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  • BMC चुनाव 2026: आपका इलाका किस वॉर्ड में आता है? दहिसर से कोलाबा तक पूरी लिस्ट जारी

    BMC चुनाव 2026: आपका इलाका किस वॉर्ड में आता है? दहिसर से कोलाबा तक पूरी लिस्ट जारी

    BMC Elections 2026 की घोषणा के बाद मुंबई में सियासी हलचल तेज। जानिए आपका इलाका किस वॉर्ड में आता है, दहिसर से कोलाबा तक 227 वॉर्ड की पूरी जानकारी।

    मुंबई: मुंबईकरों के लिए एक अहम सियासी अपडेट सामने आया है। राज्य चुनाव आयोग ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 की आधिकारिक घोषणा कर दी है। ये चुनाव 15 जनवरी 2026 को होंगे। लगभग एक दशक बाद होने जा रहे इस चुनाव को मुंबई का सबसे बड़ा नागरिक चुनाव माना जा रहा है। चुनाव से पहले वॉर्ड सीमाओं में बदलाव (डीलिमिटेशन) किया गया है, जिसके बाद अब शहर को 227 चुनावी वॉर्ड में बांटा गया है, जो 24 प्रशासनिक वॉर्ड के अंतर्गत आते हैं।

    BMC चुनाव 2026 क्यों है इतना अहम?

    BMC एशिया की सबसे अमीर नगरपालिकाओं में से एक है। सड़क, पानी, सफाई, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे मुद्दे सीधे आम नागरिक से जुड़े हैं। ऐसे में यह चुनाव सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि मुंबई के भविष्य का चुनाव माना जा रहा है।

    दक्षिण मुंबई (सिटी वॉर्ड्स)

    दक्षिण मुंबई के पारंपरिक और ऐतिहासिक इलाकों को मिलाकर 9 प्रशासनिक वॉर्ड बनाए गए हैं:

    • A वॉर्ड (224–227): कोलाबा, कफ परेड, नेवी नगर, चर्चगेट, फोर्ट
    • B वॉर्ड (221–223): मोहम्मद अली रोड, डोंगरी, भेंडी बाजार
    • C वॉर्ड (217–220): मरीन लाइंस, भूलश्वर, पायधोनी
    • D वॉर्ड (210–216): मालाबार हिल, गिरगांव, ग्रांट रोड
    • E वॉर्ड (202–209): भायखला, मझगांव, रे रोड
    • F साउथ (196–201): परेल, लालबाग, सेवरी
    • F नॉर्थ (172–181): सायन, माटुंगा, वडाला
    • G साउथ (188–195): वर्ली, प्रभादेवी, लोअर परेल
    • G नॉर्थ (182–187): दादर पश्चिम, माहिम, धारावी

    पश्चिमी उपनगर (Western Suburbs)

    मुंबई का सबसे ज्यादा वोटर वाला इलाका पश्चिमी उपनगर माना जाता है:

    • H ईस्ट (87–97): बांद्रा ईस्ट, सांताक्रूज़ ईस्ट
    • H वेस्ट (98–103): बांद्रा वेस्ट, खार
    • K ईस्ट (68–82): अंधेरी ईस्ट, जोगेश्वरी
    • K वेस्ट (53–67): अंधेरी वेस्ट, जुहू, वर्सोवा
    • P साउथ (43–52): गोरेगांव, आरे कॉलोनी
    • P नॉर्थ (27–42): मलाड, मार्वे, अक्सा, मढ़
    • R साउथ (18–26): कांदिवली, चारकोप
    • R सेंट्रल (8–17): बोरीवली, गोराई
    • R नॉर्थ (1–7): दहिसर, आईसी कॉलोनी

    पूर्वी उपनगर (Eastern Suburbs)

    पूर्वी मुंबई के औद्योगिक और रिहायशी इलाके इन वॉर्ड्स में आते हैं:

    • L वॉर्ड (155–171): कुर्ला, साकीनाका
    • M ईस्ट (134–148): गोवंडी, मानखुर्द
    • M वेस्ट (149–154): चेंबूर
    • N वॉर्ड (123–133): घाटकोपर, पंत नगर
    • S वॉर्ड (104–122): भांडुप, विक्रोली
    • T वॉर्ड: मुलुंड, नाहुर

    227 वॉर्ड से जुड़े अहम आंकड़े

    • सबसे छोटा वॉर्ड: B वॉर्ड (सिर्फ 3 चुनावी वॉर्ड)
    • सबसे बड़ा वॉर्ड: P नॉर्थ (16 चुनावी वॉर्ड)
    • प्रति वॉर्ड औसत आबादी: करीब 54,000
    • महिला आरक्षण: 227 में से 114 वॉर्ड महिलाओं के लिए आरक्षित

    आपका वॉर्ड जानना क्यों जरूरी?

    वोटर लिस्ट, प्रत्याशी, स्थानीय मुद्दे और चुनावी अधिकार समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आपका इलाका किस वॉर्ड में आता है। इससे आप जिम्मेदार वोटर बन सकते हैं।


    FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1: BMC चुनाव 2026 कब होंगे?
    👉 15 जनवरी 2026 को।

    Q2: कुल कितने वॉर्ड हैं?
    👉 227 चुनावी वॉर्ड।

    Q3: सबसे पहला और आखिरी वॉर्ड कौन सा है?
    👉 वॉर्ड 1 – दहिसर, वॉर्ड 227 – कोलाबा।

    Q4: क्या महिलाओं के लिए आरक्षण है?
    👉 हां, 114 वॉर्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

  • मालवनी पर महायुति की नज़र, 641 एकड़ जमीन के पुनर्विकास पर सियासी घमासान

    मालवनी पर महायुति की नज़र, 641 एकड़ जमीन के पुनर्विकास पर सियासी घमासान

    धारावी की तर्ज पर मालवणी के 641 एकड़ इलाके के पुनर्विकास की तैयारी शुरू। क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल, सर्वे और विस्थापन को लेकर विपक्ष ने सरकार पर बिल्डरों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।

    महाराष्ट्र/नागपुर: धारावी पुनर्विकास योजना के बाद अब मुंबई के मालाड स्थित मालवनी इलाके के 641 एकड़ भूखंड पर महायुति सरकार की नजर टिक गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे इलाके के क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल के तहत पुनर्विकास के लिए सर्वे और योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार इसे झोपड़पट्टी-मुक्त करने की पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इसे बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की साजिश करार दे रहा है।

    धारावी मॉडल पर मालवणी पुनर्विकास की तैयारी

    देश की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी धारावी को अडानी ग्रुप को सौंपे जाने के बाद अब सरकार ने मालवनी क्षेत्र के पुनर्विकास की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में 641 एकड़ क्षेत्र के सर्वेक्षण और क्लस्टर डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि क्लस्टर मॉडल के जरिए पूरे मालवनी इलाके का कम समय में पुनर्विकास संभव है और इसे एक बड़े झोपड़पट्टी पुनर्विकास प्रोजेक्ट के रूप में तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।

    641 एकड़ में फैला मालवनी, 14 हजार झोपड़ियां

    मालवनी इलाके का कुल क्षेत्रफल 641 एकड़ है, जिसमें

    • राज्य सरकार
    • म्हाडा
    • बृहन्मुंबई महानगरपालिका
    • निजी भूखंड

    शामिल हैं।
    इसमें से 565.98 एकड़ क्षेत्र में झोपड़पट्टियां हैं, जबकि 75.02 एकड़ खुली जमीन है। इस पूरे इलाके में करीब 14 हजार झोपड़ियां बसी हुई हैं। सरकार का दावा है कि पुनर्विकास के बाद यह इलाका पूरी तरह झोपड़पट्टी-मुक्त हो जाएगा।

    13 लाख लोगों के विस्थापन की आशंका

    विपक्ष का आरोप है कि इस योजना के नाम पर मालवनी में रहने वाले करीब 13 लाख लोगों को विस्थापित किया जाएगा। धारावी पुनर्विकास को लेकर पहले से चल रहे विवाद के बीच यह मुद्दा और भी संवेदनशील बन गया है।

    विपक्षी दलों का कहना है कि मुंबई में विकास के नाम पर लगातार बड़े भूखंड बिल्डरों की झोली में डाले जा रहे हैं, जबकि स्थानीय निवासियों के पुनर्वास और अधिकारों को लेकर स्पष्टता नहीं है।

    कौन करेगा सर्वे और रिपोर्ट?

    बैठक में तय किया गया कि

    • म्हाडा और
    • झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA)

    अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में सर्वे करेंगे।
    सभी झोपड़पट्टियों का सर्वे पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसियां संयुक्त रिपोर्ट तैयार करेंगी।
    जहां कानूनी अड़चनें होंगी, वहां अलग से कार्रवाई की जाएगी, और जहां विकास संभव होगा, उन इलाकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद

    इस अहम बैठक में

    • आवास राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर
    • विधायक असलम शेख
    • अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता
    • म्हाडा अधिकारी मिलिंद बोरीकर
    • SRA CEO डॉ. महेंद्र कल्याणकर

    मौजूद रहे।
    वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुंबई मनपा आयुक्त भूषण गगरानी भी बैठक में शामिल हुए।

    दागी बिल्डर को ठेका मिलने की चर्चा

    सूत्रों के अनुसार, इस पुनर्विकास परियोजना को लेकर पहले ही एक दागी बिल्डर को ठेका दिए जाने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आरोप है कि यह वही बिल्डर है, जिसने चेंबूर के माहुल इलाके में प्रोजेक्ट-अफेक्टेड लोगों के लिए इमारतें बनाई थीं, जहां करीब 9 हजार करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगे थे। बताया जाता है कि वह आपराधिक मामले में जेल भी जा चुका है।

    अब उसी बिल्डर को एक भाजपा नेता के माध्यम से मालवनी की बड़ी पुनर्विकास योजना में शामिल करने की कोशिश हो रही है।


    FAQ

    Q1. मालवणी पुनर्विकास योजना क्या है?
    मालवणी इलाके को क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल के तहत पुनर्विकसित करने की सरकारी योजना।

    Q2. कुल कितनी जमीन शामिल है?
    करीब 641 एकड़ भूमि।

    Q3. कितने लोग प्रभावित हो सकते हैं?
    करीब 13 लाख लोगों के विस्थापन की आशंका जताई जा रही है।

    Q4. विवाद क्यों हो रहा है?
    विपक्ष का आरोप है कि योजना का फायदा बिल्डरों को दिया जा रहा है।

  • शुक्ला कंपाउंड विवाद: MLA सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री से मांगा हस्तक्षेप, 1962 की डेट ऑफ लाइन बदलने की मांग तेज

    शुक्ला कंपाउंड विवाद: MLA सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री से मांगा हस्तक्षेप, 1962 की डेट ऑफ लाइन बदलने की मांग तेज

    मुंबई के दहिसर पूर्व स्थित शुक्ला कंपाउंड में 400 परिवारों का भविष्य अधर में लटका है। विकासक द्वारा 1962 से पहले के दस्तावेज़ मांगने पर दिंडोशी के MLA सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर इस नियम में बदलाव की मांग की है। मामला अब शीतकालीन अधिवेशन में उठेगा।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: दहिसर पूर्व के रावलपाड़ा स्थित शुक्ला कंपाउंड में रहने वाले करीब 400 परिवारों का भविष्य संकट में पड़ गया है, क्योंकि प्रोजेक्ट डेवलपर ने इन सभी परिवारों से घर पुनर्विकास पात्रता के लिए 1962 से पहले के दस्तावेज़ देने की शर्त रखी है।

    इन दस्तावेज़ों को उपलब्ध न करा पाने के कारण सैकड़ों परिवार बेघर होने की चिंता में हैं। अब यह मामला राजनीतिक रूप से बड़ा रूप ले चुका है।

    🏘 45 साल से रहने वाले परिवारों पर बेघर होने का खतरा

    शुक्ला कंपाउंड में रहने वाले अधिकतर परिवार पिछले चार से पांच दशकों से इस इलाके में रह रहे हैं। कई परिवार छोटे उद्योग और मजदूरी कर अपनी रोज़ी-रोटी चलाते हैं।

    इन निवासियों का कहना है कि उन्होंने बिजली बिल, राशन कार्ड, आधार कार्ड, पानी के बिल सहित कई सरकारी दस्तावेज़ जमा किए हैं, लेकिन डेवलपर केवल 1962 के पहले की ओनरशिप प्रूफ स्वीकार कर रहा है — जो लगभग असंभव है।

    🏗 डेवलपर पर स्वार्थी प्रोजेक्ट प्लानिंग का आरोप

    मौजूदा ज़मीन का असली मालिक गोविंद पाटिल ने यह प्लॉट साल 1920 में इकबाल मिर्ची से जुड़े नामों और शेलाजी इंफ्रास्ट्रक्चर के अशोक जैन को बेचा था।

    अब विकासक अशोक जैन इस जमीन पर हाई-राइज़ हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

    रहवासियों का आरोप है कि—

    “डेवलपर खुद का फायदा ज्यादा देख रहा है और पुराना डेट ऑफ लाइन दिखाकर लोगों को बाहर करने की कोशिश कर रहा है।”

    🧾 MLA सुनील प्रभु पैरवी में, मुख्यमंत्री को पत्र

    दिंडोशी विधानसभा के शिवसेना नेता एवं MLA सुनील प्रभु ने इस मामले में दखल देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है।

    प्रभु ने पत्र में लिखा कि—

    “मुंबई और महाराष्ट्र में किसी भी हाउसिंग स्कीम में पात्रता के लिए अधिकतर जगह 2012 से पहले का डॉक्यूमेंट पर्याप्त माना जाता है। ऐसे में शुक्ला कंपाउंड में 1962 की शर्त अन्यायपूर्ण है और इसे बदला जाना चाहिए।”

    उन्होंने यह भी ऐलान किया कि वे इस मुद्दे को आगामी नागपुर में होने वाले शीतकालीन विधान सभा अधिवेशन में ‘ध्यान आकर्षण’ के रूप में उठाएँगे।

    🔍 इस बदलाव से अन्य प्रोजेक्ट भी होंगे प्रभावित

    यदि सरकार दस्तावेज़ की पात्रता 1962 से बदलकर 2012 या वर्तमान नियम के अनुसार करती है, तो उसका सीधा लाभ—

    ✔ मुंबई
    ✔ ठाणे
    ✔ पालघर
    ✔ नवी मुंबई

    में हो रहे हज़ारों पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स को मिल सकता है।


    ❓ FAQ सेक्शन:

    प्रश्नउत्तर
    क्या नियम अभी बदले गए हैं?नहीं, नियम बदलने की मांग की गई है और मामला विधानसभा में उठेगा।
    क्या सभी रहवासियों को घर मिलेगा?फिलहाल स्थिति अनिश्चित है। नियम बदलने पर ही रास्ता स्पष्ट होगा।
    क्या यह मामला कानूनी रूप से कोर्ट में जा सकता है?हाँ, यदि समाधान न मिला तो रहवासी कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
  • मुंबई कांग्रेस ने BMC चुनाव के लिए संसदीय जांच समिति बनाई

    मुंबई कांग्रेस ने BMC चुनाव के लिए संसदीय जांच समिति बनाई

    मुंबई कांग्रेस ने BMC चुनाव के लिए जिलानुसार संसदीय जांच समिति गठित की है, जो उम्मीदवारों की छानबीन, मार्गदर्शन और पैनल तैयार करने का काम करेगी।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव की तैयारियों को गति देते हुए मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस कमेटी ने संसदीय जांच समिति का गठन कर दिया है। इस समिति का उद्देश्य सभी जिलों में संभावित उम्मीदवारों के आवेदन की पड़ताल करना, उनका मार्गदर्शन करना और अंतिम पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजना है। यह समिति मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद वर्षा एकनाथ गायकवाड़ के आदेश से गठित की गई है। जानकारी कांग्रेस प्रवक्ता व मीडिया समन्वयक सुरेशचंद्र राजहंस ने दी।

    समिति का मुख्य कार्य

    नई गठित समिति जिलानुसार बैठकों के माध्यम से निम्न कार्य करेगी—

    • उम्मीदवारों के आवेदन की विस्तृत छानबीन
    • जिला अध्यक्षों व जात वैधता समितियों के साथ समन्वय
    • योग्य उम्मीदवारों की सूची और पैनल तैयार करना
    • आवेदन भरने में उम्मीदवारों को मार्गदर्शन
    • उम्मीदवारों की मुलाकात कर अंतिम पैनल वरिष्ठ नेतृत्व को सौंपना

    जिलावार प्रभारी और सहप्रभारी शामिल

    मुंबई कांग्रेस ने विभिन्न जिलों के अनुसार प्रभारी और सहप्रभारी नियुक्त किए हैं। सूची इस प्रकार है—

    दक्षिण मुंबई जिला

    • प्रभारी: विधायक ज्योति गायकवाड़
    • सहप्रभारी: मोहसिन हैदर, आसिफ जकेरिया

    दक्षिण मध्य मुंबई जिला

    • प्रभारी: सचिन सावंत
    • सहप्रभारी: सुरेशचंद्र राजहंस, डॉ. किशोर सिंह

    उत्तर मध्य मुंबई जिला

    • प्रभारी: MLA अस्लम शेख
    • सहप्रभारी: विरेंद्र चौधरी, डॉ. अंजता यादव

    ईशान्य मुंबई जिला

    • प्रभारी: डॉ. अर्जित सिंह मनहास
    • सहप्रभारी: धनंजय तिवारी, एड. राजेश टेके

    उत्तर पश्चिम मुंबई जिला

    • प्रभारी: विधायक अमीन पटेल
    • सहप्रभारी: हाजी बब्बू खान, विष्णु सरोदे

    उत्तर मुंबई जिला

    • प्रभारी: मधु चव्हाण
    • सहप्रभारी: अर्शद आज़मी, क्लाइव डॉयस

    BMC चुनाव के संदर्भ में इसका महत्व

    BMC चुनाव में टिकट चयन हमेशा से कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण मुद्दा रहा है। इस बार पार्टी संगठन उम्मीदवार चयन प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने की कोशिश कर रहा है। इसी उद्देश्य से संसदीय जांच समिति गठित की गई है, ताकि सभी जिलों में योग्य, मजबूत और सक्रिय कार्यकर्ताओं को बेहतर प्रतिनिधित्व मिले।


    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    1. संसदीय पडताळणी समिति क्यों बनाई गई है?

    उम्मीदवारों की छानबीन, मार्गदर्शन और अंतिम पैनल तैयार करने के लिए यह समिति गठित की गई है।

    2. समिति में कौन-कौन शामिल हैं?

    मुंबई के विभिन्न जिलों के प्रभारी और सहप्रभारी इसमें शामिल हैं, जैसे MLA अस्लम शेख, अमीन पटेल, ज्योति गायकवाड़ सहित कई वरिष्ठ नेता।

    3. यह समिति क्या काम करेगी?

    उम्मीदवारों के आवेदन की जांच, उनकी मुलाखत, पैनल तैयार करना और वरिष्ठ नेतृत्व को अनुशंसा भेजना।

    4. समिति का गठन किसने किया?

    मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा एकनाथ गायकवाड़ के आदेश पर समिति बनाई गई है।

    5. क्या यह समिति उम्मीदवारों को आवेदन भरने में मदद करेगी?

    हाँ, जिल्हा समिति के साथ मिलकर यह समिति उम्मीदवारों को पूरा मार्गदर्शन देगी।

  • BMC ELECTION में कांग्रेस अकेले उतरने पर कायम; महाविकास अघाडी की एकता पर संकट

    BMC ELECTION में कांग्रेस अकेले उतरने पर कायम; महाविकास अघाडी की एकता पर संकट

    BMC ELECTION में कांग्रेस की अकेले लड़ने की घोषणा से महाविकास आघाड़ी (MVA) में असहजता बढ़ गई है। शिवसेना (UBT) की मनसे से नज़दीकी को लेकर कांग्रेस की असहमति सामने आई, जबकि एनसीपी (SP) गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ने के पक्ष में है।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव को लेकर कांग्रेस के अकेले लड़ने के फैसले ने महाविकास आघाड़ी की एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस का कहना है कि शिवसेना (UBT) की मनसे के साथ बढ़ती राजनीतिक नज़दीकियां उनके उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोट बैंक को नुकसान पहुंचा सकती हैं। हालांकि शिवसेना (UBT) कांग्रेस से पुनर्विचार की अपील कर रही है, जबकि एनसीपी (शरद पवार) मनसे को साथ लेकर संयुक्त मुकाबले की पक्षधर है। इस राजनीतिक खींचतान ने आगामी मनपा चुनावों की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है।

    कांग्रेस के फैसले से MVA में हलचल

    मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने साफ कहा है कि कांग्रेस बीएमसी चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेगी। इससे MVA में असहजता बढ़ी है, क्योंकि गठबंधन का मकसद भाजपा को रोकना था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के अकेले लड़ने से वोटों का बंटवारा होगा, जिससे भाजपा को सीधी बढ़त मिल सकती है।

    मनसे को लेकर कांग्रेस की बड़ी चिंता

    कांग्रेस की असहमति की सबसे बड़ी वजह है—
    🔹 शिवसेना (UBT) और मनसे की बढ़ती समीपता
    🔹 उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोट बैंक का संभावित नुकसान

    कांग्रेस का मानना है कि मनसे के साथ जुड़ाव उसकी विचारधारा के विपरीत है, क्योंकि मनसे पहले उत्तर भारतीयों के खिलाफ आक्रामक रुख के लिए जानी जाती रही है।

    कांग्रेस में भी दो धड़े, राय में मतभेद

    कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति भी खुलकर सामने आई है।
    एक धड़ा — स्थानीय समीकरण के आधार पर मनसे के साथ गठबंधन का समर्थक
    दूसरा धड़ा — मनसे के साथ किसी भी सूरत में गठबंधन के खिलाफ

    मुंबई के राजनैतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस को जल्द स्पष्ट रुख लेना होगा, वरना गैर-मराठी और गैर-हिंदू वोटों का विभाजन भाजपा के लिए रास्ता आसान बना देगा।

    एनसीपी (SP) एकता के पक्ष में

    एनसीपी (शरद पवार) गठबंधन की मजबूती के लिए MNS को साथ लेकर संयुक्त मुकाबले की वकालत कर रही है। इसी संदर्भ में वर्षा गायकवाड़ की टीम ने शरद पवार से मुलाकात भी की है, लेकिन कांग्रेस अपने निर्णय पर कायम है।

    शिवसेना (UBT) ने किया पुनर्विचार का आग्रह

    उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना कांग्रेस को साथ रखने की कोशिश जारी रखे हुए है। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा—
    🔹 “मनसे के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस की नाराज़गी व्यक्तिगत मामला हो सकता है।”
    🔹 “जनता चाहती है कि शिवसेना और मनसे साथ आएं।”

    दूसरी ओर, मनसे ने MVA में शामिल होने से इनकार करते हुए कांग्रेस को “अमीबा” कहा, जिस पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए “गिरगिट” जैसी टिप्पणी की।

    बीएमसी चुनाव — बड़ा राजनीतिक समीकरण

    • राज्य की 246 नगर परिषद और 42 नगर पंचायतों के चुनाव 2 दिसंबर को
    • बीएमसी के चुनाव जनवरी 2026 में होने की संभावना
    • वर्तमान हालात में भाजपा सबसे मजबूत स्थिति में दिख रही है
    • कांग्रेस के अकेले उतरने से विपक्ष का वोट बैंक टूट सकता है

    FAQ

    प्रश्नउत्तर
    क्या कांग्रेस MVA से अलग हो रही है?नहीं, गठबंधन बरकरार है, लेकिन बीएमसी चुनाव कांग्रेस स्वतंत्र रूप से लड़ना चाहती है।
    कांग्रेस मनसे के साथ क्यों नहीं है?कांग्रेस का कहना है कि मनसे के पुराने रुख से उसके परंपरागत वोटरों को नुकसान हो सकता है।
    क्या विपक्षी वोट बंटेंगे?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फैसले से भाजपा को सीधा लाभ मिल सकता है।
    क्या अंतिम निर्णय बदल सकता है?शिवसेना (UBT) लगातार आग्रह कर रही है, लेकिन इस समय कांग्रेस अपने फैसले पर अडिग है।
  • BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने फिर शुरू की ‘शिव भोजन थाली’, गरीबों को सस्ते में मिलेगा खाना

    BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने फिर शुरू की ‘शिव भोजन थाली’, गरीबों को सस्ते में मिलेगा खाना

    महाराष्ट्र में महायुती सरकार ने BMC चुनाव से पहले शिव भोजन थाली योजना को फिर शुरू किया है। गरीबों को ₹10 में ₹50 की थाली मिलेगी। जानिए कैसे मिला ₹70 करोड़ का बजट, किन जिलों में खुले रहेंगे केंद्र, और क्या हैं सरकार के नए नियम।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र और मुंबई के गरीब नागरिकों के लिए राहत भरी खबर है। महा यूती सरकार ने फिर से ‘शिव भोजन थाली योजना’ को शुरू करने का ऐलान किया है, जो पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी (MVA) सरकार ने शुरू की थी।
    यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को ₹10 में ₹50 की पौष्टिक थाली मुहैया कराती है। चुनावी मौसम में इस फैसले को गरीब वर्ग तक पहुंचने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    🔹 योजना का बजट और फंड रिलीज़

    • सरकार ने इस योजना के लिए ₹70 करोड़ का बजट तय किया है।
    • इसमें से ₹28 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है, जबकि सितंबर में ₹21 करोड़ पहले ही वितरित किए गए थे।
    • वित्त विभाग की अनुमति के बाद 10 दिनों के भीतर फंड खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं, नहीं तो राशि वापस ली जाएगी।
    • योजना को लागू करने की ज़िम्मेदारी अन्न व नागरी पुरवठा विभाग को दी गई है।

    🔹 क्या है ‘शिव भोजन थाली’ योजना?

    • शुरुआत: 26 जनवरी 2020 को उद्धव ठाकरे सरकार ने की थी।
    • उद्देश्य: गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराना।
    • लागत: शुरू में थाली ₹5 में मिलती थी, बाद में ₹10 कर दी गई।
    • कोविड-19 के दौरान: थाली फ्री में दी जाती थी।
    • वर्तमान स्थिति: ₹50 की थाली अब ₹10 में दी जाएगी, बाकी ₹40 का भुगतान सरकार करेगी।
    • राज्यभर में पहले 1,904 केंद्रों से रोज़ाना 2 लाख थालियाँ वितरित होती थीं।

    🔹 ऑपरेटर्स की दिक्कतें और सरकार का नया कदम

    पिछले कई महीनों से योजना ठप होने के कारण शिव भोजन केंद्र चालकों के भुगतान रुके हुए थे, जिससे उनकी आजीविका पर असर पड़ा।
    इस मुद्दे को NCP नेता और मंत्री छगन भुजबल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष उठाया।
    इसके बाद सरकार ने योजना को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया और ₹21 करोड़ का तत्काल अनुदान जारी किया।

    साथ ही, भ्रष्टाचार रोकने के लिए सभी शिव भोजन केंद्रों पर CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि भोजन वितरण में गड़बड़ी न हो।

    🔹 राजनीतिक पृष्ठभूमि: BMC चुनाव से पहले बड़ा दांव

    राज्य सरकार का यह फैसला BMC और अन्य स्थानीय निकाय चुनावों से पहले लिया गया है।
    राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम गरीब और मध्यम वर्ग के मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति का हिस्सा है।
    MVA के दौरान शुरू की गई इस योजना को महा यूती सरकार द्वारा बंद करने पर पहले काफी आलोचना हुई थी।


    🔹 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. शिव भोजन थाली योजना क्या है?
    यह महाराष्ट्र सरकार की सामाजिक योजना है, जिसके तहत गरीबों को मात्र ₹10 में ₹50 की पौष्टिक थाली दी जाती है।
    Q2. इस योजना को कब शुरू किया गया था?
    26 जनवरी 2020 को उद्धव ठाकरे सरकार ने इसे लॉन्च किया था।
    Q3. क्या यह योजना बंद कर दी गई थी?
    हाँ, मार्च 2025 में महायुती सरकार ने वित्तीय कारणों से इसे बंद कर दिया था, लेकिन अब इसे फिर से शुरू किया गया है।
    Q4. वर्तमान में थाली की लागत और सब्सिडी क्या है?
    थाली की कुल लागत ₹50 है। लाभार्थी ₹10 देते हैं, जबकि ₹40 सरकार वहन करती है।
    Q5. कितने केंद्रों पर यह योजना चल रही है?
    राज्यभर में लगभग 1,904 शिव भोजन केंद्र सक्रिय हैं, जहाँ रोज़ाना लाखों गरीब भोजन करते हैं।

  • शिंदे सेना के नेता संजय निरुपम 7 साल पुराने रेल रोको मामले में बरी

    शिंदे सेना के नेता संजय निरुपम 7 साल पुराने रेल रोको मामले में बरी

    शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के प्रवक्ता और पूर्व सांसद संजय निरुपम को 2018 के रेल रोको मामले में मुंबई की विशेष मजिस्ट्रेट अदालत ने बरी कर दिया। अदालत ने कहा — सबूतों में संदेह है, CCTV फुटेज स्पष्ट नहीं है।

    मुंबई: विशेष मजिस्ट्रेट अदालत ने शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता और पूर्व सांसद संजय निरुपम को 7 साल पुराने रेल रोको मामले में बरी कर दिया है। यह मामला 10 सितंबर 2018 का है, जब निरुपम ने कांग्रेस मुंबई अध्यक्ष के रूप में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ देशव्यापी बंद का हिस्सा बनकर अंधेरी स्टेशन पर रेल रोको आंदोलन किया था।

    🚉 क्या था मामला?

    पुलिस के अनुसार, संजय निरुपम सुबह 9:30 बजे अंधेरी रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। वे 50–60 पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी कर रहे थे और विरोध के दौरान वे प्लेटफॉर्म 3 और 4 के बीच ट्रैक पर बैठ गए। रेलवे स्टाफ ने रोकने की कोशिश की, लेकिन इसके चलते बोरीवली स्लो लोकल को 7 मिनट की देरी हुई।
    अंधेरी पुलिस ने इस पर एफआईआर दर्ज कर ली और घटना की तस्वीरें व सीसीटीवी फुटेज अदालत में पेश किए।

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    🧾 अदालत ने सबूतों पर उठाए सवाल

    न्यायाधीश वी.यू. मिसाल ने कहा कि पुलिस द्वारा पेश किए गए सीसीटीवी फुटेज और तस्वीरें स्पष्ट नहीं हैं और इनसे यह साबित नहीं होता कि निरुपम ने ही ट्रैक पर बैठकर ट्रेन रोकी थी।
    उन्होंने कहा —

    “केवल CCTV के प्रिंटआउट पेश करने से सबूत साबित नहीं होते। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B के प्रावधान पूरे न होने तक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को मान्य नहीं माना जा सकता।”

    इसके अलावा, अदालत ने कहा कि ट्रेन में देरी को लेकर पुलिस के दावे पर भी उचित सबूत नहीं दिए गए हैं।

    “यह साबित नहीं किया जा सका कि बोरीवली स्लो लोकल की देरी सीधे तौर पर संजय निरुपम की वजह से हुई थी,” न्यायाधीश ने कहा।

    🧩 ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाए जाने का संकेत

    अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब उस दिन विरोध प्रदर्शन में कई वरिष्ठ नेता, जिनमें अशोक चव्हाण (अब बीजेपी में) भी मौजूद थे, तो सिर्फ निरुपम के खिलाफ ही केस क्यों दर्ज किया गया?
    न्यायाधीश ने कहा —

    “ऐसा प्रतीत होता है कि निरुपम को इस मामले में एक ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाकर फंसाया गया था।”

    🗣️ संजय निरुपम ने दी प्रतिक्रिया

    फैसले के बाद संजय निरुपम ने कहा —

    “सात साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार सच्चाई की जीत हुई। मैंने जनता की आवाज़ उठाई थी, कोई अपराध नहीं किया था।”

    उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित था।


    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. संजय निरुपम को किस मामले में बरी किया गया है?
    👉 उन्हें 2018 के रेल रोको आंदोलन के मामले में बरी किया गया है, जो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ हुआ था।
    Q2. घटना कहां हुई थी?
    👉 यह घटना अंधेरी रेलवे स्टेशन, मुंबई पर हुई थी।
    Q3. पुलिस ने क्या आरोप लगाए थे?
    👉 पुलिस ने कहा था कि निरुपम ने ट्रैक पर बैठकर लोकल ट्रेन को सात मिनट रोका था।
    Q4. कोर्ट ने क्या कहा?
    👉 कोर्ट ने कहा कि सबूत अस्पष्ट हैं और CCTV फुटेज से निरुपम की उपस्थिति साबित नहीं होती।
    Q5. निरुपम ने क्या प्रतिक्रिया दी?
    👉 उन्होंने कहा कि यह फैसला न्याय की जीत है और उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया था।

  • MLA Aslam Shaikh के जन्मदिन पर ज़रूरतमंदों को मिलेगा राशन, धूमधाम से होगी सेलिब्रेशन

    MLA Aslam Shaikh के जन्मदिन पर ज़रूरतमंदों को मिलेगा राशन, धूमधाम से होगी सेलिब्रेशन

    मुंबई के लोकप्रिय नेता और MLA असलम शेख के जन्मदिन पर 4 नवंबर को भव्य सेलिब्रेशन का आयोजन किया जा रहा है। इस मौके पर ज़रूरतमंद लोगों के लिए राशन वितरण किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन अरिफ़ शेख द्वारा किया गया है, जिसमें इस्माईल सैय्यद का खास सहयोग रहेगा।

    मुंबई: महाराष्ट्र के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं मुंबई कांग्रेस के जाने-माने नेता और लोगों के बीच लोकप्रिय चेहरा MLA असलम शेख का जन्मदिन इस बार खास अंदाज़ में मनाया जाएगा।
    4 नवंबर की शाम को Gate No. 1, Opp. MLA Aslam Shaikh Saheb Office पर 8 बजे से एक भव्य बर्थडे सेलिब्रेशन का आयोजन किया गया है।

    इस मौके पर न सिर्फ जश्न होगा, बल्कि समाजसेवा की भी एक शानदार मिसाल देखने को मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को राशन वितरण किया जाएगा ताकि उन्हें मदद मिल सके।

    💫 आयोजन की जिम्मेदारी और सहयोग

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    इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी Aslam Shaikh Help Line के प्रेसीडेंट अरिफ़ शेख के पास है।
    उन्होंने बताया कि यह सेलिब्रेशन सिर्फ जन्मदिन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का एक तरीका भी होगा। हालांकि हर साल अनाज तो बांटा ही जाता है लेकिन इस साल कुछ खास इंतजाम किया गया है। उन्होंने कहा, कि
    इस मौके पर इस्माईल सैय्यद का भी खास सहयोग रहेगा। इस वजह से इस बार ज्यादा लोगों के लिए तैयारियां की गई है।

    कार्यक्रम पूरी तरह से पब्लिक ओपन रहेगा और जो लोग राशन वितरण का लाभ लेना चाहते हैं, वे अरिफ़ शेख (9702100786) से संपर्क कर सकते हैं। कूपन इसी नंबर पर उपलब्ध होंगे।

    💖 असलम शेख: जनता के बीच हमेशा सक्रिय

    असलम शेख, मुंबई के सबसे सक्रिय और ज़मीन से जुड़े नेताओं में गिने जाते हैं।
    चाहे वो लॉकडाउन के दौरान राशन वितरण हो या बारिश में फंसे लोगों की मदद — MLA असलम शेख हमेशा फ्रंटलाइन पर नज़र आते हैं।
    उनका जन्मदिन हर साल समाजसेवा के नए मिशन के साथ मनाया जाता है। इस बार भी उनके समर्थक “सेलिब्रेशन विद सोशल कॉज़” की थीम पर काम कर रहे हैं।

    🌆 मालाड़ एवं मालवनी में बढ़ी उत्सुकता

    इलाके में बैनर और होर्डिंग्स लग चुके हैं, और लोगों में इस कार्यक्रम को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
    स्थानीय निवासी और समर्थक इस मौके पर बड़ी संख्या में पहुंचने की तैयारी में हैं।
    लोगों का कहना है कि MLA असलम शेख के जन्मदिन पर इस तरह का आयोजन समाज को जोड़ने का बेहतरीन उदाहरण है।


    ❓ FAQ Section

    Q1. MLA Aslam Shaikh का जन्मदिन कब और कहां मनाया जाएगा?
    👉 4 नवंबर को रात 8 बजे से, Gate No.1, Opp. MLA Aslam Shaikh Office पर।
    Q2. इस इवेंट का आयोजन किसने किया है?
    👉 आयोजन Aslam Shaikh Help Line के प्रेसीडेंट अरिफ़ शेख ने किया है।
    Q3. क्या इस मौके पर कोई सामाजिक पहल भी होगी?
    👉 हां, ज़रूरतमंद लोगों के लिए राशन वितरण किया जाएगा।
    Q4. राशन कूपन कैसे मिलेंगे?
    👉 इच्छुक लोग अरिफ़ शेख (9702100786) से संपर्क कर सकते हैं।

  • दी मालाड सहकारी बैंक द्वारा पूरग्रस्तों के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि में 5 लाख रुपये की दी धनराशि

    दी मालाड सहकारी बैंक द्वारा पूरग्रस्तों के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि में 5 लाख रुपये की दी धनराशि

    दी मालाड सहकारी बैंक लिमिटेड ने मराठवाड़ा और विदर्भ के पूरग्रस्त लोगों की मदद के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि में 5 लाख रुपये का चेक सौंपा। अध्यक्ष विनोद मिश्रा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से वर्षा निवास पर मुलाकात की।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: मालाड़ पूर्व स्थित दी मालाड सहकारी बैंक लिमिटेड ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए मराठवाड़ा और विदर्भ में आए हालिया बाढ़ प्रभावितों की सहायता के लिए हाथ बढ़ाया है। भाजपा के पूर्व नगरसेवक एवं बैंक के अध्यक्ष विनोद मिश्रा ने बैंक की ओर से मुख्यमंत्री सहायता निधि (Chief Minister Relief Fund) में ₹5,00,000 (पांच लाख रुपये) का चेक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपा।

    🙏 मुख्यमंत्री से वर्षा निवास पर मुलाकात

    इस अवसर पर भाजपा के मुंबई महानगरपालिका नेता और पूर्व नगरसेवक विनोद मिश्रा ने वर्षा निवास पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री को दीवाली की शुभकामनाएं भी दीं। मुलाकात के दौरान भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व जिल्हा उपाध्यक्ष प्रकाश वकानी भी मौजूद थे।

    🌊 मराठवाड़ा और विदर्भ में बाढ़ से नुकसान

    हाल ही में महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों में हुई भारी बारिश और बाढ़ से कई परिवारों को नुकसान झेलना पड़ा। किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं, घर क्षतिग्रस्त हुए और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। ऐसे में मालाड सहकारी बैंक का यह कदम समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है कि निजी संस्थाएं भी आपदा के समय सरकार के साथ खड़ी हैं।

    🏦 बैंक की सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण

    दी मालाड सहकारी बैंक लिमिटेड मुंबई की एक पुरानी और भरोसेमंद वित्तीय संस्था है, जो समाजसेवा में भी सक्रिय रहती है। बैंक ने पहले भी शिक्षा सहायता, चिकित्सा सहायता और सामाजिक अभियानों में सहयोग दिया है। इस बार बैंक ने पूरग्रस्तों की मदद कर सामाजिक दायित्व निभाने का एक और उदाहरण पेश किया है।

    🌟 सीएम फडणवीस ने जताया आभार

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दी मालाड सहकारी बैंक और अध्यक्ष विनोद मिश्रा का धन्यवाद किया और कहा कि समाज के सभी घटक यदि ऐसे ही एकजुट होकर योगदान दें, तो प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों की मदद तेज़ी से संभव हो सकेगी।


    ❓FAQs

    Q1. दी मालाड सहकारी बैंक ने मुख्यमंत्री सहायता निधि में कितनी राशि दी?
    बैंक ने मराठवाड़ा और विदर्भ के पूरग्रस्तों की मदद के लिए 5 लाख रुपये का चेक मुख्यमंत्री सहायता निधि में सौंपा।

    Q2. चेक किसे सौंपा गया?
    बैंक के अध्यक्ष विनोद मिश्रा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को वर्षा निवास पर चेक सौंपा।

    Q3. इस अवसर पर और कौन मौजूद थे?
    इस मौके पर भाजपा युवा मोर्चा के माजी जिल्हा उपाध्यक्ष प्रकाश वकानी भी उपस्थित थे।

    Q4. पूरग्रस्त क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
    मुख्य रूप से मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र में बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है।

  • गोरगांव में पानी की किल्लत पर उद्धव सेना का ‘बाल्टी मोर्चा’, नगर निगम को दी चेतावनी

    गोरगांव में पानी की किल्लत पर उद्धव सेना का ‘बाल्टी मोर्चा’, नगर निगम को दी चेतावनी

    गोरगांव पश्चिम में पानी की किल्लत से परेशान लोगों ने उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के साथ मिलकर ‘बाल्टी मोर्चा’ निकाला। मोर्चे में बड़ी संख्या में नागरिकों ने हिस्सा लिया और BMC को चेतावनी दी कि अगर पानी की समस्या हल नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा।

    मुंबई: गोरगांव (पश्चिम) में लगातार बढ़ती पानी की किल्लत को लेकर उद्धव ठाकरे गट की शिवसेना (UBT) ने रविवार को एक ज़ोरदार ‘बाल्टी मोर्चा’ निकाला। यह मोर्चा प्रभाग क्रमांक 52 में पानी की कमी के विरोध में संदीप गाढवे की अगुवाई में आयोजित किया गया। इस दौरान नागरिकों ने खाली बाल्टियां लेकर BMC के खिलाफ नारे लगाए और प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं मिला, तो आंदोलन और उग्र होगा।

    💧 ‘पानी आमचा हक्काचा, नाही कोणाच्या बापाचा’ — नारों से गूंजा इलाका

    मोर्चे में शामिल नागरिकों ने “पानी आमचा हक्काचा, नाही कोणाच्या बापाचा!” और “आमच्या मागण्या पूर्ण करा!” जैसे नारे लगाते हुए विरोध जताया।
    आंदोलन के दौरान दीपक परब नामक नागरिक ने BMC के गेट के सामने प्रतीकात्मक रूप से नहा कर प्रशासन पर तंज कसा।

    मोर्चा खत्म होने के बाद संदीप गाढवे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सहायक आयुक्त अजय पाटणे से मुलाकात की और इलाके में चल रही पानी की समस्या पर चर्चा की।

    🏘️ नागरिकों की मुख्य मांगें क्या हैं?

    1. बंगाली कंपाउंड इलाके में कम दबाव से आने वाले पानी की समस्या का तुरंत समाधान किया जाए।
    2. पानी छोड़ने का समय घटाने का निर्णय वापस लिया जाए और पुरानी टाइमिंग बहाल की जाए।
    3. कन्यापाड़ा इलाके में दलालों के ज़रिए नल कनेक्शन के लिए वसूली की जा रही है — उसकी जांच की जाए।
    4. इलाके के बिल्डरों को कैसे और कितना पानी दिया जा रहा है, इसकी गहराई से जांच हो।
    5. आरे कॉलोनी यूनिट 32 का पंप शुरू किया जाए ताकि यूनिट 31 और 32 के नागरिकों को राहत मिल सके।
    6. साईबाबा कॉम्प्लेक्स की साई सदन इमारत में चल रही पानी की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।

    👥 मोर्चे में किसने लिया हिस्सा?

    इस आंदोलन में कई स्थानीय नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए, जिनमें—
    पूर्व नगरसेविका सुगंधा शेट्टी, दीपक परब, निलाक्षी भाबळ, विनायक ताटे, स्वाती शिर्के, सचिन सावंत, सुभाष जाधव, विजय मांजळकर, कुबेर लाड, शांताराम सावंत, विरेंद्र सोनावने और वर्षा पवार समेत बड़ी संख्या में शिवसैनिक, युवासेना और महिला सेना की कार्यकर्ता मौजूद थीं।

    गोकुलधाम, बंगाली कंपाउंड, कन्यापाड़ा, साईबाबा कॉम्प्लेक्स, आरे कॉलोनी और बंजारी पाड़ा जैसे इलाकों के नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

    🏛️ शिवसेना (UBT) का संदेश प्रशासन को

    संदीप गाढवे ने मीडिया से बातचीत में बताया

    “अब BMC को भी समझना चाहिए कि पानी कोई मेहरबानी नहीं, बल्कि नागरिकों का हक है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो शिवसेना (UBT) सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेगी।”


    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. गोरगांव में उद्धव सेना का बाल्टी मोर्चा क्यों निकाला गया?
    👉 पानी की किल्लत और कम दबाव से पानी आने की समस्या के विरोध में यह मोर्चा आयोजित किया गया।

    Q2. इस आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
    👉 प्रभाग 52 के शाखा प्रमुख संदीप गाढवे ने आंदोलन का नेतृत्व किया।

    Q3. नागरिकों की मुख्य मांग क्या है?
    👉 नियमित और पर्याप्त पानी आपूर्ति शुरू करना और दलालों द्वारा नल कनेक्शन में की जा रही वसूली की जांच करना।

    Q4. प्रशासन से कौन मिला?
    👉 एक शिष्टमंडल ने सहायक आयुक्त अजय पाटणे से मुलाकात की और समस्या पर चर्चा की।