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  • Versova–Dahisar Coastal Road को मिली हरी झंडी, CRZ अड़चन खत्म, काम तेज

    Versova–Dahisar Coastal Road को मिली हरी झंडी, CRZ अड़चन खत्म, काम तेज

    Mumbai News: वर्सोवा से दहिसर तक 22 किमी लंबे सागरी किनारा मार्ग को CRZ और वन विभाग की मंजूरी मिल गई है। जानिए लागत, रूट, फायदे और लेटेस्ट अपडेट।

    मुंबई: शहर के पश्चिमी उपनगरों के लिए गेमचेंजर माने जा रहे वर्सोवा से दहिसर Coastal Road को लेकर बड़ी राहत की खबर है। लंबे समय से CRZ (कोस्टल रेगुलेशन ज़ोन) की वजह से अटका हुआ प्रोजेक्ट अब तेज़ी से आगे बढ़ेगा। वन विभाग की ज़रूरी मंजूरी मिलते ही इस रूट के CRZ इलाकों में रुका काम दोबारा शुरू होने जा रहा है। करीब 22 किलोमीटर लंबे इस सागरी मार्ग के पूरा होने से पश्चिमी उपनगरों में ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।

    CRZ की वजह से क्यों रुका था काम?

    वर्सोवा–दहिसर Coastal Road के कुछ हिस्से ऐसे इलाकों से गुजरते हैं, जहां कांदळवन (मैंग्रोव) और घने पेड़ मौजूद हैं। इन क्षेत्रों में निर्माण के लिए CRZ के तहत अलग-अलग मंजूरियां जरूरी थीं।
    हालांकि ज़्यादातर अनुमति पहले ही मिल चुकी थीं, लेकिन वन विभाग की अंतिम मंजूरी न मिलने से इन हिस्सों का काम ठप पड़ा था।
    अब मुंबई महानगरपालिका (BMC) को यह मंजूरी मिल गई है, जिससे लंबे समय से रुका काम दोबारा रफ्तार पकड़ेगा।

    BMC का बयान: अब तेज़ी से आगे बढ़ेगा प्रोजेक्ट

    BMC के अतिरिक्त आयुक्त (प्रोजेक्ट) अभिजीत बांगर के मुताबिक,

    “वन विभाग से जरूरी अनुमति मिल चुकी है। CRZ क्षेत्र में भी जल्द काम शुरू किया जाएगा। बाकी हिस्सों में निर्माण पहले से जारी है।”

    इस मंजूरी के बाद प्रोजेक्ट की टाइमलाइन पर पड़े असर को कम करने की कोशिश की जाएगी।

    छह चरणों में बनेगा 22 KM लंबा Coastal Road

    वर्सोवा से दहिसर तक बनने वाला यह सागरी किनारा मार्ग कुल छह चरणों (Phases) में विकसित किया जाएगा।

    मुख्य डिटेल्स:

    • 📏 कुल लंबाई: लगभग 22 किलोमीटर
    • 💰 कुल लागत: करीब ₹16,621 करोड़
    • 🛣️ डिज़ाइन:
    • कुछ हिस्सों में डबल डेकर एलिवेटेड रोड
    • कुछ जगहों पर खाड़ी के नीचे टनल (Tunnel)

    यह प्रोजेक्ट टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों के लिहाज से मुंबई के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है।

    पश्चिम–पूर्व एक्सप्रेस हाईवे को मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी

    इस सागरी मार्ग को गोरेगांव–मुलुंड लिंक रोड (GMLR) से जोड़ा जाएगा। इससे:

    • पश्चिमी उपनगरों से ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे तक पहुंच आसान होगी
    • रोज़ाना सफर करने वाले हजारों वाहन चालकों को राहत मिलेगी

    इसके अलावा, इस रोड को भविष्य में दहिसर–भाईंदर एलिवेटेड रोड से जोड़ने का भी प्रस्ताव है, जिससे मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।

    ट्रैफिक में बड़ा बदलाव, सफर होगा फास्ट

    मरिन ड्राइव–वरळी सागरी मार्ग के बाद अब वर्सोवा–दहिसर सागरी रोड से मुंबई की ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

    • लिंक रोड और SV रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा
    • पीक आवर्स में सफर का समय घटेगा
    • पश्चिमी उपनगरों का कोस्टल एरिया सीधे हाई-स्पीड रोड से जुड़ेगा

    FAQ | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. वर्सोवा–दहिसर सागरी मार्ग की कुल लंबाई कितनी है?
    👉 लगभग 22 किलोमीटर।

    Q2. यह प्रोजेक्ट क्यों अटका हुआ था?
    👉 CRZ क्षेत्र में वन विभाग की मंजूरी न मिलने के कारण।

    Q3. इस प्रोजेक्ट की कुल लागत कितनी है?
    👉 करीब ₹16,621 करोड़।

    Q4. इससे आम लोगों को क्या फायदा होगा?
    👉 ट्रैफिक कम होगा, सफर तेज़ और आरामदायक बनेगा।

    Q5. क्या यह रोड पूर्वी मुंबई से भी जुड़ेगा?
    👉 हां, गोरेगांव–मुलुंड लिंक रोड के ज़रिए।

  • मुंबई लोकल ट्रेन अपडेट: 10 अक्टूबर तक कई रूट्स प्रभावित, सफर में लगेगा ज्यादा समय

    मुंबई लोकल ट्रेन अपडेट: 10 अक्टूबर तक कई रूट्स प्रभावित, सफर में लगेगा ज्यादा समय

    मुंबई लोकल ट्रेन सर्विस 10 अक्टूबर तक बड़े मेंटेनेंस और ट्रैक अपग्रेडेशन के कारण प्रभावित रहेगी। सेंट्रल, वेस्टर्न और हार्बर लाइन पर रूट बदलेंगे, देरी होगी और भीड़ बढ़ेगी। यहां पढ़ें पूरी जानकारी और वैकल्पिक यात्रा प्लान।

    मुंबई: “लाइफलाइन” कही जाने वाली लोकल ट्रेनें इन दिनों बड़े मेंटेनेंस और अपग्रेडेशन के चलते दिक्कत में हैं। सेंट्रल, वेस्टर्न और हार्बर लाइनों पर मरम्मत और सिग्नल सिस्टम मॉडर्नाइजेशन का काम चल रहा है, जिसकी वजह से रोज़ाना लाखों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। यह काम 10 अक्टूबर तक जारी रहेगा।

    disruption इतना बड़ा क्यों?

    रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह पिछले कई सालों में सबसे बड़ा प्लान्ड डिस्रप्शन है।

    • ट्रैक रिन्यूअल (Track Renewal)
    • सिग्नल मॉडर्नाइजेशन (Signaling Modernization)
    • ब्रिज स्ट्रेंथनिंग (Bridge Strengthening)

    इन अपग्रेड्स से लोकल ट्रेन नेटवर्क और भी मज़बूत और सुरक्षित होगा।

    कौन-कौन सी लाइनें होंगी प्रभावित?

    🚆 Central Line

    • ठाणे से कल्याण के बीच कई सर्विसेज़ कम कर दी गई हैं।
    • पिक ऑवर्स में यात्रियों को सबसे ज़्यादा देरी का सामना करना पड़ेगा।

    🚆 Western Line

    • नॉन-पीक आवर्स में लिमिटेड शेड्यूल पर ट्रेनें चलेंगी।
    • कुछ रूट पर डायवर्जन की वजह से सफर लंबा होगा और भीड़ बढ़ेगी।

    🚆 Harbour Line

    • नाइट ब्लॉक और बीच-बीच में सर्विस सस्पेंड होगी।
    • देर रात घर लौटने वाले यात्रियों को परेशानी होगी।

    वैकल्पिक यात्रा प्लान

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    रेलवे और BMC ने यात्रियों के लिए अलग-अलग विकल्प तैयार किए हैं:

    • BEST बसें: पिक टाइम पर अतिरिक्त बसें चलाई जा रही हैं।
    • मुंबई मेट्रो: वेस्टर्न और सेंट्रल रूट पर मेट्रो का इस्तेमाल बेहतर विकल्प होगा।
    • ऑटो-रिक्शा और कैब: शेयरिंग और ऐप-बेस्ड सर्विसेज़ उपलब्ध होंगी, लेकिन भीड़ और ट्रैफिक का सामना करना पड़ सकता है।

    यात्रियों को क्या दिक्कतें आएंगी?

    • सफर लंबा होगा: ट्रेनों के डायवर्जन और लेट होने की वजह से।
    • 🚉 भीड़ बढ़ेगी: कम ट्रेनों की वजह से पिक टाइम पर ओवरक्राउडिंग होगी।
    • 🌙 देर रात परेशानी: नाइट ब्लॉक्स की वजह से आखिरी ट्रेनें छूट सकती हैं।

    सुरक्षा पर रेलवे का अलर्ट

    यात्रियों से अपील की गई है कि:

    • भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में जबरदस्ती न चढ़ें।
    • फुट ओवरब्रिज का सही इस्तेमाल करें।
    • स्टेशन पर रेलवे स्टाफ के निर्देशों का पालन करें।

    कब तक रहेगी दिक्कत?

    10 अक्टूबर तक यह मरम्मत और अपग्रेडेशन का काम चलेगा। इसके बाद यात्रियों को बेहतर, सुरक्षित और तेज़ सर्विस का फायदा मिलेगा।


    FAQs

    Q1: मुंबई लोकल ट्रेन सर्विस किस तारीख तक प्रभावित रहेगी?
    👉 10 अक्टूबर तक।

    Q2: कौन-कौन सी लाइनों पर असर पड़ेगा?
    👉 Central Line, Western Line और Harbour Line।

    Q3: वैकल्पिक ट्रांसपोर्ट क्या है?
    👉 BEST बसें, मेट्रो, ऑटो और कैब।

    Q4: यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कत कब होगी?
    👉 पिक आवर्स (सुबह और शाम) और नाइट ब्लॉक के दौरान।

    Q5: यह काम क्यों किया जा रहा है?
    👉 ट्रैक रिन्यूअल, सिग्नल मॉडर्नाइजेशन और ब्रिज स्ट्रेंथनिंग के लिए।

  • मुंबई में जल्द आएगी पॉड टैक्सी: ट्रैफिक कम करेगी और देगी लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, CM फडणवीस का बड़ा ऐलान

    मुंबई में जल्द आएगी पॉड टैक्सी: ट्रैफिक कम करेगी और देगी लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, CM फडणवीस का बड़ा ऐलान

    मुंबई में ट्रैफिक कम करने और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए पॉड टैक्सी प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल गई है। CM देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि कुरला से बांद्रा-BKC तक ये सेवा शुरू होगी। जानें कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट और क्या होंगे फायदे।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी में जल्द ही लोगों को पॉड टैक्सी (Pod Taxi) की सुविधा मिलने वाली है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने समीक्षा बैठक में कहा कि यह सेवा शहर में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी देने और बढ़ते ट्रैफिक को कम करने में मददगार साबित होगी।

    कुर्ला और बांद्रा रेलवे स्टेशन से लेकर BKC (बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स) तक ये पॉड टैक्सी नेटवर्क बनाया जाएगा।

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    समीक्षा बैठक की तस्वीर

    🚆 प्रोजेक्ट की अहम बातें

    • कुल लागत: ₹1,016.34 करोड़
    • लोकेशन: कुर्ला – बांद्रा – BKC
    • समयसीमा: 3 से 4 साल में पूरा होने की उम्मीद
    • उद्देश्य: ट्रैफिक कम करना और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी देना

    🏙️ क्यों जरूरी है पॉड टैक्सी?

    CM फडणवीस ने कहा कि आने वाले समय में बुलेट ट्रेन स्टेशन और नया बॉम्बे हाई कोर्ट बनने से इस इलाके में ट्रैफिक काफी बढ़ जाएगा। मौजूदा ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर बोझ बढ़ने से लोगों को परेशानी होगी।

    ऐसे में पॉड टैक्सी एक तेज, आरामदायक और पर्यावरण-फ्रेंडली विकल्प बनेगी।

    🚖 पॉड टैक्सी क्या है?

    • पॉड टैक्सी Personal Rapid Transit (PRT) सिस्टम का हिस्सा है।
    • ये छोटी-छोटी ड्राइवरलेस इलेक्ट्रिक गाड़ियां होती हैं।
    • ऊँचे ट्रैक (Elevated Track) पर चलती हैं।
    • हर पॉड में सीमित लोग बैठ सकते हैं, जिससे सफर तेज और सुविधाजनक होता है।

    🛣️ कुर्ला पुलिस क्वार्टर्स का होगा रिलोकेशन

    इस प्रोजेक्ट के लिए कुर्ला पुलिस क्वार्टर्स को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा ताकि वहां की जमीन का इस्तेमाल पॉड टैक्सी नेटवर्क के लिए हो सके।

    💳 सभी ट्रांसपोर्ट के लिए सिंगल कार्ड सिस्टम

    मुंबई में एक यूनिफाइड कार्ड सिस्टम लाने की तैयारी भी चल रही है। इस कार्ड से लोकल ट्रेन, मेट्रो, बस और आने वाली पॉड टैक्सी – सबका किराया चुकाया जा सकेगा।

    🌉 स्टेशन और BKC को मिलेगा बेहतर कनेक्शन

    • कुर्ला और बांद्रा स्टेशन एरिया को पॉड टैक्सी से जोड़ने की तैयारी।
    • BKC के बड़े ऑफिस बिल्डिंग्स को भी इस सेवा से डायरेक्ट कनेक्ट किया जाएगा।
    • मौजूदा स्काईवॉक का भी स्मार्ट इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया।

    📊 बैठक में कौन-कौन थे मौजूद?

    यह हाई-लेवल मीटिंग सह्याद्री गेस्ट हाउस, मलबार हिल पर हुई।
    शामिल अधिकारी:

    • मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती
    • MMRDA चीफ संजय मुखर्जी
    • ट्रांसपोर्ट, अर्बन डेवलपमेंट और होम डिपार्टमेंट के सीनियर IAS अफसर

    ❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. मुंबई पॉड टैक्सी प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा?
    👉 3 से 4 साल में इसके पूरा होने की उम्मीद है।

    Q2. पॉड टैक्सी किन जगहों को जोड़ेगी?
    👉 कुरला, बांद्रा और बांद्रा-कुरला कॉम्प्लेक्स (BKC)।

    Q3. पॉड टैक्सी का खर्च कितना है?
    👉 प्रोजेक्ट की कुल लागत ₹1,016.34 करोड़ है।

    Q4. इसमें सफर कैसे होगा?
    👉 पॉड टैक्सी ड्राइवरलेस, इलेक्ट्रिक व्हीकल होगी जो ऊँचे ट्रैक पर चलेगी।

    Q5. क्या एक ही कार्ड से सफर करना संभव होगा?
    👉 हां, मुंबई में सभी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज के लिए एक यूनिफाइड कार्ड सिस्टम लाया जाएगा।

  • Mumbai Monorail बंद होगी 20 सितंबर से: बड़े अपग्रेड्स और नए ट्रेन रेक्स के लिए MMRDA का ऐलान

    Mumbai Monorail बंद होगी 20 सितंबर से: बड़े अपग्रेड्स और नए ट्रेन रेक्स के लिए MMRDA का ऐलान

    मुंबई मोनोरेल 20 सितंबर 2025 से अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेगी। MMRDA ने बताया कि CBTC सिग्नलिंग सिस्टम, नए ट्रेन रेक्स और फ्लेट ओवरहॉल के लिए यह कदम जरूरी है। पूरी जानकारी यहां पढ़ें।

    मुंबई: माया नगरी मुंबई के शहर वासियों के लिए बड़ी खबर है। मुंबई मोनोरेल 20 सितंबर 2025 से पूरी तरह बंद रहेगी।
    मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) ने बताया कि यह बंदी इसलिए जरूरी है ताकि नए ट्रेन रेक्स, एडवांस्ड CBTC सिग्नलिंग और फ्लेट रिफर्बिशमेंट का काम बिना रुकावट पूरा किया जा सके।

    ❓ क्यों बंद की जा रही है मोनोरेल?

    • यह बंदी पूरा 19.74 किमी रूट (चेंबूर से संत गाडगे महाराज चौक) पर लागू होगी।
    • अभी तक अपग्रेड और टेस्टिंग का काम सिर्फ रात में 3.5 घंटे की विंडो में हो रहा था, लेकिन यह टाइम बहुत कम है।
    • अब लगातार 24×7 अपग्रेड वर्क चलेगा ताकि सिस्टम जल्दी से चालू हो सके।

    🔧 कौन-कौन से अपग्रेड होंगे?

    1. नए ट्रेन रेक्स (Rolling Stock)
    • कुल 10 नए ट्रेन रेक्स Make in India प्रोजेक्ट के तहत लाए जा रहे हैं।
    • 8 रेक्स मुंबई पहुँच चुके हैं, 9वां टेस्टिंग में है और 10वां असेंबली में है।
    1. एडवांस्ड CBTC सिग्नलिंग सिस्टम
    • यह पहली बार मुंबई मोनोरेल में लगेगा।
    • सिस्टम हैदराबाद में डिवेलप हुआ है और इसका वर्किंग टेस्ट लगभग पूरा है।
    1. फ्लेट रिफर्बिशमेंट और स्टाफ ट्रेनिंग
    • पुराने रेक्स की पूरी मरम्मत और अपग्रेड होगी।
    • ट्रेनिंग सेफ्टी और ऑपरेशन के हिसाब से होगी ताकि आने वाले मेट्रो प्रोजेक्ट्स में भी फायदा मिले।

    ⚠️ सेफ्टी को लेकर चिंता

    पिछले कुछ महीनों में मोनोरेल में कई तकनीकी खराबियां और हादसे हुए।

    • हाल ही में 17 पैसेंजर बीच ट्रैक पर फंसे थे।
    • 19 अगस्त को बारिश की वजह से दो बड़ी खराबियों में 780 से ज्यादा पैसेंजर घंटों तक फंसे रहे
    • इन्हीं घटनाओं के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया है।

    📋 जांच कमेटी और सरकार का संदेश

    • MMRDA ने इन फेल्योर की जांच के लिए स्पेशल कमेटी बनाई है।
    • डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा:
      “मुंबईकरों के साथ सहयोग से मोनोरेल को और मजबूत और सुरक्षित बनाया जाएगा।”

    🚉 मुंबई मोनोरेल: इंडिया की पहली और अकेली मोनोरेल

    • 2014 में पहली लाइन शुरू हुई थी (8.26 किमी)।
    • 2019 में रूट बढ़ाकर 19.74 किमी किया गया।
    • अभी सिर्फ 5 एक्टिव रेक्स चल रहे हैं, इसलिए नए रेक्स की बेहद जरूरत है।

    📌 यात्रियों के लिए जरूरी जानकारी

    • आखिरी दिन सर्विस: 19 सितंबर 2025
    • पूरी बंदी: 20 सितंबर 2025 से
    • रूट बंद: चेंबूर से संत गाडगे महाराज चौक (दोनों तरफ)
    • कारण: नए रेक्स, CBTC सिग्नलिंग, फ्लेट ओवरहॉल
  • बोरीवली-वसई होते हुए पनवेल तक नई लोकल लाइन को मंजूरी, मुंबईकरों को बड़ी राहत

    बोरीवली-वसई होते हुए पनवेल तक नई लोकल लाइन को मंजूरी, मुंबईकरों को बड़ी राहत

    MUTP-III B के तहत बोरीवली-वसई से पनवेल तक 69 किमी लंबा नया लोकल कॉरिडोर बनेगा। 12710.82 करोड़ की लागत से बनने वाली यह लाइन मुंबईकरों की भीड़भाड़ कम करने में मदद करेगी।

    मुंबई: मुंबईकरों के लिए यहां की लोकल ट्रेन जिंदगी की लाइफ़लाइन हैं। लेकिन बढ़ती आबादी के साथ लोकल की संख्या उतनी नहीं बढ़ी, जिससे रोजाना यात्रियों को भारी भीड़ का सामना करना पड़ता है। खासकर वसई-विरार और कर्जत-खोपोली जैसे रूट पर हालात और ज्यादा खराब हैं।

    अब लंबे इंतजार के बाद मुंबईकरों के लिए खुशखबरी आई है। पनवेल-बोरीवली-वसई उपनगरीय कॉरिडोर को आखिरकार हरी झंडी मिल गई है।

    🚆 12710.82 करोड़ का प्रोजेक्ट

    यह नया लोकल कॉरिडोर मुंबई शहरी परिवहन परियोजना (MUTP-III B) के तहत बनाया जाएगा।

    • कुल लागत: ₹12710.82 करोड़
    • लंबाई: 69.23 किलोमीटर
    • लाइन: दो-तरफ़ा (डबल लाइन)

    इस रूट से नवी मुंबई, बोरीवली और वसई को सीधे पनवेल से जोड़ा जाएगा।

    भीड़ कम करने में मिलेगी मदद

    अभी तक ईस्ट-वेस्ट कनेक्टिविटी की कमी के कारण यात्री अलग-अलग रूट से चक्कर लगाकर सफर करते हैं। नया कॉरिडोर बनने के बाद:

    • लोकल ट्रेनों की भीड़ कम होगी।
    • नवी मुंबई से वसई/बोरीवली तक का सफर आसान हो जाएगा।
    • यात्रियों का समय भी बचेगा।

    🚉 MUTP-III B के तहत और भी काम

    इस प्रोजेक्ट के साथ-साथ रेलवे अन्य रूट पर भी विस्तार कर रहा है:

    • बदलापुर-कर्जत के बीच तीसरी लाइन
    • आसनगांव-कसारा के बीच चौथी लाइन
      इन सब पर मिलाकर लगभग ₹14907.47 करोड़ खर्च किए जाएंगे।

    यात्रियों और इंडस्ट्री दोनों को फायदा

    पश्चिम रेलवे सलाहकार समिति के सदस्य राजीव सिंघल के मुताबिक, यह नया कॉरिडोर सिर्फ लोकल यात्रियों ही नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए भी बड़ा फायदा देगा।

    • पनवेल से गोवा और पुणे जाने वाले यात्रियों को आसानी होगी।
    • भिवंडी के पावरलूम उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
    • लंबी दूरी के यात्री और कार्गो भी इस रूट से लाभान्वित होंगे।

    यह प्रोजेक्ट मुंबई लोकल नेटवर्क में एक नया अध्याय साबित होगा। बोरीवली-वसई से पनवेल तक लोकल कनेक्टिविटी मिलने से लाखों मुंबईकरों की रोज़ाना की यात्रा आसान और आरामदायक होगी

  • महाराष्ट्र के इन गांवों में पहली बार फहराया तिरंगा

    महाराष्ट्र के इन गांवों में पहली बार फहराया तिरंगा

    महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में एक दूरदराज उदाड्या नामक आदिवासी गांव में आजादी के बाद पहली बार तिरंगा फहराया गया है। जहां बिजली, सड़क और सरकारी स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं अभी तक नहीं पहुंच पाई है। कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया, कि इस कार्यक्रम का मकसद ग्रामीणों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। The tricolor was hoisted for the first time in these villages of Maharashtra

    डिजिटल डेस्क
    महाराष्ट्र/ नंदुरबार:
    सतपुड़ा की पहाड़ियों में बसे एक सुदूर आदिवासी गांव उदाड्या में इस बार देश की 79वां स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। गांव में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज यानी तिरंगा फहराया गया, इस कार्यक्रम के दौरान यहां के निवासियों में गर्व और देशभक्ति की भावना की लहर दौड़ गई। इस गांव में न अब तक बिजली की सुविधा प्राप्त हो पाई है, न सड़क और न ही सरकारी स्कूल या ग्राम पंचायत जैसी आधारभूत व्यवस्थाएं यहां को लोगों को मिली है। The tricolor was hoisted for the first time in these villages of Maharashtra

    आजादी के बाद पहली बार फहरा तिरंगा

    गांव में तैनात शिक्षक गणेश पावरा ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर इंटरनेट से वीडियो डाउनलोड कर तिरंगा फहराने की विधि सीखी और फिर गांव के 30 बच्चों और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर तिरंगा फहराया। यह पहल वाईयूएनजी फाउंडेशन की ओर से की गई, यह संस्था इस क्षेत्र के चार अनौपचारिक स्कूलों का संचालन करती है। संस्था के संस्थापक संदीप देओरे ने बताया कि पहली बार झंडा फहराने के साथ-साथ लोगों को उनके संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना इस कार्यक्रम का मकसद था। The tricolor was hoisted for the first time in these villages of Maharashtra

    200 से अधिक बच्चों ने लिया भाग

    करीब 250 बच्चों और उदाड्या, खपरमाल, सदरी और मंझनीपड़ा जैसे चार गांवों के लोगों ने इस आयोजन में हिस्सा लिया। इन गांवों में संचार, परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं अभी तक प्राप्त नही हो पाई हैं। यहां के लोग पावरी बोली बोलते हैं, जो हिंदी या मराठी से काफी अलग है, इस वजह से संवाद में भी इनको चुनौतियों का सामना करना पडता है। The tricolor was hoisted for the first time in these villages of Maharashtra

    संस्था के अध्यक्ष देओरे ने बताया, कि इन गांवों में शिक्षा की बेहद कमी है और इस वजह से लोग अक्सर अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। कुछ जगहों पर आंगनबाड़ी सेवाएं भी ठीक से नहीं पहुंची है, हालांकि खपरमाल जैसे गांवों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आजमीबाई अपने गांव में ही रहकर ईमानदारी से बच्चों को सेवा प्रदान कर रही है। The tricolor was hoisted for the first time in these villages of Maharashtra