Tag: शिक्षा

  • UGC नियमों पर देशभर में सवर्ण विरोध, सरकार की मंशा पर उठे सवाल

    UGC नियमों पर देशभर में सवर्ण विरोध, सरकार की मंशा पर उठे सवाल

    UGC के नए नियमों को लेकर देशभर में सवर्ण समाज का विरोध तेज़। शिक्षण संस्थानों में भेदभाव, सरकार की नीयत और राजनीति पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

    मुंबई: UGC के नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध की आवाज़ें तेज़ हो गई हैं। खासतौर पर सवर्ण समाज के छात्रों और शिक्षाविदों का कहना है कि यह नियम शिक्षा व्यवस्था में संतुलन के बजाय टकराव और भेदभाव को बढ़ावा देगा। देश भर के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीति से प्रेरित कदम बताया है।

    UGC नियमों पर क्यों भड़का विरोध

    नए यूजीसी नियमों को लेकर आरोप है कि इससे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रशासनिक निर्णयों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा। विरोध करने वालों का कहना है कि इससे शैक्षणिक स्वायत्तता प्रभावित होगी और छात्रों के बीच अविश्वास का माहौल बनेगा।
    सवर्ण संगठनों का दावा है कि नियमों की भाषा और संरचना ऐसी है, जिससे एक विशेष वर्ग को निशाना बनाए जाने की आशंका बढ़ जाती है।

    हिंदू एकता बनाम राजनीतिक ध्रुवीकरण

    आलोचकों का कहना है कि “हिंदू एकता” जैसे नारों का इस्तेमाल सामाजिक एकजुटता के बजाय वोटों के ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है। उनका आरोप है कि वास्तविक मुद्दों—जैसे शिक्षा, रोजगार, महंगाई और स्वास्थ्य—से ध्यान हटाकर समाज को आपस में बांटा जा रहा है।

    शिक्षा व्यवस्था पर नियंत्रण का आरोप

    लेखक सुरेंद्र राजभर का कहना है कि विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों और नीतियों के जरिए शिक्षा पर वैचारिक नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है। उनका सवाल है कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन स्वतंत्र रूप से निर्णय ले पाएगा या फिर हर फैसले में सरकारी दखल बढ़ेगा।

    कानूनों के दुरुपयोग की आशंका

    विरोध करने वालों ने यह भी चिंता जताई कि यदि शिकायतों की जांच और झूठी शिकायत करने वालों पर कार्रवाई की व्यवस्था कमजोर हुई, तो इसका दुरुपयोग हो सकता है। उनका कहना है कि इससे छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है और शिक्षा का माहौल डर का बन सकता है।

    सरकार से जवाबदेही की मांग

    यूजीसी नियमों के खिलाफ उठ रही आवाज़ें अब केवल सवर्ण समाज तक सीमित नहीं हैं। कई शिक्षाविद, छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता सरकार से पारदर्शिता और संवाद की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी बदलाव से पहले सभी पक्षों से चर्चा जरूरी है।


    FAQ

    Q1. यूजीसी के नए नियमों का विरोध क्यों हो रहा है?
    नियमों से शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    Q2. विरोध कौन कर रहा है?
    मुख्य रूप से सवर्ण समाज के छात्र, शिक्षाविद और कुछ सामाजिक संगठन।

    Q3. सरकार पर क्या आरोप हैं?
    आरोप है कि शिक्षा नीतियों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ और सामाजिक ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है।

    Q4. आगे क्या मांग की जा रही है?
    नियमों पर पुनर्विचार, सभी वर्गों से संवाद और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग।

  • BMC: CBSC स्कूलों से 366 छात्र पहली बार देंगे दसवीं की परीक्षा

    BMC: CBSC स्कूलों से 366 छात्र पहली बार देंगे दसवीं की परीक्षा

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका के सीबीएसई बोर्ड से जुड़े 10 स्कूलों के 366 छात्र पहली बार कक्षा 10वीं की परीक्षा देंगे। परीक्षा से पहले छात्रों के लिए विशेष अभ्यास और विशेषज्ञ शिक्षकों का मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के शिक्षा विभाग से संचालित सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध स्कूलों के लिए यह साल ऐतिहासिक होने जा रहा है। बीएमसी की 10 सीबीएसई स्कूलों के कुल 366 छात्र पहली बार कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे। परीक्षा की तैयारी को लेकर महानगरपालिका की ओर से विशेष अभ्यास कक्षाएं, सराव प्रश्नपत्रिकाएं और निजी स्कूलों के विशेषज्ञ शिक्षकों का मार्गदर्शन दिया जा रहा है। सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा 17 फरवरी 2026 से 11 मार्च 2026 तक आयोजित की जाएगी।

    BMC की 18 सीबीएसई स्कूलें, 10 स्कूल पहली बार परीक्षा में

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका के शिक्षा विभाग के अंतर्गत फिलहाल सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त कुल 18 स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें से 10 स्कूल ऐसे हैं, जिनके छात्र पहली बार कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने जा रहे हैं। इन स्कूलों के 366 छात्रों के लिए परीक्षा से पहले विशेष तैयारी अभियान चलाया जा रहा है, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में शामिल हो सकें।

    परीक्षा से पहले विशेष अभ्यास और मार्गदर्शन

    बीएमसी शिक्षा विभाग द्वारा छात्रों से नियमित रूप से सराव प्रश्नपत्रिकाएं हल करवाई जा रही हैं। इसके साथ ही गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेज़ी और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
    छात्रों की बेहतर तैयारी के लिए कुछ नामी निजी सीबीएसई स्कूलों के अनुभवी शिक्षकों का भी सहयोग लिया गया है, जो ऑनलाइन माध्यम से उत्तर लिखने की तकनीक और समय प्रबंधन पर मार्गदर्शन दे रहे हैं।

    आयुक्तों के मार्गदर्शन में चल रही तैयारी

    यह पूरा शैक्षणिक उपक्रम महानगरपालिका आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगराणी तथा अतिरिक्त आयुक्त (पूर्व उपनगर) डॉ. अविनाश ढाकणे के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है। शिक्षा विभाग का उद्देश्य है कि बीएमसी के छात्र भी निजी स्कूलों के छात्रों की तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।

    आठ भाषाओं और चार बोर्ड में शिक्षा

    बीएमसी का शिक्षा विभाग मराठी, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी, गुजराती, तमिल, तेलुगू और कन्नड़ – इन आठ भाषाओं में शिक्षा प्रदान करता है। इसके साथ ही एसएससी, सीबीएसई, आईसीएसई और आईबी जैसे चार अलग-अलग बोर्ड के पाठ्यक्रम भी महानगरपालिका की शालाओं में उपलब्ध हैं।

    SSC में 93% तक पहुंचा रिजल्ट, अब सीबीएसई पर नजर

    बीते कई वर्षों से बीएमसी के एसएससी बोर्ड के छात्रों के लिए विशेष मार्गदर्शन और अभ्यास योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिसका सकारात्मक असर परीक्षा परिणामों पर भी दिखा है। एसएससी बोर्ड का परिणाम 93 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। अब इसी तर्ज पर सीबीएसई बोर्ड के छात्रों के लिए भी विशेष तैयारी करवाई जा रही है।

    परीक्षा की तारीखें तय

    सीबीएसई बोर्ड की कक्षा 10वीं की परीक्षा 17 फरवरी 2026 से शुरू होकर 11 मार्च 2026 तक चलेगी। इस दौरान छात्रों को प्रश्नपत्र हल करने की रणनीति, उत्तर लेखन कौशल और परीक्षा के तनाव से निपटने के तरीकों पर भी मार्गदर्शन दिया जा रहा है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. बीएमसी की कितनी सीबीएसई स्कूलों के छात्र परीक्षा दे रहे हैं?
    👉 10 सीबीएसई स्कूलों के कुल 366 छात्र पहली बार दसवीं की परीक्षा देंगे।

    Q2. परीक्षा कब से कब तक होगी?
    👉 परीक्षा 17 फरवरी 2026 से 11 मार्च 2026 तक चलेगी।

    Q3. छात्रों के लिए क्या विशेष तैयारी करवाई जा रही है?
    👉 सराव प्रश्नपत्र, विशेष कक्षाएं और निजी स्कूलों के विशेषज्ञ शिक्षकों का ऑनलाइन मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

  • सरकारी नौकरी का मौका! WBBPE में 13,000 से ज्यादा प्राइमरी टीचर पदों पर भर्ती शुरू

    सरकारी नौकरी का मौका! WBBPE में 13,000 से ज्यादा प्राइमरी टीचर पदों पर भर्ती शुरू

    “West Bengal में 13,421 Assistant Teacher (Primary) पदों की भर्ती का नोटिफिकेशन जल्द जारी — जानिए योग्यता, चयन प्रक्रिया, आवेदन स्टेप बाय स्टेप और FAQs इस डिटेल न्यूज़ में।”

    West Bengal शिक्षा क्षेत्र में बड़ी खुशखबरी आई है — WBBPE (West Bengal Board of Primary Education) ने 13,421 Assistant Teacher (Primary) पदों की भर्ती की तैयारी शुरू कर दी है। यह भर्ती अधिसूचना Durga Puja के बाद जारी होगी, जैसा कि राज्य शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने पुष्टि की है।

    यह अवसर उन उम्मीदवारों के लिए है, जो West Bengal के सरकारी या सहायता प्राप्त प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक बनना चाहते हैं। इस लेख में हम चरणबद्ध तरीके से आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, चयन प्रक्रिया, तैयारी टिप्स और उपयोगी जानकारी साझा करेंगे।

    पात्रता (Eligibility Criteria)

    📚 शैक्षणिक योग्यता

    उम्मीदवारों को निम्न में से किसी एक योग्यता पूरी करनी होगी:

    • Higher Secondary (equivalent) में न्यूनतम 50% अंक + 2 साल का Diploma in Elementary Education (D.El.Ed.) ([Testbook][2])
    • Higher Secondary में 45% अंक + 2 साल D.El.Ed. (आरक्षित वर्गों के लिए)
    • Higher Secondary + 4 साल B.El.Ed. (Bachelor of Elementary Education)
    • Higher Secondary + 2 साल Diploma in Education (Special Education)
    • Graduation + 2 साल Diploma in Elementary Education (कुछ स्थिति में)

    नोट: आवेदन करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपका शैक्षणिक प्रमाणपत्र मान्यता प्राप्त संस्थान से है और दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हो।

    🎂 आयु सीमा (Age Limit)

    • न्यूनतम आयु: 18 वर्ष
    • अधिकतम आयु: 40 वर्ष
    • आरक्षित वर्गों (SC / ST / OBC / PwD / Ex-Servicemen आदि) को सरकार द्वारा निर्धारित छूट मिलेगी।

    ध्यान दें: आयु की गणना 01 जनवरी 2025 के आधार पर की जाएगी।

    चयन प्रक्रिया (Selection Process)

    चयन केवल एक लिखित परीक्षा पर आधारित नहीं होगा। WBBPE ने विस्तृत मेरिट एवं मूल्यांकन प्रणाली अपनाई है, जिसमें निम्न घटक शामिल होंगे:

    मूल्यांकन घटकअधिकतम अंक
    Madhyamik (Class 10) या समकक्ष5 अंक
    Higher Secondary या समकक्ष10 अंक
    Training (D.El.Ed. / B.El.Ed. आदि)15 अंक
    Teacher Eligibility Test (TET)5 अंक
    Extra-Curricular Activities5 अंक
    Viva-Voce / Interview5 अंक
    Aptitude Test / Teaching Experience (Para-teacher)5 अंक

    इन घटकों के आधार पर कुल मेरिट सूची तैयार की जाएगी।

    वेतन एवं अन्य लाभ (Salary & Benefits)

    अधिसूचना में वेतन को “उपयुक्त सरकारी नियमों के अनुसार” बताया गया है।

    आम अपेक्षाएं यह हैं कि चयनित शिक्षक निम्न लाभ प्राप्त करेंगे:

    • मूल वेतन (Basic Pay)
    • Dearness Allowance (DA)
    • House Rent Allowance (HRA) — पोस्टिंग के स्थान (शहरी/ग्रामीण) पर आधारित
    • Medical Allowance
    • अन्य सरकारी भत्ते (जैसे यात्रा भत्ता, अधिभोग भत्ता आदि)
    • National Pension System (NPS) या अन्य पेंशन योजना

    इन सब कारणों से यह नौकरी स्थिर आय और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है।

    आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Application Guide)

    🗂️ आवश्यक दस्तावेज तैयार करें

    • पासपोर्ट साइज फोटो (स्कैन)
    • हस्ताक्षर (स्कैन)
    • Madhyamik / Class 10 प्रमाणपत्र (आयु-व प्रमाण)
    • Higher Secondary / अन्य उच्च शिक्षा प्रमाणपत्र व अंकपत्र
    • D.El.Ed. / B.El.Ed. / अन्य प्रशिक्षण प्रमाणपत्र
    • TET (Primary) अंक प्रमाणपत्र
    • जाति प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)
    • PwD प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)
    • वैध ई-मेल और मोबाइल नंबर

    🖥️ आवेदन प्रक्रिया

    1. WBBPE की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ (जैसे wbbpe.wb.gov.in या wbprimary / WBBPE नोटिस पेज) ([wbbpe.wb.gov.in][4])
    2. होमपेज पर “Recruitment of Assistant Teachers 2025” लिंक खोजें
    3. अधिसूचना को ध्यानपूर्वक पढ़ें और “Apply Online” बटन पर क्लिक करें
    4. पहले रजिस्ट्रेशन करें — नाम, मोबाइल, ई-मेल आदि
    5. लॉगिन करने पर विस्तृत आवेदन फॉर्म भरें — व्यक्तिगत एवं शैक्षणिक जानकारी
    6. स्कैन किए गए दस्तावेज़ अपलोड करें
    7. आवेदन शुल्क ऑनलाइन भुगतान करें (डेबिट कार्ड / क्रेडिट कार्ड / नेट बैंकिंग आदि)
    8. फॉर्म सबमिट करें और आवेदन की एक प्रतिलिपि (confirmation page) प्रिंट करें

    ध्यान दें: शुल्क जमा करने और आवेदन सबमिट करने की अंतिम तिथि का विशेष ध्यान रखें।

    महत्वपूर्ण तिथियाँ (Tentative / To Be Announced)

    इवेंटतिथि / स्थिति
    अधिसूचना जारी करने की संभावित तिथिDurga Puja के बाद
    ऑनलाइन आवेदन प्रारंभअधिसूचना जारी होते ही
    ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथिअधिसूचना में निर्दिष्ट
    TET (Primary) परीक्षापहले से आयोजित हो चुकी — परिणाम घोषित
    दस्तावेज़ सत्यापन / इंटरव्यूचयन प्रक्रिया के एक भाग के रूप में

    अभी तक आधिकारिक तिथियाँ घोषित नहीं हुई हैं — उम्मीदवारों को WBBPE की वेबसाइट नियमित रूप से चेक करनी चाहिए।

    तैयारी टिप्स और रणनीति

    📌 विषय-वस्तु को गहराई से पढ़ें

    • पाठ्यक्रम (syllabus) को पूरी तरह जानें
    • Child Development & Pedagogy, भाषा (Bengali / English), गणित, पर्यावरण आदि विषयों की तैयारी
    • पिछले वर्ष के प्रश्न (PYQs) हल करें

    📝 मूल्यांकन घटकों को ध्यान में रखें

    • सिर्फ लिखित परीक्षा ही नहीं — Extra-Curricular Activities, TET अंक, Training अंकों का महत्व
    • इंटरव्यू के लिए अच्छी बोल-चाल क्षमता, आत्मविश्वास और शैक्षणिक पृष्ठभूमि पर पकड़ जरूरी

    ⏱️ समय प्रबंधन और अभ्यास

    • मॉक टेस्ट व टाइम-टेबल बनाएं
    • कमजोर विषयों को अधिक समय दें
    • आत्ममूल्यांकन करें और अपनी प्रगति देखें

    📜 दस्तावेज़ पूर्णता

    • सभी प्रमाणपत्रों की कॉपियाँ तैयार रखें
    • स्कैन की गई छवियाँ उच्च गुणवत्ता की हों
    • आवेदन फॉर्म जमा करने से पहले सभी विवरण सही हों

    कानूनी और विवाद संबंधी मामला

    • पिछले भर्ती प्रक्रिया में D.El.Ed. 2020–22 बैच के कई उम्मीदवारों को नियुक्ति न देने को लेकर Supreme Court में विवाद चल रहा है।
    • WBBPE की ओर से कुछ नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले हाई कोर्ट / सुप्रीम कोर्ट में अपीलों को छेड़ने वाले मामले में हैं।
    • इसलिए, इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर कानूनी स्थिति समय-समय पर बदल सकती है — उम्मीदवारों को लेटेस्ट अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।

    FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. क्या बिना TET उत्तीर्ण किए आवेदन किया जा सकता है?
    A1. नहीं। TET (Primary) उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।

    Q2. क्या 45% अंकधारी Higher Secondary छात्र भी आवेदन कर सकते हैं?
    A2. हाँ — यदि वे SC / ST / OBC आदि आरक्षित वर्ग हैं और अन्य शर्तें पूरी करते हों।

    Q3. आवेदन शुल्क कितना है?
    A3. सामान्य वर्ग: ₹600, OBC (A / B): ₹500, SC / ST / EWS / PwD: ₹300

    Q4. क्या किसी विषय में ट्रेनिंग नहीं है तो आवेदन रद्द होगा?
    A4. यदि आप Training / D.El.Ed. / B.El.Ed. आदि शर्तों को पूरा नहीं करते हैं, तो आवेदन मान्य नहीं होगा।

    Q5. चयन सूची में कैसा स्कोर अपेक्षित होगा?
    A5. यह उम्मीदवारों की प्रतिस्पर्धा, अंकों की तुलना, और रिक्तियों पर निर्भर करेगा — सभी मूल्यांकन घटकों का समेकित स्कोर देखें जाएंगे।


    निष्कर्ष

    WBBPE की 13,421 Assistant Teacher भर्ती एक सुनहरा मौका है West Bengal के प्रति शिक्षा प्रेमी युवाओं के लिए। यदि आप पात्र हैं, तो तैयारी अभी से शुरू कर दें, सभी दस्तावेज़ तैयार रखें, नवीनतम सरकारी अधिसूचनाओं पर नजर रखें और आवेदन करते समय सावधानी बरतें। सफलता आपके साथ हो — शुभकामनाएँ!

  • महाराष्ट्र के इन गांवों में पहली बार फहराया तिरंगा

    महाराष्ट्र के इन गांवों में पहली बार फहराया तिरंगा

    महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में एक दूरदराज उदाड्या नामक आदिवासी गांव में आजादी के बाद पहली बार तिरंगा फहराया गया है। जहां बिजली, सड़क और सरकारी स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं अभी तक नहीं पहुंच पाई है। कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया, कि इस कार्यक्रम का मकसद ग्रामीणों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। The tricolor was hoisted for the first time in these villages of Maharashtra

    डिजिटल डेस्क
    महाराष्ट्र/ नंदुरबार:
    सतपुड़ा की पहाड़ियों में बसे एक सुदूर आदिवासी गांव उदाड्या में इस बार देश की 79वां स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। गांव में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज यानी तिरंगा फहराया गया, इस कार्यक्रम के दौरान यहां के निवासियों में गर्व और देशभक्ति की भावना की लहर दौड़ गई। इस गांव में न अब तक बिजली की सुविधा प्राप्त हो पाई है, न सड़क और न ही सरकारी स्कूल या ग्राम पंचायत जैसी आधारभूत व्यवस्थाएं यहां को लोगों को मिली है। The tricolor was hoisted for the first time in these villages of Maharashtra

    आजादी के बाद पहली बार फहरा तिरंगा

    गांव में तैनात शिक्षक गणेश पावरा ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर इंटरनेट से वीडियो डाउनलोड कर तिरंगा फहराने की विधि सीखी और फिर गांव के 30 बच्चों और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर तिरंगा फहराया। यह पहल वाईयूएनजी फाउंडेशन की ओर से की गई, यह संस्था इस क्षेत्र के चार अनौपचारिक स्कूलों का संचालन करती है। संस्था के संस्थापक संदीप देओरे ने बताया कि पहली बार झंडा फहराने के साथ-साथ लोगों को उनके संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना इस कार्यक्रम का मकसद था। The tricolor was hoisted for the first time in these villages of Maharashtra

    200 से अधिक बच्चों ने लिया भाग

    करीब 250 बच्चों और उदाड्या, खपरमाल, सदरी और मंझनीपड़ा जैसे चार गांवों के लोगों ने इस आयोजन में हिस्सा लिया। इन गांवों में संचार, परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं अभी तक प्राप्त नही हो पाई हैं। यहां के लोग पावरी बोली बोलते हैं, जो हिंदी या मराठी से काफी अलग है, इस वजह से संवाद में भी इनको चुनौतियों का सामना करना पडता है। The tricolor was hoisted for the first time in these villages of Maharashtra

    संस्था के अध्यक्ष देओरे ने बताया, कि इन गांवों में शिक्षा की बेहद कमी है और इस वजह से लोग अक्सर अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। कुछ जगहों पर आंगनबाड़ी सेवाएं भी ठीक से नहीं पहुंची है, हालांकि खपरमाल जैसे गांवों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आजमीबाई अपने गांव में ही रहकर ईमानदारी से बच्चों को सेवा प्रदान कर रही है। The tricolor was hoisted for the first time in these villages of Maharashtra

  • रानीबाग में आ गए हैं नए मेहमान, अब बढ़ेगा मुंबई चिड़ियाघर का राजस्व

    रानीबाग में आ गए हैं नए मेहमान, अब बढ़ेगा मुंबई चिड़ियाघर का राजस्व

    मुंबई के भायखला स्थित रानीबाग चिड़ियाघर मे झारखंड से घड़ियाल लाए गए हैं। इसको देखने को मिल बच्चों और पर्यटकों की भीड़ लग रही है। बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने अनुमान लगाया है, कि इससे राजस्व बढ़ने की उम्मीद है। New guests have arrived in Ranibagh, now the revenue of Mumbai Zoo will increase

    मुबई: भायखला सिथित प्रसिद्ध वीरमाता जीजावाई भोसले बॉटनिकल गार्डन और जू (रानीबाग) में हालही में नए मेहमानों की एंट्री हुई है, जिससे बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) का राजस्व बढ़ने की उम्मीद है। रांची के भगवान बरसा मुंडा प्राणी संग्रहालय से चार घड़ियाल यहां प्रशासन द्वारा लाए गए हैं, जो पैंग्विन के साथ मिलकर पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण केंद्र बन गए हैं। ये सभी घड़ियाल 6 से 8 साल के हैं। इनके आगमन से रानीबाग में पर्यटकों में खासकर बच्चों की भीड़ बढ़ने की संभावना है, क्योंकि ये लुप्त हो रही प्रजातियों के प्राणी लोगों को रोमांचक झलक देखने का मौका देंगी। ऐसी जानकारी मनपा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी। New guests have arrived in Ranibagh, now the revenue of Mumbai Zoo will increase

    पक्षियों के बदले मिले घड़ियाल

    Gharials-have-been-brought-from-Jharkhand-to-the-Ranibagh-Zoo-in-Mumbai-Byculla

    इन घड़ियाल के बदले, रांची चिडियाधर को एक सफेद कॉकटेल और चार ग्रे कॉकटेल पक्षी दिए गए हैं। इन घड़ियालों को देखने के लिए देश में पहली बार ग्लास प्रदर्शनी लगाई गई है। इस खास व्यवस्था के तहत, पर्यटक कांच के माध्यम से मगरमच्छों की पानी के अंदर की गतिविधियों को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं, जो उन्हें एक अनोखा अनुभव प्रदान करेगा। यह भी उल्लेखनीय है कि इससे पहले भायखला चिड़ियाघर में मगरमचछों और घड़ियालों के लिए समर्पित आवास की कमी थी। New guests have arrived in Ranibagh, now the revenue of Mumbai Zoo will increase

    पर्यटकों में होगी वृद्धि

    मई 2023 में चिडियाघर ने अपनी तरह का पहला अंडरवाटर यूइंग डेक पेश किया था, जो अब इन नए मेहमानों के साथ और भी आकर्षक हो गया है। इस कदम से न केवल पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, बल्कि वन्य जीव संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। ऐसी जानकारी मनपा अधिकारियों से प्राप्त हो रही है। New guests have arrived in Ranibagh, now the revenue of Mumbai Zoo will increase

  • महाराष्ट्र में NCP शरद पवार गुट ‘हिंदी थोपे जाने’ के खिलाफ मोर्चे का समर्थन करेगी।

    महाराष्ट्र में NCP शरद पवार गुट ‘हिंदी थोपे जाने’ के खिलाफ मोर्चे का समर्थन करेगी।

    महाराष्ट्र में मातृभाषा के संरक्षण में शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सरकारी नीतियों के खिलाफ 5 जुलाई को विरोध मोर्चे का समर्थन किए जाने का ऐलान किया है। शुक्रवार को पार्टी नेता ने इसकी घोषणा कर दी। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई:
    शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) ने शुक्रवार को कहा कि वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से महाराष्ट्र में स्कूली पाठ्यक्रम में हिंदी को ‘थोपे जाने’ के खिलाफ पांच जुलाई को होने वाले विरोध मोर्चे का समर्थन करेंगे। पार्टी नेता ने इसके लिए पार्टी पदाधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से पांच जुलाई को विरोध मोर्चे में बड़ी संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    उद्धव और राज ने मिलाया हाथ

    राज्य सरकार द्वारा नयी शिक्षा नीति के तहत तीन-भाषा फॉर्मूला लागू करने की योजना के खिलाफ यह विरोध आयोजित किया जा रहा है। आप को बता दें कि भाषा विवाद पर 5 जुलाई को उद्धव और राज ठाकरे की संयुक्त रैली होने जा रही है। मराठी मुद्दे को लेकर 20 साल बाद दोनों मंच पर साथ नजर आएंगे। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    राकांपा शरद पवार गुट की घोषणा

    शिक्षा नीति के तहत पहली कक्षा से हिंदी को अनिवार्य बनाना शामिल किया गया है। राकांपा शरद पवार गुट की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख जयंत पाटिल ने एक खुले पत्र में इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा, कि उनकी पार्टी क्षेत्रीय हितों के मामलों में महाराष्ट्र के लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    शरद पवार ने क्या कहा?

    इसके पहले पार्टी प्रमुख शरद पवार ने भी ठाकरे भाइयों को समर्थन देते हुए कहा, कि “महाराष्ट्र में कक्षा 1 से हिंदी अनिवार्य नहीं की जानी चाहिए। अगर कोई नई भाषा शुरू की जानी है तो उसे कक्षा 5 के बाद ही शुरू किया जाना चाहिए।” In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    सरकार ने लिया यू टर्न

    दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने इसी साल अप्रैल में हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बना दिया था। विरोध के बाद उन्होंने फैसले में बदलाव किया। कक्षा 1 से 5वीं तक पढ़ने वाले स्टूडेंट्स तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी के अलावा भी दूसरी भारतीय भाषाएं चुन सकते हैं। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    महाराष्ट्र में मराठी भाषी आबादी का मुद्दा

    एनसीपी शरद पवार गुट के महाराष्ट्र अध्यक्ष पाटिल ने कहा कि इस कदम का शिक्षाविदों, अभिभावकों, भाषाविदों एवं कार्यकर्ताओं ने विरोध किया है और वे सभी दलील दे रहे हैं कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चे की मातृभाषा में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे राज्य में मराठी भाषी आबादी हिंदी सहित कई भाषाओं को सीखने के खिलाफ नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा, कि लेकिन प्राथमिक स्तर पर हिंदी को थोपना हमें अस्वीकार्य है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, कि “अगर तीन-भाषा नीति का इस्तेमाल मातृभाषा को दरकिनार करने के लिए किया जा रहा है, तो मराठी भाषी समुदाय एकजुट होकर ऐसे कदमों का विरोध करेगी।” In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    मराठी भूमिका की रक्षा

    शरद पवार गुट के नेता ने इस मुद्दे को भाषाई और क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा बताते हुए पार्टी पदाधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से पांच जुलाई को विरोध मोर्चे में बड़ी संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है।पाटिल ने कहा कि इस मोर्चे का उद्देश्य स्कूली शिक्षा में मराठी भाषा की भूमिका की रक्षा करना है। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

  • दिल्ली के सभी प्राइवेट स्कूलों को अपने कब्जे में ले लें दिल्ली सरकार

    दिल्ली के सभी प्राइवेट स्कूलों को अपने कब्जे में ले लें दिल्ली सरकार

    • सरकार से डर नहीं लगता शिक्षा माफियाओं को..!
    • दिल्ली का DPS द्वारका स्कूल सुर्खियो में..
    • गेट पर बॉउंसर तैनात कर बढाई मनमानी फीस

    नई दिल्ली: जब सरकारें निशुल्क शिक्षा देने के अपने दायित्व से भागेगी और शिक्षा माफियाओं को आजाद कर देगी तो लूटने के लिए, तो क्या होगा? शिक्षा माफियाओं को न तो सरकार से डर लगता है और न ही शिक्षा विभाग से और न किसी कोर्ट से। बेलगाम घोड़े बन गए हैं। खासकर दिल्ली में सरकारी जमीन पर खुले हुए प्राइवेट स्कूल जो किसी की परवाह किए बिना ही हर वर्ष मनमाने तरीके से फीस बढ़ाते जा रहे हैं। यहां तक कि डायरेक्टरेट ऑफ एज्युकेशन से अनुमति लेने की भी जहमत नहीं उठाते। Delhi government should take over all the private schools in Delhi

    माता-पिता नौकरी करने पर मजबूर

    आज कल दिल्ली का D.P.S द्वारका स्कूल सुर्खियों में है जो गेट पर बाउंसर तैनात करके बढ़ाई गई मनमानी फीस जमा नहीं करने वाले अभिभावकों के बच्चों को गेट पर ही रोककर जबरन बस में उनके घर पहुंचा रहे हैं। चाहे घर में ताला ही क्यों न लगा हो। कारण माता पिता दोनों ही मंहगाई बढ़ाए जाने के कारण नौकरी करने के लिए मजबूर हैं। स्कूल गेट पर तैनात बाउंसर कितने बदतमीज और बेहूदे होंगे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे लड़कियों की बांह तक पकड़कर स्कूल के भीतर जाने से रोकते है। Delhi government should take over all the private schools in Delhi

    कब-कितना फीस बढ़ाया गया?

    D.P.S द्वारका स्कूल की मनमानी देखिए। पिछले पांच वर्षों में बच्चों की फीस को 139630 रुपए से बढ़ाकर 190000 रुपए कर दिया गया है। इसी कड़ी में हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को पैसे कमाने की मशीन और बच्चों के साथ बाउंसरों और स्कूल संचालकों द्वारा पर यातना तक बताया जा रहा है। D.P.S स्कूल द्वारका के द्वारा पिछले पांच वर्षों में फीस मनमाने तरीके से कैसे बढ़ाया गया? इसका नमूना वर्ष 2020/21 में फीस थी 139630 रुपए , 2021/22 में उतनी ही रही, लेकिन 2022/23 में 152510 रुपए कर दी गई। फिर वर्ष 2023/24 में 164844 रूपये, 2024/25 में 176340 रुपए और 2025/26 में पूरे 190000 रुपए कर दी गई है। इसमें विवरण देखा जाए तो ट्यूशन फीस 142800 रुपए, इन्यूअल चार्ज 32016 रुपए और डेवलपमेंट फीस 14280 रुपए जो पैरेंट टीचर मीटिंग की फीस केवल एक बार होने की है। Delhi government should take over all the private schools in Delhi

    क्यों नाम काटा गया?

    इतना ही नहीं, फीस बढ़ाने की सूचना नहीं देने के कारण फीस जमा नहीं कर पाने वाले 32 बच्चों के नाम काट दिए गए। नाम काट देना किस एज्युकेशन मैनुएल में लिखा है? नियमानुसार सरकारी जमीन पर बने स्कूल हॉस्पिटल में 15% लोगों को निःशुल्क सुविधा देनी चाहिए। विवाद डेवलपमेंट फीस को लेकर है। डायरेक्टरेट ऑफ एज्युकेशन के अनुसार दस प्रतिशत फीस बढ़ाई जा सकती है वह भी अनुमति लेकर, लेकिन शिक्षा माफिया कब मानते हैं? जिन बच्चों के नाम काटे गए, उनके मित्र फोन कर पूछते हैं, कि क्यों नाम काटा गया? बच्चों को अकेले घर जबरन छोड़ने के कारण बच्चों के मन में भय उत्पन्न होता है। मानसिक उत्पीड़न होती है और बच्चों को भारी सदमा पहुंचता हैं। इंफ्रियोरिटी कॉम्प्लेक्स पैदा होता है। मनोवैज्ञानिक दबाव से बच्चों के मानसिक संतुलन बिगड़ने का डर रहता है। लेकिन दौलत कमाने की हवस प्राइवेट स्कूल संचालकों में इस कदर हावी है कि उनके बच्चों पर पढ़ने वाले कॉम्प्लेक्स से कोई मतलब नहीं। Delhi government should take over all the private schools in Delhi

    जनता को ही दंडित किया जा रहा है।

    जब सैकड़ों अभिभावक कोर्ट गए तो स्कूल में छुट्टी घोषित कर संचालक फरार हो गए। अभिभावकों ने पुलिस बुलाई तो बिना नेम प्लेट वाली पुलिस पहुंची लेकिन वह खुद बच्चों और उनके अभिभावकों को टॉर्चर करने लगी। पुलिस और स्कूल संस्थापकों द्वारा लगाए गए गुंडों के द्वारा दुर्व्यवहार को अलग अलग नहीं किया जा सकता। दोनों ने ही अमानवीयता का परिचय दिया है। पुलिस जो जनता की रक्षा के लिए होती है उसे जनता के विरुद्ध कर दिया गया। सरकार की तरह उसका प्रशासन भी जनता को ही दंडित करने में लगा है। Delhi government should take over all the private schools in Delhi

    आम आदमी पार्टी की सरकार

    आम आदमी पार्टी का शासन था तब, केंद्र सरकार ने सुप्रीमकोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली आप सरकार से संसद में कानून बनाकर सारे प्रशासनिक अधिकार छीन लिए और मुख्यमंत्री, शिक्षा, स्वास्थ्य मंत्री सहित झूठे शराब मामले में ई डी द्वारा जेल भेजवाया गया था। इसलिए मनमानी फीस बढ़ाने के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का दोष नहीं दिया जा सकता। सारा प्रशासन एल जी के हाथ में दे दिया गया। इसलिए एल जी को संज्ञान लेना चाहिए था, लेकिन नहीं लिया। दुनिया ने देखा किस प्रकार आम आदमी सरकार को बदनाम करने के लिए यमुना नदी की सफाई के लिए एल जी ने कुछ भी नहीं किया और सारा दोष अरविंद केजरीवाल पर मढ़ते रहे। Delhi government should take over all the private schools in Delhi

    सरकार का दायित्व

    जब दिल्ली में बीजेपी सरकार बनी तब कितनी जल्दी मशीनें लगाकर यमुना को साफ करने का ढिंढोरा पीटा गया, जबकि आज भी दिल्ली के गंदे नाले लगातार कई घाटों के पास नाले का गंदा पानी यमुना में छोड़ रहे हैं।
    शुक्र है बीजेपी की दिल्ली सरकार कम से कम प्राइवेट स्कूलों की ऑडिट करने लगी है। लेकिन यह भी अपर्याप्त है। शिक्षा, रोजगार और चिकित्सा निःशुल्क देना सरकार का दायित्व है। Delhi government should take over all the private schools in Delhi

    स्कूल कॉलेज बने लूट के धंधे

    लेकिन केंद्र सरकार ने अपने दायित्व निभाने के स्थान पर शिक्षा को प्राइवेट हाथों में सौप कर लूटने के लिए खुला छोड़ दिया। जिसके कारण समूचे देश में शिक्षा माफिया स्कूल कॉलेज को लूट का धंधा बना लिए हैं। इन माफियाओं पर लगाम लगाने का दायित्व सरकार का है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ही नहीं समूचे देश के मुख्यमंत्रियों का दायित्व बनता है कि वह समान शिक्षा नीति अपनाए और सभी प्राइवेट स्कूलों को अधिग्रहीत कर लें ताकि जनता का शोषण नहीं हो। Delhi government should take over all the private schools in Delhi

  • मुम्बई यूनिवर्सिटी की गलती, लाखों छात्रों के लिए बनी मुसीबत

    मुम्बई यूनिवर्सिटी की गलती, लाखों छात्रों के लिए बनी मुसीबत

    Mumbai University Certificate Mistake : मुम्बई यूनिवर्सिटी ने इतनी बड़ी गलती कर दी है कि अब लाखों छात्रों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है। मुम्बई यूनिवर्सिटी ने 2023-24 बैच के ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट पर अपने नाम की स्पेलिंग ही गलत छाप दी है। छात्रों को सही सर्टिफिकेट मिलने में देरी होगी। यूनिवर्सिटी अब इस गलती को सुधारने में लगी है। (Mumbai University’s mistake, creating trouble for lakhs of students)

    मुम्बई : अक्सर जरूरी दस्तावेजों पर नाम में गडबडी या स्पेलिंग मिस्टेक के कारण लोगों को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। उनमें ख़ासकर पढाई के सर्टिफिकेट में अगर मिस्टेक हो जाए तो लोग उसे जाली समझ लेते हैं। मुम्बई यूनिवर्सिटी ने भी कई बार ऐसी गलती की है। लेकिन इस बार तो यूनिवर्सिटी ने खुद अपने नाम की स्पेलिंग ही गलत छाप दी है। 2023-24 बैच के ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट पर ‘University of Mumabai‘ लिखा हुआ है। इसमें “Mumbai” की जगह “Mumabai” लिखे होने से पूरा सर्टीफिकेट ही जाली नजर आ रहा है। ये सारे सर्टिफिकेट कई कॉलेजों को भेज दिए गए हैं। अब कई कॉलेज इन सर्टिफिकेटों को वापस कर रहे हैं। (Mumbai University’s mistake, creating trouble for lakhs of students)

    एक कॉलेज के प्रिंसिपल ने कहा, ‘अपने ही नाम की स्पेलिंग गलत करना मुम्बई युनिवर्सिटी के लिए शर्मनाक बात है।’ एक दूसरे प्रिंसिपल ने कहा, ‘ऊपर गलत नाम की वजह से लोगो को सर्टिफिकेट नकली लग रहे हैं। सोचिए, अगर छात्र नौकरी या आगे की पढ़ाई के लिए इन सर्टिफिकेट का इस्तेमाल करेंगे तो क्या होगा?’ (Mumbai University’s mistake, creating trouble for lakhs of students)

    सर्टिफिकेट की वापस से होगी मांग

    प्रिंसिपल ने आगे कहा, ‘नए सर्टिफिकेट छपवाने से छात्रों को उन्हें मिलने में देरी होगी। कई छात्रों को आगे की पढ़ाई या नौकरी मिल चुकी होगी, और शायद उन्होंने इस गलती पर ध्यान भी नहीं दिया होगा।’ प्रिंसिपल ने बताया कि अब सभी गलत सर्टिफिकेट उन बच्चों से वापस मंगवाने पड़ेंगे। (Mumbai University’s mistake, creating trouble for lakhs of students)

    हैदराबाद की कंपनी ने की गड़बड़ी

    मुम्बई विश्वविद्यालय ने सर्टिफिकेट छापने का काम हैदराबाद की एक कंपनी को दिया था। अब यूनिवर्सिटी इस गलती को सुधारने में लगी है। Mumbai University के प्रवक्ता ने बताया कि ‘छपाई की समस्या के कारण कुछ सर्टिफिकेट में गलतियां हो गई हैं।’ लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि कितने सर्टिफिकेट में गलती हुई है? प्रवक्ता ने कहा, ‘हम इसे सुधार रहे हैं। छात्रों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के नए सर्टिफिकेट मिलेंगे।’ उन्होंने यह भी बताया कि गलती का पता चलते ही यूनिवर्सिटी ने इसे सुधारना शुरू कर दिया है। सभी कॉलेजों को अभी तक सर्टिफिकेट नहीं भेजे गए हैं। बाकी कॉलेजों को सही सर्टिफिकेट भेजे जाएंगे। (Mumbai University’s mistake, creating trouble for lakhs of students)

    लापरवाही पर नाराज

    एक प्रिंसिपल ने बताया कि पिछले कुछ सालों में सर्टिफिकेट में गलतियां कम हुई हैं। क्योंकि मुम्बई युनिवर्सिटी छात्रों को अपनी जानकारी जांचने और उसमें सुधार करने का मौका देता है। यह सब छपाई से पहले होता है। इससे गलतियां कम हो जाती हैं। इस बार हुई गलती वाकई में बड़ी है और उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी। छात्रों के भविष्य से जुड़े इन दस्तावेजों को तैयार करने में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। यूनिवर्सिटी को अपनी प्रक्रियाओं की समीक्षा करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो। यह घटना छात्रों और उनके माता-पिता के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी जल्द से जल्द सही सर्टिफिकेट उपलब्ध करा देगी। (Mumbai University’s mistake, creating trouble for lakhs of students)