करीब तीन महीने बाद महाराष्ट्र FDA को स्थायी आयुक्त मिला। IAS अधिकारी श्रीधर डूबे-पाटील की फुल-टाइम नियुक्ति से प्रशासनिक मजबूती, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर सख्ती की उम्मीद बढ़ी।
मुंबई: करीब तीन महीने तक प्रभारी व्यवस्था में चल रहे महाराष्ट्र खाद्य एवं औषध प्रशासन (FDA) को आखिरकार फुल-टाइम आयुक्त मिल गया है। राज्य सरकार ने IAS अधिकारी श्रीधर डूबे-पाटील को FDA का स्थायी आयुक्त नियुक्त किया है। अब तक वे प्रभारी आयुक्त की भूमिका निभा रहे थे। लंबे समय से नेतृत्व के अभाव में विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे थे, ऐसे में इस नियुक्ति को प्रशासनिक सख़्ती, पारदर्शिता और सुधारों की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

🔹 तीन महीने बाद मिली स्थायी कमान
पूर्व FDA आयुक्त राजेश नार्वेकर पिछले लगभग तीन महीनों से अवकाश पर थे। इस दौरान विभाग प्रभारी व्यवस्था के तहत चल रहा था। ऐसे में श्रीधर डूबे-पाटील को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था, जो महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं।
अब सरकार ने इसी अस्थायी व्यवस्था को खत्म करते हुए उन्हें फुल-टाइम आयुक्त बना दिया है।
🔹 प्रभारी व्यवस्था से बिगड़ी प्रशासनिक रफ्तार
प्रभारी आयुक्त के भरोसे चल रहे FDA में नीतिगत फैसलों, निरीक्षण और कार्रवाई की गति पर असर पड़ने की चर्चा लंबे समय से थी। सूत्रों के मुताबिक, इसी दौर में विभाग के भीतर बैठे कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के हौसले बढ़ गए थे।
निगरानी ढीली पड़ने से शिकायतों की जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई, जिससे आम जनता और व्यापारियों दोनों में नाराज़गी देखी गई।
🔹 राजेश नार्वेकर की छुट्टी और उठते सवाल
पूर्व आयुक्त राजेश नार्वेकर के लंबे अवकाश को लेकर प्रशासनिक गलियारों में कई सवाल उठते रहे। उनके अवकाश के पीछे अलग-अलग कारण बताए जाते हैं।
सूत्रों का कहना है कि वे FDA के कुछ अधिकारियों की कार्यशैली से नाराज़ थे। एक ईमानदार अधिकारी की सराहना करना उन्हें महंगा पड़ गया, क्योंकि कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने इसे तोड़-मरोड़कर विधानसभा तक पहुंचा दिया।
🔹 भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें उजागर
इस पूरे घटनाक्रम से यह संकेत मिलता है कि FDA में कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की जड़ें कितनी गहरी हैं।
इतना ही नहीं, FSO उत्तरेश्वर बड़े जैसे अधिकारियों को लेकर व्यापारियों द्वारा कई शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक उन पर जांच ठंडे बस्ते में पड़ी है। इससे विभाग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं।
🔹 श्रीधर डूबे-पाटील से क्यों हैं ज्यादा उम्मीदें
श्रीधर डूबे-पाटील पहले ही प्रभारी आयुक्त के तौर पर FDA की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। ऐसे में विभाग की आंतरिक समस्याओं, अधिकारियों की भूमिका और सिस्टम की कमजोरियों से वे भली-भांति परिचित हैं।
सरकारी हलकों में उम्मीद जताई जा रही है कि वे अपने कार्यकाल में—
- FDA की प्रशासनिक पकड़ मजबूत करेंगे
- भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करेंगे
- खाद्य सुरक्षा और दवा नियंत्रण को प्रभावी बनाएंगे
- जनहित से जुड़े मामलों में जीरो टॉलरेंस अपनाएंगे
🔹 जनहित से जुड़ा अहम विभाग
FDA ऐसा विभाग है जिसका सीधा संबंध आम जनता के स्वास्थ्य से है। मिलावटी खाद्य पदार्थ, नकली दवाएं और अवैध कारोबार पर लगाम लगाना इसकी मुख्य जिम्मेदारी है।
ऐसे में फुल-टाइम आयुक्त की नियुक्ति से न सिर्फ प्रशासनिक स्थिरता आएगी, बल्कि भरोसा भी मजबूत होगा।
❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. महाराष्ट्र FDA के नए फुल-टाइम आयुक्त कौन बने हैं?
👉 IAS अधिकारी श्रीधर डूबे-पाटील।
Q2. FDA को फुल-टाइम आयुक्त मिलने में देरी क्यों हुई?
👉 पूर्व आयुक्त राजेश नार्वेकर के लंबे अवकाश के कारण विभाग प्रभारी व्यवस्था में चल रहा था।
Q3. नई नियुक्ति से क्या बदलाव उम्मीद की जा रही है?
👉 भ्रष्टाचार पर सख्ती, तेज़ कार्रवाई और प्रशासनिक पारदर्शिता।
Q4. किन अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं?
👉 FSO उत्तरेश्वर बड़े सहित कुछ अधिकारियों पर व्यापारियों ने शिकायतें की हैं।
Discover more from Indian fasttrack news
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
