मुंबई: शनिवार 16 अगस्त, कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुंबई में एक की मौत 30 घायल और 15 गोविदा का अस्पताल में इलाज चल रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक, मानखुर्द में दही हांडी बांधते समय एक 32 वर्षीय व्यक्ति की गिरकर मौत हो गई है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में दही हंडी फोड़ने के चक्कर में 30 गोविंदा घायल हो गए, जिनमें से से 15 लोगों को अस्पताल भर्ती कराया गया है। Mumbai: One dead, 30 injured, 15 hospitalised during Dahi Handi festival
Mumbai बीएमसी के अधिकारियों क्या कहा?
मुंबई के उपनगर मानखुर्द में शनिवार दोपहर एक 32 वर्षीय ‘गोविंदा’ की दही हांडी बांधते समय गिरने से मौत हो गई। जबकि शहर के अलग-अलग हिस्सों में मानव पिरामिड बनाते समय 30 अन्य गोविंदा घायल हो गए। बृहन्मुंबई महानगर पालिका के अधिकारियों ने कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर इसकी जानकारी दी। Mumbai: One dead, 30 injured, 15 hospitalised during Dahi Handi festival
पहली मंजिल से गिर कर मौत
मानखुर्द के महाराष्ट्र नगर मे मृत व्यक्ति की पहचान जगमोहन शिवकिरण चौधरी के रूप में हुई है। बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि जगमोहन अपने घर की पहली मंजिल की खिड़की की ग्रिल से एक रस्सी पर दही हांडी यानी दही से भरी हुई मिट्टी की मटकी बांध रहा था। इसी दौरान वह अचानक नीचे गिर पड़ा। चौधरी को तुरंत नगरपालिका द्वारा संचालित शताब्दी गोवंडी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। Mumbai: One dead, 30 injured, 15 hospitalised during Dahi Handi festival
मुंबई, ठाणे और आस-पास के इलाकों में भारी बारिश के बीच मनाए गए इस वर्ष के दही हांडी उत्सव में 30 गोविंदा घायल हुए हैं। इनमें से 15 को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि बाकी घायलों का इलाज कर छुट्टी दे दी गई। अधिकारियों के अनुसार, इन 30 घायलों में 18 दक्षिण मुंबई से हैं, जबकि 6-6 लोग शहर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों से हैं। Mumbai: One dead, 30 injured, 15 hospitalised during Dahi Handi festival
आस्था और भक्ति भाव
दही हांडी का त्योहार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूरे महाराष्ट्र में मनाया जाता है। इसमें ‘गोविंदाओं’ की टीमें इंसानी पिरामिड बनाकर मटकी तक पहुंचने और उसे फोड़ने की कोशिश करते हैं। इसी दौरान कई हादसे होते रहते हैं लेकिन आस्था और भक्ति भाव में गोविंदा पथक इस प्रथा को बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाते आ रहे हैं। Mumbai: One dead, 30 injured, 15 hospitalised during Dahi Handi festival
महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में एक दूरदराज उदाड्या नामक आदिवासी गांव में आजादी के बाद पहली बार तिरंगा फहराया गया है। जहां बिजली, सड़क और सरकारी स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं अभी तक नहीं पहुंच पाई है। कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया, कि इस कार्यक्रम का मकसद ग्रामीणों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। The tricolor was hoisted for the first time in these villages of Maharashtra
डिजिटल डेस्क महाराष्ट्र/ नंदुरबार: सतपुड़ा की पहाड़ियों में बसे एक सुदूर आदिवासी गांव उदाड्या में इस बार देश की 79वां स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। गांव में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज यानी तिरंगा फहराया गया, इस कार्यक्रम के दौरान यहां के निवासियों में गर्व और देशभक्ति की भावना की लहर दौड़ गई। इस गांव में न अब तक बिजली की सुविधा प्राप्त हो पाई है, न सड़क और न ही सरकारी स्कूल या ग्राम पंचायत जैसी आधारभूत व्यवस्थाएं यहां को लोगों को मिली है। The tricolor was hoisted for the first time in these villages of Maharashtra
आजादी के बाद पहली बार फहरा तिरंगा
गांव में तैनात शिक्षक गणेश पावरा ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर इंटरनेट से वीडियो डाउनलोड कर तिरंगा फहराने की विधि सीखी और फिर गांव के 30 बच्चों और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर तिरंगा फहराया। यह पहल वाईयूएनजी फाउंडेशन की ओर से की गई, यह संस्था इस क्षेत्र के चार अनौपचारिक स्कूलों का संचालन करती है। संस्था के संस्थापक संदीप देओरे ने बताया कि पहली बार झंडा फहराने के साथ-साथ लोगों को उनके संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना इस कार्यक्रम का मकसद था। The tricolor was hoisted for the first time in these villages of Maharashtra
करीब 250 बच्चों और उदाड्या, खपरमाल, सदरी और मंझनीपड़ा जैसे चार गांवों के लोगों ने इस आयोजन में हिस्सा लिया। इन गांवों में संचार, परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं अभी तक प्राप्त नही हो पाई हैं। यहां के लोग पावरी बोली बोलते हैं, जो हिंदी या मराठी से काफी अलग है, इस वजह से संवाद में भी इनको चुनौतियों का सामना करना पडता है। The tricolor was hoisted for the first time in these villages of Maharashtra
संस्था के अध्यक्ष देओरे ने बताया, कि इन गांवों में शिक्षा की बेहद कमी है और इस वजह से लोग अक्सर अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। कुछ जगहों पर आंगनबाड़ी सेवाएं भी ठीक से नहीं पहुंची है, हालांकि खपरमाल जैसे गांवों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आजमीबाई अपने गांव में ही रहकर ईमानदारी से बच्चों को सेवा प्रदान कर रही है। The tricolor was hoisted for the first time in these villages of Maharashtra
डिजिटल डेस्क मुंबई: 15 अगस्त को सरकार द्वारा मांस की दुकानों को बंद करने को लेकर जारी फैसले के खिलाफ देशभर में हंगामा हो रहा है। महाराष्ट्र में नागपुर, नासिक, मालेगांव, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) और कल्याण-डोंबिवली के साथ-साथ तेलंगाना के नगर पालिका अपने अधिकार क्षेत्र के बूचड़खानों और मांस की दुकानों को 15 अगस्त के दिन बंद रखने का निर्देश जारी किया है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी नेताओं के हंगामे के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार खुद आश्चर्य जता रहे हैं। राज ठाकरे ने तो यहां तक कह दिया, कि सरकार को लोगों के खान-पान तय करने का अधिकार नहीं है। हम देश की स्वतंत्रता का पर्व मना रहे हैं। The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August
तेलंगाना में यह मामला हाईकोर्ट तक जा पहुंचा है। तेलंगाना हाई कोर्ट ने ग्रेटर हैदराबाद महानगर पालिका (जीएचएमसी) से स्वतंत्रता दिवस पर मांस की दुकानों और बूचड़खानों को बंद रखने के उसके आदेश के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। तेलंगाना सरकार के इस आदेश के खिलाफ लगाई गई याचिका में कहा गया है कि यह आदेश मनमाना है। अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(जी) (किसी भी पेशे को अपनाने का अधिकार) का उल्लंघन करता है। हाईकोर्ट के जस्टिस विजयसेन रेड्डी इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं। The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August
महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा, “मैंने टीवी पर खबर देखी, श्रद्धा का प्रश्न होता है तो इस तरह बंदी लगाई जाती है। आषाढ़ी एकादशी, महावीर जयंती जैसे अवसरों पर यह निर्णय लिया जा सकता है। अगर हम कोकण में जाएं तो वहां हर सब्जी में सूखी मछली डालकर पकाया जाता है। ऐसी बिना कारण के खाने पीने की चीजों पर रोक लगाना ठीक नहीं है। अगर भावनात्मक मुद्दा हो तो उस समय के लिए बंदी लगाई जाए तो लोग समझ सकते हैं। लेकिन, 15 अगस्त को महाराष्ट्र में बंदी लगाना उचित नहीं है। मैं इस बारे में जानकारी लूंगा।
मुंबई: पश्चिम उपनगर के दहिसर इलाके में दही हांडी अभ्यास के दौरान छठी मंजिल से गिरकर एक 11 साल के बालगोपाल की मौत हो गई है। यह घटना रविवार रात दहिसर पूर्व के केतकिडपाड़ा इलाके में हुई। मृतक बालगोविंद की पहचान महेश रमेश जाधव के रूप में हुई है, जिसकी उम्र 11 वर्ष बताई जा रही ह। मिली जानकारी के मुताबिक मृतक बालगोविंद नवतरुण गोविंदा पथक दल का सदस्य बताया जा रहा है। 11-year-old boy dies after falling from 6th floor during Dahi Handi practice in Mumbai’s Dahisar
घटना के बाद, पुलिस ने शुरुआत में आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज किया था। हालाँकि, महेश की माँ की शिकायत के बाद, नवतरुण मित्र मंडल गोविंदा पथक के अध्यक्ष बालू सुरनार के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया गया है। शिकायत के मुताबिक अध्यक्ष की लापरवाही ने बच्चे की जान ले ली। पुलिस ने मौत का कारण बनने और निरोधक आदेश का उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया गया। 11-year-old boy dies after falling from 6th floor during Dahi Handi practice in Mumbai’s Dahisar
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि छोटे बच्चों को ऊपरी मंज़िल पर चढ़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और दही हांडी खेलते समय हेलमेट, सुरक्षा बेल्ट और कुशन जैसे उपकरणों का उपयोग करना अनिवार्य है। हालाँकि, कई टीमें इन नियमों का पालन नहीं कर रही हैं। शहर में सैकड़ों गोविंदा पथक इस साल 16 अगस्त को होने वाले दही हांडी उत्सव की तैयारी कर रहे हैं। जब की इस घटना की खबर से सारा माहौल दुखी हो गया है। 11-year-old boy dies after falling from 6th floor during Dahi Handi practice in Mumbai’s Dahisar
महाराष्ट्र सरकार की “लाडकी बहन योजना” के तहत राज्य की लाखों महिलाओं के लिए रक्षाबंधन से पहले बड़ी खुशखबरी है। जुलाई महीने की 13वीं किस्त यानी 1500 रुपये बैंक खातों में 9 अगस्त 2025 से पहले जमा किए जाएंगे। हालांकि की देरी हुई है लेकिन योजना को फिर एकबार जारी रखा गया है। Ladki Bahin Yojana: Though late, but good news for Ladki Bahin Yojana holders!
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: महाराष्ट्र सरकार की “लाडकी बहन योजना” के तहत राज्य की लाखों महिलाओं के लिए रक्षाबंधन से पहले बड़ी खुशी की खबर है। जुलाई महीने की 13वीं किस्त 1500 रुपये की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 9 अगस्त 2025 से पहले जमा कर दिए जाएंगे। महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने हाल ही में इसको लेकर जानकारी साझा करते हुए बताया कि रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर महिलाओं के खातों में पैसे जमा कर दिए जाएंगे। एक जानकारी के मुताबिक किस्तों के पैसे जारी करने में देरी हुई है। यह देरी इसलिए हुई क्यों कि योजना का लाभ उठाने के लिए लाखों लोगों ने फर्जी तरीके से लाभ उठा लिया था। उसकी जांच मे देरी के कारण पात्र महिलाओं को इंतजार करना पड़ा। Ladki Bahin Yojana: Though late, but good news for Ladki Bahin Yojana holders!
योजना में पात्रता और लाभ
महाराष्ट्र सरकार की ओर से “माझी लाडकी बहन योजना” 21 से 65 वर्षीय महिलाओं के लिए चलाई जा रही है। योजना की शुरुआत से अब तक पात्र महिलाओं को 1500 रुपये प्रति माह की दर से अबतक 12 किस्तें दी जा चुकी हैं। सरकारी घोषणा के मुताबिक, अब 13वीं किस्त की राशि जारी किए जायेगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है, ताकि वे अपने जरूरतों के खर्चों को आत्मनिर्भरता से पूरा कर सकें। Ladki Bahin Yojana: Though late, but good news for Ladki Bahin Yojana holders!
Ladki Bahin Yojana में मिले फर्जी खाते
हालांकि, इस बार सभी महिलाओं को किस्त नहीं मिलेगी। सरकार की जांच में सामने आया है कि 26.34 लाख लोगों ने फर्जी तरीके से योजना का लाभ उठाया है। जिनमें से करीब 14,000 पुरुष भी शामिल थे। ऐसे सभी फर्जी लाभार्थियों को लाभार्थी सूची से हटा दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया, कि आगे से केवल योग्य और सत्यापित महिलाओं को ही योजना का लाभ मिलेगा। यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर इस योजना का लाभ लेता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। Ladki Bahin Yojana: Though late, but good news for Ladki Bahin Yojana holders!
जिन महिलाओं को किस्त मिलने वाली है, वे अपना खाता बैलेंस निम्नलिखित तरीकों से जांच सकते हैं:
ATM मशीन के जरिए पता कर सकते हैं।
बैंक शाखा कार्यालय जाकर पूछताछ की जा सकती है।
मोबाइल बैंकिंग ऐप से बेलेंस चेक कर सकते हैं।
कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके भी पता कर सकते हैं।
आपको जानकारी देते हुए बता दें, कि लाडकी बहन योजना की राशि DBT के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है।
करोड़ों महिलाओं को मिल रहा है योजना का लाभ
महाराष्ट्र सरकार की ओर से जारी “माझी लाडकी बहन योजना” के तहत पहले करीब 2.5 करोड़ महिलाओं को लाभ मिल रहा था, लेकिन जांच में गड़बड़ियां सामने आने के बाद आंकड़ा करीब सवा दो करोड़ हो गया। लेकिन इसके बाद एक बार फिर 26.34 लाख फर्जी नामों को हटाया गया, जिससे यह आंकड़ा अब घटकर करीब 2 करोड़ होने की जानकारी मिल रही है। हालांकि सरकार का लक्ष्य है कि हर पात्र महिला तक यह सहायता समय पर पहुंचे, ताकि कोई भी जरूरतमंद महिला इस योजना से वंचित न रह जाए। Ladki Bahin Yojana: Though late, but good news for Ladki Bahin Yojana holders!
मुंबई: उत्तर प्रदेश के रेल यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर सामने आ रही है। सेंट्रल रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए मुंबई स्थित कुर्ला के लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) और कानपुर के बीच चलने वाली साप्ताहिक सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन को अब 52 अतिरिक्त फेरे चलाने का फैसला किया है। खास बात यह है कि अब यह स्पेशल ट्रेन संशोधित कोच स्ट्रक्चर के साथ चलेगी। इससे यात्रियों को और भी ज्यादा आरामदायक सफर की सुविधा मिलने वाली है। Good news! 52 additional trips have been increased from Mumbai to Uttar Pradesh
मुंबई से कानपुर
सेंट्रल रेलवे से मिली जानकारी के मुताबिक, ट्रेन संख्या 04152 जो मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) से कानपुर के लिए चलाई जाती है, अब हर शनिवार शाम 5:15 बजे रवाना होकर अगले दिन दोपहर 3:45 बजे कानपुर पहुंचेगी। यह ट्रेन अब 27 दिसंबर 2025 से कुल 26 सेवाएं तक चलाई जाएगी। Good news! 52 additional trips have been increased from Mumbai to Uttar Pradesh
भारत सरकार क्या आम लोगों की तरक्की के लिए काम कर रही हैं या सिर्फ भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों को गिनाने के लिए देश की अर्थव्यवस्था को खोखला कर रही है। हालही में भारत सरकार ने देशव्यापी बंद का ऐलान कर अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की घोषणा कर दी है। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday
डिजिटल डेस्क मुंबई: सोमवार 7 जुलाई 2025 को पूर्ण बंद घोषित करने के भारत के फैसले ने पूरे देश में व्यापक रुचि और जिज्ञासा पैदा कर दी है। जबकि यह जानना जरूरी है कि एक दिन के बंद से देश की अर्थव्यवस्था पर इसका कितना असर पडेगा? सरकार फिलहाल इतिहास में अपना नाम दर्ज करने में सबसे ज्यादा रुची दिखा रही है। उसे फर्क नही पड़ता की इससे देश की जनता पर कैसा असर पड सकता है। जबकि कानून व्यवस्था में इस तरह की कोई भी निति मौजूद नही है। बंद सिर्फ सार्वजनिक हितों के मुद्दों को प्रबलता के साथ सरकार को समझने और अपनी बात मनवाने के लिए किया जाता रहा है। लेकिन यहां तो सरकार खुद की महिमा बखान करने के लिए सार्वजनिक नुकसान करने पर उतारु हो गई है। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday
बंद से हागा नुकसान
सीआईआई (Confederation of Indian Industry) के एक अनुमान के मुताबिक एक दिन के बंद से देश की अर्थव्यवस्था को तुरंत के तुरंत 25 से 90 हजार करोड़ रुपए का नुकसान होता है। सेवाओं के दोबारा शुरू होने के बाद भी नुकसान चलता रहता है और इसकी भरपाई कभी नहीं हो पाती है। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday
सरकारी फरमान
सरकारी घोषणा के मुताबिक, सार्वजनिक अवकाश मनाने का यह अभूतपूर्व कदम देश के आधुनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मनाने के साधन के रूप में पेश किया गया है। सरकार ने देश की उपलब्धियों और भविष्य की आकांक्षाओं को पहचानने और उन पर विचार करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी ठहराव की योजना बनाई है। इस निर्णय का उद्देश्य नागरिकों को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में शामिल होने के लिए एक दिन प्रदान करना है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में समुदाय की भावना बढ़े। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday
आपको जानकारी देते हुए बता दें कि बंद का प्रावधान क्यों अपनाया जाता है? ये दक्षिण एशियाई देशों जैसे भारत और नेपाल में सरकारी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर असंतोष जताने का तरीका है। भारत में नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए बंद का अधिकार है। संविधान की धारा 19 के तहत राइट टू प्रोटेस्ट मिला हुआ है, जिसे इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट 1947 का सहारा मिलता है। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday
इसके तहत सेवाएं ठप पड़ जाती हैं, फिर चाहे वो बैंकिंग हो या फिर ट्रांसपोर्ट और स्वास्थ्य। इससे आम जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित होता है और कई बार मारपीट और खूनखराबे की नौबत भी आ जाती है। कई बार राजनैतिक पार्टियां अपने नीतिगत विरोधों के चलते बंद बुलाती हैं। उनसे असहमत लोग बंद के दौरान अपनी सेवाएं जारी रखने की कोशिश करते हैं तब मारपीट और लूटपाट जैसी घटनाएं होती हैं। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday
एक दिन के बंद से कितना नुकसान होता है?
फिक्की (Federationof Indian Chambers of Commerce and Industry) के एक अनुमान के मुताबिक एकदिवसीय देशबंद से लगभग 25 हजार करोड़ रुपए का सीधा नुकसान होता है। अलग-अलग सेक्टरों में बंद से होने वाला नुकसान अलग-अलग है। जैसे देशभर के बैंक कर्मचारी एक दिन के बंद पर चले जाएं तो तकरीबन 25 हजार करोड़ का नुकसान होता है। रेलवे का नुकसान एक दिन में 24 सौ करोड़ है, वहीं देशभर के मजदूर (असंगठित सेवा) एक दिवसीय हड़ताल करें तो 26 हजार करोड़ का नुकसान हो सकता है। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday
महामारी के दौरान, मोदी सरकार ने बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाया और गैरजरूरी खर्चों को सीमित रखा. इससे जीडीपी तो बढ़ी लेकिन वेतन और खपत में सुधार नहीं हुआ। सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस के वरिष्ठ फेलो संजय कथूरिया कहते हैं, “भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह 6.5 से 7.5 फीसदी की विकास दर बनाए रख पाएगी या 5-6 फीसदी तक गिर जाएगी।” India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday
छुट्टियों का असर सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों पर पड़ेगा।
दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में विशेष कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है।
परिवहन सेवाएँ केवल आवश्यक आवश्यकताओं तक ही सीमित रहेंगी।
राष्ट्रव्यापी बंद का सरकारी ऐलान क्या है?
7 जुलाई 2025 को होने वाले पूर्ण बंद से अर्थव्यवस्था, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं सहित कई क्षेत्रों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। सरकार ने लोगों को आश्वासन दिया है कि स्वास्थ्य सेवा और सुरक्षा जैसी आवश्यक सेवाएँ चालू रहेंगी, जबकि अन्य क्षेत्रों में अस्थायी रूप से रुकावट आ सकती है। शटडाउन का उद्देश्य व्यवधानों को कम करना और नागरिकों को नियोजित सांस्कृतिक और शैक्षिक गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति देना है। व्यवसायों को किसी भी संभावित आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए पहले से तैयारी करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, और स्कूल इस अवसर का उपयोग छात्रों को देश के इतिहास और उपलब्धियों के बारे में शिक्षित करने के लिए करेंगे। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday
चूंकि 7 जुलाई 2025 को पूर्ण शटडाउन होने वाला है, इसलिए नागरिकों को सलाह दी गई है, कि वे एक सहज और आनंददायक अनुभव सुनिश्चित करने के लिए तदनुसार तैयारी करें। व्यक्तियों और परिवारों को सार्वजनिक परिवहन और अन्य सेवाओं की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए अपनी गतिविधियों की योजना पहले से बनाने के लिए कहा गया है। व्यवसायों को सलाह दी गई है कि वे छुट्टी के दौरान परिचालन परिवर्तनों के बारे में कर्मचारियों और ग्राहकों को सूचित करें। स्कूल और शैक्षणिक संस्थान को ऐसी गतिविधियाँ आयोजित करने के लिए कमर कसने के लिए कहा गया हैं, जो छात्रों को इस दिन के महत्व के बारे में शिक्षित कर सके। योजनाओं में किसी भी अपडेट या बदलाव के लिए आधिकारिक चैनलों के माध्यम से सूचित रहना के लिए सभी को महत्वपूर्ण बताया गया है। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday
अपने दिन और गतिविधियों की योजना पहले से बना लें।
सार्वजनिक परिवहन के शेड्यूल के बारे में जानकारी रखें।
स्थानीय सामुदायिक कार्यक्रमों में भाग लें।
दिन का उपयोग पारिवारिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए करें।
सरकार की किसी भी घोषणा से अवगत रहें।
शटडाउन में सरकार की भूमिका
7 जुलाई 2025 को पूर्ण शटडाउन की योजना बनाने में सरकार की भूमिका इसकी सफलता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण बताया गया है। संस्कृति मंत्रालय, अन्य विभागों के साथ मिलकर, राष्ट्रीय एकता और गौरव के विषय से जुड़े कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिए अथक प्रयास किया जा रहा है। राज्य सरकारों और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय करके, केंद्र सरकार का लक्ष्य इस छुट्टी को निर्बाध रूप से मनाना बताया गया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय सूचना और अपडेट प्रसारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, यह सुनिश्चित करते हुए कि नागरिक इस दिन के लिए अच्छी तरह से सूचित और तैयार हों जाएं। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday
भारत सरकार की घोषणा में कहा गया है, कि 7 जुलाई 2025 को राष्ट्रव्यापी बंद सिर्फ़ आराम का दिन नहीं है, बल्कि जन भागीदारी और सहभागिता का आह्वान है। इसमें कहा गया, कि नागरिकों को सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने से लेकर सामुदायिक सेवाओं में स्वयंसेवा करने तक, व्यक्तियों के लिए दिन की भावना में योगदान देने के कई तरीके हैं। स्थानीय संगठनों और सामुदायिक समूहों को ऐसे कार्यक्रमों की मेजबानी करने के लिए आमंत्रित किया जाता है जो राष्ट्रीय एकता की थीम के साथ संरेखित हों, लोगों को एक साथ आने और अपनी साझा पहचान का जश्न मनाने के लिए मंच प्रदान करें। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday
आयोजित कार्यक्रमों और समारोहों में भाग लें।
स्वयंसेवी कार्यक्रमों और सामुदायिक सेवा में भाग लें।
स्थानीय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गतिविधियों में भाग लें।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनुभव और कहानियाँ साझा करें।
लोगों के लिए अवसर बता कर मूर्ख बनाया जा रहा है।
सरकारी घोषणा में कहा गया है, कि 7 जुलाई 2025 को पूर्ण बंद होने से चिंतन और उत्सव मनाने का एक अनूठा अवसर मिलता है, जिससे राष्ट्र गौरव और एकता के साझा क्षण में एक साथ आ सकता है। इस दिन को सुविधाजनक बनाने के लिए सरकार के प्रयास समाज के ताने-बाने को मजबूत करने और भावी पीढ़ियों को प्रेरित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday
7 जुलाई 2025 को बंद का उद्देश्य क्या है?
बंद का उद्देश्य भारत के आधुनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मनाना है, जो राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देता है।
क्या बंद के दौरान आवश्यक सेवाएँ चालू रहेंगी? हाँ, स्वास्थ्य सेवा और सुरक्षा जैसी आवश्यक सेवाएँ चालू रहेंगी।
बंद के दौरान नागरिक किन गतिविधियों में भाग ले सकते हैं? नागरिक देश भर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सामुदायिक सेवा और शैक्षिक गतिविधियों में भाग ले सकते हैं।
बंद का व्यवसायों पर क्या प्रभाव पड़ेगा? व्यवसायों में अस्थायी परिचालन परिवर्तन हो सकते हैं, और उन्हें न्यूनतम व्यवधान के लिए तदनुसार योजना बनाने की सलाह दी जाती है।
शटडाउन के बारे में अपडेट कहां से मिलेगी? अपडेट और जानकारी आधिकारिक सरकारी चैनलों और मीडिया आउटलेट के माध्यम से प्रसारित की जाएगी।
Bakra eid: मुंबई के वडाला में बकरा ईद के दिन एक चाकूबाजी की घटना ने आसपास के लोगों में दहशत का माहौल फैल गई है। यहां मोबाइल फोन की चोरी के संदेह में 3 दोस्तों ने एक-दूसरे पर चाकू से हमला कर दिया। इस घटना में एक युवक को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो युवकों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। पता ये चला कि मोबाइल फोन चोरी ही नहीं हुआ था। बल्कि चार्ज करने के लिए खुद युवक ने एक दूकान में चार्जर से लगाया हुआ था, हालांकि बाद में वह खुद भुल गया। Mumbai: Bloody clash on the occasion of Bakra Eid, 3 friends attacked each other
बकरा ईद का जश्न
वडाला पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सुधाकर होनवडजकर ने बताया, कि तीनों युवक फैजान शेख, मोहम्मद हसनैन और आसिफ खान करीबी दोस्त हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी एंटॉप हिल इलाके के निवासी हैं। बकरा ईद के मौके पर वह सभी जश्न मनाने के लिए एक साथ मिले थे। इस दौरान, आसिफ खान ने अपना मोबाइल फोन पास की एक दुकान पर चार्जिंग के लिए छोड़ दिया। लेकिन बाद में वह भूल गया। Mumbai: Bloody clash on the occasion of Bakra Eid, 3 friends attacked each other
मंदिरों में बलि देने की परंपरा को बंद कर उदाहरण प्रस्तुत करे सरकार
सुप्रीम कोर्ट के आदेश स्वीकार कर मुसलमानों ने नजीर पेश की
भारतीय संविधान कानून और न्यायालय में विश्वास रखते हैं भारत के मुसलमान
डिजिटलडेस्क हिंदू हिंदुत्व के ठेकेदार बनने वाले आरएसएस के उपांग बीजेपी, विश्वहिंदू परिषद, बजरंग दल जैसे संगठन भारत के मुसलमानों द्वारा बकरा ईद पर बकरे की कुर्बानी देने की प्रथा बंद करने के लिए शक्ति प्रयोग करने से भी पीछे नहीं हट रहे। उन्हें सबसे पहले हिंदुओं के जिन मंदिरों में जानवरों की बलि देकर उस मांस को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। उन मंदिरों में बलि देने की परंपरा को बंद कर उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। पहले सत्तर प्रतिशत हिंदुओं के मांस खाने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। फिर मुसलमानों के बकरा बलि को कानून बनाकर रोका जा सकता है। निश्चित ही भारत के मुसलमान इसे स्वीकार करेंगे क्योंकि देश में समानता का व्यवहार माना जाएगा। बाबरी राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीमकोर्ट के आदेश को स्वीकार कर मुसलमानों ने नजीर पेश की थी। अर्थ है भारत के मुसलमान भारतीय संविधान कानून और न्यायालय में विश्वास रखते हैं। अगर संसद ऐसा कानून बनाती है जिसमें किसी भी पशु की बलि यानी हत्या अपराध होगा जिसपर कानूनी अपराध मानकर कोर्ट दंडित करेगी तो निश्चित ही भारत के मुसलमान इससे सहमत होंगे। जहां तक देशप्रेम और देशभक्ति का सवाल है। उसमें भी मुसलमानों ने एकता का प्रदर्शन, पाकिस्तान के विरोध में पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाकर पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारतीय सेना और सरकार के साथ खड़े रहे हैं। यहां तक कि मुस्लिम महिला द्वारा ही भारतीय सेना ने सिंदूर ऑपरेशन का नायक बनाया था। प्रेस कांफ्रेंस में भी मुस्लिम और दलित चेहरा सामने लाकर बता दिया था कि भारतीय सेना जाति मजहब को नहीं मानती।वह भारत की रक्षा के लिए अपनी शहादत देती है। सेना ने प्रतीकात्मक रूप से संदेश दिया था कि मुसलमानों और दलितों पर अन्याय अत्याचार बंद कर देना होगा। भारत के जिन ग्रुपों को पहलगाम और ऑपरेशन सिंदूर का सच बताने विदेश भेजा गया था उसमें मुस्लिम चेहरा इस्लामिक राष्ट्रों में जबरदस्त संदेश देकर बता दिया कि पाकिस्तान बार बार अपने आतंकी भेजकर भारत में निर्दोष लोगों की हत्या करवाता है। जिससे साफ है कि देश का मुसलमान देश की हिफाजत के लिए पाकिस्तान हो या कोई अन्य राष्ट्र भारत का मुसलमान बलिदान देने को तैयार है। एकजुटता दिखने में मुसलमान पीछे नहीं हटे। पहले हिंदूधर्म और अब सनातनधर्म के ठेकेदारों को मालूम होना चाहिए कि सनातन धर्म में किसी भी जीव की हत्या का निषेध करता है।सत्य, प्रेम न्याय और पुण्य को धर्म जानना मानना ही सनातन धर्मी का संकेत है। गौ को माता मानने वाले क्यों नहीं उन चार हिंदू जिनके भारत में बड़े बड़े कत्लखाने हैं। जहां लाखों गाएं रोज काटकर उनका मांस विदेश भेजने वाले देशों में दूसरे नंबर पर लाकर खड़ा कर दिया है। जिनसे हिंदुत्व और हिंदू की ठेकेदार बीजेपी सरकार चंदा लेने में संकोच नहीं करती, उन कारखानों को बंद कराने क्यों नहीं जाते? इसलिए कि मोदी सरकार उनके साथ खड़ी है। योगीजी क्यों नहीं उन कत्ल खानों में गौ का कटना बंद करा देते? हिम्मत नहीं पड़ती गौ भक्ति की आड में जो बजरंगदल खुद गौ काटकर पूजा स्थल में फेकने पर पकड़े जा चुके हैं। जो गौ मांस होने का शक केवल गरीब मुसलमानों पर कहर बनकर टूट पड़ते और उनकी हत्या का अपराध करने में नहीं झिझकते भला वे कैसे हिंदू और सनातनी होते हैं। सनातन धर्म तो समानता और न्याय का धर्म है फिर मॉब लांचिंग क्यों करते हैं? हत्या करना अपराध तो है ही पाप भी है। क्या उन्हें पाप करते शर्म आती है कभी? फिर किस मुंह से वे हिंदू और सनातनी कहते हैं। कभी खुद के हृदय में झांककर तो देखें। अगर उनकी आत्मा मरी नहीं होगी तो जवाब भीतर से ही मिल जायेगा। छत्रपति शिवाजी महाराज के सेनापति मुसलमान, नौ सेना प्रमुख मुसलमान थे।महाराणा प्रताप के सेनापति मुसलमान थे।उन्होंने अपनी जान पर खेलकर महाराणा प्रताप के प्राण बचाए थे, जबकि मुगल सम्राट अकबर के सेनापति जयपुर के राजा मानसिंह ने हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप की हत्या करने की कोशिश की थी। जयपुर के ही जयसिंह ने औरंगज़ेब की गुलामी की थी और उसका सेनापति बनकर शिवाजी के ऊपर हमला किया और उन्हें बंदी बनाकर उनसे तीस किले मुगलों को सौंपने का समझौता करने को बाध्य किया। आगरा दरबार में लेजाकर शिवाजी की बेइज्जती कराई। मानसिंह और जयसिंह जैसे हिंदू और हिंदुत्व के शत्रुओं के परिजनों को सम्मान देने वाले कैसे किसी को गद्दार होने का सार्टिफिकेट दे सकते हैं? क्या जिन नेताओं की बहन बेटियों को मुगलों से शादी कराई गई और बाद में नेताओं ने अपनी बेटियां भतीजियां मुसलमानों से ब्याह दी वे किस मुंह से हिन्दू और सनातन शब्द बोलते हैं? जो लोग हत्या को अपराध और पाप मानते हैं खुद महात्मा गांधी के हत्यारे नाथु राम गोडसे को पूजते हैं। भारत बंटवारे के झूठे आरोप में महात्मा गांधी की हत्या करने वाला क्यों नहीं मोहम्मद अली जिन्ना जिसने अंग्रेजों से मिलकर देश को बांटा उसकी हत्या करने की मर्दानगी दिखाई? सच तो यह है कि जर्मन तानाशाह हिटलर के नाज़ीवाद और इटली के तानाशाह मुसोलिनी के फासीवाद को अपना आदर्श मानने वालों से शांति की उम्मीद कैसे रखी जा सकती है। वे भला सनातनधर्म की सहिष्णुता का पालन कैसे कर सकते हैं? सनातनधर्म में नफरत के लिए कोई भी स्थान नहीं है फिर हिंदू मुस्लिम करके वोट की राजनीति करने वालों से प्रेम की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
मुंबई: बकरी ईद के मद्देनजर बीजेपी नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैय्या रहिवासी चालों और इमारतों का दौरा कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता रविवार 25 मई को घाटकोपर स्थित मैत्री को-ऑपरेटिव सोसायटी और दामोदर पार्क का दौरा किया। इसी परिसर में बकरा ईद को लेकर पहले भी दो गुटों के बीच विवाद देखने को मिला था। अब एक बार फिर कुछ रहिवासियों का विरोध देखने को मिल रहा है। BJP leader Kirit Somaiya made a big statement before Bakri Eid, said “I will not let goats be slaughtered”
उन्होंने आगे कहा, कि “पिछली बार महानगरपालिका अधिकारियों और माफिया ने पुलिस को धमकी देकर घाटकोपर में बकरा काटा था। इस बार मैं खुद ग्राउंड पर हूं। एनसीपी शरद पवार, उद्धव की सेना या राहुल गांधी की कांग्रेस का यहां पर टारगेट ही है वोट जिहाद करने का।” उन्होंने कहा, “पहलगाम हमले के बाद हमने जो जवाब दिया, वैसा ही अमेरिका में भी वोट जिहाद किया गया। भगवान उन्हें सद्बुद्धि दे।” BJP leader Kirit Somaiya made a big statement before Bakri Eid, said “I will not let goats be slaughtered”
इस साल बकरी ईद का त्योहार 6 या 7 जून को मनाने की संभावना है। इस त्योहार को लेकर तारीख की आधिकारिक घोषणा चांद नजर आने के बाद ही की जाएगी। बकरी ईद का अर्थ सिर्फ जानवरों की कुर्बानी मात्र से नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक अर्थ बहुत ही गहरा है। यह पर्व अल्लाह के प्रति समर्पण, त्याग और दान से जुड़ा हुआ है। इसकी मान्यता है कि बकरा ईद पर कुर्बानी के हिस्से को तीन भागों में तकसिम किया जाया है। पहला गरीब और जरूरतमंदों को, दूसरा हिस्सा मित्रों और रिश्तेदारों के लिए और तीसरी हिस्सा अपने घर-परिवार के लिए रखा जाता है। साथ ही ईद की नमाज़ से पहले जकत, फितरे का पैसा निकाला जाता है। जो ज़रूरतमंदों को देकर उनकी मदद की जाती है। BJP leader Kirit Somaiya made a big statement before Bakri Eid, said “I will not let goats be slaughtered”