Category: Civic Issues

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  • इंडिगो की सर्विस ठप, यात्रियों की परेशानियों पर गरजीं सांसद वर्षा गायकवाड

    इंडिगो की सर्विस ठप, यात्रियों की परेशानियों पर गरजीं सांसद वर्षा गायकवाड

    मुंबई एयरपोर्ट पर इंडिगो एयरलाइंस की सर्विस ठप होने से हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सांसद वर्षा गायकवाड ने एयरपोर्ट पहुंचकर स्थिति का जायज़ा लिया और सरकार व एयरलाइंस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने जांच और कार्रवाई की मांग की है।

    मुंबई: पिछले तीन दिनों से देशभर में IndiGo Airlines की फ्लाइट ऑपरेशन में बड़ा बवाल देखने को मिला। इस गड़बड़ी की वजह से हजारों यात्री एयरपोर्ट पर घंटों फंसे रहे, जिसमें बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    न पानी, न सही जानकारी और न स्टाफ की मदद, ऐसा माहौल बना रहा जैसे यात्री “ओलीस” बना दिए गए हों।
    मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद प्रा. वर्षा एकनाथ गायकवाड ने इस स्थिति को सरकार की नाकामी बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

    🔹 सरकार और सिस्टम की बड़ी नाकामी: गायकवाड

    सांसद वर्षा गायकवाड ने मुंबई एयरपोर्ट का दौरा कर यात्रियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा:

    “तीन दिन तक देशभर में फ्लाइट सर्विस ठप रही लेकिन सरकार की तरफ से एक भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यात्रियों को छोड़ दिया गया जैसे उनकी कोई सुनने वाला नहीं। यह नागरी विमानन मंत्रालय की सीधी नाकामी है।”

    🔹 टिकटों के दाम 5 हजार से 60 हजार तक

    इसी दौरान कई यात्रियों ने शिकायत की कि कुछ एयरलाइंस ने हालात का फायदा उठाते हुए टिकटों के दामों में भारी बढ़ोतरी की।

    • जो टिकट पहले ₹5,000 में मिल रहा था
    • वही टिकट ₹50,000 से ₹60,000 तक बेचा गया।

    सांसद गायकवाड ने इसे “यात्रियों की खुली लूट” बताया।

    🔹 यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं

    एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्थिति बेहद खराब रही। कई घंटों तक इंतज़ार के बावजूद:

    • कोई जानकारी नहीं
    • पानी नहीं
    • फूड सप्लाई नहीं
    • हेल्प डेस्क नदारद

    यात्रियों का कहना था कि एयरलाइंस स्टाफ गायब था और कोई अपडेट नहीं दिया जा रहा था।

    🔹 इंडिगो और केंद्र सरकार कैसे भरेंगी भरपाई?

    सांसद वर्षा गायकवाड ने सवाल उठाया:

    “जो बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे इस अव्यवस्था में फंसे रहे, उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा? नुकसान की भरपाई सरकार और इंडिगो कैसे करेगी?”

    🔹 जांच, एक्शन और सुधार की मांग

    उन्होंने कहा कि यह केवल “तकनीकी गलती” नहीं बल्कि ऑपरेशनल फेल्योर है और इसकी:

    • सख्त जांच
    • जिम्मेदारी तय
    • और भविष्य में रोकथाम के लिए सिस्टम सुधार

    जरूरी है।


    FAQ Section


    Q1. इंडिगो फ्लाइट में समस्या क्यों आई?
    ✔ अभी आधिकारिक कारण अस्पष्ट बताया जा रहा है, लेकिन यह बड़ा ऑपरेशनल और मैनेजमेंट फेल्योर माना जा रहा है।


    Q2. क्या यात्रियों को रिफंड या मुआवज़ा मिलेगा?
    ✔ सांसद वर्षा गायकवाड ने इसकी मांग की है, लेकिन अब तक एयरलाइंस की तरफ से कोई ठोस घोषणा नहीं।


    Q3. क्या सरकार जांच करेगी?
    ✔ मांग की गई है, लेकिन सरकारी स्तर पर अभी तक कोई आधिकारिक इन्वेस्टिगेशन आदेश नहीं दिया गया है।


    Q4. क्या टिकटों की कीमतों में कृत्रिम बढ़ोतरी हुई?
    ✔ हां, यात्रियों ने बताया कि 5 हजार के टिकट 50–60 हजार में बेचे गए।

  • गोरेगांव कॉलेज में हिजाब विवाद, 3 छात्रों पर FIR दर्ज, कॉलेज बोला — हिजाब पर कोई पाबंदी नहीं

    गोरेगांव कॉलेज में हिजाब विवाद, 3 छात्रों पर FIR दर्ज, कॉलेज बोला — हिजाब पर कोई पाबंदी नहीं

    मुंबई के गोरेगांव स्थित विवेक कॉलेज में कथित हिजाब प्रतिबंध को लेकर छात्रों और AIMIM कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन। कॉलेज प्रशासन ने जारी किया लिखित स्पष्टीकरण—”हिजाब पर कोई पाबंदी नहीं”। पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर तीन छात्रों पर FIR दर्ज की।

    मुंबई: गोरेगांव वेस्ट स्थित विवेक विद्याालय एंड जूनियर कॉलेज में हिजाब को लेकर विवाद ने गुरुवार को तूल पकड़ लिया। कुछ छात्राओं और AIMIM मुंबई यूनिट के सदस्यों ने कॉलेज प्रशासन पर हिजाब पहनने पर रोक लगाने का आरोप लगाते हुए कॉलेज के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। मामला बढ़ने पर पुलिस ने तीन छात्रों के खिलाफ बिना अनुमति प्रदर्शन और सरकारी आदेश का उल्लंघन करने के आरोप में FIR दर्ज की। वहीं कॉलेज प्रबंधन ने लिखित बयान जारी कर स्पष्ट किया कि हिजाब पहनने पर कोई रोक नहीं है और पूरा मामला “गलतफहमी” के कारण हुआ।

    कैसे शुरू हुआ विवाद?

    सूत्रों के मुताबिक, कुछ छात्राओं ने AIMIM से शिकायत की कि कॉलेज में उन्हें कक्षा में प्रवेश करने से पहले हिजाब उतारने के लिए कहा गया। छात्राओं ने इसे धार्मिक आस्था का उल्लंघन बताते हुए आपत्ति जताई।

    इसके बाद AIMIM मुंबई अध्यक्ष फ़ारूक मक़बूल शबदी छात्रों के साथ कॉलेज आए और उन्होंने कॉलेज गेट पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामला सुर्खियों में आ गया।

    कॉलेज प्रबंधन का स्पष्टीकरण

    विवाद बढ़ता देख कॉलेज की प्रिंसिपल शीजा मेनन ने लिखित बयान जारी करते हुए कहा:

    “हमारे संस्थान में छात्राओं के हिजाब पहनने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। ऐसा कोई आदेश कॉलेज की तरफ से जारी नहीं किया गया है। शायद कुछ गलतफहमी के कारण यह विवाद खड़ा हुआ, जिसकी आवश्यकता नहीं थी।”

    कॉलेज प्रशासन ने यह भी कहा कि वे विविध समुदायों का सम्मान करते हैं और संस्थान में सभी छात्रों के लिए समान और सुरक्षित माहौल बनाए रखना उनका उद्देश्य है।

    पुलिस की कार्रवाई

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    गोरेगांव पुलिस स्टेशन ने बताया कि प्रदर्शन बिना अनुमति के किया गया था, इसलिए तीन छात्रों के खिलाफ BNSS की धारा 35(3) के तहत FIR दर्ज की गई। हालांकि किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया।

    बाद में पुलिस स्टेशन में बैठक हुई, जिसमें:

    • प्रबंधन का लिखित स्पष्टीकरण पढ़ा गया
    • AIMIM प्रतिनिधियों और छात्राओं को जानकारी दी गई
    • सभी पक्ष सहमत हुए कि मामला समझौते के साथ शांतिपूर्वक समाप्त किया जाए

    पुलिस के अनुसार, क्षेत्र में कोई तनाव या सांप्रदायिक असहमति नहीं है

    राजनीतिक प्रतिक्रिया

    विवाद की जानकारी मिलते ही पूर्व बीजेपी पार्षद ज्ञानमूर्ति शर्मा अपने कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचे। पुलिस ने उन्हें स्थिति समझाई, जिसके बाद वे वापस लौट गए।

    सोशल मीडिया में बहस

    यह मामला सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा। कुछ उपयोगकर्ताओं ने इसे “धार्मिक आज़ादी का मामला” बताया, जबकि कुछ ने छात्रों द्वारा बिना परमिशन प्रदर्शन करने पर सवाल उठाए।

    जमीनी हकीकत

    जबकि प्रदर्शन से पहले जिसमें बुर्का पहनकर कॉलेज पहुंची छात्राओं को गेट पर रोका जाता हुआ वीडियो सामने आया। वीडियो में छात्राओं और कॉलेज प्रशासन के बीच बहस होती भी दिखाई दी। कुछ छात्राओं का दावा है कि जब उन्होंने इस नियम पर सवाल उठाया, तो कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि अगर नियम पसंद नहीं है, तो प्रवेश रद्द करा दें।

    1 दिसंबर को एआईएमआईएम की एडवोकेट जाहानारा शेख के साथ कई छात्राएं गोरगांव वेस्ट के टीन डोंगरी स्थित गोरेगांव पुलिस स्टेशन पहुंचीं और शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद कॉलेज की प्रिंसिपल को बातचीत के लिए थाने बुलाया गया।

    एडवोकेट जाहानारा शेख के मुताबिक, “हमने नियम वापस लेने की मांग रखी है, लेकिन प्रिंसिपल ने कहा कि वह प्रबंधन से बात करने के बाद ही फैसला लेंगी।” इसके बाद कॉलेज प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नही किया गया। उसके बाद ही छात्रों ने कॉलेज के बाहर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।


    FAQs

    Q1: विवाद किस कॉलेज में हुआ?
    ➡ गोरेगांव वेस्ट स्थित विवेक कॉलेज में।

    Q2: FIR क्यों दर्ज की गई?
    ➡ बिना अनुमति प्रदर्शन करने और सरकारी आदेश की अवहेलना के आरोप में।

    Q3: क्या कॉलेज ने हिजाब पर प्रतिबंध लगाया था?
    ➡ कॉलेज ने लिखित में स्पष्ट किया—हिजाब पर कोई प्रतिबंध नहीं।

    Q4: क्या किसी को गिरफ्तार किया गया है?
    ➡ नहीं, सिर्फ नोटिस देकर मामला शांतिपूर्वक सुलझाया गया।

    Q5: प्रदर्शन कौन आयोजित कर रहा था?
    ➡ AIMIM कार्यकर्ताओं और कुछ छात्राओं ने भाग लिया।

  • मालाड मस्ती 2025 में सितारों ने जमाया रंग, सुबह को बना दिया सेलिब्रेशन का त्योहार

    मालाड मस्ती 2025 में सितारों ने जमाया रंग, सुबह को बना दिया सेलिब्रेशन का त्योहार

    मालाड मस्ती 2025 में बॉलीवुड सितारों, लाइव म्यूज़िक, डांस और सोशल मेसेज के साथ हजारों लोगों की भागीदारी। MLA असलम शेख की अगुवाई में इवेंट ने फिर जीता लोगों का दिल।

    मुंबई: मालाड में आयोजित मालाड मस्ती 2025 रविवार सुबह सितारों की मौजूदगी, म्यूज़िक और डांस परफॉर्मेंस के साथ एक रंगीन उत्सव में बदल गया। इस खास मौके पर MLA असलम शेख और आयोजकों ने न सिर्फ मनोरंजन बल्कि समाजसेवा का संदेश भी दिया। इस मौके पर फ़िल्म “Mastii 4” की स्टारकास्ट, रियलिटी स्टार, कलाकार और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शामिल हुए, जिससे जनता में गजब का उत्साह देखने को मिला।

    ⭐ इवेंट की मुख्य झलकियां

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    🎬 बॉलीवुड सेलेब्स ने लगाया चार चांद

    इस साल मालाड मस्ती में फ़िल्म मस्तानी 4 की टीम—

    ने मंच गर्मा दिया।

    रूही सिंह की ग्लैमरस एंट्री और श्रेया शर्मा के स्टाइलिश लुक ने फैंस को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं डांसिंग कॉप अमोल कांबले की परफॉर्मेंस पर लोगों ने खूब तालियां बजाईं।

    💃 रियलिटी स्टार सना सुल्तान की धमाकेदार मौजूदगी

    सना सुल्तान ने फैंस के साथ डांस किया और लाइव इंटरैक्शन करके दर्शकों का दिल जीत लिया। सुबह के इस इवेंट में ऐसा जोश दिखा जैसे बड़ा कॉन्सर्ट हो रहा हो।

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    🎤 नए होस्टिंग जोड़ी ने बांधा माहौल

    इस बार होस्ट थे:

    दोनों की मजेदार एंकरिंग और दर्शकों से सीधा संवाद पूरे इवेंट की हाइलाइट रही।

    🤝 समाजसेवा भी साथ— किसानों के लिए समर्थन

    मालाड मस्ती ने मनोरंजन के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए हाल ही में बाढ़ से प्रभावित किसानों की सहायता का ऐलान किया।

    पिछले 9 सालों से यह कार्यक्रम सिर्फ मस्ती नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सहयोग का संदेश देता रहा है।

    🎯 आयोजन टीम

    • आयोजन: MLA असलम शेख
    • सह-समर्थन: किशन जैन (Gold Medal Company) और योगेश लखानी (Bright Outdoor)
    • इवेंट मैनेजमेंट: महेश राव – Mashraw Events

    🎤 FAQ सेक्शन


    Q. मालाड मस्ती कहां आयोजित की जाती है?

    👉 यह कार्यक्रम मुंबई के मालाड क्षेत्र में हर साल आयोजित किया जाता है।

    Q. इस साल मालाड मस्ती की मुख्य खासियत क्या रही?

    👉 बॉलीवुड सितारों की परफॉर्मेंस, लाइव संगीत और किसानों की मदद की घोषणा ने इसे खास बनाया।

    Q. क्या यह कार्यक्रम सिर्फ मनोरंजन के लिए होता है?

    👉 नहीं, यह सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक एकता को भी प्रोत्साहित करता है।

  • शुक्ला कंपाउंड विवाद: MLA सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री से मांगा हस्तक्षेप, 1962 की डेट ऑफ लाइन बदलने की मांग तेज

    शुक्ला कंपाउंड विवाद: MLA सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री से मांगा हस्तक्षेप, 1962 की डेट ऑफ लाइन बदलने की मांग तेज

    मुंबई के दहिसर पूर्व स्थित शुक्ला कंपाउंड में 400 परिवारों का भविष्य अधर में लटका है। विकासक द्वारा 1962 से पहले के दस्तावेज़ मांगने पर दिंडोशी के MLA सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर इस नियम में बदलाव की मांग की है। मामला अब शीतकालीन अधिवेशन में उठेगा।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: दहिसर पूर्व के रावलपाड़ा स्थित शुक्ला कंपाउंड में रहने वाले करीब 400 परिवारों का भविष्य संकट में पड़ गया है, क्योंकि प्रोजेक्ट डेवलपर ने इन सभी परिवारों से घर पुनर्विकास पात्रता के लिए 1962 से पहले के दस्तावेज़ देने की शर्त रखी है।

    इन दस्तावेज़ों को उपलब्ध न करा पाने के कारण सैकड़ों परिवार बेघर होने की चिंता में हैं। अब यह मामला राजनीतिक रूप से बड़ा रूप ले चुका है।

    🏘 45 साल से रहने वाले परिवारों पर बेघर होने का खतरा

    शुक्ला कंपाउंड में रहने वाले अधिकतर परिवार पिछले चार से पांच दशकों से इस इलाके में रह रहे हैं। कई परिवार छोटे उद्योग और मजदूरी कर अपनी रोज़ी-रोटी चलाते हैं।

    इन निवासियों का कहना है कि उन्होंने बिजली बिल, राशन कार्ड, आधार कार्ड, पानी के बिल सहित कई सरकारी दस्तावेज़ जमा किए हैं, लेकिन डेवलपर केवल 1962 के पहले की ओनरशिप प्रूफ स्वीकार कर रहा है — जो लगभग असंभव है।

    🏗 डेवलपर पर स्वार्थी प्रोजेक्ट प्लानिंग का आरोप

    मौजूदा ज़मीन का असली मालिक गोविंद पाटिल ने यह प्लॉट साल 1920 में इकबाल मिर्ची से जुड़े नामों और शेलाजी इंफ्रास्ट्रक्चर के अशोक जैन को बेचा था।

    अब विकासक अशोक जैन इस जमीन पर हाई-राइज़ हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

    रहवासियों का आरोप है कि—

    “डेवलपर खुद का फायदा ज्यादा देख रहा है और पुराना डेट ऑफ लाइन दिखाकर लोगों को बाहर करने की कोशिश कर रहा है।”

    🧾 MLA सुनील प्रभु पैरवी में, मुख्यमंत्री को पत्र

    दिंडोशी विधानसभा के शिवसेना नेता एवं MLA सुनील प्रभु ने इस मामले में दखल देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है।

    प्रभु ने पत्र में लिखा कि—

    “मुंबई और महाराष्ट्र में किसी भी हाउसिंग स्कीम में पात्रता के लिए अधिकतर जगह 2012 से पहले का डॉक्यूमेंट पर्याप्त माना जाता है। ऐसे में शुक्ला कंपाउंड में 1962 की शर्त अन्यायपूर्ण है और इसे बदला जाना चाहिए।”

    उन्होंने यह भी ऐलान किया कि वे इस मुद्दे को आगामी नागपुर में होने वाले शीतकालीन विधान सभा अधिवेशन में ‘ध्यान आकर्षण’ के रूप में उठाएँगे।

    🔍 इस बदलाव से अन्य प्रोजेक्ट भी होंगे प्रभावित

    यदि सरकार दस्तावेज़ की पात्रता 1962 से बदलकर 2012 या वर्तमान नियम के अनुसार करती है, तो उसका सीधा लाभ—

    ✔ मुंबई
    ✔ ठाणे
    ✔ पालघर
    ✔ नवी मुंबई

    में हो रहे हज़ारों पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स को मिल सकता है।


    FAQ सेक्शन:

    प्रश्नउत्तर
    क्या नियम अभी बदले गए हैं?नहीं, नियम बदलने की मांग की गई है और मामला विधानसभा में उठेगा।
    क्या सभी रहवासियों को घर मिलेगा?फिलहाल स्थिति अनिश्चित है। नियम बदलने पर ही रास्ता स्पष्ट होगा।
    क्या यह मामला कानूनी रूप से कोर्ट में जा सकता है?हाँ, यदि समाधान न मिला तो रहवासी कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
  • मुंबई के कॉलेज में बुर्का बैन पर हंगामा

    मुंबई के कॉलेज में बुर्का बैन पर हंगामा

    गोरगांव के विवेक विद्यालय जूनियर कॉलेज में कक्षा के अंदर बुर्का पहनने पर पाबंदी लगाने के फैसले के बाद छात्रों ने कड़ा विरोध जताया। AIMIM की मदद के बाद मामला पुलिस स्टेशन पहुंचा।

    मुंबई: गोरगांव स्थित विवेक विद्यालय जूनियर कॉलेज में कक्षाओं के अंदर बुर्का पहनने पर नया नियम लागू होने के बाद विवाद बढ़ गया है। पहले जहां इस कॉलेज में बुर्का पहनकर कक्षाओं में प्रवेश की अनुमति थी, वहीं अब अचानक इस ड्रेस कोड में बदलाव किया गया है। इस निर्णय के खिलाफ कई छात्राओं ने आपत्ति जताई है और विरोध के लिए आवाज भी उठाई है।

    विरोध क्यों शुरू हुआ?

    कॉलेज प्रशासन द्वारा जारी नए नियमों के अनुसार अब छात्राएं क्लास रुम के अंदर बुर्का नहीं पहन सकेंगी। प्रशासन का कहना है कि किसी भी धार्मिक पहचान को दर्शाने वाली पोशाक कॉलेज के माहौल और ड्रेस कोड के खिलाफ है। हालांकि, हिजाब और सिर पर दुपट्टा पहनने की अनुमति अब भी जारी है।

    कुछ छात्राओं ने बताया कि उन्हें कॉलेज आने पर पहले बुर्का उतारना पड़ता है और क्लास खत्म होने के बाद फिर से पहनना पड़ता है। इससे वे खुद को असहज और असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

    वीडियो वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ा

    स्थानीय न्यूज़ पोर्टल द्वारा पोस्ट किया गया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें बुर्का पहनकर कॉलेज पहुंची छात्राओं को गेट पर रोका जाता हुआ देखा जा सकता है। वीडियो में छात्राओं और कॉलेज प्रशासन के बीच बहस होती भी दिखाई देती है।

    कुछ छात्राओं का दावा है कि जब उन्होंने इस नियम पर सवाल उठाया, तो कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि अगर नियम पसंद नहीं है, तो प्रवेश रद्द करा दें।

    मामला अब पुलिस स्टेशन पहुंचा

    1 दिसंबर को AIMIM की एडवोकेट जाहानारा शेख के साथ कई छात्राएं गोरगांव वेस्ट के टीन डोंगरी पुलिस स्टेशन पहुंचीं और शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद कॉलेज की प्रिंसिपल को बातचीत के लिए थाने बुलाया गया।

    एडवोकेट जाहानारा शेख के मुताबिक:

    “हमने नियम वापस लेने की मांग रखी है, लेकिन प्रिंसिपल ने कहा कि वह प्रबंधन से बात करने के बाद ही फैसला लेंगी।”

    इस मामले पर कॉलेज प्रबंधन की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

    सिर्फ जूनियर कॉलेज सेक्शन को नियम लागू

    ध्यान देने योग्य बात यह है कि बुर्का बैन का यह नियम सिर्फ जूनियर कॉलेज पर लागू किया गया है, जबकि सीनियर कॉलेज की छात्राओं पर इसका कोई असर नहीं होगा।
    इससे छात्रों और अभिभावकों के बीच और अधिक सवाल खड़े हो रहे हैं।

    इस फैसले पर सामाजिक बहस

    मुंबई में सामान्य तौर पर कॉलेज ड्रेस कोड जींस, शॉर्ट्स या ट्रेंडी फैंशन तक सीमित होते हैं, लेकिन धार्मिक पहचान पर प्रतिबंध का यह मामला अब ड्रेस कोड बनाम धार्मिक स्वतंत्रता की बड़ी बहस में बदल चुका है।


    FAQ

    1- क्या कॉलेज में पूरी तरह बुर्का पहनना बंद है?
    नहीं, कॉलेज कैंपस में आने पर बुर्का पहनने पर प्रतिबंध नहीं है। पाबंदी सिर्फ कक्षाओं के अंदर है।

    2- हिजाब पहनने की अनुमति है?
    हाँ, कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हिजाब और साधारण हेडस्कार्फ की अनुमति दी जाएगी।

    3- क्या मामला कानूनी स्तर पर गया है?
    फिलहाल मामला पुलिस स्टेशन पहुंचा है, पर कोई कानूनी कार्रवाई दर्ज नहीं हुई है।

    4- क्या नियम पूरे कॉलेज में लागू है?
    नहीं, अभी नियम सिर्फ जूनियर कॉलेज पर लागू किया गया है।

  • बोरीवली में 2,000 दुकानें बंद, बैरिकेडिंग पर बड़ा विरोध

    बोरीवली में 2,000 दुकानें बंद, बैरिकेडिंग पर बड़ा विरोध

    मुंबई के बोरीवली पश्चिम स्टेशन के बाहर पैदल मार्ग पर लगाए गए बैरिकेड्स के खिलाफ 2,000 दुकानों ने तीन घंटे का शटर डाउन प्रोटेस्ट किया। व्यापारी कहते हैं कि कारोबार ठप हो रहा है, जबकि ट्रैफिक पुलिस का दावा है कि भीड़ 60-70% कम हुई है।

    मुंबई: बोरीवली पश्चिम स्टेशन के बाहर लगाए गए नए बैरिकेड्स को लेकर माहौल गर्म हो गया है। करीब 2,000 दुकानों ने बुधवार सुबह तीन घंटे तक शटर डाउन रखकर बीएमसी और ट्रैफिक पुलिस के खिलाफ विरोध जताया।
    व्यापारियों का आरोप है कि 12 पैदल क्रॉसिंग बंद होने से ग्राहकों तक पहुंच बेहद मुश्किल हो गई है, जबकि पुलिस और बीएमसी का कहना है कि इस फैसले से सड़क पर 60–70% ट्रैफिक कम हुआ है और पब्लिक को सिर्फ कुछ समय एडजस्ट करना होगा।

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    🔹 बैरिकेड्स क्यों लगाए गए?

    पिछले कुछ महीनों से बोरीवली स्टेशन के आसपास ट्रैफिक जाम की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं।
    ट्रैफिक पुलिस और बीएमसी ने:

    • जाम्बली गली से लेकर चंदावरकर रोड तक 12 पैदल क्रॉसिंग बंद की
    • स्टेशन के सामने रेलिंग लगाई
    • कई जगह पुलिसकर्मी तैनात किए

    DCP संदीप जाधव के मुताबिक:

    “लोगों को बदलाव की आदत होने में दो-तीन महीने लगेंगे, लेकिन ट्रैफिक में अब 60–70% सुधार हुआ है।”

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    🔹 दुकानदार क्यों नाराज़ हैं?

    इंद्रप्रस्थ और ठक्कर शॉपिंग सेंटर के व्यापारियों का कहना है कि स्टेशन से प्लेटफॉर्म नंबर 2 और 3 की एंट्री इन्हीं शॉपिंग कॉम्प्लेक्स से होती है।

    अब ग्राहकों को:

    • 300 मीटर दूर यू-टर्न लेना पड़ता है
    • पार्किंग ढूंढने में ज्यादा समय लग रहा है
    • सीनियर सिटिज़न और महिलाएं परेशान हैं

    Borivali Businessmen Association (BBA) के चेयरमैन ललित जैन ने कहा:

    “40 साल में पहली बार हमें दुकानें बंद करनी पड़ीं। बैरिकेड्स हटने चाहिए, वरना कारोबार डूब जाएगा।”

    🔹 दुकानदारों की मांग

    मांगस्थिति
    सभी क्रॉसिंग फिर से खुलें⛔ प्रशासन ने मना किया
    क्रॉसिंग कम से कम 2 फीट चौड़ी होविचाराधीन
    LT रोड- SV रोड पर दो-तरफा ट्रैफिकनिर्णय बाकी
    अवैध ठेलों पर कार्रवाईजारी
    स्टेशन परिसर हॉकर्स-फ्री ज़ोनआंशिक रूप से लागू
    ऑटो रिक्षा लाइन में अनुशासनपुलिस तैनाती जारी

    🔹 स्थानीय लोगों की राय

    📍 राय इस मामले में दो हिस्सों में बंटी हुई है।

    🚦 ट्रैफिक कम होने से खुश लोग

    • कहते हैं पहले 15–20 मिनट जाम में फंसते थे, अब 5 मिनट में रास्ता साफ।

    🚶‍♂️ पैदल यात्रियों और ग्राहकों की दिक्कत

    • कहते हैं स्टेशन जाना मुश्किल हो गया है, शॉपिंग सेंटर में एंट्री भूल जाएं।

    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. दुकानदारों ने दुकानें क्यों बंद कीं?

    क्योंकि स्टेशन के बाहर पैदल क्रॉसिंग बंद होने से ग्राहक उनकी दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।


    Q2. क्या बैरिकेड्स हटाए जाएंगे?

    फिलहाल पुलिस ने साफ किया है कि बैरिकेड्स नहीं हटेंगे, क्योंकि ट्रैफिक में सुधार दिख रहा है।


    Q3. क्या आगे बातचीत होगी?

    व्यापारी संगठन प्रशासन से फिर बैठक की मांग कर रहे हैं।


    Q4. क्या ट्रैफिक सच में कम हुआ?

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार ट्रैफिक 60–70% तक कम हुआ है, लेकिन इसका नुकसान दुकानों को हो रहा है।

  • मुंबई कांग्रेस ने BMC चुनाव के लिए संसदीय जांच समिति बनाई

    मुंबई कांग्रेस ने BMC चुनाव के लिए संसदीय जांच समिति बनाई

    मुंबई कांग्रेस ने BMC चुनाव के लिए जिलानुसार संसदीय जांच समिति गठित की है, जो उम्मीदवारों की छानबीन, मार्गदर्शन और पैनल तैयार करने का काम करेगी।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव की तैयारियों को गति देते हुए मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस कमेटी ने संसदीय जांच समिति का गठन कर दिया है। इस समिति का उद्देश्य सभी जिलों में संभावित उम्मीदवारों के आवेदन की पड़ताल करना, उनका मार्गदर्शन करना और अंतिम पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजना है। यह समिति मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद वर्षा एकनाथ गायकवाड़ के आदेश से गठित की गई है। जानकारी कांग्रेस प्रवक्ता व मीडिया समन्वयक सुरेशचंद्र राजहंस ने दी।

    समिति का मुख्य कार्य

    नई गठित समिति जिलानुसार बैठकों के माध्यम से निम्न कार्य करेगी—

    • उम्मीदवारों के आवेदन की विस्तृत छानबीन
    • जिला अध्यक्षों व जात वैधता समितियों के साथ समन्वय
    • योग्य उम्मीदवारों की सूची और पैनल तैयार करना
    • आवेदन भरने में उम्मीदवारों को मार्गदर्शन
    • उम्मीदवारों की मुलाकात कर अंतिम पैनल वरिष्ठ नेतृत्व को सौंपना

    जिलावार प्रभारी और सहप्रभारी शामिल

    मुंबई कांग्रेस ने विभिन्न जिलों के अनुसार प्रभारी और सहप्रभारी नियुक्त किए हैं। सूची इस प्रकार है—

    दक्षिण मुंबई जिला

    • प्रभारी: विधायक ज्योति गायकवाड़
    • सहप्रभारी: मोहसिन हैदर, आसिफ जकेरिया

    दक्षिण मध्य मुंबई जिला

    • प्रभारी: सचिन सावंत
    • सहप्रभारी: सुरेशचंद्र राजहंस, डॉ. किशोर सिंह

    उत्तर मध्य मुंबई जिला

    • प्रभारी: MLA अस्लम शेख
    • सहप्रभारी: विरेंद्र चौधरी, डॉ. अंजता यादव

    ईशान्य मुंबई जिला

    • प्रभारी: डॉ. अर्जित सिंह मनहास
    • सहप्रभारी: धनंजय तिवारी, एड. राजेश टेके

    उत्तर पश्चिम मुंबई जिला

    • प्रभारी: विधायक अमीन पटेल
    • सहप्रभारी: हाजी बब्बू खान, विष्णु सरोदे

    उत्तर मुंबई जिला

    • प्रभारी: मधु चव्हाण
    • सहप्रभारी: अर्शद आज़मी, क्लाइव डॉयस

    BMC चुनाव के संदर्भ में इसका महत्व

    BMC चुनाव में टिकट चयन हमेशा से कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण मुद्दा रहा है। इस बार पार्टी संगठन उम्मीदवार चयन प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने की कोशिश कर रहा है। इसी उद्देश्य से संसदीय जांच समिति गठित की गई है, ताकि सभी जिलों में योग्य, मजबूत और सक्रिय कार्यकर्ताओं को बेहतर प्रतिनिधित्व मिले।


    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    1. संसदीय पडताळणी समिति क्यों बनाई गई है?

    उम्मीदवारों की छानबीन, मार्गदर्शन और अंतिम पैनल तैयार करने के लिए यह समिति गठित की गई है।

    2. समिति में कौन-कौन शामिल हैं?

    मुंबई के विभिन्न जिलों के प्रभारी और सहप्रभारी इसमें शामिल हैं, जैसे MLA अस्लम शेख, अमीन पटेल, ज्योति गायकवाड़ सहित कई वरिष्ठ नेता।

    3. यह समिति क्या काम करेगी?

    उम्मीदवारों के आवेदन की जांच, उनकी मुलाखत, पैनल तैयार करना और वरिष्ठ नेतृत्व को अनुशंसा भेजना।

    4. समिति का गठन किसने किया?

    मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा एकनाथ गायकवाड़ के आदेश पर समिति बनाई गई है।

    5. क्या यह समिति उम्मीदवारों को आवेदन भरने में मदद करेगी?

    हाँ, जिल्हा समिति के साथ मिलकर यह समिति उम्मीदवारों को पूरा मार्गदर्शन देगी।

  • BMC ELECTION में कांग्रेस अकेले उतरने पर कायम; महाविकास अघाडी की एकता पर संकट

    BMC ELECTION में कांग्रेस अकेले उतरने पर कायम; महाविकास अघाडी की एकता पर संकट

    BMC ELECTION में कांग्रेस की अकेले लड़ने की घोषणा से महाविकास आघाड़ी (MVA) में असहजता बढ़ गई है। शिवसेना (UBT) की मनसे से नज़दीकी को लेकर कांग्रेस की असहमति सामने आई, जबकि एनसीपी (SP) गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ने के पक्ष में है।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव को लेकर कांग्रेस के अकेले लड़ने के फैसले ने महाविकास आघाड़ी की एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस का कहना है कि शिवसेना (UBT) की मनसे के साथ बढ़ती राजनीतिक नज़दीकियां उनके उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोट बैंक को नुकसान पहुंचा सकती हैं। हालांकि शिवसेना (UBT) कांग्रेस से पुनर्विचार की अपील कर रही है, जबकि एनसीपी (शरद पवार) मनसे को साथ लेकर संयुक्त मुकाबले की पक्षधर है। इस राजनीतिक खींचतान ने आगामी मनपा चुनावों की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है।

    कांग्रेस के फैसले से MVA में हलचल

    मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने साफ कहा है कि कांग्रेस बीएमसी चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेगी। इससे MVA में असहजता बढ़ी है, क्योंकि गठबंधन का मकसद भाजपा को रोकना था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के अकेले लड़ने से वोटों का बंटवारा होगा, जिससे भाजपा को सीधी बढ़त मिल सकती है।

    मनसे को लेकर कांग्रेस की बड़ी चिंता

    कांग्रेस की असहमति की सबसे बड़ी वजह है—
    🔹 शिवसेना (UBT) और मनसे की बढ़ती समीपता
    🔹 उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोट बैंक का संभावित नुकसान

    कांग्रेस का मानना है कि मनसे के साथ जुड़ाव उसकी विचारधारा के विपरीत है, क्योंकि मनसे पहले उत्तर भारतीयों के खिलाफ आक्रामक रुख के लिए जानी जाती रही है।

    कांग्रेस में भी दो धड़े, राय में मतभेद

    कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति भी खुलकर सामने आई है।
    एक धड़ा — स्थानीय समीकरण के आधार पर मनसे के साथ गठबंधन का समर्थक
    दूसरा धड़ा — मनसे के साथ किसी भी सूरत में गठबंधन के खिलाफ

    मुंबई के राजनैतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस को जल्द स्पष्ट रुख लेना होगा, वरना गैर-मराठी और गैर-हिंदू वोटों का विभाजन भाजपा के लिए रास्ता आसान बना देगा।

    एनसीपी (SP) एकता के पक्ष में

    एनसीपी (शरद पवार) गठबंधन की मजबूती के लिए MNS को साथ लेकर संयुक्त मुकाबले की वकालत कर रही है। इसी संदर्भ में वर्षा गायकवाड़ की टीम ने शरद पवार से मुलाकात भी की है, लेकिन कांग्रेस अपने निर्णय पर कायम है।

    शिवसेना (UBT) ने किया पुनर्विचार का आग्रह

    उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना कांग्रेस को साथ रखने की कोशिश जारी रखे हुए है। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा—
    🔹 “मनसे के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस की नाराज़गी व्यक्तिगत मामला हो सकता है।”
    🔹 “जनता चाहती है कि शिवसेना और मनसे साथ आएं।”

    दूसरी ओर, मनसे ने MVA में शामिल होने से इनकार करते हुए कांग्रेस को “अमीबा” कहा, जिस पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए “गिरगिट” जैसी टिप्पणी की।

    बीएमसी चुनाव — बड़ा राजनीतिक समीकरण

    • राज्य की 246 नगर परिषद और 42 नगर पंचायतों के चुनाव 2 दिसंबर को
    • बीएमसी के चुनाव जनवरी 2026 में होने की संभावना
    • वर्तमान हालात में भाजपा सबसे मजबूत स्थिति में दिख रही है
    • कांग्रेस के अकेले उतरने से विपक्ष का वोट बैंक टूट सकता है

    FAQ

    प्रश्नउत्तर
    क्या कांग्रेस MVA से अलग हो रही है?नहीं, गठबंधन बरकरार है, लेकिन बीएमसी चुनाव कांग्रेस स्वतंत्र रूप से लड़ना चाहती है।
    कांग्रेस मनसे के साथ क्यों नहीं है?कांग्रेस का कहना है कि मनसे के पुराने रुख से उसके परंपरागत वोटरों को नुकसान हो सकता है।
    क्या विपक्षी वोट बंटेंगे?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फैसले से भाजपा को सीधा लाभ मिल सकता है।
    क्या अंतिम निर्णय बदल सकता है?शिवसेना (UBT) लगातार आग्रह कर रही है, लेकिन इस समय कांग्रेस अपने फैसले पर अडिग है।
  • मालवनी में अनधिकृत टर्फ पर रोक — नागरिकों के आंदोलन को बड़ी जीत

    मालवनी में अनधिकृत टर्फ पर रोक — नागरिकों के आंदोलन को बड़ी जीत

    मालाड–मालवनी के सार्वजनिक मैदान पर बनाए जा रहे अवैध टर्फ पर प्रशासन ने तत्काल रोक लगा दी है। यह फैसला स्थानीय नागरिकों, संस्थाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लंबे संघर्ष और आंदोलन के बाद आया।

    मुंबई: मालाड़ पश्चिम के मालवनी गेट नंबर 8 स्थित में बस डेपो के पास, म्हाडा के सार्वजनिक खेल मैदान पर बन रहे अनधिकृत टर्फ को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के संयुक्त आंदोलन को बड़ी सफलता मिली है। लगातार विरोध, शिकायतों और प्रशासनिक स्तर पर किए गए दबाव के बाद टर्फ निर्माण के कार्य को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। नागरिकों ने घोषणा की है कि मैदान पूरी तरह बच्चों, खिलाड़ियों और जनता के लिए खुला होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

    🔹 प्रदर्शन के बाद रोक — आंदोलन बना निर्णायक

    मालाड–मालवनी के खुले सार्वजनिक मैदान पर कुछ लोगों द्वारा चुपचाप टर्फ निर्माण शुरू किया गया था, जिसकी जानकारी मिलते ही नागरिकों ने विरोध दर्ज कराया। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, म्हाडा, बीएमसी और सभी संबंधित विभागों को लिखित शिकायत देना शुरू किया और नियमित फ़ॉलोअप लिया।
    इसी फ़ॉलोअप के बाद सरकार ने विवादित टर्फ निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने का आदेश जारी किया।

    🔹 धमकियों के बावजूद संघर्ष जारी रखा

    सामाजिक कार्यकर्ताओं को आंदोलन रोकने के लिए कथित तौर पर झूठे फौजदारी मामलों में फंसाने की धमकियाँ भी दी गईं, लेकिन आंदोलनकारियों ने पीछे हटने से इंकार कर दिया। उनके साहस और नेतृत्व से स्थानीय युवाओं का मनोबल बढ़ा और आंदोलन व्यापक हो गया।

    🔹 राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन

    आंदोलन की ताकत लोगों के एकजुट होने से और बढ़ी।
    मुख्य रूप से— सामाजिक कार्यकर्ताओं ने म्हाडा कार्यालय और पुलिस स्टेशन में जाकर मजबूती से आपत्ति दर्ज की। संगठनों और नागरिकों के दबाव के बाद प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करने पर मजबूर होना पड़ा।

    🔹 म्हाडा का सख्त संदेश — ‘एक ईंट भी रखी तो कार्रवाई’

    प्रशासन ने चेतावनी दी है कि भविष्य में मैदान पर एक ईंट भी रखी गई तो एमआरटीपी कानून लागू करके तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
    लेकिन इसी बीच नागरिकों ने स्पष्ट कहा है कि—
    📌 मैदान पूरी तरह बच्चों और खिलाड़ियों के लिए वापस खुलने तक संघर्ष जारी रहेगा।


    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1: मालवनी में टर्फ किस वजह से विवाद में था?
    टर्फ सार्वजनिक खेल मैदान पर बिना अनुमति और बिना नोटिस के बनाया जा रहा था, इसलिए स्थानीय लोगों ने उसे अवैध बताया।

    Q2: टर्फ निर्माण पर रोक क्यों लगाई गई?
    नागरिकों व सामाजिक संगठनों के विरोध, शिकायतों और आंदोलन के बाद प्रशासन ने कार्य रोकने का आदेश दिया।

    Q3: क्या यह मामला अब पूरी तरह खत्म हो गया है?
    प्रशासन ने रोक तो लगाई है, लेकिन नागरिकों का कहना है कि मैदान पूरी तरह बच्चों और खिलाड़ियों के लिए खुलने तक आंदोलन जारी रहेगा।

    Q4: टर्फ शुरू करने वालों पर कोई कानूनी कार्रवाई होगी?
    प्रशासन के अनुसार, यदि अब मैदान पर कोई निर्माण कार्य शुरू हुआ तो एमआरटीपी कानून के तहत तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

  • शिवधाम संकुल में नागरिक समस्याओं का दौरा, MLA सुनील प्रभु ने दिए निर्देश

    शिवधाम संकुल में नागरिक समस्याओं का दौरा, MLA सुनील प्रभु ने दिए निर्देश

    मालाड पूर्व — शिवधाम संकुल में सड़क, स्ट्रीट लाइट, सीर्वेज लाइन और भटकते कुत्तों जैसी नागरिक समस्याओं को लेकर MLA सुनील प्रभु ने स्थल निरीक्षण किया। मरम्मत और सुधार कार्यों के लिए नगरपालिका अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।

    मुंबई: मालाड (पूर्व) के प्रभाग क्रमांक 44 स्थित शिवधाम संकुल में नागरिकों की बढ़ती समस्याओं को लेकर स्थानीय विधायक सुनील प्रभु ने मंगलवार दोपहर मौके का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मलनिस्सारण लाइन, सड़कों के कंक्रीटीकरण, स्ट्रीट लाइट, भटकते कुत्तों और फायर ब्रिगेड के पीछे बने कबूतरखाने सहित कई मुद्दों पर नागरिकों से चर्चा की और तुरंत समाधान के निर्देश दिए।

    🔹 सड़क और सीवरेज की खराब स्थिति पर MLA का फोकस

    निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि शिवधाम संकुल के कई अंदरूनी रास्ते टूटे हुए हैं और बरसात के बाद से स्थिति और बिगड़ गई है।
    सीवरेज लाइन की सफाई और मरम्मत पर भी नागरिकों ने शिकायत की।

    👉 इस पर MLA सुनील प्रभु ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि

    • सड़क का कंक्रीटीकरण जल्द पूरा करें
    • सीवरेज लाइन की तुरंत सफाई और मरम्मत शुरू करें
    MLA-Sunil-Prabhu-gave-instructions-to-visit-Shivdham-Complex-to-address-civic-issues-1

    🔹 स्ट्रीट लाइट बंद — दो बड़े हॉलोजन लगाने का आदेश

    स्ट्रीट लाइट बंद होने से रात में अंधेरा और सुरक्षा संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं।
    जब तक सड़क का काम पूरा नहीं होता तब तक MLA ने निर्देश दिया कि
    ✔ दो बड़े हॉलोजन लाइट तुरंत लगाई जाएं।

    🔹 बैरिकेड्स हटाने के निर्देश — नागरिकों को आराम

    ओबेरॉय मॉल के सामने लगे बैरिकेड्स के कारण लोगों को जान जोखिम में डालकर सड़क पार करनी पड़ रही थी।
    नागरिकों ने यह मुद्दा उठाया तो MLA ने संबंधित अधिकारियों को आज के आज बैरिकेड्स हटाने का आदेश दिया।

    🔹 म्हाडा पार्क की बदहाल स्थिति पर चर्चा

    संकुल में म्हाडा के अंतर्गत बने उद्यान की देखभाल न होने पर नागरिकों ने नाराज़गी जताई।
    सुनील प्रभु ने आश्वासन दिया कि
    👉 म्हाडा प्रशासन से बात कर उद्यान का नवीनीकरण जल्द करवाया जाएगा।

    🔹 निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे

    इस निरीक्षण के दौरान शिवसेना के कई स्थानीय पदाधिकारी और संकुल की विभिन्न हाउसिंग सोसायटियों के प्रतिनिधि मौजूद थे —
    शाखा प्रमुख सुभाष धनुका, उपशाखाप्रमुख शैलेश जाधव, अशोक दैने, युवासेना उपशाखाधिकारी आर्यन जाधव, मंगेश चव्हाण, शिवधाम सेवा मंडल के अध्यक्ष रविंद बोभाटे, सचिव जितेंद्र पराडकर ऐसे ही विभिन्न गृहनिर्माण सोसायटी के पदाधिकारी संतोष नाझरे, रामचंद्र म्हापणकर, अरुण वाघ, कुंदन गोस्वामी, सुरेश गोसवी, अनंत ठाकरे, सुनील मोरे, प्रथमेश वेंगुर्लेकर समेत बड़ी संख्या में नागरिक भी शामिल थे।


    FAQ — शिवधाम संकुल नागरिक समस्या दौरे पर

    प्रश्नउत्तर
    दौरा किसने किया?स्थानीय MLA सुनील प्रभु ने।
    मुख्य समस्याएं क्या थीं?टूटी सड़कें, बंद स्ट्रीट लाइट, सीवेज लाइन, भटके कुत्ते, बैरिकेड्स और पार्क की स्थिति।
    क्या अधिकारियों को निर्देश दिए गए?हां, तुरंत मरम्मत और कार्रवाई शुरू करने को कहा गया।
    बैरिकेड हटाने की मांग पर क्या आदेश दिया गया?आज ही हटाने और नागरिकों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने के निर्देश।
    म्हाडा पार्क को लेकर क्या निर्णय लिया गया?नवीनीकरण के लिए म्हाडा के साथ फॉलो-अप करने का आश्वासन।