर आधारित थे और सार्वजनिक जनहित के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे थे।

    संसदीय प्रथा के अनुसार, ऐसे सुझावों पर एक महीने के भीतर सरकार की तरफ से लिखित जवाब मिलना ज़रूरी होता है। लेकिन अधिवेशन खत्म हुए पूरे दो महीने बीत जाने के बाद भी नगरविकास विभाग ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है।

    विधानसभा अध्यक्ष को लिखी चिट्ठी

    सुनील प्रभु ने इस लापरवाही पर विधानसभा अध्यक्ष एडवोकेट राहुल नार्वेकर को पत्र लिखकर नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि अगर समय पर जवाब मिलता, तो सदस्य संबंधित मुद्दों पर फॉलो-अप कर जनता को न्याय दिला सकते।

    विधानसभा अध्यक्ष ने पहले भी कई बार इस पर निर्देश दिए हैं कि कटौती सुझावों के जवाब समय पर दिए जाएं, लेकिन प्रशासन की तरफ से इस पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।

    कटौती सुझावों का महत्व

    • ये सुझाव नगरविकास विभाग की योजनाओं और कामों से सीधे जुड़े हुए हैं।
    • दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र से जुड़े कई अहम मुद्दे इसमें शामिल हैं।
    • समय पर कार्रवाई होती तो स्थानीय जनता को राहत और पारदर्शिता मिल सकती थी।

    सुनील प्रभु का बयान

    प्रभु का कहना है कि प्रशासन की यह उदासीनता लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है और इससे जनता का विश्वास भी कमजोर होता है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से अपील की है कि संबंधित विभाग को सख्त निर्देश दिए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।


    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. कटौती सुझाव क्या होते हैं?
    👉 विधानसभा में विपक्षी सदस्यों को बजट की विभिन्न मांगों में कटौती सुझाने का अधिकार होता है, जिन्हें कटौती सुझाव कहा जाता है।

    Q2. इन सुझावों पर सरकार को जवाब कब देना होता है?
    👉 संसदीय प्रथा के अनुसार, एक महीने के भीतर संबंधित विभाग की ओर से लिखित जवाब मिलना अनिवार्य है।

    Q3. सुनील प्रभु ने कितने कटौती सुझाव पेश किए थे?
    👉 कुल 8 कटौती सुझाव, जो नगरविकास विभाग और दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र से जुड़े थे।

    Q4. अब तक प्रशासन का रुख कैसा रहा है?
    👉 दो महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई लिखित जवाब नहीं दिया गया है।

  • Mumbai News: सलमान खान लद्दाख शूटिंग के दौरान घायल, ‘बैटल ऑफ गलवान’ के अगले शेड्यूल से पहले लौटे मुंबई

    Mumbai News: सलमान खान लद्दाख शूटिंग के दौरान घायल, ‘बैटल ऑफ गलवान’ के अगले शेड्यूल से पहले लौटे मुंबई

    सलमान खान अपनी अपकमिंग फिल्म Battle of Galwan की शूटिंग लद्दाख में कर रहे थे, जहां ठंड और ऑक्सीजन की कमी के बीच उन्हें हल्की चोट लग गई। अब वह मुंबई लौट आए हैं और आराम करने के बाद फिल्म के अगले शेड्यूल में हिस्सा लेंगे।

    मुंबई: बॉलीवुड के दबंग स्टार सलमान खान इन दिनों अपनी बहुचर्चित फिल्म बैटल ऑफ गलवान की शूटिंग कर रहे हैं। यह फिल्म 2020 के भारत-चीन गलवान घाटी संघर्ष पर आधारित है और इसका निर्देशन अपूर्व लखिया कर रहे हैं।

    फिल्म का पहला शेड्यूल लद्दाख की बर्फीली वादियों में रखा गया था, जहां मौसम बेहद सख्त और ऑक्सीजन की कमी जैसी चुनौतियां थीं।

    एक्शन सीन के दौरान लगी चोट

    शूटिंग के दौरान सलमान खान को हल्की चोट आई। हालांकि, उन्होंने शूटिंग बीच में छोड़ी नहीं और पूरा शेड्यूल पूरा किया। एक टीम मेंबर ने बताया – “सलमान भाई ने हर सीन पूरे जोश और समर्पण के साथ किया। मौसम कितना भी खराब रहा हो, उन्होंने कभी बहाना नहीं बनाया।”

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    45 दिन का शेड्यूल, सलमान रहे 15 दिन मौजूद

    इस लद्दाख शेड्यूल को 45 दिनों तक चलाया गया। इसमें सलमान लगभग 15 दिन सेट पर मौजूद रहे। उन्होंने ज़्यादातर एक्शन सीन खुद किए, जिससे बाकी टीम भी मोटिवेट हुई।

    मुंबई लौटे सलमान, अगला शेड्यूल जल्द

    अब सलमान खान मुंबई लौट आए हैं और यहां थोड़ी देर आराम करेंगे। अगले हफ्ते से फिल्म का दूसरा शेड्यूल शुरू होगा, जिसमें मुख्य रूप से इमोशनल और ड्रामेटिक सीन शूट किए जाएंगे।

    फिल्म का मोशन पोस्टर पहले ही रिलीज़ हो चुका है, जिसमें सलमान खान का खून से सना चेहरा और तेज़ नज़रें काफी चर्चा में हैं। हालांकि, फिल्म की रिलीज़ डेट अब तक अनाउंस नहीं की गई है।

    बिग बॉस 19 और फिल्मों में बैलेंस

    फिल्मों के साथ-साथ सलमान खान टीवी शो बिग बॉस 19 भी होस्ट कर रहे हैं। लद्दाख शेड्यूल के दौरान उन्होंने कुछ एपिसोड मिस किए, लेकिन हमेशा की तरह इस बार भी वह फिल्मों और टीवी प्रोजेक्ट्स में अच्छा बैलेंस बना रहे हैं।

    फैंस की उम्मीदें

    सलमान खान के डेडिकेशन और प्रोफेशनलिज्म को देखते हुए कहा जा रहा है कि बैटल ऑफ गलवान उनके करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण फिल्मों में से एक साबित हो सकती है। फैंस बेसब्री से इसके अगले शेड्यूल और रिलीज़ डेट का इंतजार कर रहे हैं।

    ❓ FAQ Section

    Q1. सलमान खान को चोट कैसे लगी?
    👉 लद्दाख में बैटल ऑफ गलवान की शूटिंग के दौरान एक्शन सीन करते वक्त उन्हें हल्की चोट लगी।

    Q2. क्या शूटिंग रोकी गई थी?
    👉 नहीं, सलमान खान ने चोट लगने के बाद भी पूरा शेड्यूल पूरा किया।

    Q3. अगला शेड्यूल कब होगा?
    👉 फिल्म का दूसरा शेड्यूल मुंबई में अगले हफ्ते शुरू होगा।

    Q4. फिल्म का निर्देशन कौन कर रहा है?
    👉 बैटल ऑफ गलवान का निर्देशन अपूर्व लखिया कर रहे हैं।

    Q5. फिल्म की रिलीज़ डेट क्या है?
    👉 अभी तक फिल्म की रिलीज़ डेट आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं की गई है।

  • मुंबई में फेरीवालों पर कार्रवाई के खिलाफ मंत्रालय में चर्चा और ज्ञापन, अधिकारियों ने दिया आश्वासन

    मुंबई में फेरीवालों पर कार्रवाई के खिलाफ मंत्रालय में चर्चा और ज्ञापन, अधिकारियों ने दिया आश्वासन

    मुंबई सहित महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में फेरीवालों पर हो रही पुलिस कार्रवाई और भारी जुर्माने के खिलाफ सामाजिक संगठनों ने मंत्रालय में अधिकारियों से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। अधिकारियों ने इस मुद्दे को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उठाने का भरोसा दिलाया।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य शहरों में फुटपाथ पर रोज़ी-रोटी कमाने वाले फेरीवालों पर बार-बार की जा रही कार्रवाई को लेकर सामाजिक संगठनों ने आवाज़ बुलंद की है। फेरीवालों का कहना है कि मुंबई पुलिस अधिनियम की धाराओं का दुरुपयोग कर उनसे हजारों रुपये का जुर्माना वसूला जा रहा है। इसी मुद्दे पर 18 सितंबर 2025 को मंत्रालय में कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अधिकारियों से मुलाकात की और एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

    🚶‍♂️ फेरीवालों का संघर्ष और परेशानी

    मुंबई महानगर और उपनगरों में हज़ारों लोग फेरी लगाकर अपना पेट पालते हैं। लेकिन पुलिस प्रशासन द्वारा रोज़ाना किए जाने वाले छापों और कार्रवाई के कारण इनकी ज़िंदगी मुश्किल हो गई है।

    • एक ही फेरीवाले पर ₹1200 तक का जुर्माना लगाया जाता है।
    • कई बार दिन में दो-दो बार भी जुर्माना वसूला जाता है।
    • कई पुलिस कर्मियों पर धारा 102, 115 और 117 का गलत इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं।

    🏢 मंत्रालय में हुआ प्रतिनिधिमंडल

    इस मुद्दे को गंभीरता से उठाने के लिए महाराष्ट्र हॉकर्स फेडरेशन, लाल बावटा जनरल वर्कर्स यूनियन, महाराष्ट्र राज्य राष्ट्रीय मजदूर संघ, शहीद भगत सिंह हॉकर्स यूनियन मुंबई, महाराष्ट्र एकता हॉकर्स यूनियन सहित कई संगठन एक साथ आए।
    बैठक में उपस्थित रहे प्रमुख लोग:

    • कर्नल प्रकाश रेड्डी
    • श्री मिलिंद ताम्बड़े
    • कर्नल सुरेश सावंत
    • शांताराम जाधव
    • कर्नल अखिलेश गौड़

    इन सभी ने मिलकर फेरीवालों पर हो रहे अन्याय की विस्तृत जानकारी दी और अधिकारियों को ठोस सबूत भी दिखाए।

    📑 ज्ञापन की मुख्य बातें

    संगठनों ने मंत्रालयीन अधिकारियों को जो ज्ञापन सौंपा, उसमें मुख्य रूप से यह मुद्दे उठाए गए:

    1. पुलिस द्वारा धारा 102, 115 और 117 का दुरुपयोग।
    2. अनुचित और भारी जुर्माना, जिससे फेरीवालों की रोज़ी-रोटी पर असर।
    3. पुलिसकर्मियों द्वारा एक ही दिन में बार-बार जुर्माना लगाने की घटनाएँ।
    4. गरीब और मेहनतकश तबके पर आर्थिक बोझ।
    5. स्थायी समाधान की ज़रूरत ताकि फेरीवाले सम्मान के साथ जीवन जी सकें।

    ⚖️ अधिकारियों की प्रतिक्रिया

    मंत्रालय के उप सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने शिष्टमंडल की बातों को गंभीरता से सुना।

    • उन्होंने आश्वासन दिया कि यह मुद्दा आगामी विधानसभा के शीतकालीन सत्र में रखा जाएगा।
    • अधिकारियों ने माना कि जुर्माना लगाने की प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ियाँ हो सकती हैं।
    • आगे की कार्रवाई के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया गया है।

    🗣️ संगठनों की मांग

    संगठनों ने साफ कहा कि:

    • फेरीवालों को रोज़ परेशान करने का सिलसिला बंद होना चाहिए।
    • मुंबई पुलिस अधिनियम में बदलाव कर फेरीवालों के लिए अलग गाइडलाइन बने।
    • पुलिस और स्थानीय निकायों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई पर निगरानी समिति बने।
    memorandum-in-the-ministry-against-action-against-hawkers-in-Mumbai

    📊 फेरीवालों की संख्या और अहमियत

    • सिर्फ मुंबई में अनुमानित 2.5 से 3 लाख फेरीवाले रोज़ाना काम करते हैं।
    • ये छोटे कारोबार शहर की अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं।
    • आम जनता को सस्ता सामान और रोज़मर्रा की ज़रूरतें उपलब्ध कराते हैं।

    फेरीवालों का कहना है कि अगर उनकी सुरक्षा और कामकाज सुनिश्चित हो तो वे भी टैक्स और रजिस्ट्रेशन के लिए तैयार हैं।

    🛑 लगातार कार्रवाई का असर

    • फेरीवालों के परिवारों पर आर्थिक संकट।
    • बच्चों की पढ़ाई पर असर।
    • छोटे-छोटे कर्ज़ चुकाना मुश्किल।
    • रोज़ कमाने-खाने वालों की रोज़ी-रोटी खतरे में।

    🚨 नतीजा और आगे की राह

    यह मुलाकात फेरीवालों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आई है।
    अगर विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा होती है और ठोस कदम उठाए जाते हैं तो हजारों परिवारों को राहत मिलेगी।

    ❓ FAQ – मुंबई में फेरीवालों पर कार्रवाई और मंत्रालय को सौंपा गया ज्ञापन

    Q1. फेरीवालों पर बार-बार कार्रवाई क्यों की जा रही है?
    👉 स्थानीय निकाय और पुलिस प्रशासन मुंबई पुलिस अधिनियम की धारा 102, 115 और 117 का हवाला देकर कार्रवाई करते हैं। इन धाराओं के तहत फुटपाथ अतिक्रमण और असुविधा को रोकने के लिए प्रावधान है, लेकिन सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इन धाराओं का दुरुपयोग हो रहा है।

    Q2. एक फेरीवाले पर कितना जुर्माना लगाया जाता है?
    👉 फेरीवालों पर नियमित रूप से ₹1200 तक का जुर्माना लगाया जाता है। कुछ मामलों में तो एक ही दिन में दो-दो बार चालान काटा जाता है।

    Q3. इस मुद्दे पर मंत्रालय में किन-किन संगठनों ने ज्ञापन सौंपा?
    👉 महाराष्ट्र हॉकर्स फेडरेशन, लाल बावटा जनरल वर्कर्स यूनियन, महाराष्ट्र राज्य राष्ट्रीय मजदूर संघ, शहीद भगत सिंह हॉकर्स यूनियन मुंबई, महाराष्ट्र एकता हॉकर्स यूनियन समेत कई संगठन शामिल रहे।

    Q4. सरकार की ओर से क्या आश्वासन मिला है?
    👉 मंत्रालयीन अधिकारियों और उप सचिव ने कहा है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाएगा और विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में इसे उठाने का प्रयास किया जाएगा।

    Q5. फेरीवालों की मुख्य मांगें क्या हैं?
    👉

    • अनुचित और बार-बार किए जा रहे जुर्माने को रोका जाए।
    • मुंबई पुलिस अधिनियम की धारा 102, 115 और 117 के दुरुपयोग पर रोक लगे।
    • स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 के तहत फेरीवालों को कानूनी सुरक्षा मिले।
    • नगर पालिका और पुलिस की ओर से पारदर्शी और न्यायपूर्ण व्यवस्था बनाई जाए।
  • कांदिवली (पूर्व) में अवैध फेरीवालों से हलकान जनता – आखिर कब होगी कार्रवाई?

    कांदिवली (पूर्व) में अवैध फेरीवालों से हलकान जनता – आखिर कब होगी कार्रवाई?

    मुंबई कांदिवली (पूर्व) ठाकुर विलेज इलाके में अवैध फेरीवालों और ऑटो रिक्शा स्टैंड के कारण ट्रैफिक जाम और गंदगी से लोग परेशान। डेंगू-मलेरिया का खतरा बढ़ा, नागरिकों ने शिकायतें दर्ज कराई लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई जैसे महानगर में हर दिन लाखों लोग सफर करते हैं। लेकिन यहां की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है सड़क पर कब्जा जमाए हुए अवैध फेरीवाले और ट्रैफिक जाम। कांदिवली (पूर्व) का ठाकुर विलेज और समता नगर इलाका भी इन समस्याओं से बुरी तरह जूझ रहा है।

    यहां अप्पर आयुक्त कार्यालय से लेकर ठाकुर कॉलेज के सामने तक की सड़क पर पचासों फेरीवाले रोजाना अवैध दुकानें लगाते हैं। सड़कें पूरी तरह कब्जाई जाती हैं, जिससे स्थानीय लोग और राहगीर परेशान हैं।

    गंदगी और बीमारी का खतरा

    फेरीवालों के कारण इलाके में गंदगी इतनी बढ़ गई है कि डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
    लोगों का कहना है कि सड़क किनारे सब्ज़ियां, फल और खाने-पीने का सामान गंदगी के बीच बेचा जाता है। इससे न सिर्फ संक्रमण फैलने का खतरा है बल्कि बच्चों और बुज़ुर्गों की सेहत भी दांव पर लग रही है।

    एक स्थानीय निवासी ने बताया:
    “हर तरफ कचरा और बदबू फैली रहती है। बारिश में तो हालत और खराब हो जाती है। चारों तरफ पानी भरने के बाद मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। अगर अभी कार्रवाई नहीं हुई तो इलाके में डेंगू और मलेरिया के केस तेजी से बढ़ेंगे।”

    ऑटो रिक्शा स्टैंड से यातायात ठप

    फेरीवालों के साथ-साथ यहां ऑटो रिक्शा वालों ने भी अपने-अपने अनधिकृत स्टैंड बना लिए हैं।

    • सड़क के दोनों ओर ऑटो खड़े रहते हैं।
    • इससे यातायात बाधित होता है और कभी-कभी तो रास्ता पूरी तरह जाम हो जाता है।
    • लोगों को ऑफिस, स्कूल और अस्पताल पहुंचने में दिक्कत आती है।

    एक कॉलेज स्टूडेंट ने शिकायत करते हुए कहा:
    “सुबह-शाम ट्रैफिक इतना बढ़ जाता है कि कॉलेज पहुंचने में आधा घंटा ज्यादा लग जाता है। पुलिस और बीएमसी को रोजाना यह जाम दिखता है, लेकिन फिर भी कोई कदम नहीं उठाया जाता।”

    Kandivali-East-residents-are-worried-about-illegal-hawkers-when-will-action-be-taken-bmc-news

    शिकायतें हुईं लेकिन कार्रवाई नहीं

    स्थानीय नागरिकों ने इस समस्या को लेकर कई बार शिकायतें दर्ज कराई हैं।

    • सहायक आयुक्त, आर/दक्षिण वार्ड
    • डीएमसी संजय कुर्हाडे
    • सहायक आयुक्त मनीष सालवे

    को लिखित में शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

    लोगों का आरोप है कि अधिकारी सिर्फ शिकायतें सुनते हैं, लेकिन कार्रवाई करने में बिल्कुल भी रुचि नहीं दिखाते।

    नागरिकों का आक्रोश – जिम्मेदार कौन?

    इलाके के लोगों का कहना है कि

    • जब तक अवैध फेरीवालों और ऑटो वालों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक समस्या बनी रहेगी।
    • बीएमसी और पुलिस दोनों की जिम्मेदारी है कि वे मिलकर इलाके को फेरीवालों और जाम से मुक्त कराएं।
    • लेकिन अधिकारियों का रवैया देखकर लगता है कि उन्हें जनता की परेशानी से कोई मतलब नहीं है।

    एक बुज़ुर्ग महिला ने कहा:
    “हमारे घर के सामने रोजाना फेरीवाले दुकान लगाते हैं। गली में चलना भी मुश्किल हो गया है। कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं। आखिर हमें ही क्यों भुगतना पड़ रहा है?”

    खतरनाक हालात – कभी भी हो सकता है हादसा

    स्थानीय लोग डर के साए में जी रहे हैं।

    • जाम की वजह से एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी इमरजेंसी गाड़ियां भी फंस जाती हैं।
    • कहीं भी अनचाही दुर्घटना हो सकती है।
    • भीड़ और अव्यवस्था से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ गया है।

    वरिष्ठ निरीक्षक की जिम्मेदारी

    अब लोगों की नज़रें अतिक्रमण एवं निर्मूलन विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक नंदकुमार आवारे पर टिकी हैं।
    लोग उम्मीद कर रहे हैं कि वे जल्द से जल्द कार्रवाई करेंगे और इलाके को अवैध फेरीवालों और ऑटो वालों से मुक्त कराएंगे।

    मुंबई के अन्य इलाकों की कहानी भी ऐसी ही

    गौर करने वाली बात यह है कि सिर्फ कांदिवली ही नहीं, बल्कि मुंबई के कई हिस्सों – दहिसर, बोरीवली, मलाड और अंधेरी – में भी यही समस्या देखी जाती है।
    जहां-जहां लोकल ट्रेन स्टेशन और कॉलेज हैं, वहां अवैध फेरीवालों का कब्जा आम बात है।

    इससे साफ है कि यह समस्या सिर्फ एक इलाके की नहीं, बल्कि पूरे मुंबई शहर की है।

    लोगों की मांग – कड़ी कार्रवाई हो

    स्थानीय नागरिकों की मांग है कि:

    1. अवैध फेरीवालों के खिलाफ तुरंत निर्मूलन अभियान चलाया जाए।
    2. ऑटो रिक्शा वालों को सिर्फ निर्धारित स्टैंड पर खड़ा करने का आदेश दिया जाए।
    3. गंदगी साफ करने के लिए बीएमसी की सफाई टीम को रोजाना तैनात किया जाए।
    4. इलाके में पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए ताकि दोबारा अवैध कब्जा न हो।

    कांदिवली (पूर्व) का यह मुद्दा आज की मुंबई की असलियत बयान करता है।

    • अवैध फेरीवाले और ऑटो वाले
    • प्रशासन की लापरवाही
    • और आम जनता की परेशानी

    यह सिर्फ एक लोकल समस्या नहीं है, बल्कि एक ऐसा सवाल है जो हर मुंबईकर के दिल में है – “जनता की शिकायतें कब सुनी जाएंगी और कार्रवाई आखिर कब होगी?”

  • महाराष्ट्र में 1.8 लाख डॉक्टरों की चेतावनी: एलोपैथी में होम्योपैथिक डॉक्टरों की एंट्री से मचा बवाल

    महाराष्ट्र में 1.8 लाख डॉक्टरों की चेतावनी: एलोपैथी में होम्योपैथिक डॉक्टरों की एंट्री से मचा बवाल

    IMA महाराष्ट्र ने 18 सितंबर को 24 घंटे की हड़ताल का ऐलान किया है। होम्योपैथिक डॉक्टरों को एलोपैथिक दवाएं लिखने की इजाज़त देने के सरकार के फैसले पर एलोपैथिक डॉक्टर भड़क उठे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में मेडिकल सेक्टर में बवाल मचा हुआ है। IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) से जुड़े लगभग 1.8 लाख एलोपैथिक डॉक्टरों ने 18 सितंबर को 24 घंटे की हड़ताल करने का ऐलान किया है। वजह? सरकार का वो फैसला जिससे होम्योपैथिक डॉक्टरों को एलोपैथी की प्रैक्टिस की इजाज़त दी जा रही है।

    📚 क्या है CCMP कोर्स और इसका मतलब?

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    प्रदर्शन की तस्वीर

    राज्य सरकार ने महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) को निर्देश दिया है कि वो उन होम्योपैथिक डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन शुरू करे जिन्होंने CCMP यानी Certificate Course in Modern Pharmacology को पूरा किया है। ये एक 1 साल का कोर्स है, जिसके बाद होम्योपैथिक डॉक्टर कुछ चुने हुए केसों में एलोपैथिक दवाएं लिख सकेंगे।

    😠 एलोपैथिक डॉक्टर क्यों हैं नाराज़?

    IMA महाराष्ट्र के अध्यक्ष डॉ. संतोष कदम के मुताबिक, ये फैसला न सिर्फ मेडिकल फील्ड की क्वालिटी को गिराएगा बल्कि मरीजों की सेहत के साथ भी खिलवाड़ है। उनका कहना है कि “हमने सीएम से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है और मांग की है कि सरकार 5 सितंबर को जारी GR (Government Resolution) को तुरंत वापस ले।”

    🏥 कौन-कौन हड़ताल में शामिल होगा?

    • सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टर
    • मेडिकल कॉलेजों के छात्र
    • BMC और राज्य सरकार से जुड़े डॉक्टर संगठन जैसे MARDA, BMC MARDA
    • Federation of All India Medical Association (FAIMA)

    हालांकि, इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी, ताकि मरीजों को ज़रूरी इलाज मिलता रहे।

    ⚠️ आगे क्या होगा? देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    FAIMA के अध्यक्ष डॉ. अक्षय डोंगरदिवे ने साफ किया है कि अगर सरकार ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो देशभर में आंदोलन शुरू होगा। “हम जनता को इसके जोखिम समझाएंगे और ज़रूरत पड़ी तो सड़कों पर भी उतरेंगे।”

  • दादर में मीनाताई ठाकरे की मूर्ति पर रेड पेंट फेंका गया – राज ठाकरे ने मुंबई पुलिस को 24 घंटे में आरोपी पकड़ने का निर्देश

    दादर में मीनाताई ठाकरे की मूर्ति पर रेड पेंट फेंका गया – राज ठाकरे ने मुंबई पुलिस को 24 घंटे में आरोपी पकड़ने का निर्देश

    मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में मीनाताई ठाकरे की मूर्ति पर रेड पेंट फेंका गया। राज ठाकरे ने मौके पर पहुंचकर पुलिस को निर्देश दिया कि 24 घंटे में आरोपी को ट्रेस किया जाए। CCTV फुटेज की जांच शुरू।

    मुंबई: दादर इलाके में स्थित शिवाजी पार्क के पास लगी मीनाताई ठाकरे की मूर्ति पर बुधवार सुबह किसी अज्ञात शख्स ने रेड पेंट फेंक दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और राजनीतिक माहौल भी गर्मा गया।

    राज ठाकरे का सख्त रुख – “24 घंटे में चाहिए आरोपी”

    महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे दोपहर को खुद शिवाजी पार्क पहुंचे और घटना स्थल का मुआयना किया। उन्होंने मौके पर मौजूद मुंबई पुलिस अधिकारियों को साफ कहा,
    “हर एक CCTV चेक करो और 24 घंटे के अंदर आरोपी को पकड़ो।”

    राज ठाकरे के साथ पार्टी कार्यकर्ता भी मौजूद थे और उन्होंने साफ कर दिया कि ये हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    शिवसेना (UBT) भी हुई एक्टिव, मूर्ति की साफ-सफाई कर पहनाया माला

    घटना की खबर मिलते ही शिवसेना (UBT) के कार्यकर्ता भी तुरंत वहां पहुंचे। उन्होंने मूर्ति को साफ किया और नई माला पहनाई। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी शाम को स्थल पर जाकर अपनी प्रतिक्रिया दी।

    शिवाजी पार्क का महत्व – सिर्फ एक पार्क नहीं, राजनीति का केंद्र

    शिवाजी पार्क सिर्फ एक सार्वजनिक स्थान नहीं है, बल्कि ये महाराष्ट्र की राजनीति का अहम केंद्र रहा है। यहीं पर बाला साहेब ठाकरे की याद में मेमोरियल भी है और मीनाताई ठाकरे की मूर्ति भी उसी क्षेत्र में है। मूर्ति पर हुए इस हमले को राजनीतिक और भावनात्मक रूप से गंभीर माना जा रहा है।

    पुलिस ने दर्ज किया केस, CCTV फुटेज खंगालने का काम शुरू

    शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ IPC की धारा 298 के तहत केस दर्ज किया गया है, जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने या धार्मिक स्थान को अपवित्र करने से जुड़ी है। पुलिस अब आसपास के सभी CCTV कैमरों की फुटेज चेक कर रही है ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके।

    लोगों में गुस्सा, बोले – वहां तो हमेशा गार्ड होता है!

    स्थानीय लोगों ने बताया कि पार्क में हमेशा एक सिक्योरिटी गार्ड तैनात रहता है, फिर भी ये हरकत हो जाना हैरान करने वाली बात है। सभी ने इस घटना की निंदा करते हुए प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

  • Mumbai Monorail बंद होगी 20 सितंबर से: बड़े अपग्रेड्स और नए ट्रेन रेक्स के लिए MMRDA का ऐलान

    Mumbai Monorail बंद होगी 20 सितंबर से: बड़े अपग्रेड्स और नए ट्रेन रेक्स के लिए MMRDA का ऐलान

    मुंबई मोनोरेल 20 सितंबर 2025 से अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेगी। MMRDA ने बताया कि CBTC सिग्नलिंग सिस्टम, नए ट्रेन रेक्स और फ्लेट ओवरहॉल के लिए यह कदम जरूरी है। पूरी जानकारी यहां पढ़ें।

    मुंबई: माया नगरी मुंबई के शहर वासियों के लिए बड़ी खबर है। मुंबई मोनोरेल 20 सितंबर 2025 से पूरी तरह बंद रहेगी।
    मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) ने बताया कि यह बंदी इसलिए जरूरी है ताकि नए ट्रेन रेक्स, एडवांस्ड CBTC सिग्नलिंग और फ्लेट रिफर्बिशमेंट का काम बिना रुकावट पूरा किया जा सके।

    ❓ क्यों बंद की जा रही है मोनोरेल?

    • यह बंदी पूरा 19.74 किमी रूट (चेंबूर से संत गाडगे महाराज चौक) पर लागू होगी।
    • अभी तक अपग्रेड और टेस्टिंग का काम सिर्फ रात में 3.5 घंटे की विंडो में हो रहा था, लेकिन यह टाइम बहुत कम है।
    • अब लगातार 24×7 अपग्रेड वर्क चलेगा ताकि सिस्टम जल्दी से चालू हो सके।

    🔧 कौन-कौन से अपग्रेड होंगे?

    1. नए ट्रेन रेक्स (Rolling Stock)
    • कुल 10 नए ट्रेन रेक्स Make in India प्रोजेक्ट के तहत लाए जा रहे हैं।
    • 8 रेक्स मुंबई पहुँच चुके हैं, 9वां टेस्टिंग में है और 10वां असेंबली में है।
    1. एडवांस्ड CBTC सिग्नलिंग सिस्टम
    • यह पहली बार मुंबई मोनोरेल में लगेगा।
    • सिस्टम हैदराबाद में डिवेलप हुआ है और इसका वर्किंग टेस्ट लगभग पूरा है।
    1. फ्लेट रिफर्बिशमेंट और स्टाफ ट्रेनिंग
    • पुराने रेक्स की पूरी मरम्मत और अपग्रेड होगी।
    • ट्रेनिंग सेफ्टी और ऑपरेशन के हिसाब से होगी ताकि आने वाले मेट्रो प्रोजेक्ट्स में भी फायदा मिले।

    ⚠️ सेफ्टी को लेकर चिंता

    पिछले कुछ महीनों में मोनोरेल में कई तकनीकी खराबियां और हादसे हुए।

    • हाल ही में 17 पैसेंजर बीच ट्रैक पर फंसे थे।
    • 19 अगस्त को बारिश की वजह से दो बड़ी खराबियों में 780 से ज्यादा पैसेंजर घंटों तक फंसे रहे
    • इन्हीं घटनाओं के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया है।

    📋 जांच कमेटी और सरकार का संदेश

    • MMRDA ने इन फेल्योर की जांच के लिए स्पेशल कमेटी बनाई है।
    • डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा:
      “मुंबईकरों के साथ सहयोग से मोनोरेल को और मजबूत और सुरक्षित बनाया जाएगा।”

    🚉 मुंबई मोनोरेल: इंडिया की पहली और अकेली मोनोरेल

    • 2014 में पहली लाइन शुरू हुई थी (8.26 किमी)।
    • 2019 में रूट बढ़ाकर 19.74 किमी किया गया।
    • अभी सिर्फ 5 एक्टिव रेक्स चल रहे हैं, इसलिए नए रेक्स की बेहद जरूरत है।

    📌 यात्रियों के लिए जरूरी जानकारी

    • आखिरी दिन सर्विस: 19 सितंबर 2025
    • पूरी बंदी: 20 सितंबर 2025 से
    • रूट बंद: चेंबूर से संत गाडगे महाराज चौक (दोनों तरफ)
    • कारण: नए रेक्स, CBTC सिग्नलिंग, फ्लेट ओवरहॉल