Mumbai Kandivali West में senior citizen के हक में बड़ा फैसला। Tribunal ने बेटे को फ्लैट खाली करने और ₹5000 monthly maintenance देने का आदेश दिया। जानिए पूरा मामला और Senior Citizens Act 2007 के नियम।
मुंबई: Kandivali West इलाके से एक अहम मामला सामने आया है, जहां 69 साल के बुजुर्ग पिता को उनके ही बेटे से लड़ कर कोर्ट से न्याय की गुहार लगानी पड़ी। ट्रिब्यूनल कोर्ट ने बेटे को पिता का फ्लैट खाली करने और हर महीने ₹5000 maintenance देने का आदेश दिया है।
⚖️ ट्रिब्यूनल ने दिया सख्त आदेश
यह फैसला Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act 2007 के तहत दिया गया। केस की सुनवाई बांद्रा (पूर्व) के सब-डिविजनल ऑफिसर और पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिजन्स मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल कोर्ट में हुई।
🏠 बेटे पर फ्लैट कब्जा करने और परेशान करने का आरोप
69 वर्षीय बुजुर्ग ने शिकायत में बताया कि उनके बेटे ने उनके खुद के फ्लैट पर जबरन कब्जा कर लिया था और उन्हें वहां से बाहर कर दिया था।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बेटे के कारण उन्हें मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानी और मेडिकल खर्च उठाने में दिक्कत हो रही थी।
🚓 पुलिस में शिकायत और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
पीड़ित ने पहले पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई और बाद में ट्रिब्यूनल कोर्ट में अपील की।
जनवरी में कोर्ट ने आदेश दिया था कि फ्लैट वापस बुजुर्ग को सौंपा जाए, लेकिन बेटे ने आदेश नहीं माना।
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🚨 पुलिस को हस्तक्षेप के आदेश
बेटे द्वारा आदेश का पालन नहीं करने पर ट्रिब्यूनल कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह हस्तक्षेप कर फ्लैट खाली करवाए और बुजुर्ग को कब्जा दिलाए।
Mumbai Police की मदद से आखिरकार पिछले महीने फ्लैट का कब्जा बुजुर्ग को वापस दिला दिया गया।
🧾 बेटे की दलील भी कोर्ट ने सुनी
सुनवाई के दौरान बेटे ने सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि उसने पिता को रहने से नहीं रोका और संपत्ति पर उसका भी अधिकार है।
उसने पारिवारिक विवाद और harassment के काउंटर आरोप भी लगाए, लेकिन कोर्ट ने सभी दस्तावेज और सबूतों के आधार पर फैसला सुनाया।
📊 ट्रिब्यूनल का अहम ऑब्जर्वेशन
कोर्ट ने माना कि फ्लैट का मालिकाना हक बुजुर्ग के पास है और बेटे के व्यवहार से उनका “peaceful living” प्रभावित हुआ है।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि बच्चों की जिम्मेदारी सिर्फ खाना-पीना नहीं बल्कि माता-पिता को सम्मान और सुरक्षित जीवन देना भी है।
📌 ट्रिब्यूनल के मुख्य आदेश (Key Directions)
- बेटे को 30 दिनों के अंदर फ्लैट खाली करना होगा
- बुजुर्ग को शांतिपूर्ण कब्जा देना अनिवार्य
- हर महीने ₹5000 maintenance देना होगा
- जरूरत पड़ने पर पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित करेगी
🔗 सरकारी कानून और जानकारी
❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. क्या माता-पिता अपने बच्चे को घर से निकाल सकते हैं?
हाँ, अगर घर उनके नाम पर है और बच्चा परेशान कर रहा है, तो कानून इसके लिए अनुमति देता है।
Q2. Senior Citizens Act 2007 क्या कहता है?
यह कानून बच्चों को अपने माता-पिता की देखभाल और maintenance देने के लिए बाध्य करता है।
Q3. Maintenance कितनी तय होती है?
यह कोर्ट केस के आधार पर तय करता है, जैसे इस मामले में ₹5000 महीना तय किया गया।
Q4. अगर बेटा आदेश नहीं माने तो क्या होगा?
पुलिस हस्तक्षेप कर सकती है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
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