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  • Maharashtra: सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर लगी सख्ती

    Maharashtra: सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर लगी सख्ती

    महाराष्ट्र की सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर सख्त कानून पास कर दिया है। इसके तहत नियम का पालन नही किए जाने पर महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन और अपील) नियमों के तहत कार्रवाई के आदेश दिए हैं। Maharashtra: Strictness imposed on the use of social media for government employees

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई:
    देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने महाराष्ट्र के सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम तय किए हैं। सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। Maharashtra: Strictness imposed on the use of social media for government employees

    सोशल मीडिया पोस्ट पर लगी रोक

    महाराष्ट्र की महायुति सरकार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) शामिल हैं। सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के जानकारी दायक सोशल मीडिया पोस्ट कभी कभार लोगों में भ्रम या गलत संदेश भी फैला सकता है। इसकी जिम्मेदारी को लेकर सरकार अब सख्त हो गई है। हालांकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर रोक नही लगाया गया है। सिर्फ पोस्ट करते समय ध्यान देने के लिए कहा गया है।

    क्या करें क्या ना करें ?

    सामान्य प्रशासन विभाग ने सोमवार को एक सरकारी आदेश जारी कर यह नियम सार्वजनिक रुप से प्रसारित कर दिया है। इसमें बताया गया है कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट कर सकते हैं? और क्या नहीं? आदेश में यह भी कहा गया है कि जो भी इन नियमों का उल्लंघन करेगा, उस पर महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1979 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    सोशल मीडिया से होगी समस्या

    आदेश में जानकारी देते हुए, कहा गया है, कि “सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के आसान उपयोग से पलक झपकते ही दुनिया के किसी भी कोने में जानकारी पहुंचाई जा सकती है। इसकी अदभुत क्षमता और एक क्लिक में कई लोगों तक बात पहुंचा देने की सुविधा के साथ कुछ खतरे भी सामने आए हैं—जैसे गोपनीय जानकारी का लीक होना, झूठी या भ्रामक जानकारी फैलना और इसके साथ ही बड़ी दिक्कत वाली बात यह है कि एक बार पोस्ट की गई जानकारी को हटाने के लिए कई नियमों का पालन करना पडता है इसकी सीमाएं तय की गई है। सरकारी विभाग के लिए दिक्कत हो सकती है।”

    आदेश में आगे कहा गया, कि “यह भी देखा गया है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल सरकार की नीतियों, राजनीतिक घटनाओं या कुछ व्यक्तियों की आलोचना के लिए किया जा रहा है, जो सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन है।” Maharashtra: Strictness imposed on the use of social media for government employees

    नए नियमों की जानकारी

    सरकार द्वारा जारी नियमों के अनुसार, अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा गया है कि वे राज्य सरकार या देश से जुड़ी किसी भी नीति की आलोचना करने से बचें और सोशल मीडिया का उपयोग “सावधानी और जिम्मेदारी” के साथ करें। उन्हें कोई आपत्तिजनक या मानहानि करने वाली सामग्री पोस्ट नहीं करने को कहा गया है।

    खुद का प्रचार

    नियमों में यह भी कहा गया है कि अधिकारी यह ज़रूर बता सकते हैं, कि किसी योजना या प्रोजेक्ट की सफलता के लिए उन्होंने या उनके विभाग ने क्या प्रयास किए हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि वे खुद का प्रचार न करें। सरकार की किसी योजना या प्रोजेक्ट से जुड़ी पहले से स्वीकृत जानकारी केवल वही व्यक्ति साझा कर सकता है जिसे इसके लिए अधिकृत किया गया है। इसका मकसद आम जनता की भागीदारी को बढ़ाना है।

    सरकारी महकमों का इस्तेमाल

    नियमों में यह भी कहा गया है कि अधिकारी और कर्मचारी अपने निजी और आधिकारिक इस्तेमाल के लिए अलग-अलग सोशल मीडिया अकाउंट बना सकते हैं। इसके अलावा, जब किसी अधिकारी का ट्रांसफर हो जाए, तो उन्हें अपने आधिकारिक अकाउंट को तुरंत संबंधित विभाग के प्रभारी को सौंप देना होगा। नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है, कि अधिकारी और कर्मचारी अपने व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी आधिकारिक पदनाम, सरकारी प्रतीक (लोगो), यूनिफॉर्म, सरकारी गाड़ी या निवास जैसी संपत्तियों से जुड़ी फोटो, वीडियो या रील न डालें।

    अधिकारियों और कर्मचारियों को विभागीय समन्वय के लिए व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे सोशल मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल की अनुमति होगी, लेकिन उन्हें बिना अनुमति के कोई भी गोपनीय दस्तावेज़, चाहे वह पूरा हो या आंशिक, अपलोड, फॉरवर्ड या साझा करने से बचने की सलाह दी गई है। सरकार ने यह भी सख्त निर्देश दिए हैं कि जिन ऐप्स या प्लेटफॉर्म्स को सरकार ने बैन किया है, उनका उपयोग बिल्कुल न किया जाए।

    यह आदेश सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होगा — चाहे वे स्थायी हों, अनुबंध पर हों या सरकार के बाहर से नियुक्त किए गए हों। यह नियम उन सभी कर्मचारियों पर भी लागू होंगे जो सरकारी कंपनियों, उपक्रमों, अतिथि सेवाओं या स्थानीय निकायों में काम कर रहे हैं। Maharashtra: Strictness imposed on the use of social media for government employees

  • बिहार में वोटर लिस्ट के सत्यापन का खेल। वोट मत दें जनता लेकिन जीतेगी तो BJP ही..

    बिहार में वोटर लिस्ट के सत्यापन का खेल। वोट मत दें जनता लेकिन जीतेगी तो BJP ही..

    बिना किसी आई डी और बिना किसी मतदाता से मिले ही blo द्वारा कार्यालय में बैठकर खुद ही वोटर फॉर्म भरने का कार्य कराया जाना कत्तई उचित नहीं। वेरिफिकेशन के लिए blo को हर घर जाकर वोटरों से मिलने और उनसे भारत में रहने, उनके पिता की जन्मतिथि मांगने की बात चुनाव आयोग ने की थी। जब blo किसी मतदाता से मिलेगा ही नहीं तो सत्यापन किस बात का करेगा? बहुत ही सीनियर पत्रकार अजीत अंजुम को पता था, कि किसी भी कार्यालय में बिना अनुमति लिए कैमरामैन और माइक लेकर जाने पर उन पर सरकारी कार्यवाही में अड़ंगा डालने का आरोप लगाया जा सकता है। इसीलिए वे बिना कैमरामैन और बिना माइक लिए उस कमरे में गए, जहां तमाम blo बैठे हुए मतदाताओं के सिंगल फॉर्म भर रहे थे।
    मजेदार बात यह हुई, कि blo फॉर्म पर सिर्फ नाम लिख रहे थे। मतदाता के पिता या पति का नाम नहीं लिख रहे थे। फिर कैसे पहचान होगी कि वोट देने वाला सही है या नही? इससे भी बड़ी मजेदार बात यह, कि जेडीएस के बड़े नेता और नीतीश कुमार सरकार में उपमुख्यमंत्री रह चुके लालू यादव के बेटे की पत्नी का नाम काट दिया गया है। एक महिला के नाम पर बने वोटर आईडी पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की फोटो लगा दी है। पत्नी शादी होने के बाद जब ससुराल आती है तो ससुराल की सदस्य बन जाती है। नाम इसलिए काटा गया कि उनका जन्म दिल्ली में हुआ था। दिल्ली भारत की राजधानी और लालू यादव का पूरा परिवार बिहार के पटना में रहता है।
    बात वोटर लिस्ट बनाने की तो blo बिना किसी आई डी के सिंगल फॉर्म भरे और उसमें केवल मतदाता का नाम हो पिता या पति का नाम नहीं हो तो वह व्यक्ति वोट कैसे देगा? अब यही सच पुराने ख्यात पत्रकार अजीत अंजुम ने अपनी मोबाइल में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में डाल दी। जिस पर देश भर से प्रतिक्रिया आनी स्वाभाविक है। चुनाव आयोग की तरह बिहार पुलिस भी सरकारी दबाव में है जिसने बेवजह पत्रकार अजीत अंजुम द्वारा मतदाता सूची को ऑफिस में भरे जाने का सच दिखाने के लिए एफआईआर दर्ज कर दी। यानी सरकार कुछ भी कराए उसे अधिकार है। लेकिन अगर पत्रकार गलतियों को देश की जनता के सामने लाए तो गुनहगार हो गया।
    चुनाव आयुक्त बदल देने से कुछ नहीं होगा। क्योंकि सरकार यदि जिसे आयुक्त बनाएगी तो इसी शर्त के साथ कि वह सरकार के कहे अनुसार कार्य करे। पिछले दस साल से चुनाव आयोग के द्वारा पक्षपाती रवैया अपनाए जाने का विरोध देश भर में हो रहा है। क्योंकि चुनाव खत्म होने के बाद प्रसाइडिंग ऑफिसर फॉर्म 17 भरता है जिसमें कुल मतदाता स्त्री पुरुष और कुल पड़े हुए मत की गिनती स्त्री पुरुष अलग अलग बताना पड़ता है।
    बैलेट बॉक्स था या अब ई वी एम दोनों में यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। उसी शाम या रात जिला मुख्यालय पर बॉक्स और फॉर्म के साथ तीनों वोटर लिस्ट लिफाफे में भरकर जमा करना होता है। दूसरे दिन ही केंद्रीय चुनाव आयोग पड़े हुए मतों का प्रतिशत बता सकता है। लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में प्रथम चरण के मतदान प्रतिशत तीन अन्य चरण के मतदान होने के बाद बताने में तेरह दिन लगाए। फिर दस दिनों में क्या क्या करता रहा चुनाव आयोग? आयोग की गड़बड़ी छुपाने के लिए जल्द ही सारे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज डिलीट करने का नियम मनमाने ढंग से बना दिया गया ताकि कोर्ट में सबूत पेश करना नहीं पड़े ।
    बीजेपी को चुनाव जीताने के लिए चुनाव आयोग बेशक बेइमानी करता है। एक ही वोटर आईडी का यूनिक नंबर कई कई राज्यों में वोटर कैसे बनाया जाता है यह तो चुनाव आयोग ही बता सकता है। चुनाव के दिन शाम पांच बजे मेन गेट बंद कर पीछे से शुरू करके कूपन नंबर एक से दिए जाने का नियम है मगर महाराष्ट्र चुनावों में इस नियम का पालन नहीं किया गया और ‘अंतिम घंटे में बीस प्रतिशत वोट पड़े’ ऐसा बता दिया गया।
    लाखों वोट अंतिम घंटे में पढ़ने के टोकन नंबर ही सुरक्षित नहीं किए गए। जहां तक ई वी एम हैक होने की बात है वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी जब गुजरात के सीएम थे बार बार हैकिंग और बेइमानी की बातें कहते थे। यह भी कहा कि विदेशों में जहां पढ़े लिखे लोग होते है बैलेट पेपर पर नाम पढ़कर वोट देते हैं। ईवीएम हैक करने का सच चिप बनाने वाला जापान और ईवीएम बनाने वाला अमेरिका ई वीं एम से चुनाव नहीं करता। सुप्रसिद्ध अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने भी कहा है ईवीएम सरलता से हैक किया जा सकता है। चिप लगे होने से मोबाइल फीचर्स खत्म होते ही नेट प्रोवाइडर कंपनिया ऑफिस में बैठे बैठे सिम बैन कर देते हैं जिससे नेट तो क्या आउट गोइंग और इन कमिंग कॉल बंद कर दी जाती है। चिप लगे होने से ही इसरो अपने चंद्रयान को धरती पर बैठे कंट्रोल करता है। चिप के कारण हीं अभी हाल में अंतरिक्ष में यान भेजा और सकुशल धरती पर उतारा गया।
    अहम प्रश्न है कि विपक्षी सवाल चुनाव आयोग से पूछते हैं तो जवाब केंद्र सरकार क्यों देने लगती है जैसे चैनल पर ज्यों हि विपक्षी नेता किसी विषय पर सरकार को कटघरे में खड़ा करता है तो एंकर तमतमा जाते हैं और सरकार की तरफ से वकालत करने लगते हैं। अरे भाई लोकतंत्र में हर किसी सरकारी विभाग की जवाबदेही होती है तो दूसरा विभाग उत्तर कैसे दे सकता है।
    बिहार की जनता भले नीतीश कुमार और बीजेपी को वोट नहीं दे लेकिन इतनी गारंटी ली ही जा सकती है जब तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति सरकार करती रहेगी चुनाव में पक्षपात कर आयोग सत्ता के पक्ष में करता रहेगा।गुलामी बजाता रहेगा। ऐसे में सरकार द्वारा चुने गए चुनाव आयुक्तों और ईवीएम के रहते बीजेपी को हरा पाना जनता के लिए असंभव है। वोट मत दे जनता भले ही जीतेगी तो बीजेपी ही।

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  • मुंबई BMC ने की फिर एक बार बड़ी कार्रवाई। बोरीवली में तोड़ा 40 अवैध निर्माण

    मुंबई BMC ने की फिर एक बार बड़ी कार्रवाई। बोरीवली में तोड़ा 40 अवैध निर्माण

    बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने फिर एक बार 40 रूमों का अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिया है। इस तोड़क कार्रवाई के बाद अवैध निर्माणकर्ताओं मे हडकंप मच गया है। Mumbai BMC once again took a big action. 40 illegal constructions were demolished in Borivali

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने एक बार फिर अवैध निर्माण पर जबरदस्त तोड़क कार्रवाई कर अवैध निर्माणकर्ताओं मे हडकंप मचा दिया है। बोरीवली मनपा आर/मध्य बिल्डिंग एन्ड फैक्ट्री डिपार्टमेंट द्वारा गोराई बीच में बने अवैध होटलों को ध्वस्त कर दिया है। बोरीवली पश्चिम के गोराई बीच के पास सर्वे क्रमांक 41 में बीच रिसॉर्ट नामक 40 कमरों का अवैध निर्माण तैयार किया गया था। Mumbai BMC once again took a big action. 40 illegal constructions were demolished in Borivali

    छुटभैये नेता हुए गायब

    इसकी कार्रवाई में इलाके के छुटभैये नेताओं के हंगामे के बाद अवैध निर्माणकर्ताओं ने कोर्ट का दामन थाम लिया था। लेकिन कोर्ट ने भी उन्हें खदेड़ दिया। जिसके बाद दम खम के साथ बुलडोजर लेकर बीएमसी ने पूरे स्ट्रक्चर को जमीदोंस्त कर दिया। इस कार्रवाई के बाद से इलाके के अवैध निर्माणकर्ताओं में खलबली मच गई है। इसके साथ ही जो छुटभैया नेताओं का समूह इन अवैध निर्माणों को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहा था, नदारद हो गया है। Mumbai BMC once again took a big action. 40 illegal constructions were demolished in Borivali

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    शहर में अवैध निर्माणों का खतरा

    मनपा नियमों को अनदेखी कर शहर भर में अवैध निर्माण कराना अब आम हो गया है। लोगों को पता नहीं, कि यह अवैध निर्माण सिर्फ सरकारी कर व्यवस्था के साथ ही धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि इन्हीं अवैध निर्माणों के निचे दबने से निर्दोष लोगों की मौत हो जाती है। कहीं अवैध निर्माण के ढह जाने पर प्रशासन को कोसा जाता है। सरकारी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही भी होती है। Mumbai BMC once again took a big action. 40 illegal constructions were demolished in Borivali

    क्यों नही होती शिकायत?

    लेकिन जब लोगों के नजरों के सामने निर्माण कार्य हो रहा हो, तो रोका नही जाता। ऐसे ही इस अवैध निर्मित “बीच रिसोर्ट” के खिलाफ आरटीआइ कार्यकर्ता चन्द्रकान्त गुप्ता ने शिकायत की थी। लेकिन उसे धमकाया गया। एक्ट्रोशन और जान से मारने की धमकी दी गई। छुटभैये नेताओं का उन अवैध निर्माणकर्ताओं को साथ मिला। सारा खेल पैसों पर चलता रहा। लेकिन मनपा आर/मध्य विभाग ने तोड़क कार्यवाही कर ही दी। Mumbai BMC once again took a big action. 40 illegal constructions were demolished in Borivali

    BMC ने क्या कहा?

    बृहन्मुंबई महानगर पालिका परिमंडल-7 के मनपा उपायुक्त संजय कुर्हाडे ने बताया, कि अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के सख्त आदेश जारी किए गए है। माननीय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसको लेकर निर्देश दिये हुए हैं। एसआईटी के तहत अवैध निर्माणों का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसकी कार्रवाई के पीछे भी राजस्व का नुकसान हो रहा है। लेकिन लोगों की सुरक्षा के लिए हमें सख्ती बरतनी पड़ रही है। उन्होंने यह भी कहा, कि अवैध निर्माणों पर अंकुश लगाने के लिए एमआरटीपी कानून के तहत पुलिसिया कार्रवाई भी हो सकती है। Mumbai BMC once again took a big action. 40 illegal constructions were demolished in Borivali

    खर्च की वसूली

    मनपा आर/मध्य विभाग की सहायक आयुक्त संध्या नांदेड़कर ने बताया, कि तोड़क दस्ते में वार्ड के इमारत कारखाना विभाग से अभियंता शिवराज, अभियंता बाघमारे, दुय्यम अभियंता राजाराम जगताप, कनिष्ठ अभियंता सुरज पावले और बाकी कर्मचारी ने भरपूर तत्परता दिखाई। मौके पर पुलिस बंदोबस्त के साथ बुलडोजर का सहारा लेना पड़ा। उन्होंने बताया कि इस तोड़क कार्रवाई का खर्च अवैध निर्माणकर्ताओं से वसूला जाना अभी बाकी है।जिसे फिलहाल ध्वस्त कर दिया गया है। Mumbai BMC once again took a big action. 40 illegal constructions were demolished in Borivali

    सब की रिपोर्ट बनेगी।

    इसके बाद से गोराई गांव के अवैध बंगले, अवैध मकान, अवैध हुक्का पार्लर, अवैध गेस्ट हाउस, रो हाउस काफी सारे बने हुए हैं। इनके खिलाफ भी तोड़क कार्रवाई होने वाली है। इन अवैध निर्माणों के मालिकों मे हडकंप मचा हुआ है। बताया जा रहा है कि अपने अवैध निर्माणों को बचाने के लिए छुटभैया नेताओं और माननीय कोर्ट का सहारा लेने के लिए भगदड़ मची हुई है। लेकिन राज्य में भ्रष्टाचार को लेकर एसआईटी की टीम काम कर रही है। सदन में मौजूदा विधायकों ने इसको लेकर मुद्दा उठाया था। तब से मनपा आयुक्त भुषण गगरानी ने सभी 26, वार्ड में जांच शुरू कर अवैध निर्माण कार्य को ध्वस्त कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

  • शिक्षा का भगवाकरण और सत्यानाश करती बीजेपी सरकारें

    शिक्षा का भगवाकरण और सत्यानाश करती बीजेपी सरकारें

    भाजपा सरकार देश भर में शिक्षा का भगवाकरण करते हुए सरकारी स्कूलों को क्यों बंद कर रही है? इसके पीछे का राज साफ है। भले ही देश की उन्नति खत्म हो जाय। लेकिन सवाल नही पूछना चाहिए। BJP governments saffronising and destroying education

    मुंबई: शिक्षा ही परिवार, समाज और राष्ट्र की उन्नति के द्वार खोलती है। जो देश जितना ही शिक्षित है उतना ही संपन्न और खुशहाल है। शिक्षा ही विकास का मूल है। अशिक्षित समाज भीड़ बन जाता है जिसका धर्म अराजकता अंधविश्वास होता है। अनियंत्रित भीड़ विनाश का कारण बनती है। किसी ने बिल्कुल ठीक ही कहा है, देश की बर्बादी के लिए हर वह व्यक्ति जिम्मेदार है जिसे लगता है कि शिक्षा, चिकित्सा और रोज़गार से ज्यादा महत्वपूर्ण धार्मिक मुद्दे हैं।

    देश में शिक्षा का भगवाकरण

    विपक्ष बीजेपी सत्ता पर आरोप लगाता है कि देश में सरकार शिक्षा का भगवाकरण कर रही है जिसमें सामाजिक आर्थिक मुद्दे गायब कर दिए जा रहे। इसका प्रमाण हैं कि राजस्थान में स्कूली किताबों से महात्मा गांधी के परिवार को हटाया जा रहा है। BJP governments saffronising and destroying education

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    शिक्षा और परीक्षा का सौदा

    सुप्रसिद्ध आई ए एस कोचिंग के शिक्षक विकास दिव्यकृति का कथन है, कि सत्ता में जब अनपढ़ लोग बढ़ जाते हैं तो शिक्षा और परीक्षा बिकने लगती है। देश की लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर तीस से चालीस लाख में बेचे गए धनवानों को ताकि गरीब प्रतियोगी परीक्षा से बाहर चले जाएं और सरकार परीक्षा के नाम पर करोड़ों रुपए वसूलकर डकार जाती है और जब छात्र पुनः परीक्षा की मांग करते है तो गुलाम पुलिस द्वारा उन पर लाठियां बरसवाई जाती हैं।

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    शिक्षा पर 18% की जीएसटी

    उन्होंने यह भी कहा, कि शिक्षा का प्राइवेटीकरण करके माफियाओं को सौंपी जा रही जो मनमानी फीस और अन्य वस्तुएं छात्रों को बेचकर दौलत कमा रहे। आज स्कूल कॉलेज खोलना सबसे बड़ा व्यापार माना जाता है। सरकार खुद गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को शिक्षा से दूर रखने के लिए शिक्षा पर 18% जीएसटी लगाकर शिक्षा को महंगी कर चुकी है। सरकार ने 350 ऐसे लोगों को ज्वाइंट सेक्रेटरी और अध्यक्ष बनाए जो पद आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों को ही मिलते हैं लेकिन बिना आईएएस परीक्षा पास किए विशिष्ट विचारधारा के लोगों को आईएएस पोस्ट पर बिठा दिया गया।

    विश्वविद्यालयों पर भगवा कब्जा

    इतना ही नहीं आरएसएस की विचारधारा के लोगों को विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर और प्रोफेसर नियुक्त कर शिक्षा का भगवाकरण कर दिया है। ऐसे लोग यूनिवर्सिटी में उच्च पदों पर बैठकर गैर विचारधारा वाले लोगों को पीएचडी में प्रवेश देने से मना कर दिया, लेकिन आंदोलन के कारण प्रवेश देने को मजबूर हो गए। महामना मदन मोहन मालवीय की बगिया बी एच यू या काशी हिंदू विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा के प्रोफेसर के रूप में एक सुयोग्य मुस्लिम को नियुक्त किया गया तो बीजेपी से संलग्न छात्र संघ के विरोध के कारण उन्हें हटा दिया गया या हटने को मजबूर कर दिया गया।

    BJP-governments-saffronising-and-destroying-education-system

    दिल्ली यूनिवर्सिटी में मनुस्मृति पढ़ाने की योजना प्रबल विरोध के चलते पीछे हटने को बाध्य कर दिया। जिससे वी सी जो घोषणा करनी पड़ी कि दिल्ली विश्वविद्यालय में मनुस्मृति नहीं पढ़ाई जाएगी। यह बहुत बड़ा प्रमाण है शिक्षा के भगवाकरण का। BJP governments saffronising and destroying education

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    शिक्षा क्षेत्र मे भेदभाव

    शिक्षा के भगवाकरण के कारण ही उच्च पदों पर विशेषधारा के बैठे लोग जाति को लेकर भेदभाव किया जाता है जिस कारण बंगलुरु यूनिवर्सिटी में दस दलित प्रोफेसरों के साथ भेदभाव किए जाने से सभी दलितों ने इस्तीफा दे दिया। जब शिक्षित लोग भी जाति के कारण अपमानित किए जा रहे हों, अर्थात शिक्षा क्षेत्र में जाति का बोलबाला हो जाए तो सिस्टम हिलाना जरूरी हो जाता है। दस दलित प्रोफेसरों का इस्तीफा देने की बाध्यता शिक्षा के भगवाकरण की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। जिसका अर्थ है शिक्षा पाने आने वाले छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।

    धर्म की राजनीति

    हमारे देश में जितना संघर्ष धार्मिक स्थलों के लिए किया जा रहा है उतना ही संघर्ष यदि शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए किया जाता तो देश की तस्वीर और तकदीर ही बदल जाती। बीजेपी सरकार धर्म की राजनीति के द्वारा वोट बैंक बनाने में लगी है देश समाज से कोई लेना देना नहीं है। बीजेपी आरएसएस और उसके एजेंट धूर्त, अज्ञानी और ढोंगी बाबा जनता को धर्म के नाम पर मूर्ख बनाकर धन और शरीर शोषण करते हैं। आशा राम और रामरहीम इसके ज्वलंत उदाहरण हैं।

    मानसिक गुलामी

    सरकार जानती है कि देश में जितने अधिक अशिक्षित रहेंगे उनसे कांवड़ उठवाना, मस्जिद के सामने नाचना, गालीया देना, सोशल मीडिया में गालियां लिखने के लिए मानसिक गुलाम बनाना और पांच किलो मुफ्त अनाज और चंद सिक्के भीख में देकर वोट पाना सरल हो जाता है। BJP governments saffronising and destroying education

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    मुर्दे ही पैदा होंगे जागरूक भारतीय नहीं

    जबकि शिक्षित जो स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों से शिक्षा ज्ञान पाकर निकलते हैं वे संविधान पढ़ते हैं। अपने मौलिक अधिकार जानते हैं। सरकार के दायित्व क्या-क्या है की जानकारी रखते हैं। वे सत्ता से सवाल पूछने लगते हैं। सरकार की असफलता तानाशाही नफरती राजनीति जानते हैं। अपने अधिकार मांगने के लिए आंदोलन करते हैं। इसलिए “न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।” सीधे-सीधे सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। क्योंकि स्कूल कॉलेज बंद किए जाने से मुर्दे ही पैदा होंगे जागरूक भारतीय नहीं। उन्हें धर्म के नाम पर मुसलमानों के खिलाफ भड़काना सरल होता है।

    मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार

    तेलंगाना जो भारत का छोटा सा नवनिर्मित राज्य हैं वहां की सरकार शिक्षा का महत्व समझती है इसलिए सिर्फ एक छात्रा के लिए ही स्कूल खोला जाता है। इसके विपरीत हिन्दी भाषी राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान में सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। जबकि संविधान में चौदह साल के कम उम्र के बच्चों को मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार है, लेकिन बीजेपी सरकार सरकारी स्कूल बंद करने में लगी हैं।

    कितनी सरकारी स्कूलें हुई बंद ?

    एक तरफ गैर बीजेपी सरकार की सोच कि एक बच्ची के लिए नियमित स्कूल खोला और पढ़ाया जाता है। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू कर 334 शिक्षकों की भर्ती आरम्भ कर दी गई है। वहीं दूसरी ओर बीजेपी शासित राज्यों में पिछले दस वर्षों में लगभग नब्बे हजार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। मध्यप्रदेश में 29000 और उत्तर प्रदेश में 25000 स्कूल बंद किए जा चुके हैं।

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    स्कूलें बंद मधुशालाओं का उद्घाटन

    राम कृष्ण का प्रदेश है उत्तर प्रदेश जहां पहले 50 छात्रों से कम होने पर स्कूल बंद कर दूसरे स्कूल में मर्ज करने की बात कही गई है उसका दायरा बढ़ाकर अब 70 छात्र होने पर भी सरकारी स्कूल बंद कर मर्ज किए जाने की मंशा है। यहां सवाल उठता है पांच मिल दूर तक स्कूल में लड़कियां कैसे जाएंगी? उनके अलावा गरीब लड़के भी शिक्षा बंद कर देंगे। योगी सरकार ने स्कूल बंद करने और 27308 नई मधुशाला खोलने का निर्णय किया है।

    सरकारी स्कूलें बंद कराने का सरकारी फरमान

    दूसरी तरफ हरियाणा सरकार का अनोखा आदेश है, कि जो बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे उन्हें 500 रुपए महीने फीस देनी होगी लेकिन जो बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने जाएंगे उन्हें 1100 रुपए महीने दिए जाएंगे। जिसका अर्थ है सभी सरकारी स्कूल बंद करना। प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा देना। सब मिलाकर बीजेपी सरकारें गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित रखना चाहती है। ताकि पांच किलो मुफ्त अनाज देकर वोट लिया जा सके साथ ही कांवड़ उठाने वाले की संख्या में 21% वृद्धि की संभावना है। जितने लोग कांवड़ उठाएंगे उनपर सरकार फूल बरसाकर तृप्त करेगी। प्रोत्साहित करेगी ताकि मानसिक गुलाम बने रहकर बीजेपी को वोट देते रहें।

    मुफ्त शिक्षा के खिलाफ हाईकोर्ट का फैसला

    दुखद प्रसंग यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय जज ने 51 गरीब छात्रों की अपील खारिज कर सरकार के पक्ष में निर्णय दिया है। यहां सवाल उठता है कि माननीय जज को छात्रों की नहीं सरकार की चिंता अधिक है। क्या कोर्ट सरकार से सवाल नहीं कर सकती थी? कि सब कुछ मुफ्त देने के बावजूद क्या कारण है कि सरकारी स्कूलों में छात्र पढ़ना ही नहीं चाहते? सरकार पता करे और गरीब बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए प्रेरित करे।

  • वेस्टर्न रेलवे ने शुरू की धरपकड़, सादे कपड़ो में तैनात RPF की स्पेशल टीम

    वेस्टर्न रेलवे ने शुरू की धरपकड़, सादे कपड़ो में तैनात RPF की स्पेशल टीम

    वेस्टर्न रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाते हुए एक स्पेशल टीम का गठन किया है। आरपीएफ की यह टीम सादे कपड़ो में तैनात कर दी गई है। आईजी अजय सादानी ने दिये आदेश .. Western Railway started the crackdown, special RPF team deployed in plain clothes

    न्यूज़ डेस्क
    मुंबई:
    चर्चगेट से गुजरात के सूरत तक चलने वाली मुंबई लोकल ट्रेन और मेल एक्सप्रेस में अवैध फेरीवालों, किन्नरों और अवैध यात्रा करने वालों के खिलाफ आरपीएफ ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। यात्रियों की लगातार शिकायतों के बाद आरपीएफ के आईजी चर्चगेट अजय सादानी ने इसको लेकर सख्त आदेश दिए हैं। सादे कपड़ो में आरपीएफ की टीम निगरानी के लिए तैनात कर दिए गए हैं। पिछले 12 दिनों में 1632 लोगों की धरपकड़ हो चुकी है। इसमे 298 अवैध होकर, 100 किन्नर , विकलांग कोच से 889 और महिला कोच में 80 पुरुष यात्रियों की पकड़ा गया है।

    लगातार हो रही थी शिकायत

    बता दें कि मुंबई लोकल में भीड़ के समय यात्रा के दौरान अवैध हाकर, भीख मांग कर परेशान करने वाले किन्नर, विकलांगों के लिए आरक्षित कोच में अवैध यात्री और महिला कोच में पुरुष यात्रियों से लोग परेशान हो गए थे। जिसको लेकर लगातार रेल प्रशासन को शिकायत मिल रही थी। इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए आई जी आरपीएफ चर्चगेट अजय सादानी ने सख्त कार्रवाई के आदेश दिए। इसपर वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त मुंबई सेंट्रल संतोष कुमार सिंह राठौड़ ने एक विशेष टीम का गठन किया, जो हर रेलवे स्टेशनों पर सादे कपड़ो में यात्रियों की सुरक्षा के लिए तैनात कर दिए गए हैं। Western Railway started the crackdown, special RPF team deployed in plain clothes

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    विशेष चैकिंग अभियान

    वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त मुंबई सेंट्रल संतोष कुमार सिंह राठौड़ ने बताया, कि मुंबई मंडल द्वारा सादे कपड़ों में अवैध गतिविधियों की धरपकड़ और रोकथाम लिए एक स्पेशल टीम का गठन किया गया है। जिनके द्वारा एक विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। पिछले 12 दिनों में कुल 1632 लोगों की धरपकड़ की है जिनमे 298 अवैध होकर, ट्रेनों में भीख मांगकर यात्रियों को परेशान करने वाले 100 किन्नर, विकलांग कोच में अनाधिकृत यात्रा करने वाले 889 गैर विकलांग यात्री और महिला कोच में यात्रा करने वाले 80 पुरुष यात्रियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए कोर्ट के समक्ष पेश कर चालान किया गया। Western Railway started the crackdown, special RPF team deployed in plain clothes

    अपराधियों की धरपकड़

    उन्होंने आगे कहा, कि गाड़ी संख्या 20907/08 सयाजी नगरी एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में अनाधिकृत रूप से यात्रा करने वाले 244 जनरल यात्रियों को 132855 रुपए का जुर्माना करवाया गया। पश्चिम रेलवे का मुंबई सेंट्रल मंडल यात्रियों की सुरक्षा और सहयोग के लिए सदैव तत्पर है। उन्होंने यह भी बताया, कि चालू वर्ष 2025 में रेलवे सुरक्षा बल मुंबई सेंट्रल द्वारा यात्रियों के सामानों की चोरी करने वाले 328 अपराधियों की धरपकड़ कर जीआरपी को अग्रिम कार्यवाही हेतु सौंपा गया है। साथ ही 563 शराब तस्करों को 20,09,786/-रु मूल्य की शराब के साथ पकड़कर जीआरपी के सुपुर्द किया गया है घर से भागे हुए और परिजनों से बिछड़े हुए 191 बच्चों को एनजीओ या उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया। Western Railway started the crackdown, special RPF team deployed in plain clothes

  • मराठी मुद्दा लोगों के सर चढ़कर बोलने लगा है। मराठी नहीं बोलने पर छात्र को हॉकी से पीटा, हो गया लहू-लुहान

    मराठी मुद्दा लोगों के सर चढ़कर बोलने लगा है। मराठी नहीं बोलने पर छात्र को हॉकी से पीटा, हो गया लहू-लुहान

    नवी मुंबई के वाशी इलाके में 20 वर्षीय छात्र पर चार लोगों ने हॉकी स्टिक से हमला कर दिया। विवाद मराठी नही बोलने का बताया जा रहा है। मुख्य आरोपी ने छात्र के सिर पर वार किया.. The Marathi issue has become a topic of discussion among people. A student was beaten with a hockey stick

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    न्यूज़ डेस्क
    महाराष्ट्र:
    मुंबई से सटे नवी मुंबई के वाशी इलाके में 20 वर्षीय छात्र पर हॉकी स्टिक से हमला करने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि पीडित छात्र से आरोपियों ने मराठी में बात करने को कहा था, जिसकी वजह से उनके बीच बहस हुई।

    इस घटना के बाद से लोग मराठी भाषा विवाद के नाम पर आपसी रंजीश को अंजाम देने का हथियार बताने लगे हैं। लोगों का कहना है कि समाज में अचानक इतना गुस्सा कहां से आ गया। जो एक दूसरे को लोग अपने गुस्से का शिकार बना रहे हैं। किसी का तिरस्कार और मार पीट यह मानवता के खिलाफ सरारस हमले हैं, जो कतई बर्दाश्त के बाहर है। समय रहते इसपर प्रशासन को अंकुश लगाना चाहिए। The Marathi issue has become a topic of discussion among people. A student was beaten with a hockey stick

    कैसे हुआ झगड़ा?

    पुलिस के मुताबिक, यह झगड़ा तब शुरू हुआ, जब फैजान नाइक का एक आरोपी ने मराठी में बात न करने पर आपत्ति जताई। बहस इतनी बढ़ गई कि नाइक और तीन अन्य ने शिकायतकर्ता पर हमला कर दिया। मुख्य आरोपी ने पीड़ित के सिर पर हॉकी स्टिक से वार किया, जिससे उसे सर फट गया और गंभीर चोटें आईं। The Marathi issue has become a topic of discussion among people. A student was beaten with a hockey stick

    पुलिस ने क्या कहा?

    अन्य आरोपियों ने भी उसका साथ दिया और उसे खूब पीटा। आरोपियों ने पीड़ित को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पीड़ित की मेडिकल जांच करवाई गई है और उसका बयान दर्ज किया गया है। आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार किया जा सकता है। The Marathi issue has become a topic of discussion among people. A student was beaten with a hockey stick

  • महिला हर दिन अपनी छाती का दूध बेच कर करती है 66 हजार की कमाई, पहलवान भी हैं इनके ग्राहक!

    महिला हर दिन अपनी छाती का दूध बेच कर करती है 66 हजार की कमाई, पहलवान भी हैं इनके ग्राहक!

    अमेरिका मे महिलाएं हर दिन अपनी छाती का दूध बेचकर पैसे कमाने का काम करने लगी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए इस कारोबार को अच्छा खासा प्रतिसाद भी मिल रहा है। खास बात यह है कि इसमें बॉडीबिल्डर का शौक रखने वाले भी ग्राहक बन गए हैं। This woman earns 66 thousand rupees every day by selling her breast milk, even wrestlers are her customers!

    न्यूज़ डेस्क
    अमेरिका:
    डॉक्टर ये हिदायत देते हैं कि नवजात बच्चों को 6 महिने तक सिर्फ मां का ही दूध पिलाना चाहिए। कुछ औरतों को ज्यादा मात्रा में ब्रेस्ट मिल्क बनता है, जिसकी वजह से उन्हें अतिरिक्त मिल्क मशीन से पंप कर के निकालना पड़ता है। विदेशों में अब इसी मिल्क को कई औरतें बेचकर पैसे कमा रही हैं। हाल ही में कुछ औरतों ने बताया कि वो इसके जरिए मोटी कमाई कर रही हैं। अमेरिका की एक महिला इस वजह से चर्चा में आ गई हैं, जि्होंने दावा किया है कि वो ब्रिेस्ट मिल्क बेचकर हर दिन 66 हजार रुपए की कमाई कर रही हैं। हैरानी की बात ये है कि उनके ग्राहकों में जिम जाने वाले पहलवान भी शामिल हैं।

    अटलांटा यह अमेरिकी राज्य जॉर्जिया का सबसे अधिक आबादी वाला शहर और राज्य की राजधानी है। शहर की सीमा के भीतर रहने वाली 510, 823 की आबादी के साथ, अमेरिकी जनगणना के अनुसार दक्षिणपूर्व में 8वां सबसे अधिक आबादी वाला और संयुक्त राज्य अमेरिका का 38 वां सबसे अधिक आबादी वाला शहर है। यहां औरते अपनी छाती का दूध बेचकर पैसे कमाने का काम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए कर रही है। This woman earns 66 thousand rupees every day by selling her breast milk, even wrestlers are her customers!

    छाती के दूध से पैसा कमाने का जरिया

    कीरा विलियम्स नाम की एक अमेरिकी महिला मां बनने के बाद अपने मदरहुड (मातृत्व) को पैसा कमाने का जरिया बना रही हैं। अटलांटा की रहने वाली कीरा रोजाना लगभग 800 डॉलर तक की कमाई सिर्फ अपने ब्रेस्ट मिल्क को बेचकर कर रही हैं। वह फेसबुक पर इसे बेचती हैं, और अब तक 3,500 औस दूध बेच चुकी हैं। उनकी सबसे बड़ी ग्राहक हैं दूसरी माएं जिनके पास खुद दूध नहीं बनता, और हैरानी की बात ये है कि उनके ग्राहक बॉडीबिल्डर भी हैं, जो इसे प्री-वर्कआउट ड्रिंक के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। ये बॉडीबिल्डर ब्रेस्ट मिल्क को ‘प्राकृतिक प्रोटीन शेक’ मानते है और एक औस के लिए 2 डॉलर तक भुगतान करते हैं, जबकि आम तौर पर माएँ इसे 50 सेंट प्रति औस पर बेचती हैं।

    पुरुष भी बन गए ग्राहक

    हालांकि, कीरा बताती हैं, कि पुरुष ग्राहकों को दूध बेचते समय उन्हें सतर्क रहना पड़ता है, क्योंकि ‘कभी-कभी कुछ ग्राहक’ अजीब इरादों से भी संपर्क करते हैं। कई बार उन्हें ऐसे मैसेज मिलते हैं जो सीमाओं को लांघकर भेजे गए होते हैं लेकिन सतर्कता और समझदारी से वह इस ‘वर्चुअल माइनफील्ड’ को पार करती हैं। ब्रेस्ट मिल्क को लंबे समय से सुपरफूड माना जाता है, इसमें विटामिन ए, बी6, बी12, डी आयरन, कैल्शियम, जिंक जैसे तत्व पाए जाते हैं। कोविड-19 के दौरान वैज्ञानिकों ने इसके एंटीबॉडी गुणों को देखते हुए इसे संभावित इलाज के रूप में भी बताया था। इस वजह से ब्रेस्ट मित्क की मांग और भी बढ़ गई।

    न्यूयॉँर्क पोस्ट के अनुसार कीरा अकेली नहीं है। यूटा की रहने वाली निकोल हॉवर्ड भी अपने अतिरिव्त ब्रेस्ट मिल्क को बेवकर पिछले 10 महीनों में 8 लाख से ज्यादा पैसे कमा चुकी हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर बताया, कि वह दिन का बड़ा हिस्सा दूध निकालने, स्टोर करने और बेवने में बिताती हैं। This woman earns 66 thousand rupees every day by selling her breast milk, even wrestlers are her customers!

  • Mumbai BMC: अब शमशान और दफन भूमि की होगी ऑनलाइन बुकिंग

    Mumbai BMC: अब शमशान और दफन भूमि की होगी ऑनलाइन बुकिंग

    बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने दाह संस्कार और कब्रिस्तान में दफनाने के लिए ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। Mumbai BMC: Now crematorium and burial ground will be booked online

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने नागरिक सेवाओं में आधुनिकीकरण करते हुए, लोगों के शोकाकुल माहौल के दौरान होने वाली दिक्कतों और तनाव को कम करने के लिए एक ठोस कदम बढ़ा दिया है। इसके लिए बीएमसी ने एक नया ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म, श्मशान प्रबंधन प्रणाली, लॉन्च कर दिया है। इस ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए अब नागरिक दाह संस्कार या दफ़नाने के लिए स्लॉट बुक कर सकते हैं। शनिवार, 19 जुलाई से इसे आम नागरिकों के लिए लाइव कर दिया गया है। इसे बीएमसी की आधिकारिक वेबसाइट के ‘अप्लाई’ सेक्शन में जाकर इस्तेमाल किया जाएगा।

    कैसे होगी ऑनलाइन बुकिंग ?

    नागरिक बुकिंग के लिए (https://portal.mcgm.gov.in) पोर्टल पर जा सकते हैं। बीएमसी ने निवासियों से, विशेष रूप से आपात स्थिति में, इस नई प्रणाली का उपयोग करने का आग्रह किया है ताकि देरी से बचा जा सके और नगरपालिका के श्मशान घाट और कब्रिस्तानों में सुचारू रूप से संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

    बीएमसी ने क्या कहा?

    बीएमसी के एक उच्च अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया, कि श्मशान प्रबंधन प्रणाली का मुख्य उद्देश्य परिवारों के लिए भावनात्मक रूप से कठिन समय के दौरान भ्रम, प्रतीक्षा समय और गलत संचार को कम करना है। जनता और श्मशान कर्मचारियों के बीच पारदर्शिता और समन्वय स्थापित करके, बीएमसी शहर में अंतिम संस्कार सेवाओं की समग्र दक्षता में सुधार की उम्मीद करती है। Mumbai BMC: Now crematorium and burial ground will be booked online

  • पति के साथ Sexual इनकार और शक करना तलाक का कारण- बॉम्बे हाईकोर्ट

    पति के साथ Sexual इनकार और शक करना तलाक का कारण- बॉम्बे हाईकोर्ट

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक घरेलू मामले पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया, कि पुरुष पर शक करना और शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना तलाक का उचित आधार है। अदालत ने इसको लेकर महिला की एक याचिका खारिज कर दी। Denial and doubt of sex with husband is reason for divorce- Bombay High Court

    नेशनल डेस्क
    मुंबई:
    पति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना और उस पर एक्सट्रा मैरिटल अफेर होने का शक करना, अपने पति पर क्रूरता का एक स्वरूप है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक फैसला सुनाते हुए कहा, कि ऐसा करना तलाक का एक वैध आधार माना जा सकता है। अदालत ने यह टिप्पणी एक पारिवारिक मामलों के तलाक के आदेश को चुनौती देने वाली एक महिला की याचिका को खारिज करते हुए उसे राहत देने से इनकार करते हुए की। Denial and doubt of sex with husband is reason for divorce- Bombay High Court

    तलाक से इंकार, एक लाख रुपये मासिक भत्ते की मांग

    बम्बई हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि महिला के व्यवहार को उसके पति के प्रति “क्रूरता” माना जा सकता है। अदालत ने पत्नी की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने अपने पति के तलाक के आवेदन को स्वीकार करने वाले पारिवारिक न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी। महिला ने अपने पति को एक लाख रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने का भी निर्देश देने की मांग की थी।

    पुणे की अदालत ने कर दी थी सुनवाई

    प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस जोड़े की शादी 2013 में हुई थी। लेकिन दिसंबर 2014 में वे दोनों अलग रहने लगे। 2015 में, पति ने क्रूरता के आधार पर तलाक के लिए पुणे की एक पारिवारिक अदालत में अर्जी की थी। अदालत ने उस समय उसकी अर्जी मंजूर कर ली और सुनवाई के दौरान पति के तलाक की अर्जी को कबूल करते हुए दोनों को अलग कर दिया।

    तलाक का कारण ?

    महिला ने आरोप लगाया था कि उसके ससुराल वालों ने उसे प्रताड़ित किया। हालाँकि, वह अब भी अपने पति से प्यार करती थी और शादी को बरकरार रखना चाहती थी। हालाँकि, पति ने अपनी पत्नी को तलाक देने के कई कारण बताए थे। इनमें शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना, उस पर एक्सट्रा मैरिटल अफेर होने का शक करना और उसपर झूठे क्रूरता का दावा करते हुए अपने परिवार, दोस्तों और कर्मचारियों के सामने मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शामिल था। इसमें उसने यह भी दावा किया कि उसकी पत्नी उसका घर छोड़कर अपने माता-पिता के घर रह रही है।

    विवाह हुआ खत्म

    पुणे के आदेश को चुनौती करते हुए महिला ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। जबकि महिला को वहां भी मुंहकी खानी पड़ी। हाईकोर्ट ने कहा, “अपीलकर्ता (महिला) का पुरुष के कर्मचारियों के प्रति व्यवहार निश्चित रूप से उसे परेशान करेगा। इसी तरह, उसके दोस्तों के सामने उसका अपमान करना भी अपने पति के प्रति क्रूरता है।” कोर्ट ने यह भी कहा, कि पुरुष की दिव्यांग बहन के प्रति महिला का उदासीन व्यवहार भी उसे और उसके परिवार को परेशान करेगा। महिला की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा, दंपति के बीच शादी के टिकने की कोई संभावना नहीं है, इसलिए यह खत्म हो गई है।

  • अब सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, आधे घंटे का मिला तोहफा

    अब सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, आधे घंटे का मिला तोहफा

    महाराष्ट्र की सरकार ने अपने सरकारी कर्मचारियों को सुबह आधा घंटा देर से अपने कार्यालय में उपस्थित दर्ज कराने की अनुमति दे दी है, ताकि मुंबई की लोकल ट्रेनों में भीड़ को कम किया जा सके। कर्मचारियों को इस अतिरिक्त समय को कार्य दिवस के अंत में जोड़ना होगा। Now government employees will have a great time, they got a gift of half an hour

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई:
    महाराष्ट्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए एक नई नीति की घोषणा की है, जिसके तहत उन्हें सुबह आधा घंटा देर से ऑफिस आने की अनुमति दी जाएगी। यह निर्णय मुंबई की लोकल ट्रेनों में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लिया गया है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने विधानसभा में बताया कि इस लचीले समय से कर्मचारी सुबह और शाम के पीक आवर्स से बच सकेंगे, जिससे ट्रेनों में यात्रियों का दबाव कम होगा। हालांकि, कर्मचारियों को यह आधा घंटा कार्य दिवस के अंत में जोड़कर पूरा करना होगा, ताकि कुल कामकाजी समय पर कोई असर न पड़े।

    मुंबई लोकल ट्रेन में घटेगी भीड़

    मुंबई की लोकल ट्रेनें प्रतिदिन लगभग 70 लाख यात्रियों का बोझा ढोती हैं, और पीक आवर्स में ट्रेनों में यात्रा करना बेहद कठिन हो जाता है। सरकारी कर्मचारी बड़ी संख्या में इन ट्रेनों का उपयोग करते हैं, और नई नीति के तहत उन्हें सुबह 10 बजे के बजाय 10:30 बजे उपस्थिति दर्ज करने की अनुमति होगी। इस बदलाव से न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि ट्रेनों में असुविधा और दुर्घटनाओं का जोखिम भी कम होगा। Now government employees will have a great time, they got a gift of half an hour

    विशेषज्ञों का क्या है कहना?

    हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इसका प्रभाव सीमित हो सकता है, क्योंकि निजी क्षेत्र के कर्मचारी और अन्य यात्री अभी भी पीक आवर्स में यात्रा करते हैं। परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार, यह योजना तभी पूरी तरह सफल होगी जब निजी कंपनियां भी अपने कर्मचारियों के लिए लचीले समय को अपनाएं। Now government employees will have a great time, they got a gift of half an hour