मुंबई की बोरीवली कोर्ट ने महिला जॉगर से छेड़छाड़ करने वाले आरोपी को एक साल की सजा सुनाई। घटना के दौरान राहगीर ने महिला को बचाया था।
मुंबई: महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े एक अहम मामले में बोरीवली की मजिस्ट्रेट अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 30 वर्षीय नरेश कोल को महिला जॉगर से छेड़छाड़ करने के मामले में एक साल की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी कहा कि समाज में महिलाओं के साथ होने वाले गलत व्यवहार को शुरुआत से ही रोकना जरूरी है, इसलिए ऐसे मामलों में किसी तरह की नरमी नहीं दिखाई जा सकती।
🚨 घटना का विवरण
यह घटना 21 मार्च की रात लगभग 8 बजे मुंबई के पश्चिमी उपनगर में हुई थी। महिला रोजाना की तरह जॉगिंग कर रही थी, तभी एक अजनबी पीछे से आया और उसे पकड़कर जबरदस्ती जंगल की ओर खींचने की कोशिश करने लगा। महिला ने शोर मचाया और मदद के लिए चिल्लाई।
इसी दौरान वहां से गुजर रहे एक मोटरसाइकिल सवार ने महिला को बचाया और आरोपी को पकड़ लिया। बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया।
🧾 महिला और गवाह की गवाही
मुकदमे के दौरान महिला और मोटरसाइकिल सवार दोनों को गवाह के रूप में पेश किया गया। दोनों ने अदालत के सामने साफ तौर पर बयान दिया कि आरोपी ने महिला के साथ बदसलूकी की और उसे जबरन जंगल की तरफ खींचने की कोशिश की।
अदालत ने कहा कि महिला और राहगीर एक-दूसरे को नहीं जानते थे और न ही आरोपी से कोई संबंध था। ऐसे में किसी अजनबी के खिलाफ झूठा आरोप लगाने का कोई कारण नहीं हो सकता।
🙅 आरोपी की दलील और अदालत का जवाब
नरेश कोल ने अदालत में दावा किया कि उसने महिला को छुआ नहीं बल्कि तेज रफ्तार गाड़ी से बचने के लिए दौड़ते हुए गलती से उससे टकरा गया। लेकिन अदालत ने उसकी इस दलील को खारिज कर दिया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा –
“अगर आरोपी निर्दोष होता, तो महिला को डरने और चिल्लाने की कोई जरूरत नहीं पड़ती। आरोपी का महिला को जंगल की ओर घसीटना साफ दिखाता है कि उसका इरादा गलत था।”
⚖️ अदालत का फैसला
22 अगस्त को आए फैसले में बोरीवली कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए कहा –
“भले ही आरोपी युवा है, लेकिन इस तरह की हरकत से समाज की महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा को खतरा पहुंचता है। ऐसे मामलों में सख्त सजा देना जरूरी है।”
अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 (महिला की मर्यादा भंग करने की नीयत से हमला या बल प्रयोग) के तहत दोषी पाया और एक साल कैद की सजा सुनाई। इसमें वह 5 महीने की जेल भी शामिल है, जो आरोपी पहले से ही इस मामले में काट चुका है।
👩⚖️ महिला सुरक्षा पर संदेश
अदालत के इस फैसले से समाज को यह साफ संदेश मिला कि महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे अपराधों को समय रहते रोकना समाज की जिम्मेदारी है और हर महिला को न्याय दिलाना न्याय व्यवस्था की प्राथमिकता होनी चाहिए।
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