Bombay HC का बड़ा आदेश: MSRTC को देना होगा ₹50 लाख मुआवज़ा

Bombay High Court ने MSRTC को आदेश दिया कि COVID-19 से ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारी की पत्नी को ₹50 लाख compensation दे। कोर्ट ने कहा – महामारी के समय “narrow view” लेकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।

मुंबई: Bombay High Court ने एक अहम फैसले में Maharashtra State Road Transport Corporation (MSRTC) को निर्देश दिया है कि वह COVID-19 के दौरान ड्यूटी करते हुए संक्रमित होकर जान गंवाने वाले अपने कर्मचारी की पत्नी को ₹50 लाख का compensation अदा करे। कोर्ट ने साफ कहा कि महामारी के समय निगम ने अपनी जिम्मेदारी को लेकर “narrow view” अपनाया, जो स्वीकार नहीं किया जा सकता।

🔹 Compensation Claim खारिज करने को दी थी चुनौती

याचिकाकर्ता सुनीता बापू जगताप ने MSRTC के जनवरी 2022 और मार्च 2023 के उन फैसलों को कोर्ट में चुनौती दी थी, जिनमें उनके मुआवज़े का दावा यह कहकर खारिज कर दिया गया था कि उनके पति “essential services” में तैनात नहीं थे और वे interstate transport के ड्राइवर भी नहीं थे।

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सुनीता जगताप के पति बापू जगताप की अप्रैल 2021 में COVID-19 से मौत हो गई थी। पत्नी का कहना था कि उनके पति ने महामारी के सबसे खतरनाक दौर में ड्यूटी की और उसी दौरान संक्रमण की चपेट में आए।

🔹 HC का आदेश: 8 हफ्ते में भुगतान, नहीं तो 6% ब्याज

24 फरवरी को जस्टिस मकरंद कर्णिक और जस्टिस श्रीराम मोडक की बेंच ने सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि MSRTC कुल ₹50 लाख में से ₹45 लाख आठ हफ्तों के भीतर अदा करे और पहले से दिए गए ₹5 लाख को adjust किया जाए।

अगर आठ हफ्तों में भुगतान नहीं किया गया, तो 6% per annum की दर से interest भी देना होगा। कोर्ट ने कहा कि यह widow compensation का मामला है और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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🔹 कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “Pandemic में Narrow View क्यों?”

बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि MSRTC ने महामारी के दौरान अपनी जिम्मेदारी को लेकर बेहद संकीर्ण नजरिया अपनाया। कोर्ट ने कहा:

“Pandemic के समय हालात ऐसे थे कि लोग घर से बाहर निकलने से डर रहे थे। ऐसे में जो कर्मचारी ड्यूटी कर रहे थे, वे अपनी जान जोखिम में डालकर public service निभा रहे थे।”

कोर्ट ने यह भी माना कि भले ही मृतक सीधे interstate buses नहीं चला रहे थे, लेकिन वे ड्राइवरों और कंडक्टरों के संपर्क में आते थे, जिससे उन्हें भी समान खतरा था।

🔹 Pandemic की भयावह स्थिति पर कोर्ट की टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि वह judicial notice ले सकती है कि उस समय पूरा देश ठप था, public transport limited services के साथ चल रही थी और दवाइयों की भारी किल्लत थी।

बेंच ने स्पष्ट किया कि सरकारों ने उस समय Disaster Management Act, 2005 और Epidemic Diseases Act, 1897 के तहत विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया था। ऐसे हालात में कोई भी सरकारी संस्था अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती।

🔹 Wadala Depot में ड्यूटी और संक्रमण की कहानी

बापू जगताप को मार्च 24 से 28, 2021 के बीच BEST Bus Depot, वडाला में ट्रैफिक सुपरविजन की ड्यूटी दी गई थी। वहां वे बस ड्राइवरों और स्टाफ के लगातार संपर्क में रहे।

29 से 31 मार्च तक तबीयत खराब होने के कारण उन्होंने छुट्टी ली और नाशिक जिले के मनमाड लौट गए। 5 अप्रैल 2021 को उनकी COVID-19 रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इलाज के दौरान 7 अप्रैल 2021 को येवला के सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में COVID-related pneumonia से उनका निधन हो गया।

🔹 Widow Compensation और Employee Rights पर बड़ा संदेश

इस फैसले को employee rights, COVID compensation policy और government liability के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। High Court ने साफ किया कि महामारी जैसे संकट के समय ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को “essential service” की संकीर्ण परिभाषा में बांधकर उनके परिवार को मुआवज़े से वंचित नहीं किया जा सकता।

यह निर्णय भविष्य में Pandemic Death Compensation मामलों में एक मजबूत मिसाल बन सकता है।


❓ FAQ Section

1. Bombay High Court ने MSRTC को कितना मुआवज़ा देने का आदेश दिया?

कोर्ट ने कुल ₹50 लाख compensation देने का आदेश दिया, जिसमें ₹45 लाख आठ हफ्तों में देने होंगे और ₹5 लाख पहले से दिए गए हैं।

2. यह मामला किस वर्ष की घटना से जुड़ा है?

यह मामला अप्रैल 2021 में COVID-19 से हुई कर्मचारी की मौत से जुड़ा है।

3. कोर्ट ने MSRTC पर क्या टिप्पणी की?

कोर्ट ने कहा कि निगम ने महामारी के दौरान “narrow view” अपनाया और अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की।

4. अगर MSRTC तय समय में भुगतान नहीं करती तो क्या होगा?

आठ हफ्तों में भुगतान न होने पर 6% per annum interest देना होगा।

5. कर्मचारी की ड्यूटी कहाँ लगी थी?

उन्हें मार्च 2021 में वडाला स्थित BEST Bus Depot में ट्रैफिक सुपरविजन के लिए तैनात किया गया था।


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