Category: Civic Issues

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  • INDIA: दिल्ली में परिवार बचाओ रैली

    INDIA: दिल्ली में परिवार बचाओ रैली

    • इन नेताओं से पूछिए की लोकतंत्र की परिभाषा क्या है?
    • एक दूसरे के घोर विरोधी सब एक हो गए हैं।
    • INDIA गठबंधन के 28 दलों के नेताओं का मोदी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

    वी बी माणिक
    नई दिल्ली-
    कल पूरा विपक्षी पार्टियों के कुल 28 दलों के नेताओ ने मोदी के विरुद्ध लोकसभा चुनाव में इज्जत और परिवार बचाओ रैली निकाल कर सभी से चुनाव में मतदान करने के लिए आह्वान किया है। जिसमें मुख्य आकर्षण सुनीता केजरीवाल, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, फारूक अब्दुल्ला, लालू प्रसाद यादव, सीताराम येचुरी, शरद पवार, महबूबा मुफ्ती, अखिलेश यादव एवं अन्य नेता उपस्थित हुए सभी ने एक स्वर में अरविंद केजरीवाल को जेल से छुड़ाने के लिए आवाज उठाया। (india political news)

    आप को बता दें, कि इसी रामलीला मैदान में 2012 में केजरीवाल ने अन्ना हजारे के साथ मिलकर राजनीति नहीं करने की शपथ ली थी। पर हजारे को धोखा देकर दिल्ली की सत्ता पर कब्जा कर लिया और घोटाले में जेल की यात्रा पर चले गए। वही राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि मोदी ने क्रिकेट में मैच फिक्सिंग की तरह ईडी, सीबीआई और इनकमटैक्स डिपार्टमेंट जैसे सरकारी विभागों को लगाकर चुनाव जीतने की तैयारी में लगे है। (india political news)

    https://indian-fasttrack.com/2024/03/28/electoral-bond-bag
    indian fasttrack news

    INDIA गठबंधन..

    राहुल क्या क्या बोलते है ये किसी भी जनता के समझ मे नही आता है। ईवीएम तो कांग्रेस ही लायी थी। आज उसका विरोध कर रहे हैं। संविधान समाप्त हो जाएगा बीजेपी से जनता को छुटकारा पाने का चुनाव है। सुनीता ने कहा कि केजरीवाल जेल से सरकार चलाएंगे। इस इंडिया गठबंधन में आधे से ज्यादा नेता बेल पर है और कुछ जेल में है। क्या सत्ता धारी पार्टी के नेता ही भ्रष्टाचार में लिप्त है। यहां तो हर छोटे से बड़ा नेता किसी न किसी घोटाले में लिप्त है। (india political news)

    India,
    दिल्ली के रामलीला मैदान से विरोध प्रदर्शन की तस्वीर

    भाजपा नेताओं ने कहा इस गठबंधन में भ्रष्टाचारी सब एक हो गए है जो कभी एक दूसरे के घोर विरोधी थे। आज सब एक दूसरे की गोद मे बैठे है क्या केवल चुनाव जीतकर जनता को लूटने का संकल्प ले रखा है? अभी तक सीट बंटवारा नही हो सका है बात एकता की कर रहे है। जनता इनको जिताने वाली नही है। क्या करेंगे ? (india political news)

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    अखिलेश यादव को बताना चाहिए कि उत्तरप्रदेश में जो जंगल राज की सरकार चला रहे थे इनके कार्यकर्ता पुलिस थानों, सरकारी कार्यालयों में दलाली करते थे। महिलाएं अपने को असुरक्षित महसूस करती थी। पुलिस शिकायत नही सुनती थी। पुलिस कर्मी थानों में बैठकर खुलेआम शराब पीते थे। इस पर कितना कंट्रोल किया था। वही मानसिकता पुलिस वालों की आज भी है। भले योगी की सरकार हो। क्योंकि अखिलेश वाली मानसिकता अभी तक गयी नही है। सारे नेता लोकतंत्र की बात करते है इन नेताओं से पूछिए की लोकतंत्र की परिभाषा क्या है? (india political news)

  • इलेक्टोरल बॉन्ड का झोल।

    इलेक्टोरल बॉन्ड का झोल।

    • इलेक्टोरल बॉन्ड का झोल सामने आते शुरू हुआ देश में राजनैतिक भूचाल।
    • कौन से दल ने कितना किया झोल?
    • रिपोर्ट अभी और बाकी है..
    • Electoral Bond Indian Government Political News

    सुरेन्द्र राय
    मुंबई-
    हम भारतीय अपने जहन में कई वर्षो से लगातार एक जटिल समस्या का हल ढूंढ रहे है और वह जटिल समस्या यह है, कि इंसान अंततः भ्रस्ट क्यों हो रहा है? जबकि हमारे भारतीय समाज में भ्रस्टाचार के वर्चस्व का एक नया स्तंभ स्थापित हो चुका है और हमने इसमें ज्ञान, दौलत और हिंसा की एक ऐसी मिसाल इलेक्टोरल बॉन्ड जैसे को खड़ी कर दी है, जो भ्रस्टाचार और सत्ता के मध्य अटुट और अतरंग संबंध स्थापित करती नजर आ रही है।

    हालांकि यह सत्ता विमर्श एक गंभीर जिरह की मांग करता है, जो सामाजिक विकास कार्य में अवरुद्ध करने वाला घटक के रूप में साबित हो रहा है, जो एक भ्रस्ट आचरण की पहचान है। जिसकी हमें घोर निंदा की जानी चाहिए।
    अब ऐसे में पिछले पांच वर्षों में कंपनियों ने अपने फ़ायदे के लिए सरकार को इलेक्टोरल बॉन्ड के ज़रिए कितना पैसा दिया यह पूरी तरह से अभी खुला नहीं है। घाघ लोगों का खुलासा एस बी आई ने नहीं किया। पांच वर्षों में किस कंपनी ने कितना चंदा दिया?

    Indian Fasttrack Political News

    ‘बिजनेस टाइम्स’ मैगज़ीन में छपी खबर के अनुसार भारती एयरटेल में 241 करोड़, तता स्टील ने 175 करोड़, एल एन्ड टी ने 85 करोड़, महेंद्रा एन्ड महिंद्रा ने 39 करोड़, अल्ट्राटेक सीमेंट ने 23 करोड़, बजाज फाईनैंस ने 20 करोड़, मारुति सुज़ुकी ने 20 करोड़, टेक एम ने 15 करोड़ रुपए के बॉन्ड खरीदे। बीजेपी को पिछले दो वर्षों में यानी 2019 में 216.9 करोड़, 2023/24 में 296.12 करोड़ मिले। जबकि कांग्रेस को 2019 में मात्र 15.85 करोड़ और 2023/24 में 81.1 करोड़ मिले। इसके साथ ही दूसरे दलों को 2019 में 4.55 करोड़ और 2023/24 में 33 करोड़ मिले।

    किसने कितने खरीदे इलेक्टोरल बॉन्ड ?

    पिछले पांच साल इलेक्टोरल बॉन्ड में कितने पैसे मिले हैं इसपर नज़र डालें तो पता चलता है, कि 2019 में 237 करोड़ , 2020 में 46 करोड़, 2021 में 40 करोड़ रुपए मिले। जबकि 2022 में 563 करोड़ और 2023 में 347 करोड़ के साथ दो वर्षों का भारी उछाल देखने को मिला। 2024 में सिर्फ 65 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे गए।

    इलेक्टोरल बॉन्ड,

    कांग्रेस के चारों एकाउंट आई टी ने फ्रीज किए हैं। इसलिए सुप्रीमकोर्ट द्वारा गैरकानूनी गैरसंवैधानिक बताए जाने पर बीजेपी के भी खाते सीज करने की मांग की ज़ा रही है। यही न्याय का तकाज़ा भी है।
    प्रकाशित खबर के मुताबिक, फ्यूचर जेमिंग कंपनी द्वारा 149 करोड़ 2020 में, 324 करोड़ 2021 में, 440 करोड़ 2022 में, 321 करोड़ 2023 में और 2024 में 63 करोड़ क्षेत्रीय दलो जिसमें डी एम के, टी एम सी, वाई एस आर कांग्रेस और अन्य को दिए।

    Electoral Bond News

    जबकि 2019 में बीजेपी को 125 करोड़ 2021 में, 33 करोड़ 2022 में, 129 करोड़ और 2023 में, 297 करोड़ रुपये मेघा इंजीनियरिंग ने दिए। क्विक ने भाजपा को 325 करोड़ 2022 में, शिवसेना को 25 करोड़, 2023 में बीजेपी को 50 करोड़ दिए।
    इसके साथ ही लिस्टेड कंपनियों से बीजेपी को 2019 और 2023/24 में 216.9 करोड़ और 298.12 करोड़ रुपए मिले, जबकि कांग्रेस को 15.85 और 81.1 करोड़, अन्य दलों को 4.55 और 33 करोड़ मिले।

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    टॉप 10 डोनर्स के 9.6 करोड़ मूल्य के इलेक्टोरल बॉन्ड एकस्पायर हो गए। जिनमे फ्यूचर जेमिंग के 3, ई सी एल के 2, पैसिफिया इंडिया के 1.25, सिलवेनस बिल्डर के 1, सी मेकर्तिच के 0.4, वेदांता लिमिटेड के 0.3, सुधा कमर्शियल के 0.3, जुपिटर के 0.25, उत्कल अलमुनियम के 0.2 करोड़ रुपए का इलेक्टोरल बॉन्ड एकस्पायर हो गया। अकेले जालान ग्रुप की कंपनी केवेंटर फूडपार्क ने बीजेपी को 144.5, कांग्रेस को 20, अकाली दल को 0.5, यस पी को 10, टी एम सी को 20 करोड़ रुपये दिए।

    जबकि मदनलाल लिमिटेड ने बीजेपी को एकमुश्त 175 करोड़, कांग्रेस को 10 करोड़ और एम के जे ने कांग्रेस को 69.35, आप को 7, टी एम सी को 18.5, बी आर एस को 10, बीजेपी को 12.5, और बी जे डी को 10 करोड़ रुपए दिए। इसके साथ ही एम के जे ने कांग्रेस को 22.25, टी एम सी को 27.4, बीजेपी को 14.07 करोड़ दिए। सस्मल इंफ्रास्ट्रक्चर ने कांग्रेस को 39 करोड़ और बीजेपी को 5 करोड़ दिए।

  • ठंडे पड़ गये हैं भारतीय जनता पार्टी के नेता

    ठंडे पड़ गये हैं भारतीय जनता पार्टी के नेता

    • भारतीय जनता पार्टी के नेता चुनावी समर भूमि में ठंडे पड़ गए हैं..
    • बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में पार्टी की नीतियों का हो रहा है खामियाजा..

    सुरेंद्र राय
    मुंबई-
    बड़ा शोर है भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार का लेकिन मोदी को छोड़कर एक भी चुनावी समर भूमि में सक्रिय नेता नहीं है। सबसे बड़ी 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के नेता चुनाव प्रचार में दूर दूर तक नजर नहीं आते। सबसे बड़ा हिंदुत्व चेहरा हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। जिनकी देश में बड़ी मांग है, लेकिन मोदी की तरह वे कहीं भी चुनावी मूड में नहीं दिखते।

    भारतीय जनता पार्टी का युपी में चुनाव प्रचार

    दो दो डिप्टी सीएम हैं जो अपनी खोल से अभी बाहर ही नहीं निकल सके हैं। प्रांतीय अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी भी कहीं नमूदार नहीं हो रहे। बड़े जोर शोर से ढिंढोरा पिटा गया था, चौधरी चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी का। उन्हें गाजे बाजे के साथ भारतीय जनता पार्टी में लाया गया। यह सोचकर कि उनके दादा चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देकर पश्चिमी यूपी की सारी सीटें बिना प्रचार किए भारतीय जनता पार्टी की झोली में आ गिरेंगी। परंतु अभी भी जयंत चौधरी पशोपेश में हैं। किसान बिरादरी उनके बीजेपी में जाने पर उनसे दूरी बना ली है। अब वे किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह की तरह किसानों के नेता नहीं रह गए हैं। बिना संख्या बल के वे भारतीय जनता पार्टी को कितनी सीटें दिलाएंगे खुद समझ नहीं पा रहे। चुनाव प्रचार तो बड़ी दूर की कौड़ी है उनके लिए। हालत यह हो गई है, “आधी छोड़ सारी को धावे। आधी मिले न सारी पावे।”

    https://indian-fasttrack.com/2024/03/22/why-do-corporates-donate-its-a-business-but-its-dirty-electoral-bond
    Election 2024

    तुरूप का इक्का ..

    भारतीय जनता पार्टी के साथी अनुप्रिया पटेल और बड़बोले अस्तित्वहीन ओमप्रकाश राजभर जिनकी अमित शाह ने उत्तर प्रदेश सरकार में ताजपोशी कराई है। छवि बेहद खराब होने से जनता उनसे कन्नी काटने लगी है। मेनका गांधी और संतोष गंगवार यूपी के आठ आठ बार सांसद रहे हैं। लेकिन उनके टिकट ही पक्के नहीं हुए हैं। करें भी तो क्या? टिकट मिलेगा या नहीं? कहा भी नहीं जा सकता। तुरूप का इक्का होने से रहे।

    भारतीय जनता पार्टी,

    बिहार की संसदीय गठबंधन ..

    सांसदों के लिहाज से बिहार में 40 सीटें होने से बिहार का बड़ा महत्त्व है। वहां गठबंधन तुड़ाकर नीतीश कुमार को भारतीय जनता पार्टी अपने पाले में भले ले आई है लेकिन जनता में उनकी पलटू चाचा की छवि बनने से उनकी खुद की छवि को बड़ा धक्का लगा है। जनता में उनकी पूछ नहीं रही। सुशील मोदी ज़रूर बड़ा चेहरा बने थे, लेकिन वे कहीं चुनाव प्रचार करते नहीं दिखते। राजीव प्रसाद रूडी का कहीं अता पता नहीं है। हरदम मोदी नाम की माला जपने और विपक्षी दलों को बुरा भला कहने वाले रवि शंकर प्रसाद नदारत हैं। उनके अलावा सम्राट चौधरी, गिरिराज सिंह और चौबे सांसद रहे हैं। बड़बोले भी लेकिन चुनाव प्रचार में वे दोनो दूर दूर तक नजर नहीं आते। गिरिराज सिंह का हाल यह है, कि उनकी भारतीय जनता पार्टी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मुर्दाबाद के नारे लगाए और काले झंडे दिखाकर उन्हें क्षेत्र में आने ही नहीं दिया।

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    महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार ..

    सीट के लिहाज से महाराष्ट्र 48 सीटों वाला बड़ा महत्त्वपूर्ण राज्य है। यहां के सबसे बड़े नेता हैं नितिन गडकरी जो भारतीय जनता पार्टी की नीतियों के धुर विरोधी रहे हैं। मुमकिन नहीं कि वे चुनाव प्रचार करेंगे। शिवसेना और राकांपा तोड़कर शिंदे और अजीत पवार के साथी छगन भुजबल, पटेल आदि पर खुद भारतीय जनता पार्टी ने हजारों करोड़ के घोटाले का मामला उठाकर उन्हें अपने साथ लाकर सरकार तो बना ली लेकिन महाराष्ट्र की जनता उन्हें गद्दार कहकर नफरत करती है। कुछ समय बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। उस चुनाव को याद कर ही सिहरने वाले ये नेता चुनाव प्रचार की हिम्मत भला कैसे दिखाएंगे? अपने ही बड़े नेता पूर्व मुख्यमंत्री का कद छोटा कर डिप्टी सी एम बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी उनसे चुनाव में कोई उम्मीद कैसे कर सकती है।

  • देवेंद्र फडणवीस का पीए बताकर 15 लाख की धोखाधड़ी, दो गिरफ्तार

    देवेंद्र फडणवीस का पीए बताकर 15 लाख की धोखाधड़ी, दो गिरफ्तार

    महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस का खुद को पीए बताकर 15 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। (Maharashtra Deputy Chief minister devendra fadnavis News)

    इस्माईल शेख
    मुंबई- शनिवार 23 मार्च, महाराष्ट्र राज्य के उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री देवेन्द्र फडणवीस का पीए बताकर 15 लाख रुपये की धोखाधड़ी किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में मुंबई पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान सुहास महाडिक और किरण पाटिल के रूप में हुई है। मामले की तहकीकात मरीन ड्राइव पुलिस कर रही है। (Maharashtra Deputy Chief minister devendra fadnavis News)

    पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, सुहास महाडिक और किरण पाटिल ने खुद को गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस का पीए बताकर Mumbai की एक सोसाइटी का मामला सुलझाने का प्रयास किया और इसको लेकर फडणवीस के नाम पर 15 लाख वसूले थे। लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो पीड़ित ने शनिवार को इन दोनों के विरुद्ध मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 170, 419, 420 और 34 के तहत मामला दर्ज कराया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को आज ही गिरफ्तार कर लिया है। (Maharashtra Deputy Chief minister devendra fadnavis News)

    https://indian-fasttrack.com/2024/03/21/sangeeta-shashi-nair-has-become-synonymous-with-terror-in-dahisar
    Indian fasttrack news

    लगातार हो रही है धोखाधड़ी ..

    धोखाधड़ी,
    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अमृता फडणवीस की फाइल तस्वीर

    आप को जानकारी देते हुए बताया, कि इससे पहले राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नाम पर धोखाधड़ी करने को लेकर पुलिस ने गिरफ्तारी की थी। इतना ही नहीं देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस से भी रंगदारी मांगने का प्रयास किया गया था। जिसको लेकर पुलिस ने आरोपित पति-पत्नी को गिरफ्तार किया था। (Maharashtra Deputy Chief minister devendra fadnavis News)

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  • कॉरपोरेट देता क्यों है चंदा। धंधा है, पर गंदा है।

    कॉरपोरेट देता क्यों है चंदा। धंधा है, पर गंदा है।

    • कॉरपोरेट सत्तारुढ दल को हजारों करोड़ों का चंदा देते ही क्यों है?
    • चंदे का गंदा धंधा ही ऊपरी स्तर पर भृस्टाचार का मूल है।
    • Electoral Bond ADR Report

    सुरेंद्र राय
    मुंबई:
    अपने देश में चंदा लेना और देना धंधा है पर बहुत ही गंदा है। कॉरपोरेट का काम है अपना बिजनेस ढंग से चलाना। उसे आगे बढ़ाना। फिर प्रश्न उठता है, कि आखिर कॉरपोरेट राजनीतिक दल विशेष रूप से सत्तारूढ़ दल को हजारों करोड़ों का चंदा देते ही क्यों हैं? क्या सरकार उनपर दबाव डालती है? जैसे तीस कंपनियों के पीछे सी बी आई के छापे डलवाकर दबाव बनाया और साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए की प्रोटेक्शन मनी ली गई। जिसकी न्यायिक जांच कर कानूनी कार्रवाई करने की जरूरत है और साथ ही सत्ता प्रतिष्ठान को भी सबक सिखाना अपरिहार्य है। (Electoral Bond ADR Report)

    चंदा देश में गंदा काम ..

    चंदा दो। गलत तरीके से काम करते रहो। टैक्स चोरी करते रहों। बस ध्यान रखना चंदा देते रहो। दूसरा पक्ष है सरकार को चंदा दो और सरकार चंदे से कई गुना लाभ कमाने का अवसर देगी। कॉरपोरेट सेक्टर की लगभग पच्चीस लाख करोड़ की बैंक ऋण माफी इसी चंदे के गंदे धंधे का ही परिणाम थी। सुप्रीमकोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड को गैर संवैधानिक बताकर गंदे खेल की दुखती रग पर हाथ रख दिया है। (Electoral Bond ADR Report)

    https://indian-fasttrack.com/2024/03/17/the-first-phase-of-maharashtra-elections-will-be-held-on-april-19-mumbai-on-may-20
    Member of Parliament Election 2024 India

    एस बी आई जो सरकारी बैंक ने चंदे के गंदे धंधे को छुपाने की कोशिश की लेकिन सुप्रीमकोर्ट ने गर्दन ही मड़ोड दी। कॉर्पोरेट और धनी कर्णवीर जैसा दानी तो होते नहीं। चैरिटी के नाम पर लाल पाई न देने वाले धनवान राजनीतिक दलों को चंदा देते हैं तो वह बिज़नेस में उतनी ही पूंजी लगाते हैं जिसका कई गुना सरकार उन्हें फ़ायदा करती है। यह चंदे का गंदा धंधा ही ऊपरी स्तर पर भ्रष्टाचार का मूल है। (Electoral Bond ADR Report)

    किसने कितना दिया चंदा ?

    चंदा देने की बात करें तो फार्मा से 78.7% , खनन से 18.5% , स्टील से 10.0% , टेलिकॉम से 9% , और सिमेंट उद्योग से 6.1% , प्लास्टिक उद्योग से 0.12% , ऑटो सेक्टर से 0.11% , पेट्रोकेमिकल से 0.02% , पेपर से 0.02% , और ई एम जी सी से 0.01% डोनेशन दिए गए। अकेले फ़रवरी 2024 की बात करें तो बीजेपी को 90%, क्षेत्रीय दलों को 58.2% और कांग्रेस को मात्र 24.2% चंदा मिला। अकेले कोलकाता के संस्थानों में हल्दिया एनर्जी ने 337 करोड़, इसेल माइनिंग एंड इंड्रस्ट्रीज ने 224.5 करोड़ , केवेंटर फुडपार्क इन्फ्रा ने 195 करोड़ , मदनलाल ने 185 करोड़ , और एम के जे इंटरप्राइज में 128 करोड़ रुपए चंदा दिया है। (Electoral Bond ADR Report)

    Electoral Bond ADR Report

    चंदा, Electoral Bond,

    चंदा देने के तरीके भी मजेदार हैं। जैसा कि बॉन्ड खरीदने वालों ने अपने यहां इंट्री की है। वेदांता लिमिटेड ने डोनेशन दिखाकर फ़रवरी 23 में 123 करोड़ और फ़रवरी 24 में 155 करोड़ दिए। भारतीय एयरटेल ने दूसरे व्यय दिखाकर फ़रवरी 23 में 102.5 करोड़ और फ़रवरी 24 में मात्र 30 करोड़ दिए। जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड ने डोनेशन दिखाकर फ़रवरी 23 में 13 करोड़ और फ़रवरी 24 में 25 करोड़ दिए। सिप्ला लिमिटेड ने मिसलेनियस खर्च दिखाकर फ़रवरी 23 में कुछ नहीं तो फ़रवरी 24 में 24.2 करोड़ चंदा दिया। (Electoral Bond ADR Report)

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    टोरेंट पावर लिमिटेड ने डोनेशन दिखाकर फ़रवरी 23 में 27.5 और फ़रवरी 24 में 23 करोड़ दिए। अरबिंदो फार्मा लिमिटेड ने डोनेशन दिखाकर फ़रवरी 23 में 5.5 करोड़ जबकि फ़रवरी 24 में 21.5 करोड़ के बॉन्ड खरीदे। द रामको सिमेंट ने सीधे सीधे डोनेशन दिखाकर फ़रवरी 24 में 20 करोड़ के बॉन्ड खरीदे। हीरो मोटोकॉर्प लिमिटेड ने बॉन्ड नहीं लेकर लिगल तरीके से अंडर सेक्सन 182 ऑफ कंपनीज एक्ट 2023 के अनुसार फ़रवरी 24 में 20 करोड़ सीधे सीधे डोनेशन दिया। कॉमेंट सेल्टर से 233 करोड़ के बॉन्ड लिए गए जिसमें वेदान्त और आदित्य बिरला ग्रुप टॉप पर रहा। (Electoral Bond ADR Report)

    सोचने की बात यह है कि सत्ता दल को करोड़ों रूपए बॉन्ड के द्वारा देने पर फ़रवरी 23 और फ़रवरी 24 में उनकी बैलेंस सीट में कितनी वृद्धि और फ़ायदा मिला। जिसकी न्यायिक जांच कर कानूनी कार्रवाई करने की जरूरत के अलावा सत्ता प्रतिष्ठान को भी सबक सिखाना अपरिहार्य है। (Electoral Bond ADR Report)

  • Maharashtra; राज्य सरकार नहीं चाहती निष्पक्ष चुनाव ?

    Maharashtra; राज्य सरकार नहीं चाहती निष्पक्ष चुनाव ?

    चुनाव अधिकारियों के जरिये खुद के पक्ष में जीत हासिल करने के प्रलोभन में महाराष्ट्र की सरकार तबादले को रोके हुए है। शिंदे सरकार पर उठते सवाल?

    सुरेन्द्र राय
    मुंबई-
    आम चुनाव आते ही बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर का दौर शुरू हो जाता है। सरकारें चुनाव आयोग पर दबाव डालती रहती हैं, ताकि ऐसे अधिकारी रहें जो उसकी पार्टी को चुनाव जीताने में मदद करें। महाराष्ट्र के चुनाव आयोग ने बीएमसी में बहुत समय से अपना साम्राज्य बनाकर बैठे अधिकारियों के ट्रांसफर का आदेश दिए हैं। लेकिन शिंदे सरकार उन्हें हटा नहीं रही। क्यों यह तो सरकार ही बता सकती है?

    महाराष्ट्र चुनाव आयोग के निर्देश।

    सूत्रों के अनुसार बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) कमिश्नर इक़बाल सिंह चहल, उपायुक्त अश्विनी भिड़े और बेलरासू चार-चार साल से अपने पदों पर एक ही जगह बैठे हैं। जिन्हें हटाने का आदेश महाराष्ट्र चुनाव आयोग ने दे दिया है। परन्तु शिंदे सरकार हटाने को तैयार ही नहीं हैं। कारण ये अधिकारी शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के समय पदनिर्देशित किए गए थे। जिन्हें उद्धव ठाकरे गुट के खास भी माने जाते हैं। अगर तीनों बड़े मनपा अधिकारियों के ट्रांसफर नहीं किए गए तो निष्पक्ष चुनाव हो ही नहीं पाएगा। इसकी भी जानकारी सूत्र बताते हैं।

    https://indian-fasttrack.com/2024/03/14/the-slogan-of-every-party-is-all-seats-are-ours
    Indian Political news

    आयुक्त इकबाल सिंह चहल को शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट का माना जाता है। 15 मार्च तक चुनाव आचार संहिता लागू होने वाली है। अतः दो दिनों में तीनों बड़े अधिकारियों को हटाना ज़रूरी है। मगर अभी तक चुनाव आयोग के आदेश के बावजूद हटाया नहीं गया है। ख़बर के मुताबिक, आयुक्त इक़बाल सिंह चहल को सेक्रेटरी बनाया जाना है। या बनना चाहते हैं। इसलिए वे यहां से हटना नहीं चाहते। इसके साथ ही परदेशी को मनपा आयुक्त बनाने की बात चली लेकिन परदेशी ने रुचि नहीं दिखाई और साफ तौर पर मना कर दिया, कि वे इच्छुक नहीं है।

    चुनाव,

    मुख्यमंत्री के बांधें है किसी ने हाथ ..

    चुनाव आयोग की सख्ती और तीनों पदों पर राज्य सरकार किसे लाती है। इस बात को लेकर मुंबई में चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्ष कांग्रेसी नेता विजय वेडेट्टीवार का कहना है, कि मुख्यमंत्री का हाथ किसने बांध दिया है? क्या इन अधिकारियों का दबाव शिंदे पर है? हो सकता है, शिवसेना में रहते हुए शिंदे के तीनों अधिकारियों से मधुर संबंध रहे हों। उन्होंने राज्य चुनाव आयोग के साथ ही केंद्रीय चुनाव आयोग को भी पत्र लिखा है।

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    इसके साथ ही, सुधाकर शिंदे के संदर्भ में आरोप है, कि वे आईएएस नहीं होने के बावजूद भी आईएएस पद पर बैठे हुए हैं।उन्होंने साकीनाका झोपड़पट्टी पुनर्वसन में करोड़ों के घोटाले के साथ ही फर्जी लोगों को जालसाजी कर आवास आवंटन करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने सीट से जांच कराने की भी मांग की है।

  • हर दल का नारा है, सारा सीट हमारा है।

    हर दल का नारा है, सारा सीट हमारा है।

    देश में चुनावी बिगुल बजने की तैयारी जोरों-शोरों से की जा रही है। किसी का टिकट कटा तो किसी ने पाला बदला। समय ही बताएगा कि ऊंट किस करवट बैठता है।

    वी बी माणिक
    मुंबई
    – समय आ गया चुनावी बिगुल बजने वाला है। सारे योद्धा मल्ल युद्ध की तैयारी में जी-जान से जुट गए है। जिन पहलवानों को टिकट नही मिलने वाला है वह अपने भाग्य की आज़माइश निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अखाड़े में उतरेंगे और अपने दल का सत्यानाश करेंगे। (indian politics and election News)

    सभी राजनीतिक दल अपने सारे हथियारों पर धार देना शुरू कर दिया है। टीवी चैनलों पर ओपिनियन पोल आने शुरू हो गए है। सारे चैनल कौन जीतेगा? कौन हारेगा? इसकी भविष्यवाणी कर रहे है। जो कि परिणाम के बाद सब गलत साबित होता है। इसके साथ ही इन नेताओं की पत्नियां मन्दिरो में जाकर बड़े-बड़े मन्नत चुनाव जीतने के लिए मांग रही है। भले ही पांच वर्ष मंदिर में पूजा नही करती है। बड़े पैमाने पर दल बदल भी शुरू हो गया है। हर जगह चुनावी सभाएं, संपर्क अभियान, भारत जोड़ो यात्रा, लूट हत्या, अपहरण की घटनाएं बढ़ती जा रही है। (indian politics and election News)

    अपराधियों को लोकसभा में घुसाने की तैयारी ..

    अनेको प्रकार के आश्वासन, प्रलोभन भी दिए जा रहे हैं। इस बार तो कई माफियाओ और अपराधियों को टिकट देकर लोकसभा में भेजने की तैयारी की जा रही है। जन मानस सोच में पड़ गया है कल ये गुंडा इस पार्टी में था अब इसको दूसरी पार्टी ने चुनाव का टिकट दिया? अगर सही मायने में देखा जाय तो करीब 50 प्रतिशत लोग स्वेच्छा से मतदान करना ही नही चाहते 30 प्रतिशत लोग मतदान के दिन अपना घर छोड़कर घूमने निकल जाते है। (indian politics and election News)

    Mumbai congress and shivsena maha vikas aghadi gatbandhan news

    मुफ्त की शराब ..

    इनके नाम पर फर्जी मतदान करवाया जाता है। बूथ कैप्चरिंग, मतपेटी गायब करना बंदूक की नोक पर बूथ पर पूरी तरह कब्जा करके अपने प्रत्याशी को विजयी बनाने के लिए राजनीतिक पार्टीया पूरी तैयारियां करती है। फिर भी साफ सुथरी चरित्रवान छवि ईमानदार कर्मठ नेता कहलाते है और वोट के लिए नोटों के बंडल के साथ शराब मुफ्त में वितरण करवाना ये सब तैयारियां शुरू हो गयी है। (indian politics and election News)

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    Indian वोट किसे दें ?

    सभी राजनीतिक दल नए-नए हथकंडे अपनाएंगे। अभी भी लोग असमंजस में है, वो किसको वोट दें? किसको न दें? वही दूसरी ओर चुनाव आयोग भी पूरी निष्पक्षता से काम नही करता। सभी उम्मीदवारों की आपराधिक घटनाओं की जाँच करवाना चाहिए जिसके ऊपर एक भी केस विचारसधीन हो या पुलिस में दर्ज हो उसको चुनाव लड़ने से वंचित कर देना चाहिए। पर चुनाव आयोग इस तरह की न्यायिक कार्यवाही कर नही सकता। क्योंकि चुनाव आयोग कोई कार्य, निष्पक्षता से नही करता है। अपने समय पर चुनाव करवाये समय पर सारे कार्य करे ये भी राजनीतिक दलों के हाथ की कठपुतली बने हुए हैं। (indian politics and election News)

    आजकल में ही आचार संहिता लगने वाला है ये सभी दलों को मालूम है। कुछ पार्टीयो ने तो अभी तक अपने प्रत्याशियों का चयन भी नही किया है। सभी प्रत्याशियों के सम्पत्ति की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पर चुनाव आयोग ये कभी नही करवाएगा। जो उम्मीदवार पहले जीतकर लोकसभा में रह चुके है। उनकी जाँच काफी गम्भीरतापूर्वक होनी चाहिए, कि इस सांसद के पास इतना धन संपत्ति कहां से आया है। इसके पहले कितना था चुनावी चंदे के चक्कर मे बैंक ही आरोप के कटघरे में खड़ा हो गया। (indian politics and election News)

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    कौन है ईमानदार ?

    अब ईमानदार कौन रह गया? ये सबसे बड़ा प्रश्न खड़ा हो गया है। जहाँ आचार संहिता लागू हुआ कोई भी आम नागरिक लाख पचास हजार रुपये लेकर नही चल पाएगा। उसको स्थानीय पुलिस परेशान करेगी इसके अलावा ईडी, सीबीआई छापेमारी और तेज हो जाएगी। कुछ पकड़े जाएंगे, कुछ छोड़े जाएंगे। हर पार्टीया दावा कर रही है, कि इस बार सत्ता हमारी आएगी। पर इसका फैसला तो देश का मतदाता करने वाला है। पर नेताओ के दावे बड़े बड़े है काम किसी का नही दिखाई पड़ रहा है। अब आगे चलकर देखना है, कि ऊंट किस करवट बैठता है। (indian politics and election News)

  • Maharashtra: उद्धव ठाकरे को और एक झटका

    Maharashtra: उद्धव ठाकरे को और एक झटका

    पूर्व शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नेता रवींद्र वायकर शिंदे की सेना में शामिल। वायकर चार बार बीएमसी स्थायी समिति के अध्यक्ष और मुंबई के जोगेश्वरी क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे हैं।

    नितिन तोरस्कर (मंत्रालय प्रतिनिधि)
    मुंबई-
    उद्धव ठाकरे गुट के कद्दावर नेता और ठाकरे परिवार के करीबी रवींद्र वायकर रविवार रात एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। वर्षा बंगले में वायकर को एकनाथ शिंदे ने अपनी पार्टी में शामिल किया। वायकर चार बार बीएमसी स्थायी समिति के अध्यक्ष और मुंबई के जोगेश्वरी क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे हैं।

    मीडिया से बात करते हुए वायकर ने कहा, वह 1974 से बाला साहेब ठाकरे के साथ हैं। “मैं पार्टी और सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर था।” यूबीटी शिवसेना छोड़ने की वजह पर बात करते हुए वायकर ने कहा, ”आरे कॉलोनी की 45 किलोमीटर सड़कों के निर्माण जैसे कई काम लंबित हैं। मुझे उन सड़कों के निर्माण के लिए कम से कम 173 करोड़ रुपये की जरूरत है। इसके अलावा मेरे विधानसभा क्षेत्र के सर्वोदय नगर में कई जर्जर इमारतें हैं। उन इमारतों का पुनर्विकास करना होगा और सरकार से बाहर रहते हुए ऐसे काम नहीं हो सकते।”

    वायकर ने कहा, “मैंने देश में पीएम नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे जी द्वारा किए गए बेहद अच्छे काम को देखा है। इसलिए, मैं एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो रहा हूं।”

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    सीएम एकनाथ शिंदे ने भी उनका स्वागत किया और कहा, “अन्य नेताओं की तरह वायकर भी महाराष्ट्र में महायुति सरकार और केंद्रीय स्तर पर मोदीजी द्वारा किए गए विकास कार्यों से प्रभावित हैं। शिवसेना में लगातार इजाफ़ा हो रहा है।”

    उद्धव ठाकरे,

    विपक्ष का दावा ..

    हालांकि, विपक्षी नेता विजय वेडट्टिवार ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि रवींद्र वायकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ जा रहे हैं। उन्हें ईडी और आयकर जैसी एजेंसियों ने परेशान किया था। जब उन्होंने हमसे बात की तो वह भावुक थे। उन पर दबाव है।” इसलिए वह एकनाथ वाली शिवसेना में शामिल हो रहे हैं।”

    उद्धव ठाकरे ने क्या कहा ?

    गोरेगांव में रैली को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, “अगर कोई सोच रहा है, कि यूबीटी सेना के विधायक चुराने के बाद पार्टी पर असर पड़ेगा तो मैंने आपको स्पष्ट कर दिया है, कि इससे मेरी पार्टी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मेरी रैलियों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। बड़ी हस्तियां पार्टी छोड़ दी है लेकिन जिन लोगों ने उन्हें बड़ा बनाया वे अब भी मेरे साथ हैं।”

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    मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा उसके पीछे थी। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, कि वायकर ने जोगेश्वरी इलाके में बगीचे के लिए आरक्षित भूमि पर कब्जा कर लिया है।

  • उद्धव की घोषणा पर भड़के कांग्रेस नेता संजय निरुपम

    उद्धव की घोषणा पर भड़के कांग्रेस नेता संजय निरुपम

    चुनावी टिकट के बंटवारे पर भड़के संजय निरुपम। कहा, कांग्रेस को नीचा दिखाने के लिए ऐसी हरकत जानबूझकर की जा रही है।

    नितिन तोरस्कर (मंत्रालय प्रतिनिधि)
    मुंबई
    – महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी में सब कुछ ठीक नहीं है। दरअसल शिवसेना (UBT) ने मुंबई की उत्तर-पश्चिम लोकसभा सीट से पार्टी उम्मीदवार के तौर पर शनिवार को अमोल कीर्तिकर का नाम घोषित किया है। इसको लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम भड़क गए। कहा, कि कांग्रेस को नीचा दिखाने के लिए जानबूझकर ऐसी हरकत की जा रही है।

    संजय निरुपम ने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा अमोल कीर्तिकर को उम्मीदवार घोषित किए जाने पर सवाल खड़ा कर दिया है। संजय निरुपम ने कहा, कि शिवसेना (UBT) ने उत्तर पश्चिम सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया, जबकि अभी तक सीट बटवारे पर फैसला नहीं हुआ है। संजय निरुपम ने कहा, कि 8 से 9 सीटें पेंडिंग है और उसमें से एक उत्तर पश्चिम की सीट भी है। उद्धव ठाकरे गठबंधन धर्म का उल्लंघन कल रहे है।

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    कांग्रेसी नेता संजय निरुपम ने उद्धव ठाकरे के उम्मीदवार पर कई आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, कि ‘कांग्रेस को नीचा दिखाने के लिए ऐसी हरकत जानबूझकर की जा रही है। उद्धव ठाकरे ने जिस उम्मीदवार का नाम प्रस्तावित किया है वह कौन है? वह खिचड़ी स्कैम का घोटालेबाज है। उसने खिचड़ी सप्लायर से बैंक चेक के जरिये रिश्वत ली है।’

    कांग्रेस,
    उत्तर पश्चिम एकनाथ शिंदे के सांसद गजानन कार्तिक एवं उद्धव ठाकरे के साथ अमोल कार्तिक की फाइल तस्वीर

    संजय निरुपम ने कहा, ‘कोविड के समय प्रवासी मजदूरों को बीएमसी की तरफ से मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया गया था। यह एक सराहनीय कार्य था लेकिन गरीबों के खाने में से शिवसेना के उम्मीदवार ने कमीशन खाया है और ईडी मामले की जांच कर रही है। क्या ऐसे घोटालेबाज उम्मीदवार के लिए कांग्रेस और शिवसेना के कार्यकर्ता प्रचार करेंगे? दोनों पार्टी के नेतृत्व से मेरा यह सवाल है।’

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    अमोल कीर्तिकर के पिता गजानन कीर्तिकर हैं सांसद

    आप जानकारी देते हुए बता दें, कि उत्तर पश्चिम लोकसभा सीट से अमोल कीर्तिकर के पिता गजानन कीर्तिकर इस वक्त के मौजूदा सांसद हैं। गजानन कीर्तिकर उद्धव ठाकरे की शिवसेना से संसदीय चुनाव जितने के बाद पार्टी से बगावत कर शिंदे गुट मे पाला बदल लिया है। कार्तिक इस वक्त महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना में हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की ओर से संजय निरुपम ने उत्तर पश्चिम लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था और यहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा। शिवसेना उम्मीदवार गजानन कीर्तिकर ने संजय निरुपम को 2 लाख 60 हज़ार से भी अधिक वोटों से हराया था।

  • कांग्रेस विधायक वर्षा गायकवाड़ समेत 16 पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज

    कांग्रेस विधायक वर्षा गायकवाड़ समेत 16 पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज

    बिना इजाज़त सफाईकर्मियों के साथ मनपा (BMC) मुख्यालय के बाहर कांग्रेस और एनसीपी द्वारा निकाले गए मोर्चा के मामले विधायक वर्षा गायकवाड़ समेत 16 पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज।

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    सफाईकर्मियों के साथ मनपा (BMC) मुख्यालय के बाहर कांग्रेस और एनसीपी द्वारा निकाले गए मोर्चा के मामले में आजाद मैदान पुलिस ने विधायक एवं पूर्व शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ समेत 16 पदाधिकारियों और 60 से 70 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि बिना अनुमति के मोर्चा निकालने का मामला दर्ज किया गया है। (Mumbai case filed against Varsha Gaikwad)

    मुंबई की विशेष मलिन बस्तियों में स्वच्छता के लिए ठेकेदारी प्रथा अपनाई जा रही है। ठेका प्रथा से दैनिक मजदूरों के सामने भुखमरी की नौबत आ जायेगी है। इसलिए सफाई कर्मचारी संगठनों ने बुधवार को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर मांग किया, कि मनपा (BMC) प्रशासन 1200 करोड़ रुपये के टेंडर रद्द करें। इस आंदोलन में कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार ग्रुप), आप, कम्युनिस्ट पार्टी और इंडिया गठबंधन की सहयोगी पार्टियों ने हिस्सा लिया। (Mumbai Congress Party Varsha Gaikwad News)

    इस आंदोलन की पृष्ठभूमि में बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) मुख्यालय के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। मनपा मुख्यालय और सामने की सड़कों को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया गया था। प्रदर्शनकारियों ने इस सड़क को जाम कर मुख्यालय में घुसने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने मनपा कमिश्नर इकबाल सिंह चहल से मिलने की कोशिश की। (Mumbai Congress Party Varsha Gaikwad News)

    https://indian-fasttrack.com/2023/03/27/strange-hospital-strange-doctor

    मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़..

    पुलिस बल ने उन्हें मुख्यालय जाने से रोक दिया। पुलिस सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर आजाद मैदान थाने ले गई। आज़ाद मैदान पुलिस ने मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ के साथ प्रकाश रेड्डी और 15 अन्य पदाधिकारियों के साथ-साथ 60 से 70 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। अधिकारी ने बताया, कि बिना इजाजत मोर्चा निकालने और आदेश का उल्लंघन करने का के लिए भारतीय दंड संहिता सहित मुंबई पुलिस की धारा 143, 145, 149 के साथ 188 के तहत मामला दर्ज किया गया है। (Mumbai Congress Party Varsha Gaikwad News)

    कांग्रेस,

    मंत्रालय के सामने किया सड़क जाम ..

    युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा बुधवार को मंत्रालय के यहां सड़क जाम कर दिया था। उस मामले में मरीन ड्राइव पुलिस ने यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कुणाल राउत और 17 कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इलेक्ट्रो बांड के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मांगी गई सूची एसबीआई द्वारा अब तक नहीं दिए जाने के विरोध में युवा कांग्रेस ने बुधवार को मंत्रालय के पास सड़क रोककर प्रदर्शन किया था। उस वक्त सभी अधिकारियों को हिरासत में लेकर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। इन सभी को नोटिस देकर रिहा कर दिया गया। (Mumbai Congress Party Varsha Gaikwad News)

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