Category: Maharashtra

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  • मालवनी पर महायुति की नज़र, 641 एकड़ जमीन के पुनर्विकास पर सियासी घमासान

    मालवनी पर महायुति की नज़र, 641 एकड़ जमीन के पुनर्विकास पर सियासी घमासान

    धारावी की तर्ज पर मालवणी के 641 एकड़ इलाके के पुनर्विकास की तैयारी शुरू। क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल, सर्वे और विस्थापन को लेकर विपक्ष ने सरकार पर बिल्डरों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।

    महाराष्ट्र/नागपुर: धारावी पुनर्विकास योजना के बाद अब मुंबई के मालाड स्थित मालवनी इलाके के 641 एकड़ भूखंड पर महायुति सरकार की नजर टिक गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे इलाके के क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल के तहत पुनर्विकास के लिए सर्वे और योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार इसे झोपड़पट्टी-मुक्त करने की पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इसे बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की साजिश करार दे रहा है।

    धारावी मॉडल पर मालवणी पुनर्विकास की तैयारी

    देश की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी धारावी को अडानी ग्रुप को सौंपे जाने के बाद अब सरकार ने मालवनी क्षेत्र के पुनर्विकास की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में 641 एकड़ क्षेत्र के सर्वेक्षण और क्लस्टर डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि क्लस्टर मॉडल के जरिए पूरे मालवनी इलाके का कम समय में पुनर्विकास संभव है और इसे एक बड़े झोपड़पट्टी पुनर्विकास प्रोजेक्ट के रूप में तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।

    641 एकड़ में फैला मालवनी, 14 हजार झोपड़ियां

    मालवनी इलाके का कुल क्षेत्रफल 641 एकड़ है, जिसमें

    • राज्य सरकार
    • म्हाडा
    • बृहन्मुंबई महानगरपालिका
    • निजी भूखंड

    शामिल हैं।
    इसमें से 565.98 एकड़ क्षेत्र में झोपड़पट्टियां हैं, जबकि 75.02 एकड़ खुली जमीन है। इस पूरे इलाके में करीब 14 हजार झोपड़ियां बसी हुई हैं। सरकार का दावा है कि पुनर्विकास के बाद यह इलाका पूरी तरह झोपड़पट्टी-मुक्त हो जाएगा।

    13 लाख लोगों के विस्थापन की आशंका

    विपक्ष का आरोप है कि इस योजना के नाम पर मालवनी में रहने वाले करीब 13 लाख लोगों को विस्थापित किया जाएगा। धारावी पुनर्विकास को लेकर पहले से चल रहे विवाद के बीच यह मुद्दा और भी संवेदनशील बन गया है।

    विपक्षी दलों का कहना है कि मुंबई में विकास के नाम पर लगातार बड़े भूखंड बिल्डरों की झोली में डाले जा रहे हैं, जबकि स्थानीय निवासियों के पुनर्वास और अधिकारों को लेकर स्पष्टता नहीं है।

    कौन करेगा सर्वे और रिपोर्ट?

    बैठक में तय किया गया कि

    • म्हाडा और
    • झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA)

    अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में सर्वे करेंगे।
    सभी झोपड़पट्टियों का सर्वे पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसियां संयुक्त रिपोर्ट तैयार करेंगी।
    जहां कानूनी अड़चनें होंगी, वहां अलग से कार्रवाई की जाएगी, और जहां विकास संभव होगा, उन इलाकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद

    इस अहम बैठक में

    • आवास राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर
    • विधायक असलम शेख
    • अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता
    • म्हाडा अधिकारी मिलिंद बोरीकर
    • SRA CEO डॉ. महेंद्र कल्याणकर

    मौजूद रहे।
    वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुंबई मनपा आयुक्त भूषण गगरानी भी बैठक में शामिल हुए।

    दागी बिल्डर को ठेका मिलने की चर्चा

    सूत्रों के अनुसार, इस पुनर्विकास परियोजना को लेकर पहले ही एक दागी बिल्डर को ठेका दिए जाने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आरोप है कि यह वही बिल्डर है, जिसने चेंबूर के माहुल इलाके में प्रोजेक्ट-अफेक्टेड लोगों के लिए इमारतें बनाई थीं, जहां करीब 9 हजार करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगे थे। बताया जाता है कि वह आपराधिक मामले में जेल भी जा चुका है।

    अब उसी बिल्डर को एक भाजपा नेता के माध्यम से मालवनी की बड़ी पुनर्विकास योजना में शामिल करने की कोशिश हो रही है।


    FAQ

    Q1. मालवणी पुनर्विकास योजना क्या है?
    मालवणी इलाके को क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल के तहत पुनर्विकसित करने की सरकारी योजना।

    Q2. कुल कितनी जमीन शामिल है?
    करीब 641 एकड़ भूमि।

    Q3. कितने लोग प्रभावित हो सकते हैं?
    करीब 13 लाख लोगों के विस्थापन की आशंका जताई जा रही है।

    Q4. विवाद क्यों हो रहा है?
    विपक्ष का आरोप है कि योजना का फायदा बिल्डरों को दिया जा रहा है।

  • KEM अस्पताल में आधुनिक बर्न केयर सेंटर का उद्घाटन

    KEM अस्पताल में आधुनिक बर्न केयर सेंटर का उद्घाटन

    मुंबई के केईएम अस्पताल में नवीनीकरण किए गए बर्न केयर सेंटर का उद्घाटन किया गया। यहां अब महिला, पुरुष और बच्चों समेत सालाना 150 से अधिक जले हुए मरीजों का आधुनिक इलाज संभव होगा।

    मुंबई: परेल स्थित केईएम अस्पताल में जले हुए मरीजों के इलाज के लिए पूरी तरह से नवीनीकरण किए गए बर्न केयर सेंटर का उद्घाटन किया गया है। इस केंद्र में अब महिलाओं और बच्चों के साथ-साथ पुरुष मरीजों को भी इलाज की सुविधा मिलेगी। अत्याधुनिक आईसीयू, वेंटिलेटर और संक्रमण से बचाव की विशेष व्यवस्था के साथ यह केंद्र हर साल करीब 150 से 170 जले हुए मरीजों के इलाज में सक्षम होगा।

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    केईएम अस्पताल में बर्न केयर सेंटर का लोकार्पण

    राजे एडवर्ड मेमोरियल (KEM) अस्पताल में नवीनीकरण किए गए बर्न केयर सेंटर का उद्घाटन 13 दिसंबर 2025 को श्री शैलेश लिमडी के हाथों किया गया। इस अवसर पर अस्पताल की अधिष्ठाता डॉ. संगीता रावत, प्लास्टिक सर्जरी विभाग की प्रमुख डॉ. विनिता पुरी और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ डॉक्टर उपस्थित थे।

    महिला, बच्चे और पुरुष मरीजों को समान सुविधा

    इस बर्न केयर सेंटर में अब जले हुए मरीजों के लिए सभी आवश्यक आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। पहले जहां सुविधाएं सीमित थीं, वहीं अब महिला, बालक और पुरुष सभी मरीजों को एक ही केंद्र में उच्च स्तरीय इलाज मिलेगा।

    सालाना 150 से 170 मरीजों के इलाज की क्षमता

    नवीनीकरण किए गए इस केंद्र की क्षमता सालाना 150 से 170 जले हुए मरीजों के इलाज की है। गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को समय पर और सही इलाज मिल सके, इसके लिए इस केंद्र को विशेष रूप से विकसित किया गया है।

    आईसीयू में अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण

    इस बर्न केयर सेंटर में कुल 12 बेड उपलब्ध कराए गए हैं।
    यहां मौजूद सुविधाओं में शामिल हैं—

    • पूरी तरह सुसज्जित अतिदक्षता उपचार कक्ष (ICU)
    • वेंटिलेटर सपोर्ट सिस्टम
    • मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर
    • डायलिसिस मशीन
    • आधुनिक चिकित्सा उपकरण

    इन सुविधाओं के चलते जले हुए मरीजों में इलाज के दौरान आने वाली जटिलताओं पर अधिक प्रभावी तरीके से नियंत्रण संभव होगा।

    संक्रमण से बचाव के लिए विशेष व्यवस्था

    जले हुए मरीजों को संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। इसे ध्यान में रखते हुए—

    • वार्ड में नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था
    • मरीजों की सुरक्षित आवाजाही
    • अलग और संरक्षित उपचार कक्ष

    की योजना बनाई गई है, जिससे मरीजों को सुरक्षित वातावरण मिल सके।

    मरीजों की मानसिक स्थिति का भी रखा गया ध्यान

    इलाज के दौरान मरीजों को दर्द और तनाव से कुछ राहत मिले, इसके लिए—

    • बेहतर प्रकाश व्यवस्था
    • आधुनिक फर्नीचर
    • मरीजों का ध्यान भटकाने के लिए टीवी की सुविधा

    भी उपलब्ध कराई गई है।

    बीएमसी आयुक्त के निर्देश पर हुआ नवीनीकरण

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका (Bmc) आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगराणी ने जले हुए मरीजों को समय पर और आधुनिक इलाज देने के निर्देश दिए थे। अतिरिक्त आयुक्त और सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में इस बर्न केयर सेंटर का नवीनीकरण पूरा किया गया।

    सरकारी योजनाओं के तहत गरीब मरीजों को इलाज

    उपायुक्त (सार्वजनिक स्वास्थ्य) शरद उघडे ने बताया कि इस केंद्र के माध्यम से सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।

    डॉक्टरों का कहना

    प्लास्टिक सर्जरी विभाग की प्रमुख डॉ. विनिता पुरी ने कहा कि जले हुए मरीजों को शारीरिक चोट के साथ-साथ मानसिक और सामाजिक आघात भी झेलना पड़ता है। यह बर्न केयर सेंटर मरीजों को इलाज के साथ-साथ सम्मान, सुरक्षा और नई उम्मीद देने का प्रयास करेगा।


    FAQ

    प्रश्न 1: बर्न केयर सेंटर का उद्घाटन कब हुआ?
    उत्तर: 13 दिसंबर 2025 को।

    प्रश्न 2: यहां कितने मरीजों का इलाज हो सकता है?
    उत्तर: सालाना 150 से 170 जले हुए मरीजों का।

    प्रश्न 3: क्या पुरुष मरीजों को भी इलाज मिलेगा?
    उत्तर: हां, अब पुरुष मरीजों को भी सुविधा उपलब्ध है।

    प्रश्न 4: इस केंद्र में कौन-कौन सी सुविधाएं हैं?
    उत्तर: आईसीयू, वेंटिलेटर, डायलिसिस मशीन और संक्रमण नियंत्रण की विशेष व्यवस्था।

  • मुंबई में 4 नए पुलिस स्टेशन और 2 नए ज़ोन को मिली मंज़ूरी

    मुंबई में 4 नए पुलिस स्टेशन और 2 नए ज़ोन को मिली मंज़ूरी

    मुंबई की बढ़ती आबादी और अपराध को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने 4 नए पुलिस स्टेशन, 2 नए डीसीपी ज़ोन और 3 एसीपी डिविज़न को मंजूरी दी है। 1,448 नए पद और ₹130 करोड़ से ज्यादा का बजट स्वीकृत।

    मुंबई: शहर में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। 12 दिसंबर 2025 को गृह विभाग द्वारा जारी शासन निर्णय के तहत मुंबई पुलिस कमिश्नरेट में 4 नए पुलिस स्टेशन, 2 नए डीसीपी ज़ोन और 3 नए एसीपी डिविज़न बनाए जाएंगे। इस फैसले से न सिर्फ पुलिस की पहुंच बढ़ेगी, बल्कि बढ़ती आबादी, ट्रैफिक और अपराध पर नियंत्रण भी आसान होगा।

    मुंबई में अभी कितने पुलिस स्टेशन हैं?

    फिलहाल मुंबई में कुल 100 पुलिस स्टेशन कार्यरत हैं, जिनमें शामिल हैं—

    • 93 स्थानीय पुलिस स्टेशन
    • 2 तटीय पुलिस स्टेशन (गोराई और माहिम)
    • 5 साइबर पुलिस स्टेशन

    अब सरकार ने इस नेटवर्क में 4 नए पुलिस स्टेशन जोड़ने की मंजूरी दे दी है।

    कहां-कहां बनेंगे नए पुलिस स्टेशन

    सरकार द्वारा स्वीकृत नए पुलिस स्टेशन और उनका क्षेत्राधिकार इस प्रकार है:

    1. महाराष्ट्र नगर पुलिस स्टेशन

    • क्षेत्र: भांडुप और पार्कसाइट पुलिस स्टेशन से अलग किया गया इलाका

    2. गोलिबार पुलिस स्टेशन

    • क्षेत्र: वाकोला और निर्मल नगर पुलिस स्टेशन से विभाजित इलाका

    3. मड-मार्वे पुलिस स्टेशन

    • क्षेत्र: मालवनी पुलिस स्टेशन के कुछ हिस्से

    4. आसलफा पुलिस स्टेशन

    • क्षेत्र: घाटकोपर और साकीनाका पुलिस स्टेशन से पुनर्गठन

    इन नए थानों से स्थानीय नागरिकों को नजदीक पुलिस सहायता मिलेगी और शिकायतों के निपटारे में तेजी आएगी।

    1,448 नए पद और ₹130 करोड़ से ज्यादा का बजट

    चारों नए पुलिस स्टेशनों के लिए सरकार ने—

    • 1,448 नए पद स्वीकृत किए हैं
    • ₹124.13 करोड़ का वार्षिक (रिकरिंग) खर्च
    • ₹7.39 करोड़ का एकमुश्त (नॉन-रिकरिंग) खर्च मंजूर किया है

    यह खर्च संबंधित वित्तीय वर्ष के बजट से पूरा किया जाएगा।

    2 नए डीसीपी ज़ोन और 3 एसीपी डिविज़न

    पुलिस प्रशासन को और बेहतर बनाने के लिए सरकार ने—

    • 2 नए डीसीपी ज़ोन
    • 3 नए एसीपी डिविज़न

    को भी मंजूरी दी है।
    इसके तहत—

    • डीसीपी ज़ोन के लिए 34 नए पद
    • एसीपी डिविज़न के लिए 30 नए पद

    स्वीकृत किए गए हैं।
    इस पर ₹6.24 करोड़ का वार्षिक और ₹83.95 लाख का एकमुश्त खर्च आएगा।

    क्यों लिया गया यह फैसला?

    सरकार के मुताबिक—

    • मुंबई की तेज़ी से बढ़ती आबादी
    • शहर का लगातार हो रहा विस्तार
    • ट्रैफिक दबाव और अपराध के बढ़ते मामले

    इन सभी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। नए पुलिस स्टेशन और ज़ोन बनने से पेट्रोलिंग बेहतर होगी और अपराध नियंत्रण मजबूत होगा।

    प्रस्ताव कैसे हुआ मंजूर?

    यह प्रस्ताव मुंबई पुलिस आयुक्त द्वारा भेजा गया था।

    • 11 नवंबर 2025 को हुई उच्चस्तरीय सचिव समिति की बैठक में इस पर चर्चा हुई
    • इसके बाद गृह विभाग ने 12 दिसंबर 2025 को शासन निर्णय जारी कर मंजूरी दी

    FAQ सेक्शन

    Q1: मुंबई में कितने नए पुलिस स्टेशन बनाए जाएंगे?
    मुंबई में 4 नए पुलिस स्टेशन बनाए जाएंगे।

    Q2: किन इलाकों को फायदा मिलेगा?
    भांडुप, पार्कसाइट, वाकोला, निर्मल नगर, मालवणी, मड-मार्वे, घाटकोपर और साकीनाका क्षेत्र।

    Q3: कुल कितने नए पद स्वीकृत हुए हैं?
    कुल 1,448 नए पद पुलिस स्टेशनों के लिए और 64 पद डीसीपी-एसीपी संरचना के लिए।

    Q4: इस पर कितना खर्च आएगा?
    करीब ₹130 करोड़ से ज्यादा का खर्च आएगा।

    Q5: इससे आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
    तेज़ पुलिस रिस्पॉन्स, बेहतर पेट्रोलिंग और अपराध नियंत्रण।

  • स्वच्छ मुंबई के लिए BMC की ‘स्वच्छता मंथन’ प्रतियोगिता, 4.20 करोड़ रुपये के इनाम

    स्वच्छ मुंबई के लिए BMC की ‘स्वच्छता मंथन’ प्रतियोगिता, 4.20 करोड़ रुपये के इनाम

    मुंबई को साफ और सुंदर बनाने के लिए बीएमसी ने 2026 में ‘स्वच्छता मंथन’ प्रतियोगिता की घोषणा की है। वार्ड, सोसायटी, अस्पताल, स्कूल, बाजार समेत कई श्रेणियों में 4.20 करोड़ रुपये के पुरस्कार दिए जाएंगे।

    मुंबई: शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने वर्ष 2026 के लिए एक बड़ी पहल की घोषणा की है। 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2026 तक चलने वाली ‘स्वच्छता मंथन’ प्रतियोगिता के तहत प्रशासनिक वार्ड, हाउसिंग सोसायटी, झोपड़पट्टी क्षेत्र, अस्पताल, स्कूल, बाजार, रेस्टोरेंट और सार्वजनिक स्थलों को साफ रखने पर कुल 4 करोड़ 20 लाख रुपये के पुरस्कार दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नागरिकों और निजी संस्थानों से बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की है।

    BMC-Swachhata-Manthan-competition-for-a-clean-Mumbai-with-prizes-worth-Rs-crore-news

    पूरे साल चलेगा BMC का स्वच्छता मंथन प्रतियोगिता

    बीएमसी के घनकचरा प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित यह प्रतियोगिता जनवरी से दिसंबर 2026 तक चलेगी। इसका उद्देश्य केवल सफाई नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी बढ़ाकर स्थायी स्वच्छता संस्कृति विकसित करना है।

    महानगरपालिका आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगराणी ने निर्देश दिए हैं कि यह अभियान पूरे मुंबई महानगर में प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।

    इन श्रेणियों में मिलेंगे पुरस्कार

    ‘स्वच्छता मंथन’ प्रतियोगिता कई वर्गों में आयोजित की जाएगी, ताकि शहर के हर हिस्से को इसमें शामिल किया जा सके:

    • स्वच्छ प्रशासनिक वार्ड
    • स्वच्छ आवासीय संकुल (हाउसिंग सोसायटी)
    • स्वच्छ झोपड़पट्टी क्षेत्र
    • स्वच्छ व्यावसायिक प्रतिष्ठान
    • स्वच्छ अस्पताल (सरकारी व निजी)
    • स्वच्छ स्कूल (सरकारी व निजी)
    • स्वच्छ रेस्टोरेंट
    • स्वच्छ सामुदायिक शौचालय
    • स्वच्छ सड़कें व मार्ग
    • स्वच्छ उद्यान व खुली जगहें
    • स्वच्छ बाजार क्षेत्र
    • आसपास का क्षेत्र गोद लेकर स्वच्छता (विशेष श्रेणी)

    किस श्रेणी में कितनी इनामी राशि

    बीएमसी द्वारा घोषित पुरस्कार राशि इस प्रकार होगी:

    • स्वच्छ वार्ड:
    • प्रथम: ₹50 लाख
    • द्वितीय: ₹25 लाख
    • तृतीय: ₹15 लाख
    • अन्य सभी श्रेणियां (सोसायटी, अस्पताल, स्कूल, बाजार आदि):
    • प्रथम: ₹15 लाख
    • द्वितीय: ₹10 लाख
    • तृतीय: ₹5 लाख

    कुल मिलाकर सभी श्रेणियों में ₹4.20 करोड़ की पुरस्कार राशि दी जाएगी।

    सेलिब्रिटी भी बनेंगे स्वच्छता अभियान का हिस्सा

    इस अभियान को जनआंदोलन बनाने के लिए—

    • फिल्म, खेल और अन्य क्षेत्रों की नामचीन हस्तियों को किसी इलाके को गोद लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
    • प्रसिद्ध अभिनेता अक्षय कुमार ने इस स्वच्छता अभियान में व्यक्तिगत रूप से भाग लेने की इच्छा जताई है।

    मूल्यांकन होगा निष्पक्ष संस्था से

    बीएमसी ने स्पष्ट किया है कि—

    • प्रतियोगिता का मूल्यांकन त्रयस्थ (थर्ड पार्टी) एजेंसी द्वारा किया जाएगा।
    • दिसंबर 2026 में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी में भव्य पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित होगा।

    मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का नागरिकों से आह्वान

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि—

    “स्वच्छ और सुंदर मुंबई केवल प्रशासन से नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी से संभव है।”

    उन्होंने नागरिकों, हाउसिंग सोसायटियों और निजी संस्थानों से इस प्रतियोगिता में सक्रिय भागीदारी की अपील की है।


    FAQ सेक्शन

    Q1: स्वच्छता मंथन प्रतियोगिता कब से कब तक चलेगी?
    यह प्रतियोगिता 1 जनवरी 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक चलेगी।

    Q2: कुल कितनी पुरस्कार राशि रखी गई है?
    कुल 4 करोड़ 20 लाख रुपये के पुरस्कार दिए जाएंगे।

    Q3: कौन-कौन भाग ले सकता है?
    नागरिक, हाउसिंग सोसायटी, स्कूल, अस्पताल, रेस्टोरेंट, बाजार और निजी संस्थान।

    Q4: मूल्यांकन कौन करेगा?
    एक स्वतंत्र त्रयस्थ संस्था द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा।

    Q5: पुरस्कार कब दिए जाएंगे?
    दिसंबर 2026 में भव्य समारोह में पुरस्कार वितरण होगा।

  • वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड को हाईकोर्ट की मंजूरी, BMC को मिली बड़ी राहत

    वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड को हाईकोर्ट की मंजूरी, BMC को मिली बड़ी राहत

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड परियोजना को हरी झंडी दे दी है। करीब 45 हजार मैंग्रोव कटेंगे, बदले में तीन गुना पौधारोपण और 10 साल की निगरानी अनिवार्य होगी।

    मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर को मिरा-भायंदर से सीधे जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड परियोजना को आखिरकार बॉम्बे हाईकोर्ट की मंजूरी मिल गई है। अदालत ने बीएमसी को करीब 45 हजार मैंग्रोव काटने की सशर्त अनुमति दी है। इसके बदले बीएमसी को तीन गुना पौधारोपण, चंद्रपुर में 103 हेक्टेयर वनरोपण और अगले 10 वर्षों तक हर साल निगरानी रिपोर्ट जमा करनी होगी। इस फैसले से मुंबई के उत्तरी हिस्से की ट्रैफिक समस्या कम होने की उम्मीद है।

    हाईकोर्ट का अहम फैसला

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी की याचिका पर सुनवाई करते हुए वर्सोवा–भायंदर डेवलपमेंट प्लान रोड (कोस्टल रोड नॉर्थ) को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी।
    हालांकि अदालत ने साफ किया कि—

    • परियोजना पर 10 साल तक निगरानी जरूरी होगी
    • हर साल कम्पनसेटरी प्लांटेशन की रिपोर्ट जमा करनी होगी

    अदालत का कहना है कि विकास के साथ पर्यावरण संतुलन भी उतना ही जरूरी है।

    कितने मैंग्रोव कटेंगे, कितना होगा पुनरोपण

    परियोजना के तहत—

    • कुल मैंग्रोव: करीब 60,000
    • प्रभावित होंगे: 45,675 मैंग्रोव
    • सड़क निर्माण के लिए सीधे कटेंगे: करीब 9,000 मैंग्रोव (10 हेक्टेयर)

    बीएमसी ने भरोसा दिलाया है कि—

    • तीन गुना मैंग्रोव पुनरोपण किया जाएगा
    • चंद्रपुर जिले में 103 हेक्टेयर क्षेत्र में अनिवार्य वनरोपण होगा

    वर्सोवा से भायंदर तक कैसा होगा रोड नेटवर्क

    यह कोस्टल रोड मुंबई के पश्चिमी किनारे पर एक बड़ा ट्रैफिक कॉरिडोर बनेगा।

    रूट डिटेल्स

    • शुरुआत: वर्सोवा
    • बीच के इलाके: मलाड, मालवनी, कांदिवली, बोरीवली, दहिसर
    • अंत: भायंदर (मिरा-भायंदर)

    संरचना

    • एलिवेटेड रोड
    • फ्लाईओवर और इंटरचेंज
    • टनल और ब्रिज
    • सतही ट्रैफिक कम करने की व्यवस्था

    दो फेज़ में बनेगी कोस्टल रोड

    • फेज-1: वर्सोवा से दहिसर
    • लंबाई: लगभग 20–25 किमी
    • इसे कोस्टल रोड फेज-2 या वर्सोवा–दहिसर लिंक रोड भी कहा जाएगा
    • फेज-2: दहिसर से भायंदर
    • एलिवेटेड रोड
    • लंबाई: 5.6 किमी, चौड़ाई 45 मीटर

    कुल मिलाकर इंटरचेंज और कनेक्टर मिलाकर नेटवर्क 60 किलोमीटर से ज्यादा का होगा।

    ट्रैफिक और कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा फायदा

    बीएमसी के अनुसार—

    • वेस्टर्न सबर्ब्स से मिरा-भायंदर का सफर तेज होगा
    • वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और लिंक रोड पर दबाव घटेगा
    • रोज़ाना लाखों यात्रियों को राहत मिलेगी

    पर्यावरण बनाम विकास की बहस फिर तेज

    जहां एक तरफ इस प्रोजेक्ट को ट्रैफिक समस्या का स्थायी समाधान बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मैंग्रोव कटाई को लेकर पर्यावरणविदों की चिंता भी बनी हुई है।
    हाईकोर्ट ने इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए सख्त शर्तों के साथ मंजूरी दी है।


    FAQ सेक्शन

    Q1: वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड क्या है?
    यह मुंबई को मिरा-भायंदर से जोड़ने वाली 26.3 किमी लंबी तटीय सड़क परियोजना है।

    Q2: कितने मैंग्रोव काटे जाएंगे?
    करीब 45,675 मैंग्रोव प्रभावित होंगे, जिनमें से लगभग 9,000 सीधे कटेंगे।

    Q3: बदले में क्या किया जाएगा?
    तीन गुना पौधारोपण और चंद्रपुर में 103 हेक्टेयर वनरोपण किया जाएगा।

    Q4: कोर्ट ने क्या शर्त रखी है?
    10 साल तक निगरानी और हर साल रिपोर्ट दाखिल करना अनिवार्य होगा।

    Q5: इससे आम लोगों को क्या फायदा होगा?
    ट्रैफिक कम होगा और वेस्टर्न सबर्ब्स से भायंदर तक सफर तेज होगा।

  • मुंबई को मिलेगी ‘पगड़ी सिस्टम’ से आज़ादी? राज्य सरकार ने बनाया नया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क

    मुंबई को मिलेगी ‘पगड़ी सिस्टम’ से आज़ादी? राज्य सरकार ने बनाया नया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क

    महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई को पुराने ‘पगड़ी सिस्टम’ से मुक्त करने के लिए नया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क बनाने का बड़ा फैसला किया। इससे 19,000 से ज्यादा पुरानी इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता साफ होगा।

    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई को दशकों पुराने ‘पगड़ी सिस्टम’ से बाहर निकालने की बड़ी पहल की है। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में घोषणा की कि शहर के पुराने पगड़ी मॉडल पर चलने वाले मकानों के लिए एक अलग रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे किरायेदारों और मकान मालिकों — दोनों के हक सुरक्षित रहेंगे और 19,000 से ज्यादा जर्जर इमारतों का पुनर्विकास तेज होगा। यह निर्णय मुंबई की रियल एस्टेट मार्केट को मजबूत करने और सालों से लंबित हजारों विवादों को खत्म करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    क्या है पगड़ी सिस्टम और क्यों जरूरी पड़ा बदलाव?

    मुंबई में दशकों से चल रहा पगड़ी सिस्टम एक ऐसा मॉडल है जिसमें किरायेदार मकान में रहने के लिए एकमुश्त रकम देकर आंशिक मालिकाना हक जैसा अधिकार पा लेता है।

    • किराया बेहद कम
    • सबलेट करने की अनुमति
    • मकान मालिक को वास्तविक मूल्य का लाभ नहीं

    इस सिस्टम के कारण मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच अक्सर विवाद खड़े होते रहे हैं। कई केस तो दशकों से अदालत में लंबित हैं।

    मुंबई में 19,000 से ज्यादा इमारतें पगड़ी सिस्टम में

    डिप्टी सीएम शिंदे ने बताया कि मुंबई में करीब 19,000 पुरानी, प्री-1960 सीज्ड इमारतें पगड़ी सिस्टम पर चल रही हैं।
    इनमें से—

    • कई इमारतें पहले ही जर्जर हो चुकी हैं
    • कुछ ढह चुकी हैं
    • और 13,000 से ज्यादा अभी भी पुनर्विकास का इंतज़ार कर रही हैं

    यह सारी इमारतें महाराष्ट्र रेंट कंट्रोल एक्ट के दायरे में आती हैं, जिससे किरायेदार सुरक्षित रहते हैं, लेकिन मकान मालिक अपने अधिकारों की उचित भरपाई न मिलने की शिकायत करते हैं।

    Deputy chief minister eknath shinde

    क्यों आया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क का विचार?

    शिंदे ने विधानसभा में बताया—

    • 28,000 से ज्यादा किरायेदार–मकान मालिक विवाद अदालतों में अटके हैं
    • पुराने कानून जमीन पर असरदार साबित नहीं हो रहे
    • पुनर्विकास बाधित होने से इमारतें खतरे में हैं

    सरकार अब हाईकोर्ट की मंजूरी से फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाएगी, ताकि सभी मामले तीन साल के भीतर निपट जाएं।

    कमजोर वर्ग के लिए मुफ्त पुनर्निर्माण की सुविधा

    FSI (Floor Space Index) बढ़ाना काफी नहीं है—यह बात भी शिंदे ने साफ कही।
    EWS और LIG वर्ग के पगड़ी धारकों के लिए—

    • मुफ्त पुनर्निर्माण
    • टेनेंट हिस्से के बराबर FSI
    • लैंड ओनर को मूल FSI
    • इंसेंटिव FSI

    अगर जमीन की ऊंचाई सीमा या अन्य रुकावटों के कारण FSI का पूरा उपयोग नहीं हो पाया, तो बचा हुआ FSI TDR (Transfer of Development Rights) के रूप में दिया जाएगा।

    पुरानी इमारतों के लिए खुला रास्ता

    सरकार का कहना है कि यह नया फ्रेमवर्क—

    • जर्जर इमारतों के गिरने के खतरे को रोकेगा
    • जीवन और संपत्ति दोनों की सुरक्षा करेगा
    • लंबे समय से अटकी पुनर्विकास परियोजनाओं में नई जान डालेगा

    साथ ही मौजूदा पुनर्विकास विकल्प 33(7) और 33(9) भी उपलब्ध रहेंगे।

    मकान मालिक और किरायेदार—दोनों के लिए फायदे

    सरकार के अनुसार—

    • किरायेदारों का पुनर्विकास और घर की सुरक्षा
    • मकान मालिकों को उचित हिस्सा और कानूनी राहत
    • लंबे विवादों का निपटारा
    • शहर में रियल एस्टेट मार्केट को बल

    यह सिस्टम दोनों पक्षों के लिए न्यायसंगत समाधान प्रदान करेगा।


    FAQ सेक्शन

    1. पगड़ी सिस्टम क्या होता है?

    एक पुराना किरायेदारी मॉडल जिसमें किरायेदार एकमुश्त रकम देकर कम किराए पर आंशिक मालिकाना अधिकार जैसा लाभ पाता है।

    2. मुंबई में कितनी पगड़ी इमारतें हैं?

    करीब 19,000 से ज्यादा इमारतें पगड़ी सिस्टम में आती हैं।

    3. नया फ्रेमवर्क कब लागू होगा?

    सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी है, विस्तृत नियम जल्द सामने आएंगे।

    4. क्या किरायेदारों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे?

    हाँ, सरकार ने साफ कहा है कि किरायेदार और मकान मालिक दोनों के हित सुरक्षित रखे जाएंगे।

    5. क्या सभी केस जल्द निपटेंगे?

    फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए सभी 28,000 केस अगले तीन साल में निपटाने की योजना है।

  • हाईवे पर दंपती ने लगा दी रसोई, राहगीर से उलझे; वीडियो वायरल

    हाईवे पर दंपती ने लगा दी रसोई, राहगीर से उलझे; वीडियो वायरल

    व्यस्त हाईवे पर दंपती द्वारा सड़क किनारे रसोई जमाने का वीडियो वायरल। राहगीर ने टोका तो दंपती ने उल्टा जवाब दिया। सोशल मीडिया पर सड़क सुरक्षा और नागरिक जिम्मेदारी को लेकर बहस छिड़ी।

    मुंबई: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक दंपती व्यस्त हाईवे के किनारे सड़क पर ही अस्थायी रसोई बनाकर खाना बनाते दिखाई दे रहा है। वहीं राहगीर ने जब उन्हें सड़क पर बैठकर खाना पकाने के खतरों के बारे में समझाने की कोशिश की, तो दंपती ने उल्टा तर्क देते हुए कहा — “हमें भी पता है…” और खुद को “रेस्ट एरिया” में होने का दावा किया। इस वीडियो ने देशभर में सड़क सुरक्षा, नागरिक जिम्मेदारी और जागरूकता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    हाईवे पर सब्ज़ियां फैलाकर चूल्हा जलाया, बच्चा भी बैठा था पास

    वीडियो में महिला हाईवे किनारे सड़क पर बैठी सब्ज़ियां काटती, रोटियां बेलती और पोर्टेबल गैस स्टोव पर उन्हें सेंकती दिखाई देती है। वहीं उनका छोटा बच्चा ठीक पास में सड़क पर ही बैठा हुआ नजर आता है।
    दंपती का सामान इस तरह फैला था कि छोटे वाहनों के गुजरने में भी बाधा पैदा हो रही थी।

    राहगीर ने रोका, तो दंपती बोले— “ये हमारा रेस्ट एरिया है”

    वीडियो रिकॉर्ड करने वाले राहगीर ने जब उनसे पूछा कि तेज़ रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पर खाना बनाना कितना खतरनाक है, तो दंपती ने बिना समझे उल्टा सवाल करते हुए कहा कि वे किसी “डिज़ाइनटेड रेस्ट एरिया” में बैठे हैं।
    दंपती की लापरवाही और तर्क सुनकर राहगीर ने अपनी नाराज़गी जाहिर की और पूरा वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया।

    सोशल मीडिया पर नाराज़गी— ‘जान से खेलकर कंटेंट मत बनाओ’

    वीडियो सामने आने के बाद यूज़र्स ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हाईवे किसी भी तरह की गतिविधि— खाना बनाना, पिकनिक, बच्चों को बैठाना— के लिए नहीं होते।
    कई लोगों ने लिखा कि “हाईवे पर गाड़ियां 100-120 की स्पीड से दौड़ती हैं, ऐसे में सड़क के बीच खाना बनाना जान जोखिम में डालने जैसा है।”
    कुछ ने ट्रैफिक पुलिस और हाईवे अथॉरिटी से कार्रवाई की मांग भी की है।

    रोड सेफ्टी को लेकर फिर उठा सवाल

    एक्सपर्ट्स लंबे समय से बताते आए हैं कि भारत में सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता बहुत कम है।
    हाईवे पर इस तरह की गतिविधियां—

    • दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं,
    • अचानक ब्रेक लगने की नौबत लाती हैं,
    • पीछे चलने वाले वाहनों के लिए बड़ा खतरा बनती हैं।

    इस घटना में बच्चा भी मौजूद था, जिससे खतरा और बढ़ गया था।

    क्यों खतरा बढ़ जाता है? (डिटेल विश्लेषण)

    • हाईवे पर रुकने की अनुमति केवल निर्धारित लेन में होती है, सड़क पर नहीं।
    • सड़क किनारे बैठना भी तेज़ रफ्तार ट्रैफिक में जानलेवा साबित हो सकता है।
    • रात या कम रोशनी वाले इलाकों में ऐसे लोग दिखते भी नहीं।
    • अचानक मोड़ या ब्रेक से बड़े हादसे हो सकते हैं।

    FAQ सेक्शन

    1. वीडियो कहाँ शूट किया गया था?

    फिलहाल वीडियो के सटीक लोकेशन की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसे भारत के किसी व्यस्त हाईवे का बताया जा रहा है।

    2. क्या दंपती के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है?

    अब तक इस मामले में किसी आधिकारिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।

    3. क्या हाईवे पर रुककर खाना बनाना गैरकानूनी है?

    हां, हाईवे पर अवैध रूप से रुकना, सड़क पर बैठना या गतिविधि करना ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन माना जाता है।

    4. सोशल मीडिया ने कैसी प्रतिक्रिया दी?

    यूज़र्स ने दंपती की लापरवाही पर कड़ी आलोचना की और इसे सड़क सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया।

  • Malad में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, विदेशियों को बैन दवाइयां बेचने वाले 5 गिरफ्तार

    Malad में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, विदेशियों को बैन दवाइयां बेचने वाले 5 गिरफ्तार

    मुंबई के मालाड स्थित चिनचोली बंदर में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर पर पुलिस ने छापा मारकर पाँच लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपी विदेशों में बैन दवाओं की सप्लाई का झांसा देकर भारी रकम वसूल रहे थे। पुलिस ने IT Act, BNS और टेलीग्राफ एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया है।

    मुंबई: मालाड इलाके में बांगुर नगर पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी एक अवैध कॉल सेंटर चलाकर अमेरिका सहित कई देशों के ग्राहकों को बैन दवाइयां भेजने का दावा करते थे और उनसे भारी रकम वसूलते थे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ IT Act और नई दंड संहिता (BNS) की कई धाराओं में केस दर्ज किया है।

    Malad में चल रहा था अवैध कॉल सेंटर, विदेशी ग्राहकों को बनाया जा रहा था निशाना

    मुंबई के चिंचोली बंदर, मालाड स्थित एक ऑफिस में यह फर्जी कॉल सेंटर ऑपरेट किया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपी खुद को विदेशी ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर विदेशी ग्राहकों से संपर्क करते थे।

    वे ग्राहक को कहते थे कि उनके लिए ऐसी दवाइयां उपलब्ध हैं जो आमतौर पर बैन हैं या ऑनलाइन बेचना गैरकानूनी है। इसी बहाने उनसे डॉलर में भुगतान भी ले लिया जाता था।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

    पुलिस के अनुसार पकड़े गए पाँच आरोपी—

    • अयूब शेख (30)
    • फैजान भलीम (27)
    • फारुख शेख (29)
    • मोइन अहमद शेख (32)
    • ज़ीशान नासिर अंसारी (22)

    ये सभी मिलकर लंबे समय से ये फर्जीवाड़ा चला रहे थे।
    ये सभी मिलकर अमेरिका सहित कई देशों के लोगों को फंसाकर लाखों की ठगी कर रहे थे।

    कैसे करते थे ठगी? पुलिस ने खोला पूरा खेल

    • संदिग्ध वेबसाइट या डेटा के जरिए विदेशी ग्राहकों तक पहुँच बनाना
    • खुद को इंटरनेशनल ऑनलाइन फार्मेसी का अधिकारी बताना
    • मेडिकल कंसल्टेशन का झांसा देना
    • “बैन मेडिसिन उपलब्ध” कहकर ऑनलाइन पेमेंट वसूलना
    • पैसे लेने के बाद उत्पाद न भेजना

    यह पूरा नेटवर्क फार्मा से जुड़े अवैध कारोबार + साइबर फ्रॉड का कॉम्बिनेशन था।

    कौन-कौन सी धाराओं में केस दर्ज?

    बांगुर नगर पुलिस ने मामला दर्ज किया है—

    • BNS की धाराएँ 318(4), 319(2), 3(5)
    • IT Act 2000 की धाराएँ 66(A), 66(D), 75
    • Indian Telegraph Act की धारा 20

    पाँचों आरोपियों को 15 दिसंबर तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है।

    मालाड और मुंबई में बढ़ते साइबर फ्रॉड को लेकर पुलिस अलर्ट

    इस तरह के कॉल सेंटर लगातार मुंबई के कई इलाकों में पकड़े जा रहे हैं। विदेशी ग्राहकों को निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि—

    • वे दवाओं की कीमत ज़्यादा चुकाते हैं
    • वे शिकायत भारत में दर्ज नहीं करा पाते
    • वेरिफिकेशन की प्रक्रिया मुश्किल होती है

    पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े और लोगों की तलाश कर रही है।


    FAQ

    1. क्या गिरफ्तार कॉल सेंटर वास्तव में दवाइयां सप्लाई करता था?

    नहीं, आरोपी सिर्फ भुगतान लेते थे और बाद में उत्पाद नहीं भेजते थे। यह पूरा रैकेट फर्जीवाड़ा था।

    2. क्या ग्राहकों को किसी तरह की मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन की सुविधा दी जाती थी?

    वे खुद को इंटरनेशनल फार्मेसी बताकर नकली कंसल्टेशन की बात करते थे, जो पूरी तरह अवैध था।

    3. क्या इस रैकेट में और लोग शामिल हो सकते हैं?

    पुलिस के अनुसार यह एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है, जिसकी जाँच जारी है।

    4. क्या विदेशी ग्राहक भारत में केस दर्ज कर सकते हैं?

    तकनीकी रूप से हाँ, लेकिन शिकायत प्रक्रिया जटिल होने के कारण अक्सर ठगी की रिपोर्ट नहीं होती।

  • BMC चुनाव से पहले भाजपा में तकरार? किरीट सोमैया ने मंत्री लोढा को लगाई फटकार

    BMC चुनाव से पहले भाजपा में तकरार? किरीट सोमैया ने मंत्री लोढा को लगाई फटकार

    मुंबई महापौर पद को लेकर भाजपा के भीतर मतभेद उभरते दिख रहे हैं। मंत्री मंगलप्रभात लोढा के “भाजपा का महापौर” बयान पर पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा—“कसली कॉलर टाइट? भाजपा महापौर की रेस में नहीं है।”

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव नज़दीक आते ही राजनीति गर्माती जा रही है। एक तरफ भाजपा नेता जहां BMC में सत्ता स्थापित करने की बात कर रहे हैं, वहीं भाजपा के भीतर ही इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आते दिख रहे हैं। मंत्री मंगलप्रभात लोढा द्वारा “मुंबई में भाजपा का महापौर बनेगा” इस दावे के बाद पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने उन्हें कड़े शब्दों में फटकार लगाई और कहा कि “भाजपा महापौर पद की लड़ाई नहीं लड़ रही है।” सोमैया ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी इस बयान पर ध्यान देने की बात कही।

    मुंबई में महापौर पद पर सियासी बयानबाज़ी तेज़

    राज्य के 29 नगर निगम चुनावों की घोषणा से पहले ही मुंबई में राजनीतिक दलों ने तैयारी तेज कर दी है। महायुती के नेताओं का दावा है कि इस बार मुंबई में उनका महापौर बनेगा।
    वहीं शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) भी लगातार यह कहते हुए दिखाई दे रही है कि “मुंबई में फिर से शिवसेना का महापौर आएगा।”

    इसी माहौल में मंत्री मंगलप्रभात लोढा के बयान ने राजनीतिक हलचलों को और हवा दे दी।

    मंगलप्रभात लोढा का बयान: “भाजपा का महापौर बनेगा, कॉलर टाइट होगा!”

    एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मंत्री लोढा ने कहा था—

    “मुंबई महानगरपालिका में जब भाजपा का महापौर चुना जाएगा, तब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उसके शपथ ग्रहण समारोह में आएंगे, और उस वक्त आपकी और मेरी कॉलर टाइट होगी!”

    उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में कई दल फडणवीस के संकेतों पर चलते हैं।

    उनके इस बयान के बाद से राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है कि भाजपा अकेले महापौर पद का दावा कर रही है।

    सैय्या—”किस तरह का कॉलर टाइट? बीजेपी मेयर पद का चुनाव नहीं लड़ रही है!”

    मंगलप्रभात लोढा के बयान पर भाजपा के ही वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने नाराज़गी जताई।
    मीडिया से बातचीत में सोमैया ने कहा—

    “भाजपा महापौर पद के लिए लड़ ही नहीं रही। जो नेता महापौर पद की बात कर रहे हैं, उन्हें मैंने भी बताया है और फडणवीस जी को भी कहा है कि उन्हें रोको। कैसा कॉलर टाइट? कैसा महापौर पद?”

    सोमैया ने स्पष्ट किया कि भाजपा का ध्यान महापालिका में “भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन” और विकास पर है, न कि महापौर की कुर्सी पर।

    महा विकास अघाड़ी और ठाकरे गुट पर भी हमला

    मीडिया से बातचीत के दौरान सोमैया ने शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) को भी आड़े हाथों लिया।
    उन्होंने कहा—

    • “कोविड के दौरान ठाकरे सेना कमाई कर रही थी।”
    • “खिचड़ी घोटाला, रेमडेसिविर घोटाला—ये सब मुंबई को लूटने की कहानी है।”
    • “हमारा लक्ष्य BMC को भ्रष्टाचार से मुक्त कराकर मुंबई का विकास करना है।”

    उनके अनुसार भाजपा—चाहे फडणवीस हों या मोदी—पिछले 25 वर्षों से “लूट” का आरोप झेल रही मुंबई को बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुंबई में क्या भाजपा एकजुट नहीं? उठने लगे सवाल

    लोढा का “भाजपा का महापौर” वाला दावा और सोमैया की “भाजपा महापौर पद की लड़ाई नहीं लड़ रही” वाली प्रतिक्रिया—दोनों ने मिलकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—

    क्या BMC चुनाव में भाजपा की रणनीति स्पष्ट नहीं है?

    या फिर पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनी है?

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि BMC चुनाव 2025 महाराष्ट्र में सत्ता संतुलन तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
    इसलिए भाजपा चाहती है कि हर बयान बेहद सोच–समझकर दिया जाए।


    FAQ सेक्शन

    1. महापौर पद को लेकर भाजपा में विवाद क्यों दिख रहा है?

    मंत्री लोढा ने कहा कि “भाजपा का महापौर बनेगा”, जबकि सोमैया ने कहा कि भाजपा महापौर की रेस में नहीं है। इसी वजह से मतभेद की चर्चा शुरू हुई।

    2. भाजपा की आधिकारिक रणनीति क्या है?

    सोमैया के मुताबिक, भाजपा का मुख्य फोकस महापालिका को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना और विकास तेज़ करना है।

    3. BMC चुनाव कब होने की उम्मीद है?

    राज्य चुनाव आयोग जल्द ही तारीखों की घोषणा कर सकता है। 29 नगर निगमों के चुनाव एक साथ होने की संभावना है।

    4. शिवसेना (उद्धव गुट) का दावा क्या है?

    ठाकरे गुट का दावा है कि वे फिर से मुंबई में महापौर बनाएंगे।

  • काला घोड़ा क्षेत्र में सुशोभीकरण तेज, BMC आयुक्त ने की मौके पर समीक्षा

    काला घोड़ा क्षेत्र में सुशोभीकरण तेज, BMC आयुक्त ने की मौके पर समीक्षा

    मुंबई के ऐतिहासिक काला घोड़ा इलाके में चल रहा BMC का सुशोभीकरण अंतिम चरण में है। आयुक्त भूषण गगराणी ने रुदरफोर्ड स्ट्रीट, डॉ. वी.बी. गांधी मार्ग और बी. भरूचा मार्ग पर जारी कार्यों की समीक्षा की। क्षेत्र में प्लाज़ा, पाथवे, बैरिकेट्स और आकर्षक ग्रेनाइट फर्श तैयार किया जा रहा है।

    मुंबई: दक्षिण मुंबई का मशहूर और ऐतिहासिक काला घोड़ा इलाके का सुशोभीकरण अब अंतिम चरण में है। गुरूवार को BMC आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगराणी और माजी मुख्य सचिव नितीन करीर ने क्षेत्र का दौरा कर कामों की समीक्षा की। यहां लगभग 3,443 वर्गमीटर क्षेत्र में आधुनिक पाथवे, ग्रेनाइट फर्श, प्लाज़ा, बैरिकेट्स और पर्यटक–अनुकूल सुविधाएँ तैयार की जा रही हैं, ताकि आने वाले दिनों में यह इलाका मुंबईकरों और विदेशी पर्यटकों के लिए और भी आकर्षक बन सके।

    मुंबई का प्रतिष्ठित काला घोड़ा क्षेत्र अब और निखरेगा

    दक्षिण मुंबई का काला घोड़ा इलाका शहर की ऐतिहासिक विरासत, कला और संस्कृति की पहचान माना जाता है। यहां स्थित गैलरी, संग्रहालय, आर्ट स्टूडियो और पुरातन इमारतों के कारण यह हर दिन हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। इसी को और सुदृढ़ बनाने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने बड़े पैमाने पर सुशोभीकरण का काम हाथ में लिया है।

    काला घोड़ा एक ऐसा स्थान है, जहाँ हर साल प्रसिद्ध काला घोड़ा आर्ट फेस्टिवल आयोजित होता है, और यह क्षेत्र UNESCO के Victorian Gothic & Art Deco Ensemble से लगा हुआ है। इस वजह से भी इसे एक व्यवस्थित और वर्ल्ड-क्लास पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    3,443 वर्गमीटर में पहले चरण का काम लगभग पूरा

    सुशोभीकरण के पहले चरण में:

    • डॉ. वी. बी. गांधी मार्ग, रुदरफोर्ड स्ट्रीट, बी. भरूचा मार्ग
    • रोप वॉक लेन और साईबाबा रोड

    इन पाँच सड़कों के कुल 3,443 वर्गमीटर क्षेत्र में (करीब 500 मीटर लंबाई) आधुनिक पाथवे, फेसिंग और सड़क सुधार का काम किया जा रहा है।

    यहाँ करडा और काला ग्रेनाइट, बेसॉल्ट स्टोन और आकर्षक पैटर्न वाली वॉकवे तैयार हो रही हैं। इन पायवाटों को ऐसा डिज़ाइन किया गया है कि पर्यटक चलते हुए आराम का अनुभव कर सकें।

    प्लाज़ा एरिया और बैठने की व्यवस्था बनेगी आकर्षण

    बी. भरूचा मार्ग के चौक पर एक छोटा लेकिन खूबसूरत प्लाज़ा बनाया जा रहा है, जहाँ—

    • टेबल–चेयर की बैठने की सुविधा
    • हल्का रिफ्रेशमेंट लेने के लिए स्पॉट
    • फोटो प्वाइंट और कला प्रदर्शन का स्थान

    मुंबईकरों और विदेशी पर्यटकों को यह नया प्लाज़ा विशेष रूप से आकर्षित करेगा।

    अवजड वाहनों पर रोक, चारों तरफ सुरक्षा बैरिकेट्स

    इस क्षेत्र को पूरी तरह ‘टूरीस्ट–फ्रेंडली’ बनाने के लिए BMC ने बड़े वाहनों को आने से रोकने का फैसला किया है। इसके चारों ओर आधुनिक सेफ्टी बैरिकेड्स लगाए जाएंगे ताकि पैदल यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक माहौल मिले।

    उपहारगृहों और दुकानों को एकसमान साइन बोर्ड लगाने का निर्देश

    दौरे के दौरान आयुक्त भूषण गगराणी ने महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा—

    • सभी रेस्टोरेंट, कैफे, होटल और दुकानों के साइन बोर्ड एकसमान आकार में हों।
    • पूरे क्षेत्र की सौंदर्यात्मक पहचान एक जैसी दिखनी चाहिए।
    • किसी भी तरह की अवैध या अव्यवस्थित बोर्डिंग को हटाया जाए।

    इससे पर्यटन क्षेत्र की दृश्यता और आकर्षण बढ़ेगा।


    पर्यटकों के लिए नया ‘हेरिटेज वॉक अनुभव’

    काला घोड़ा क्षेत्र पहले से ही हेरिटेज वॉक का केंद्र माना जाता है।
    नई पाथवे और सुशोभीकरण के बाद यहाँ—

    • पर्यटक आराम से पैदल घूम सकेंगे
    • कला, वास्तुकला और स्थानीय खानपान का आनंद ले सकेंगे
    • सड़कें और लेन अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित होंगी

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    1. काला घोड़ा में सुशोभीकरण का काम क्यों किया जा रहा है?

    यह क्षेत्र मुंबई का प्रमुख कला एवं पर्यटन स्थल है। इसे और आकर्षक व आधुनिक बनाने के लिए BMC सुशोभीकरण कर रही है।

    2. सुशोभीकरण में क्या–क्या शामिल है?

    नए पाथवे, प्लाज़ा, ग्रेनाइट फर्श, बैरिकेट्स, एकसमान साइन बोर्ड, सुरक्षित वॉकिंग लेन और पर्यटन–अनुकूल सुविधाएँ।

    3. किसने निरीक्षण किया?

    BMC आयुक्त भूषण गगराणी और माजी मुख्य सचिव नितीन करीर ने पूरे प्रोजेक्ट का दौरा कर समीक्षा की।

    4. पहले चरण में कितना क्षेत्र शामिल है?

    लगभग 3,443 वर्गमीटर क्षेत्र (करीब 500 मीटर लंबाई) को विकसित किया जा रहा है।