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  • प्रभाग -6 के जवाबदेह अभियंताओं की शह पर किया जा रहा गैरकानूनी बांधकाम

    प्रभाग -6 के जवाबदेह अभियंताओं की शह पर किया जा रहा गैरकानूनी बांधकाम

    • करोड़ों की हेरा-फेरी न हो तो महानगर पालिका कैसी?
    • आदिवासी के रिक्त भूखंड पर भूमाफियाओं का कब्जा।
    • मीरा-भायंदर आदिवासियों की जमीन की बिना रजिस्ट्री किए ही झोपड़ा धारकों का एग्रीमेंट बनाकर बेची जा रही जमीन।

    सुरेन्द्र राय
    मिरा/भायंदर-
    यहां तो होड़ लगी रहती है, कि कौन सा प्रभाग अधिकारी अपने पाले हुए गुर्गे या स्थानीय भूमाफियाओं के माध्यम से कितनी बड़ी जमीन कब्जा कराकर, उस पर गैरकानूनी तरीके से निर्माण कराकर प्रॉपर्टी बनाता है और वही उच्च अधिकारियों को खिलाता हुआ चमचागिरी करके प्रमोशन पा जाता है।

    मीरा-भायंदर महानगरपालिका का भ्रष्टाचार ..

    देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से सटे मीरा-भायंदर महानगर पालिका में अवैध निर्माण रूपी भ्रष्टाचार का खेल बखूबी चलता रहता है। यहां पर अवैध निर्माण रूपी भ्रष्टाचार के कीर्तिमान बनते और टूटते रहते हैं। लेकिन मजाल क्या है, कि कोई बड़े से बड़ा पालिका अधिकारी उनकी गिरेबां पकड़कर कानून के हवाले करे और सजा दिलाए। क्योंकि बड़े अधिकारियों तक अवैध निर्माण रूपी भ्रष्टाचार की काली कमाई के कमीशन पहुंचते रहते हैं।

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    वैसे तो मीरा-भायंदर महानगर पालिका के अधिकांश प्रभाग  भ्रष्टाचार में लिप्त है। कहीं प्रभाग अधिकारी अपनी काली कमाई को स्थानीय भूमाफियाओं और ठेकेदारों के साथ मिलकर खपाता है अवैध निर्माण में, तो कहीं प्रभाग अधिकारी के साथ मिलकर प्रभाग अभियंता गैरकानूनी बांधकाम कराते हुए संरक्षण देकर मोटी कमाई करते हुए आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करते हैं। वह भी बिना रजिस्ट्री के!
    एक ऐसे ही अवैध निर्माण रूपी भ्रष्टाचार का मामला मीरा – भायंदर महानगर पालिका, प्रभाग- 6 के अंतर्गत प्रकाश में आया है।

    जहां पर स्थानीय भूमाफिया मंगल गांधी, बाबू म्हात्रे और अवेश कुरेशी द्वारा मीरा रोड(पूर्व)  काशिमीरा स्थित काशिगांव, मीनाक्षी नगर के डचकूल पाड़ा, महाराष्ट्र – ४०११०७ स्थित विगत वर्षों से रिक्त पड़े भूखंड, आदिवासी की जमीन पर प्रभाग -6 के भ्रष्ट अधिकारियों से साठगांठ कर पतरे के रूम का स्ट्रक्चर निर्माण कर उसे मेहनत कश गरीब जरूरत मंद लोगो को अंधेरे में रखकर धड़ल्ले से बेचा जा रहा है।

    बता दें, कि जब संवाददाता ने खुद इस मामले की जांच पड़ताल की तो पता चला कि मीरा-भायंदर, महानगरपालिका, प्रभाग -6 के जवाबदेह अभियंताओं ने उक्त भूमाफियाओं से भारी धनराशि लेकर अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले प्रभाग -6 में आदिवासी की जमीन पर अवैध ढंग से पतरे रूपी स्ट्रक्चर का निर्माण कराकर गैरकानूनी तरीके से बेचा जा रहा है। फिर उसी पतरे रूपी स्ट्रक्चर को पक्के बांधकाम कराकर लाखों रुपए में बेचकर मालामाल होने की साजिश के तहत भूमाफिया मंगल गांधी, बाबू म्हात्रे और अवेश कुरेशी से मिलीभगत कर प्रभाग -6 के जवाबदेह अभियंताओं द्वारा महानतम भ्रष्टाचार किया जा रहा है।

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    हालांकि संवाददाता ने उक्त मामले की जानकारी प्रभाग -6 के प्रभाग अधिकारी, प्रभाकर म्हात्रे को दी जिसे संज्ञान में लेते हुए प्रभाग अधिकारी प्रभाकर म्हात्रे ने  संवाददाता को बताया कि आदिवासी की जमीन पर किए गए अनाधिकृत निर्माण कार्य को लेकर प्रभाग – 6 द्वारा तोड़क कारवाई की जा चुकी है।उक्त जमीन पर यदि पुनः कोई भी भूमाफिया चाहे वह मंगल गांधी ,बाबू म्हात्रे या अवेश कुरेशी ही क्यों न हो उस पर एमआरटीपी के तहत एफआईआर दर्ज करवाएंगे, इतना कहकर प्रभाग – 6 के प्रभाग अधिकारी,प्रभाकर म्हात्रे ने अपनी वाणी को विराम दिया। अब ऐसे में जिसकी उच्च स्तरीय जांच कर तोडक कार्रवाई जरूरी है।

    मीरा-भायंदर महानगर पालिका, प्रभाग – 6 के प्रभाग अधिकारी प्रभाकर म्हात्रे से हमारी मांग है कि जवाबदेह अभियंताओं के भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच पारदर्शी तरीके से कराकर आरोप तय कर दंडात्मक कार्रवाई कराए और साथ ही तोड़क कारवाई कर आदिवासियों को अपने जमीन से वंचित होने से बचाएं अन्यथा आपकी साख पर भी बट्टा लगेगा!

  • कब सुधरेगा पूना का चेकिंग स्टाफ

    कब सुधरेगा पूना का चेकिंग स्टाफ

    रेलवे प्रशासन के भ्रष्टाचार पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। लेकिन भ्रष्टाचार के इन सवालों को लेकर जीएम लालवानी का कोई व्यक्तव्य नही आता है।

    वी बी माणिक
    मुंबई
    – मध्यरेल के पूना और सोलापुर मंडल का चेकिंग स्टाफ वसूली पर अपनी जिंदगी बसर कर रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूना और सोलापुर के टिकट चेकिंग स्टाफ मेल एक्सप्रेस गाड़ियों में बड़े पैमाने पर हफ्ता लेकर अवैध हॉकरों से मोटी रकम लेकर गाड़ियों में फालतू खाना, चाय, चिक्की, पानी, समोसा, वड़ापाव बिकवाते है। घटिया किस्म की सामग्री से परेशान यात्रियों के शिकायत के बावजूद इन पर कार्रवाई नही की जाती है। उल्टा यात्रियों को ही धमकाते है।

    रेलवे, भ्रष्टाचार,
    मध्य रेलवे जीएम नरेश लालवानी की फाइल तस्वीर

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    ये टीसी नही गुंडे हैं। इस पर जीएम नरेश लालवानी का कोई व्यक्तव्य नही आता है। रेलवे स्टाफ फर्जी तरीके से यात्रा करता है। न तो उसके पास यात्रा करने की टिकट या पास कुछ नही होता हैं। यात्रियों को गाड़ी खाली रहने के बाद भी सीट नही मिलता है। रेलवे को लूटने का पूरा धंधा यही टीसी करते है। इनका इंचार्ज महीने का लाखो रुपये का टेंडर लेता है। जिसका हिस्से के तौर पर हफ्ता एसीएम और डीसीएम तक जाता है।

    रेलवे प्रशासन के भ्रष्टाचार पर सवाल ?

    सिर्फ पूना से सोलापूर के बीच यात्रा पर रेलवे प्रशासन के भ्रष्टाचार को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। पूना से सोलापुर के बीच अवैध रूप से 300 से 500 रुपये में ऐसी की सीटें बेचने का कारोबार करते है। प्रति ट्रिप में कितने अवैध यात्रियों से पैसे लिए जाते है? क्या करता है इनका विजिलेंस विभाग? कितनी कार्रवाई करता है ऐसे टीसीओ पर ? पूना और सोलापुर मंडल भ्रष्टाचार में अव्वल है इसका रिवार्ड जीएम कब घोषित करेंगे ?

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  • सहायक आयुक्तों की भर्ती में बड़े पैमाने हुआ है भ्रष्टाचार: आयुक्त चहल निकले रक्त चूसक जोंक

    सहायक आयुक्तों की भर्ती में बड़े पैमाने हुआ है भ्रष्टाचार: आयुक्त चहल निकले रक्त चूसक जोंक

    • मनपा आयुक्त के रूप में सबसे ज्यादा अयोग्य अभ्यर्थी नियुक्त करने का चहल का रिकार्ड
    • मनपा आयुक्त चहल के कैरेक्टर रोल की जांच सीबीआई व ईडी से कराने की मुंबईकरों की मांग।

    सुरेंद्र राय
    मुंबई-
    बृहन्मुंबई महानगर पालिका के आयुक्त  इकबाल सिंह चहल को एक ईमानदार अधिकारी के रूप में जाना जाता रहा है। किंतु किसी को क्या मालूम था की इकबाल सिंह चहल अपने निजी लाभ के लिए सहायक आयुक्तों की होने वाली नई भर्ती पर ध्यान नहीं देंगे तथा वह कभी भी राज्य संघ लोक सेवा आयोग से सहायक आयुक्त की भर्ती के लिए कोई मांग नहीं करेंगे। इन दोनों ने ऐसा किया है जिसके कारण मनपा में सहायक आयुक्त का कार्य भी प्रभारी सहायक आयुक्त से लिया जा रहा है। सहायक आयुक्त की जगह अपेक्षित काम ना कर पाने के कारण प्रभारी सहायक आयुक्त जनता की अनेक समस्याएं दूर नहीं कर पा रहे हैं।

    मनपा आयुक्त द्वारा प्रभारी सहायक आयुक्तों की नियुक्ति ..

    सूत्रों का कहना है, कि कितनों को तो आयुक्त चहल ने योग्यता न होने के बावजूद भी नियुक्त किया है, जिसे उनका निंदनीय भ्रष्टाचार माना जा रहा है। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के कारण बृहन्मुंबई महानगर पालिका में सहायक आयुक्तों की भर्ती बंद होने से निगम के 10 से 15 विभाग कार्यालयों का प्रभार सहायक आयुक्तों के पास है। इसके कारण विभाग में कई नागरिक समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं और देखा जा रहा है कि प्रभारी सहायक आयुक्त कभी-कभी उनका समाधान करने में विफल हो रहे हैं।

    मनपा आयुक्त,
    मुंबई मनपा आयुक्त मुख्यालय की फाइल तस्वीर

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    मुंबई महानगर में 24 नगरपालिका प्रभाग कार्यालय हैं। इनमें से प्रत्येक संभागीय कार्यालय का प्रबंधन एक अलग एमपीएससी से चयनित एक सहायक आयुक्त द्वारा किया जाता है। लेकिन चूंकि एमपीएससी द्वारा पिछले दो वर्षों से सहायक आयुक्त की भर्ती प्रक्रिया नहीं की गई है, इसलिए मनपा प्रशासन ने उन अधिकारियों को प्रभारी सहायक आयुक्त का प्रभार दिया है जो कुछ विभागीय कार्यालयों में घनकचरा व्यवस्थापन व परिरक्षण विभाग के कार्यकारी अभियंता हैं।

    ऐसे में उनके लिए वार्ड का कार्यभार पूरा करना मुश्किल हो रहा है। इसके कारण वार्ड में कूड़ा-कचरा, सड़क, अनाधिकृत निर्माण, रेहड़ी, फेरीवाले और प्रतिष्ठानों का आस्थापना विभाग सहित अन्य समस्याओं का समाधान होता नजर नहीं आ रहा है। नतीजा, इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। गत वर्ष से मुंबई नगर निगम में नगरसेवकों का कार्यकाल समाप्त होने के कारण वे नगर पालिका के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकते।

    नागरिकों को सीवरेज, फुटपाथ मरम्मत, जलापूर्ति, मलिन बस्तियों में सफाई जैसे बुनियादी कार्यों के लिए नगरसेवकों के कार्यालय तक पहुंचना पड़ता है। चूंकि नगरसेवकों का कार्यालय भी बंद है, इसलिए उनके कार्यालय जाने पर भी नागरिकों का काम नहीं हो पाता है। नागरिकों की यह भी शिकायत है कि नगर निगम सहायक आयुक्त द्वारा समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। इससे दिन-ब-दिन शहर में नागरिक समस्याएं बढ़ती जा रही है।

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    मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल के कार्यकाल में फर्जी वार्ड ऑफिसर से मोटी रकम लेकर नियुक्ति की है ऐसा कहा जाता है। स्थानीय विधायक और सांसद की ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए इन वार्ड ऑफिसरों की मनपा आयुक्त से सांठ-गांठ कर नियुक्ति की है ऐसा भी कहा जाता है। जिसमे आयुक्त की प्रति माह ५०० करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय है। क्या इसकी जांच राज्य सरकार और केंद्र सरकार करेगी या ईडी सीबीआई करेगी।

  • आरपीएफ निरीक्षक कुंज बिहारी सिंह पूरी तरह निष्क्रिय लापरवाह

    आरपीएफ निरीक्षक कुंज बिहारी सिंह पूरी तरह निष्क्रिय लापरवाह

    मुंबई मध्यरेल के लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर रात होते यात्रियों की सुरक्षा और रक्षा राम भरोसे, यात्रियों को रेलवे प्रशासन से मदद मांगने पर भरोसा करने में सावधानी बरतने की अपील …

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    कुर्ला स्थित, मध्यरेल के लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) पर रात्रि 8 के बाद कोई भी रेल सुरक्षा बल का अधिकारी और सिपाही ड्यूटी पर दिखाई नही पड़ता है और प्लेटफार्म 2/3 पर स्टाल धारक यात्रियों से जमकर लूटपाट करते है और सामान लेने के बाद बिल मांगने पर देते भी नही है। इसके गुंडागर्दी मारपीट के लिए उतारू हो जाते है आरपीएफ से फोन पर शिकायत करने पर निरीक्षक कुंज बिहारी सिंह सीधे कहते है। ट्वीट करिये। कार्रवाई करने से सीधा मना कर देते है।

    इस स्टेशन पर स्टेशन मास्टर, सीसीआई आरपीएफ सभी मिले हुए हैं। एक मोटी रकम की वसूली की जाती है। इस पर जीएम और डीआरएम किसी का भी ध्यान नही है। यात्रियों की कोई सुरक्षा नही है सारे डकैत स्टाल खोलकर खुलेआम यात्रियों की जेब पर डाका डाल रहे है। लेकिन जीएम नरेश लालवानी ईमानदारी का नारा लगा रहे है। जिसको ट्वीट करना नही आता, उसकी शिकायत नही ली जाती है।

    रेलवे प्रशासन,
    मुंबई का कुर्ला स्थित लोकमान्य तिलक टर्मिनस की फाइल तस्वीर

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    रेलवे प्रशासन का लोकमान्य तिलक टर्मिनस

    क्या रेलवे प्रशासन सुधरेगा या केवल लूटने का ही काम करेगा? मुंबई के कंट्रोल रूम में फोन किया गया, तो पहले कांबले ने फोन उठाया और टीसी को शिकायत करने के लिए कहा गया। फिर कंट्रोल में ड्यूटी पर तैनात दिनेश ने कहा, कि आप टीसी से शिकायत पुस्तिका में शिकायत करिये। गाड़ी छूटने पर टीसी क्या करेगा ? शिकायत के मुताबिक, गाड़ी संख्या 18029 शालीमार एक्सप्रेस के एसी बोगी में अवैध पानी।

    मुंबई से सटे ठाणा स्टेशन का अवैध वेंडर राजा अपने पालतू गुर्गो से 20 रुपये में पानी की बोतल बिकवाता है। इस गोरखधंधे में रेलवे सुरक्षा बल पर तैनात सुरक्षारक्षक इनका साथ देते हैं। इसी तरह रेल सुरक्षा बल रेलवे की सुरक्षा करती रही तो रेलवे बिकने में ज्यादा समय नही लगेगा। आरपीएफ जवानों को इतनी पगार मिलती है जिससे उनका परिवार अच्छी तरह से भरण पोषण किया जा सकता है। फिर भी रेल कर्मी और अधिकारियों का बिना वसूली के काम नही चलता है।

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    मुंबई के मध्यरेल के कंट्रोल रूम में रात में लगता है फर्जी लोग बिठाए गए है। ट्रेन में कोई भी अप्रिय घटना घट जाए, इनसे कोई मतलब नही होता। सूत्रों से पता चला है, कि कंट्रोल में लगातार शिकायतों के चलते अब वहां भी इन अवैध वेंडरों ने रिश्वत का नजराना पेश करना शुरू कर दिया है। अब कंट्रोल रूम में तैनात सरकारी कर्मचारियों द्वारा भी अवैध वेंडरों से हफ्ता उगाही की जाती है इसीलिए शिकायत नही लिया जाता है।

  • कब सुधरेंगे विधायक विनय वर्मा, क्या यही है अपनादल पार्टी की पहचान

    कब सुधरेंगे विधायक विनय वर्मा, क्या यही है अपनादल पार्टी की पहचान

    शोहरतगढ़ को शोहरत की बुलंद उंचाईयों तक लेजाने की इच्छा जाहिर करने वाले अपना दल पार्टी के विधायक हकीकत में अपने समर्थकों को ही चूना लगा रहे हैं।

    वी बी माणिक
    लखनऊ
    – उत्तर प्रदेश, सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ निर्वाचित अपनादल के विधायक सुधरने को तैयार नही है। योगी आदित्यनाथ की सरकार में जगह हासिल करने के बाद से ही इनके तेवर बदल गए हैं। गरीबों का पैसा चुनाव के समय डकार कर बैठे विनय आज तक देने को तैयार नही है। जिन लोगो ने अपना खून पसीना बहाकर और नगद उधारी के तौर पर पैसे दिए हैं वो त्राहि-त्राहि कर रहे है। एक ग्राम प्रधान का भी करीब पच्चीस लाख लेकर बैठे है।

    योगी आदित्यनाथ की सरकार ..

    समाजवादी पार्टी से हाथ झटक कर भाजपा के सहारे उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में जगह हासिल करने वाली अपनादल की सुप्रीमो एवं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की पार्टी क्या बेईमानो, लुटेरों की पार्टी है? जो गरीबों का खून पीने का काम करती है। बड़ा दुर्भाग्य है ये गरीब पुलिस में शिकायत भी दर्ज नही करवा पा रहे है। विनय वर्मा द्वारा इनको खुली धमकी दी जाती है, कि तुमको जो करते बने कर लो हम पैसा नही देंगे। पत्रकार ने अनुप्रिया पटेल से संपर्क करने का प्रयास किया। उनसे मुलाकात नही हो सका है।

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    योगी आदित्यनाथ,
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अपना दल पार्टी की मुखिया अनुप्रिया पटेल की तस्वीर

    राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऐसी पार्टीयो के समर्थन से सरकार चला रहे है। योगी जी घोषणाएं अच्छी-अच्छी कर रहे है पर जो उनकी सरकार में कुछ लुटेरे विधायक बैठे है। उन पर कार्रवाई कब होगी ? कब गरीबो का पैसा मिलेगा ? यही कारण है ठग लुटेरे नेता योगी जी से सहयोग माँगकर चुनाव जीतकर जनता को गुमराह करए है। इससे बड़े शर्म की बात और क्या हो सकता है।

    वैसे भी अपना दल पार्टी का नारा है ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिसदारी’ इसका विधायक विनय वर्मा भरपूर फायदा उठा रहे हैं। लोगों को इनके इरादों को समझने में समय लग गया। नहीं तो धोखा और नुकसान नहीं होता। बता दें कि लोग कहते हैं, कि ये विनय वर्मा अपनी जरूरत के वक़्त हाथ जोड़कर मदद मांग रहे थे। अभी वही उधार के पैसे वापस करने के बजाय सत्ता का रौब झाड़ते हुए धमका रहे हैं। ये राजनीति का गंदा चहरा है। जो इनसे धोखा खाने वालों को देखने को मिल रहा है।

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  • दूसरी मंजिल से धड़ाम, टूटे दांत पैर फ्रैक्कर। Spider-man का क्राईम खुलासा

    दूसरी मंजिल से धड़ाम, टूटे दांत पैर फ्रैक्कर। Spider-man का क्राईम खुलासा

    टूटे हुए दो दांतों से पुलिस को मिला सुराग, 4 महीने बाद हुआ गिरफ्तार। Spider-man thief क्राईम का हआ खुलासा

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    बोरीवली के इलाके में एक चोर अपने दो दूटे दांतों की वजह से चोरी की घटना के 4 महीने बाद पकड़ा गया। दरअसल, यहां स्पाइडर-मैन नाम से चर्चित अज्ञात चोर चोरी करने के बाद भागते समय दूसरी मंजिल से गिर गया। इसके चलते उसके दो दांत दूट गए और एक पैर में फैक्चर हो गया। (Spider-man thief का क्राईम खुलासा)

    पुलिस को घटना स्थल की जांच से मिले इन्हीं दो टूटे दांतों की मदद से उसे बोरीवली पुलिस ने चार महीने बाद गिरफ्तार कर लिया। चोर की पहचान 29 साल के रोहित राठौड के रूप में हुई। खबरों के मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी ने बताया, कि रोहित राठौड़ आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ चोरी के 19 मामले दर्ज हैं। पुलिस ने रोहित की पहचान करने के लिए बोरीवली और उसके आस पास के 400 से अधिक अस्पतालों में पूछताछ की थी। इसके बाद उसे दहिसर से गिरफ्तार किया गया। (Spider-man thief का क्राईम खुलासा)

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    राठौड़ की गिरफ्तारी से पुलिस को दो मामले सुलझाने में मदद मिली है। रोहित राठौड़ को इससे पहले डीएन नगर, कांदिवली, बोरीवली, वकोला, सांताक्रूज, दहिसर, कस्तूरबा मार्ग
    और समेत अन्य कई पुलिस स्टेशनों द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है। वह एक साल तक वकोला पुलिस स्टेशन से तड़ीपार भी रहा है। (Spider-man thief का क्राईम खुलासा)

    कैसे की थी चोरी, कैसे हुआ इसका खुलासा ?

    बताया जा रहा है, कि रोहित 22 जून को दहिसर पश्चिम के महात्रेवाड़ी में राजाराम तावड़े रोड पर स्थित अर्पिता अपार्टमेंट में चोरी करने पहुंचा था। यहां उसने दूसरे मंजिल पर बने एक फ्लैट में चोरी की। शिकायत के मुताबिक, जब घर में मौजूद एक 32 वर्षीय सदस्य ने चोरी होते देखा, तो उसने घर के अन्य सदस्यों को बुलाया। हालाकि, तब तक रोहित रसोई की खिड़की से कूदकर भाग गया। इसके
    बाद चोरी की सूचना पुलिस को दी गई। इसके बाद एक टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने जब जांच की तो घटनास्थल पर दो दात मिले। (Spider-man thief का क्राईम खुलासा)

    मुंबई परिमंडल 11 के डीसीपी अजयकुमार बंसल और बोरीवली पश्चिम के एमएचबी पुलिस थाने के वरिष्ठ निरीक्षक सुधीर कुडालकर के मार्गदर्शन में एपीआई सूर्यकांत पवार और पीएसआई अखिलेश भोम्बे के साथ जांच शुरू की गई। इमारत परिसर में दो टूटे हुए दांत और खून के धब्बे पाए गए। सीसीटीवी फुटेज की जांच में पुलिस ने देखा तो उसमें चोर कूदते वक्त गिरता हुआ दिखाई दिया। पुलिस ने कैमरे में देखा, कि इसमें उसके दो दात दूंट गए और उसके पैर में भी फैक्चर हो गया। हालाकि, अंधेरे की वजह से फुटेज में उसका चेहरा नहीं दिख सका। चोर चोट के बावजूद एक दीवार कूदकर भागने में सपफल रहा। (Spider-man thief का क्राईम खुलासा)

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    Spider-man thief

    पुलिस को यह पता था कि आरोपी चोर को काफी बोच लगी है, ऐसे में वह अस्पताल जरूर जाएगा। पुलिस ने आसपास के अस्पतालों में जाकर चेक किया। हालांकि, वह नहीं मिला। इसके बाद एक पुलिसकर्मी को रोज अलग-अलग अस्पतालों में जाकर चेक करने की ड्यूटी पर लगा दिया गया। पिछले हफ्ते पुलिसकर्मी ने देखा कि चोर वकोला में एक अस्पताल में इलाज करा रहा है। इसके बाद पुलिस ने उसके डिस्वार्ज होने का इंतजार किया जैसे ही वह घर पहुंचा, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। #Spiderman का क्राईम खुलासा..

  • नवरात्रि का डांडिया रास फाल्गुनी पाठक के नाम पर 5 लाख रुपये की ठगी

    नवरात्रि का डांडिया रास फाल्गुनी पाठक के नाम पर 5 लाख रुपये की ठगी

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    फाल्गुनी पाठक का डांडिया पास देने की बात कहकर लाखों रुपये की ठगी करने के आरोप में चार गिरफ्तार ।

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    शहर में नवरात्र का सीजन चल रहा है। इसका फायदा उठाने के लिए कुछ लोगों ने रियायती पास देने का झूठा वादा कर लाखों रूपये की ठगी कर फरार हो गए थे। जिन्हें बोरीवली पश्चिम के एमएचबी कॉलोनी पुलिस ने गिरफ्तार कर कुल 10 लाख रुपये का माल जब्त किया है।

    बोरीवली पश्चिम के चिकूवाडी इलाके में डांडिया क्वीन “फाल्गुनी पाठक” का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इसका सस्ते दामों में पास मुहैया कराने को लेकर कांदीवली पूर्व के 24 वर्षीय होटल चालक आश्विन रमाकांत सुर्वे ने अफवाह फैला रखी थी। इसके जाल में फंसकर कांदिवली पूर्व, ठाकुर विलेज के रहने वाले 20 वर्षीय निहार श्रेयश मोदी ने विशाल शाह और उसके और एक साथी से मुलाकात की इनके बीच हुए सौदेबाजी के मुताबिक फरियादी ने 5 लाख 14 हजार 800 रूपये दिये। लेकिन दोनों बदमाशों ने पैसे लेने के बाद अपना मोबाइल फोन बंद कर फरार हो गए।

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    एमएचबी कॉलोनी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के सुधिर कुडाळकर ने बताया, कि जानकारी प्राप्त होते ही गुनह रजिस्टर क्रमांक 545/2023 में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406, 34 के तहत मामला दर्ज कर पड़ताल शुरू की। उन्होंने कहा कि जांच का जिम्मा क्राईम डिटेक्शन के पुलिस निरीक्षक सचीन शिंदे और पुलिस उपनिरीक्षक डॉ दिपक हिंडे एवं उनकी टीम को गठित कर दिया गया था। जांच में पुलिस बोरीवली पश्चिम के योगी नगर से दहिसर चेक नाका और गोरेगांव तक के 87 सीसीटीवी कैमरा की फुटेज निकल गई और मोबाइल क्रमांक एवं तंत्रिका विश्लेषण के जरिए 18 अक्टूबर दो लोगों को गिरफ्तार किया गया और पता चला कि उनके दो और साथी फरार है।

    फाल्गुनी पाठक का डांडिया रास ..

    पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने बड़ी चतुराई के साथ तीन से चार ऑटो रिक्शा बदली किया था और जी फोन से बात हुई थी वह सभी फोन उन लोगों ने बंद कर दिया था। लेकिन मुंबई पुलिस ने जांच कर दूसरा ही दिन बाकी तो आरोपियों को भी गिरफ्तार कर ले आई और उनके पास से 91 हजार रुपये कैश और एक इनोवा कार जिसकी कीमत लगभग 9 लाख 50 हज़ार रुपये आंकी जा रही है। इसके साथी आईफोन कंपनी का लगभग 20 हजार रुपये का मोबाइल फोन मामले के तहत जब्त कर लिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम 24 वर्षीय आश्विन रमाकांत सुर्वे, 38 वर्षीय श्रीपाल मुकेश बागडिया वय, 30 वर्षीय सुशील राजाराम तिरलोटकर और 35 वर्षीय संतोष भागवत गुंबरे बताये जा रहे हैं।

  • निवासियों को भुगतना पड़ रहा है एसआरए की बिल्डिंगों के घटिया निर्माण का खामियाजा

    निवासियों को भुगतना पड़ रहा है एसआरए की बिल्डिंगों के घटिया निर्माण का खामियाजा

    • SRA व मनपा के अधिकारी सहित बिल्डर मालामाल: निवासी बेचारे बेहाल।

    सुरेंद्र राय
    मुंबई
    : महानगर मुंबई में ऐसा चलन रहा है, कि जो भी उपयोगी काम जनता के लिए किए जाते हैं, उन्हें या तो कोई विभाग संभालता है या फिर ठेकेदारों को दे दिया जाता है। जनोपयोगी कार्य या निर्माण चाहे जैसे भी कराया जाता हो किंतु उसके निर्माण में निर्माण कर्ता अधिक से अधिक पैसे बचाने की कोशिश करता है, जिसका असर यह पड़ता है कि कार्य या निर्माण अत्यंत घटिया किस्म का और घटिया निर्माण सामग्री वाला होता है। यही हाल है झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) का, जो बिल्डरों को पुनर्वसन हेतु घर बनाने का ठेका दे देता है, जिसमें बिल्डर मनमानी काफी कुछ काम करते हैं।

    SRA की योजना में घटिया बिल्डिंग निर्माण ..

    काम भले ही घटिया हो लेकिन वह बिल्डर या सारे अधिकारियों को समय-समय पर आर्थिक भेंट और अनेक उपहारों से खुश करते रहते हैं। महानगर मुंबई में भी झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) योजना के तहत बनाई गई घटिया इमारतों के कई मामले प्रकाश में आये हैं।

    जानकारी के अनुसार एसआरए ने गोरेगांव झोपड़पट्टी पुनर्वसन योजना के तहत इमारत की पार्किंग में आग जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से बचने के लिए डेवलपर्स और आर्किटेक्ट्स को नए निर्देश जारी किए हैं। हालांकि, प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसी घटनाएं भविष्य में भी हो सकती हैं, जब तक कि सहकारी आवास सोसायटी द्वारा उन इमारतों के लिए आवश्यक देखभाल नहीं की जाती हैं तथा जो पूरी हो चुकी हैं, उन्हें आवासीय प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। इसकी जिम्मेदारी डेवलपर की होती है। इसके बाद भवन महापालिका को सौंप दिया जाता है।

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    गोरेगांव से SRA इमारत के नीचे लगी आग जानी की तस्वीर

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    बता दें, कि झोपड़पट्टी पुनर्वसन में अब तक ढाई लाख फ्लैटों को रहने योग्य प्रमाणपत्र दिया जा चुका है। अधिकांश इमारतों की त्रिवर्षीय अवधि समाप्त हो गई है, इसलिए रखरखाव की जिम्मेदारी अब संबंधित सहकारी आवास समितियों की है। लेकिन यह पाया गया है, कि इन आवास संगठनों द्वारा उचित सावधानी नहीं बरती जा रही है। इसलिए अब प्राधिकरण द्वारा इसकी दोबारा समीक्षा की जाएगी। स्लम पुनर्वास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश लोखंडे ने कहा, कि सभी पुनर्वास भवनों के डेवलपर्स और वास्तुकारों को दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे और दावा किया गया है कि फायर ब्रिगेड द्वारा ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ जारी करने के बाद ही रहने योग्य प्रमाण पत्र जारी किया गया था। उसके बाद तीन साल की अवधि के लिए बिल्डरों की जिम्मेदारी व देनदारी को लागू करने के आग्रह की ओर से एसआरए ने अपनी आंखें बंद कर ली हैं।

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    गोरेगांव की जिस इमारत में आग लगी वह सात मंजिला इमारत थी। जबकि झोपड़पट्टी पुनर्वास में 42 मंजिला टावर खड़े हैं। ऐसे टावरों को रहने योग्य प्रमाण पत्र देने के बाद डेवलपर की जिम्मेदारी केवल तीन साल तक होती है, तो असली परीक्षा इन टावरों में रहने वाले निवासियों के लिए होती है। सवाल यह है कि ऐसे टावरों के रखरखाव की देखभाल संबंधित सहकारी आवास सोसायटी द्वारा कैसे की जाएगी इसका कोई प्रारूप एसआरए ने नहीं पेश किया है। महापालिका के पी/उत्तर विभाग कार्यालय में बार-बार की शिकायतों कि गोरेगांव में दुर्घटना ग्रस्त इमारत में पार्किंग स्थल और सड़क पर बाधाएं डाली जा रही हैं। इस पर मनपा अधिकारी भी चुप बैठे हैं।

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  • पत्रकारों को संरक्षण कब मिलेगा ?

    पत्रकारों को संरक्षण कब मिलेगा ?

    देश की सरकार पत्रकारों को संरक्षण देने से रही। लेकिन देश के नेताओं ने राजनीति का अपराधीकरण जरूर कर दिया है। कहीं इनके खिलाफ जागरुकता ना फैल जाए, इसी को लेकर पत्रकारों की आवाज कुचली जा रही है।

    वी बी माणिक
    मुंबई
    – भारत सरकार ने पत्रकरो के लिए कानून तो बना दिया है पर उसका अनुपालन कब से होगा? नेता,मंत्री, सरकारी अधिकारी, कर्मचारी, खाकी वर्दी जब धन उगाही करती है तब तो उनको भी संरक्षण प्रदान किया जाता है। इसके अलावा न्यायपालिका में खुलेआम फाइल को इधर-उधर करने के लिए वसूली किया जाता है। तब कहाँ चली जाती है नियम कानून जब इन मामलों की हकीकत देश के सामने उजागर करने वाले पत्रकार वर्ग सुरक्षा पर बात आती तो सांप सूंघ जाता है।

    जनता का हक और सरकारी संरक्षण

    सरकार और नेताओं की तनख्वाह जनता अदा करती है। जिसके फलस्वरूप देश की जनता वास्तविकता की जानकारी रखने की हकदार हैं और इस जनता जनार्दन के हक को अदा करने वाला पत्रकार वर्ग इनसे न सरकार से अपना मेहनताना मांगता है। मीडिया वर्ग को अपने कर्तव्यों को पूरा करने में जानमाल का जोखिम रहता है। ऐसे में पत्रकारों को संरक्षण नहीं मिलना सच्चाई का गला घोटने जैसा ही है। इसमें कोई एक हो तो सुनवाई हो चुकी होती पर पूरा सिस्टम ही भ्रष्टाचार में लिप्त होता जा रहा है।

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    पत्रकार, संरक्षण,
    पत्रकार संरक्षण कानून को लेकर बेसबरी से इंतजार करता मीडिया वर्ग की प्रतिकारात्मक फाइल तस्वीर

    पत्रकारों को संरक्षण ..

    आज देश मे अधिकांश नेता अपराधी है जिनके ऊपर केस चल रहे है और वो खुलेआम छुट्टे सांड की तरह घूम रहे गरीबो की जमीनों पर अपने गुर्गो द्वारा जब्ती, कब्जा कर रहे है। मकानों पर अवैध कब्जा कर रहे है। मामला न्यायालय में दो तीन पीढ़ी तक चलता है। इस पर कोई पत्रकार खबर लिखता है, तो उसको धमकी दिया या आजाती है। पुलिस कुछ नही करती धमकी देने वाले गुंडों का स्वागत लोग भी करते है।

    देश को मिल रही खुली झूठ ..

    आज पत्रकार सबसे कमजोर वर्ग बन गया है। सच्चाई लिखना जुर्म बन गया है। नेताओ का स्वाभिमान पूरी तरह खत्म हो गया है। कुछ पत्रकार तो विधायको, मंत्रियों, सांसदों के पिए और चाटुकार बन गए है। दिन पर दिन पत्रकारिता समाप्ति की ओर बढ़ने लगी है। अब नेता टीवी पर बैठकर सीधा झूठ बोलते हैं।

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    चुनाव आयोग भी गुमराह ..

    इस पर चुनाव आयोग कब संज्ञान लेगा की जिस नेता पर एक भी केस हो उसको चुनाव लड़ने का अधिकार नही होना चाहिए। अगर वो झूठ बोलकर चुनाव लड़ता है, तो उसकी मान्यता रदद् कर देना चाहिए। चुनाव आयोग किन कामों में ग़ुम है। इसका देश की जनता को कोई जानकारी नहीं है। सवाल करने वाले पूछ तो रहें हैं जवाब देना जरूरी नहीं। आने वाला दिन भारत का अंधकार मय दिखाई पड़ रहा है।

  • चुनाव लड़ने के लिए अपने ही समाज से पैसे लेकर अब उन्हीं को धमका रहा है अपनादल का विधायक

    चुनाव लड़ने के लिए अपने ही समाज से पैसे लेकर अब उन्हीं को धमका रहा है अपनादल का विधायक

    अपनादल के विधायक विनय कुमार वर्मा  स्वर्णकार समाज की लुटिया डूबा रहे है और समाज के कथित ठेकेदार वर्मा की जय जय कार कर रहे है।

    वी बी माणिक
    लखनऊ-
    उत्तरप्रदेश के शोहरतगढ़ से अपनादल अनुप्रिया पटेल गुट के विधायक विनय कुमार वर्मा ने अपने स्वर्णकार समाज के कई लोगो से चुनाव लड़ने के नाम पर उधारी के तौर पर लिए गए करोड़ो रूपये का घपला कर दिया है। जिन-जिन लोगो ने पैसा दिया है, वह अपना पैसा मांगते है, तो वर्मा धमकी देकर सीधा कहता है, “मैं पैसा नही दूंगा। जो करते बने कर लो।”

    इसके अलावा चुनाव प्रचार के दौरान अपनादल के वर्मा ने जिससे अपने लिए चार बॉडी गार्ड लिया था। उसका भी लाखों रुपये डकार गया है। उन सभी चारो बॉडी गार्डो का भी पैसा नही दिया है। कुल 4 महीना इक्कीस दिन तक बॉडीगार्डों ने चौबीसों घंटे अपनादल के वर्मा की सुरक्षा में तैनात थे। सभी बॉडीगार्ड अपने मालिक से पैसे के लिए झगड़ा कर रहे है। मालिक ने समाज के ठेकेदारों से इसकी शिकायत किया, कि ऐसे समाज के नेता जो गरीबो का ही खून पीकर विधायक बने है।

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    अपनादल,
    अपना दल का विधायक विनय वर्मा की फाइल तस्वीर

    अपनादल का विधायक ..

    अब सुरक्षा गार्ड कंपनी का मालिक दर-दर भटक कर समाज के ठेकेदारों के सामने गुहार लगा रहा है। ऐसे विधायक को चुल्लूभर पानी मे डूब मरना चाहिए। विनय कुमार वर्मा  स्वर्णकार समाज की लुटिया डूबा रहे है और समाज के कथित ठेकेदार वर्मा की जय जय कार कर रहे है।

    क्या ऐसे लोग समाज के लिए योग्य है? क्या समाज ऐसे लोगो का सामाजिक बहिष्कार करेगा? या ऐसे विधायको का सत्कार करेगा और अवैध कारोबार को बढ़ावा देगा? इस पर समाज को विचार करना है। समाज के अंदर काफी तोश व्याप्त है। लोग अपनादल के विधायक के नाम से डर रहे है। क्या अनुप्रिया पटेल इस विधायक पर कार्रवाई करेंगी या ऐसे विधायको का सत्कार करेंगी? जो लूटपाट, बेईमानी, ठगी में माहिर हो खबर लिखने के बाद क्या कार्रवाई होगी? ये नागरिकों और समाज को जानकारी मिलनी चाहिए सुर सभी गरीबो का पैसा वापस मिलना चाहिए।

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