Category: National News

  • मुलुंड में बनेगा मुंबई शहर का पहला पक्षी पार्क

    मुलुंड में बनेगा मुंबई शहर का पहला पक्षी पार्क

    सरकार ने पक्षी पार्क बनाने के लिए भूखंड का आरक्षण चिड़ियाघर में बदल दिया है। पार्क के विशेष पक्षियों में लाल छाती वाला तोता, ब्लॉसम-हेडेड तोता, सफेद मोर, मालाबार ग्रे हॉर्नबिल, काला हंस, गलाह कॉकटू, शुतुरमुर्ग, मुकुटधारी कबूतर और स्कार्लेट मैकॉ शामिल होंगे। (Mumbai city’s first bird park will be built in Mulund)

    मुंबई- महाराष्ट्र शहरी विकास (UD) विभाग ने बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के नाहुर, मुलुंड में एक आरक्षित मनोरंजन मैदान को पक्षी पार्क में परिवर्तित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जो भारत की आजादी के बाद से मुंबई शहर के लिए पहली बार हुआ है।

    कैसा होगा पार्क?

    17,958 वर्ग मीटर में फैले इस प्रस्तावित पार्क को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार विकसित किया जाएगा और यह भायखला में वीरमाता जीजाबाई भोसले पार्क और चिड़ियाघर के लिए एक उपग्रह केंद्र के रूप में कार्य करेगा। इस पार्क में 18 क्षेत्रीय और विदेशी प्रजातियों के 206 पक्षी थीम वाले बाड़ों में रखे जाएंगे, जिससे एशियाई, अफ्रीकी, ऑस्ट्रेलियाई और अमेरिकी आवास पुनर्जीवित होंगे। (Mumbai city’s first bird park will be built in Mulund)

    कैसे किया प्रस्ताव?

    भूमि आरक्षण श्रेणी को ‘मनोरंजन मैदान’ से ‘चिड़ियाघर’ में बदलने का प्रस्ताव सबसे पहले जनवरी 2024 में मुंबई चिड़ियाघर के निदेशक द्वारा शुरू किया गया था। बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने जनता से प्रतिक्रिया की मांग की थी। सितंबर तक वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई और जनवरी 2025 में प्रस्ताव को शहरी विकास विभाग को भेज दिया। अंतिम मंजूरी 7 अप्रैल, 2025 को मिल ही गई। (Mumbai city’s first bird park will be built in Mulund)

    शिक्षा और जागरूकता

    मुलुंड विधायक मिहिर कोटेचा, जिन्होंने इस परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उन्होंने कहा, “यह पक्षी पार्क मुंबई के लिए एक ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित गंतव्य होगा। मुंबई के भायखला का चिड़ियाघर की स्थापना के बाद से एक सदी से भी अधिक समय में अपनी तरह का पहला यह न केवल लोगों को मनोरंजन प्रदान करेगा, बल्कि पक्षी जैव विविधता के बारे में शिक्षा और जागरूकता भी प्रदान करेगा।” (Mumbai city’s first bird park will be built in Mulund)

    केंद्र की मंजूरी

    80 करोड़ रुपये की इस परियोजना को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (Central Zoo Authority) से मंज़ूरी मिल गई है और इसके 18 महीने में पूरा होने की उम्मीद है। एक सलाहकार की नियुक्ति पहले ही हो चुकी है और विस्तृत योजना पर काम चल रहा है। पार्क के विशेष पक्षियों में लाल छाती वाला तोता, ब्लॉसम-हेडेड तोता, सफेद मोर, मालाबार ग्रे हॉर्नबिल, काला हंस, गलाह कॉकटू, शुतुरमुर्ग, मुकुटधारी कबूतर और स्कार्लेट मैका शामिल होंगे। (Mumbai city’s first bird park will be built in Mulund)

    विधायक मिहिर कोटेचा ने कहा, “यह पार्क मुलुंड और व्यापक मुंबई महानगर क्षेत्र के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा।” उन्होंने यह भी कहा, कि “परिवारों, छात्रों और पक्षी प्रेमियों को आखिरकार एक समर्पित स्थान मिलेगा जहाँ वे प्राकृतिक वातावरण में पक्षियों को देख और सराह सकते हैं।” (Mumbai city’s first bird park will be built in Mulund)

  • Bombay High Court: लोन डिफॉल्ट पर बैंकों को नहीं मिलेगा एलओसी जारी करने का अधिकार

    Bombay High Court: लोन डिफॉल्ट पर बैंकों को नहीं मिलेगा एलओसी जारी करने का अधिकार

    Bombay High Court: बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सूना दिया, जिसके बाद से बैंक सेक्टर में हाहाकार मच गया है। कोर्ट के फैसले के मुताबिक लोन डिफॉल्ट के मामलों अब कोई भी बैंक एलओसी जारी नहीं कर सकेगा। (Bombay High Court’s decision Banks will not get the right to issue LOC in case of loan default)

    मुंबई- आजकल लोन लेना एक सामान्य प्रक्रिया बन गई है। बैंक अपने ग्राहकों को कर्ज चुकाने के लिए एक निश्चित समय सीमा देती है और इसके साथ ब्याज भी लेती है। यदि कोई व्यक्ति समय पर लोन का भुगतान नहीं करता, तो बैंक उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। हाल ही में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस विषय पर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को यह स्पष्ट कर दिया, कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को कर्ज न चुकाने वालों यानी किसी भी लोन डिफॉल्ट के खिलाफ लुकआउट सकुलर (LOC) जारी करने का अधिकार नहीं है। इस निर्णय के बाद, ऐसे बैंकों द्वारा जारी किए गए सभी एलओसी रह्द कर दिए गए हैं। (Bombay High Court’s decision Banks will not get the right to issue LOC in case of loan default)

    अदालत का आदेश और प्रभाव

    न्यायमूर्ति गौतम पटेल और न्यायमूर्ति माधव जामदार की बेंच ने केंद्र सरकार के उस ज्ञापन को भी असंविधानिक घोषित किया, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के चेयरपर्सन को एलओसी जारी करने का अधिकार दिया गया था। केंद्र सरकार की और से पेश हुए वकील आदित्य ठक्कर ने अदालत से अपने आदेश पर रोक लगाने की अपील की, लेकिन पीठ ने इसे अस्वीकार कर दिया। (Bombay High Court’s decision Banks will not get the right to issue LOC in case of loan default)

    बैंकों का लक्ष्य सिर्फ व्यापार

    देखा जाता है कि ज्यादातर बैंक लोन देने की होड़ में उपभोक्ता से कई दस्तावेजों पर सिग्नेचर  करवा कर उसे फंसा कर रखने की कोशिश करती है। बैंकों का लक्ष्य अपना व्यापार करना होता है। जबतक उपभोक्ता अपने किश्त के पैसे जमा करता है और बैंक को मुनाफा मिलता रहता है, तब तक सब ठिक चलता है। लेकिन जैसे ही परिस्थिति बिगड़ती है और उपभोक्ता पैसे देने में असमर्थ होता है वैसे-वैसे बैंक का रुख कड़ा होने लगता है। हालांकि बैंक अपने पैसों के अलावा ब्याज के पैसौं को मिलाकर चक्रवर्ती ब्याज लगाकर वसूली शुरू कर देती है और वैसे में जब उपभोगकर्ता और अधिक समस्या में फंस जाता है तब बैंक लुकाउट नोटिस जारी कर कानूनी कार्यवाही करती है। अब बम्बई हाईकोर्ट के फैसले के बाद ऐसा नही चलेगा। (Bombay High Court’s decision Banks will not get the right to issue LOC in case of loan default)

    अदालत के फैसले में क्या कहा?

    बम्बई हाईकोर्ट की अदालत ने कई याचिकाओं पर अपना निर्णय सुनाया और कहा कि ब्यूरो ऐसे एलओसी पर कोई कार्रवाई नहीं करेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका निर्णय किसी भी चूककर्ता के खिलाफ न्यायाधिकरण या आपराधिक अदालत के आदेशों को प्रभावित नहीं करेगा। (Bombay High Court’s decision Banks will not get the right to issue LOC in case of loan default)

  • नगरपालिका का समर कैंप 11 साल के बच्चे की मौत, ठेकेदार समेत 6 पर केस दर्ज

    नगरपालिका का समर कैंप 11 साल के बच्चे की मौत, ठेकेदार समेत 6 पर केस दर्ज

    Mumbai News: मुंबई के नजदीक महानगर पालिका के एक स्विमिंग पूल में 11 वर्षीय बच्चे की डूबने से मौत हो गई है। इसमे ठेकेदार समेत 6 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। बच्चा पूल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा था। लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। (11 year old child died in Nagarpalika’s summer camp, case filed against 6 including contractor)

    Mumbai News: समर कैम्प में स्विमिंग सीखने गए 11 साल के बच्चे की पूल में डूबने से मौत हो गई है. यह घटना रविवार 21 अप्रैल लगभग सवेरे 10:30 बजे की है। मृतक छात्र का नाम ग्रंथ मुथा बताया गया है। जिस स्विमिंग पूल में हादसा हुआ, वह मीरा भाईंदर महानगरपालिका (MBMC) का है। इस मामले में 6 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। नवघर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ठेकेदार समेत 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। (11 year old child died in Nagarpalika’s summer camp, case filed against 6 including contractor)

    किस पर करें भरोसा?

    नवघर पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी नारायण सुभाष नायक, हिंगोला सीमांचल नायक, प्रथमेश मोहन कदम, अर्जुन लक्ष्मण कदम, साहस चैरिटेबल ट्रस्ट के ठेकेदार और प्रबंधन वर्ग एवं अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज किया गया है। ग्रन्थ मुथा ने अपने दोस्त के साथ एक स्विमिंग पूल में तैराकी सीखने के लिए 15 दिन के समर कैंप में एडमिशन लिया था। उनकी सात दिन की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी थी। हालांकि, ग्रंथ दोपहर के बैच में स्विमिंग के लिए गया और डूब गया। (11 year old child died in Nagarpalika’s summer camp, case filed against 6 including contractor)

    इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि जब वह डूब रहा था, तब पूल में मौजूद किसी भी कोच या प्रबंधन को इस बात का पता नहीं चला। जब ग्रन्थ का शव पानी से बाहर आया तो उसे तुंगा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। (11 year old child died in Nagarpalika’s summer camp, case filed against 6 including contractor)

    पिता ने लगाया आरोप

    इस घटना के बाद ग्रंथ के पिता ने आरोप लगाया कि ठेकेदार और कैंप आयोजकों की लापरवाही के कारण उनके बेटे की जान चली गई। इस शिकायत के आधार पर नवघर पुलिस ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है इस दुर्घटना ने महानगर पालिका द्वारा प्रायोजित तैराकी केंद्र में सुरक्षा उपायों पर सवाल खड़े कर दिए है। (11 year old child died in Nagarpalika’s summer camp, case filed against 6 including contractor)

  • क्यों नहीं हो रही घपले की जांच? रिश्वत की बेड़ियों में जकड़ा आर/ दक्षिण वार्ड

    क्यों नहीं हो रही घपले की जांच? रिश्वत की बेड़ियों में जकड़ा आर/ दक्षिण वार्ड

    कांदीवली बीएमसी का एक ऐसा घपला आज आपके सामने पेश किया जा रहा है, जिसकी जांच और पड़ताल में ही हमारा दिमाग काम करना बंद कर दिया। (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)

    मुंबई- बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के अधिकारी एवं कर्मचारी हमेशा से ही हेराफेरी और घपले बाज़ी के लिए मशहूर रहे हैं। लेकिन आज आपके सामने कांदीवली पश्चिम का एक ऐसा मामला पेश करने जा रहे हैं, जो घपलेबाजों को भी शर्मसार कर दे। कहते हैं, बीएमसी जो कर दे, कोई पूछने वाला नहीं है। सत्ता या कुर्सी ही सर्वोपरि है। जब तक साहेब कुर्सी पर बैठे रहेंगे दीवान ही रहेंगे। (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)

    क्या है पूरा मामला ?

    वाकया है कि 14 अगस्त 1993 में अपने झोपड़े जिसकी माप 15 गुने 10 फीट रही। जिसके मालिक अब्दुल रहमान 90 हज़ार रुपये में सेवालाल रामलाल रामदेव मौर्या को बेच देते हैं जिसे 1976 के सेंसस में भी 15 गुने 10 का ही दर्ज किया गया है। बीएमसी के जल आपूर्ति विभाग ने 25/09/2017 को पेय जल का कनेक्शन सेवालाल रामलाल रामदेव मौर्या का पता शॉप नियर आकांक्षा बिल्डिंग, त्रिकम दास रोड, कांदिवली (पश्चिम) के नाम पर दिया। जबकि बिजली का बिल आकांक्षा आर्केड CHS वड़ापाव शॉप त्रिकम दास रोड के पते पर आता है यानी फर्जी तरीके से आकांक्षा सोसाइटी द्वारा मौर्या फास्ट फूड टी एंड कोलड्रिंक का प्रीमाइस में होने का पत्र सोसाइटी सेक्रेटरी द्वारा एक पत्र बीएमसी आर/ दक्षिण वॉर्ड को 12/03/2018 को लिखित रूप में दिया गया था। (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)

    चाय की दुकान या फास्ट फूड की दुकान?

    लेकिन बीएमसी रोड ओपनिंग परमिशन 13/03/2018 को मौर्या फास्ट फूड को लेंथ ऑफ फ्रेंच 6.5 मीटर बताया गया। बीएमसी द्वारा यह पत्र mr. सावंत के नाम का केयर ऑफ दिया गया। जबकि बीएमसी स्वास्थ्य विभाग द्वारा मौर्या टी एंड कोल्ड्रिंक्स को सिर्फ चाय बेचने का लाइसेंस 28/12/2017 को सिर्फ दो साल के लिए दिया गया। जिसमें शॉप आकांक्षा आर्केड का पता दर्ज किया गया था। हैरानी की बात यह कि गुमास्ता लाइसेंस मौर्या फास्ट फूड सेंटर के नाम से वड़ा पाव बेचने का दर्ज किया गया है। (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)

    क्या है घपला?

    इस घपलेबाजी पर तमाम सवाल उठ खड़े होते हैं। वड़ा पाव का लाइट बिल आकांक्षा आर्केड और एप्लिकेशन फॉर्म में नियर आकांक्षा आर्केड क्यों लिखा गया? यदि वड़ा पाव शॉप लाइट बिल आकांक्षा आर्केड बिल्डिंग का है, तो 394 का लाइसेंस मौर्या टी एंड कोल्ड्रिंक्स शॉप का एक्सेप्ट कैसे हुआ? नेचर ऑफ बिजनेस के अनुसार सिर्फ मौर्या टी एंड कोल्ड्रिंक्स लिखा गया है तो लाइट बिल में आकांक्षा वड़ा पाव कैसे लिखा जा सकता है? शॉप एंड एस्टेब्लिश यानी गुमास्ता लाइसेंस में आकांक्षा आर्केड बिल्डिंग के पते पर नेचर ऑफ बिजनेस वड़ा पाव है, तो टी एंड कोल्ड्रिंक्स का क्यों नहीं है? (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)

    बिल्डिंग एंड फैक्ट्री विभाग

    इतना ही नहीं सवाल यह भी है कि जब सेंसस में 150 वर्ग फीट है तो गुमास्ता में 120 वर्ग फीट कैसे दर्ज किया गया है? इसमें कौन सा सही है? जबकि झोपड़े की खरीदी में एरिया 150 वर्ग फीट है और फॉर्म P में आकांक्षा आर्केड लिखा है तो बिल्डिंग एंड फैक्टरी विभाग की एन ओ सी जो केवल चाल में लिया जाता है, तो बिल्डिंग में कैसे लिया गया? (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)

    जांच कौन करेगा?

    इतने सारे घपलों घोटालों में कौन सा बीएमसी विभाग, एप्लीकेंट और आर्केड बिल्डिंग का सेक्रेटरी सहित तमाम लोग शामिल हैं और तमाम अनियमितताएं हुई या जानबूझकर की गई, कहीं धोखाधड़ी के लिए तो साजिश नहीं की गई? जांच कौन करेगा? और गलत करने वालों को कानून के हवाले कौन करेगा? करेगा भी या नहीं? कौन बता सकता है नियमों कानूनों की हत्या में शामिल तमाम किरदार कौन है? (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)

  • Mumbai: जैन मंदिर विवाद के बाद BMC अधिकारी का तबादला

    Mumbai: जैन मंदिर विवाद के बाद BMC अधिकारी का तबादला

    Mumbai vileparle jain protest against Bmc
    मुंबई में जैन समुदाय के विरोध प्रदर्शन की तस्वीर

    BMC प्रशासन द्वारा जैन मंदिर ध्वस्त किए जाने पर सामुदायिक विवाद के बाद बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने मनपा के-ईस्ट वार्ड के प्रभारी सहायक आयुक्त नवनाथ घाडगे को तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित कर दिया। अब मंदिर वहीं बनाया जाएगा। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) प्रशासन द्वारा शहर के विले पार्ले क्षेत्र में एक जैन मंदिर को गिराए जाने के बाद विवाद इतना बढ़ गया कि शनिवार को जैन समाज के लोगों ने लाखों की संख्या में मोर्चा निकाल कर विरोध प्रदर्शन किया। तत्पश्चात मनपा प्रशासन ने उसी दिन आनन फानन में वार्ड के सहायक आयुक्त का तबादला कर दिया। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)

    बृहन्मुंबई महानगर पालिका आयुक्त भूषण गगरानी ने बताया कि मनपा के-ईस्ट वार्ड के प्रभारी नवनाथ घाडगे को तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित कर दिया गया है। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)

    क्या है मामला ?

    के-ईस्ट वार्ड की एक टीम ने 16 अप्रैल को नेमिनाथ कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के अंदर स्थित एक जैन मंदिर या ‘चैतलया’ को यह दावा करते हुए ध्वस्त कर दिया कि यह एक अनधिकृत संरचना है। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)

    जैन समुदाय का विरोध

    शनिवार को वार्ड कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला गया। महाराष्ट्र गौशाला संघ के परेश शाह ने दावा किया कि धार्मिक नेताओं और महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रसाद लोढ़ा, स्थानीय भाजपा विधायक पराग अलवानी और कुछ अन्य राजनीतिक नेताओं सहित 20,000 से अधिक लोगों ने मार्च में भाग लिया। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)

    उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मांगों का एक ज्ञापन सौंपा और वार्ड ऑफिसर घाडगे के साथ दो घंटे तक बैठक की। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)

    परेश शाह ने कहा, “बीएमसी की कार्रवाई से पूरा जैन समुदाय व्यथित है।” उन्होंने मांग की कि महानगर पालिका अधिकारी को निलंबित करे। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्टियों को जवाब देने का समय दिए बिना ही मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)

    शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने कहा, कि बीएमसी पर मुख्यमंत्री कार्यालय और शहरी विकास मंत्री का कार्यालय पूरी तरह से और सीधे तौर पर नियंत्रण रखता है, जिससे पता चलता है कि इस घटना के लिए वे ही जिम्मेदार हैं। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)

    शहरी विकास विभाग का नेतृत्व उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कर रहे हैं, जो प्रतिद्वंद्वी शिवसेना के प्रमुख हैं।

    खुद के खिलाफ विरोध का ढोंग

    “संरक्षक मंत्री (लोढ़ा) किसके खिलाफ विरोध कर रहे थे? वह जो कर रहे हैं वह डेरासर (मंदिर) को बचाने के बजाय संरक्षक मंत्री के रूप में अपनी शक्तियों का उपयोग करके नाटक कर रहे हैं! “उनके पास बीएमसी में ही एक अवैध कार्यालय है, और उन्हें रियल एस्टेट और ऐसे मामलों का बहुत बड़ा अनुभव है। डेरासर की रक्षा करने के बजाय, अब वह विरोध का नाटक कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि हर कोई यह समझेगा – भाजपा किसी की नहीं है। यह भाजपा सरकार है जो सीएम कार्यालय के माध्यम से बीएमसी चला रही है, “श्री ठाकरे ने आरोप लगाया। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)

    विरोध मार्च में भाग लेने वाली सांसद और मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने दावा किया कि बीएमसी अधिकारियों ने अदालत के फैसले का इंतजार किए बिना मंदिर को ध्वस्त कर दिया। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)

    जैन मंदिर अब वहीं पर बनाया जाएगा

    उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान जैन तीर्थंकरों की मूर्तियों और धार्मिक ग्रंथों का भी “अपमान” किया गया और इस “षड्यंत्र” के लिए “भाजपा गठबंधन की बुलडोजर सरकार” को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बीएमसी आयुक्त भूषण गगरानी से बात की जिन्होंने आश्वासन दिया कि उसी स्थान पर एक नया मंदिर बनाया जाएगा। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)

    कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने भाजपा सरकार पर “अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “बिना उचित नोटिस दिए किसी ढांचे को गिराना गलत है। इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।”

  • देवेन्द्र फडणवीस को बॉम्बे हाईकोर्ट का नोटिस, चुनाव में घपला..

    देवेन्द्र फडणवीस को बॉम्बे हाईकोर्ट का नोटिस, चुनाव में घपला..

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2024 के महाराष्ट्र चुनाव में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस नेता प्रफुल्ल विनोदराव गुडधे द्वारा दायर चुनाव याचिका के संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को नोटिस जारी किया है। (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

    मुंबई- बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ नागपुर दक्षिण पश्चिम विधानसभा सीट से 2024 में उनकी जीत को चुनौती देने वाली एक चुनावी याचिका को लेकर नोटिस जारी किया है। आरोप है कि देवेंद्र फडणवीस ने चुनाव के दौरान कई अनिवार्य प्रावधानों का पालन नहीं किया। (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

    क्या है मामला ?

    बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच द्वारा जारी नोटिस का जवाब 8 मई को देना है। यह समन कांग्रेस नेता प्रफुल्ल विनोदराव गुडधे द्वारा जनवरी में दायर चुनाव याचिका के संबंध में जारी किया गया था, जो विधानसभा चुनाव के दौरान देवेंद्र फडणवीस से 39,710 मतों के अंतर से हार गए थे। (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

    खबरों के मुताबिक, गुडधे ने याचिका में प्रक्रियागत खामियों और भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाया था और मांग की थी कि हाईकोर्ट फडणवीस की जीत को “अमान्य” घोषित करे। (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

    यह मामला न्यायमूर्ति प्रवीण पाटिल की पीठ के समक्ष पहुंचा, जिन्होंने गुरुवार को अपने कक्ष में याचिका पर सुनवाई की और फडणवीस को नोटिस जारी किया। (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

    गुडधे के वकील पवन दहत ने बताया, “न्यायमूर्ति प्रवीण पाटिल ने मुख्यमंत्री फडणवीस को समन (नोटिस) जारी किया है, जिस पर 8 मई तक जवाब देना है।” (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

    कोर्ट में पेशी

    खबरों के मुताबिक, देवेंद्र फडणवीस को अगली तारीख पर कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने की जरूरत नहीं है। लेकिन मुख्यमंत्री के कानूनी प्रतिनिधि को कोर्ट में पेश होकर याचिका का जवाब देना होगा। विनोदराव गुडधे के वकील पवन दहत और एबी मून ने दावा किया है, कि पिछले साल नवंबर में हुए राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान कई अनिवार्य प्रावधानों का पालन नहीं किया गया था। (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

    महायुति गठबंधन की सरकार

    महायुति गठबंधन युवती में भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी शामिल हैं। इसी महायुति गठबंधन ने हालही के विधानसभा चुनाव में भारी जीत हासिल की। ​​इस गठबंधन ने 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा सीटों में 230 सीटें जीतीं है। जिसमें भाजपा ने 132 सीटें जीतें। शिवसेना और एनसीपी ने क्रमशः 57 और 41 सीटों पर जीत हासिल की है। जीत के बाद, देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने, जबकि शिंदे और पवार ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

    इस बीच, उच्च न्यायालय ने नागपुर पश्चिम से भाजपा विधायक मोहन मते और चंद्रपुर जिले की चिमूर सीट से कीर्तिकुमार भांगडिया को भी इसी तरह की चुनाव याचिकाओं पर समन जारी किया है। (Bombay High Court issues notice to Devendra Fadnavis, election fraud)

  • मुंबई पुलिस का ‘ऑपरेशन शोध’ आम नागरिकों से पुलिस ने की अपील

    मुंबई पुलिस का ‘ऑपरेशन शोध’ आम नागरिकों से पुलिस ने की अपील

    मुंबई पुलिस ‘ऑपरेशन शोध’ के तहत लापता बच्चों और लड़कियों के साथ महिलाओं की तलाश कर रहा है। पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि अगर किसी को कोई संदिग्ध बच्चा दिखाई देता है, तो विनम्रता से बच्चे के पास जाएं और किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचित करें। (Mumbai Police’s Operation Shodh, Police appeals to common citizens)

    मुंबई- शहर भर में लापता बच्चों और नाबालिग लड़की की गुमशुदगी की रिपोर्ट पर मुंबई पुलिस गंभीरता से ‘ऑपरेशन शोध’ की शुरुआत कर दी है। मुंबई पुलिस ऑपरेशन शोध (Mumbai Police Operation Shodh) नाम का ये विशेष अभियान 17 अप्रैल से 30 मई तक चलेगा। इस ऑपरेशन के तहत मुंबई पुलिस लपाता लड़कियों, महिलाओं और बच्चों को ढूढने की कोशिश करेगी। इस अभियान का मकसद 18 साल से कम उम्र के लापता या किडनैप बच्चों और 18 साल से ज्यादा उम्र की लापता लड़कियों के साथ महिलाओं का शहर भर में पता लगाना है। (Mumbai Police’s Operation Shodh, Police appeals to common citizens)

    मुंबई पुलिस का ऑपरेशन ‘शोध’ 

    ऑपरेशन ‘शोध’ के तहत, मुंबई पुलिस हर पुलिस स्टेशन के स्तर पर ज्यादा से ज्यादा लापता बच्चों और लड़कियों का पता लगाने और उन्हें फिर से उनके परिजनों से मिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। शहर की पुलिस ने इस मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए नागरिकों और बाल कल्याण के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों से भी सहयोग मांगा है। (Mumbai Police’s Operation Shodh, Police appeals to common citizens)

    संदिग्ध बच्चा दिखे तो क्या करें ?

    मुंबई पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा, कि अगर किसी को कोई संदिग्ध बच्चा दिखाई देता है, तो विनम्रता से बच्चे के पास जाएं और किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचित करें। डायल 100 या चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर या नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर पुलिस कंट्रोल रूम को इसकी सूचना दी जा सकती है। (Mumbai Police’s Operation Shodh, Police appeals to common citizens)

    मुंबईकरों से पुलिस की खास अपील

    अभियान के तहत पुलिस ने लोगों को रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों, धार्मिक स्थलों, अस्पतालों, होटलों, दुकानों पर देखे जाने वाले बच्चों और सड़कों पर कूड़ा बीनने या भीख मांगते पाए जाने वाले बच्चों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। नागरिकों को उन मामलों की रिपोर्ट करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जहां नाबालिग बच्चे घरेलू कामों में लगे पाए जाते हैं या बिना किसी अभिभावक के घूमते पाए जाते हैं। (Mumbai Police’s Operation Shodh, Police appeals to common citizens)

  • Mumbai BMC: मनपा बजट में खतरे की घंटी!

    Mumbai BMC: मनपा बजट में खतरे की घंटी!

    एक लंबे समय के बाद अब वह न केवल अधिक संसाधन जुटाने की राह ख़ोज रही है, बल्कि वह राज्य सरकार से अपने हिस्से की अतिरिक्त राशि मांगते हुए बकाया राशि को जारी करने की मांग भी कर रही है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    मुंबई– बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) प्रशासक ने 3 फरवरी 2025 को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मनपा का वार्षिक बजट जारी किया। 744.27 बिलियन रुपए का यह बजट 2024-25 के बजट की तुलना में 20 प्रतिशत ज़्यादा रहा। इस बजट में बुनियादी ढांचे के कोई नए या मुख़्य काम को शुरू करने का उल्लेख नहीं है। हालांकि पहले से ही मंजूर बड़ी परियोजनाएं या फिर चल रही परियोजनाओं को जारी रखने के लिए भारी मात्रा में पैसा ख़र्च करना पड़ेगा। जिसपर मनपा प्रशासन ने संसाधनों का और अधिक बंटवारा करने के बजाय उनका विवेकपूर्ण उपयोग करते हुए पुराने कार्य को ही पूरा करने पर जोर देते हुए समझदारी का परिचय दिया है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    Bmc चुनाव की संभावना

    इस बजट में किसी नए कर की घोषणा नहीं की गई है। ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि BMC के चुनाव इसी वर्ष होंगे। परंपरागत रूप से यह देखा गया है कि सरकारें कर वृद्धि की पृष्ठभूमि में चुनाव नहीं लड़ा करती हैं या चुनाव लड़ना पसंद नहीं करती हैं। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    Bmc बजट पर काबू

    बीएमसी के बजट में पूंजीगत निवेश के लिए 431.62 बिलियन रुपए या कुल बजट के 58 प्रतिशत राशि का प्रावधान दिखाई देता है। इसका उपयोग मुख़्यतः शहर में नई संपत्तियों के निर्माण पर किया जाना है। दूसरी ओर राजस्व ख़र्च में वेतन, पेंशन समेत अन्य संस्थागत ख़र्च भी शामिल हैं। इसके लिए 312.04 बिलियन रुपए या कुल बजट की 41.52 प्रतिशत राशि का प्रावधान किया गया है। BMC का राजस्व बजट हमेशा से ही काफ़ी बढ़ा हुआ था और अब इसे काबू में लाने की कोशिश होती देखकर अच्छा लग रहा है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    खर्च पर ध्यान देना जरूरी

    लेकिन साल जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा वैसे-वैसे राजस्व ख़र्च के बर्ताव पर पहनी नज़र रखनी ज़रूरी होगी। यहां बुनियादी ढांचे के रखरखाव का उल्लेख किया जाना भी आवश्यक है। परंपरागत रूप से म्युनिसिपल इंफ्रास्ट्रक्चर मैनुएल्स में मेंटेनेंस शेड्यूल दिया जाता है, जिस पर पूर्व निर्धारित समयावधि के हिसाब से अमल करना होता है। लेकिन नगरपालिका कर्मियों की ओर से होने वाली चूक की वजह से पूर्व में बुनियादी ढांचे की विफ़लता के अनेक मामले देखे गए हैं, जिसमें जनहानि भी हुई है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है, कि राजस्व बजट में बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए पर्याप्त राशि का प्रावधान किया गया होगा। कुछ बुनियादी सुविधाओं को नियमित रखरखाव की ज़रूरत होती है जबकि कुछ को उनकी उम्र बढ़ने के बाद भारी या बड़े रखरखाव की आवश्यकता होती है। बुनियादी ढांचे के वार्षिक निरीक्षण और उन्हें बेहतर स्थिति में रखने के लिए राशि का प्रावधान उतना ही आवश्यक है जितना आवश्यक नई बुनियादी सुविधाओं संबंधी संपत्तियों के निर्माण पर पैसा ख़र्च करना होता है।

    दुर्भाग्यवश देश की अर्बन लोकल बॉडीज (ULB ) यानी शहरी स्थानीय निकाय, संसाधनों को लेकर काफ़ी संघर्ष करती हैं। यह बात GST की ओर से इन संस्थाओं के राजस्व संबंधी सभी रास्तों पर कब्ज़ा करने के बाद और भी सटीकता से लागू होती है। BMC की स्थिति और भी गंभीर है। इसका कारण यह है कि BMC पर अनेक विशाल परियोजनाओं का काम डाल दिया गया है, जो BMC की पूर्व में मजबूत रही वित्तीय स्थिति पर दबाव में डालने का काम कर रही है।

    BMC का कमिटेड फंड

    बजट में पहले से चल रही परियोजनाओं पर होने वाले कुल बिल यानी ख़र्च के रूप में 2.32 ट्रिलियन रुपए दर्शाए गए हैं। इस राशि को कमिटेड लायबिलिटी अर्थात प्रतिबद्ध देय राशि के रूप में दिखाया गया है। इस राशि में से 882.51 बिलियन रुपए केवल सड़क और पुलों के लिए ही रखे गए हैं। चूंकि वार्षिक बजटीय प्रावधान से यह बोझ नहीं उठाया जा सकता। इसलिए BMC को अपने भारी भरकम रिजर्व यानी जमा राशि को हाथ लगाना होगा। 817.74 बिलियन रुपए की इस जमा राशि के एक बड़े हिस्से को कमिटेड लायबिलिटी और वर्तमान में जारी निर्माण कार्य पर ही ख़र्च करने की नौबत आ गई है।

    BMC के खजाने पर बोझ

    ऐसे में यह साफ़ है कि महानगरपालिका के पास मौजूद जमा निधि का खजाना तेजी से खाली होता जा रहा है और यह भविष्य में बहुत ज़्यादा सहायता करने की स्थिति में नहीं होगा। चूंकि हम अनिश्चितता के दौर में रह रहे हैं, जहां अचानक आने वाला संकट शहर के सुचारू संचालन में व्यवधान डालता है। ऐसी स्थिति में स्थानीय निकाय के पास जमा निधि ही ऐसे संकट को पार करने में उसकी सहायता करती है। लेकिन भविष्य में उसे जमा निधि से सहायता मिलने की संभावना कम ही दिखाई देती है।

    राजस्व वृद्धि हासिल करना और सोच-समझकर ख़र्च करना।

    बड़ी परियोजनाओं के इस अत्यधिक बोझ को लेकर पड़ने वाला दबाव नगर पालिका के बजट में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। इसी वजह से बजट का पहला स्टेटेड ऑब्जेक्टिव यानी लिखित उद्देश्य फिस्कल डिसिप्लिन अर्थात वित्तीय अनुशासन और सस्टेनेबिलिटी यानी वहनीयता है। इसके तहत दो लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। पहला है रेवेन्यू ऑग्मेंटेशन यानी राजस्व वृद्धि हासिल करना और एक्सपेंडिचर रेशनलाइजेशन यानी व्यय युक्तिकरण अर्थात सोच-समझकर ख़र्च करना। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    BMC ने की सरकार से गुजारिश

    निश्चित रूप से महापालिका प्रशासन चिंतित है और वह सिविक मशीनरी यानी नगरीय व्यवस्था को अपनी कमर कसने के लिए तैयार होने को कह रहा है। राजस्व वृद्धि करने के लिए नगरपालिका प्रशासन आय अर्जित करने या संसाधन जुटाने के नए स्रोत ख़ोज रहा है। इसकी शुरुआत करते हुए BMC ने राज्य सरकार को गुजारिश की है, कि वह महापालिका की ओर से एकत्रित किए गए प्रीमियम में राज्य सरकार की हिस्सेदारी के प्रतिशत को कम करें, ताकि स्थानीय निकाय को प्रीमियम में ज़्यादा हिस्सेदारी मिल सके। यदि राज्य सरकार ने उसकी यह गुजारिश मान ली तो 2025- 26 के दौरान ही उसे 3 बिलियन रुपए की अतिरिक्त आय होगी। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    अधिनियम में संशोधन पर विचार

    BMC ने वेकेंट लैंड टेनेंसी (VLT) यानी खाली जमीन किरायेदारी नीति भी जारी की है। इसके तहत वह उसके पास उपलब्ध खाली जमीन को दीर्घावधि की लीज पर दे सकेगा। इसके चलते BMC को 20 बिलियन रुपए मिलने की उम्मीद है। BMC इस बात पर भी विचार कर रही है कि क्या वह सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) यूजर चार्ज लगा सकता है? ऐसा करने के लिए वह 2006 के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सैनिटेशन बायलॉज यानी अधिनियम में संशोधन करना चाहता है। उसका मानना है कि ऐसा हुआ तो वेस्ट मैनेजमेंट को इंडिपेंडेंट सस्टेनेबल यानी स्वतंत्रता के साथ वहनीय किया जा सकेगा। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    BMC का प्लान

    BMC ने कहा, कि वह स्लम्स यानी झोपड़पट्टी में आने वाले 50,000 के आसपास कमर्शियल यूनिट्स पर संपत्ति कर लगाना चाहता है। यह एक साहसिक नवाचार है और इसके चलते ULB को 3.5 बिलियन रुपए मिल सकेंगे। इसके अलावा वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे से जुड़े दहिसर ‘चेक नाके’ पर एक ट्रांसपोर्टेशन और कमर्शियल हब बनाने का प्रस्ताव है। इससे भी अतिरिक्त आय हासिल हो सकेगी। इसके अलावा BMC की वरली और क्रॉफोर्ड मार्केट जैसे इलाकों में अंडर यूटिलाइज्ड प्लॉट्स यानी कम उपयोग में आने वाले प्लॉट्स की नीलामी करने की भी योजना है। BMC की मनोरंजन कर वसूलने में तेजी लाने, अपनी विज्ञापन नीति को अंतिम रूप देने तथा ट्रेड लाइसेंस फ़ीस में वृद्धि करने की भी योजना है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    संसाधनों को बढ़ाना भी आय अर्जित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा बेहतर दिनों में शुरू किए गए गैर ज़रूरी ख़र्च में कटौती करके भी पैसा अर्जित किया जा सकता है। BMC अब इस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। ऐसा करने के लिए वह ख़र्च में युक्तिकरण की नीति लागू करने की इच्छुक है। इस नीति के तहत वह आस्थापना ख़र्च को न्यूनतम करने, कार्यबल की कुशलता बढ़ाने, 10 प्रतिशत ऊर्जा संरक्षण और प्वाइंट ऑफ यूटिलिटी यानी उपयोगिता के हिसाब से कार्य का चयन करना चाहती है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    BMC की सेवाएं

    BMC देश में सबसे ज़्यादा संख्या में सेवाएं मुहैया करवाती है। इसमें शिक्षा एवं स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण सामाजिक बुनियादी ढांचा भी शामिल है। यह BMC की सेवाओं में सबसे अहम क्षेत्र है। इनके लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की गई है। BMC को कुछ अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने की आवश्यकता है। इसमें शहर की हवा, सॉलिड वेस्ट एंड सैनिटेशन मैनेजमेंट, ओपन स्पेसेस्‌ और बगीचे, बाढ़ शमन एवं आपदा मुस्तैदी विशेषत: बाढ़ प्रबंधन का समावेश है। इन सभी के लिए संसाधन उपलब्ध करवाए गए हैं। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    यह बात विशेष रूप से संशोधित BRIMSTOWAD (बृहन्मुंबई स्टॉर्म वॉटर डिस्पोजल सिस्टम) मास्टर प्लान के तहत स्टॉर्म वॉटर ड्रेंस यानी बरसाती पानी निकास नाली में की गई वृद्धि से साबित होती है। BRIMSTOWAD मास्टर प्लान में नई नालियों का निर्माण, पुरानी नालियों का विस्तार, होल्डिंग पॉन्ड्स यानी पानी को जमा करने के तालाब और नालों की संख्या में विस्तार के साथ मीठी नदी का समावेश है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    BMC का Water Sistema

    BMC सबसे पुरानी बस सेवा BEST का भी संचालन करती है। इस अंडरटेकिंग यानी उपक्रम के लिए 10 बिलियन रुपए दिए गए हैं। इस राशि से वह बसों के अपने काफिले में नई बसों को जोड़ने के साथ ही 2,000 इलेक्ट्रिक बस भी शामिल कर रहा है। मुंबई के पास दशकों से एक मजबूत जलापूर्ति व्यवस्था है। वह इसे इसी तरह मजबूत बनाए रखना चाहता है। इसी वजह से शहर के जलापूर्ति एवं सीवरेज विभाग को उन्नतिकरण के लिए 134.23 बिलियन रुपए की एक भारी-भरकम राशि दी गई है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    आश्चर्यजनक

    आश्चर्यजनक रूप से शहर के डेवलपमेंट प्लान यानी विकास योजना (DP 2034) को लागू करने के लिए अलग से राशि का प्रावधान नहीं किया गया है। शहर में क्वॉलिटी ऑफ लाइफ यानी जिंदगी की गुणवत्ता मुख़्यत: विकास योजना के अमल पर ही निर्भर है। इस बात की संभावना है, कि व्यक्तिगत तौर पर विभागों के लिए किए गए प्रावधान के तहत विकास योजना पर होने वाला ख़र्च शामिल किया गया होगा। लेकिन बजट में DP के लिए अलग से हेड अर्थात मद बनाने को लेकर की गई सिफ़ारिश की उपेक्षा की गई है। DP में यह सिफ़ारिश की गई थी कि DP के लिए अलग से मद बनाकर उसके लिए किए गए प्रावधान को इसमें दर्शाया जाए। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    निष्कर्ष

    कुल मिलाकर मौजूदा स्थितियों को देखते हुए बजट में बेहतर करने का एक ईमानदार प्रयास किया गया है। लेकिन यह भी साफ़ है कि जिस ULB को देश की सबसे धनाढ्य यानी संपन्न महापालिका के रूप में पहचाना जाता था। वह अब अपने सामर्थ्य से अधिक काम लेने की वजह से मुश्किल में दिखाई दे रही है। एक लंबे समय के बाद अब वह न केवल अधिक संसाधन जुटाने की राह ख़ोज रही है, बल्कि वह राज्य सरकार से अपने हिस्से की अतिरिक्त राशि मांगते हुए बकाया राशि को जारी करने की भी मांग कर रही है। यह ऐसे वक़्त में हुआ है जब निर्वाचित स्थानीय निकाय अस्तित्व में नहीं है और महापालिका पर इस वक़्त सीधे राज्य सरकार का ही नियंत्रण है। वर्तमान स्थिति में सावधानी बरतना आवश्यक है। इस स्थिति में बेकार के ख़र्च से बचने की कोशिश होनी चाहिए। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

    निश्चित रूप से देश की अग्रणी ULB पर 2024 में हुए राष्ट्रीय और उसके बाद नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव का असर पड़ा है। इसी तरह वह अपने आसन्न चुनावों का दबाव भी झेल रही है। इन सारे दबावों के बावजूद मौजूदा स्थानीय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि लोगों को आकर्षित करने वाले बुनियादी कार्यों की घोषणा करने की होड़ के कारण शहर के वित्तीय स्वास्थ्य पर विपरीत परिणाम न पड़े। ऐसा हुआ तो एक वक़्त आएगा जब BMC के वित्तीय संसाधनों पर इतना बोझ बढ़ेगा कि वह टूटने की कगार पर पहुंच जाएगी। ऐसा हुआ तो यह घोर त्रासदी होगी। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget

  • Mumbai: पानी संकट से निपटने के लिए BMC ने लागू किया आपदा प्रबंधन अधिनियम

    Mumbai: पानी संकट से निपटने के लिए BMC ने लागू किया आपदा प्रबंधन अधिनियम

    Mumbai water tanker association news
    प्रतिक्रियात्मक फाइल तस्वीर

    मुंबई में पानी सप्लाई करने वाले टैंकरों के हड़ताल से शहर में हाहाकार मच गया है। 10 अप्रैल गुरुवार से शुरू हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल ने शहर में पानी की किल्लत होने लगी है। अब बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने इस समस्या से निपटने के लिए मुंबई में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 लागू कर दिया है। Mumbai Chaos due to strike by water tanker operators, BMC implements Disaster Management Act

    मुम्बई- देश की आर्थिक राजधानी एवं मायानगरी मुंबई शहर में 10 अप्रैल गुरुवार से पानी सप्लाई करने वाले टेंकर संचालकों द्वारा घोषित अनिश्चितकालीन हड़ताल से पानी का संकट मंडरा रहा है। शहर के रैस्टोरेंट, हॉटेल और कंस्ट्रक्शन साइट्स बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। इस समस्या से निपटने के लिए बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने शहर में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 लागू कर दिया है। Mumbai Chaos due to strike by water tanker operators, BMC implements Disaster Management Act

    क्या है मामला ?

    टैंकरों को जलापूर्ति करने वाले निजी कुओं के मालिकों को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) द्वारा जारी नोटिस के विरोध में गुरुवार 10 अप्रैल से मुंबई पानी टैंकर एसोसिएशन (Mumbai Water Tanker Association) ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है। एसोसिएशन के प्रवक्ता अंकुर शर्मा ने बताया कि एसोसिएशन के पास करीब 1,800 पंजीकृत टैंकर हैं, जो शहर के विभिन्न हिस्सों में करीब 350 एमएलडी पानी की आपूर्ति करते हैं। सभी टैंकरों को अनिश्चिकाल के लिए रोक दिया गया। Mumbai Chaos due to strike by water tanker operators, BMC implements Disaster Management Act

    व्यापार किया बंद

    उन्होंने कहा कि प्राधिकारियों ने 200 वर्ग मीटर जमीन, कुएं के पट्टे या प्रॉपर्टी कार्ड, डिजिटल जल प्रवाह मीटर की स्थापना, बीआईएस मानक का पालन, दैनिक जलग्रहण का सटीक माप और कुछ अन्य चीजों एवं नियमों को अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (Central Ground Water Authority) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी लेना अनिवार्य कर दिया है। मुंबई जैसे शहर में इन सभी नियमों को लागू करना मुश्किल है। जब तक सरकार इन शर्तों में कुछ ढील नहीं देती, टैंकर सेवाएं फिर से शुरू नहीं होंगी। ऐसी जानकारी देते हुए एसोसिएशन के प्रवक्ता अंकुर शर्मा ने बताया कि “हमने अपना व्यापार ही बंद कर दिया है।” Mumbai Chaos due to strike by water tanker operators, BMC implements Disaster Management Act

    शहर में पानी की सप्लाई बंद होने से सीधे तौर पर यहां का ज्यादातर कारोबार बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। शहर में हॉटेल, रैस्टोरेंट और इमारतों के कंस्ट्रक्शन पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। इसको देखते हुए बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने शहर में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 लागू करने का ऐलान कर दिया है। Mumbai Chaos due to strike by water tanker operators, BMC implements Disaster Management Act

    क्या है आपदा प्रबंधन अधिनियम ?

    आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 का उद्देश्य आपदाओं से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय तंत्र स्थापित करना है। यह अधिनियम राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (SDA) की स्थापना करता है। यह आपदा प्रबंधन योजनाओं को लागू करने, वित्तीय सहायता प्रदान करने और आपदाओं के दौरान और बाद में आवश्यक सहायता प्रदान करने का प्रावधान करता है। Mumbai Chaos due to strike by water tanker operators, BMC implements Disaster Management Act

    राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDA): प्रत्येक राज्य में एक SDA होता है जो राज्य स्तर पर आपदा प्रबंधन योजनाओं को लागू करता है।

    आपदा प्रबंधन योजनाएं: राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन योजनाएं बनाई जाती हैं। इन योजनाओं में आपदा की रोकथाम, तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्वास शामिल हैं।

    वित्तीय सहायता: अधिनियम में आपदा राहत और पुनर्वास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रावधान है।

    अधिनियम का उल्लंघन: अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान है।

    आपदा प्रबंधन का क्षेत्र: अधिनियम प्राकृतिक आपदाओं, मानव निर्मित आपदाओं और गंभीर दुर्घटनाओं को शामिल करता है।

    राज्य आपदा प्रबंधन योजनाएं (SDMP): राज्य आपदा प्रबंधन योजनाएं राज्य स्तर पर आपदा प्रबंधन के लिए दृष्टिकोण प्रदान करती हैं।

    अधिनियम के उद्देश्य

    • प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं से निपटने के लिए एक तंत्र स्थापित करना।
    • आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करना।
    • आपदाओं से प्रभावित लोगों को राहत और सहायता प्रदान करना।
    • आपदा प्रबंधन के लिए क्षमता निर्माण करना।
    • आपदा प्रबंधन के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करना।