Category: Jammu & kashmir

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  • श्रीनगर एयरपोर्ट पर पार्किंग में खंभे से टकराया IndiGo विमान, यात्री सुरक्षित; वापसी उड़ान पर असर?

    श्रीनगर एयरपोर्ट पर पार्किंग में खंभे से टकराया IndiGo विमान, यात्री सुरक्षित; वापसी उड़ान पर असर?

    श्रीनगर एयरपोर्ट पर पार्किंग के दौरान IndiGo की 6E 225 उड़ान VDGS पोल से टकरा गई। सभी यात्री सुरक्षित हैं, विमान को नुकसान हुआ।

    जम्मू-कश्मीर: श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर शुक्रवार सुबह नवी मुंबई से पहुंची IndiGo की उड़ान 6E 225 पार्किंग के दौरान एक सिग्नल खंभे से टकरा गई। हादसा करीब सुबह 9:02 बजे बे नंबर 6 में विमान को पार्क करते समय हुआ। विमान में सवार सभी यात्री और चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

    विमान का पंजीकरण VT-NOG बताया गया है। टक्कर के बाद विमान के अगले हिस्से को नुकसान पहुंचा और यात्रियों को विमान से उतारने के लिए सीढ़ियों का इस्तेमाल किया गया।

    लैंडिंग के समय नहीं, पार्किंग के दौरान हुआ हादसा

    यह घटना विमान के रनवे पर उतरते समय नहीं हुई। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, विमान श्रीनगर पहुंचने के बाद पार्किंग बे में अपनी जगह पर लगाया जा रहा था, तभी वह VDGS पोल के संपर्क में आया। यानी लैंडिंग हादसा नहीं है, जमीन पर पार्किंग के दौरान हुई घटना है।

    VDGS यानी Visual Docking Guidance System विमान को पार्किंग की सही स्थिति और रुकने की जगह बताने वाला सिग्नल पोल है। श्रीनगर एयरपोर्ट की घटना में इसी सिस्टम के पोल से विमान का संपर्क हुआ। जानकारी के मुताबिक इस पोल पर विमान को दिशा और स्थिति बताने वाली प्रदर्शन इकाई के साथ लेजर और कैमरा सेंसर भी जुड़े होते हैं।

    विमान को कितना नुकसान हुआ?

    टक्कर के बाद विमान को नुकसान हुआ है। तस्वीरों और मौके से सामने आई जानकारी में विमान के अगले हिस्से के पास क्षति दिखाई दे रही है, लेकिन नुकसान की सटीक तकनीकी सीमा और विमान दोबारा उड़ान के लिए कब उपलब्ध होगा, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

    विमान की पहचान Airbus A321neo के रूप में की गई है।

    क्या श्रीनगर एयरपोर्ट की दूसरी उड़ानें प्रभावित हुईं?

    एयरपोर्ट प्रशासन के मुताबिक घटना के बावजूद श्रीनगर एयरपोर्ट का सामान्य संचालन जारी रहा और दूसरी उड़ानों के आगमन-प्रस्थान पर तत्काल कोई व्यापक असर नहीं पड़ा।

    हालांकि, जिस विमान के साथ यह घटना हुई, उसकी अगली उड़ान को लेकर स्थिति पर यात्रियों की नजर बनी हुई है। कुछ उड़ान-ट्रैकिंग सेवाओं में 6E 226, यानी श्रीनगर से नवी मुंबई जाने वाली वापसी उड़ान की स्थिति रद्द दिखाई गई है, लेकिन अलग-अलग ट्रैकिंग सेवाओं में स्थिति एक जैसी नहीं है। इसलिए इसके आधार पर अंतिम फैसला मानने से पहले IndiGo की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

    ब्रेक फेल होने की बात कितनी सही?

    घटना के बाद कुछ मीडिया रिपोर्टों में विमान के ब्रेक सिस्टम में खराबी को संभावित वजह बताया गया है। लेकिन यह बात अभी आधिकारिक तौर पर पुष्ट नहीं हुई है।

    श्रीनगर एयरपोर्ट प्रशासन ने कहा है कि घटना की परिस्थितियों की जांच संबंधित सक्षम अधिकारियों द्वारा की जाएगी और जांच पूरी होने के बाद ही सही कारण सामने आएगा। इसलिए फिलहाल ब्रेक फेल होने को हादसे की निश्चित वजह बताना सही नहीं है।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विमान में सवार सभी यात्री और चालक दल सुरक्षित हैं। विमान को हुई तकनीकी क्षति, घटना का वास्तविक कारण और वापसी की उड़ान पर इसका अंतिम असर जांच और एयरलाइन की आगे की जानकारी के बाद स्पष्ट होगा।

  • Poonch में पाकिस्तानी ड्रोन, Rajouri में 3 और दिखे; LoC पर Search Operation से बढ़ी हलचल, क्या मिला?

    Poonch में पाकिस्तानी ड्रोन, Rajouri में 3 और दिखे; LoC पर Search Operation से बढ़ी हलचल, क्या मिला?

    Poonch में suspected पाकिस्तानी ड्रोन दिखने के बाद search operation शुरू हुआ। Rajouri में 3 drones की हलचल और suspicious movement से LoC पर alert बढ़ा।

    ताजा अपडेट:

    Poonch और Rajouri के LoC क्षेत्रों में suspected drone activity के बाद security forces का search operation जारी है। Poonch में यह जांच की जा रही है कि drone ने जमीन पर कोई suspicious material तो नहीं गिराया। फिलहाल किसी weapon, narcotics या दूसरे payload की recovery की official confirmation नहीं हुई है।

    जम्मू-कश्मीर: Poonch और Rajouri में सामने आई drone activity ने LoC पर security alert बढ़ा दिया है। Poonch के Mendhar सेक्टर में 28 अगस्त की रात suspected Pakistan-origin drone दिखाई दिया, जबकि इसी दौरान Rajouri के Nowshera सेक्टर से तीन suspected Pakistani drones की movement की जानकारी सामने आई।

    लेकिन इस पूरे मामले में सिर्फ आसमान में दिखाई दिए drones ही चिंता की वजह नहीं हैं। Rajouri में suspicious ground movement की खबरों के बाद security forces ने जमीन पर भी search operation शुरू किया है।

    Poonch में रात 8:05 बजे क्या हुआ?

    28 अगस्त की रात करीब 8:05 बजे Poonch के Mendhar सेक्टर के Balakote इलाके में Behrooti गांव के ऊपर एक suspected drone देखा गया।

    बताया गया कि drone Mangalnar-Dabrote की दिशा में आगे बढ़ा और बाद में Pakistan की तरफ वापस चला गया।

    Drone के वापस जाने के बाद भी security forces ने इलाके की तलाश शुरू कर दी। वजह साफ है—drone वापस चला गया, इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि उसने जमीन पर कुछ छोड़ा ही नहीं।

    इसीलिए आसपास के इलाके में search operation के जरिए संभावित suspicious material की तलाश की जा रही है।

    Rajouri में एक नहीं, तीन drones की हलचल

    Poonch की घटना के बीच Rajouri से सामने आई जानकारी ने security concern और बढ़ा दिया।

    Nowshera सेक्टर के Rumlidhara इलाके में तीन suspected Pakistani drones की movement की रिपोर्ट सामने आई। Security forces ने counter-drone measures activate किए और drones को वापस जाने पर मजबूर किया गया।

    इसके बाद आसपास के इलाके में search operation शुरू किया गया।

    यानी एक ही समय में Poonch और Rajouri के LoC belt में suspected drone activity की दो अलग घटनाएं सामने आईं।

    सिर्फ drone नहीं, जमीन पर भी suspicious movement

    Rajouri के Nowshera इलाके में border fence के पास backpack लिए एक संदिग्ध व्यक्ति की movement देखे जाने की रिपोर्ट है। इसके बाद security forces ने आसपास तलाश शुरू की।

    इसके अलावा Rajouri के Gaibas, Mithiyani, Mogla और Narla इलाकों में दो suspected armed persons देखे जाने की सूचना के बाद भी search operation चलाया गया।

    इस वजह से security agencies को aerial surveillance के साथ ground-level search भी बढ़ाना पड़ा।

    एक नजर में पूरा मामला

    इलाकाक्या हुआ
    Poonch-MendharSuspected Pakistani drone दिखाई दिया
    Balakote-Behrootiरात करीब 8:05 बजे drone movement
    Rajouri-Nowshera3 suspected drones की movement
    RumlidharaCounter-drone measures के बाद search
    Rajouri के कुछ इलाकेSuspicious ground movement की reports
    Poonchसंभावित material की तलाश
    फिलहालSearch और security surveillance जारी

    क्या Poonch वाले drone ने हथियार या drugs गिराए?

    यह इस समय सबसे बड़ा सवाल है, लेकिन इसका जवाब अभी साफ नहीं है।

    Poonch की मौजूदा घटना में weapon, heroin, narcotics या किसी दूसरे payload की recovery की official confirmation सामने नहीं आई है।

    Security forces की search का एक मकसद यही पता करना है कि drone ने जमीन पर कोई suspicious material छोड़ा था या नहीं।

    Drone को लेकर इतनी चिंता क्यों?

    Border areas में drone का इस्तेमाल केवल surveillance के लिए नहीं होता। पिछले मामलों में drones के जरिए weapons और narcotics की cross-border delivery की जांच सामने आ चुकी है।

    इसी वजह से LoC के पास किसी suspected drone की sighting के बाद security forces केवल आसमान पर नजर नहीं रखतीं, बल्कि जमीन पर भी संभावित drop locations की तलाश करती हैं।

    हालांकि Poonch की मौजूदा घटना में यह कहना जल्दबाजी होगी कि drone किसी weapon या drug delivery के लिए आया था। अभी ऐसी कोई पुष्टि नहीं है।

    क्या यह पहली घटना है? नहीं

    Poonch और Rajouri की मौजूदा घटनाओं को समझने के लिए पिछले कुछ हफ्तों की घटनाएं भी महत्वपूर्ण हैं।

    23 अगस्त को Kathua के Hiranagar के Bobiyan इलाके में suspected Pakistan-origin drone देखा गया था। इसके बाद search operation चलाया गया और यह जांच की गई कि कहीं drone से weapons या narcotics तो नहीं गिराए गए। उस search में कुछ suspicious मिलने की पुष्टि नहीं हुई थी।

    16 अगस्त को Hiranagar सेक्टर के Katli गांव के पास भी एक suspected drone मिलने की खबर सामने आई थी, जिसे security team ने कब्जे में लिया था।

    4 अगस्त को Kathua में suspected Pakistani drone activity के बाद search operation शुरू किया गया था। इसी दौरान Poonch में suspected terrorist movement की information के आधार पर security forces ने searches की थीं।

    इससे पहले 27 जुलाई को Samba के Nandpur और Rajouri के Nowshera सेक्टर में suspected Pakistani drone activity के बाद भी search operations शुरू किए गए थे।

    यानी हाल के मामलों में Poonch, Rajouri, Samba और Kathua के border areas से drone alerts और उसके बाद security searches की घटनाएं सामने आई हैं।

    क्या drone surveillance कर रहा था?

    हर drone sighting को हमला या smuggling attempt मानना सही नहीं होगा।

    Security agencies को ऐसे मामलों में कई possibilities देखनी पड़ती हैं—क्या drone सिर्फ surveillance कर रहा था, क्या किसी location की जानकारी जुटाई जा रही थी, क्या कोई material पहुंचाने की कोशिश हुई या क्या इसकी activity किसी ground movement से जुड़ी थी।

    मौजूदा Poonch घटना में इनमें से किसी भी possibility की अभी official confirmation नहीं हुई है।

    Amritsar के मामलों से क्यों जुड़ता है यह angle?

    Drone-based smuggling का खतरा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि Punjab में हाल के मामलों में Pakistan-based handlers से allegedly जुड़े arms और heroin networks की जांच सामने आई है।

    एक मामले में weapons और drone की recovery की जानकारी दी गई थी। NIA की जांच में Pakistan और Australia links को भी खंगालने की बात सामने आई।

    इसका मतलब यह नहीं कि Poonch वाला drone भी हथियार या drugs लेकर आया था। दोनों घटनाओं को सीधे जोड़ने की अभी कोई official confirmation नहीं है।

    लेकिन पुराने मामलों की वजह से border पर drone activity को security agencies गंभीरता से लेती हैं।

    Bayraktar TB2 वाला angle कितना सही है?

    Pakistan की drone capability को लेकर भी हाल में चर्चा रही है। कुछ reports में LoC के पास Turkish-made Bayraktar TB2 drones की deployment के claims सामने आए हैं। ऐसे drones surveillance और reconnaissance के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

    लेकिन Poonch में 28 अगस्त को दिखाई दिए suspected drone को Bayraktar TB2 बताने की कोई verified confirmation अभी सामने नहीं आई है।

    LoC पर इसका असर क्या होगा?

    लगातार drone alerts के बाद border areas में aerial surveillance और counter-drone preparedness बढ़ानी पड़ सकती है।

    अगर drone activity के साथ जमीन पर suspicious movement भी सामने आए, तो security forces को forest और village areas में cordon-and-search operation चलाना पड़ता है।

    इससे security deployment और निगरानी दोनों बढ़ते हैं। Poonch और Rajouri में मौजूदा घटनाओं में यही broader security concern दिखाई दे रहा है।

    अब आगे क्या होगा?

    इस पूरे मामले में अगला बड़ा update Poonch और Rajouri में चल रहे search operations से मिल सकता है।

    अगर search के दौरान कोई suspicious object, weapon, narcotics या दूसरा material मिलता है, तो मामले का security angle और गंभीर हो सकता है।

    अगर कुछ नहीं मिलता, तो फिलहाल मामला suspected drone intrusion और security alert तक सीमित रह सकता है।

    फिलहाल Poonch में drone sighting, Rajouri में तीन drones की reported movement और suspicious ground movement की खबरों के बाद LoC के इस हिस्से में security agencies की निगरानी बढ़ी हुई है।

    अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि search operation में क्या सामने आता है और security agencies की तरफ से अगला official update क्या आता है।

  • क्या 1946 में मुसलमानों ने पाकिस्तान के लिए वोट दिया था? पूरा सच जो अब तक आपसे छुपाया गया!

    क्या 1946 में मुसलमानों ने पाकिस्तान के लिए वोट दिया था? पूरा सच जो अब तक आपसे छुपाया गया!

    Did all Muslims vote for Pakistan in 1946? जानिए पूरा सच—British India, limited voting rights, Muslim League, Cabinet Mission Plan और Partition की असली कहानी।

    1946 Elections, Pakistan Vote, और Muslim League—को दशकों से एक बड़ा नैरेटिव बनाया गया कि “मुसलमानों ने पाकिस्तान बनवाया।” लेकिन जब हम पूरे historical context को देखते हैं, तो कहानी एकदम अलग निकलती है। सच ये है कि उस समय की voting system, political agenda, और constitutional negotiations को समझे बिना ये दावा करना अधूरा और भ्रामक है। आइए, इस पूरे मुद्दे को उसी अंदाज़ में समझते हैं, जैसे आपने सवाल उठाया है—बिना कुछ छोड़े, पूरे विस्तार के साथ।

    क्या हुआ? (1946 Elections का पूरा घटनाक्रम)

    1946 में हुए चुनाव आज के भारत जैसे नहीं थे। उस समय देश की भौगोलिक और प्रशासनिक स्थिति पूरी तरह अलग थी।

    उस समय भारत दो हिस्सों में बंटा हुआ था:

    1. 11 British Provinces (ब्रिटिश प्रांत)
    2. लगभग 565 Princely States (रियासतें)

    चुनाव सिर्फ इन 11 प्रांतों में हुए थे, जिनमें शामिल थे:

    • बंगाल
    • पंजाब
    • संयुक्त प्रांत (UP)
    • बिहार
    • बॉम्बे प्रांत
    • मद्रास
    • मध्य प्रांत और बरार
    • असम
    • उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP)
    • सिंध
    • उड़ीसा

    जबकि 565 रियासतें—जैसे हैदराबाद, जम्मू-कश्मीर, जूनागढ़, भोपाल, त्रावणकोर, मैसूर, बड़ोदा—इनमें चुनाव हुए ही नहीं।

    मतलब साफ है:
    इन रियासतों में रहने वाले 100% मुसलमानों का 1946 चुनाव से कोई लेना-देना नहीं था।

    कहाँ हुआ? (Election Coverage Reality)

    चुनाव का दायरा बेहद सीमित था
    पूरे भारत की बड़ी आबादी इस प्रक्रिया से बाहर थी

    इसलिए यह कहना कि “पूरे भारत के मुसलमानों ने वोट दिया”
    पूरी तरह गलत और भ्रामक है

    किसे मिला वोट देने का अधिकार? (Voting Rights Reality)

    आज की तरह उस समय हर व्यक्ति को वोट देने का अधिकार नहीं था।

    उस समय universal adult franchise लागू नहीं था

    वोट देने के लिए जरूरी शर्तें थीं:

    • जमीन या संपत्ति
    • टैक्स देना
    • शिक्षा

    इतिहासकारों के अनुसार:
    केवल 10-12% आबादी को ही वोट देने का अधिकार था

    यानी:

    • 100 में से सिर्फ 10 लोग वोट दे सकते थे
    • बाकी 90% (मुसलमान समेत) वोट नहीं दे सकते थे

    इसलिए यह कहना कि “मुसलमानों ने वोट दिया”—
    अधिकांश मुसलमानों ने तो वोट ही नहीं दिया क्योंकि अधिकार ही नहीं था

    क्या सभी मुसलमान मुस्लिम लीग के साथ थे? (Ground Reality of Muslim Politics)

    यह भी एक बड़ा भ्रम है कि सभी मुसलमान Muslim League के साथ थे

    इसके उलट, कई बड़े और प्रभावशाली संगठन लीग के खिलाफ थे:

    • जमीयत उलेमा-ए-हिंद
    • मजलिस-ए-अहरार-ए-इस्लाम
    • ऑल इंडिया आज़ाद मुस्लिम कॉन्फ्रेंस

    ये सभी संगठन:
    पाकिस्तान के विचार के विरोध में थे
    एक संयुक्त भारत के पक्षधर थे

    यानी मुस्लिम समाज के भीतर भी गहरा मतभेद था

    चुनाव का असली मतलब क्या था? (Election Narrative vs Reality)

    यह सच है कि मुस्लिम रिजर्व सीटों पर Muslim League को भारी सफलता मिली

    लेकिन:
    इसका मतलब यह नहीं कि हर वोट “पाकिस्तान” के लिए था

    असल मुद्दा था:

    • आज़ाद भारत में मुसलमानों की स्थिति क्या होगी?
    • उन्हें बराबरी का दर्जा मिलेगा या नहीं?

    लीग का चुनावी नारा था:
    “मुसलमान एक अलग क़ौम हैं—उन्हें बराबरी और सुरक्षा चाहिए, वरना पाकिस्तान एक विकल्प है।”

    यानी:
    पाकिस्तान मुद्दा था
    लेकिन यह अंतिम समाधान के रूप में पेश किया गया था, न कि तत्काल लक्ष्य

    जिन्ना का असली उद्देश्य (Jinnah’s Strategy Explained)

    मोहम्मद अली जिन्ना का मुख्य मकसद था:

    यह साबित करना कि मुसलमानों का प्रतिनिधित्व सिर्फ मुस्लिम लीग करती है
    कांग्रेस मुसलमानों की तरफ से बोलने का दावा न करे

    क्योंकि कांग्रेस कहती थी:
    “हम सभी भारतीयों की पार्टी हैं”

    जिन्ना चाहते थे:
    भविष्य की संवैधानिक बातचीत में
    मुसलमानों की हिस्सेदारी तय करने का अधिकार लीग के पास हो

    उस समय का भाव यही था:
    “Vote हमारा, Representation भी हमारा”

    लोगों पर असर (Public Sentiment & Social Impact)

    जिन मुसलमानों को वोट का अधिकार था, उन्होंने लीग को इसलिए चुना:

    • minority insecurity
    • political representation
    • भविष्य की सुरक्षा

    यह भावना आज भी कई वंचित समुदायों में देखी जाती है

    सरकारी अपडेट (Cabinet Mission Plan – पूरा सच)

    1946 में ब्रिटिश सरकार ने Cabinet Mission Plan पेश किया

    मकसद:
    भारत को एक ही देश बनाए रखना
    प्रांतों को अधिक स्वायत्तता देना

    Plan की मुख्य बातें:

    • देश को 3 ग्रुप में बांटना:
    • Group A – हिंदू बहुल
    • Group B – पश्चिम के मुस्लिम बहुल (Punjab, Sindh, NWFP)
    • Group C – पूर्व के मुस्लिम बहुल (Bengal, Assam)

    केंद्र सरकार के पास सिर्फ 3 विषय:

    • रक्षा
    • विदेश नीति
    • संचार

    बाकी सभी अधिकार प्रांतों के पास

    यह मॉडल जिन्ना के लिए परफेक्ट था
    मुसलमानों के अधिकार भी सुरक्षित
    और देश भी एकजुट रहता

    इसलिए:
    जिन्ना ने इस प्लान को स्वीकार कर लिया

    आगे क्या हुआ? (Turning Point Explained)

    जुलाई 1946 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने बयान दिया:
    “Constituent Assembly किसी भी योजना से बंधी नहीं होगी”

    इससे मुस्लिम लीग को डर लगा:

    • कांग्रेस सत्ता में आकर प्लान बदल देगी
    • मजबूत केंद्र बना देगी
    • मुस्लिम बहुल प्रांतों की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी

    इसे आज के संदर्भ में ऐसे समझिए:
    जैसे कश्मीर में autonomy का मुद्दा

    इसके बाद:
    जिन्ना ने Cabinet Mission Plan से समर्थन वापस लिया
    राजनीतिक टकराव बढ़ गया

    और यही घटनाएं आगे चलकर 1947 के Partition तक पहुंचीं

    Final Truth (साफ-साफ निष्कर्ष)

    565 रियासतों में चुनाव नहीं हुए
    90% लोगों को वोट देने का अधिकार ही नहीं था
    सभी मुसलमानों ने वोट नहीं दिया
    सभी मुसलमान पाकिस्तान के समर्थक नहीं थे
    मुस्लिम लीग की जीत = पाकिस्तान के लिए सर्वसम्मति नहीं

    और सबसे अहम:
    जिन्ना ने पहले अखंड भारत का विकल्प स्वीकार किया था


    FAQ

    Q1: क्या 1946 में सभी मुसलमानों ने पाकिस्तान के लिए वोट दिया था?

    नहीं, अधिकांश के पास वोट का अधिकार ही नहीं था।

    Q2: कितने प्रतिशत लोग वोट दे सकते थे?

    लगभग 10-12%।

    Q3: क्या मुस्लिम लीग ही सभी मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करती थी?

    नहीं, कई बड़े संगठन इसके खिलाफ थे।

    Q4: क्या पाकिस्तान पहले से तय था?

    नहीं, Cabinet Mission Plan के जरिए भारत को एक रखने की कोशिश हुई थी।

    इतिहास को आधा पढ़ना सबसे बड़ा भ्रम पैदा करता है। “मुसलमानों ने पाकिस्तान बनवाया”—ये लाइन सुनने में आसान है, लेकिन सच्चाई बेहद जटिल है।

    असलियत ये है:

    • ज्यादातर लोग वोट ही नहीं दे सके
    • मुसलमानों के अंदर भी मतभेद थे
    • और राजनीति अधिकार और सुरक्षा की थी, न कि सिर्फ बंटवारे की

    इसलिए जरूरी है कि हम इतिहास को facts के साथ समझें—न कि assumptions के आधार पर।

    References / Sources

  • कांग्रेस के सामने संसद में मोदी सरकार की बोलती हुई बंद।

    कांग्रेस के सामने संसद में मोदी सरकार की बोलती हुई बंद।

    दुनिया की निगाहों में भारत की गवाही और भारत के बीच हुए लगातार आतंकी हमलों पर विदेश नीति और संसद में खड़े होकर छपरी और टपरी जैसे भाषण कि “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” और पाकिस्तानी हमले पर ट्रम्प का सीजफायर। भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत ही नहीं दे पा रहा।

    डिजिटल डेस्क
    नई दिल्ली:
    संसद का मानसून सत्र चल रहा। बिहार में वोट काटने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा। रोहिंग्या बांग्लादेश और नेपाली के नाम पर लाखों नाम काट डाले गए। blo लोगों के घर जाकर सत्यापन करने की जगह ऑफिस में बैठकर फॉर्म में नाम लिखकर खुद ही वोटर के हस्ताक्षर कर रहे। विपक्षी उनके वोटरों के नाम काटने के आरोप लगाए। पत्रकार अजीत अंजुम ने मोबाइल द्वारा चुनाव आयोग के खेल को सबूत सहित सार्वजनिक किया तो उनपर एफआईआर कर दी गई यानी सच दिखाने का दंड दिया गया।

    लोकतंत्र का हिस्सा

    संसद में ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा में सत्ता विपक्ष में वाक्युद्ध चल ही रहा था, कि सीजफायर की भी बात हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 25 बार कहे गये वक्तव्य, कि “हमने ट्रेड की धमकी देकर युद्ध रुकवा दी।” पर विपक्ष ने हमला बोला। यही जीवंत लोकतंत्र है। ट्रंप ने खुद अपने एक्स हैंडल पर शाम 5.35 पर सीजफायर की घोषणा की। भारत की तरफ से नहीं। संसद में सत्ता ने उत्तर नहीं दिया। विपक्ष मांग करता रहा कि पीएम आकर कहें कि ट्रंप ने वॉर नहीं रुकवाई। रक्षामंत्री ने कहा पीओके लेना हमारा मकसद नहीं फिर भाजपा ने बार बार कांग्रेस और नेहरू पर आरोप क्यों लगाए?

    संसद में होती है गुंडो की भाषा

    पहलगाम में कथित तौर पर पाकिस्तानी आतंकी आए और धर्म पूछकर मारा जिसके प्रमाण नहीं। संसद के मानसून सत्र के समय ही  सेना ने घोषित किया कि मुठभेड़ में सारे आतंकी मारे गए। इससे पूर्व जिन कथित आतंकियों के स्क्रेच जारी किए गए गवाह ने उसे गलत कहा। अहम बात यह कि सत्ता के दंभ में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” क्या ऐसे स्पीकर और राज्यसभा के सभापति सदन की मर्यादा बचाने की कोशिश करेंगे? “मुझसे निपट लो।” क्यों भाई पीएम हो क्या? ऐसी भाषा किसी गली का गुंडा या फिर माफिया ही बोल सकता है। लेकिन विपक्ष को टोकने वाले सत्ता की असंसदीय भाषा की अनसुनी करते हुए पद की गरिमा खो चुके हैं।

    जवाब देने से क्यों भागती है मोदी सरकार?

    मोदी सरकार वर्तमान में अपने से संबंधित बात पर चर्चा करने से भागती है। मोदी दिल्ली में ही है लेकिन सदन में आ नहीं सकते। ऐसा मणिपुर मामले में किया था। अंतिम समय में आए भी तो क्या कुछ कहा दुनिया जानती है। प्रधानमंत्री होने के नाते कभी मणिपुर गए ही नहीं। इसी तरह उरी, पठानकोट, पुलवामा और पहलगाम भी नहीं गए। यह सही है कि पहलगाम में आतंकी हमला हुआ। 27 भारतीयों को जान गंवानी पड़ी। विपक्ष सवाल पूछता रहा, सवा सौ किलोमीटर दूर पाकिस्तानी आतंकवादी कैसे आए? लोगों से कथित रूप से धर्म पूछा। पेंट खुलवाकर देखा कौन सा धर्म है। बीजेपी के मंत्रियों में तनिक भी विधवा हुई महिलाओं के प्रति सम्मान भाव नहीं देखा गया। बड़ी बेशर्मी से कहा गया, महिलाओं में वीरांगना भाव नहीं था। एक ने तो कर्नल सोफिया के लिए आतंकवादियों की बहन तक कह दिया। यही है इनका सेना के प्रति सम्मान भाव।

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    कांग्रेस पर सवाल उठाने का नतीजा

    अब सेशन में ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल जवाब हो रहे हैं। इसी बीच उन दरिंदे आतंकवादियों को सेना द्वारा मुठभेड़ में मारे जाने की बात कही गई। यहां टाइमिंग का सवाल जरूर उठता है। विपक्ष के प्रधान की पुलवामा में उपयुक्त आरडीएक्स कहां से आया सत्ता के पास कोई उत्तर है ही नहीं। कांग्रेस फोबिया से पीड़ित बीजेपी सरकार ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया। मुंबई आतंकी हमले का आरोप लगाकर अपने आरोप ढकने और जायज़ ठहराने की नाकाम कोशिश की। जिस पर प्रियंका गांधी ने आड़े हाथों लेते हुए जवाब दिया। मुंबई हमले के सारे आतंकियों को भून दिया गया। एक जीवित आतंकी कसाब को पकड़कर फांसी दी गई। जिसे दुनिया ने देखा और भारत के साथ पूरी दुनिया खड़ी दिखाई दी। आतंकवाद की सर्वत्र आलोचना की गई।

    इस्तीफे देने का दायित्व

    यही नहीं कांग्रेस में दायित्वबोध जवाबदेही होने के कारण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और गृहमंत्री ने खुद को दोषी समझकर इस्तीफा दे दिया। लेकिन यह भूल गई प्रियंका कि बीजेपी में दायित्व बोध जवाबदेही और इस्तीफा देने की समझ है ही नही। अगर  नैतिकता होती तो मणिपुर मामले में इस्तीफा दिया गया होता। उरी, पठानकोट और पुलवामा की असफलता पर इस्तीफे की झड़ी लग गई होती। प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन से इस्तीफा मांगने वाले क्यों नहीं अपने गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री से इस्तीफा देने की मांग करते?

    सरकार ने दिया सेना को धोखा

    इस्तीफा तो विदेश मंत्री को भी देना चाहिए था कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के पूर्व पाकिस्तान को सूचना दे दी, जिससे हमारे विमान मार गिराए गए। पीएम मोदी से इस गलत बयानी और प्रचार पर इस्तीफा मांगते कि उन्होंने दावा किया था सेना को खुली छूट दी है समय और स्थान सेना तय करे जबकि फौजी अधिकारियों ने बार बार मोदी के दावे की पोल खोली है। यही नहीं एयर मार्शल भी कह चुके हैं कि “जब समय पर सप्लाई नहीं कर सकते तो वादा क्यों करते हो?”

    कांग्रेस और मोदी में अंतर?

    आज तक सत्ता का कोई भी उन मारे गए पर्यटकों के घर जाने की जरूरत नहीं समझी जब कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जाकर उनके जख्मों पर मरहम लगा चुके हैं। राहुल गांधी की राजनीति सर्व ग्राही है। इसीलिए वे मणिपुर जाकर पीड़ितों के ज़ख्म सहला चुके हैं उनके विपरीत पीएम मोदी शहीदों के नाम पर वोट ही नहीं मांगे बल्कि कानून नियम के विरुद्ध सेना की वर्दी पहनकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय लेते हुए अपनी फोटो डालकर पोस्टर चिपकवा चुके हैं। पाकिस्तान के दो टुकड़े करने और 95 हजार सैनिकों के आत्मसमर्पण की सफलता का श्रेय लेने की कोशिश इंदिरा गांधी ने कभी भी नहीं की।

    टैक्स का बोझ सुविधा के नाम पर भ्रष्टाचार

    दरअसल हिंदू-मुस्लिम कर चुनाव आयोग द्वारा छल कपट और गलत काम कराकर चुनाव जीतना ही मोदी का एकमात्र लक्ष्य है। फर्जी वोटर बढ़वाकर हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली चुनाव जीतने के बाद बिहार में वोटरों को बाहर करने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा है। मोदी सरकार अपने 11 साल के शासन में किए गए कार्य पर वोट मांगने की हिम्मत कर ही नहीं सकते। क्योंकि किसान, मजदूर, युवाओं, छात्रों, गृहिणियों के जीवन को दूभर बना दिया है। टैक्स का इतना भार दुनिया के किसी भी देश में नहीं है। सुविधा के नाम पर सर्वत्र भ्रष्टाचार ही हुआ है।

    प्रशासन का गलत इस्तेमाल

    सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे ताकि गरीबों के बच्चे पढ़ न सकें। परीक्षा में अनियमितता के विरोध में छात्र हितों के खातिर जब शिक्षक दिल्ली में रैली कर रहे थे तब पुलिस द्वारा शिक्षकों को घसीट कर बस में जबरन बिठाकर दूर ले जाकर छोड़ा गया। इस कार्य में दिल्ली पुलिस सिद्धहस्त है, जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी से न्याय मांगने महिला पहलवान जब दिल्ली के जंतर मंतर पर रैली निकाले हुए धरने पर बैठी थी तब भी अमित शाह के आदेश पर उन्हें घसीटा और बसों में जबरन लादकर दूर ले जाकर छोड़ा गया था।

    विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने दावा?

    दिल्ली पुलिस वही है जो हाईकोर्ट के जस्टिस वर्मा के घर आग लगने से जली झुलसी नोटो की गाड़ियों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं कर सकी। जांच करना तो बड़ी दूर की बात, जिस राष्ट्र में शिक्षकों को अपमानित किया जाए। उन्हें घसीटकर बसों में ठूंसा जाए। प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर चालीस पचास लाख रुपयों में बेचा जाए। सड़कें पहली ही बरसात में बहने लगें। पुल बनते समय या उदघाटन के पहले ही जल समाधि लेने लगें। ये सारे करतूतें भ्रष्टाचार सामने दिखता ही नहीं बल्कि चीख-चीख कर बोलता भी है। उस देश को वहां की सरकार जो विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने का दावा करे, जहां की अस्सी करोड़ जनता को गरीबी रेखा से नीचे रखने का षडयंत्र रचा जाए, क्या कहा जा सकता है?

    विदेशनीति पर सवाल?

    ऐसी विदेशनीति को क्या कहा जाए कि अरबों रुपए जनता के पैसे फूंककर विश्व की यात्रा की जाए। लेकिन पाकिस्तान युद्ध के समय दुनिया का एक भी देश खुलकर भारत के साथ नहीं आए। अमेरिका का राष्ट्रपति धमकी देता रहे। राष्ट्र को अपमानित करता रहे लेकिन सत्ता में हिम्मत नहीं जो कह सके ट्रंप झूठ बोल रहा है। उसी ट्रंप ने रूस से तेल खरीदना बंद करा दे जबकि हमारा पड़ोसी चीन अमेरिका के आंखों में आँखें डालकर जवाब देता हो। सबसे विश्वसनीय देश रूस को भी दूर कर दे ऐसी विदेशनीति जो अमेरिका की गोद में बैठी हो क्या कहा जाएगा?

    दुनिया की निगाहों में भारत?

    भारत ने डेलिगेशन भेजे बताने के लिए कि पाकिस्तान ने पहलगाम में आतंकी हमला करके 27 बेकसूरों को गोली मारकर हत्या कर दी, जिसके लिए जीरो टॉलरेंस अपनाकर हमने पाकिस्तानी आतंकवादियों के अड्डों पर सीमित हमले कर सौ आतंकियों को मार गिराया। लेकिन कोई राष्ट्र यकीन नहीं कर रहा। क्योंकि हमारे पास कोई सबूत नहीं जैसा कि मणिशंकर ने कहा है जिसका अर्थ दुनिया समझती है भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत नहीं दे पा रहा। मुंबई हमले में कसाब को जिंदा सबूत दिखाया गया था। यानी पाकिस्तानी आतंकवाद की गुहार कोई सुनने के लिए तैयार नहीं उलटे ट्रंप हम पर 25% टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 100% पेनल्टी लगाने की घोषणा कर दी। संसद में भले दावा किया गया हो कि पाकिस्तानी आतंकियों को सेना ने मार गिराया है। दुनिया की निगाहों में भारत झूठ बोल रहा।

  • Terrorist Encounter: इंडियन आर्मी को देखते ही आतंकियों ने चलाई गोली

    Terrorist Encounter: इंडियन आर्मी को देखते ही आतंकियों ने चलाई गोली

    जम्मू-कश्मीर के वन क्षेत्र में सुरक्षा बलों के जवानों और आतंकियों के बीच मुठभेड़। पूरे इलाके को घेरा। मौके पर अतिरिक्त जवानों को भेजा गया है। इंडियन आर्मी ने दी जानकारी

    नेशनल डेस्क
    Encounter in Jammu and Kashmir:
    जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में रविवार को सुरक्षा बलों के जवानों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई है। बताया गया, कि घटना खानकू वन क्षेत्र की है। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, भारतीय सेना को गुप्त सूचना मिली थी कि दच्छन और नागसेनी क्षेत्रों के बीच आतंकवादियों की मौजूदगी है। इसके बाद इंडियन आर्मी और पुलिस सहित सुरक्षा बलों की टीम ने घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इस बीच आतंकियों के साथ गोलिबारी शुरू हो गई।

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    बताया गया, कि सेना के जवानों को करीब आता हुआ देख आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। जवानों ने भी गोली चलाकर जवाब दिया। दोनों ओर से कुछ देर तक गोलीबारी चली। रविवार शाम तक किसी के मरने की खबर नहीं है। सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर रखा है। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में अतिरिक्त बल भेज दिया गया है। आतंकवादियों की तलाश के लिए तलाशी अभियान जारी है।

  • Mumbai: पाकिस्तानी जासूस के नाम पर 22.4 लाख रुपये की ठगी

    Mumbai: पाकिस्तानी जासूस के नाम पर 22.4 लाख रुपये की ठगी

    साइबर जालसाजों ने एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस अधिकारियों के रूप में खुद को पेश करते हुए मुंबई की एक 64 वर्षीय महिला पर “पाकिस्तानी जासूस” होने का झूठा आरोप लगाकर 22.4 लाख रुपये की उगाही की है। इस सिलसिले में मुंबई पुलिस की सायबर सेल ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दिया है।

    मुंबई: साइबर जालसाजों ने एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस अधिकारियों के रूप में खुद को पेश करते हुए दक्षिण मुंबई की एक 64 वर्षीय महिला पर “पाकिस्तानी जासूस” होने का झूठा आरोप लगाकर 22.4 लाख रुपये की उगाही की है। जालसाजों ने वरिष्ठ नागरिक को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। इसके लिए अपराधियों ने विडियो कॉल का भी इस्तेमाल किया और फर्जी दस्तावेजों की फोटो कॉपी दिखाई।

    कैसे किया मजबूर?

    जब महिला ने वीडियो कॉल मे सायबर जालसाजों को सरकारी वर्दी पहने हुए देखा तो वह घबरा गई और पहले तो वो उन्हें विश्वास दिलाने की कोशिश करती रही कि शायद उनसे कोई चूक हुई है। लेकिन जालसाज उनके कनेक्शन पाकिस्तान से बताने के नकली प्रमाणित दस्तावेज दिखाकर धमकाने लगे और सीधे-सीधे केस से बचने के लिए उन्हें 22.4 लाख रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया।

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    फर्जी जासूसी घोटाला

    आखिरकार घबराहट के मारे पीड़ित महिला ने उनके कहे अनुसार पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर किए और राहत की सांस ली। घटना के बारे में पता चलने पर, दक्षिण साइबर पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज किया और मामले की जांच शुरू कर दी। अधिकारी इस व्यापक फर्जी जासूसी घोटाले में शामिल जालसाजों का पता लगाने के लिए काम कर रहे हैं।

  • क्या दुनिया में भारत का डंका बजा या स्वयं अकेला पड़ गया?

    क्या दुनिया में भारत का डंका बजा या स्वयं अकेला पड़ गया?

    डिजिटल डेस्क
    बीजेपी सरकार
    ढोल बजाकर खुशी का इजहार करने और गर्व में भरती जा रही। कहा जा रहा की जापान को छोड़कर भारत को विश्वगुरू ने विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था बनाते हुए जापान को पीछे छोड़ दिया है। यह दावा सरासर गलत और भ्रामक है। भारत अभी चौथी अर्थव्यवस्था बना नहीं हैं बनने की ओर अग्रसर है। दरअसल एमएफए की तरफ से भारत और जापानी अर्थ व्यवस्था पर अंदाजा लगाया था, कि भारत जापान को 0.01 अंक आगे बढ़कर विश्व की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।

    इसी बात को नीति आयोग के अधिकारी के सीईओ ले उड़े और भारत द्वारा जापानी अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ते हुए चौथी अर्थव्यवस्था बन गया है। अब नीति आयोग जब कह रहा हो तो बीजेपी और मोदी सरकार ने भी लपक लिया और घोषणा कर डाली लेकिन नीति आयोग के ही बड़े अर्थशास्त्री ने खुलासा करते हुए कहा है, कि “भारत अभी विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था नहीं बना है। हां बनने की राह पर अग्रसर जरूर है।” उन्होंने कहा, “चौथी अर्थव्यवस्था बनने के लिए चौथी तिमाही तक भारत को अपनी जीडीपी मेंटेन रखनी होगी। चौथी तिमाही का परिणाम निश्चित करेगा कि भारत विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था बन गया है या नहीं? चौथी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है न कि बन गया है।”

    नीति आयोग के सदस्य अर्थशास्त्री का कथन बीजेपी सरकार को झकझोर कर रख दिया होगा। नीति आयोग का सीईओ चौथी अर्थब्यव्यवस्था बन चुका है भारत का सच नीति आयोग के ही सदस्य ने खोलकर बता दिया है। जिससे साफ है कि चौथी अर्थव्यवस्था बना नहीं है। हां चौथी तिमाही के अंत में भी हमें अपनी जीडीपी उसी स्तर या उससे ऊंचे स्तर पर बनाए रखना होगा। उन्होंने निष्कर्ष में कहा बने नहीं हैं बनने की राह पर अग्रसर हैं। अगर चौथी तिमाही के अंत तक हम जीडीपी बढ़ाए रख सके तो दिसंबर 2025 तक बन सकते हैं।
    अर्थव्यवस्था तब बढ़ती है जब वैज्ञानिक टेक्नोलॉजी बढ़ती जाए। विदेशी निवेश अधिक बढ़ाना पड़ेगा। एप्पल मोबाइल भले ही चीन से भारत में बनने लगे, लेकिन हमें यह नहीं भूलना होगा कि एप्पल मोबाइल मेड इन इंडिया के नाम पर केवल असेंबलिंग की जाती है। उसके पार्ट्स चिप आदि चीन से ही आते हैं। चीन हार्डवेयर में अमेरिका से कम नहीं है। अमेरिकी उद्योगों के लिए चीन में बनी चिप्स जैसे पार्ट्स चीन से ही आते हैं।

    भले बीजेपी लग रही हो कि दुनिया में भारत का डंका बज रहा जबकि सच तो यह है कि भारत का दुनिया में डंका नहीं घंटा बज रहा है। भारत जब पाकिस्तान पर बढ़त हासिल किए हुए था तब एकाएक क्या हुआ कि भारत को सीजफायर का ऐलान करना पड़ गया। भारत को जीती हुई बाज़ी हारने को मजबूर क्यों होना पड़ा। भले आर्मी के जनरल कहा कि कितने विमान गिरे यह महत्वपूर्ण नहीं है। क्यों गिरे यह मुद्दा है और इससे हमने क्या सीखा? तीन बाते ऐसी हुई हैं जिससे भारत के डंका बजने की बात बेनकाब हो जाती है।

    अमेरिकी वाणिज्य मंत्री का कहना है कि भारत ने हमारे साथ गलत किया, उसे भुगतना होगा। दूसरा है जिस पाकिस्तान को आतंकवादियों का संरक्षक बताने के लिए दुनिया भर से गुहार लगाने के लिए सांसदों की टीमें भेजी गई ताकि पाकिस्तान को ब्लैक लिस्टेड कराया जा सके। वह तो हुआ ही नहीं क्योंकि हमारे डेलिगेशनो का दुनिया पर कोई भी असर नहीं हुआ है। संयुक्त राष्ट्र संघ के दो मंचों का पाकिस्तान को एक में अध्यक्ष और दूसरे में उपाध्यक्ष बना दिया गया। आप पाकिस्तान उन मंचों से बताएगा कि कौन आतंकवादी देश है। कौन आतंकवादी गीत है जिसे कौन सा देश समर्थन कर रहा है। दो अत्यंत महत्वपूर्ण पद पाकर अब पाकिस्तान के लिए भारत के खिलाफ यह कहने का अधिकार मिल गया है कि उसके देश में बलूच आतंकी गुट है जिसे भारत का समर्थन हासिल है। भारत ही बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करने के लिए हथियार और पैसा दे रहा है। दूसरी बात पाकिस्तान को अफगानिस्तानी फूटी आंखों नहीं सुहाते, जिसने पाकिस्तान के भारत युद्ध के समय भारत का समर्थन किया था।

    जिन तालिबानी लड़ाकों के कारण अमेरिका जैसा शक्तिशाली राष्ट्र अपने युद्धक विमान टैक्स जैसे सारे विपाश छोड़कर भागना पड़ा है, उन तालिबानियों को पाकिस्तान के लिए खतरा बताकर उन्हें आतंकवादी घोषित कर सकेगा। यही नहीं अब पाकिस्तान भारत को ही आतंकवाद फैलाने का आरोपी बताने की हैसियत में आ चुका है। ट्रंप का यह पसितारा उसके माय बेस्ट फ्रेंड मोदी और आई मिस यू मोदी के खिलाफ गुस्से का इजहार कर भारत को निचा दिखाने वाला कदम है। कल को पाकिस्तान खाड़ी देशों को भी विश्वास दिला सकता है, कि भारत में रहने वाले मुसलमानों को भारत हिंदुत्व वाली सरकार प्रताड़ित कर रही है। मस्जिदों मुसलमानों की बस्तियों पर बुलडोजर चलाकर अन्याय किया जा रहा है। इन बातों पर छपी खबरें प्रमाण बन जाएंगी और इस्लामिक राष्ट्र भारत के खिलाफ जिहाद के तौर पर खड़े हो सकते हैं।

    अमेरिका ने पहले ही एक अरब डॉलर का कर्ज पाकिस्तान को दिलाया था, जिससे पाकिस्तान अमेरिका और अब एशियाई बैंक से भी पाकिस्तान को कर्ज दिलवा चुका है। जिससे पाकिस्तान हथियार खरीदकर भारत के साथ युद्ध कर सके। भारत अब दुनिया में अकेला पड़ गया है। चीन तो भारत के विरोध में है ही। रूस जो भारत का सदाबहार मित्र रहा है वह भी पाकिस्तान स्थित अपने साझेदार पाकिस्तान के साथ बंद स्टील फैक्ट्री फिर से चालू कर पाकिस्तानी आय में वृद्धि करने में लगा हुआ है। भारत सरकार ने भारतीय वायु सेना को स्वदेशी जहाज देने का वादा किया था, जिसे समय से पूरा किया ही नहीं जा रहा। अमेरिका भारत को ब्लैकमेल लगातार करने और भारत की बेइज्जती करने में लगा है।

    यह वही ट्रंप है जिसके लिए वैश्विक कानून तोड़कर पीएम मोदी ने अब की बार ट्रंप सरकार का नारा लगाया था। दोबारा चुनाव में ट्रंप हार गए तो जब मोदी अमेरिकी यात्रा पर जाने वाले थे तब ट्रंप ने कहा था मेरा बेस्ट फ्रेंड मोदी मुझसे मिलने आ रहा है। लेकिन मोदी अमेरिका जाने के बाद राष्ट्रपति वाईडन से तो भेंट किया लेकिन ट्रंप से मिलने की फॉर्मेलिटी भी नहीं दिखाई। जिसे ट्रंप ने अपना अपमान समझा जो सही भी है। एक कहे मेरा बेस्ट फ्रेंड मुझसे मिलने आ रहा है दूसरा अनदेखा कर दे। औपचारिकता भी नहीं निभाए तो फ्रेंड कैसा? इसीलिए जब राष्ट्रपति पद की शपथ लेनी थी तब ट्रंप ने मोदी को बुलाया तक नहीं और जब पीएम गए उससे मिले तब ट्रंप ने कहा था आई मिस यू फ्रेंड। ये चार शब्द बड़े अर्थपूर्ण थे। व्यंग्य और दुखी हो कर कहा था ट्रंप ने। इशारा था लेकिन तब तक बहुत अधिक दरार पड़ चुकी थी। जिस कारण ट्रंप भारत को बेइज्जत करने का एक भी मौका छोड़ नहीं रहा। शायद जब तक मोदी और ट्रंप जीवित रहेंगे ट्रंप अपमान नहीं भूलेगा और गिन गिन कर बदला लेता रहेगा। पाकिस्तान को भारत पर तरजीह देकर ट्रंप ने भारत को अकेला कर दिया है।

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  • क्यों वापस लिया गया हर घर सिंदूरबांटने का फैसला?

    क्यों वापस लिया गया हर घर सिंदूरबांटने का फैसला?

    • हर घर सिंदूर योजना
    • सिंदूर प्रतीक है पति के जीवित होने का
    • एजेंडा बना लिया गया है गोदी मीडिया
    • पिछले 60 सालों से पति का इंतजार
    • सेना का अपमान, हिंदू संस्कृति से खिलवाड़
    • शहीदों की पत्नियों को क्या सिंदूर दिया जाएगा?
    • लोगों का सिंदूर छीनने में भाजपा सरकार का बहुत बड़ा योगदान
    • बीजेपी दैत्य है या दानव?
    • भारतीय सेना की गौरव गाथा है ऑपरेशन सिंदूर
    • भाजपा की निंदनीय विचार

    मुंबई: पहलगाम में आतंकवादियों ने धर्म पूछकर हिंदुओं को टार्गेट किलिंग किया था। दरअसल पाकिस्तान चाहता है भारत में हिंदू-मुस्लिम के बीच दंगे हों तभी तो भारत कमजोर होगा। दुर्भाग्यवश बीजेपी पाकिस्तानी एजेंडे पर ही काम करते हुए जहरीले बोल बोले जा रही है। ऑपरेशन सिंदूर जो हमारी सेना ने पीओके स्थित आतंकवादियों के अड्डे नष्ट करने के साथ ही सौ से अधिक आतंकवादियों को भी मार गिराया। इसमें मजेदार बात यह है, कि नेतृत्व कर्नल सोफिया कुरैशी और व्योमिका सिंह को दिया गया। पाकिस्तान के महत्वपूर्ण हवाईअड्डे भी तहस नहस कर दिए। तुर्की के ड्रोन और चीन के हथियारों का भारतीय फौज ने धुआं निकाल दिया। लेकिन भारतीय जनता पार्टी, सेना को अपमानित करते हुए मोदी को ऑपरेशन सिंदूर का नायक बताते हुए पोस्टर लगाए, साथ ही हर घर शिक्षा रोजगार नहीं पहुंचाने वाले हर घर सिंदूर भेजकर हिंदुओं की भावनाओं का मजाक उड़ाने की सोच ली।

    पिछले 60 सालों से पति का इंतजार

    यह नहीं पता उन्हें कि भारत की हिंदू पत्नियां पति के सिंदूर से अपनी मांग संवारती हैं।बीजेपी के सिंदूर पहुंचाने के मामले में देश में उबाल आ गया और निश्चय किया गया जो भी लुच्चा और लफंगा सिंदूर लेकर आएगा। उसकी जमकर कुटाई होगी। सोशल मीडिया पर देश में नारी के सुहाग चिन्ह को लेकर बीजेपी के खिलाफ भावना उजागर हुई। जिस सिंदूर बांटो अभियान के द्वारा बीजेपी अपना वोट बैंक बढ़ाना चाहती थी, उसी को लेकर धुर विरोध शुरू हो गया। इसमें यह भी लिखा गया, “मोदीजी पहले सिंदूर अपनी पत्नी को भेजे जो पिछले साठ सालों से इंतजार कर रही हैं।”

    हर घर सिंदूर योजना

    वोट बैंक के लिए भाजपा जो न करे, थोड़ा ही है। पहलगाम हो या पुलवामा दोनों ही जगह सुरक्षा देने में बीजेपी सरकार चूक गई थी। नतीजन पहलगाम में 26 महिलाओं के सुहाग उजड़ गए और पुलवामा में चालीस सैनिकों की पत्नियों की मांग के सिंदूर पुछ गए। पाकिस्तान के साथ युद्ध हो या आतंकियों के साथ मुठभेड़ यहां हजारों जवान शहीद हो गए। उनकी पत्नियां विधवा और बच्चे अनाथ हो गए और अब बीजेपी सभी हिंदू घरों में सिंदूर भेजने की योजना पर काम कर रही है।

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    शहीदों की पत्नियों को क्या सिंदूर दिया जाएगा?

    आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह इस पर सवाल उठाते हैं। भारतीय हिंदू पत्नियां अपने पति के नाम का ही सिंदूर अपनी मांग में डालती हैं। किसी पराई औरत का सिंदूर अपनी मांग में भरना ही नहीं चाहेगी। न भरती ही भी हैं। संजय सिंह सवाल करते हैं कि क्या पहलगाम में विधवा हुई पत्नियों को सिंदूर भेज पाएंगे? क्या पुलवामा और उरी में शहीद फौजी जवानों की पत्नियों को सिंदूर दिया जा सकता है? क्या भारत पाकिस्तान युद्ध में शहीद 21 जवानों की विधवाओं को सिंदूर भेजा जा सकेगा? संजय सिंह के सवाल भारतीय हिंदू विचारधारा के सवाल हैं। उनका विरोध कर पाना किसी के बूते का नहीं है।

    एजेंडा बना लिया गया है गोदी मीडिया

    हो सकता है, गोदी मीडिया के निर्लज्ज एंकर्स संजय सिंह को हिंदू विरोधी घोषित कर, देशद्रोही भी कह दे। उनको लानत मलामत भेज सकते हैं, क्योंकि उनके मालिक का एजेंडा है बीजेपी सत्ता आरएसएस, बजरंग दल जैसे कथित हिंदू संगठनों से अगर कोई निष्पक्ष पत्रकार सवाल पूछता है तो उसे एंटी हिंदू और देश विरोधी घोषित करने, मुगलों की पैदाइश होने, डी एन ए टेस्ट कराने की बात, दो दो रुपाल्ली के ट्रोलर ट्रोल करने लगते हैं और मोदी विरोधियों को देशद्रोही होने का सार्टिफिकेट देने लगते हैं।

    भारतीय सेना की गौरव गाथा है ऑपरेशन सिंदूर

    सोशल मीडिया में अपने सरकार से कोई सवाल पूछ लिया तो अंधभक्त हो या बीजेपी नेता तुरंत एक्शन मोड में आ जाते हैं और गालियों की बौछार शुरू कर देते हैं। मुगलों की, हलाल की औलाद कहने में उन्हें शर्म नहीं आती। बीजेपी के सवाल को घुमाकर आपको देशद्रोही हिंदू विरोधी बताने लगते हैं। ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की गौरव गाथा है। लेकिन प्रचार तंत्र उसे महत्त्व नहीं देता। सारी उपलब्धियां बीजेपी और मोदी की बताने लगता है।

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    सिंदूर प्रतीक है पति के जीवित होने का

    मुस्लिम स्त्रियां सिंदूर से अपनी मांग नहीं भरती। तमाम ऐसी हिंदू महिलाएं भी मांग में सिंदूर नहीं डालतीं। अन्य हिंदू स्त्रियां अपनी मांग में केवल अपने पति के नाम का सिंदूर डालती हैं। किसी पराए मर्द के नाम का नहीं। सवाल यह भी है, कि देश में करोड़ो हिंदू बेवाएं भी हैं। जिनके पति की मृत्यु के बाद से सिंदूर नहीं डालती। कुल मिलाकर चालीस करोड़ हिंदू पत्नियां अपनी मांग में सिंदूर भरती हैं। सिंदूर प्रतीक है पति के जीवित रहने का। जिनके पति जीवित नहीं वे सिंदूर क्यों पहनेंगी?

    सेना का अपमान, हिंदू संस्कृति से खिलवाड़

    हर हिंदू परिवार में सिंदूर पहुंचाने की बात उठ रही है। भाजपा ने फौजी उपलब्धियों को अपनी उपलब्धि बताते हुए मोदी की फोटो चस्पा किए हैं जिसमें सेना का चेहरा नहीं है। बीजेपी ने इस पोस्टर के द्वारा सेना को अपमानित किया है और अब हर हिंदू घरों में सिंदूर भेजकर बीजेपी हिंदू संस्कृति से खिलवाड़ करे हुए अपना वोट बैंक बनाना चाहती है।

    लोगों का सिंदूर छीनने में भाजपा सरकार का बहुत बड़ा योगदान..

    संजय सिंह के सवाल सेना का सम्मान करते हैं। उनका कहना कि बीजेपी का कोई लुच्चा लफंगा हिंदू औरतों को ले जाकर सिंदूर देगा?आखिर सिंदूर को लेकर बीजेपी अपना प्रचार क्यों कर रही है। बीजेपी से सवाल है, कि “तुम सिंदूर क्यों भेज रहे हो?” उन्होंने यह भी कहा, कि “अपनी मां भाभी और पत्नी को दूसरे के द्वारा अपने नाम का सिंदूर पहनाकर दिखा दे।”
    दरअसल लोगों का सिंदूर छीनने में भाजपा सरकार का बहुत बड़ा योगदान है। पहलगाम हमले के समय सुरक्षा व्यवस्था क्यों हटा ली गई थी?

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    बीजेपी दैत्य है या दानव?

    आपकी गलती से पुलवामा हुआ। आपने एयरलिफ्ट नहीं दिया। पहलगाम पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था में आप चुके। पांच दर्जन से अधिक हिंदू पत्नियां विधवा बनीं आप की गलतियों से। लेकिन बीजेपी को अपनी गलती स्वीकार ही नहीं होती। दूसरे के श्रम और शौर्य को अपना बताने की आदत हो गई है। बिना श्रम किए भोजन करने वाले दैत्य होते हैं। दूसरों का हक मारने वाले दानव होते हैं। सच कहा जाए तो हिंदू विधवाओं और सेना का अपमान करने वाली बीजेपी को हिंदुत्ववादी और सनातनधर्मी बोलने का अधिकार ही नहीं है।सनातनधर्म स्व नही सर्व में विश्वास रखता है। सनातन मैं नहीं हम कहना सिखाता है। आप तो सेना के पुरुषार्थ को ही छीनकर अपना पुरुषार्थ बताकर वोट की राजनीति कर रहे हैं।

    भाजपा की निंदनीय विचार

    हिंदू विधवाओं को क्या सिंदूर देंगे जिनके पति पुलवामा, पहलगाम और उरी में शहीद हुए? किसी लुच्चे और लफंगे के हाथों का सिंदूर एक भी हिंदू पत्नी स्वीकार नहीं करेगी। किस हैसियत से सिंदूर देने का कुत्सित विचार आया? हर घर सिंदूर पहुंचाने का विचार ही निंदनीय है। ऐसी निकृष्ट सोच वाली पार्टी जिसके मंत्री बहादुर देश की बिटियों को आतंकी की बहन कहता है। सेना के शौर्य का अपमान केवल निहित स्वार्थ वोट के लिए केवल और केवल बीजेपी ही कर और सोच सकती है। सच तो यही है जैसा राहुल गांधी ने संसद में कहा था बीजेपी का हिंदुत्व देश का हिंदुत्व नहीं है बिल्कुल सटीक बैठता है।

  • मोदी की पाक से दोस्ती कैसे हुई नाकाम?

    मोदी की पाक से दोस्ती कैसे हुई नाकाम?

    • पाकिस्तान में मोदी बने बिन बुलाये मेहमान।
    • सर्प का स्वभाव है डसना, चाहे जितना दूध पिलाया जाए।
    • क्या चीन के रहते भारत पाकिस्तान का पानी रोक सकता है?
    • जब समय पर सप्लाई नहीं कर सकते तो टेंडर ही क्यों देते हैं?
    • अपनी नाकामी छुपाने की हरचंद कोशिश, सेना इसरो का श्रेय खुद लेते रहते हैं।
    • भारत को क्यों सफाई पेश करनी पड़ी?
    • सरकार ने किया सेना का बार-बार अपमान
    • सैन्य अधिकारियों ने मोदी सरकार की कर दी किरकिरी
    • देश की जनता को है सच जानने का अधिकार।
    • सरकार ने गलती किया जो सोर्स कोड नहीं मांगा।
    • मोदी सरकार की विदेश नीति पर उठे सवाल?

    मुंबई: जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी अपने पद और गोपनीयता की शपथ ले रहे थे तब भारत के जन्मजात शत्रु पाकिस्तान से दोस्ती करने की कोशिश करते हुए हमारे देश के प्रधानमंत्री ने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया था।जबकि इसके पूर्व हमारे किसी भी प्रधानमंत्री ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को नहीं बुलाया था।मोदी ने सहृदयता दिखाते हुए आमंत्रित किया।प्रयास अच्छा जरूर रहा।

    बिन बुलाए मेहमान

    फिर भी मोदी ने विदेश यात्रा से लौटते समय बिन बुलाए मेहमान की तरह पाकिस्तान चले गए। लेकिन कहावत है कुत्ते की पूंछ कभी सीधी नहीं होती। उसी तर्ज पर पाकिस्तान पहले भी आतंकी हमले भारत में किए थे और गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी ने पाकिस्तान को सबक सिखाने की बातें कहते रहे थे। फिर पाकिस्तान से दोस्ती का प्रयास ही बेमानी थी। हमारे प्रधानमंत्री कांग्रेस शासन की बात छोड़ भी देते और अपनी पार्टी के अटल बिहारी वाजपेयी के समय संसद पर आतंकी हमला याद रखते तो भूलकर भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से दोस्ती की पेग नहीं बढ़ाते।

    अब मोदी के ही शासनकाल में पठानकोट, उरी, पुलवामा और अभी हालही के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकवादियों का स्याह चेहरा सामने आया, जिसकों देख उनकी आँखें खुल गईं होंगी, कि सर्प का स्वभाव है डसना, चाहे जितना दूध पिलाया जाए।

    क्या चीन के रहते भारत पाकिस्तान का पानी रोक सकता है?

    पाकिस्तान के आतंकवादियों को अमेरिका पालता है। अमेरिका बनिया देश है। वह दूसरे देशों को लड़ाकर अपने हथियार बेचता है। पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि तोड़ने के कारण ही अब चीन ब्रह्मपुत्र के पानी को रोकने जा रहा है। वैसे भी सिंधु और उसकी सहायक नदियों में पानी तिब्बत से ही आता है जिसपर चीन का कब्जा है। वैसे भी भारत पाकिस्तान का पानी तभी रोक पाएगा जब बहुत बड़े बांध बनायेगा। लेकिन अड़चन यही होगी कि तब तक चीन पांच नदियों का पानी रोक चुका होगा। चीन की भौगोलिक स्थिति ही ऐसी है, कि वह जब चाहे भारत की नदियों को सुखा कर सकता है। सिंधु नदी संधि तोड़ना प्रतीकात्मक हो सकता है। मनोवैज्ञानिक दबाव संभव है। लेकिन जब तक चीन पाकिस्तान के साथ खड़ा है भारत उसका पानी रोक ही नहीं पाएगा।

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    जब समय पर सप्लाई नहीं कर सकते तो टेंडर ही क्यों देते हैं?

    जब दो देश युद्ध लड़ते हैं तो नुकसान दोनों का होता है। ब्लूम वर्ग को इंटरव्यू में भारतीय चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) अनिल चौहान ने कहा, पाकिस्तान के साथ संघर्ष में भारतीय जेट गिरने की बात महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि विमान गिरे ही क्यों? भारत ने अपनी गलतियों को पहचाना, उन्हें जल्दी सुधारा और फिर दो दिन के भीतर दुश्मन के ठिकानों को लंबी दूरी से निशाना बनाकर एक बार फिर प्रभावी तरीके से जवाब दिया। लेकिन एयर मार्शल ने सरकार पर तीखे प्रहार करते हुए कहा, जब समय पर सप्लाई नहीं कर सकते तो टेंडर ही क्यों देते हैं?उन्होंने पूछा जब समय से एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ और पूरा ही नही कर सकते तो वादा ही क्यों करते हो? दरअसल समय पर युद्धक विमान नहीं मिलने की ओर इशारा कर रहे थे जिसमें सरकार फेल हुई।

    अपनी नाकामी छुपाने की हरचंद कोशिश, सेना इसरो का श्रेय खुद लेते रहते हैं।

    मोदीजी की एक विशेषता है, वे सेना इसरो का श्रेय खुद लेते रहते हैं लेकिन अपनी नाकामी छुपाने की हरचंद कोशिश करते रहते हैं।ऑपरेशन सिंदूर हमारी जांबाज़ सेना ने चलाया। पाकिस्तानी आतंकवादियों को और उनके ठिकाने नष्ट करने के साथ पाकिस्तान के महत्वपूर्ण हवाईअड्डों को क्षति पहुंचाई ताकि उसके लड़ाकू विमान उड़ ही नहीं सकें। यहां तक कि पाकिस्तानी पायलट अपने विमानों को बचाने के लिए दौड़े परन्तु भारतीय सेना ने उनके हैंगर पर हमला करके विमानों को ही नष्ट कर दिया। सेना कहती है आज का युद्ध जमीन, आसमान, पानी और अंतरिक्ष में लड़ा जाता है। यहां तक कि साइबर द्वारा प्रोपोगंडा फैलाकर लड़ा जाता है जैसा चीन ने पाकिस्तानी पक्ष में किया।

    भारत को क्यों सफाई पेश करनी पड़ी?

    पाकिस्तानी एंकर्स भारत की गोदी मीडिया के एंकरों से ज्यादे समझदार हैं जो भारत के जेट और राफेल गिराने के दावे कर रहे थे जिससे पाकिस्तानी सेना का हौसला बुलंद हो सके। भले भारतीय सेना की मार से पाकिस्तानी फ़ौजी भागते नजर आए। लेकिन गोदी मीडिया के अनुसार हमारे सैनिकों ने पाकिस्तान में घुसकर लाहौर, इस्लामाबाद और कराची तक जीत लेने का झूठ बोलकर भारत को हमलावर बताने में लगे थे। मजबूर होकर सरकार को सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल भेजकर दुनिया को बताना पड़ा कि हमलावर हम नहीं पाकिस्तान द्वारा पाले गए आतंकी हैं जिन्होंने बार बार कायराना हरकते करके निरीह भारतीयों को मारा है।

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    सरकार ने किया सेना का बार-बार अपमान

    सरकार फौज के ऑपरेशन सिंदूर को बीजेपी का बताने के लिए सेना का अपमान बार-बार किया और सैनिक वर्दी में मोदी की फोटो लगाकर पोस्टर टंगवाए। खुद मोदी भी सेना के शौर्य को अपना बताने में चुनाव प्रचार करते रहते हैं। अपना शौर्य बताने वाले बीजेपी के प्रधानमंत्री हमारे जेट जिसमे राफेल भी थे, इसे छुपाते क्यों हैं? सेना ने साफ साफ कहा संघर्ष में नुकसान होता है। कितने विमान गिरे यह मुद्दा नहीं है। क्यों गिरे यह प्रमुख मुद्दा है। एयर मार्शल ने तो बीजेपी सरकार के बड़बोले पन की पोल खोलकर रखते हुए कहा जब समय पर मुहैय्या ही नहीं कर सकते तो वादे ही क्यों करते हो?

    सैन्य अधिकारियों ने मोदी सरकार की कर दी किरकिरी

    विपक्ष विशेषकर राहुल गांधी और राष्ट्रभक्त जनता जब सवाल पूछती है तो बीजेपी की ट्रोल कंपनी देशद्रोही कहने लगते हैं। अमित मालवीय में तनिक भी नैतिकता बची हो तो एयर मार्शल और C D S की ओर उंगली उठाकर दिखाएं। दिन में ही तारे नजर आने लगे हैं। जो सच हमारे सेना के बड़े अधिकारी कह रहे हैं पीएम मोदी उन्हें छुपा क्यों रहे? विपक्ष विशेष संसद सत्र बुलाने की मांग कर रहा, तो भाग क्यों रहे? संसद का विशेष सत्र मत बुलाइए लेकिन विपक्ष को विश्वास में लेने के लिए सभी विपक्षी दलों के नेताओं को एक बड़े कमरे में जहां कैमरे लगे हों, बुलाकर विपक्षी नेताओं को तो जवाब दे ही सकते हैं। लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे। किरकिरी तो हमारे सैन्य अधिकारियों ने मोदी सरकार की कर दी है।

    देश की जनता को है सच जानने का अधिकार

    अगर बीजेपी सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने की हिम्मत करे तो सारा सच देश के सामने आ जायेगा। सच क्या है? यह जानने का अधिकार विपक्षी दलों को ही नहीं 145 करोड़ जनता को भी है। बीजेपी सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान के खिलाफ संपूर्ण देशवासी और पूरा विपक्ष सरकार और सेना के साथ खड़ा होकर देशभक्ति दिखा चुका है। अब बीजेपी को अपनी देशभक्ति दिखाने की जरूरत है। सच क्या है? क्या सचमुच राफेल मार गिराया गया, जिसे बीजेपी सरकार ने यूरोपीय संगठन के राष्ट्र फ्रांस से खरीदा था।

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    सरकार ने गलती किया जो सोर्स कोड नहीं मांगा।

    सरकार ने चूक किया जो सोर्स कोड नहीं मांगा। जबकि मनमोहन सिंह की सरकार ने बेहद कम मूल्य पर राफेल खरीदी की बात की थी, वह भी सोर्स कोड सहित। ताकि टेक्नोलॉजी भारत को मिले और उस पर भारत निर्मित मिसाइलें तैनात की जा सकें। लेकिन नाटो संगठन अमेरिका के पिट्ठू राष्ट्रों का संगठन है। मोदी के मित्र ट्रंप ने अपना बदसूरत चेहरा पाकिस्तान का सपोर्ट कर दिखा दिया।

    मोदी सरकार की विदेश नीति पर उठे सवाल?

    मोदी सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठने लगे हैं। आखिर सवा सौ बार विदेश यात्रा से मोदी ने कौन सी उपलब्धि हासिल की? क्योंकि एक भी देश खुलकर भारत के साथ नहीं आया। यहां तक कि सदाबहार दोस्त रूस भी क्यों खुलकर भारत के साथ नहीं आया? जो पाकिस्तान में स्टील प्लांट सहित कई प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहा है। बीजेपी सरकार ने अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध इतने कड़वे कर लिए हैं जिससे भारत के साथ कोई पड़ोसी देश तक नहीं आया।

  • महाराष्ट्र सरकार ने 8 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया, शारदा राउत एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स की विशेष आईजीपी नियुक्त

    महाराष्ट्र सरकार ने 8 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया, शारदा राउत एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स की विशेष आईजीपी नियुक्त

    महाराष्ट्र सरकार ने राज्य ने राज्य के 8 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का ताबड़तोड़ तबादला किया है। इसमें महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकारियों के फेरबदल किए गए हैं। जाने किसे कहां नियुक्त किया गया है।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई:
    महाराष्ट्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल में आठ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया है, जो राज्य की पुलिस और कानून प्रवर्तन मशीनरी को मजबूत करने के अपने निरंतर प्रयासों को रेखांकित करता है। राज्य के नेतृत्व में बदलाव के बाद नौकरशाही में निरंतर बदलाव के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।

    सबसे उल्लेखनीय नियुक्तियों में से एक 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी शारदा राउत की है, जिन्हें नवगठित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के लिए विशेष पुलिस महानिरीक्षक (IGP) नामित किया गया है। शारदा राउत पहले राज्य खुफिया विभाग (SID) में संयुक्त आयुक्त के रूप में कार्यरत थीं और हाल ही में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटी हैं। उनकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा मादक पदार्थों की तस्करी और मादक द्रव्यों के सेवन पर अंकुश लगाने पर गहन ध्यान केंद्रित करने का संकेत देती है।

    महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने फरवरी में एएनटीएफ को औपचारिक रूप से मंजूरी दी थी, जिसमें 346 नए पदों का सृजन किया गया था, जो राज्य भर में मादक पदार्थ विरोधी अभियान और प्रवर्तन को बढ़ाने की दिशा में एक प्रमुख नीतिगत कदम का संकेत है।

    एक अन्य महत्वपूर्ण नियुक्ति में, 2002 बैच के अधिकारी रवींद्र शिसवे, जो पहले रेलवे पुलिस, मुंबई के आयुक्त के रूप में कार्यरत थे, उन्हें शारदा राउत की जगह संयुक्त आयुक्त, एसआईडी के रूप में नियुक्त किया गया है।

    अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियां निम्नलिखित है:-

    • सुप्रिया पाटिल यादव (2004 बैच), जो हाल ही में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस आई हैं, उन्हें महाराष्ट्र पुलिस मुख्यालय में विशेष आईजीपी (स्थापना) नियुक्त किया गया है।
    • अमरावती शहर में पुलिस आयुक्त नवीनचंद्र रेड्डी को नागपुर में संयुक्त पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया है। उनके प्रतिस्थापन की प्रतीक्षा हो रही है।
    • नागपुर के संयुक्त पुलिस आयुक्त निसार तांबोली को राजीव जैन की जगह नागपुर में राज्य रिजर्व पुलिस बल (SRPF) का विशेष आईजीपी नियुक्त किया गया है। राजीव जैन अब तटीय सुरक्षा (समुद्री) में विशेष आईजीपी के रूप में काम करेंगे।
    • अभिषेक त्रिमुखे, अतिरिक्त सीपी (उत्तर क्षेत्र), मुंबई को राज्य पुलिस मुख्यालय में विशेष आईजीपी (प्रशासन) के रूप में स्थानांतरित किया गया है।
    • डॉ. आरती सिंह, 2006 बैच की आईपीएस अधिकारी और वर्तमान विशेष आईजीपी (प्रशासन), को उनके पद से मुक्त कर दिया गया है और वे अपने अगले कार्यभार की प्रतीक्षा कर रही हैं।