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  • Godman Culture पर शिवसेना (UBT) का हमला, ‘Maharashtra की Progressive Identity खतरे में’

    Godman Culture पर शिवसेना (UBT) का हमला, ‘Maharashtra की Progressive Identity खतरे में’

    Shiv Sena (UBT) ने Saamana Editorial में Godman Culture और Superstition पर बड़ा हमला बोला। Ashok Kharat Controversy के बीच Maharashtra Politics में बढ़ते अंधविश्वास पर सवाल।

    मुंबई: Mumbai में सियासी माहौल गरम है। Shiv Sena (UBT) ने अपने मुखपत्र Saamana में छपे तीखे Editorial के जरिए महाराष्ट्र में बढ़ते Godman Culture और Superstition पर जोरदार हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि यह ट्रेंड राज्य की Progressive Roots को कमजोर कर रहा है।

    🔮 Ashok Kharat Controversy से उठा बड़ा मुद्दा

    Editorial में खुद को ज्योतिषी बताने वाले Ashok Kharat के विवाद का जिक्र करते हुए कहा गया कि इस मामले ने दिखा दिया है कि कैसे Political Leaders और Officials सत्ता और प्रभाव के लिए अंधविश्वास का सहारा ले रहे हैं।

    ⚠️ राजनीति में बढ़ रहा Superstition Trend

    Editorial के मुताबिक, Maharashtra की राजनीति अब Rational Thinking से हटकर Superstition Culture की तरफ बढ़ रही है।
    पार्टी ने इसे राज्य की पहचान के लिए खतरनाक बताया।

    🏛️ Senior Leaders पर भी लगाए आरोप

    Saamana में दावा किया गया कि कई बड़े मंत्री और अधिकारी Ashok Kharat के आश्रम गए थे।

    • कुछ नेताओं ने Political Gain के लिए Occult Practices भी किए
    • इससे Governance पर भी सवाल उठ रहे हैं

    👩‍⚖️ Women’s Commission Controversy पर भी निशाना

    Shiv-Sena-UBT-attacks-Godman-Culture-Maharashtra-Identity-Danger-news

    Editorial में State Women’s Commission की पूर्व अध्यक्ष की आलोचना करते हुए कहा गया:

    • सिर्फ Resignation देना काफी नहीं
    • Systemic Failure को Address करना जरूरी
    • समय रहते Action होता तो Victims को नुकसान नहीं होता

    📢 सिर्फ Kharat नहीं, समर्थकों की भी जिम्मेदारी

    Shiv Sena (UBT) ने साफ कहा:

    👉 जिम्मेदारी सिर्फ Ashok Kharat तक सीमित नहीं होनी चाहिए
    👉 जो लोग उनके संपर्क में थे, उनकी भी Accountability तय होनी चाहिए

    📚 Phule-Ambedkar Legacy का दिया हवाला

    Editorial में Maharashtra के महान समाज सुधारकों का जिक्र करते हुए कहा गया कि:

    • Mahatma Jyotiba Phule
    • B. R. Ambedkar
    • Bahinabai Chaudhari

    इन सभी ने Rational Thinking और Social Reform को बढ़ावा दिया था।
    लेकिन आज का Superstition Trend इन मूल्यों को कमजोर कर रहा है।

    🧠 Governance और Merit पर उठे सवाल

    Editorial में कहा गया कि:

    • नेताओं का Rituals और Occult Practices पर Dependence
    • उनके Confidence की कमी दिखाता है
    • Merit-Based Governance से ध्यान भटक रहा है

    🔥 Political Fallout जारी

    Ashok Kharat मामले में गिरफ्तारी के बाद:

    • Opposition Parties ने व्यापक जांच की मांग की
    • Maharashtra की Progressive Image को नुकसान बताया गया

    Shiv Sena (UBT) ने Constitutional Values और Rational सोच की ओर लौटने की अपील की।

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    FAQ Section

    Q1. Ashok Kharat कौन हैं?
    👉 एक self-proclaimed astrologer, जिनका नाम विवादों में आया है।

    Q2. Shiv Sena (UBT) ने क्या आरोप लगाए?
    👉 नेताओं पर अंधविश्वास और occult practices अपनाने का आरोप।

    Q3. Editorial में मुख्य चिंता क्या है?
    👉 Maharashtra की Progressive Identity को खतरा।

    Q4. क्या Action की मांग की गई है?
    👉 Wider Accountability और Systemic Reform।

  • Parbhani Mayor Controversy: मुस्लिम महापौर पर महाराष्ट्र में सियासी घमासान

    Parbhani Mayor Controversy: मुस्लिम महापौर पर महाराष्ट्र में सियासी घमासान

    Parbhani महानगरपालिका में शिवसेना (UBT) के मुस्लिम महापौर चुने जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बवाल मच गया। अंबादास दानवे ने BJP पर पलटवार करते हुए सिकंदर बख्त से मुख्तार अब्बास नकवी तक का नाम लिया। पढ़ें पूरी खबर।

    महाराष्ट्र: Parbhani महानगरपालिका में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के समर्थन से मुस्लिम नेता सय्यद इकबाल महापौर चुने गए। इसके बाद BJP और विरोधी दलों ने हिंदुत्व के मुद्दे पर ठाकरे गुट को घेरा। जवाब में अंबादास दानवे ने BJP पर पलटवार करते हुए पार्टी के मुस्लिम नेताओं की लंबी लिस्ट गिना दी और पूछा – “तब आपका हिंदुत्व कहां था?” इस मुद्दे ने पूरे महाराष्ट्र की राजनीति का पारा बढ़ा दिया है।

    Parbhani-Mayor-Controversy-Political-turmoil-in-Maharashtra-over-Muslim-mayor-news

    🏛️ Parbhani में मुस्लिम महापौर, क्यों मचा सियासी तूफान?

    Parbhani महानगरपालिका में शिवसेना (UBT) की तरफ से मुस्लिम उम्मीदवार को महापौर बनाए जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में जबरदस्त बहस छिड़ गई है।

    सोशल मीडिया पर “हिंदुत्व बनाम सेक्युलर राजनीति”, “जनाब सेना” जैसे कीवर्ड ट्रेंड करने लगे। सवाल उठाया गया कि मुंबई में मराठी और हिंदुत्व की बात करने वाली पार्टी परभणी में मुस्लिम महापौर कैसे चुन सकती है?

    🔥 BJP का हमला: हिंदुत्व पर उठे सवाल

    BJP और कुछ हिंदुत्ववादी संगठनों ने आरोप लगाया कि यह फैसला शिवसेना (UBT) की बदली हुई विचारधारा को दिखाता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि “Shiv Sena UBT Muslim Mayor”, “Parbhani Mayor Controversy”, “Hindutva Politics Maharashtra” जैसे सर्च टर्म्स गूगल पर तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं।


    🗣️ अंबादास दानवे का पलटवार: BJP को दिखाया आईना

    इस पूरे विवाद पर अंबादास दानवे ने BJP पर सीधा हमला बोला।

    दानवे ने कहा:

    “परभणी में मुस्लिम महापौर बनते ही BJP के कई विद्वानों को अचानक दर्द शुरू हो गया। लेकिन जब आपके ही दल में मुस्लिम नेता बड़े पदों पर थे, तब आपका हिंदुत्व कहां था?”

    📜 BJP के मुस्लिम नेताओं की लिस्ट गिनाई

    दानवे ने BJP के कई मुस्लिम चेहरों का नाम लेकर सवाल खड़ा किया:

    • सिकंदर बख्त
    • शाहनवाज हुसैन
    • मुख्तार अब्बास नकवी
    • नजमा हेपतुल्ला
    • एम.जे. अकबर
    • सैयद जफर इस्लाम
    • जमाल सिद्दीकी

    दानवे ने कहा कि जब इन नेताओं को मंत्री और सांसद बनाया गया, तब किसी ने हिंदुत्व पर सवाल नहीं उठाया।

    🤝 हिंदू नगरसेवकों ने भी किया समर्थन

    दानवे ने यह भी साफ किया कि महापौर के चुनाव में कई हिंदू नगरसेवकों ने भी समर्थन दिया। उनके मुताबिक यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, न कि धर्म का मुद्दा।

    🌾 सय्यद इकबाल कौन हैं?

    नवनियुक्त महापौर सय्यद इकबाल को शिवसेना का पुराना और जमीनी कार्यकर्ता बताया जा रहा है।

    जानकारी के मुताबिक वे लंबे समय से तालुका प्रमुख रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि सांसद संजय जाधव के शिवपुराण कथा आयोजन के लिए इकबाल ने अपनी जमीन उपलब्ध कराई थी।

    🌡️ महाराष्ट्र में बढ़ा सियासी तापमान

    यह मुद्दा अब सिर्फ परभणी तक सीमित नहीं रहा। “Maharashtra Political Controversy 2026”, “Shiv Sena vs BJP Latest News”, “Muslim Mayor Maharashtra Debate” जैसे कीवर्ड ट्रेंड कर रहे हैं।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले चुनावों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।


    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. परभणी में कौन महापौर बने हैं?
    परभणी महानगरपालिका में शिवसेना (UBT) समर्थित सय्यद इकबाल महापौर चुने गए हैं।

    Q2. विवाद क्यों शुरू हुआ?
    मुस्लिम महापौर चुने जाने के बाद BJP और अन्य दलों ने हिंदुत्व के मुद्दे पर सवाल उठाए।

    Q3. अंबादास दानवे ने क्या कहा?
    अंबादास दानवे ने BJP के मुस्लिम नेताओं की लिस्ट गिनाते हुए पलटवार किया।

    Q4. क्या यह मामला चुनावों को प्रभावित करेगा?
    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों में बड़ा फैक्टर बन सकता है।

  • BMC Election: सीट बंटवारे पर ठाकरे बंधुओं की बातचीत तेज, UBT को 125 और MNS को 90 सीटें संभव

    BMC Election: सीट बंटवारे पर ठाकरे बंधुओं की बातचीत तेज, UBT को 125 और MNS को 90 सीटें संभव

    BMC Election 2026 से पहले ठाकरे बंधुओं में सीट शेयरिंग को लेकर अंतिम दौर की बातचीत। शिवसेना (UBT) 120–125 और मनसे 80–90 सीटों पर लड़ सकती है।

    मुंबई: आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। प्रस्तावित फॉर्मूले के तहत शिवसेना (UBT) करीब 120 से 125 सीटों पर और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) लगभग 80 से 90 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है।

    ठाकरे बंधुओं की संभावित युति पर सबकी नजर

    करीब एक दशक बाद होने जा रहे बीएमसी चुनाव को लेकर ठाकरे परिवार की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग का मकसद साफ है—मराठी वोटों का बंटवारा रोकना और मुंबई महानगरपालिका में मज़बूत दावेदारी पेश करना।

    सूत्र बताते हैं कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच कई दौर की अनौपचारिक बैठकें हो चुकी हैं और जल्द ही इस पर औपचारिक ऐलान हो सकता है।

    BMC Election 2017 के नतीजों से सीख, लेकिन सीटों पर मतभेद

    2017 के BMC Election में शिवसेना (तत्कालीन अविभाजित) ने 84 सीटें जीती थीं। उद्धव ठाकरे चाहते हैं कि ये सभी 84 सीटें शिवसेना (UBT) के पास ही रहें।
    हालांकि, मनसे इस मांग से सहमत नहीं है

    मनसे का तर्क है कि वर्ली, दादर, कालाचौकी, मुलुंड और भांडुप जैसे मराठी बहुल इलाकों में उसका मजबूत जनाधार है। इसी आधार पर मनसे कुछ ऐसी सीटों की मांग कर रही है, जिन पर पहले शिवसेना का दबदबा रहा है।

    NCP (शरद पवार) और वाम दलों की भी हो सकती है एंट्री

    वोटों के बंटवारे से बचने के लिए ठाकरे बंधु इस संभावित गठबंधन में एनसीपी (शरद पवार गुट) और वाम दलों को शामिल करने पर भी विचार कर रहे हैं।

    सूत्रों के अनुसार, यदि शरद पवार गुट गठबंधन में शामिल होता है तो उसे 15 से 20 सीटें दी जा सकती हैं। इससे गठबंधन को शहरी और अल्पसंख्यक वोटों में मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    महा युति में भी सीट बंटवारे को लेकर खींचतान

    दूसरी ओर, सत्तारूढ़ महा युति (भाजपा–शिंदे गुट शिवसेना) में भी सीट शेयरिंग को लेकर गहमागहमी है।
    एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 90 से 100 सीटों की मांग की है, यह दावा करते हुए कि उसका संगठन और जनाधार कई वार्डों में मजबूत है।

    वहीं, भाजपा मुंबई में 135 से 140 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।

    2017 में किसका पलड़ा भारी था?

    2017 के बीएमसी चुनाव में कुल 227 सीटों में से:

    • शिवसेना: 84 सीटें
    • भाजपा: 82 सीटें

    उस वक्त दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़े थे। इस बार तस्वीर बदली हुई है और गठबंधनों का गणित ज्यादा अहम हो गया है।


    FAQ | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1: बीएमसी चुनाव कब होने हैं?
    👉 जनवरी 2026 में।

    Q2: शिवसेना (UBT) कितनी सीटों पर लड़ सकती है?
    👉 लगभग 120 से 125 सीटों पर।

    Q3: मनसे को कितनी सीटें मिलने की संभावना है?
    👉 करीब 80 से 90 सीटें।

    Q4: क्या एनसीपी (शरद पवार) भी गठबंधन में शामिल होगी?
    👉 बातचीत चल रही है, 15–20 सीटें दिए जाने की संभावना है।

  • BMC ELECTION में कांग्रेस अकेले उतरने पर कायम; महाविकास अघाडी की एकता पर संकट

    BMC ELECTION में कांग्रेस अकेले उतरने पर कायम; महाविकास अघाडी की एकता पर संकट

    BMC ELECTION में कांग्रेस की अकेले लड़ने की घोषणा से महाविकास आघाड़ी (MVA) में असहजता बढ़ गई है। शिवसेना (UBT) की मनसे से नज़दीकी को लेकर कांग्रेस की असहमति सामने आई, जबकि एनसीपी (SP) गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ने के पक्ष में है।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव को लेकर कांग्रेस के अकेले लड़ने के फैसले ने महाविकास आघाड़ी की एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस का कहना है कि शिवसेना (UBT) की मनसे के साथ बढ़ती राजनीतिक नज़दीकियां उनके उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोट बैंक को नुकसान पहुंचा सकती हैं। हालांकि शिवसेना (UBT) कांग्रेस से पुनर्विचार की अपील कर रही है, जबकि एनसीपी (शरद पवार) मनसे को साथ लेकर संयुक्त मुकाबले की पक्षधर है। इस राजनीतिक खींचतान ने आगामी मनपा चुनावों की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है।

    कांग्रेस के फैसले से MVA में हलचल

    मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने साफ कहा है कि कांग्रेस बीएमसी चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेगी। इससे MVA में असहजता बढ़ी है, क्योंकि गठबंधन का मकसद भाजपा को रोकना था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के अकेले लड़ने से वोटों का बंटवारा होगा, जिससे भाजपा को सीधी बढ़त मिल सकती है।

    मनसे को लेकर कांग्रेस की बड़ी चिंता

    कांग्रेस की असहमति की सबसे बड़ी वजह है—
    🔹 शिवसेना (UBT) और मनसे की बढ़ती समीपता
    🔹 उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोट बैंक का संभावित नुकसान

    कांग्रेस का मानना है कि मनसे के साथ जुड़ाव उसकी विचारधारा के विपरीत है, क्योंकि मनसे पहले उत्तर भारतीयों के खिलाफ आक्रामक रुख के लिए जानी जाती रही है।

    कांग्रेस में भी दो धड़े, राय में मतभेद

    कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति भी खुलकर सामने आई है।
    एक धड़ा — स्थानीय समीकरण के आधार पर मनसे के साथ गठबंधन का समर्थक
    दूसरा धड़ा — मनसे के साथ किसी भी सूरत में गठबंधन के खिलाफ

    मुंबई के राजनैतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस को जल्द स्पष्ट रुख लेना होगा, वरना गैर-मराठी और गैर-हिंदू वोटों का विभाजन भाजपा के लिए रास्ता आसान बना देगा।

    एनसीपी (SP) एकता के पक्ष में

    एनसीपी (शरद पवार) गठबंधन की मजबूती के लिए MNS को साथ लेकर संयुक्त मुकाबले की वकालत कर रही है। इसी संदर्भ में वर्षा गायकवाड़ की टीम ने शरद पवार से मुलाकात भी की है, लेकिन कांग्रेस अपने निर्णय पर कायम है।

    शिवसेना (UBT) ने किया पुनर्विचार का आग्रह

    उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना कांग्रेस को साथ रखने की कोशिश जारी रखे हुए है। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा—
    🔹 “मनसे के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस की नाराज़गी व्यक्तिगत मामला हो सकता है।”
    🔹 “जनता चाहती है कि शिवसेना और मनसे साथ आएं।”

    दूसरी ओर, मनसे ने MVA में शामिल होने से इनकार करते हुए कांग्रेस को “अमीबा” कहा, जिस पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए “गिरगिट” जैसी टिप्पणी की।

    बीएमसी चुनाव — बड़ा राजनीतिक समीकरण

    • राज्य की 246 नगर परिषद और 42 नगर पंचायतों के चुनाव 2 दिसंबर को
    • बीएमसी के चुनाव जनवरी 2026 में होने की संभावना
    • वर्तमान हालात में भाजपा सबसे मजबूत स्थिति में दिख रही है
    • कांग्रेस के अकेले उतरने से विपक्ष का वोट बैंक टूट सकता है

    FAQ

    प्रश्नउत्तर
    क्या कांग्रेस MVA से अलग हो रही है?नहीं, गठबंधन बरकरार है, लेकिन बीएमसी चुनाव कांग्रेस स्वतंत्र रूप से लड़ना चाहती है।
    कांग्रेस मनसे के साथ क्यों नहीं है?कांग्रेस का कहना है कि मनसे के पुराने रुख से उसके परंपरागत वोटरों को नुकसान हो सकता है।
    क्या विपक्षी वोट बंटेंगे?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फैसले से भाजपा को सीधा लाभ मिल सकता है।
    क्या अंतिम निर्णय बदल सकता है?शिवसेना (UBT) लगातार आग्रह कर रही है, लेकिन इस समय कांग्रेस अपने फैसले पर अडिग है।
  • मुंबई बीएमसी चुनाव की तारीख़ों का आज ऐलान संभव! महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव पर दोपहर में प्रेस कॉन्फ्रेंस

    मुंबई बीएमसी चुनाव की तारीख़ों का आज ऐलान संभव! महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव पर दोपहर में प्रेस कॉन्फ्रेंस

    महाराष्ट्र में लंबे इंतज़ार के बाद बीएमसी समेत सभी स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा आज होने की संभावना है। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने दोपहर 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जिसमें चुनाव की तारीख़ें घोषित की जा सकती हैं।

    मुंबई: 4 नवंबर महाराष्ट्र में लंबे इंतज़ार के बाद बीएमसी (BMC) समेत राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा आज होने की संभावना है। राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission – SEC) ने आज दोपहर 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जिसमें राज्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश वाघमारे औपचारिक रूप से चुनाव कार्यक्रम का ऐलान कर सकते हैं।

    सूत्रों के मुताबिक, घोषणा के तुरंत बाद आचार संहिता (Model Code of Conduct) पूरे राज्य में लागू हो जाएगी।

    🏙️ तीन चरणों में होंगे महाराष्ट्र के निकाय चुनाव

    राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार, इस बार स्थानीय निकाय चुनाव तीन चरणों में कराए जाने की संभावना है।

    1️⃣ पहला चरण: 246 नगरपालिका परिषदों और 42 नगर पंचायतों के चुनाव होंगे।
    2️⃣ दूसरा चरण: जिल्हा परिषद (Zilla Parishad) और पंचायत समितियों के लिए मतदान होगा।
    3️⃣ अंतिम चरण: बड़े नगर निगमों — मुंबई, पुणे, नागपुर, ठाणे और नासिक के चुनाव होंगे।

    संभावना है कि पहले चरण का मतदान नवंबर के अंत तक कराया जाएगा, यानी चुनावी प्रक्रिया इसी हफ्ते शुरू हो सकती है।

    🏛️ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार समयसीमा तय

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, जिन निकायों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, उनके चुनाव 31 जनवरी 2026 से पहले संपन्न कराना अनिवार्य है।
    इसी वजह से राज्य निर्वाचन आयोग पर समय पर चुनाव कराने का दबाव बढ़ गया है।

    इस चुनावी प्रक्रिया में शामिल होंगे —

    • 289 नगरपालिका परिषदें
    • 32 जिल्हा परिषदें
    • 331 पंचायत समितियाँ
    • 29 नगर निगम (Municipal Corporations)

    यह हाल के वर्षों में महाराष्ट्र का सबसे बड़ा नागरिक चुनाव होगा।

    ⚡ राजनीतिक दलों के लिए लिटमस टेस्ट

    बीएमसी चुनाव हमेशा से महाराष्ट्र की राजनीति का केंद्र रहे हैं।
    इस बार का नतीजा 2026 विधानसभा चुनावों की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
    राज्य के प्रमुख दल —
    भारतीय जनता पार्टी (BJP), शिवसेना (शिंदे गट), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गट), कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गट) — सभी इस चुनाव को अपनी साख से जोड़कर देख रहे हैं।

    बीएमसी पर फिलहाल प्रशासक का शासन है, और अब चुनावी बिगुल बजते ही मुंबई की सियासत में गर्मी तेज़ होना तय है।

    🕓 चुनाव कार्यक्रम का ऐलान आज शाम

    राज्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश वाघमारे आज शाम 4 बजे प्रेस से बातचीत करेंगे।
    सूत्रों के अनुसार, प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ही चुनावी अधिसूचना जारी की जाएगी और पूरे महाराष्ट्र में चुनावी माहौल बन जाएगा।


    FAQ सेक्शन

    प्रश्न 1: बीएमसी और महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव कब होंगे?
    👉 राज्य निर्वाचन आयोग आज शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में तारीख़ों का ऐलान करेगा।
    प्रश्न 2: कितने चरणों में होंगे चुनाव?
    👉 तीन चरणों में — नगरपालिका परिषद, पंचायत समितियाँ और बड़े नगर निगम (जैसे मुंबई, पुणे, नागपुर)।
    प्रश्न 3: क्या आज से आचार संहिता लागू होगी?
    👉 हाँ, घोषणा के तुरंत बाद आचार संहिता लागू होने की संभावना है।
    प्रश्न 4: कौन से शहर अंतिम चरण में रहेंगे?
    👉 मुंबई, पुणे, नागपुर, ठाणे और नासिक।
    प्रश्न 5: यह चुनाव क्यों महत्वपूर्ण है?
    👉 क्योंकि यह 2026 विधानसभा चुनावों से पहले सभी राजनीतिक दलों के लिए बड़ा टेस्ट साबित होगा।

  • गोरगांव में पानी की किल्लत पर उद्धव सेना का ‘बाल्टी मोर्चा’, नगर निगम को दी चेतावनी

    गोरगांव में पानी की किल्लत पर उद्धव सेना का ‘बाल्टी मोर्चा’, नगर निगम को दी चेतावनी

    गोरगांव पश्चिम में पानी की किल्लत से परेशान लोगों ने उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के साथ मिलकर ‘बाल्टी मोर्चा’ निकाला। मोर्चे में बड़ी संख्या में नागरिकों ने हिस्सा लिया और BMC को चेतावनी दी कि अगर पानी की समस्या हल नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा।

    मुंबई: गोरगांव (पश्चिम) में लगातार बढ़ती पानी की किल्लत को लेकर उद्धव ठाकरे गट की शिवसेना (UBT) ने रविवार को एक ज़ोरदार ‘बाल्टी मोर्चा’ निकाला। यह मोर्चा प्रभाग क्रमांक 52 में पानी की कमी के विरोध में संदीप गाढवे की अगुवाई में आयोजित किया गया। इस दौरान नागरिकों ने खाली बाल्टियां लेकर BMC के खिलाफ नारे लगाए और प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं मिला, तो आंदोलन और उग्र होगा।

    💧 ‘पानी आमचा हक्काचा, नाही कोणाच्या बापाचा’ — नारों से गूंजा इलाका

    मोर्चे में शामिल नागरिकों ने “पानी आमचा हक्काचा, नाही कोणाच्या बापाचा!” और “आमच्या मागण्या पूर्ण करा!” जैसे नारे लगाते हुए विरोध जताया।
    आंदोलन के दौरान दीपक परब नामक नागरिक ने BMC के गेट के सामने प्रतीकात्मक रूप से नहा कर प्रशासन पर तंज कसा।

    मोर्चा खत्म होने के बाद संदीप गाढवे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सहायक आयुक्त अजय पाटणे से मुलाकात की और इलाके में चल रही पानी की समस्या पर चर्चा की।

    🏘️ नागरिकों की मुख्य मांगें क्या हैं?

    1. बंगाली कंपाउंड इलाके में कम दबाव से आने वाले पानी की समस्या का तुरंत समाधान किया जाए।
    2. पानी छोड़ने का समय घटाने का निर्णय वापस लिया जाए और पुरानी टाइमिंग बहाल की जाए।
    3. कन्यापाड़ा इलाके में दलालों के ज़रिए नल कनेक्शन के लिए वसूली की जा रही है — उसकी जांच की जाए।
    4. इलाके के बिल्डरों को कैसे और कितना पानी दिया जा रहा है, इसकी गहराई से जांच हो।
    5. आरे कॉलोनी यूनिट 32 का पंप शुरू किया जाए ताकि यूनिट 31 और 32 के नागरिकों को राहत मिल सके।
    6. साईबाबा कॉम्प्लेक्स की साई सदन इमारत में चल रही पानी की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।

    👥 मोर्चे में किसने लिया हिस्सा?

    इस आंदोलन में कई स्थानीय नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए, जिनमें—
    पूर्व नगरसेविका सुगंधा शेट्टी, दीपक परब, निलाक्षी भाबळ, विनायक ताटे, स्वाती शिर्के, सचिन सावंत, सुभाष जाधव, विजय मांजळकर, कुबेर लाड, शांताराम सावंत, विरेंद्र सोनावने और वर्षा पवार समेत बड़ी संख्या में शिवसैनिक, युवासेना और महिला सेना की कार्यकर्ता मौजूद थीं।

    गोकुलधाम, बंगाली कंपाउंड, कन्यापाड़ा, साईबाबा कॉम्प्लेक्स, आरे कॉलोनी और बंजारी पाड़ा जैसे इलाकों के नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

    🏛️ शिवसेना (UBT) का संदेश प्रशासन को

    संदीप गाढवे ने मीडिया से बातचीत में बताया

    “अब BMC को भी समझना चाहिए कि पानी कोई मेहरबानी नहीं, बल्कि नागरिकों का हक है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो शिवसेना (UBT) सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेगी।”


    FAQ सेक्शन

    Q1. गोरगांव में उद्धव सेना का बाल्टी मोर्चा क्यों निकाला गया?
    👉 पानी की किल्लत और कम दबाव से पानी आने की समस्या के विरोध में यह मोर्चा आयोजित किया गया।

    Q2. इस आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
    👉 प्रभाग 52 के शाखा प्रमुख संदीप गाढवे ने आंदोलन का नेतृत्व किया।

    Q3. नागरिकों की मुख्य मांग क्या है?
    👉 नियमित और पर्याप्त पानी आपूर्ति शुरू करना और दलालों द्वारा नल कनेक्शन में की जा रही वसूली की जांच करना।

    Q4. प्रशासन से कौन मिला?
    👉 एक शिष्टमंडल ने सहायक आयुक्त अजय पाटणे से मुलाकात की और समस्या पर चर्चा की।