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  • महिला पुलिस अधिकारी से छेड़छाड़ बीजेपी नेता को पड़ा भारी, पुलिस ने किया एफआईआर दर्ज

    महिला पुलिस अधिकारी से छेड़छाड़ बीजेपी नेता को पड़ा भारी, पुलिस ने किया एफआईआर दर्ज

    पुणे शहर के एक बीजेपी नेता पर महिला पुलिस अधिकारी के साथ छेड़छाड़ के मेमले में मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच के चलते नेता को पार्टी से इस्तीफा देना पड़ा। चित्रा वाघ ने भी की कड़ी कार्रवाई की मांग.. BJP leader had to pay heavily for molesting a woman police officer, police filed an FIR

    डिजिटल डेस्क
    महाराष्ट्र:
    पुणे में एक महिला पुलिस अधिकारी से छेड़छाड़ करने के आरोप में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पुणे इकाई के एक पदाधिकारी के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज किया गया है। पुणे पुलिस ने इसकी जानकारी दी। आरोपी प्रमोद कोंधरे भाजपा की पुणे इकाई के महासचिव के पद पर हुआ करता था जब उसने अपराध को अंजाम दिया। हालांकि केस दर्ज होने के बाद प्रमोद कोंधरे के एक वरिष्ठ सहयोगी ने बताया कि कोंधरे ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। BJP leader had to pay heavily for molesting a woman police officer, police filed an FIR

    घिनौनी हरकत

    पुलिस ने बताया कि घटना सोमवार को शनिवार वाड़ा इलाके में एक चाय की दुकान के पास हुई थी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपी प्रमोद कोंधरे ने कथित रूप से महिला अधिकारी से दुर्व्यवहार किया और महिला अधिकारी का यौन उत्पीड़न करते हुए किसी को भी शर्म आ जाए ऐसी घिनौनी हरकत की। BJP leader had to pay heavily for molesting a woman police officer, police filed an FIR

    सीसीटीवी कैमरे में हुआ कैद

    अधिकारी ने बताया, सीसीटीवी कैमरे के फुटेज से कथित घटना का पता चला और महिला अधिकारी ने भी कोंधरे पर अनुचित कृत्य में शामिल होने का आरोप लगाया। हमने महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने और यौन उत्पीड़न से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 और 75 के तहत मामला दर्ज किया है। BJP leader had to pay heavily for molesting a woman police officer, police filed an FIR

    कड़ी कार्रवाई की मांग

    इस बीच, भाजपा के नगर अध्यक्ष धीरज घाटे ने कहा कि कोंधरे ने अपना इस्तीफा दे दिया है और पार्टी ने इसे स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा, पत्र में कोंधरे ने कहा कि उनके खिलाफ जांच पूरी होने तक उन्हें उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया जाना चाहिए। हमने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए भाजपा नेता और विधान परिषद सदस्य (MLC) चित्रा वाघ ने कोंधरे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। BJP leader had to pay heavily for molesting a woman police officer, police filed an FIR

  • गरीब न पढ़े अंग्रेजी ताकि आगे न बढे न सरकार गिरे

    गरीब न पढ़े अंग्रेजी ताकि आगे न बढे न सरकार गिरे

    • बीजेपी सरकार ने सौंप दिया शिक्षा को माफियाओं के हाथ
    • शिक्षा को व्यापार की तरह चलाया जा रहा माफियाओं के हाथों
    • पचास हजार के ऊपर सरकारी स्कूल बंद
    • हाईकोर्ट ने रद्द की शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियां
    • निःशुल्क शिक्षा देने के अपने दायित्व से भाग रही सरकारें
    • दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के शासन में बच्चों को दिया गया शिक्षा का अधिकार
    • सरकारों का लोकलुभावन नारा ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ ..
    • 18℅ की GST लगाकर सरकार ने किया आम आदमी के बच्चों को शिक्षा से वंचित
    • गृहमंत्री अमित शाह का अंग्रेजी न पढाने का बयान देश की तरक्की के लिए बाधक
    • उत्तर प्रदेश के 70 प्रतिशत इंजीनियर बेकार
    • देश में लाखों कॉलेज विश्वविद्यालय नेताओं या उनके रिश्तेदारों के…!
    • धर्म की सियासत चमकाने में व्यस्त बीजेपी सरकार
    • बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 60℅ सरकारी स्कूल बंद
    • पांच किलो मुफ्त राशन गर्म तवे पर पानी की बूंद जैसा
    • मुफ्त राशन प्रचार में राशन खर्च से अधिक विज्ञापन का खर्च
    • विज्ञापनों और कथित धर्म आस्था और हिंदुत्व के नाम पर टिकी बीजेपी सरकार
    • 95℅ जनता को गरीबी रेखा के नीचे रखने का षडयंत्र

    मुंबई: बीजेपी के कथित चाणक्य अमित शाह ने अंग्रेजी नहीं पढ़ने की वकालत की है। लेकिन सबसे पहले उन्हें अपने बेटे को जिसे बीसीसीआई का सेक्रेटरी दबाव में बनाया है, इससे कहें कि अंग्रेजी न बोले। इसके साथ ही अपनी सरकार के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को पार्टी से बाहर करें जो विदेश से पढ़कर आए हैं क्योंकि वहां अंग्रेजी ही पढ़ाई जाती है। साथ ही उन मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को भी जिनके बेटे, बेटियां विदेश में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे और जो वहां सेटल्ड हो चुके हैं।

    देश के सारे कॉन्वेंट स्कूल बंद कर दें। सीबीएससी जिसमें अंग्रेजी मीडियम से शिक्षा दी जाती है उसकी मान्यताएं खत्म कर दें। संसद में अंग्रेजी बोलने, सेक्रेटरियो द्वारा अंग्रेजी बोलने लिखने की मनाही कर दें। यहां तक कि संसद में अंग्रेजी बोलने वालों को बरखास्त कर दें। तब आम गरीब आदमी या देशवासियों से अंग्रेजी पढ़ने को मना करें।
    लेकिन अब कोई छात्र किस मीडियम में पढ़ेगा। किस भाषा में बात करेगा सरकार इस पर रोक कैसे लगा सकती है?

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    बीजेपी सरकार ने सौंप दिया शिक्षा को माफियाओं के हाथ

    एक तो वैसे ही बीजेपी सरकार ने शिक्षा को माफियाओं के हाथों में सौप दिया है, जिसे व्यापार की तरह चलाया जा रहा है। मनमानी फीस की वसूली की जा रही है। स्कूल बैग, जूता, मोजा और किताबें वह भी प्राइवेट स्कूलों की जिनका मूल्य चार सौ से कम नहीं है। उसमें भी कमीशन मिलता है। तमाम प्राइवेट स्कूलों में न लाइब्रेरी है, न कंप्यूटर हाल और ना ही साइंस लैब।

    फिर भी स्कूलों को दो चार लाख रुपए लेकर मान्यताएं दी जा रही है, जहां शिक्षा के नाम पर नील बटा सन्नाटा है। ट्यूशन पढ़ने के लिए बच्चों पर दबाव डाला जाता है। सरकार जिसका दायित्व है कि निःशुल्क शिक्षा देना।नहीं दे रही। तमाम सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। स्कूलों को मर्च किया जा रहा दूर के स्कूलों में।

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    हाईकोर्ट ने रद्द की शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियां

    शिक्षक आंदोलन रत हैं। बिजली कर्मचारी आंदोलन रत हैं, लेकिन बीजेपी सरकारें दो कार्य कर रही। अब तक पचास हजार से ऊपर तक के सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियां किए जाने पर हाईकोर्ट ने सारी नियुक्तियां रद्द कर दी हैं। वहीं शिक्षा निःशुल्क देने के अपने दायित्व से भाग रही सरकारें। प्राइवेट स्कूलों की सालाना फीस लाखों में रखी गई है।

    उसके अलावा हर वर्ष एडमिशन फीस और तमाम तरह की फीस की वसूली की जा रही है। यहां तक कि फीस जमा नहीं कर पाने वाले छात्रों को गेट से ही घर लौटाया जा रहा। केंद्र सरकार की नाक के नीचे दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल द्वारा तीन साल में हजारों रुपए बढ़ा दिए जाने और छात्रों के घर लौटाए जाने के कारण अभिभावकों को आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ा था।

    दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के शासन में बच्चों को दिया गया शिक्षा का अधिकार

    दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के शासन में बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिया गया। अगर पांच दस वर्ष जीवित रहते तो शिक्षा को समवर्ती सूची से निकालकर समूचे देश में एक ही शिक्षा पद्धति लागू कर देते। पाठ्यक्रम भी एक होते ताकि असमय स्थल परिवर्तन का बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। छः से चौदह वर्ष आयु तक शिक्षा का अधिकार देने के बाद उनकी योजना कॉलेज और विश्वविद्यालयों में भी निःशुल्क शिक्षा का अधिकार दे देते। लेकिन देश का दुर्भाग्य उनकी मृत्यु की साजिश रची गई।जिससे उनका शिक्षा को लेकर सारी योजना ही बंद हो गई।

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    सरकारों का लोकलुभावन नारा ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ ..

    अब तो सरकारें सारे के सारे सरकारी स्कूल बंद करने पर तुली हुई हैं। हमारी सरकारों ने नारे बड़े लोकलुभावन दिए थे, कि “पड़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया” लेकिन कार्य उसके ठीक विपरित किए जा रहे हैं। भारी भरकम फीस के कारण लाखों छात्र पांचवीं और आठवी कक्षा के बाद स्कूल छोड़ने के लिए बाध्य हो जाते हैं। प्राइवेट स्कूलों कॉलेजों में पढ़ा पाना देश के नब्बे प्रतिशत लोगों के बूते में नहीं है।

    18℅ की GST लगाकर सरकार ने किया आम आदमी के बच्चों को शिक्षा से वंचित

    शिक्षा पर 18% की जीएसटी लगाकर सरकार ने आम आदमी के बच्चों को शिक्षा से वंचित कर दिया है। कैसे पड़ेगा इंडिया और कैसे बढ़ेगा इंडिया?
    देश में एक भी कॉलेज और विश्वविद्यालय ऐसा नहीं है जो दुनिया के टॉप दो सौ विश्वविद्यालयों में स्थान पा सके। इसका कारण है शिक्षा मद में केंद्र सरकार द्वारा कटौती।

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    गृहमंत्री अमित शाह का अंग्रेजी न पढाने का बयान देश की तरक्की के लिए बाधक

    अंग्रेजी भाषा अंतरराष्ट्रीय भाषा है। अंग्रेजी पढ़े लिखे छात्रों को ही खुद अपने ही देश में प्राइवेट जॉब मिल पाता है। बिना अंग्रेजी के कहीं भी कोई पूछता तक नहीं है। विदेश जाने, उच्च शिक्षा प्राप्ति अथवा जॉब पाने के लिए अंग्रेजी टेस्ट अनिवार्य है। ज्ञान विज्ञान की समस्त पुस्तकें अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है। भारतीय भाषाओं में अनुवाद के लिए अरबों खरबों रूपये व्यय करने होंगे। बिना अंग्रेजी ज्ञान के कोई भी विदेश जाकर उच्च शिक्षा या नौकरी या व्यवसाय कर ही नहीं सकता। ऐसे में गृहमंत्री अमित शाह का अंग्रेजी नहीं पढ़ाने का बयान देश की तरक्की के लिए बाधक है।केंद्रीय मंत्री को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए।

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    निःशुल्क शिक्षा देने के अपने दायित्व से भाग रही सरकारें

    जबकि शिक्षा को व्यापार करने की छूट कदापि नहीं दी जानी चाहिए। सरकार का दायित्व है, कि सभी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करना। लेकिन सरकार अपने दायित्व पालन से भाग रही है। निःशुल्क शिक्षा प्रशिक्षण देकर प्रति परिवार एक रोजगार के संसाधन जुटाना सरकार का दायित्व है। जब नब्बे प्रतिशत बच्चे पढ़ेंगे नहीं तो आगे कैसे बढ़ेंगे। शिक्षा का स्तर इतना नीचे गिर चुका है कि उत्तर प्रदेश के सत्तर प्रतिशत इंजीनियर बेकार हैं। उन्हें ज्ञान ही नहीं है कि प्राइवेट शिक्षा संस्थान प्रैक्टिकल कहां करते हैं? बिना प्रेक्टिकल के ज्ञान कैसे आयेगा?

    देश में लाखों कॉलेज विश्वविद्यालय नेताओं या उनके रिश्तेदारों के हैं जिनका लक्ष्य दौलत अर्जित करना है। इसीलिए सरकार शिक्षा को माफियाओं के हाथों सौंप चुकी है। सरकार डरती है कि कहीं शिक्षा व्यवसाय पर नकेल कसी गई तो उसके लोग ही सरकार गिरा देंगे। सत्ता बचाने के लिए देश के एक सौ चालीस करोड़ लोगों के जीवन से खिलवाड़ करना सरकार को शोभा नहीं देता। शायद यही वजह है, कि सरकार को चुनाव जीतने के लिए धर्म, नफरत का सहारा लेना पड़ रहा है। अपने वादों को जो कभी पूरे ही नहीं किए सरकार ने, वोट मांगने की हिम्मत ही नहीं है। इसलिए धर्म की सियासत चमकाने का कार्य कर रही सरकार।

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    बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 60℅ सरकारी स्कूल बंद

    सिर्फ़ दो बीजेपी शासित राज्यों मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में ही 60% सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। दोनों राज्यों के दो करोड़ बच्चे चौथी या आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। महंगाई इतनी बढ़ गई है, कि पांच किलो मुफ्त राशन गर्म तवे पर पानी की भी बूंद जैसा नहीं है। माता पिता मेहनत करते हैं। महीने में आठ से दस दिन मजदूरी मिलती है शेष दिन फांका कटता है। परिवार का पेट भरे कि बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में महंगी शिक्षा लेने भेजें?

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    95℅ जनता को गरीबी रेखा के नीचे रखने का षडयंत्र

    दरअसल पांच किलो मुफ्त राशन का प्रचार करने में राशन खर्च से अधिक विज्ञापन खर्च आ जाता है। विज्ञापनों और कथित धर्म आस्था और हिंदुत्व के नाम पर टिकी बीजेपी सरकारें नहीं चाहती कि अस्सी करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ पाएं। ऊपर से अंग्रेजी नहीं पढ़ाने की वकालत? यह वकालत वे लोग करते हैं जो कभी अंग्रेजों की दलाली करते और गांधी के आंदोलन को कुचलने के लिए वायसराय को खत लिखा करते थे। आज उन्हीं की औलादें सत्ता में आई हैं, तो देश को निरक्षर रखने के तमाम उपाय करते रहते हैं। विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था चंद पूंजीपतियों की है जबकि सच तो यह है कि देश की 95% आबादी बीजेपी शासन में हैंड टू माउथ हो चुकी है।

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    विज्ञापनों और कथित धर्म आस्था और हिंदुत्व के नाम पर टिकी बीजेपी सरकार

    इतने टैक्स तो लुटेरे अंग्रेजों ने भी नहीं लगाए थे जितनी हिंदुत्ववादी सरकार टैक्स लगाकर 95% जनता को गरीबी रेखा के नीचे रखने का षडयंत्र करती है। गरीबी झेली है। गरीब मां का बेटा हूं। बर्तन माजती थी मां कहने वाले पीएम दिन में पांच ड्रेस वह भी लाखों के बदलते रहते हैं। नेहरू पर आरोप लगाने वाले सोचें कहां राजा भोज कहां गंगू तेली। नेहरू परिवार आजादी के पहले से ही संपन्न रहा था। उनकी बराबरी तो क्या पैरों की धूल बराबर आज कोई नेता नहीं। हर मोर्चे पर नाकाम सरकार केवल विज्ञापनों, व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के द्वारा ब्रेन वाश करके मूर्ख बनाती और धर्म आस्था के नाम पर वोट मांगती सरकार।

  • शिवसेना के डॉ. अभिषेक वर्मा ने योग दिवस पर लोगों से की अपील

    शिवसेना के डॉ. अभिषेक वर्मा ने योग दिवस पर लोगों से की अपील

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    शिवसेना शिंदे गुट के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अभिषेक वर्मा ने योग दिवस पर योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया और लोगों से इसे अपने जीवन में उतारने की अपील की। Shiv Sena’s Dr. Abhishek Verma appealed to the people on Yoga Day

    डिजिटल डेस्क
    नई दिल्ली:
    21 जून 2025 अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के राष्ट्रीय समन्वयक एवं चुनाव प्रभारी डॉ. अभिषेक वर्मा के तत्वावधान में नई दिल्ली स्थित उनके निजी आवास पर भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में 110 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें योग साधक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विशिष्ट अतिथि भी शामिल थे। Shiv Sena’s Dr. Abhishek Verma appealed to the people on Yoga Day

    योग का महत्व

    डॉ. वर्मा, श्रीमती अंका वर्मा, राजकुमारी निकोल वर्मा एवं युवराज आदितेश्वर वर्मा सहित वर्मा परिवार के सभी सदस्यों ने पारंपरिक सनातनी विधि से योग, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास किया। प्रतिष्ठित योगाचार्यों ने उपस्थितजनों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग की महत्ता बताई। Shiv Sena’s Dr. Abhishek Verma appealed to the people on Yoga Day

    योग की आवश्यकता

    अपने संबोधन में डॉ. अभिषेक वर्मा ने कहा, “योग भारत की सनातन परंपरा की वैज्ञानिक देन है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विश्व पटल पर स्थापित किया है। शिवसेना (NDA) के लोकप्रिय नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी योग को जन-जन तक पहुँचाने और इसे जनआंदोलन बनाने का कार्य कर रही है।” उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि “योग केवल एक दिन की क्रिया नहीं, बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना आज के युग की आवश्यकता है।” Shiv Sena’s Dr. Abhishek Verma appealed to the people on Yoga Day

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    श्रीमती अंका वर्मा ने कहा, “योग ने मुझे मातृत्व, व्यवसाय और अध्यात्म में संतुलन बनाना सिखाया—यह मेरे जीवन का आंतरिक मार्गदर्शक बन गया है।”

    राजकुमारी निकोल वर्मा ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “तेज़ और तनावपूर्ण जीवन में योग मुझे मानसिक शांति और स्थिरता देता है—यह मेरा आत्मबल है।”

    कार्यक्रम का समापन वैदिक मंत्रोच्चार, प्रसाद वितरण और योग को जीवन में अपनाने की प्रतिज्ञा के साथ हुआ। यह आयोजन राष्ट्रभक्ति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक जागरूकता का अद्भुत संगम साबित हुआ। Shiv Sena’s Dr. Abhishek Verma appealed to the people on Yoga Day

  • औरंगजेब को लेकर हिंदू मुस्लिम पर राजनीति, सरकार ने बढ़ाई मकबरे की सुरक्षा

    औरंगजेब को लेकर हिंदू मुस्लिम पर राजनीति, सरकार ने बढ़ाई मकबरे की सुरक्षा

    औरंगजेब के मकबरे को लेकर हिंदू मुस्लिम की राजनीति महाराष्ट्र में गरमा रही है। पक्ष विपक्ष के अलावा बजरंग दल और धर्मवीर संभाजी महाराज प्रतिष्ठान समाधि को नष्ट करने पर उतारू हो गये हैं। इसी बीच सरकार ने मकबरे की सुरक्षा बढ़ा दी है। (Politics on Hindu Muslim over Aurangzeb, Government increased the security of the tomb)

    महाराष्ट्र/औरंगाबाद: औरंगजेब को लेकर विवाद जारी है। इसको लेकर जमकर बयानबाजी भी की जा रही है। इस बीच, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के खुलताबाद स्थित औरंगजेब की मजार को लेकर राज्य में माहौल गरमा गया है। बजरंग दल ने इस मकबरे को हटाने की मांग की है। दूसरी ओर, धर्मवीर संभाजी महाराज प्रतिष्ठान के मिलिंद एकबोटे ने इस समाधि को नष्ट करने की चेतावनी दी है। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और भाजपा के बीच जंग छिड़ी हुई है। (Politics on Hindu Muslim over Aurangzeb, Government increased the security of the tomb)

    सरकार ने बढ़ाई सुरक्षा

    माहौल बिगड़ता देख अब महाराष्ट्र सरकार ने औरंगजेब की मजार पर सुरक्षा बढ़ा दी है। अब  मजार के आसपास एसआरपीएफ की एक टुकड़ी तैनात कर दी गई है। इसमें 15 पुलिस कर्मी होंगे। जिसमें दो पुलिस अधिकारी भी कब्र की सुरक्षा करेंगे। इसके साथ ही मिलिंद एकबोटे पर 5 अप्रैल तक छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) जिले में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। (Politics on Hindu Muslim over Aurangzeb, Government increased the security of the tomb)

    बजरंग दल का प्रदर्शन

    बजरंग दल ने कहा है कि औरंगजेब का मकबरा हमें हमारी गुलामी, लाचारी और उत्पीड़न की याद दिलाता है। महाराष्ट्र सरकार को जल्द से जल्द इस कब्र को खोद देना चाहिए। बजरंग दल ने चेतावनी दी है कि वह स्वाभिमानी हिंदू समुदाय के साथ सड़कों पर उतरेगा। बजरंग दल ने कहा है कि अगर औरंगजेब की कब्र नहीं हटाई गई तो उसी दिन पूरे महाराष्ट्र में सभी तहसीलदार और जिला कलेक्टरों के कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। (Politics on Hindu Muslim over Aurangzeb, Government increased the security of the tomb)

    NCP के विधायक ने क्या कहा?

    औरंगजेब के मजार को लेकर पूरे राज्य भर में राजनीति गरमा गई है और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार ने इस मुद्दे पर अलग रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, औरंगजेब यहां 27 साल तक शासन नहीं कर सका। औरंगजेब का मकबरा इसका प्रतीक है। अगर आज यह कब्र हटा दी गई तो भविष्य में लोग हंगामा करेंगे। इसलिए रोहित पवार ने राय व्यक्त की है कि प्रतीक के तौर पर उस कब्र को न छूना ही उचित होगा। (Politics on Hindu Muslim over Aurangzeb, Government increased the security of the tomb)

    Maharashtra Aurangabad news
    औरंगजेब के मकबरे के बाहर सुरक्षा की तस्वीर

    कांग्रेस का विरोध

    कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग करना छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरवशाली इतिहास को मिटाने का एक तरीका है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल को स्टंट नहीं करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि महाराष्ट्र में फडणवीस की सरकार औरंगजेब जैसी क्रूरता से काम कर रही है। गृह विभाग घासीराम कोतवाल की तरह चलाया जा रहा है। औरंगजेब का मकबरा वीरता का नहीं, बल्कि क्रूरता का मकबरा है। वह समाधि भी शिवाजी महाराज के गौरवशाली इतिहास का प्रमाण है। (Politics on Hindu Muslim over Aurangzeb, Government increased the security of the tomb)

    मुसलमानों को लुभाने का आरोप

    वहीं, भाजपा नेता अतुल भटखलकर ने कहा कि औरंगजेब की कब्र को सजाने की क्या जरूरत है? उन्होंने कहा कि विपक्ष औरंगजेब की कब्र पर जाकर फूल बरसाता है। औरंगजेब की कब्र को सजाकर मुसलमानों को लुभाने का काम किया जा रहा है। इसलिए मैं विरोधियों को सिर्फ यही चेतावनी दूंगा कि आपने इतने वर्षों तक छत्रपति शिवाजी महाराज का सच्चा इतिहास छिपाने का पाप किया है। अब हिंदू समाज जाग गया है। यदि अब से आप औरंगजेब की कब्र को बचाने की कोशिश करेंगे तो हिंदू समुदाय आपको माफ नहीं करेगा। (Politics on Hindu Muslim over Aurangzeb, Government increased the security of the tomb)

  • हलाल के जवाब में मल्हार मटन, होली से पहले शुरु हुई सियासी लड़ाई

    हलाल के जवाब में मल्हार मटन, होली से पहले शुरु हुई सियासी लड़ाई

    महाराष्ट्र से मल्हार सर्टिफिकेट की शुरुआत हुई है। क्या किसी प्रोडक्ट को धार्मिक आधार पर प्रमाण पत्र देना कानूनी है? क्या यह हलाल सर्टिफिकेट के जवाब में नया कारोबारी शुरू किया गया है। नितेश राणे की इस पहल पर सियासी रूख़ जानते हैं। (Malhar Mutton in response to Halal, political battle started before Holi)

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई में हलाल सर्टिफिकेशन के जवाब में मल्हार सर्टिफाइड यानी झटके वाली मीट की दुकानें खुल गई हैं। खासकर इसका ऐलान होली के त्योहार से पहले हुआ है। इस ऐलान के बाद से राजनैतिक गलियारों में हलचल देखने को मिल रही है। महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने इसका ऐलान किया। (Malhar Mutton in response to Halal, political battle started before Holi)

    सख्त हिंदू धार्मिक प्रथाओं का पालन

    मल्हार सार्टिफिकेशन की पहल महाराष्ट्र के मत्स्य पालन और बंदरगाह कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने की है। सर्टिफाइड दुकानों की लिस्ट भी वेबसाइट पर उपलब्ध है, जिसमें बताया गया है कि मल्हार सर्टिफाइड मटन खटीक समुदाय के वेंडर के पास ही उपलब्ध है। वेबसाइट में बताया गया है कि यह प्लेटफॉर्म उन मटन विक्रेताओं को बढ़ावा देता है जो बकरा या भेड़ को काटते के दौरान सख्त हिंदू धार्मिक प्रथाओं का पालन करते हैं। हलाल प्रोडक्ट में भी इस्लामी मान्यताओं का ख्याल रखने का दावा किया जाता है। राणे की इस पहल का एनसीपी नेता जितेंद्र आह्वाड ने आलोचना की है, जबकि शिंदे सेना और बीजेपी ने समर्थन किया है। वहीं समाजवादी पार्टी के नेता रईस शेख ने इसका स्वागत किया। (Malhar Mutton in response to Halal, political battle started before Holi)

    वैचारिक प्रतिस्पर्धा के तौर पर स्थापित करने की कोशिश

    आधिकारिक तौर से मल्हार सर्टिफिकेशन मटन यानी गोश्त का ही किया गया है, जबकि हलाल सर्टिफिकेशन में फूड प्रोडक्ट के अलावा कपड़ा, साबुन, चाय, तेल, शैंपू जैसे उत्पाद शामिल हैं। मल्हार वेबसाइट पर मौजूद दुकानों की संख्या भी गिनी चुनी है, मगर आने वाले कुछ वर्षों में यह सिस्टम गली-मुहल्लों में दिखने लगे तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। यह अभी हलाल के मुकाबले खड़ा नया ब्रांड है, जिसे यह खाने के तौर-तरीकों से अधिक वैचारिक प्रतिस्पर्धा के तौर पर स्थापित करने की कोशिश है। महाराष्ट्र में हलाल बनाम मल्हार के बिजनेस कॉम्पिटिशन और वैचारिक लड़ाई के लिए पर्याप्त स्पेस के तौर पर देखा जा रहा है। डिपार्टमेंट ऑफ एनिमल हस्बेंड्री के अनुसार, बंगाल के बाद महाराष्ट्र मटन खाने में दूसरे नंबर पर है, जहां 11 फीसदी उत्पादन होता है। (Malhar Mutton in response to Halal, political battle started before Holi)

    हलाल बनाम झटका मटन की बहस

    भारत में सालाना 640 मीट्रिक टन बकरे के गोश्त की खपत होती है। पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, तेलंगाना और तमिलनाडु बकरे के मांस के उत्पादन में 75 फीसदी योगदान करते हैं। अगर बकरे के साथ चिकन को भी शामिल कर दिया जाए तो नॉनवेज का मार्केट काफी बड़ा है। हिंदू संगठनों ने हलाल सर्टिफिकेशन को सुनियोजित साजिश करार दिया था। आरोप है कि हलाल का तमगा देने वाली कंपनियां और संगठन कारोबारी मुनाफे के लिए फर्जी प्रमाण पत्र बांट रहे हैं। राजनीतिक नजरिये से देखें तो इनमें से छह राज्यों में झटका बनाम हलाल पर बहस होती रही है। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना में ऐसा विवाद ज्यादा नजर नहीं आया है। हिंदू और सिख कम्यूनिटी के लोग झटका मांस की वकालत करते रहे हैं, मगर इसके लिए उनके पास हलाल सर्टिफिकेशन जैसा प्लेटफॉर्म नहीं था। (Malhar Mutton in response to Halal, political battle started before Holi)

    हलाल और मल्हार सर्टिफिकेट पर कानूनी विचार

    उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने हलाल सर्टिफिकेशन को गैरकानूनी घोषित कर चुकी है, क्योंकि कोई सरकारी एजेंसी इसके लिए प्रमाण पत्र जारी नहीं करती है। यूपी सरकार गैरकानूनी तौर से सर्टिफिकेट जारी करने के लिए हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड चेन्नई, जमीयत उलेमा हिंद हलाल ट्रस्ट दिल्ली, हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया मुंबई, जमीयत-उलेमा-ए-महाराष्ट्र के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर चुकी है। ऐसे में मल्हार सर्टिफिकेट की वैधता पर सवाल खड़े हैं। (Malhar Mutton in response to Halal, political battle started before Holi)

    क्या मल्हार सरकारी योजना है?

    मल्हार सर्टिफिकेशन को भी सरकारी वैधता प्राप्त नहीं है। शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने कहा कि अगर मल्हार सर्टिफिकेट देना सरकार की योजना है तो सीएम को उद्घाटन करना चाहिए था। सरकार बताए कि कंपनी किसकी है। बता दें कि जिस तरह हलाल वाले हरे मुहर को बेरोकटोक शॉपिंग मार्ट से लेकर फाइव स्टार सर्विस तक स्थापित किया गया, उससे मल्हार के लिए रास्ते खुल गए हैं। संभव है कि आने वाले समय में फूड डिलिवर करने वाले होटलों और कंपनियों को बताना पड़े कि मेन्यू में हलाल और मल्हार प्रोडक्ट क्या-क्या हैं? (Malhar Mutton in response to Halal, political battle started before Holi)

    राजनीतिक तौर से संरक्षण और मार्केटिंग हुई तो मल्हार सर्टिफिकेट देने वाली कंपनियां भी पैदा हो जाएंगी, जैसा हलाल प्रोडक्ट को लेकर हुआ है। भारत में करीब 12 कंपनियां हलाल सर्टिफिकेट देती हैं। बीजेपी नेता नीतेश राणे ने मल्हार वेबसाइट की शुरुआत करते हुए कहा कि यह हिंदू मांस विक्रेताओं को एक ही मंच पर लाने की कोशिश है। राजनीतिक नजरिये से देखें तो मल्हार को हलाल के मुकाबले के लिए लाया गया है, जिस पर प्रतिक्रिया आनी अभी और भी बाकी है। (Malhar Mutton in response to Halal, political battle started before Holi)