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  • BMC का हेल्थ चॅटबॉट लॉन्च, मुंबईकरों को मिलेगी डिजिटल स्वास्थ्य सुविधा

    BMC का हेल्थ चॅटबॉट लॉन्च, मुंबईकरों को मिलेगी डिजिटल स्वास्थ्य सुविधा

    BMC ने नागरिकों की सुविधा के लिए हेल्थ चॅटबॉट सेवा शुरू की। पालकमंत्री आशिष शेलार के हाथों लोकार्पण। अब मुंबईकरों को स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी मिलेगी एक ही नंबर पर।

    मुंबई: स्वास्थ्य सेवाओं को और आसान व डिजिटल बनाने की दिशा में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने बड़ा कदम उठाया है। बीएमसी ने नागरिकों के लिए हेल्थ चॅटबॉट सेवा शुरू की है, जिसका लोकार्पण राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी व सांस्कृतिक कार्य मंत्री तथा मुंबई उपनगर जिले के पालकमंत्री आशिष शेलार के हाथों किया गया। इस चॅटबॉट के जरिए अब नागरिक घर बैठे स्वास्थ्य से जुड़ी अहम जानकारी और सेवाओं का लाभ ले सकेंगे।

    डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की ओर बीएमसी का कदम

    BMC लगातार अपने कामकाज में तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग कर रही है। इसी डिजिटल पहल के तहत हेल्थ चॅटबॉट सेवा शुरू की गई है, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़े और नागरिकों तक सुविधाएं तेजी से पहुंच सकें।
    बीएमसी आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगराणी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने यह डिजिटल सुविधा तैयार की है।

    क्या है BMC हेल्थ चॅटबॉट?

    बीएमसी हेल्थ चॅटबॉट नागरिकों को स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी देने वाला एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
    इसके लिए 9892993368 नंबर उपलब्ध कराया गया है, जिस पर व्हाट्सऐप या चैट के माध्यम से जानकारी ली जा सकती है।

    इन सुविधाओं की मिलेगी जानकारी

    हेल्थ चॅटबॉट के माध्यम से नागरिकों को कई महत्वपूर्ण सेवाओं की जानकारी मिलेगी, जैसे—

    • बीमारियों से बचाव और स्वास्थ्य जागरूकता
    • बीएमसी की स्वास्थ्य योजनाएं और अभियान
    • नजदीकी अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्र
    • स्वास्थ्य केंद्र में ऑनलाइन अपॉइंटमेंट
    • स्वास्थ्य प्रमाणपत्र और लाइसेंस की प्रक्रिया
    • जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र
    • विवाह पंजीकरण
    • दिव्यांग प्रमाणपत्र
    • प्रसूतिगृह और स्वास्थ्य परवाने से जुड़ी जानकारी

    ऑनलाइन पंजीकरण से बचेगा समय

    इस चॅटबॉट के जरिए नागरिक स्वास्थ्य केंद्रों में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। इससे लंबी कतारों से राहत मिलेगी और समय की बचत होगी। आपातकालीन स्थिति में यह सुविधा निर्णय लेने में भी मददगार साबित होगी।

    राज्य और केंद्र की योजनाओं की जानकारी भी मिलेगी

    आने वाले समय में इस चॅटबॉट के जरिए राज्य और केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।
    इसके साथ ही बीएमसी जल्द ही स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अलग वेबसाइट और OPD व बेड उपलब्धता डैशबोर्ड भी शुरू करने जा रही है।


    FAQ सेक्शन

    Q1. बीएमसी हेल्थ चॅटबॉट का नंबर क्या है?
    9892993368

    Q2. इस चॅटबॉट से क्या जानकारी मिलेगी?
    स्वास्थ्य सेवाएं, अस्पताल जानकारी, प्रमाणपत्र, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और योजनाओं की जानकारी।

    Q3. क्या यह सेवा मुफ्त है?
    हां, यह सेवा नागरिकों के लिए पूरी तरह निःशुल्क है।

    Q4. इसका फायदा किसे होगा?
    मुंबई के सभी नागरिकों को।

  • योग के ज़रिये सेवा की मिसाल: डॉ. बिजय महाराणा को राष्ट्रीय चिकित्सा गौरव सम्मान

    योग के ज़रिये सेवा की मिसाल: डॉ. बिजय महाराणा को राष्ट्रीय चिकित्सा गौरव सम्मान

    अंतरराष्ट्रीय योग विशेषज्ञ और ‘मिशन टू सक्सेस’ पुस्तक के लेखक डॉ. बिजयकुमार महाराणा को गरीब कैंसर रोगियों के लिए योग चिकित्सा और सामाजिक सेवा के लिए वर्ष 2025 का राष्ट्रीय चिकित्सा गौरव सम्मान नई दिल्ली में प्रदान किया गया।

    नई दिल्ली: गरीब और जरूरतमंद कैंसर रोगियों के लिए निःशुल्क योग चिकित्सा और जागरूकता फैलाने वाले जाने-माने अंतरराष्ट्रीय योग विशेषज्ञ डॉ. बिजयकुमार महाराणा को वर्ष 2025 का “राष्ट्रीय चिकित्सा गौरव सम्मान” प्रदान किया गया है। यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित समारोह में दिया गया। गृह कल्याण केंद्र के माध्यम से किए जा रहे उनके परोपकारी योग कार्यों को देशभर में सराहना मिली है।

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    भव्य सम्मान समारोह

    यह प्रतिष्ठित सम्मान गृह कल्याण केंद्र द्वारा प्रदान किया गया, जो भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के तत्वावधान में कार्यरत एक पंजीकृत संस्था है। समारोह में देशभर से सामाजिक, चिकित्सा और योग क्षेत्र से जुड़े गणमान्य लोग उपस्थित थे।

    ओडिशा के गांव से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर

    ओडिशा के क्योंझर जिले के खलियामेंटा गांव से आने वाले डॉ. बिजयकुमार महाराणा वर्तमान में गृह कल्याण केंद्र (जी.के.के.) में योग प्रशिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों से शुरू हुआ उनका सफर आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुका है।

    100 से अधिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान

    मुंबई स्थित गृह कल्याण केंद्र के प्रभारी जे. एम. सिंह ने बताया कि डॉ. महाराणा को योग गतिविधियों के संचालन और सामाजिक सेवा के लिए अब तक 100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार व सम्मान मिल चुके हैं।
    उन्होंने कहा कि यह सम्मान गृह कल्याण केंद्र से जुड़े सभी सदस्यों के लिए गर्व का विषय है।

    गरीब कैंसर रोगियों के लिए योग सेवा

    डॉ. महाराणा ने अपने कार्यकाल में कैंसर रोगियों के लिए विशेष योग कार्यक्रम चलाए, जिनका उद्देश्य शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संबल भी देना रहा है।
    नई दिल्ली स्थित मां कल्याणी सेवा संगठन के त्रिलोक कुमार झा और अरुण अग्रवाल ने कैंसर रोगियों के लिए आयोजित योग गतिविधियों हेतु गृह कल्याण केंद्र का आभार व्यक्त किया।

    राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता भी हैं डॉ. महाराणा

    गृह कल्याण केंद्र, नई दिल्ली के सचिव कर्नल राजीव वर्मा ने बताया कि डॉ. बिजयकुमार महाराणा राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं और वर्तमान में मुंबई के जी.के.के. केंद्र में योग सिखाकर समाज में योग जागरूकता फैला रहे हैं।

    सीपीडब्ल्यूडी मुंबई का सहयोग

    मुंबई स्थित सीपीडब्ल्यूडी के कार्यकारी अभियंता विक्रांत वर्मा ने कहा कि गरीब कैंसर रोगियों को निःशुल्क योग चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए सीपीडब्ल्यूडी मुंबई ने आवश्यक सुविधाएं प्रदान की हैं।
    उन्होंने डॉ. महाराणा के कार्य को प्रेरणादायक बताया।

    युवाओं के आदर्श बने डॉ. बिजय महाराणा

    नेशनल यूथ अवॉर्डीज़ फेडरेशन ऑफ इंडिया (NYAFI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जावेद जमादार ने कहा कि डॉ. महाराणा देश के युवाओं के लिए एक आदर्श हैं और माननीय प्रधानमंत्री के योग मिशन को जमीनी स्तर पर साकार कर रहे हैं।


    FAQ सेक्शन

    Q1. डॉ. बिजय महाराणा को कौन सा सम्मान मिला है?
    उन्हें वर्ष 2025 का “राष्ट्रीय चिकित्सा गौरव सम्मान” मिला है।

    Q2. यह सम्मान कहां प्रदान किया गया?
    नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में।

    Q3. डॉ. महाराणा किस क्षेत्र में कार्य करते हैं?
    वे योग प्रशिक्षक हैं और गरीब कैंसर रोगियों के लिए योग चिकित्सा प्रदान करते हैं।

    Q4. क्या उन्हें पहले भी पुरस्कार मिले हैं?
    हां, उन्हें 100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं।

  • मालाड में 25 लाख की नकली सोने की ठगी, इंटर-स्टेट गैंग गिरफ्तार

    मालाड में 25 लाख की नकली सोने की ठगी, इंटर-स्टेट गैंग गिरफ्तार

    मालाड (वेस्ट) में खुदाई के दौरान सोना मिलने का झांसा देकर 25 लाख रुपये की ठगी करने वाले इंटर-स्टेट गैंग को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया। गुजरात और पालघर से आरोपियों की धरपकड़, 15.45 लाख रुपये बरामद।

    मुंबई: जमीन की खुदाई के दौरान सोने के आभूषण मिलने का झांसा देकर मालाड इलाके में 25 लाख रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर इंटर-स्टेट गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। मुंबई पुलिस ने गुजरात और पालघर से इस गैंग के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी फरार है। मामले में अब तक 15.45 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। यह ठगी नवंबर के अंत से दिसंबर की शुरुआत के बीच की गई थी।

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    खुदाई में सोना मिलने का झांसा देकर ठगी

    पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता दिनेश मेहता (51), जो मालाड (वेस्ट) के सोमवारी बाजार स्थित अंकुर बिल्डिंग में रहते हैं, उनसे मुख्य आरोपी बाबूलाल भालाराम वाघेला (55) ने संपर्क साधा।
    आरोपी ने खुद को राजस्थान से जुड़ा बताते हुए राजस्थानी भाषा में बातचीत शुरू की और धीरे-धीरे भरोसा जीत लिया। उसने दावा किया कि नासिक में एक मंदिर के पीछे खुदाई के दौरान करीब 900 ग्राम सोने के आभूषण मिले हैं

    नमूना दिखाकर बनाया विश्वास

    आरोपी ने या तो आभूषण बेचने में मदद करने या सीधे बेचने का प्रस्ताव दिया। भरोसा दिलाने के लिए उसने कुछ पीले धातु के मोती नमूने के तौर पर दिए, जो जांच में असली सोना निकले। इसी भरोसे में आकर दिनेश मेहता ने 25 लाख रुपये नकद दे दिए और आभूषण अपने पास ले लिए।

    जौहरी की जांच में निकला नकली सोना

    कुछ समय बाद जब इन आभूषणों को जौहरी को दिखाया गया, तो वे पूरी तरह नकली पाए गए। ठगी का अहसास होते ही शिकायतकर्ता ने मालाड पुलिस से संपर्क किया।
    इसके बाद 5 दिसंबर 2025 को मालाड पुलिस स्टेशन में क्राइम रजिस्टर नंबर 883/25 के तहत मामला दर्ज किया गया।

    कानूनी धाराएं और जांच

    पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2), 318(4) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया है।
    जांच के दौरान क्राइम डिटेक्शन टीम ने मालाड और कांदिवली (ईस्ट) सहित कई इलाकों के 100 से ज्यादा सरकारी और निजी CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली।

    CCTV, कॉल डिटेल और चाल-ढाल से पहचान

    हालांकि CCTV फुटेज साफ नहीं थी, लेकिन पुलिस ने

    • शरीर की बनावट
    • चलने की चाल (gait analysis)
    • कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल डंप डेटा

    के आधार पर आरोपियों की पहचान की। लगातार तीन दिनों की मेहनत के बाद पुलिस को सफलता मिली।

    गुजरात और विरार से गिरफ्तारियां

    जांच में कुल पांच आरोपियों की पहचान हुई।

    • मुख्य आरोपी बाबूलाल वाघेला को कालोल, गांधीनगर (गुजरात) से गिरफ्तार किया गया।
    • उसके घर की तलाशी में 15.45 लाख रुपये नकद और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ।
    • उसकी पत्नी कोकुबाई वाघेला (50) की भूमिका सामने आने पर उन्हें BNS की धारा 35(3) के तहत नोटिस दिया गया है।

    इसके बाद विरार (ईस्ट) से तीन अन्य आरोपी—
    मंगलाराम वागरी, केसराराम वागरी और भवरलाल वागरी—को गिरफ्तार किया गया।

    राजस्थान से जुड़े, पेशे से फोटो फ्रेम बनाने वाले आरोपी

    पुलिस के मुताबिक सभी आरोपी मूल रूप से राजस्थान के जालोर जिले के रहने वाले हैं और अलग-अलग राज्यों में घूम-घूमकर ऐसी ठगी करते हैं।
    गिरफ्तार आरोपी पेशे से फोटो फ्रेम बनाने का काम करते हैं। मुख्य आरोपी बाबूलाल वाघेला के खिलाफ गुजरात के कालोल तालुका और साबरमती पुलिस स्टेशन में पहले से भी ठगी के मामले दर्ज हैं।

    एक आरोपी फरार, तलाश जारी

    इस केस में गोविंद (उम्र करीब 30 वर्ष) नाम का एक आरोपी अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
    बरामद रकम के अलावा बाकी पैसे और अन्य संपत्ति की रिकवरी की प्रक्रिया जारी है।

    पुलिस अधिकारियों की भूमिका

    इस पूरे मामले की जांच एपीआई अभिजीत काले और दीपक रैवाडे कर रहे हैं, जो वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक दुष्यंत चव्हाण के मार्गदर्शन में काम कर रहे हैं।


    FAQ सेक्शन

    Q1. ठगी की रकम कितनी थी?
    25 लाख रुपये नकद।

    Q2. अब तक कितनी रकम बरामद हुई है?
    15.45 लाख रुपये।

    Q3. मुख्य आरोपी कहां से गिरफ्तार हुआ?
    कालोल, गांधीनगर (गुजरात) से।

    Q4. कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
    चार आरोपी गिरफ्तार, एक फरार।

    Q5. कौन-सी धाराओं में केस दर्ज है?
    BNS की धारा 316(2), 318(4) और 3(5)।

  • मालवनी पर महायुति की नज़र, 641 एकड़ जमीन के पुनर्विकास पर सियासी घमासान

    मालवनी पर महायुति की नज़र, 641 एकड़ जमीन के पुनर्विकास पर सियासी घमासान

    धारावी की तर्ज पर मालवणी के 641 एकड़ इलाके के पुनर्विकास की तैयारी शुरू। क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल, सर्वे और विस्थापन को लेकर विपक्ष ने सरकार पर बिल्डरों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।

    महाराष्ट्र/नागपुर: धारावी पुनर्विकास योजना के बाद अब मुंबई के मालाड स्थित मालवनी इलाके के 641 एकड़ भूखंड पर महायुति सरकार की नजर टिक गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे इलाके के क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल के तहत पुनर्विकास के लिए सर्वे और योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार इसे झोपड़पट्टी-मुक्त करने की पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इसे बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की साजिश करार दे रहा है।

    धारावी मॉडल पर मालवणी पुनर्विकास की तैयारी

    देश की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी धारावी को अडानी ग्रुप को सौंपे जाने के बाद अब सरकार ने मालवनी क्षेत्र के पुनर्विकास की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में 641 एकड़ क्षेत्र के सर्वेक्षण और क्लस्टर डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि क्लस्टर मॉडल के जरिए पूरे मालवनी इलाके का कम समय में पुनर्विकास संभव है और इसे एक बड़े झोपड़पट्टी पुनर्विकास प्रोजेक्ट के रूप में तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।

    641 एकड़ में फैला मालवनी, 14 हजार झोपड़ियां

    मालवनी इलाके का कुल क्षेत्रफल 641 एकड़ है, जिसमें

    • राज्य सरकार
    • म्हाडा
    • बृहन्मुंबई महानगरपालिका
    • निजी भूखंड

    शामिल हैं।
    इसमें से 565.98 एकड़ क्षेत्र में झोपड़पट्टियां हैं, जबकि 75.02 एकड़ खुली जमीन है। इस पूरे इलाके में करीब 14 हजार झोपड़ियां बसी हुई हैं। सरकार का दावा है कि पुनर्विकास के बाद यह इलाका पूरी तरह झोपड़पट्टी-मुक्त हो जाएगा।

    13 लाख लोगों के विस्थापन की आशंका

    विपक्ष का आरोप है कि इस योजना के नाम पर मालवनी में रहने वाले करीब 13 लाख लोगों को विस्थापित किया जाएगा। धारावी पुनर्विकास को लेकर पहले से चल रहे विवाद के बीच यह मुद्दा और भी संवेदनशील बन गया है।

    विपक्षी दलों का कहना है कि मुंबई में विकास के नाम पर लगातार बड़े भूखंड बिल्डरों की झोली में डाले जा रहे हैं, जबकि स्थानीय निवासियों के पुनर्वास और अधिकारों को लेकर स्पष्टता नहीं है।

    कौन करेगा सर्वे और रिपोर्ट?

    बैठक में तय किया गया कि

    • म्हाडा और
    • झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA)

    अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में सर्वे करेंगे।
    सभी झोपड़पट्टियों का सर्वे पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसियां संयुक्त रिपोर्ट तैयार करेंगी।
    जहां कानूनी अड़चनें होंगी, वहां अलग से कार्रवाई की जाएगी, और जहां विकास संभव होगा, उन इलाकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद

    इस अहम बैठक में

    • आवास राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर
    • विधायक असलम शेख
    • अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता
    • म्हाडा अधिकारी मिलिंद बोरीकर
    • SRA CEO डॉ. महेंद्र कल्याणकर

    मौजूद रहे।
    वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुंबई मनपा आयुक्त भूषण गगरानी भी बैठक में शामिल हुए।

    दागी बिल्डर को ठेका मिलने की चर्चा

    सूत्रों के अनुसार, इस पुनर्विकास परियोजना को लेकर पहले ही एक दागी बिल्डर को ठेका दिए जाने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आरोप है कि यह वही बिल्डर है, जिसने चेंबूर के माहुल इलाके में प्रोजेक्ट-अफेक्टेड लोगों के लिए इमारतें बनाई थीं, जहां करीब 9 हजार करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगे थे। बताया जाता है कि वह आपराधिक मामले में जेल भी जा चुका है।

    अब उसी बिल्डर को एक भाजपा नेता के माध्यम से मालवनी की बड़ी पुनर्विकास योजना में शामिल करने की कोशिश हो रही है।


    FAQ

    Q1. मालवणी पुनर्विकास योजना क्या है?
    मालवणी इलाके को क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल के तहत पुनर्विकसित करने की सरकारी योजना।

    Q2. कुल कितनी जमीन शामिल है?
    करीब 641 एकड़ भूमि।

    Q3. कितने लोग प्रभावित हो सकते हैं?
    करीब 13 लाख लोगों के विस्थापन की आशंका जताई जा रही है।

    Q4. विवाद क्यों हो रहा है?
    विपक्ष का आरोप है कि योजना का फायदा बिल्डरों को दिया जा रहा है।

  • KEM अस्पताल में आधुनिक बर्न केयर सेंटर का उद्घाटन

    KEM अस्पताल में आधुनिक बर्न केयर सेंटर का उद्घाटन

    मुंबई के केईएम अस्पताल में नवीनीकरण किए गए बर्न केयर सेंटर का उद्घाटन किया गया। यहां अब महिला, पुरुष और बच्चों समेत सालाना 150 से अधिक जले हुए मरीजों का आधुनिक इलाज संभव होगा।

    मुंबई: परेल स्थित केईएम अस्पताल में जले हुए मरीजों के इलाज के लिए पूरी तरह से नवीनीकरण किए गए बर्न केयर सेंटर का उद्घाटन किया गया है। इस केंद्र में अब महिलाओं और बच्चों के साथ-साथ पुरुष मरीजों को भी इलाज की सुविधा मिलेगी। अत्याधुनिक आईसीयू, वेंटिलेटर और संक्रमण से बचाव की विशेष व्यवस्था के साथ यह केंद्र हर साल करीब 150 से 170 जले हुए मरीजों के इलाज में सक्षम होगा।

    Modern-Burn-Care-Centre-inaugurated-at-KEM-Hospital-news

    केईएम अस्पताल में बर्न केयर सेंटर का लोकार्पण

    राजे एडवर्ड मेमोरियल (KEM) अस्पताल में नवीनीकरण किए गए बर्न केयर सेंटर का उद्घाटन 13 दिसंबर 2025 को श्री शैलेश लिमडी के हाथों किया गया। इस अवसर पर अस्पताल की अधिष्ठाता डॉ. संगीता रावत, प्लास्टिक सर्जरी विभाग की प्रमुख डॉ. विनिता पुरी और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ डॉक्टर उपस्थित थे।

    महिला, बच्चे और पुरुष मरीजों को समान सुविधा

    इस बर्न केयर सेंटर में अब जले हुए मरीजों के लिए सभी आवश्यक आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। पहले जहां सुविधाएं सीमित थीं, वहीं अब महिला, बालक और पुरुष सभी मरीजों को एक ही केंद्र में उच्च स्तरीय इलाज मिलेगा।

    सालाना 150 से 170 मरीजों के इलाज की क्षमता

    नवीनीकरण किए गए इस केंद्र की क्षमता सालाना 150 से 170 जले हुए मरीजों के इलाज की है। गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को समय पर और सही इलाज मिल सके, इसके लिए इस केंद्र को विशेष रूप से विकसित किया गया है।

    आईसीयू में अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण

    इस बर्न केयर सेंटर में कुल 12 बेड उपलब्ध कराए गए हैं।
    यहां मौजूद सुविधाओं में शामिल हैं—

    • पूरी तरह सुसज्जित अतिदक्षता उपचार कक्ष (ICU)
    • वेंटिलेटर सपोर्ट सिस्टम
    • मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर
    • डायलिसिस मशीन
    • आधुनिक चिकित्सा उपकरण

    इन सुविधाओं के चलते जले हुए मरीजों में इलाज के दौरान आने वाली जटिलताओं पर अधिक प्रभावी तरीके से नियंत्रण संभव होगा।

    संक्रमण से बचाव के लिए विशेष व्यवस्था

    जले हुए मरीजों को संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। इसे ध्यान में रखते हुए—

    • वार्ड में नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था
    • मरीजों की सुरक्षित आवाजाही
    • अलग और संरक्षित उपचार कक्ष

    की योजना बनाई गई है, जिससे मरीजों को सुरक्षित वातावरण मिल सके।

    मरीजों की मानसिक स्थिति का भी रखा गया ध्यान

    इलाज के दौरान मरीजों को दर्द और तनाव से कुछ राहत मिले, इसके लिए—

    • बेहतर प्रकाश व्यवस्था
    • आधुनिक फर्नीचर
    • मरीजों का ध्यान भटकाने के लिए टीवी की सुविधा

    भी उपलब्ध कराई गई है।

    बीएमसी आयुक्त के निर्देश पर हुआ नवीनीकरण

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका (Bmc) आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगराणी ने जले हुए मरीजों को समय पर और आधुनिक इलाज देने के निर्देश दिए थे। अतिरिक्त आयुक्त और सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में इस बर्न केयर सेंटर का नवीनीकरण पूरा किया गया।

    सरकारी योजनाओं के तहत गरीब मरीजों को इलाज

    उपायुक्त (सार्वजनिक स्वास्थ्य) शरद उघडे ने बताया कि इस केंद्र के माध्यम से सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।

    डॉक्टरों का कहना

    प्लास्टिक सर्जरी विभाग की प्रमुख डॉ. विनिता पुरी ने कहा कि जले हुए मरीजों को शारीरिक चोट के साथ-साथ मानसिक और सामाजिक आघात भी झेलना पड़ता है। यह बर्न केयर सेंटर मरीजों को इलाज के साथ-साथ सम्मान, सुरक्षा और नई उम्मीद देने का प्रयास करेगा।


    FAQ

    प्रश्न 1: बर्न केयर सेंटर का उद्घाटन कब हुआ?
    उत्तर: 13 दिसंबर 2025 को।

    प्रश्न 2: यहां कितने मरीजों का इलाज हो सकता है?
    उत्तर: सालाना 150 से 170 जले हुए मरीजों का।

    प्रश्न 3: क्या पुरुष मरीजों को भी इलाज मिलेगा?
    उत्तर: हां, अब पुरुष मरीजों को भी सुविधा उपलब्ध है।

    प्रश्न 4: इस केंद्र में कौन-कौन सी सुविधाएं हैं?
    उत्तर: आईसीयू, वेंटिलेटर, डायलिसिस मशीन और संक्रमण नियंत्रण की विशेष व्यवस्था।

  • मुंबई में 4 नए पुलिस स्टेशन और 2 नए ज़ोन को मिली मंज़ूरी

    मुंबई में 4 नए पुलिस स्टेशन और 2 नए ज़ोन को मिली मंज़ूरी

    मुंबई की बढ़ती आबादी और अपराध को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने 4 नए पुलिस स्टेशन, 2 नए डीसीपी ज़ोन और 3 एसीपी डिविज़न को मंजूरी दी है। 1,448 नए पद और ₹130 करोड़ से ज्यादा का बजट स्वीकृत।

    मुंबई: शहर में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। 12 दिसंबर 2025 को गृह विभाग द्वारा जारी शासन निर्णय के तहत मुंबई पुलिस कमिश्नरेट में 4 नए पुलिस स्टेशन, 2 नए डीसीपी ज़ोन और 3 नए एसीपी डिविज़न बनाए जाएंगे। इस फैसले से न सिर्फ पुलिस की पहुंच बढ़ेगी, बल्कि बढ़ती आबादी, ट्रैफिक और अपराध पर नियंत्रण भी आसान होगा।

    मुंबई में अभी कितने पुलिस स्टेशन हैं?

    फिलहाल मुंबई में कुल 100 पुलिस स्टेशन कार्यरत हैं, जिनमें शामिल हैं—

    • 93 स्थानीय पुलिस स्टेशन
    • 2 तटीय पुलिस स्टेशन (गोराई और माहिम)
    • 5 साइबर पुलिस स्टेशन

    अब सरकार ने इस नेटवर्क में 4 नए पुलिस स्टेशन जोड़ने की मंजूरी दे दी है।

    कहां-कहां बनेंगे नए पुलिस स्टेशन

    सरकार द्वारा स्वीकृत नए पुलिस स्टेशन और उनका क्षेत्राधिकार इस प्रकार है:

    1. महाराष्ट्र नगर पुलिस स्टेशन

    • क्षेत्र: भांडुप और पार्कसाइट पुलिस स्टेशन से अलग किया गया इलाका

    2. गोलिबार पुलिस स्टेशन

    • क्षेत्र: वाकोला और निर्मल नगर पुलिस स्टेशन से विभाजित इलाका

    3. मड-मार्वे पुलिस स्टेशन

    • क्षेत्र: मालवनी पुलिस स्टेशन के कुछ हिस्से

    4. आसलफा पुलिस स्टेशन

    • क्षेत्र: घाटकोपर और साकीनाका पुलिस स्टेशन से पुनर्गठन

    इन नए थानों से स्थानीय नागरिकों को नजदीक पुलिस सहायता मिलेगी और शिकायतों के निपटारे में तेजी आएगी।

    1,448 नए पद और ₹130 करोड़ से ज्यादा का बजट

    चारों नए पुलिस स्टेशनों के लिए सरकार ने—

    • 1,448 नए पद स्वीकृत किए हैं
    • ₹124.13 करोड़ का वार्षिक (रिकरिंग) खर्च
    • ₹7.39 करोड़ का एकमुश्त (नॉन-रिकरिंग) खर्च मंजूर किया है

    यह खर्च संबंधित वित्तीय वर्ष के बजट से पूरा किया जाएगा।

    2 नए डीसीपी ज़ोन और 3 एसीपी डिविज़न

    पुलिस प्रशासन को और बेहतर बनाने के लिए सरकार ने—

    • 2 नए डीसीपी ज़ोन
    • 3 नए एसीपी डिविज़न

    को भी मंजूरी दी है।
    इसके तहत—

    • डीसीपी ज़ोन के लिए 34 नए पद
    • एसीपी डिविज़न के लिए 30 नए पद

    स्वीकृत किए गए हैं।
    इस पर ₹6.24 करोड़ का वार्षिक और ₹83.95 लाख का एकमुश्त खर्च आएगा।

    क्यों लिया गया यह फैसला?

    सरकार के मुताबिक—

    • मुंबई की तेज़ी से बढ़ती आबादी
    • शहर का लगातार हो रहा विस्तार
    • ट्रैफिक दबाव और अपराध के बढ़ते मामले

    इन सभी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। नए पुलिस स्टेशन और ज़ोन बनने से पेट्रोलिंग बेहतर होगी और अपराध नियंत्रण मजबूत होगा।

    प्रस्ताव कैसे हुआ मंजूर?

    यह प्रस्ताव मुंबई पुलिस आयुक्त द्वारा भेजा गया था।

    • 11 नवंबर 2025 को हुई उच्चस्तरीय सचिव समिति की बैठक में इस पर चर्चा हुई
    • इसके बाद गृह विभाग ने 12 दिसंबर 2025 को शासन निर्णय जारी कर मंजूरी दी

    FAQ सेक्शन

    Q1: मुंबई में कितने नए पुलिस स्टेशन बनाए जाएंगे?
    मुंबई में 4 नए पुलिस स्टेशन बनाए जाएंगे।

    Q2: किन इलाकों को फायदा मिलेगा?
    भांडुप, पार्कसाइट, वाकोला, निर्मल नगर, मालवणी, मड-मार्वे, घाटकोपर और साकीनाका क्षेत्र।

    Q3: कुल कितने नए पद स्वीकृत हुए हैं?
    कुल 1,448 नए पद पुलिस स्टेशनों के लिए और 64 पद डीसीपी-एसीपी संरचना के लिए।

    Q4: इस पर कितना खर्च आएगा?
    करीब ₹130 करोड़ से ज्यादा का खर्च आएगा।

    Q5: इससे आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
    तेज़ पुलिस रिस्पॉन्स, बेहतर पेट्रोलिंग और अपराध नियंत्रण।

  • स्वच्छ मुंबई के लिए BMC की ‘स्वच्छता मंथन’ प्रतियोगिता, 4.20 करोड़ रुपये के इनाम

    स्वच्छ मुंबई के लिए BMC की ‘स्वच्छता मंथन’ प्रतियोगिता, 4.20 करोड़ रुपये के इनाम

    मुंबई को साफ और सुंदर बनाने के लिए बीएमसी ने 2026 में ‘स्वच्छता मंथन’ प्रतियोगिता की घोषणा की है। वार्ड, सोसायटी, अस्पताल, स्कूल, बाजार समेत कई श्रेणियों में 4.20 करोड़ रुपये के पुरस्कार दिए जाएंगे।

    मुंबई: शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने वर्ष 2026 के लिए एक बड़ी पहल की घोषणा की है। 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2026 तक चलने वाली ‘स्वच्छता मंथन’ प्रतियोगिता के तहत प्रशासनिक वार्ड, हाउसिंग सोसायटी, झोपड़पट्टी क्षेत्र, अस्पताल, स्कूल, बाजार, रेस्टोरेंट और सार्वजनिक स्थलों को साफ रखने पर कुल 4 करोड़ 20 लाख रुपये के पुरस्कार दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नागरिकों और निजी संस्थानों से बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की है।

    BMC-Swachhata-Manthan-competition-for-a-clean-Mumbai-with-prizes-worth-Rs-crore-news

    पूरे साल चलेगा BMC का स्वच्छता मंथन प्रतियोगिता

    बीएमसी के घनकचरा प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित यह प्रतियोगिता जनवरी से दिसंबर 2026 तक चलेगी। इसका उद्देश्य केवल सफाई नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी बढ़ाकर स्थायी स्वच्छता संस्कृति विकसित करना है।

    महानगरपालिका आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगराणी ने निर्देश दिए हैं कि यह अभियान पूरे मुंबई महानगर में प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।

    इन श्रेणियों में मिलेंगे पुरस्कार

    ‘स्वच्छता मंथन’ प्रतियोगिता कई वर्गों में आयोजित की जाएगी, ताकि शहर के हर हिस्से को इसमें शामिल किया जा सके:

    • स्वच्छ प्रशासनिक वार्ड
    • स्वच्छ आवासीय संकुल (हाउसिंग सोसायटी)
    • स्वच्छ झोपड़पट्टी क्षेत्र
    • स्वच्छ व्यावसायिक प्रतिष्ठान
    • स्वच्छ अस्पताल (सरकारी व निजी)
    • स्वच्छ स्कूल (सरकारी व निजी)
    • स्वच्छ रेस्टोरेंट
    • स्वच्छ सामुदायिक शौचालय
    • स्वच्छ सड़कें व मार्ग
    • स्वच्छ उद्यान व खुली जगहें
    • स्वच्छ बाजार क्षेत्र
    • आसपास का क्षेत्र गोद लेकर स्वच्छता (विशेष श्रेणी)

    किस श्रेणी में कितनी इनामी राशि

    बीएमसी द्वारा घोषित पुरस्कार राशि इस प्रकार होगी:

    • स्वच्छ वार्ड:
    • प्रथम: ₹50 लाख
    • द्वितीय: ₹25 लाख
    • तृतीय: ₹15 लाख
    • अन्य सभी श्रेणियां (सोसायटी, अस्पताल, स्कूल, बाजार आदि):
    • प्रथम: ₹15 लाख
    • द्वितीय: ₹10 लाख
    • तृतीय: ₹5 लाख

    कुल मिलाकर सभी श्रेणियों में ₹4.20 करोड़ की पुरस्कार राशि दी जाएगी।

    सेलिब्रिटी भी बनेंगे स्वच्छता अभियान का हिस्सा

    इस अभियान को जनआंदोलन बनाने के लिए—

    • फिल्म, खेल और अन्य क्षेत्रों की नामचीन हस्तियों को किसी इलाके को गोद लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
    • प्रसिद्ध अभिनेता अक्षय कुमार ने इस स्वच्छता अभियान में व्यक्तिगत रूप से भाग लेने की इच्छा जताई है।

    मूल्यांकन होगा निष्पक्ष संस्था से

    बीएमसी ने स्पष्ट किया है कि—

    • प्रतियोगिता का मूल्यांकन त्रयस्थ (थर्ड पार्टी) एजेंसी द्वारा किया जाएगा।
    • दिसंबर 2026 में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी में भव्य पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित होगा।

    मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का नागरिकों से आह्वान

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि—

    “स्वच्छ और सुंदर मुंबई केवल प्रशासन से नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी से संभव है।”

    उन्होंने नागरिकों, हाउसिंग सोसायटियों और निजी संस्थानों से इस प्रतियोगिता में सक्रिय भागीदारी की अपील की है।


    FAQ सेक्शन

    Q1: स्वच्छता मंथन प्रतियोगिता कब से कब तक चलेगी?
    यह प्रतियोगिता 1 जनवरी 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक चलेगी।

    Q2: कुल कितनी पुरस्कार राशि रखी गई है?
    कुल 4 करोड़ 20 लाख रुपये के पुरस्कार दिए जाएंगे।

    Q3: कौन-कौन भाग ले सकता है?
    नागरिक, हाउसिंग सोसायटी, स्कूल, अस्पताल, रेस्टोरेंट, बाजार और निजी संस्थान।

    Q4: मूल्यांकन कौन करेगा?
    एक स्वतंत्र त्रयस्थ संस्था द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा।

    Q5: पुरस्कार कब दिए जाएंगे?
    दिसंबर 2026 में भव्य समारोह में पुरस्कार वितरण होगा।

  • वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड को हाईकोर्ट की मंजूरी, BMC को मिली बड़ी राहत

    वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड को हाईकोर्ट की मंजूरी, BMC को मिली बड़ी राहत

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड परियोजना को हरी झंडी दे दी है। करीब 45 हजार मैंग्रोव कटेंगे, बदले में तीन गुना पौधारोपण और 10 साल की निगरानी अनिवार्य होगी।

    मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर को मिरा-भायंदर से सीधे जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड परियोजना को आखिरकार बॉम्बे हाईकोर्ट की मंजूरी मिल गई है। अदालत ने बीएमसी को करीब 45 हजार मैंग्रोव काटने की सशर्त अनुमति दी है। इसके बदले बीएमसी को तीन गुना पौधारोपण, चंद्रपुर में 103 हेक्टेयर वनरोपण और अगले 10 वर्षों तक हर साल निगरानी रिपोर्ट जमा करनी होगी। इस फैसले से मुंबई के उत्तरी हिस्से की ट्रैफिक समस्या कम होने की उम्मीद है।

    हाईकोर्ट का अहम फैसला

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी की याचिका पर सुनवाई करते हुए वर्सोवा–भायंदर डेवलपमेंट प्लान रोड (कोस्टल रोड नॉर्थ) को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी।
    हालांकि अदालत ने साफ किया कि—

    • परियोजना पर 10 साल तक निगरानी जरूरी होगी
    • हर साल कम्पनसेटरी प्लांटेशन की रिपोर्ट जमा करनी होगी

    अदालत का कहना है कि विकास के साथ पर्यावरण संतुलन भी उतना ही जरूरी है।

    कितने मैंग्रोव कटेंगे, कितना होगा पुनरोपण

    परियोजना के तहत—

    • कुल मैंग्रोव: करीब 60,000
    • प्रभावित होंगे: 45,675 मैंग्रोव
    • सड़क निर्माण के लिए सीधे कटेंगे: करीब 9,000 मैंग्रोव (10 हेक्टेयर)

    बीएमसी ने भरोसा दिलाया है कि—

    • तीन गुना मैंग्रोव पुनरोपण किया जाएगा
    • चंद्रपुर जिले में 103 हेक्टेयर क्षेत्र में अनिवार्य वनरोपण होगा

    वर्सोवा से भायंदर तक कैसा होगा रोड नेटवर्क

    यह कोस्टल रोड मुंबई के पश्चिमी किनारे पर एक बड़ा ट्रैफिक कॉरिडोर बनेगा।

    रूट डिटेल्स

    • शुरुआत: वर्सोवा
    • बीच के इलाके: मलाड, मालवनी, कांदिवली, बोरीवली, दहिसर
    • अंत: भायंदर (मिरा-भायंदर)

    संरचना

    • एलिवेटेड रोड
    • फ्लाईओवर और इंटरचेंज
    • टनल और ब्रिज
    • सतही ट्रैफिक कम करने की व्यवस्था

    दो फेज़ में बनेगी कोस्टल रोड

    • फेज-1: वर्सोवा से दहिसर
    • लंबाई: लगभग 20–25 किमी
    • इसे कोस्टल रोड फेज-2 या वर्सोवा–दहिसर लिंक रोड भी कहा जाएगा
    • फेज-2: दहिसर से भायंदर
    • एलिवेटेड रोड
    • लंबाई: 5.6 किमी, चौड़ाई 45 मीटर

    कुल मिलाकर इंटरचेंज और कनेक्टर मिलाकर नेटवर्क 60 किलोमीटर से ज्यादा का होगा।

    ट्रैफिक और कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा फायदा

    बीएमसी के अनुसार—

    • वेस्टर्न सबर्ब्स से मिरा-भायंदर का सफर तेज होगा
    • वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और लिंक रोड पर दबाव घटेगा
    • रोज़ाना लाखों यात्रियों को राहत मिलेगी

    पर्यावरण बनाम विकास की बहस फिर तेज

    जहां एक तरफ इस प्रोजेक्ट को ट्रैफिक समस्या का स्थायी समाधान बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मैंग्रोव कटाई को लेकर पर्यावरणविदों की चिंता भी बनी हुई है।
    हाईकोर्ट ने इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए सख्त शर्तों के साथ मंजूरी दी है।


    FAQ सेक्शन

    Q1: वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड क्या है?
    यह मुंबई को मिरा-भायंदर से जोड़ने वाली 26.3 किमी लंबी तटीय सड़क परियोजना है।

    Q2: कितने मैंग्रोव काटे जाएंगे?
    करीब 45,675 मैंग्रोव प्रभावित होंगे, जिनमें से लगभग 9,000 सीधे कटेंगे।

    Q3: बदले में क्या किया जाएगा?
    तीन गुना पौधारोपण और चंद्रपुर में 103 हेक्टेयर वनरोपण किया जाएगा।

    Q4: कोर्ट ने क्या शर्त रखी है?
    10 साल तक निगरानी और हर साल रिपोर्ट दाखिल करना अनिवार्य होगा।

    Q5: इससे आम लोगों को क्या फायदा होगा?
    ट्रैफिक कम होगा और वेस्टर्न सबर्ब्स से भायंदर तक सफर तेज होगा।

  • मुंबई को मिलेगी ‘पगड़ी सिस्टम’ से आज़ादी? राज्य सरकार ने बनाया नया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क

    मुंबई को मिलेगी ‘पगड़ी सिस्टम’ से आज़ादी? राज्य सरकार ने बनाया नया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क

    महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई को पुराने ‘पगड़ी सिस्टम’ से मुक्त करने के लिए नया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क बनाने का बड़ा फैसला किया। इससे 19,000 से ज्यादा पुरानी इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता साफ होगा।

    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई को दशकों पुराने ‘पगड़ी सिस्टम’ से बाहर निकालने की बड़ी पहल की है। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में घोषणा की कि शहर के पुराने पगड़ी मॉडल पर चलने वाले मकानों के लिए एक अलग रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे किरायेदारों और मकान मालिकों — दोनों के हक सुरक्षित रहेंगे और 19,000 से ज्यादा जर्जर इमारतों का पुनर्विकास तेज होगा। यह निर्णय मुंबई की रियल एस्टेट मार्केट को मजबूत करने और सालों से लंबित हजारों विवादों को खत्म करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    क्या है पगड़ी सिस्टम और क्यों जरूरी पड़ा बदलाव?

    मुंबई में दशकों से चल रहा पगड़ी सिस्टम एक ऐसा मॉडल है जिसमें किरायेदार मकान में रहने के लिए एकमुश्त रकम देकर आंशिक मालिकाना हक जैसा अधिकार पा लेता है।

    • किराया बेहद कम
    • सबलेट करने की अनुमति
    • मकान मालिक को वास्तविक मूल्य का लाभ नहीं

    इस सिस्टम के कारण मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच अक्सर विवाद खड़े होते रहे हैं। कई केस तो दशकों से अदालत में लंबित हैं।

    मुंबई में 19,000 से ज्यादा इमारतें पगड़ी सिस्टम में

    डिप्टी सीएम शिंदे ने बताया कि मुंबई में करीब 19,000 पुरानी, प्री-1960 सीज्ड इमारतें पगड़ी सिस्टम पर चल रही हैं।
    इनमें से—

    • कई इमारतें पहले ही जर्जर हो चुकी हैं
    • कुछ ढह चुकी हैं
    • और 13,000 से ज्यादा अभी भी पुनर्विकास का इंतज़ार कर रही हैं

    यह सारी इमारतें महाराष्ट्र रेंट कंट्रोल एक्ट के दायरे में आती हैं, जिससे किरायेदार सुरक्षित रहते हैं, लेकिन मकान मालिक अपने अधिकारों की उचित भरपाई न मिलने की शिकायत करते हैं।

    Deputy chief minister eknath shinde

    क्यों आया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क का विचार?

    शिंदे ने विधानसभा में बताया—

    • 28,000 से ज्यादा किरायेदार–मकान मालिक विवाद अदालतों में अटके हैं
    • पुराने कानून जमीन पर असरदार साबित नहीं हो रहे
    • पुनर्विकास बाधित होने से इमारतें खतरे में हैं

    सरकार अब हाईकोर्ट की मंजूरी से फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाएगी, ताकि सभी मामले तीन साल के भीतर निपट जाएं।

    कमजोर वर्ग के लिए मुफ्त पुनर्निर्माण की सुविधा

    FSI (Floor Space Index) बढ़ाना काफी नहीं है—यह बात भी शिंदे ने साफ कही।
    EWS और LIG वर्ग के पगड़ी धारकों के लिए—

    • मुफ्त पुनर्निर्माण
    • टेनेंट हिस्से के बराबर FSI
    • लैंड ओनर को मूल FSI
    • इंसेंटिव FSI

    अगर जमीन की ऊंचाई सीमा या अन्य रुकावटों के कारण FSI का पूरा उपयोग नहीं हो पाया, तो बचा हुआ FSI TDR (Transfer of Development Rights) के रूप में दिया जाएगा।

    पुरानी इमारतों के लिए खुला रास्ता

    सरकार का कहना है कि यह नया फ्रेमवर्क—

    • जर्जर इमारतों के गिरने के खतरे को रोकेगा
    • जीवन और संपत्ति दोनों की सुरक्षा करेगा
    • लंबे समय से अटकी पुनर्विकास परियोजनाओं में नई जान डालेगा

    साथ ही मौजूदा पुनर्विकास विकल्प 33(7) और 33(9) भी उपलब्ध रहेंगे।

    मकान मालिक और किरायेदार—दोनों के लिए फायदे

    सरकार के अनुसार—

    • किरायेदारों का पुनर्विकास और घर की सुरक्षा
    • मकान मालिकों को उचित हिस्सा और कानूनी राहत
    • लंबे विवादों का निपटारा
    • शहर में रियल एस्टेट मार्केट को बल

    यह सिस्टम दोनों पक्षों के लिए न्यायसंगत समाधान प्रदान करेगा।


    FAQ सेक्शन

    1. पगड़ी सिस्टम क्या होता है?

    एक पुराना किरायेदारी मॉडल जिसमें किरायेदार एकमुश्त रकम देकर कम किराए पर आंशिक मालिकाना अधिकार जैसा लाभ पाता है।

    2. मुंबई में कितनी पगड़ी इमारतें हैं?

    करीब 19,000 से ज्यादा इमारतें पगड़ी सिस्टम में आती हैं।

    3. नया फ्रेमवर्क कब लागू होगा?

    सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी है, विस्तृत नियम जल्द सामने आएंगे।

    4. क्या किरायेदारों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे?

    हाँ, सरकार ने साफ कहा है कि किरायेदार और मकान मालिक दोनों के हित सुरक्षित रखे जाएंगे।

    5. क्या सभी केस जल्द निपटेंगे?

    फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए सभी 28,000 केस अगले तीन साल में निपटाने की योजना है।

  • हाईवे पर दंपती ने लगा दी रसोई, राहगीर से उलझे; वीडियो वायरल

    हाईवे पर दंपती ने लगा दी रसोई, राहगीर से उलझे; वीडियो वायरल

    व्यस्त हाईवे पर दंपती द्वारा सड़क किनारे रसोई जमाने का वीडियो वायरल। राहगीर ने टोका तो दंपती ने उल्टा जवाब दिया। सोशल मीडिया पर सड़क सुरक्षा और नागरिक जिम्मेदारी को लेकर बहस छिड़ी।

    मुंबई: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक दंपती व्यस्त हाईवे के किनारे सड़क पर ही अस्थायी रसोई बनाकर खाना बनाते दिखाई दे रहा है। वहीं राहगीर ने जब उन्हें सड़क पर बैठकर खाना पकाने के खतरों के बारे में समझाने की कोशिश की, तो दंपती ने उल्टा तर्क देते हुए कहा — “हमें भी पता है…” और खुद को “रेस्ट एरिया” में होने का दावा किया। इस वीडियो ने देशभर में सड़क सुरक्षा, नागरिक जिम्मेदारी और जागरूकता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    हाईवे पर सब्ज़ियां फैलाकर चूल्हा जलाया, बच्चा भी बैठा था पास

    वीडियो में महिला हाईवे किनारे सड़क पर बैठी सब्ज़ियां काटती, रोटियां बेलती और पोर्टेबल गैस स्टोव पर उन्हें सेंकती दिखाई देती है। वहीं उनका छोटा बच्चा ठीक पास में सड़क पर ही बैठा हुआ नजर आता है।
    दंपती का सामान इस तरह फैला था कि छोटे वाहनों के गुजरने में भी बाधा पैदा हो रही थी।

    राहगीर ने रोका, तो दंपती बोले— “ये हमारा रेस्ट एरिया है”

    वीडियो रिकॉर्ड करने वाले राहगीर ने जब उनसे पूछा कि तेज़ रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पर खाना बनाना कितना खतरनाक है, तो दंपती ने बिना समझे उल्टा सवाल करते हुए कहा कि वे किसी “डिज़ाइनटेड रेस्ट एरिया” में बैठे हैं।
    दंपती की लापरवाही और तर्क सुनकर राहगीर ने अपनी नाराज़गी जाहिर की और पूरा वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया।

    सोशल मीडिया पर नाराज़गी— ‘जान से खेलकर कंटेंट मत बनाओ’

    वीडियो सामने आने के बाद यूज़र्स ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हाईवे किसी भी तरह की गतिविधि— खाना बनाना, पिकनिक, बच्चों को बैठाना— के लिए नहीं होते।
    कई लोगों ने लिखा कि “हाईवे पर गाड़ियां 100-120 की स्पीड से दौड़ती हैं, ऐसे में सड़क के बीच खाना बनाना जान जोखिम में डालने जैसा है।”
    कुछ ने ट्रैफिक पुलिस और हाईवे अथॉरिटी से कार्रवाई की मांग भी की है।

    रोड सेफ्टी को लेकर फिर उठा सवाल

    एक्सपर्ट्स लंबे समय से बताते आए हैं कि भारत में सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता बहुत कम है।
    हाईवे पर इस तरह की गतिविधियां—

    • दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं,
    • अचानक ब्रेक लगने की नौबत लाती हैं,
    • पीछे चलने वाले वाहनों के लिए बड़ा खतरा बनती हैं।

    इस घटना में बच्चा भी मौजूद था, जिससे खतरा और बढ़ गया था।

    क्यों खतरा बढ़ जाता है? (डिटेल विश्लेषण)

    • हाईवे पर रुकने की अनुमति केवल निर्धारित लेन में होती है, सड़क पर नहीं।
    • सड़क किनारे बैठना भी तेज़ रफ्तार ट्रैफिक में जानलेवा साबित हो सकता है।
    • रात या कम रोशनी वाले इलाकों में ऐसे लोग दिखते भी नहीं।
    • अचानक मोड़ या ब्रेक से बड़े हादसे हो सकते हैं।

    FAQ सेक्शन

    1. वीडियो कहाँ शूट किया गया था?

    फिलहाल वीडियो के सटीक लोकेशन की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसे भारत के किसी व्यस्त हाईवे का बताया जा रहा है।

    2. क्या दंपती के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है?

    अब तक इस मामले में किसी आधिकारिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।

    3. क्या हाईवे पर रुककर खाना बनाना गैरकानूनी है?

    हां, हाईवे पर अवैध रूप से रुकना, सड़क पर बैठना या गतिविधि करना ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन माना जाता है।

    4. सोशल मीडिया ने कैसी प्रतिक्रिया दी?

    यूज़र्स ने दंपती की लापरवाही पर कड़ी आलोचना की और इसे सड़क सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया।