Category: BMC Updates

  • तृतीय पंथियों को नौकरियों में आरक्षण कब देगी सरकार

    तृतीय पंथियों को नौकरियों में आरक्षण कब देगी सरकार

    वी बी माणिक
    मुंबई
    – बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) और नगर पालिका, नगर परिषद, नगर पंचायत और अन्य सरकारी, गैर सरकारी स्कूलों अन्य  संस्थाओं में कब भर्ती किया जाएगा तृतीय पंथियों (किन्नरों) को। सरकारी नौकरियों में इनके आरक्षण को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    2012-13 के समय उच्चतम न्यायालय में दायर याचिका में न्यायमूर्तियों ने एक आदेश पारित कर कहा है, कि इनको भी पुरुषों और महिलाओं की तरह तृतीय पंथियों को भी नौकरी में लिया जाना चाहिए। जिस पर महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार के निर्णय के अधीन राज्य सरकार ने अधिकार संरक्षण अधिनियम 2019 तहत कलम 9 और 10 में तरतूद किया है, कि किसी भी किन्नरों को रोजगार सम्बंधित किसी प्रकार का भेदभाव नही किया जाएगा।

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    आरक्षण,

    आरक्षण पर सवाल?

    राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया रिट याचिका क्र 400/2012  एवं  604/2013 में उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया है, कि किन्नरों को शिक्षा संस्थानों में पिछड़ी जाति के नागरिक के आधार पर आरक्षण दिया जाय। इसके लिए तृतीय पंथियों को लेकर एक संस्था ‘संपदा ग्रामीण महिला संस्था (संग्राम)’ ने मुंबई उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका एल क्र. 2781/2022 दाखिल किया है। इस आधार पर एक तृतीयपंथी के प्रार्थना पत्र पर पुलिस उपनिरीक्षक पद के लिए आवेदन किया गया है।

    अब प्रश्न ये है, कि राज्य सरकार और महाराष्ट्र की सभी सरकारी संस्थाओं ने अभी तक केवल पेपर बाज़ी के अलावा कुछ भी नही किया है। केवल एक ‘नगरपालिका पिम्परी चिंचवड़’ ने कुछ किन्नरों की भर्ती किया है। किन्नरों को सभी विभागों में उनकी योग्यता के आधार पर भर्ती करना है। माननीय न्यायालय ने 9 दिसंबर 22 को निर्देश दिया है। महाराष्ट्र राज्य शासन ने  पुरूष महिला और तृतीय पंथी ऐसे शब्दों का प्रयोग करने का निर्णय लिया है।

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    मनपा और राज्य सरकार में सुरक्षा के लिए भर्ती करने की प्रतिक्रिया शुरू करने जा रही है। पर तृतीयपंथियो के जीवन यापन के लिए सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय होगा। ये भर्ती कब शुरू होगी? कितना प्रतिशत आरक्षण मिलेगा? इस पर सरकार विचार कर रही है। इस पर अतिशीघ्र निर्णय लेने का आदेश राज्य सरकार ने दिया है। पर इसका पालन सरकार खुद नही कर रही है, इसके लिए जबाबदार कौन है?

  • भूमाफिया मयूर केनी के गैरकानूनी निर्माण को बचाने में लगे जिम्मेदार अधिकारी

    भूमाफिया मयूर केनी के गैरकानूनी निर्माण को बचाने में लगे जिम्मेदार अधिकारी

    • भू-माफिया मयूर केनी के अवैध निर्माणों में धड़ल्ले से अपनी काली कमाई लगाकर दोगुना लाभ कमा रहे हैं मनपा पी/उत्तर के अधिकारी
    • क्या इन अवैध निर्माणों को धराशाई कर भूमाफिया के विरुद्ध एमआरटीपी के तहत दंडात्मक कार्रवाई कर पाएगा मनपा प्रशासन?

    मन्सूर शेख
    मुंबई-
    रिक्त भूखंड (Open Plot) पर बड़े बड़े गैरकानूनी तरीके से निर्माण कार्य होते नही, मनपा अधिकारी खुद अपना कालाधन (BlackMoney) लगाकर गैरकानूनी तरीके से निर्माण कार्य करते हुए भ्रष्टाचार (Corruption) की सीमा लांघकर खूब दौलत जमा करते हैं। ऐसा ही गैरकानूनी (illegal) निर्माण कार्य वार्ड क्रमांक 32, जय भोले सोसायटी, पठारे वाड़ी रोड़ से बाजार गली रोड़, नियर दीना सिरामिक्स, मालवणी चर्च, मालाड (पश्चिम) मुंबई – 400095 स्थित रिक्त भूखंड पर 24, रूम का ग्राउंड +1 (दो मंजिला), निवास का अवैध निर्माण कर्ता व भूमाफिया मयूर केनी द्वारा बनाकर बेचा भी जा रहा है।

    निश्चित ही मनपा पी/उत्तर (BMC, P/North) विभाग के डीओ, राजन प्रभु और वार्ड ऑफिसर किरण दिघावकर ने अपने पद और पावर का दुरुपयोग करते हुए अपने अधीनस्थ अधिकारियों को मजबूर किया हो या फिर कुछ धन दिया हो। दोनो ही स्थिति में डीओ राजन प्रभु और वार्ड ऑफिसर किरण दिघावकर ही गैरकानूनी बांधकाम (illegal Construction) के लिए जवाबदेह हैं। इस भ्रष्ट (Corruption) आचरण वाले जिम्मेदार अधिकारियो ने अपने पद और पावर का दुरुपयोग किया है, जिसके चलते ये दोनो सजा के लिए भी पात्र है। अतः डीओ राजन प्रभु और वार्ड ऑफिसर किरण दिघावकर के खिलाफ अविलंब गैरकानूनी बांधकाम की उपेक्षा ही नहीं अधिनस्थों को भी अपने भ्रष्ट व्यापार (Corrupt Business) में शामिल करने के कारण सेक्शन 56(ए) महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नागरीय प्लानिंग एक्ट 1966 और मनपा सर्विसेज एंड कंडक्ट रूल्स 1989 के तहत कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाय।

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    मनपा, पी/उत्तर,
    अवध निर्माण की तस्वीर

    मनपा पी/उत्तर वार्ड अवैध निर्माण का अड्डा..

    जैसे एक मछली पूरे तालाब को गंदा करती है।उसी तरह डीओ राजन प्रभु और वार्ड ऑफिसर किरण दिघावकर ने पूरे वार्ड को ही भ्रष्ट (Corrupt) बना दिया है। इसलिए इन दोनो अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाय।
    पता चला है कि चूंकि उक्त अवैध निर्माण में डीओ राजन प्रभु और वार्ड ऑफिसर किरण दिघावकर का पैसा लगा हुआ है, इसलिए सारे अधिकारी मिलकर उक्त अवैध निर्माण को बचाने में लगे हुए हैं। इसका प्रमाण यह है कि गैरकानूनी निर्माण के रूप में 24, रूम, वह भी दो मंजिला मकान बनाए जा रहे हैं। अब ऐसे में मनपा का पी/ उत्तर, वार्ड अवैध निर्माण का अड्डा बन चुका है।

    अब देखना यह है, कि बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) का तोड़क दस्ता गैरकानूनी निर्माण यानी 24, रूम, ग्राउंड +1, के (दो मंजिला) मकान पर तोड़क कार्रवाई करते है या नहीं? बताया जाता है, कि मयूर केनी ने सरकारी भूखंडों पर कब्जा कर अवैध निर्माण के जरिए करोड़ों की चल अचल संपत्ति (BlackMoney) अर्जित कर ली है। हम मांग करते हैं, कि अवैध निर्माण कर्ता व भूमाफिया मयूर केनी द्वारा अवैध रूप से सरकारी भखंडो पर कब्जा कर सैकड़ों की संख्या में चालियां बनाकर बेचे जाने पर क्या महाराष्ट्र सरकार के मुखिया एकनाथ शिंदे आरोपी मयूर केनी के उपर कानूनी कार्रवाई कर जेल भेजेंगे या लीपापोती की जाएगी।

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  • ठेकेदार की काली करतूतों का शिकार हुआ दुपहिया चालक

    ठेकेदार की काली करतूतों का शिकार हुआ दुपहिया चालक

    • मनपा आर/दक्षिण के क्षेत्र में कांदिवली (पश्चिम) में हुआ घटिया सामग्री से घटिया सड़क निर्माण (भ्रष्टाचार)

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    महानगर मुंबई में सर्वसामान्य लोगों की नागरिक सुविधाओं को मुहैया कराने के लिए गठित बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC), कुछ करे या न करे किंतु नागरिकों (Citizens) को भ्रष्टाचार (Corruption) से किसी न किसी रूप में रूबरू अवश्य कराती है। मनपा कर्मियों की इसी भ्रष्ट (Corrupt) करतूतों का शिकार एक दुपहिया वाहन चालक (two wheelers Driver) शिव प्रसाद यादव हो गया है। जिसे घटिया सामग्री व तकनीक से बनाए गए डिवाइडर में यूटर्न लेते समय गंभीर चोटें आई हैं।

    सड़क निर्माण मे भ्रष्टाचार

    भुक्त भोगी यादव ने कांदिवली पुलिस थाने में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक को पत्र देकर सड़क निर्माण के ठेकेदार (Contractor) व निर्माण स्तर के निरीक्षक अभियंताओं (engineer’s) के विरुद्ध अपराध (Crime) दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई (legally Action) किए जाने की अपील की है।
    उक्त शिकायती पत्र पुलिस व मनपा (BMC) के वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रेषित किया है। पत्र में दर्शाया गया है, कि शिकायत कर्ता शिव प्रसाद यादव गत 30 अगस्त 2023 कांदिवली (पश्चिम) स्थित माथुरादास रोड़ पर जा रहे थे। जहां श्री राम स्वीट्स के पास वह यू – टर्न लेने लगे तो डिवाइडर में उनका पैर फंस जाने से उन्हें गंभीर चोट आई है।

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    भ्रष्टाचार, मनपा,
    घटना स्थल की तस्वीर

    पीड़ित एवं शिव प्रसाद यादव कांदिवली (पश्चिम) स्थित शताब्दी अस्पताल में उपचार करा रहे हैं। बता दें कि उक्त क्षेत्र मनपा आर/ दक्षिण (R/South) विभाग के कार्य क्षेत्र में आता है। शिकायत कर्ता शिव प्रसाद यादव का कहना है, कि अधिकतम काली कमाई (BlackMoney) करने के लिए उक्त सड़क के निर्माण का ठेकेदार सार्वजनिक निर्माण विभाग के अभियंता से सांठगांठ कर घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग कर घटिया तकनीक से नौसिखिये कारीगरों द्वारा रोड़ का निर्माण कराया है। जिसके कारण डिवाइडर की सेटिंग में काम गैप होने से शिकायतकर्ता का पैर फंसा है।

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    शिकायत कर्ता ने ठेकेदार व मनपा अभियंताओं, जिसने कि सड़क पास किया है, के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने तथा उक्त रोड़ के निर्माण की तटस्त जांच विशेषज्ञों की टीम से कराने का निवेदन पुलिस व मनपा (BMC) के उच्च अधिकारियों से किया है। शिकायतकर्ता शिव प्रसाद यादव का आरोप है, कि ठेकेदार व मनपा अधिकारी सड़क टेंडर का पैसा आपस में बंदरबाट करते है तथा ठेकेदार सड़क निर्माण सस्ती सामग्री व तकनीक से कर देता है। ठेकेदार व सड़क की रिपोर्ट करने वाले अभियंता के विरुद्ध जनोपयोगी निर्माण में कम लागत लगाने व घटिया निर्माण कर बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) व जनता (Public) से धोखाधड़ी करने का अपराध दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई किये जाने की अपील की है।

  • मनपा में सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखा रही है सायली गावड़े

    मनपा में सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखा रही है सायली गावड़े

    निष्क्रिय अयोग्य महिला को जबाबदारी देकर मनपा सुरक्षा प्रमुख क्या दिखाना चाहते है? ऐसे भ्रष्टाचारी को ऐसे महत्वपूर्ण स्थान पर नियुक्त किया गया है।

    वी बी माणिक
    मुंबई
    – बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के परिमंडल 1 की उप प्रमुख सुरक्षा अधिकारी श्रीमती सायली गावड़े खुलेआम अपने अधिकार का दुरुपयोग कर रही है। गावड़े अपने अधीन कार्यरत सुरक्षा कर्मियों से पार्किंग के नाम पर अवैध तरीके से ए वार्ड के क्रॉफर्ड मार्किट और सी वार्ड के मुंबादेवी परिसर में खुलेआम लूट मचा रखा है।

    इसके अलावा झूठ बोलने में पीएचडी कर रखा है। कोई भी नागरिक शिकायत करना चाहता है तो सुनने को तैयार नही है। क्या मनपा प्रशासन इनको मुफ्त का पगार देती है ? परिमंडल 1 काफी महत्वपूर्ण इलाका है। जिसमे मनपा मुख्यालय, रानी बाग़, ए, बी, सी, डी और ई वार्ड शामिल है। सी वार्ड में तो एशिया का सबसे बड़ा मार्किट है। गावड़े झूठ बोलकर और महिला होने का फायदा उठाकर अपने वरिष्ठों को भी गुमराह करती है।

    https://indian-fasttrack.com/2023/08/20/illegal-3-studios-running-in-p-south-theft-of-2-crore-70-lakh-revenue-per-month
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    मनपा,
    बृहन्मुंबई महानगरपालिका की फाइल तस्वीर

    मनपा की सुरक्षा व्यवस्था..

    अब प्रश्न ये है कि मुंबादेवी परिसर के आसपास 3 बार बम धमाके हो चुके हैं। जिसमे सैकड़ो निर्दोष लोगों ने अपनी जान गवाई है। फिर भी इनको ध्यान नही है ऐसे निष्क्रिय अयोग्य महिला को जबाबदारी देकर मनपा सुरक्षा प्रमुख क्या दिखाना चाहते है? ऐसे भ्रष्टाचारी को ऐसे महत्वपूर्ण स्थान पर नियुक्त किया गया है। अब देखना यह है कि बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के आयुक्त (Commissioner) इकबाल सिंह चहल इस निष्क्रिय और अयोग्य सुरक्षा कर्मी की कार्यशैली पर जांच करा कर दंडात्मक कार्रवाई करते हैं कि नहीं?

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  • बिना किसी शिकायत के 54000 गड्ढे भर देने का मुंबई मनपा का दावा

    बिना किसी शिकायत के 54000 गड्ढे भर देने का मुंबई मनपा का दावा

    • अधिकारियों ने किया मुंबईकरों पर बहुत बड़ा एहसान।
    • किसी अजूबे से कम नहीं बृहन्मुंबई महानगर पालिका..

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    कमाल की बात है। 15 दिनों में 54000 गड्ढे भरना। किसी अजूबे से कम नहीं है। मुंबई  महानगर पालिका का दावा है, कि उसने मात्र 15 दिनों में ही महानगर के तीन एक्सप्रेस हाईवे सहित कुल 54000 गड्ढे भर दिए। बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने दावे किए थे कि मानसून के पूर्व ही उसने पहले ही छः हजार गड्ढे भर दिए थे।

    ऐसे में बृहन्मुंबई महानगर पालिका का दावा है, कि इससे अब कम गड्ढे पड़ेंगे लेकिन 54 हजार छोटे बड़े गड्ढे उभरना सारे दावे की पोल खोल देते हैं। मनपा यह भी दावा करती है, कि इस बार उसने जनता की शिकायतों का इंतजार नहीं किया। यानी वह कहना चाहती है, कि “अब मुंबईकरों को शिकायत कर जगाने की जरूरत ही नहीं है।” यानी बृहन्मुंबई महानगर पालिका बिना मुंबईकरों के जगाए जागती नहीं थी। सोई रहती थी। इस बार नींद से अपने आप जाग गई। सौ बार शिकायतें करने के बाद भी सोई रहने वाली बृहन्मुंबई महानगर पालिका प्रशासन अब जगाए जाने का इंतजार नहीं की। खुद जग गई और रिकार्ड समय में 54000 हजार गड्ढे भर कर मुंबईकरों पर एहसान कर दिया।

    https://indian-fasttrack.com/2023/08/17/your-orders-are-being-flouted-illegal-constructions-are-happening-indiscriminately-stop-it
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    रास्तों की मरम्मत करते मनपा अधिकारी की प्रतिकारात्मक फाइल तस्वीर

    क्या है सवाल..? बृहन्मुंबई महानगर पालिका

    इतनी जल्दी और भारी मात्रा में गड्ढे भरने के दावे पर भी सवाल उठेंगे ही। जैसा कि बृहन्मुंबई महानगर पालिका बहाना करती है, कि भारी वर्षा और ट्रैफिक के कारण गड्ढे भारी मात्रा में पड़ते हैं। तो सवाल यह है कि आरसीसी (RCC) की सड़कों में भी गड्ढे क्यों पड़ते हैं? साधारण सी बात है डांबर का शत्रु है पानी और जल भराव से गड्ढे पड़ेंगे ही, लेकिन सड़क बनाने की विधि में प्लास्टिक के उपयोग तक विज्ञान पहुंच गया है। लेकिन मनपा अत्याधुनिक तकनीकी का प्रयोग क्यों नहीं करती। हर बार वही गिट्टी डालकर कोरम पूर्ति करना क्या उचित है? चलो इस बार शायद चुनावी वर्ष में बृहन्मुंबई महानगर पालिका अपने आप जागी।मुंबईकरों को जगाना नहीं पड़ा। इसके लिए बृहन्मुंबई महानगर पालिका बधाई की पात्र है।

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  • अवैध निर्माण में संलिप्त पूरा पी/ दक्षिण वार्ड

    अवैध निर्माण में संलिप्त पूरा पी/ दक्षिण वार्ड

    • आरोप तय कर दंडात्मक कार्रवाई करें अन्यथा आपकी साख पर भी बट्टा लगेगा।
    • मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल।
    • नोटिस के संदर्भ में स्पीकिंग ऑर्डर देकर गैरकानूनी निर्माण।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    गोरेगांव पी/ दक्षिण वार्ड को सर्वाधिक भ्रष्टाचारी होने का तमगा दिया जाए तो अतिशयोक्ति न होगी। इस वार्ड के सभी आला अफसर भ्रष्टाचार के पंक में पूरी तरह डूबे हैं। इन्हें किसी भी तरह का भय नहीं। चाहे जितना न्यूज लिखे, आरटीआई डाली जाए। इनकी कानों में जूं नहीं रेंगती।

    फरियाद तो सुने मनपा आयुक्त ..

    खुद ही बांधकाम कराते हैं। तोड़ने की नोटिस भेजते हैं और फिर नोटिस के संदर्भ में स्पीकिंग ऑर्डर देकर गैरकानूनी निर्माण कर्ता से लाखों रुपए वसूलकर उसे स्टे आर्डर लेने की सलाह देते हैं और कोर्ट में बीएमसी विधि विभाग के अधिकारी वकील मौन साध लेता है। स्टे के खिलाफ नहीं बोलता, जिससे तुरंत ही गैरकानूनी बांधकम करने वाले को कोर्ट से स्टे मिल जाता है।

    https://indian-fasttrack.com/2023/08/07/statements-of-more-than-100-people-were-recorded-jaipur-mumbai-train-firing-news-rpf-had-expressed-his-desire-to-deboard-the-train-at-valsad-called-even-after-the-incident
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    नोटिस के संदर्भ में स्पीकिंग ऑर्डर देकर गैरकानूनी निर्माण।

    ताजा मामला गोरेगांव (पूर्व) शौर्य कंपाउंड, नियर बंजारा पाड़ा, इन बिटवीन शेटेलाइट गार्डन फेस -।।, अरुण कुमार वैद्य मार्ग, का है।जहां गैरकानूनी ढंग से 6000 चौरस फूट के जी + १ (दो मंजिला) के व्यापारिक गाले का निर्माण बना लिया जिसकी एवज में कथित रूप से लाखों की रिश्वत दी गई। जिससे वार्ड ऑफिसर(प्रभारी) राजेश आक्रे, उपायुक्त विश्वास शंकरवार ने आपस में बांट लिया। दिखाने के लिए 354 (ए) की नोटिस दे दिया। बता दे कि मनपा अधिनियम 1888 के तहत 354 (ए) कि नोटिस देने के 24 घंटे के भीतर तोड़क कार्रवाई जरूरी है। लेकिन अवैध व्यापारिक गाले का बांधकाम जी+१ (दो मंजिला) कुल 6000 वर्गफुट का गैरकानूनी निर्माण करने वाले ठेकेदार आशिफ फतेह मोहम्मद खान को तुरंत कोर्ट से स्टे लेने की मौखिक सलाह दी ताकि तोड़क कार्रवाई न करनी पड़े।

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    सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे यानी तोड़क कार्रवाई न होने से गैरकानूनी निर्माण बच जाए।
    मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल से हमारी मांग है की पी/ दक्षिण वार्ड के सभी बड़े अधिकारियों का तुरंत ट्रांसफर कर इनके भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच पारदर्शी तरीके से कराकर आरोप तय कर दंडात्मक कार्रवाई करें अन्यथा आपकी साख पर भी बट्टा लगेगा।

  • पी/दक्षिण में चल रहे अवैध 3 स्टूडियोज, प्रतिमाह 2 करोड़ 70 लाख राजस्व की चोरी

    पी/दक्षिण में चल रहे अवैध 3 स्टूडियोज, प्रतिमाह 2 करोड़ 70 लाख राजस्व की चोरी

    • आयुक्त के आदेश के बावजूद पी/दक्षिण के अधिकारियों द्वारा स्टूडियोज को नही हटाकर दे रहे हैं अर्हपूर्ण संरक्षण।
    • रिश्वत की ताल पर नाच रहा, मनपा का पी/दक्षिण विभाग।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    बॉलीवुड फिल्मों व सीरियलों की शूटिंग हेतु बृहन्मुंबई महानगर पालिका के पी/दक्षिण वार्ड के कार्यक्षेत्र में बनाए गए अस्थाई स्टूडियो के मालिकों ने मनपा द्वारा परमिशन रद्द किए जाने के उपरांत भी पी/ दक्षिण वार्ड के जिम्मेदार अधिकारियों से अर्थपूर्ण सेटिंग कर निःसंकोच चलाए जा रहे हैं। जबकि मनपा ने उन्हें तत्काल हटाने की नोटिस महीनो पहले जारी कर दी थी। मगर मनपा अधिकारियों की आदत के अनुसार उक्त तीन स्टूडियोज को अर्थपूर्ण संरक्षण देकर न ही तोड़क कार्रवाई की गई है और ना ही स्टूडियो मालिकों के विरुद्ध भूमि पर अतिक्रमण करने का अपराध मनपा प्रशासन द्वारा कराया गया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार गोरेगांव (पूर्व) आरे कॉलोनी, रॉयल पॉम हॉटल के पास रूबी बिल्डिंग के पीछे स्थित मनपा द्वारा शूटिंग के लिए तीन स्टूडियो बनाने की अस्थायी परमिशन ली गई थी, जो काफी पहले ही मनपा आयुक्त द्वारा रद्द कर दी गई थी। तीनों में प्रत्येक स्टूडियो 20, हजार वर्गफिट क्षेत्र पर बनाया गया है। प्रत्येक स्टूडियो का मासिक भाड़ा 90 लाख रुपए है, जिसे परमिशन रद्द किए जाने के उपरांत अब निजी तौर पर मनपा के अधिकारियों द्वारा वसूला जाता है, जो मनपा के कोष में नहीं जाता है। ऐसा मनपा सूत्रों ने बताया है।

    https://indian-fasttrack.com/2023/08/12/for-canceling-the-contract-without-paying-global-music-pvt-ltd-kidnapping-of-ceo-rajkumar-singh
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    रिश्वत, मनपा,
    मनपा पी/दक्षिण विभाग के भ्रष्टाचार की तस्वीर

    रिश्वत का खेल क्या कहता है?

    उक्त संबंध में मनपा के सहाय्यक आयुक्त राजेश आक्रे, परिमंडल -4 के उपायुक्त (डीएमसी) विश्वास शंकरवार पत्रकारों व शिकायत कर्ताओं को बताने या लिखित जवाब देने में टालमटोल करते हैं। इसकी शिकायत एक शिकायत कर्ता द्वारा दिनांक:13/06/2023 को किए जाने के बाद मनपा पी/दक्षिण के सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहाय्यक अभियंता ने एक पत्रक क्र.सआ पीद/ बी -53/7855 के माध्यम से शिकायतकर्ता को बतलाया है, कि आयुक्त के आदेश के साथ ही साथ दो स्टूडियो के मालिकों ने अदालत से स्टे – ऑर्डर ले लिया है।

    बताया जा रहा है, कि मनपा प्रशासन द्वारा मनपा के विधि विभाग को स्टे-ऑर्डर शीघ्र हटवाने का आदेश दिया था। किंतु विधि विभाग (legal department) की कार्रवाई का कोई भी ले आउट नही आया है। यह भी बताया गया है, कि स्टूडियो की परमिशन रद्द किए जाने के बाद से ही स्टूडियो का भाड़ा आधिकारिक तौर पर नही वसूला जाता हैं। यानि कि 90 लाख × 3 = 2,70,00,000 (दो करोड़ 70 लाख मात्र) का भाड़ा, क्या मनपा के कोष में जमा किया जा रहा है? या मनपा के प्रशासनिक अधिकारियों की जेब में पहुंच रहा है? यह सवाल सर्व जागरूक नागरिकों का है। जिसका जवाब देने में मनपा अधिकारी टालमटोल कर रहे हैं।

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    जबकि आयुक्त द्वारा परमिशन रद्द किए जाने के उपरांत सभी स्टूडियोज को हटवा देना या डिमोलिशन कर देना चाहिए था। दो स्टूडियोज का स्टे – ऑर्डर जनहित के परिप्रेक्ष्य में निश्चित ही, मा. न्यायालय द्वारा हटा दिया गया होता, यदि मनपा प्रशासन विधिवत अपना पक्ष प्रस्तुत किया होता? किंतु मनपा पी/दक्षिण के अधिकारियों को तो प्रतिमाह 4 करोड़ 50 लाख की मलाई चाभनी थी ! शिकायत कर्ताओं ने भी स्टूडियो और मालिको व भ्रष्ट मनपा अधिकारियों के विरुद्ध न्यायालय जाने का मन बनाया है।

  • उड़ रही है आपके आदेश की धज्जियां…..हो रहें हैं धड़ल्ले से अवैध निर्माण। रोकिये।

    उड़ रही है आपके आदेश की धज्जियां…..हो रहें हैं धड़ल्ले से अवैध निर्माण। रोकिये।

    • आर/दक्षिण विभाग के सक्षम अधिकारी है भ्रष्टाचार में लिप्त।
    • कर रहें हैं मोटी कमाई…
    • अवैध निर्माण को दे रहें हैं संरक्षण..
    • उड़ रही मुख्यमंत्री के आदेशों की धज्जियां..

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    महाराष्ट्र सरकार के मुखिया ने आदेश दिया है, कि मुंबई में अब और अवैध निर्माण पर जीरो टॉलरेंस अपनाया जाए। झोपड़ों की भरमार से जीवनोपयोगी सुविधाओं से मुंबईकर वंचित होते हैं। किंतु कौन सुनता – मानता है मुख्यमंत्री का आदेश?
    भ्रष्ट मनपा अधिकारी दौलत कमाने के लिए अवैध निर्माण को संरक्षण दे रहे है और उसके बदले हो रही लाखों रुपयों की वसूली। जी हां!आइए चन्द गैरकानूनी बांधकाम का जायजा लेते हैं।

    हम कांदिवली (पूर्व) आकुर्ली रोड़ स्थित गोविंद सेठ चाल, जूना खदान, अटल बिहारी वाजपेई हॉल के पास, वडार पाड़ा रोड क्रमांक -१, वार्ड क्रमांक २९, में विगत कई वर्षों से रिक्त पड़े भूखंड (open plot) पर ४ रूम का अवैध बांधकाम हो रहा है। बताया जा रहा है, कि उक्त अवैध बांधकाम को दो बार तोड़ा जा चुका है। किसी तरह की घाही नहीं दिख पड़ती आश्वस्त से लग रहें मजदूर मिस्त्री और भूमाफिया। उसने बताया कि लाखों रुपए गैरकानूनी बांधकाम करने की एवज में आर/दक्षिण वार्ड को वे दे चुके हैं।

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    भ्रष्ट अधिकारियों की फाइल तस्वीर

    दुसरा है कांदिवली (पश्चिम) देवबाई चाल, कांदिवली गांवठान, कांदिवली गांवठन रोड स्थित रिक्त भूखंड (open plot) पर ५ मकान के आवासीय परिसर का गैरकानूनी निर्माण कार्य बिना किसी वैध अनुमति के इमारत विभाग के अभियंताओं की मिलीभगत से किया जा रहा है। स्थानीय जनता की माने तो सहाय्यक अभियंता प्रमोद ब्राम्हणकर स्वंय इस गैरकानूनी बांधकाम को पहले होने दिया। अब ऐसे में ५ (पांच) मकान के आवासीय परिसर का जमीनी सतह से पूर्ण हो चुके बांधकाम को दिनांक: 24/05/2023 को 354(A) की नोटिस जारी कर अभियंता ने स्वयं भ्रष्टाचार में लिप्त होने का अपना परिचय दिया है।

    नोटिस देकर तीन महीने हो गए हैं, लेकिन कार्रवाई जीरो! जरा रुको गैरकानूनी बांधकाम का सिलसिला अभी थमा नहीं है। 354(A) की नोटिस के तुरंत बाद ही ठीक उसी बांधकाम को ग्राउंड +1 (दो मंजिला) के शक्ल में गैरकानूनी निर्माण कार्य को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। ताकि नोटिस धारक उक्त नोटिस के आधार पर बकायदा कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखने में सफल हो सके और वह बड़ी आसानी से कोर्ट का स्टे ऑर्डर ला सके। यहां भी वही कहानी दोहराई गई।

    तीसरा है कांदिवली (पश्चिम) ईरानी वाड़ी,रोड नंबर – ४, नियर शिवशंभु मंदिर स्थित रामनारायण पांडे चाल में रिक्त भूखंड (open plot) पर 200 वर्गफिट के अंतर्गत एक व्यापारिक गाले का गैर कानूनी तरीके से निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस गैरकानूनी बांधकाम का ठेकेदार है अजय पांडे। जिसके चेहरे पर जंग जीतने की खुशी झलक रही है।
    सहाय्यक अभियंता ने बताया कि परिमंडल -७ की उपायुक्त, भाग्यश्री कापसे बेहद प्रभावशाली महिला अधिकारी है। जिनका संबंध राज्य के नेताओं से है। उनका संरक्षण भी। यह भी ज्ञात हुआ कि अपने पद और पॉवर का नाजायज फायदा उठाते हुए मैडम ने सहाय्यक आयुक्त ललित तलेकर, डीओ अभय जगताप पर दबाव बनाकर गैरकानूनी बांधकाम कराती और संरक्षण देती हैं। लाखों में खेलती है।

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    मुख्यमंत्री,
    कांदिवली के अवैध निर्माण की तस्वीर

    राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से अपील ..

    इस काले कारोबार में सहाय्यक आयुक्त और डीओ लिप्त है। ये दोनो भी भ्रष्टाचार के माध्यम से खुद भी मालामाल हो रहे हैं।
    अब ऐसे में ठेकेदार और अवैध निर्माण कर्ता, भूमाफिया मूंछों पर ताव देते हुए कहता है, कि यहां का वार्ड और नेता उसके साथ है कोई कितनी भी कंप्लेंन करें! मेरा कुछ भी नही उखड़ेगा।
    वाह मानना होगा गैरकानूनी बांधकाम करने वाले ठेकेदार और भूमाफिया की हेकड़ी को जिसके सामने आर/दक्षिण, वार्ड के जिम्मेदार अधिकारी या तो विवश है या उनकी जेबें गर्म हो चुकी हैं।
    राज्य के मुखिया से हमारी मांग है कि निष्पक्ष पारदर्शी जांच पूरे मुंबई शहर में कराएं। अवैध बांधकाम की सूची बनवाएं। अवैध निर्माण तोड़ने, उसका वीडियो बनवाकर शिकायत कर्ताओं को भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करें। साथ ही भूमाफियाओं और ठेकेदारों को कानूनी ढंग से दंडित करने की पहल करें।

  • बसों में यात्री कब होंगे सुरक्षित | Mumbai BEST Strike

    बसों में यात्री कब होंगे सुरक्षित | Mumbai BEST Strike

    Mumbai BEST Strike : बसों की हड़ताल को लेकर मुंबईकर काफी परेशान हो गए हैं। प्राइवेट कर्मियों की हड़ताल ने मुंबई के कामकाज को प्रभावित कर दिया है।

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    प्राइवेट बस कर्मियों द्वारा हड़ताल पर जाने से मुंबई करों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल के मुताबिक, मुंबई (Mumbai) में बेस्ट (BEST) की प्राइवेट बस ड्राइवरों की मांग है, कि उनको भी परमानेंट नौकरी दी जाय। जैसे बेस्ट के ड्राइवर और कंडक्टरो के वेतन के बराबर इनको भी वेतन और सारी सुविधाएं मिलनी चाहिए। पर निजी कंपनियों द्वारा बेस्ट प्रशासन के साथ पहले से ही एग्रीमेंट हो चुका है, कि इनको बेस्ट विभाग में नही लिया जाएगा। तो फिर ये प्राइवेट कर्मी मुंबई में जगह-जगह तोड़फोड़ और बेस्ट बसों के ड्राइवरों के साथ मारपिट, गाली गलौज कैसे कर सकते हैं?

    Mumbai BEST Strike हड़ताल..

    हड़ताल (Strike) से मुंबईकर परेशान है, क्योंकि इनको यात्रा करने के लिए बसे नही मिल रही है। एसी बसें रूटों पर नही चल रही है। यहां तक कि डिपो से बसे बाहर नही निकल रही है। इस पर बेस्ट प्रशासन ने पुलिस में शिकायत भी किया है। फिर भी पुलिस मूक दर्शक बनी हुई है। मालवणी पुलिस ने दिखावे के लिए केवल दो पुलिस की गाड़ी सुरक्षा के लिए दिया है। पर कार्रवाई के लिए नही।

    https://indian-fasttrack.com/2023/08/04/mumbai-three-women-arrested-with-rs-4-lakh-65-thousand-drugs-and-rs-5-lakh-75-thousand-cash-in-kandivali
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    Mumbai, BEST, Strike,
    कांदिवली स्टेशन स्थित BEST बस की तस्वीर

    बृहन्मुंबई (Mumbai) विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन (BEST)  से संबंधित निजी बस चालकों का रविवार को पांचवें दिन भी हड़ताल (Strike) जारी रहा। इसमें परिचालकों की कमी के कारण लगभग 704 बसें सड़कों से नदारद रहीं। हड़ताल के कारण शहर के 18 बस डेपो पर प्रभाव देखा गया जबकि शहर में बेस्ट 27 डिपो से बसों का संचालन करती है। बड़ी शर्मनाक स्थिति पुलिस और नेताओं ने बना रखा है इस पर सारी बेस्ट की सारी यूनियन कान में तेल डालकर सो रही है। क्या राज्य सरकार इस पर जल्दी फरमान देगी या मुंबईकरों को आग में झोंकने के लिए तैयार है। आपको जानकारी देते हुए बता दे कि ये पूरा विभाग मनपा (BMC) के अंतर्गत ही आता है।

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  • निजी स्वार्थों के चलते ठेकेदारों की मदद से निधि की बंदरबाट कर लेते हैं अभियंता

    निजी स्वार्थों के चलते ठेकेदारों की मदद से निधि की बंदरबाट कर लेते हैं अभियंता

    • घटिया सड़क निर्माण की भी उत्तम जांच रिपोर्ट लगाता है दुय्यम अभियंता अमोल जाधव
    • दुय्यम अभियंता अमोल जाधव के कार्यो की जांच कराने की मांग।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    यदि जलवाहिनी में मध्य रास्ते पर सुराख हो तो उससे पानी बहकर जाया हो जाता है। तथा गंतव्य तक उतना पानी नहीं पहुंच पाता, जितना की उद्धिस्ट होता है। यही दृष्टांत शत प्रतिशत लागू होता है। मनपा आर/दक्षिण में दुय्यम अभियंता के रूप में कार्यरत अमोल जाधव का, जो मनपा के परिरक्षण (maintenence) हेतु जारी की गई निधि को उद्दिष्ट कार्य में नहीं पहुंचने देते और जलवाहीनी के सुराख की भांति निधि को निजी स्वार्थों के चलते ठेकेदारों की मदद से बंदरबाट कर लेते हैं।

    अभियंता अमोल जाधव का कारनामा ..

    ऐसी जानकारी संवाददाता को दुय्यम अभियंता अमोल जाधव के प्रिय ठेकेदार ने दूरभाष पर प्रदान की है। बताया गया है, कि दुय्यम अभियंता अमोल जाधव मनपा आर/दक्षिण के परिरक्षण विभाग में कार्यरत हैं। तथा वे ठेकेदारों के प्रिय पात्र है, क्योंकि वह ठेकेदारों को खाने और खिलाने की भरपूर सुविधा देते हैं, कि उनकी इच्छानुसार काम का परसेंटेज व जारी की गई निधि के आधार पर तय रहती है।अब ठेकेदार काम घटिया करे या बढ़िया, किंतु उसे जारी की गई धनराशि तत्काल मिल जाती है।

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    अभियंता, अमोल जाधव,
    सब- इंजीनियर अमोल जाधव की फाइल तस्वीर

    यही कारण है कि दोगुनी काली कमाई करने के लिए सड़कों के दुरुस्तीकरण के निर्माण में या गड्ढों को भरने के लिए घटिया कांक्रीट, तारकोल (डांबर) या सीमेंट का उपयोग करते हैं ताकि सड़क की लागत से अधिकतम धनराशि बचाई जा सके।भले ही सड़क का निर्माण एक तरफ से पूरा हो और दूसरी तरफ पुनः टूटना – फूटना शुरू हो जाय,किंतु दुय्यम अभियंता अमोल जाधव घटिया सड़क के निर्माण की भी गलत रिपोर्ट लगा देता है और ठेकेदारों को लाभ पहुंचाता है।

    ज्ञात हो कि कुछ वर्ष पूर्व भ्रष्टाचार के आरोप में इसके खिलाफ अपराधिक मामला भी दर्ज हुआ है और वर्तमान में वह जमानत पर रिहा किया गया है और अपनी ड्यूटी पर आर/दक्षिण विभाग में कार्यरत हैं।ठेकेदारों को ठेके का टेंडर दिलवाने में अमोल जाधव काफी मदद करता है, इसीलिए उसे मनपा कर्मियों द्वारा सड़क इंजीनियर भी कहा जाता है। उसकी देखरेख में बनाई गई सड़के, बनाए जाने के साथ ही टूटने – फूटने व ऊबड़ खाबड़ होने लगती हैं। दुय्यम अभियंता अमोल जाधव के भ्रष्ट कारनामों की जांच कराकर उसके द्वारा सड़क निर्माणों में किए गए भ्रष्टाचारों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई किए जाने की मांग स्थानीय नागरिकों ने मनपा के शीर्ष अधिकारियों से की है।

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