Category: BMC Updates

  • मुंबई में जनगणना 2027 की तैयारी शुरू, एम-वेस्ट में डिजिटल सर्वे

    मुंबई में जनगणना 2027 की तैयारी शुरू, एम-वेस्ट में डिजिटल सर्वे

    मुंबई के एम-वेस्ट वार्ड में जनगणना-2027 की पूर्व जांच शुरू हो गई है। डिजिटल तरीके से घरयादी व घरगणना की प्रक्रिया 30 नवंबर 2025 तक चलेगी। कुल 135 प्रगणक और 22 पर्यवेक्षक क्षेत्र में तैनात किए गए हैं।

    मुंबई: जनगणना-2027 की तैयारी अब तेज़ हो गई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के एम-वेस्ट विभाग में घरयादी और घरगणना की पूर्व जांच शुरू हो चुकी है। 10 से 30 नवंबर 2025 तक चलने वाली इस प्रक्रिया में पहली बार पूरी जनगणना को डिजिटल फॉर्मेट में संचालित किया जा रहा है। इस सर्वे के लिए 135 प्रगणक और 22 पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं, जबकि DLM App और HLO App के ज़रिए पूरा डेटा ऑनलाइन कैप्चर किया जाएगा।

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    पूर्व जांच में डिजिटल गणना, BMC ने संभाली जिम्मेदारी

    जनगणना-2027 को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में मुंबई महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। एम-वेस्ट वार्ड में घरों की सीमा, बिल्डिंगों की संख्या और परिवारों की जानकारी DLM App और HLO App के ज़रिए दर्ज की जा रही है। इसके लिए CMMS पोर्टल पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग भी की जा रही है, ताकि किसी तरह की त्रुटि न रह जाए।

    135 प्रगणक और 22 पर्यवेक्षक तैनात

    पूर्व जांच के लिए BMC ने एम-वेस्ट वार्ड में 142 घरयादी गट बनाए हैं। हर क्षेत्र में जिम्मेदारी निभाने के लिए कुल 135 प्रगणक और 22 सुपरवाइज़र तैनात किए गए हैं। इन सभी को 6 से 8 नवंबर तक डिजिटल प्रशिक्षण दिया गया था, ताकि ऐप आधारित सर्वे सुचारू रूप से हो सके।

    राज्यभर में तीन जिलों में हो रही टेस्टिंग

    महाराष्ट्र में जनगणना की यह पूर्व जांच सिर्फ तीन स्थानों पर हो रही है—

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    • मुंबई का एम-वेस्ट वार्ड (आंशिक)
    • जलगांव जिला – चोपड़ा तहसील (आंशिक)
    • कोल्हापुर जिला – गगनबावड़ा तहसील

    ये क्षेत्र नमूना परीक्षण के तौर पर चुने गए हैं, ताकि 2027 में होने वाली राष्ट्रीय जनगणना को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

    वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया निरीक्षण दौरा

    पूर्व जांच के कामकाज की समीक्षा हाल ही में एक उच्चस्तरीय बैठक में की गई, जिसमें—

    • महाराष्ट्र सरकार की अतिरिक्त मुख्य सचिव (GAD) सीमा व्यास,
    • जनगणना विभाग की महानिदेशक डॉ. निरुपमा डांगे,
    • उप महानिबंधक ए. एन. राजीव,
    • तथा BMC की कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दक्षा शहा शामिल हुईं।

    इस दौरान प्रगणकों के काम की प्रत्यक्ष समीक्षा भी की गई और निर्देश दिए गए कि सभी कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरे हों।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    1. जनगणना 2027 की पूर्वचाचणी क्या है?

    यह जनगणना की वास्तविक प्रक्रिया से पहले की टेस्टिंग है, जिसके जरिए सिस्टम, ऐप, सर्वे प्रक्रिया और फील्ड वर्क का परीक्षण किया जाता है।

    2. यह पूर्वचाचणी मुंबई में कहाँ हो रही है?

    मुंबई में यह प्रक्रिया बृहन्मुंबई महानगरपालिका के एम-वेस्ट वार्ड में चल रही है।

    3. जनगणना पहली बार डिजिटल क्यों की जा रही है?

    डिजिटल प्रक्रिया से डेटा तेजी से और अधिक सटीकता के साथ इकट्ठा होता है, जिससे राष्ट्रीय स्तर की रिपोर्ट बनाना आसान होता है।

    4. कितने कर्मचारी तैनात किए गए हैं?

    कुल 135 प्रगणक और 22 पर्यवेक्षक इस सर्वे में काम कर रहे हैं।

    5. सर्वे कब तक चलेगा?

    10 नवंबर से 30 नवंबर 2025 तक पूर्वचाचणी का फील्ड वर्क चलेगा।

  • मालाड में विकास कार्य बना सिरदर्द, लोगों की बढ़ी मुश्किलें

    मालाड में विकास कार्य बना सिरदर्द, लोगों की बढ़ी मुश्किलें

    मालाड में चल रहे बीएमसी के विकास प्रोजेक्ट से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। पुल, सड़क चौड़ीकरण और निर्माण कार्यों से ट्रैफिक जाम और धूल-मिट्टी से नागरिकों का जीना मुश्किल हुआ। करोड़ों के प्रोजेक्ट के बावजूद सुविधाओं की जगह बढ़ी दिक्कतें।

    मुंबई: मालाड इलाके में चल रही कई विकास परियोजनाएं अब स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बन चुकी हैं। सड़कों की खुदाई, अधूरे पुल और धूल-मिट्टी के बीच नागरिकों का रोजमर्रा का जीवन कठिन हो गया है। बीएमसी ने यातायात सुधारने और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 2,200 करोड़ रुपए के टेंडर जारी किए हैं, लेकिन काम की धीमी रफ्तार और खराब प्लानिंग से जनता नाराज़ है।

    🏗️ एक साथ कई प्रोजेक्ट, जनता बेहाल

    मालाड पश्चिम में इस समय कई बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट चल रहे हैं — जिनमें नए पुलों का निर्माण, सड़क चौड़ीकरण, और पुराने ब्रिज का पुनर्निर्माण शामिल है।
    बीएमसी का दावा है कि ये काम मुंबई के पश्चिमी उपनगरों की ट्रैफिक समस्या को कम करेंगे, लेकिन फिलहाल इसका उल्टा असर दिख रहा है। कई जगहों पर ट्रैफिक जाम, रास्तों की खुदाई और डाइवर्जन के चलते यात्रियों को रोज घंटों की देरी झेलनी पड़ रही है।

    🌉 लगून रोड पुल: बड़ा सपना, बड़ी मुसीबत

    मालाड-पश्चिम में इंफिनिटी मॉल से अंधेरी तक के मालवनी कच्चा रोड़ यानी लगून रोड को जोड़ने के लिए एक केबल-स्टेयड वाहन पुल बनाया जा रहा है।
    इसकी लागत लगभग ₹1,700 करोड़ और लंबाई 380 मीटर है।
    बीएमसी का कहना है कि इससे लिंक रोड और एस.वी. रोड का ट्रैफिक कम होगा, मगर स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुल के काम ने रोजमर्रा की ज़िंदगी को मुश्किल बना दिया है।

    🏞️ रामचंद्र लेन नाले पर एलिवेटेड रोड का काम अटका

    रामचंद्र लेन नाले के ऊपर बन रही एलिवेटेड रोड जो रायन इंटरनेशनल स्कूल से एमडीपी रोड को जोड़ेगी, फिलहाल अधर में लटकी है।
    करीब ₹400 करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट से एवरशाइन नगर और अथर्व कॉलेज के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद थी, मगर लोगों का कहना है कि “काम चल रहा है, लेकिन खत्म होने का कोई टाइम नहीं दिखता।”

    🛣️ तटीय सड़क और चौड़ीकरण कार्य से बढ़ी दिक्कतें

    तटीय सड़क (Coastal Road) से जोड़ने के लिए मार्वे रोड पर नया लिंक बनाया जा रहा है।
    साथ ही मालाड-मार्वे रोड को महाकाली जंक्शन से चारकोप नाका तक चौड़ा किया जा रहा है, लेकिन महीनों से ये काम अधूरा पड़ा है।
    पुराने पुलों को गिराकर नए बनाने की योजना ने भी स्थानीय नागरिकों की नींद उड़ा दी है।

    🏚️ दुकानदारों का विरोध और नागरिकों की नाराज़गी

    नवंबर 2022 में एसवी रोड पर पुल बंद करने की मनपा की योजना के खिलाफ दुकानदारों ने विरोध किया था।
    उनका कहना था कि अचानक नोटिस देकर कुछ ही दिनों में दुकानें खाली करने को कहा गया, जिससे कई व्यापारियों का रोज़गार खतरे में पड़ गया।
    स्थानीय निवासी सुखदेव सिंह ने कहा —

    “हर बार मनपा विकास का नाम लेकर सड़कें खोद देती है, लेकिन काम कभी टाइम पर पूरा नहीं होता। अच्छी-भली सड़कों को तोड़कर लोगों को परेशान किया जा रहा है।”

    ⚙️ परियोजना 2028 तक पूरी करने का लक्ष्य

    बीएमसी ने इन सभी प्रोजेक्ट्स को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन शहर के अनुभव बताते हैं कि शायद ही कोई प्रोजेक्ट समय पर पूरा हुआ हो।
    लोगों का कहना है कि ‘टेंडर तो पास हो जाते हैं, लेकिन काम जनता को राहत नहीं देते।’


    FAQ सेक्शन

    Q1. मालाड में कौन-कौन से बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं?
    👉 मालवनी लगून रोड पुल, रामचंद्र लेन नाले पर एलिवेटेड रोड, तटीय सड़क लिंक और मालाड-मार्वे रोड चौड़ीकरण जैसे प्रमुख प्रोजेक्ट चल रहे हैं।
    Q2. बीएमसी ने इन प्रोजेक्ट्स पर कितना खर्च तय किया है?
    👉 लगभग ₹2,200 करोड़ का टेंडर जारी किया गया है।
    Q3. क्या इन प्रोजेक्ट्स से ट्रैफिक समस्या कम होगी?
    👉 फिलहाल उल्टा असर दिख रहा है। निर्माण कार्यों से सड़कों पर भारी ट्रैफिक और नागरिकों को असुविधा हो रही है।
    Q4. प्रोजेक्ट कब तक पूरे होंगे?
    👉 बीएमसी का लक्ष्य 2028 तक पूरा करने का है, लेकिन लोगों को देरी की चिंता है।

  • BMC की अफोर्डेबल हाउसिंग लॉटरी को ठंडी प्रतिक्रिया, सिर्फ 855 ने किया डिपॉज़िट पेमेंट

    BMC की अफोर्डेबल हाउसिंग लॉटरी को ठंडी प्रतिक्रिया, सिर्फ 855 ने किया डिपॉज़िट पेमेंट

    मुंबई में BMC की अफोर्डेबल हाउसिंग लॉटरी को उम्मीद के मुताबिक रिस्पॉन्स नहीं मिला। 23,704 लोगों ने रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन सिर्फ 855 ने ही डिपॉज़िट जमा किया। जानिए क्यों नहीं बिक रहे 55 लाख से 1 करोड़ तक के ये फ्लैट्स।

    मुंबई: बॉम्बे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) की अफोर्डेबल हाउसिंग लॉटरी 2024 को इस बार कमजोर रिस्पॉन्स मिला है। कुल 23,704 नागरिकों ने रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन सिर्फ 855 लोगों ने ही ₹11,000 का डिपॉज़िट पेमेंट किया है। जबकि आवेदन की अंतिम तारीख में अब केवल चार दिन बाकी हैं।
    यह फ्लैट्स डेवलपमेंट कंट्रोल एंड प्रमोशन रेगुलेशन (DCPR), 2034 के तहत विकसित किए गए हैं। कुल 426 फ्लैट्स में से 381 EWS (Economically Weaker Section) और 45 LIG (Low Income Group) के लिए रखे गए हैं।

    🏠 महंगे दामों से खरीदार पीछे हटे

    BMC ने 16 अक्टूबर को इन 426 फ्लैट्स की बिक्री की घोषणा की थी, जिनकी कीमतें ₹55 लाख से ₹1.07 करोड़ के बीच रखी गई हैं।
    इन फ्लैट्स से BMC को करीब ₹308 करोड़ की आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन उच्च दामों के कारण खरीदारों की रुचि कम देखी जा रही है।
    BMC के मुताबिक, कीमतें स्थानीय रेडी रेकनर रेट से लगभग 10% ज़्यादा हैं, जो मिडल क्लास और लो-इनकम परिवारों के लिए भारी पड़ रही हैं।

    स्थान:
    इन फ्लैट्स के लोकेशन में मरोल (अंधेरी), मजास गांव (जोगेश्वरी ईस्ट), गोरेगांव वेस्ट, कांदिवली वेस्ट, भांडुप वेस्ट, भायखला, दहिसर और कांजुरमार्ग शामिल हैं।

    📉 BMC कर सकती है फ्लैट के रेट्स में कमी

    एक वरिष्ठ BMC अधिकारी के अनुसार —

    “अगर खरीदार नहीं मिलते हैं, तो हम कीमतों में कमी पर विचार कर सकते हैं। लेकिन उससे पहले हम मार्केट की स्थिति और अन्य सरकारी हाउसिंग इन्वेंटरी का रिव्यू करेंगे।”

    यह फ्लैट्स DCPR 2034 की रेग्युलेशन 15 और 33(20)(b) के तहत डेवेलपर्स से लिए गए हैं, जिसमें उन्हें 4000 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर बने प्रोजेक्ट का कुछ हिस्सा अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए देना होता है।

    पहले ऐसे फ्लैट्स MHADA लॉटरी के जरिए अलॉट किए जाते थे, लेकिन इस बार BMC ने खुद यह प्रक्रिया संभाली है।

    🗓️ ऑनलाइन आवेदन और लॉटरी का शेड्यूल

    • अंतिम तारीख: 14 नवंबर 2025 (रात 11:59 बजे तक)
    • योग्य आवेदकों की सूची: 18 नवंबर (शाम 5 बजे)
    • लॉटरी ड्रॉ: 20 नवंबर (शाम 5 बजे)
    • सफल आवेदकों की घोषणा: 21 नवंबर (शाम 5 बजे)
    • आधिकारिक वेबसाइट: https://housing.mcgm.gov.in

    📊 BMC आवेदन डेटा (16 अक्टूबर – 10 नवंबर तक)

    विवरणसंख्या
    कुल रजिस्टर्ड आवेदक23,704
    रजिस्ट्रेशन फीस (₹1,180) भरने वाले1,644
    डिपॉज़िट (₹11,000) जमा करने वाले855

    🧩 क्यों नहीं मिल रही है जनता की रुचि?

    • फ्लैट्स की कीमतें आमदनी के मुकाबले ज्यादा
    • 269 से 489 वर्गफुट के छोटे आकार
    • EMI और ब्याज दरों में बढ़ोतरी
    • निजी बिल्डर्स के सस्ते ऑफर्स से मुकाबला
    • जगहों की सीमित कनेक्टिविटी

    🏡 EWS और LIG के लिए उम्मीदें अभी बाकी

    हालांकि शुरुआत धीमी रही है, लेकिन BMC को उम्मीद है कि जैसे-जैसे अंतिम तिथि करीब आएगी, आवेदकों की संख्या बढ़ेगी।
    इसके अलावा, अगर कीमतों में कमी की घोषणा होती है, तो यह मिडल क्लास खरीदारों के लिए बड़ा मौका बन सकता है।


    FAQ सेक्शन

    Q1. BMC की अफोर्डेबल हाउसिंग लॉटरी क्या है?
    यह एक सरकारी योजना है जिसमें मुंबई के अलग-अलग इलाकों में बने सस्ते घरों को लॉटरी सिस्टम के जरिए पात्र नागरिकों को आवंटित किया जाता है।
    Q2. आवेदन की आखिरी तारीख क्या है?
    14 नवंबर 2025 रात 11:59 बजे तक ऑनलाइन आवेदन और डिपॉज़िट किया जा सकता है।
    Q3. किन इलाकों में फ्लैट्स उपलब्ध हैं?
    मरोल, जोगेश्वरी, गोरेगांव, कांदिवली, भांडुप, बायकुला, दहिसर और कांजुरमार्ग में।
    Q4. फ्लैट्स की कीमतें कितनी हैं?
    ₹55 लाख से ₹1.07 करोड़ के बीच, क्षेत्र और साइज के अनुसार।
    Q5. क्या BMC दरें घटा सकती है?
    हां, BMC ने संकेत दिए हैं कि अगर खरीदार नहीं मिलते हैं तो दरों में कमी पर विचार किया जाएगा।

  • गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के निरीक्षण पर पहुंचे MLA सुनील प्रभु, बीएमसी अधिकारियों को दी कई अहम निर्देश

    गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के निरीक्षण पर पहुंचे MLA सुनील प्रभु, बीएमसी अधिकारियों को दी कई अहम निर्देश

    शिवसेना नेता और पूर्व महापौर सुनील प्रभु ने गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के निर्माण कार्य का बीएमसी अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। उन्होंने आदिवासी पाड़ा के लोगों की सुविधाओं और भविष्य में होने वाली ट्रैफिक समस्याओं पर तत्काल समाधान के निर्देश दिए।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड पर चल रहे विकास कार्यों का शिवसेना नेता और विधायक सुनील प्रभु ने सोमवार को बीएमसी अधिकारियों के साथ स्थल निरीक्षण किया।
    निरीक्षण के दौरान उन्होंने नागरिकों को हो रही समस्याओं का जायजा लिया और संबंधित विभागों को कई सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।

    🏗️ स्थानीय नागरिकों की समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश

    विधायक सुनील प्रभु ने बताया कि गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के निर्माण से श्रमसाफल्य सोसायटी, श्रीकृष्ण नगर, जयभीम नगर और दिंडोशी महानगरपालिका वसाहत जैसे इलाकों के नागरिकों को असुविधा हो रही है।
    उन्होंने बीएमसी के रस्ता विभाग, पूल विभाग और परिरक्षण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि

    • श्रीकृष्ण नगर के नागरिकों के लिए संतोष नगर बस स्टॉप तक पहुंचने के लिए अंडरपास (भुयारी मार्ग) बनाया जाए।
    • पर्जन्य जल वाहिनी (ड्रेनेज लाइन) को सड़क के एक ओर स्थानांतरित कर नया निर्माण किया जाए।
    • गणेश मंदिर-इंदिरा विकास केंद्र मार्ग पर नागरिकों और वाहनों को सुगम आवागमन की सुविधा दी जाए।
    • बीएसटी बसों के लिए टर्मिनल पॉइंट तैयार किया जाए ताकि यातायात में बाधा न आए।

    🚧 आदिवासी पाड़ा के लोगों की सुविधा के लिए भी निर्देश

    निरीक्षण के दौरान सुनील प्रभु ने यह भी बताया कि गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के टनल निर्माण कार्य के चलते बालासाहेब फालके चित्रनगरी के हबाले आदिवासी पाड़ा में लोगों का मुख्य मार्ग बंद हो गया था, जिससे उन्हें आवाजाही में भारी दिक्कतें हो रही थीं।
    अब बीएमसी ने इस “मिसिंग लिंक रोड” का काम शुरू कर दिया है, जिसका शुभारंभ स्वयं सुनील प्रभु ने किया।

    🚦 भविष्य की ट्रैफिक समस्या पर भी होगी बैठक

    दादासाहेब फालके चित्रनगरी के मुख्य प्रवेश द्वार के पास उड्डाणपुल का एग्जिट पॉइंट बनने वाला है।
    विधायक ने बताया कि इस क्षेत्र में भविष्य में वाहन जाम की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
    इसलिए उन्होंने बीएमसी के पूल विभाग, रस्ते विभाग और परिरक्षण विभाग को नियोजन बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए ताकि पहले से योजना बनाई जा सके।

    👥 अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी

    निरीक्षण के दौरान विधायक सुनील प्रभु के साथ
    ** पूर्व उपमहापौर सुहास वाडकर**,
    *पूर्व नगरसेवक तुलसीराम शिंदे*,
    ** उद्धव ठाकरे गुट के शाखाप्रमुख संपत मोरे**,
    तथा बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

    💬 सुनील प्रभु ने क्या कहा

    “हमारा उद्देश्य सिर्फ सड़क और पुल नहीं बनाना है, बल्कि आसपास के नागरिकों की सुविधा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। बीएमसी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि स्थानीय लोगों की जरूरतें पूरी हों और ट्रैफिक व्यवस्था सुचारु रहे।”
    सुनील प्रभु, विधायक (शिवसेना – उद्धव बालासाहेब ठाकरे गट)


    FAQ सेक्शन:

    Q1. गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड का निरीक्षण किसने किया?
    विधायक और शिवसेना नेता सुनील प्रभु ने बीएमसी अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया।
    Q2. निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या था?
    स्थानीय नागरिकों की समस्याओं को समझना, ट्रैफिक व्यवस्था सुधारना और निर्माण कार्य में आवश्यक बदलाव के निर्देश देना।
    Q3. कौन-कौन से इलाके प्रभावित हैं?
    श्रीकृष्ण नगर, दिंडोशी, जयभीम नगर और हबाले आदिवासी पाड़ा जैसे इलाके इस परियोजना से प्रभावित हैं।
    Q4. ट्रैफिक को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
    फालके चित्रनगरी के पास संभावित ट्रैफिक जाम को रोकने के लिए नियोजन बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
    Q5. इस मौके पर और कौन मौजूद थे?
    उपमहापौर सुहास वाडकर, पूर्व नगरसेवक तुलसीराम शिंदे और बीएमसी अधिकारी।

  • मुंबई के वेस्टर्न उपनगरों में अब लगेंगे वॉटर मीटर, BMC करेगी सप्लाई मॉनिटरिंग शुरू

    मुंबई के वेस्टर्न उपनगरों में अब लगेंगे वॉटर मीटर, BMC करेगी सप्लाई मॉनिटरिंग शुरू

    मुंबई के गोरेगांव से दहिसर तक अब बीएमसी लगाएगी वॉटर मीटर। पानी की सप्लाई में दबाव की कमी और लीकेज की पहचान होगी आसान। पश्चिमी उपनगरों में पानी की कमी पर अब सख्ती से नज़र रखी जाएगी।

    मुंबई: शहर में पानी की सप्लाई से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) अब एक नई पहल शुरू करने जा रही है।
    गोरेगांव से लेकर दहिसर तक के वेस्टर्न उपनगरों (Western Suburbs) में अब वॉटर मीटर (Water Meter) लगाए जाएंगे, जिससे न सिर्फ पानी का दबाव (Water Pressure) मॉनिटर किया जा सकेगा, बल्कि लीकेज और कंटैमिनेशन जैसी दिक्कतों का तुरंत पता चल सकेगा।

    बीएमसी का मानना है कि इन वॉटर मीटरों से न्यायसंगत जल वितरण (Equitable Water Distribution) सुनिश्चित किया जा सकेगा और लंबे समय से परेशान इलाकों में राहत मिलेगी।

    🚰 गोरेगांव से दहिसर तक वॉटर मीटर लगाने की योजना

    बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक, पहले चरण में गोरेगांव, कांदिवली, बोरीवली, दहिसर और मलाड (Marve क्षेत्र सहित) जैसे इलाकों में वॉटर मीटर लगाए जाएंगे।
    इन इलाकों में पिछले चार महीनों से लगातार कम दबाव की पानी की सप्लाई (Low Water Pressure) की शिकायतें मिल रही हैं।

    हालांकि मुंबई के सात झीलों में पर्याप्त पानी का भंडार मौजूद है, लेकिन पश्चिमी उपनगरों में पाइपलाइन दबाव और लीकेज की समस्या की वजह से कई सोसायटियों को अब भी कम सप्लाई मिल रही है।

    📉 कम दबाव की समस्या बनी बड़ी चुनौती

    केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने हाल ही में उत्तर मुंबई के पानी संकट की समीक्षा बैठक की थी।
    उन्होंने बताया कि दहिसर, मागाठाणे और कांदिवली जैसे इलाकों में पानी का दबाव 40-45 लेवल तक ही रह जाता है, जबकि आदर्श स्तर 60-65 होना चाहिए।

    गोयल ने बीएमसी को सुझाव दिया कि ऐसे इलाकों में जोनल प्रेशर मीटर (Zonal Pressure Meter) लगाकर सप्लाई को ट्रैक किया जाए ताकि तुरंत सुधार किया जा सके।

    🧾 प्रदूषित पानी और पाइपलाइन लीकेज पर सख्त निगरानी

    बैठक में मंत्री ने कहा कि सबसे पहले प्रदूषित पानी और पाइपलाइन लीकेज जैसी शिकायतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित इलाकों का डिजिटल मैप तैयार किया जाए और सुधारात्मक कदम तुरंत उठाए जाएं।

    हालांकि कुल सप्लाई बढ़ाने में समय लगेगा, लेकिन यह मॉनिटरिंग सिस्टम तत्काल राहत देने में मदद करेगा।

    🗣️ स्थानीय नेताओं की मांग – ‘बराबर पानी सप्लाई हो’

    बोरीवली के विधायक संजय उपाध्याय ने कहा,

    “शहर के दक्षिण हिस्से से बड़ी आबादी उपनगरों में शिफ्ट हो चुकी है, लेकिन पानी का वितरण उसी पुराने पैटर्न पर है। पश्चिमी उपनगरों को अब भी कम सप्लाई दी जा रही है, जो अनुचित है।”

    स्थानीय नेताओं ने मांग की है कि बीएमसी सप्लाई की रफ्तार बढ़ाए और वॉटर मीटर के जरिए पारदर्शी सिस्टम लाए।

    🏙️ बीएमसी की उम्मीद – अगले साल तक बड़ा बदलाव

    बीएमसी इंजीनियरिंग विभाग का कहना है कि अगले छह से आठ महीनों में यह वॉटर मीटरिंग प्रोजेक्ट पूरा कार्यान्वित (Implemented) हो जाएगा।
    इसके बाद हर ज़ोन में डिजिटल डेटा के ज़रिए पानी की खपत, दबाव और लीकेज की जानकारी रियल टाइम में मिल सकेगी।


    FAQ सेक्शन

    Q1. बीएमसी कहां-कहां वॉटर मीटर लगाएगी?
    👉 पहले चरण में गोरेगांव से दहिसर तक के वेस्टर्न उपनगरों में।
    Q2. इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    👉 पानी का दबाव मॉनिटर करना, लीकेज पकड़ना और न्यायसंगत सप्लाई सुनिश्चित करना।
    Q3. कौन-कौन से इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?
    👉 मागाठाणे, दहिसर, कांदिवली (वेस्ट) और मलाड (वेस्ट) के मार्वे क्षेत्र।
    Q4. क्या केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इस पर कोई कदम उठाया है?
    👉 हां, उन्होंने बीएमसी को मीटर लगाने और पाइपलाइन लीकेज पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
    Q5. यह प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा?
    👉 बीएमसी का लक्ष्य है कि अगले 6–8 महीनों में इसे पूरी तरह लागू किया जाए।

  • दहिसर टोल हटाओ या मैं खुद तोड़ दूंगा – परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की सख्त चेतावनी

    दहिसर टोल हटाओ या मैं खुद तोड़ दूंगा – परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की सख्त चेतावनी

    महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने दहिसर टोल प्लाजा का निरीक्षण कर अधिकारियों को 13 नवंबर तक टोल हटाने की अंतिम चेतावनी दी। कहा – “समयसीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो मैं खुद टोल उखाड़ दूंगा।”

    मुंबई: दहिसर टोल प्लाजा को लेकर राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है।
    परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने शनिवार को टोल प्लाजा का निरीक्षण करते हुए 13 नवंबर तक इसे हटाने की डेडलाइन दी।
    उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी —

    “अगर तय समय में कार्रवाई नहीं हुई, तो मैं खुद जाकर टोल प्लाजा उखाड़ दूंगा।”

    इस बीच भाजपा ने टोल को हाईवे पर शिफ्ट करने का विरोध किया है, जिससे शिवसेना (शिंदे गुट) और भाजपा के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

    🔹 टोल प्लाजा हटाने पर विवाद क्यों?

    दहिसर टोल प्लाजा पर लगातार ट्रैफिक जाम और भीड़भाड़ की समस्या बनी हुई है।
    इसी वजह से टोल को स्थानांतरित करने की मांग उठ रही थी।
    उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी अधिकारियों को यह टोल हटाने और इसे वर्सोवा हाईवे या खाड़ी ब्रिज पार शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे।

    लेकिन इस प्रस्ताव का भाजपा और मंत्री गणेश नाईक ने खुलकर विरोध किया।
    इससे सरकार के अंदर ही मतभेद उभर आए हैं।

    🔹 निरीक्षण में भड़के सरनाईक

    शनिवार सुबह प्रताप सरनाईक दहिसर टोल प्लाजा पहुंचे।
    निरीक्षण के दौरान मुंबई पुलिस, MSRDC, मनपा, टोल कंपनी और परिवहन विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
    लेकिन सरनाईक ने देखा कि एक तरफ से फ्रेम हटाने के अलावा कोई ठोस काम नहीं हुआ।
    जब अधिकारियों ने और वक्त मांगा, तो मंत्री नाराज़ हो गए और कहा —

    “13 नवंबर को मैं फिर आऊंगा। अगर तब भी यही हाल रहा, तो खुद टोल बूथ तोड़ दूंगा।”

    🔹 निरीक्षण के दौरान विरोध प्रदर्शन

    सरनाईक जब टोल को वर्सोवा क्रीक ब्रिज के पार स्थानांतरित करने का निरीक्षण करने पहुंचे,
    तो कांग्रेस नेता विजय पाटिल और उनके समर्थकों ने विरोध जताया।
    विरोधियों ने कहा —

    “मुंबई का टोल प्लाजा वसई क्षेत्र में नहीं लाया जा सकता। यहां पहले से सड़कों की हालत खराब है, ट्रैफिक भी है। यह स्वीकार्य नहीं होगा।”

    🔹 सड़क साफ करने और डिवाइडर हटाने के आदेश

    निरीक्षण के बाद मंत्री सरनाईक ने मुंबई की ओर आने वाले मार्ग पर बने डिवाइडर हटाने और
    वाहनों के लिए रास्ता खोलने का आदेश दिया।
    उन्होंने कहा कि

    • क्रेन, बेंच और अन्य बाधाएं हटाई जाएं।
    • अनावश्यक होर्डिंग, लोहे के खंभे और अतिरिक्त बूथ तोड़े जाएं।
    • केवल व्यावसायिक वाहनों के लिए जरूरी बूथ ही रहें।

    साथ ही, मीरा-भायंदर की ओर आने वाले टोल बूथ को भी शिफ्ट करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया।


    FAQ सेक्शन

    1. दहिसर टोल हटाने की आखिरी तारीख क्या है?
    → परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने 13 नवंबर तक की डेडलाइन दी है।
    2. उन्होंने क्या चेतावनी दी?
    → सरनाईक ने कहा, “अगर कार्रवाई नहीं हुई तो मैं खुद टोल तोड़ दूंगा।”
    3. टोल को कहां शिफ्ट करने का प्रस्ताव है?
    → वर्सोवा हाईवे या खाड़ी ब्रिज के पार स्थानांतरित करने की बात चल रही है।
    4. किसने विरोध किया है?
    → भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने प्रस्तावित शिफ्टिंग का विरोध किया है।

  • HIV पॉज़िटिव होने पर नहीं की सर्जरी: मुंबई के शताब्दी अस्पताल पर भेदभाव का आरोप

    HIV पॉज़िटिव होने पर नहीं की सर्जरी: मुंबई के शताब्दी अस्पताल पर भेदभाव का आरोप

    मुंबई के कांदिवली स्थित BMC के शताब्दी अस्पताल में HIV पॉज़िटिव मरीज को अपेंडिक्स की सर्जरी से मना कर दिया गया। मरीज को दो बार रेफर किया गया और बाद में नायर अस्पताल में इलाज शुरू हुआ। जानिए क्या कहती है सरकार और कानून।

    मुंबई: कांदिवली के शताब्दी अस्पताल में HIV पॉज़िटिव मरीज को सर्जरी से इनकार किए जाने का मामला सामने आया है।
    37 वर्षीय यह व्यक्ति, जो मलवणी इलाके का रहने वाला है, गंभीर पेट दर्द और अपेंडिक्स की शिकायत के चलते 31 अक्टूबर को अस्पताल में भर्ती हुआ था।
    अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में 7.5 mm का अपेंडिक्स और किडनी स्टोन की पुष्टि हुई थी। डॉक्टरों ने शुरू में आपातकालीन अपेंडिक्स सर्जरी की तैयारी की, लेकिन HIV रिपोर्ट आने के बाद सर्जरी रोक दी गई।

    मरीज को उसी दिन डिस्चार्ज कर कुपर अस्पताल रेफर कर दिया गया — और रेफरल नोट में यह स्पष्ट लिखा गया कि वजह मरीज का HIV पॉज़िटिव होना है।

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    🔹 एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक — मरीज का दर्द बढ़ा

    कुपर अस्पताल के सर्जरी विभाग ने रेफरल पर सवाल उठाए और मरीज को वापस लौटा दिया।
    इसके बाद शताब्दी अस्पताल ने फिर से मरीज को नायर अस्पताल रेफर किया, जहाँ अब उसका इलाज चल रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल जूनियर डॉक्टरों की गलती नहीं थी — क्योंकि मरीज को भर्ती करने और डिस्चार्ज करने दोनों में सीनियर डॉक्टरों की जानकारी शामिल थी।
    वर्तमान में मरीज नायर अस्पताल में ब्लड क्लॉट की समस्या से जूझ रहा है।

    🔹 अस्पताल की सफाई में फंसी जान? शताब्दी अस्पताल ने दी सफाई

    शताब्दी अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अजय गुप्ता ने भेदभाव के आरोपों से इनकार किया।
    उन्होंने बताया कि मरीज शुक्रवार को आया था, जबकि शनिवार को ऑपरेशन थिएटर (OT) की मासिक डीप क्लीनिंग निर्धारित थी।

    उनके अनुसार,

    “शनिवार को वार्ड के मरीजों की सर्जरी तय थी। HIV पॉज़िटिव मरीज की सर्जरी करने के बाद OT की पूरी स्टरलाइज़ेशन प्रक्रिया करनी होती है, जिससे बाकी 5 सर्जरी रद्द करनी पड़तीं। इसलिए हमने मरीज को नायर अस्पताल भेजा।”

    हालाँकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि HIV पॉज़िटिव मरीज को इलाज से इनकार करना कानूनन अपराध है, और अस्पताल को यूनिवर्सल प्रिकॉशन के तहत इलाज करना चाहिए था।

    🔹 कानून क्या कहता है — HIV Act, 2017

    HIV और AIDS (Prevention and Control) Act, 2017 के तहत किसी भी व्यक्ति को उसकी HIV स्थिति के कारण इलाज से वंचित करना गैरकानूनी है।
    यह कानून मरीज की गोपनीयता की रक्षा करता है और

    • स्वास्थ्य सेवा,
    • रोजगार,
    • शिक्षा,
    • और आवास में किसी भी प्रकार के भेदभाव पर रोक लगाता है।

    सभी अस्पतालों को ‘यूनिवर्सल प्रिकॉशन’ (universal precautions) का पालन करना अनिवार्य है, ताकि HIV-संक्रमित मरीजों को भी सामान्य मरीजों की तरह ही इलाज मिल सके।

    🔹 प्रशासनिक और नैतिक सवाल

    इस पूरे प्रकरण ने BMC के अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

    • क्या OT क्लीनिंग का बहाना वास्तव में देरी का कारण था या भेदभाव का मामला?
    • क्या BMC के अस्पताल HIV-पॉज़िटिव मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित हैं?
    • और क्या ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी?

    स्वास्थ्य अधिकार कार्यकर्ताओं ने राज्य स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच की मांग की है।


    🔹 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. क्या अस्पताल HIV मरीज का इलाज मना कर सकता है?
    नहीं, HIV और AIDS (Prevention and Control) Act, 2017 के तहत इलाज से इनकार करना अवैध है।
    Q2. मरीज की हालत अभी कैसी है?
    वह फिलहाल नायर अस्पताल में भर्ती है और ब्लड क्लॉट की समस्या से जूझ रहा है।
    Q3. क्या शताब्दी अस्पताल ने भेदभाव स्वीकार किया?
    अस्पताल प्रशासन ने इनकार किया, उन्होंने कहा कि OT की डीप क्लीनिंग के कारण सर्जरी संभव नहीं थी।
    Q4. क्या सरकार इस मामले की जांच करेगी?
    संभावना है कि BMC और राज्य स्वास्थ्य विभाग से जांच की मांग की जाएगी, क्योंकि यह कानून का उल्लंघन है।
    Q5. क्या HIV मरीजों को विशेष सुरक्षा दी जाती है?
    हाँ, कानून के तहत मरीज की पहचान गोपनीय रखनी होती है, और सभी डॉक्टरों को यूनिवर्सल सुरक्षा मानकों का पालन करना होता है।

  • कांदिवली में मनपा अभियंता अभय जगताप पर सवाल — अवैध निर्माण पर कार्रवाई से क्यों कर रहे हैं इंकार?

    कांदिवली में मनपा अभियंता अभय जगताप पर सवाल — अवैध निर्माण पर कार्रवाई से क्यों कर रहे हैं इंकार?

    मुंबई के कांदिवली (पश्चिम) आर/दक्षिण वार्ड में प्रभारी अभियंता अभय जगताप पर गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय नागरिकों और विधायक के आदेश के बावजूद अवैध निर्माण पर कार्रवाई न करने से लोग नाराज़ हैं। सवाल उठ रहा है — क्या कानून से ऊपर हैं कार्यकारी अभियंता एवं डी. ओ. अभय जगताप?

    मुंबई: कांदिवली (पश्चिम) में स्थित मनपा आर/दक्षिण वार्ड कार्यालय में तैनात (प्रभारी) कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप पर स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
    निवासियों का आरोप है कि वार्ड के अंतर्गत आने वाले सागवाडी आदिवासी पाड़ा, समाज मंदिर के पास अवैध निर्माण होने के बावजूद, जगताप कार्रवाई से बच रहे हैं।

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    लोगों का कहना है कि उन्होंने सार्वजनिक शौचालय और बोरिंग के लिए मांग की थी, जिसको लेकर 10 लाख रुपये सरकारी फंड भी पास किया गया। लेकिन उस पर कुछ लोगों ने तीन अवैध कमरे बना लिए। विधायक और सहाय्यक आयुक्त के आदेश के बाद भी तोड़क कार्रवाई नहीं की गई, जिससे नागरिकों में नाराज़गी है।

    सार्वजनिक शौचालय के लिए दी गई भूमि पर हुआ कब्ज़ा

    स्थानीय नागरिकों ने बताया कि क्षेत्र में शौचालय की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें काफी परेशानी होती है।
    इसी वजह से गुरुचरण की भूमि पर शौचालय निर्माण के लिए आवेदन किया गया था।
    लेकिन कुछ अराजक तत्वों ने मौके का फायदा उठाकर वहाँ तीन अवैध रूम बना लिए।

    नागरिकों ने इस संबंध में तत्कालीन सहाय्यक आयुक्त मनीष साल्वे को पत्र लिखा और अवैध निर्माण हटाने की मांग की।
    इसके साथ ही, विधायक योगेश सागर ने भी मनपा को पत्र भेजकर कार्रवाई का अनुरोध किया।

    अभय जगताप पर मिलीभगत के आरोप

    स्थानीय लोगों का कहना है कि (प्रभारी) कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप ने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की है।
    आरोप है कि उन्होंने अवैध निर्माणकर्ताओं से पैसे लेकर कार्रवाई रोक दी है।
    स्थानीयों के अनुसार, जगताप का रवैया मनमाना है और वे कहते हैं —

    “मेरी मर्जी है, कोई काम करूं या न करूं। मेरा क्या बिगाड़ लेंगे अधिकारी या विधायक?”

    यह बात न केवल प्रशासनिक अनुशासनहीनता को दर्शाती है बल्कि मनपा की साख पर भी सवाल उठाती है।

    सहाय्यक आयुक्त और विधायक के आदेशों की अनदेखी

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    सूत्रों के मुताबिक, विधायक योगेश सागर ने खुद सहाय्यक आयुक्त से फोन पर बात कर कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
    अभय जगताप का कहना है कि यह मामला अब वर्तमान सहाय्यक अभियंता शिशिर खोखले या पूर्व अभियंता ब्रह्मणकार को देखना चाहिए। जबकि ब्रह्मणकर का तबादला हो चुका है।
    हालांकि जगताप का यह बयान जिम्मेदारी से बचने की कोशिश मानी जा रही है।

    स्थानीय समाज का विरोध — कार्रवाई की मांग

    इस पूरे मामले में आदिवासी समाज और स्थानीय महिलाएं खुलकर विरोध में उतर आई हैं।
    चंदू बंजारा, गोपाल, अजय, कमल काली, दिनेश और कई अन्य लोगों ने पत्रकार को बुलाकर आदिवासी समाज मंदिर के पास बने अवैध निर्माण के खिलाफ अपनी बात रखी।
    उनका कहना है कि अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो वे मनपा कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करेंगे।
    इसी सिलसिले में अखिल भारतीय मानवाधिकार नागरिक विकल्प के मुंबई उपाध्यक्ष राजेश किसन मंजाळ से मुलाकात की तो उन्होंने और भी चौकाने वाला खुलासा किया मनपा आर/ दक्षिण विभाग के इमारत व कारखाना विभाग की ओर से शिकायत क्रमांक RS/022/14- 12 – 2024/333 से संबंधित राजेश पवार के खिलाफ नोटिस क्रमांक RS/DO1RS/022/351-MMC ACT/RS333NO1/16-12-2024 जारी किया गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि भ्रष्ट प्रभारी कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप ने यहां रिश्वतखोरी की हुई है।

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    निवासियों ने मांग की है कि

    “सबसे पहले भ्रष्ट प्रभारी कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो और फिर अवैध निर्माण पर बुलडोजर चले।”

    कनिष्ठ अभियंता पर भी सवाल — ‘जगताप से क्यों डरते हैं अधिकारी?’

    सूत्र बताते हैं कि जब से अभय जगताप प्रभारी डी.ओ. बने हैं, वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों को धमकाते और दबाव डालते हैं।
    कई अधिकारी उनके खिलाफ बोलने से डरते हैं।
    स्थानीयों का कहना है कि तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता नितिन ठाकुर ही इस मामले की सच्चाई बता सकते हैं कि आखिर “जगताप का डर” इतना क्यों है? लेकिन उनका भी तबादला हो गया है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. मामला किस इलाके का है?
    A1. कांदिवली (पश्चिम) आर/दक्षिण वार्ड, पटेल नगर रोड नंबर 4 का मामला है।
    Q2. विवाद किस बात को लेकर है?
    A2. नागरिकों द्वारा दी गई भूमि पर अवैध निर्माण हुआ है, जिस पर कार्रवाई नहीं की गई।
    Q3. किस अधिकारी पर आरोप लगे हैं?
    A3. प्रभारी कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप पर।
    Q4. क्या विधायक और मनपा अधिकारी इस मामले में शामिल हुए?
    A4. हाँ, विधायक योगेश सागर और तत्कालीन सहाय्यक आयुक्त मनीष साल्वे दोनों ने कार्रवाई का आदेश दिया था।
    Q5. नागरिकों की क्या मांग है?
    A5. अभय जगताप के खिलाफ जांच और दंडात्मक कार्रवाई, साथ ही अवैध निर्माण का तुरंत तोड़फोड़ अभियान।

  • BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने फिर शुरू की ‘शिव भोजन थाली’, गरीबों को सस्ते में मिलेगा खाना

    BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने फिर शुरू की ‘शिव भोजन थाली’, गरीबों को सस्ते में मिलेगा खाना

    महाराष्ट्र में महायुती सरकार ने BMC चुनाव से पहले शिव भोजन थाली योजना को फिर शुरू किया है। गरीबों को ₹10 में ₹50 की थाली मिलेगी। जानिए कैसे मिला ₹70 करोड़ का बजट, किन जिलों में खुले रहेंगे केंद्र, और क्या हैं सरकार के नए नियम।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र और मुंबई के गरीब नागरिकों के लिए राहत भरी खबर है। महा यूती सरकार ने फिर से ‘शिव भोजन थाली योजना’ को शुरू करने का ऐलान किया है, जो पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी (MVA) सरकार ने शुरू की थी।
    यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को ₹10 में ₹50 की पौष्टिक थाली मुहैया कराती है। चुनावी मौसम में इस फैसले को गरीब वर्ग तक पहुंचने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    🔹 योजना का बजट और फंड रिलीज़

    • सरकार ने इस योजना के लिए ₹70 करोड़ का बजट तय किया है।
    • इसमें से ₹28 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है, जबकि सितंबर में ₹21 करोड़ पहले ही वितरित किए गए थे।
    • वित्त विभाग की अनुमति के बाद 10 दिनों के भीतर फंड खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं, नहीं तो राशि वापस ली जाएगी।
    • योजना को लागू करने की ज़िम्मेदारी अन्न व नागरी पुरवठा विभाग को दी गई है।

    🔹 क्या है ‘शिव भोजन थाली’ योजना?

    • शुरुआत: 26 जनवरी 2020 को उद्धव ठाकरे सरकार ने की थी।
    • उद्देश्य: गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराना।
    • लागत: शुरू में थाली ₹5 में मिलती थी, बाद में ₹10 कर दी गई।
    • कोविड-19 के दौरान: थाली फ्री में दी जाती थी।
    • वर्तमान स्थिति: ₹50 की थाली अब ₹10 में दी जाएगी, बाकी ₹40 का भुगतान सरकार करेगी।
    • राज्यभर में पहले 1,904 केंद्रों से रोज़ाना 2 लाख थालियाँ वितरित होती थीं।

    🔹 ऑपरेटर्स की दिक्कतें और सरकार का नया कदम

    पिछले कई महीनों से योजना ठप होने के कारण शिव भोजन केंद्र चालकों के भुगतान रुके हुए थे, जिससे उनकी आजीविका पर असर पड़ा।
    इस मुद्दे को NCP नेता और मंत्री छगन भुजबल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष उठाया।
    इसके बाद सरकार ने योजना को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया और ₹21 करोड़ का तत्काल अनुदान जारी किया।

    साथ ही, भ्रष्टाचार रोकने के लिए सभी शिव भोजन केंद्रों पर CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि भोजन वितरण में गड़बड़ी न हो।

    🔹 राजनीतिक पृष्ठभूमि: BMC चुनाव से पहले बड़ा दांव

    राज्य सरकार का यह फैसला BMC और अन्य स्थानीय निकाय चुनावों से पहले लिया गया है।
    राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम गरीब और मध्यम वर्ग के मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति का हिस्सा है।
    MVA के दौरान शुरू की गई इस योजना को महा यूती सरकार द्वारा बंद करने पर पहले काफी आलोचना हुई थी।


    🔹 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. शिव भोजन थाली योजना क्या है?
    यह महाराष्ट्र सरकार की सामाजिक योजना है, जिसके तहत गरीबों को मात्र ₹10 में ₹50 की पौष्टिक थाली दी जाती है।
    Q2. इस योजना को कब शुरू किया गया था?
    26 जनवरी 2020 को उद्धव ठाकरे सरकार ने इसे लॉन्च किया था।
    Q3. क्या यह योजना बंद कर दी गई थी?
    हाँ, मार्च 2025 में महायुती सरकार ने वित्तीय कारणों से इसे बंद कर दिया था, लेकिन अब इसे फिर से शुरू किया गया है।
    Q4. वर्तमान में थाली की लागत और सब्सिडी क्या है?
    थाली की कुल लागत ₹50 है। लाभार्थी ₹10 देते हैं, जबकि ₹40 सरकार वहन करती है।
    Q5. कितने केंद्रों पर यह योजना चल रही है?
    राज्यभर में लगभग 1,904 शिव भोजन केंद्र सक्रिय हैं, जहाँ रोज़ाना लाखों गरीब भोजन करते हैं।

  • मुंबई वेस्टर्न सबर्ब्स में बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए BMC को 346 हेक्टेयर ज़मीन चाहिए

    मुंबई वेस्टर्न सबर्ब्स में बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए BMC को 346 हेक्टेयर ज़मीन चाहिए

    मुंबई की वेस्टर्न सबर्ब्स में कोस्टल रोड नॉर्थ, माध–वर्सोवा ब्रिज व अन्य लिंक रोड्स के लिए BMC ने 346 हेक्टेयर ज़मीन अधिग्रहण का प्रस्ताव दिया है — जानिए पूरी जानकारी, क्या बन रहा है, क्या चुनौतियाँ हैं।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महापालिका (BMC) वेस्टर्न उपनगरों में आने वाले बड़े पब्लिक-इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए 346 हेक्टेयर ज़मीन अधिग्रहित करने जा रही है। इस ज़मीन का इस्तेमाल 20 किमी लंबी Mumbai Coastal Road Project‑North (MCRP-North) (वर्सोवा–भायंदर लिंक रोड) के एलाइन्मेंट, इंटरचेंज, एक्सेस रोड्स, वर्क स्पेस और डेवलपमेंट प्लान रोड्स के लिए होगा। इसके साथ ही 2.06 किमी लंबी केबल-स्टे ब्रिज Madh–Versova Bridge और अन्य सबर्ब लिंक रोड्स पर भी काम चल रहा है।

    क्या बन रहा है / प्रोजेक्ट का विवरण

    MCRP-North (वर्सोवा–भायंदर लिंक)

    • पहली फेज पूरी होने के बाद अब MCRP-North में करीब 20 किमी लंबी सड़क बनाई जा रही है।
    • अनुमानित लागत लगभग ₹16,621 करोड़ है।
    • इसका उद्देश्य वर्तमान में 90-120 मिनट चलने वाली यात्रा को मात्र 15-20 मिनट में बदलना है।
    • इसके अलावा इस सड़क से 55% तक कार्बन उत्सर्जन कम होने का लक्ष्य है।

    अन्य लिंक ब्रिज व सबर्ब कनेक्शन

    • माध–वर्सोवा ब्रिज (लगभग 2.06 किमी) प्रस्तावित है, लागत करीब ₹3,990 करोड़
    • एक अन्य लिंक रोड, अंधेरी–मालाड कनेक्शन लगभग ₹2,200 करोड़ की लागत से 2028 तक पूरा होगा।
    • इसके अतिरिक्त मार्वे–मनोरी ब्रिज भी प्रस्तावित है, जिससे 29 किमी की दूरी सिर्फ 1.5 किमी में घट जाएगी।

    ज़मीन अधिग्रहण व क्लियरेंस की चुनौतियाँ

    • इन सभी प्रोजेक्ट्स के लिए BMC को कुल 346 हेक्टेयर ज़मीन चाहिए, जिसमें सड़क एलाइन्मेंट, इंटरचेंज, एक्सेस रोड और विकास-रोड्स शामिल हैं।
    • सिर्फ MCRP-North के लिए ही करीब 200 हेक्टेयर ज़मीन आवश्यक है।
    • BMC ने ₹5.24 करोड़ के टेंडर के माध्यम से एक कंसल्टेंट नियुक्त करने के लिए निविदा आमंत्रित की है, जो ज़मीन अधिग्रहण और क्लियरेंस कार्य करेगा। सबमिशन की आखिरी तारीख 17 नवंबर है।
    • पर्यावरणीय व क्रूज़ जोन (CRZ) नियम, मैंग्रोव संरक्षण जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं। उदाहरण के लिए MCRP-North के लिए मैंग्रोव व कुछ सरकारी ज़मीनों के हस्तांतरण संबंधी क्लियरेंस मिल चुकी है।

    क्यों महत्वपूर्ण है ये बदलाव?

    • मुंबई के वेस्टर्न उपनगरों में ट्रैफिक और यात्रा समय बड़ी समस्या है — ये प्रोजेक्ट्स उन बॉटलनेक्स को दूर करेंगे।
    • बेहतर कनेक्टिविटी से वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे, मलाड, अंधेरी, वर्सोवा आदि इलाकों के लिए लाभदायक होगा।
    • भूमि विकास व सड़क नेटवर्क बेहतर होने से आसपास के रियल एस्टेट एवं व्यावसायिक क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिलेगा।
    • पर्यावरण की दृष्टि से कार्बन उत्सर्जन कम करना व सड़क-यात्रा सुरक्षित व तेज़ बनाना उद्देश्य है।

    क्या देखना है आगे?

    • ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर ध्यान रहेगा — सरकारी व गैर-सरकारी ज़मीन, मैंग्रोव ज़मीन व CRZ ज़ोन जैसी वरीयताएँ।
    • पर्यावरणीय क्लियरेंस व कोर्ट ऑर्डर समय-समय पर मुद्दा बने रह सकते हैं।
    • कार्यान्वयन की गति और समय-सीमा (2028 तक कई लिंक रोड्स की समयसीमा) चेक होगी।
    • स्थानीय समुदायों, मछुआरों, वर्सोवा-कोलीवाडा आदि पर असर का ध्यान देना जरूरत है।

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. 346 हेक्टेयर का ये आंकड़ा क्या पूरी परियोजना के लिए है?
    A1. हाँ — यह सभी प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स (MCRP-North + लिंक ब्रिज व एक्सेस रोड्स) के लिए कुल ज़मीन की आवश्यकता को दर्शाता है।
    Q2. इस प्रक्रिया में पर्यावरण को लेकर क्या सावधानी ली जा रही है?
    A2. मैंग्रोव व CRZ ज़ोन की क्लियरेंस मिल चुकी है — उदाहरण के लिए MCRP-North के लिए मदती लैंड व मैंग्रोव डायवर्शन के लिए इन-प्रिंसिपल ऑप्रूवल मिला है।
    Q3. इन कार्यों की समयसीमा क्या है?
    A3. कुछ लिंक रोड्स व ब्रिज्स की लक्ष्य समयसीमा 2028 तक रखी गयी है। MCRP-North के लिए भी 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
    Q4. स्थानीय लोगों के लिए क्या फायदे होंगे?
    A4. ट्रैफिक कम होगा, यात्रा समय घटेगा, वेस्टर्न उपनगरों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी — साथ ही आसपास के इलाकों में विकास व रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
    Q5. लागत कितनी अनुमानित है?
    A5. उदाहरण के लिए MCRP-North का अनुमानित बजट लगभग ₹16,621 करोड़ है, माध-वर्सोवा ब्रिज का अनुमान लगभग ₹3,990 करोड़ है।