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  • मुंबई पुनर्विकास विवाद: 6,000 परिवार हाईकोर्ट में अटके

    मुंबई पुनर्विकास विवाद: 6,000 परिवार हाईकोर्ट में अटके

    मुंबई में 6,000 से ज़्यादा परिवार पुनर्विकास विवाद में फंसे हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट में केस लंबित, RERA सुरक्षा से बाहर, और घर लौटने का इंतज़ार। Mumbai redevelopment dispute 6,000 families stuck in High Court

    मुंबई का स्काईलाइन दिन-ब-दिन बदल रहा है। नई-नई ऊँची इमारतें खड़ी हो रही हैं, पुरानी बिल्डिंग्स ध्वस्त की जा रही हैं। लेकिन इस विकास के पीछे एक खामोश संकट भी छिपा है—हज़ारों परिवार जो अपने ही घर का इंतज़ार कर रहे हैं।

    बॉम्बे हाईकोर्ट में इस समय 6,000 से अधिक पुनर्विकास से जुड़े मामले लंबित हैं। इनमें अधिकांश वो परिवार हैं जिनकी इमारतें तोड़ दी गईं और डेवलपर ने नए घर का वादा किया, लेकिन सालों बाद भी उन्हें घर नहीं मिला। Mumbai redevelopment dispute 6,000 families stuck in High Court

    कानून की खामियां और RERA का दायरा

    जब कोई इमारत गिरा दी जाती है, तो उसके मूल निवासी RERA (Real Estate Regulation and Development Act) की सुरक्षा से बाहर हो जाते हैं।

    • RERA केवल उन खरीदारों को सुरक्षा देता है जिन्होंने पैसे देकर नया फ्लैट खरीदा हो।
    • लेकिन पुनर्विकास और SRA (स्लम रिहैबिलिटेशन) योजनाओं में, निवासी अपना पुराना घर छोड़ते हैं और बदले में नया फ्लैट मिलने की उम्मीद रखते हैं।

    इसमें पैसे का लेन-देन नहीं होता, लेकिन जोखिम उतना ही बड़ा है। और यही सबसे बड़ी कानूनी खामी है।

    क्यों हो रही है देरी?

    अधिवक्ता गॉडफ्रे पिमेंटा का कहना है कि डेवलपर्स पर जवाबदेही तय करने वाला कोई ठोस कानून नहीं है।

    • कई परियोजनाएं सालों से रुकी हुई हैं
    • परिवारों को अदालतों में लंबी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
    • औसतन एक केस 5-7 साल तक चलता है, जिससे मध्यमवर्गीय और वरिष्ठ नागरिक बेहद परेशान हो जाते हैं।

    पिमेंटा का कहना है, “अगर पुनर्विकास को RERA के दायरे में लाया जाए तो डेवलपर्स पर समय सीमा पूरी करने का दबाव बनेगा और निवासियों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी।” Mumbai redevelopment dispute 6,000 families stuck in High Court

    विशेषज्ञों की राय: नए कानून की ज़रूरत

    महाराष्ट्र सोसायटीज़ वेलफेयर एसोसिएशन (महासेवा) के अध्यक्ष, सीए रमेश प्रभु का कहना है कि जब RERA लागू हुआ तो यह ऐतिहासिक कदम था, लेकिन यह नए फ्लैट खरीदारों को ध्यान में रखकर बनाया गया था।

    उनके अनुसार, अब सरकार को चाहिए कि:

    • पुनर्विकास और पुनर्वास के लिए एक अलग ढांचा तैयार करे।
    • इसके लिए एक थिंक टैंक स्थापित किया जाए।
    • समयबद्ध मंजूरी और निगरानी के लिए एकल खिड़की प्रणाली लागू की जाए।

    महाराष्ट्र की भूमिका और ज़िम्मेदारी

    महाराष्ट्र हमेशा से आवास सुधारों में अग्रणी रहा है।

    • MOFA (Maharashtra Ownership Flats Act) ने देशभर को दिशा दी।
    • 2012 में, केंद्र की RERA से पहले ही राज्य ने अपना आवास कानून लागू कर दिया था।

    अब विशेषज्ञों का कहना है कि महाराष्ट्र को एक बार फिर नेतृत्व करना चाहिए और पुनर्विकास न्यायाधिकरण (Redevelopment Tribunal) की स्थापना करनी चाहिए, जिसके पास सख्त समयसीमा और प्रवर्तन की शक्ति हो।

    आँकड़े बताते हैं संकट की गहराई

    • महाराष्ट्र में 1.25 लाख से ज़्यादा हाउसिंग सोसायटीज़ और 2 लाख अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स हैं।
    • इनमें से लगभग 30% सोसायटीज़ पुनर्विकास की प्रक्रिया में हैं या उसके इंतज़ार में हैं।
    • बॉम्बे हाईकोर्ट में 6,000 से अधिक केस लंबित हैं, जबकि दीवानी अदालतों में यह संख्या और ज़्यादा है।

    एडवोकेट श्रीप्रसाद परब कहते हैं, “यह एक परिवर्तनकारी दौर है, लेकिन जब तक समय पर न्याय और कड़ा कानूनी ढांचा नहीं मिलता, तब तक हज़ारों लोग अधर में फंसे रहेंगे।” Mumbai redevelopment dispute 6,000 families stuck in High Court

    परिवारों की जंग और मानसिक असर

    जो परिवार अपने घर छोड़कर किराए के मकानों में रह रहे हैं, वे सिर्फ आर्थिक बोझ ही नहीं बल्कि मानसिक तनाव भी झेल रहे हैं।

    • किराया और खर्चा बढ़ रहा है।
    • कई बुज़ुर्ग परिवार हर रोज़ घर लौटने की उम्मीद में जी रहे हैं।
    • लंबे केस और धीमी प्रक्रिया ने कई लोगों की मानसिक शांति और सम्मान छीन लिया है।

    प्रभु कहते हैं, “प्रगति अच्छी है, लेकिन अगर यह लोगों के घर और जीवन की शांति छीन ले तो इसका क्या मतलब?”

    मुंबई के हर नए टॉवर के साथ यह सवाल खड़ा होता है कि कहीं कोई पुराना परिवार तो अपने घर की राह नहीं देख रहा।
    पुनर्विकास एक सुनहरा सपना है, लेकिन जब तक कानून में बदलाव नहीं होता और निवासियों को RERA जैसी सुरक्षा नहीं मिलती, तब तक यह एक जुआ ही रहेगा। Mumbai redevelopment dispute 6,000 families stuck in High Court

  • मराठा आरक्षण पर राजनीति: ओबीसी संग्राम और फडणवीस का जवाब

    मराठा आरक्षण पर राजनीति: ओबीसी संग्राम और फडणवीस का जवाब

    मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र में नया विवाद। छगन भुजबल की नाराजगी, ओबीसी नेताओं का रुख और देवेंद्र फडणवीस की सफाई जानें विस्तार से।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों आरक्षण को लेकर एक बार फिर गरमा गई है। मराठा आरक्षण को लेकर सरकार के नए जीआर (Government Resolution) ने माहौल को गर्म कर दिया है। मराठा समुदाय को मनाने में सफल रहे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अब ओबीसी नेताओं की नाराजगी का सामना कर रहे हैं। सबसे बड़ा नाम है एनसीपी नेता और मंत्री छगन भुजबल का, जिन्होंने कैबिनेट बैठक का बहिष्कार कर दिया। Politics on Maratha reservation: OBC struggle and Fadnavis’s answer

    मराठा आंदोलन और सरकार का फैसला

    मराठा आंदोलन पिछले कई महीनों से चल रहा था। कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने अनशन किया और सरकार से 8 मांगें रखीं। इनमें से 6 मांगों को सरकार ने मान लिया। सबसे अहम मांग थी मराठा-कुनबी प्रमाणपत्र को लेकर, जिस पर सरकार ने सबकमेटी के जरिए अहम फैसला लिया। Politics on Maratha reservation: OBC struggle and Fadnavis’s answer

    इसके बाद आज़ाद मैदान और अन्य जगहों पर मराठा समाज ने जश्न मनाया। लेकिन इसी फैसले से ओबीसी नेताओं में नाराजगी देखने को मिली। Politics on Maratha reservation: OBC struggle and Fadnavis’s answer

    छगन भुजबल क्यों नाराज?

    बुधवार को महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक थी। उससे पहले छगन भुजबल प्री-कैबिनेट मीटिंग में शामिल हुए, लेकिन मुख्य बैठक में नहीं गए। उनका कहना है कि सरकार का यह जीआर ओबीसी के अधिकारों पर असर डाल सकता है।

    भुजबल ने यहां तक कह दिया कि वे इस मामले को अदालत में ले जाएंगे। इसके बाद अटकलें तेज हो गईं कि वे मंत्री पद भी छोड़ सकते हैं। हालांकि अभी तक उन्होंने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। Politics on Maratha reservation: OBC struggle and Fadnavis’s answer

    देवेंद्र फडणवीस का जवाब

    जब मीडिया ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस विवाद पर सवाल किया तो उन्होंने साफ कहा:

    • “कोई कैबिनेट छोड़कर नहीं गया है। मैंने छगन भुजबल से फोन पर बात की है।”
    • “हमारा जीआर ओबीसी पर असर नहीं डालता। राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ ने भी इसे देखकर यही कहा है।”
    • “हम मराठों का आरक्षण मराठों को देंगे और ओबीसी का आरक्षण ओबीसी को। किसी का अधिकार छीना नहीं जाएगा।”

    ओबीसी पर असर होगा या नहीं?

    फडणवीस ने स्पष्ट किया कि यह जीआर सामान्य आरक्षण का आदेश नहीं है, बल्कि यह सिर्फ “प्रूफ का जीआर” है।

    • उन्होंने कहा कि मराठवाड़ा के सबूत हैदराबाद गजट में मौजूद हैं, इसलिए इन्हें शामिल किया गया है।
    • जिनके पास सबूत होंगे, उन्हें ही आरक्षण का हक मिलेगा।
    • ओबीसी संगठनों ने भी इस पर सहमति जताई है।

    महाराष्ट्र में आगे की राजनीति

    महाराष्ट्र की राजनीति में आरक्षण हमेशा से संवेदनशील मुद्दा रहा है।

    • मराठा समाज की बड़ी आबादी है, जो लंबे समय से आरक्षण की मांग करता आया है।
    • वहीं ओबीसी समाज भी यह मानता है कि उनके अधिकार किसी और को न दिए जाएं।
    • ऐसे में सरकार को दोनों समुदायों को साथ लेकर चलना आसान नहीं होगा।

    फिलहाल फडणवीस यह दावा कर रहे हैं कि ओबीसी का हक किसी भी हाल में नहीं छीना जाएगा। लेकिन छगन भुजबल की नाराजगी यह संकेत देती है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा राजनीतिक संकट बन सकता है। Politics on Maratha reservation: OBC struggle and Fadnavis’s answer

    सोशल मीडिया पर माहौल

    मराठा आंदोलन के खत्म होते ही ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर मराठा समर्थकों ने खुशी जताई। वहीं ओबीसी समर्थक इस फैसले को लेकर चिंता जता रहे हैं। #MarathaReservation, #OBCReservation और #ChhaganBhujbal जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। Politics on Maratha reservation: OBC struggle and Fadnavis’s answer

    महाराष्ट्र सरकार ने मराठा आंदोलन को शांत करने के लिए जो कदम उठाया है, उसने ओबीसी समाज में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। छगन भुजबल जैसे बड़े नेता की नाराजगी इस मुद्दे को और तूल दे सकती है। हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लगातार यह भरोसा दिला रहे हैं कि किसी भी समाज के साथ अन्याय नहीं होगा। Politics on Maratha reservation: OBC struggle and Fadnavis’s answer

    ❓ मराठा आरक्षण विवाद से जुड़े आम सवाल (FAQ)

    Q1. मराठा आरक्षण विवाद क्यों उठा?

    मराठा आरक्षण विवाद इसलिए उठा क्योंकि सरकार ने मराठा समाज को आरक्षण देने के लिए नया जीआर (सरकारी आदेश) निकाला। इस फैसले से ओबीसी नेताओं को लग रहा है कि उनके आरक्षण पर असर पड़ सकता है।

    Q2. छगन भुजबल क्यों नाराज हैं?

    एनसीपी नेता और मंत्री छगन भुजबल का कहना है कि सरकार का यह कदम ओबीसी समाज के हक पर असर डाल सकता है। इसी वजह से उन्होंने कैबिनेट बैठक का बहिष्कार किया और कहा कि वे अदालत जाएंगे।

    Q3. क्या छगन भुजबल ने मंत्री पद छोड़ा है?

    नहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ किया है कि कोई भी मंत्री कैबिनेट से बाहर नहीं गया है। भुजबल अब भी सरकार का हिस्सा हैं।

    Q4. देवेंद्र फडणवीस ने इस विवाद पर क्या कहा?

    फडणवीस ने कहा कि सरकार का जीआर ओबीसी पर कोई असर नहीं डालता। मराठा और ओबीसी दोनों को उनका हक मिलेगा और किसी का आरक्षण किसी और को नहीं दिया जाएगा।

    Q5. क्या ओबीसी का आरक्षण खतरे में है?

    सरकार का कहना है कि ओबीसी का आरक्षण बिल्कुल सुरक्षित है। यह जीआर सिर्फ सबूत और प्रमाण से जुड़ा है। जिनके पास योग्य प्रमाण होंगे, उन्हें ही आरक्षण मिलेगा। Politics on Maratha reservation: OBC struggle and Fadnavis’s answe

  • मुंबई में ईद की छुट्टी अब 8 सितंबर को मनाई जाएगी

    मुंबई में ईद की छुट्टी अब 8 सितंबर को मनाई जाएगी

    महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई और उपनगरों में ईद-ए-मिलाद की छुट्टी 5 सितंबर से बदलकर 8 सितंबर कर दी है। यह निर्णय गणेश विसर्जन और मुस्लिम समुदाय की सहमति से लिया गया।

    📍 सरकार का बड़ा ऐलान

    महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को घोषणा कर दी कि मुंबई शहर और उपनगरों में ईद-ए-मिलाद की सार्वजनिक छुट्टी अब 5 सितंबर के बजाय 8 सितंबर को होगी। राज्य के अन्य जिलों में पहले से घोषित 5 सितंबर की छुट्टी यथावत रहेगी। हालांकि मुस्लिम समुदाय के उलेमाओं ने फातिहा और कुरानखानी का इंतेज़ाम 5 सितंबर को ही करने का फैसला किया है। शहर भर में मुस्लिम समुदाय 4 सितंबर की शाम से ही ईद ए मिलाद की तैयारी करने वाले है। Eid holiday in Mumbai will now be celebrated on 8 September

    🤝 बदलाव क्यों किया गया?

    इस वर्ष अनंत चतुर्दशी (6 सितंबर) और गणेश विसर्जन का आयोजन बड़े पैमाने पर होने वाला है। ऐसे में ट्रैफिक व्यवस्था और धार्मिक सौहार्द बनाए रखने के लिए मुस्लिम समुदाय ने अपनी ईद-ए-मिलाद का जुलूस 8 सितंबर को निकालने का निर्णय लिया है। Eid holiday in Mumbai will now be celebrated on 8 September

    सरकार ने इस सहमति को स्वीकार करते हुए छुट्टी की तारीख बदल दी। Eid holiday in Mumbai will now be celebrated on 8 September

    🕌 मुस्लिम समुदाय की पहल

    • मुस्लिम समाज ने गणेश भक्तों और जुलूस में शामिल लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए खुद तारीख बदलने का प्रस्ताव रखा।
    • यह कदम धार्मिक एकता और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करता है।
    • इसी वजह से सरकार ने भी तुरंत नोटिफिकेशन जारी कर इस बदलाव को लागू कर दिया।

    हालांकि इसके लिए राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांग्रेसी विधायक असलम शेख और कई उलेमाओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चिट्ठी लिखी थी। इसके बाद सरकार ने 5 सितंबर की जगह 8 सितंबर को ईद ए मिलाद की छुट्टी घोषित कर दी। Eid holiday in Mumbai will now be celebrated on 8 September

    🏛️ सरकारी आदेश क्या कहता है?

    • मुंबई शहर और उपनगरों के सरकारी कार्यालय 5 सितंबर को सामान्य रूप से खुले रहेंगे।
    • केवल 8 सितंबर को ईद-ए-मिलाद की छुट्टी लागू होगी।
    • महाराष्ट्र के अन्य जिलों में पहले घोषित 5 सितंबर की छुट्टी ही मान्य होगी।

    🙏 गणेशोत्सव और ईद एक साथ

    मुंबई में हर साल की तरह इस बार भी गणेशोत्सव बेहद धूमधाम से मनाया जा रहा है।

    • अनंत चतुर्दशी 6 सितंबर को है, जिस दिन लाखों गणेश मूर्तियों का विसर्जन होगा।
    • विसर्जन यात्रा और ईद-ए-मिलाद का जुलूस एक साथ होने से कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक पर दबाव बढ़ सकता था।
    • ऐसे में मुस्लिम समाज ने आगे आकर जुलूस की तारीख आगे बढ़ाई, जिसे सभी ने सराहा।

    🌍 सौहार्द और भाईचारे की मिसाल

    मुंबई हमेशा से गंगा-जमुनी तहज़ीब के लिए जानी जाती है।

    • गणेशोत्सव और ईद जैसे पर्वों का एक ही समय पर आना चुनौती बन सकता था, लेकिन दोनों समुदायों ने मिलकर इसे शांति और आपसी सम्मान के साथ हल कर दिया।
    • यह कदम बताता है कि मुंबई की पहचान सिर्फ आर्थिक राजधानी ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक एकता भी है।

    📊 छुट्टियों का कैलेंडर कैसे बदलेगा?

    • मुंबई और उपनगर → ईद-ए-मिलाद की छुट्टी 8 सितंबर को
    • महाराष्ट्र के अन्य जिले → ईद-ए-मिलाद की छुट्टी 5 सितंबर को
    • सरकारी दफ्तर (मुंबई) → 5 सितंबर को खुले रहेंगे, 8 सितंबर को बंद रहेंगे

    ✅ इसका असर आम लोगों पर

    • स्कूल-कॉलेज: मुंबई में 5 सितंबर को छुट्टी नहीं, बल्कि 8 सितंबर को छुट्टी रहेगी।
    • ऑफिस कर्मचारी: सरकारी आदेश के मुताबिक प्राइवेट और सरकारी दफ्तर 8 सितंबर को बंद रहेंगे।
    • धार्मिक जुलूस: गणेश विसर्जन और ईद की जुलूस अब अलग-अलग दिन होने से ट्रैफिक व्यवस्था आसान होगी।

    मुंबई में ईद-ए-मिलाद की छुट्टी 5 सितंबर से बदलकर 8 सितंबर कर दी गई है।
    यह बदलाव धार्मिक सौहार्द बनाए रखने के लिए किया गया है, ताकि गणेश विसर्जन और ईद की जुलूस में किसी तरह की परेशानी न हो। Eid holiday in Mumbai will now be celebrated on 8 September

    👉 यह फैसला बताता है कि मुंबई की ताकत उसकी सांप्रदायिक एकता और भाईचारे में है।

  • मुंबई का P/North वार्ड: बढ़ते तापमान और घटती हरियाली का संकट

    मुंबई का P/North वार्ड: बढ़ते तापमान और घटती हरियाली का संकट

    मुंबई का पी/नॉर्थ वार्ड तेजी से गर्म हो रहा है। 2015 से 2024 के बीच तापमान 5°C से ज्यादा बढ़ गया है। अवैध निर्माण और हरियाली की कमी ने संकट गहरा दिया है।

    📍 P/North वार्ड कहाँ है और क्यों अहम है?

    मुंबई का पी/नॉर्थ वार्ड (P/North Ward) 46.67 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसके पूर्व में संजय गांधी नेशनल पार्क और पश्चिम में मढ़-मनोरी के मैंग्रोव जंगल हैं। इसमें मलाड, मालवनी, माढ़ और अक्सा जैसे प्रमुख इलाके आते हैं।
    यह मुंबई का सबसे ज्यादा आबादी वाला वार्ड है। 13 वर्ष पहले यानी 2011 की जनगणना के अनुसार यहां करीब 10 लाख लोगों की आबादी रिकार्ड की गई थी। इतनी घनी आबादी के बीच हर डिग्री तापमान का बढ़ना लाखों लोगों को प्रभावित करता है। Mumbai’s P/North ward: The crisis of rising temperatures and decreasing greenery

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    🌳 हरियाली के बावजूद बढ़ता तापमान

    मानचित्र पर यह इलाका हरा-भरा दिखता है, लेकिन हकीकत अलग है।

    • 2015 से 2024 के बीच तापमान 5°C से ज्यादा बढ़ा
    • 42.24°C (2015) से बढ़कर 50°C (2024) तक पहुंच गया
    • सबसे ज्यादा असर झोपड़पट्टी और घनी आबादी वाले इलाकों में
    • कंक्रीट, डामर और टिन की छतों ने प्राकृतिक ठंडक देने वाले पेड़ों और खुली जमीन की जगह ले ली
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    🔥 सबसे ज्यादा खतरे में कौन हैं?

    पी/नॉर्थ वार्ड की अनौपचारिक बस्तियां (झोपड़पट्टियां) इस संकट का सबसे बड़ा शिकार हैं।

    • 26% घरों की छतें एस्बेस्टस और टिन की, जो तेजी से गर्म होती हैं
    • 25% घरों में अब भी पारंपरिक ईंधन (लकड़ी आदि) से खाना बनता है
    • केवल 25% लोग ही अपने घरों के मालिक, बाकी किरायेदार हैं
    • स्वास्थ्य सेवाओं, बिजली और साफ पानी तक सीमित पहुंच

    👉 इन सभी कारणों से यह इलाका जलवायु संकट (Climate Crisis) का हॉटस्पॉट बन चुका है।

    📊 आंकड़े और सैटेलाइट डेटा क्या कहते हैं?

    • 60% इलाके का तापमान 5°C से ज्यादा बढ़ा
    • दत्तवाडी, महाराष्ट्र नगर और कलेक्टर कंपाउंड सबसे गर्म इलाकों में शामिल
    • मैंग्रोव इलाकों में मलबा डालकर और अवैध निर्माण कर ठंडी और नम जमीन को गर्म और बंजर बनाया गया

    📌 निष्कर्ष: जितनी तेजी से हरियाली और खुली जगहें कम हो रही हैं, उतनी ही तेजी से यहां की जमीन गर्म हो रही है। Mumbai’s P/North ward: The crisis of rising temperatures and decreasing greenery

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    ✅ समाधान: मुंबई को क्या कदम उठाने चाहिए?

    1. प्राकृतिक इलाकों की सुरक्षा

    • मैंग्रोव और जंगलों की कानूनी सुरक्षा और पुनर्वनीकरण
    • अवैध निर्माण और मलबा डालने पर कड़ी रोकथाम

    2. गर्मी-संवेदनशील विकास

    • नई इमारतों और SRA प्रोजेक्ट्स में पेड़, वेंटिलेशन और ग्रीन स्पेस अनिवार्य
    • झोपड़पट्टियों में रिफ्लेक्टिव पेंट और शेड नेट्स का इस्तेमाल

    3. कमजोर आबादी की सुरक्षा

    • रिफ्लेक्टिव रूफ और ठंडी छतें सभी घरों में लागू हों
    • स्वच्छ पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं की 100% कवरेज
    • हीटवेव जागरूकता अभियान, खासकर महिलाओं के लिए

    4. पेड़ और हरियाली बढ़ाना

    • सड़क किनारे, फुटपाथ और सरकारी जमीन पर पेड़ लगाना
    • छायादार पैदल मार्ग और साइकिल ट्रैक विकसित करना
  • बांद्रा टर्मिनस पर नकली पुलिसकर्मी ने व्यापारी से 10.30 लाख लूटे

    बांद्रा टर्मिनस पर नकली पुलिसकर्मी ने व्यापारी से 10.30 लाख लूटे

    मुंबई के बांद्रा टर्मिनस पर नकली पुलिसकर्मी बनकर दो युवकों ने व्यापारी से ₹10.30 लाख ठग लिए। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। Fake policeman robs businessman of Rs 10.30 lakh at Bandra Terminus

    मुंबई: बांद्रा टर्मिनस रेलवे स्टेशन पर सोमवार को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। मलाड निवासी व्यापारी विकास गुप्ता को दो व्यक्तियों ने नकली रेलवे पुलिसकर्मी बनकर ₹10.30 लाख से ठग लिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों की पहचान नीलेश कालसुलकर (45) और प्रवीण शुक्ला (32) के रूप में की है और उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। Fake policeman robs businessman of Rs 10.30 lakh at Bandra Terminus

    व्यापारी के साथ धोखाधड़ी कैसे हुई?

    विकास गुप्ता, जो कपड़ों का व्यापारी है, सोमवार को गुजरात व्यापारिक यात्रा पर जा रहे थे। बांद्रा टर्मिनस पर ट्रेन का इंतजार करते समय दो व्यक्ति उनके पास आए और खुद को रेलवे पुलिसकर्मी बताया।

    • उन्होंने व्यापारी से गंतव्य पूछकर उसका बैग चेक करने की मांग की।
    • बैग में कैश देखकर उन्होंने गुप्ता से पैसों का सबूत मांगा।
    • गुप्ता तत्काल कोई दस्तावेज़ नहीं दिखा सके और घबरा गए।
    • इसी मौके का फायदा उठाकर दोनों नकली पुलिसकर्मियों ने ₹10.30 लाख जब्त कर लिए और चेतावनी दी कि अब यह पैसा वापस नहीं मिलेगा।

    घटना के तुरंत बाद गुप्ता को धोखाधड़ी का एहसास हुआ और उन्होंने बांद्रा रेलवे पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। Fake policeman robs businessman of Rs 10.30 lakh at Bandra Terminus

    पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

    रेलवे पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
    एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया –
    “हमने आरोपियों को नकली पुलिसकर्मी बनकर धोखाधड़ी करने और ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस अपराध में क्या असली रेलवे पुलिसकर्मी भी शामिल हैं, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा।”

    CCTV फुटेज से नए राज़

    सूत्रों ने संकेत दिया है कि इस मामले में कुछ वरिष्ठ रेलवे पुलिस अधिकारियों की भी भूमिका हो सकती है।

    • बांद्रा टर्मिनस और खार रोड रेलवे स्टेशन की CCTV फुटेज में एक महिला पुलिसकर्मी और अन्य स्टाफ बैग लेकर जाते दिखे।
    • यह फुटेज अब जांच का हिस्सा बन गया है।
    • जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इस गैंग में अंदरूनी पुलिसकर्मी शामिल तो नहीं।

    यात्रियों के लिए चेतावनी

    पिछले कुछ दिनों में वसई और मुंबई सेंट्रल में भी ऐसे ही मामले सामने आए हैं, जहां यात्रियों से नकली पुलिसकर्मी बनकर ठगी की गई।
    रेलवे पुलिस ने यात्रियों को आगाह किया है कि

    • किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को पैसे या बैग न दिखाएं।
    • असली पुलिसकर्मी हमेशा अपनी आईडी कार्ड और यूनिफॉर्म में रहते हैं।
    • किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रेलवे हेल्पलाइन या स्टेशन पुलिस को जानकारी दें।

    बढ़ता खतरा और जांच

    यह घटना रेलवे यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है।

    • नकली पुलिसकर्मी आसानी से यात्रियों को शिकार बना रहे हैं।
    • यात्रियों का भरोसा तोड़कर वे लाखों रुपये हड़प रहे हैं।
    • इस मामले में अब यह जांचना बाकी है कि क्या यह संगठित गिरोह है और क्या इसमें रेलवे पुलिस का कोई अंदरूनी हाथ है।

    बांद्रा टर्मिनस की यह घटना यात्रियों के लिए एक चेतावनी है कि यात्रा के दौरान सतर्क रहें और नकली पुलिसकर्मियों से सावधान रहें। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन जांच अभी जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और राज़ खुल सकते हैं। Fake policeman robs businessman of Rs 10.30 lakh at Bandra Terminus

  • विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर को मिली मंजूरी, 2026 से शुरू होगा काम

    विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर को मिली मंजूरी, 2026 से शुरू होगा काम

    महाराष्ट्र सरकार ने विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर को BOT मॉडल पर मंजूरी दी। 2026 से काम शुरू, 126 किमी लंबा कॉरिडोर जोड़ेगा JNPT, NMIA और MTHL से।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने लंबे समय से अटके विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर प्रोजेक्ट को आखिरकार हरी झंडी दे दी है। इस फैसले के साथ राज्य की परिवहन और आर्थिक विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। यह कॉरिडोर मुंबई महानगर क्षेत्र के लिए नया लाइफलाइन साबित हो सकता है, क्योंकि यह प्रोजेक्ट मुंबई, नवी मुंबई, पालघर और रायगढ़ को सीधे जोड़ देगा। Virar-Alibaug Multimodal Corridor gets approval, work to start from 2026

    प्रोजेक्ट का महत्व

    यह 126.3 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर मुंबई के कई बड़े आर्थिक और परिवहन केंद्रों को जोड़ेगा। इसमें शामिल हैं:

    • जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT)
    • नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NMIA)
    • मुंबई ट्रांस हार्बर सी लिंक (MTHL)

    साथ ही यह प्रोजेक्ट कई नेशनल हाइवे और एक्सप्रेसवे से भी जुड़ने वाला है, जिनमें शामिल हैं:

    • मुंबई-अहमदाबाद हाईवे (NH-48)
    • मुंबई-आगरा हाईवे (NH-848)
    • कल्याण-मुर्बड हाईवे (NH-61)
    • मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे
    • मुंबई-बेंगलुरु हाईवे (NH-48)
    • मुंबई-गोवा हाईवे (NH-66)

    BOT मॉडल पर होगा निर्माण

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    पहले इस प्रोजेक्ट को EPC (Engineering Procurement Construction) मॉडल पर लाने की तैयारी थी, लेकिन लागत अनुमान से अधिक बोली आने के बाद सरकार ने इसे रद्द कर दिया। अब इसे BOT (Build, Operate and Transfer) मॉडल पर बनाया जाएगा। Virar-Alibaug Multimodal Corridor gets approval, work to start from 2026

    इस मॉडल में निजी कंपनियां निवेश कर प्रोजेक्ट बनाएंगी और कुछ वर्षों तक उसका संचालन करने के बाद सरकार को सौंप देंगी। इससे सरकार के ऊपर वित्तीय बोझ कम होगा। Virar-Alibaug Multimodal Corridor gets approval, work to start from 2026

    पहला चरण: 96.41 किलोमीटर का निर्माण

    पहले चरण में 96.41 किलोमीटर का कॉरिडोर बनाया जाएगा। यह हिस्सा पालघर जिले के नावघर से लेकर रायगढ़ जिले के पेन तालुका के बालवली तक फैला होगा। Virar-Alibaug Multimodal Corridor gets approval, work to start from 2026

    इस हिस्से में प्राथमिकता से उन इलाकों पर काम होगा जहां कॉरिडोर का हिस्सा NHAI के वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे स्पर (Morbe से Karanjade तक) से जुड़ता है। Virar-Alibaug Multimodal Corridor gets approval, work to start from 2026

    जमीन अधिग्रहण और लागत

    सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने का आदेश दिया है।

    • जमीन अधिग्रहण लागत: ₹22,250 करोड़
    • प्रशासनिक मंजूरी: ₹37,013 करोड़
    • इसमें अनुमानित ब्याज: ₹14,763 करोड़ भी शामिल है।

    इसके अलावा, HUDCO को “कम्फर्ट क्लॉज” दिया गया है, जिसके तहत अगर MSRDC से पर्याप्त राजस्व नहीं आता है तो लोन की अदायगी सुनिश्चित होगी। Virar-Alibaug Multimodal Corridor gets approval, work to start from 2026

    आर्थिक विकास की नई राह

    यह कॉरिडोर मुंबई और उसके आसपास के शहरों के लिए नई संभावनाएं लेकर आएगा।

    • रोज़गार के अवसर: प्रोजेक्ट से निर्माण और संचालन दोनों चरणों में हजारों नौकरियां पैदा होंगी।
    • यातायात पर असर: भारी ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और लॉजिस्टिक्स का समय कम होगा।
    • औद्योगिक विकास: नवी मुंबई और रायगढ़ जिले के औद्योगिक क्षेत्रों को नया बूस्ट मिलेगा।

    चुनौतियां भी कम नहीं

    हालांकि यह प्रोजेक्ट बड़ा बदलाव लाने वाला है, लेकिन चुनौतियां भी सामने हैं।

    • जमीन अधिग्रहण से जुड़ी कानूनी बाधाएं
    • प्रोजेक्ट लागत में और बढ़ोतरी की आशंका
    • BOT मॉडल पर निवेशकों को आकर्षित करने की चुनौती
    • स्थानीय लोगों का विरोध और पुनर्वास का मुद्दा

    विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर मुंबई और महाराष्ट्र के लिए एक ऐतिहासिक प्रोजेक्ट है। अगर यह योजना तय समय पर पूरी हुई, तो मुंबई महानगर क्षेत्र को ट्रैफिक जाम, यात्रा समय और लॉजिस्टिक्स लागत से बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही यह JNPT, नवी मुंबई एयरपोर्ट और MTHL जैसे प्रोजेक्ट्स से सीधे जुड़कर मुंबई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नया पहचान देगा। Virar-Alibaug Multimodal Corridor gets approval, work to start from 2026

  • शिल्पा शेट्टी का बांद्रा रेस्टोरेंट बंद, 60 करोड़ का विवाद

    शिल्पा शेट्टी का बांद्रा रेस्टोरेंट बंद, 60 करोड़ का विवाद

    शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा पर 60 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप। इस बीच बांद्रा का मशहूर रेस्टोरेंट बास्टियन बंद होने जा रहा है। Shilpa Shetty’s Bandra restaurant closed, dispute of Rs 60 crores

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई: बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा इन दिनों 60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में कानूनी विवादों का सामना कर रहे हैं। इसी बीच शिल्पा शेट्टी ने अपने सोशल मीडिया पर घोषणा की है कि उनका मशहूर बांद्रा स्थित रेस्टोरेंट बास्टियन (Bastian Bandra) अब बंद हो रहा है। Shilpa Shetty’s Bandra restaurant closed, dispute of Rs 60 crores

    बास्टियन बांद्रा का अंतिम दिन

    शिल्पा शेट्टी ने लिखा –
    “यह गुरुवार एक युग का अंत है, क्योंकि हम मुंबई के सबसे आइकॉनिक डेस्टिनेशन BASTIAN BANDRA को अलविदा कह रहे हैं। यह जगह हमें अनगिनत यादें और शहर की नाइटलाइफ का जादुई अनुभव दे गई।”

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    उन्होंने आगे कहा कि इस आखिरी शाम को खास बनाने के लिए एक स्पेशल इवेंट आयोजित किया जाएगा, जहां पुराने ग्राहकों के साथ इस सफर को याद किया जाएगा। Shilpa Shetty’s Bandra restaurant closed, dispute of Rs 60 crores

    बास्टियन का इतिहास

    • शिल्पा शेट्टी और रंजीत बिंद्रा ने मिलकर 2016 में इस रेस्टोरेंट की शुरुआत की थी।
    • 2023 में इसे रीलोकेट कर बांद्रा में फिर से खोला गया।
    • यहां के इंटरनेशनल फूड मेन्यू और आर्टिस्टिक डेकोर ने इसे मुंबई की नाइटलाइफ का पसंदीदा हॉटस्पॉट बना दिया।
    • कई बॉलीवुड सितारे और बिजनेस टायकून यहां पार्टी करते नज़र आते थे।

    60 करोड़ की धोखाधड़ी का केस

    शिल्पा और राज कुंद्रा पर आरोप है कि उन्होंने मुंबई के बिजनेसमैन दीपक कोठारी से 2015 से 2023 के बीच लगभग 60 करोड़ रुपये का निवेश लिया और उसका गलत इस्तेमाल किया। Shilpa Shetty’s Bandra restaurant closed, dispute of Rs 60 crores

    • यह पैसा उनकी कंपनी बेस्ट डील टीवी प्राइवेट लिमिटेड के जरिए बिजनेस ग्रोथ के लिए दिया गया था।
    • शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह रकम बिजनेस में लगाने के बजाय पर्सनल खर्चों में इस्तेमाल हुई।
    • आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है।

    राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी का बचाव

    दोनों की ओर से एडवोकेट प्रशांत पाटिल ने बयान जारी किया और कहा:
    “ये आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। यह मामला सिविल नेचर का है और इस पर पहले ही NCLT मुंबई ने 4 अक्टूबर 2024 को फैसला सुना दिया था।” Shilpa Shetty’s Bandra restaurant closed, dispute of Rs 60 crores

    उन्होंने यह भी जोड़ा कि मीडिया में फैलाई जा रही खबरें तथ्यों से परे हैं और इस मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।

    बास्टियन की विरासत

    हालांकि बास्टियन बांद्रा अब बंद हो रहा है, लेकिन शिल्पा ने बताया कि इसका Arcane Affair Thursday Night Ritual आगे भी जारी रहेगा। अब यह Bastian At The Top नामक नए स्पेस में आयोजित होगा, जिससे बास्टियन की विरासत एक नए अध्याय में आगे बढ़ेगी। Shilpa Shetty’s Bandra restaurant closed, dispute of Rs 60 crores

    असर और चर्चा

    रेस्टोरेंट बंद होने की खबर के बाद सोशल मीडिया पर फैंस और ग्राहकों ने अपनी भावनाएं साझा कीं। कई लोगों ने लिखा कि मुंबई की नाइटलाइफ का एक बड़ा हिस्सा अब खत्म हो गया है। वहीं, धोखाधड़ी केस ने शिल्पा और राज की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। Shilpa Shetty’s Bandra restaurant closed, dispute of Rs 60 crores

    शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा के लिए यह दौर काफी कठिन साबित हो रहा है। जहां एक ओर कानूनी केस उनकी प्रतिष्ठा पर असर डाल रहा है, वहीं दूसरी ओर उनका प्रिय रेस्टोरेंट बास्टियन भी बंद हो गया है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में यह मामला किस दिशा में जाता है। Shilpa Shetty’s Bandra restaurant closed, dispute of Rs 60 crores

  • मुंबई के लादी पाव पर संकट, लकड़ी से जलने वाले भट्टी बैन से बढ़ेगी कीमत

    मुंबई के लादी पाव पर संकट, लकड़ी से जलने वाले भट्टी बैन से बढ़ेगी कीमत

    BMC ने मुंबई में वुड और कोयले से चलने वाले भट्टी पर बैन लगा दिया है। जानें कैसे इससे वड़ा पाव, पाव भाजी और मिसळ पाव महंगे हो सकते हैं और बेकरी वालों पर कैसा संकट आने वाला है।

    मुंबई और वड़ा पाव का रिश्ता इतना गहरा है कि इसे “गरीबों का बर्गर” भी कहा जाता है। ऑफिस जाते कर्मचारी हों या कॉलेज के विद्यार्थी, हर किसी के लिए लादी पाव से बनी स्नैक्स जैसे वड़ा पाव, पाव भाजी और मिसळ पाव रोज़ की ज़िंदगी का हिस्सा हैं। लेकिन अब यह स्वाद बदल सकता है। Mumbai’s Ladi Pav is in trouble, the ban on wood-fired ovens will increase the price

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने शहर की लगभग 1,000 बेकरीयों को नोटिस जारी कर कहा है कि वे लकड़ी से जलने वाले और कोयला भट्टी का इस्तेमाल बंद करें। इसके बजाय उन्हें इको-फ्रेंडली पीएनजी (पाइप्ड नैचरल गैस) ओवन लगाना होगा। Mumbai’s Ladi Pav is in trouble, the ban on wood-fired ovens will increase the price

    
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    क्यों लगाया बैन?

    BMC का कहना है कि लकड़ी और कोयले से चलने वाले भट्टी से PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषक निकलते हैं। ये प्रदूषक न सिर्फ़ बेकरी के भीतर काम करने वालों की सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि शहर की हवा भी खराब करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ़ ये बेकरी ही मुंबई के 3.5% प्रदूषण के लिए ज़िम्मेदार हैं। Mumbai’s Ladi Pav is in trouble, the ban on wood-fired ovens will increase the price

    बेकरीवालों की मुश्किलें

    1. लागत में इज़ाफा

    इंडियन बेकर्स असोसिएशन के अध्यक्ष खोदादाद ईरानी ने बताया कि पीएनजी आधारित ओवन लगाना लकड़ी और कोयला भट्टी से 3 से 4 गुना महंगा है। छोटे बेकरी वाले इतने बड़े खर्च को कैसे उठाएंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है।

    2. फ्लेवर का संकट

    लकड़ी से चलने वाले भट्टी से पकाई गई लादी पाव को जो खास स्मोकी टेस्ट मिलता है, वह गैस ओवन में गायब हो जाएगा। यानी, मुंबईकरों का ऑथेंटिक वड़ा पाव टेस्ट बदल सकता है।

    3. रोज़गार पर असर

    गैस या इलेक्ट्रिक ओवन लगाने पर मशीनों पर निर्भरता बढ़ेगी। इससे कर्मचारियों की ज़रूरत कम होगी, और हज़ारों कामगारों की नौकरियां दांव पर लग सकती हैं।

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    कीमतें होंगी दोगुनी?

    अगर पीएनजी ओवन का इस्तेमाल शुरू हुआ तो एक साधारण वड़ा पाव जिसकी कीमत अभी ₹15–₹20 है, वह ₹30–₹40 तक पहुंच सकता है। इसी तरह पाव भाजी और मिसळ पाव जैसे आइटम भी महंगे होंगे।

    मुंबई की गलियों का स्वाद बदल जाएगा?

    मुंबई की गलियों में बिकने वाले वड़ा पाव का स्वाद सिर्फ़ आलू और मसाले से नहीं बल्कि लादी पाव की सॉफ्टनेस और सुगंध से पूरा होता है। अगर ओवन बदल गए तो यह सुगंध और टेक्सचर बदल जाएगा। Mumbai’s Ladi Pav is in trouble, the ban on wood-fired ovens will increase the price

    सवाल उठता है: क्या सिर्फ़ बेकरीज़ ही ज़िम्मेदार?

    मुंबई में प्रदूषण के बड़े कारण हैं –

    • वाहनों से निकलने वाला धुआं
    • निर्माण कार्यों से धूल
    • औद्योगिक प्रदूषण

    ऐसे में केवल बेकरीज़ को टारगेट करना कई विशेषज्ञों के अनुसार एकतरफ़ा फैसला है।

    आगे का रास्ता

    सरकार और BMC को चाहिए कि –

    1. छोटे बेकरी वालों को सब्सिडी या आर्थिक मदद दे।
    2. नई टेक्नोलॉजी के साथ ऐसा ओवन लाए जो सुरक्षित भी हो और फ्लेवर भी बनाए रखे
    3. प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित कदम उठाए।

    मुंबई के लिए लादी पाव सिर्फ़ एक ब्रेड नहीं, बल्कि संस्कृति और पहचान है। अगर लकड़ी की आग से चलने वाली भट्टी पूरी तरह बंद हो जाते हैं तो यह परंपरा टूट जाएगा और वड़ा पाव खाने का असली मज़ा बदल जाएगा। सवाल यह है कि – क्या मुंबई अपनी हवा साफ़ करने के नाम पर अपनी सबसे प्यारी डिश का स्वाद कुर्बान कर पाएगी? Mumbai’s Ladi Pav is in trouble, the ban on wood-fired ovens will increase the price

  • मुंबई में नौकरी अपडेट: सरकारी व निजी में रिक्त पदों पर आवेदन प्रक्रिया

    मुंबई में नौकरी अपडेट: सरकारी व निजी में रिक्त पदों पर आवेदन प्रक्रिया

    मुंबई में सितंबर 2025 में सरकारी व निजी क्षेत्र में ताज़ा नौकरियाँ: नगर निगम, BMC, पुलिस, कॉन्स्टेबल भर्ती व बड़ी कंपनियों में अवसर—जानें कैसे करें आवेदन। Jobs in Mumbai: Application process for vacancies in government and private sector

    डिजिटल डेस्क मुंबई: भारत की आर्थिक राजधानी, नौकरी चाहने वालों के लिए फिर से रोजगार के नए अवसरों की राह खोल रही है। चाहे सरकारी क्षेत्र हो या निजी—यहां हर श्रेणी में अवसर बढ़ रहे हैं। Jobs in Mumbai: Application process for vacancies in government and private sector

    सरकारी क्षेत्र में प्रमुख भर्तीें

    1. नगर निगम (MBMC) – 358 रिक्तियाँ

    महाराष्ट्र नगर निगम ने फायरमैन, इलेक्ट्रिशियन, जूनियर इंजीनियर (JE), क्लर्क समेत कुल 358 नई भर्तियाँ निकाली हैं, जिनमें वेतन ₹1.12 लाख तक हो सकता है। इच्छुक उम्मीदवारों को तुरंत ऑनलाइन आवेदन करने की सलाह दी गई है।

    2. BMC (मुंबई महानगरपालिका) – स्वास्थ्य विभाग

    BMC ने 23 पदों के लिए भर्ती की घोषणा की है, जिनमें स्वास्थ्य विभाग में काम करने में रुचि रखने वालों के लिए अवसर हैं और वेतन ₹1.75 लाख प्रति माह तक हो सकता है।

    3. पुलिस कांस्टेबल भर्ती – 15,631 पद

    महाराष्ट्र कैबिनेट ने 12,399 पुलिस कांस्टेबल, 234 ड्राइवर, 2,393 आर्म्ड कांस्टेबल, 580 जेल कांस्टेबल समेत कुल 15,631 पदों को भरने की मंजूरी दी है। यह भर्ती OMR आधारित लिखित परीक्षा के माध्यम से होगी और उम्र सीमा से अधिक समय सीमा वाले उम्मीदवारों को भी एक विशेष अवसर मिलेगा।

    4. नवी मुंबई महापालिका (NMMC)

    NMMC ने 668 रिक्त पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया घोषित की है और इसका परीक्षा समय-सारणी अब उपलब्ध है। इच्छुक उम्मीदवारों की तैयारी हेतु यह एक महत्वपूर्ण अवसर है (Maharashtra Times)।

    5. नागरिक रक्षा (Civil Defence)

    स्थापित कमी को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने लगभग 300 रिक्त पदों को भरने, उन्नत आपातकाल उपकरणों और आपातकालीन तैयारी बढ़ाने हेतु ₹20 करोड़ से अधिक का प्रस्ताव भेजा है।

    6. MSRTC – 15,000 ड्राइवर व कंडक्टर

    एमएसआरटीसी (महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम) ने अगले पांच वर्षों में 15,000 ड्राइवर और कंडक्टर भर्ती करने की योजना बनाई है, जिससे सड़क परिवहन शक्ति बढ़ेगी। Jobs in Mumbai: Application process for vacancies in government and private sector

    निजी क्षेत्र और कॉरपोरेट अवसर

    FreeJobAlert पर ताज़ा रिक्तियाँ

    एक नजर FreeJobAlert की सूची पर:

    • IBPS RRB – ऑफिस असिस्टेंट व ऑफिसर पदों पर 13,217 रिक्तियाँ, आवेदन की अंतिम तिथि 21-सितंबर-2025
    • Bombay High Court – Cook cum Peon पद (1 vacancy), आवेदन की अंतिम तिथि 21-सितंबर-2025
    • RCFL (Rail Coach Factory) – Apprentice पदों पर 325 रिक्तियाँ, अंतिम तिथि 12-सितंबर-2025
    • अन्य अवसर: Exim Bank, Director General of Shipping, NFDC, POWERGRID, SBI, MRVC, TIFR, आदि—अलग-अलग पदों पर आवेदन खुला है।

    MySarkariNaukri अपडेट

    • LIC Housing Finance – Assistant Manager / Associate पद के लिए जारी, अंतिम तिथि 15-सितंबर-2025
    • Naval Dockyard – Apprentice पद, अंतिम तिथि 12-सितंबर-2025
    • Indian Institute of Packaging – Clerk / Junior Assistant, अंतिम तिथि 24-सितंबर-2025

    Indeed पर कॉर्पोरेट और स्टार्टअप अवसर

    कुछ प्रमुख मौजूदा पद:

    • Google – Data Analytics, Project Management, Digital Business Marketing Apprenticeships (अंतिम तिथि 14-सितंबर-2025)
    • Kotak Mahindra – Management Trainee – Agri-Fin Projects
    • KPMG – Internal Audit Executive, Assistant Manager – Digital Government Advisory
    • The Carlyle Group – Executive Assistant (Mumbai)
    • Others – Customer Service Representative (Pretty Child), Business Analyst, Technical Sales Engineer, Talent Acquisition Partner, ERP Specialist

    Randstad और Shine जैसे पोर्टल पर हजारों अवसर

    Shine.com पर मुंबई में वर्तमान में 7419+ नौकरी रिक्तियाँ उपलब्ध हैं—IT, मार्केटिंग, फाइनेंस, हेल्थकेयर, शिक्षा जैसे सेक्टर शामिल
    Randstad पर 131+ विभिन्न प्रकार की सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियाँ मुंबई में उपलब्ध हैं।

    आवेदन करने की विस्तृत प्रक्रिया

    सरकारी भर्ती (जैसे MBMC, BMC, Police, NMMC):

    1. संबंधित आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ (MBMC/BMC/NMMC/POLICE)
    2. भर्ती अधिसूचना डाउनलोड करें (योग्यता, आयु, प्रारंभिक शुल्क, चयन प्रक्रिया विवरण)
    3. ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें—पात्रता दस्तावेज़ स्कैन करके अपलोड करें
    4. आवेदन शुल्क का भुगतान करें (यदि निर्धारित हो)
    5. सबमिशन के बाद आवेदन संख्या और ई-मेल/एसएमएस पावती संभाल कर रखें
    6. Admit Card और परीक्षा संबंधी अपडेट वेबसाइट/ई-मेल पर समय-समय पर देखें
    7. लिखित/शारीरिक परीक्षा और अंतर्वार्ता में भाग लें

    निजी/कॉर्पोरेट अवसर (Indeed, FreeJobAlert आदि):

    1. पोर्टल (Indeed, FreeJobAlert, Shine) पर खाता बनाएँ और प्रोफ़ाइल अपलोड करें
    2. इच्छित कीवर्ड (e.g., “Apprentice Mumbai”), लोकैलिटी और श्रेणी के हिसाब से फिल्टर करें
    3. उपयुक्त जॉब पोस्ट चुनें और “Apply Now” करें
    4. कवर लेटर, रिज़्यूमे और अन्य दस्तावेज़ तैयार रखें
    5. उम्मीदवार को कॉल/ई-मेल से आगे की प्रक्रिया के लिए संपर्क किया जाएगा

    नौकरी अलर्ट और तैयारी सुझाव

    • नौकरी अलर्ट सेट करें (Shine, Indeed पर) ताकि नए अवसर सीधे आपकी ई-मेल/मोबाइल पर पहुँचे
    • दस्तावेज़ जैसे रिज्यूमे, मार्कशीट, प्रमाणपत्र, आईडी प्रूफ हमेशा तैयार रखें
    • परीक्षा पैटर्न और पिछले प्रश्नपत्र देखें—विशेषकर सरकारी भर्ती के लिए
    • इंटरव्यू और टाइटल्ड एप्लिकेशन ट्रिक्स पर ध्यान दें

    मुंबई में इस समय सरकारी भर्ती से लेकर निजी और कॉर्पोरेट सेक्टर तक नौकरी की बहार है। चाहे वह नगर निगम और BMC जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएँ हों, पुलिस भर्ती हो या 15,000 ड्राइवर-कंडक्टर की MSRTC योजना, कॉर्पोरेट प्रतिष्ठानों में apprenticeships व विशेषज्ञ पद—यह लेख हर उम्मीदवार की दिशा में मार्गदर्शक साबित हो सकता है। Jobs in Mumbai: Application process for vacancies in government and private sector

  • मराठा आरक्षण: मर भी जाऊंगा तो नहीं हटूंगा- मनोज जरांगे

    मराठा आरक्षण: मर भी जाऊंगा तो नहीं हटूंगा- मनोज जरांगे

    मराठा आरक्षण आंदोलन: मनोज जरांगे पाटिल का ऐलान, “मर भी जाऊं तो भी नहीं हटूंगा”। पांच दिन से भूख हड़ताल, सरकार पर दबाव।

    मुंबई: मराठा आरक्षण की माँग को लेकर आज़ाद मैदान में बैठे मनोज जरांगे पाटिल ने आंदोलन को और सख्त करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि चाहे उनकी जान भी क्यों न चली जाए, वे धरना स्थल से नहीं हटेंगे। पाटिल पिछले पांच दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है। Maratha reservation: Even if I die, I will not step back – Manoj Jarange

    जरांगे का सख्त ऐलान

    मनोज जरांगे ने मुख्यमंत्री और सरकार को चेतावनी दी है। उनका कहना है कि सरकार उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा, “अगर मैं मर भी जाऊं, तो भी इस ज़मीन से नहीं उठूंगा। सोमवार को होने वाले जनआक्रोश का सामना करना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।”

    हाईकोर्ट और पुलिस की सख्ती

    मुंबई पुलिस ने आंदोलन को जारी रखने की अनुमति नहीं दी और प्रदर्शनकारियों को आज़ाद मैदान खाली करने का आदेश दिया है।
    बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि आंदोलनकारियों ने अपने वादे पूरे नहीं किए और इसके चलते शहर ठप पड़ा, जिससे आम जनता को परेशानी हुई।

    कोर्ट ने साफ आदेश दिया कि:

    • आंदोलनकारियों को आज़ाद मैदान से हटाया जाए।
    • मुंबई की सड़कों से ट्रैफ़िक जाम हटाया जाए।
    • नए प्रदर्शनकारियों को शहर में एंट्री न दी जाए।
    • जरांगे पाटिल और समर्थकों को मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

    पाटिल का पलटवार

    मनोज जरांगे पाटिल ने कोर्ट और पुलिस की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि उन्होंने कानून का उल्लंघन नहीं किया है और वे शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन चला रहे हैं।

    उन्होंने दावा किया कि जैसे ही अदालत का आदेश मिला, प्रदर्शनकारियों ने अपनी गाड़ियाँ सड़कों से हटा दीं ताकि ट्रैफ़िक में कोई दिक्कत न हो। पाटिल का कहना है कि वे पिछले दो सालों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं और अब जब तक मांगे पूरी नहीं होतीं, वे मुंबई नहीं छोड़ेंगे।

    मराठा आरक्षण की मुख्य मांग

    पाटिल और उनके समर्थकों की मुख्य मांग है कि मराठा समाज को सरकारी नौकरी और शिक्षा में ओबीसी कोटे के तहत 10% आरक्षण मिले।
    उनका कहना है कि जब तक “हैदराबाद राजपत्र” लागू नहीं होता और लिखित आदेश नहीं आता, तब तक वे धरना खत्म नहीं करेंगे। Maratha reservation: Even if I die, I will not step back – Manoj Jarange

    सरकार पर बढ़ा दबाव

    इस आंदोलन के चलते महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया है। सरकार ने बातचीत के लिए राधाकृष्ण विखे पाटिल की अगुवाई में 10 मंत्रियों की समिति बनाई है। समिति आंदोलनकारियों से बातचीत करने और समाधान निकालने की कोशिश कर रही है।

    आज़ाद मैदान में भीड़ और माहौल

    मुंबई के आज़ाद मैदान में हजारों की संख्या में मराठा समाज के लोग जुटे हुए हैं। आंदोलन के शुरुआती दिनों में शहर के कई हिस्सों में ट्रैफिक जाम हुआ था, लेकिन अब स्थिति सामान्य हो रही है।

    हालांकि, मनोज जरांगे पाटिल की सेहत लगातार गिर रही है। मेडिकल टीम समय-समय पर उनकी जांच कर रही है। इसके बावजूद उन्होंने भूख हड़ताल तोड़ने से साफ इनकार कर दिया है।

    निर्णायक मोड़ पर आंदोलन

    मराठा आरक्षण का यह संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। एक तरफ सरकार और अदालत कानून व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मनोज जरांगे पाटिल साफ कह रहे हैं कि वे “न्याय मिलने तक पीछे नहीं हटेंगे, चाहे जान भी क्यों न चली जाए।”

    यह आंदोलन अब महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन चुका है और आने वाले दिनों में इसका असर राज्य की स्थिरता पर भी पड़ सकता है।