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  • महाराष्ट्र में NCP शरद पवार गुट ‘हिंदी थोपे जाने’ के खिलाफ मोर्चे का समर्थन करेगी।

    महाराष्ट्र में NCP शरद पवार गुट ‘हिंदी थोपे जाने’ के खिलाफ मोर्चे का समर्थन करेगी।

    महाराष्ट्र में मातृभाषा के संरक्षण में शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सरकारी नीतियों के खिलाफ 5 जुलाई को विरोध मोर्चे का समर्थन किए जाने का ऐलान किया है। शुक्रवार को पार्टी नेता ने इसकी घोषणा कर दी। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई:
    शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) ने शुक्रवार को कहा कि वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से महाराष्ट्र में स्कूली पाठ्यक्रम में हिंदी को ‘थोपे जाने’ के खिलाफ पांच जुलाई को होने वाले विरोध मोर्चे का समर्थन करेंगे। पार्टी नेता ने इसके लिए पार्टी पदाधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से पांच जुलाई को विरोध मोर्चे में बड़ी संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    उद्धव और राज ने मिलाया हाथ

    राज्य सरकार द्वारा नयी शिक्षा नीति के तहत तीन-भाषा फॉर्मूला लागू करने की योजना के खिलाफ यह विरोध आयोजित किया जा रहा है। आप को बता दें कि भाषा विवाद पर 5 जुलाई को उद्धव और राज ठाकरे की संयुक्त रैली होने जा रही है। मराठी मुद्दे को लेकर 20 साल बाद दोनों मंच पर साथ नजर आएंगे। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    राकांपा शरद पवार गुट की घोषणा

    शिक्षा नीति के तहत पहली कक्षा से हिंदी को अनिवार्य बनाना शामिल किया गया है। राकांपा शरद पवार गुट की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख जयंत पाटिल ने एक खुले पत्र में इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा, कि उनकी पार्टी क्षेत्रीय हितों के मामलों में महाराष्ट्र के लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    शरद पवार ने क्या कहा?

    इसके पहले पार्टी प्रमुख शरद पवार ने भी ठाकरे भाइयों को समर्थन देते हुए कहा, कि “महाराष्ट्र में कक्षा 1 से हिंदी अनिवार्य नहीं की जानी चाहिए। अगर कोई नई भाषा शुरू की जानी है तो उसे कक्षा 5 के बाद ही शुरू किया जाना चाहिए।” In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    सरकार ने लिया यू टर्न

    दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने इसी साल अप्रैल में हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बना दिया था। विरोध के बाद उन्होंने फैसले में बदलाव किया। कक्षा 1 से 5वीं तक पढ़ने वाले स्टूडेंट्स तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी के अलावा भी दूसरी भारतीय भाषाएं चुन सकते हैं। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    महाराष्ट्र में मराठी भाषी आबादी का मुद्दा

    एनसीपी शरद पवार गुट के महाराष्ट्र अध्यक्ष पाटिल ने कहा कि इस कदम का शिक्षाविदों, अभिभावकों, भाषाविदों एवं कार्यकर्ताओं ने विरोध किया है और वे सभी दलील दे रहे हैं कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चे की मातृभाषा में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे राज्य में मराठी भाषी आबादी हिंदी सहित कई भाषाओं को सीखने के खिलाफ नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा, कि लेकिन प्राथमिक स्तर पर हिंदी को थोपना हमें अस्वीकार्य है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, कि “अगर तीन-भाषा नीति का इस्तेमाल मातृभाषा को दरकिनार करने के लिए किया जा रहा है, तो मराठी भाषी समुदाय एकजुट होकर ऐसे कदमों का विरोध करेगी।” In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    मराठी भूमिका की रक्षा

    शरद पवार गुट के नेता ने इस मुद्दे को भाषाई और क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा बताते हुए पार्टी पदाधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से पांच जुलाई को विरोध मोर्चे में बड़ी संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है।पाटिल ने कहा कि इस मोर्चे का उद्देश्य स्कूली शिक्षा में मराठी भाषा की भूमिका की रक्षा करना है। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

  • बकरी ईद के पहले बीजेपी नेता किरीट सोमैय्या का बड़ा बयान, बोले “नहीं कटने दूंगा बकरे”

    बकरी ईद के पहले बीजेपी नेता किरीट सोमैय्या का बड़ा बयान, बोले “नहीं कटने दूंगा बकरे”

    Mumbai News: बीजेपी नेता किरीट सोमैय्या ने आरोप लगाते हुए कहा कि एनसीपी शरद पवार, कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की वोट जिहाद की सेना ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करती है। इस बार मैं खुद ग्राउंड पर हूँ। नहीं काटने दूंगा बकरा .. BJP leader Kirit Somaiya made a big statement before Bakri Eid, said “I will not let goats be slaughtered”

    मुंबई: बकरी ईद के मद्देनजर बीजेपी नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैय्या रहिवासी चालों और इमारतों का दौरा कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता रविवार 25 मई को घाटकोपर स्थित मैत्री को-ऑपरेटिव सोसायटी और दामोदर पार्क का दौरा किया। इसी परिसर में बकरा ईद को लेकर पहले भी दो गुटों के बीच विवाद देखने को मिला था। अब एक बार फिर कुछ रहिवासियों का विरोध देखने को मिल रहा है। BJP leader Kirit Somaiya made a big statement before Bakri Eid, said “I will not let goats be slaughtered”

    बकरा नहीं काटने दूंगा ..

    बीजेपी नेता किरीट सोमैय्या ने आरोप लगाते हुए कहा, कि “एनसीपी शरद पवार, कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की वोट जिहाद की सेना ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करती है। यह सब वोट जिहाद के लिए हो रहा है। अगली बार अगर कोई दहशत फैलाने के लिए ऐसा कोई काम करेगा, यानी बकरा काटेगा तो हम ऐसा नहीं होने देंगे।” BJP leader Kirit Somaiya made a big statement before Bakri Eid, said “I will not let goats be slaughtered”

    किरीट सोमैया हुए हमलावर

    उन्होंने आगे कहा, कि “पिछली बार महानगरपालिका अधिकारियों और माफिया ने पुलिस को धमकी देकर घाटकोपर में बकरा काटा था। इस बार मैं खुद ग्राउंड पर हूं। एनसीपी शरद पवार, उद्धव की सेना या राहुल गांधी की कांग्रेस का यहां पर टारगेट ही है वोट जिहाद करने का।” उन्होंने कहा, “पहलगाम हमले के बाद हमने जो जवाब दिया, वैसा ही अमेरिका में भी वोट जिहाद किया गया। भगवान उन्हें सद्‌बुद्धि दे।” BJP leader Kirit Somaiya made a big statement before Bakri Eid, said “I will not let goats be slaughtered”

    हिजरी कैलेंडर का आखिरी महीना

    ईद उल-अजहा मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए अहम हिस्सा है। इस पर आम बोलचाल की भाषा में बकरा ईद भी कहा जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक बकरी ईद का त्योहार जुल हिज्जा (Dhul Hijjah) महीने की दसवीं तारीख को मनाया जाता है, जोकि हिजरी कैलेंडर का 12वां या आखिरी महीना होता है। BJP leader Kirit Somaiya made a big statement before Bakri Eid, said “I will not let goats be slaughtered”

    कब है बकरी ईद ?

    इस साल बकरी ईद का त्योहार 6 या 7 जून को मनाने की संभावना है। इस त्योहार को लेकर तारीख की आधिकारिक घोषणा चांद नजर आने के बाद ही की जाएगी। बकरी ईद का अर्थ सिर्फ जानवरों की कुर्बानी मात्र से नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक अर्थ बहुत ही गहरा है। यह पर्व अल्लाह के प्रति समर्पण, त्याग और दान से जुड़ा हुआ है। इसकी मान्यता है कि बकरा ईद पर कुर्बानी के हिस्से को तीन भागों में तकसिम किया जाया है। पहला गरीब और जरूरतमंदों को, दूसरा हिस्सा मित्रों और रिश्तेदारों के लिए और तीसरी हिस्सा अपने घर-परिवार के लिए रखा जाता है। साथ ही ईद की नमाज़ से पहले जकत, फितरे का पैसा निकाला जाता है। जो ज़रूरतमंदों को देकर उनकी मदद की जाती है। BJP leader Kirit Somaiya made a big statement before Bakri Eid, said “I will not let goats be slaughtered”

  • मालवनी कच्चा रोड़ और एवरशाइन को जोड़ने वाला ब्रिज क्यों तोडना है जरूरी?

    मालवनी कच्चा रोड़ और एवरशाइन को जोड़ने वाला ब्रिज क्यों तोडना है जरूरी?

    मालाड़ पश्चिम के मालवनी कच्चा रोड़ से एवरशाइन नगर को जोड़ने वाले ब्रिज को लेकर भारतीय जनता पार्टी बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए लोगों की मुलभुत सुविधाओं से खिलवाड़ कर रही है। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    मालाड़ पश्चिम के एक छोटे से ब्रिज को लेकर राजनीती तेज हो गई है। लेकिन इस राजनीतिक खेल में अकेले भारतीय जनता पार्टी लोगों के मुलभुत सुविधाओं के साथ खेल कर रही है और दूसरी पार्टियों के स्थानीय दिग्गज नेता मुकदर्शी बने तमाशा देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि ये सारा खेल एवरशाइन नगर के किनारे खाली पड़ी जमीन के बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। जबकि यही जमीन कभी मैंग्रोवस से भरी हुआ करती थी। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    भाजपा की दोहरी राजनीति से लोग परेशान

    खबर के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा मुंबई अध्यक्ष तेजिंदर सिंह तिवाना एवरशाइन नगर के निवासियों की आवाज बनकर मालवनी कच्चा रोड़ और एवरशाइन नगर को जोड़ने वाले ब्रिज को तोड़ने की मांग कर रहे हैं। शिकायत के आधार पर कहा जा रहा है कि इस ब्रिज पर बाइक सवारों की वजह से दुर्घटना का खतरा है। जबकि एक समाजसेवक को यह जानने की जरूरत है कि इस ब्रिज के कारण लाखों लोगों को सफर करने में सहूलियत मिलती है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो शहर में कोई भी किसी भी रोड़ और रास्ते को बंद करने की मांग को लेकर आंदोलन पर बैठ जाएगा और दूसरी तरफ अगर इस ब्रिज को तोड़ दिया गया तो लाखों लोगों को मालवनी से बाहर निकलने के लिए लंबा और ट्रेफिक से जाम का सफर तय करना पडेगा। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    आम लोगों ने क्या कहा?

    दूसरी तरफ लोगों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी को मालवनी की जनता से कोई लेना देना नही है वो अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकती है। लेकिन हमारे इलाके के विधायक क्यों खामोश हैं। एक तरफ इसी ब्रिज को बनाने के लिए सरकारी खजाने का करोड़ों रूपया खर्च किया जाता है और दूसरी तरफ बेतूके कारण बता कर उसे तोड़कर आम लोगों का नुकसान किया जाता है। ये तो आम जनता के साथ सरासर अन्याय है। बता दें कि भाजपा के तेजिंदर सिंह तिवाना बेतूके कारण बताकर आंदोलन का इशारा दे रहे हैं। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    क्या है पूरा मामला?

    तेजिंदर सिंह ने बताया कि एवरशाइन नगर के निवासियों ने पुल पर अवैध रूप से बनाए गए रैंप को ध्वस्त करने के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम और मुंबई पुलिस को अल्टीमेटम देने का फैसला किया है। निवासियों ने इस पैदल यात्री पुल का उपयोग करने वाले दोपहिया वाहन सवारों के लिए खतरे पर चर्चा करने के लिए शनिवार शाम को एक सार्वजनिक बैठक का आयोजन किया। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    निवासियों द्वारा BMC और पुलिस को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि रैंप के कारण कई दुर्घटनाएँ हुई हैं, जिनमें से कई में वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं। निवासियों ने बाइकर्स को प्रवेश की अनुमति देने वाले रैंप को ध्वस्त करने, FOB पर बाइकर्स को इसका उपयोग करने से रोकने के लिए ट्रैफ़िक पुलिस को तैनात करने और बाइकर्स को पुल पर जाने से रोकने के लिए बोलार्ड लगाने की मांग की है। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    विरोध प्रदर्शन की योजना

    निवासियों ने 20 जनवरी तक की समयसीमा तय की है, जिसके विफल होने पर वे एक बड़े विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं, जिसमें एवरशाइन नगर के निवासी और भाजपा कार्यकर्ता तजिंदर सिंह तिवाना द्वारा अनिश्चितकालीन अनशन भी शामिल है। बैठक में तिवाना ने कहा, “हमने इन अवैध रैंपों को गिराने के लिए बीएमसी और अन्य अधिकारियों को पत्र लिखा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    समाज सेवकों से अपील

    इस ब्रिज को जबरन अगर प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। तो मालवनी और मालाड़ के लाखों समाजसेवकों और आरटीआइ कार्यकर्ताओं से अनुरोध है कि एवरशाइन से सटे रिक्त भूखंड पर क्या होने वाला है उस पर नजर बनाए रखें। बता दें कि इसके पहले यहाँ मैंग्रोवस की घनी झाडियां हुआ करती थी। कुछ साल पहले इसी ब्रिज के अचानक गिर जाने की वजह से काफी सारे लोग घायल हुए थे। उसी समय धडल्ले से यहा अवैध मिट्टी की भरनी कर मैंग्रोवस को नष्ट कर दिया गया। इस अवैध भरनी की शिकायत पर भरनी माफिया चौरसिया के खिलाफ मालवनी पुलिस थाने में एफआईआर भी दर्ज है। जबकि ध्यान देने बात यह है कि आज भी यहां मैंग्रोवस की झाड़ियां मौजूद है। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

  • चुनाव खत्म हुआ तो विवादों में फंसी ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना’, क्या हुआ 2100  का वादा?

    चुनाव खत्म हुआ तो विवादों में फंसी ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना’, क्या हुआ 2100  का वादा?

    महाराष्ट्र सरकार की ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना’ अब विवादों में फंस गई है। सरकार इसमें अनियमितता को लेकर क्रॉस वेरिफिकेशन कर रही है। वहीं, विपक्ष ने आरोप लगाया है कि चुनाव खत्म तो मामला खत्म। साथ ही राज्य के कृषि मंत्री का कहना है कि इससे किसानों की कर्जमाफी योजना प्रभावित हो रही है। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    नितिन तोरस्कर (मंत्रालय प्रतिनिधि)
    मुंबई-
    महाराष्ट्र में बहुचर्चित ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना‘ अब विवादों में फंस गया है। 2 महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव से कुछ ही महीने पहले महायुति गठबंधन ने इस योजना को लागू किया और चुनाव प्रचार में इसका भरपूर इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं, चुनाव से पहले महिलाओं के बैंक खातों में 1500 रुपए की कुल 5 किश्तें भी जमा कराई और दावा किया गया कि चुनाव जीतते ही इस योजना के लाभार्थियों को 1500 की जगह 2100 रुपए दिया जाएगा। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    2100 बना चुनावी जुमला

    राज्य की महिलाओं ने महायुति को चुनाव तो जिता दिया, लेकिन अब तक उनके खाते में 2100 रुपये की रकम नहीं आई। और तो और 1500 देने मे भी सरकार आना-कानी कर रही है। राज्य के कृषि मंत्री ने यहां तक ​​कह दिया कि लाडकी बहिन योजना की वजह से किसानों की कर्जमाफी योजना प्रभावित हो रही है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना’ अब विवादों में आ गई है। विधानसभा चुनाव में वादा किया गया था कि चुनाव जीतने के बाद इस योजना की राशि 1500 से बढ़ाकर 2100 कर दी जाएगी। लेकिन चुनाव जीतते ही इस योजना के लाभार्थियों की जांच शुरू कर दी गई। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    कहां हुई गडबडी ?

    आरोप है कि बड़ी संख्या में महिलाओं ने इस योजना के तहत दो बार पंजीकरण कराया और दो बार पैसे भी ले लिए। एक ही घर की 4 से 5 महिलाओं ने इस योजना का लाभ उठाया। जिनके पास 4 पहिया वाहन हैं वे भी लाभार्थी बन गईं और जो शादी करके दूसरे राज्य में चले गए है उन लोगों ने भी इस योजना का फायदा उठा लिया। इतना ही नहीं, जिनकी सालाना आय 2.5 लाख से अधिक है वो भी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। अब सरकारी यंत्रणा ऐसे लाभार्थियों की सूची बनाकर उन्हें इस योजना से हटा रही है। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    क्रॉस वेरिफिकेशन

    अब तक 1.5 करोड़ से अधिक महिलाएं इस योजना से जुड़ चुकी हैं, जबकि सूची छांटने के बाद यह संख्या करीब 25 लाख कम हो जाएगी. वहीं, राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे का कहना है कि पात्र लाभार्थियों को क्रॉस वेरिफिकेशन प्रक्रिया से परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले 2 महीनों में हमारे पास लाडकी बहिन योजना लाभार्थियों के बारे में कुछ शिकायतें मिली हैं, जिनके आधार पर क्रॉस वेरिफिकेशन किया जाएगा। आईटी विभाग की मदद ली जा रही है। आधार कार्ड का क्रॉस वेरिफिकेशन किया जाएगा। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों को इस प्रक्रिया से परेशान होने की जरूरत नहीं है। हमारा उद्देश्य है कि अधिकतम लाभार्थियों को योजना का लाभ मिले। लेकिन हमें जो शिकायतें मिली हैं, उनका समाधान करने की जरूरत है। इस योजना का उद्देश्य राज्य की महिलाओं को सशक्त बनाना और जिनके परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपए से कम है, उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करना है। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    विपक्ष और पक्ष दोनों ने लगाया आरोप

    महाराष्ट्र सरकार की ‘माझी लाडकी बहिन योजना’ को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनावी फायदे के लिए बिना उचित जांच के इस योजना को शुरू कर दिया गया, जिसके कारण अपात्र लाभार्थियों को भी इसका फायदा मिला। शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि सरकार ने वोट पाने के लिए मानदंडों को सख्ती से लागू किए बिना लाभार्थियों को पैसे बांटे। राउत ने यह भी कहा, कि ‘वह सिर्फ चुनावी नारा था, चुनाव से पहले पैसे देकर वोट लिए गए, उसके बाद मामला खत्म हो गया।’ (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    एक ही महिला को कई योजनाओं का मिला लाभ

    वहीं, महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे ने भी आरोप लगाया कि लड़की बहन योजना के कारण किसानों के हित की कई योजनाएं बंद हो गईं। उन्होंने अपनी ही सरकार के लाडकी बहिन योजना पर 45 हजार करोड़ और किसान कर्ज योजना पर 15 हजार करोड़ हर साल व्यर्थ में बांटने का आरोप लगाया। अब अगर हमारे मंत्रालय को और पैसा मिलेगा तो हम किसानों को किसान सम्मान योजना का लाभ दे पाएंगे। वैसे भी इस योजना का पैसा महिलाएं लेती हैं और सिर्फ प्रपंच पर खर्च करती हैं। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    उन्होंने कहा, ‘इस बात को सभी लोग जानते हैं कि हमारे घर में भी महिलाएं हैं। महिलाओं को दिया जाने वाला पैसा अब सिर्फ प्रपंच पर खर्च होता है। लड़की बहन योजना का पैसा भी इधर-उधर किया गया। बच्चों के लिए ये लो, उनके लिए वो लो। बेकार का खर्च, और कुछ नहीं.’ उनका कहना है कि जो महिलाएं मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना में सरकारी पैसा ले रही हैं, उन्हें किसान सम्मान योजना में पैसा नहीं लेना चाहिए। मुझे बताइए कि एक महिला दो सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे ले सकती है? सरकार को इस पर जीआर लाना चाहिए। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    क्या बंद हो जाएगा मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना ?

    मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना को लेकर विवादों के बीच लोगों में इस योजना को बंद किए जाने को लेकर चर्चाऐ आम होने लगी है। लोगों को अब लगने लगा है कि शायद महायुति की सरकार ने लोगों को ‘चुनावी जुमले’ जैसे वादों मे फंसा कर धोखा दिया है और अब चुनाव मे जीत हासिल करने के बाद पैसा देना बंद कर दिया है। वहीं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया है कि इस योजना को बंद नहीं किया जाएगा और पात्र लाभार्थियों को सहायता मिलती रहेगी। उन्होंने कहा, कि सरकार ने लाडकी बहिन योजना शुरू की थी, लेकिन विपक्ष ने इसमें बाधा डालने की कोशिश की। फिलहाल ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना’ को बंद नहीं किया गया है। हालांकि, सरकार ने संकेत दिया है कि पात्रता मानदंडों की सख्ती से जांच की जाएगी ताकि केवल पात्र लाभार्थियों को ही इसका लाभ मिल सके। इससे यह सुनिश्चित होगा कि योजना का उद्देश्य सही लाभार्थियों तक पहुंचे और किसी भी तरह की अनियमितता से बचा जा सके। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

  • पवार गुट ‘विलय’ की चर्चा! आदित्‍य ठाकरे ने की फडणवीस से मुलाकात

    पवार गुट ‘विलय’ की चर्चा! आदित्‍य ठाकरे ने की फडणवीस से मुलाकात

    Ajit Pawar and Sharad Pawar: महाराष्‍ट्र में विधानसभा चुनावों के बाद सभी दल अपने हिसाब से भविष्‍य की राह बुन रहे हैं। दरअसल आने वाले नगरपालिका एवं पंचायत चुनाव को लेकर सभी दल नए सिरे से तैयारी कर रहे हैं। (Discussion of ‘merger’ of Pawar groups! Aditya Thackeray met Fadnavis)

    नितिन तोरस्कर (मंत्रालय प्रतिनिधि)
    मुंबई
    – महाराष्‍ट्र की सियासत में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) अजित पवार और शरद पवार गुट आपस में विलय करने की इस वक्‍त सबसे ज्‍यादा चर्चा और बहस का कारण बनी हुई है। अब इन चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे की शिवसेना गुट के नेता आदित्‍य ठाकरे ने एक बार फिर सीएम देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। कुछ दिन पहले भी नागपुर में उद्धव और आदित्‍य ठाकरे ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। उसके बाद उद्धव की पार्टी के मुखपत्र सामना में सीएम फडणवीस के कार्यों की तारीफ की गई थी। (Discussion of ‘merger’ of Pawar groups! Aditya Thackeray met Fadnavis)

    आदित्य ठाकरे ने क्या कहा?

    इस गर्म जोशी भरी मुलाकात के बाद आदित्य ठाकरे ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, “आज हमने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बातचीत की और विनती की है कि जो ‘वॉटर फॉर ऑल’ योजना है, जिसे हम लेकर आए थे उस पर वे वापस अमल करें। पिछली एकनाथ शिंदे सरकार ने इस योजना को ‘स्थगित’ कर दिया था। हम चाहते हैं कि मुंबई के हर घर को पानी मिलना चाहिए। (Discussion of ‘merger’ of Pawar groups! Aditya Thackeray met Fadnavis)

    गठबंधन बन-बिगड़ सकते है।

    कामकाज के सिलसिले में मिलने-जुलने में कोई खास बात नहीं है लेकिन पवार परिवार में चल रही हलचल के बीच आदित्‍य ठाकरे की मुलाकात मायने रखती है। दरअसल महाराष्‍ट्र में विधानसभा चुनावों के बाद सभी दल अपने हिसाब से भविष्‍य की राह बुन रहे हैं। इसी बीच राज्य में आने वाले नगरनिगम एवं पंचायती चुनाव को लेकर सभी दल नए सिरे से तैयारियां कर रहे हैं। वैसे भी महाराष्‍ट्र के जानकार कह रहे हैं क‍ि अब विधानसभा चुनाव के बाद यहां नए सिरे से गठबंधन बन-बिगड़ सकते हैं। (Discussion of ‘merger’ of Pawar groups! Aditya Thackeray met Fadnavis)

    पवार का पावर गेम

    एक तरफ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को एकजुट करने वाले राजनेता इस आधार पर पैरोकारी कर रहे हैं, कि महाराष्‍ट्र में यदि अजित पवार और शरद पवार की पार्टी का आपस में विलय हो जाए तो उनका वोट प्रतिशत बढ़कर 20% हो जाएगा। इसके साथ ही शरद पवार की पार्टी में 8 लोकसभा और चार राज्‍यसभा सांसद हैं। अजित गुट के पास एक लोकसभा सदस्‍य है। इन सबके एक साथ आने से केंद्र सरकार में एनसीपी का प्रतिनिधित्‍व होगा। इसके अलावा पूरे महाराष्‍ट्र में अजित पवार के पास 41 और शरद पवार के पास 10 विधायक हैं। इनके एकजुट होने से डिप्‍टी सीएम अजित पवार का महाराष्‍ट्र में दबदबा बढ़ेगा। (Discussion of ‘merger’ of Pawar groups! Aditya Thackeray met Fadnavis)

    इंडिया की जगह NDA की शरण

    इसी तरह उद्धव ठाकरे की शिवसेना के भीतर भी मंथन का दौर चल रहा है. पार्टी के कुछ नेता दबे स्‍वरों में राज ठाकरे की महाराष्‍ट्र नवर्निमाण सेना को एक साथ लाने की मांग कर रहे हैं। उनका मकसद ठाकरे परिवार को एकजुट करके शिवसेना की खोई हुई ताकत को फिर से हासिल करना है। एकनाथ शिंदे के अलग होने के बाद उद्धव की पार्टी कमजोर हुई है। उद्धव के पास केवल 20 विधायक हैं। वहीं कुछ नेता कांग्रेस और इंडिया गठबंधन से हटने की बात कह रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने के बाद ही शिवसेना अपनी फायरब्रांड हिंदू छवि को हासिल करने में सक्षम हो सकती है। ऐसे लोग इंडिया गठबंधन की जगह एनडीए में जाने के पक्षधर हैं। महाराष्‍ट्र और केंद्र में अगले पांच साल तक कोई चुनाव नहीं होने वाला है। उसको देखते हुए सियासी दल नए सिरे से अपनी तैयारियों में लग गए हैं। (Discussion of ‘merger’ of Pawar groups! Aditya Thackeray met Fadnavis)

  • इलेक्शन कमीशन की हो गई कमाई, महाराष्ट्र में छाप डाले नोट

    इलेक्शन कमीशन की हो गई कमाई, महाराष्ट्र में छाप डाले नोट

    Maharashtra Election: चुनाव कराने से इलेक्शन कमीशन भी पैसा कमा लेते हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद यह साफ हो गया। महाराष्ट्र में इस बार 4 हजार से ज्यादा उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। जिनमें से 3500 से भी ज्यादा उम्मीदवारों की बहुत बुरी तरह हार हुई है और इसका सीधा फायदा आयोग को हुआ…

    नितिन तोरस्कर (मंत्रालय प्रतिनिधि)
    मुम्बई-
    महाराष्ट्र चुनाव के नतीजे सभी के सामने है। महाराष्ट्र में अब मुख्यमंत्री कौन होगा? इसको लेकर भी बैठकों का दौर शुरू हो गया है। महाराष्ट्र में अगला सीएम देवेंद्र फणडवीस होंगे या फिर से एक बार दोबारा एकनाथ शिंदे शपथ लेंगे ? ये आज शाम तक साफ हो जाने वाला है। लेकिन महाराष्ट्र में इस बार चुनाव लड़ने वाले 4,136 उम्मीदवारों में से 3,515 यानी 85 प्रतिशत उम्मीदवारों की जमानत राशि जब्त हो गई है। क्योंकि वह चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित न्यूनतम वोट अपने लिए हासिल करने में असफल रहे हैं। कुल मिलाकर चुनाव आयोग को जब्त जमानत राशि से 3.5 करोड़ रूपए की कमाई हो गई है, जो पिछले 10 सालों में सबसे ज्यादा है।

    2014 के चुनाव की बात करें तो 4, 119 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा और 3, 422 यानी 83.1 प्रतिशत उम्मीदवारों की जमानत राशि जब्त हो गई थी। जो 3.4 करोड़ रुपए थी‌। 2019 में 3, 237 उम्मीदवारों में से 80.5 प्रतिशत उम्मीदवारों ने अपनी जमानत राशि खोई थी, जिसके कारण आयोग को 2.6 करोड़ रुपए की कमाई हुई थी। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत यदि कोई उम्मीदवार अपने निर्वाचन क्षेत्र में डाले गए कुल वैध मतों का कम से कम छठा हिस्सा प्राप्त करने में विफल रहता है, तो उसकी जमानत राशि जब्त कर ली जाती है। प्रत्येक विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार को 10,000 रुपए की जमानत राशि जमा करनी होती है। जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों को ₹5,000 रुपए जमा करने होते हैं।

    महाराष्ट्र में किसको हुआ सबसे ज्यादा नुकसान?

    दो प्रमुख गठबंधनों में से, महाविकास अघाड़ी (MVA) को सबसे बड़ा नुकसान हुआ है। जिसमें 22 सीटों पर जमानत राशि जब्त हो गई। कांग्रेस ने 9 सीटों पर जमानत राशि खो दी है। शिवसेना (UBT) ने 8 सीटों पर और एनसीपी शरद पवार गुट के 3 सीटों पर जमानत राशि को दी। किसान और मजदूर पार्टी, जो MVA का हिस्सा है उस की 2 सीटों पर जमानत राशि जप्त ‌हो गई।

    कहां हुआ सबसे ज्यादा फायदा

    महाराष्ट्र में चुनाव आयोग को सबसे ज्यादा फायदा कहां हुआ है यह भी आपको हम बता देना चाहते हैं। जमानत जप्त के मामले में नासिक जिले के बड़े खिलाड़ियों के बीच सबसे अधिक पैसों का फायदा हुआ है। यहां शिवसेना (UBT) की 2 सीटों पर, कांग्रेस की 3 सीटों पर और एनसीपी शरद पवार गुट की 1 सीट पर जमानत राशि जब्त हुई है। छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के मामले में मुंबई उपनगर में 261 और पुणे में 260 उम्मीदवारों की जमानत राशि जब्त की गई है।

    भाजपा उम्मीदवारों की जमानत का क्या रहा?

    महाराष्ट्र में किसी भी भाजपा उम्मीदवार की जमानत राशि जब्त नहीं हुई है। हालांकि, महायोधी के घटक दल एकनाथ शिंदे की शिवसेना के एक उम्मीदवार ने विदर्भ के दर्यापुर (अमरावती जिला) में अपनी जमानत राशि खो दी है और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने महाराष्ट्र में 5 सीटों पर जमानत राशि खो दी। उसी जिले के मोर्शी निर्वाचन क्षेत्र में एक अनोखी स्थिति देखी गई, जहां एनसीपी के दोनों गुटों ने अपनी जमानत राशि खो दी है। कड़े मुकाबले में, भाजपा के उमेश यावलकर ने 99,683 वोट हासिल किए, जबकि एनसीपी के देवेंद्र भुयार और एनसीपी शरद पवार गुट के गिरीश कराले क्रमशः सिर्फ 34,695 और 31,843 वोट ही हासिल कर सके, जो अनिवार्य सीमा से कम था।

    राज ठाकरे के सभी उम्मीदवार हुए फैल

    अन्य छोटे दलों के भी कई उम्मीदवारों की जमानत राशि जब्त हुई। जिनमें VBA, BSP और MNS ने राज्यभर में लगभग सभी सीटों पर जमानत राशि खो दी है। एक अपवाद था कि MNS के अमित ठाकरे, जिन्होंने महिम निर्वाचन क्षेत्र में हारने के बावजूद न्यूनतम सीमा को पार कर लिया था। नागपुर दक्षिण पश्चिम में देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले निर्दलीय उम्मीदवार सचिन वाघाडे, जिन्होंने अपनी जमानत राशि खो दी पर उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ना हमारा संवैधानिक अधिकार है और हम इसमें भाग लेते हैं, क्योंकि हम अभी भी लोकतंत्र और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास करते हैं। जबकि मैं चुनाव आयोग की निष्पक्षता सुनिश्चित करने और फर्जी उम्मीदवारों को रोकने की आवश्यकता को समझता हूं। लेकिन मेरा मानना है कि पूरी जमानत जब्त करने के बजाय, 25% राशि को बरकरार रखा जाना चाहिए।

  • गद्दार पार्टी में आकर खुद्दार हो जाते हैं- भाजपा

    गद्दार पार्टी में आकर खुद्दार हो जाते हैं- भाजपा

    भाजपा जिला अध्यक्ष प्रदीप रामचंदानी के बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में खलबली मचा दिया है। महायुति गठबंधन में और पार्टीयों से आए नेताओं के अलावा सीधे तौर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को ही निशाना बना दिया। (Maharashtra Assembly Election Traitors become selfish after joining BJP)

    न्यूज़ डेस्क
    ठाणे-
    मुंबई से सटे ठाणे जिले का उल्हासनगर विधानसभा सीट महायुति गठबंधन के लिए राजनैतिक खलबली का विषय बन गया है। यहां भाजपा के जिला अध्यक्ष प्रदीप रामचंदानी ने ही महायुति गठबंधन में शामिल दलों और पार्टी में बाहर से आए नेताओं के अलावा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ ही जहर उगल दिया। इसके बाद से शिंदे गुट के शिवसैनिक कार्यकर्ताओं की नाराजगी के कारण मामला बिगड़ते देख रामचंदानी ने कहा कि उनकी बात का गलत मतलब निकाला गया है। (Maharashtra Assembly Election Traitors become selfish after joining BJP)

    चुनावी सभा में हंगामा

    उल्हासनगर में एक चुनावी सभा के दौरान भाजपा कार्यकर्ता द्वारा दिए बयान के बाद से महाराष्ट्र की सियासत गर्म हो गई है। दरअसल, उल्हासनगर से भाजपा के जिला अध्यक्ष प्रदीप रामचंदानी ने कहा, कि “जिन्हें गद्दार कहा जाता है वह मुख्यमंत्री बन जाते हैं और भाजपा में आकर सब खुद्दार हो जाते हैं। बदलते समय के साथ राजनीति की परिभाषा बदल गई है।” भाजपा जिला अध्यक्ष के इस बयान से शिंदे गुट के शिवसैनिक कार्यकर्ता काफी नाराज हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा जिला अध्यक्ष के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की तैयारी शुरू कर दी गई है। (Maharashtra Assembly Election Traitors become selfish after joining BJP)

    माहौल बिगड़ता देख लिया यू टर्न

    हालांकि, जिला अध्यक्ष के विवादित बयान के बाद से भाजपा के बड़े नेताओं ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, बयान के बाद माहौल गर्म होता देख भाजपा जिला अध्यक्ष ने कहा, उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है। बता दें कि उल्हासनगर विधानसभा सीट पर कुमार आयलानी को महायुति की ओर से चुनावी उम्मीदवार की घोषणा की गई है।मौजूदा समय में यहां से कुमार आयलानी विधायक भी है। शनिवार को विधानसभा चुनाव प्रचार के मद्देनजर भाजपा की ओर से एक सभा आयोजित की गई थी। इस सभा में भाजपा के जिला अध्यक्ष प्रदीप रामचंदानी ने विवादित बयान दिया। इसके बाद से यहां माहौल गर्म हो गया है। (Maharashtra Assembly Election Traitors become selfish after joining BJP)

    कब होगा चुनाव ?

    महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए राज्य में एक ही बार 20 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। 23 नवंबर को चुनाव आयोग परिणाम घोषित करेगा। चुनाव आयोग ने इस बार एक ही टप्पे में चुनाव कार्य निपटाने का फैसला किया है। विधानसभा चुनाव को लेकर महाविकास अघाड़ी गठबंधन का दावा है कि इस बार उनकी सरकार बन रही है। वहीं, एकनाथ शिंदे (Shivsena) अजित पवार गुट (NCP)और भाजपा (BJP) की महायुति गठबंधन का दावा है कि दूसरी बार भी उनकी ही सरकार बनेगी। हालांकि पिछ्ली बार महाविकास अघाडी गठबंधन को ही जीत मिली थी। बाद में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को तोड़ कर भाजपा ने सरकार बना ली। (Maharashtra Assembly Election Traitors become selfish after joining BJP)

    कौन है गद्दार ?

    हालांकि की शिवसैनकों को तोड़कर सरकार गिराने वाले एकनाथ शिंदे को गद्दार कहा जा रहा था। लेकिन भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया। दूसरी तरफ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को तोड़कर आए अजित पवार को उप मुख्यमंत्री बना दिया। फिलहाल एक बार फिर महाविकास अघाडी गठबंधन में शामिल काग्रेस, शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद पवार गुट, समाजवादी पार्टी और अन्य सहयोगी दल महाराष्ट्र में सरकार बनाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। 23 नवंबर के बाद ही इसके परिणाम सामने आएंगे। (Maharashtra Assembly Election Traitors become selfish after joining BJP)

  • महराष्ट्र में कांग्रेस का जलवा, 50 फीसदी बढ़ेंगी सीटें

    महराष्ट्र में कांग्रेस का जलवा, 50 फीसदी बढ़ेंगी सीटें

    Election Survey: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 पर इलेक्टोरल एज का प्री पोल सर्वे की रिपोर्ट सामने आई है। इसमें कांग्रेस महाराष्ट्र की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है। सर्वे में महाविकास अघाडी गठबंधन को बढ़त मिलता दिख रहा है। (Congress shines in Maharashtra seats will increase by 50 percent)

    न्यूज़ डेस्क
    मुंबई-
    महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 2024 के लिए महाविकास अघाड़ी (MVA) और महायुति की गठबंधन पार्टियों के अलावा निर्दलीय उम्मीदवारों की ओर से प्रचार अभियान की शुरुआत हो चुका है। चुनाव में जीत हासिल करने के लिए सभी राजनैतिक पार्टियों ने अपने दिग्गज नेताओं का बड़े-बड़े कार्यभार सौंप दिए हैं। इस बीच एक ऐसा सर्वे सामने आया है, जिसमें महाराष्ट्र में महाविकास अघाडी गठबंधन (MVA) को बहुमत मिलता नजर आ रहा है। इलेक्टोरल एज प्री पोल सर्वे के अनुसार राज्य की 288 विधानसभा सीटों में से महाविकास अघाडी गठबंधन को 157 सीटें मिल सकती है। खासकर इसमें कांग्रेस पार्टी एक बड़ी राजनैतिक दल के रूप में उभर कर सामने आ रही है। (Congress shines in Maharashtra seats will increase by 50 percent)

    सर्वे की मानें तो महाविकास अघाडी गठबंधन में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है, जिसे 68 सीट मिलने का अनुमान है। इसके अलावा शरद पवार गुट के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को 44, उद्धव ठाकरे गुट के शिवसेना (UBT) को 41, समाजवादी पार्टी को 1, सीपीआईएम को 1 और PWP को 2 सीटें मिल सकती है। इसके अलावा शिवसेना (UBT) के नेता महाविकास अघाडी गठबंधन की ओर से उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री का चेहरा बताते हैं। सर्वे में कांग्रेस अगर सबसे बड़ी पार्टी बनती है तो फिर सीएम पद को लेकर खींचतान देखने को मिल सकता है। (Congress shines in Maharashtra seats will increase by 50 percent)

    2019 के चुनाव में क्या हुआ?

    2019 में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की बात करें तो उस समय कांग्रेस को 44 सीटें मिली थी। सर्वे की मानें तो इस बार कांग्रेस की सीटों में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। 2019 में शिवसेना एक ही थी। लेकिन अब दो हिस्सों में बंट गई है। तब एक ही पार्टी हुआ करती थी, जिसके कर्ताधर्ता उद्धव ठाकरे थे और पिछले विधानसभा चुनाव में शिवसेना को 56 सीटें मिले थे। यहीं हाल एनसीपी का भी है। 2019 में जब शरद पवार और अजित पवार साथ थे तो एनसीपी को 54 सीटें मिली थी, लेकिन अब दोनों पार्टियां दो टुकड़ों मे बंट चुकी हैं। (Congress shines in Maharashtra seats will increase by 50 percent)

    बनेगी महाविकास अघाडी गठबंधन की सरकार

    सर्वे के अनुसार महाराष्ट्र में महायुति को मात्र 117 सीटें मिल सकती है, जिसमें से सबसे अधिक बीजेपी 79 सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है। इसके अलावा शिवसेना शिंदे गुट को 23 सीटें मिलने का अनुमान है। अजित पवार गुट के एनसीपी को 14 सीटें मिलेंगी, RYSP को एक सीट और अन्य को 14 सीटें मिल सकती है। ऐसे मे साफ है कि महाविकास अघाडी गठबंधन की सरकार फिर से महाराष्ट्र मे सत्ता स्थापित करने जा रही है। (Congress shines in Maharashtra seats will increase by 50 percent)

  • राजनैतिक झटका, कांग्रेसी वरिष्ठ नेता रवि राजा भाजपा में शामिल

    राजनैतिक झटका, कांग्रेसी वरिष्ठ नेता रवि राजा भाजपा में शामिल

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रवि राज को देवेन्द्र फडणवीस ने मुंबई उपाध्यक्ष का पद देकर सम्मानित किया। मुंबई के सायन कोलीवाडा से टिकट नहीं मिलने के कारण नाराज़ चल रहे थे। (Political shock, senior Congress leader Ravi Raja joins BJP)

    नितिन तोरस्कर (मंत्रालय प्रतिनिधि)
    मुंबई-
    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रवि राजा अपने समर्थकों के साथ गुरुवार को उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा के मुंबई अध्यक्ष आशीष शेलार की मौजूदगी में पार्टी प्रवेश किया। रवि राज पिछले 44 वर्षों से कांग्रेसी नेता के रूप में काम कर रहे थे। इस बार चुनावी टिकट को लेकर मन मुटाव के बीच रवि राज ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। (Political shock, senior Congress leader Ravi Raja joins BJP)

    कांग्रेस पार्टी से नाराज

    इसके पहले रवि राज राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस से मिलकर भाजपा में शामिल होने की इच्छा जाहिर की थी। कांग्रेस से इस्तीफे के बाद तुरंत भारतीय जनता पार्टी ने अपना मंच साझा करते हुए रवि राजा को मुंबई भाजपा का उपाध्यक्ष नियुक्त कर दिया। राजा सायन कोलीवाड़ा विधानसभा सीट से टिकट न मिलने से नाराज थे। वह इस बात से भी परेशान थे कि कांग्रेस ने मुंबई के विकास में उनके काम और योगदान को मान्यता नहीं दी और न ही उसकी सराहना की। (Political shock, senior Congress leader Ravi Raja joins BJP)

    महायुति की BMC पर नजर

    रवि राजा ने अपना इस्तीफा सीधे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा। कांग्रेस पार्टी ने सायन कोलीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से गणेश यादव को चुनावी मैदान में उतारा है।राजा का यह फैसला कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ा नुकसान और भाजपा के लिए फायदेमंद हो सकता है। यह ऐसे समय में हुआ, जब महायुति मुंबई में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने और महा विकास अघाड़ी को हराने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मुंबई में 36 विधानसभा सीटों पर महायुति और महाविकास अघाडी गठबंधन वाले दलों के बीच घमासान युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। इसी बीच अपक्ष उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। महायुति बीएमसी पर नजर रखते हुए अधिक से अधिक सीटें जीतने के लिए काफी उत्सुक है। (Political shock, senior Congress leader Ravi Raja joins BJP)

    भाजपा को होगा लाभ

    उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) में पांच बार पार्षद (नगरसेवक) रहे राजा का भाजपा में स्वागत करते हुए कहा कि मुंबई की राजनीति में उनके अनुभव को देखते हुए पार्टी को इससे बहुत लाभ होगा। राजा एक अनुभवी पार्षद (Councilor) हैं। वह 23 वर्षों से अधिक समय से बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन निगम (BEST) के सदस्य रहे हैं। (Political shock, senior Congress leader Ravi Raja joins BJP)

    और भी दलों के नेता भाजपा में शामिल होंगे

    उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मौजूदा विधानसभा चुनाव प्रक्रिया के दौरान विभिन्न दलों के और भी नेता भाजपा में शामिल होंगे। हालांकि, उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी। वहीं रवि राजा ने कहा, “मैंने 44 साल बाद कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। मैं भारतीय जनता पार्टी मे अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करूंगा। यह पहले से तय है कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार और राज्य में महायुति सरकार के काम को देखते हुए महायुति सरकार फिर से सत्ता में आएगी।” राजा ने कहा कि सायन कोलीवाड़ा से भाजपा उम्मीदवार तमिल सेल्वन की जीत निश्चित है। (Political shock, senior Congress leader Ravi Raja joins BJP)

  • त्यौहार के कारण कम पडेंगे पर प्रांतीयों के वोट

    त्यौहार के कारण कम पडेंगे पर प्रांतीयों के वोट

    महाराष्ट्र में चुनाव के बीच पर प्रांतीय वोटरों की कमी देखने को मिल सकती है। मुंबई से भर-भर कर जा रहे हैं लोग। ट्रेनों में देखी जा रही है खचाखच भीड़। (Due to festivals in Mumbai, votes of provincials will be less)

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    मुंबई एवं महाराष्ट्र में पर प्रांतीयो के वोट पर चिंता जताई जा रही है। देशभर में दिवाली और छठ के त्यौहार के बीच चुनाव की घोषणा उत्तर भारतीय उम्मीदवारों के लिए परेशानी का सबब साबित हो सकता है। बताया जा रहा है कि इस बार मतों की संख्या 35 से 40 प्रतिशत के बीच ही सिमट कर रह जाएगी। मतगणना के दिन ऐसा नजारा देखने को मिल सकता है।

    कब होगा चुनाव

    आप को बता दें कि महाराष्ट्र में 20 नवंबर को विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होने जा रहे हैं। चुनाव की मतगणना 23 नवंबर को होगी। इसी समय देश में त्यौहारी सीजन चल रहा है। दिवाली के साथ-साथ छठ पूजा के लिए राज्य के परप्रांती उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल की ओर कूच कर रहे हैं। जबकि ज्यादातर चुनावी उम्मीदवार इन्ही के भरोसे चुनावी मैदान में उतरे हैं। लेकिन इन लोगों को अपने गांव जाने से नहीं रोक पा रहे हैं।

    मुंबई की जनसंख्या

    दोहरी राजधानी कही जाने वाली मुंबई यानी महाराष्ट्र की राजधानी के अलावा देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की जनसंख्या लगभग 2 करोड़ 25 लाख के आसपास है। जबकि यहां 36 विधानसभा सीटों पर लगभग सैकड़ो की संख्या में उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है। लेकिन मुंबई का ज्यादातर परप्रांती समूह त्यौहार के कारण यहां से प्रस्थान कर रहा है। यूपी बिहार के लिए ट्रेनों मे जगह नही होने के बावजूद चालू डिब्बे में खचाखच भीड़ देखी जा रही है। इसी को लेकर पिछले दिनों बांद्रा टर्मिनस पर लोग हादसे का शिकार हो गए। भीड़ की धक्कामुक्की में 10 लोग घायल हो गए थे जिनमें से 2 लोगों की हालत अभी भी क्रिटिकल बनी हुई है।

    महायुति और महाविकास अघाडी में टक्कर

    महाराष्ट्र में पक्ष विपक्ष के दो गठबंधन वाले समुह के बीच खास कर चुनाव देखा जा रहा है। महाविकास अघाडी गठबंधन में कांग्रेस 102 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, तो वहीं उद्धव ठाकरे गुट (UBT) की शिवसेना 96 सीटों के लिए अपना प्रत्याशी उतार चुकी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के शरद पवार गुट 86 सीटों पर अपना दाव खेल रहे हैं, वहीं समाजवादी पार्टी (SP) 2 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। साथ ही, शेतकरी कामगार पक्ष 2 सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रही है। इसके साथ ही महायुति गठबंधन में भाजपा (BJP) 148 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है। शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट 80 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) अजित पवार गुट के 53 उम्मीदवारों लिस्ट जारी की गई है। महायुति मे राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) वर्ली के 1 सीट पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं भाजपा के चुनाव चिन्ह पर महायुति गठबंधन के मित्र पक्ष 6 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं।