भारतीय प्रधानमंत्री की चुप्पी आज धमकियों का सामना कर रही है। जनता के अरबों डॉलर टैक्स का पैसा खर्च कर दो सौ विदेशी दौरों और 79 राष्ट्रों के दौरों का परिणाम क्या निकला जब पाकिस्तान के साथ युद्ध में एक भी राष्ट्र भारत के साथ खुलकर नहीं आया।
नेशनल डेस्क
नई दिल्ली: भारत को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप बार बार धमकी देते रहते हैं कि भारत पर हम बहुत अधिक टैरिफ लगाएंगे। भारत चुप रहता है। ट्रंप ने बारह बार कहा था उसने भारत और पाकिस्तान को ट्रेड की धमकी देकर सीज फायर कराया। 22 अरब रूपये जनता के टैक्स का खर्च कर दो सौ विदेशी दौरों और 79 राष्ट्रों के दौरों का परिणाम क्या निकला जब पाकिस्तान के साथ युद्ध में एक भी राष्ट्र भारत के साथ खुलकर नहीं आया। जबकि अमेरिका चीन तुर्की और अज़रबैजान खुलकर पाकिस्तान के साथ खड़े रहे। अमेरिका के चक्कर में भारत रूस का साथ भी छोड़ता दिख रहा है।
भारत को खुली चुनौती
ट्रंप भारत चीन ब्राजील को रूस के साथ संबंध रखने के कारण हमेशा धमकी देता है। रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों पर रूस के विदेशमंत्री ने स्पष्ट जवाब दिया हम तैयार हैं। चीन ने तो अमेरिकी ट्रंप को खुली धमकी दे डाली चाहे ट्रेड वॉर हो या सचमुच का युद्ध हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। अब अमेरिकी पिट्ठू नाटो के अध्यक्ष ने रूस यूक्रेन युद्ध के कारण भारत को रूस का साथ छोड़ने अन्यथा बैन झेलने की खुली चुनौती दे डाली है। लेकिन भारत है कि जवाब ही नहीं देता। अमेरिका हड़काया करता है तो मोदी हंसते हैं। बार बार भारत का अपमान करता है फिर भी मोदी की हिम्मत नहीं पड़ती कि पलट कर जवाब दें।
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कौन है नाटो अध्यक्ष?
नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनायझेशन (NATO) यह यूरोप और उत्तरी अमेरिका के 32 सदस्य देशों का एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन है। इसकी स्थापना 4 अप्रैल 1949 को उत्तरी अटलांटिक संधि पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी। इन 32 सदस्य देशों में से 30 यूरोप में और दो उत्तरी अमेरिका में स्थित हैं। नाटो के अध्यक्ष (महासचिव) मार्क रूट ने हालही में भारत को रुस का साथ छोडने अन्यथा बैन झेलने की चुनौती दी है।
क्या रुस को है भारत पर भरोसा?
छोटे से राष्ट्र ब्राजील ने ट्रंप को टका सा जवाब दिया तुम्हे टैरिफ लगाना हो लगाओ हम नहीं झुकेंगे। रूस प्रतिद्वंद्वी है। चाइना के सामने अमेरिका की दाल गलती नहीं वह हमेशा अमेरिका को मुंह तोड़ जवाब देता रहता है। रूस यूक्रेन युद्ध में नाटो भी शामिल है यूक्रेन को हथियारों की मदद करता हुआ अमेरिका तो है ही। रूस को शायद भारत पर भरोसा ही नहीं रहा इसीलिए पाकिस्तान के साथ ट्रेड कर रहा है।
भारत और मोदी कहीं है ही नही ..
बंद पड़ी स्टील कंपनी चालू करने और रेल संपर्क बढ़ाने में इन्वेस्ट कर रहा है और भारत ऊहापोह की स्थिति में है। पुरानी विदेशनीति भारत छोड़ चुका है। मोदी भले खुद को विश्वगुरू कहलाने की चेष्टा करते रहते हैं। गोदी मीडिया और अंधभक्त विश्वगुरू ही मानते हैं। लेकिन सच तो यह है कि भारत और मोदी कहीं है ही नहीं। ईरान ब्रिक्स में नया नया शामिल होकर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करा लेता है जबकि भारत को कोई पूछता तक नहीं।
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भारतीय बाज़ार पर कब्जा
तमाम संगठनों में भारत शामिल होने के बावजूद कोई अहमियत हो देखा नहीं जाता।रूस भारत का हर विपदा में पक्का साथी रहा है पर लगता है अमेरिकी धमकियों के आगे घुटने टेक कर रूस दूर जा रहा हैं। अमेरिका भारत के 140 करोड़ लोगों के बड़े बाजार पर कब्जा कर अपने माल को खपाना चाहता है। ट्रेड की धमकी इसीलिए देता है। अमेरिका भारत को जीरो टैरिफ पर अपना खाद्यान्न बेचना चाहता है। साथ ही अपने देश की देशी गायों का दूध जिसमें सुअर मछली मुर्गे की चर्बी मिली हुई होती है।
भारत की खामोशी
कहने को तो भारत ने अमेरिका को मना कर दिया है कि तुम्हारा मांसाहार वाला दूध हम नहीं लेंगे। ऐसा इसलिए कि भारत के हिंदुओं को भरोसा हो जाए कि मोदी सनातन की रक्षा कर रहे हैं जबकि वास्तविकता यह है कि अमेरिकी गायों के मांसाहार वाले दूध आयात को स्वीकृत कर दिया गया है। अमेरिका शाकाहारी दूध बेचेगा या मांसाहारी इसकी गारंटी कहने को भारत की ओर से ले ली जाएगी। भारत चीन दोनों रूस से तेल खरीदने वाले बड़े ग्राहक हैं।रूस को अमेरिकी धमकियों का कोई भय नहीं। चीन भी खुला जवाब देता है लेकिन भारत की खामोशी कायरता बताती है।
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चोरी छुपे सहमति
अमेरिका से वहां के कृषि उपज खरीदने पर चोरी छुपे सहमति बन चुकी है क्योंकि मोदी के परम मित्र अडानी ने कई वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अनाज के सीमेंटेड गोदाम बनाए हुए हैं। अडानी के फायदे के लिए ही मोदी सरकार ने किसान संविरोधी तीन कानून बना लिए थे। जिससे किसानों की जमीन छीनकर अडानी को दी जा सके और किसान अपने ही खेतों में मजदूर बनकर रह जाएं। लेकिन किसानों के व्यापक विरोध के चलते मोदी ने तीनों बिल वापस लेने की घोषणा कर दी थी। फिर भी अब जीरो टैरिफ पर अमेरिकी किसानों के खाद्य पदार्थ भारत आयत कर अडानी के भंडार भरा जाएगा।
सस्ता होगा अनाज
अमेरिकी अनाज बेहद सस्ता होगा क्योंकि अमेरिका अपने किसानों को सौ प्रतिशत सब्सिडी देता है। जबकि भारत में बीज खाद डीजल कीटनाशक आदि बेहद महंगे हैं। किसान कर्ज के बोझ तले दबा आत्महत्या कर रहा है। उसकी लागत भी नहीं मिलती। अमेरिकी अनाज की जीरो टैरिफ पर भारत में आयात करने में सस्ता पड़ेगा तो अडानी सस्ता अनाज खुले मार्केट में डाल देंगे तो भारत के किसानों का मंहगा खाद्यान्न कौन लेगा?
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भारतीय किसानों की मुश्किल
नतीजा होगा लाखों किसान आत्महत्या कर लेंगे तब मोदी कहेंगे मेरे लिए थोड़े मरे हैं। मरता है किसान तो मरे, मोदी को केवल अडानी का फायदा दिखता है। ट्रंप भारतीय नजरों में अपने प्रोडक्ट लाना चाहता है। मोदी सरकार में हिम्मत नहीं कि वह ट्रंप को जवाब दे दे। सच तो यह है जैसा बीजेपी के वरिष्ठ नेता स्वामी कहते हैं अडानी को बचाने के लिए मोदी देश भी बेच देगा।
