फाल्गुनी पाठक का डांडिया पास देने की बात कहकर लाखों रुपये की ठगी करने के आरोप में चार गिरफ्तार ।
इस्माईल शेख मुंबई- शहर में नवरात्र का सीजन चल रहा है। इसका फायदा उठाने के लिए कुछ लोगों ने रियायती पास देने का झूठा वादा कर लाखों रूपये की ठगी कर फरार हो गए थे। जिन्हें बोरीवली पश्चिम के एमएचबी कॉलोनी पुलिस ने गिरफ्तार कर कुल 10 लाख रुपये का माल जब्त किया है।
बोरीवली पश्चिम के चिकूवाडी इलाके में डांडिया क्वीन “फाल्गुनी पाठक” का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इसका सस्ते दामों में पास मुहैया कराने को लेकर कांदीवली पूर्व के 24 वर्षीय होटल चालक आश्विन रमाकांत सुर्वे ने अफवाह फैला रखी थी। इसके जाल में फंसकर कांदिवली पूर्व, ठाकुर विलेज के रहने वाले 20 वर्षीय निहार श्रेयश मोदी ने विशाल शाह और उसके और एक साथी से मुलाकात की इनके बीच हुए सौदेबाजी के मुताबिक फरियादी ने 5 लाख 14 हजार 800 रूपये दिये। लेकिन दोनों बदमाशों ने पैसे लेने के बाद अपना मोबाइल फोन बंद कर फरार हो गए।
एमएचबी कॉलोनी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के सुधिर कुडाळकर ने बताया, कि जानकारी प्राप्त होते ही गुनह रजिस्टर क्रमांक 545/2023 में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406, 34 के तहत मामला दर्ज कर पड़ताल शुरू की। उन्होंने कहा कि जांच का जिम्मा क्राईम डिटेक्शन के पुलिस निरीक्षक सचीन शिंदे और पुलिस उपनिरीक्षक डॉ दिपक हिंडे एवं उनकी टीम को गठित कर दिया गया था। जांच में पुलिस बोरीवली पश्चिम के योगी नगर से दहिसर चेक नाका और गोरेगांव तक के 87 सीसीटीवी कैमरा की फुटेज निकल गई और मोबाइल क्रमांक एवं तंत्रिका विश्लेषण के जरिए 18 अक्टूबर दो लोगों को गिरफ्तार किया गया और पता चला कि उनके दो और साथी फरार है।
फाल्गुनी पाठक का डांडिया रास ..
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने बड़ी चतुराई के साथ तीन से चार ऑटो रिक्शा बदली किया था और जी फोन से बात हुई थी वह सभी फोन उन लोगों ने बंद कर दिया था। लेकिन मुंबई पुलिस ने जांच कर दूसरा ही दिन बाकी तो आरोपियों को भी गिरफ्तार कर ले आई और उनके पास से 91 हजार रुपये कैश और एक इनोवा कार जिसकी कीमत लगभग 9 लाख 50 हज़ार रुपये आंकी जा रही है। इसके साथी आईफोन कंपनी का लगभग 20 हजार रुपये का मोबाइल फोन मामले के तहत जब्त कर लिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम 24 वर्षीय आश्विन रमाकांत सुर्वे, 38 वर्षीय श्रीपाल मुकेश बागडिया वय, 30 वर्षीय सुशील राजाराम तिरलोटकर और 35 वर्षीय संतोष भागवत गुंबरे बताये जा रहे हैं।
SRA व मनपा के अधिकारी सहित बिल्डर मालामाल: निवासी बेचारे बेहाल।
सुरेंद्र राय मुंबई: महानगर मुंबई में ऐसा चलन रहा है, कि जो भी उपयोगी काम जनता के लिए किए जाते हैं, उन्हें या तो कोई विभाग संभालता है या फिर ठेकेदारों को दे दिया जाता है। जनोपयोगी कार्य या निर्माण चाहे जैसे भी कराया जाता हो किंतु उसके निर्माण में निर्माण कर्ता अधिक से अधिक पैसे बचाने की कोशिश करता है, जिसका असर यह पड़ता है कि कार्य या निर्माण अत्यंत घटिया किस्म का और घटिया निर्माण सामग्री वाला होता है। यही हाल है झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) का, जो बिल्डरों को पुनर्वसन हेतु घर बनाने का ठेका दे देता है, जिसमें बिल्डर मनमानी काफी कुछ काम करते हैं।
SRA की योजना में घटिया बिल्डिंग निर्माण ..
काम भले ही घटिया हो लेकिन वह बिल्डर या सारे अधिकारियों को समय-समय पर आर्थिक भेंट और अनेक उपहारों से खुश करते रहते हैं। महानगर मुंबई में भी झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) योजना के तहत बनाई गई घटिया इमारतों के कई मामले प्रकाश में आये हैं।
जानकारी के अनुसार एसआरए ने गोरेगांव झोपड़पट्टी पुनर्वसन योजना के तहत इमारत की पार्किंग में आग जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से बचने के लिए डेवलपर्स और आर्किटेक्ट्स को नए निर्देश जारी किए हैं। हालांकि, प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसी घटनाएं भविष्य में भी हो सकती हैं, जब तक कि सहकारी आवास सोसायटी द्वारा उन इमारतों के लिए आवश्यक देखभाल नहीं की जाती हैं तथा जो पूरी हो चुकी हैं, उन्हें आवासीय प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। इसकी जिम्मेदारी डेवलपर की होती है। इसके बाद भवन महापालिका को सौंप दिया जाता है।
गोरेगांव से SRA इमारत के नीचे लगी आग जानी की तस्वीर
बता दें, कि झोपड़पट्टी पुनर्वसन में अब तक ढाई लाख फ्लैटों को रहने योग्य प्रमाणपत्र दिया जा चुका है। अधिकांश इमारतों की त्रिवर्षीय अवधि समाप्त हो गई है, इसलिए रखरखाव की जिम्मेदारी अब संबंधित सहकारी आवास समितियों की है। लेकिन यह पाया गया है, कि इन आवास संगठनों द्वारा उचित सावधानी नहीं बरती जा रही है। इसलिए अब प्राधिकरण द्वारा इसकी दोबारा समीक्षा की जाएगी। स्लम पुनर्वास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश लोखंडे ने कहा, कि सभी पुनर्वास भवनों के डेवलपर्स और वास्तुकारों को दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे और दावा किया गया है कि फायर ब्रिगेड द्वारा ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ जारी करने के बाद ही रहने योग्य प्रमाण पत्र जारी किया गया था। उसके बाद तीन साल की अवधि के लिए बिल्डरों की जिम्मेदारी व देनदारी को लागू करने के आग्रह की ओर से एसआरए ने अपनी आंखें बंद कर ली हैं।
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गोरेगांव की जिस इमारत में आग लगी वह सात मंजिला इमारत थी। जबकि झोपड़पट्टी पुनर्वास में 42 मंजिला टावर खड़े हैं। ऐसे टावरों को रहने योग्य प्रमाण पत्र देने के बाद डेवलपर की जिम्मेदारी केवल तीन साल तक होती है, तो असली परीक्षा इन टावरों में रहने वाले निवासियों के लिए होती है। सवाल यह है कि ऐसे टावरों के रखरखाव की देखभाल संबंधित सहकारी आवास सोसायटी द्वारा कैसे की जाएगी इसका कोई प्रारूप एसआरए ने नहीं पेश किया है। महापालिका के पी/उत्तर विभाग कार्यालय में बार-बार की शिकायतों कि गोरेगांव में दुर्घटना ग्रस्त इमारत में पार्किंग स्थल और सड़क पर बाधाएं डाली जा रही हैं। इस पर मनपा अधिकारी भी चुप बैठे हैं।
देश की सरकार पत्रकारों को संरक्षण देने से रही। लेकिन देश के नेताओं ने राजनीति का अपराधीकरण जरूर कर दिया है। कहीं इनके खिलाफ जागरुकता ना फैल जाए, इसी को लेकर पत्रकारों की आवाज कुचली जा रही है।
वी बी माणिक मुंबई– भारत सरकार ने पत्रकरो के लिए कानून तो बना दिया है पर उसका अनुपालन कब से होगा? नेता,मंत्री, सरकारी अधिकारी, कर्मचारी, खाकी वर्दी जब धन उगाही करती है तब तो उनको भी संरक्षण प्रदान किया जाता है। इसके अलावा न्यायपालिका में खुलेआम फाइल को इधर-उधर करने के लिए वसूली किया जाता है। तब कहाँ चली जाती है नियम कानून जब इन मामलों की हकीकत देश के सामने उजागर करने वाले पत्रकार वर्ग सुरक्षा पर बात आती तो सांप सूंघ जाता है।
जनता का हक और सरकारी संरक्षण
सरकार और नेताओं की तनख्वाह जनता अदा करती है। जिसके फलस्वरूप देश की जनता वास्तविकता की जानकारी रखने की हकदार हैं और इस जनता जनार्दन के हक को अदा करने वाला पत्रकार वर्ग इनसे न सरकार से अपना मेहनताना मांगता है। मीडिया वर्ग को अपने कर्तव्यों को पूरा करने में जानमाल का जोखिम रहता है। ऐसे में पत्रकारों को संरक्षण नहीं मिलना सच्चाई का गला घोटने जैसा ही है। इसमें कोई एक हो तो सुनवाई हो चुकी होती पर पूरा सिस्टम ही भ्रष्टाचार में लिप्त होता जा रहा है।
पत्रकार संरक्षण कानून को लेकर बेसबरी से इंतजार करता मीडिया वर्ग की प्रतिकारात्मक फाइल तस्वीर
पत्रकारों को संरक्षण ..
आज देश मे अधिकांश नेता अपराधी है जिनके ऊपर केस चल रहे है और वो खुलेआम छुट्टे सांड की तरह घूम रहे गरीबो की जमीनों पर अपने गुर्गो द्वारा जब्ती, कब्जा कर रहे है। मकानों पर अवैध कब्जा कर रहे है। मामला न्यायालय में दो तीन पीढ़ी तक चलता है। इस पर कोई पत्रकार खबर लिखता है, तो उसको धमकी दिया या आजाती है। पुलिस कुछ नही करती धमकी देने वाले गुंडों का स्वागत लोग भी करते है।
देश को मिल रही खुली झूठ ..
आज पत्रकार सबसे कमजोर वर्ग बन गया है। सच्चाई लिखना जुर्म बन गया है। नेताओ का स्वाभिमान पूरी तरह खत्म हो गया है। कुछ पत्रकार तो विधायको, मंत्रियों, सांसदों के पिए और चाटुकार बन गए है। दिन पर दिन पत्रकारिता समाप्ति की ओर बढ़ने लगी है। अब नेता टीवी पर बैठकर सीधा झूठ बोलते हैं।
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चुनाव आयोग भी गुमराह ..
इस पर चुनाव आयोग कब संज्ञान लेगा की जिस नेता पर एक भी केस हो उसको चुनाव लड़ने का अधिकार नही होना चाहिए। अगर वो झूठ बोलकर चुनाव लड़ता है, तो उसकी मान्यता रदद् कर देना चाहिए। चुनाव आयोग किन कामों में ग़ुम है। इसका देश की जनता को कोई जानकारी नहीं है। सवाल करने वाले पूछ तो रहें हैं जवाब देना जरूरी नहीं। आने वाला दिन भारत का अंधकार मय दिखाई पड़ रहा है।
भारत भूषण साप्ताहिक समाचारपत्र के संपादक एवं पत्रकार अमित मिश्र के घर हुआ जानलेवा हमला। फरार आरोपियों का मुखिया बिल्डर पैसों के दम पर फिर एक बार दे रहा है हमले की धमकी।
इस्माईल शेख मुंबई- पत्रकार की सुरक्षा को लेकर मीडिया वर्ग पिछले दशकों से झूसता आ रहा है। इसको लेकर कई सरकारों से गुहार लगाने के बावजूद अब तक हल नहीं निकल पाया है। वही एक ताजा मामला मालाड पश्चिम से है जिसमें पत्रकार और उसके परिवार पर हमले की खबर सामने आ रही है। पुलिस को मिली शिकायत में पीड़ित पत्रकार की पत्नी रेनू अमित मिश्रा ने बताया, कि मैं और मेरे बच्चे बिल्डर ओपी सिंह के गुर्गों के हमले में बाल-बाल बचे हैं। मालाड पुलिस ने शिकायत पर मामला दर्ज कर आरोपी सचिन सिंग और अजय यादव की सरगर्मी से तलाश कर रही है। पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद से पत्रकार के परिवार को एफआईआर रफा-दफा करने के लिए धमकाया जा रहा है। इसको लेकर भारत भूषण अखबार के संपादक अमित मिश्र ने मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई है।
मिली जानकारी के मुताबिक, पत्रकार अमित मिश्र मालाड सदगुरू साईनाथ चाल, रूम नं. 9, साईंनाथ रोड, मालाड पश्चिम, लाइफलाइन अस्पताल के बगल में अपनी 36 वर्षीय पत्नी रेणु और 19 वर्षीय बेटा शशांक, 8 साल के अनमोल, 13 साल की प्रगती और 11 साल की वैष्णवी के साथ रहते हैं। इन्हीं के साथ पत्रकार अमित मिश्र के बड़े भाई 56 वर्षीय संतोष मिश्र भी रहते हैं। घटना 17 सितंबर सुबह ठीक 10:00 बजे की है, जब पूरा परिवार घर में आराम कर रहा था। आरोपी और उसके साथी पीड़ित परिवार का दरवाजा पीट कर उन्हें गंदी और भद्दी गालियां दे रहे थे इस समय शशांक पूछने के लिए दरवाजा खोलकर बाहर गया तो उसे सीधे चांटा जड़ दिया और पिटने लग गए, रेणु मिश्र अपने बेटे के बचाव में आगे बढ़ी तो उसे भी मार कर जमीन पर गिरा दिया।
अचानक हुए इस हमले से पत्रकार का परिवार सदमे में दूबक कर रह गया। वहीं अमित मिश्र आगे बढ़कर हमलावरों का सामना करने के लिए जब बाहर गए तो देखा, कि हमलावर कम से कम 10 से 12 की संख्या में घर के बाहर लाठी और फावड़ा लिए हुए खड़े हैं, उन्होंने तुरंत दरवाजा बंद कर पुलिस कंट्रोल को फोन पर मदद के लिए गुहार लगाया। जब तक पुलिस पहुंची तब तक हमलावर फरार हो चुके थे।
हमलावर सचिन सिंग, अजय यादव और संजय शुक्ला एक माने-जाने कुख्यात अपराधी है। जो “वीआईपी डेवलपर्स” बिल्डर आपी सिंह के लिए काम करते हैं। पीड़ित ने बताया कि यह लोग बिल्डर के इशारे पर किसी की भी जान लेने से नहीं हिचकीचाते। इनके खिलाफ पुलिस पर हमला करने तक का मामला भी दर्ज है और बिल्डर ओपी सिंह भी कोई दूध का धुला नहीं है। ओपी सिंह के खिलाफ मुंबई शहर के कई पुलिस थानों और मुंबई के बाहर भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
और तो और मलाड पुलिस थाने में शिकायत दर्ज होने के बाद फरारी की हालत में भी बिल्डर के लोग पीड़ित परिवार को फोन पर धमकियां दे रहे हैं। बिल्डर ओपी सिंह ने तो सीधे तौर पर अमित मिश्र को फोन पर कहा, कि ‘मिश्रा जी आप बात आगे मत बढ़ाओं जो होना था वह हो गया। हम बिल्डर हैं, घर में बन्द करके जान से मरवा भी सकते है।’ फोन पर हुई इस बातचीत के समय बिल्डर ओपी सिंग का लड़का मोनू सिंग से भी बात हुई, उसने भी धमकाते हुए कहा, कि ‘हमारे लड़कों को कोर्ट से जमानत तो मिल जाएगी उसके बाद सोचो तुम्हारा क्या होगा? इसीलिए कहता हूं, कि मामले को रफत-दफा कर दो, वरना तुम पर हमले तो होंगे और दूसरे झूठे मामले भी अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में दर्ज होने शुरू हो जाएंगे, तुम्हें तो पता है। हमारे पास पैसों का पावर है।’
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क्या है पत्रकार के परिवार पर हमले की हकीकत ?
2 सालो पहले बिल्डर ओपी सिंह और अमित मिश्र के बीच एक खाली पड़ी जमीन को लेकर सौदा हुआ था। अमित मिश्र के पास मुंबई में अपना खुद का मकान नहीं होने के कारण ओपी सिंह के पास खाली पड़ी 10×15 फूट जमीन पर अपने लिए घर बनाने का मन बताया। समय कोरोना काल का था लोगों को पैसों की जरूरत थी, तो बिल्डर ने 3 लाख रुपये में सौदा तय कर दिया। इस समय अमित ने एक लाख 50 हज़ार रुपये कैश पैसे ओपी सिंह को दे दिया और बाकी पैसे धीरे-धीरे देने का वादा किया। 3 लाख रुपए में रूम बन गया और अपने परिवार के साथ उस रूम में अमित मिश्र रहने लगे। 6 महिने बाद ही रूम नाला करटिंग में महानगर पालिका द्वारा कार्रवाई के समय टूट गया। उस रूम को फिर से बनवाने में 1 लाख 50 हजार रुपये लगे, दो बार रूम की बनई में कुल 4,50,000 रुपए लग गए।
यहां आपको बताना चाहते हैं, कि अमित मिश्र के घर के पास ही बिल्डर के कब्जे का और 4 रूम है। जिसका बिजली बिल अमित मिश्र द्वारा भरवारा जाता आ रहा है। अंदाजन हर महीने 5 से 9 हजार रुपये के बीच लाइट का बिल आता है जिसका भुगतान अमित मिश्र को ही करना पड़ता है। क्योंकि अमित अपने रूम का बकाया डेढ़ लाख रुपया दे नहीं पाया था। जो खुद अपने आप में एक भारी रकम भुगतान के रूप में अमित मिश्र ने भरा है।
मालाड़ पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक रवि अडाने ने बताया, कि गु.र.क्र.0549/23 में भारतीय दंड संहिता की धारा 354,323,504,509,506,34 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपी फरार है। पुलिस उप निरिक्षक पवार मामले की पड़ताल और आरोपियों की तलाश कर रहे हैं। लेकिन मामला दर्ज होने के बाद फोन पर मिली धमकियों से मिश्रा परिवार सदमे में है और अपनी जान की सुरक्षा के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मदद की गुहार लगा रहे है।
डीओ राजन प्रभु और वार्ड ऑफिसर किरण दिघावकर की लालच से अवैध निर्माणों को मिल रहा संरक्षण (BMC Corruption)
ठेकेदार नरसिम पुत्तावल्लू की गुलामी कर रहा मनपा का पी/ नॉर्थ,वार्ड का मुकादम विट्ठल राठौड़
क्या मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल पी/ नॉर्थ, वार्ड के जिम्मेदार अधिकारीयों पर आईपीसी १८६० की धारा २१७ एवं २१८ के तहत एफआईआर दर्ज करवाएंगे?
सुरेंद्र राय मुंबई- बृहन्मुंबई महानगरपालिका एशिया की सबसे बड़ी नगर पालिका मानी जाती है। किंतु वर्तमान में उसके अधिकारी और कर्मचारी ही काली कमाई की लालच में मनपा की साख में बट्टा लगा रहे हैं। जानकारी के अनुसार मुंबई मनपा के सभी वार्डो में अवैध निर्माणों के भ्रष्टाचारो (Corruption) का खेल जारी है। जिसमें अधिकारी और ठेकेदार मिलकर मलाई खा रहे हैं। लेकिन मालाड़ बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) का पी/ नॉर्थ, वार्ड इससे दो कदम और आगे निकल चुका है। यहां न केवल अभियंता (Engineer) बल्कि मुकादम भी डीओ (Designated Officer) और वार्ड के सहआयुक्त (Assistant Commissioner) के लिए अवैध निर्माण (Illegal construction) को बचाने के लिए बिचौलिए का काम करता है। इसी तरह का मामला वार्ड क्रमांक ३२ के अंतर्गत आने वाले चिकुवाड़ी का है।
भ्रष्ट BMC के उच्च अधिकारी ..
अवैध निर्माण की तस्वीर
वहीं मनपा पी/ नॉर्थ वार्ड में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते उसके कार्यक्षेत्र में भूमाफियाओं और ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माणों का ग्राफ लगातार बड़ी ही तेजी से बढ़ रहा है। जिस पर अंकुश लगा पाना अब पी/ नॉर्थ, वार्ड के वश में नहीं है ऐसा माना जा रहा है। वहीं स्थानीय नागरिकों, समाजसेवको व शिकायतकर्ताओं की माने तो मनपा परिमंडल -४ के उपायुक्त (Deputy Municipal Commissioner) विश्वास शंकरवार की ईमानदार छवि अब नोटो के बंडलों पर बिक चुकी है। जबकि उपायुक्त विश्वास शंकरवार अवैध निर्माणों पर मनपा नियमों के तहत उसकी जांच कर कार्रवाई करने की बजाय स्वयं रिश्वत की आंच में अपनी नैतिकता को भुला बैठे हैं।
इसी तरह का मामला वार्ड क्रमांक ३२ के अंतर्गत आने वाले चिकुवाड़ी का है। यहां के गली नंबर -२, मालवणी चर्च, मालाड (पश्चिम) मुंबई ४०००९५. स्थित रिक्त भूखंड पर अधिकारियों से मिलीभगत कर ठेकेदार नरसिम पुत्तावल्लू ने १२ व्यापारिक गाले और मकान की चॉल बना डाली है। स्थानीय नागरिक बताते हैं, कि उपायुक्त विश्वास शंकरवार की इसी भ्रष्ट (Corrupt) और रिश्वतखोर वाली छवि के कारण ही पी/ नॉर्थ वार्ड में अवैध निर्माणों का ग्राफ लगातार बढ़ी ही तेजी से बढ़ रहा है। अब ऐसे में उपायुक्त विश्वास शंकरवार की तरफ से उक्त अवैध निर्माण पर कारवाई का न होना ही जिसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है।
हालांकि ठेकेदार नरसिम पुत्तावल्लु द्वारा बिना किसी खौफ के धड़ल्ले से किए जा रहे अवैध निर्माण के मामले में डीओ. राजन प्रभु और सहाय्यक आयुक्त किरण दिघावकर की तरफ से बरती जा रही लापरवाही या सेटिंग उक्त अवैध निर्माणों के लिए अभयदान साबित हो रही है। वहीं इमारत व कारखाना विभाग में कार्यरत मुकादम विट्ठल राठौड़ की माने तो मनपा (BMC) का पी/नॉर्थ, वार्ड ठेकेदार नरसिम पुत्तावल्लू की गुलामी करने में व्यस्त नजर आ रहा है तथा उसके अवैध निर्माणों को संरक्षण देने में सक्षम अधिकारियों ने पूरी सहमति जताई है।
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स्थानीय नागरिकों की माने तो सहाय्यक अभियंता अनिल पुणतांबेकर की कार्यप्रणाली भी सिर्फ अवैध निर्माणों से मिलने वाली काली कमाई (Black Money) के हिस्सेदारी पर ही निर्भर है ना की अवैध निर्माणों के बढ़ते ग्राफ पर अंकुश लगाने में है। यदि लोकसेवक (Public Servant) होने के नाते जानबूझकर कानून के किसी भी निर्देश की अवज्ञा करता है तो वह लोकसेवक भारतीय दंड संहिता (IPC) १८६० की धारा २१७ एवं २१८ के अनुसार अपराधी होता है।मनपा पी/नार्थ वार्ड से विगत वर्षों मे अवैध निर्माण से कितनी काली कमाई किया होइसका अनुमान लगाया जाना यदि असंभव नहीं तो दुष्कर अवश्य है। क्या बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) में एक भी जिम्मेदार व ईमानदार अधिकारी नही है? जो भ्रष्ट एवं रिश्वतखोर अधिकारियों के भ्रष्टाचार (Corruption) की जांच कराकर दंडित करने की कार्रवाई करा सकें?
मुंबई की ट्रैफिक पुलिस की इन दिनों चांदी ही चांदी नजर आ रही है। यहां भ्रष्टाचार की सारी हदें पार करते हुए यातायात पुलिस दिखाई पड़ रही हैं।
वी बी माणिक मुंबई- आजकल मुंबई शहर की वाहतूक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पूरे मुंबई की यातायात पूरी तरह जाम जैसी स्थिति बन गयी है। इसका कारण है ट्रैफिक का कोई नियम कानून है ही नही। इसका करण भी है। पुलिस विभाग पूरी तरह लापरवाह हो गयी है। नो पार्किंग में भी अवैध पार्किंग चलाई जा रही है। जिस पर कोई शिकायत करता है तो पुलिस उससे उल्टा प्रश्न करती है, कि तुमको क्या परेशानी है? इसके बाद नो इंट्री में भी शुल्क लेकर गाड़िया चलाई जाती है। (Mumbai Traffic police Corruption News)
मुंबई ट्रेफिक पुलिस महाराष्ट्र (Maharashtra) के भाजपा एकनाथ शिंदे गठबंधन की सरकार (Government) में भ्रष्टाचार (Corruption) की चरम सीमा पर पहुँच गए हैं। क्या लोगों को कानून व्यवस्था (Law and order) से महरूम कराना एक सरकारी कर्मचारी (Public Servant) को शोभा देता है। वो भी किस लिए? काली कमाई (Black money) के लिए। जिसपर नजर पड़ी तो आप अंदर भी हो जाओगे। इसके बाद अगर कोई गाड़ी वाला भूल से साइड पार्किंग (Parking) करके खड़ा रहता है, तो उससे लंबे चौड़े डिमांड किये जाते है। अगर गाड़ी मालिक या चालक पैसे देने से मना करता है, तो उसके साथ बदतमीजी भी अच्छे पैमाने पर की जाती है। फिर उसपर फर्जी केस बनाया जाता है। उसका लाइसेंस गाड़ी का पेपर लेकर उसको ट्रैफिक चौकी में बुलाकर उसकी अच्छी खात्री की जाती है। ये कौन सा नियम है? कौन सा कानून है? इस विषय पर अधिकारी कब ध्यान देंगे? कब ऐसे पुलिस वालों पर कार्रवाई करेंगे? (Mumbai Traffic police Corruption News) अजब तेरा जलवा, गजब तेरी छाया। पुलिस वालों की जेब मे माया ही माया। ये कब सुधरेंगे ये तो सरकार ही बताएगी। (Mumbai Traffic police Corruption News)
विक्रोली में हिंदू संगठनों के पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन से स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हथियार बंद पुलिस बल, दंगा नियंत्रण बल, होम गार्ड की अतिरिक्त जनशक्ति को विक्रोली पश्चिम में संवेदनशील बिंदुओं पर तैनात किया गया है।
इस्माईल शेख मुंबई- विक्रोली मे शुक्रवार की एक घटना के बाद से ही यहां का वातावरण तनावपूर्ण हो गया है। पार्कसाइट पुलिस ने शुक्रवार रात 30 वर्षीय महिला के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न के आरोप में एक नाबालिग को पकड़ा है। पीडीत महिला स्थानीय शस्त्र इकाई से जुड़ी एक कांस्टेबल है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, घटना शुक्रवार रात करीब साढ़े नौ बजे की है। विक्रोली की रहने वाली कांस्टेबल अपने चचेरे भाई और दोस्त के साथ रात के खाने के लिए अपने चाचा के घर की ओर जा रही थी, तभी एक अज्ञात व्यक्ति पीछे से आया और उसे छूने लगा। उसके दोस्त और चचेरे भाई ने तुरंत उस व्यक्ति को पकड़ लिया, लेकिन बाइक पर सवार दो लोगों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने आरोपी को पकड़ लिया, उसे थप्पड़ मारा और तुरंत वहां से चले जाने को कहा।
घटना के बाद महिला ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपराध दर्ज कराया। मुंबई परिमंडल-7 के पुलिस उपायुक्त पुरूषोत्तम कराड ने कहा, “अपराधी को ट्रैक करने के लिए टीमों का गठन किया गया था।” उन्होंने कहा, “हमने एक सीसीटीवी कैमरे के फुटेज में संदिग्ध को देखा।”
महिला पुलिस कांस्टेबल ..
फुटेज के आधार पर पुलिस ने शनिवार को विक्रोली में रहने वाले एक नाबालिग को पकड़ लिया। उन पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस बीच, घटना की खबर चिंगारी की तरह फैल गई, जिसमें कई लोगों ने दावा किया कि महिला के साथ छेड़छाड़ करने वाला आरोपी ईद के जुलूस का हिस्सा था। शनिवार सुबह हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन कर दोषी की गिरफ्तारी की मांग की।
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मुंबई पुलिस ने निवारक उपाय के रूप में, स्थानीय हथियार बंद पुलिस बल, दंगा नियंत्रण बल, होम गार्ड की अतिरिक्त जनशक्ति को विक्रोली पश्चिम में संवेदनशील बिंदुओं पर तैनात किया गया। समाचार लिखे जाने तक पुलिस बाइक सवार लोगों का पता लगाने में भी कामयाब रही। उन्हें मामले में सह-आरोपी बनाया गया है। अपराध के खिलाफ नाबालिग लड़के के साथ 3 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है।
इस्माईल शेख मुंबई- Mumbai Tunnal: देश की आर्थिक राजधानी के साथ-साथ सभी को बराबरी का दर्जा दिलाने वाली मुंबई अब और भी बदल रही है। मुंबई की घनी बढ़ती आबादी के कारण शहर और उसके उपनगरों की परिवहन व्यवस्था में भी काफी परिवर्तन हो रहे हैं। परिणामस्वरूप, यात्रियों के लिए उपनगरों में पूर्व और पश्चिम के बीच यात्रा करना कठिन हो गया। समाधान के तौर पर मुंबई को सात सुरंगों के जरिए पूर्व-पश्चिम से जोड़ा जा रहा है और मेट्रो का जाल भी बिछाया जा रहा है। मुंबई को कभी फ्लाईओवरों का शहर कहा जाता था। अब इसे सुरंगों के शहर के नाम से जाना जाएगा।
मुंबई बनने जा रहा है अब सुरंगों का शहर
मुंबई महानगरीय क्षेत्र में प्रस्तावित ‘मरीन ड्राइव टू बांद्रा-वर्ली सी-लिंक’ तटीय सड़क (Coastal Road) मुंबई में यातायात की भीड़ को कम करने के लिए महत्वपूर्ण होगी। इसके साथ ही महत्वाकांक्षी परियोजना ‘शिवाडी-न्हावा शेवा ट्रांस हार्बर लिंक’ भी जोर-शोर से चल रही है। यह लिंक रोड मुंबई को रायगढ़ जिले से सीधे जोड़ता है।
कोलाबा से सिप्ज़ मेट्रो 3, जिस पर एमएमआरसीएल (MMRCL) द्वारा काम किया जा रहा है, पूरी तरह से भूमिगत है। इस रूट पर 26 स्टेशन भूमिगत और एक स्टेशन जमीन के ऊपर है। एमआरडीए द्वारा निर्माणाधीन लगभग 3.4 किमी लंबे मुंबई मेट्रो रूट 7ए परियोजना के मार्ग के तहत 2.49 किमी लंबी डबल सुरंग के लिए टी62 टनल बोरिंग मशीन की मदद से प्रारंभिक सुरंग निर्माण कार्य 1 सितंबर, 2023 से शुरू हो गया है।
गिरगांव से ब्रीच कैंडी पार्क भारत के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीन का प्रयोग कुल लंबाई 10.58 किमी अनुमानित लागत 12,721 करोड़ रुपये
बीकेसी से शिलफाटा भारत की पहली समुद्री सुरंग. जिसमें खाड़ी के नीचे 7 किमी लंबी सुरंग भी शामिल है कुल लंबाई 21 किमी अनुमानित लागत 6,400 करोड़
ऑरेंज गेट से मरीन ड्राइव तक तटीय सड़क को सुरंग से जोड़ा जाएगा. दक्षिण मुंबई में ट्रैफिक जाम से छुटकारा मिलेगा। कुल लंबाई 3.5 किमी अनुमानित लागत 6,327 करोड़
तुर्भे से जुईनगर होते हुए खारघर सायन-पनवेल राजमार्ग पर यातायात की भीड़ कम हो जाएगी। कुल लंबाई 2.4 किमी अनुमानित लागत 2,195 करोड़
ऐरोली से कटाई नाका केवल नवी मुंबई-डोंबिवली यात्रा 15 मिनट में. 12.30 किमी एलिवेटेड रूट कुल लंबाई 1.69 किमी अनुमानित लागत 1,441 करोड़
टिकुजिनी वाडी से मगाथाने ठाणे से बोरीवली की दूरी 15 मिनट में पहुंचा जा सकता है। कुल लंबाई 11.84 किमी अनुमानित लागत 14,000 करोड़ रुपये
फिल्म सिटी से मुलुंड खिंडीपाड़ा एक से डेढ़ घंटे का सफर यह 15 मिनट में पूरा हो जाएगा। लंबाई 12.20 किमी खर्च 8,137 करोड़
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शहर की परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करना, निवासियों का पुनर्वास करना महंगा हो गया है। संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान मुंबई में पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी के लिए एक बड़ी बाधा है। इसके लिए आवश्यक पर्यावरण विभाग के परमिट कानून की कसौटी पर समस्याग्रस्त साबित होता है। ऐसी कठिनाइयों को दूर करने के लिए भूमिगत सुरंगों के माध्यम से परिवहन प्रणाली का निर्माण एक सस्ता विकल्प है।
डेढ़ साल बच्चा किडनैप जो अपनी 9 साल की बहन के साथ खेल रहा था। मुंबई पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर किडनैर महिला को गिरफ्तार कर उसके पास से मासूम बच्चे को सही सलामत परिवार के पास सौंप दिया।
इस्माईल शेख मुंबई- मलाड पश्चिम, मालवणी के इलाके से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां घर के बाहर खेल रहे एक मासूम बच्चे को दिनदहाड़े किडनैप कर लिया गया और उसे सिर्फ छुपा कर रखा था। बच्चा सिर्फ डेढ़ साल का था जो अपनी 9 साल की बहन के साथ खेल रहा था। लेकिन मुंबई पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर आरोपी महिला को गिरफ्तार कर उसके पास से मासूम बच्चे को सही सलामत परिवार के पास सौंप दिया है।
मामला मुंबई पुलिस परिमंडल 11 अंतर्गत मालवनी पुलिस थाने का है। यहां 28 वर्षीय महिला ने एक डेढ़ साल के बच्चे को किडनैप कर छुपा कर अपने पास रखा था। जिसे मालवनी पुलिस थाना अंतर्गत गुनाह रजिस्टर क्रमांक 1272/2023 में भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 365 और 368 के तहत गिरफ्तार किया गया है। किडनैपिंग का मकसद अभी तक साफ नहीं हो पाया है मामले की तहकीकात अभी और जारी है।
मलवनी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक चिमाजी आढ़ाव ने जानकारी देते हुए बताया, कि 28 सितंबर की शाम लगभग 6:30 के आसपास हुई घटना की जानकारी बच्चे की 20 वर्षीय मां कविता रवि वडार ने पुलिस को दी। उसने बताया कि गांवदेवी मंदिर के उसके घर के पास, उसकी 9 साल की बेटी और डेढ़ साल का बेटा दोनों खेल रहे थे। उसी दरमियान एक अज्ञात महिला जिसने पीले रंग की शर्ट और नीले रंग की जींस पहनी हुई थी। उसने पास की दुकान से बिस्किट लाने के लिए 9 साल की बच्ची को 200 रुपये दिए और जैसे ही बच्ची बिस्कुट लेने के लिए दुकान की तरफ गई उस अज्ञात महिला ने डेढ़ साल के बच्चे को उठाकर फरार हो गई।
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वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक चिमाजी आढ़ाव ने बताया, कि मामला गंभीर होने की कारण मुंबई पुलिस परिमंडल 11 के उपायुक्त अजय कुमार बंसल के नेतृत्व में विभिन्न पुलिस थानों के क्राईम डिटेक्शन ऑफिसर्स की अलग-अलग टीम गठित की गई। पुलिस में तांत्रिक विश्लेषण के आधार पर कई जगहों पर पड़ताल की आखिरकार मालवणी के राठौड़ी इलाके में ओमजी कंपाउंड स्थित गोपाल होटल के पास श्री. समर्थ वेलफेयर सोसाइटी से 28 वर्षीय सोनम मंतोष साहू को हिरासत में लिया। पुलिस ने बताया, कि सोनम एक ग्रहणी है जिसे बच्चे को किडनैप कर सिर्फ छुपा के रखा था अब तक यही पता चल पाया है आगे की पड़ताल जारी है। पुलिस ने यह भी बताया, कि अगर कोई और सुराग मिलता है तो आरोपी महिला के खिलाफ अपराधिक धाराएं और भी बढ़ाई जा सकती है।
मुंबई मुंबई के मलाड और मुलुंड में पर प्रांतियों से मराठियों पर अत्याचार दोनों ही घटनाओं में पुलिस ने किया मामला दर्ज मुलुंड में देर रात गुजराती बाप और बेटा गिरफ्तार।
इस्माईल शेख मुंबई- मुलुंड में एक मराठी महिला को यह कहकर घर देने से इनकार कर दिया, कि ‘महाराष्ट्रियन के लिए अनुमति नहीं है’। महिला द्वारा सोशल मीडिया (Social media) पर मामले का खुलासा करने के बाद ये राजनीतिक दुष्परिणाम भी सामने आए हैं। इस मामले पर महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया है। मराठी महिला के बाद अब मालाड़ में एक मराठी युवक की पिटाई का मामला सामने आया है। इस मामले में वंचित बहुजन अघाड़ी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
मुंबई में मराठी युवक की पिटाई
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में पूरे देश से लोग अपनी आजीविका के लिए आते हैं। सर्वसमावेशी मुंबई में कल रात मुंबई के मलाड (Malad) में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई। सिद्धार्थ अंगुरे नामक एक मराठी युवक को पर प्रांतीय गिरोह ने ‘जय श्री राम’ चिल्लाने के लिए मजबूर किया। जैसे ही सिद्धार्थ ने घोषणा करने से इनकार कर दिया, इस गिरोह ने युवक को बेरहमी से पीटा। ‘जय श्री राम बोल नहीं तो मारूंगा’ कहने वाले पर प्रांतीय गैंग ने युवक को जमकर पीटा और गाली-गलौज की। युवक के भाई और रिश्तेदारों के हस्तक्षेप से युवक बाल-बाल बचा। फिलहाल कांदिवली पश्चिम के डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल में इसका इलाज चल रहा है।
पीड़ित परिवार इस मामले में मदद के लिए वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के पास पहुंचा। उसके बाद वंचित बहुजन अघाड़ी की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। कुरा पुलिस स्टेशन में आरोपी सुरज तिवारी, अरुण पांडे, पंडित और राजेश रिक्षावाला के खिलाफ धारा 341, 504, 323, 506, 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है। वंचित बहुजन अघाड़ी के युवा नेता सुजात अंबेडकर ने इस मामले में पुलिस से बात कर उचित कार्रवाई की मांग की है। लोगों को एक दूसरे के ख़िलाफ़ खड़ा करना, देश धार्मिक कट्टरता और तनाव पैदा करने वाली ऐसी घटनाओं से जूझ रहा है। सुजात अंबेडकर ने कहा, कि चूंकि मुंबई जैसे शहरों में ऐसी घटनाएं हुई हैं, इसलिए वंचितों की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है।
गुजराती बाप-बेटे के खिलाफ मामला दर्ज
इस बीच, मुलुंड में आधी रात को एक मराठी महिला को घर देने से इनकार करने वाले गुजराती पिता-पुत्र के खिलाफ आखिरकार मामला दर्ज कर लिया गया है। तृप्ति देवरुखकर की शिकायत पर मुलुंड पुलिस स्टेशन में यह मामला दर्ज किया गया है और पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। प्रवीण ठक्कर और उनके बेटे नीलेश ठक्कर दोनों ने तृप्ति देवरुखकर को घर किराए पर देने से इनकार कर दिया क्योंकि वे मराठी हैं। उन्होंने इस बारे में सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया और यह वायरल हो गया। इस मामले में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने उक्त महिला से संपर्क किया। तब तृप्ति देवरुखकर ने देर रात मुलुंड पुलिस स्टेशन में धारा 341, 323, 504 और 34 के तहत मामला दर्ज कराया। मुलुंड पुलिस ने रात में दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया है।
महिला आयोग ने लिया संज्ञान
मुलुंड की घटना पर महिला आयोग ने संज्ञान लिया है। इस संबंध में महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने ट्वीट किया है। मुंबई के मुलुंड में एक मराठी महिला तृप्ति देवरुखकर को सोसायटी ने ऑफिस देने से इनकार कर दिया। साथ ही सोसायटी के लोगों ने इस महिला के साथ गलत व्यवहार और बदसलूकि की। तृप्ति देवरुखकर ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए अपनी व्यथा सबके सामने रखी। जब मैंने वह वीडियो देखा तो मैंने आयोग के माध्यम से तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया।
इस संबंध में सहकारिता आयुक्त, महाराष्ट्र राज्य, पुणे और प्रमुख सचिव, आवास विभाग, महाराष्ट्र राज्य, मंत्रालय, मुंबई से रिपोर्ट मांगी गई है। इसके साथ ही मुलुंड पुलिस को इस संबंध में कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। आयोग के निर्देशानुसार, पुलिस ने देर रात मुलुंड में देवरुखकर को परेशान करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। दोषियों के खिलाफ तदनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए. संविधान प्रदत्त अधिकारों का हनन, महिलाओं पर अत्याचार। आयोग इस संबंध में देवरुखकर को न्याय मिलने तक आयोग अनुवर्ती कार्रवाई करेगा। ये बात रूपाली चाकणकर ने कही है।