मुंबई के जौहरी की दुकान पर नकली सोने की मुर्ति गिरवी और असली सोना और पैसे लेकर फरार 8 में से 1 को चारकोप पुलिस ने राजस्थान से किया गिरफ्तार। फर्जी आधार कार्ड का भी इस्तेमाल..
इस्माईल शेख मुंबई– कांदिवली पश्चिम के चारकोप पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है जो सोनार की दुकान में जाकर पहले तो उसका भरोसा हासिल करते थे और बाद में नकली सोने की मूर्ति दिखाकर उसे गिरवी रखने की बात करते थे और उसके बदले असली सोना और पैसे लेकर फरार हो जाया करते थे। पुलिस ने कहा, कि गिरोह में 7 से 8 लोग मिले हुए थे जबकि राजस्थान से एक आरोपी को गिरफ्तार कर 25 तोला सोना बरामद किया गया है।
चारकोप पुलिस थाने की वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्रीमती ज्योति भोपळे ने बताया, कि चारकोप सेक्टर 5 का रहने वाला 46 वर्षीय फरियादी कमलेश मांगीलाल जैन जो पेशे से एक जौहरी का काम करता है। अंतरराज्यीय गिरोह ने पहले तो बनावटी आधार कार्ड के सहारे जुलाई महीने से अगस्त के बीच फरियाद के साथ व्यवहार बनाया, जिसमें एक महिला भी शामिल थीं और 27 अगस्त को गिरौह ने बताया कि हमारे पास कुल 54 देवताओं की सोने की प्रतिमा है जिसे हम बेच नहीं सकते लेकिन हम गिरवी रखना चाहते हैं। इसके बदले में फरियादी से 438 ग्राम सोने के गहने और कैश पैसे कुल मिलाकर 43 लाख 22 हज़ार 500 रुपये दे दिए और गिराह वहां से चंपक हो गया। इसमें मुख्य आरोपी बनवारीलाल बंजारा बताया जा रहा है।
चारकोप पुलिस के साथ राजस्थान से गिरफ्तार आरोपी की तस्वीर
मुंबई पुलिस परिमंडल 11 के उपयुक्त अजय कुमार बंसल ने बताया, कि चारकोप पुलिस थाना अंतर्गत गु.र.क्र. 400/23 में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406, 120(ब), 465, 467, 468 के तहत मामला दर्ज कर जान शुरू की गई जिसमें सीसीटीवी और तांत्रिक विश्लेषण के आधार पर पता चला कि राजस्थान अलवर के उद्योग नगरी में अंतरराज्यीय गिरोह की गतिविधियां पाई गई। तुरंत एक टीम गठित कर राजस्थान भेजा गया। जहां केसरोली मोड, गोलेटा, अलवर के एमआईए पुलिस थाने की मदद से 29 वर्षीय जितेंद्र सुंदरलाल भोपा को हिरासत में लिया गया। तो पता चला कि उसी की मां पानादेवी भोपा और 6 से 7 लोगों ने मिलकर ठगी के इस कार्य को अंजाम दिया है। इसके साथ यह भी पता चला कि क्राइम में इस्तेमाल देवताओं की नकली सोने की प्रतिमा और जरूरी पैसों का इंतजाम हरियाणा के एक आरोपी ने किया था।
साथ ही पुलिस उपायुक्त अजय कुमार बंसल ने यह भी बताया, कि मुंबई से जौहरी को चूना लगाने के बाद अंतरराज्यीय गिरोह ने असली सोने के गहनों को पिघलाकर नए डिजाइन में बनाने के लिए राजस्थान के एक दूसरे सोनार को वहां दिया था। जहां से 25 तोला पिघला हुआ सोना मुंबई पुलिस ने हस्तगत कर लिया है और आरोपी को राजस्थान की अदालत में पेश कर वहां से ट्रांजिट रिमांड के जरिए उसे मुंबई लाया गया, बाकी के 7 आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं।
इस्माईल शेख मुंबई- जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस में चार लोगों की गोली मारकर हत्या करने के मामले में पुलिस ने नया खुलासा किया है। पुलिस ने कहा, जांच से पता चला है कि मामले में गिरफ्तार आरोपी RPF कांस्टेबल चेतन सिंह ने अपराध के बाद अपनी पत्नी से फोन पर बात किया। उसने अपनी पत्नी से फोन पर कहा था कि अब उसे अपने बच्चों का पालन-पोषण खुद करना होगा। (Jaipur Mumbai Train Firing news)
खबर के मुताबिक, शनिवार को चेतन की पत्नी रेनू और उसकी मां मथुरा से मुंबई आईं और बोरीवली जीआरपी के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया। रेनू ने चेतन के पिछले चिकित्सा उपचारों से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए, इसमें मथुरा के एक न्यूरोलॉजिकल अस्पताल की रिपोर्ट भी शामिल थी। पुलिस दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच करेगी और रिपोर्ट के बिंदुओं पर सरकारी डॉक्टरों से चेतन की जांच भी करा सकती है। (Jaipur Mumbai Train Firing news)
Indian fasttrack newsहत्या के आरोपी आरपीएफ जवान चेतन बच्चू सिंह की तस्वीर
Jaipur Mumbai Train Firing news
31 जुलाई की शुरुआत में चेतन ने अपने वरिष्ठ एएसआई टीकाराम मीणा को अस्वस्थ महसूस करने और वलसाड में ट्रेन से उतरने की इच्छा जाहिर की। लेकिन ट्रेन को वहां रोका नहीं जा सकता था। इसलिए टीकाराम मीणा ने सुझाव दिया था कि वह ट्रेन में आराम करें। चेतन ने रेनू को फोन करके बताया था कि अस्वस्थ महसूस करने के बावजूद उसे ट्रेन से उतरने नहीं दिया जा रहा है। फोन पर उनकी अगली बातचीत के दौरान उसने बेहतर महसूस करने की बात भी कही थी। (Jaipur Mumbai Train Firing news)
घटना के बाद भी किया था कॉल..
मीरा रोड पर ट्रेन से उतरने के बाद उसने उसे आखिरी बार कॉल किया था। इस बार उसने रेनू से कहा कि अब उनके बच्चों की परवरिश करना अब अकेले उसी की जिम्मेदारी है। पुलिस ने बताया कि चेतन से शुक्रवार को सात घंटे तक पूछताछ की गई। रेनू से भी काफी देर तक पूछताछ की गई। उसने पुलिस को बताया कि चेतन कुछ साल पहले एक सीढ़ी से गिर गया था, जिसके बाद उसे न्यूरोलॉजिकल संबंधी समस्याएं हो गईं और इलाज के लिए उसे मथुरा में विभिन्न डॉक्टरों के पास ले जाया गया। (Jaipur Mumbai Train Firing news)
पुलिस ने गोलीबारी के प्रमुख गवाहों सहित, 100 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए हैं। कुछ गवाह दूसरे राज्यों में रहते हैं और उन्होंने ईमेल पर बयान दर्ज कराए हैं। चेतन अब तक कई बार अपने ही बयानों से पलट चुका है। मिली जानकारी के मुताबिक, चेतन को सोमवार सवेरे बोरीवली में एक मजिस्ट्रेट अदालत के सामने पेश किया जाएगा। इस दौरान जीआरपी पुलिस हिरासत की अवधि बढ़ाने की मांग कर सकती है। (Jaipur Mumbai Train Firing news)
जयपुर मुंबई सुपरफास्ट ट्रेन में एक सहायक उप निरीक्षक और 3 यात्रियों सहित 4 लोगों को RPF के जवान ने गोली मारकर हत्या कर दी।
वी बी माणिक मुंबई– पश्चिम रेल (Western Railway) के वसई और मीरा रोड के बीच आरपीएफ (RPF) जवान चेतन बच्चू सिंह जो परेल वर्कशॉप में तैनात है ने जयपुर मुंबई सुपरफास्ट ट्रेन में सुबह लगभग 5 बजे के आसपास एक सहायक उप निरीक्षक टीकाराम जो दादर में तैनात है रेल सुरक्षा बल और तीन यात्रियों कादर और अंसार को अपने सर्विस रिवाल्वर से गोली मारकर हत्या कर दी।
घटना के समय सभी यात्री सो रहे थे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ये जवान अपने सर्विस के दौरान अधिकारियों के उत्पीड़न से त्रस्त था। जयपुर मुंबई सुपरफास्ट ट्रेन मैं हुई घटना को लेकर केस बोरीवली जीआरपी में दर्ज किया गया है। इसकी जाँच जीआरपी के वरिष्ठ अधिकारी कर रहे है। अभी भी जीआरपी के वरिष्ठ अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नही है।
Indian fasttrack newsहत्या के आरोपी आरपीएफ जवान चेतन बच्चू सिंह की तस्वीर
RPF में कब सुधार आएगा?
आज ही सोमवार 31 जुलाई, आरपीएफ के महानिदेदशक संजय चंदर अपने कार्य से सेवा मुक्त हो रहे है। कुछ लोगों का कहना है, कि उनको चेतन ने सलामी दी है। मनोज यादव नए महानिदेशक का चार्ज लेंगे क्या आरपीएफ जवानों की भारी कमी को प्राथमिकता देंगे या राज्य के प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की सुरक्षा से ही काम चलाएंगे। यहां आपको बता दें, कि पिछले काफी दिनों से सुरक्षा कर्मियों की माँग चल रही है।
लेकिन केंद्र सरकार नही जाग रही है। इसी कारण ऐसी घटनाओ की पुनरावृति हो रही है। ऐसी दर्दनाक घटना से सभी लोग अचंभित है। घटना पर बता दें, कि अभी तक मृतकों की शिनाख्त नही हो सकी है। आगे आरपीएफ और जीआरपी सुरक्षा की दृष्टि से कौन सा नया कदम उठाते है, यह देखने का विषय है।
मणिपुर, राजस्थान, बिहार, छतीसगढ़ में महिलाओं के साथ जो शर्मसार करने वाली घटना हुई है। इस पर कार्रवाई का अभी तक नहीं होना क्या नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप पर देश चल रहा है? ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं।
वी बी माणिक मुंबई- आजकल के नेताओ में शर्म, लाज, हया, सब खत्म हो चुका है। कोई हिन्दू शास्त्र का तो कोई कुरान की दुहाई देकर राजनीति को पूरी तरह गंदगी में ढकेल दिया है। दिन पर दिन महिलाओं के इज्जत को तार-तार कर सभी राजनीतिक दलों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जोर-शोर से चल रहा है। टीवी चैनलों पर जमकर कबूतरबाजी चलाकर टीआरपी बटोरी जा रही है। (Indian politics)
लेकिन मणिपुर, राजस्थान, बिहार, छतीसगढ़ में महिलाओं के साथ जो शर्मसार करने वाली घटना घटित हुई है। उससे केवल राज्य का ही नही पूरे देश का नाम, विश्व पटल नाम काफी खराब हुआ है। मणिपुर और राजस्थान बिहार में महिला को निर्वस्त्र कर उनके साथ दुष्कर्म करने वाले और वहाँ उपस्थित दर्शको के साथ वीडियो बनाने वालों के विरुद्ध कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए था। इसके साथ ही राज्य के मुख्यमंत्री जो कुम्भकर्णीय की नींद सो रहे थे उनको सलाखों के पीछे ढकेलना चाहिए था। (Indian politics)
यह खबर लिखने में हम पत्रकारों का सर शर्म से झुक जाता है। क्योंकि पत्रकारों को लिखने के अलावा कोई अधिकार नही है। यह मुद्दा अब देश की संसद में चला गया है। वहाँ भी नेता अपनी रोटी सेक रहे है। इस पर कार्रवाई की बात कोई नही कर रहा है। बड़ी विडंबना है, कि देश की संसद और विधानसभा में नेता की जगह अपराधियो ने कब्जा कर लिया है। पर इसका जबाबदार है कौन ? (Indian politics)
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देश की जनता अपने देश में महिलाओं को दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती के रूप में देखा जाता है और पुरुष वर्ग इन्हीं का अपमान करता है। इन्हीं को शैतानो की तरह नोचता है। इन्हीं के साथ हैवानियत करता है। ऐसे लोगो को चुल्लू भर पानी मे डुब मरना चाहिए। ये जितने दरिंदे है ये सब नेताओ के चमचे है। इसलिए इन पर कार्रवाई नही हो रहा है। आईएएस और आईपीएस अधिकारी क्यो चुप बैठे है? देश का दुर्भाग्य है, कि खाकी पर हमेशा खादी भारी पड़ता है। कब सुधरेगा हमारा देश कब वो दिन आएगा जब बहन बेटिया अपने को सुरक्षित महसूस करेंगी और दरिंदो का सर्वनाश होगा। (Indian politics)
इस आर्टिकल को पढ़कर आप भी घर बैठे इलेक्शन कार्ड (Election Card) में अपना फोटो, पता और बाकी जानकारियों में बदलाव कर सकेंगे। हम खास आपके लिए महत्वपूर्ण जानकारियां लेकर आए हैं।
डिजिटल डेस्क (Indian Fasttrack News Network) एक मतदाता पहचान पत्र आपके भारतीय होने और पते के प्रमाण के लिए एक आवश्यक दस्तावेज के रूप में कार्य करता है। इसलिए, भविष्य में असुविधा से बचने के लिए, आपका नाम, पता, जन्म पत्र आदि जैसी जानकारी में किसी भी गड़बड़ी को ठीक करना आवश्यक है। अगर आप भी ऑनलाइन और ऑफलाइन वोटर आईडी (Election Card) में सुधार करना चाहते हैं तो इसकी प्रक्रियाओं की जांच के लिए पढ़ना जारी रखें।
Election Card सुधार के लिए आवेदन कैसे करें
संभावित मतदाता पहचान पत्र में अपना नाम, पता और अन्य जानकारी बदलने के लिए ऑनलाइन मतदाता पहचान पत्र सुधार का विकल्प चुन सकते हैं। आवेदक का नाम, पता और जन्म तिथि बदलने के लिए प्रत्येक चरण को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। जो निम्नलिखित हैं।
Election Card पर ऑनलाइन नाम बदलने के तरीके के बारे में निम्नलिखित चरणों पर एक नज़र डालें:-
Step 1:एनवीएसपी की आधिकारिक वेबसाइट या राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल पर जाएं। अपना यूजर नेम और पासवर्ड डालकर पोर्टल पर खुद को रजिस्टर करें। यदि आप मौजूदा सदस्य हैं तो लॉगिन करें। Step 2: “निर्वाचक विवरण में सुधार” चुनें और फॉर्म 8 पर क्लिक करें। Step 3: आपको दूसरे पृष्ठ पर भेज दिया जाएगा और निम्नलिखित विवरण दर्ज करें
आपका संसदीय क्षेत्र या राज्य विधानसभा।
अपना नाम, उम्र, लिंग और मतदाता सूची का भाग संख्या टाइप करें।
अपने परिवार के सदस्यों के बारे में जानकारी दर्ज करें, जैसे पति या पत्नी, पिता या माता।
अपना आवासीय पता लिखें।
Step 4: आवश्यक दस्तावेज जैसे पैन कार्ड, पासपोर्ट आदि अपलोड करें। Step 5: अपना गलत या गलत वर्तनी वाला नाम बदलने या संपादित करने के लिए “My Name” टैब चुनें। अपना आवासीय शहर, तिथि और संपर्क विवरण जैसे – ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर दर्ज करें। Step 6: सभी विवरणों को सत्यापित करें और चुनाव कार्ड को अपडेट करने के लिए सबमिट करें।
एक बार जब आपका आवेदन संसाधित और सत्यापित हो जाता है, तो आपको अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक सूचना (Massage) प्राप्त होगा। तदनुसार, इसे अपने निकटतम निर्वाचन कार्यालय से प्राप्त करें।
Voter ID Card में पता बदलना..
क्या आप एक नए निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए हैं और सोच रहे हैं कि मतदाता पहचान पत्र ( Election Card) में पता कैसे बदला जाए, तो चिंता न करें। नीचे दिए गए सरल चरणों का पालन करें:-
Step 1: एनवीएसपी पोर्टल पर लॉग इन करें। टैब “नए मतदाता के पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन करें/एसी से स्थानांतरित होने के कारण” का चयन करें और यदि आप वर्तमान में एक नए निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित हुए हैं तो Form 6 चुनें। Step 2: यदि आप एक ही निर्वाचन क्षेत्र के भीतर एक आवासीय क्षेत्र से दूसरे में स्थानांतरित हो गए हैं तो Form 8A चुनें। Step 3: आवश्यक जानकारी जैसे नाम, निर्वाचन क्षेत्र, राज्य, जन्म तिथि आदि के साथ संबंधित फॉर्म भरें। अपना संपर्क विवरण जैसे मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी आदि प्रदान करें। Step 4: प्रासंगिक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि अपलोड करें। संबंधित दस्तावेजों के साथ फॉर्म जमा करें। Step 5: घोषणा विकल्प का चयन करें। कैप्चर टाइप करें और सबमिट करें।
यहां बताया गया है कि आप NVSP पोर्टल पर पहुंचकर voter ID पर अपनी जन्मतिथि ऑनलाइन कैसे बदल सकते हैं।
Step 1: पोर्टल पर लॉग इन करने के बाद, Form 8 चुनें। Step 2: अपना नाम, संसदीय क्षेत्र या राज्य या जिला विधानसभा से संबंधित जानकारी दर्ज करें। अन्य जानकारी में शामिल हैं:
एपिक या मतदाता का फोटो पहचान पत्र संख्या।
उस विकल्प का चयन करें जिसे आप अपडेट करना चाहते हैं, इस मामले में, आपकी जन्म तिथि।
अपनी सही जन्मतिथि दर्ज करें और आयु प्रमाण के लिए आधार कार्ड जैसे दस्तावेज प्रदान करें।
Step 3: घोषणा विकल्प का चयन करें और सबमिट करें।
इसके अतिरिक्त, आप वोटर पोर्टल के माध्यम से voter ID सुधार का विकल्प भी चुन सकते हैं। यह एक सरकारी पोर्टल है जहां आवेदक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं या मतदाता पहचान पत्र पर जानकारी बदल सकते हैं। इसे एक्सेस करने के लिए आपको एक अकाउंट बनाना होगा। लॉग इन करने के बाद, “voter ID में सुधार” का विकल्प चुनें। अन्य चरण ऊपर बताए गए चरणों के समान हैं।
Voter ID सुधार ऑफलाइन कैसे करें?
इंटरनेट एक्सेस के बिना आवेदक निर्वाचन कार्यालय में जाकर ऊपर उल्लिखित सभी सूचनाओं को बदल सकते हैं। Form 8, 8A या 6 के लिए पूछें। आप इसे NVSP की आधिकारिक वेबसाइट से भी डाउनलोड कर सकते हैं। आप इसे कैसे डाउनलोड कर सकते हैं, इसके चरण यहां दिए गए हैं।
NVSP पोर्टल पर जाएं। “फॉर्म” पर क्लिक करें।
राज्य चुनें”। अब “डाउनलोड” अनुभाग पर नेविगेट करें और “फ़ॉर्म” चुनें।
आवश्यक फॉर्म डाउनलोड करें – Form 6, 8, या 8A
अपना नाम, आयु, निर्वाचन क्षेत्र इत्यादि जैसे अनिवार्य क्षेत्रों को भरें। इसे सहायक दस्तावेजों के साथ संबंधित निर्वाचन कार्यालय में जमा करें। इसमें आधार कार्ड, पासपोर्ट आदि शामिल हैं।
आपको Voter ID सुधार का विकल्प क्यों और कब चाहिए?
एक मतदाता पहचान पत्र चुनाव के दौरान आपके वोट डालने की अनुमति देता है। इसके अतिरिक्त, जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, यह एक आवश्यक पहचान प्रमाण भी है। इसलिए, इसमें कोई भी गड़बड़ी असुविधा का कारण बन सकती है। उदाहरण के लिए, यदि आप अपने काम के लिए एक निर्वाचन क्षेत्र से दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए हैं, तो अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन मतदाता पहचान पत्र सुधार का विकल्प चुनें।
मतदाता पहचान पत्र सुधार स्थिति की जांच कैसे करें?
एक बार जब आप Voter Id सुधार के लिए आवेदन कर देते हैं, तो आपको एक संदर्भ संख्या प्राप्त होगी। वोटर आईडी सुधार के लिए अपने आवेदन की स्थिति को ट्रैक करने के लिए इसका इस्तेमाल करें।
Step 1: एनवीएसपी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। नीचे उल्लिखित “ट्रैक एप्लिकेशन स्थिति” पर क्लिक करें। Step 2: संदर्भ आईडी दर्ज करें और आवेदन की स्थिति देखने के लिए “ट्रैक स्थिति” चुनें।
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आवेदक 1950 पर कॉल करके भी मतदाता पहचान पत्र सुधार के लिए आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। आप दो आसान चरणों के साथ वोटर पोर्टल के माध्यम से भी स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं पंजीकृत सदस्य “Track Status” का चयन करके स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं।
आवेदन की स्थिति देखने के लिए संदर्भ संख्या दर्ज करें।
इस प्रकार, यह सब वोटर आईडी सुधार के बारे में है। फॉर्म जमा करने से पहले सभी विवरणों को सत्यापित करना सुनिश्चित करें। इसके अतिरिक्त, एक सुगम आवेदन प्रक्रिया के लिए दस्तावेजों को संभाल कर रखें।
2024 के चुनाव में सेंट्रल जांच एजेंसियों पर रोक का होगा कितना असर?
नितिन तोरस्कर ( मंत्रालय प्रतिनिधि) मुंबई- विपक्ष शासित राज्यों में सीबीआई-ईडी जैसी सेंट्रल जांच एजेंसियों की एंट्री और एक्शन पर सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्र सरकार के इशारे पर सीबीआई और ईडी विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करते हैं। विपक्ष शासित 10 राज्य ऐसे हैं, जहां सीबीआई बिना राज्य सरकार के परमिशन के कोई जांच या धर-पकड़ नहीं कर सकती। ताजा मामला तमिलनाडु का है। एमके स्टालिन सरकार के गृह मंत्रालय ने सर्कुलर जारी कर कहा है, कि किसी भी तरह की जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों को राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी।
तमिलनाडु सरकार का यह फैसला तब आया है, जब ईडी ने लंबी पूछताछ के बाद एक्साइज मिनिस्टर बालाजी सेंदिल को गिरफ्तार कर लिया। तमिलनाडु सरकार ने यह आदेश दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैबलिशमेंट एक्ट 1946 के प्रावधानों के अनुरूप जारी किया है। बिहार में लालू यादव के परिवार के लोग भी यही आरोप लगाते हैं, कि केंद्रीय जांच एजेंसियों (CBI) का इस्तेमाल केंद्र सरकार अपने मतलब के लिए करती है। इसे एकतरफा कार्रवाई या बदले के भावना बताया जाता रहा है। चुनाव के संदर्भ में यह दलील दी जाती है, कि सिर्फ विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच हो रही है। क्या इसका चनावों पर असर पड़ेगा, यह देखना बाकी है।
भारत के कुल 10 राज्यों में सेंट्रल एजेंसियों (CBI) पर बैन लगा दिया गया है। पश्चिम बंगाल, झारखंड, पंजाब, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, केरल, मिजोरम, मेघालय और राजस्थान के बाद अब तमिलनाडु भी केंद्रीय जांच एजेंसियों पर बैन लगाने वाले राज्यों में शुमार हैं। इन राज्यों में सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियां किसी भी शिकायत पर बिना राज्य सरकार की सहमति के कोई कार्रवाई नहीं कर सकतीं। हां, इसमें एक छूट जरूर शामिल है। अगर जांच किसी न्यायालयी आदेश या राज्य सरकार की संस्तुति पर हो रही हो, तो इस पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। हकीकत यह है कि जब भी किसी मामले में केंद्रीय एजेंसियों से जांच की जरूरत महसूस होती है तो लोग हाईकोर्ट की शरण में जाते हैं। कोर्ट अगर इजाजत देता है तो जांच होती है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की फाइल तस्वीर
बंगाल और झारखंड में बैन का कोई असर नहीं।
बैन के बावजूद सेंट्रल एजेंसियां कुछ राज्यों में आराम से अपने काम को कर रही है। पड़ोस की बात करें तो बंगाल और झारखंड में भी केंद्रीय एजेंसियों (CBI) की जांच पर रोक है। बंगाल में शिक्षक नियुक्ति घोटाला की जांच सीबीआई और ईडी दोनों कर रहे हैं। यह जांच भी राज्य सरकार की मर्जी के खिलाफ है। लेकिन बाध्यता यह है कि इसकी जांच का आदेश कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिया है। जांच का परिणाम यह है कि सीएम ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के कई नेताओं-कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई है तो कुछ अन्य की गिरफ्तारियां कभी भी हो सकती हैं। यहां राज्य सरकार की बंदिश का कोई रोड़ा सेंट्रल एजेंसियों की जांच या गिरफ्तारी में अटक नहीं रहा है।
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सेंट्रल एजेंसियों के खिलाफ 14 दल..
सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) के एक्शन से नाराज 14 राजनीतिक दलों के नेतों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसमें बिहार से आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव, झारखंड से सीएम हेमंत सोरेन और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया कि सेंट्रल एजेंसियों की जांच नहीं रोकी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट जाने वालों में अधिकतर वैसे दल शामिल थे, जिसके नेता या कार्यकर्ता बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं। उनके खिलाफ अदालतों ने सेंट्रल एजेंसियों से जांच की सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट से निराश होकर ये नेता जांच से बचने की नयी तरकीब तलाश रहे हैं।
एजेंसियों की जांच का, चुनाव पर असर…
केंद्रीय जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। उन्हें जांच के लिए कोर्ट या राज्य सरकारों ने ही कहा है। आम आदमी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि जांच के लपेटे में उनके पसंदीदा नेता रहे हैं या विरोधी। सामान्य भाव यही है कि चोर या भ्रष्टाचारी पकड़ा जाना चाहिए। लालू यादव के परिवार की बात करें तो उनके मामले में भी स्वजातीय को छोड़ कर किसी को इसकी परवाह नहीं है कि जांच एजेंसियां उनके परिवार के खिलाफ जांच कर रही हैं।
हां, थोड़ा-बहुत संदेह तब तक बरकरार रहता है, जब तक दोष न सिद्ध हो जाए। सुखद पहलू यह है कि ईडी ने जितने मामलों की अब तक जांच की है, उनमें अधिकतर के खिलाफ दोष सिद्ध हुए हैं और सजा भी हुई हैं। सामाजिक न्याय के मसीहा, समाज के वंचित लोगों को स्वर्ग नहीं, स्वर देने का दावा करने वाले लालू प्रसाद के बारे में भी जब चारा घोटाले में सीबीआई जांच शुरू हुई थी तो यही कहा जाता था कि उन्हें फंसाया गया है। दोष सिद्ध होने और सजा के बाद सबकी बोलती बंद हो गई थी।
भारत का मुसलमान सिर्फ उस दल को वोट देगा जो बीजेपी को हरा सके।
चुनावी सर्वे में मोदी मैजिक खत्म होने के संकेत।
गुजरात लॉबी केवल दो उद्योगपतियों के लिए कर रही है काम।
पूर्व राज्यपाल ने चालीस जवानों के हत्या की कथित साजिश का किया खुलासा।
आगामी विधानसभा चुनावों में राजस्थान, मध्यप्रदेश, तेलंगाना जैसे राज्यों में बीजेपी की करारी हार की संभावना।
कांग्रेस का दामन थाम रहे बीजेपी की लेफ्ट वाहिनी बजरंग दल के लोग।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- आसार तो यही नजर आ रहे हैं, कि अब मोदी मैजिक खत्म हो रहा है। जिस तरह मोदी के चेहरे पर दो बार लोकसभा और अन्य कई राज्यों में विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में दो बार मोदी चेहरे ने प्रचंड जीत दिलाई थी। उसके आसार खत्म होने के संकेत चुनावी सर्वे में मिलने लगे हैं। मोदी का चेहरा, हिंदुत्व कार्ड, हिंदू-मुस्लिम और पाकिस्तान की बार-बार रट अब नहीं चलने वाली है। अहम बात यह कि ऐसा क्यों हो रहा?कारण अनेक हैं जिनमें एक कारण है गुजरात लॉबी द्वारा खुद को बीजेपी, सरकार और देश समझने की भ्रांति।
पूरे देश को लगने लगा है कि जिस तरह देश की विरासतें जिन्हें पिछले सत्तर वर्षों में अथक श्रम से निर्मित किया गया था उसे एक झटके में खत्म करने के लिए औने-पौने दाम पर केवल दो गुजराती व्यापारियों को बेचने के कारण जनता समझने लगी है कि गुजरात लॉबी केवल उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है। पिछले समय में अडानी पर हिडेनबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार फेक कंपनी द्वारा अडानी डिफेंस में बीस हजार करोड़ का इन्वेस्टमेंट शंकाएं पैदा करने लगा है।
Indian fasttrack newsबजरंग दल हुई कांग्रेस के साथ ..
गुजरात लॉबी..
चालीस जवानों की हत्या की कथित साजिश जिसको लेकर पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने खुलासे किए हैं, जो बेहद शर्मनाक हैं। गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश ने दो बार 80 लोकसभा सीटों में अधिकतम सीटें दिलाने वाले राज्य के सीएम योगी आदित्यनाथ के उपर जिस तरह से गुजरात लॉबी ने दूसरे दलों के लोगों को डिप्टी सीएम बनाकर योगी को बांध दिया गया और गुजरात लॉबी ने योगी को अपंग बनाने के लिए संगठन में प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी नियुक्त किए उससे योगी समर्थकों में मायूसी होने से यूपी की चालीस सीटों पर पेंच फंस गया है।
भारत का मुसलमान सिर्फ उस दल को वोट देगा जो बीजेपी को हरा सके।
कर्नाटक में बुरी तरह हार हुई है। सर्वे बताते हैं, कि आगामी विधानसभा चुनावों में राजस्थान, मध्यप्रदेश, तेलंगाना जैसे राज्यों में बीजेपी की करारी हार संभावित है। जिस तरह बीजेपी की लेफ्ट वाहिनी बजरंग दल के लोग कांग्रेस का दामन थाम रहे, जिस तरह बीजेपी से मोह भंग होने के कारण बीजेपी छोड़ रहे है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी की हार सुनिश्चित लगने के बाद आरएसएस को चिंता में डाल दिया है।
आरएसएस समझ चुका है कि मोदी अब रेस जीतने वाले नहीं रहे इसलिए वह मोदी के स्थान पर दूसरा चेहरा आगे लाने पर विचार कर रहा है। जिसे देखकर स्पष्ट है कि अब गुजरात लॉबी के दिन खत्म होने वाले हैं। यद्यपि नरेंद्र मोदी और अमित शाह मुस्लिमों को साधने में लगे हैं लेकिन इतना तय है कि भारत का मुसलमान सिर्फ उस दल को वोट देगा जो बीजेपी को हरा सके।