Mumbai Session Court ने Dahisar में मां की हत्या के मामले में आरोपी बेटे को IPC Section 302 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई। Court ने Circumstantial Evidence के आधार पर दोषी ठहराया, Police Confession को सबूत नहीं माना।
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर से एक सनसनीखेज Crime News सामने आई है। मुंबई की सेशन कोर्ट ने अपनी मां की हत्या करने वाले बेटे को Life Imprisonment की सजा सुनाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि Circumstantial Evidence के आधार पर यह साबित होता है कि आरोपी ही हत्या के लिए जिम्मेदार है।
🏛️ Court का फैसला: “Homicidal Death हुई, आरोपी जिम्मेदार”
Additional Sessions Judge M Mohiuddin ने 24 फरवरी के अपने Judgment में कहा कि मृतका ललिता शेनॉय की मौत आरोपी की कस्टडी में हुई और यह Homicidal Death है।
कोर्ट के मुताबिक:
- घटना के समय घर में सिर्फ आरोपी मौजूद था
- Crime Scene से Blood-Stained Items बरामद हुए
- आरोपी यह नहीं बता सका कि मां को चोटें कैसे आईं
जज ने कहा कि आरोपी द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण झूठा प्रतीत होता है, जो उसके खिलाफ मजबूत परिस्थिति जन्य साक्ष्य (Circumstantial Evidence) है।
📍 Dahisar की Chawl में रहता था आरोपी
यह मामला मुंबई के Dahisar इलाके का है। आरोपी अपनी मां के साथ एक Chawl में रहता था।
कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार:
- घटना के समय घर में कोई अन्य परिवार सदस्य मौजूद नहीं था
- पड़ोसियों ने बताया कि मां-बेटे के बीच कभी-कभी झगड़ा होता था
📞 सुबह पुलिस को दी थी “Unknown Person” वाली जानकारी
हत्या की रात के बाद अगली सुबह आरोपी ने पुलिस को फोन कर बताया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसकी मां की हत्या कर दी है।
जब पुलिस मौके पर पहुंची तो मां अपने कमरे में मृत पाई गई। कमरे से कई खून से सने सामान बरामद हुए, जिनमें शामिल थे:
- Paper Cutter
- खून से सने कपड़े
- Pillow Cover
🧾 कथित कबूलनामा, लेकिन Court ने नहीं माना
कोर्ट ने नोट किया कि आरोपी ने पुलिस के सामने कथित रूप से कबूल किया था कि:
- उसने मां को 30 Sleeping Tablets दीं
- तकिए से मुंह दबाया
- Paper Cutter से गला काटा
उसने कहा कि झगड़े के बाद उसने “हमेशा के लिए बहस खत्म करने” के लिए यह कदम उठाया।
लेकिन Indian Evidence Act की Section 25 और Bhartiya Nagrik Suraksha Sanhita की Section 23 के तहत पुलिस के सामने दिया गया Confession अदालत में मान्य नहीं होता।
इसलिए कोर्ट ने आरोपी के बयान पर भरोसा नहीं किया और फैसला Circumstantial Evidence के आधार पर सुनाया।
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🔬 Forensic Report और Medical Evidence
जांच के दौरान पुलिस ने कमरे से कई सामान जब्त किए:
- Paper Cutter
- Blood-Stained Clothes
- Pillow
- Mattress का टुकड़ा
Forensic Tests में कुछ सामान पर Human Blood की पुष्टि हुई। Medical Examination में पाया गया कि मौत गर्दन पर गहरे कट (Deep Incised Neck Injuries) के कारण हुई।
हालांकि Paper Cutter पर आरोपी के Fingerprints नहीं मिले, लेकिन कोर्ट ने कहा कि घटना के समय घर में और कोई नहीं था।
❗ आरोपी का “Unnatural Conduct” भी बना सबूत
कोर्ट ने आरोपी के व्यवहार पर भी सवाल उठाए।
जज ने कहा:
- अगर कोई अज्ञात व्यक्ति हत्या करता, तो आरोपी शोर मचाता
- पड़ोसियों को बुलाता
- मां को अस्पताल ले जाने की कोशिश करता
लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया और सुबह तक चुप रहा। कोर्ट ने इसे “Unnatural Conduct” मानते हुए आरोपी के खिलाफ मजबूत परिस्थिति माना।
⚖️ सजा और जुर्माना
कोर्ट ने आरोपी को Indian Penal Code की Section 302 के तहत Murder का दोषी ठहराया।
सजा:
- Life Imprisonment
- ₹5,000 Fine
- Fine नहीं भरने पर 3 महीने की अतिरिक्त सजा
कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी 29 नवंबर 2018 से न्यायिक हिरासत में है और Code of Criminal Procedure की Section 428 के तहत जेल में बिताया गया समय सजा में Adjust किया जाएगा।
👩⚖️ कौन थे वकील?
- आरोपी की ओर से Advocate Shashikant Damodarlal Chandak (Legal Aid) और Kanchan Chandak पेश हुए।
- राज्य की ओर से Additional Public Prosecutor PS Rathod ने पैरवी की।
❓ FAQ Section
1. आरोपी को किस धारा में सजा मिली?
IPC Section 302 (Murder) के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
2. क्या आरोपी का Confession कोर्ट में माना गया?
नहीं, Indian Evidence Act और BNSS Act के तहत पुलिस के सामने दिया गया Confession मान्य नहीं होता।
3. सजा क्या है?
Life Imprisonment और ₹5,000 जुर्माना।
4. घटना कब की है?
आरोपी को 29 नवंबर 2018 को गिरफ्तार किया गया था और तभी से वह न्यायिक हिरासत में है।
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