
सुरेंद्र राजभर की रिपोर्ट
मुंबई – कभी बेज़बान जानवर (कुत्ता) तो कभी मासूम बच्चा क्या दोनों पानी से भरे गड्ढे मे गिरते हैं! दोनों पानी मे डूबकर नही मरते! मरते हैं पानी मे दौड़ रहे बिजली की करंट से! अविश्वसनीय लग रहा होगा न ? लेकिन यह कपोल कल्पित कहानी नही, सच्ची घटना है बिल्डर की लापरवाही के कारण हुई मौत!
इसी कड़ी में एक और की मृत्यु हो गई! वह भी बिल्डर की सुरक्षा इंतजामों में बरती गई लापरवाही या फिर जानबूझकर की गई गलती! जी हां! कांदिवली (पश्चिम) में एस आर ए. के अंतर्गत बन रही बिल्डिंगों से संबंधित है ये तीनों हृदयविदारक मौत! मगर पुलिस और कानून के लंबे हाथ बौने साबित हो रहे हैं! अभी तीनों वाक्या रुपारेल द्वारा कांदिवली (पश्चिम) मे बनाए जा रहे एसआरए प्रोजेक्ट के है! प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार निर्माणाधीन ईमारत कैम्पस मे बने गढ़ढ़े में 29 मार्च 2019 को एक बेज़बान जानवर (कुत्ता) गिर गया ! उसकी मौत पानी मे डूबने से नही बल्कि पानी मे बिजली करंट दौड़ने से हुई! Builder Ruparel
इस घटना से बिल्डर ने कोई सबक नही लिया! शायद दुसरी हृदयविदारक घटना का उसे इंतजार था! वह दिन भी आ गया जब मासूम बच्चा एक दुसरे गढ़ढ़े मे गिरकर मर गया! बच्चे की मौत के लिए जिम्मेदार फिर से पानी में प्रवाहित होने वाला बिजली का करंट ही था!
बच्चे की मौत ने स्थानीय नागरिकों को भीतर से हिलाकर रख दिया! वे आक्रोश से भर गये! बच्चे का शव का अंतिम संस्कार करने के पूर्व जवाबदेह बिल्डर, उसके पार्टनर और संबंधित जिम्मेदार अफसरों की गिरफ्तारी की मांग करने लगे लेकिन बिल्डर द्वारा मृत बालक को परिजनों पर राजनैतिक दबाव बनाकर अंतिम संस्कार करा दिया गया! कितने शर्म की बात है कि मासूम की लाश पर बैठकर कुचाले की गई!
जबकि बिल्डर रुपारेल का दावा है कि सुरक्षा के पूरे इंतजाम पुख्ता रुप से किये गये हैं! याद हो कि 29 मार्च 2019 को पुलिस ने पंचनामा के बाद आज 7 महीने बाद भी जांच है कि पूरी होने का नाम ही नही ले रही! 4 जून 7 साल के आदित्य सिंह चौहान मामले मे गु.र.क्र.314/19 में भा.द.वी. की धारा 304 (अ), 34 के तहत एफआईआर बिल्डर, पार्टनर्स और जवाबदेह अधिकारियों के विरुद्ध दर्ज की गई थी !
पहले कुत्ते की पानी के गढ़ढ़े मे बिजली करंट से मौत, फिर बच्चे की भी गढ़ढ़े मे गिरने से मौत, बिल्डर की नियत पर सवाल जरुर खड़ा करती है! एक यह की पानी वाले गढ़ढ़े मे बिजली का करंट कैसे लगाया गया और क्यूँ ? कुत्ते की मौत से बिल्डर, पार्टनर्स, साईट पर जवाब देह अधिकारियों ने सबक क्यूँ नही लिया ? यदी जानबूझकर गलती नही की गई होती तो फिर गढ़ढ़े मे गिरकर बिजली करंट से 7 साल के आदित्य सिंह चौहान मासूम बच्चे की मौत क्यूँ होती ? निश्चित ही यह जानबूझकर किया गया अपराध प्रथम दृष्ट्या लगता है!
तीसरी घटना मे के.डी. कंपाउंड के बजरंग सेवा सोसायटी के निर्माणाधीन ईमारत के 8वें महले से सीधे नीचे जमीन पर आ गिरने से मजदूर राम निवास शाह की मौत स्पष्ट है कि बिल्डर ने मजदूरों की भी सुरक्षा के लिए नीचे जाली लगानी चाहिए थी ताकि कोई मजदूर गिरे भी तो जाली यानी नेट पर आकर गिरे जिससे चोट लगने की भी संभावना खत्म हो जाती! मृत्यु तो बड़ी दूर की बात है!
सीधे नीचे जमीन पर गिरकर मरे मजदूर की फोटो साबित करती है कि सुरक्षा के मानकों के अनुसार बिल्डर ने व्यवस्था ही नही की! मजदूर की मौत पर पोलिस उपनिरीक्षक संदिप संभाजी पाटिल की फ़रियाद पर गु.र.क्र. 589/19 भा.द.वि. की धारा 304 (अ), 34 के तहत लोकेश रामअवतार खंडेलवाल, अमित रुपारेल, कांन्टेक्टर रविंद्र शंकर रेड्डी व अन्य जवाबदार के खिलाफ मामला दर्ज कर कांदिवली पुलिस जांच कर रही है!
ऐसे बिल्डरों के लाईसेंस रद्द कर देने चाहिए ! साथ ही मृतक मासूम 7 वर्षिय बच्चे और मजदूर को कंपनसेशन के रुप मे 20-20 लाख रुपये का जुर्माना और आजीवन सजा दी जानी चाहिए! जांच के नाम पर राजनैतिक दबाव का खेल शायद चल रहा है!
बच्चे के मामले में केवल सुपरवाइज़र की गिरफ्तारी और अमित रुपारेल, लोकेश खंडेलवाल, प्रदीप अहीरे,रुपारेल बिल्डर के पार्टनर्स और अन्य जवाबदेह लोगों का शिकंजे से बाहर खुलेआम घुमना साबित करता है कि मामला दाल मे काला वाला नही बल्कि दाल ही काली वाला है!
पुलिस विभाग को यथा शीघ्र बिना किसी राजनैतिक दबाव के बिल्डर्स, पार्टनर्स और जिम्मेदार लोगों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए प्रयास करना होगा ताकि खाकी का सम्मान बना रहे!
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