Category: Manipur

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  • कांग्रेस के सामने संसद में मोदी सरकार की बोलती हुई बंद।

    कांग्रेस के सामने संसद में मोदी सरकार की बोलती हुई बंद।

    दुनिया की निगाहों में भारत की गवाही और भारत के बीच हुए लगातार आतंकी हमलों पर विदेश नीति और संसद में खड़े होकर छपरी और टपरी जैसे भाषण कि “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” और पाकिस्तानी हमले पर ट्रम्प का सीजफायर। भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत ही नहीं दे पा रहा।

    डिजिटल डेस्क
    नई दिल्ली:
    संसद का मानसून सत्र चल रहा। बिहार में वोट काटने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा। रोहिंग्या बांग्लादेश और नेपाली के नाम पर लाखों नाम काट डाले गए। blo लोगों के घर जाकर सत्यापन करने की जगह ऑफिस में बैठकर फॉर्म में नाम लिखकर खुद ही वोटर के हस्ताक्षर कर रहे। विपक्षी उनके वोटरों के नाम काटने के आरोप लगाए। पत्रकार अजीत अंजुम ने मोबाइल द्वारा चुनाव आयोग के खेल को सबूत सहित सार्वजनिक किया तो उनपर एफआईआर कर दी गई यानी सच दिखाने का दंड दिया गया।

    लोकतंत्र का हिस्सा

    संसद में ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा में सत्ता विपक्ष में वाक्युद्ध चल ही रहा था, कि सीजफायर की भी बात हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 25 बार कहे गये वक्तव्य, कि “हमने ट्रेड की धमकी देकर युद्ध रुकवा दी।” पर विपक्ष ने हमला बोला। यही जीवंत लोकतंत्र है। ट्रंप ने खुद अपने एक्स हैंडल पर शाम 5.35 पर सीजफायर की घोषणा की। भारत की तरफ से नहीं। संसद में सत्ता ने उत्तर नहीं दिया। विपक्ष मांग करता रहा कि पीएम आकर कहें कि ट्रंप ने वॉर नहीं रुकवाई। रक्षामंत्री ने कहा पीओके लेना हमारा मकसद नहीं फिर भाजपा ने बार बार कांग्रेस और नेहरू पर आरोप क्यों लगाए?

    संसद में होती है गुंडो की भाषा

    पहलगाम में कथित तौर पर पाकिस्तानी आतंकी आए और धर्म पूछकर मारा जिसके प्रमाण नहीं। संसद के मानसून सत्र के समय ही  सेना ने घोषित किया कि मुठभेड़ में सारे आतंकी मारे गए। इससे पूर्व जिन कथित आतंकियों के स्क्रेच जारी किए गए गवाह ने उसे गलत कहा। अहम बात यह कि सत्ता के दंभ में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” क्या ऐसे स्पीकर और राज्यसभा के सभापति सदन की मर्यादा बचाने की कोशिश करेंगे? “मुझसे निपट लो।” क्यों भाई पीएम हो क्या? ऐसी भाषा किसी गली का गुंडा या फिर माफिया ही बोल सकता है। लेकिन विपक्ष को टोकने वाले सत्ता की असंसदीय भाषा की अनसुनी करते हुए पद की गरिमा खो चुके हैं।

    जवाब देने से क्यों भागती है मोदी सरकार?

    मोदी सरकार वर्तमान में अपने से संबंधित बात पर चर्चा करने से भागती है। मोदी दिल्ली में ही है लेकिन सदन में आ नहीं सकते। ऐसा मणिपुर मामले में किया था। अंतिम समय में आए भी तो क्या कुछ कहा दुनिया जानती है। प्रधानमंत्री होने के नाते कभी मणिपुर गए ही नहीं। इसी तरह उरी, पठानकोट, पुलवामा और पहलगाम भी नहीं गए। यह सही है कि पहलगाम में आतंकी हमला हुआ। 27 भारतीयों को जान गंवानी पड़ी। विपक्ष सवाल पूछता रहा, सवा सौ किलोमीटर दूर पाकिस्तानी आतंकवादी कैसे आए? लोगों से कथित रूप से धर्म पूछा। पेंट खुलवाकर देखा कौन सा धर्म है। बीजेपी के मंत्रियों में तनिक भी विधवा हुई महिलाओं के प्रति सम्मान भाव नहीं देखा गया। बड़ी बेशर्मी से कहा गया, महिलाओं में वीरांगना भाव नहीं था। एक ने तो कर्नल सोफिया के लिए आतंकवादियों की बहन तक कह दिया। यही है इनका सेना के प्रति सम्मान भाव।

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    कांग्रेस पर सवाल उठाने का नतीजा

    अब सेशन में ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल जवाब हो रहे हैं। इसी बीच उन दरिंदे आतंकवादियों को सेना द्वारा मुठभेड़ में मारे जाने की बात कही गई। यहां टाइमिंग का सवाल जरूर उठता है। विपक्ष के प्रधान की पुलवामा में उपयुक्त आरडीएक्स कहां से आया सत्ता के पास कोई उत्तर है ही नहीं। कांग्रेस फोबिया से पीड़ित बीजेपी सरकार ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया। मुंबई आतंकी हमले का आरोप लगाकर अपने आरोप ढकने और जायज़ ठहराने की नाकाम कोशिश की। जिस पर प्रियंका गांधी ने आड़े हाथों लेते हुए जवाब दिया। मुंबई हमले के सारे आतंकियों को भून दिया गया। एक जीवित आतंकी कसाब को पकड़कर फांसी दी गई। जिसे दुनिया ने देखा और भारत के साथ पूरी दुनिया खड़ी दिखाई दी। आतंकवाद की सर्वत्र आलोचना की गई।

    इस्तीफे देने का दायित्व

    यही नहीं कांग्रेस में दायित्वबोध जवाबदेही होने के कारण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और गृहमंत्री ने खुद को दोषी समझकर इस्तीफा दे दिया। लेकिन यह भूल गई प्रियंका कि बीजेपी में दायित्व बोध जवाबदेही और इस्तीफा देने की समझ है ही नही। अगर  नैतिकता होती तो मणिपुर मामले में इस्तीफा दिया गया होता। उरी, पठानकोट और पुलवामा की असफलता पर इस्तीफे की झड़ी लग गई होती। प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन से इस्तीफा मांगने वाले क्यों नहीं अपने गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री से इस्तीफा देने की मांग करते?

    सरकार ने दिया सेना को धोखा

    इस्तीफा तो विदेश मंत्री को भी देना चाहिए था कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के पूर्व पाकिस्तान को सूचना दे दी, जिससे हमारे विमान मार गिराए गए। पीएम मोदी से इस गलत बयानी और प्रचार पर इस्तीफा मांगते कि उन्होंने दावा किया था सेना को खुली छूट दी है समय और स्थान सेना तय करे जबकि फौजी अधिकारियों ने बार बार मोदी के दावे की पोल खोली है। यही नहीं एयर मार्शल भी कह चुके हैं कि “जब समय पर सप्लाई नहीं कर सकते तो वादा क्यों करते हो?”

    कांग्रेस और मोदी में अंतर?

    आज तक सत्ता का कोई भी उन मारे गए पर्यटकों के घर जाने की जरूरत नहीं समझी जब कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जाकर उनके जख्मों पर मरहम लगा चुके हैं। राहुल गांधी की राजनीति सर्व ग्राही है। इसीलिए वे मणिपुर जाकर पीड़ितों के ज़ख्म सहला चुके हैं उनके विपरीत पीएम मोदी शहीदों के नाम पर वोट ही नहीं मांगे बल्कि कानून नियम के विरुद्ध सेना की वर्दी पहनकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय लेते हुए अपनी फोटो डालकर पोस्टर चिपकवा चुके हैं। पाकिस्तान के दो टुकड़े करने और 95 हजार सैनिकों के आत्मसमर्पण की सफलता का श्रेय लेने की कोशिश इंदिरा गांधी ने कभी भी नहीं की।

    टैक्स का बोझ सुविधा के नाम पर भ्रष्टाचार

    दरअसल हिंदू-मुस्लिम कर चुनाव आयोग द्वारा छल कपट और गलत काम कराकर चुनाव जीतना ही मोदी का एकमात्र लक्ष्य है। फर्जी वोटर बढ़वाकर हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली चुनाव जीतने के बाद बिहार में वोटरों को बाहर करने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा है। मोदी सरकार अपने 11 साल के शासन में किए गए कार्य पर वोट मांगने की हिम्मत कर ही नहीं सकते। क्योंकि किसान, मजदूर, युवाओं, छात्रों, गृहिणियों के जीवन को दूभर बना दिया है। टैक्स का इतना भार दुनिया के किसी भी देश में नहीं है। सुविधा के नाम पर सर्वत्र भ्रष्टाचार ही हुआ है।

    प्रशासन का गलत इस्तेमाल

    सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे ताकि गरीबों के बच्चे पढ़ न सकें। परीक्षा में अनियमितता के विरोध में छात्र हितों के खातिर जब शिक्षक दिल्ली में रैली कर रहे थे तब पुलिस द्वारा शिक्षकों को घसीट कर बस में जबरन बिठाकर दूर ले जाकर छोड़ा गया। इस कार्य में दिल्ली पुलिस सिद्धहस्त है, जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी से न्याय मांगने महिला पहलवान जब दिल्ली के जंतर मंतर पर रैली निकाले हुए धरने पर बैठी थी तब भी अमित शाह के आदेश पर उन्हें घसीटा और बसों में जबरन लादकर दूर ले जाकर छोड़ा गया था।

    विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने दावा?

    दिल्ली पुलिस वही है जो हाईकोर्ट के जस्टिस वर्मा के घर आग लगने से जली झुलसी नोटो की गाड़ियों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं कर सकी। जांच करना तो बड़ी दूर की बात, जिस राष्ट्र में शिक्षकों को अपमानित किया जाए। उन्हें घसीटकर बसों में ठूंसा जाए। प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर चालीस पचास लाख रुपयों में बेचा जाए। सड़कें पहली ही बरसात में बहने लगें। पुल बनते समय या उदघाटन के पहले ही जल समाधि लेने लगें। ये सारे करतूतें भ्रष्टाचार सामने दिखता ही नहीं बल्कि चीख-चीख कर बोलता भी है। उस देश को वहां की सरकार जो विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने का दावा करे, जहां की अस्सी करोड़ जनता को गरीबी रेखा से नीचे रखने का षडयंत्र रचा जाए, क्या कहा जा सकता है?

    विदेशनीति पर सवाल?

    ऐसी विदेशनीति को क्या कहा जाए कि अरबों रुपए जनता के पैसे फूंककर विश्व की यात्रा की जाए। लेकिन पाकिस्तान युद्ध के समय दुनिया का एक भी देश खुलकर भारत के साथ नहीं आए। अमेरिका का राष्ट्रपति धमकी देता रहे। राष्ट्र को अपमानित करता रहे लेकिन सत्ता में हिम्मत नहीं जो कह सके ट्रंप झूठ बोल रहा है। उसी ट्रंप ने रूस से तेल खरीदना बंद करा दे जबकि हमारा पड़ोसी चीन अमेरिका के आंखों में आँखें डालकर जवाब देता हो। सबसे विश्वसनीय देश रूस को भी दूर कर दे ऐसी विदेशनीति जो अमेरिका की गोद में बैठी हो क्या कहा जाएगा?

    दुनिया की निगाहों में भारत?

    भारत ने डेलिगेशन भेजे बताने के लिए कि पाकिस्तान ने पहलगाम में आतंकी हमला करके 27 बेकसूरों को गोली मारकर हत्या कर दी, जिसके लिए जीरो टॉलरेंस अपनाकर हमने पाकिस्तानी आतंकवादियों के अड्डों पर सीमित हमले कर सौ आतंकियों को मार गिराया। लेकिन कोई राष्ट्र यकीन नहीं कर रहा। क्योंकि हमारे पास कोई सबूत नहीं जैसा कि मणिशंकर ने कहा है जिसका अर्थ दुनिया समझती है भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत नहीं दे पा रहा। मुंबई हमले में कसाब को जिंदा सबूत दिखाया गया था। यानी पाकिस्तानी आतंकवाद की गुहार कोई सुनने के लिए तैयार नहीं उलटे ट्रंप हम पर 25% टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 100% पेनल्टी लगाने की घोषणा कर दी। संसद में भले दावा किया गया हो कि पाकिस्तानी आतंकियों को सेना ने मार गिराया है। दुनिया की निगाहों में भारत झूठ बोल रहा।

  • वक्फ संशोधन विधेयक में क्या है सेक्शन 40, जिसे खत्म करने का किया ऐलान

    वक्फ संशोधन विधेयक में क्या है सेक्शन 40, जिसे खत्म करने का किया ऐलान

    लोकसभा में केंद्रीय मंत्री वक्फ एक्ट के सेक्शन 40 खत्म करने का ऐलान कर दिया है। वक्फ बोर्ड अधिनियम 40 के तहत वक्त बोर्ड को वक्फ संपत्तियों के फैसले का अधिकार दिया गया था। लेकिन अब इसे हटाने का प्रस्ताव किया गया है, जिससे बोर्ड की स्वतंत्रता पर सवाल उठ रहे हैं।

    Waqf Amendment Bill 2024: 2 अप्रैल को लोकसभा में पेश किए गए ‘वक्फ संशोधन बिल 2024’ में सबसे बड़ा बदलाव है सेक्शन 40 को खत्म करना। ये सेक्शन ही इस बोर्ड को किसी भी भूमि को वक्फ संपत्ति में बदलने की अनुमति देता था। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को संसद में एक बहस के दौरान इसे वक्फ अधिनियम का सबसे कठोर प्रावधान बताया था।

    रिजिजू ने चर्चा के दौरान कहा कि, ‘अधिनियम में सबसे कठोर प्रावधान सेक्शव 40 है, जिसके तहत वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित कर सकता था, लेकिन संशोधन के तहत हमने उस प्रावधान को हटा दिया है।” ऐसे में, दूसरी तरफ सवाल उठता है कि आखिर ये सेक्शन 40 है क्या? और इसे हटाने के बाद किस तरीके के बदलाव आ सकते हैं?

    वक्फ कानून अधिनियम 40

    वक्फ कानून का अधिनियम 40 वक्फ संपत्तियों के बारे में फैसला करने से जुड़ा हुआ है। इसका मतलब है कि अगर किसी संपत्ति के बारे में यह सवाल उठता है कि क्या वह संपत्ति वक्फ है या नहीं ? तो वक्फ बोर्ड इस सवाल का फैसला खुद कर सकता था। इस फैसले को चुनौती देने का अधिकार किसी के भी पास नहीं था। अगर किसी को आपत्ति होती भी थी तो वह, वक्फ ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता था। जिसपर फैसले का अधिकार भी वक्फ बोर्ड के ही पास था।

    इस सेक्शन के तहत, अगर वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति को वक्फ संपत्ति मानता है, तो उसका यह फैसला अंतिम होता है। इसका मतलब है कि सरकार या कोई और संस्थान इस फैसले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। अगर किसी को बोर्ड के फैसले से आपत्ति होती, तो वह वक्फ ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता था।

    यह सेक्शन वक्फ बोर्ड को एक तरह से स्वतंत्रता देता था कि वह बिना किसी बाहरी दबाव के यह तय कर सके कि कोई संपत्ति वक्फ बोर्ड की संपत्ति है या नही? साथ ही, अगर कोई अन्य ट्रस्ट या सोसाइटी की संपत्ति को वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकरण कराने की आवश्यकता होती, तो बोर्ड उसे ऐसा करने का निर्देश दे सकता था। अब, वक्फ संशोधन बिल में इस सेक्शन को हटाने के प्रस्ताव से वक्फ बोर्ड की ताकत और स्वतंत्रता पर सवाल उठने लगे हैं।

    सरकारी हस्तक्षेप नहीं

    सेक्शन 40 के तहत, बोर्ड के फैसले पर सरकार या किसी अन्य सरकारी संस्थान का कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होता था। इसका मतलब है कि वक्फ संपत्तियों के मामलों में बोर्ड का फैसला ही सर्वोपरि होता था।

    इस सेक्शन के तहत अगर कोई संपत्ति किसी अन्य ट्रस्ट या सोसाइटी के तहत पंजीकृत होती, लेकिन वक्फ बोर्ड को लगता कि वह संपत्ति वक्फ संपत्ति हो सकती है, तो बोर्ड उसकी जांच कर सकता था। अगर बोर्ड ने यह फैसला लिया कि वह संपत्ति वक्फ संपत्ति है, तो उस ट्रस्ट या सोसाइटी को उसे वक्फ एक्ट के तहत पंजीकरण करने के लिए कहा जाता था।

    सेक्शन 40 को लागू नहीं किया जाएगा

    वक्फ (संशोधन) बिल 2025 में इस सेक्शन को हटा दिया गया है। इस बदलाव को लेकर केंद्रीय मंत्री ने संसद में ऐलान किया कि सेक्शन 40 को अब लागू नहीं किया जाएगा।

    इस बदलाव के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कालन बैनर्जी ने संसद में कहा कि अगर सेक्शन 40 को हटा दिया गया, तो वक्फ बोर्ड महज एक ‘गुड़िया’ बनकर रह जाएगा, जिसकी कोई ताकत नहीं होगी। उनका कहना था कि अगर इस सेक्शन को हटा दिया जाता है, तो वक्फ बोर्ड को बनाए रखने का कोई मतलब नहीं है और इसकी शक्तियां सीधे तौर पर मंत्री को दे दी जानी चाहिए।

    केंद्र सरकार का तर्क

    केंद्र सरकार का कहना है कि इस बदलाव से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और प्रभावशीलता आएगी। उनका मानना है कि अब वक्फ संपत्तियों के मामलों में कोई भ्रम नहीं होगा और यह प्रक्रिया ज्यादा सरल और सुचारू होगी।

    वक्फ कानून मे संशोधन का असर

    विपक्ष का कहना है कि इस बदलाव से वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी और सरकार को वक्फ संपत्तियों के मामलों में ज्यादा नियंत्रण मिलेगा। वहीं, सरकार का कहना है कि यह बदलाव वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को और बेहतर बनाएगा। अब यह देखना होगा कि इस बिल को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और इसका वक्फ बोर्ड पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

  • Maharashtra: परली में आंदोलन, संजय राउत का हमला, PM मोदी मुंबई दौरे पर।

    Maharashtra: परली में आंदोलन, संजय राउत का हमला, PM मोदी मुंबई दौरे पर।

    Narendra Modi in Mumbai: पीएम मोदी की मुंबई यात्रा पर टिप्पणी करते हुए शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने उम्मीद जताई कि PM यहां के विकास को लेकर घोषणा करेंगे। उन्होंने परली में कानून व्यवस्था की स्थिति पर भी सरकार की आलोचना की। (Movement in Parli Maharashtra, Sanjay Raut’s attack, PM Modi on Mumbai tour)

    नितिन तोरस्कर (मंत्रालय प्रतिनिधि)
    मुंबई- 
    भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई दौरे पर हैं। ऐसे में शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने इस पर राज्य मे विकास और कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। राउत ने कहा, कि “देखते हैं कि मोदी धारावी के लिए कोई घोषणा करते हैं या नहीं। यदि मोदी मुंबई के विकास के लिए आ रहे हैं तो उनका स्वागत है।” इस दौरान बड़ा खुलासा करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि “बालासाहेब ठाकरे ही वह व्यक्ति थे जो मोदी के पक्ष में मजबूती से खड़े रहे।” राउत ने तंज कसते हुए कहा कि मोदी के जल्द ही मणिपुर जाने की उम्मीद है। इसके साथ ही राउत ने महाराष्ट्र के बीड जिले में परली आंदोलन को लेकर कानून व्यवस्था पर राज्य सरकार की आलोचना की। (Movement in Parli Maharashtra, Sanjay Raut’s attack, PM Modi on Mumbai tour)

    विरोध प्रदर्शन से कानून व्यवस्था पर चिंता

    संजय राउत ने आगे कहा कि महाराष्ट्र में बीड जिले के परली में विरोध प्रदर्शन कानून व्यवस्था का मुद्दा है। लोग बड़ी संख्या पर आपत्ति जता रहे हैं। कल परली में वाल्मीकि कराड पर मकोका लगाए जाने के बाद समर्थकों ने पुलिस स्टेशन के बाहर धरना दिया। इस अवसर पर वाल्मीकि कराड की मां भी उपस्थित थीं। समर्थक बहुत आक्रामक लग रहे थे। इस दौरान कुछ गंभीर आरोप भी लगाए गए। अब संजय राउत ने इस पर महाराष्ट्र सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। (Movement in Parli Maharashtra, Sanjay Raut’s attack, PM Modi on Mumbai tour)

    बीजेपी भ्रष्ट लोगों बना अड्डा

    संजय राउत ने बीजेपी की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि बीजेपी किसी को भी पार्टी में स्वीकार करे लेती है। महायुति में कई लोग दागी हैं। बीजेपी भ्रष्ट लोगों का अड्डा बन गई है। अमित शाह गुजरात के बर्खास्त गृह मंत्री थे। मुझे शाह को दी गई मदद के बारे में भी पता है। कुछ बातें गोपनीय होती हैं। कहने की जरूरत नहीं कि किसको किससे मदद मिली। ईवीएम को आज महागठबंधन के मंच पर रखा जाना चाहिए। (Movement in Parli Maharashtra, Sanjay Raut’s attack, PM Modi on Mumbai tour)

    https://indian-fasttrack.com/mob-lynching-in-mumbai-dispute-over-overtake-dindoshi-police-station-malad-news

    विधायकों के साथ मीटिंग

    संजय राउत ने यह बयान पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से आज महायुति के विधायकों को निर्देश दिए जाने के बाद दिया। परली की स्थिति को देखते हुए धनंजय मुंडे परली गए। हालांकि इससे पहले उन्होंने उपमुख्यमंत्री अजित पवार से मुलाकात की और उनकी अनुमति लेकर परली के लिए रवाना हो गए। वह आज नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन के लिए परली में अनुपस्थित रहेंगे। राज्य में महायुति के सभी विधायक मुंबई में हैं। (Movement in Parli Maharashtra, Sanjay Raut’s attack, PM Modi on Mumbai tour)

  • NEET PG Result 2024 Live Updates: NBEMS to report scorecards soon; This is the way to check at natboard.edu.in

    NEET PG Result 2024 Live Updates: NBEMS to report scorecards soon; This is the way to check at natboard.edu.in

    NEET PG Result Date and Time How to Really look at Neet PG Result Direct Connection at natboard-edu.in: A legitimacy rundown will likewise be delivered for half of all India standard seats, it will be arranged in view of the imprints got by the competitor.

    NEET PG Result 2024 Live Updates: Consideration competitors! The outcomes for NEET PG 2024 tests are supposed to be pronounced by the Public Leading body of Assessments in Clinical Sciences (NBEMS) at any point in the near future. It is guessed that the outcomes will be out before the current week’s over. Be that as it may, there is no affirmation on the date and time yet. When the outcomes are out, up-and-comers can really take a look at their scores at true sites – natboard.edu.in and nbe.edu.in. The cut-off marks for NEET PG 2024 will be delivered alongside the outcomes. Up-and-comers who will score the base most reduced cut-off just will be announced as effectively qualified.

    The most effective method to Actually look at NEET PG Result Direct Connect to Check
    -Applicants should visit the authority site at natboard.edu.in to check the NEET PG result PDF.

    -Find the featured connection and snap on the connection gave in the PDF to see the scorecard

    -Understudies should top off their roll number and their name to really take a look at their outcomes

    The NEET PG 2024 assessment was directed on August 11, 2024. Around 2,28,540 applicants showed up for the assessment which was held in two movements around the same time. For all the inclusion encompassing NEET PG Results 2024, applicants can follow our live updates here:

    NEET PG Result Date and Time How to Really look at Neet PG Result Direct Connection at natboard-edu.in: Actually take a look at every one of the LIVE updates here

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  • आरएसएस ने मानी बीजेपी की हार।

    आरएसएस ने मानी बीजेपी की हार।

    • मोदी कराएंगे अपनी मर्जी का चुनाव।
    • मोदी के सामने आरएसएस हुआ बौना।
    • चार सौ का नारा केवल कार्यकर्ताओं को बचाने का सहारा।

    सुरेंद्र राय
    मुंबई– आरएसएस बीजेपी की मदर संगठन है। लेकिन आज मोदी के सामने बौना हो गया। कारण मोदी ने अपना कद इतना बढ़ा लिया जो लोकतंत्र के दायरे में फिट नहीं बैठता। वैसे आरएसएस भी लोकतंत्र और भारतीय संविधान को नहीं मानता। मनुस्मृति और एक पार्टी का शासन के लिए मोदी कृतसंकल्प हैं। लेकिन आरएसएस को लोकसभा चुनाव में बीजेपी के हाथ से बाजी जाती दिखती है।आरएसएस की नज़र में मोदी का करिश्मा व ख्याति खत्म हो चुकी है। (RSS And Modi Government BJP Political News)

    आरएसएस की सरकार में स्थिति क्या है?

    आरएसएस एक बार कांग्रेस का पहले समर्थन कर चुकी है। बीजेपी की सत्ता में आरएसएस को सुविधाएं तो मिलीं। सत्रसूख भी मिला मगर अस्तित्वहीन हो चुका है आरएसएस। सरकार पर कोई प्रभाव नहीं रहा। हिंदू कार्ड भी राम मंदिर बन जाने से फेल हो गया है। आरएसएस का हिंदुत्व अंतिम स्वांस गिन रहा। महाराष्ट्र में एम एन एस से गठजोड़ होने की स्थिति में उत्तर भारतीय संगठन बीजेपी का साथ छोड़ने की घोषणा कर चुके हैं। (RSS And Modi Government BJP Political News)

    https://indian-fasttrack.com/2024/03/28/electoral-bond-bag
    Indian Fasttrack News Network

    एम एन एस से गठबंधन के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ लाखों वोटर्स बीजेपी से किनारा करेंगे। गुजरात के कच्छ में तेईस गांव के लोग चुनाव का बहिष्कार की घोषणा कर चुके हैं। अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी ने दिल्ली के लोगों को नाराज़ कर दिया है। गिरफ्तारी का प्रभाव पंजाब और हरियाणा में भी पड़ेगा। (RSS And Modi Government BJP Political News)

    आरएसएस,
    आरएसएस संगठन की प्रतिकारात्मक फाइल तस्वीर

    पूर्वोत्तर के मणीपुर, मिजोरम जैसे प्रदेशों में जाने की हिम्मत मोदी नहीं दिखा रहे। महिला खिलाडियों को जिस तरह दिल्ली पुलिस द्वारा सड़क पर घसीटा गया। बलात्कारी को बचाया गया। किसान आंदोलन दो के समय ड्रोन से आंसू गैस के गोले गिराए गए। दुनिया में बैन पेयलेट गन चलाकर किसानों की आंखें फिफी गई। एम एस पी लागू करने के वादे से मोदी पीछे हटे, सड़क पर नुकीले कीलें जड़ी गई।किसान नाराज हैं। (RSS And Modi Government BJP Political News)

    Live Video On indian fasttrack News Channel Mumbai

    बीजेपी को भी हार का भय सता रहा है। लोग टिकट मिलने पर भी चुनाव से कतरा रहे है। और भी नेता बीजेपी छोड़कर भाग रहे है। ए बी पी सर्वे में दो सौ सीटें भी बीजेपी पाने की स्थिति में नहीं है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में देश भर से मिले समर्थन ने बीजेपी और आरएसएस की नींद उड़ा दी हैं।इंडिया गठबंधन और भी मज़बूत हुआ है। छोटे छोटे दलों को जिस तरह बीजेपी से जोड़ा जा रहा है उसकी हताशा ही झलकती है। चार सौ का नारा केवल कार्यकर्ताओं को ढाढस बंधाने के लिए दिया जा रहा है। तीनों चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कर मोदी ने संदेश दिया है कि वे आयोग द्वारा अपनी मर्ज़ी का चुनाव कराएंगे। (RSS And Modi Government BJP Political News)

  • नेताओ के आरोप प्रत्यारोप पर चल रहा है देश

    नेताओ के आरोप प्रत्यारोप पर चल रहा है देश

    मणिपुर, राजस्थान, बिहार, छतीसगढ़ में महिलाओं के साथ जो शर्मसार करने वाली घटना हुई है। इस पर कार्रवाई का अभी तक नहीं होना क्या नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप पर देश चल रहा है? ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं।

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    आजकल के नेताओ में शर्म, लाज, हया, सब खत्म हो चुका है। कोई हिन्दू शास्त्र का तो कोई कुरान की दुहाई देकर राजनीति को पूरी तरह गंदगी में ढकेल दिया है। दिन पर दिन महिलाओं के इज्जत को तार-तार कर सभी राजनीतिक दलों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जोर-शोर से चल रहा है। टीवी चैनलों पर जमकर कबूतरबाजी चलाकर टीआरपी बटोरी जा रही है।

    लेकिन मणिपुर, राजस्थान, बिहार, छतीसगढ़ में महिलाओं के साथ जो शर्मसार करने वाली घटना घटित हुई है। उससे केवल राज्य का ही नही पूरे देश का नाम, विश्व पटल नाम काफी खराब हुआ है। मणिपुर और राजस्थान बिहार में महिला को निर्वस्त्र कर उनके साथ दुष्कर्म करने वाले और वहाँ उपस्थित दर्शको के साथ वीडियो बनाने वालों के विरुद्ध कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए था। इसके साथ ही राज्य के मुख्यमंत्री जो कुम्भकर्णीय की नींद सो रहे थे उनको सलाखों के पीछे ढकेलना चाहिए था।

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    प्रतिकारात्मक फ़ाईल तस्वीर

    यह खबर लिखने में हम पत्रकारों का सर शर्म से झुक जाता है। क्योंकि पत्रकारों को लिखने के अलावा कोई अधिकार नही है। यह मुद्दा अब देश की संसद में चला गया है। वहाँ भी नेता अपनी रोटी सेक रहे है। इस पर कार्रवाई की बात कोई नही कर रहा है। बड़ी विडंबना है, कि देश की संसद और विधानसभा में नेता की जगह अपराधियो ने कब्जा कर लिया है। पर इसका जबाबदार है कौन ?

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    देश की जनता अपने देश में महिलाओं को दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती के रूप में देखा जाता है और पुरुष वर्ग इन्हीं का अपमान करता है। इन्हीं को शैतानो की तरह नोचता है। इन्हीं के साथ हैवानियत करता है। ऐसे लोगो को चुल्लू भर पानी मे डुब मरना चाहिए। ये जितने दरिंदे है ये सब नेताओ के चमचे है। इसलिए इन पर कार्रवाई नही हो रहा है।
    आईएएस और आईपीएस अधिकारी क्यो चुप बैठे है? देश का दुर्भाग्य है, कि खाकी पर हमेशा खादी भारी पड़ता है। कब सुधरेगा हमारा देश कब वो दिन आएगा जब बहन बेटिया अपने को सुरक्षित महसूस करेंगी और दरिंदो का सर्वनाश होगा।

  • देश मे महिलाएं सुरक्षित नही है।

    देश मे महिलाएं सुरक्षित नही है।

    देश में महिला की सुरक्षा को लेकर लगातार लोगों में खौफ का माहौल बढ़ता जा रहा है। इस पर केंद्र सरकार को अंकुश लगाने की जरूरत है। India

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    आजकल अधिकांश राज्यो में महिलाओं लडकियो पर बलात्कार दुराचार की घटनाओं में दिन पर दिन बाढ़ सी आ गयी है। जिस पर राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर रहे है। राजस्थान, छतीसगढ़  मणिपुर, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यो में महिलाएं सुरक्षित नहीं है। (India)

    मणिपुर की घटना.. India

    राज्य सरकारें क्या कर रही है? महिलाओं को   बलात्कार कर उनको जिंदा जला दिया जा रहा है। देश में इतना बड़ा पाप हो रहा। लेकिन इस पर राजनीतिक दलों के लोग अपनी रोटिया सेक रहे है। पिछले 80 दिनों से मणिपुर जल रहा है। मणिपुर के मुख्यमंन्त्री कान में तेल डालकर कुम्भकर्ण की नींद सो रहा है। उनको पता ही नही चल रहा है कि राज्य में क्या हो रहा है। ये बड़े शर्म का विषय है।

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    Indian fasttrack news
    India,
    महिला सुरक्षा पर प्रतिकारात्मक तस्वीर

    राजस्थान की घटना..

    दूसरी ओर राजस्थान में रात में जिंदा एक 6 महीने की बच्ची को जला दिया गया। जिस पर मुख्यमंन्त्री गहलोत ने एक शब्द नही बोला। अब अपराधी ही नेता बने है। इस पर चुनाव आगोग को कड़ा नियम लागू करना चाहिए कि जिस नेता पर एक भी छोटा केस हो तो उसको चुनाव लड़ने का अधिकार समाप्त कर देना चाहिए। लोक सभा और कुछ राज्यो के विधानसभा चुनाव करीब है। क्या अपराध की घटनाओं को बढ़ाकर चुनाव का पूर्वाभ्यास किया जा रहा है? India

    अब निर्दोष नागरिकों, महिलाओ की हत्या, बलात्कार, लूट, चोरी, डकैती, राहजनी और अन्य घटनाओ की बाढ़ लाकर नेता अपनी ताकत बता रहे है। प्रधानमंत्री को आज वीडियो दिखाई पड़ा अभी तक मणिपुर की घटना की जानकारी नही थी। ये कबतक चलेगा पुलिस कब सुधरेगी नेताओ की चमचागिरी पुलिस कब बन्द करेगी। आजकल महाराष्ट्र में पुलिस की हफ्ता उगाही जोरो पर चल रही है। क्योंकि इनके आका सत्ता में और विपक्ष में बैठे है। इन पुलिस वालों का कोई कुछ नही कर सकता। India

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    अब तो पुलिस स्टेशनों में महिलाओं की शिकायत तक नही ली जाती है। ये छोड़िये आम नागरिकों की शिकायत नही ली जाती है। पुलिस की मानसिकता दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है। केवल अपने आकाओं के आगे पीछे मंडराते रहते है। अगर पुलिस के विरुद्ध किसी ने खबर लगा दिया। तो पुलिस हनुमान जी बनकर पत्रकार के पीछे लग जाती है। ये अपने देश का दुर्भाग्य है।
    दिल्ली में जब निर्भया कांड हुआ था। तो महिलाओ के लिए लोकसभा में कई कानून का इम्पलीमेंट (IMPLEMENT) किया गया था। पर उसपर आजतक अमल नही किया गया। कब होगी बहन बेटियों माताओ की सुरक्षा ये जबाब जनता पूछ रही है। India

  • चुप्पी ने बढ़ाई मणिपुर संकट

    चुप्पी ने बढ़ाई मणिपुर संकट

    • मणिपुर को एफआईआर और अस्फा से डराया नहीं जा सकता।
    • केंद्र सरकार मणिपुर को लेकर संजीदा नहीं।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    वैसे तो देश भर में पीएम मोदी के मन की बात का विरोध करते और कहते हैं हमारे मन की बात क्यों नहीं सुनी जाती? विरोध करने पर एफआईआर और जेल होती है।
    मणिपुर को एफआईआर और अस्फा से डराया नहीं जा सकता। मन की बात में पीएम द्वारा मणिपुर के नाम पर चुप्पी खल गई।

    मन की बात के लेखक सलाहकार ने शायद महिला पहलवानों पर चुप्पी, किसानों पर चुप्पी, पुरानी पेंशन बहाली पर चुप्पी, सेवानिवृत्त सैनिकों, वन नेशन वन रैंक और वन सैलरी की घोषणा के बाद चुप्पी, मॉरीशस की फेक कंपनी द्वारा अडानी डिफेंस में बीस हजार इन्वेस्ट पर चुप्पी, चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश में सौ गांव बसा लेने पर चुप्पी, किसान आत्महत्या पर कहना कि वे मेरे लिए थोड़े ही मरे? मणिपुर पर चुप्पी के बाद मणिपुर के लोगों ने बैनर्स पोस्टर्स लगाकर अपनी-अपनी रेडियो ट्रांजिस्टर सड़कों पर तोड़कर टुकड़े-टुकड़े करते हुए कहा, हम नहीं सुनेंगे पीएम के मन की बात। कितनी नफरत जुड़ गई होगी?

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    मणिपुर,
    आरएसएस दत्तात्रेय होसबले की फाइल तस्वीर

    चुप्पी ने बढ़ाई मणिपुर संकट..

    याद रहे मणिपुर के पहले भी पूर्वोत्तर में ऐसी आग सुलगती रही थी जिसे डायलॉग से सुलझाया गया और अब वह आदर्श राज्य बन गया। आरएसएस के बड़े नेता दत्तात्रेय होसबले ने कहा, हिंसा कोई भी उचित नहीं। हर समस्या का हल है संवाद। यहीं चूक गई केंद्र और मणिपुर सरकार। हाइकोर्ट के फैसले पर डबल इंजन की सरकार ने ध्यान नहीं दिया। उपेक्षा की। जिसका अंजाम मणिपुर हिंसा में सौ से अधिक लोगों की हत्या, साठ हजार लोगों का पलायन, हजारों घरों का जलना, बीजेपी मंत्री का घर जलाना आदि पर चुप्पी।

    सोनिया गांधी की पहल पर सर्वदलीय बैठक बुलाई गई जिसमें मैत्री और कुकी समुदाय और मणिपुर सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं होना।सिर्फ एक कांग्रेसी का शामिल होना। केंद्र सरकार के बीजेपी नेताओं और अफसरों की चली ढाई घंटे बैठक में मणिपुर कांग्रेस के प्रतिनिधि को चंद मिनट से अधिक नहीं बोलने देना, राहुल गांधी का विरोध कर लौटने को मजबूर करना बताता है, कि केंद्र सरकार मणिपुर को लेकर संजीदा नहीं है। सच कहा जाय तो बीजेपी सरकार नहीं चाहती की डायलॉग हो और समस्या का समाधान निकले।

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    केंद्र सरकार याद रखे मणिपुर को बुलडोजर से रौंदकर डराया नहीं जा सकता। दशक पहले से मणिपुर को सैनिक छावनी में बदल दिया गया फिर भी कुकी या मैत्री समुदाय को डराया नहीं जा सका। जरूरत है कि जिस प्रकार कांग्रेस की केंद्र सरकार ने संवाद के जरिए मिजोरम को दहकने से बचा लिया था। उसी तरह मणिपुर में शांति बहाली के लिए आर्मी नहीं, सरकार से सशस्त्र युद्ध नहीं प्रेम पूर्वक संवाद से बचाया जा सकता है। लेकिन इच्छा शक्ति की कमी से बीजेपी सरकार कदम नहीं उठा सकी है।

  • मणिपुर में सैकड़ों हत्या की जा चुकी है निरपराध लोगों की

    मणिपुर में सैकड़ों हत्या की जा चुकी है निरपराध लोगों की

    • लापता मोदी के लगे पोस्टर्स..
    • दंगो से बचने के लिए तमाम समुदाय के लोगों ने पड़ोसी राज्यों में शरण ली।
    • गृहमंत्री के पास सामुदायिक दंगे खत्म करने का कोई उपाय नहीं।
    • अमेरिकी ड्रोन से किसकी रक्षा होगी?
    • चीन ने भारतीय भूभाग में सैकड़ों गांव बसा लिए।
    • देश के भीतर हिंसा को रोकना सरकार का दायित्व।
    • बीजेपी नेताओं को खुद, अब केंद्र की डबल इंजन की सरकार पर भरोसा नहीं।
    • पीएम मोदी का बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा एकदम खोखला।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    बड़ी गजब की खबर है। जैसे रोम जल रहा था, तो वहां का राजा नीरो बंशी बजाने में तल्लीन था। कुछ हालत ठीक वैसे ही हमारे देश में है। मणिपुर महीने भर से सांप्रदायिक हिंसा से ग्रस्त है। लगभग तीन सौ गांव अग्नि की भेंट चढ़ चुके हैं। सैकड़ों निरपराध लोगों की हत्या की जा चुकी है। हजारों घायल हैं। तमाम समुदाय दंगों से बचने के लिए पड़ोसी राज्यों में शरण ली है। मणिपुर सरकार के हाथ पांव फूल रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री के पास सामुदायिक दंगे खत्म करने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा है। आर्मी और पुलिस पर हमले हो रहे हैं।

    अमेरिकी ड्रोन से किसकी रक्षा होगी?

    आर्मी के एक अधिकारी ने केंद्र सरकार को चेताया है। लेकिन मणिपुर को जलता छोड़ मोदी अमेरिका राजभोज में शामिल होने पहुंच गए हैं। अमेरिका जाने से पहले ही दो बिलियन अमेरिकी डॉलर्स के ड्रोन खरीदने का सौदा पक्का कर चुके हैं। कारण बताया जाता है, देश की सुरक्षा के लिए हथियार खरीदना ज़रूरी है। देश पर 155 लाख करोड़ का विदेशी कर्ज है। यानी हर भारतीय एक लाख के कर्ज में है। 140 करोड़ में गिरवी रख दी गई है जनता।

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    मणिपुर, लापता मोदी,
    मणिपुर आगजनी की तस्वीर

    आजादी के बाद से 2014 तक भारत पर कुल विदेशी कर्ज मात्र 55 लाख डॉलर्स था। मोदी सीएम थे तब मन मोहन सिंह द्वारा लिए गए विदेशी कर्ज की बड़ी आलोचना की थी। उनके पीएम बनने से पूर्व 65 साल में 55 लाख डॉलर्स का कर्ज था। जिसकी आलोचना ही नहीं खिल्ली उड़ाने वाले मोदी ने मात्र 9 वर्षो में 100 लाख करोड़ का विदेशी कर्ज ले लिए जिसे कथित रूप से मुफ्त अनाज बांटने, किसान सम्मान निधि देने, पीएम आवास योजना और उज्वला योजना में मुफ्त सिलेंडर बांटने जिन्हे फिर कभी रीफिल कराया ही नहीं जाता।

    ऋण लेकर घी पीना शायद इसे ही कहते हैं।विदेशी ऋण केवल ऐसे उपयोग के लिए लिये  जाते हैं जिनसे राष्ट्र को आय हो लेकिन जब सवाल अपनी छवि बनाने की हो तो क्या कहा जाए?
    अमेरिकी ड्रोन से किसकी रक्षा होगी? चीन ने भारतीय भूभाग में सैकड़ों गांव बसा लिए है। पाकिस्तान आंखें तरेर रहा है। चीन के खिलाफ एक शब्द बोल नहीं सकते।

    एक दो नहीं दस राज्यों में CBI की एंट्री पर बैन

    मणिपुर भाजपा ने लगाए ‘लापता मोदी’ के पोस्टर्स..

    सरकार का दायित्व है कि देश के भीतर हिंसा को रोकना जरूरी है। यहां तो हिंसाग्रस्त मणिपुर छोड़कर पीएम दावत खाने पहुंच गए। मणिपुर की चिंता नहीं। वहां की सरकार में शामिल मंत्रियों की फिक्र नहीं। हिंसाग्रस्त मणिपुर का तीन गुट मोदी से मिलने आया।चिट्ठी भी लिखी गई। मणिपुर भाजपा में भगदड़ मची हुई है। मंत्री के घर फूंके गए हैं। बीजेपी के नेताओं को खुद अब केंद्र की डबल इंजिन सरकार पर भरोसा नहीं है। मणिपुर के बीजेपी नेताओं ने राज्यभर में मोदी मिसिंग के पोस्टर चिपकाए हैं।

    देश का दुर्भाग्य है, देश की सभी सरकारी मशीनरी पूरी तरह भ्र्ष्टाचार में लिप्त हो गयी है।

    स्थानीय पुलिस और आर्मी में झड़प की खबर है। अरुणाचल प्रदेश जिसका भूभाग कब्जे में लेकर चीन ने सौ गांव बसा लिए हैं। उसके बाद भी मणिपुर दंगाग्रस्त राज्य बेहद ज़रूरी है शांति स्थापना के लिए। लेकिन पीएम लापता, गृहमंत्री मौन। मौन तो मोदी भी हैं। एक शब्द तक नहीं बोले। मणिपुर का नाम लेने से उसी तरह बचते रहे हैं जैसे महिला पहलवानों के यौन शोषण के खिलाफ धरना देने से उपजी स्थिति के संदर्भ में भी एक शब्द नहीं बोले जिससे यह संदेश विश्व भर में गया, कि मोदी का बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा एकदम खोखला है।

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    देश की आर्थिक स्थिति डांवाडोल है। मंहगाई चरम सीमा पार कर गई है। टैक्स मनमाना, पेनाल्टी मनमानी लगाई जा रही। सच तो यह है कि देश चलाना, हिंसा रोकना मोदी सरकार के बूते का नहीं। अब मणिपुर वाले पूछ रहे हैं कि हम देश के नागरिक हैं या नहीं? वोटर हैं या नहीं? जिसका जवाब बीजेपी के किसी भी नेता के पास नहीं है।

  • भाजपा मंत्री, बीजेपी सचिव के घर की आगजनी, बीजेपी के वादे से मुकरने का नतीजा

    भाजपा मंत्री, बीजेपी सचिव के घर की आगजनी, बीजेपी के वादे से मुकरने का नतीजा

    • मणिपुर घटना में अमित शाह लाचार।
    • दरअसल झूठ की भी अपनी हद होती है।
    • पीएम की छवि विदेशों में भी धूमिल।
    • मैती समुदाय को आरक्षण देना गुजरात लॉबी का वादा।
    • मैती समुदाय आक्रामक भूमिका में..
    • कुकी, नगा और आदिवासी उतर गए तो स्थिति होगी अत्यंत भयंकर।
    • गुजरात लॉबी की तानाशाही के भय से बीजेपी के सांसद, मंत्री चुप।
    • आरएसएस के सामने अब नही तो कभी नहीं की विकट स्थिति।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    मणिपुर की हिंसा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हाथ पांव फूला देने के लिए काफी है। पीएम नरेंद्र मोदी मणिपुर जलता छोड़ विदेश चले गए। जो उन्हें देश की नहीं अपनी छवि बनाने की चिंता है। लेकिन छवि बनाते-बनाते कब मटिया मेट हो गई पता नहीं चला। दरअसल झूठ की भी हद होती है। महिला पहलवान अब उनकी और देश की बेटियां नहीं रही। वे अपने बाहुबली आरोपी सांसद को बचाने में लगे रहे इसी बीच विदेशों में भी उनकी छवि धूमिल हो गई।

    ये राहुल गांधी हैं कि अमेरिका में जाकर मोदी की यात्रा के पहले सारा गुड गोबर कर दिए। बीजेपी की ऐसी तैसी कर दी। दूसरी तरफ गुजरात लॉबी द्वारा महिला पहलवानों की उपेक्षा से आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और माफियाओं बलात्कारियों को मटियामेट करने का एलान करने वाले यूपी से सीएम योगी आदित्यनाथ की पेशानी पर बल पड़ गए हैं। उन्हे लगता है गुजरात लॉबी बीजेपी का सत्यानाश कर देगी।

    बाहुबली को पीएम, गृहमंत्री द्वारा दिल्ली पुलिस द्वारा नाबालिग पहलवान के यौनशोषण मामले में क्लीन चिट देकर पॉक्सो कानून से हटाने का असर देश की आधी आबादी यानी महिलाओं पर पड़ेगा। यदि उन्होंने बीजेपी को वोट नहीं दिया तो बीजेपी को खत्म होने से कोई रोक नहीं पाएगा।

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    मणिपुर, अमित शाह,
    मणिपुर आगजनी की तस्वीर

    गुजरात लॉबी का वादा..

    मणिपुर हिंसा बीजेपी की ही बोई गई है। मैती समुदाय को आरक्षण देने का वादा गुजरात लॉबी का था। तो मणिपुर हिंसा आगजनी का श्रेय भी इन्ही के माथे जाएगा। गृहमंत्री अमित शाह मणिपुर दौरा कर चुके हैं। लेकिन हासिल कुछ नहीं हुआ। बीजेपी मंत्री एवं बीजेपी सचिव के घर की आगजनी बीजेपी के वादे से मुकरने का नतीजा है। आरक्षण का पेच कुछ इस तरह फंस गया है, कि अमित शाह के सम्मुख एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। अगर बीजेपी मैती समुदाय को आरक्षण देती है तो यह कुकी, नगा और अन्य आदिवासियों के लिए निर्धारित कोटे में से दिया जाएगा जिसे ये अपने हक पर डाका डालना समझेंगे।

    मणिपुर घटना में अमित शाह लाचार।

    अभी तो मैती समुदाय आक्रामक भूमिका में है। कल कुकी नगा और आदिवासी उतर गए तो स्थिति अत्यंत भयंकर होगी। गृहयुद्ध भीषण रूप से फैलेगा। अमित शाह को शायद इसी बात की चिंता हो। उनकी समझ में नहीं आ रहा, कि करें तो क्या करें? मणिपुर हिंसा की आग में जल रहा है। जिसमे खुद अब बीजेपी के घर भी जद में आ गए हैं। अमित शाह के बूते का नहीं रहा मणिपुर। पीएम तो विदेश यात्रा के द्वारा अपनी नष्ट हो चुकी छवि को सुधारने में लगे हैं।

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    आरएसएस के सामने अब नही तो कभी नहीं की विकट स्थिति।

    आश्चर्य नहीं होगा कि आज गुजरात लॉबी की तानाशाही के भय से बीजेपी के जो सांसद, मंत्री चुप हैं। मूक दर्शक बने हुए हैं कल सारे के सारे गुजरात लॉबी के विरुद्ध उठ खड़े हों। आसार तो यही नजर आते है, कि बीजेपी आत्मघात के रास्ते पर बहुत आगे निकल गई है जहां से लौटना असंभव है। आरएसएस के सामने अब नहीं तो कभी नहीं की विकट स्थिति आ खड़ी हुई है। देखना मजेदार होगा कि क्या आरएसएस गुजरात लॉबी को बीजेपी से अलग-थलग करेगी या बीजेपी को नष्ट होने देती है।