BMC चुनाव 2025-26 के नामांकन में बीजेपी, शिवसेना, कांग्रेस और अजित पवार गुट की एनसीपी में परिवारवाद हावी नजर आ रहा है। नेताओं के बेटे-बेटी, पत्नी और रिश्तेदारों को टिकट, पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी।
मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2025-26 के लिए नामांकन की आखाे-सीमा खत्म होने से ठीक पहले राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवारों की सूचियां जारी करना शुरू कर दिया है। लेकिन इस बार टिकट वितरण में एक बार फिर परिवारवाद छाया हुआ है। बीजेपी, शिवसेना (UBT), कांग्रेस और अजित पवार गुट की एनसीपी ने सांसदों, विधायकों और पूर्व नगरसेवकों के बेटे-बेटी, पत्नी, भाई-बहन और रिश्तेदारों को मैदान में उतार दिया है, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है।
नामांकन में ‘परिवार पहले’ की राजनीति
बीएमसी के 227 वार्डों के लिए जैसे-जैसे नाम सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे यह साफ होता जा रहा है कि इस चुनाव में भी राजनीतिक विरासत को प्राथमिकता दी गई है। कई ऐसे नेता हैं जिन्होंने सालों तक पार्टी के लिए काम किया, लेकिन टिकट ऐन मौके पर नेताओं के परिजनों को दे दिया गया।
बीजेपी की सूची में रिश्तेदारों की भरमार
बीजेपी ने भी इस बार कई चर्चित नामों को दोहराया है—
आकाश पुरोहित, पूर्व विधायक राज पुरोहित के बेटे
नील सोमैया, पूर्व सांसद किरीट सोमैया के बेटे
संगीता शर्मा, पूर्व नगरसेवक द्यानमूर्ति शर्मा की पत्नी
मकरंद नरवेकर, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवेकर के भाई (वार्ड 226, कोलाबा)
हर्षिता नरवेकर, राहुल नरवेकर की बहन (वार्ड 227)
दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी सांसद धनंजय महाडिक ने हाल ही में बयान दिया था कि पार्टी सांसदों और विधायकों के बच्चों या जीवनसाथियों को टिकट नहीं देगी, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) भी इस ट्रेंड से अछूती नहीं रही—
अंकित प्रभु, विधायक सुनील प्रभु के बेटे (गोरेगांव, वार्ड 54)
सुप्रदा फातरपेकर, पूर्व विधायक प्रकाश फातरपेकर की बेटी (चेंबूर, वार्ड 150)
सोनम जमसुतकर, विधायक मनोज जमसुतकर की पत्नी (वार्ड 210)
विठ्ठल लोकरें और उनकी पत्नी सुनंदा लोकरें (मानखुर्द-शिवाजीनगर)
जिशान मुल्तानी, पूर्व नगरसेवक चेंजेज मुल्तानी के बेटे
सबा हारून खान, विधायक हारून खान की बेटी
अजित पवार गुट की NCP और कांग्रेस भी पीछे नहीं
एनसीपी (अजित पवार गुट) ने विधायक नवाब मलिक के परिवार से उनके भाई कैप्टन मलिक, बहन डॉ. सईदा खान और बुशरा परवीन मलिक को टिकट दिया है।
कांग्रेस ने मालाड पश्चिम के वार्ड 34 से विधायक असलम शेख के बेटे हैदर अली शेख को मैदान में उतारा है।
BMC चुनावी टिकट न मिलने से पार्टी छोड़ने की होड़
टिकट बंटवारे से नाराज कई पुराने नगरसेवक अब पार्टी बदलने लगे हैं—
एमएनएस नेता स्नेहल जाधव ने दादर से टिकट न मिलने पर इस्तीफा दे दिया, उनके शिंदे गुट में जाने की चर्चा है।
शरद पवार गुट की मुंबई अध्यक्ष राखी जाधव बीजेपी में शामिल हो चुकी हैं और घाटकोपर से टिकट मिलने की संभावना है।
बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) का सीट शेयरिंग फॉर्मूला
बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना इस बार साथ मिलकर बीएमसी चुनाव लड़ेंगी—
बीजेपी: लगभग 128 सीटें
शिवसेना (शिंदे): लगभग 79 सीटें
बाकी सीटों पर स्थानीय समीकरणों के आधार पर फैसला होगा
हालांकि दोनों दल अपनी-अपनी सूची अलग-अलग जारी कर सकते हैं।
ये पूर्व नगरसेवक भी मैदान में
किशोरी पेडणेकर, पूर्व मेयर (शिवसेना UBT) – वार्ड 199
तेजस्वी गोसालकर, अब बीजेपी से – वार्ड 2 (दहिसर)
विनोद मिश्रा, पूर्व बीजेपी नगरसेवक – मालाड
रवि राजा, पूर्व कांग्रेस नेता, अब बीजेपी से – वार्ड 185
बीएमसी चुनाव में परिवारवाद क्यों बना मुद्दा?
मुंबई जैसे महानगर में बीएमसी सिर्फ नगर निगम नहीं, बल्कि देश की सबसे अमीर नगरपालिका है। ऐसे में टिकट वितरण में पारदर्शिता और जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका देना हमेशा चर्चा का विषय रहा है। इस बार भी वही सवाल उठ रहा है—क्या जनता नाम देखकर वोट देगी या काम देखकर?
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. बीएमसी चुनाव 2025 में परिवारवाद क्यों चर्चा में है? क्योंकि लगभग सभी प्रमुख दलों ने नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट दिया है।
Q2. सबसे ज्यादा परिवारवाद किस पार्टी में दिखा? बीजेपी, शिवसेना (UBT), एनसीपी (अजित पवार) और कांग्रेस—चारों में यह ट्रेंड देखने को मिला।
Q3. टिकट न मिलने से किसे नुकसान हो सकता है? पुराने जमीनी कार्यकर्ताओं को, जो अब पार्टी छोड़ने या बगावत की राह पर हैं।
Q4. क्या इससे चुनावी नतीजों पर असर पड़ेगा? संभावना है, क्योंकि मुंबई के कई इलाकों में स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवार की पकड़ अहम होती है।
BMC ELECTION में कांग्रेस की अकेले लड़ने की घोषणा से महाविकास आघाड़ी (MVA) में असहजता बढ़ गई है। शिवसेना (UBT) की मनसे से नज़दीकी को लेकर कांग्रेस की असहमति सामने आई, जबकि एनसीपी (SP) गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ने के पक्ष में है।
मुंबई: बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव को लेकर कांग्रेस के अकेले लड़ने के फैसले ने महाविकास आघाड़ी की एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस का कहना है कि शिवसेना (UBT) की मनसे के साथ बढ़ती राजनीतिक नज़दीकियां उनके उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोट बैंक को नुकसान पहुंचा सकती हैं। हालांकि शिवसेना (UBT) कांग्रेस से पुनर्विचार की अपील कर रही है, जबकि एनसीपी (शरद पवार) मनसे को साथ लेकर संयुक्त मुकाबले की पक्षधर है। इस राजनीतिक खींचतान ने आगामी मनपा चुनावों की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है।
कांग्रेस के फैसले से MVA में हलचल
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने साफ कहा है कि कांग्रेस बीएमसी चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेगी। इससे MVA में असहजता बढ़ी है, क्योंकि गठबंधन का मकसद भाजपा को रोकना था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के अकेले लड़ने से वोटों का बंटवारा होगा, जिससे भाजपा को सीधी बढ़त मिल सकती है।
मनसे को लेकर कांग्रेस की बड़ी चिंता
कांग्रेस की असहमति की सबसे बड़ी वजह है— 🔹 शिवसेना (UBT) और मनसे की बढ़ती समीपता 🔹 उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोट बैंक का संभावित नुकसान
कांग्रेस का मानना है कि मनसे के साथ जुड़ाव उसकी विचारधारा के विपरीत है, क्योंकि मनसे पहले उत्तर भारतीयों के खिलाफ आक्रामक रुख के लिए जानी जाती रही है।
कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति भी खुलकर सामने आई है। एक धड़ा — स्थानीय समीकरण के आधार पर मनसे के साथ गठबंधन का समर्थक दूसरा धड़ा — मनसे के साथ किसी भी सूरत में गठबंधन के खिलाफ
मुंबई के राजनैतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस को जल्द स्पष्ट रुख लेना होगा, वरना गैर-मराठी और गैर-हिंदू वोटों का विभाजन भाजपा के लिए रास्ता आसान बना देगा।
एनसीपी (SP) एकता के पक्ष में
एनसीपी (शरद पवार) गठबंधन की मजबूती के लिए MNS को साथ लेकर संयुक्त मुकाबले की वकालत कर रही है। इसी संदर्भ में वर्षा गायकवाड़ की टीम ने शरद पवार से मुलाकात भी की है, लेकिन कांग्रेस अपने निर्णय पर कायम है।
शिवसेना (UBT) ने किया पुनर्विचार का आग्रह
उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना कांग्रेस को साथ रखने की कोशिश जारी रखे हुए है। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा— 🔹 “मनसे के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस की नाराज़गी व्यक्तिगत मामला हो सकता है।” 🔹 “जनता चाहती है कि शिवसेना और मनसे साथ आएं।”
दूसरी ओर, मनसे ने MVA में शामिल होने से इनकार करते हुए कांग्रेस को “अमीबा” कहा, जिस पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए “गिरगिट” जैसी टिप्पणी की।
बीएमसी चुनाव — बड़ा राजनीतिक समीकरण
राज्य की 246 नगर परिषद और 42 नगर पंचायतों के चुनाव 2 दिसंबर को
बीएमसी के चुनाव जनवरी 2026 में होने की संभावना
वर्तमान हालात में भाजपा सबसे मजबूत स्थिति में दिख रही है
कांग्रेस के अकेले उतरने से विपक्ष का वोट बैंक टूट सकता है
FAQ
प्रश्न
उत्तर
क्या कांग्रेस MVA से अलग हो रही है?
नहीं, गठबंधन बरकरार है, लेकिन बीएमसी चुनाव कांग्रेस स्वतंत्र रूप से लड़ना चाहती है।
कांग्रेस मनसे के साथ क्यों नहीं है?
कांग्रेस का कहना है कि मनसे के पुराने रुख से उसके परंपरागत वोटरों को नुकसान हो सकता है।
क्या विपक्षी वोट बंटेंगे?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फैसले से भाजपा को सीधा लाभ मिल सकता है।
क्या अंतिम निर्णय बदल सकता है?
शिवसेना (UBT) लगातार आग्रह कर रही है, लेकिन इस समय कांग्रेस अपने फैसले पर अडिग है।
महाराष्ट्र में लंबे इंतज़ार के बाद बीएमसी समेत सभी स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा आज होने की संभावना है। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने दोपहर 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जिसमें चुनाव की तारीख़ें घोषित की जा सकती हैं।
मुंबई: 4 नवंबर महाराष्ट्र में लंबे इंतज़ार के बाद बीएमसी (BMC) समेत राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा आज होने की संभावना है। राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission – SEC) ने आज दोपहर 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जिसमें राज्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश वाघमारे औपचारिक रूप से चुनाव कार्यक्रम का ऐलान कर सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, घोषणा के तुरंत बाद आचार संहिता (Model Code of Conduct) पूरे राज्य में लागू हो जाएगी।
🏙️ तीन चरणों में होंगे महाराष्ट्र के निकाय चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार, इस बार स्थानीय निकाय चुनाव तीन चरणों में कराए जाने की संभावना है।
1️⃣ पहला चरण: 246 नगरपालिका परिषदों और 42 नगर पंचायतों के चुनाव होंगे। 2️⃣ दूसरा चरण: जिल्हा परिषद (Zilla Parishad) और पंचायत समितियों के लिए मतदान होगा। 3️⃣ अंतिम चरण: बड़े नगर निगमों — मुंबई, पुणे, नागपुर, ठाणे और नासिक के चुनाव होंगे।
संभावना है कि पहले चरण का मतदान नवंबर के अंत तक कराया जाएगा, यानी चुनावी प्रक्रिया इसी हफ्ते शुरू हो सकती है।
🏛️ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार समयसीमा तय
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, जिन निकायों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, उनके चुनाव 31 जनवरी 2026 से पहले संपन्न कराना अनिवार्य है। इसी वजह से राज्य निर्वाचन आयोग पर समय पर चुनाव कराने का दबाव बढ़ गया है।
इस चुनावी प्रक्रिया में शामिल होंगे —
289 नगरपालिका परिषदें
32 जिल्हा परिषदें
331 पंचायत समितियाँ
29 नगर निगम (Municipal Corporations)
यह हाल के वर्षों में महाराष्ट्र का सबसे बड़ा नागरिक चुनाव होगा।
बीएमसी चुनाव हमेशा से महाराष्ट्र की राजनीति का केंद्र रहे हैं। इस बार का नतीजा 2026 विधानसभा चुनावों की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। राज्य के प्रमुख दल — भारतीय जनता पार्टी (BJP), शिवसेना (शिंदे गट), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गट), कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गट) — सभी इस चुनाव को अपनी साख से जोड़कर देख रहे हैं।
बीएमसी पर फिलहाल प्रशासक का शासन है, और अब चुनावी बिगुल बजते ही मुंबई की सियासत में गर्मी तेज़ होना तय है।
🕓 चुनाव कार्यक्रम का ऐलान आज शाम
राज्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश वाघमारे आज शाम 4 बजे प्रेस से बातचीत करेंगे। सूत्रों के अनुसार, प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ही चुनावी अधिसूचना जारी की जाएगी और पूरे महाराष्ट्र में चुनावी माहौल बन जाएगा।
❓ FAQ सेक्शन
प्रश्न 1: बीएमसी और महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव कब होंगे? 👉 राज्य निर्वाचन आयोग आज शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में तारीख़ों का ऐलान करेगा। प्रश्न 2: कितने चरणों में होंगे चुनाव? 👉 तीन चरणों में — नगरपालिका परिषद, पंचायत समितियाँ और बड़े नगर निगम (जैसे मुंबई, पुणे, नागपुर)। प्रश्न 3: क्या आज से आचार संहिता लागू होगी? 👉 हाँ, घोषणा के तुरंत बाद आचार संहिता लागू होने की संभावना है। प्रश्न 4: कौन से शहर अंतिम चरण में रहेंगे? 👉 मुंबई, पुणे, नागपुर, ठाणे और नासिक। प्रश्न 5: यह चुनाव क्यों महत्वपूर्ण है? 👉 क्योंकि यह 2026 विधानसभा चुनावों से पहले सभी राजनीतिक दलों के लिए बड़ा टेस्ट साबित होगा।
दुनिया की निगाहों में भारत की गवाही और भारत के बीच हुए लगातार आतंकी हमलों पर विदेश नीति और संसद में खड़े होकर छपरी और टपरी जैसे भाषण कि “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” और पाकिस्तानी हमले पर ट्रम्प का सीजफायर। भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत ही नहीं दे पा रहा।
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र चल रहा। बिहार में वोट काटने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा। रोहिंग्या बांग्लादेश और नेपाली के नाम पर लाखों नाम काट डाले गए। blo लोगों के घर जाकर सत्यापन करने की जगह ऑफिस में बैठकर फॉर्म में नाम लिखकर खुद ही वोटर के हस्ताक्षर कर रहे। विपक्षी उनके वोटरों के नाम काटने के आरोप लगाए। पत्रकार अजीत अंजुम ने मोबाइल द्वारा चुनाव आयोग के खेल को सबूत सहित सार्वजनिक किया तो उनपर एफआईआर कर दी गई यानी सच दिखाने का दंड दिया गया।
लोकतंत्र का हिस्सा
संसद में ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा में सत्ता विपक्ष में वाक्युद्ध चल ही रहा था, कि सीजफायर की भी बात हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 25 बार कहे गये वक्तव्य, कि “हमने ट्रेड की धमकी देकर युद्ध रुकवा दी।” पर विपक्ष ने हमला बोला। यही जीवंत लोकतंत्र है। ट्रंप ने खुद अपने एक्स हैंडल पर शाम 5.35 पर सीजफायर की घोषणा की। भारत की तरफ से नहीं। संसद में सत्ता ने उत्तर नहीं दिया। विपक्ष मांग करता रहा कि पीएम आकर कहें कि ट्रंप ने वॉर नहीं रुकवाई। रक्षामंत्री ने कहा पीओके लेना हमारा मकसद नहीं फिर भाजपा ने बार बार कांग्रेस और नेहरू पर आरोप क्यों लगाए?
संसद में होती है गुंडो की भाषा
पहलगाम में कथित तौर पर पाकिस्तानी आतंकी आए और धर्म पूछकर मारा जिसके प्रमाण नहीं। संसद के मानसून सत्र के समय ही सेना ने घोषित किया कि मुठभेड़ में सारे आतंकी मारे गए। इससे पूर्व जिन कथित आतंकियों के स्क्रेच जारी किए गए गवाह ने उसे गलत कहा। अहम बात यह कि सत्ता के दंभ में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” क्या ऐसे स्पीकर और राज्यसभा के सभापति सदन की मर्यादा बचाने की कोशिश करेंगे? “मुझसे निपट लो।” क्यों भाई पीएम हो क्या? ऐसी भाषा किसी गली का गुंडा या फिर माफिया ही बोल सकता है। लेकिन विपक्ष को टोकने वाले सत्ता की असंसदीय भाषा की अनसुनी करते हुए पद की गरिमा खो चुके हैं।
मोदी सरकार वर्तमान में अपने से संबंधित बात पर चर्चा करने से भागती है। मोदी दिल्ली में ही है लेकिन सदन में आ नहीं सकते। ऐसा मणिपुर मामले में किया था। अंतिम समय में आए भी तो क्या कुछ कहा दुनिया जानती है। प्रधानमंत्री होने के नाते कभी मणिपुर गए ही नहीं। इसी तरह उरी, पठानकोट, पुलवामा और पहलगाम भी नहीं गए। यह सही है कि पहलगाम में आतंकी हमला हुआ। 27 भारतीयों को जान गंवानी पड़ी। विपक्ष सवाल पूछता रहा, सवा सौ किलोमीटर दूर पाकिस्तानी आतंकवादी कैसे आए? लोगों से कथित रूप से धर्म पूछा। पेंट खुलवाकर देखा कौन सा धर्म है। बीजेपी के मंत्रियों में तनिक भी विधवा हुई महिलाओं के प्रति सम्मान भाव नहीं देखा गया। बड़ी बेशर्मी से कहा गया, महिलाओं में वीरांगना भाव नहीं था। एक ने तो कर्नल सोफिया के लिए आतंकवादियों की बहन तक कह दिया। यही है इनका सेना के प्रति सम्मान भाव।
कांग्रेस पर सवाल उठाने का नतीजा
अब सेशन में ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल जवाब हो रहे हैं। इसी बीच उन दरिंदे आतंकवादियों को सेना द्वारा मुठभेड़ में मारे जाने की बात कही गई। यहां टाइमिंग का सवाल जरूर उठता है। विपक्ष के प्रधान की पुलवामा में उपयुक्त आरडीएक्स कहां से आया सत्ता के पास कोई उत्तर है ही नहीं। कांग्रेस फोबिया से पीड़ित बीजेपी सरकार ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया। मुंबई आतंकी हमले का आरोप लगाकर अपने आरोप ढकने और जायज़ ठहराने की नाकाम कोशिश की। जिस पर प्रियंका गांधी ने आड़े हाथों लेते हुए जवाब दिया। मुंबई हमले के सारे आतंकियों को भून दिया गया। एक जीवित आतंकी कसाब को पकड़कर फांसी दी गई। जिसे दुनिया ने देखा और भारत के साथ पूरी दुनिया खड़ी दिखाई दी। आतंकवाद की सर्वत्र आलोचना की गई।
यही नहीं कांग्रेस में दायित्वबोध जवाबदेही होने के कारण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और गृहमंत्री ने खुद को दोषी समझकर इस्तीफा दे दिया। लेकिन यह भूल गई प्रियंका कि बीजेपी में दायित्व बोध जवाबदेही और इस्तीफा देने की समझ है ही नही। अगर नैतिकता होती तो मणिपुर मामले में इस्तीफा दिया गया होता। उरी, पठानकोट और पुलवामा की असफलता पर इस्तीफे की झड़ी लग गई होती। प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन से इस्तीफा मांगने वाले क्यों नहीं अपने गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री से इस्तीफा देने की मांग करते?
सरकार ने दिया सेना को धोखा
इस्तीफा तो विदेश मंत्री को भी देना चाहिए था कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के पूर्व पाकिस्तान को सूचना दे दी, जिससे हमारे विमान मार गिराए गए। पीएम मोदी से इस गलत बयानी और प्रचार पर इस्तीफा मांगते कि उन्होंने दावा किया था सेना को खुली छूट दी है समय और स्थान सेना तय करे जबकि फौजी अधिकारियों ने बार बार मोदी के दावे की पोल खोली है। यही नहीं एयर मार्शल भी कह चुके हैं कि “जब समय पर सप्लाई नहीं कर सकते तो वादा क्यों करते हो?”
आज तक सत्ता का कोई भी उन मारे गए पर्यटकों के घर जाने की जरूरत नहीं समझी जब कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जाकर उनके जख्मों पर मरहम लगा चुके हैं। राहुल गांधी की राजनीति सर्व ग्राही है। इसीलिए वे मणिपुर जाकर पीड़ितों के ज़ख्म सहला चुके हैं उनके विपरीत पीएम मोदी शहीदों के नाम पर वोट ही नहीं मांगे बल्कि कानून नियम के विरुद्ध सेना की वर्दी पहनकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय लेते हुए अपनी फोटो डालकर पोस्टर चिपकवा चुके हैं। पाकिस्तान के दो टुकड़े करने और 95 हजार सैनिकों के आत्मसमर्पण की सफलता का श्रेय लेने की कोशिश इंदिरा गांधी ने कभी भी नहीं की।
टैक्स का बोझ सुविधा के नाम पर भ्रष्टाचार
दरअसल हिंदू-मुस्लिम कर चुनाव आयोग द्वारा छल कपट और गलत काम कराकर चुनाव जीतना ही मोदी का एकमात्र लक्ष्य है। फर्जी वोटर बढ़वाकर हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली चुनाव जीतने के बाद बिहार में वोटरों को बाहर करने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा है। मोदी सरकार अपने 11 साल के शासन में किए गए कार्य पर वोट मांगने की हिम्मत कर ही नहीं सकते। क्योंकि किसान, मजदूर, युवाओं, छात्रों, गृहिणियों के जीवन को दूभर बना दिया है। टैक्स का इतना भार दुनिया के किसी भी देश में नहीं है। सुविधा के नाम पर सर्वत्र भ्रष्टाचार ही हुआ है।
सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे ताकि गरीबों के बच्चे पढ़ न सकें। परीक्षा में अनियमितता के विरोध में छात्र हितों के खातिर जब शिक्षक दिल्ली में रैली कर रहे थे तब पुलिस द्वारा शिक्षकों को घसीट कर बस में जबरन बिठाकर दूर ले जाकर छोड़ा गया। इस कार्य में दिल्ली पुलिस सिद्धहस्त है, जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी से न्याय मांगने महिला पहलवान जब दिल्ली के जंतर मंतर पर रैली निकाले हुए धरने पर बैठी थी तब भी अमित शाह के आदेश पर उन्हें घसीटा और बसों में जबरन लादकर दूर ले जाकर छोड़ा गया था।
विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने दावा?
दिल्ली पुलिस वही है जो हाईकोर्ट के जस्टिस वर्मा के घर आग लगने से जली झुलसी नोटो की गाड़ियों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं कर सकी। जांच करना तो बड़ी दूर की बात, जिस राष्ट्र में शिक्षकों को अपमानित किया जाए। उन्हें घसीटकर बसों में ठूंसा जाए। प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर चालीस पचास लाख रुपयों में बेचा जाए। सड़कें पहली ही बरसात में बहने लगें। पुल बनते समय या उदघाटन के पहले ही जल समाधि लेने लगें। ये सारे करतूतें भ्रष्टाचार सामने दिखता ही नहीं बल्कि चीख-चीख कर बोलता भी है। उस देश को वहां की सरकार जो विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने का दावा करे, जहां की अस्सी करोड़ जनता को गरीबी रेखा से नीचे रखने का षडयंत्र रचा जाए, क्या कहा जा सकता है?
ऐसी विदेशनीति को क्या कहा जाए कि अरबों रुपए जनता के पैसे फूंककर विश्व की यात्रा की जाए। लेकिन पाकिस्तान युद्ध के समय दुनिया का एक भी देश खुलकर भारत के साथ नहीं आए। अमेरिका का राष्ट्रपति धमकी देता रहे। राष्ट्र को अपमानित करता रहे लेकिन सत्ता में हिम्मत नहीं जो कह सके ट्रंप झूठ बोल रहा है। उसी ट्रंप ने रूस से तेल खरीदना बंद करा दे जबकि हमारा पड़ोसी चीन अमेरिका के आंखों में आँखें डालकर जवाब देता हो। सबसे विश्वसनीय देश रूस को भी दूर कर दे ऐसी विदेशनीति जो अमेरिका की गोद में बैठी हो क्या कहा जाएगा?
दुनिया की निगाहों में भारत?
भारत ने डेलिगेशन भेजे बताने के लिए कि पाकिस्तान ने पहलगाम में आतंकी हमला करके 27 बेकसूरों को गोली मारकर हत्या कर दी, जिसके लिए जीरो टॉलरेंस अपनाकर हमने पाकिस्तानी आतंकवादियों के अड्डों पर सीमित हमले कर सौ आतंकियों को मार गिराया। लेकिन कोई राष्ट्र यकीन नहीं कर रहा। क्योंकि हमारे पास कोई सबूत नहीं जैसा कि मणिशंकर ने कहा है जिसका अर्थ दुनिया समझती है भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत नहीं दे पा रहा। मुंबई हमले में कसाब को जिंदा सबूत दिखाया गया था। यानी पाकिस्तानी आतंकवाद की गुहार कोई सुनने के लिए तैयार नहीं उलटे ट्रंप हम पर 25% टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 100% पेनल्टी लगाने की घोषणा कर दी। संसद में भले दावा किया गया हो कि पाकिस्तानी आतंकियों को सेना ने मार गिराया है। दुनिया की निगाहों में भारत झूठ बोल रहा।
Mumbai News: बीजेपी नेता किरीट सोमैय्या ने आरोप लगाते हुए कहा कि एनसीपी शरद पवार, कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की वोट जिहाद की सेना ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करती है। इस बार मैं खुद ग्राउंड पर हूँ। नहीं काटने दूंगा बकरा ..
मुंबई: बकरी ईद के मद्देनजर बीजेपी नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैय्या रहिवासी चालों और इमारतों का दौरा कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता रविवार 25 मई को घाटकोपर स्थित मैत्री को-ऑपरेटिव सोसायटी और दामोदर पार्क का दौरा किया। इसी परिसर में बकरा ईद को लेकर पहले भी दो गुटों के बीच विवाद देखने को मिला था। अब एक बार फिर कुछ रहिवासियों का विरोध देखने को मिल रहा है। BJP leader Kirit Somaiya made a big statement before Bakri Eid, said “I will not let goats be slaughtered”
बकरा नहीं काटने दूंगा ..
बीजेपी नेता किरीट सोमैय्या ने आरोप लगाते हुए कहा, कि “एनसीपी शरद पवार, कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की वोट जिहाद की सेना ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करती है। यह सब वोट जिहाद के लिए हो रहा है। अगली बार अगर कोई दहशत फैलाने के लिए ऐसा कोई काम करेगा, यानी बकरा काटेगा तो हम ऐसा नहीं होने देंगे।
उन्होंने आगे कहा, कि “पिछली बार महानगरपालिका अधिकारियों और माफिया ने पुलिस को धमकी देकर घाटकोपर में बकरा काटा था। इस बार मैं खुद ग्राउंड पर हूं। एनसीपी शरद पवार, उद्धव की सेना या राहुल गांधी की कांग्रेस का यहां पर टारगेट ही है वोट जिहाद करने का।” उन्होंने कहा, “पहलगाम हमले के बाद हमने जो जवाब दिया, वैसा ही अमेरिका में भी वोट जिहाद किया गया। भगवान उन्हें सद्बुद्धि दे।
इस साल बकरी ईद का त्योहार 6 या 7 जून को मनाने की संभावना है। इस त्योहार को लेकर तारीख की आधिकारिक घोषणा चांद नजर आने के बाद ही की जाएगी। बकरी ईद का अर्थ सिर्फ जानवरों की कुर्बानी मात्र से नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक अर्थ बहुत ही गहरा है। यह पर्व अल्लाह के प्रति समर्पण, त्याग और दान से जुड़ा हुआ है। इसकी मान्यता है कि बकरा ईद पर कुर्बानी के हिस्से को तीन भागों में तकसिम किया जाया है। पहला गरीब और जरूरतमंदों को, दूसरा हिस्सा मित्रों और रिश्तेदारों के लिए और तीसरी हिस्सा अपने घर-परिवार के लिए रखा जाता है। साथ ही ईद की नमाज़ से पहले जकत, फितरे का पैसा निकाला जाता है। जो ज़रूरतमंदों को देकर उनकी मदद की जाती है। BJP leader Kirit Somaiya made a big statement before Bakri Eid, said “I will not let goats be slaughtered”
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पुलिस और प्रशासन की लापरवाही के कारण लगातार बढ़ते अपराध को लेकर नगर मजिस्ट्रेट बार कॉनसील अधिवक्ताओं ने मिलकर न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपते हुए कार्यवाही की मांग की है। (Increasing graph of crime in Varanasi, Uttar Pradesh)
विशेष संवाददाता वाराणसी- उत्तर प्रदेश के वाराणसी में बढ़ते आपराधिक घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए, युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष और अधिवक्ता श्री विकास सिंह के नेतृत्व में बार कॉनसील के अधिवक्ताओं ने आज नगर मजिस्ट्रेट श्री रवि शंकर सिंह को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में वाराणसी शहर में बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर शीघ्र प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई है। (Increasing graph of crime in Varanasi, Uttar Pradesh)
पुलिस और प्रशासन की लापरवाही
ज्ञापन में विशेष रूप से कुछ हालिया अपराधों का उल्लेख किया गया है। जिनमें एक ही परिवार के 5 सदस्यों की हत्या, प्रॉपर्टी डीलर के ऑफिस में गोलीबारी, एक गर्भवती महिला की पिटाई से बच्चे की मौत, शहर में लूटपाट की बढ़ती घटनाएं, होटल के बेसमेंट में मजदूर की मौत और जुएं के खेल की बढ़ती घटनाएं शामिल हैं। इन घटनाओं में प्रशासन और पुलिस की लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं, और मांग की गई है कि पुलिस और प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई की जाए। (Increasing graph of crime in Varanasi, Uttar Pradesh)
प्रशासन की जिम्मेदारी
युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि “वाराणसी में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ चुकी है और आम नागरिकों में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। इस पर शीघ्र कार्रवाई की आवश्यकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और अपराधियों के खिलाफ ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। (Increasing graph of crime in Varanasi, Uttar Pradesh)
आंदोलन की योजना
ज्ञापन सौंपने के बाद नगर मजिस्ट्रेट ने इस मामले पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है और कहा कि प्रशासन इस पर त्वरित कार्रवाई करेगी। युवा कांग्रेस और अधिवक्ताओं ने आगामी दिनों में इस मुद्दे पर और अधिक ध्यान आकर्षित करने के लिए आंदोलन की योजना बनाई है। (Increasing graph of crime in Varanasi, Uttar Pradesh)
बिना इजाज़त सफाईकर्मियों के साथ मनपा (BMC) मुख्यालय के बाहर कांग्रेस और एनसीपी द्वारा निकाले गए मोर्चा के मामले विधायक वर्षा गायकवाड़ समेत 16 पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज।
इस्माईल शेख मुंबई- सफाईकर्मियों के साथ मनपा (BMC) मुख्यालय के बाहर कांग्रेस और एनसीपी द्वारा निकाले गए मोर्चा के मामले में आजाद मैदान पुलिस ने विधायक एवं पूर्व शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ समेत 16 पदाधिकारियों और 60 से 70 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि बिना अनुमति के मोर्चा निकालने का मामला दर्ज किया गया है। (Mumbai case filed against Varsha Gaikwad)
मुंबई की विशेष मलिन बस्तियों में स्वच्छता के लिए ठेकेदारी प्रथा अपनाई जा रही है। ठेका प्रथा से दैनिक मजदूरों के सामने भुखमरी की नौबत आ जायेगी है। इसलिए सफाई कर्मचारी संगठनों ने बुधवार को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर मांग किया, कि मनपा (BMC) प्रशासन 1200 करोड़ रुपये के टेंडर रद्द करें। इस आंदोलन में कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार ग्रुप), आप, कम्युनिस्ट पार्टी और इंडिया गठबंधन की सहयोगी पार्टियों ने हिस्सा लिया। (Mumbai Congress Party Varsha Gaikwad News)
इस आंदोलन की पृष्ठभूमि में बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) मुख्यालय के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। मनपा मुख्यालय और सामने की सड़कों को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया गया था। प्रदर्शनकारियों ने इस सड़क को जाम कर मुख्यालय में घुसने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने मनपा कमिश्नर इकबाल सिंह चहल से मिलने की कोशिश की। (Mumbai Congress Party Varsha Gaikwad News)
पुलिस बल ने उन्हें मुख्यालय जाने से रोक दिया। पुलिस सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर आजाद मैदान थाने ले गई। आज़ाद मैदान पुलिस ने मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ के साथ प्रकाश रेड्डी और 15 अन्य पदाधिकारियों के साथ-साथ 60 से 70 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। अधिकारी ने बताया, कि बिना इजाजत मोर्चा निकालने और आदेश का उल्लंघन करने का के लिए भारतीय दंड संहिता सहित मुंबई पुलिस की धारा 143, 145, 149 के साथ 188 के तहत मामला दर्ज किया गया है। (Mumbai Congress Party Varsha Gaikwad News)
मंत्रालय के सामने किया सड़क जाम ..
युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा बुधवार को मंत्रालय के यहां सड़क जाम कर दिया था। उस मामले में मरीन ड्राइव पुलिस ने यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कुणाल राउत और 17 कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इलेक्ट्रो बांड के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मांगी गई सूची एसबीआई द्वारा अब तक नहीं दिए जाने के विरोध में युवा कांग्रेस ने बुधवार को मंत्रालय के पास सड़क रोककर प्रदर्शन किया था। उस वक्त सभी अधिकारियों को हिरासत में लेकर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। इन सभी को नोटिस देकर रिहा कर दिया गया। (Mumbai Congress Party Varsha Gaikwad News)
आधे से ज्यादा प्रदेशों में कांग्रेस का शासन होने वाला है।
देश भर के आदिवासी और दलित एकजुट हो सकते हैं।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- प्रायः हर प्रदेश में चंद क्षत्रप अवश्य हैं। जैसे यूपी में सपा, महाराष्ट्र में शिवसेना और राकांपा लेकिन टूट से परेशान विहार में नीतीश और लालू फेमिली, बंगाल में ममता दीदी, इसी तरह साउथ में डी एम के. और कुछ छुटपुट क्षेत्रों में दूसरे क्षत्रप। किसी में इतनी शक्ति नहीं कि अकेले बीजेपी और मोदी का मुकाबला कर सके। दूसरी ओर जहां आप पार्टी ने दिल्ली और पंजाब फतह किया। लेकिन दूसरे प्रांतों में अप्रभावी रही, जबकि कांग्रेस ने पहले बीजेपी की दौलत शोहरत के सम्मुख सीमा तने गर्व से खड़ी रही। कांग्रेस और हिमाचल प्रदेश के बाद कर्नाटक में भी जीत हासिल कर सरकार बना ली। यहां समझने की जरूरत है कि देशभर के आदिवासी और दलित जनता कांग्रेस के साथ होती दिखाई दे रही है।
लोकसभा चुनाव पूर्व तेलंगाना, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में होने वाली विधानसभाओं में अपना परचम लहराएगी कांग्रेस। महाराष्ट्र में भले जयचंदों की कमी नहीं है। अपने अपने बासों की पीठ में छुरा भोंककर सत्तासुख ले रहे यह सुख अस्थाई है। आगामी चुनाव और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस राकांपा और शिवसेना मिलकर कब्जा कर लेंगे। हरियाणा में भी कांग्रेस की जीत बड़ी होगी। कुल मिलाकर आधे से ज्यादा प्रदेशों में कांग्रेस का शासन होने वाला है। यूपी में भी कांग्रेस आश्चर्य में डाल सकती है। जो बीजेपी और मोदी के सपनों पर तुषारापार करने के लिए काफी है।
Indian fasttrack newsकांग्रेस पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की तस्वीर
उत्तम बात यह हुई कि पटना में सभी विरोधी दलों को लगा कि राहुल गांधी ही मोदी के सर्वोत्तम विकल्प होंगे। गुजरात में राहुल को न्याय मिल नहीं सकता इस बात को बहुत पहले रेखांकित किया जा चुका है। मान लें सुप्रीमकोर्ट में भी लोकसभा चुनाव पूर्व न्याय नहीं मिला और राहुल जेल चले गए तो विपक्षी दलों को एकमत होकर प्रियंका गांधी अथवा कांग्रेस अध्यक्ष को विकल्प के रूप में सोचना होगा।
देश भर के आदिवासी और दलित एकजुट हो सकते हैं।
Live video on Indian fasttrack news channel
चूंकि मापन्ना मल्लिकार्जुन खड़गे आदिवासी समुदाय के हैं। इसलिए देश भर के आदिवासियों और दलित उनके नाम पर एकजुट हो सकते हैं। सिर्फ उनके नाम की औपचारिक घोषणा करने की जरूरत होगी। चुनाव प्रचार में सिर्फ उनका नाम दलित आदिवासी समुदाय से जोड़ने की जरूरत होगी। यदि ऐसा हुआ और क्षत्रप मिलकर ईमानदारी से एक के सामने एक प्रत्याशी खड़ा करने की नीति का पालन करते हैं। तो आराम से विपक्षी दलों का गठबंधन 400 + सीटें जीतकर केंद्र में मोदी और बीजेपी को हटा कर नया इतिहास लिखेंगे। अभी तक दलित आदिवासी कभी भी देश का प्रधान मंत्री नहीं बना। खड़गे के रूप में आदिवासियों दलितों को अपना पीएम मिलने का स्वप्न साकार हो जाएगा।