Category: BMC Updates

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  • मढ सीआरज़ेड घोटाला – 24 हजार फाइलें गायब, भ्रष्टाचार की परतें उजागर

    मढ सीआरज़ेड घोटाला – 24 हजार फाइलें गायब, भ्रष्टाचार की परतें उजागर

    मालाड मढ सीआरज़ेड घोटाले की पूरी जांच रिपोर्ट – कैसे 24 हजार फाइलें गायब हुईं, SIT जांच पर उठे सवाल, और हाईकोर्ट ने अधिकारियों पर क्यों जताई नाराज़गी। जानिए घोटाले की पूरी टाइमलाइन और भ्रष्टाचार का खेल।

    मुंबई: मालाड (Malad) के मढ (Madh) इलाके में समुद्र किनारे बने बंगले और अवैध बांधकाम (Illegal Constructions in CRZ Area) लंबे समय से विवादों में रहे हैं।

    • 2010–2015: कई बिल्डरों और दलालों ने CRZ (Coastal Regulation Zone) नियमों को तोड़कर बंगले और होटल बनाए।
    • 2016–2019: RTI कार्यकर्ताओं ने शिकायतें करना शुरू किया। पहली बार सामने आया कि महापालिका (BMC) और सरकारी अधिकारियों ने बनावट नक्शे (Fake Maps) पास किए।
    • 2019: RTI में खुलासा हुआ कि इन बांधकामों को वैध दिखाने के लिए बनावट प्रमाणपत्र दिए गए।

    🔹 SIT जांच और बनावट नक्शों का खुलासा

    हाईकोर्ट के आदेश पर एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई।

    • SIT ने पाया कि दलाल और कुछ अधिकारी मिलकर पैसों के बदले बनावट नक्शे पास कर रहे थे।
    • अप्रैल 2025 में पुलिस ने एक गवाह का बयान दर्ज किया, जिसने माना कि उसने अधिकारियों और दलालों को नक्शा पास कराने के लिए रिश्वत दी।
    • इस गवाह ने कैसे, कब और किसे पैसे दिए, इसके सबूत भी पेश किए।

    🔹 24 हजार फाइलें कैसे गायब हुईं?

    RTI एक्टिविस्ट वैभव ठाकुर ने हाल ही में जानकारी मांगी तो बड़ा खुलासा हुआ –
    👉 जिलाधिकारी कार्यालय से 24 हजार से ज्यादा कागजात गायब हो चुके हैं।
    ये वही कागज थे जिनमें अवैध बांधकामों से जुड़े नक्शे, अनुमति और प्रमाणपत्र दर्ज थे।

    याचिकाकर्ता का आरोप है कि –

    • कुछ अधिकारियों को बचाने के लिए फाइलें गायब की गईं।
    • SIT की जांच में भी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, सिर्फ दलालों पर दबाव बनाया गया।

    🔹 हाईकोर्ट की कड़ी फटकार

    शुक्रवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा –

    • “इतनी बड़ी संख्या में फाइलें गायब कैसे हो गईं?”
    • “अगर एक हफ्ते में फाइलें नहीं मिलतीं तो अलग से FIR दर्ज करें।”
    • कोर्ट ने पूछा – “दलालों पर कार्रवाई हुई, तो अधिकारियों पर क्यों नहीं?”

    साथ ही कोर्ट ने कहा कि हर बार याचिकाकर्ताओं को ही कोर्ट का दरवाज़ा क्यों खटखटाना पड़ता है, यह जिम्मेदारी सरकार और अधिकारियों की भी है।

    🔹 70 बांधकाम तोड़े गए, लेकिन…

    BMC ने कोर्ट को बताया कि अब तक 70 अवैध बांधकाम तोड़े जा चुके हैं।
    लेकिन याचिकाकर्ताओं का दावा है कि –

    • कई बड़े निर्माण अब भी खड़े हैं।
    • छोटे-मोटे बांधकाम गिराकर सिर्फ दिखावा किया जा रहा है।

    🔹 राजनीति और प्रशासन की मिलीभगत?

    इस पूरे मामले में राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप भी लगे हैं।

    • दलालों के ज़रिए नेताओं तक पैसा पहुँचने की बात कही जा रही है।
    • SIT जांच पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या बड़े नामों को बचाने के लिए जांच को कमजोर किया गया।

    📌 घोटाले की टाइमलाइन (संक्षेप में)

    • 2010–2015: मढ इलाके में अवैध बांधकाम शुरू।
    • 2016–2019: RTI में खुलासे – नकली प्रमाणपत्र और नक्शे।
    • 2019: हाईकोर्ट में याचिका दाखिल।
    • 2020–2023: SIT जांच शुरू, लेकिन धीमी प्रगति।
    • अप्रैल 2025: गवाह ने दलालों और अधिकारियों पर रिश्वतखोरी का खुलासा किया।
    • सितंबर 2025: RTI में पता चला कि 24 हजार फाइलें गायब।
    • सितंबर 2025: हाईकोर्ट ने ज़िलाधिकारी कार्यालय को फटकार लगाई।

    ❓FAQ सेक्शन

    Q1. मढ सीआरज़ेड घोटाले में कितनी फाइलें गायब हुई हैं?
    लगभग 24 हजार कागज़ात, जो अवैध बांधकामों से जुड़े थे।

    Q2. SIT जांच पर सवाल क्यों उठे?
    क्योंकि SIT ने सिर्फ दलालों पर कार्रवाई की, अधिकारियों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    Q3. हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?
    एक हफ्ते में फाइलें ढूंढो, वरना अलग FIR दर्ज करो।

    Q4. कितने अवैध बांधकाम अब तक तोड़े गए हैं?
    BMC का दावा है कि 70 बांधकाम गिराए जा चुके हैं।

  • मुंबई में फेरीवालों पर कार्रवाई के खिलाफ मंत्रालय में चर्चा और ज्ञापन, अधिकारियों ने दिया आश्वासन

    मुंबई में फेरीवालों पर कार्रवाई के खिलाफ मंत्रालय में चर्चा और ज्ञापन, अधिकारियों ने दिया आश्वासन

    मुंबई सहित महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में फेरीवालों पर हो रही पुलिस कार्रवाई और भारी जुर्माने के खिलाफ सामाजिक संगठनों ने मंत्रालय में अधिकारियों से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। अधिकारियों ने इस मुद्दे को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उठाने का भरोसा दिलाया।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य शहरों में फुटपाथ पर रोज़ी-रोटी कमाने वाले फेरीवालों पर बार-बार की जा रही कार्रवाई को लेकर सामाजिक संगठनों ने आवाज़ बुलंद की है। फेरीवालों का कहना है कि मुंबई पुलिस अधिनियम की धाराओं का दुरुपयोग कर उनसे हजारों रुपये का जुर्माना वसूला जा रहा है। इसी मुद्दे पर 18 सितंबर 2025 को मंत्रालय में कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अधिकारियों से मुलाकात की और एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

    🚶‍♂️ फेरीवालों का संघर्ष और परेशानी

    मुंबई महानगर और उपनगरों में हज़ारों लोग फेरी लगाकर अपना पेट पालते हैं। लेकिन पुलिस प्रशासन द्वारा रोज़ाना किए जाने वाले छापों और कार्रवाई के कारण इनकी ज़िंदगी मुश्किल हो गई है।

    • एक ही फेरीवाले पर ₹1200 तक का जुर्माना लगाया जाता है।
    • कई बार दिन में दो-दो बार भी जुर्माना वसूला जाता है।
    • कई पुलिस कर्मियों पर धारा 102, 115 और 117 का गलत इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं।

    🏢 मंत्रालय में हुआ प्रतिनिधिमंडल

    इस मुद्दे को गंभीरता से उठाने के लिए महाराष्ट्र हॉकर्स फेडरेशन, लाल बावटा जनरल वर्कर्स यूनियन, महाराष्ट्र राज्य राष्ट्रीय मजदूर संघ, शहीद भगत सिंह हॉकर्स यूनियन मुंबई, महाराष्ट्र एकता हॉकर्स यूनियन सहित कई संगठन एक साथ आए।
    बैठक में उपस्थित रहे प्रमुख लोग:

    • कर्नल प्रकाश रेड्डी
    • श्री मिलिंद ताम्बड़े
    • कर्नल सुरेश सावंत
    • शांताराम जाधव
    • कर्नल अखिलेश गौड़

    इन सभी ने मिलकर फेरीवालों पर हो रहे अन्याय की विस्तृत जानकारी दी और अधिकारियों को ठोस सबूत भी दिखाए।

    📑 ज्ञापन की मुख्य बातें

    संगठनों ने मंत्रालयीन अधिकारियों को जो ज्ञापन सौंपा, उसमें मुख्य रूप से यह मुद्दे उठाए गए:

    1. पुलिस द्वारा धारा 102, 115 और 117 का दुरुपयोग।
    2. अनुचित और भारी जुर्माना, जिससे फेरीवालों की रोज़ी-रोटी पर असर।
    3. पुलिसकर्मियों द्वारा एक ही दिन में बार-बार जुर्माना लगाने की घटनाएँ।
    4. गरीब और मेहनतकश तबके पर आर्थिक बोझ।
    5. स्थायी समाधान की ज़रूरत ताकि फेरीवाले सम्मान के साथ जीवन जी सकें।

    ⚖️ अधिकारियों की प्रतिक्रिया

    मंत्रालय के उप सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने शिष्टमंडल की बातों को गंभीरता से सुना।

    • उन्होंने आश्वासन दिया कि यह मुद्दा आगामी विधानसभा के शीतकालीन सत्र में रखा जाएगा।
    • अधिकारियों ने माना कि जुर्माना लगाने की प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ियाँ हो सकती हैं।
    • आगे की कार्रवाई के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया गया है।

    🗣️ संगठनों की मांग

    संगठनों ने साफ कहा कि:

    • फेरीवालों को रोज़ परेशान करने का सिलसिला बंद होना चाहिए।
    • मुंबई पुलिस अधिनियम में बदलाव कर फेरीवालों के लिए अलग गाइडलाइन बने।
    • पुलिस और स्थानीय निकायों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई पर निगरानी समिति बने।
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    📊 फेरीवालों की संख्या और अहमियत

    • सिर्फ मुंबई में अनुमानित 2.5 से 3 लाख फेरीवाले रोज़ाना काम करते हैं।
    • ये छोटे कारोबार शहर की अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं।
    • आम जनता को सस्ता सामान और रोज़मर्रा की ज़रूरतें उपलब्ध कराते हैं।

    फेरीवालों का कहना है कि अगर उनकी सुरक्षा और कामकाज सुनिश्चित हो तो वे भी टैक्स और रजिस्ट्रेशन के लिए तैयार हैं।

    🛑 लगातार कार्रवाई का असर

    • फेरीवालों के परिवारों पर आर्थिक संकट।
    • बच्चों की पढ़ाई पर असर।
    • छोटे-छोटे कर्ज़ चुकाना मुश्किल।
    • रोज़ कमाने-खाने वालों की रोज़ी-रोटी खतरे में।

    🚨 नतीजा और आगे की राह

    यह मुलाकात फेरीवालों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आई है।
    अगर विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा होती है और ठोस कदम उठाए जाते हैं तो हजारों परिवारों को राहत मिलेगी।

    ❓ FAQ – मुंबई में फेरीवालों पर कार्रवाई और मंत्रालय को सौंपा गया ज्ञापन

    Q1. फेरीवालों पर बार-बार कार्रवाई क्यों की जा रही है?
    👉 स्थानीय निकाय और पुलिस प्रशासन मुंबई पुलिस अधिनियम की धारा 102, 115 और 117 का हवाला देकर कार्रवाई करते हैं। इन धाराओं के तहत फुटपाथ अतिक्रमण और असुविधा को रोकने के लिए प्रावधान है, लेकिन सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इन धाराओं का दुरुपयोग हो रहा है।

    Q2. एक फेरीवाले पर कितना जुर्माना लगाया जाता है?
    👉 फेरीवालों पर नियमित रूप से ₹1200 तक का जुर्माना लगाया जाता है। कुछ मामलों में तो एक ही दिन में दो-दो बार चालान काटा जाता है।

    Q3. इस मुद्दे पर मंत्रालय में किन-किन संगठनों ने ज्ञापन सौंपा?
    👉 महाराष्ट्र हॉकर्स फेडरेशन, लाल बावटा जनरल वर्कर्स यूनियन, महाराष्ट्र राज्य राष्ट्रीय मजदूर संघ, शहीद भगत सिंह हॉकर्स यूनियन मुंबई, महाराष्ट्र एकता हॉकर्स यूनियन समेत कई संगठन शामिल रहे।

    Q4. सरकार की ओर से क्या आश्वासन मिला है?
    👉 मंत्रालयीन अधिकारियों और उप सचिव ने कहा है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाएगा और विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में इसे उठाने का प्रयास किया जाएगा।

    Q5. फेरीवालों की मुख्य मांगें क्या हैं?
    👉

    • अनुचित और बार-बार किए जा रहे जुर्माने को रोका जाए।
    • मुंबई पुलिस अधिनियम की धारा 102, 115 और 117 के दुरुपयोग पर रोक लगे।
    • स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 के तहत फेरीवालों को कानूनी सुरक्षा मिले।
    • नगर पालिका और पुलिस की ओर से पारदर्शी और न्यायपूर्ण व्यवस्था बनाई जाए।
  • महाराष्ट्र में 1.8 लाख डॉक्टरों की चेतावनी: एलोपैथी में होम्योपैथिक डॉक्टरों की एंट्री से मचा बवाल

    महाराष्ट्र में 1.8 लाख डॉक्टरों की चेतावनी: एलोपैथी में होम्योपैथिक डॉक्टरों की एंट्री से मचा बवाल

    IMA महाराष्ट्र ने 18 सितंबर को 24 घंटे की हड़ताल का ऐलान किया है। होम्योपैथिक डॉक्टरों को एलोपैथिक दवाएं लिखने की इजाज़त देने के सरकार के फैसले पर एलोपैथिक डॉक्टर भड़क उठे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में मेडिकल सेक्टर में बवाल मचा हुआ है। IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) से जुड़े लगभग 1.8 लाख एलोपैथिक डॉक्टरों ने 18 सितंबर को 24 घंटे की हड़ताल करने का ऐलान किया है। वजह? सरकार का वो फैसला जिससे होम्योपैथिक डॉक्टरों को एलोपैथी की प्रैक्टिस की इजाज़त दी जा रही है।

    क्या है CCMP कोर्स और इसका मतलब?

    Maharashtra-IMA-Strike-Why-are-allopathic-doctors-on-strike
    प्रदर्शन की तस्वीर

    राज्य सरकार ने महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) को निर्देश दिया है कि वो उन होम्योपैथिक डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन शुरू करे जिन्होंने CCMP यानी Certificate Course in Modern Pharmacology को पूरा किया है। ये एक 1 साल का कोर्स है, जिसके बाद होम्योपैथिक डॉक्टर कुछ चुने हुए केसों में एलोपैथिक दवाएं लिख सकेंगे।

    एलोपैथिक डॉक्टर क्यों हैं नाराज़?

    IMA महाराष्ट्र के अध्यक्ष डॉ. संतोष कदम के मुताबिक, ये फैसला न सिर्फ मेडिकल फील्ड की क्वालिटी को गिराएगा बल्कि मरीजों की सेहत के साथ भी खिलवाड़ है। उनका कहना है कि “हमने सीएम से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है और मांग की है कि सरकार 5 सितंबर को जारी GR (Government Resolution) को तुरंत वापस ले।”

    कौन-कौन हड़ताल में शामिल होगा?

    • सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टर
    • मेडिकल कॉलेजों के छात्र
    • BMC और राज्य सरकार से जुड़े डॉक्टर संगठन जैसे MARDA, BMC MARDA
    • Federation of All India Medical Association (FAIMA)

    हालांकि, इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी, ताकि मरीजों को ज़रूरी इलाज मिलता रहे।

    आगे क्या होगा? देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    FAIMA के अध्यक्ष डॉ. अक्षय डोंगरदिवे ने साफ किया है कि अगर सरकार ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो देशभर में आंदोलन शुरू होगा। “हम जनता को इसके जोखिम समझाएंगे और ज़रूरत पड़ी तो सड़कों पर भी उतरेंगे।”

  • Aksa Beach to be demolished: एनजीटी ने 2 महीने में तोड़ने का आदेश दिया

    Aksa Beach to be demolished: एनजीटी ने 2 महीने में तोड़ने का आदेश दिया

    मलाड वेस्ट के Aksa Beach पर महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (MMB) द्वारा बनाया गया 600 मीटर लंबा प्रोमेनेड एनजीटी ने अवैध ठहराया। CRZ नियमों के उल्लंघन पर इसे 2 महीने में गिराने का आदेश। जानिए पूरी रिपोर्ट।

    मुंबई: मलाड वेस्ट में मशहूर Aksa Beach पर महाराष्ट्र सागरी मंडल (MMB) ने 2023 में करीब ₹11.83 करोड़ खर्च करके 600 मीटर लंबा प्रोमेनेड और 4 मीटर चौड़ा रास्ता बना दिया था। लेकिन अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इसे पूरी तरह अवैध मानते हुए 2 महीने के अंदर तोड़ने का आदेश दे दिया है।

    📜 कैसे हुआ विवाद?

    • 2017 में MMB ने बीच पर सीफ्रंट डेवलपमेंट का प्रस्ताव रखा।
    • लेकिन Maharashtra Coastal Zone Management Authority (MCZMA) ने यह कहते हुए रिजेक्ट कर दिया कि यह एरिया Coastal Regulation Zone (CRZ) में आता है।
    • 2019 में MCZMA ने केवल एंटी-इरोशन बंड (Anti-Erosion Bund) बनाने की अनुमति दी, पर शर्त रखी कि बीच पर कॉन्क्रीट या पक्का स्ट्रक्चर नहीं बनेगा।
    • इसके बावजूद 2023 में UCR वॉल और कॉबल स्टोन पाथवे बना दिया गया।

    ⚠️ क्यों पड़ा मुद्दा गम्भीर?

    • यह प्रोमेनेड इंटर-टाइडल ज़ोन (High Tide और Low Tide के बीच का इलाका) में बना है, जो इकोलॉजिकल एरिया माना जाता है।
    • एक्टिविस्ट बांदा कुमार और ज़ोरु बाथेना ने NGT में शिकायत करते हुए कहा कि:
    • प्रोमेनेड बीच को सेडिमेंटेशन से रोक देगा।
    • बीच का नैचुरल सैंड डिपॉज़िशन बंद हो जाएगा।
    • लगातार बीच इरोशन (कटाव) बढ़ेगा।
    • सबूत यह भी है कि पिछले साल और इस साल प्रोमेनेड का बड़ा हिस्सा ज्वार से टूटकर बह गया।

    ⚖️ NGT का फैसला

    NGT ने माना कि MMB का इरादा लैंड को बाढ़ और कटाव से बचाने का था, लेकिन इसके लिए जो काम हुआ वह CRZ नियमों का सीधा उल्लंघन है।
    इसलिए, 2 महीने के भीतर प्रोमेनेड तोड़ने का आदेश दिया गया है।

  • मुंबई में आरक्षित जमीन पर फर्जी नक्शों का खेल, गरीबों के घर और दुकानें खतरे में

    मुंबई में आरक्षित जमीन पर फर्जी नक्शों का खेल, गरीबों के घर और दुकानें खतरे में

    मुंबई के मालाड, कांदिवली और बोरीवली में फर्जी नक्शों के जरिए आरक्षित जमीन पर गरीबों की बस्तियां और दुकानें अवैध बताई जा रही हैं। मंत्री आशीष शेलार ने जांच और कार्रवाई के आदेश दिए।

    🚨 आरक्षित जमीन पर फर्जी नक्शों का खुलासा

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के पी-नॉर्थ, आर-साउथ और आर-सेंट्रल विभागों में बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां बिल्डरों और मनपा अधिकारियों की मिलीभगत से आरक्षित जमीनों के फर्जी नक्शे बनाए गए और उन्हीं नक्शों के आधार पर गरीबों के घर, चॉल और दुकानें अवैध घोषित कर दिए गए।

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    🏘️ मालाड, कांदिवली और बोरीवली में 350 से ज्यादा परिसरों को नोटिस

    मंत्री आशीष शेलार ने बोरीवली स्थित आर-सेंट्रल कार्यालय में हुई बैठक में कहा कि मालाड, कांदिवली और बोरीवली इलाके के 350 से ज्यादा परिसरों को अवैध ठहराते हुए नोटिस जारी किए गए। इनमें नागरिकों के घर, इमारतें, गांवठण और चॉलें शामिल हैं।

    🛑 SIT जांच का गलत इस्तेमाल

    शेलार ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि SIT जांच सिर्फ विशेष मामलों के लिए है। लेकिन उसके नाम पर आम नागरिकों को उनके घर-दुकानों से बेदखल करना पूरी तरह गलत और गैरकानूनी है।

    📝 फर्जी स्कैनिंग और जिम्मेदार अधिकारी

    मंत्री ने कहा कि अगर नक्शों की स्कैनिंग के दौरान जानबूझकर फेरबदल किया गया है, तो सिर्फ ठेकेदार ही नहीं बल्कि उन्हें नियुक्त करने वाले अधिकारियों की भी जांच होगी। बताया जा रहा है कि 950 से ज्यादा गांवठणों को नोटिस भेजी गई है, जिससे लोग परेशान हैं।

    📊 सरकार पर पुनर्विचार का दबाव

    इस मामले में पहले एक समिति बनी थी और अब SIT जांच भी चल रही है। लेकिन कई पीड़ित नागरिकों का आरोप है कि उन्हें बिना वजह परेशान किया जा रहा है।
    मंत्री शेलार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस रिपोर्ट पर दोबारा विचार किया जाए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी यही मांग उठाई है।

    ⚠️ आंदोलन की चेतावनी

    पीड़ित नागरिकों ने कहा है कि अगर सरकार ने जल्द सख्त कार्रवाई नहीं की, तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

    📌 FAQ सेक्शन – मुंबई आरक्षित जमीन घोटाला

    1. मुंबई में आरक्षित जमीन पर फर्जी नक्शों का मामला क्या है?

    👉 मालाड, कांदिवली और बोरीवली में बीएमसी अधिकारियों और बिल्डरों की मिलीभगत से फर्जी नक्शे बनाकर गरीबों के घर, चॉल और दुकानों को अवैध ठहराने का आरोप है।

    2. किन इलाकों में फर्जी नक्शों के आधार पर नोटिस दिए गए?

    👉 पी-नॉर्थ, आर-साउथ और आर-सेंट्रल विभागों के तहत आने वाले मालाड, कांदिवली और बोरीवली में 350 से ज्यादा परिसरों को नोटिस जारी किया गया।

    3. इस घोटाले में कितनी बस्तियों और गांवठणों को नोटिस मिली?

    👉 लगभग 950 गांवठण और 350 से ज्यादा परिसरों को अवैध बताते हुए नोटिस जारी की गई हैं।

    4. आशीष शेलार ने इस मामले पर क्या कदम उठाए?

    👉 मंत्री आशीष शेलार ने बोरीवली आर-सेंट्रल कार्यालय में बैठक कर अधिकारियों को निर्देश दिया कि SIT रिपोर्ट का गलत इस्तेमाल न हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।

    5. क्या मुंबई के लोग आंदोलन करेंगे?

    👉 हाँ, पीड़ित नागरिकों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने कार्रवाई नहीं की, तो वे आंदोलन करेंगे।

  • Mumbai BMC: झोपड़पट्टी पुनर्विकास के लिए 26 प्रोजेक्ट्स पर फिर से मांगे प्रस्ताव

    Mumbai BMC: झोपड़पट्टी पुनर्विकास के लिए 26 प्रोजेक्ट्स पर फिर से मांगे प्रस्ताव

    बीएमसी ने मुंबई के एम/ईस्ट वार्ड में झोपड़पट्टी पुनर्विकास के लिए 26 प्रोजेक्ट्स पर दोबारा एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है। डेडलाइन 30 सितंबर तय।

    मुंबई: शहर के झोपड़पट्टियों में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने एम/ईस्ट वार्ड (मानखुर्द, देवनार और गोवंडी) इलाके में 26 स्लम रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए फिर से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है।

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    🔹 पिछली बार क्यों अटका था मामला?

    बीएमसी ने 10 मई को पहली बार 64 नगर पालिका प्लॉट्स पर पुनर्विकास का प्रस्ताव मांगा था। लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते 17 प्लॉट होल्ड पर रखे गए। बचे हुए 47 प्लॉट्स पर सिर्फ 29 प्रोजेक्ट्स को ही 100 ऑफर मिले।
    सबसे बड़ी समस्या ये रही कि 8 प्लॉट्स के लिए केवल 1-1 डेवलपर ने ही बोली लगाई थी।

    🔹 अब नया फोकस एम/ईस्ट वार्ड पर

    इस बार बीएमसी ने खास तौर पर मानखुर्द, देवनार और गोवंडी जैसे इलाकों पर फोकस किया है। ये इलाका कम आय वर्ग और भारी अतिक्रमण के लिए जाना जाता है।
    नई योजना के तहत करीब 8.37 लाख वर्गमीटर जमीन और लगभग 49,000 झोपड़ी संरचनाओं को रीडेवलपमेंट में शामिल किया जाएगा।

    🔹 डेडलाइन और प्रक्रिया

    • EOI डॉक्यूमेंट उपलब्ध होगा: 15 सितंबर से
    • अंतिम तारीख: 30 सितंबर
    • जिम्मेदारी ठेकेदारों की:
    • झोपड़ी सर्वे
    • प्लानिंग
    • परमिट्स
    • टेनेमेंट निर्माण
    • मेंटेनेंस

    सभी प्रोजेक्ट्स को DCPR-2034 की रेगुलेशन 33(10) के तहत लागू किया जाएगा।

    🔹 पश्चिमी उपनगर बनाम पूर्वी उपनगर

    पहले आए ऑफर्स ज्यादातर अंधेरी, बोरीवली और वर्ली जैसे पश्चिमी इलाकों के लिए थे। जबकि पूर्वी उपनगर जैसे मुलुंड और एम/ईस्ट वार्ड के लिए डेवलपर्स की दिलचस्पी बेहद कम रही। इसीलिए बीएमसी ने अब फिर से खास तौर पर इन इलाकों पर जोर दिया है।

  • Mumbai: रिक्शा चालक के घर को लगा दी आग

    Mumbai: रिक्शा चालक के घर को लगा दी आग

    मुंबई के विक्रोली में बैनर विरोध करने वाले रिक्शा चालक के घर अज्ञात लोगों ने आग लगाई। गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ। पुलिस जांच में जुटी।

    मुंबई: आर्थिक राजधानी मुंबई के विक्रोली इलाके से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। मंगलवार तड़के कुछ अज्ञात लोगों ने एक रिक्शा चालक के घर को आग लगा दी। वजह बनी इलाके में अनधिकृत रूप से लगाए गए बैनरों का विरोध। गनीमत रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ और परिवार ने समय रहते आग पर काबू पा लिया।

    घटना कहाँ और कब हुई?

    यह घटना मंगलवार सुबह करीब 4 बजे विक्रोली के पार्कसाइट इलाके के वर्षानगर में हुई। इलाके में स्थित एक चौराहे पर एक महापुरुष के सम्मान में लोहे का बोर्ड लगाया गया था। लेकिन हाल के दिनों में कुछ लोगों ने इस बोर्ड पर बिना अनुमति के त्योहारी बैनर लगाना शुरू कर दिया।

    रिक्शा चालक ने जताया विरोध

    स्थानीय रिक्शा चालक ने जब अवैध रूप से लगाए गए बैनरों को देखा, तो उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी और इन्हें हटाने की मांग की। इसी बीच, कुछ युवकों ने उसके साथ बहस शुरू कर दी। पुलिस के हस्तक्षेप से विवाद उस समय शांत हो गया।

    लेकिन विवाद खत्म होने के कुछ ही घंटों बाद रिक्शा चालक के घर पर हमला हो गया।

    आगजनी की घटना

    सुबह लगभग चार बजे अज्ञात लोगों ने रिक्शा चालक के घर में आग लगाने की कोशिश की। घर में मौजूद परिवार के सदस्यों ने किसी तरह आग बुझाई और बड़ी दुर्घटना होने से बच गई। इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल है।

    पुलिस में शिकायत दर्ज

    रिक्शा चालक ने तुरंत पार्कसाइट पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल आरोपियों की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीद गवाहों की मदद से पूरे मामले की जांच कर रही है।

    बैनर विवाद की पृष्ठभूमि

    कुछ साल पहले इस इलाके में एक चौराहे का नाम एक महापुरुष के नाम पर रखा गया था। सम्मान के तौर पर वहाँ लोहे का बोर्ड लगाया गया था। लेकिन धीरे-धीरे यह बोर्ड त्योहारों और आयोजनों के लिए बैनर लगाने का स्थान बन गया।

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अवैध बैनरों से जगह की सुंदरता बिगड़ती है और कई बार यह सड़क पर बाधा भी बनते हैं। इसी के खिलाफ रिक्शा चालक ने आवाज उठाई थी।

    नागरिकों की प्रतिक्रिया

    घटना के बाद इलाके के लोगों में गुस्सा और नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में अवैध बैनरबाजी एक गंभीर समस्या है। यदि कोई नागरिक इसके खिलाफ आवाज उठाता है, तो उसे धमकियों और हमलों का सामना करना पड़ता है।

    एक निवासी ने कहा – “यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं है। बैनरबाजी पूरे शहर की समस्या है। प्रशासन को कड़ा कदम उठाना चाहिए।”

    पुलिस की कार्रवाई

    पार्कसाइट पुलिस स्टेशन ने कहा है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। फिलहाल अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू हो चुकी है। पुलिस ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।

    मुंबई में अवैध बैनरबाजी की समस्या

    मुंबई में हर त्यौहार, राजनीतिक कार्यक्रम या सामाजिक आयोजन के दौरान अवैध बैनर और पोस्टर लगाए जाते हैं। नगर निगम और पुलिस समय-समय पर कार्रवाई करते हैं, लेकिन यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक कड़ी सजा का प्रावधान नहीं होगा, तब तक अवैध बैनरबाजी और इस तरह की घटनाएं रुकना मुश्किल है।

    विक्रोली में हुई यह घटना सिर्फ एक आगजनी का मामला नहीं है, बल्कि यह नागरिक अधिकारों और कानून व्यवस्था से जुड़ा सवाल भी है। सवाल यह है कि आखिर कोई व्यक्ति शहर में अवैध कामों के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे सुरक्षा कौन देगा?

    फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है और उम्मीद है कि जल्द ही आरोपियों को कानून के कटघरे में लाया जाएगा।

  • Mumbai: BMC ने बनाई एक्सप्रेस हाइवे सुधार नीति

    Mumbai: BMC ने बनाई एक्सप्रेस हाइवे सुधार नीति

    बीएमसी ने वेस्टर्न और ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे के लिए नई नीति का ड्राफ्ट तैयार किया है। इसमें ट्रैफिक जाम, मीडियन मेंटेनेंस और विज्ञापन पर नियम शामिल हैं।

    मुंबई: शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली वेस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे (WEH) और ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे (EEH) को लेकर बीएमसी (BMC) ने नई नीति का ड्राफ्ट तैयार किया है। करीब 25 किलोमीटर लंबे इन दोनों हाइवे पर रोज़ाना लाखों गाड़ियां दौड़ती हैं। इस वजह से ट्रैफिक जाम, सर्विस रोड का कनेक्शन और मीडियन की देखरेख जैसी समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।

    🚦 ट्रैफिक जाम से निपटना बड़ी चुनौती

    बीएमसी के ब्रिज विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, हाइवे और सर्विस रोड के बीच सही कनेक्टिविटी नहीं है। इसे ठीक करने के लिए पहले एक्सेस कंट्रोल सिस्टम का सुझाव दिया गया था। अब नई नीति में इसे शामिल किया गया है।

    • भीड़भाड़ कम करने के लिए अहम जगहों पर अंडरपास (Underpass) बनाने की योजना है।
    • इन अंडरपास से हाइवे और आर्टेरियल रोड पर बिना रुकावट ट्रैफिक का बहाव होगा।
    • खासकर बॉटलनेक पॉइंट्स पर इसे लागू किया जाएगा।

    🌱 मीडियन पर पौधों की देखरेख में गड़बड़ी

    वर्तमान में हाइवे के मीडियन पर अलग-अलग एजेंसियां पौधों की देखरेख करती हैं। इससे कहीं नीम के पेड़ हैं, तो कहीं सजावटी पौधे। इस असमानता को खत्म करने के लिए नई नीति में एक एजेंसी को स्पष्ट जिम्मेदारी देने की तैयारी है।

    • उदाहरण के तौर पर, ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे पर फिलहाल 4 एजेंसियां काम कर रही हैं।
    • बीएमसी चाहती है कि आगे एक ही एजेंसी इसकी जिम्मेदारी संभाले।

    🛠️ हाइवे और इंटरनल रोड में बड़ा फर्क

    बीएमसी अधिकारी ने कहा कि हाइवे पर ट्रेंचिंग और री-इंस्टेटमेंट का तरीका इंटरनल रोड से अलग होता है।

    • हाइवे पर गाड़ियां ज्यादा और भारी चलती हैं, इसलिए री-इंस्टेटमेंट चार्जेस भी अधिक होंगे।
    • नई नीति में इसे लेकर स्पष्ट नियम बनाए जाएंगे।

    📢 विज्ञापन और अधिकार क्षेत्र पर स्पष्टता

    फिलहाल हाइवे के अलग-अलग हिस्से एमएसआरडीसी (MSRDC) और एमएमआरडीए (MMRDA) जैसी एजेंसियों के अधीन आते हैं। इससे विज्ञापन के नियम और परमिशन में उलझन रहती है।

    नई नीति का मकसद है:

    • विज्ञापन के फॉर्मेट और परमिशन में समानता लाना।
    • अधिकार क्षेत्र को साफ करना ताकि विवाद न हो।

    ✅ नई नीति से मिलने वाले फायदे

    • ट्रैफिक मैनेजमेंट में सुधार
    • मीडियन की एक जैसी देखरेख
    • हाइवे पर विज्ञापन के नियमों में पारदर्शिता
    • लंबी अवधि के लिए सस्टेनेबल हाइवे गवर्नेंस

  • मुंबई के लादी पाव पर संकट, लकड़ी से जलने वाले भट्टी बैन से बढ़ेगी कीमत

    मुंबई के लादी पाव पर संकट, लकड़ी से जलने वाले भट्टी बैन से बढ़ेगी कीमत

    BMC ने मुंबई में वुड और कोयले से चलने वाले भट्टी पर बैन लगा दिया है। जानें कैसे इससे वड़ा पाव, पाव भाजी और मिसळ पाव महंगे हो सकते हैं और बेकरी वालों पर कैसा संकट आने वाला है।

    मुंबई और वड़ा पाव का रिश्ता इतना गहरा है कि इसे “गरीबों का बर्गर” भी कहा जाता है। ऑफिस जाते कर्मचारी हों या कॉलेज के विद्यार्थी, हर किसी के लिए लादी पाव से बनी स्नैक्स जैसे वड़ा पाव, पाव भाजी और मिसळ पाव रोज़ की ज़िंदगी का हिस्सा हैं। लेकिन अब यह स्वाद बदल सकता है। Mumbai’s Ladi Pav is in trouble, the ban on wood-fired ovens will increase the price

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने शहर की लगभग 1,000 बेकरीयों को नोटिस जारी कर कहा है कि वे लकड़ी से जलने वाले और कोयला भट्टी का इस्तेमाल बंद करें। इसके बजाय उन्हें इको-फ्रेंडली पीएनजी (पाइप्ड नैचरल गैस) ओवन लगाना होगा। Mumbai’s Ladi Pav is in trouble, the ban on wood-fired ovens will increase the price

    
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    क्यों लगाया बैन?

    BMC का कहना है कि लकड़ी और कोयले से चलने वाले भट्टी से PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषक निकलते हैं। ये प्रदूषक न सिर्फ़ बेकरी के भीतर काम करने वालों की सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि शहर की हवा भी खराब करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ़ ये बेकरी ही मुंबई के 3.5% प्रदूषण के लिए ज़िम्मेदार हैं। Mumbai’s Ladi Pav is in trouble, the ban on wood-fired ovens will increase the price

    बेकरीवालों की मुश्किलें

    1. लागत में इज़ाफा

    इंडियन बेकर्स असोसिएशन के अध्यक्ष खोदादाद ईरानी ने बताया कि पीएनजी आधारित ओवन लगाना लकड़ी और कोयला भट्टी से 3 से 4 गुना महंगा है। छोटे बेकरी वाले इतने बड़े खर्च को कैसे उठाएंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है।

    2. फ्लेवर का संकट

    लकड़ी से चलने वाले भट्टी से पकाई गई लादी पाव को जो खास स्मोकी टेस्ट मिलता है, वह गैस ओवन में गायब हो जाएगा। यानी, मुंबईकरों का ऑथेंटिक वड़ा पाव टेस्ट बदल सकता है।

    3. रोज़गार पर असर

    गैस या इलेक्ट्रिक ओवन लगाने पर मशीनों पर निर्भरता बढ़ेगी। इससे कर्मचारियों की ज़रूरत कम होगी, और हज़ारों कामगारों की नौकरियां दांव पर लग सकती हैं।

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    कीमतें होंगी दोगुनी?

    अगर पीएनजी ओवन का इस्तेमाल शुरू हुआ तो एक साधारण वड़ा पाव जिसकी कीमत अभी ₹15–₹20 है, वह ₹30–₹40 तक पहुंच सकता है। इसी तरह पाव भाजी और मिसळ पाव जैसे आइटम भी महंगे होंगे।

    मुंबई की गलियों का स्वाद बदल जाएगा?

    मुंबई की गलियों में बिकने वाले वड़ा पाव का स्वाद सिर्फ़ आलू और मसाले से नहीं बल्कि लादी पाव की सॉफ्टनेस और सुगंध से पूरा होता है। अगर ओवन बदल गए तो यह सुगंध और टेक्सचर बदल जाएगा। Mumbai’s Ladi Pav is in trouble, the ban on wood-fired ovens will increase the price

    सवाल उठता है: क्या सिर्फ़ बेकरीज़ ही ज़िम्मेदार?

    मुंबई में प्रदूषण के बड़े कारण हैं –

    • वाहनों से निकलने वाला धुआं
    • निर्माण कार्यों से धूल
    • औद्योगिक प्रदूषण

    ऐसे में केवल बेकरीज़ को टारगेट करना कई विशेषज्ञों के अनुसार एकतरफ़ा फैसला है।

    आगे का रास्ता

    सरकार और BMC को चाहिए कि –

    1. छोटे बेकरी वालों को सब्सिडी या आर्थिक मदद दे।
    2. नई टेक्नोलॉजी के साथ ऐसा ओवन लाए जो सुरक्षित भी हो और फ्लेवर भी बनाए रखे।
    3. प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित कदम उठाए।

    मुंबई के लिए लादी पाव सिर्फ़ एक ब्रेड नहीं, बल्कि संस्कृति और पहचान है। अगर लकड़ी की आग से चलने वाली भट्टी पूरी तरह बंद हो जाते हैं तो यह परंपरा टूट जाएगा और वड़ा पाव खाने का असली मज़ा बदल जाएगा। सवाल यह है कि – क्या मुंबई अपनी हवा साफ़ करने के नाम पर अपनी सबसे प्यारी डिश का स्वाद कुर्बान कर पाएगी? Mumbai’s Ladi Pav is in trouble, the ban on wood-fired ovens will increase the price

  • मुंबई में नौकरी अपडेट: सरकारी व निजी में रिक्त पदों पर आवेदन प्रक्रिया

    मुंबई में नौकरी अपडेट: सरकारी व निजी में रिक्त पदों पर आवेदन प्रक्रिया

    मुंबई में सितंबर 2025 में सरकारी व निजी क्षेत्र में ताज़ा नौकरियाँ: नगर निगम, BMC, पुलिस, कॉन्स्टेबल भर्ती व बड़ी कंपनियों में अवसर—जानें कैसे करें आवेदन।

    डिजिटल डेस्क मुंबई: भारत की आर्थिक राजधानी, नौकरी चाहने वालों के लिए फिर से रोजगार के नए अवसरों की राह खोल रही है। चाहे सरकारी क्षेत्र हो या निजी—यहां हर श्रेणी में अवसर बढ़ रहे हैं।

    सरकारी क्षेत्र में प्रमुख भर्तीें

    1. नगर निगम (MBMC) – 358 रिक्तियाँ

    महाराष्ट्र नगर निगम ने फायरमैन, इलेक्ट्रिशियन, जूनियर इंजीनियर (JE), क्लर्क समेत कुल 358 नई भर्तियाँ निकाली हैं, जिनमें वेतन ₹1.12 लाख तक हो सकता है। इच्छुक उम्मीदवारों को तुरंत ऑनलाइन आवेदन करने की सलाह दी गई है।

    2. BMC (मुंबई महानगरपालिका) – स्वास्थ्य विभाग

    BMC ने 23 पदों के लिए भर्ती की घोषणा की है, जिनमें स्वास्थ्य विभाग में काम करने में रुचि रखने वालों के लिए अवसर हैं और वेतन ₹1.75 लाख प्रति माह तक हो सकता है।

    3. पुलिस कांस्टेबल भर्ती – 15,631 पद

    महाराष्ट्र कैबिनेट ने 12,399 पुलिस कांस्टेबल, 234 ड्राइवर, 2,393 आर्म्ड कांस्टेबल, 580 जेल कांस्टेबल समेत कुल 15,631 पदों को भरने की मंजूरी दी है। यह भर्ती OMR आधारित लिखित परीक्षा के माध्यम से होगी और उम्र सीमा से अधिक समय सीमा वाले उम्मीदवारों को भी एक विशेष अवसर मिलेगा।

    4. नवी मुंबई महापालिका (NMMC)

    NMMC ने 668 रिक्त पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया घोषित की है और इसका परीक्षा समय-सारणी अब उपलब्ध है। इच्छुक उम्मीदवारों की तैयारी हेतु यह एक महत्वपूर्ण अवसर है (Maharashtra Times)।

    5. नागरिक रक्षा (Civil Defence)

    स्थापित कमी को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने लगभग 300 रिक्त पदों को भरने, उन्नत आपातकाल उपकरणों और आपातकालीन तैयारी बढ़ाने हेतु ₹20 करोड़ से अधिक का प्रस्ताव भेजा है।

    6. MSRTC – 15,000 ड्राइवर व कंडक्टर

    एमएसआरटीसी (महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम) ने अगले पांच वर्षों में 15,000 ड्राइवर और कंडक्टर भर्ती करने की योजना बनाई है, जिससे सड़क परिवहन शक्ति बढ़ेगी।

    निजी क्षेत्र और कॉरपोरेट अवसर

    FreeJobAlert पर ताज़ा रिक्तियाँ

    एक नजर FreeJobAlert की सूची पर:

    • IBPS RRB – ऑफिस असिस्टेंट व ऑफिसर पदों पर 13,217 रिक्तियाँ, आवेदन की अंतिम तिथि 21-सितंबर-2025
    • Bombay High Court – Cook cum Peon पद (1 vacancy), आवेदन की अंतिम तिथि 21-सितंबर-2025
    • RCFL (Rail Coach Factory) – Apprentice पदों पर 325 रिक्तियाँ, अंतिम तिथि 12-सितंबर-2025
    • अन्य अवसर: Exim Bank, Director General of Shipping, NFDC, POWERGRID, SBI, MRVC, TIFR, आदि—अलग-अलग पदों पर आवेदन खुला है।

    MySarkariNaukri अपडेट

    • LIC Housing Finance – Assistant Manager / Associate पद के लिए जारी, अंतिम तिथि 15-सितंबर-2025
    • Naval Dockyard – Apprentice पद, अंतिम तिथि 12-सितंबर-2025
    • Indian Institute of Packaging – Clerk / Junior Assistant, अंतिम तिथि 24-सितंबर-2025

    Indeed पर कॉर्पोरेट और स्टार्टअप अवसर

    कुछ प्रमुख मौजूदा पद:

    • Google – Data Analytics, Project Management, Digital Business Marketing Apprenticeships (अंतिम तिथि 14-सितंबर-2025)
    • Kotak Mahindra – Management Trainee – Agri-Fin Projects
    • KPMG – Internal Audit Executive, Assistant Manager – Digital Government Advisory
    • The Carlyle Group – Executive Assistant (Mumbai)
    • Others – Customer Service Representative (Pretty Child), Business Analyst, Technical Sales Engineer, Talent Acquisition Partner, ERP Specialist

    Randstad और Shine जैसे पोर्टल पर हजारों अवसर

    – Shine.com पर मुंबई में वर्तमान में 7419+ नौकरी रिक्तियाँ उपलब्ध हैं—IT, मार्केटिंग, फाइनेंस, हेल्थकेयर, शिक्षा जैसे सेक्टर शामिल
    – Randstad पर 131+ विभिन्न प्रकार की सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियाँ मुंबई में उपलब्ध हैं।

    आवेदन करने की विस्तृत प्रक्रिया

    सरकारी भर्ती (जैसे MBMC, BMC, Police, NMMC):

    1. संबंधित आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ (MBMC/BMC/NMMC/POLICE)
    2. भर्ती अधिसूचना डाउनलोड करें (योग्यता, आयु, प्रारंभिक शुल्क, चयन प्रक्रिया विवरण)
    3. ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें—पात्रता दस्तावेज़ स्कैन करके अपलोड करें
    4. आवेदन शुल्क का भुगतान करें (यदि निर्धारित हो)
    5. सबमिशन के बाद आवेदन संख्या और ई-मेल/एसएमएस पावती संभाल कर रखें
    6. Admit Card और परीक्षा संबंधी अपडेट वेबसाइट/ई-मेल पर समय-समय पर देखें
    7. लिखित/शारीरिक परीक्षा और अंतर्वार्ता में भाग लें

    निजी/कॉर्पोरेट अवसर (Indeed, FreeJobAlert आदि):

    1. पोर्टल (Indeed, FreeJobAlert, Shine) पर खाता बनाएँ और प्रोफ़ाइल अपलोड करें
    2. इच्छित कीवर्ड (e.g., “Apprentice Mumbai”), लोकैलिटी और श्रेणी के हिसाब से फिल्टर करें
    3. उपयुक्त जॉब पोस्ट चुनें और “Apply Now” करें
    4. कवर लेटर, रिज़्यूमे और अन्य दस्तावेज़ तैयार रखें
    5. उम्मीदवार को कॉल/ई-मेल से आगे की प्रक्रिया के लिए संपर्क किया जाएगा

    नौकरी अलर्ट और तैयारी सुझाव

    • नौकरी अलर्ट सेट करें (Shine, Indeed पर) ताकि नए अवसर सीधे आपकी ई-मेल/मोबाइल पर पहुँचे
    • दस्तावेज़ जैसे रिज्यूमे, मार्कशीट, प्रमाणपत्र, आईडी प्रूफ हमेशा तैयार रखें
    • परीक्षा पैटर्न और पिछले प्रश्नपत्र देखें—विशेषकर सरकारी भर्ती के लिए
    • इंटरव्यू और टाइटल्ड एप्लिकेशन ट्रिक्स पर ध्यान दें

    मुंबई में इस समय सरकारी भर्ती से लेकर निजी और कॉर्पोरेट सेक्टर तक नौकरी की बहार है। चाहे वह नगर निगम और BMC जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएँ हों, पुलिस भर्ती हो या 15,000 ड्राइवर-कंडक्टर की MSRTC योजना, कॉर्पोरेट प्रतिष्ठानों में apprenticeships व विशेषज्ञ पद—यह लेख हर उम्मीदवार की दिशा में मार्गदर्शक साबित हो सकता है। Jobs in Mumbai: Application process for vacancies in government and private sector