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Iran crisis और global oil supply impact के बीच Modi Government ने घरेलू इस्तेमाल के लिए kerosene supply बढ़ाने का फैसला लिया। जानिए कौन-कौन से राज्यों में मिलेगा फायदा।
नई दिल्ली: दुनिया में बढ़ते Energy Crisis और ईरान से जुड़े तनाव के बीच नरेंद्र मोदी सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत दी है।
मुंबई स्टाइल में बोले तो – “अब गैस की टेंशन थोड़ी कम होने वाली है भाई!”
रविवार को केंद्र सरकार ने ऐलान किया कि घरेलू जरूरतों के लिए kerosene distribution rules में ढील दी जाएगी, ताकि लोगों को खाना बनाने और रोशनी के लिए परेशानी न हो।
Middle East Crisis का सीधा असर
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान संकट के चलते global oil supply पर असर साफ दिख रहा है।
सप्लाई चेन डिस्टर्ब fuel prices में उतार-चढ़ाव LPG availability पर दबाव
इसी को ध्यान में रखते हुए Ministry of Petroleum and Natural Gas ने kerosene supply बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है।
क्या है सरकार का नया फैसला?
सरकार ने पेट्रोलियम से जुड़े safety और licensing rules में temporary relaxation दिया है।
इसका मकसद:
आम लोगों को तुरंत राहत
fuel shortage से बचाव
rural और गरीब इलाकों में energy access बढ़ाना
इन 21 राज्यों/UTs में मिलेगा फायदा
सरकार ने साफ किया है कि यह सुविधा देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी:
दिल्ली (NCT)
चंडीगढ़
हरियाणा
पंजाब
दादरा और नगर हवेली और दमन-दीव
पुडुचेरी
आंध्र प्रदेश
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
गोवा
गुजरात
उत्तराखंड
लक्षद्वीप
जम्मू-कश्मीर
लद्दाख
तेलंगाना
हिमाचल प्रदेश
नागालैंड
मध्य प्रदेश
सिक्किम
👉 यानी देश के बड़े हिस्से में अब kerosene आसानी से उपलब्ध होगा।
India में petrol diesel shortage की अफवाहों पर IOC, BPCL और HPCL का बड़ा बयान। Fuel supply पूरी तरह stable, panic buying से बचने की अपील। जानिए latest fuel price और पूरा अपडेट।
नई दिल्ली: भारत में पेट्रोल और डीजल की कमी को लेकर चल रही अफवाहों के बीच सरकारी तेल कंपनियों ने बड़ा बयान जारी किया है। Indian Oil Corporation (IOC), Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited ने साफ कहा है कि देश में fuel shortage जैसी कोई स्थिति नहीं है।
कंपनियों ने अफवाहों को बताया गलत
IOC ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रही खबरें “भ्रामक” हैं और इससे लोगों में बेवजह चिंता पैदा हो रही है। BPCL ने इन रिपोर्ट्स को “completely unfounded” बताया और कहा कि भारत के पास petrol, diesel, crude oil और ATF का पर्याप्त स्टॉक है। HPCL ने भी कहा कि petrol, diesel और LPG की सप्लाई पूरी तरह stable है।
West Asia तनाव के बीच भी सप्लाई मजबूत
यह बयान ऐसे समय आया है जब West Asia में युद्ध चौथे हफ्ते में है और Strait of Hormuz से गुजरने वाले oil tankers की आवाजाही सीमित हो गई है। इसके बावजूद भारत में fuel supply पर कोई असर नहीं पड़ा है।
Panic Buying से बचने की अपील
तेल कंपनियों ने लोगों से खास अपील की है कि वे panic buying न करें। कंपनियों के मुताबिक, ऐसी अफवाहें सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती हैं और अनावश्यक दबाव बना सकती हैं।
Fuel Prices में नहीं हुआ बड़ा बदलाव
26 मार्च के हिसाब से:
दिल्ली: Petrol ₹94.77 / Diesel ₹87.67
मुंबई: Petrol ₹103.50 / Diesel ₹90.03
Regular petrol और diesel की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
हालांकि, पिछले हफ्ते premium petrol की कीमत करीब ₹2 प्रति लीटर और industrial diesel की कीमत ₹22 प्रति लीटर बढ़ाई गई थी।
Premium Fuel का असर बहुत कम
कंपनियों के अनुसार premium petrol का इस्तेमाल कुल उपभोक्ताओं के 5% से भी कम लोग करते हैं, इसलिए इसका आम जनता पर ज्यादा असर नहीं पड़ता।
भारत 40 से ज्यादा देशों से crude oil खरीदता है, जिसमें Russia और Iran जैसे देश भी शामिल हैं। इसी diversified sourcing की वजह से supply stable बनी हुई है और कीमतों को नियंत्रित रखा जा सका है।
WordCamp Bhopal 2025 भोपाल में आयोजित होने वाला सेंट्रल इंडिया का प्रमुख WordPress सम्मेलन है, जहां 400+ डेवलपर्स, डिज़ाइनर्स और डिजिटल प्रोफेशनल्स एक मंच पर जुटेंगे।
मध्यप्रदेश: सेंट्रल इंडिया के टेक इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी खबर है। WordCamp Bhopal 2025 इस साल भोपाल में आयोजित होने जा रहा है, जो WordPress कम्युनिटी के लिए एक खास और बहुप्रतीक्षित इवेंट माना जा रहा है। यह एक volunteer-driven WordPress conference है, जहां टेक्नोलॉजी, ओपन-सोर्स और कम्युनिटी की ताकत एक ही मंच पर देखने को मिलेगी।
इस साल के WordCamp Bhopal में 400 से ज्यादा प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें डेवलपर्स, डिज़ाइनर्स, ब्लॉगर, स्टार्टअप फाउंडर्स, डिजिटल एंटरप्रेन्योर और WordPress के शौकीन लोग शामिल होंगे।
WordPress: दुनिया का सबसे लोकप्रिय CMS
WordPress आज दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला open-source content management system है, जो लाखों वेबसाइट्स को पावर करता है। ब्लॉगिंग से लेकर बड़े कॉर्पोरेट पोर्टल, ई-कॉमर्स साइट्स और सरकारी वेबसाइट्स तक — WordPress हर जगह मौजूद है।
WordCamp जैसे इवेंट्स इसी ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म की ताकत और कम्युनिटी स्पिरिट को सेलिब्रेट करने के लिए आयोजित किए जाते हैं।
कौन-कौन होंगे शामिल?
WordCamp Bhopal 2025 में हिस्सा लेने वालों में शामिल होंगे:
WordPress Developers
Web & UI/UX Designers
Bloggers और Content Creators
Digital Entrepreneurs
Educators और Students
Open-source Contributors
यह इवेंट टेक एक्सपर्ट्स और नए सीखने वालों — दोनों के लिए फायदेमंद रहेगा। यह इवेंट टेक एक्सपर्ट्स और नए सीखने वालों — दोनों के लिए फायदेमंद रहेगा। इस इवेंट को बुक करने के लिए यहां क्लिक करें — https://bhopal.wordcamp.org/
इस सम्मेलन में inspiring talks, hands-on workshops और real-world case studies पेश की जाएंगी। WordPress सिक्योरिटी, परफॉर्मेंस, SEO, थीम और प्लगइन डेवलपमेंट जैसे अहम विषयों पर एक्सपर्ट्स अपने अनुभव साझा करेंगे।
इसके अलावा, यह इवेंट नेटवर्किंग के लिहाज से भी बेहद खास है, जहां लोग इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स से सीधे जुड़ सकते हैं।
भोपाल की बढ़ती WordPress कम्युनिटी
भोपाल की WordPress कम्युनिटी पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। WordCamp Bhopal 2025 इसी बढ़ती हुई कम्युनिटी की ताकत को दिखाता है। यह इवेंट पूरी तरह inclusive और welcoming atmosphere में आयोजित किया जाएगा, जहां हर किसी को सीखने और जुड़ने का मौका मिलेगा।
सेंट्रल इंडिया के टेक इकोसिस्टम को मिलेगा फायदा
WordCamp Bhopal 2025 सिर्फ एक कॉन्फ्रेंस नहीं, बल्कि सेंट्रल इंडिया के डिजिटल और टेक इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने का एक मजबूत कदम है। इससे नए स्टार्टअप्स, फ्रीलांसर्स और टेक टैलेंट को पहचान मिलेगी।
FAQ
Q1. WordCamp Bhopal 2025 क्या है? यह एक WordPress-focused टेक कॉन्फ्रेंस है, जो भोपाल में आयोजित होगी।
Q2. इसमें कितने लोग शामिल होंगे? लगभग 400+ प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है।
Q3. यह इवेंट किसके लिए है? डेवलपर्स, डिज़ाइनर्स, ब्लॉगर, एंटरप्रेन्योर और WordPress यूजर्स के लिए।
Q4. WordCamp क्यों खास होता है? क्योंकि यह पूरी तरह कम्युनिटी-ड्रिवन और ओपन-सोर्स स्पिरिट पर आधारित होता है।
बिना हेलमेट बाइक चलाने पर अब चालान की प्रक्रिया बदली जाएगी। ट्रैफिक डिपार्टमेंट ने ई-चालान सिस्टम शुरू किया है, जो AI कैमरों से चालान जनरेट करेगा। जानिए नया नियम क्या कहता है और किन शहरों में लागू हुआ है।
नई दिल्ली: भारत में बाइक और स्कूटर चलाने वालों के लिए बड़ी खबर आई है। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने बिना हेलमेट चालान से जुड़े नियमों में बड़ा तकनीकी बदलाव किया है। अब से चालान सीधे मौके पर नहीं, बल्कि ई-चालान सिस्टम के जरिए काटा जाएगा।
इस बदलाव का मकसद ट्रैफिक सिस्टम को ज़्यादा पारदर्शी, स्मार्ट और रिश्वत-मुक्त बनाना है। हालांकि हेलमेट पहनना अब भी अनिवार्य रहेगा।
नया नियम क्या कहता है?
अब ट्रैफिक पुलिस मैन्युअल रूप से चालान काटने की बजाय AI-सक्षम कैमरा सिस्टम पर निर्भर होगी। अगर किसी सड़क या चौराहे पर CCTV या ट्रैफिक कैमरा लगा है और किसी बाइक सवार ने बिना हेलमेट वाहन चलाया, तो सिस्टम वाहन की नंबर प्लेट स्कैन कर चालान अपने आप जनरेट कर देगा।
यानी कि अगर कैमरा कवरेज है, तो चालान ऑटोमेटिक होगा। अगर कैमरा नहीं है, तो ट्रैफिक पुलिस मौके पर चालान काट सकती है।
हेलमेट की अनिवार्यता अब भी बरकरार
नए नियम का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि बिना हेलमेट चलाना अब छूट गया है। मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicle Act) के तहत, बाइक चालक और पीछे बैठने वाला दोनों के लिए हेलमेट पहनना जरूरी है। अगर आप बिना हेलमेट पकड़े गए, तो चालान तो कटेगा ही — बस तरीका अब डिजिटल होगा।
देशभर के कई शहरों में हाईटेक AI ट्रैफिक कैमरे लगाए जा रहे हैं। ये कैमरे न सिर्फ बिना हेलमेट बल्कि सीट बेल्ट, रेड लाइट जंप, मोबाइल यूज़ जैसे उल्लंघनों को भी पहचान सकते हैं।
इन कैमरों से
वाहन की नंबर प्लेट स्कैन होती है
सिस्टम डेटा को ट्रैफिक सर्वर भेजता है
और ई-चालान सीधे वाहन मालिक के नाम जारी होता है
इससे भ्रष्टाचार, झगड़े और गलत चालान की संभावना खत्म हो जाती है।
फिलहाल यह सिस्टम देश के कई बड़े शहरों में शुरू किया जा चुका है— 📍 दिल्ली 📍 लखनऊ 📍 भोपाल 📍 पुणे 📍 जयपुर 📍 अहमदाबाद
अब धीरे-धीरे इसे छोटे शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर भी लागू किया जा रहा है।
सड़क सुरक्षा और पारदर्शिता पर जोर
सरकार का लक्ष्य सिर्फ चालान बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाना है। सड़क हादसों में सबसे ज़्यादा मौतें बिना हेलमेट के होती हैं। AI आधारित सिस्टम से अब यह पता लगाना आसान होगा कि किसने नियम तोड़े, और यह सब बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के होगा।
FAQs
Q1. क्या अब बिना हेलमेट चलाने पर चालान नहीं कटेगा? चालान अभी भी कटेगा, लेकिन अब यह ऑटोमेटिक ई-चालान सिस्टम से कैमरा मॉनिटरिंग के जरिए होगा।
Q2. क्या हेलमेट पहनना अब वैकल्पिक हो गया है? नहीं, हेलमेट अब भी जरूरी है। बिना हेलमेट बाइक चलाना अभी भी ट्रैफिक नियम का उल्लंघन है।
Q3. किन शहरों में यह नया सिस्टम लागू हुआ है? दिल्ली, लखनऊ, भोपाल, पुणे, जयपुर और अहमदाबाद में यह सिस्टम सक्रिय है।
Q4. क्या पुलिस अब चालान नहीं काटेगी? जहां कैमरा कवरेज नहीं है, वहां पुलिस मैन्युअल रूप से चालान काट सकती है।
Q5. क्या इससे गलत चालान की संभावना कम होगी? हां, क्योंकि यह सिस्टम AI आधारित है और मानवीय त्रुटियों या पक्षपात की गुंजाइश नहीं रहती।
कैनरा बैंक ने 3500 अप्रेंटिस पदों के लिए भर्ती निकाली है। ग्रेजुएट उम्मीदवारों के लिए यह शानदार मौका है ₹15,000 मासिक स्टाइपेंड और बैंकिंग सेक्टर में करियर शुरू करने का। आवेदन की आखिरी तारीख 12 अक्टूबर 2025 है।
डिजिटल डेस्क मुंबई: अगर आप हाल ही में ग्रेजुएशन पूरी कर चुके हैं और बैंकिंग सेक्टर में अपना करियर शुरू करना चाहते हैं, तो आपके लिए बड़ी खुशखबरी है। Canara Bank ने पूरे भारत में 3500 अप्रेंटिस पदों के लिए भर्ती निकाली है। यह मौका सिर्फ एक साल का अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम नहीं, बल्कि एक सुनहरा गेटवे है बैंकिंग सेक्टर में करियर की शुरुआत का।
प्रोफाइल 100% पूरी करें और एनरोलमेंट नंबर प्राप्त करें।
कैनरा बैंक की वेबसाइट पर जाएं – [canarabank.com → Careers → Recruitment]
“Engagement of Graduate Apprentices 2025” लिंक पर क्लिक करें।
“New Registration” पर जाकर बेसिक जानकारी भरें।
आवेदन फॉर्म भरें और सभी दस्तावेज़ अपलोड करें।
₹500 फीस ऑनलाइन पे करें (General/OBC/EWS के लिए)।
फाइनल सबमिट कर आवेदन प्रिंट निकाल लें।
आवेदन शुल्क (Application Fees)
कैटेगरी
फीस
SC/ST/PwBD
NIL
General/OBC/EWS
₹500/-
FAQ
1- कैनरा बैंक अप्रेंटिस भर्ती 2025 के लिए आवेदन कब तक कर सकते हैं? आवेदन की आखिरी तारीख 12 अक्टूबर 2025 है।
2- इस भर्ती के लिए परीक्षा होगी या नहीं? नहीं, चयन मेरिट (12वीं/डिप्लोमा मार्क्स) के आधार पर होगा।
3- क्या अप्रेंटिस को परमानेंट नौकरी मिलेगी? यह एक साल का अप्रेंटिस प्रोग्राम है, लेकिन प्रदर्शन अच्छा होने पर भविष्य में स्थायी अवसरों की संभावना बढ़ सकती है।
4- स्टाइपेंड कितना मिलेगा? कुल ₹15,000 प्रति माह — जिसमें ₹10,500 बैंक और ₹4,500 सरकार की तरफ से मिलेगा।
5- कौन आवेदन नहीं कर सकता? जिनके पास पहले से एक साल से ज़्यादा का जॉब अनुभव है या जिन्होंने पहले अप्रेंटिसशिप की है, वे आवेदन नहीं कर सकते।
अनिल अंबानी की Reliance Infrastructure Ltd पर ED की बड़ी कार्रवाई। मुंबई और इंदौर में 6 ठिकानों पर छापेमारी, विदेशी मुद्रा कानून उल्लंघन (FEMA) मामले में जांच जारी।
मुंबई: कारोबारी जगत में आज एक बार फिर से हलचल मच गई जब एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने इंडस्ट्रियलिस्ट अनिल अंबानी की Reliance Infrastructure Limited (R-Infra) के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की। मुंबई और इंदौर में एक साथ 6 जगहों पर छापेमारी की जा रही है। यह पूरा मामला कथित रूप से विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन और विदेश में अवैध धन भेजने से जुड़ा बताया जा रहा है।
ED की छापेमारी से मचा हड़कंप
ED अधिकारियों के मुताबिक, जांच एजेंसी ने मंगलवार सुबह से ही मुंबई और इंदौर के 6 ठिकानों पर रेड शुरू की। इनमें से कुछ दफ्तरों से लेकर निजी प्रॉपर्टीज भी शामिल हैं। जांच का फोकस इस बात पर है कि रिलायंस इंफ्रा के जरिए विदेशों में अवैध तरीके से धन ट्रांसफर तो नहीं किया गया।
मामला क्या है?
ED की ये कार्रवाई दरअसल FEMA यानी Foreign Exchange Management Act के उल्लंघन से जुड़ी है। आरोप है कि रिलायंस इंफ्रा के जरिए करोड़ों रुपए की रकम विदेशों में भेजी गई और उसकी जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या संबंधित एजेंसियों को ठीक तरीके से नहीं दी गई। इस मामले में पहले से ही कुछ वित्तीय अनियमितताओं की रिपोर्ट्स सामने आ चुकी थीं। अब ED ने कार्रवाई करते हुए छापेमारी शुरू कर दी है।
अनिल अंबानी की Reliance Group बीते कई सालों से आर्थिक मुश्किलों में फंसी रही है। खासकर रिलायंस कम्युनिकेशंस और उससे जुड़ी कंपनियों के कर्ज के मामले पहले ही काफी सुर्खियों में रह चुके हैं। अब Reliance Infrastructure पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ED यह पता लगाने में जुटा है कि आखिर कंपनी ने अपनी फॉरेन डीलिंग्स में किस तरह के नियम तोड़े और कितना पैसा विदेश भेजा गया।
छापेमारी के दौरान क्या मिला?
हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी कोई बड़ा खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, ED टीम ने कई अहम दस्तावेज और डिजिटल डेटा जब्त किया है। इसमें कंपनी के अकाउंट्स, फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन और ईमेल्स शामिल हो सकते हैं। जानकारी ये भी मिल रही है कि एजेंसी कुछ शेल कंपनियों और विदेशी खातों की भी जांच कर रही है जिनके जरिए कथित रूप से पैसे ट्रांसफर किए गए।
अनिल अंबानी का बयान क्या है?
फिलहाल अनिल अंबानी या Reliance Infrastructure की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि कंपनी ED की जांच में पूरा सहयोग कर रही है।
ED की जांच का दायरा और बढ़ सकता है
ED की इस रेड को सिर्फ शुरुआत माना जा रहा है। अगर छापेमारी में पुख्ता सबूत मिलते हैं तो आने वाले दिनों में अनिल अंबानी समेत कंपनी के कई टॉप एग्जीक्यूटिव्स से पूछताछ की जा सकती है। इसके अलावा, मामला कोर्ट तक भी पहुंच सकता है।
अनिल अंबानी और विवादों का पुराना रिश्ता
अनिल अंबानी का नाम इससे पहले भी कई विवादों में आ चुका है।
राफेल डील विवाद के दौरान उनका नाम काफी चर्चा में रहा।
उनकी कंपनियों पर भारी-भरकम कर्ज चढ़ा और कई बार उन्हें कोर्ट में भी पेश होना पड़ा।
अनिल अंबानी को 2019 में लंदन कोर्ट ने भी संपत्ति और कर्ज मामले में तलब किया था।
अब Reliance Infrastructure पर यह नई कार्रवाई उनके लिए एक और बड़ा झटका मानी जा रही है।
क्या है FEMA कानून?
Foreign Exchange Management Act (FEMA) भारत का वो कानून है जिसके जरिए विदेशों में पैसे भेजने और वहां से पैसे लाने पर निगरानी रखी जाती है। अगर कोई कंपनी या व्यक्ति बिना नियमों का पालन किए विदेशी करेंसी में ट्रांजेक्शन करता है, तो ये गंभीर अपराध माना जाता है और ED जैसी एजेंसियां सीधे जांच में उतर जाती हैं।
आर्थिक जगत में चर्चा का माहौल
इस खबर के सामने आने के बाद मुंबई के बिजनेस सर्कल में खलबली मच गई है। कई लोग मान रहे हैं कि अगर यह मामला गंभीर साबित हुआ तो अनिल अंबानी की कंपनियों की स्थिति और खराब हो सकती है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस कार्रवाई का असर स्टॉक मार्केट और खासकर रिलायंस इंफ्रा के शेयरों पर भी दिख सकता है।
मीडिया और सोशल मीडिया पर चर्चा
जैसे ही खबर आई, सोशल मीडिया पर #AnilAmbani और #EDRaid ट्रेंड करने लगे। लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे बिजनेस फ्रॉड पर सख्त कार्रवाई बता रहे हैं तो कुछ इसे राजनीतिक एंगल से भी जोड़ रहे हैं।
FAQ
Q1. ED ने छापेमारी कहां की? मुंबई और इंदौर में कुल 6 ठिकानों पर।
Q2. मामला किससे जुड़ा है? अनिल अंबानी की Reliance Infrastructure Limited और कथित FEMA उल्लंघन से।
Q3. क्या अनिल अंबानी से पूछताछ होगी? अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई, लेकिन सबूत मिलने पर संभव है कि उन्हें बुलाया जाए।
Q4. FEMA कानून क्या है? यह विदेशी मुद्रा लेन-देन को नियंत्रित करने वाला भारतीय कानून है।
Q5. क्या पहले भी अनिल अंबानी विवादों में रहे हैं? हां, राफेल डील, कर्ज मामले और लंदन कोर्ट में पेशी जैसे विवादों में उनका नाम रहा है।
मध्य प्रदेश के कटनी जिले में सोना-चांदी और मिनरल्स की नई खदान शुरू होने जा रही है। मुंबई की कंपनी प्रोस्पेक्ट रिसोर्स मिनरल्स को 50 साल की लीज मिली है। इस प्रोजेक्ट से जिले को 100 करोड़ से ज्यादा का राजस्व और हजारों रोजगार मिलने की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश:एमपी के कई जिले अब मिनरल हब बनते जा रहे हैं। पन्ना हीरों के लिए पहले से मशहूर सिंगरौली में 18 हजार टन सोना मिलने की पुष्टि हो चुकी है। अब बारी है कटनी की, जहां इमलिया गांव की जमीन के नीचे सोना-चांदी और अन्य खनिज का खजाना मिला है। यहां करीब 7 लाख टन सोना-चांदी और मिनरल्स निकाले जाएंगे।
मुंबई की कंपनी को मिला 50 साल का ठेका
इस खदान की जिम्मेदारी मुंबई की प्राइवेट कंपनी प्रोस्पेक्ट रिसोर्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड को दी गई है। कंपनी को 50 साल की लीज मिल चुकी है। अगले 6 महीनों में खनन का काम शुरू कर दिया जाएगा।
जिले को मिलेगा 100 करोड़ का फायदा
इस प्रोजेक्ट से कटनी जिले को बड़ा राजस्व मिलेगा। कंपनी आने वाले सालों में टैक्स के रूप में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा देगी। इसके साथ ही जिला प्रशासन को लंबे समय तक लगातार फायदा होता रहेगा।
रोजगार और ज्वेलरी हब बनने की संभावना
खनन के साथ ही भविष्य में कटनी में ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने की योजना है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और जिले की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। मार्च 2026 तक यहां जमीन से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं और मशीनरी इंस्टॉलेशन पूरा करने का टारगेट रखा गया है।
खनन प्रोजेक्ट के बाद कटनी जिले में इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बढ़ावा मिलेगा। यहां एयरपोर्ट निर्माण की भी संभावना तेज हो गई है, जिससे पर्यटन और इंडस्ट्री दोनों को फायदा होगा।
FAQ
Q1. कटनी जिले में कितनी मात्रा में सोना-चांदी मिलने की उम्मीद है? यहां करीब 7 लाख टन सोना-चांदी और अन्य मिनरल्स निकाले जाएंगे।
Q2. किस कंपनी को खदान का ठेका मिला है? मुंबई की प्राइवेट कंपनी प्रोस्पेक्ट रिसोर्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड को 50 साल की लीज मिली है।
Q3. जिले को इससे कितना फायदा होगा? टैक्स और रॉयल्टी के रूप में जिले को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व मिलेगा।
Q4. इस प्रोजेक्ट से स्थानीय लोगों को क्या लाभ होगा? रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और भविष्य में ज्वेलरी यूनिट्स खुलने की संभावना है।
Q5. खनन का काम कब शुरू होगा? अगले 6 महीनों में खनन का काम शुरू हो जाएगा और मार्च 2026 तक पूरी तैयारी हो जाएगी।
Bigg Boss 19 सीजन विवादों में घिर गया है। एक डॉक्टर से शो का हिस्सा बनने को लेकर 10 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगा है। मुंबई पुलिस द्वारा FIR दर्ज करने के बाद इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।
डिजिटल डेस्क मुंबई: देश का सबसे चर्चित टेलिविजन रियलिटी शो बिग बॉस सीज़न 19 शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गया है। हालांकि फैंस शो को लेकर बेहद एक्साइटेड नजर आ रहे हैं, लेकिन शुरू होने से पहले ही शो में भाग लेने को लेकर पैसों के लेन-देन और ठगी का मामला प्रकाश में आ रहा है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो पिछले 2 दिनों से वायरल हो रहा है। इसमें एक डॉक्टर ने बिग बॉस कंटेस्टेंट सिलेक्शन को लेकर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने दावा किया, कि बिग बॉस में आने के नाम पर उनसे पैसे लेकर धोखा दिया गया है।
बिग बॉस पर लगे आरोप
बिग बॉस में कंटेस्टेंट बनकर भेजने के नाम पर जिस व्यक्ति ने ठगी का आरोप लगाया है वह मध्य प्रदेश के भोपाल के रहने वाले पेशे से डॉक्टर हैं। डॉक्टर अभिनीत गुप्ता पेशे से एक स्किन स्पेशलिस्ट यानी डर्माटॉलॉजिस्ट हैं। 10 लाख रुपये की धोखाधड़ी के बाद उन्होंने पहले भोपाल में शिकायत दर्ज कराई और उसके बाद मुंबई के ओशिवारा पुलिस स्टेशन में केस दर्ज करवाया।
पहले की थी 1 करोड़ रुपये की मांग
हाल ही में मुंबई के एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होकर भोपाल के रहने वाले हैं डॉक्टर अभिनीत गुप्ता ने इस पूरी ठगी का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ये मामला साल 2022 का है। उस दौरान किसी करण सिंह नामक व्यक्ति का उन्हें फोन आया था और उसने बिग बॉस में एंट्री दिलाने के लिए उन्हें लालच दिया था। उस दौरान करण सिंह ने उन्हें कहा था कि बिग बॉस के मेकर्स से उनकी अच्छी पहचान है वो उनकी एंट्री बिग बॉस में करा देगा लेकिन उसके लिए 1 करोड़ रुपये देने होंगे।
कॉन्फ़्रेंस के दौरान डॉक्टर ने बताया कि उन्होंने 1 करोड़ रुपये देने से मना किया, तो सिंह ने उनसे 60 लाख रुपयों की मांग करते हुए उनकी मीटिंग एंडेमोल कंपनी के अध्यक्ष के साथ तय कर दी। मुंबई में बिकेसी स्थित बिग बॉस के ऑफिस में मिटिंग के दौरान कंपनी के सीईओ ने भी करण के बैंक अकाउंट में 10 लाख रुपयों का भुगतान करने को कहा, जबकि डॉक्टर ने बिग बॉस के बैंक अकाउंट में पैसा जमा करना चाहते थे तो, कंपनी के लोगों ने बताया कि उन्हें लोगों को पैसे देने पडते हैं जब कंपनी पेमेंट कर देगी तो उसका भुगतान आप को हो जाएगा। इस वजह से उन्होंने सिंह के बैंक अकाउंट में 10 लाख रुपये ट्रांसफर किए। यह पूरी प्रक्रिया बिग बॉस सीज़न 16 के लिए चल रहा था। लेकिन सीजन 16 के कंटेस्टेंट्स की लिस्ट जब सामने आई तो उसमें उनका नाम नहीं था।
अभिनीत ने आगे बताते हुए कहा कि जब मैंने करण से पूछा कि लिस्ट में मेरा नाम क्यों नहीं है? तो उसने कहा कि वाइल्ड कार्ड के तौर पर आपकी एंट्री होगी, लेकिन सीजन खत्म हो गया और मेरी एंट्री नहीं हुई। इसके बाद जब मैंने दोबारा पूछा तो वो मुझे फिर से गुमराह करता रहा और उसने कहा कि 17वें सीजन में एंट्री होगी। 17वें सीजन के खत्म होने के बाद भी एंट्री नहीं हुई तब मैंने उससे पैसे वापस मांगे तो उसने नहीं दिए। मैंने पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज की। आप को बता दें, कि साल 2025 में सीजन 19वां आ रहा है। जो 24 अगस्त से जियो हॉटस्टार पर और कलर्स पर देखने को मिलेगा। उससे पहले ही शो को लेकर पैसों की लेनदेन और ठगी के कारण विवादित चर्चा में बना हुआ है।
Free Computer Training Scheme: डिजिटल भारत मिशन के तहत भारत सरकार ने फ्रि कंप्यूटर कोर्स के साथ 15 हजार रुपये के आर्थिक मदद देने ऐलान कर दिया है। यह स्कॉलरशिप 12वीं पास युवाओं के लिए आरक्षित कर दी गई है। आईये जानते हैं कैसे और कहां करें आवेदन?
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: भारत सरकार ने डिजिटल भारत मिशन को आगे बढ़ाते हुए 12वीं पास युवाओं के लिए एक बेहद लाभकारी योजना की शुरुआत की है। फ्री कंप्यूटर ट्रेनिंग योजना 2025 के अंतर्गत अब युवाओं को मुफ्त में कंप्यूटर कोर्स करने का अवसर मिलेगा, साथ ही 15000 रुपये तक की आर्थिक मदद भी दी जाएगी। यह पहल विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
बेसिक से एडवांस
इस योजना के माध्यम से छात्र न केवल बेसिक से लेकर एडवांस कंप्यूटर स्किल्स सीख सकेंगे, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान 15000 रुपये तक की स्कॉलरशिप भी दी जाएगी। यह मदद सीधे छात्र के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाऐंगे ताकि वे कोर्स के दौरान आर्थिक बोझ से मुक्त रह सकें।
किन्हें मिलेगा योजना का लाभ?
फ्री कंप्यूटर ट्रेनिंग योजना का लाभ केवल उन्हीं युवाओं को मिलेगा जो भारत के नागरिक होंगे। जिन्होंने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की है और जिनकी उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच होगी। इसके साथ ही, परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और आवेदक ने पहले से किसी संस्थान से कंप्यूटर कोर्स नहीं किया होना चाहिए।
इस योजना के अंतर्गत युवाओं को माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस, इंटरनेट का उपयोग, डिजिटल लेन-देन, साइबर सुरक्षा, टाइपिंग, ईमेलिंग और सरकारी पोर्टल्स पर कार्य करना सिखाया जाएगा। कोर्स की अवधि 3 से 6 महीने की होगी और यह पूरी तरह से सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थानों द्वारा कराया जाएगा।
आवेदन प्रक्रिया कैसे करें?
इच्छुक उम्मीदवार अपने राज्य की स्किल डेवलपमेंट या श्रम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाइट पर “Free Computer Training Scheme” दर्शाया गया होगा। उसी पर क्लिक करें और रजिस्ट्रेशन करें। इसी के साथ जरूरी दस्तावेज जैसे – आधार कार्ड, 12वीं की मार्कशीट, फोटो, बैंक पासबुक आदि अपलोड करें और आवेदन सबमिट कर दें। कुछ राज्यों में यह सुविधा CSC केंद्रों पर भी उपलब्ध हो चुकी है।
योजना के प्रमुख लाभ
योजना के तहत युवाओं को न केवल मुफ्त कंप्यूटर ट्रेनिंग दी जाएगी, बल्कि कोर्स पूरा करने के बाद एक सरकारी प्रमाणपत्र भी मिलेगा। साथ ही 15000 रुपये तक की स्कॉलरशिप और प्लेसमेंट सपोर्ट भी मुहैया कराया जाएगा, जिससे युवाओं को करियर की दिशा में बेहतर अवसर मिल सकें।
यह योजना उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, हरियाणा, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम में लागू हो चुकी है। अन्य राज्यों में भी इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा रहा है।
युवाओं को रोजगार में लाभ
इस योजना के अंतर्गत मिलने वाली ट्रेनिंग से छात्र सरकारी और प्राइवेट सेक्टर दोनों में रोजगार के लिए तैयार होंगे। डिजिटल इंडिया, CSC केंद्र, बैंकिंग, बीमा, डेटा एंट्री और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में इन युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है।
युवाओं का अनुभव और आत्मविश्वास
कई युवाओं ने बताया कि इस कोर्स के माध्यम से उन्हें न केवल टेक्निकल स्किल्स मिलीं बल्कि नौकरी पाने में भी आसानी हुई। कुछ छात्रों को स्थानीय कंपनियों में 10000 रुपये से 15000 रुपये प्रति माह की शुरुआती नौकरी भी मिली है।
भाजपा सरकार देश भर में शिक्षा का भगवाकरण करते हुए सरकारी स्कूलों को क्यों बंद कर रही है? इसके पीछे का राज साफ है। भले ही देश की उन्नति खत्म हो जाय। लेकिन सवाल नही पूछना चाहिए।
मुंबई: शिक्षा ही परिवार, समाज और राष्ट्र की उन्नति के द्वार खोलती है। जो देश जितना ही शिक्षित है उतना ही संपन्न और खुशहाल है। शिक्षा ही विकास का मूल है। अशिक्षित समाज भीड़ बन जाता है जिसका धर्म अराजकता अंधविश्वास होता है। अनियंत्रित भीड़ विनाश का कारण बनती है। किसी ने बिल्कुल ठीक ही कहा है, देश की बर्बादी के लिए हर वह व्यक्ति जिम्मेदार है जिसे लगता है कि शिक्षा, चिकित्सा और रोज़गार से ज्यादा महत्वपूर्ण धार्मिक मुद्दे हैं।
देश में शिक्षा का भगवाकरण
विपक्ष बीजेपी सत्ता पर आरोप लगाता है कि देश में सरकार शिक्षा का भगवाकरण कर रही है जिसमें सामाजिक आर्थिक मुद्दे गायब कर दिए जा रहे। इसका प्रमाण हैं कि राजस्थान में स्कूली किताबों से महात्मा गांधी के परिवार को हटाया जा रहा है।
शिक्षा और परीक्षा का सौदा
सुप्रसिद्ध आई ए एस कोचिंग के शिक्षक विकास दिव्यकृति का कथन है, कि सत्ता में जब अनपढ़ लोग बढ़ जाते हैं तो शिक्षा और परीक्षा बिकने लगती है। देश की लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर तीस से चालीस लाख में बेचे गए धनवानों को ताकि गरीब प्रतियोगी परीक्षा से बाहर चले जाएं और सरकार परीक्षा के नाम पर करोड़ों रुपए वसूलकर डकार जाती है और जब छात्र पुनः परीक्षा की मांग करते है तो गुलाम पुलिस द्वारा उन पर लाठियां बरसवाई जाती हैं।
उन्होंने यह भी कहा, कि शिक्षा का प्राइवेटीकरण करके माफियाओं को सौंपी जा रही जो मनमानी फीस और अन्य वस्तुएं छात्रों को बेचकर दौलत कमा रहे। आज स्कूल कॉलेज खोलना सबसे बड़ा व्यापार माना जाता है। सरकार खुद गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को शिक्षा से दूर रखने के लिए शिक्षा पर 18% जीएसटी लगाकर शिक्षा को महंगी कर चुकी है। सरकार ने 350 ऐसे लोगों को ज्वाइंट सेक्रेटरी और अध्यक्ष बनाए जो पद आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों को ही मिलते हैं लेकिन बिना आईएएस परीक्षा पास किए विशिष्ट विचारधारा के लोगों को आईएएस पोस्ट पर बिठा दिया गया।
विश्वविद्यालयों पर भगवा कब्जा
इतना ही नहीं आरएसएस की विचारधारा के लोगों को विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर और प्रोफेसर नियुक्त कर शिक्षा का भगवाकरण कर दिया है। ऐसे लोग यूनिवर्सिटी में उच्च पदों पर बैठकर गैर विचारधारा वाले लोगों को पीएचडी में प्रवेश देने से मना कर दिया, लेकिन आंदोलन के कारण प्रवेश देने को मजबूर हो गए। महामना मदन मोहन मालवीय की बगिया बी एच यू या काशी हिंदू विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा के प्रोफेसर के रूप में एक सुयोग्य मुस्लिम को नियुक्त किया गया तो बीजेपी से संलग्न छात्र संघ के विरोध के कारण उन्हें हटा दिया गया या हटने को मजबूर कर दिया गया।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में मनुस्मृति पढ़ाने की योजना प्रबल विरोध के चलते पीछे हटने को बाध्य कर दिया। जिससे वी सी जो घोषणा करनी पड़ी कि दिल्ली विश्वविद्यालय में मनुस्मृति नहीं पढ़ाई जाएगी। यह बहुत बड़ा प्रमाण है शिक्षा के भगवाकरण का। BJP governments saffronising and destroying education
शिक्षा के भगवाकरण के कारण ही उच्च पदों पर विशेषधारा के बैठे लोग जाति को लेकर भेदभाव किया जाता है जिस कारण बंगलुरु यूनिवर्सिटी में दस दलित प्रोफेसरों के साथ भेदभाव किए जाने से सभी दलितों ने इस्तीफा दे दिया। जब शिक्षित लोग भी जाति के कारण अपमानित किए जा रहे हों, अर्थात शिक्षा क्षेत्र में जाति का बोलबाला हो जाए तो सिस्टम हिलाना जरूरी हो जाता है। दस दलित प्रोफेसरों का इस्तीफा देने की बाध्यता शिक्षा के भगवाकरण की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। जिसका अर्थ है शिक्षा पाने आने वाले छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
धर्म की राजनीति
हमारे देश में जितना संघर्ष धार्मिक स्थलों के लिए किया जा रहा है उतना ही संघर्ष यदि शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए किया जाता तो देश की तस्वीर और तकदीर ही बदल जाती। बीजेपी सरकार धर्म की राजनीति के द्वारा वोट बैंक बनाने में लगी है देश समाज से कोई लेना देना नहीं है। बीजेपी आरएसएस और उसके एजेंट धूर्त, अज्ञानी और ढोंगी बाबा जनता को धर्म के नाम पर मूर्ख बनाकर धन और शरीर शोषण करते हैं। आशा राम और रामरहीम इसके ज्वलंत उदाहरण हैं।
सरकार जानती है कि देश में जितने अधिक अशिक्षित रहेंगे उनसे कांवड़ उठवाना, मस्जिद के सामने नाचना, गालीया देना, सोशल मीडिया में गालियां लिखने के लिए मानसिक गुलाम बनाना और पांच किलो मुफ्त अनाज और चंद सिक्के भीख में देकर वोट पाना सरल हो जाता है। BJP governments saffronising and destroying education
जबकि शिक्षित जो स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों से शिक्षा ज्ञान पाकर निकलते हैं वे संविधान पढ़ते हैं। अपने मौलिक अधिकार जानते हैं। सरकार के दायित्व क्या-क्या है की जानकारी रखते हैं। वे सत्ता से सवाल पूछने लगते हैं। सरकार की असफलता तानाशाही नफरती राजनीति जानते हैं। अपने अधिकार मांगने के लिए आंदोलन करते हैं। इसलिए “न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।” सीधे-सीधे सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। क्योंकि स्कूल कॉलेज बंद किए जाने से मुर्दे ही पैदा होंगे जागरूक भारतीय नहीं। उन्हें धर्म के नाम पर मुसलमानों के खिलाफ भड़काना सरल होता है।
मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार
तेलंगाना जो भारत का छोटा सा नवनिर्मित राज्य हैं वहां की सरकार शिक्षा का महत्व समझती है इसलिए सिर्फ एक छात्रा के लिए ही स्कूल खोला जाता है। इसके विपरीत हिन्दी भाषी राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान में सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। जबकि संविधान में चौदह साल के कम उम्र के बच्चों को मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार है, लेकिन बीजेपी सरकार सरकारी स्कूल बंद करने में लगी हैं।
एक तरफ गैर बीजेपी सरकार की सोच कि एक बच्ची के लिए नियमित स्कूल खोला और पढ़ाया जाता है। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू कर 334 शिक्षकों की भर्ती आरम्भ कर दी गई है। वहीं दूसरी ओर बीजेपी शासित राज्यों में पिछले दस वर्षों में लगभग नब्बे हजार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। मध्यप्रदेश में 29000 और उत्तर प्रदेश में 25000 स्कूल बंद किए जा चुके हैं।
राम कृष्ण का प्रदेश है उत्तर प्रदेश जहां पहले 50 छात्रों से कम होने पर स्कूल बंद कर दूसरे स्कूल में मर्ज करने की बात कही गई है उसका दायरा बढ़ाकर अब 70 छात्र होने पर भी सरकारी स्कूल बंद कर मर्ज किए जाने की मंशा है। यहां सवाल उठता है पांच मिल दूर तक स्कूल में लड़कियां कैसे जाएंगी? उनके अलावा गरीब लड़के भी शिक्षा बंद कर देंगे। योगी सरकार ने स्कूल बंद करने और 27308 नई मधुशाला खोलने का निर्णय किया है।
दूसरी तरफ हरियाणा सरकार का अनोखा आदेश है, कि जो बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे उन्हें 500 रुपए महीने फीस देनी होगी लेकिन जो बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने जाएंगे उन्हें 1100 रुपए महीने दिए जाएंगे। जिसका अर्थ है सभी सरकारी स्कूल बंद करना। प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा देना। सब मिलाकर बीजेपी सरकारें गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित रखना चाहती है। ताकि पांच किलो मुफ्त अनाज देकर वोट लिया जा सके साथ ही कांवड़ उठाने वाले की संख्या में 21% वृद्धि की संभावना है। जितने लोग कांवड़ उठाएंगे उनपर सरकार फूल बरसाकर तृप्त करेगी। प्रोत्साहित करेगी ताकि मानसिक गुलाम बने रहकर बीजेपी को वोट देते रहें।
मुफ्त शिक्षा के खिलाफ हाईकोर्ट का फैसला
दुखद प्रसंग यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय जज ने 51 गरीब छात्रों की अपील खारिज कर सरकार के पक्ष में निर्णय दिया है। यहां सवाल उठता है कि माननीय जज को छात्रों की नहीं सरकार की चिंता अधिक है। क्या कोर्ट सरकार से सवाल नहीं कर सकती थी? कि सब कुछ मुफ्त देने के बावजूद क्या कारण है कि सरकारी स्कूलों में छात्र पढ़ना ही नहीं चाहते? सरकार पता करे और गरीब बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए प्रेरित करे।