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  • नितेश राणे के करीबी दाऊद शेख ने छोड़ी भाजपा, सैकड़ों कार्यकर्ताओं संग मनसे में शामिल

    नितेश राणे के करीबी दाऊद शेख ने छोड़ी भाजपा, सैकड़ों कार्यकर्ताओं संग मनसे में शामिल

    मुंबई में भाजपा को झटका, नितेश राणे के करीबी दाऊद शेख सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ मनसे में शामिल हुए। जानिए उनकी राजनीतिक यात्रा और असर।

    मुंबई: मुंबई की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत भाजपा युवा मोर्चा के उत्तर-पश्चिम मुंबई उपनगर के पूर्व उपाध्यक्ष दाऊद शेख ने भाजपा छोड़कर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का दामन थाम लिया है। दाऊद शेख के साथ सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं के मनसे में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। यह प्रवेश अमित ठाकरे की मौजूदगी में हुआ।

    इस घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दाऊद शेख की राजनीतिक यात्रा लंबे समय तक राणे परिवार की राजनीतिक धारा से जुड़ी रही है। उनकी राजनीति की शुरुआत स्वाभिमान संगठन से हुई थी और वे शुरू से इस संगठन से जुड़े रहे।

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    कार्यक्रम के दौरान बाहर जमा कार्यकर्ताओं की तस्वीर

    स्वाभिमान संगठन से शुरू हुई दाऊद शेख की राजनीतिक यात्रा

    दाऊद शेख का राजनीतिक सफर सीधे भाजपा से शुरू नहीं हुआ था। वे पहले स्वाभिमान संगठन से जुड़े थे, जिसका नेतृत्व राणे परिवार की राजनीतिक धारा से जुड़ा रहा। बाद में जब स्वाभिमान संगठन का भाजपा में विलय हुआ, तब दाऊद शेख भी भाजपा में शामिल हुए।

    इसी राजनीतिक यात्रा के दौरान वे नारायण राणे और नितेश राणे के सान्निध्य में सक्रिय रहे। बाद में भाजपा संगठन में उनकी सक्रियता बढ़ी और उन्होंने भाजपा युवा मोर्चा में उत्तर-पश्चिम मुंबई उपनगर के स्तर पर जिम्मेदारी संभाली।

    यही कारण है कि दाऊद शेख का भाजपा छोड़कर मनसे में जाना केवल एक सामान्य दल-बदल की घटना नहीं माना जा रहा है। उनके लंबे राजनीतिक सफर और राणे परिवार से पुराने जुड़ाव के कारण इस फैसले ने मुंबई के राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है।

    भाजपा-मनसे के बढ़ते टकराव के बीच लिया फैसला

    दाऊद शेख का मनसे में प्रवेश ऐसे समय हुआ है जब भाजपा और मनसे के बीच राजनीतिक टकराव पहले से तेज है। पुणे के एक सरकारी कॉलेज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटाने के विवाद के बाद दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बयानबाजी तथा विरोध प्रदर्शन बढ़े थे।

    अमित ठाकरे के खिलाफ भाजपा युवा मोर्चा के आंदोलन को लेकर भी विवाद हुआ था। इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने युवा मोर्चा की आंदोलन शैली पर नाराजगी जताते हुए कार्यकर्ताओं को संयमित और सकारात्मक तरीके से काम करने की सलाह दी थी।

    इसके बाद मुंबई में भाजपा और मनसे के कार्यकर्ताओं के बीच तनावपूर्ण स्थिति भी सामने आई। ऐसे राजनीतिक माहौल के बीच दाऊद शेख का भाजपा से निकलकर अमित ठाकरे की मौजूदगी में मनसे में शामिल होना इस घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बनाता है।

    भाजपा छोड़ने की वजह पर अभी स्पष्ट बयान नहीं

    दाऊद शेख के मनसे में शामिल होने की खबर सामने आ चुकी है, लेकिन उन्होंने भाजपा छोड़ने का विस्तृत कारण क्या बताया है, इस बारे में उपलब्ध जानकारी में कोई स्पष्ट सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

    इसी तरह उनके साथ मनसे में शामिल हुए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की सटीक संख्या भी स्पष्ट नहीं की गई है। फिलहाल जानकारी सैकड़ों कार्यकर्ताओं के प्रवेश की है।

    भाजपा की ओर से दाऊद शेख के जाने और उनके साथ कार्यकर्ताओं के मनसे में शामिल होने पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। नितेश राणे की ओर से इस घटनाक्रम पर कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आती है तो यह इस राजनीतिक घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना सकती है।

    उत्तर-पश्चिम मुंबई में क्या पड़ सकता है असर?

    दाऊद शेख लंबे समय से उत्तर-पश्चिम मुंबई के राजनीतिक और संगठनात्मक क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में उनके साथ स्थानीय स्तर के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का मनसे में जाना संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    हालांकि, केवल इस प्रवेश के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि भाजपा के चुनावी आधार पर कोई बड़ा असर पड़ गया है। इसका वास्तविक राजनीतिक प्रभाव इस बात से तय होगा कि दाऊद शेख के साथ गए कार्यकर्ता मनसे के संगठन में कितनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं और उन्हें पार्टी में आगे क्या जिम्मेदारी दी जाती है।

    फिलहाल सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि स्वाभिमान संगठन से शुरू होकर राणे परिवार की राजनीतिक धारा और फिर भाजपा तक पहुंचे दाऊद शेख ने अब मनसे का रास्ता क्यों चुना। आने वाले दिनों में दाऊद शेख, भाजपा और मनसे की ओर से आने वाले बयानों से इस फैसले के पीछे की राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

  • Mumbai: कोंकण वासियों के लिए नई सौगात, होली से पहले चलेगी Ro-Ro Ferry

    Mumbai: कोंकण वासियों के लिए नई सौगात, होली से पहले चलेगी Ro-Ro Ferry

    मुंबई से विजयदुर्ग तक Ro-Ro फेरी सेवा 1 मार्च से शुरू। M2M Princess जहाज से 7 घंटे में सफर, गाड़ियों के साथ यात्रा की सुविधा। होली और समर सीजन से पहले बड़ा फैसला।

    मुंबई: कोंकण जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। महाराष्ट्र पोर्ट्स विभाग ने 1 मार्च से मुंबई-विजयदुर्ग Ro-Ro (Roll-on/Roll-off) फेरी सेवा शुरू करने का ऐलान किया है। यह सेवा होली और समर वेकेशन सीजन से ठीक पहले शुरू की जा रही है, जबकि इसी समय हजारों लोग मुंबई से सिंधुदुर्ग और कोंकण के अपने गांवों की ओर रुख करते हैं।

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    7 घंटे में पूरा होगा सफर, गाड़ियां भी साथ जाएंगी

    नई जल सेवा में हाई-स्पीड वेसल M2M Princess को तैनात किया जाएगा। यह जहाज दक्षिण एशिया की सबसे तेज़ पैसेंजर-कम-व्हीकल फेरी में से एक माना जाता है।

    यात्री अपनी दोपहिया और चारपहिया गाड़ियों के साथ मुंबई के भाऊचा धक्का (Ferry Wharf) से बोर्ड कर सकेंगे और सीधे विजयदुर्ग में उतर सकेंगे। सड़क मार्ग से जहां 10-12 घंटे लगते हैं, वहीं फेरी से यह सफर लगभग 7 घंटे में पूरा होगा।

    पहले सितंबर में होना था लॉन्च, क्यों टला था प्लान?

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    इस सेवा की घोषणा पहले राज्य के पोर्ट्स मंत्री नितेश राणे ने गणेशोत्सव से पहले 1 सितंबर को लॉन्च करने की बात कही थी। लेकिन कम एडवांस बुकिंग और पब्लिक रिस्पॉन्स कमजोर रहने के कारण इसे टाल दिया गया था।

    अब विभाग ने ऑपरेशनल मॉडल में बदलाव कर सही टाइमिंग के साथ दोबारा शुरुआत करने का फैसला लिया है।

    16 दिन का पायलट प्रोजेक्ट, 8-8 ट्रिप

    मार्च में 16 दिन का पायलट रन रखा गया है, जिसमें मुंबई और विजयदुर्ग से 8-8 ट्रिप होंगी। अधिकारियों के मुताबिक 140 से ज्यादा रेगुलेटरी क्लियरेंस हासिल किए जा चुके हैं।

    मंजूरी मुंबई पोर्ट अथॉरिटी, महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड और शिपिंग से जुड़े केंद्रीय विभागों से ली गई है।

    क्या सरकार देगी Viability Gap Funding?

    पायलट फेज के दौरान ईंधन खर्च महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड उठाएगा। इसके बाद राइडरशिप, रेवेन्यू और ऑपरेशनल लागत का आकलन किया जाएगा।

    अगर जरूरत पड़ी तो राज्य सरकार से Viability Gap Funding (VGF) मांगी जाएगी, ताकि सेवा लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे।

    कोंकण के लिए नया ट्रैफिक-फ्री विकल्प

    मुंबई-गोवा हाईवे पर अक्सर जाम और लंबा सफर लोगों को परेशान करता है। ऐसे में यह Ro-Ro फेरी सेवा ट्रैफिक-फ्री, तेज और आरामदायक विकल्प मानी जा रही है।

    पोर्ट्स मंत्री नितेश राणे खुद उद्घाटन यात्रा में मुंबई से विजयदुर्ग तक मौजूद रहेंगे।


    FAQ Section

    Q1. मुंबई-विजयदुर्ग Ro-Ro फेरी कब शुरू होगी?

    यह सेवा 1 मार्च से शुरू होगी।

    Q2. सफर में कितना समय लगेगा?

    करीब 7 घंटे में मुंबई से विजयदुर्ग पहुंचा जा सकेगा।

    Q3. क्या गाड़ियां साथ ले जा सकते हैं?

    हां, दोपहिया और चारपहिया वाहन फेरी में ले जाए जा सकते हैं।

    Q4. पहले यह सेवा क्यों टली थी?

    कम एडवांस बुकिंग और कमजोर पब्लिक रिस्पॉन्स के कारण सितंबर में लॉन्च टाल दिया गया था।

  • हलाल के जवाब में मल्हार मटन, होली से पहले शुरु हुई सियासी लड़ाई

    हलाल के जवाब में मल्हार मटन, होली से पहले शुरु हुई सियासी लड़ाई

    महाराष्ट्र से मल्हार सर्टिफिकेट की शुरुआत हुई है। क्या किसी प्रोडक्ट को धार्मिक आधार पर प्रमाण पत्र देना कानूनी है? क्या यह हलाल सर्टिफिकेट के जवाब में नया कारोबारी शुरू किया गया है। नितेश राणे की इस पहल पर सियासी रूख़ जानते हैं। (Malhar Mutton in response to Halal, political battle started before Holi)

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई में हलाल सर्टिफिकेशन के जवाब में मल्हार सर्टिफाइड यानी झटके वाली मीट की दुकानें खुल गई हैं। खासकर इसका ऐलान होली के त्योहार से पहले हुआ है। इस ऐलान के बाद से राजनैतिक गलियारों में हलचल देखने को मिल रही है। महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने इसका ऐलान किया। (Malhar Mutton in response to Halal, political battle started before Holi)

    सख्त हिंदू धार्मिक प्रथाओं का पालन

    मल्हार सार्टिफिकेशन की पहल महाराष्ट्र के मत्स्य पालन और बंदरगाह कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने की है। सर्टिफाइड दुकानों की लिस्ट भी वेबसाइट पर उपलब्ध है, जिसमें बताया गया है कि मल्हार सर्टिफाइड मटन खटीक समुदाय के वेंडर के पास ही उपलब्ध है। वेबसाइट में बताया गया है कि यह प्लेटफॉर्म उन मटन विक्रेताओं को बढ़ावा देता है जो बकरा या भेड़ को काटते के दौरान सख्त हिंदू धार्मिक प्रथाओं का पालन करते हैं। हलाल प्रोडक्ट में भी इस्लामी मान्यताओं का ख्याल रखने का दावा किया जाता है। राणे की इस पहल का एनसीपी नेता जितेंद्र आह्वाड ने आलोचना की है, जबकि शिंदे सेना और बीजेपी ने समर्थन किया है। वहीं समाजवादी पार्टी के नेता रईस शेख ने इसका स्वागत किया। (Malhar Mutton in response to Halal, political battle started before Holi)

    वैचारिक प्रतिस्पर्धा के तौर पर स्थापित करने की कोशिश

    आधिकारिक तौर से मल्हार सर्टिफिकेशन मटन यानी गोश्त का ही किया गया है, जबकि हलाल सर्टिफिकेशन में फूड प्रोडक्ट के अलावा कपड़ा, साबुन, चाय, तेल, शैंपू जैसे उत्पाद शामिल हैं। मल्हार वेबसाइट पर मौजूद दुकानों की संख्या भी गिनी चुनी है, मगर आने वाले कुछ वर्षों में यह सिस्टम गली-मुहल्लों में दिखने लगे तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। यह अभी हलाल के मुकाबले खड़ा नया ब्रांड है, जिसे यह खाने के तौर-तरीकों से अधिक वैचारिक प्रतिस्पर्धा के तौर पर स्थापित करने की कोशिश है। महाराष्ट्र में हलाल बनाम मल्हार के बिजनेस कॉम्पिटिशन और वैचारिक लड़ाई के लिए पर्याप्त स्पेस के तौर पर देखा जा रहा है। डिपार्टमेंट ऑफ एनिमल हस्बेंड्री के अनुसार, बंगाल के बाद महाराष्ट्र मटन खाने में दूसरे नंबर पर है, जहां 11 फीसदी उत्पादन होता है। (Malhar Mutton in response to Halal, political battle started before Holi)

    हलाल बनाम झटका मटन की बहस

    भारत में सालाना 640 मीट्रिक टन बकरे के गोश्त की खपत होती है। पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, तेलंगाना और तमिलनाडु बकरे के मांस के उत्पादन में 75 फीसदी योगदान करते हैं। अगर बकरे के साथ चिकन को भी शामिल कर दिया जाए तो नॉनवेज का मार्केट काफी बड़ा है। हिंदू संगठनों ने हलाल सर्टिफिकेशन को सुनियोजित साजिश करार दिया था। आरोप है कि हलाल का तमगा देने वाली कंपनियां और संगठन कारोबारी मुनाफे के लिए फर्जी प्रमाण पत्र बांट रहे हैं। राजनीतिक नजरिये से देखें तो इनमें से छह राज्यों में झटका बनाम हलाल पर बहस होती रही है। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना में ऐसा विवाद ज्यादा नजर नहीं आया है। हिंदू और सिख कम्यूनिटी के लोग झटका मांस की वकालत करते रहे हैं, मगर इसके लिए उनके पास हलाल सर्टिफिकेशन जैसा प्लेटफॉर्म नहीं था। (Malhar Mutton in response to Halal, political battle started before Holi)

    हलाल और मल्हार सर्टिफिकेट पर कानूनी विचार

    उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने हलाल सर्टिफिकेशन को गैरकानूनी घोषित कर चुकी है, क्योंकि कोई सरकारी एजेंसी इसके लिए प्रमाण पत्र जारी नहीं करती है। यूपी सरकार गैरकानूनी तौर से सर्टिफिकेट जारी करने के लिए हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड चेन्नई, जमीयत उलेमा हिंद हलाल ट्रस्ट दिल्ली, हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया मुंबई, जमीयत-उलेमा-ए-महाराष्ट्र के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर चुकी है। ऐसे में मल्हार सर्टिफिकेट की वैधता पर सवाल खड़े हैं। (Malhar Mutton in response to Halal, political battle started before Holi)

    क्या मल्हार सरकारी योजना है?

    मल्हार सर्टिफिकेशन को भी सरकारी वैधता प्राप्त नहीं है। शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने कहा कि अगर मल्हार सर्टिफिकेट देना सरकार की योजना है तो सीएम को उद्घाटन करना चाहिए था। सरकार बताए कि कंपनी किसकी है। बता दें कि जिस तरह हलाल वाले हरे मुहर को बेरोकटोक शॉपिंग मार्ट से लेकर फाइव स्टार सर्विस तक स्थापित किया गया, उससे मल्हार के लिए रास्ते खुल गए हैं। संभव है कि आने वाले समय में फूड डिलिवर करने वाले होटलों और कंपनियों को बताना पड़े कि मेन्यू में हलाल और मल्हार प्रोडक्ट क्या-क्या हैं? (Malhar Mutton in response to Halal, political battle started before Holi)

    राजनीतिक तौर से संरक्षण और मार्केटिंग हुई तो मल्हार सर्टिफिकेट देने वाली कंपनियां भी पैदा हो जाएंगी, जैसा हलाल प्रोडक्ट को लेकर हुआ है। भारत में करीब 12 कंपनियां हलाल सर्टिफिकेट देती हैं। बीजेपी नेता नीतेश राणे ने मल्हार वेबसाइट की शुरुआत करते हुए कहा कि यह हिंदू मांस विक्रेताओं को एक ही मंच पर लाने की कोशिश है। राजनीतिक नजरिये से देखें तो मल्हार को हलाल के मुकाबले के लिए लाया गया है, जिस पर प्रतिक्रिया आनी अभी और भी बाकी है। (Malhar Mutton in response to Halal, political battle started before Holi)