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Iran crisis और global oil supply impact के बीच Modi Government ने घरेलू इस्तेमाल के लिए kerosene supply बढ़ाने का फैसला लिया। जानिए कौन-कौन से राज्यों में मिलेगा फायदा।
नई दिल्ली: दुनिया में बढ़ते Energy Crisis और ईरान से जुड़े तनाव के बीच नरेंद्र मोदी सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत दी है।
मुंबई स्टाइल में बोले तो – “अब गैस की टेंशन थोड़ी कम होने वाली है भाई!”
रविवार को केंद्र सरकार ने ऐलान किया कि घरेलू जरूरतों के लिए kerosene distribution rules में ढील दी जाएगी, ताकि लोगों को खाना बनाने और रोशनी के लिए परेशानी न हो।
Middle East Crisis का सीधा असर
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान संकट के चलते global oil supply पर असर साफ दिख रहा है।
सप्लाई चेन डिस्टर्ब fuel prices में उतार-चढ़ाव LPG availability पर दबाव
इसी को ध्यान में रखते हुए Ministry of Petroleum and Natural Gas ने kerosene supply बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है।
क्या है सरकार का नया फैसला?
सरकार ने पेट्रोलियम से जुड़े safety और licensing rules में temporary relaxation दिया है।
इसका मकसद:
आम लोगों को तुरंत राहत
fuel shortage से बचाव
rural और गरीब इलाकों में energy access बढ़ाना
इन 21 राज्यों/UTs में मिलेगा फायदा
सरकार ने साफ किया है कि यह सुविधा देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी:
दिल्ली (NCT)
चंडीगढ़
हरियाणा
पंजाब
दादरा और नगर हवेली और दमन-दीव
पुडुचेरी
आंध्र प्रदेश
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
गोवा
गुजरात
उत्तराखंड
लक्षद्वीप
जम्मू-कश्मीर
लद्दाख
तेलंगाना
हिमाचल प्रदेश
नागालैंड
मध्य प्रदेश
सिक्किम
👉 यानी देश के बड़े हिस्से में अब kerosene आसानी से उपलब्ध होगा।
Mumbai Indians IPL 2026 full schedule: MI के सभी मैच, dates, timings और venues की पूरी लिस्ट। Hardik Pandya की कप्तानी में MI का पूरा fixture देखें।
मुंबई: Mumbai Indians (MI) ने IPL 2026 के लिए अपनी पूरी तैयारी कर ली है। 5 बार की चैंपियन टीम इस बार Hardik Pandya की कप्तानी में मैदान में उतरेगी और इतिहास रचने की कोशिश करेगी।
🏆 MI का IPL इतिहास और पिछला सीजन
मुंबई इंडियंस IPL की सबसे सफल टीमों में से एक है, जिसने 2013, 2015, 2017, 2019 और 2020 में खिताब जीता है। पिछले सीजन में टीम प्लेऑफ तक पहुंची थी, लेकिन Shreyas Iyer की शानदार पारी ने उन्हें बाहर कर दिया।
🗓️ MI IPL 2026 Full Match Schedule (Dates, Time, Venue)
March 29 MI vs Kolkata Knight Riders – Mumbai – 7:30 PM
April 4 Delhi Capitals vs MI – Delhi – 3:30 PM
April 7 Rajasthan Royals vs MI – Guwahati – 7:30 PM
April 12 MI vs Royal Challengers Bengaluru – Mumbai – 7:30 PM
April 16 MI vs Punjab Kings – Mumbai – 7:30 PM
April 20 Gujarat Titans vs MI – Ahmedabad – 7:30 PM
April 23 MI vs Chennai Super Kings – Mumbai – 7:30 PM
April 29 MI vs Sunrisers Hyderabad – Mumbai – 7:30 PM
May 2 CSK vs MI – Chennai – 7:30 PM
May 4 MI vs Lucknow Super Giants – Mumbai – 7:30 PM
India में petrol diesel shortage की अफवाहों पर IOC, BPCL और HPCL का बड़ा बयान। Fuel supply पूरी तरह stable, panic buying से बचने की अपील। जानिए latest fuel price और पूरा अपडेट।
नई दिल्ली: भारत में पेट्रोल और डीजल की कमी को लेकर चल रही अफवाहों के बीच सरकारी तेल कंपनियों ने बड़ा बयान जारी किया है। Indian Oil Corporation (IOC), Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited ने साफ कहा है कि देश में fuel shortage जैसी कोई स्थिति नहीं है।
कंपनियों ने अफवाहों को बताया गलत
IOC ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रही खबरें “भ्रामक” हैं और इससे लोगों में बेवजह चिंता पैदा हो रही है। BPCL ने इन रिपोर्ट्स को “completely unfounded” बताया और कहा कि भारत के पास petrol, diesel, crude oil और ATF का पर्याप्त स्टॉक है। HPCL ने भी कहा कि petrol, diesel और LPG की सप्लाई पूरी तरह stable है।
West Asia तनाव के बीच भी सप्लाई मजबूत
यह बयान ऐसे समय आया है जब West Asia में युद्ध चौथे हफ्ते में है और Strait of Hormuz से गुजरने वाले oil tankers की आवाजाही सीमित हो गई है। इसके बावजूद भारत में fuel supply पर कोई असर नहीं पड़ा है।
Panic Buying से बचने की अपील
तेल कंपनियों ने लोगों से खास अपील की है कि वे panic buying न करें। कंपनियों के मुताबिक, ऐसी अफवाहें सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती हैं और अनावश्यक दबाव बना सकती हैं।
Fuel Prices में नहीं हुआ बड़ा बदलाव
26 मार्च के हिसाब से:
दिल्ली: Petrol ₹94.77 / Diesel ₹87.67
मुंबई: Petrol ₹103.50 / Diesel ₹90.03
Regular petrol और diesel की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
हालांकि, पिछले हफ्ते premium petrol की कीमत करीब ₹2 प्रति लीटर और industrial diesel की कीमत ₹22 प्रति लीटर बढ़ाई गई थी।
Premium Fuel का असर बहुत कम
कंपनियों के अनुसार premium petrol का इस्तेमाल कुल उपभोक्ताओं के 5% से भी कम लोग करते हैं, इसलिए इसका आम जनता पर ज्यादा असर नहीं पड़ता।
भारत 40 से ज्यादा देशों से crude oil खरीदता है, जिसमें Russia और Iran जैसे देश भी शामिल हैं। इसी diversified sourcing की वजह से supply stable बनी हुई है और कीमतों को नियंत्रित रखा जा सका है।
लोकसभा में केंद्रीय मंत्री वक्फ एक्ट के सेक्शन 40 खत्म करने का ऐलान कर दिया है। वक्फ बोर्ड अधिनियम 40 के तहत वक्त बोर्ड को वक्फ संपत्तियों के फैसले का अधिकार दिया गया था। लेकिन अब इसे हटाने का प्रस्ताव किया गया है, जिससे बोर्ड की स्वतंत्रता पर सवाल उठ रहे हैं।
Waqf Amendment Bill 2024: 2 अप्रैल को लोकसभा में पेश किए गए ‘वक्फ संशोधन बिल 2024’ में सबसे बड़ा बदलाव है सेक्शन 40 को खत्म करना। ये सेक्शन ही इस बोर्ड को किसी भी भूमि को वक्फ संपत्ति में बदलने की अनुमति देता था। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को संसद में एक बहस के दौरान इसे वक्फ अधिनियम का सबसे कठोर प्रावधान बताया था।
रिजिजू ने चर्चा के दौरान कहा कि, ‘अधिनियम में सबसे कठोर प्रावधान सेक्शव 40 है, जिसके तहत वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित कर सकता था, लेकिन संशोधन के तहत हमने उस प्रावधान को हटा दिया है।” ऐसे में, दूसरी तरफ सवाल उठता है कि आखिर ये सेक्शन 40 है क्या? और इसे हटाने के बाद किस तरीके के बदलाव आ सकते हैं?
वक्फ कानून अधिनियम 40
वक्फ कानून का अधिनियम 40 वक्फ संपत्तियों के बारे में फैसला करने से जुड़ा हुआ है। इसका मतलब है कि अगर किसी संपत्ति के बारे में यह सवाल उठता है कि क्या वह संपत्ति वक्फ है या नहीं ? तो वक्फ बोर्ड इस सवाल का फैसला खुद कर सकता था। इस फैसले को चुनौती देने का अधिकार किसी के भी पास नहीं था। अगर किसी को आपत्ति होती भी थी तो वह, वक्फ ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता था। जिसपर फैसले का अधिकार भी वक्फ बोर्ड के ही पास था।
इस सेक्शन के तहत, अगर वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति को वक्फ संपत्ति मानता है, तो उसका यह फैसला अंतिम होता है। इसका मतलब है कि सरकार या कोई और संस्थान इस फैसले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। अगर किसी को बोर्ड के फैसले से आपत्ति होती, तो वह वक्फ ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता था।
यह सेक्शन वक्फ बोर्ड को एक तरह से स्वतंत्रता देता था कि वह बिना किसी बाहरी दबाव के यह तय कर सके कि कोई संपत्ति वक्फ बोर्ड की संपत्ति है या नही? साथ ही, अगर कोई अन्य ट्रस्ट या सोसाइटी की संपत्ति को वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकरण कराने की आवश्यकता होती, तो बोर्ड उसे ऐसा करने का निर्देश दे सकता था। अब, वक्फ संशोधन बिल में इस सेक्शन को हटाने के प्रस्ताव से वक्फ बोर्ड की ताकत और स्वतंत्रता पर सवाल उठने लगे हैं।
सरकारी हस्तक्षेप नहीं
सेक्शन 40 के तहत, बोर्ड के फैसले पर सरकार या किसी अन्य सरकारी संस्थान का कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होता था। इसका मतलब है कि वक्फ संपत्तियों के मामलों में बोर्ड का फैसला ही सर्वोपरि होता था।
इस सेक्शन के तहत अगर कोई संपत्ति किसी अन्य ट्रस्ट या सोसाइटी के तहत पंजीकृत होती, लेकिन वक्फ बोर्ड को लगता कि वह संपत्ति वक्फ संपत्ति हो सकती है, तो बोर्ड उसकी जांच कर सकता था। अगर बोर्ड ने यह फैसला लिया कि वह संपत्ति वक्फ संपत्ति है, तो उस ट्रस्ट या सोसाइटी को उसे वक्फ एक्ट के तहत पंजीकरण करने के लिए कहा जाता था।
सेक्शन 40 को लागू नहीं किया जाएगा
वक्फ (संशोधन) बिल 2025 में इस सेक्शन को हटा दिया गया है। इस बदलाव को लेकर केंद्रीय मंत्री ने संसद में ऐलान किया कि सेक्शन 40 को अब लागू नहीं किया जाएगा।
इस बदलाव के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कालन बैनर्जी ने संसद में कहा कि अगर सेक्शन 40 को हटा दिया गया, तो वक्फ बोर्ड महज एक ‘गुड़िया’ बनकर रह जाएगा, जिसकी कोई ताकत नहीं होगी। उनका कहना था कि अगर इस सेक्शन को हटा दिया जाता है, तो वक्फ बोर्ड को बनाए रखने का कोई मतलब नहीं है और इसकी शक्तियां सीधे तौर पर मंत्री को दे दी जानी चाहिए।
केंद्र सरकार का तर्क
केंद्र सरकार का कहना है कि इस बदलाव से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और प्रभावशीलता आएगी। उनका मानना है कि अब वक्फ संपत्तियों के मामलों में कोई भ्रम नहीं होगा और यह प्रक्रिया ज्यादा सरल और सुचारू होगी।
वक्फ कानून मे संशोधन का असर
विपक्ष का कहना है कि इस बदलाव से वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी और सरकार को वक्फ संपत्तियों के मामलों में ज्यादा नियंत्रण मिलेगा। वहीं, सरकार का कहना है कि यह बदलाव वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को और बेहतर बनाएगा। अब यह देखना होगा कि इस बिल को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और इसका वक्फ बोर्ड पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
महाराष्ट्र सरकार लव जिहाद के खिलाफ कानून लाने की तैयारी कर रही है, मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी दूसरे धर्म में शादी करना गलत नहीं है। वहीं मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा सरकारों को हिंदू मुस्लिम की राजनीति से ऊपर उठकर राज्य के विकास और तरक्की के लिए काम करना चाहिए। जबकि लव जिहाद कानून का हवाला देते हुए पक्षपात किया जाता है।
मुम्बई: महाराष्ट्र सरकार के ‘लव जिहाद’ कानून बनाए जाने के खिलाफ कई तरह के बयान सामने आ रहे हैं। सरकार ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून बनने की तैयारी कर रही है। महाराष्ट्र राज्य पुलिस महानिदेशक (DGP) के नेतृत्व में राज्य सरकार ने लव जिहाद को लेकर एक कमेटी का गठन किया है। वहीं विरोध के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे धर्म में शादी करना गलत नहीं है, लेकिन धोखाधड़ी और झूठी पहचान के जरिए की होने वाले अत्याचार के खिलाफ कदम उठाए जाने की जरूरत है। (It is not wrong to marry in another religion, Love Jihad- Chief Minister Devendra Fadnavis)
धोखे से शादी
सीएम फडणवीस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और केरल हाई कोर्ट ने ‘लव जिहाद’ की हकीकत के बारे में टिप्पणी की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हकीकत है कि महाराष्ट्र में धोखे से शादी करने और फिर बच्चे पैदा होने पर छोड़ देने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इन घटनाओं का असर न केवल उस परिवार पर पड़ता हैं, बल्कि समाज पर भी इसका गहरा असर होता है। (It is not wrong to marry in another religion, Love Jihad- Chief Minister Devendra Fadnavis)
सांप्रदायिक सोच
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी दूसरे धर्म में शादी करने पर कुछ भी गलत नहीं है। ये सब नॉर्मल है, लेकिन अगर पहचान बदलकर या छिपाकर इस तरह की शादी की जाती है, तो ये गंभीर मामला है। समय रहते इन पर अंकुश लगाने की जरूरत है। वहीं उत्तर प्रदेश के बरेली से ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा लव जिहाद को लेकर कानून बनाने की तैयारी सांप्रदायिक सोच को जाहिर करता है। (It is not wrong to marry in another religion, Love Jihad- Chief Minister Devendra Fadnavis)
पक्षपात का आरोप
मौलाना ने कहा कि हम इस बात को पहले से ही कहते आए हैं कि इस्लाम अपने अनुयायियों को पहचान छुपाने की इजाजत नहीं देता। साथ ही पूरे भारत में कोई भी मुस्लिम संस्था नहीं है जो धर्मांतरण का कार्य करती हो। जबकि कुछ दिनों से ये देखा जा रहा है कि मुस्लिम लड़कियां हिंदू बन रही हैं, अगर उस लड़की के माता-पिता शिकायत करते हैं तो उनकी शिकायत नहीं सुनी जाती। अगर दूसरे संप्रदाय के लोग इस तरह की शिकायत करते हैं तो तत्काल कार्रवाई होती है। जबकि होना ये चाहिए कि निष्पक्ष और इंसाफ पर आधारित कार्रवाई हो। (It is not wrong to marry in another religion, Love Jihad- Chief Minister Devendra Fadnavis)
मौलाना ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार लव जिहाद पर कानून बनाकर बहुसंख्यक का भला नहीं कर सकती। इस तरह के कानूनों से समाज पर कोई अच्छा असर नहीं पड़ता। सरकार फिरकापरस्ती को बढ़ावा देना चाहती है। सरकारों को हिंदू मुस्लिम की राजनीति से ऊपर उठकर राज्य के विकास और तरक्की के लिए काम करना चाहिए। इस तरह के कानून की वो लोग बात करते हैं, जिनकी सोच बहुत छोटी है और वो विकास के बजाय हिंदू मुसलमानों को आपस में टकराव की तरफ ले जाने की बात करते हैं। (It is not wrong to marry in another religion, Love Jihad- Chief Minister Devendra Fadnavis)
महाराष्ट्र में धर्मांतरण की शिकायतों के बाद देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में इसके खिलाफ कानून बनाने का वादा किया था। अब राज्य सरकार ने पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की है। इस समिति के सदस्य महिला एवं बाल कल्याण विभाग के सचिव, अल्पसंख्यक विकास विभाग के सचिव, विधि एवं न्याय विभाग के सचिव, सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग के सचिव, गृह विभाग के सचिव तथा गृह विभाग (विधि) के सचिव होंगे। (It is not wrong to marry in another religion, Love Jihad- Chief Minister Devendra Fadnavis)
उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे बीजेपी शासित राज्यों में इस प्रकार के कानून मौजूद हैं। तमिलनाडु में 2002 में इस कानून को रद्द कर दिया गया था। मध्य प्रदेश में जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर एक से पांच साल तक कैद की सजा और 25 हजार रुपए के जुर्माने की सजा। हिमाचल और उत्तराखंड में 5 साल तक कैद की सजा का प्रावधान है। SC-ST और नाबालिग के मामले में ये सजा 7 साल की है। उत्तर प्रदेश में जबरन धर्म परिवर्तन करने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। गुजरात में लव जिहाद कानून के तहत 5 साल की सजा और अधिकतम 5 लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है। जबकि राजस्थान में इस कानून से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। (It is not wrong to marry in another religion, Love Jihad- Chief Minister Devendra Fadnavis)
महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने लव जिहाद और जबरन धर्मांतर जैसे मामलों के खिलाफ कानून बनाने के लिए 7 सदस्यीय कमेटी बना दी है। महाराष्ट्र के DGP संजय वर्मा की अध्यक्षता में कमेटी का गठन
मुंबई: महाराष्ट्र में लव-जिहाद के खिलाफ कानून लागू करने की तैयारी हो रही है। इसके लिए डीजीपी संजय वर्मा की अध्यक्षता में एक कमेटी बना दी गई है। इसमें महिला एवं बाल कल्याण, अल्पसंख्यक विभाग, कानून एवं न्यायपालिका, सामाजिक न्याय, विशेष सहायक, गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। बता दें कि तमिलनाडु में इस कानून को लागू करने के बाद रद्द कर दिया गया था। हालांकि देश के 9 राज्यों जैसे, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में लव-जिहाद के खिलाफ कानून मौजूद हैं। (Preparation to bring law against love jihad in Maharashtra, panel of 7 members ready)
कमेटी जबरन धर्मांतरण और लव जिहाद के मामले में शिकायतों को कैसे निपटाया जाए, इस पर सुझाव देगी। इसके अलावा यह दूसरे राज्यों में लागू कानूनों की स्टडी करेगी और इस आधार पर कानूनी सलाह देगी। पैनल में महाराष्ट्र के DGP संजय वर्मा को अध्यक्ष के रुप में चुना गया है। इसके साथ ही महिला एवं बाल कल्याण, अल्पसंख्यक मामले, कानून एवं न्यायपालिका, सामाजिक न्याय, विशेष सहायता और गृह जैसे प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं। (Preparation to bring law against love jihad in Maharashtra, panel of 7 members ready)
महाराष्ट्र में विपक्षी पार्टी NCP शरद पवार की लीडर सुप्रिया सुले ने कहा- शादी या प्रेम निजी इच्छा है। मैं सरकार से निवेदन करती हूं कि यह असल मुद्दों पर ध्यान दें। मोदी जी अभी अमेरिका से वापस लौटे हैं। अमेरिका ने हम पर नए टैरिफ लगा दिए हैं, जिसका प्रभाव हमारे देश पर पड़ेगा। ऐसे मामलों पर ध्यान देना चाहिए। (Preparation to bring law against love jihad in Maharashtra, panel of 7 members ready)
एक लाख से अधिक शिकायतें मिलीं
अक्टूबर, 2024 में तत्कालीन उप मुख्यमंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था- एक दशक पहले हम सोचते थे कि लव जिहाद की बात इक्का-दुक्का घटना है, लेकिन एक लाख से अधिक शिकायतें मिली हैं। इनमें हिंदू महिलाओं को दूसरे धर्मों के पुरुषों के साथ भागकर शादी करने का झांसा दिया गया। (Preparation to bring law against love jihad in Maharashtra, panel of 7 members ready)
उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में इस प्रकार के कानून मौजूद हैं। तमिलनाडु में 2002 में इस कानून को रद्द कर दिया गया था। भाजपा नेता और मंत्री नितेश राणे और महाराष्ट्र के विभिन्न हिंदू संगठनों ने भी राज्य में ‘लव जिहाद’ कानून लागू करने की मांग की है। (Preparation to bring law against love jihad in Maharashtra, panel of 7 members ready)
मध्य प्रदेश में जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर एक से पांच साल तक कैद की सजा और 25 हजार रुपए के जुर्माने की सजा।
हिमाचल और उत्तराखंड में 5 साल तक कैद की सजा का प्रावधान है। SC-ST और नाबालिग के मामले में ये सजा 7 साल की है।
उत्तर प्रदेश में जबरन धर्म परिवर्तन करने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।
गुजरात में लव जिहाद कानून के तहत 5 साल की सजा और अधिकतम 5 लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।
यूपी सरकार ने लव जिहाद विरोधी कानून पारित किया सरकार इस बिल को पहली बार 2021 में लेकर आई थी। अब इसमें संशोधन किया गया है। पहले अधिकतम 10 वर्ष की सजा और 50 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान था। कानून लागू होने से लेकर अप्रैल, 2023 तक 427 केस दर्ज हुए थे। इनमें से 65 नाबालिग लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराया गया था। सबसे ज्यादा केस बरेली में दर्ज हुए थे। (Preparation to bring law against love jihad in Maharashtra, panel of 7 members ready)
राजस्थान में भी 16 साल बाद लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के विरोधी बिल पेश किया गया था। राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेद विधेयक कानून को इसी साल तक लागू किया जाएगा। इस बिल के जरिए राज्य सरकार की एक धर्म से दूसरे धर्म में जबरन परिवर्तन करवाने वालों पर लगाम लगाएगी। (Preparation to bring law against love jihad in Maharashtra, panel of 7 members ready)
मस्जिद ट्रस्ट ने खुद अवैध निर्माण को तोड़ने का वादा करते हुए मस्जिद को तोड़ने का काम आज से शुरू कर दिया है। इससे पहले मस्जिद ट्रस्ट ने अवैध निर्माण के कुछ हिस्से को हरे रंग के परदे से कवर कर दिया था।
न्यूज़ डेस्क मुंबई- महाराष्ट्र में नफरत की आग तेज़ हो गई है। यहां पूराने धर्मस्थलों को निशाना बनाया जा रहा है। पुणे के 25 साल पुराने मस्जिद पर बुलडोजर चलाने के बाद जहाँ मुस्लिम समुदाय विरोध कर रहा है, वहीं मुंबई के धारावी स्थित महबूब ए सुभानिया मस्जिद में अवैध निर्माण की शिकायत पर मस्जिद ट्रस्ट खुद तोड़क कार्यवाही करते हुए विवाद को खत्म करने का ऐलान किया और साथ ही सोमवार यानी आज से अवैध निर्माण पर हथौड़ा चलाया। इससे पहले मस्जिद ट्रस्ट ने अवैध निर्माण के कुछ हिस्से को हरे रंग के परदे से ढक दिया था।
बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) की टीम यहां निरीक्षण करने पहुंची थी। मस्जिद ट्रस्ट का कहना है कि जो भी कार्रवाई होगी वो कानून के तहत होगी। इससे पहले मस्जिद ट्रस्ट ने खुद धारावी की महबूब ए सुभानिया मस्जिद में अवैध निर्माण को तोड़ने का वादा किया था। वहीं पुणे में भी मस्जिद को तोड़े जाने पर हंगामा मचा हुआ है। इसके अलावा आज हिमाचल के कुल्लू में अवैध मस्जिद के खिलाफ हिंदू संगठन हल्ला बोल रहे हैं, जगह-जगह विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
पुणे में मस्जिद पर चला बुलडोजर
पुणे में मस्जिद और मदरसे पर बुलडोजर एक्शन हुआ है। अवैध निर्माण के खिलाफ महानगर पालिका ने आधी रात में ये कार्रवाई की है। महानगर पालिका का ये एक्शन हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुआ है जिसमें कहा गया था कि पुणे के पिंपरी चिंचवड़ में जितने भी अवैध धर्म स्थल हैं, उसे तोड़ा जाए। 6 महीने पहले पुणे महानगर पालिका ने ऐसे सभी अवैध निर्माण वाले धर्म स्थलों को नोटिस भेजा था। लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया। जिसके बाद महानगर पालिका ने तोड़क कार्रवाई की। मस्जिद और मदरसे पर बुलडोज़र एक्शन का शहर के मुसलमान जमकर विरोध कर रहे हैं।
25 साल पुरानी मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन
बता दें कि ये पूरा मामला पुणे से सटे पिंपरी चिंचवड़ का है। 25 साल पहले यहां मस्जिद का निर्माण हुआ था लेकिन बीते कुछ सालों पहले यहां दारुल उलूम जामिआ इन आमिया नाम से मदरसा चलाया जा रहा था। इसके खिलाफ हिंदू संगठनों ने शिकायत की। इस बीच हाईकोर्ट ने इलाके के सभी अवैध धर्मस्थलों को तोड़ने का आदेश भी जारी कर दिया और फिर कल रात महानगर पालिका ने अवैध निर्माण पर बुलडोज़र चला दिया। इस कार्रवाई में मदरसा पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है। वहीं मस्जिद का कुछ हिस्सा भी अवैध निर्माण होने का हवाला देते हुए गिरा दिया गया है।
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इस आर्टिकल को पढ़कर आप भी घर बैठे इलेक्शन कार्ड (Election Card) में अपना फोटो, पता और बाकी जानकारियों में बदलाव कर सकेंगे। हम खास आपके लिए महत्वपूर्ण जानकारियां लेकर आए हैं।
डिजिटल डेस्क (Indian Fasttrack News Network) एक मतदाता पहचान पत्र आपके भारतीय होने और पते के प्रमाण के लिए एक आवश्यक दस्तावेज के रूप में कार्य करता है। इसलिए, भविष्य में असुविधा से बचने के लिए, आपका नाम, पता, जन्म पत्र आदि जैसी जानकारी में किसी भी गड़बड़ी को ठीक करना आवश्यक है। अगर आप भी ऑनलाइन और ऑफलाइन वोटर आईडी (Election Card) में सुधार करना चाहते हैं तो इसकी प्रक्रियाओं की जांच के लिए पढ़ना जारी रखें।
Election Card सुधार के लिए आवेदन कैसे करें
संभावित मतदाता पहचान पत्र में अपना नाम, पता और अन्य जानकारी बदलने के लिए ऑनलाइन मतदाता पहचान पत्र सुधार का विकल्प चुन सकते हैं। आवेदक का नाम, पता और जन्म तिथि बदलने के लिए प्रत्येक चरण को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। जो निम्नलिखित हैं।
Election Card पर ऑनलाइन नाम बदलने के तरीके के बारे में निम्नलिखित चरणों पर एक नज़र डालें:-
Step 1:एनवीएसपी की आधिकारिक वेबसाइट या राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल पर जाएं। अपना यूजर नेम और पासवर्ड डालकर पोर्टल पर खुद को रजिस्टर करें। यदि आप मौजूदा सदस्य हैं तो लॉगिन करें। Step 2: “निर्वाचक विवरण में सुधार” चुनें और फॉर्म 8 पर क्लिक करें। Step 3: आपको दूसरे पृष्ठ पर भेज दिया जाएगा और निम्नलिखित विवरण दर्ज करें
आपका संसदीय क्षेत्र या राज्य विधानसभा।
अपना नाम, उम्र, लिंग और मतदाता सूची का भाग संख्या टाइप करें।
अपने परिवार के सदस्यों के बारे में जानकारी दर्ज करें, जैसे पति या पत्नी, पिता या माता।
अपना आवासीय पता लिखें।
Step 4: आवश्यक दस्तावेज जैसे पैन कार्ड, पासपोर्ट आदि अपलोड करें। Step 5: अपना गलत या गलत वर्तनी वाला नाम बदलने या संपादित करने के लिए “My Name” टैब चुनें। अपना आवासीय शहर, तिथि और संपर्क विवरण जैसे – ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर दर्ज करें। Step 6: सभी विवरणों को सत्यापित करें और चुनाव कार्ड को अपडेट करने के लिए सबमिट करें।
एक बार जब आपका आवेदन संसाधित और सत्यापित हो जाता है, तो आपको अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक सूचना (Massage) प्राप्त होगा। तदनुसार, इसे अपने निकटतम निर्वाचन कार्यालय से प्राप्त करें।
Voter ID Card में पता बदलना..
क्या आप एक नए निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए हैं और सोच रहे हैं कि मतदाता पहचान पत्र ( Election Card) में पता कैसे बदला जाए, तो चिंता न करें। नीचे दिए गए सरल चरणों का पालन करें:-
Step 1: एनवीएसपी पोर्टल पर लॉग इन करें। टैब “नए मतदाता के पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन करें/एसी से स्थानांतरित होने के कारण” का चयन करें और यदि आप वर्तमान में एक नए निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित हुए हैं तो Form 6 चुनें। Step 2: यदि आप एक ही निर्वाचन क्षेत्र के भीतर एक आवासीय क्षेत्र से दूसरे में स्थानांतरित हो गए हैं तो Form 8A चुनें। Step 3: आवश्यक जानकारी जैसे नाम, निर्वाचन क्षेत्र, राज्य, जन्म तिथि आदि के साथ संबंधित फॉर्म भरें। अपना संपर्क विवरण जैसे मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी आदि प्रदान करें। Step 4: प्रासंगिक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि अपलोड करें। संबंधित दस्तावेजों के साथ फॉर्म जमा करें। Step 5: घोषणा विकल्प का चयन करें। कैप्चर टाइप करें और सबमिट करें।
यहां बताया गया है कि आप NVSP पोर्टल पर पहुंचकर voter ID पर अपनी जन्मतिथि ऑनलाइन कैसे बदल सकते हैं।
Step 1: पोर्टल पर लॉग इन करने के बाद, Form 8 चुनें। Step 2: अपना नाम, संसदीय क्षेत्र या राज्य या जिला विधानसभा से संबंधित जानकारी दर्ज करें। अन्य जानकारी में शामिल हैं:
एपिक या मतदाता का फोटो पहचान पत्र संख्या।
उस विकल्प का चयन करें जिसे आप अपडेट करना चाहते हैं, इस मामले में, आपकी जन्म तिथि।
अपनी सही जन्मतिथि दर्ज करें और आयु प्रमाण के लिए आधार कार्ड जैसे दस्तावेज प्रदान करें।
Step 3: घोषणा विकल्प का चयन करें और सबमिट करें।
इसके अतिरिक्त, आप वोटर पोर्टल के माध्यम से voter ID सुधार का विकल्प भी चुन सकते हैं। यह एक सरकारी पोर्टल है जहां आवेदक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं या मतदाता पहचान पत्र पर जानकारी बदल सकते हैं। इसे एक्सेस करने के लिए आपको एक अकाउंट बनाना होगा। लॉग इन करने के बाद, “voter ID में सुधार” का विकल्प चुनें। अन्य चरण ऊपर बताए गए चरणों के समान हैं।
Voter ID सुधार ऑफलाइन कैसे करें?
इंटरनेट एक्सेस के बिना आवेदक निर्वाचन कार्यालय में जाकर ऊपर उल्लिखित सभी सूचनाओं को बदल सकते हैं। Form 8, 8A या 6 के लिए पूछें। आप इसे NVSP की आधिकारिक वेबसाइट से भी डाउनलोड कर सकते हैं। आप इसे कैसे डाउनलोड कर सकते हैं, इसके चरण यहां दिए गए हैं।
NVSP पोर्टल पर जाएं। “फॉर्म” पर क्लिक करें।
राज्य चुनें”। अब “डाउनलोड” अनुभाग पर नेविगेट करें और “फ़ॉर्म” चुनें।
आवश्यक फॉर्म डाउनलोड करें – Form 6, 8, या 8A
अपना नाम, आयु, निर्वाचन क्षेत्र इत्यादि जैसे अनिवार्य क्षेत्रों को भरें। इसे सहायक दस्तावेजों के साथ संबंधित निर्वाचन कार्यालय में जमा करें। इसमें आधार कार्ड, पासपोर्ट आदि शामिल हैं।
आपको Voter ID सुधार का विकल्प क्यों और कब चाहिए?
एक मतदाता पहचान पत्र चुनाव के दौरान आपके वोट डालने की अनुमति देता है। इसके अतिरिक्त, जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, यह एक आवश्यक पहचान प्रमाण भी है। इसलिए, इसमें कोई भी गड़बड़ी असुविधा का कारण बन सकती है। उदाहरण के लिए, यदि आप अपने काम के लिए एक निर्वाचन क्षेत्र से दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए हैं, तो अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन मतदाता पहचान पत्र सुधार का विकल्प चुनें।
मतदाता पहचान पत्र सुधार स्थिति की जांच कैसे करें?
एक बार जब आप Voter Id सुधार के लिए आवेदन कर देते हैं, तो आपको एक संदर्भ संख्या प्राप्त होगी। वोटर आईडी सुधार के लिए अपने आवेदन की स्थिति को ट्रैक करने के लिए इसका इस्तेमाल करें।
Step 1: एनवीएसपी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। नीचे उल्लिखित “ट्रैक एप्लिकेशन स्थिति” पर क्लिक करें। Step 2: संदर्भ आईडी दर्ज करें और आवेदन की स्थिति देखने के लिए “ट्रैक स्थिति” चुनें।
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आवेदक 1950 पर कॉल करके भी मतदाता पहचान पत्र सुधार के लिए आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। आप दो आसान चरणों के साथ वोटर पोर्टल के माध्यम से भी स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं पंजीकृत सदस्य “Track Status” का चयन करके स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं।
आवेदन की स्थिति देखने के लिए संदर्भ संख्या दर्ज करें।
इस प्रकार, यह सब वोटर आईडी सुधार के बारे में है। फॉर्म जमा करने से पहले सभी विवरणों को सत्यापित करना सुनिश्चित करें। इसके अतिरिक्त, एक सुगम आवेदन प्रक्रिया के लिए दस्तावेजों को संभाल कर रखें।
आधे से ज्यादा प्रदेशों में कांग्रेस का शासन होने वाला है।
देश भर के आदिवासी और दलित एकजुट हो सकते हैं।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- प्रायः हर प्रदेश में चंद क्षत्रप अवश्य हैं। जैसे यूपी में सपा, महाराष्ट्र में शिवसेना और राकांपा लेकिन टूट से परेशान विहार में नीतीश और लालू फेमिली, बंगाल में ममता दीदी, इसी तरह साउथ में डी एम के. और कुछ छुटपुट क्षेत्रों में दूसरे क्षत्रप। किसी में इतनी शक्ति नहीं कि अकेले बीजेपी और मोदी का मुकाबला कर सके। दूसरी ओर जहां आप पार्टी ने दिल्ली और पंजाब फतह किया। लेकिन दूसरे प्रांतों में अप्रभावी रही, जबकि कांग्रेस ने पहले बीजेपी की दौलत शोहरत के सम्मुख सीमा तने गर्व से खड़ी रही। कांग्रेस और हिमाचल प्रदेश के बाद कर्नाटक में भी जीत हासिल कर सरकार बना ली। यहां समझने की जरूरत है कि देशभर के आदिवासी और दलित जनता कांग्रेस के साथ होती दिखाई दे रही है।
लोकसभा चुनाव पूर्व तेलंगाना, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में होने वाली विधानसभाओं में अपना परचम लहराएगी कांग्रेस। महाराष्ट्र में भले जयचंदों की कमी नहीं है। अपने अपने बासों की पीठ में छुरा भोंककर सत्तासुख ले रहे यह सुख अस्थाई है। आगामी चुनाव और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस राकांपा और शिवसेना मिलकर कब्जा कर लेंगे। हरियाणा में भी कांग्रेस की जीत बड़ी होगी। कुल मिलाकर आधे से ज्यादा प्रदेशों में कांग्रेस का शासन होने वाला है। यूपी में भी कांग्रेस आश्चर्य में डाल सकती है। जो बीजेपी और मोदी के सपनों पर तुषारापार करने के लिए काफी है।
Indian fasttrack newsकांग्रेस पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की तस्वीर
उत्तम बात यह हुई कि पटना में सभी विरोधी दलों को लगा कि राहुल गांधी ही मोदी के सर्वोत्तम विकल्प होंगे। गुजरात में राहुल को न्याय मिल नहीं सकता इस बात को बहुत पहले रेखांकित किया जा चुका है। मान लें सुप्रीमकोर्ट में भी लोकसभा चुनाव पूर्व न्याय नहीं मिला और राहुल जेल चले गए तो विपक्षी दलों को एकमत होकर प्रियंका गांधी अथवा कांग्रेस अध्यक्ष को विकल्प के रूप में सोचना होगा।
देश भर के आदिवासी और दलित एकजुट हो सकते हैं।
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चूंकि मापन्ना मल्लिकार्जुन खड़गे आदिवासी समुदाय के हैं। इसलिए देश भर के आदिवासियों और दलित उनके नाम पर एकजुट हो सकते हैं। सिर्फ उनके नाम की औपचारिक घोषणा करने की जरूरत होगी। चुनाव प्रचार में सिर्फ उनका नाम दलित आदिवासी समुदाय से जोड़ने की जरूरत होगी। यदि ऐसा हुआ और क्षत्रप मिलकर ईमानदारी से एक के सामने एक प्रत्याशी खड़ा करने की नीति का पालन करते हैं। तो आराम से विपक्षी दलों का गठबंधन 400 + सीटें जीतकर केंद्र में मोदी और बीजेपी को हटा कर नया इतिहास लिखेंगे। अभी तक दलित आदिवासी कभी भी देश का प्रधान मंत्री नहीं बना। खड़गे के रूप में आदिवासियों दलितों को अपना पीएम मिलने का स्वप्न साकार हो जाएगा।