Author: indianfasttrack

  • Vistara Airlines में Hijack की खबर यात्री हुआ गिरफ्तार।

    Vistara Airlines में Hijack की खबर यात्री हुआ गिरफ्तार।

    मुंबई से दिल्ली जाने वाली Vistara Airlines की फ्लाइट मे एक यात्री ने फोन पर Hijack से संबंधित बात की। शिकायत पर सहार पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

    इस्माईल शेख
    मुंबई- विस्तार एयरलाइन (Vistara Airlines) के विमान (Flight) में चालक दल के एक सदस्य ने एक यात्री को फोन पर ‘हाईजैक’ (Hijack) के बारे में बात करते हुए सुना जिसके बाद मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने उसे गिरफ्तार कर लिया। एक पुलिस अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि घटना गुरुवार रात को यहां छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुई।

    पुलिस अधिकारी ने बताया, कि “दिल्ली जाने वाली विस्तार एयरलाइन की उड़ान के चालक दल के एक सदस्य ने यात्री को अपने फोन पर विमान ‘हाईजैक’ के बारे में बात करते सुना था। चालक दल के सदस्य ने तुरंत अधिकारियों को सूचित किया और पुलिस को भी इसकी सूचना मिली।”

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    Vistara Airlines में Hijack की खबर.

    Vistara Airlines, Hijack,
    मुंबई पुलिस बंदोबस्त की फाइल तस्वीर

    गिरफ्तार आरोपी की पहचान रितेश संजयकुकर जुनेजा के रूप में हुई है। यह व्यक्ति विस्तारा एयरलाइंस (Vistara Airlines) की फ्लाइट में सवार था। सहार पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय गोविलकर ने जानकारी देते हुए बताया, कि “यात्री मानसिक रूप से अस्थिर है और 2021 से उसका उपचार चल रहा है।”

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    उन्होंने कहा, कि यात्री के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 336 (लापरवाही या गलत इरादे से लोगों के जीवन या व्यक्ति अथवा अन्य की सुरक्षा को खतरे में डालना) और 505(2) (जो अफवाहें फैलाने या चिंताजनक समाचार फैलाने जैसे अपराधों से संबंधित) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। मामले की अभी और अधिक तहकीकात सहार पुलिस कर रही है।

  • Mumbai: फर्जी शेयर बाजार चलाने वाला गिरफ्तार, एप के जरिये 3 महीने में की 4,672 करोड़ रुपयों की शेयर ट्रेडिंग

    Mumbai: फर्जी शेयर बाजार चलाने वाला गिरफ्तार, एप के जरिये 3 महीने में की 4,672 करोड़ रुपयों की शेयर ट्रेडिंग

    Mumbai में फर्जी शेयर बाजार चलाने वाले जतिन मेहता को गिरफ्तार कर लिया गया है। वह एप के जरिये तीन महीने में 4,672 करोड़ रुपयों की शेयर ट्रेडिंग कर टैक्स चोरी से सरकार को लगभग 1.95 करोड़ रुपये का चूना लगा चुका है। पुलिस ने उसे कांदीवली से किया गिरफ्तार।

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    फर्जी शेयर बाजार चलाने वाले जतिन मेहता को क्राईम ब्रांच यूनिट 11 की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वह एप के जरिये तीन महीने में 4672 करोड़ रुपयों की शेयर ट्रेडिंग कर टैक्स चोरी से सरकार को लगभग 1.95 करोड़ रुपये का चूना लगा चुका है। उसे मंगलवार को मुंबई उपनगर (Mumbai suburbs) कांदीवली से गिरफ्तार किया गया। बिना किसी वैध लाइसेंस के वह ‘मूडी’ नामक मोबाइल एप के जरिये कैश से फर्जी शेयर बाजार चला रहा था।

    Mumbai में डिब्बा ट्रेडिंग..

    23 मार्च से 20 जून के बीच बिना किसी वैध लाइसेंस के वह ‘मूडी’ नामक मोबाइल एप के जरिये कैश से फर्जी शेयर बाजार चला रहा था। ऐसे शेयर बाजार को मुंबई (Mumbai) में डिब्बा ट्रेडिंग के नाम से जाना जाता है। इस मामले के जांच अधिकारी अभिजीत जाधव के अनुसार, जतिन बिल्कुल शेयर दलालों जैसा व्यवहार करता था और शेयर बाजार से जुड़ने के इच्छुक लोगों को अपने एप का पासवर्ड दे देता था। वह लोगों से 50-50 हजार का डिपाजिट भी लेता था।

    https://indian-fasttrack.com/2023/06/22/kurar-police-arrested-4-one-absconding
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    Mumbai, डिब्बा ट्रेडिंग,
    क्राइम ब्रांच यूनिट 11 की पुलिस और आरोपी की तस्वीर

    तीन महिनों में किया 4,672 करोड़ रुपयों का कारोबार

    उन्होंने आगे बताया कि शेयर बाजार में लाभ होने पर वह लाभ की राशि अपना कमीशन काट कर नकद ही अपने ग्राहकों को भिजवा देता था। घाटा होने पर उनकी डिपाजिट राशि से पैसे काट लिए जाते थे और बाद में उतने पैसे डिपाजिट में और जमा करवा लिए जाते थे। इस प्रकार उसने तीन माह में इस फर्जी शेयर बाजार से 4,672 करोड़ रुपयों का कारोबार किया। शेयर बाजार में लाभ होने पर शेयरधारकों को 15 से 30 प्रतिशत तक टैक्स देना पड़ता है। लेकिन, फर्जी शेयर बाजार में वे टैक्स देने से बच जाते थे।

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    इस प्रकार सरकार को करीब दो करोड़ रुपये के टैक्स का नुकसान हुआ है। इसके अलावा जतिन मेहता ने सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स, कैपिटल गेन्स टैक्स, राज्य सरकार के स्टांप ड्यूटी शुल्क, सेबी की टर्नओवर फीस जैसे कई टैक्सों की चोरी की है। उस पर कार्रवाई करने के लिए पुलिस को नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) एवं मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) के अधिकारियों की भी मदद लेनी पड़ी। डीसीपी राज तिलक रौशन ने बताया कि क्राइम ब्रांच ने आरोपी के पास से 5 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक राउटर, एक टैब, एक पैन ड्राइव और काफी कैश भी जब्त किया है।

  • अमित मालवीय के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगा मुकदमा!

    अमित मालवीय के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगा मुकदमा!

    भाजपा के आईटी सेल मुखिया अमित मालवीय के खिलाफ जहर बोने के आरोप लगाकर कर्नाटक में एफआईआर दर्ज हो गई है। फेक खबरें फैलाना ही बीजेपी आईटी सेल का काम- कांग्रेस

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    बीजेपी की एक झूठ फैलाने वाली फैक्ट्री है जिसे बीजेपी आईटी सेल कहा जाता है।इसका काम है विपक्षी नेताओं के प्रति नफरत फैलाकर समाज में गलत संदेश देकर सांप्रदायिक माहौल बिगड़ना। यह दो तरह से काम करती है। पीएम मोदी की छवि निर्माण और विपक्षी नेताओं विशेषकर कांग्रेस के राहुल गांधी को टारगेट कर बदनाम करना।

    राहुल गांधी ने महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर हमेशा छोटी छोटी बातें बोलने वाले मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। बढ़ती मंहगाई पर चुप्पी क्यों? रुपया गिरते जाने पर चुप्पी क्यों? बेरोजगारी पर चुप्पी क्यों? चीन पर चुप्पी क्यों? आदि-आदि।
    राहुल गांधी के एक वीडियो को बीजेपी आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने पहले सोशल मीडिया पर शेयर किया। फिर बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा और दूसरे ने शेयर किया। जिसमे सामाजिक सदभाव बिगाड़ने, समाज में जहर घोलने का काम किया। आईटी सेल को झूठ की फैक्ट्री नहीं कहें तो और क्या कहेंगे।फेक खबरें फैलाना ही बीजेपी आईटी सेल का काम है। यही हिंदू मुस्लिम, मंदिर मस्जिद और पाकिस्तान की रट लगाता रहता है। जो भारतीय कानून के अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आता है।

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    अमित मालवीय,
    भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय की फाइल तस्वीर

    याद होगा राहुल गांधी ने नीरव मोदी, ललित मोदी और नरेंद्र मोदी के नाम लेते हुए पूछा था, कि “सबके सरनेम मोदी ही क्यों?” राहुल का यह राजनीतिक भाषण था। जैसे नेहरू परिवार को भ्रष्ट परिवार खुद मोदी ने कहा था। बार-बार नेहरू और गांधी परिवार के खिलाफ खुद पीएम जहर घोलते रहते हैं। कांग्रेस मुक्त भारत का नारा खुद मोदी ने दिया था। लेकिन कांग्रेस और नेहरू, गांधी परिवार ने कभी तवज्जो नहीं दी।

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    अमित मालवीय के खिलाफ एफआईआर दर्ज..

    भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल मुखिया अमित मालवीय के खिलाफ कांग्रेसी अध्यक्ष खड़गे के पुत्र और मंत्री ने जहर बोने के आरोप लगाकर कर्नाटक में एफआईआर दर्ज कराई है। मंत्री के अनुसार वे एफआईआर के बाद कोर्ट जाएंगे। सजा भी दिलाएंगे। मामला कर्नाटक में है। वहां कांग्रेस की सरकार है। जैसे बीजेपी नेता ने राहुल गांधी के खिलाफ सूरत में एफआईआर दायर किया गया था।
    अब आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय के विरुद्ध कर्नाटक में एफआईआर दर्ज करते हुए कोर्ट में घसीटने का निर्णय लिया गया हैं।

  • कुरार पुलिस ने किया 4 को गिरफ्तार एक फरार..

    कुरार पुलिस ने किया 4 को गिरफ्तार एक फरार..

    ATM के भीतर बोलबचन कर हाथ की सफाई करने वाले गिरोह का कुरार पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। सभी बदमाश भांडुप के रहने वाले बताया जा रहे हैं।

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    मलाड पूर्व के कुरार पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है। जो एटीएम में लोगों से बोल बचन कर अपने हाथ की सफाई से उन लोगों का अकाउंट साफ कर दिया करते थे। कुरार पुलिस ने 4 बदमाशों को भांडुप पश्चिम से गिरफ्तार किया है और तीन अपराधियों की पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही है।

    ATM में बोलबच्चन ..

    घटना 16 जून 2023 की है। जब गोरेगाव पूर्व, आरे मिल्क कॉलनी, युनिट क्रमांक 32, एकता रहिवासी मंडळ की रहने वाली, 57 वर्षीय फरियादी लिला डोमनिक जेवियर अपने खाते से पैसे निकालने के लिए मलाड पूर्व दिंडोशी शाखा बैंक ऑफ इंडिया के पास लगे एटीएम मशीन में गई। वहां मौजूद कुछ अज्ञात लोगों ने अपने हाथ की सफाई दिखाते हुए उनके अकाउंट से 50 हजार रुपये निकाल लिए। इस घटना की जानकारी पीड़ित महिला ने कुरार पुलिस को दी।

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    ATM, बोलबच्चन,
    प्रतिकारात्मक तस्वीर

    पुलिस ने घटनाएं वारदात की सीसीटीवी फुटेज खंगाली और गु.र. क्र. 350/2023 भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 34 के तहत मामला दर्ज कर सीसीटीवी की मदद से बदमाशों की तलाशी शुरू कर दी। कुरार पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सतीश गाढवे ने बताया, कि क्राईम डिटेक्शन के पुलिस निरीक्षक मनोज चाळके के मार्गदर्शन में सहायक पुलिस निरीक्षक वानखेडे और उनकी टीम ने घटनास्थल से बदमाशों का पीछा करते हुए कुल 109 सीसीटीवी फुटेज को खंगाला और उनके रहते इलाके तक पहुंच गए।

    19 जून की आधी रात को पुलिस ने भांडुप पश्चिम के जंगल मंगल रोड, सर्वोदय नगर, गावदेवी मंदिर के पास से तीन बदमाशों को हिरासत में लिया। उनसे मामले के तहत पूछताछ की तो उन्होंने अपना गुनाह कबूल कर लिया और साथ ही बिहार की रहने वाली और एक महिला साथी का भी नाम उन लोगों ने उजागर कर दिया। जो उस घटना में शामिल थी। चारों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। बिहार का रहने वाला इनका एक और साथी फरार बताया जा रहा है।

    गिरफ्तार तीन बदमाश भांडुप पश्चिम के रहने वाले बताए जा रहे हैं और एक महिला और पुरुष बिहार के होने की जानकारियां दी जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 32 वर्षीय धर्मवीर किशुन महतो, 28 वर्षीय विवेक कुमार बुधन पासवान, 23 वर्षीय बिरलाल लक्ष्मण सहा के रूप में हुई है यह सभी भांडुप पश्चिम गांवदेवी मंदिर के पास, जंगल मंगल रोड, सर्वोदय नगर के रहने वाले हैं। इनके साथ ही 27 वर्षीय किशोर कांचन महतो को भी गिरफ्तार किया गया है, जो गायखत, रामनगर, हर्षिदी, मतिहारी, बिहार की रहने वाली बताई जा रही है।

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    इसके साथ ही 29 वर्षीय अरुण कुमार मोहन प्रसाद फरार है, जो सूर्यापूर, जीवधारा थाना पिपरकाठी, सुरजपूर, पूर्वी चंपारण्य, बिहार राज्य का रहने वाला बताया जा रहा है। पुलिस की पड़ताल में इन बदमाशों के खिलाफ माटुंगा पुलिस थाने, पार्कसाईट पुलिस थाने, वरळी पुलिस थाने, माणिकपूर और भायखला पुलिस थाने में अपराधिक मामले दर्ज हैं। मामले की और अधिक तहकीकात कुरार पुलिस कर रही हैं।

  • मणिपुर में सैकड़ों हत्या की जा चुकी है निरपराध लोगों की

    मणिपुर में सैकड़ों हत्या की जा चुकी है निरपराध लोगों की

    • लापता मोदी के लगे पोस्टर्स..
    • दंगो से बचने के लिए तमाम समुदाय के लोगों ने पड़ोसी राज्यों में शरण ली।
    • गृहमंत्री के पास सामुदायिक दंगे खत्म करने का कोई उपाय नहीं।
    • अमेरिकी ड्रोन से किसकी रक्षा होगी?
    • चीन ने भारतीय भूभाग में सैकड़ों गांव बसा लिए।
    • देश के भीतर हिंसा को रोकना सरकार का दायित्व।
    • बीजेपी नेताओं को खुद, अब केंद्र की डबल इंजन की सरकार पर भरोसा नहीं।
    • पीएम मोदी का बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा एकदम खोखला।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    बड़ी गजब की खबर है। जैसे रोम जल रहा था, तो वहां का राजा नीरो बंशी बजाने में तल्लीन था। कुछ हालत ठीक वैसे ही हमारे देश में है। मणिपुर महीने भर से सांप्रदायिक हिंसा से ग्रस्त है। लगभग तीन सौ गांव अग्नि की भेंट चढ़ चुके हैं। सैकड़ों निरपराध लोगों की हत्या की जा चुकी है। हजारों घायल हैं। तमाम समुदाय दंगों से बचने के लिए पड़ोसी राज्यों में शरण ली है। मणिपुर सरकार के हाथ पांव फूल रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री के पास सामुदायिक दंगे खत्म करने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा है। आर्मी और पुलिस पर हमले हो रहे हैं।

    अमेरिकी ड्रोन से किसकी रक्षा होगी?

    आर्मी के एक अधिकारी ने केंद्र सरकार को चेताया है। लेकिन मणिपुर को जलता छोड़ मोदी अमेरिका राजभोज में शामिल होने पहुंच गए हैं। अमेरिका जाने से पहले ही दो बिलियन अमेरिकी डॉलर्स के ड्रोन खरीदने का सौदा पक्का कर चुके हैं। कारण बताया जाता है, देश की सुरक्षा के लिए हथियार खरीदना ज़रूरी है। देश पर 155 लाख करोड़ का विदेशी कर्ज है। यानी हर भारतीय एक लाख के कर्ज में है। 140 करोड़ में गिरवी रख दी गई है जनता।

    https://indian-fasttrack.com/2023/06/17/leaders-of-politics-like-nitish-kumar-sharad-yadav-lalu-yadav-mulayam-singh-yadav-emerged-in-the-jaiprakash-movement
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    मणिपुर, लापता मोदी,
    मणिपुर आगजनी की तस्वीर

    आजादी के बाद से 2014 तक भारत पर कुल विदेशी कर्ज मात्र 55 लाख डॉलर्स था। मोदी सीएम थे तब मन मोहन सिंह द्वारा लिए गए विदेशी कर्ज की बड़ी आलोचना की थी। उनके पीएम बनने से पूर्व 65 साल में 55 लाख डॉलर्स का कर्ज था। जिसकी आलोचना ही नहीं खिल्ली उड़ाने वाले मोदी ने मात्र 9 वर्षो में 100 लाख करोड़ का विदेशी कर्ज ले लिए जिसे कथित रूप से मुफ्त अनाज बांटने, किसान सम्मान निधि देने, पीएम आवास योजना और उज्वला योजना में मुफ्त सिलेंडर बांटने जिन्हे फिर कभी रीफिल कराया ही नहीं जाता।

    ऋण लेकर घी पीना शायद इसे ही कहते हैं।विदेशी ऋण केवल ऐसे उपयोग के लिए लिये  जाते हैं जिनसे राष्ट्र को आय हो लेकिन जब सवाल अपनी छवि बनाने की हो तो क्या कहा जाए?
    अमेरिकी ड्रोन से किसकी रक्षा होगी? चीन ने भारतीय भूभाग में सैकड़ों गांव बसा लिए है। पाकिस्तान आंखें तरेर रहा है। चीन के खिलाफ एक शब्द बोल नहीं सकते।

    मणिपुर भाजपा ने लगाए ‘लापता मोदी’ के पोस्टर्स..

    सरकार का दायित्व है कि देश के भीतर हिंसा को रोकना जरूरी है। यहां तो हिंसाग्रस्त मणिपुर छोड़कर पीएम दावत खाने पहुंच गए। मणिपुर की चिंता नहीं। वहां की सरकार में शामिल मंत्रियों की फिक्र नहीं। हिंसाग्रस्त मणिपुर का तीन गुट मोदी से मिलने आया।चिट्ठी भी लिखी गई। मणिपुर भाजपा में भगदड़ मची हुई है। मंत्री के घर फूंके गए हैं। बीजेपी के नेताओं को खुद अब केंद्र की डबल इंजिन सरकार पर भरोसा नहीं है। मणिपुर के बीजेपी नेताओं ने राज्यभर में मोदी मिसिंग के पोस्टर चिपकाए हैं।

    स्थानीय पुलिस और आर्मी में झड़प की खबर है। अरुणाचल प्रदेश जिसका भूभाग कब्जे में लेकर चीन ने सौ गांव बसा लिए हैं। उसके बाद भी मणिपुर दंगाग्रस्त राज्य बेहद ज़रूरी है शांति स्थापना के लिए। लेकिन पीएम लापता, गृहमंत्री मौन। मौन तो मोदी भी हैं। एक शब्द तक नहीं बोले। मणिपुर का नाम लेने से उसी तरह बचते रहे हैं जैसे महिला पहलवानों के यौन शोषण के खिलाफ धरना देने से उपजी स्थिति के संदर्भ में भी एक शब्द नहीं बोले जिससे यह संदेश विश्व भर में गया, कि मोदी का बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा एकदम खोखला है।

    indian fasttrack news

    देश की आर्थिक स्थिति डांवाडोल है। मंहगाई चरम सीमा पार कर गई है। टैक्स मनमाना, पेनाल्टी मनमानी लगाई जा रही। सच तो यह है कि देश चलाना, हिंसा रोकना मोदी सरकार के बूते का नहीं। अब मणिपुर वाले पूछ रहे हैं कि हम देश के नागरिक हैं या नहीं? वोटर हैं या नहीं? जिसका जवाब बीजेपी के किसी भी नेता के पास नहीं है।

  • भाजपा मंत्री, बीजेपी सचिव के घर की आगजनी, बीजेपी के वादे से मुकरने का नतीजा

    भाजपा मंत्री, बीजेपी सचिव के घर की आगजनी, बीजेपी के वादे से मुकरने का नतीजा

    • मणिपुर घटना में अमित शाह लाचार।
    • दरअसल झूठ की भी अपनी हद होती है।
    • पीएम की छवि विदेशों में भी धूमिल।
    • मैती समुदाय को आरक्षण देना गुजरात लॉबी का वादा।
    • मैती समुदाय आक्रामक भूमिका में..
    • कुकी, नगा और आदिवासी उतर गए तो स्थिति होगी अत्यंत भयंकर।
    • गुजरात लॉबी की तानाशाही के भय से बीजेपी के सांसद, मंत्री चुप।
    • आरएसएस के सामने अब नही तो कभी नहीं की विकट स्थिति।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    मणिपुर की हिंसा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हाथ पांव फूला देने के लिए काफी है। पीएम नरेंद्र मोदी मणिपुर जलता छोड़ विदेश चले गए। जो उन्हें देश की नहीं अपनी छवि बनाने की चिंता है। लेकिन छवि बनाते-बनाते कब मटिया मेट हो गई पता नहीं चला। दरअसल झूठ की भी हद होती है। महिला पहलवान अब उनकी और देश की बेटियां नहीं रही। वे अपने बाहुबली आरोपी सांसद को बचाने में लगे रहे इसी बीच विदेशों में भी उनकी छवि धूमिल हो गई।

    ये राहुल गांधी हैं कि अमेरिका में जाकर मोदी की यात्रा के पहले सारा गुड गोबर कर दिए। बीजेपी की ऐसी तैसी कर दी। दूसरी तरफ गुजरात लॉबी द्वारा महिला पहलवानों की उपेक्षा से आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और माफियाओं बलात्कारियों को मटियामेट करने का एलान करने वाले यूपी से सीएम योगी आदित्यनाथ की पेशानी पर बल पड़ गए हैं। उन्हे लगता है गुजरात लॉबी बीजेपी का सत्यानाश कर देगी।

    बाहुबली को पीएम, गृहमंत्री द्वारा दिल्ली पुलिस द्वारा नाबालिग पहलवान के यौनशोषण मामले में क्लीन चिट देकर पॉक्सो कानून से हटाने का असर देश की आधी आबादी यानी महिलाओं पर पड़ेगा। यदि उन्होंने बीजेपी को वोट नहीं दिया तो बीजेपी को खत्म होने से कोई रोक नहीं पाएगा।

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    मणिपुर, अमित शाह,
    मणिपुर आगजनी की तस्वीर

    गुजरात लॉबी का वादा..

    मणिपुर हिंसा बीजेपी की ही बोई गई है। मैती समुदाय को आरक्षण देने का वादा गुजरात लॉबी का था। तो मणिपुर हिंसा आगजनी का श्रेय भी इन्ही के माथे जाएगा। गृहमंत्री अमित शाह मणिपुर दौरा कर चुके हैं। लेकिन हासिल कुछ नहीं हुआ। बीजेपी मंत्री एवं बीजेपी सचिव के घर की आगजनी बीजेपी के वादे से मुकरने का नतीजा है। आरक्षण का पेच कुछ इस तरह फंस गया है, कि अमित शाह के सम्मुख एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। अगर बीजेपी मैती समुदाय को आरक्षण देती है तो यह कुकी, नगा और अन्य आदिवासियों के लिए निर्धारित कोटे में से दिया जाएगा जिसे ये अपने हक पर डाका डालना समझेंगे।

    मणिपुर घटना में अमित शाह लाचार।

    अभी तो मैती समुदाय आक्रामक भूमिका में है। कल कुकी नगा और आदिवासी उतर गए तो स्थिति अत्यंत भयंकर होगी। गृहयुद्ध भीषण रूप से फैलेगा। अमित शाह को शायद इसी बात की चिंता हो। उनकी समझ में नहीं आ रहा, कि करें तो क्या करें? मणिपुर हिंसा की आग में जल रहा है। जिसमे खुद अब बीजेपी के घर भी जद में आ गए हैं। अमित शाह के बूते का नहीं रहा मणिपुर। पीएम तो विदेश यात्रा के द्वारा अपनी नष्ट हो चुकी छवि को सुधारने में लगे हैं।

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    आरएसएस के सामने अब नही तो कभी नहीं की विकट स्थिति।

    आश्चर्य नहीं होगा कि आज गुजरात लॉबी की तानाशाही के भय से बीजेपी के जो सांसद, मंत्री चुप हैं। मूक दर्शक बने हुए हैं कल सारे के सारे गुजरात लॉबी के विरुद्ध उठ खड़े हों। आसार तो यही नजर आते है, कि बीजेपी आत्मघात के रास्ते पर बहुत आगे निकल गई है जहां से लौटना असंभव है। आरएसएस के सामने अब नहीं तो कभी नहीं की विकट स्थिति आ खड़ी हुई है। देखना मजेदार होगा कि क्या आरएसएस गुजरात लॉबी को बीजेपी से अलग-थलग करेगी या बीजेपी को नष्ट होने देती है।

  • ए विभाग के मनपाकर्मी दबा के कर रहे हैं वसूली।

    ए विभाग के मनपाकर्मी दबा के कर रहे हैं वसूली।

    • BMC का काला कारोबार। मुंबई उच्च न्यायालय की फटकार।
    • जारी है लगातार BMC में भ्रष्टाचार।
    • बीएमसी के कई वार्डो का यही हाल है।
    • बिना टेंडर के अवैध पार्किंग।

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के ए वार्ड अंतर्गत बॉम्बे समाचार मार्ग पर आजकल अवैध पार्किंग जोरो पर चलाई जा रही है। इस काली (Black money) की कमाई वार्ड ऑफिसर और यहां के मनपाकर्मी खा रहे हैं। इन कारोबारों पर कोई पूछने वाला नही है। जब से इकबाल सिंह चहल ने मनपा आयुक्त (BMC Commissioner) का पदभार संभाला है। तब से मनपा (BMC) में अवैध वसूली और अवैध निर्माण का काम जोरो से चल रहा है।

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    मुंबई का कोई भी नागरिक कितना भी शिकायत कर ले उस पर कोई कार्रवाई नही होती। यहां तक की राजस्व को लगाए जा रहे चूने को उजागर करने के लिए शिकायतकर्ता को काफी पैसे खर्च कर धक्के खाने पड़ते हैं। लेकिन सुनवाई नहीं होती। इस विषय पर बॉम्बे उच्चन्यायालय ने भी मनपा प्रशासन को कई बार कड़ी फटकार लगाई है। फिर भी ये सुधरने को तैयार नही है। क्योंकि मनपाकर्मी मोटी चमड़ी वाले हो गए हैं।

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    BMC,
    बीएमसी ए वार्ड अंतर्गत अवैध पार्किंग की तस्वीर

    BMC का काला कारोबार..

    बड़ा शर्म आता है इन मनपाकर्मीयो पर जो कितने निर्लज्ज है। इनको वसूली के अलावा कुछ नही आता। बीएमसी के कई वार्डो का यही हाल है। बिना टेंडर के अवैध पार्किंग चलाई जा रही है। जिसमे वार्ड ऑफिसर और परिरक्षण विभाग के लोग मलाई खा रहे हैं और नागरिक मनपा कार्यालय के धक्के खा रहे हैं। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा। जो भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए आम नागरिकों को ही जूझना पड़ रहा है।

  • एक दो नहीं दस राज्यों में CBI की एंट्री पर बैन

    एक दो नहीं दस राज्यों में CBI की एंट्री पर बैन

    • CBI की एंट्री पर बैन मैं तमिलनाडू भी हुआ शामिल।
    • 2024 के चुनाव में सेंट्रल जांच एजेंसियों पर रोक का होगा कितना असर?

    नितिन तोरस्कर ( मंत्रालय प्रतिनिधि)
    मुंबई-
    विपक्ष शासित राज्यों में सीबीआई-ईडी जैसी सेंट्रल जांच एजेंसियों की एंट्री और एक्शन पर सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्र सरकार के इशारे पर सीबीआई और ईडी विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करते हैं। विपक्ष शासित 10 राज्य ऐसे हैं, जहां सीबीआई बिना राज्य सरकार के परमिशन के कोई जांच या धर-पकड़ नहीं कर सकती। ताजा मामला तमिलनाडु का है। एमके स्टालिन सरकार के गृह मंत्रालय ने सर्कुलर जारी कर कहा है, कि किसी भी तरह की जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों को राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी।

    तमिलनाडु सरकार का यह फैसला तब आया है, जब ईडी ने लंबी पूछताछ के बाद एक्साइज मिनिस्टर बालाजी सेंदिल को गिरफ्तार कर लिया। तमिलनाडु सरकार ने यह आदेश दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैबलिशमेंट एक्ट 1946 के प्रावधानों के अनुरूप जारी किया है। बिहार में लालू यादव के परिवार के लोग भी यही आरोप लगाते हैं, कि केंद्रीय जांच एजेंसियों (CBI) का इस्तेमाल केंद्र सरकार अपने मतलब के लिए करती है। इसे एकतरफा कार्रवाई या बदले के भावना बताया जाता रहा है। चुनाव के संदर्भ में यह दलील दी जाती है, कि सिर्फ विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच हो रही है। क्या इसका चनावों पर असर पड़ेगा, यह देखना बाकी है।

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    सेंट्रल एजेंसियों (CBI) पर है बैन वाले राज्य ..

    भारत के कुल 10 राज्यों में सेंट्रल एजेंसियों (CBI) पर बैन लगा दिया गया है। पश्चिम बंगाल, झारखंड, पंजाब, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, केरल, मिजोरम, मेघालय और राजस्थान के बाद अब तमिलनाडु भी केंद्रीय जांच एजेंसियों पर बैन लगाने वाले राज्यों में शुमार हैं। इन राज्यों में सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियां किसी भी शिकायत पर बिना राज्य सरकार की सहमति के कोई कार्रवाई नहीं कर सकतीं। हां, इसमें एक छूट जरूर शामिल है। अगर जांच किसी न्यायालयी आदेश या राज्य सरकार की संस्तुति पर हो रही हो, तो इस पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। हकीकत यह है कि जब भी किसी मामले में केंद्रीय एजेंसियों से जांच की जरूरत महसूस होती है तो लोग हाईकोर्ट की शरण में जाते हैं। कोर्ट अगर इजाजत देता है तो जांच होती है।

    CBI,
    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की फाइल तस्वीर

    बंगाल और झारखंड में बैन का कोई असर नहीं।

    बैन के बावजूद सेंट्रल एजेंसियां कुछ राज्यों में आराम से अपने काम को कर रही है। पड़ोस की बात करें तो बंगाल और झारखंड में भी केंद्रीय एजेंसियों (CBI) की जांच पर रोक है। बंगाल में शिक्षक नियुक्ति घोटाला की जांच सीबीआई और ईडी दोनों कर रहे हैं। यह जांच भी राज्य सरकार की मर्जी के खिलाफ है। लेकिन बाध्यता यह है कि इसकी जांच का आदेश कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिया है। जांच का परिणाम यह है कि सीएम ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के कई नेताओं-कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई है तो कुछ अन्य की गिरफ्तारियां कभी भी हो सकती हैं। यहां राज्य सरकार की बंदिश का कोई रोड़ा सेंट्रल एजेंसियों की जांच या गिरफ्तारी में अटक नहीं रहा है।

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    सेंट्रल एजेंसियों के खिलाफ 14 दल..

    सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) के एक्शन से नाराज 14 राजनीतिक दलों के नेतों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसमें बिहार से आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव, झारखंड से सीएम हेमंत सोरेन और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया कि सेंट्रल एजेंसियों की जांच नहीं रोकी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट जाने वालों में अधिकतर वैसे दल शामिल थे, जिसके नेता या कार्यकर्ता बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं। उनके खिलाफ अदालतों ने सेंट्रल एजेंसियों से जांच की सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट से निराश होकर ये नेता जांच से बचने की नयी तरकीब तलाश रहे हैं।

    एजेंसियों की जांच का, चुनाव पर असर…

    केंद्रीय जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। उन्हें जांच के लिए कोर्ट या राज्य सरकारों ने ही कहा है। आम आदमी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि जांच के लपेटे में उनके पसंदीदा नेता रहे हैं या विरोधी। सामान्य भाव यही है कि चोर या भ्रष्टाचारी पकड़ा जाना चाहिए। लालू यादव के परिवार की बात करें तो उनके मामले में भी स्वजातीय को छोड़ कर किसी को इसकी परवाह नहीं है कि जांच एजेंसियां उनके परिवार के खिलाफ जांच कर रही हैं।

    हां, थोड़ा-बहुत संदेह तब तक बरकरार रहता है, जब तक दोष न सिद्ध हो जाए। सुखद पहलू यह है कि ईडी ने जितने मामलों की अब तक जांच की है, उनमें अधिकतर के खिलाफ दोष सिद्ध हुए हैं और सजा भी हुई हैं। सामाजिक न्याय के मसीहा, समाज के वंचित लोगों को स्वर्ग नहीं, स्वर देने का दावा करने वाले लालू प्रसाद के बारे में भी जब चारा घोटाले में सीबीआई जांच शुरू हुई थी तो यही कहा जाता था कि उन्हें फंसाया गया है। दोष सिद्ध होने और सजा के बाद सबकी बोलती बंद हो गई थी।

  • आसान नहीं नितिन गडकरी को पार्टी से निकाल फेंकना।

    आसान नहीं नितिन गडकरी को पार्टी से निकाल फेंकना।

    • सादगी के लिए विख्यात गडकरी सच बोलते है।
    • नितिन गडकरी का प्रभाव पूरे महाराष्ट्र में है।
    • महाराष्ट्र के निर्विवाद सबसे बड़े नेता है गडकरी।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    केंद्र की बीजेपी सरकार में पीएम मोदी की कृपा पाने के लिए मंत्री तक हमेशा मोदी के बचाव में अनर्गल प्रलाप करते देखे सुने जाते हैं।
    परिवहन मंत्री नितिन गडकरी एक ऐसे व्यक्तित्व हैं। जिन पर कभी कोई लांछन नहीं लगा। सादगी के लिए विख्यात गडकरी सच बोलते हैं। इसी कारण वे यदा-कदा अपनी ही सरकार की नीतियों का प्रेस के सामने मुखर विरोध करते हैं। तभी उनके पास भारी और खास मंत्रालयों की भरमार है। उनका कद छोटा करने के लिए उनसे अन्य मंत्रालय छीन लिए गए लेकिन परिवहन मंत्रालय का भारी भरकम मंत्रालय आज भी उनके हाथ में है।

    अन्य मंत्रालय छीन लिए जाने का कारण है। उनकी साफ गोई का स्वभाव। वे अपनी ही सरकार के प्रबल आलोचक हैं। जिस कारण गुजरात लॉबी को वे फूटी आंखों में सुझाते हैं।  अगर बस चलता तो कभी का उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया होता। केंद्र सरकार में एकमात्र मंत्री नितिन गडकरी हैं। जो कार्य करने में नंबर वन बन कर आज भी स्थिर हैं। पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद पहले थोड़ा मनमौजी स्वभाव के थे। लेकिन मंत्रालय में जगह नहीं मिलने से अब बेवजह प्रेस के सामने आकर बेवजह विलाप करते हुए विपक्षियों पर आरोप मढ़ते रहते हैं। उन्हे याद रखना होगा कि कितनी भी चाटुकारिता कर लें मंत्री पद नही मिलेगी।

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    गडकरी,
    भाजपा परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की फाइल तस्वीर

    नितिन गडकरी का प्रभाव पूरे महाराष्ट्र में है।

    गडकरी महाराष्ट्र के निर्विवाद सबसे बड़े नेता हैं। पक्ष-विपक्ष का कोई भी नेता इनसे किसी भी समय मिल सकता है। वे दूसरे नेताओं को आगे बढ़ाते रहते हैं। इसी कारण वे जहां जनता के लाडले हैं वहीं नेताओं द्वारा समापुजित भी हैं। जब मोदी और शाह आरोपी बाहुबली से भयभीत हैं जो मुश्किल से चार या पांच सीटों पर प्रभाव रखता है तो नितिन गडकरी का प्रभाव पूरे महाराष्ट्र में है। महाराष्ट्र के सभी नेता इनकी प्रशंसा करते हैं। जिसके उलट फड़नवीस  विदेशी शिक्षा लेकर एलिट बने हुए हैं। उनसे मिलने के लिए अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है। सभी से तो मिलते भी नहीं। उनकी शिवसेना पार्टी को तोड़ने में बड़ा हाथ रहा। केंद्र की नजदीकियां इन पर भारी पड़ी।

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    सादगी के लिए विख्यात गडकरी सच बोलते है।

    शाह नहीं चाहते कि महाराष्ट्र या किसी राज्य में कोई नेता ऐसा हो पाए जो उनकी पीएम पद की राह में रोड़ा बनें। मोदी के बाद अमित शाह खुद को नंबर दो बनाने पर लगे हुए हैं। यूपी के सीएम योगी की राह में कांटे उनके बिछाए हुए हैं। लेकिन योगी आज भी मोदी के लिए चैलेंज बने हुए है। लगभग बीस लोकसभा सीटों पर उनकी मजबूत पकड़ है। इसलिए अमित शाह उन्हे अपने जाल में कैद नहीं कर पाए हैं। इन सबसे अलग नितिन गडकरी सुयोग्य शासक बनने के गुणों से भरपुर हैं। भाजपा में यदि पीएम पोस्ट के लिए कोई योग्य व्यक्ति है तो नितिन गडकरी हैं। इसीलिए अमित शाह के लिए उनका पत्ता साफ कर पाना बूते से बाहर है। हर नेता गडकरी नहीं बन पाएगा।

  • महाराष्ट्र सरकार —- हनीमून खत्म

    महाराष्ट्र सरकार —- हनीमून खत्म

    • महाराष्ट्र सरकार की राजनीति।
    • दो घड़ों में बट गए बिल्डर लॉबी और कॉरपोरेट।
    • चाणक्य भूल जाते हैं कि लोकसभा की 41 सीटें जीतने में शिवसेना गठबंधन का हाथ था।
    • महाराष्ट्र में बीजेपी दोयम दर्जे से कभी आगे नहीं बढ़ी।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    महाराष्ट्र सरकार में यहां भूचाल मचा हुआ है। दो पक्षों की साझेदारी में धीरे-धीरे तनाव उत्पन्न हो रहा है। शिंदे और फडणवीस के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। क्योंकि फडणवीस गृहमंत्री होते हुए भी ठाणे जिले के आईपीएस को हटा नहीं सकते जबकि भाजपा के स्थानीय बड़े नेता का सिर फोड़ दिया गया। यह साझेदारी कब तक चलेगी यह कहा नहीं जा सकता।

    दिल्ली बड़ी बेरहम है। जो कोई सत्ता में आता है, खुद को सम्राट समझने लगता है। वहां का सत्ताधारी कभी भी बर्दास्त नहीं करता, कि उसके साम्राज्य में किसी प्रांत का नेता शक्तिशाली बनकर उसे चुनौती देने की स्थिति में आए। इसीलिए यूपी में भाजपा के स्टार प्रचारक योगी आदित्यनाथ के पर कतर दिए गए। बिना दांत और नाखून के सीएम बना दिए गए। मजबूरी थी केंद्र की क्योंकि योगी आरएसएस के बेहद करीब हैं। सरकार में उनके दाहिने बाएं तो महावत के रूप में उपमुख्यमंत्री रख दिए गए। संगठन में प्रांतीय अध्यक्ष और प्रभारी दिल्ली ने नियुक्त कर योगी को रोक दिया। लेकिन योगी के बगावती तेवर ने उन्हें शक्तिशाली सीएम बना दिया।

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    महाराष्ट्र, सरकार,
    मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की फाइल तस्वीर

    महाराष्ट्र सरकार की राजनीति ..

    महाराष्ट्र में बकौल पूर्व सीएम फड़णवीस ने ही शिवसेना तोड़ने, शिंदे के साथ अपनी मित्रता निभाने और खुद मुख्यमंत्री बनने के ख्वाब पाले थे। किंतु चाणक्य ने सस्पेंस रखते हुए एकनाथ शिंदे को सीएम बना दिया। फड़नवीस को बेइज्जत करने के लिए उन्हें डिप्टी सीएम बनने को मजबूर कर दिया।
    अब शिंदे और फडणवीस के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। क्योंकि फडणवीस गृहमंत्री होते हुए भी ठाणे जिले के आईपीएस को हटा नहीं सकते। जबकि भाजपा के स्थानीय बड़े नेता का सिर फोड़ दिया गया। शिंदे के प्रभाव के कारण एफआईआर भी नहीं लिखी गई। कितने असहज हो चुके हैं फडणवीस?

    बिल्डर लॉबी,कॉरपोरेट भी दो घड़े में बंट गए हैं। कुछ को शिंदे तो कुछ को फडणवीस का वरद हस्त प्राप्त है। बीजेपी के कार्यकर्ता पीटे जाय। फडणवीस उसके पक्ष में खड़े भी हो जाएं लेकिन शिंदे द्वारा यह कहा जाए कि ठाणे जिले के किसी पुलिस अधिकारी का फडणवीस ट्रांसफर या पोस्टिंग, प्रमोशन नहीं कर सकते। क्योंकि बॉस शिंदे हैं और फडणवीस उनके अधीन हैं। उन्हे शिंदे का आदेश मानना ही पड़ेगा। बेचारे शिंदे करते भी तो क्या ? क्योंकि निरंतर उनका अपमान चाणक्य के फोन आने के बाद किया जाता है।

    आज हालत ऐसे हैं कि कभी अभिन्न मित्र आज आंख में आंख मिलाकर बात तक नहीं करते। जिसका खामियाजा लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बीजेपी को ही भुगतना पड़ेगा। यूपी में लोकसभा की 64 सीटें 2019 में बीजेपी जीती थी। वहां योगी को नीचा दिखाया जा रहा और महाराष्ट्र में कुल 41 लोकसभा सीटें जीतने वाली भाजपा आगामी चुनाव में दहाई तक का आंकड़ा भी नहीं छूने की स्थिति में रह गई है। जिस बालासाहेब ठाकरे ने 2001 के गुजरात दंगे में सीएम मोदी का साथ दिया था। उन्हीं के बेटे उद्धव ठाकरे को चाणक्य ने लहूलुहान कर मोदी के विजय रथ को रोक दिया है। संभव है चाणक्य खुद पीएम की कुर्सी पाना चाहते हों और मोदी को डोमिनेट करने की महत्त्वाकांक्षा रखते हों।

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    महाराष्ट्र के मामले में चाणक्य भूल जाते हैं, कि लोकसभा की 41 सीटें जीतने में शिवसेना गठबंधन का हाथ था और यह भी भूल गए कि महाराष्ट्र में बीजेपी दोयम दर्जे से कभी आगे नहीं बढ़ी। शिवसेना के प्रभुत्व का लाभ बीजेपी को मिलता रहा है। लेकिन उद्धव ठाकरे को चोटिल कर चाणक्य ने भाजपा का महाराष्ट्र में सर्वनाश करने का जुगाड कर लिया है। इससे, सबसे बड़ा नुकसान पीएम मोदी का ही होगा और विधानसभा चुनाव में आने वाले समय में बीजेपी को 288 सीटों में बमुश्किल 20 सीटें ही मिलेंगी। शरद पवार, कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की ही आगामी सरकार बनेगी। उसी तरह जैसे यूपी की लोकसभा चुनाव में 40 सीटों पर पेंच फसने से आरएसएस चिंतित है।