Category: Mumbai News

  • आरएसएस ने मानी बीजेपी की हार।

    आरएसएस ने मानी बीजेपी की हार।

    • मोदी कराएंगे अपनी मर्जी का चुनाव।
    • मोदी के सामने आरएसएस हुआ बौना।
    • चार सौ का नारा केवल कार्यकर्ताओं को बचाने का सहारा।

    सुरेंद्र राय
    मुंबई– आरएसएस बीजेपी की मदर संगठन है। लेकिन आज मोदी के सामने बौना हो गया। कारण मोदी ने अपना कद इतना बढ़ा लिया जो लोकतंत्र के दायरे में फिट नहीं बैठता। वैसे आरएसएस भी लोकतंत्र और भारतीय संविधान को नहीं मानता। मनुस्मृति और एक पार्टी का शासन के लिए मोदी कृतसंकल्प हैं। लेकिन आरएसएस को लोकसभा चुनाव में बीजेपी के हाथ से बाजी जाती दिखती है।आरएसएस की नज़र में मोदी का करिश्मा व ख्याति खत्म हो चुकी है। (RSS And Modi Government BJP Political News)

    आरएसएस की सरकार में स्थिति क्या है?

    आरएसएस एक बार कांग्रेस का पहले समर्थन कर चुकी है। बीजेपी की सत्ता में आरएसएस को सुविधाएं तो मिलीं। सत्रसूख भी मिला मगर अस्तित्वहीन हो चुका है आरएसएस। सरकार पर कोई प्रभाव नहीं रहा। हिंदू कार्ड भी राम मंदिर बन जाने से फेल हो गया है। आरएसएस का हिंदुत्व अंतिम स्वांस गिन रहा। महाराष्ट्र में एम एन एस से गठजोड़ होने की स्थिति में उत्तर भारतीय संगठन बीजेपी का साथ छोड़ने की घोषणा कर चुके हैं। (RSS And Modi Government BJP Political News)

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    एम एन एस से गठबंधन के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ लाखों वोटर्स बीजेपी से किनारा करेंगे। गुजरात के कच्छ में तेईस गांव के लोग चुनाव का बहिष्कार की घोषणा कर चुके हैं। अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी ने दिल्ली के लोगों को नाराज़ कर दिया है। गिरफ्तारी का प्रभाव पंजाब और हरियाणा में भी पड़ेगा। (RSS And Modi Government BJP Political News)

    आरएसएस,
    आरएसएस संगठन की प्रतिकारात्मक फाइल तस्वीर

    पूर्वोत्तर के मणीपुर, मिजोरम जैसे प्रदेशों में जाने की हिम्मत मोदी नहीं दिखा रहे। महिला खिलाडियों को जिस तरह दिल्ली पुलिस द्वारा सड़क पर घसीटा गया। बलात्कारी को बचाया गया। किसान आंदोलन दो के समय ड्रोन से आंसू गैस के गोले गिराए गए। दुनिया में बैन पेयलेट गन चलाकर किसानों की आंखें फिफी गई। एम एस पी लागू करने के वादे से मोदी पीछे हटे, सड़क पर नुकीले कीलें जड़ी गई।किसान नाराज हैं। (RSS And Modi Government BJP Political News)

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    बीजेपी को भी हार का भय सता रहा है। लोग टिकट मिलने पर भी चुनाव से कतरा रहे है। और भी नेता बीजेपी छोड़कर भाग रहे है। ए बी पी सर्वे में दो सौ सीटें भी बीजेपी पाने की स्थिति में नहीं है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में देश भर से मिले समर्थन ने बीजेपी और आरएसएस की नींद उड़ा दी हैं।इंडिया गठबंधन और भी मज़बूत हुआ है। छोटे छोटे दलों को जिस तरह बीजेपी से जोड़ा जा रहा है उसकी हताशा ही झलकती है। चार सौ का नारा केवल कार्यकर्ताओं को ढाढस बंधाने के लिए दिया जा रहा है। तीनों चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कर मोदी ने संदेश दिया है कि वे आयोग द्वारा अपनी मर्ज़ी का चुनाव कराएंगे। (RSS And Modi Government BJP Political News)

  • INDIA: दिल्ली में परिवार बचाओ रैली

    INDIA: दिल्ली में परिवार बचाओ रैली

    • इन नेताओं से पूछिए की लोकतंत्र की परिभाषा क्या है?
    • एक दूसरे के घोर विरोधी सब एक हो गए हैं।
    • INDIA गठबंधन के 28 दलों के नेताओं का मोदी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

    वी बी माणिक
    नई दिल्ली-
    कल पूरा विपक्षी पार्टियों के कुल 28 दलों के नेताओ ने मोदी के विरुद्ध लोकसभा चुनाव में इज्जत और परिवार बचाओ रैली निकाल कर सभी से चुनाव में मतदान करने के लिए आह्वान किया है। जिसमें मुख्य आकर्षण सुनीता केजरीवाल, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, फारूक अब्दुल्ला, लालू प्रसाद यादव, सीताराम येचुरी, शरद पवार, महबूबा मुफ्ती, अखिलेश यादव एवं अन्य नेता उपस्थित हुए सभी ने एक स्वर में अरविंद केजरीवाल को जेल से छुड़ाने के लिए आवाज उठाया। (india political news)

    आप को बता दें, कि इसी रामलीला मैदान में 2012 में केजरीवाल ने अन्ना हजारे के साथ मिलकर राजनीति नहीं करने की शपथ ली थी। पर हजारे को धोखा देकर दिल्ली की सत्ता पर कब्जा कर लिया और घोटाले में जेल की यात्रा पर चले गए। वही राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि मोदी ने क्रिकेट में मैच फिक्सिंग की तरह ईडी, सीबीआई और इनकमटैक्स डिपार्टमेंट जैसे सरकारी विभागों को लगाकर चुनाव जीतने की तैयारी में लगे है। (india political news)

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    INDIA गठबंधन..

    राहुल क्या क्या बोलते है ये किसी भी जनता के समझ मे नही आता है। ईवीएम तो कांग्रेस ही लायी थी। आज उसका विरोध कर रहे हैं। संविधान समाप्त हो जाएगा बीजेपी से जनता को छुटकारा पाने का चुनाव है। सुनीता ने कहा कि केजरीवाल जेल से सरकार चलाएंगे। इस इंडिया गठबंधन में आधे से ज्यादा नेता बेल पर है और कुछ जेल में है। क्या सत्ता धारी पार्टी के नेता ही भ्रष्टाचार में लिप्त है। यहां तो हर छोटे से बड़ा नेता किसी न किसी घोटाले में लिप्त है। (india political news)

    India,
    दिल्ली के रामलीला मैदान से विरोध प्रदर्शन की तस्वीर

    भाजपा नेताओं ने कहा इस गठबंधन में भ्रष्टाचारी सब एक हो गए है जो कभी एक दूसरे के घोर विरोधी थे। आज सब एक दूसरे की गोद मे बैठे है क्या केवल चुनाव जीतकर जनता को लूटने का संकल्प ले रखा है? अभी तक सीट बंटवारा नही हो सका है बात एकता की कर रहे है। जनता इनको जिताने वाली नही है। क्या करेंगे ? (india political news)

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    अखिलेश यादव को बताना चाहिए कि उत्तरप्रदेश में जो जंगल राज की सरकार चला रहे थे इनके कार्यकर्ता पुलिस थानों, सरकारी कार्यालयों में दलाली करते थे। महिलाएं अपने को असुरक्षित महसूस करती थी। पुलिस शिकायत नही सुनती थी। पुलिस कर्मी थानों में बैठकर खुलेआम शराब पीते थे। इस पर कितना कंट्रोल किया था। वही मानसिकता पुलिस वालों की आज भी है। भले योगी की सरकार हो। क्योंकि अखिलेश वाली मानसिकता अभी तक गयी नही है। सारे नेता लोकतंत्र की बात करते है इन नेताओं से पूछिए की लोकतंत्र की परिभाषा क्या है? (india political news)

  • मालवनी इलाके से हत्यारा नकली डॉक्टर अपनी पत्नी के साथ हुआ गिरफ्तार

    मालवनी इलाके से हत्यारा नकली डॉक्टर अपनी पत्नी के साथ हुआ गिरफ्तार

    कुल 4 अपराधिक मामलों का आरोपी एक बार फिर नकली डॉक्टर की भेष मे लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करता गिरफ्तार हुआ है।

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    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    मुलुंड पुलिस थाने से फरार हत्या के 46 वर्षीय आरोपी परवेज़ अब्दुल अजिज शेख और उसकी पत्नी बीयूएमएस पदवीधर डॉक्टर को मुंबई क्राईम ब्रांच युनिट 12 की पुलिस ने मालाड़ पश्चिम के मालवनी इलाके से गिरफ्तार किया है। मालवनी गेट नंबर 7 संत पॉल स्कूल के पास “अजिज पॉली क्लिनिक” के नाम पर नकली दवाखाना चलाया जा रहा था। इसके पहले भी यहीं से पती पत्नी को गिरफ्तार किया  गया था।

    मुंबई पुलिस प्रकटीकरण-1 के पुलिस उपायुक्त विशाल सिंह ठाकुर ने बताया, कि मुलुंड पुलिस थाना अंतर्गत गुनाह रजिस्टर्ड क्रमांक 298/2023 में भारतीय दंड संहिता की धारा 112, 117, 120(ब), 302, 307, 416, 419, 465, 426, 471, 34 के साथ महाराष्ट्र मेडिकल प्रेक्टीशनर्स एक्ट 1961 की धारा 33, 33(अ), 34, 36 के तहत फरार आरोपी द्वारा मालवनी इलाके में दवाखाना चलाकर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई।

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    मार्व रोड़ के चारकोप नाका स्थित रक्षा हॉस्पिटल की करतूत

    मुंबई क्राईम ब्रांच युनिट 12 के अधिकारियों ने बृहन्मुंबई महानगर पालिका, मालाड़, पी/उत्तर विभाग के असिस्टेंट मेडिकल ऑफिसर को साथ लेकर जब इस नकली दवाखाने में छापा मारा तो वहा आरोपी अजिज के साथ उसकी पत्नी बीयूएमएस पदवीधर डॉक्टर भी उसके अपराध में आरोपी का साथ देते पाईं गई। हालांकि आरोपी की पत्नी डॉक्टर जरूर है लेकिन जीन दवाईयों को उन्हें देने का अधिकार प्राप्त नहीं है उन दवाईयों और इंजेक्शन्स का यहां मरीज़ों पर इस्तेमाल किया जा रहा था।

    नकली डॉक्टर का लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़

    अजिज पॉली क्लिनिक के भीतर की तस्वीर
    डॉक्टर,
    क्लिनिकल की तस्वीर

    मुंबई क्राईम ब्रांच युनिट 12 के अधिकारियों ने दोनों पती पत्नी को हिरासत में लेकर मालवनी पुलिस थाने में गुनाह रजिस्टर्ड क्रमांक 431/2024 में भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 34 के साथ महाराष्ट्र मेडिकल प्रेक्टिसनर्स एक्ट की धारा 33, 33 (अ), 33(ब), 35(2), 36 के तहत मामला दर्ज किया है। मालवनी पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है।

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    बता दें कि इससे पहले आरोपी परवेज़ अब्दुल अजित शेख के खिलाफ मालवनी पुलिस थाने में 2 ठाणे शहर के कापूरबावडी पुलिस थाने में एक अपराधिक मामला दर्ज है। साथ ही अजित की 32 वर्षीय पत्नी बीयूएमएस पदवीधर डॉक्टर के खिलाफ मालवनी पुलिस थाने में एक अपराधिक मामला दर्ज है। 2023 में गिरफ्तारी और जमानत पर रिहा होने के बाद फिर से दोनों पती और पत्नी मालवनी परिसर के उसी नकली दवाखाने को  “अजिज पॉली क्लिनिक” के नाम से चला रहे थे।

  • इलेक्टोरल बॉन्ड का झोल।

    इलेक्टोरल बॉन्ड का झोल।

    • इलेक्टोरल बॉन्ड का झोल सामने आते शुरू हुआ देश में राजनैतिक भूचाल।
    • कौन से दल ने कितना किया झोल?
    • रिपोर्ट अभी और बाकी है..
    • Electoral Bond Indian Government Political News

    सुरेन्द्र राय
    मुंबई-
    हम भारतीय अपने जहन में कई वर्षो से लगातार एक जटिल समस्या का हल ढूंढ रहे है और वह जटिल समस्या यह है, कि इंसान अंततः भ्रस्ट क्यों हो रहा है? जबकि हमारे भारतीय समाज में भ्रस्टाचार के वर्चस्व का एक नया स्तंभ स्थापित हो चुका है और हमने इसमें ज्ञान, दौलत और हिंसा की एक ऐसी मिसाल इलेक्टोरल बॉन्ड जैसे को खड़ी कर दी है, जो भ्रस्टाचार और सत्ता के मध्य अटुट और अतरंग संबंध स्थापित करती नजर आ रही है। (Electoral Bond Indian Government Political News)

    हालांकि यह सत्ता विमर्श एक गंभीर जिरह की मांग करता है, जो सामाजिक विकास कार्य में अवरुद्ध करने वाला घटक के रूप में साबित हो रहा है, जो एक भ्रस्ट आचरण की पहचान है। जिसकी हमें घोर निंदा की जानी चाहिए।
    अब ऐसे में पिछले पांच वर्षों में कंपनियों ने अपने फ़ायदे के लिए सरकार को इलेक्टोरल बॉन्ड के ज़रिए कितना पैसा दिया यह पूरी तरह से अभी खुला नहीं है। घाघ लोगों का खुलासा एस बी आई ने नहीं किया। पांच वर्षों में किस कंपनी ने कितना चंदा दिया? (Electoral Bond Indian Government Political News)

    ‘बिजनेस टाइम्स’ मैगज़ीन में छपी खबर के अनुसार भारती एयरटेल में 241 करोड़, तता स्टील ने 175 करोड़, एल एन्ड टी ने 85 करोड़, महेंद्रा एन्ड महिंद्रा ने 39 करोड़, अल्ट्राटेक सीमेंट ने 23 करोड़, बजाज फाईनैंस ने 20 करोड़, मारुति सुज़ुकी ने 20 करोड़, टेक एम ने 15 करोड़ रुपए के बॉन्ड खरीदे। बीजेपी को पिछले दो वर्षों में यानी 2019 में 216.9 करोड़, 2023/24 में 296.12 करोड़ मिले। जबकि कांग्रेस को 2019 में मात्र 15.85 करोड़ और 2023/24 में 81.1 करोड़ मिले। इसके साथ ही दूसरे दलों को 2019 में 4.55 करोड़ और 2023/24 में 33 करोड़ मिले। (Electoral Bond Indian Government Political News)

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    Indian Fasttrack Political News

    किसने कितने खरीदे इलेक्टोरल बॉन्ड ?

    पिछले पांच साल इलेक्टोरल बॉन्ड में कितने पैसे मिले हैं इसपर नज़र डालें तो पता चलता है, कि 2019 में 237 करोड़ , 2020 में 46 करोड़, 2021 में 40 करोड़ रुपए मिले। जबकि 2022 में 563 करोड़ और 2023 में 347 करोड़ के साथ दो वर्षों का भारी उछाल देखने को मिला। 2024 में सिर्फ 65 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे गए। (Electoral Bond Indian Government Political News)

    इलेक्टोरल बॉन्ड,

    कांग्रेस के चारों एकाउंट आई टी ने फ्रीज किए हैं। इसलिए सुप्रीमकोर्ट द्वारा गैरकानूनी गैरसंवैधानिक बताए जाने पर बीजेपी के भी खाते सीज करने की मांग की ज़ा रही है। यही न्याय का तकाज़ा भी है।
    प्रकाशित खबर के मुताबिक, फ्यूचर जेमिंग कंपनी द्वारा 149 करोड़ 2020 में, 324 करोड़ 2021 में, 440 करोड़ 2022 में, 321 करोड़ 2023 में और 2024 में 63 करोड़ क्षेत्रीय दलो जिसमें डी एम के, टी एम सी, वाई एस आर कांग्रेस और अन्य को दिए। (Electoral Bond Indian Government Political News)

    https://indian-fasttrack.com/2024/03/22/why-do-corporates-donate-its-a-business-but-its-dirty-electoral-bond
    Electoral Bond News

    जबकि 2019 में बीजेपी को 125 करोड़ 2021 में, 33 करोड़ 2022 में, 129 करोड़ और 2023 में, 297 करोड़ रुपये मेघा इंजीनियरिंग ने दिए। क्विक ने भाजपा को 325 करोड़ 2022 में, शिवसेना को 25 करोड़, 2023 में बीजेपी को 50 करोड़ दिए।
    इसके साथ ही लिस्टेड कंपनियों से बीजेपी को 2019 और 2023/24 में 216.9 करोड़ और 298.12 करोड़ रुपए मिले, जबकि कांग्रेस को 15.85 और 81.1 करोड़, अन्य दलों को 4.55 और 33 करोड़ मिले। (Electoral Bond Indian Government Political News)

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    टॉप 10 डोनर्स के 9.6 करोड़ मूल्य के इलेक्टोरल बॉन्ड एकस्पायर हो गए। जिनमे फ्यूचर जेमिंग के 3, ई सी एल के 2, पैसिफिया इंडिया के 1.25, सिलवेनस बिल्डर के 1, सी मेकर्तिच के 0.4, वेदांता लिमिटेड के 0.3, सुधा कमर्शियल के 0.3, जुपिटर के 0.25, उत्कल अलमुनियम के 0.2 करोड़ रुपए का इलेक्टोरल बॉन्ड एकस्पायर हो गया। अकेले जालान ग्रुप की कंपनी केवेंटर फूडपार्क ने बीजेपी को 144.5, कांग्रेस को 20, अकाली दल को 0.5, यस पी को 10, टी एम सी को 20 करोड़ रुपये दिए। (Electoral Bond Indian Government Political News)

    जबकि मदनलाल लिमिटेड ने बीजेपी को एकमुश्त 175 करोड़, कांग्रेस को 10 करोड़ और एम के जे ने कांग्रेस को 69.35, आप को 7, टी एम सी को 18.5, बी आर एस को 10, बीजेपी को 12.5, और बी जे डी को 10 करोड़ रुपए दिए। इसके साथ ही एम के जे ने कांग्रेस को 22.25, टी एम सी को 27.4, बीजेपी को 14.07 करोड़ दिए। सस्मल इंफ्रास्ट्रक्चर ने कांग्रेस को 39 करोड़ और बीजेपी को 5 करोड़ दिए। (Electoral Bond Indian Government Political News)

  • ठंडे पड़ गये हैं भारतीय जनता पार्टी के नेता

    ठंडे पड़ गये हैं भारतीय जनता पार्टी के नेता

    • भारतीय जनता पार्टी के नेता चुनावी समर भूमि में ठंडे पड़ गए हैं..
    • बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में पार्टी की नीतियों का हो रहा है खामियाजा..

    सुरेंद्र राय
    मुंबई-
    बड़ा शोर है भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार का लेकिन मोदी को छोड़कर एक भी चुनावी समर भूमि में सक्रिय नेता नहीं है। सबसे बड़ी 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के नेता चुनाव प्रचार में दूर दूर तक नजर नहीं आते। सबसे बड़ा हिंदुत्व चेहरा हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। जिनकी देश में बड़ी मांग है, लेकिन मोदी की तरह वे कहीं भी चुनावी मूड में नहीं दिखते।

    भारतीय जनता पार्टी का युपी में चुनाव प्रचार

    दो दो डिप्टी सीएम हैं जो अपनी खोल से अभी बाहर ही नहीं निकल सके हैं। प्रांतीय अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी भी कहीं नमूदार नहीं हो रहे। बड़े जोर शोर से ढिंढोरा पिटा गया था, चौधरी चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी का। उन्हें गाजे बाजे के साथ भारतीय जनता पार्टी में लाया गया। यह सोचकर कि उनके दादा चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देकर पश्चिमी यूपी की सारी सीटें बिना प्रचार किए भारतीय जनता पार्टी की झोली में आ गिरेंगी। परंतु अभी भी जयंत चौधरी पशोपेश में हैं। किसान बिरादरी उनके बीजेपी में जाने पर उनसे दूरी बना ली है। अब वे किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह की तरह किसानों के नेता नहीं रह गए हैं। बिना संख्या बल के वे भारतीय जनता पार्टी को कितनी सीटें दिलाएंगे खुद समझ नहीं पा रहे। चुनाव प्रचार तो बड़ी दूर की कौड़ी है उनके लिए। हालत यह हो गई है, “आधी छोड़ सारी को धावे। आधी मिले न सारी पावे।”

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    Election 2024

    तुरूप का इक्का ..

    भारतीय जनता पार्टी के साथी अनुप्रिया पटेल और बड़बोले अस्तित्वहीन ओमप्रकाश राजभर जिनकी अमित शाह ने उत्तर प्रदेश सरकार में ताजपोशी कराई है। छवि बेहद खराब होने से जनता उनसे कन्नी काटने लगी है। मेनका गांधी और संतोष गंगवार यूपी के आठ आठ बार सांसद रहे हैं। लेकिन उनके टिकट ही पक्के नहीं हुए हैं। करें भी तो क्या? टिकट मिलेगा या नहीं? कहा भी नहीं जा सकता। तुरूप का इक्का होने से रहे।

    भारतीय जनता पार्टी,

    बिहार की संसदीय गठबंधन ..

    सांसदों के लिहाज से बिहार में 40 सीटें होने से बिहार का बड़ा महत्त्व है। वहां गठबंधन तुड़ाकर नीतीश कुमार को भारतीय जनता पार्टी अपने पाले में भले ले आई है लेकिन जनता में उनकी पलटू चाचा की छवि बनने से उनकी खुद की छवि को बड़ा धक्का लगा है। जनता में उनकी पूछ नहीं रही। सुशील मोदी ज़रूर बड़ा चेहरा बने थे, लेकिन वे कहीं चुनाव प्रचार करते नहीं दिखते। राजीव प्रसाद रूडी का कहीं अता पता नहीं है। हरदम मोदी नाम की माला जपने और विपक्षी दलों को बुरा भला कहने वाले रवि शंकर प्रसाद नदारत हैं। उनके अलावा सम्राट चौधरी, गिरिराज सिंह और चौबे सांसद रहे हैं। बड़बोले भी लेकिन चुनाव प्रचार में वे दोनो दूर दूर तक नजर नहीं आते। गिरिराज सिंह का हाल यह है, कि उनकी भारतीय जनता पार्टी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मुर्दाबाद के नारे लगाए और काले झंडे दिखाकर उन्हें क्षेत्र में आने ही नहीं दिया।

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    महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार ..

    सीट के लिहाज से महाराष्ट्र 48 सीटों वाला बड़ा महत्त्वपूर्ण राज्य है। यहां के सबसे बड़े नेता हैं नितिन गडकरी जो भारतीय जनता पार्टी की नीतियों के धुर विरोधी रहे हैं। मुमकिन नहीं कि वे चुनाव प्रचार करेंगे। शिवसेना और राकांपा तोड़कर शिंदे और अजीत पवार के साथी छगन भुजबल, पटेल आदि पर खुद भारतीय जनता पार्टी ने हजारों करोड़ के घोटाले का मामला उठाकर उन्हें अपने साथ लाकर सरकार तो बना ली लेकिन महाराष्ट्र की जनता उन्हें गद्दार कहकर नफरत करती है। कुछ समय बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। उस चुनाव को याद कर ही सिहरने वाले ये नेता चुनाव प्रचार की हिम्मत भला कैसे दिखाएंगे? अपने ही बड़े नेता पूर्व मुख्यमंत्री का कद छोटा कर डिप्टी सी एम बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी उनसे चुनाव में कोई उम्मीद कैसे कर सकती है।

  • देवेंद्र फडणवीस का पीए बताकर 15 लाख की धोखाधड़ी, दो गिरफ्तार

    देवेंद्र फडणवीस का पीए बताकर 15 लाख की धोखाधड़ी, दो गिरफ्तार

    महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस का खुद को पीए बताकर 15 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। (Maharashtra Deputy Chief minister devendra fadnavis News)

    इस्माईल शेख
    मुंबई- शनिवार 23 मार्च, महाराष्ट्र राज्य के उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री देवेन्द्र फडणवीस का पीए बताकर 15 लाख रुपये की धोखाधड़ी किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में मुंबई पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान सुहास महाडिक और किरण पाटिल के रूप में हुई है। मामले की तहकीकात मरीन ड्राइव पुलिस कर रही है। (Maharashtra Deputy Chief minister devendra fadnavis News)

    पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, सुहास महाडिक और किरण पाटिल ने खुद को गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस का पीए बताकर Mumbai की एक सोसाइटी का मामला सुलझाने का प्रयास किया और इसको लेकर फडणवीस के नाम पर 15 लाख वसूले थे। लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो पीड़ित ने शनिवार को इन दोनों के विरुद्ध मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 170, 419, 420 और 34 के तहत मामला दर्ज कराया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को आज ही गिरफ्तार कर लिया है। (Maharashtra Deputy Chief minister devendra fadnavis News)

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    Indian fasttrack news

    लगातार हो रही है धोखाधड़ी ..

    धोखाधड़ी,
    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अमृता फडणवीस की फाइल तस्वीर

    आप को जानकारी देते हुए बताया, कि इससे पहले राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नाम पर धोखाधड़ी करने को लेकर पुलिस ने गिरफ्तारी की थी। इतना ही नहीं देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस से भी रंगदारी मांगने का प्रयास किया गया था। जिसको लेकर पुलिस ने आरोपित पति-पत्नी को गिरफ्तार किया था। (Maharashtra Deputy Chief minister devendra fadnavis News)

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  • मालाड़ BMC का चाईना मुकादम मालवनी इलाके में सुर्खियां बटोर रहा है।

    मालाड़ BMC का चाईना मुकादम मालवनी इलाके में सुर्खियां बटोर रहा है।

    बताया जाता है कि मार खाने के बाद से मालाड़ BMC मालवनी का चाईना मुकादम इमानदार हो गया है। वार्ड क्रमांक 33 में 8 जगहों पर दिन दहाड़े अवैध निर्माण।

    इस्माईल शेख
    मुंबई
    – मालाड़ पश्चिम के मालवनी इलाके में अवैध निर्माणों की भरमार हो रही है। मलबे में दबकर लोगों की मौत के बाद भी यहां अवैध निर्माण को बे-रोक-टोक अंजाम दिया जा रहा है। खास कर वार्ड क्रमांक 33 में 7 जगहों पर खाली पड़ी भूखंड पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। साथ ही रिझवान कंपाउंड के ग्राउंड प्लस एक के अवैध निर्माण की लगातार शिकायतों के बाद भी मनपा सहायक अभियंता सागर राणे की ड्यूटी नकारात्मक साबित हो रही है।

    बताया जाता है कि मालवनी वार्ड क्रमांक 33 का मनपा चाईना मुकादम इस्तेखार और राधे यादव इन अवैध बांधकामों को पैसे लेकर संरक्षण देने का काम कर रहे हैं। खबर के मुताबिक चाईना मुकादम इस्तेखार एक अवैध निर्माण की मनपा कर्मचारियों द्वारा तोड़क कार्रवाई में मार खाने के बाद से इमानदार हो गया है। यहां पैसे लेकर अवैध बांधकाम को संरक्षण देने का वादा किया गया था। लेकिन मनपा अधिकारियों को पैसे नहीं पहुंचाने की वजह से तोड़क दस्ते ने अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद गुस्साए लोगों ने सरे आम इस्तेखार को पिटना शुरू कर दिया।

    https://indian-fasttrack.com/2024/03/19/malvani-police-is-cleaning

    अवैध निर्माणों की रिपोर्ट ..

    मालवनी वार्ड क्रमांक 33 आज़मी नगर संत. मेथ्यूस इंग्लिश स्कूल के पास लगभग 3 हज़ार स्क्वायर फीट की रिक्त भूखंड पर कॉन्ट्रैक्टर महबूब द्वारा व्यवसायिक गाले का अवैध निर्माण किया जा रहा है। वहीं खारोडी इलाके के हनुमान मंदिर के पास अदालत कंपाउंड की रिक्त भूखंड पर लगभग 4 हज़ार स्क्वायर फीट में अवैध निर्माण का बांधकाम अवैध कॉन्ट्रैक्टर अदालत द्वारा किया जा रहा है। वहीं खारोडी के काल भैरव मंदिर और गावदेवी मंदिर के पीछे, साई श्रद्धा सोसायटी, फैय्याज की गली में रिक्त भूखंड पर कॉन्ट्रैक्टर बबलू वेल्डर द्वारा ग्राउंड प्लस दो के 2 रूमों का अवैध निर्माण किया जा रहा है। साथ ही कॉन्ट्रैक्टर विजय जगताप द्वारा राठोडी के ‘अंबेवाडी रहिवासी वेल्फेयर सोसायटी’ में रिक्त भूखंड पर एक अवैध रुम का अवैध बांधकाम कर रहा है। वहीं राठोडी गांव के ओमजी कंपाउंड 16 फिट रोड़ पर पूर्णिमा इलेक्ट्रॉनिक्स के सामने कॉन्ट्रैक्टर ख़ैरियत अली द्वारा एनडी जोन वाली लगभग 600 स्क्वायर फीट जमीन पर 3 रूमों का अवैध बांधकाम कर रहा है। इसके साथ ही राठोडी गांव स्थित ओमजी रिझवान कंपाउंड के ‘ओम विनायक वेलफेयर सोसायटी’ में ग्राउंड प्लस एक महले का अवैध निर्माण किया जा रहा है।

    चाईना, मुकदमा,
    मालाड़ पी/उत्तर विभाग के दुय्यम अभियंता रंजित पाटिल की अवैध निर्माण के साथ फाइल तस्वीर

    एक नही दो-दो चाईना मुकादम ..

    बता दें कि यह सारे अवैध निर्माण मनपा पी/उत्तर विभाग अंतर्गत वार्ड क्रमांक 33 में बे-रोक-टोक चाईना मुकादम के अंडरगाईडेंस में किया जा रहा है। मनपा पी/उत्तर विभाग, इमारत बांधकाम विभाग के सहायक अभियंता सागर राणे से लगातार इन अवैध निर्माणों के खिलाफ शिकायतें की जा रही है। वार्ड के मनपा दुय्यम अभियंता रंजित पाटिल और मुकादम हेनराय गोनसल्वीस रिश्वत खोरी के दाग से बचने के लिए, निजी स्तर पर वार्ड मे इस्तेखार और राधे यादव को चाईना मुकादम के तौर पर नियुक्त किया है। आप को यह भी बता दें कि अवैध निर्माण के इस लेन देन में लाखों रुपयों का खेल चलता है। कभी पकड़े गए तो सरकारी नौकरी गवांनी पड़ सकती है। लेकिन वार्ड में नियुक्त ये दोनों चाईना मुकादम मनपा सहायक अभियंता सागर राणे और दुय्यम अभियंता रंजित पाटिल के साथ- साथ वार्ड के मुकादम हेनराय गोनसल्वीस के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।

    अवैध निर्माण की शुरूआत से पूरा होने तक यहां मनपा के अधिकारी पैसों को हाथ तक नहीं लगाते, सारा लेन देन इन चाईना मुकादमों द्वारा अवैध निर्माणकर्ताओं और मकान मालिकों से किया जाता है। कुछ हफ़्तों बाद जब मामला सलट जाता है। तब, मनपा अधिकारियों द्वारा इन मुकादमों से पूराने पैसों की डिमांड की जाती है। इससे भ्रष्टाचार में उनके फसने का खतरा कम हो जाता है। ऐसे ही एक मामले में इस्तेखार द्वारा पैसे गबन किए जाने के बाद पूर्व मनपा अधिकारियों ने अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। इससे गुस्साए पीड़ितों ने प्रशासन के सामने ही चाईना मुकादम की पिटाई कर दी। लेकिन इस घटना के बाद से इस्तेखार सुधार चुका है। मनपा अधिकारियों और कर्मचारियों के रिश्वत के पैसे अपने बैंक के खातों मे संभाल कर रखता है और समय पर पेमेंट पूरा भी करता है। इसीलिए इस्तेखार और राधे यादव द्वारा संरक्षित अवैध निर्माणों पर तोड़क कार्रवाई नही होती।

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  • कॉरपोरेट देता क्यों है चंदा। धंधा है, पर गंदा है।

    कॉरपोरेट देता क्यों है चंदा। धंधा है, पर गंदा है।

    • कॉरपोरेट सत्तारुढ दल को हजारों करोड़ों का चंदा देते ही क्यों है?
    • चंदे का गंदा धंधा ही ऊपरी स्तर पर भृस्टाचार का मूल है।
    • Electoral Bond ADR Report

    सुरेंद्र राय
    मुंबई:
    अपने देश में चंदा लेना और देना धंधा है पर बहुत ही गंदा है। कॉरपोरेट का काम है अपना बिजनेस ढंग से चलाना। उसे आगे बढ़ाना। फिर प्रश्न उठता है, कि आखिर कॉरपोरेट राजनीतिक दल विशेष रूप से सत्तारूढ़ दल को हजारों करोड़ों का चंदा देते ही क्यों हैं? क्या सरकार उनपर दबाव डालती है? जैसे तीस कंपनियों के पीछे सी बी आई के छापे डलवाकर दबाव बनाया और साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए की प्रोटेक्शन मनी ली गई। जिसकी न्यायिक जांच कर कानूनी कार्रवाई करने की जरूरत है और साथ ही सत्ता प्रतिष्ठान को भी सबक सिखाना अपरिहार्य है। (Electoral Bond ADR Report)

    चंदा देश में गंदा काम ..

    चंदा दो। गलत तरीके से काम करते रहो। टैक्स चोरी करते रहों। बस ध्यान रखना चंदा देते रहो। दूसरा पक्ष है सरकार को चंदा दो और सरकार चंदे से कई गुना लाभ कमाने का अवसर देगी। कॉरपोरेट सेक्टर की लगभग पच्चीस लाख करोड़ की बैंक ऋण माफी इसी चंदे के गंदे धंधे का ही परिणाम थी। सुप्रीमकोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड को गैर संवैधानिक बताकर गंदे खेल की दुखती रग पर हाथ रख दिया है। (Electoral Bond ADR Report)

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    Member of Parliament Election 2024 India

    एस बी आई जो सरकारी बैंक ने चंदे के गंदे धंधे को छुपाने की कोशिश की लेकिन सुप्रीमकोर्ट ने गर्दन ही मड़ोड दी। कॉर्पोरेट और धनी कर्णवीर जैसा दानी तो होते नहीं। चैरिटी के नाम पर लाल पाई न देने वाले धनवान राजनीतिक दलों को चंदा देते हैं तो वह बिज़नेस में उतनी ही पूंजी लगाते हैं जिसका कई गुना सरकार उन्हें फ़ायदा करती है। यह चंदे का गंदा धंधा ही ऊपरी स्तर पर भ्रष्टाचार का मूल है। (Electoral Bond ADR Report)

    किसने कितना दिया चंदा ?

    चंदा देने की बात करें तो फार्मा से 78.7% , खनन से 18.5% , स्टील से 10.0% , टेलिकॉम से 9% , और सिमेंट उद्योग से 6.1% , प्लास्टिक उद्योग से 0.12% , ऑटो सेक्टर से 0.11% , पेट्रोकेमिकल से 0.02% , पेपर से 0.02% , और ई एम जी सी से 0.01% डोनेशन दिए गए। अकेले फ़रवरी 2024 की बात करें तो बीजेपी को 90%, क्षेत्रीय दलों को 58.2% और कांग्रेस को मात्र 24.2% चंदा मिला। अकेले कोलकाता के संस्थानों में हल्दिया एनर्जी ने 337 करोड़, इसेल माइनिंग एंड इंड्रस्ट्रीज ने 224.5 करोड़ , केवेंटर फुडपार्क इन्फ्रा ने 195 करोड़ , मदनलाल ने 185 करोड़ , और एम के जे इंटरप्राइज में 128 करोड़ रुपए चंदा दिया है। (Electoral Bond ADR Report)

    Electoral Bond ADR Report

    चंदा, Electoral Bond,

    चंदा देने के तरीके भी मजेदार हैं। जैसा कि बॉन्ड खरीदने वालों ने अपने यहां इंट्री की है। वेदांता लिमिटेड ने डोनेशन दिखाकर फ़रवरी 23 में 123 करोड़ और फ़रवरी 24 में 155 करोड़ दिए। भारतीय एयरटेल ने दूसरे व्यय दिखाकर फ़रवरी 23 में 102.5 करोड़ और फ़रवरी 24 में मात्र 30 करोड़ दिए। जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड ने डोनेशन दिखाकर फ़रवरी 23 में 13 करोड़ और फ़रवरी 24 में 25 करोड़ दिए। सिप्ला लिमिटेड ने मिसलेनियस खर्च दिखाकर फ़रवरी 23 में कुछ नहीं तो फ़रवरी 24 में 24.2 करोड़ चंदा दिया। (Electoral Bond ADR Report)

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    टोरेंट पावर लिमिटेड ने डोनेशन दिखाकर फ़रवरी 23 में 27.5 और फ़रवरी 24 में 23 करोड़ दिए। अरबिंदो फार्मा लिमिटेड ने डोनेशन दिखाकर फ़रवरी 23 में 5.5 करोड़ जबकि फ़रवरी 24 में 21.5 करोड़ के बॉन्ड खरीदे। द रामको सिमेंट ने सीधे सीधे डोनेशन दिखाकर फ़रवरी 24 में 20 करोड़ के बॉन्ड खरीदे। हीरो मोटोकॉर्प लिमिटेड ने बॉन्ड नहीं लेकर लिगल तरीके से अंडर सेक्सन 182 ऑफ कंपनीज एक्ट 2023 के अनुसार फ़रवरी 24 में 20 करोड़ सीधे सीधे डोनेशन दिया। कॉमेंट सेल्टर से 233 करोड़ के बॉन्ड लिए गए जिसमें वेदान्त और आदित्य बिरला ग्रुप टॉप पर रहा। (Electoral Bond ADR Report)

    सोचने की बात यह है कि सत्ता दल को करोड़ों रूपए बॉन्ड के द्वारा देने पर फ़रवरी 23 और फ़रवरी 24 में उनकी बैलेंस सीट में कितनी वृद्धि और फ़ायदा मिला। जिसकी न्यायिक जांच कर कानूनी कार्रवाई करने की जरूरत के अलावा सत्ता प्रतिष्ठान को भी सबक सिखाना अपरिहार्य है। (Electoral Bond ADR Report)

  • Maharashtra; राज्य सरकार नहीं चाहती निष्पक्ष चुनाव ?

    Maharashtra; राज्य सरकार नहीं चाहती निष्पक्ष चुनाव ?

    चुनाव अधिकारियों के जरिये खुद के पक्ष में जीत हासिल करने के प्रलोभन में महाराष्ट्र की सरकार तबादले को रोके हुए है। शिंदे सरकार पर उठते सवाल?

    सुरेन्द्र राय
    मुंबई-
    आम चुनाव आते ही बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर का दौर शुरू हो जाता है। सरकारें चुनाव आयोग पर दबाव डालती रहती हैं, ताकि ऐसे अधिकारी रहें जो उसकी पार्टी को चुनाव जीताने में मदद करें। महाराष्ट्र के चुनाव आयोग ने बीएमसी में बहुत समय से अपना साम्राज्य बनाकर बैठे अधिकारियों के ट्रांसफर का आदेश दिए हैं। लेकिन शिंदे सरकार उन्हें हटा नहीं रही। क्यों यह तो सरकार ही बता सकती है?

    महाराष्ट्र चुनाव आयोग के निर्देश।

    सूत्रों के अनुसार बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) कमिश्नर इक़बाल सिंह चहल, उपायुक्त अश्विनी भिड़े और बेलरासू चार-चार साल से अपने पदों पर एक ही जगह बैठे हैं। जिन्हें हटाने का आदेश महाराष्ट्र चुनाव आयोग ने दे दिया है। परन्तु शिंदे सरकार हटाने को तैयार ही नहीं हैं। कारण ये अधिकारी शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के समय पदनिर्देशित किए गए थे। जिन्हें उद्धव ठाकरे गुट के खास भी माने जाते हैं। अगर तीनों बड़े मनपा अधिकारियों के ट्रांसफर नहीं किए गए तो निष्पक्ष चुनाव हो ही नहीं पाएगा। इसकी भी जानकारी सूत्र बताते हैं।

    https://indian-fasttrack.com/2024/03/14/the-slogan-of-every-party-is-all-seats-are-ours
    Indian Political news

    आयुक्त इकबाल सिंह चहल को शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट का माना जाता है। 15 मार्च तक चुनाव आचार संहिता लागू होने वाली है। अतः दो दिनों में तीनों बड़े अधिकारियों को हटाना ज़रूरी है। मगर अभी तक चुनाव आयोग के आदेश के बावजूद हटाया नहीं गया है। ख़बर के मुताबिक, आयुक्त इक़बाल सिंह चहल को सेक्रेटरी बनाया जाना है। या बनना चाहते हैं। इसलिए वे यहां से हटना नहीं चाहते। इसके साथ ही परदेशी को मनपा आयुक्त बनाने की बात चली लेकिन परदेशी ने रुचि नहीं दिखाई और साफ तौर पर मना कर दिया, कि वे इच्छुक नहीं है।

    चुनाव,

    मुख्यमंत्री के बांधें है किसी ने हाथ ..

    चुनाव आयोग की सख्ती और तीनों पदों पर राज्य सरकार किसे लाती है। इस बात को लेकर मुंबई में चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्ष कांग्रेसी नेता विजय वेडेट्टीवार का कहना है, कि मुख्यमंत्री का हाथ किसने बांध दिया है? क्या इन अधिकारियों का दबाव शिंदे पर है? हो सकता है, शिवसेना में रहते हुए शिंदे के तीनों अधिकारियों से मधुर संबंध रहे हों। उन्होंने राज्य चुनाव आयोग के साथ ही केंद्रीय चुनाव आयोग को भी पत्र लिखा है।

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    इसके साथ ही, सुधाकर शिंदे के संदर्भ में आरोप है, कि वे आईएएस नहीं होने के बावजूद भी आईएएस पद पर बैठे हुए हैं।उन्होंने साकीनाका झोपड़पट्टी पुनर्वसन में करोड़ों के घोटाले के साथ ही फर्जी लोगों को जालसाजी कर आवास आवंटन करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने सीट से जांच कराने की भी मांग की है।

  • हर दल का नारा है, सारा सीट हमारा है।

    हर दल का नारा है, सारा सीट हमारा है।

    देश में चुनावी बिगुल बजने की तैयारी जोरों-शोरों से की जा रही है। किसी का टिकट कटा तो किसी ने पाला बदला। समय ही बताएगा कि ऊंट किस करवट बैठता है।

    वी बी माणिक
    मुंबई
    – समय आ गया चुनावी बिगुल बजने वाला है। सारे योद्धा मल्ल युद्ध की तैयारी में जी-जान से जुट गए है। जिन पहलवानों को टिकट नही मिलने वाला है वह अपने भाग्य की आज़माइश निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अखाड़े में उतरेंगे और अपने दल का सत्यानाश करेंगे। (indian politics and election News)

    सभी राजनीतिक दल अपने सारे हथियारों पर धार देना शुरू कर दिया है। टीवी चैनलों पर ओपिनियन पोल आने शुरू हो गए है। सारे चैनल कौन जीतेगा? कौन हारेगा? इसकी भविष्यवाणी कर रहे है। जो कि परिणाम के बाद सब गलत साबित होता है। इसके साथ ही इन नेताओं की पत्नियां मन्दिरो में जाकर बड़े-बड़े मन्नत चुनाव जीतने के लिए मांग रही है। भले ही पांच वर्ष मंदिर में पूजा नही करती है। बड़े पैमाने पर दल बदल भी शुरू हो गया है। हर जगह चुनावी सभाएं, संपर्क अभियान, भारत जोड़ो यात्रा, लूट हत्या, अपहरण की घटनाएं बढ़ती जा रही है। (indian politics and election News)

    अपराधियों को लोकसभा में घुसाने की तैयारी ..

    अनेको प्रकार के आश्वासन, प्रलोभन भी दिए जा रहे हैं। इस बार तो कई माफियाओ और अपराधियों को टिकट देकर लोकसभा में भेजने की तैयारी की जा रही है। जन मानस सोच में पड़ गया है कल ये गुंडा इस पार्टी में था अब इसको दूसरी पार्टी ने चुनाव का टिकट दिया? अगर सही मायने में देखा जाय तो करीब 50 प्रतिशत लोग स्वेच्छा से मतदान करना ही नही चाहते 30 प्रतिशत लोग मतदान के दिन अपना घर छोड़कर घूमने निकल जाते है। (indian politics and election News)

    https://indian-fasttrack.com/2024/03/10/congress-leader-sanjay-nirupam-angry-at-uddhavs-announcement
    Mumbai congress and shivsena maha vikas aghadi gatbandhan news

    मुफ्त की शराब ..

    इनके नाम पर फर्जी मतदान करवाया जाता है। बूथ कैप्चरिंग, मतपेटी गायब करना बंदूक की नोक पर बूथ पर पूरी तरह कब्जा करके अपने प्रत्याशी को विजयी बनाने के लिए राजनीतिक पार्टीया पूरी तैयारियां करती है। फिर भी साफ सुथरी चरित्रवान छवि ईमानदार कर्मठ नेता कहलाते है और वोट के लिए नोटों के बंडल के साथ शराब मुफ्त में वितरण करवाना ये सब तैयारियां शुरू हो गयी है। (indian politics and election News)

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    Indian वोट किसे दें ?

    सभी राजनीतिक दल नए-नए हथकंडे अपनाएंगे। अभी भी लोग असमंजस में है, वो किसको वोट दें? किसको न दें? वही दूसरी ओर चुनाव आयोग भी पूरी निष्पक्षता से काम नही करता। सभी उम्मीदवारों की आपराधिक घटनाओं की जाँच करवाना चाहिए जिसके ऊपर एक भी केस विचारसधीन हो या पुलिस में दर्ज हो उसको चुनाव लड़ने से वंचित कर देना चाहिए। पर चुनाव आयोग इस तरह की न्यायिक कार्यवाही कर नही सकता। क्योंकि चुनाव आयोग कोई कार्य, निष्पक्षता से नही करता है। अपने समय पर चुनाव करवाये समय पर सारे कार्य करे ये भी राजनीतिक दलों के हाथ की कठपुतली बने हुए हैं। (indian politics and election News)

    आजकल में ही आचार संहिता लगने वाला है ये सभी दलों को मालूम है। कुछ पार्टीयो ने तो अभी तक अपने प्रत्याशियों का चयन भी नही किया है। सभी प्रत्याशियों के सम्पत्ति की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पर चुनाव आयोग ये कभी नही करवाएगा। जो उम्मीदवार पहले जीतकर लोकसभा में रह चुके है। उनकी जाँच काफी गम्भीरतापूर्वक होनी चाहिए, कि इस सांसद के पास इतना धन संपत्ति कहां से आया है। इसके पहले कितना था चुनावी चंदे के चक्कर मे बैंक ही आरोप के कटघरे में खड़ा हो गया। (indian politics and election News)

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    कौन है ईमानदार ?

    अब ईमानदार कौन रह गया? ये सबसे बड़ा प्रश्न खड़ा हो गया है। जहाँ आचार संहिता लागू हुआ कोई भी आम नागरिक लाख पचास हजार रुपये लेकर नही चल पाएगा। उसको स्थानीय पुलिस परेशान करेगी इसके अलावा ईडी, सीबीआई छापेमारी और तेज हो जाएगी। कुछ पकड़े जाएंगे, कुछ छोड़े जाएंगे। हर पार्टीया दावा कर रही है, कि इस बार सत्ता हमारी आएगी। पर इसका फैसला तो देश का मतदाता करने वाला है। पर नेताओ के दावे बड़े बड़े है काम किसी का नही दिखाई पड़ रहा है। अब आगे चलकर देखना है, कि ऊंट किस करवट बैठता है। (indian politics and election News)