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  • मनपा पी/नॉर्थ के अधिकारियों के नकारेपन के चलते भूमाफिया, ठेकेदारों के हौसले बुलंद

    मनपा पी/नॉर्थ के अधिकारियों के नकारेपन के चलते भूमाफिया, ठेकेदारों के हौसले बुलंद

    • मुंबई में खाली जमीन को हथियाने के लिए BMC के सरकारी अधिकारी ही अपराध का साथ दे रहे हैं।
    • न्यायालयीन ‘स्थगन’ आदेश की अवहेलना कर मालाड (पूर्व) ठेकेदारों द्वारा धड़ल्ले से हो रहा अवैध निर्माण

    सुरेंद्र राय
    मुंबई-
    महानगरपालिका (BMC) प्रशासन व महशुल विभाग की नाकामियों के चलते मुंबई में भूमाफियायों व अवैधनिर्माण कर्ता, ठेकेदारों के हौसले इस कदर बुलंद है, कि वे मनमानी तौर पर अवैध निर्माण ही नहीं करते बल्कि कोर्ट के आदेशों की अवमानना करके कानून से खिलवाड़ भी करते हैं। यानि कि वे मनपा, महशूल विभाग व अदालतों तक को भी धत्ता बताकर अपनी मनमानी करते हैं। कारण यहां खाली जमीन की किमत आसमान छू रही हैं।
    ऐसा ही एक मामला मनपा पी/उत्तर विभाग के कार्यक्षेत्र में वार्ड क्रमांक -४५ के अंतर्गत यूसुफ चौकसी कंपाउंड, मिलन सेवा संघ सोशल, खोडियार माता मंदिर के सामने, बच्छानी नगर, चिल्ड्रेन एकेडमी स्कूल के समीप, मालाड (पूर्व) में हमीद कुरेशी व वालम कुरेशी द्वारा अनधिकृत निर्माण किए जाने का मामला प्रकाश में आया है।

    BMC अधिकारीयों के कारनामे ..

    BMC,

    प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त अवैध निर्माण के विरुद्ध संजय रामदास भगत द्वारा मनपा प्रशासन एवं महशूल विभाग के संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गयी थी। किंतु अपेक्षित कार्यवाई के अभाव में वर्ष २०११ में एक मामला मुकदमा नंबर – ११४३ हीरा पी. फडिकर और पंचानन फडिकर के विरुद्ध दायर किया गया था। मामले के मुताबिक, उक्त दोनों ने अपीलकर्ता संजय रामदास भगत के रूम नंबर -१ के समीप अवैध निर्माण कर रहे हैं।

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    इस अपील को दिनांक -२५/१०/२०२३ में खारिज कर दिया गया था। सिटी सिविल कोर्ट दिंडोशी के उक्त फैसले के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील करने की तैयारी कर रहे हैं जबकि उसी न्यायालय में मुकदमा नंबर -२११७/२०११ अब तक विचाराधीन है। जिसमें भी उक्त जगह पर किसी भी प्रकार के निर्माण पर स्थगन आदेश लगाया गया है। इसके उपरांत भी उक्त ठेकेदारों द्वारा न्यायालयीन आदेशों का उल्लंघन करके उपरोक्त ठेकेदारों द्वारा अवैध निर्माण किया जा रहा है।

    Malad SRA Project Live video on indian fasttrack news channel

    उक्त स्थल पर किए जा रहे अवैध निर्माणों को मनपा पी/उत्तर विभाग के अधिकारियों का आपसी समर्थन आर्थिक सेटिंग के आधार पर किए जाने की जानकारी सूत्रों ने दी है। अन्यथा अदालत की अवमानना करके अवैध निर्माण किया जाना मुश्किल था। मनपा के बांधकाम विभाग के अधिकारी/ कर्मचारी उक्त निर्माण स्थल पर आते-जाते देखे जाते हैं। मनपा अधिकारियों को उक्त स्थल पर न्यायालयीन स्थगनादेश की भी जानकारी है।
    इसके उपरांत भी मनपा उक्त ठेकेदारों के अवैध निर्माण कार्य पर न तो रोक लगायी है और ना ही उक्त संबंध में न्यायालय को भी सूचित है। स्थानीय जनों ने उक्त अवैध निर्माण पर तत्काल तोड़क कार्यवाही कर ठेकेदारों के विरुद्ध एमआरटीपी (MRTP) के तहत दंडात्मक कार्रवाई कराये जाने की
    मनपा प्रशासन से अपील की है।

  • पिता ने स्मार्टफोन छिना नाराज़ 16 साल के लड़के ने आत्महत्या कर ली। मोबाइल फोन की लत को कैसे दूर करें..

    पिता ने स्मार्टफोन छिना नाराज़ 16 साल के लड़के ने आत्महत्या कर ली। मोबाइल फोन की लत को कैसे दूर करें..

    मुंबई के मालाड़ पश्चिम मालवनी इलाके में एक दुखद घटना की खबर है। यहां एक 16 वर्षीय लड़के ने अपने पिता द्वारा उसका स्मार्टफोन जब्त करने से नाराज होकर अपनी जान दे दी। मोबाइल फोन की लत से कैसे निपटा जाए?

    इस्माईल शेख
    मुंबई
    – एक दुखद घटना में, मुंबई के एक 16 वर्षीय लड़के ने अपने पिता द्वारा उसका स्मार्टफोन जब्त करने से नाराज होकर अपनी जान दे दी। इस घटना ने युवाओं में मोबाइल फोन की लत की बढ़ती समस्या और इस व्यापक समस्या से निपटने के बारे में चिंताएं पैदा कर दी हैं। यहां वह सब कुछ है जो आपको जानना आवश्यक है।

    खबर के मुताबिक, ज्यादा गेम खेलने के कारण उसके पिता ने उसका फोन जब्त कर लिया था, जिसके बाद मालवानी में लड़के ने दुखद रूप से अपनी जान दे दी। लड़का, जिसकी पहचान नाबालिग होने के कारण गोपनीय रखी गई है। बताया जाता है कि वह अपने फोन से अलग होने पर परेशानी व्यक्त कर रहा था। मालवणी में अपने माता-पिता के साथ रहने वाले किशोर की 16 नवंबर की रात को अपने पिता के साथ तीखी बहस भी हुई।

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    नाबालिक के जान देने का कारण ..

    जान,
    प्रतिकारात्मक फाइल तस्वीर

    लगातार गेम खेलने से परेशान पिता ने लड़के का सेलफोन छीन लिया और उसे बिस्तर पर आराम करने का निर्देश दिया। परेशान होकर, लड़का, जिसने पहले भी इसी तरह की स्थितियों में खुद को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी थी, 17 नवंबर को रसोई में दुपट्टे का उपयोग करके टिन के हुक से लटका हुआ पाया गया था। उसे बचाने के लिए उसके पिता के प्रयासों के बावजूद, एक निजी अस्पताल में प्रवेश से पहले ही मृत घोषित कर दिया गया। मालवानी पुलिस ने मामले को आकस्मिक मौत के रूप में दर्ज किया है, और दिल दहला देने वाली घटना की आगे की जांच के लिए शव को पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया है।

    मोबाइल फोन की लत से कैसे निपटें..

    मोबाइल फोन की लत से निपटने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, जिसमें माता-पिता का मार्गदर्शन, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और शिक्षा शामिल है। माता-पिता से मोबाइल फोन के उपयोग पर समय पर उचित सीमा निर्धारित करने, बाहरी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार उपयोग के बारे में खुली चर्चा में शामिल होने का आग्रह किया जाता है।

    • माता-पिता फोन के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश स्थापित कर सकते हैं। भोजन, पारिवारिक समय और सोने के समय जैसी डिवाइस-मुक्त गतिविधियों के लिए विशिष्ट अवधि निर्धारित करें।
    • ज़िम्मेदारीपूर्ण उपयोग का अनुकरण करके फ़ोन की स्वस्थ आदतें प्रदर्शित करें। यदि किशोर माता-पिता को निरंतर स्क्रीन समय के बजाय आमने-सामने की बातचीत को प्राथमिकता देते हुए देखते हैं, तो उनके इन व्यवहारों का अनुकरण करने की अधिक संभावना है।
    • व्यक्ति को शारीरिक गतिविधियों और बाहरी गतिविधियों को प्रोत्साहित करना चाहिए। माता-पिता खेल, शौक या सामुदायिक गतिविधियों में भागीदारी को प्रोत्साहित कर सकते हैं जिनमें स्क्रीन शामिल नहीं है।
    • वयस्क किशोरों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर अत्यधिक स्क्रीन समय के संभावित नकारात्मक प्रभावों के बारे में सूचित कर सकते हैं। नींद में खलल, आंखों पर तनाव और पारस्परिक संबंधों पर प्रभाव जैसे विषयों पर चर्चा करें।
    • माता-पिता ऐप के उपयोग और स्क्रीन समय को प्रबंधित और मॉनिटर करने के लिए स्मार्टफ़ोन पर अभिभावक नियंत्रण सुविधाओं को लागू कर सकते हैं। इससे माता-पिता को स्थापित सीमाएं लागू करने में मदद मिल सकती है।
    • किशोरों के साथ खुला और गैर-निर्णयात्मक संचार बनाए रखें। उन्हें सजा के डर के बिना फोन के उपयोग से संबंधित अपने अनुभवों, चुनौतियों और चिंताओं को साझा करने के लिए प्रोत्साहित करें।
    • किशोरों को जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता और ऑनलाइन गतिविधियों के संभावित परिणामों के बारे में शिक्षित करना हमेशा बेहतर होता है। इसमें सोशल मीडिया, साइबरबुलिंग के प्रभाव को समझना और एक स्वस्थ ऑनलाइन उपस्थिति बनाए रखने के महत्व को समझना शामिल है।
  • मिठाई, मावा, पनीर व दूध में मिलावट है या नहीं, 2 मिनट में करें पहचान, अपनाए ये तरीके

    मिठाई, मावा, पनीर व दूध में मिलावट है या नहीं, 2 मिनट में करें पहचान, अपनाए ये तरीके

    मिलावट खोर मावा की मिठाई, दही, पनीर यहां तक की किराने के आइटमों में भी मिलावट करने से नहीं चूकते है। जिसका उपयोग करने से शरीर पर प्रभाव पड़ता है। मिलावटी पदार्थ से बचने के लिए खाद्य मिश्रण की पहचान के लिए जागरूक होना अति आवश्यक है। आपकी दीपावली शुभ हो ..

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    त्यौहारी सीजन के नजदीक आते ही दूध से बने कई उत्पादों में मिलावट खोर मिलावट करने लगते हैं। जिनकी शिकायत खाद्य विभाग के पास पहुंचती है। मिलावट खोर मावा की मिठाई, दही, पनीर यहां तक की किराने के आइटमों में भी मिलावट करने से नहीं चूकते हैं। जिसका उपयोग करने से शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। मिलावटी पदार्थ से बचने के लिए खाद्य मिश्रण की पहचान के लिए जागरूक होना अति आवश्यक है। ऐसे में हम आपको कुछ तरीके बताएंगे जिन्हे अपना कर आप भी मिलावटी चीजों की स्वंय ही जांच कर सकते है।

    एफडीए (FDA) के एक अधिकारी ने बताया कि त्यौहार आते ही मिलावट खोर सक्रिय हो जाते हैं और ज्यादा मुनाफे के चक्कर में खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट कर देते हैं। जिससे शरीर को नुकसान होता है। ऐसे में मिठाई, मावा की दूध, दही, पनीर में अगर मिलावट है या नहीं। उसे पहचानने के लिए कुछ आयोडीन या टिंचर आयोडीन की बूंदे डालने पर उसका रंग नीला या बैंगनी हो जाएगा तो आप समझ जाए कि वह मिलावटी वस्तु है, उसे  मत खरीदे। इसके साथ ही, मिठाइयों पर लगाने वाला चांदी का वर्क एल्युमिनियम का फॉयल भी हो सकता है अगर पहचान करनी है तो उसे उंगलियों से मसले फॉयल के छोटे-छोटे टुकड़े हो जाएंगे तो वह मिलावटी है।

    दीपावली,
    प्रतिकारात्मक फाइल तस्वीर

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    दीपावली के शुभ अवसर पर मिठाई की जांच..

    मिठाई खरीदने जाएं तो उसका कलर देखें, मिठाई का कलर ज्यादा गहरा है तो उसे ना ले। खाद्य विभाग के अनुसार फूड सेफ्टी के अंतर्गत अगर कोई भी वस्तु खरीदें तो तीन चीज देखी जाती है जिसका खास तौर से ध्यान रखें। पहले मिठाई को अच्छे से देखकर, दूसरा सूंघकर और तीसरा उसे खाकर उसका पता लगा सकते हैं. कि इसमें मिलावट है या नहीं।

    नकली और मिलावटी मावा..

    मावे की पहचान कैसे करें कि वह असली है या नकली, तो मावे को थोड़ा सा हाथ के उंगलियों पर ले और उसे अपनी उंगलियों पर मसले अगर मावे में चिकनाहट है तो वह सही है। या फिर दूसरा आयोडीन की एक-दो बूंद मावे में डालने पर मावे का बैंगनी कलर हो जाता है तो मावे में मिलावट है तो उसे ना खरीदें।

    दूध की शुद्धता…

    दूध अगर खरीदना है तो उसे पहले हीलाकर देखें अगर उसमें झाग आ रहे हैं तो ऐसे दूध को भी ना खरीदें। पनीर है उसमें भी टिंचर आयोडीन की एक-दो बूंद डालकर देखें, अगर उसका कलर भी बैंगनी हो जाता है तो उसे भी ना खरीदें उसमें भी मिलावट हो सकती है। इस तरह से बाजार की खाद्य सामग्रियों में मिलावट होने से हम बच सकते हैं।

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  • प्रभाग -6 के जवाबदेह अभियंताओं की शह पर किया जा रहा गैरकानूनी बांधकाम

    प्रभाग -6 के जवाबदेह अभियंताओं की शह पर किया जा रहा गैरकानूनी बांधकाम

    • करोड़ों की हेरा-फेरी न हो तो महानगर पालिका कैसी?
    • आदिवासी के रिक्त भूखंड पर भूमाफियाओं का कब्जा।
    • मीरा-भायंदर आदिवासियों की जमीन की बिना रजिस्ट्री किए ही झोपड़ा धारकों का एग्रीमेंट बनाकर बेची जा रही जमीन।

    सुरेन्द्र राय
    मिरा/भायंदर-
    यहां तो होड़ लगी रहती है, कि कौन सा प्रभाग अधिकारी अपने पाले हुए गुर्गे या स्थानीय भूमाफियाओं के माध्यम से कितनी बड़ी जमीन कब्जा कराकर, उस पर गैरकानूनी तरीके से निर्माण कराकर प्रॉपर्टी बनाता है और वही उच्च अधिकारियों को खिलाता हुआ चमचागिरी करके प्रमोशन पा जाता है।

    मीरा-भायंदर महानगरपालिका का भ्रष्टाचार ..

    देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से सटे मीरा-भायंदर महानगर पालिका में अवैध निर्माण रूपी भ्रष्टाचार का खेल बखूबी चलता रहता है। यहां पर अवैध निर्माण रूपी भ्रष्टाचार के कीर्तिमान बनते और टूटते रहते हैं। लेकिन मजाल क्या है, कि कोई बड़े से बड़ा पालिका अधिकारी उनकी गिरेबां पकड़कर कानून के हवाले करे और सजा दिलाए। क्योंकि बड़े अधिकारियों तक अवैध निर्माण रूपी भ्रष्टाचार की काली कमाई के कमीशन पहुंचते रहते हैं।

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    वैसे तो मीरा-भायंदर महानगर पालिका के अधिकांश प्रभाग  भ्रष्टाचार में लिप्त है। कहीं प्रभाग अधिकारी अपनी काली कमाई को स्थानीय भूमाफियाओं और ठेकेदारों के साथ मिलकर खपाता है अवैध निर्माण में, तो कहीं प्रभाग अधिकारी के साथ मिलकर प्रभाग अभियंता गैरकानूनी बांधकाम कराते हुए संरक्षण देकर मोटी कमाई करते हुए आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करते हैं। वह भी बिना रजिस्ट्री के!
    एक ऐसे ही अवैध निर्माण रूपी भ्रष्टाचार का मामला मीरा – भायंदर महानगर पालिका, प्रभाग- 6 के अंतर्गत प्रकाश में आया है।

    जहां पर स्थानीय भूमाफिया मंगल गांधी, बाबू म्हात्रे और अवेश कुरेशी द्वारा मीरा रोड(पूर्व)  काशिमीरा स्थित काशिगांव, मीनाक्षी नगर के डचकूल पाड़ा, महाराष्ट्र – ४०११०७ स्थित विगत वर्षों से रिक्त पड़े भूखंड, आदिवासी की जमीन पर प्रभाग -6 के भ्रष्ट अधिकारियों से साठगांठ कर पतरे के रूम का स्ट्रक्चर निर्माण कर उसे मेहनत कश गरीब जरूरत मंद लोगो को अंधेरे में रखकर धड़ल्ले से बेचा जा रहा है।

    बता दें, कि जब संवाददाता ने खुद इस मामले की जांच पड़ताल की तो पता चला कि मीरा-भायंदर, महानगरपालिका, प्रभाग -6 के जवाबदेह अभियंताओं ने उक्त भूमाफियाओं से भारी धनराशि लेकर अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले प्रभाग -6 में आदिवासी की जमीन पर अवैध ढंग से पतरे रूपी स्ट्रक्चर का निर्माण कराकर गैरकानूनी तरीके से बेचा जा रहा है। फिर उसी पतरे रूपी स्ट्रक्चर को पक्के बांधकाम कराकर लाखों रुपए में बेचकर मालामाल होने की साजिश के तहत भूमाफिया मंगल गांधी, बाबू म्हात्रे और अवेश कुरेशी से मिलीभगत कर प्रभाग -6 के जवाबदेह अभियंताओं द्वारा महानतम भ्रष्टाचार किया जा रहा है।

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    हालांकि संवाददाता ने उक्त मामले की जानकारी प्रभाग -6 के प्रभाग अधिकारी, प्रभाकर म्हात्रे को दी जिसे संज्ञान में लेते हुए प्रभाग अधिकारी प्रभाकर म्हात्रे ने  संवाददाता को बताया कि आदिवासी की जमीन पर किए गए अनाधिकृत निर्माण कार्य को लेकर प्रभाग – 6 द्वारा तोड़क कारवाई की जा चुकी है।उक्त जमीन पर यदि पुनः कोई भी भूमाफिया चाहे वह मंगल गांधी ,बाबू म्हात्रे या अवेश कुरेशी ही क्यों न हो उस पर एमआरटीपी के तहत एफआईआर दर्ज करवाएंगे, इतना कहकर प्रभाग – 6 के प्रभाग अधिकारी,प्रभाकर म्हात्रे ने अपनी वाणी को विराम दिया। अब ऐसे में जिसकी उच्च स्तरीय जांच कर तोडक कार्रवाई जरूरी है।

    मीरा-भायंदर महानगर पालिका, प्रभाग – 6 के प्रभाग अधिकारी प्रभाकर म्हात्रे से हमारी मांग है कि जवाबदेह अभियंताओं के भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच पारदर्शी तरीके से कराकर आरोप तय कर दंडात्मक कार्रवाई कराए और साथ ही तोड़क कारवाई कर आदिवासियों को अपने जमीन से वंचित होने से बचाएं अन्यथा आपकी साख पर भी बट्टा लगेगा!

  • सहायक आयुक्तों की भर्ती में बड़े पैमाने हुआ है भ्रष्टाचार: आयुक्त चहल निकले रक्त चूसक जोंक

    सहायक आयुक्तों की भर्ती में बड़े पैमाने हुआ है भ्रष्टाचार: आयुक्त चहल निकले रक्त चूसक जोंक

    • मनपा आयुक्त के रूप में सबसे ज्यादा अयोग्य अभ्यर्थी नियुक्त करने का चहल का रिकार्ड
    • मनपा आयुक्त चहल के कैरेक्टर रोल की जांच सीबीआई व ईडी से कराने की मुंबईकरों की मांग।

    सुरेंद्र राय
    मुंबई-
    बृहन्मुंबई महानगर पालिका के आयुक्त  इकबाल सिंह चहल को एक ईमानदार अधिकारी के रूप में जाना जाता रहा है। किंतु किसी को क्या मालूम था की इकबाल सिंह चहल अपने निजी लाभ के लिए सहायक आयुक्तों की होने वाली नई भर्ती पर ध्यान नहीं देंगे तथा वह कभी भी राज्य संघ लोक सेवा आयोग से सहायक आयुक्त की भर्ती के लिए कोई मांग नहीं करेंगे। इन दोनों ने ऐसा किया है जिसके कारण मनपा में सहायक आयुक्त का कार्य भी प्रभारी सहायक आयुक्त से लिया जा रहा है। सहायक आयुक्त की जगह अपेक्षित काम ना कर पाने के कारण प्रभारी सहायक आयुक्त जनता की अनेक समस्याएं दूर नहीं कर पा रहे हैं।

    मनपा आयुक्त द्वारा प्रभारी सहायक आयुक्तों की नियुक्ति ..

    सूत्रों का कहना है, कि कितनों को तो आयुक्त चहल ने योग्यता न होने के बावजूद भी नियुक्त किया है, जिसे उनका निंदनीय भ्रष्टाचार माना जा रहा है। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के कारण बृहन्मुंबई महानगर पालिका में सहायक आयुक्तों की भर्ती बंद होने से निगम के 10 से 15 विभाग कार्यालयों का प्रभार सहायक आयुक्तों के पास है। इसके कारण विभाग में कई नागरिक समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं और देखा जा रहा है कि प्रभारी सहायक आयुक्त कभी-कभी उनका समाधान करने में विफल हो रहे हैं।

    मनपा आयुक्त,
    मुंबई मनपा आयुक्त मुख्यालय की फाइल तस्वीर

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    मुंबई महानगर में 24 नगरपालिका प्रभाग कार्यालय हैं। इनमें से प्रत्येक संभागीय कार्यालय का प्रबंधन एक अलग एमपीएससी से चयनित एक सहायक आयुक्त द्वारा किया जाता है। लेकिन चूंकि एमपीएससी द्वारा पिछले दो वर्षों से सहायक आयुक्त की भर्ती प्रक्रिया नहीं की गई है, इसलिए मनपा प्रशासन ने उन अधिकारियों को प्रभारी सहायक आयुक्त का प्रभार दिया है जो कुछ विभागीय कार्यालयों में घनकचरा व्यवस्थापन व परिरक्षण विभाग के कार्यकारी अभियंता हैं।

    ऐसे में उनके लिए वार्ड का कार्यभार पूरा करना मुश्किल हो रहा है। इसके कारण वार्ड में कूड़ा-कचरा, सड़क, अनाधिकृत निर्माण, रेहड़ी, फेरीवाले और प्रतिष्ठानों का आस्थापना विभाग सहित अन्य समस्याओं का समाधान होता नजर नहीं आ रहा है। नतीजा, इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। गत वर्ष से मुंबई नगर निगम में नगरसेवकों का कार्यकाल समाप्त होने के कारण वे नगर पालिका के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकते।

    नागरिकों को सीवरेज, फुटपाथ मरम्मत, जलापूर्ति, मलिन बस्तियों में सफाई जैसे बुनियादी कार्यों के लिए नगरसेवकों के कार्यालय तक पहुंचना पड़ता है। चूंकि नगरसेवकों का कार्यालय भी बंद है, इसलिए उनके कार्यालय जाने पर भी नागरिकों का काम नहीं हो पाता है। नागरिकों की यह भी शिकायत है कि नगर निगम सहायक आयुक्त द्वारा समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। इससे दिन-ब-दिन शहर में नागरिक समस्याएं बढ़ती जा रही है।

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    मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल के कार्यकाल में फर्जी वार्ड ऑफिसर से मोटी रकम लेकर नियुक्ति की है ऐसा कहा जाता है। स्थानीय विधायक और सांसद की ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए इन वार्ड ऑफिसरों की मनपा आयुक्त से सांठ-गांठ कर नियुक्ति की है ऐसा भी कहा जाता है। जिसमे आयुक्त की प्रति माह ५०० करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय है। क्या इसकी जांच राज्य सरकार और केंद्र सरकार करेगी या ईडी सीबीआई करेगी।

  • देश का दुर्भाग्य है, देश की सभी सरकारी मशीनरी पूरी तरह भ्र्ष्टाचार में लिप्त हो गयी है।

    देश का दुर्भाग्य है, देश की सभी सरकारी मशीनरी पूरी तरह भ्र्ष्टाचार में लिप्त हो गयी है।

    चुनाव आयोग मौनी बाबा की तरह या “गाँधी जी” तीन बंदरो की तरह “माल मत देखो, माल मत पकड़ो, शिकायत मत सुनो” की तर्ज पर चल रहा है।

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    पांच राज्यो में चुनावी बिगुल बज गया है। अखाड़े में बड़े बड़े पहलवानो की नूरा कुश्ती देखने को मिलेगा। मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, मिजोरम में सभी प्रमुख राजनिगिक दलों ने अपने पहलवानो की घोषणा कर दिय है। रेफरी के रूप में जनता तैयार है। पर अब प्रश्न ये उठता है, कि सभी उम्मीदवारो और नेताओं के सम्पत्ति की निष्पक्ष जांच क्यों नही करता है चुनाव आयोग।

    चुनाव आयोग के कार्य ..

    सभी के पास कितने काले धन है? उम्मीदवारो ने सम्पत्ति की कितनी जानकारी दिया है और इनके नेता के पास कितना धन है। इस विषय पर चुनाव आयोग मौनी बाबा की तरह या “गाँधी जी” तीन बंदरो की तरह “माल मत देखो, माल मत पकड़ो, शिकायत मत सुनो” की तर्ज पर चल रहा है। ये कितने बड़े अपराधी है? कितने केस है? कितने विचाराधीन है? इसकी जानकारी न रखता है न ही जानकारी देता है।

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    चुनाव आयोग,
    चुनाव आयोग की प्रतिकारात्मक फ़ाईल तस्वीर

    इसी बीच चुनाव आयोग की ओर से घोषणा
    की गई है, कि राजनीतिक दलों और अभ्यर्थियों द्वारा मतदान बूथों के पास लगाए गई शिविरों के निकट अनावश्यक भीड़ इकट्ठा नहीं होने देंगे ताकि दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों और अभ्यर्थियों के मध्य टकराव और तनाव से बचा जा सके। आचार संहिता की धाराओं प्रशासन भरपूर इस्तेमाल करने जा रहा है।

    Election Commission of India

    लेकिन, आप को बता दें, दिन पर दिन भ्रष्टाचार बढ़ता ही जा रहा है। कितना भी पत्रकार लिखता है। फिर भी नेताओ, मंत्रियों और चुनाव आयोग को कोई फर्क नही पड़ता है। चुनाव में धन-बल की आजमाइस जोरो पर चलती है। हत्याएं होती है। अपहरण होते है। इस पर भी चुनाव के पास समय नही होता है। देश का दुर्भाग्य है, देश की सभी सरकारी मशीनरी पूरी तरह भ्र्ष्टाचार में लिप्त हो गयी है।

    Live video on indian fasttrack news channel
  • कब सुधरेंगे विधायक विनय वर्मा, क्या यही है अपनादल पार्टी की पहचान

    कब सुधरेंगे विधायक विनय वर्मा, क्या यही है अपनादल पार्टी की पहचान

    शोहरतगढ़ को शोहरत की बुलंद उंचाईयों तक लेजाने की इच्छा जाहिर करने वाले अपना दल पार्टी के विधायक हकीकत में अपने समर्थकों को ही चूना लगा रहे हैं।

    वी बी माणिक
    लखनऊ
    – उत्तर प्रदेश, सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ निर्वाचित अपनादल के विधायक सुधरने को तैयार नही है। योगी आदित्यनाथ की सरकार में जगह हासिल करने के बाद से ही इनके तेवर बदल गए हैं। गरीबों का पैसा चुनाव के समय डकार कर बैठे विनय आज तक देने को तैयार नही है। जिन लोगो ने अपना खून पसीना बहाकर और नगद उधारी के तौर पर पैसे दिए हैं वो त्राहि-त्राहि कर रहे है। एक ग्राम प्रधान का भी करीब पच्चीस लाख लेकर बैठे है।

    योगी आदित्यनाथ की सरकार ..

    समाजवादी पार्टी से हाथ झटक कर भाजपा के सहारे उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में जगह हासिल करने वाली अपनादल की सुप्रीमो एवं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की पार्टी क्या बेईमानो, लुटेरों की पार्टी है? जो गरीबों का खून पीने का काम करती है। बड़ा दुर्भाग्य है ये गरीब पुलिस में शिकायत भी दर्ज नही करवा पा रहे है। विनय वर्मा द्वारा इनको खुली धमकी दी जाती है, कि तुमको जो करते बने कर लो हम पैसा नही देंगे। पत्रकार ने अनुप्रिया पटेल से संपर्क करने का प्रयास किया। उनसे मुलाकात नही हो सका है।

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    योगी आदित्यनाथ,
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अपना दल पार्टी की मुखिया अनुप्रिया पटेल की तस्वीर

    राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऐसी पार्टीयो के समर्थन से सरकार चला रहे है। योगी जी घोषणाएं अच्छी-अच्छी कर रहे है पर जो उनकी सरकार में कुछ लुटेरे विधायक बैठे है। उन पर कार्रवाई कब होगी ? कब गरीबो का पैसा मिलेगा ? यही कारण है ठग लुटेरे नेता योगी जी से सहयोग माँगकर चुनाव जीतकर जनता को गुमराह करए है। इससे बड़े शर्म की बात और क्या हो सकता है।

    वैसे भी अपना दल पार्टी का नारा है ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिसदारी’ इसका विधायक विनय वर्मा भरपूर फायदा उठा रहे हैं। लोगों को इनके इरादों को समझने में समय लग गया। नहीं तो धोखा और नुकसान नहीं होता। बता दें कि लोग कहते हैं, कि ये विनय वर्मा अपनी जरूरत के वक़्त हाथ जोड़कर मदद मांग रहे थे। अभी वही उधार के पैसे वापस करने के बजाय सत्ता का रौब झाड़ते हुए धमका रहे हैं। ये राजनीति का गंदा चहरा है। जो इनसे धोखा खाने वालों को देखने को मिल रहा है।

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  • शहर में अब नवरात्रि का कार्यक्रम भी कमर्शियल हो गया है

    शहर में अब नवरात्रि का कार्यक्रम भी कमर्शियल हो गया है

    • मुंबईकरों को सावधानी बरतने की अपील

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    नवरात्रि का धार्मिक भक्तिभाव कार्यक्रम अब मुंबई जैसे शहरों के लिए कमर्शियल बन गया है। इसका आयोजन, प्रचार-प्रसार और इंट्री पास के नाम पर लाखों रूपये का आज की तारीख में एक नया ही कारोबार खड़ा हो गया है। ऐसे ही नकली पास के मामले में बोरीवली पश्चिम के एमएचबी पुलिस थाने ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। बता दे कि भाजपा के विधायक सुनील राणे द्वारा प्रस्तुत रंगरात्रि डांडिया नाइट्स सीजन 2 विथ किंजल दवे फर्जी पास मामला मे पुलिस में चार लोगों को गिरफ्तार कर 30 लाख रुपए का फर्जीवाडे का खुलासा किया है।

    डांडिया रास कार्यक्रम

    इन दिनों शहर भर में अवैध बैनर और पोस्टरों के जरिए डांडिया रास कार्यक्रम को आयोजकों द्वारा मुंबईकरों का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है। वहीं पैसों की लालच में लोगों को ठगने के लिए कई गिरोह सक्रिय हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक डांडिया क्वीन फाल्गुनी पाठक और भाजपा विधायक सुनील राने द्वारा प्रस्तुत किंजल दवे की प्रोग्राम में नकली पास बेचे जाने का खुलासा हुआ है। जिसमें 4 लोगों को एमएचबी पुलिस ने गिरफ्तार करते हुए उनके पास से 30 लाख रुपये का फर्जी पास, होलोग्राम स्टिकर, लैपटॉप और प्रिंटर बरामद किया है। दो लोग फरार बताए जा रहे हैं जिन्हें पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही है।

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    मुंबई पुलिस परिमंडल 11 के उपयुक्त अजय कुमार बंसल ने बताया, कि 14 अक्टूबर को विधायक सुनील राणे का कार्य देख रहे नीरव घनश्याम मोदी ने एमएचबी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई कि हमारे कार्यक्रम का पास कई जगह मिल रहा है जो फर्जी है। हमारे अलावा और किसी को पास देने का अधिकार नही है। पुलिस ने तत्काल इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।

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    जांच में पता चलने पर पुलिस ने 24 वर्षीय विरार के रहने वाले करण अजय शाह, मलाड के 34 वर्षीय परेश सुरेश नेवरेकर, बोरीवली के 24 वर्षीय दर्शन प्रवीण गोहिल और मालाड़ पश्चिम मनोरी इलाके से 24 वर्षीय कव्हिश भालचंद्र पाटिल को गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि इनके पास से 30 लाख रुपये का बनावटी पास, होलोग्राम स्टिकर, लैपटॉप, प्रिंटर आदि समान बरामद किया है। दो आरोपी संतोष और स्वप्निल फरार है जिन्हें पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही है।

    बता दे कि 13 अक्टूबर को फाल्गुनी  पाठक शो के लिए रियायती टिकट खरीदने की कोशिश में 156 लोगों के साथ 5 लाख की धोखाधड़ी हुई है। पैसा लेकर कुछ लोग फरार हो गए है इसकी भी शिकायत एमएचबी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई है। पुलिस इन आरोपियों की भी सरगर्मी से तलाश कर रही है।

  • निवासियों को भुगतना पड़ रहा है एसआरए की बिल्डिंगों के घटिया निर्माण का खामियाजा

    निवासियों को भुगतना पड़ रहा है एसआरए की बिल्डिंगों के घटिया निर्माण का खामियाजा

    • SRA व मनपा के अधिकारी सहित बिल्डर मालामाल: निवासी बेचारे बेहाल।

    सुरेंद्र राय
    मुंबई
    : महानगर मुंबई में ऐसा चलन रहा है, कि जो भी उपयोगी काम जनता के लिए किए जाते हैं, उन्हें या तो कोई विभाग संभालता है या फिर ठेकेदारों को दे दिया जाता है। जनोपयोगी कार्य या निर्माण चाहे जैसे भी कराया जाता हो किंतु उसके निर्माण में निर्माण कर्ता अधिक से अधिक पैसे बचाने की कोशिश करता है, जिसका असर यह पड़ता है कि कार्य या निर्माण अत्यंत घटिया किस्म का और घटिया निर्माण सामग्री वाला होता है। यही हाल है झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) का, जो बिल्डरों को पुनर्वसन हेतु घर बनाने का ठेका दे देता है, जिसमें बिल्डर मनमानी काफी कुछ काम करते हैं।

    SRA की योजना में घटिया बिल्डिंग निर्माण ..

    काम भले ही घटिया हो लेकिन वह बिल्डर या सारे अधिकारियों को समय-समय पर आर्थिक भेंट और अनेक उपहारों से खुश करते रहते हैं। महानगर मुंबई में भी झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) योजना के तहत बनाई गई घटिया इमारतों के कई मामले प्रकाश में आये हैं।

    जानकारी के अनुसार एसआरए ने गोरेगांव झोपड़पट्टी पुनर्वसन योजना के तहत इमारत की पार्किंग में आग जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से बचने के लिए डेवलपर्स और आर्किटेक्ट्स को नए निर्देश जारी किए हैं। हालांकि, प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसी घटनाएं भविष्य में भी हो सकती हैं, जब तक कि सहकारी आवास सोसायटी द्वारा उन इमारतों के लिए आवश्यक देखभाल नहीं की जाती हैं तथा जो पूरी हो चुकी हैं, उन्हें आवासीय प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। इसकी जिम्मेदारी डेवलपर की होती है। इसके बाद भवन महापालिका को सौंप दिया जाता है।

    Sra,
    गोरेगांव से SRA इमारत के नीचे लगी आग जानी की तस्वीर

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    बता दें, कि झोपड़पट्टी पुनर्वसन में अब तक ढाई लाख फ्लैटों को रहने योग्य प्रमाणपत्र दिया जा चुका है। अधिकांश इमारतों की त्रिवर्षीय अवधि समाप्त हो गई है, इसलिए रखरखाव की जिम्मेदारी अब संबंधित सहकारी आवास समितियों की है। लेकिन यह पाया गया है, कि इन आवास संगठनों द्वारा उचित सावधानी नहीं बरती जा रही है। इसलिए अब प्राधिकरण द्वारा इसकी दोबारा समीक्षा की जाएगी। स्लम पुनर्वास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश लोखंडे ने कहा, कि सभी पुनर्वास भवनों के डेवलपर्स और वास्तुकारों को दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे और दावा किया गया है कि फायर ब्रिगेड द्वारा ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ जारी करने के बाद ही रहने योग्य प्रमाण पत्र जारी किया गया था। उसके बाद तीन साल की अवधि के लिए बिल्डरों की जिम्मेदारी व देनदारी को लागू करने के आग्रह की ओर से एसआरए ने अपनी आंखें बंद कर ली हैं।

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    गोरेगांव की जिस इमारत में आग लगी वह सात मंजिला इमारत थी। जबकि झोपड़पट्टी पुनर्वास में 42 मंजिला टावर खड़े हैं। ऐसे टावरों को रहने योग्य प्रमाण पत्र देने के बाद डेवलपर की जिम्मेदारी केवल तीन साल तक होती है, तो असली परीक्षा इन टावरों में रहने वाले निवासियों के लिए होती है। सवाल यह है कि ऐसे टावरों के रखरखाव की देखभाल संबंधित सहकारी आवास सोसायटी द्वारा कैसे की जाएगी इसका कोई प्रारूप एसआरए ने नहीं पेश किया है। महापालिका के पी/उत्तर विभाग कार्यालय में बार-बार की शिकायतों कि गोरेगांव में दुर्घटना ग्रस्त इमारत में पार्किंग स्थल और सड़क पर बाधाएं डाली जा रही हैं। इस पर मनपा अधिकारी भी चुप बैठे हैं।

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  • विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान, 5 राज्यों के समीकरण | सेमीफाइनल या रिहर्सल

    विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान, 5 राज्यों के समीकरण | सेमीफाइनल या रिहर्सल

    देश के पांच राज्यों में 7 नवंबर से शुरू होकर 30 नवंबर तक कुल चार चरणों में मतदान होंगे। छत्तीसगढ़ में दो चरणों में, जबकि बाकी राज्यों में एक ही दिन वोट डाले जाएंगे। नतीजे 3 दिसंबर को आएंगे। साल के ये आखिरी चुनाव सेमीफाइनल तो नहीं, लेकिन 2024 के आम चुनाव के लिए रिहर्सल जैसे जरूर हैं।

    वी बी माणिक
    नई दिल्ली
    – देश की राजनीति में सेमीफाइनल मैच का बिगुल बज चुका है। इसके तहत देश के पाँच राज्यो में सभी दलों के रण बाकुरो की टोली ताल ठोकना शुरू कर दिया है। इस चुनावी खेल में कौन पहलवान जीतेगा? कौन हारेगा? ये समय बतायेगा। इस समय जाति गणना की माँग जोरो पर चल रही है। पर अधिकांश नेता अपनी जाति के बारे में कुछ नही बोल रहे है।

    देश में महिलाओ के साथ बलात्कार की घटना में काफी बढ़ोतरी हुई है। जिस पर राज्य सरकारें चुप्पी साध कर बैठी है। सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह समाप्ति की ओर बढ़ती जा रही है। रणबाँकुरों की ओर से टिकट के लिये जोर आजमाइश की जा रही है। चाहे वह कितना बड़ा अपराधी हो, इसको पार्टियां नही देख रही है। जितने दोषी राजनीतिक पार्टियां है उससे ज्यादा दोषी चुनाव आयोग है।

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    देश के पांच राज्यों में चुनाव

    मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार से देश की जनता कई माध्यमों सवाल करती आ रही है, कि क्योंकि चुनाव आयोग इस बात की जाँच क्यों नही करता कि जो भी नेता चुनाव लड़ रहा है उस के खिलाफ आपराधिक कितने केस दर्ज है? न्यायालय में कितने में दोषी पाया गया है और कितने केस विचाराधीन है? अगर है तो चुनाव लड़ने के योग्य नही है। चुनाव आयोग एकदम निष्पक्ष नही है क्योंकि चुनाव आयोग से रिटायर्ड होने के बाद ये भी किसी राजनीतिक पार्टी से चुनाव लड़कर या पीछे के रास्ते से लोकसभा-राज्यसभा में पहुँच जाते है। और आजीवन मलाई खाते है।

    चुनाव,
    चुनावी समीकरण को दर्शाती हुई तस्वीर

    पांचो राज्यों में कुल चार चरणों में वोटिंग होगी। सिर्फ छत्तीसगढ़ में दो चरणों में मतदान होंगे बाकी राज्यों में एक ही चरण में वोट डाले जाएंगे। शुरुआत मिजोरम से 7 नवंबर को होगी, जबकि आखिरी चरण में तेलंगाना विधानसभा के लिए 30 नवंबर को वोट डाले जाएंगे – सभी राज्यों में मतगणना 3 नवंबर को होगी।

    अब राजीनीतिक पार्टीयो के पहलवानो मे से ये पहलवान चुनाव जीतने के बाद पाँच वर्ष तक अपने एरिया में अपने चमचो के साथ केवल दहशत पैदा करना। पुलिस थानों को अपनी रखैल बनाकर रखना। दुकानदारों व्यापारियों और अन्य कारोबारियों से अवैध धन उगाही का काम करते है और ठेकेदारों से हर कार्य का कमीशन लेना, सरकारी दफ्तरों में वसूली करना, कर्मचारियों को धमकी देना, यही काम करते है। चुनाव आयोग इसकी जाँच क्यों नही करवाता है? बहुत गरीब वर्ग इन विधायकों द्वारा ठगी के शिकार हुए होते है इस पर कोई कार्रवाई नही होती है। अब देखना है, कि 3 दिसंबर को इस सेमीफाइनल मुकाबले का क्या रिजल्ट आता है।

    चुनाव तारीखों की घोषणा तो अब हुई है, लेकिन राजनीतिक पार्टियां काफी पहले से ही चुनाव कैंपेन शुरू कर चुकी हैं। अब तक का हाल तो यही बता रहा है कि 3 राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई है, जबकि तेलंगाना और मिजोरम में क्षेत्रीय दलों का दबदबा है।

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