सुरेंद्र राजभर मुंबई: कांदिवली (पश्चिम) स्थित महावीर नगर फेरीवाला संगठन के सभासदों और सदस्यों ने मिलकर संगठन स्थापना दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया। महावीर नगर परिसर के सभी पथ विक्रेता इसमें शामिल हुए। यह संगठन, नेशनल हॉकर्स फेडरेशन और महाराष्ट्र हॉकर्स फेडरेशन के नेतृत्व में बोर्ड अनावरण का उद्घाटन किया।
मौके पर संगठन के मार्ग दर्शक रहे अखिलेश गौड़ ने बोर्ड यानि फलक का अनावरण किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के विधानसभा संघठक संतोष राणे, उप विभाग प्रमुख श्याम मोरे, स्थानीय कार्यकर्ता सुरेश रसाल, महेश गुप्ता और उप शाखा प्रमुख हरेश्याम गौड, राधेश्याम गौड़, विनय लिंबाचिया और अन्य ढेर सारे लोग उपस्थित रहे।
शिवसेना शिंदे गुट के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अभिषेक वर्मा ने योग दिवस पर योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया और लोगों से इसे अपने जीवन में उतारने की अपील की।
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: 21 जून 2025 अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के राष्ट्रीय समन्वयक एवं चुनाव प्रभारी डॉ. अभिषेक वर्मा के तत्वावधान में नई दिल्ली स्थित उनके निजी आवास पर भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में 110 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें योग साधक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विशिष्ट अतिथि भी शामिल थे।
योग का महत्व
डॉ. वर्मा, श्रीमती अंका वर्मा, राजकुमारी निकोल वर्मा एवं युवराज आदितेश्वर वर्मा सहित वर्मा परिवार के सभी सदस्यों ने पारंपरिक सनातनी विधि से योग, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास किया। प्रतिष्ठित योगाचार्यों ने उपस्थितजनों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग की महत्ता बताई।
योग की आवश्यकता
अपने संबोधन में डॉ. अभिषेक वर्मा ने कहा, “योग भारत की सनातन परंपरा की वैज्ञानिक देन है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विश्व पटल पर स्थापित किया है। शिवसेना (NDA) के लोकप्रिय नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी योग को जन-जन तक पहुँचाने और इसे जनआंदोलन बनाने का कार्य कर रही है।” उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि “योग केवल एक दिन की क्रिया नहीं, बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना आज के युग की आवश्यकता है।”
श्रीमती अंका वर्मा ने कहा, “योग ने मुझे मातृत्व, व्यवसाय और अध्यात्म में संतुलन बनाना सिखाया—यह मेरे जीवन का आंतरिक मार्गदर्शक बन गया है।”
राजकुमारी निकोल वर्मा ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “तेज़ और तनावपूर्ण जीवन में योग मुझे मानसिक शांति और स्थिरता देता है—यह मेरा आत्मबल है।”
कार्यक्रम का समापन वैदिक मंत्रोच्चार, प्रसाद वितरण और योग को जीवन में अपनाने की प्रतिज्ञा के साथ हुआ। यह आयोजन राष्ट्रभक्ति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक जागरूकता का अद्भुत संगम साबित हुआ।
महाराष्ट्र की राजनीति में क्या बड़ा बदलाव होने जा रहा है? ऐसी राजनैतिक गलियारों में गरमागरम खुसफुसाहट होने लगी है। हालही में पुरानी शिवसेना को अखंड शिवसेना के निर्माण के लिए सभी प्रमुख नेताओं को हाथ मिलाने का आग्रह पूर्व गृहमंत्री और बालासाहेब ठाकरे के खासमखास नेता ने पेशकश की है। ‘Akhand Shiv Sena’: Balasaheb’s close aide urges Uddhav, Raj, Eknath to join hands and form alliance.
मंत्रालयप्रतिनिधि मुंबई: महाराष्ट्र की सबसे बड़ी राजनैतिक दल शिवसेना को एकबार फिर समेटते हुए अखंड शिवसेना बनाने की खुसफुसाहट राजनैतिक हलचल बना हुआ है। यहां राज्य के पूर्व गृहमंत्री जिन्होंने उद्धव बालासाहेब ठाकरे, एकनाथ शिंदे और राज ठाकरे को एक होकर हाथ मिलाने और गठबंधन करने का आग्रह किया है। यह वही नेता हैं, जो कभी स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के खासमखास हुआ करते थे। इन्होंने शिवसेना के एक प्रमुख मोर्चे की स्थापना की जो आज भी राज्य के भुमिपुत्रों के लिए काम करता है।
यह वही नेता हैं जो स्वर्गीय बालासाहेब से प्रेरित होकर वे शिवसेना में शामिल हुए थे। बाद में स्थानीय लोकाधिकार समिति की स्थापना की, जो शिवसेना का एक मोर्चा है जो भूमिपुत्रों के लिए काम करता है। राज्य के मराठी माणूस का इस समिति को इतना प्रतिसाद मिला कि देखते ही देखते लाखों की संख्या में इससे लोग जुड़ने लगे। इसी स्थानीय लोकाधिकार के कारण मराठी माणूस को बँक मे नौकरी मिलना आसान हो गया। इसी समिति के माध्यम से शिवसेना को बढावा मिला और अच्छे कार्यकर्ता भी प्राप्त हुए, इनमे अरविंद सावंत और भाई पोतनीड जैसे कई नेता उभरकर सामने आये।
अखंड शिवसेना का निर्माण
इसी कारण स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे ने 1996-97 में पहली बार युती की सरकार बनाई और उन्हें गृहराज्यमंत्री के पद से नवाजा। आज उन्होंने एकबार फिर पुरानी शिवसेना के दिग्गज नेताओं को साथ लाने और हाथ मिलाकर ‘अखंड शिवसेना’ के निर्माण के लिए तीनों नेताओं को गठबंधन में आने का आग्रह किया है।
राज्य में नगर निगम चुनाव होने जा रहे हैं। राज्य में सत्ता पक्ष भाजपा के साथ एकनाथ शिंदे की शिवसेना गठबंधन में होने के बावजूद कहीं साथ तो कहीं अलग होकर चुनाव लड़ने की अटकलें लग रहे हैं। वहीं बृहन्मुंबई महानगर पालिका की सत्ता पर हमेशा से काबिज़ रहनेवाली उद्धव की शिवसेना गुटबाजी के कारण कमजोर दिखाई पड़ने लगी है। राज ठाकरे भी कभी शिवसेना का बड़ा चेहरा हुआ करते थे। लेकिन पारिवारिक विवाद के चलते उन्होंने ‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना‘ का निर्माण किया और शिवसेना के कई दिग्गज नेताओं को अपने ले गये। बाद में उन्होंने एक मजबूत नेतृत्व कायम किया। लेकिन समय के चलते आज महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भी कमजोर साबित हो रही है। ऐसे में स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के करीबी नेता का इन तीनों दिग्गज नेताओं को गठबंधन के लिए एकत्रित करना, ‘अखंड शिवसेना’ के उदय की संभावना प्रबल कर रहा है ऐसा राजनैतिक विशेषज्ञों द्वारा विश्वास जताया जा रहा है।
BMC चुनाव से पहले शिवसेना और बीजेपी में गठबंधन को लेकर नई खींचतान शुरू हो गई है। शिवसेना मुंबई में बीजेपी को समर्थन देने के लिए तैयार है, लेकिन बदले में ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में भी बीजेपी का समर्थन चाहती है। Before BMC elections, Shiv Sena entangled BJP in conditions
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: आगामी कुछ ही दिनों में चुनाव आयोग महाराष्ट्र में पार्षदों के चुनाव की अधिसूचना जारी करने वाला है। 6 मई को सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर चुनाव की तारीख जारी करने के आदेश दिए थे। चुनाव की तैयारियों के बीच महायुति गठबंधन में तोलमोल शुरू हो गए हैं। शिंदे की शिवसेना ने चुनाव से पहले बीजेपी के सामने अपनी शर्तों को रख दिया है। शिवसेना का कहना है कि अगर बीजेपी बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव में गठबंधन चाहती है, तो उसे ठाणे और कल्याण-डोंबिवली (KDMC) में भी ऐसा ही करना होगा। शिवसेना, भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर दबाव बनाने के लिए उद्धव ठाकरे गुट के पार्षदों को शामिल करा रही है, ताकि गठबंधन नहीं होने की स्थिति में उन्हें चुनाव में उतारा जा सके। Before BMC elections, Shiv Sena entangled BJP in conditions
शिवसेना की शर्त क्या है?
महाराष्ट्र निकाय चुनाव में गठबंधन को लेकर सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि बीजेपी पूरे प्रदेश में गठबंधन नहीं करेगी। इसके जवाब में शिवसेना ने भी अपनी चाल चल दी है और बीएमसी चुनाव के साथ अन्य नगर निगमों के चुनाव में भी गठबंधन का दबाव बना दिया है। शिवसेना के नेताओं ने कहा, कि बीजेपी मुंबई में गठबंधन करना चाहती है तो उसे ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में भी शिवसेना का साथ देना होगा। अगर ऐसा हुआ तो बीजेपी बीएमसी की सत्ता में आ सकती है और शिवसेना ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में अपना दबदबा बनाए रख सकती है। Before BMC elections, Shiv Sena entangled BJP in conditions
भाजपा को मुंबई में होगा नुकसान
शिवसेना नेता ने कहा कि अगर बीजेपी अकेले बीएमसी चुनाव में उतरेगी तो उसे नुकसान होना तय है। मुंबई में बीजेपी उद्धव ठाकरे की सेना यूबीटी के खिलाफ चुनाव लड़ेगी मगर उसे एकनाथ शिंदे की शिवसेना और मनसे के साथ भी दो-दो हाथ करना पड़ेगा। ऐसे में वोट बंट सकते हैं और बीजेपी को बीएमसी की सत्ता हासिल नही हो सकेगी। ऐसे में उसे शिवसेना का समर्थन लेना होगा। शिवसेना नेता ने साफ किया कि बीजेपी मुंबई में दबदबा बनाना चाहती है। वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में मजबूत होना चाहती है। इन इलाकों में हमारी पार्टी वहां मजबूत है और हम चाहते हैं कि यह ऐसा ही बना रहे। Before BMC elections, Shiv Sena entangled BJP in conditions
जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई, तो मुंबई के ज्यादा पार्षद उनके साथ नहीं गए। अब बृहन्मुंबई महानगर पालिका का कार्यकाल खत्म हो गया है। एकनाथ शिंदे ने उद्धव गुट के लगभग 45 पार्षदों को अपनी तरफ कर लिया है। शिवसेना की इस रणनीति से बीजेपी पर दबाव बढ़ रहा है। शिंदे बीजेपी को यह जताना चाहते हैं कि अगर वह ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में गठबंधन नहीं करती है, तो शिवसेना पुराने पार्षदों को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव में उतार सकती है। इस वजह से बीजेपी को नुकसान हो सकता है। Before BMC elections, Shiv Sena entangled BJP in conditions
Shiv Sena Reward on Pahalgam Attackers: पहलगाम आतंकी हमलावरों के खिलाफ जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 20 लाख रुपये की ईनामी घोषणा की है। इसी कड़ी में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना की ओर से अतिरिक्त 10 लाख रुपये की ईनामी घोषणा की गई है।
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना की ओर से जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमलों के आतंकवादियों की सूचना देने वाले को 10 लाख रुपये का अतिरिक्त इनाम देने की घोषित की है। इसके पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इन आतंकियों पर 20 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है।
किसने किया ऐलान?
शिवसेना के अनुसार पार्टी ने यह कदम आतंकवाद के खिलाफ़ एक कड़ा रुख अपनाते हुए उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में किया है। पार्टी के युवा नेता राहुल कनाल ने इस इनामी राशि की घोषणा की है। शिवसेना के युवा नेता राहुल कनाल कुछ समय पहले कुणाल कामरा कंट्रोवर्सी मामले से चर्चे में आए हैं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ बयानबाज़ी को लेकर उन्होंने कुछ कार्यकर्ताओं के साथ उस स्टूडियो को तोड़ दिया था। जिसमें कुणाल कमारा ने शिंदे पर कटाक्ष करने वाले वीडियो शूट किया था। इसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई। राहुल एन कनाल शिवसेना के सोशल मीडिया प्रभारी होने के साथ यूथ विंग युवा सेना के महासचिव हैं।
शिवसेना ने दी यह दलील
राहुल कनाल के अनुसार यह घोषणा जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा तीन संदिग्धों की तस्वीरें जारी करने के जवाब में की गई है, जिसके लिए पुलिस ने 20 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। एकनाथ शिंदे ने कहा, कि हम आतंकवाद और उसका समर्थन करने वालों के खिलाफ़ मजबूती से खड़े हैं। हम नागरिकों से आग्रह करते हैं कि वे ऐसी कोई भी जानकारी लेकर आगे आएं, जिससे इन अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने में मदद मिल सके। शिवसेना के अनुसार इनामी राशि में इज़ाफा करके, हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाए और पीड़ितों और उनके परिवारों को जल्द न्याय मिले।
पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई, जिनमें ज़्यादातर पर्यटक महाराष्ट्र से थे। शिवसेना की पहल का उद्देश्य संदिग्धों को पकड़ने में जम्मू-कश्मीर पुलिस के प्रयासों का समर्थन करना है। पहलगाम हमले के बाद खुद डिप्टी सीएम शिंदे श्रीनगर पहुंचे थे। वहां उन्होंने महाराष्ट्र के घायल टूरिस्ट सुबोध पाटिल से मुलाकात की थी। इसके साथ पर्यटकों को रेस्क्यू किया गया था। शिवसेना ने अब कुछ मोबाइल नंबर जारी करके कहा है कि हम जनता से अपील करते हैं कि वे इस अवसर का उपयोग आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में योगदान देने और हमारे राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करने के लिए करें।
मुंबई: कोविड महामारी के दौरान बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) की खिचड़ी वितरण योजना में 14.57 करोड़ रुपये की हेराफेरी मामले में 8 आरोपियों के खिलाफ किला कोर्ट में मुंबई पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया है। आरोपियों पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और सरकारी रेकॉर्ड में फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगे हैं, जिनकी विस्तृत जांच के बाद EOW ने यह चार्जशीट दायर की है। कल्याण के रहने वाले 36 वर्षीय गोपाल पांडुरंग लवाने ने इसको लेकर शिकायत दर्ज की थी। (Mumbai BMC: Shiv Sena MP’s son also involved in Khichdi scam, chargesheet filed against 8)
क्या है घोटाला?
श्री वैष्णवी किचन और सह्याद्री रिफ्रेशमेंट के पार्टनर गोपाल पांडुरंग लवाने की शिकायत के मुताबिक, अप्रैल 2020 से जुलाई 2020 के बीच कोविड संकट के दौरान आरोपियों ने खिचड़ी के 100 और 200 ग्राम वजन के पैकेटों की आपूर्ति की थी और BMC से 300 ग्राम प्रति पैकेट के हिसाब से भुगतान वसूला। इसमें आरोपियों ने 6.27 करोड़ रुपये का घपला किया। (Mumbai BMC: Shiv Sena MP’s son also involved in Khichdi scam, chargesheet filed against 8)
आठ आरोपियों में राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के सांसद गजानन किर्तिकर के सुपुत्र अमोल किर्तिकर भी शामिल हैं। बता दें कि अमोल किर्तिकर शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नेता हैं। जिन्होंने हालही में गोरेगांव पूर्व से विधानसभा चुनाव लड़ा था। इसके अलावा आरोप पत्र में सुनील कदम उर्फ बाला कदम, राजीव सालुंखे, सुजीत पाटकर, संजय चंद्रकांत माशेलकर, प्रांजल माशेलकर, प्रीतम माशेलकर और सूरज चव्हाण का नाम दर्ज है। आरोपियों ने जांच एजेंसियों को गुमराह करने के लिए फर्जी दस्तावेज भी तैयार किए थे। इसके कारण मामले में आईपीसी की धारा 465, 468, 471 (जालसाजी और दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा) भी जोड़ दी गई हैं। (Mumbai BMC: Shiv Sena MP’s son also involved in Khichdi scam, chargesheet filed against 8)
मुम्बई: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना शिंदे गुट के करीब 25 मौजूदा और पू्र्व विधायकों की सिक्योरिटी में कौटती करने का फैसला किया गया है। इसको लेकर शिंदे गुट शिवसेना के नेताओं ने नाराजगी भी जाहिर की। उनका कहना है कि देंवेंद्र फडणवीस की अगुआई वाली सरकार में उन्हें साइडलाइन किया जा रहा है। गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने ही पास रखी है। (Reduction in security of Shiv Sena MLAs of Shinde faction. accused of being sidelined)
बता दें कि इससे पहले शिवसेना के 40 और 10 निर्दलीय विधायकों ने शिंदे का समर्थन किया था। इसके बाद शिंदे गुट की शिवसेना ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। वहीं उद्धव ठाकरे के समर्थकों ने शिवसेना को विभाजित करने के आरोप एकनाथ शिंदे और उनके समर्थकों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। कई जगहों पर विरोध का उग्र रूप भी देखा गया। वहीं शिंदे सेना के विधायकों की सुरक्षा के मद्देनजर वाई प्लस सिक्योरिटी मुहैया कराई गई थी। विधायकों को पांच से छह पुलिसकर्मियों के अलावा एक एस्कॉर्ट वाहन भी दिया गया था। (Reduction in security of Shiv Sena MLAs of Shinde faction. accused of being sidelined)
विधायकों की सुरक्षा में 600 पुलिसकर्मी
इसके अलावा शिवसेना शिंदे गुट के विधायकों के काफिले के साथ फ्लैशिंग लाइट वाला वाहन भी रहता था। मुम्बई में एक आईपीएस अधिकारी ने कहा, विधायकों की सुरक्षा के लिए करीब 600 पुलिसकर्मियों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में पुलिस के बाकी काम प्रभावित होते हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने फैसला लिया है कि इन विधायकों की सुरक्षा में कटौती की जाएगी। केवल उन शिवसेना विधायकों को इतनी सुरक्षा मिलेगी जो कि मंत्रिपद पर हैं या फिर उनकी जान को खतरा है। (Reduction in security of Shiv Sena MLAs of Shinde faction. accused of being sidelined)
अब मिलेगा सिर्फ एक पुलिसकर्मी
उन्होंने कहा कि अन्य विधायकों की तरह ही बाकी शिवसेना विधायकों को सुरक्षा के लिए एक पुलिसकर्मी दिया जाएगा। गृह विभाग ने कई अन्य राजनेताओं की सुरक्षा में भी कटौती करने का फैसला किया है। वहीं शिवसेना की प्रवक्ता मनीषा कयांदे ने कहा, कि “कहा जा रहा है, अब चुनौतियां कम हैं इसलिए शिवसेना विधायकों की सुरक्षा भी कम कर दी गई है। लेकिन कुछ लोगों को इसको लेकर शिकायत है।” शिंदे सेना के नेताओं का कहना है, कि “सरकार सोच-समझकर उन्हें साइडलाइन करने के लिए ऐसा कर रही है।” वहीं शिवसेना के दो मंत्री रायगढ़ और नासिक की गार्जियन मिनिस्टरशिप को लेकर भी नाखुश हैं। शिंदे भी देवेंद्र फडणवीस के साथ कई बैठकों में शामिल नहीं हुए। (Reduction in security of Shiv Sena MLAs of Shinde faction. accused of being sidelined)
एक तरफ सत्ता पक्ष महायुति गठबंधन के शिवेसेना और बीजेपी में इस तरह की दूरियों के कारण आपसी कलह के कयास लगाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शरद पवार तारीफ कर रहे हैं। वहीं देवेंद्र फडणवीस से शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं ने मुलाकात चर्चाओं का विषय बना हुआ है। बता दें कि महाराष्ट्र के चुनाव में शिवसेना और बीजेपी ने मिलकर बड़ी जीत दर्ज की, लेकिन तीन महीने के भीतर ही दोनों में मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति ने महाराष्ट्र की 288 सीटों में से 230 सीट जीतकर भारी प्रदर्शन के साथ विजय हासिल किया है। (Reduction in security of Shiv Sena MLAs of Shinde faction. accused of being sidelined)
नगरपालिका चुनाव
हालही के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद अब मुम्बई, पुणे और ठाणे समेत पूरे राज्य मे नगर पंचायत एवं नगरपालिका चुनाव भी बड़े दांव वाली लड़ाई होने वाली है, जिसके लिए राज्यभर में सभी राजनैतिक पार्टियां और उनके कार्यकर्ता कमर कस रहे हैं। हालही में उद्धव ठाकरे गुट के शिवसेना नेताओं ने पिछले ढाई महीने में कम से कम तीन बार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। इसके अलावा मुख्यमंत्री से आदित्य ठाकरे ने दो बार, उद्धव ने एक बार मुलाकात की है, जबकि अन्य वरिष्ठ शिवसेना नेताओं ने भी फडणवीस से अलग से मिलने गए। (Reduction in security of Shiv Sena MLAs of Shinde faction. accused of being sidelined)
मुम्बई: राज्य या देश में चुनाव आते ही राजनैतिक उठा पटक शुरू हो जाती है। कोई नाराज़ तो कोई लोभ के चले पाला बदल लेते हैं। लेकिन महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद भी यहां राजनैतिक उठा पटक थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां हर दिन नया ट्विस्ट देखने को मिल रहा है। उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) गुट की शिवसेना को एक के बाद एक बड़े झटके लग रहे हैं। ये झटके कोई और नहीं ठाकरे के पुराने साथी और पार्टी को तोड़ने वाले एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ही दे रहे हैं। (Thackeray group gets another big blow, resignation of Matoshree loyalist Jitendra Janawale, allegation of conspiracy)
अब ताज़ा खबर के मुताबिक, बांद्रा पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के उपविभाग प्रमुख जितेंद्र जनावाले ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। जितेंद्र जनावाले ने अपने इस्तीफे में आरोप लगाते हुए कहा, कि उन्होंने पिछले छह सालों से कार्यक्षेत्र से बाहर नियुक्ति कर राजनीतिक नुकसान पहुंचाने की साजिश रची गई है। इससे पहले मातोश्री के वफादार नेता राजन साल्वी ने इस्तीफा देकर एकनाथ शिंदे गुट के शिवसेना में शामिल हो गए है। जितेंद्र जनावाले के भी एकनाथ की पार्टी में शामिल होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। (Thackeray group gets another big blow, resignation of Matoshree loyalist Jitendra Janawale, allegation of conspiracy)
नजरअंदाज का आरोप
जितेंद्र जनावाले को एक ऐसे कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है, जो ठाकरे गुट को मशाल चुनाव चिन्ह मिलने के बाद सबसे पहले खुद मशाल लेकर मातोश्री आए थे। जनावाले का कहना है कि विभाग प्रमुख अनिल परब ने उन्हें कार्यक्षेत्र से बाहर रखा था। अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा है कि जानबूझकर उन्हें पार्टी में नजरअंदाज किया जा रहा है और अपनी व्यथा बताने के बावजूद पार्टी ने कोई कार्रवाई नहीं की। पत्र में उन्होंने लिखा है कि वह इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं क्योंकि उनकी क्षमता के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। (Thackeray group gets another big blow, resignation of Matoshree loyalist Jitendra Janawale, allegation of conspiracy)
राजन साल्वी ने भी किया था अनदेखा का आरोप
बता दें कि इससे पहले हाल ही में पार्टी के पूर्व विधायक राजन साल्वी ने इस्तीफा दे दिया था। कोंकण में ठाकरे गुट के वरिष्ठ नेता राजन साल्वी ने उपनेता पद से इस्तीफा देकर शिंदे गुट का दामन थाम लिया। वह पिछले 35 सालों से शिवसेना के लिए काम कर रहे थे। कोंकण के रतापुर निर्वाचन क्षेत्र से 2024 का विधानसभा चुनाव हारने वाले तीन बार के विधायक राजन साल्वी ने पार्टी पर अनदेखी करने का आरोप लगाया था वो अपनी उपेक्षा से नाराज थे। इसके बाद राजन साल्वी शिंदे गुट की शिवसेना शामिल हो गए। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उद्योग मंत्री उदय सामंत और कई पार्टी नेताओं की उपस्थिति में वो शिवसेना में शरण ले ली। (Thackeray group gets another big blow, resignation of Matoshree loyalist Jitendra Janawale, allegation of conspiracy)
इस बीच उद्धव ठाकरे की अगुवाई में ठाकरे गुट के सांसदों की बैठक 20 फरवरी को बुलाई गई है। ऐसे ही 25 फरवरी को विधायकों की बैठक होने जा रही है। माना जा रहा है कि पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे इस दौरान सांसदों और विधायकों का मार्गदर्शन करेंगे। उद्धव ठाकरे की ओर से यह बैठक तब बुलाई जा रही है जब पार्टी के पूर्व विधायक और कई पदाधिकारी लगातार ठाकरे का साथ छोड़कर शिंदे गुट में शामिल हो रहे हैं। (Thackeray group gets another big blow, resignation of Matoshree loyalist Jitendra Janawale, allegation of conspiracy)
स्टैंप पेपर पर दस्तखत कराकर जानलेवा धमकी देकर छोड़ा विधायक प्रकाश सुर्वे के बेटे राज सुर्वे ने।
ली थी मनोज मिश्रा से अपहरण की सुपारी।
मुंबई- नेता हो या अभिनेता, सबको आवश्यक है। किंतु यदि वे अपने सामाजिक उत्तरदायित्वों को निभाते हुए, अपनी संतानों को अच्छे संस्कार नहीं देते हैं तो उनकी संताने शॉर्ट कट का रास्ता अपनाकर असामाजिक व अनैतिक कार्य करने लगती है। ऐसा ही एक मामला विधायक प्रकाश सुर्वे के साथ भी घटित हुआ है, जहां उनके बेटे राज सुर्वे, उसके साथी विक्की शेट्टी सुपारी देने वाले मनोज मिश्रा व उनके 10,12 अज्ञात गुंडे टाइप साथियों के विरुद्ध म्यूजिक कंपनी के मालिक राजकुमार सिंह ने वनराई पुलिस थाने में प्राथमिकी नामजद एफआईआर दर्ज कराई है।
Live video on Indian fasttrack news channel
पुलिस में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार गोरेगांव (पूर्व) में चिंतामणि क्लासिक बिल्डिंग इको हाउस के पास, विश्वेश्वर नगर रोड़ के फ्लैट नंबर 302, 303, 403 तीसरा व चौथे मजले पर’ ग्लोबल म्यूजिक जंक्शन प्रा. लि. नाम की कंपनी का कार्यालय है। वहीं आरोपी मनोज मिश्रा (30) वर्ष वाय – 503, एग्जीबिशन रोड़, गन अपार्टमेंट चौक के समीप ही पटना, बिहार की भी आदिशक्ति प्रा. लि. नाम की म्यूजिक कंपनी है। मनोज मिश्रा ने उसके 1.5 करोड़ फॉलोअर्स बताया है। उसे पैसे की आवश्यकता थी अपनी आदिशक्ति कंपनी को बढ़ाने के लिए, इसलिए उसने ग्लोबल म्यूजिक जंक्शन के सीईओ राजकुमार सिंह से अपनी कंपनी ‘ आदिशक्ति प्रा. लि. डिजिटल लाइसेंस पर वर्ष 2019 में ओटीटी प्लेटफार्म के संबंध में आवश्यक करार पत्र लेकर राजकुमार सिंह ने एक वर्ष का ही करार किया था।
Indian fasttrack newsविधायक प्रकाश सुर्वे की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ फाइल तस्वीर
अपहरण की सुपारी ..
किंतु कंपनी का व्यवहार अच्छा रहा। इसी कारण वर्ष – 2021 में मनोज मिश्रा ने यूट्यूब चैनल के लिए 8 करोड़ रुपए एडवांस में लिया और 5 वर्ष का करारनामा लिखा, जिसका लॉकिंग पीरियड 3 वर्ष का था। यह करारनामा वर्ष – 2026 में अपने पांच वर्ष पूर्ण करता। चैनल डेवलपमेंट के लिए मनोज मिश्रा ने कंटेंट न बनाकर उक्त पैसे को अन्यत्र खर्च किया, जिससे राजकुमार सिंह को मिलने वाले नियमित लाभ में कमी आने लगी।
शिकायत के मुताबिक यूट्यूब चैनल का कंटेंट बनाने के लिए मनोज मिश्रा ने और पैसे की मांग की, जिसे राजकुमार सिंह ने इनकार कर दिया। किंतु मनोज मिश्रा ने वर्ष -2022 से करारनामा रद्द करने के लिए राजकुमार सिंह पर दबाव डालने लगा। राजकुमार सिंह ने समझौते के लिए उससे कहा कि वह उसे जून व जुलाई 2023, में एक करोड़ रुपए उसकी कंपनी के बैंक खाते में दे चुका है। वह उसका पैसा वापस करके करार रद्द कर सकता है।किंतु मनोज मिश्रा ने ऐसा न करते हुए, पद्माकर, राज सुर्वे को करार रद्द कराने की सुपारी दे दी। दिनांक – 09/08/2023 को 10 – 15 लोग राजकुमार सिंह के कार्यालय में आए और उसे विधायक प्रकाश सुर्वे के कार्यालय में ले गए, फिर कुछ दूर स्थित एक अन्य बिल्डिंग में ले गए, जहां उसके मोबाइल पर वनराई पुलिस का फोन आया, किंतु अपहरण कर्ताओं के दबाव के कारण राजकुमार सिंह ने पुलिस को जवाब नहीं दे पाया। फिर अपहरण कर्ताओं ने राजकुमार सिंह को दहिसर स्थित एक कार्यालय में लाया गया। जहां पद्माकर, राज सुर्वे पहले से ही मौजूद था।
Live video on Indian fasttrack news channel
उसने जानलेवा धमकियां दी। उसके साथी विकी शेट्टी ने मनोज मिश्रा द्वारा लाए गए 100 / – के स्टैंप पेपर पर राजकुमार सिंह से जबरन करारनामा रद्द करने के लिए दस्तखत कराया और राजकुमार सिंह को जानलेवा धमकियां देते हुए, पुलिस में न जाने की ताकीद कर छोड़ दिया। फिर राजकुमार सिंह ने वनराई पुलिस स्टेशन जाकर मनोज मिश्रा, पद्माकर, राज सुर्वे, विकी शेट्टी व 10,12 अज्ञात लोगों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुंबई एयरपोर्ट से फरार होने की कोशिश कर रहे मनोज मिश्रा व उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। अब देखना यह है कि पुलिस विधायक प्रकाश सुर्वे के बेटे राज सुर्वे को भी गिरफ्तार करती है या नहीं?
चाणक्य भूल जाते हैं कि लोकसभा की 41 सीटें जीतने में शिवसेना गठबंधन का हाथ था।
महाराष्ट्र में बीजेपी दोयम दर्जे से कभी आगे नहीं बढ़ी।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- महाराष्ट्र सरकार में यहां भूचाल मचा हुआ है। दो पक्षों की साझेदारी में धीरे-धीरे तनाव उत्पन्न हो रहा है। शिंदे और फडणवीस के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। क्योंकि फडणवीस गृहमंत्री होते हुए भी ठाणे जिले के आईपीएस को हटा नहीं सकते जबकि भाजपा के स्थानीय बड़े नेता का सिर फोड़ दिया गया। यह साझेदारी कब तक चलेगी यह कहा नहीं जा सकता।
दिल्ली बड़ी बेरहम है। जो कोई सत्ता में आता है, खुद को सम्राट समझने लगता है। वहां का सत्ताधारी कभी भी बर्दास्त नहीं करता, कि उसके साम्राज्य में किसी प्रांत का नेता शक्तिशाली बनकर उसे चुनौती देने की स्थिति में आए। इसीलिए यूपी में भाजपा के स्टार प्रचारक योगी आदित्यनाथ के पर कतर दिए गए। बिना दांत और नाखून के सीएम बना दिए गए। मजबूरी थी केंद्र की क्योंकि योगी आरएसएस के बेहद करीब हैं। सरकार में उनके दाहिने बाएं तो महावत के रूप में उपमुख्यमंत्री रख दिए गए। संगठन में प्रांतीय अध्यक्ष और प्रभारी दिल्ली ने नियुक्त कर योगी को रोक दिया। लेकिन योगी के बगावती तेवर ने उन्हें शक्तिशाली सीएम बना दिया।
Indian fasttrack newsमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की फाइल तस्वीर
महाराष्ट्र सरकार की राजनीति ..
महाराष्ट्र में बकौल पूर्व सीएम फड़णवीस ने ही शिवसेना तोड़ने, शिंदे के साथ अपनी मित्रता निभाने और खुद मुख्यमंत्री बनने के ख्वाब पाले थे। किंतु चाणक्य ने सस्पेंस रखते हुए एकनाथ शिंदे को सीएम बना दिया। फड़नवीस को बेइज्जत करने के लिए उन्हें डिप्टी सीएम बनने को मजबूर कर दिया। अब शिंदे और फडणवीस के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। क्योंकि फडणवीस गृहमंत्री होते हुए भी ठाणे जिले के आईपीएस को हटा नहीं सकते। जबकि भाजपा के स्थानीय बड़े नेता का सिर फोड़ दिया गया। शिंदे के प्रभाव के कारण एफआईआर भी नहीं लिखी गई। कितने असहज हो चुके हैं फडणवीस?
बिल्डर लॉबी,कॉरपोरेट भी दो घड़े में बंट गए हैं। कुछ को शिंदे तो कुछ को फडणवीस का वरद हस्त प्राप्त है। बीजेपी के कार्यकर्ता पीटे जाय। फडणवीस उसके पक्ष में खड़े भी हो जाएं लेकिन शिंदे द्वारा यह कहा जाए कि ठाणे जिले के किसी पुलिस अधिकारी का फडणवीस ट्रांसफर या पोस्टिंग, प्रमोशन नहीं कर सकते। क्योंकि बॉस शिंदे हैं और फडणवीस उनके अधीन हैं। उन्हे शिंदे का आदेश मानना ही पड़ेगा। बेचारे शिंदे करते भी तो क्या ? क्योंकि निरंतर उनका अपमान चाणक्य के फोन आने के बाद किया जाता है।
आज हालत ऐसे हैं कि कभी अभिन्न मित्र आज आंख में आंख मिलाकर बात तक नहीं करते। जिसका खामियाजा लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बीजेपी को ही भुगतना पड़ेगा। यूपी में लोकसभा की 64 सीटें 2019 में बीजेपी जीती थी। वहां योगी को नीचा दिखाया जा रहा और महाराष्ट्र में कुल 41 लोकसभा सीटें जीतने वाली भाजपा आगामी चुनाव में दहाई तक का आंकड़ा भी नहीं छूने की स्थिति में रह गई है। जिस बालासाहेब ठाकरे ने 2001 के गुजरात दंगे में सीएम मोदी का साथ दिया था। उन्हीं के बेटे उद्धव ठाकरे को चाणक्य ने लहूलुहान कर मोदी के विजय रथ को रोक दिया है। संभव है चाणक्य खुद पीएम की कुर्सी पाना चाहते हों और मोदी को डोमिनेट करने की महत्त्वाकांक्षा रखते हों।
Live video on Indian fasttrack news channel
महाराष्ट्र के मामले में चाणक्य भूल जाते हैं, कि लोकसभा की 41 सीटें जीतने में शिवसेना गठबंधन का हाथ था और यह भी भूल गए कि महाराष्ट्र में बीजेपी दोयम दर्जे से कभी आगे नहीं बढ़ी। शिवसेना के प्रभुत्व का लाभ बीजेपी को मिलता रहा है। लेकिन उद्धव ठाकरे को चोटिल कर चाणक्य ने भाजपा का महाराष्ट्र में सर्वनाश करने का जुगाड कर लिया है। इससे, सबसे बड़ा नुकसान पीएम मोदी का ही होगा और विधानसभा चुनाव में आने वाले समय में बीजेपी को 288 सीटों में बमुश्किल 20 सीटें ही मिलेंगी। शरद पवार, कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की ही आगामी सरकार बनेगी। उसी तरह जैसे यूपी की लोकसभा चुनाव में 40 सीटों पर पेंच फसने से आरएसएस चिंतित है।