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  • Kangana Ranaut News: ‘मेरी उम्र में 2 नेशनल अवॉर्ड थे’, CJP के सौरव दास पर कंगना का पलटवार, Gen Z विवाद फिर गरमाया

    Kangana Ranaut News: ‘मेरी उम्र में 2 नेशनल अवॉर्ड थे’, CJP के सौरव दास पर कंगना का पलटवार, Gen Z विवाद फिर गरमाया

    भाजपा सांसद कंगना रनौत ने CJP प्रवक्ता सौरव दास पर तीखा पलटवार करते हुए उन्हें ‘बेकार’ बताया और कहा कि उनकी उम्र में वह दो राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी थीं। जानिए पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ।

    नई दिल्ली: भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर राजनीतिक विवाद के केंद्र में हैं। Gen Z प्रदर्शनकारियों पर की गई उनकी तीखी टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद अब सीधे Cockroach Janta Party (CJP) और उसके प्रवक्ता सौरव दास तक पहुंच गया है। सौरव दास के बयान पर कंगना ने भी तीखा जवाब देते हुए उन्हें “बेकार” बताया और कहा कि “उसकी उम्र में मैं दो राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी थी।”

    विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

    हाल ही में Gen Z के नेतृत्व वाले छात्र प्रदर्शनों को लेकर कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर कड़ी टिप्पणी की थी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के व्यवहार और भाषा को “puke-inducing” और “crass” बताया था। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल की जा रही भाषा बेहद आपत्तिजनक है। इन टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई।

    CJP ने क्या जवाब दिया?

    कंगना की टिप्पणी के बाद CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने पलटवार करते हुए कहा कि कंगना को उनकी अपनी पार्टी भी गंभीरता से नहीं लेती। उन्होंने दावा किया कि Gen Z और Gen Alpha के युवा भी कंगना के बयानों को महत्व नहीं देते। दास ने कंगना की सांसद के रूप में भूमिका पर भी सवाल उठाए।

    फिर कंगना ने क्या कहा?

    सौरव दास की टिप्पणी के जवाब में कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए तीखा पलटवार किया। उन्होंने दास की उम्र, पेशे और अनुभव पर सवाल उठाते हुए उन्हें “बेकार” बताया। कंगना ने लिखा कि “उसकी उम्र में मैं दो नेशनल अवॉर्ड जीत चुकी थी,” और अपने फिल्मी तथा सार्वजनिक जीवन की उपलब्धियों का हवाला देते हुए आलोचनाओं का जवाब दिया।

    यह विवाद इतना बड़ा क्यों बन गया?

    यह विवाद सिर्फ दो लोगों के बीच जुबानी जंग नहीं है। इसकी पृष्ठभूमि हाल में हुए Gen Z छात्र आंदोलन से जुड़ी है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा प्रणाली, जवाबदेही और युवाओं के मुद्दों पर व्यापक बहस छेड़ी। आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने कई मांगें स्वीकार कीं और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा भी हुआ। ऐसे माहौल में कंगना की टिप्पणियां और CJP की प्रतिक्रिया राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गई हैं।

    राजनीतिक मायने क्या हैं?

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद अब केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। एक तरफ कंगना रनौत सत्तारूढ़ दल की सांसद हैं, वहीं दूसरी ओर CJP हालिया छात्र आंदोलनों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। ऐसे में दोनों पक्षों के बयान आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और अब तक किसी समझौते या नरमी के संकेत नहीं मिले हैं।

    Official Sources / References

    FAQ

    Q1. विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
    Gen Z प्रदर्शनकारियों पर कंगना रनौत की सोशल मीडिया टिप्पणी के बाद।

    Q2. सौरव दास ने क्या कहा था?
    उन्होंने कहा कि कंगना को उनकी अपनी पार्टी और नई पीढ़ी गंभीरता से नहीं लेती।

    Q3. कंगना रनौत ने क्या जवाब दिया?
    उन्होंने सौरव दास को “बेकार” बताया और कहा कि उनकी उम्र में वह दो राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी थीं।

    Q4. क्या यह विवाद छात्र आंदोलन से जुड़ा है?
    यह विवाद Gen Z छात्र आंदोलन पर कंगना की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ, लेकिन बाद में यह कंगना और CJP के बीच राजनीतिक बयानबाजी में बदल गया।

  • मालाड ईस्ट में विजय साळसकर उद्यान आम लोगों के लिए खुला, 4600 स्क्वायर मीटर में आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार

    मालाड ईस्ट में विजय साळसकर उद्यान आम लोगों के लिए खुला, 4600 स्क्वायर मीटर में आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार

    मालाड पूर्व के रहेजा कॉम्प्लेक्स के पास स्थित विजय साळसकर उद्यान का नवीनीकरण पूरा, शिवसेना विधायक सुनील प्रभू के प्रयास से आम जनता के लिए खोला गया। बच्चों के लिए रॉक क्लाइंबिंग, वॉकिंग ट्रैक और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष व्यवस्था।

    मुंबई: मालाड पूर्व के दिंडोशी क्षेत्र में रहेजा कॉम्प्लेक्स के पास स्थित स्वर्गीय विजय साळसकर उद्यान को अब आम नागरिकों के लिए खोल दिया गया है। दिंडोशी से शिवसेना विधायक सुनील प्रभू के लगातार प्रयासों के बाद Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) ने इस उद्यान का नवीनीकरण कर इसे लोकाग्रह के चलते जनता को समर्पित किया।

    📍 दिंडोशी वॉर्ड 36 में था जर्जर हाल

    दिंडोशी विभाग के वॉर्ड क्रमांक 36, मालाड ईस्ट स्थित रहेजा कॉम्प्लेक्स इलाके के नागरिक लंबे समय से इस उद्यान की खराब स्थिति से परेशान थे। मॉर्निंग वॉक के लिए समुचित जगह नहीं थी और बच्चों के खेलने की भी कोई खास व्यवस्था नहीं थी। इससे स्थानीय रहवासियों को रोजाना दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

    🏗️ विधायक सुनील प्रभू का लगातार फॉलोअप

    स्थानीय लोगों की मांग को देखते हुए विधायक सुनील प्रभू ने BMC के समक्ष लगातार पाठपुरावा किया। उन्होंने मुंबई महानगरपालिका के बजट में इस उद्यान के नवीनीकरण के लिए विशेष निधि उपलब्ध कराने की मांग की।
    इसके बाद 29 अप्रैल 2025 को इस प्रोजेक्ट का काम आधिकारिक रूप से शुरू हुआ।

    🌳 4600 वर्गमीटर में तैयार हुआ आधुनिक गार्डन

    करीब 4600 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले इस मैदान को अब आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। उद्यान को बच्चों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।

    🛝 बच्चों और युवाओं के लिए खास सुविधाएं

    • रॉक क्लाइंबिंग गेम
    • आधुनिक व्यायाम उपकरण
    • सुरक्षित और आकर्षक खेल क्षेत्र

    🚶 मॉर्निंग वॉक और वरिष्ठ नागरिकों के लिए व्यवस्था

    • सुगम वॉकिंग ट्रैक (पथ वे)
    • वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैठने की विशेष व्यवस्था
    • व्यूइंग गैलरी
    • हरे-भरे घास का मैदान
    • आकर्षक रंगरोगन से सजी उद्यान की दीवारें

    इन सुविधाओं से अब यह गार्डन स्थानीय परिवारों के लिए एक प्रमुख पिकनिक और फिटनेस स्पॉट बन गया है।

    👥 उद्घाटन के दौरान मौजूद रहे कई गणमान्य

    उद्यान के उद्घाटन अवसर पर पूर्व नगरसेवक प्रमुख सुधीर गुजर, शिवसेना की पूर्व नगरसेविका रीना सुर्वे, उपविधान संघटिका रुचिता आरोस्कर, उपशाखा प्रमुख अल्पेश चव्हाण, उपविभाग समन्वयक कृष्णकांत सुर्वे सहित रहेजा परिसर के अनेक नागरिक उपस्थित थे।

    स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए विधायक सुनील प्रभू का आभार व्यक्त किया।

    🌆 मालाड ईस्ट के लिए क्यों अहम है यह उद्यान?

    तेजी से विकसित हो रहे मालाड ईस्ट और दिंडोशी इलाके में ओपन स्पेस की कमी एक बड़ी समस्या रही है। ऐसे में विजय साळसकर उद्यान का पुनर्विकास स्थानीय निवासियों के लिए राहत की खबर है।
    यह उद्यान अब फिटनेस, बच्चों के मनोरंजन और सामुदायिक मेलजोल का प्रमुख केंद्र बनेगा।


    ❓ FAQ Section

    Q1: विजय साळसकर उद्यान कहाँ स्थित है?

    मालाड पूर्व के दिंडोशी वॉर्ड 36 में रहेजा कॉम्प्लेक्स के पास।

    Q2: उद्यान का नवीनीकरण कब शुरू हुआ?

    29 अप्रैल 2025 को काम शुरू हुआ।

    Q3: उद्यान में कौन-कौन सी सुविधाएं हैं?

    रॉक क्लाइंबिंग, व्यायाम उपकरण, वॉकिंग ट्रैक, वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैठने की व्यवस्था, व्यूइंग गैलरी और हरा-भरा लॉन।

    Q4: इस परियोजना के पीछे किसका प्रयास रहा?

    शिवसेना विधायक सुनील प्रभू के लगातार फॉलोअप से यह काम संभव हुआ।

    Q5: कुल क्षेत्रफल कितना है?

    करीब 4600 वर्गमीटर।

  • Kandivali West में BJP MLA Yogesh Sagar का सरप्राइज चेक, गांजा-हुक्का मटेरियल बिक्री पर 5 केस दर्ज

    Kandivali West में BJP MLA Yogesh Sagar का सरप्राइज चेक, गांजा-हुक्का मटेरियल बिक्री पर 5 केस दर्ज

    कांदिवली वेस्ट के महावीर नगर में BJP विधायक योगेश सागर ने अचानक निरीक्षण किया। गांजा, हुक्का मटेरियल और बैन तंबाकू की खुलेआम बिक्री के आरोप। पुलिस ने 5 मामले दर्ज किए, पहले 99 पान स्टॉल्स पर भी कार्रवाई।

    मुंबई: शहर के पश्चिमी उपनगर कांदिवली वेस्ट में बैन तंबाकू, गांजा और हुक्का मटेरियल की खुलेआम बिक्री की शिकायतों के बीच BJP विधायक Yogesh Sagar ने गुरुवार को अचानक निरीक्षण किया। महावीर नगर इलाके में तीन पान दुकानों की जांच के दौरान कई प्रतिबंधित सामान मिलने का दावा किया गया। मौके पर मौजूद पुलिस ने पांच अपराध दर्ज किए हैं।

    🔎 जांच के दौरान क्या मिला?

    विधायक योगेश सागर ने आरोप लगाया कि:

    • बैन तंबाकू उत्पाद (गुटखा, लूज तंबाकू)
    • हुक्का से जुड़ा मटेरियल
    • संदिग्ध नशीला पाउडर
    • अवैध गांजा सप्लाई

    खुलेआम बेचे जा रहे थे। उनका कहना है कि कुछ दुकानदार पड़ोसी दुकानों में प्रतिबंधित सामान छिपा रहे थे।

    🚔 पुलिस का बयान

    स्थानीय पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जनवरी से फरवरी के बीच, गुरुवार की कार्रवाई को छोड़कर, 99 पान स्टॉल्स के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिनमें से 18 अवैध स्टॉल्स को तोड़ दिया गया।

    गुरुवार की कार्रवाई में 5 केस दर्ज किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि पहले इन दुकानों से मादक पदार्थ नहीं मिले थे, अधिकतर कार्रवाई गुटखा और प्रतिबंधित तंबाकू पर हुई थी।

    🏛️ राजनीतिक दबाव और नाराजगी

    यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में इलाके के ही एक अन्य विधायक Sanjay Upadhyay ने भी:

    • अवैध हुक्का पार्लर
    • खुले में शराबखोरी
    • देर रात तक चलने वाले कैफे
    • ट्रैफिक नियम तोड़ते शेयर ऑटो

    को लेकर शिकायत उठाई थी।

    लगातार आ रही शिकायतों से साफ है कि सत्ताधारी दल के विधायकों में जमीनी स्तर पर पुलिसिंग को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।

    🗣️ MLA Yogesh Sagar का आरोप

    योगेश सागर ने कहा, “लोकल लेवल पर सबको पता है क्या चल रहा है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही। कानून तोड़ने वालों में डर नहीं है। पुलिस को सख्त कदम उठाने चाहिए।”

    उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आसपास की दुकानें भी प्रतिबंधित सामान छिपाने में मदद करती पाई गईं, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी।

    📌 सरकार की नीति बनाम जमीनी हकीकत

    मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis पहले ही अवैध हुक्का, तंबाकू और ड्रग्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं।

    लेकिन लगातार हो रही विधायकों की शिकायतें इस बात की ओर इशारा कर रही हैं कि नीति और जमीनी अमल के बीच अंतर है।


    ❓ FAQ Section

    Q1: यह कार्रवाई कहां हुई?
    महावीर नगर, कांदिवली वेस्ट में तीन पान दुकानों पर।

    Q2: कितने केस दर्ज हुए?
    पुलिस ने पांच मामले दर्ज किए हैं।

    Q3: पहले भी कार्रवाई हुई थी?
    जनवरी-फरवरी में 99 पान स्टॉल्स पर कार्रवाई और 18 को हटाया गया।

    Q4: क्या मादक पदार्थ मिले?
    पुलिस के अनुसार पहले इन दुकानों से मादक पदार्थ नहीं मिले थे, अधिकतर कार्रवाई बैन तंबाकू पर थी।

  • BMC मेयर चुनाव: ऋतु तावड़े और संजय घाडी ने भरा नामांकन

    BMC मेयर चुनाव: ऋतु तावड़े और संजय घाडी ने भरा नामांकन

    BMC Mayor Election 2026: मुंबई महानगरपालिका के मेयर पद के लिए ऋतु तावड़े और डिप्टी मेयर पद के लिए संजय घाडी ने नामांकन दाखिल किया। जानिए पूरी डिटेल।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में होने वाले महापौर और उप महापौर चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 11 फरवरी 2026 को होने वाली इस अहम चुनाव प्रक्रिया के लिए बुधवार को महापौर पद के लिए नगरसेविका ऋतु तावड़े और उप महापौर पद के लिए नगरसेवक संजय घाडी ने अपना नामांकन दाखिल किया। यह नामांकन BMC सचिव मंजिरी देशपांडे के पास 7 फरवरी 2026 को जमा किया गया।

    BMC मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव 2026

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका की विशेष बैठक बुधवार, 11 फरवरी 2026 को आयोजित की जाएगी, जिसमें महापौर और उप महापौर पद का चुनाव होगा। इस चुनाव को मुंबई की राजनीति में काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह महानगरपालिका के प्रशासनिक नियंत्रण से जुड़ा होता है।

    कौन हैं मेयर पद की उम्मीदवार ऋतु तावड़े

    महापौर पद के लिए नामांकन भरने वाली ऋतु तावड़े, वार्ड नंबर 132 की नगरसेविका हैं। वे लंबे समय से स्थानीय राजनीति में सक्रिय रही हैं और संगठनात्मक कामकाज का अच्छा अनुभव रखती हैं। पार्टी के भीतर उन्हें एक मजबूत और भरोसेमंद चेहरा माना जा रहा है।

    डिप्टी मेयर पद के लिए संजय घाडी का नामांकन

    उप महापौर पद के लिए संजय घाडी, वार्ड नंबर 5 से नगरसेवक हैं। वे जमीनी स्तर पर सक्रिय नेता माने जाते हैं और महानगरपालिका के कामकाज में उनकी पकड़ मजबूत बताई जाती है।

    नामांकन के दौरान मौजूद रहे बड़े नेता

    नामांकन दाखिल करने के दौरान कई दिग्गज नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
    इस मौके पर—

    • कौशल, रोजगार, उद्योजकता व नवाचार मंत्री एवं मुंबई उपनगर सहपालक मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा
    • विधायक अमित साटम
    • बीजेपी गटनेते गणेश खणकर
    • पूर्व सांसद राहुल शेवाळे
    • पूर्व सांसद मनोज कोटक
    • नगरसेवक प्रभाकर शिंदे

    सहित बड़ी संख्या में नगरसेवक और नगरसेविकाएं उपस्थित रहीं।

    राजनीतिक संकेत और आगे की रणनीति

    इस नामांकन के बाद यह साफ माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। राजनीतिक गलियारों में इसे मुंबई महानगरपालिका की सत्ता दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. BMC मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव कब होगा?
    👉 11 फरवरी 2026 को BMC की विशेष बैठक में चुनाव होगा।

    Q2. महापौर पद के लिए किसने नामांकन भरा है?
    👉 वार्ड नंबर 132 की नगरसेविका ऋतु तावड़े ने।

    Q3. उप महापौर पद के उम्मीदवार कौन हैं?
    👉 वार्ड नंबर 5 के नगरसेवक संजय घाडी।

    Q4. नामांकन कब और कहां दाखिल किया गया?
    👉 7 फरवरी 2026 को BMC सचिव मंजिरी देशपांडे के पास।

  • Mumbai को नया मेयर क्यों नहीं मिला? लॉटरी तय करेगी आरक्षण, एक हफ्ते तक इंतज़ार

    Mumbai को नया मेयर क्यों नहीं मिला? लॉटरी तय करेगी आरक्षण, एक हफ्ते तक इंतज़ार

    Mumbai: बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजे आ चुके हैं, लेकिन शहर को मेयर मिलने में वक्त लगेगा। जानिए मेयर पद का आरक्षण लॉटरी से कैसे तय होता है, कानून क्या कहता है और इसमें एक हफ्ता क्यों लग सकता है।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव खत्म हो चुके हैं और नई जनरल बॉडी भी लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन इसके बावजूद मुंबई को तुरंत नया मेयर नहीं मिलेगा। इसकी वजह सिर्फ बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान नहीं है, बल्कि मेयर के चुनाव से जुड़ी एक कानूनी प्रक्रिया भी है। कानून के मुताबिक, मेयर पद का आरक्षण लॉटरी सिस्टम से तय होता है और जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक मेयर का चुनाव संभव नहीं है। इसी कारण मुंबई को नया मेयर मिलने में कम से कम एक हफ्ते का वक्त लग सकता है।

    🏛️ Mumbai का मेयर तुरंत क्यों नहीं चुना जा सकता?

    बीएमसी चुनाव के नतीजे आने के बाद आमतौर पर लोगों को लगता है कि मेयर का नाम भी तुरंत सामने आ जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि मेयर का चुनाव पार्षदों द्वारा किया जाता है और उससे पहले कुछ कानूनी औपचारिकताएं पूरी करना जरूरी होता है।
    सबसे अहम प्रक्रिया है मेयर पद का आरक्षण तय होना, जो सीधे चुनाव से नहीं बल्कि लॉटरी यानी ड्रॉ ऑफ लॉट्स से तय किया जाता है।

    🎟️ क्या है मेयर पद का आरक्षण सिस्टम?

    देशभर की शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies) में मेयर पद के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू है।
    इस व्यवस्था के तहत मेयर का पद अलग-अलग वर्गों के लिए रोटेशन के आधार पर आरक्षित किया जाता है, जैसे:

    • अनुसूचित जाति (SC)
    • अनुसूचित जनजाति (ST)
    • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
    • महिलाएं
    • सामान्य (ओपन) वर्ग

    यह आरक्षण पहले से तय नहीं होता, बल्कि हर कार्यकाल में लॉटरी के ज़रिए तय किया जाता है।

    📜 आरक्षण रोटेशन क्यों जरूरी है?

    मेयर पद पर आरक्षण की व्यवस्था संविधान के 74वें संशोधन से जुड़ी है। इस संशोधन के तहत शहरी निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया गया और यह तय किया गया कि SC, ST और महिलाओं को नेतृत्व के अवसर मिलें।
    महाराष्ट्र में यह व्यवस्था नगरपालिका अधिनियम (Municipal Corporations Act) के तहत लागू होती है, जिसमें OBC आरक्षण भी शामिल है।
    रोटेशन सिस्टम का मकसद यह है कि हर वर्ग को समय-समय पर मेयर बनने का मौका मिले और कोई एक वर्ग लगातार फायदे में न रहे।

    🎲 मेयर पद का फैसला लॉटरी से ही क्यों?

    लॉटरी सिस्टम इसलिए अपनाया गया है ताकि प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रहे।
    अगर सरकार या राजनीतिक दल तय करें कि किस वर्ग के लिए मेयर पद आरक्षित होगा, तो उस पर पक्षपात और राजनीतिक दखल के आरोप लग सकते हैं।
    ड्रॉ ऑफ लॉट्स से यह सुनिश्चित किया जाता है कि आरक्षण पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से तय हो।

    🗂️ लॉटरी की प्रक्रिया कैसे होती है?

    1. शहरी विकास विभाग (Urban Development Department) लॉटरी कराने का नोटिफिकेशन जारी करता है
    2. पिछले कार्यकालों के आधार पर आरक्षण रोटेशन की सूची तैयार की जाती है
    3. सार्वजनिक रूप से लॉटरी (ड्रॉ) निकाली जाती है
    4. जिस वर्ग का नाम निकलता है, वही मेयर पद के लिए आरक्षित माना जाता है
    5. इसके बाद आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी होता है

    जब तक यह पूरी प्रक्रिया खत्म नहीं होती, कोई भी पार्टी अपने मेयर उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं कर सकती।

    🗳️ मेयर का चुनाव कैसे होता है?

    आरक्षण तय होने के बाद बीएमसी की विशेष बैठक बुलाई जाती है।
    मेयर का चुनाव पार्षदों के बीच से ही किया जाता है।
    मुंबई की 227 सदस्यीय जनरल बॉडी में मेयर बनने के लिए कम से कम 114 पार्षदों का समर्थन जरूरी होता है।
    पिछले दो कार्यकालों में लॉटरी के ज़रिए मेयर पद ओपन जनरल कैटेगरी में गया था।

    👑 मुंबई मेयर के पास कितनी ताकत होती है?

    कानून के मुताबिक, मुंबई का मेयर बीएमसी का औपचारिक (Ceremonial) प्रमुख होता है।
    मेयर का कार्यकाल ढाई साल का होता है और उनकी मुख्य जिम्मेदारियां हैं:

    • जनरल बॉडी की बैठकों की अध्यक्षता
    • सदन में व्यवस्था बनाए रखना
    • बराबरी की स्थिति में निर्णायक वोट देना
    • शहर के “First Citizen” के तौर पर आधिकारिक कार्यक्रमों में प्रतिनिधित्व करना

    हालांकि, बीएमसी का प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) के पास होता है, जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त IAS अधिकारी होते हैं।


    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. क्या चुनाव नतीजों के तुरंत बाद मेयर चुना जा सकता है?
    👉 नहीं, पहले मेयर पद का आरक्षण तय होना जरूरी है।

    Q2. मेयर पद का आरक्षण कौन तय करता है?
    👉 शहरी विकास विभाग लॉटरी के ज़रिए आरक्षण तय करता है।

    Q3. मुंबई को नया मेयर मिलने में कितना वक्त लग सकता है?
    👉 कानूनी प्रक्रिया पूरी होने में लगभग एक हफ्ता लग सकता है।

  • BMC Election 2025: नामांकन के बाद रोज़ खर्च का हिसाब रखना अनिवार्य- सहायक आयुक्त गजानन बिल्लाळे

    BMC Election 2025: नामांकन के बाद रोज़ खर्च का हिसाब रखना अनिवार्य- सहायक आयुक्त गजानन बिल्लाळे

    BMC Election 2025-26 में उम्मीदवारों को नामांकन के दिन से रोज़ाना चुनावी खर्च का हिसाब रखना होगा। खर्च नियंत्रण के लिए वार्ड स्तर पर टीम गठित, गजानन बेल्लाळे ने दी सख्त हिदायत।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की नगर सेवकिय चुनाव 2025-26 को लेकर चुनावी खर्च पर सख्त निगरानी शुरू हो गई है। नामांकन पत्र दाखिल करने के पहले दिन से ही उम्मीदवारों को रोज़ाना अपने चुनावी खर्च का पूरा हिसाब रखना अनिवार्य कर दिया गया है। सहायक आयुक्त (कर निर्धारण व संकलन) गजानन बेल्लाळे ने साफ किया कि चुनाव आयोग की गाइडलाइंस के मुताबिक खर्च की निगरानी के लिए हर वार्ड में अलग-अलग खर्च नियंत्रण टीमें तैनात की गई हैं।

    नामांकन के साथ ही खर्च का हिसाब जरूरी

    BMC चुनाव में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उम्मीदवारों को नामांकन के दिन से ही रोज़ाना खर्च का लेखा-जोखा रखना होगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर प्रचार सामग्री, सभाएं, रैलियां, प्रचार वाहन और अन्य गतिविधियों की प्रचलित दरसूची पहले ही तय कर दी गई है।

    गजानन बेल्लाळे ने कहा कि उम्मीदवारों के हर खर्च की जांच की जाएगी ताकि किसी भी तरह की अनियमितता या गैरकानूनी लेन-देन पर तुरंत कार्रवाई हो सके।

    BMC-Election-2025-26
    बैठक की तस्वीर

    BMC वार्ड स्तर पर खर्च नियंत्रण पथक गठित

    चुनावी खर्च पर सख्ती से नजर रखने के लिए BMC ने हर प्रभाग (Ward) में Election Expenditure Monitoring Team बनाई है।

    इन टीमों में:

    • लेखाधिकारी
    • लेखापाल
    • खर्च निरीक्षक
    • उड़नदस्ता (Flying Squad)
    • वीडियो निगरानी टीम

    शामिल हैं। इन सभी की बैठक BMC मुख्यालय में आयोजित की गई, जिसमें खर्च निगरानी की पूरी कार्यप्रणाली पर चर्चा हुई।

    बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद

    इस अहम बैठक में:

    • प्रमुख लेखापाल (वित्त) वैशाली देसाई
    • दादासाहेब फाळके चित्रनगरी, गोरेगांव की वित्तीय सलाहकार व प्रमुख लेखाधिकारी चारुलेखा खोत
    • प्रशासनिक विभाग के वरिष्ठ लेखाधिकारी

    मौजूद रहे। बैठक में सभी अधिकारियों को समन्वय के साथ निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

    चुनाव आयोग की गाइडलाइंस क्या कहती हैं?

    राज्य चुनाव आयोग के 15 फरवरी 2024 के आदेश के अनुसार:

    • उम्मीदवार को अलग बैंक अकाउंट से ही चुनावी खर्च करना होगा
    • खर्च और आय का पूरा विवरण तय फॉर्मेट (नमूना) में देना अनिवार्य
    • प्रचार के लिए इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्रियों की स्थानीय दरों के अनुसार सूची तैयार

    यह नियम सभी स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनावों पर लागू है।

    कौन-कौन से फॉर्म भरना जरूरी?

    उम्मीदवारों को चुनाव के बाद 30 दिनों के भीतर ये दस्तावेज जमा करने होंगे:

    • नमूना क्रमांक 1: प्राप्त निधि का विवरण
      (स्वनिधि, पार्टी फंड, दान, कर्ज)
    • नमूना क्रमांक 2: चुनाव में किया गया खर्च
    • नमूना क्रमांक 3: शपथपत्र (Affidavit)
    • नमूना क्रमांक 4: खर्च जमा करने की रसीद

    BMC अधिकारियों और उम्मीदवार – दोनों को ये दस्तावेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    संदिग्ध लेन-देन पर तुरंत कार्रवाई

    चुनाव प्रचार के दौरान अगर किसी तरह का:

    • संदिग्ध खर्च
    • बेहिसाब पैसा
    • गैरकानूनी प्रचार

    पाया जाता है, तो खर्च नियंत्रण टीम तुरंत कार्रवाई करेगी। उड़नदस्ते और वीडियो निगरानी टीम लगातार नजर रखेगी।


    FAQ Section

    ❓ नामांकन के बाद खर्च का हिसाब कब से रखना होगा?

    ➡️ नामांकन पत्र दाखिल करने के उसी दिन से रोज़ाना खर्च का हिसाब रखना अनिवार्य है।

    ❓ क्या अलग बैंक अकाउंट जरूरी है?

    ➡️ हां, चुनावी खर्च के लिए अलग बैंक खाता अनिवार्य किया गया है।

    ❓ खर्च का विवरण कब जमा करना होगा?

    ➡️ चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर।

    ❓ खर्च की निगरानी कौन करेगा?

    ➡️ वार्ड स्तर पर गठित खर्च नियंत्रण पथक, उड़नदस्ते और वीडियो निगरानी टीम।

  • BMC चुनाव 2025: टिकट बंटवारे में परिवारवाद हावी, पुराने कार्यकर्ता फिर पीछे

    BMC चुनाव 2025: टिकट बंटवारे में परिवारवाद हावी, पुराने कार्यकर्ता फिर पीछे

    BMC चुनाव 2025-26 के नामांकन में बीजेपी, शिवसेना, कांग्रेस और अजित पवार गुट की एनसीपी में परिवारवाद हावी नजर आ रहा है। नेताओं के बेटे-बेटी, पत्नी और रिश्तेदारों को टिकट, पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2025-26 के लिए नामांकन की आखाे-सीमा खत्म होने से ठीक पहले राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवारों की सूचियां जारी करना शुरू कर दिया है। लेकिन इस बार टिकट वितरण में एक बार फिर परिवारवाद छाया हुआ है। बीजेपी, शिवसेना (UBT), कांग्रेस और अजित पवार गुट की एनसीपी ने सांसदों, विधायकों और पूर्व नगरसेवकों के बेटे-बेटी, पत्नी, भाई-बहन और रिश्तेदारों को मैदान में उतार दिया है, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है।

    नामांकन में ‘परिवार पहले’ की राजनीति

    बीएमसी के 227 वार्डों के लिए जैसे-जैसे नाम सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे यह साफ होता जा रहा है कि इस चुनाव में भी राजनीतिक विरासत को प्राथमिकता दी गई है।
    कई ऐसे नेता हैं जिन्होंने सालों तक पार्टी के लिए काम किया, लेकिन टिकट ऐन मौके पर नेताओं के परिजनों को दे दिया गया।

    BMC-Elections-2025-Nepotism-dominates-ticket-distribution-old-party-workers-take-a-back-seat-aslam-shaikh

    बीजेपी की सूची में रिश्तेदारों की भरमार

    बीजेपी ने भी इस बार कई चर्चित नामों को दोहराया है—

    • आकाश पुरोहित, पूर्व विधायक राज पुरोहित के बेटे
    • नील सोमैया, पूर्व सांसद किरीट सोमैया के बेटे
    • संगीता शर्मा, पूर्व नगरसेवक द्यानमूर्ति शर्मा की पत्नी
    • मकरंद नरवेकर, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवेकर के भाई (वार्ड 226, कोलाबा)
    • हर्षिता नरवेकर, राहुल नरवेकर की बहन (वार्ड 227)

    दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी सांसद धनंजय महाडिक ने हाल ही में बयान दिया था कि पार्टी सांसदों और विधायकों के बच्चों या जीवनसाथियों को टिकट नहीं देगी, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है।

    शिवसेना (UBT) में भी परिवारवाद जारी

    उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) भी इस ट्रेंड से अछूती नहीं रही—

    • अंकित प्रभु, विधायक सुनील प्रभु के बेटे (गोरेगांव, वार्ड 54)
    • सुप्रदा फातरपेकर, पूर्व विधायक प्रकाश फातरपेकर की बेटी (चेंबूर, वार्ड 150)
    • सोनम जमसुतकर, विधायक मनोज जमसुतकर की पत्नी (वार्ड 210)
    • विठ्ठल लोकरें और उनकी पत्नी सुनंदा लोकरें (मानखुर्द-शिवाजीनगर)
    • जिशान मुल्तानी, पूर्व नगरसेवक चेंजेज मुल्तानी के बेटे
    • सबा हारून खान, विधायक हारून खान की बेटी
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    अजित पवार गुट की NCP और कांग्रेस भी पीछे नहीं

    • एनसीपी (अजित पवार गुट) ने विधायक नवाब मलिक के परिवार से उनके भाई कैप्टन मलिक, बहन डॉ. सईदा खान और बुशरा परवीन मलिक को टिकट दिया है।
    • कांग्रेस ने मालाड पश्चिम के वार्ड 34 से विधायक असलम शेख के बेटे हैदर अली शेख को मैदान में उतारा है।

    BMC चुनावी टिकट न मिलने से पार्टी छोड़ने की होड़

    टिकट बंटवारे से नाराज कई पुराने नगरसेवक अब पार्टी बदलने लगे हैं—

    • एमएनएस नेता स्नेहल जाधव ने दादर से टिकट न मिलने पर इस्तीफा दे दिया, उनके शिंदे गुट में जाने की चर्चा है।
    • शरद पवार गुट की मुंबई अध्यक्ष राखी जाधव बीजेपी में शामिल हो चुकी हैं और घाटकोपर से टिकट मिलने की संभावना है।

    बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) का सीट शेयरिंग फॉर्मूला

    बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना इस बार साथ मिलकर बीएमसी चुनाव लड़ेंगी—

    • बीजेपी: लगभग 128 सीटें
    • शिवसेना (शिंदे): लगभग 79 सीटें
    • बाकी सीटों पर स्थानीय समीकरणों के आधार पर फैसला होगा

    हालांकि दोनों दल अपनी-अपनी सूची अलग-अलग जारी कर सकते हैं।

    ये पूर्व नगरसेवक भी मैदान में

    • किशोरी पेडणेकर, पूर्व मेयर (शिवसेना UBT) – वार्ड 199
    • तेजस्वी गोसालकर, अब बीजेपी से – वार्ड 2 (दहिसर)
    • विनोद मिश्रा, पूर्व बीजेपी नगरसेवक – मालाड
    • रवि राजा, पूर्व कांग्रेस नेता, अब बीजेपी से – वार्ड 185

    बीएमसी चुनाव में परिवारवाद क्यों बना मुद्दा?

    मुंबई जैसे महानगर में बीएमसी सिर्फ नगर निगम नहीं, बल्कि देश की सबसे अमीर नगरपालिका है। ऐसे में टिकट वितरण में पारदर्शिता और जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका देना हमेशा चर्चा का विषय रहा है। इस बार भी वही सवाल उठ रहा है—क्या जनता नाम देखकर वोट देगी या काम देखकर?


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. बीएमसी चुनाव 2025 में परिवारवाद क्यों चर्चा में है?
    क्योंकि लगभग सभी प्रमुख दलों ने नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट दिया है।

    Q2. सबसे ज्यादा परिवारवाद किस पार्टी में दिखा?
    बीजेपी, शिवसेना (UBT), एनसीपी (अजित पवार) और कांग्रेस—चारों में यह ट्रेंड देखने को मिला।

    Q3. टिकट न मिलने से किसे नुकसान हो सकता है?
    पुराने जमीनी कार्यकर्ताओं को, जो अब पार्टी छोड़ने या बगावत की राह पर हैं।

    Q4. क्या इससे चुनावी नतीजों पर असर पड़ेगा?
    संभावना है, क्योंकि मुंबई के कई इलाकों में स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवार की पकड़ अहम होती है।

  • BMC चुनाव से पहले कांग्रेस-VBA का बड़ा दांव, सीट शेयरिंग फाइनल

    BMC चुनाव से पहले कांग्रेस-VBA का बड़ा दांव, सीट शेयरिंग फाइनल

    मुंबई BMC चुनाव से पहले कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के बीच गठबंधन फाइनल। 227 वार्डों में सीट शेयरिंग, MVA की अंदरूनी राजनीति, MNS फैक्टर और महायुति की चुनौती—पूरी डिटेल मुंबई की आम बोलचाल की हिंदी में।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस और प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) ने आख़िरकार गठबंधन का ऐलान कर दिया है। लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद दोनों दलों ने सीट शेयरिंग का फ़ॉर्मूला तय किया, जिसके तहत कांग्रेस 165 और VBA 62 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। 15 जनवरी को वोटिंग और 16 जनवरी को नतीजे आएंगे। यह गठबंधन कांग्रेस और VBA—दोनों के लिए मुंबई में सियासी वजूद बचाने और मज़बूत करने की एक अहम कोशिश माना जा रहा है।

    BMC चुनाव से पहले आख़िरी वक़्त का गठबंधन

    मुंबई की राजनीति में ऐन चुनाव से पहले गठबंधन होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार कांग्रेस-VBA की जुगलबंदी इसलिए अहम है क्योंकि दोनों ही दल दबाव में दिख रहे थे। कांग्रेस को मुंबई में लगातार कमजोर होती पकड़ की चिंता है, वहीं VBA अब तक महानगर में बड़ा राजनीतिक स्पेस नहीं बना पाई है।
    ऐसे में यह गठबंधन दोनों के लिए “करो या मरो” जैसी स्थिति लेकर आया है।

    सीट शेयरिंग का गणित क्या कहता है?

    BMC की कुल 227 सीटों में से:

    • कांग्रेस: 165 सीटें
    • VBA: 62 सीटें

    VBA के लिए यह सीटें सिर्फ संख्या नहीं हैं, बल्कि मुंबई जैसे बड़े शहर में अपनी पहचान बनाने का मौका भी हैं। दूसरी तरफ़ कांग्रेस ने ज़्यादा सीटें लेकर यह साफ़ कर दिया है कि वह अभी भी खुद को इस गठबंधन की बड़ी ताक़त मानती है।

    MVA के अंदर बढ़ी खींचतान

    कांग्रेस पहले से ही महा विकास आघाड़ी (MVA) का हिस्सा है, जिसमें:

    • शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट)
    • शरद पवार की NCP

    लेकिन मामला तब उलझ गया जब शिवसेना-UBT ने राज ठाकरे की MNS के साथ हाथ मिला लिया। कांग्रेस ने इस पर खुलकर आपत्ति जताई और कहा कि MNS के साथ जाना पार्टी की विचारधारा के खिलाफ़ है।
    इसी तनाव के बीच कांग्रेस का VBA से हाथ मिलाना यह दिखाता है कि मुंबई में पार्टी अब “सैद्धांतिक बहस” से ज़्यादा “चुनावी मजबूरी” पर चल रही है।

    वोट बैंक की राजनीति और असली मक़सद

    कांग्रेस-VBA गठबंधन का सीधा फोकस है:

    • दलित वोट
    • OBC वोट
    • अल्पसंख्यक वोट

    ये वो वर्ग हैं, जिन्हें अलग-अलग लड़कर दोनों पार्टियां पूरी तरह साध नहीं पा रही थीं। साथ आकर उम्मीद है कि वोटों का बंटवारा रुके और मुकाबले में मज़बूती आए।

    महायुति की मज़बूती बनी सबसे बड़ी चुनौती

    मुंबई के बाहर, ग्रामीण महाराष्ट्र में महायुति (BJP + शिंदे शिवसेना + अजित पवार NCP) ने हाल ही में जबरदस्त प्रदर्शन किया है:

    • BJP: 117 नगराध्यक्ष
    • शिंदे गुट: 53
    • अजित पवार गुट: 37
    • कांग्रेस: सिर्फ़ 28

    ये आंकड़े कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी हैं। अगर मुंबई जैसे किले में भी पार्टी कमजोर पड़ी, तो आगे की राजनीति और मुश्किल हो सकती है।

    एशिया की सबसे अमीर नगरपालिका की जंग

    BMC सिर्फ़ एक चुनाव नहीं है। यह:

    • बजट
    • कॉन्ट्रैक्ट
    • शहरी विकास
    • राजनीतिक कंट्रोल

    सबका केंद्र है। इसी वजह से हर पार्टी यहां पूरी ताक़त झोंक रही है। कांग्रेस-VBA का गठबंधन इसी लड़ाई में खुद को ज़िंदा रखने की कोशिश है।

    15 जनवरी की वोटिंग, 16 को फैसला

    अब सबकी नज़रें:

    • 15 जनवरी: मतदान
    • 16 जनवरी: नतीजे

    इन 24 घंटों में तय होगा कि यह गठबंधन भविष्य की राजनीति का मॉडल बनेगा या फिर सिर्फ़ एक चुनावी प्रयोग बनकर रह जाएगा।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. कांग्रेस-VBA गठबंधन क्यों हुआ?
    मुंबई में कमजोर होती पकड़ और वोटों के बंटवारे को रोकने के लिए दोनों दल साथ आए हैं।

    Q2. सीट शेयरिंग का फ़ॉर्मूला क्या है?
    कांग्रेस 165 और VBA 62 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

    Q3. क्या यह गठबंधन MVA को प्रभावित करेगा?
    हां, खासकर MNS के साथ शिवसेना-UBT की नज़दीकी को लेकर कांग्रेस में नाराज़गी है।

    Q4. मतदान और नतीजे कब हैं?
    15 जनवरी को वोटिंग और 16 जनवरी को नतीजे आएंगे।

  • BMC चुनाव 2025-26: नामांकन के साथ शौचालय उपयोग प्रमाणपत्र जरूरी

    BMC चुनाव 2025-26: नामांकन के साथ शौचालय उपयोग प्रमाणपत्र जरूरी

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव 2025-26 में उम्मीदवारों के लिए नामांकन पत्र के साथ शौचालय उपयोग प्रमाणपत्र या स्व-प्रमाणपत्र देना अनिवार्य, नहीं देने पर नामांकन हो सकता है रद्द।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की सार्वत्रिक चुनाव 2025-26 की प्रक्रिया को लेकर राज्य चुनाव आयोग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब हर उम्मीदवार को नामांकन पत्र के साथ शौचालय उपयोग प्रमाणपत्र या स्व-प्रमाणपत्र जमा करना अनिवार्य होगा। यदि जांच के दौरान यह प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया, तो रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को नामांकन पत्र अवैध घोषित करने का अधिकार होगा।

    BMC-Elections-2025-26-Toilet-usage-certificate-mandatory-with-nomination

    राज्य चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देश

    माननीय राज्य चुनाव आयोग, महाराष्ट्र ने चुनाव कार्यक्रम घोषित करते समय साफ किया है कि नामांकन के साथ उम्मीदवार द्वारा दिए जाने वाले सभी शपथपत्रों और घोषणाओं में शौचालय उपयोग प्रमाणपत्र भी शामिल होगा। यह नियम सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू रहेगा।

    स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ा है नियम

    यह शर्त स्वच्छ भारत अभियान के तहत लाई गई थी। खुले में शौच को खत्म करने और स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महाराष्ट्र अधिनियम क्रमांक 19 (2016) में संशोधन किया गया था।
    इसके अनुसार,

    • जो व्यक्ति नियमित रूप से शौचालय का उपयोग नहीं करता
    • या उसका प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं करता

    वह चुनाव लड़ने और निर्वाचित होने के लिए अपात्र माना जाएगा। यह नियम 2017 के महानगरपालिका चुनाव से पहले ही लागू कर दिया गया था।

    किसे और कैसा प्रमाणपत्र देना होगा

    BMC चुनाव 2025-26 में उम्मीदवारों को निम्न में से कोई एक जानकारी देना जरूरी होगा:

    • अगर खुद के घर में शौचालय है, तो उसका प्रमाण
    • अगर किराए के घर में शौचालय है, तब भी प्रमाणपत्र
    • अगर घर में शौचालय नहीं है, तो सामुदायिक शौचालय के उपयोग का उल्लेख

    यह प्रमाणपत्र सहायक आयुक्त या प्रभाग अधिकारी द्वारा नियमों के अनुसार जारी किया जाएगा या स्व-प्रमाणपत्र स्वीकार किया जाएगा।

    तस्वीर की जरूरत नहीं, प्रक्रिया सरल

    महानगरपालिका प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि

    • शौचालय या व्यक्ति की फोटो खींचने की कोई जरूरत नहीं है
    • केवल नियमों के अनुसार प्रमाणपत्र देना पर्याप्त होगा

    इस संबंध में 22 दिसंबर 2025 को BMC मुख्यालय में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में भी विस्तृत जानकारी दी गई थी।

    नामांकन जांच में होगी सख्ती

    चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि नामांकन पत्र की जांच के दौरान यदि शौचालय उपयोग प्रमाणपत्र या स्व-प्रमाणपत्र नहीं पाया गया, तो नामांकन तुरंत खारिज किया जा सकता है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. शौचालय उपयोग प्रमाणपत्र किसके लिए जरूरी है?
    ➡️ BMC चुनाव 2025-26 लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए।

    Q2. प्रमाणपत्र नहीं देने पर क्या होगा?
    ➡️ नामांकन पत्र अवैध घोषित किया जा सकता है।

    Q3. किराए के घर में रहने वालों को क्या करना होगा?
    ➡️ शौचालय उपयोग का प्रमाणपत्र या स्व-प्रमाणपत्र देना होगा।

    Q4. क्या शौचालय की फोटो देनी होगी?
    ➡️ नहीं, फोटो की कोई आवश्यकता नहीं है।

    Q5. यह नियम कब से लागू है?
    ➡️ 2016 के संशोधित कानून के तहत, 2017 से लागू।

  • BMC Election: सीट बंटवारे पर ठाकरे बंधुओं की बातचीत तेज, UBT को 125 और MNS को 90 सीटें संभव

    BMC Election: सीट बंटवारे पर ठाकरे बंधुओं की बातचीत तेज, UBT को 125 और MNS को 90 सीटें संभव

    BMC Election 2026 से पहले ठाकरे बंधुओं में सीट शेयरिंग को लेकर अंतिम दौर की बातचीत। शिवसेना (UBT) 120–125 और मनसे 80–90 सीटों पर लड़ सकती है।

    मुंबई: आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। प्रस्तावित फॉर्मूले के तहत शिवसेना (UBT) करीब 120 से 125 सीटों पर और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) लगभग 80 से 90 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है।

    ठाकरे बंधुओं की संभावित युति पर सबकी नजर

    करीब एक दशक बाद होने जा रहे बीएमसी चुनाव को लेकर ठाकरे परिवार की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग का मकसद साफ है—मराठी वोटों का बंटवारा रोकना और मुंबई महानगरपालिका में मज़बूत दावेदारी पेश करना।

    सूत्र बताते हैं कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच कई दौर की अनौपचारिक बैठकें हो चुकी हैं और जल्द ही इस पर औपचारिक ऐलान हो सकता है।

    BMC Election 2017 के नतीजों से सीख, लेकिन सीटों पर मतभेद

    2017 के BMC Election में शिवसेना (तत्कालीन अविभाजित) ने 84 सीटें जीती थीं। उद्धव ठाकरे चाहते हैं कि ये सभी 84 सीटें शिवसेना (UBT) के पास ही रहें।
    हालांकि, मनसे इस मांग से सहमत नहीं है।

    मनसे का तर्क है कि वर्ली, दादर, कालाचौकी, मुलुंड और भांडुप जैसे मराठी बहुल इलाकों में उसका मजबूत जनाधार है। इसी आधार पर मनसे कुछ ऐसी सीटों की मांग कर रही है, जिन पर पहले शिवसेना का दबदबा रहा है।

    NCP (शरद पवार) और वाम दलों की भी हो सकती है एंट्री

    वोटों के बंटवारे से बचने के लिए ठाकरे बंधु इस संभावित गठबंधन में एनसीपी (शरद पवार गुट) और वाम दलों को शामिल करने पर भी विचार कर रहे हैं।

    सूत्रों के अनुसार, यदि शरद पवार गुट गठबंधन में शामिल होता है तो उसे 15 से 20 सीटें दी जा सकती हैं। इससे गठबंधन को शहरी और अल्पसंख्यक वोटों में मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    महा युति में भी सीट बंटवारे को लेकर खींचतान

    दूसरी ओर, सत्तारूढ़ महा युति (भाजपा–शिंदे गुट शिवसेना) में भी सीट शेयरिंग को लेकर गहमागहमी है।
    एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 90 से 100 सीटों की मांग की है, यह दावा करते हुए कि उसका संगठन और जनाधार कई वार्डों में मजबूत है।

    वहीं, भाजपा मुंबई में 135 से 140 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।

    2017 में किसका पलड़ा भारी था?

    2017 के बीएमसी चुनाव में कुल 227 सीटों में से:

    • शिवसेना: 84 सीटें
    • भाजपा: 82 सीटें

    उस वक्त दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़े थे। इस बार तस्वीर बदली हुई है और गठबंधनों का गणित ज्यादा अहम हो गया है।


    FAQ | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1: बीएमसी चुनाव कब होने हैं?
    👉 जनवरी 2026 में।

    Q2: शिवसेना (UBT) कितनी सीटों पर लड़ सकती है?
    👉 लगभग 120 से 125 सीटों पर।

    Q3: मनसे को कितनी सीटें मिलने की संभावना है?
    👉 करीब 80 से 90 सीटें।

    Q4: क्या एनसीपी (शरद पवार) भी गठबंधन में शामिल होगी?
    👉 बातचीत चल रही है, 15–20 सीटें दिए जाने की संभावना है।