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  • मुंबई BMC Net Zero Plan: 2050 तक नगर भवन होंगे Net-Zero, Nair Hospital और R/Central Ward से होगी शुरुआत

    मुंबई BMC Net Zero Plan: 2050 तक नगर भवन होंगे Net-Zero, Nair Hospital और R/Central Ward से होगी शुरुआत

    मुंबई में BMC का बड़ा क्लाइमेट एक्शन प्लान – 2050 तक सभी म्युनिसिपल बिल्डिंग होंगी Net-Zero Energy और Net-Zero Carbon. Nair Hospital और R/Central Ward Office में पायलट प्रोजेक्ट शुरू, जानें पूरी डिटेल।

    मुंबई: Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) की इमारतों में बिजली खपत को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। ‘Net Zero Action Plan for Municipal Buildings of Mumbai and Panvel’ स्टडी के मुताबिक, मुंबई के म्युनिसिपल स्कूल, ऑफिस, अस्पताल और ऑडिटोरियम मिलकर BMC की कुल बिजली खपत का 14.7 प्रतिशत हिस्सा लेते हैं। वहीं C40 की आकलन रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम के अधिकार क्षेत्र वाली इमारतें कुल नगरपालिका बिजली खपत का 19 प्रतिशत उपयोग करती हैं।

    🔎 मुंबई क्लाइमेट वीक में हुआ ऐलान

    यह एक्शन प्लान राज्य सरकार ने Mumbai Climate Week के दौरान घोषित किया। इस योजना का मकसद 2050 तक सभी मौजूदा नगर निगम भवनों को Net-Zero Energy और नए भवनों को Net-Zero Carbon में बदलना है।

    इस रिपोर्ट को ग्लोबल क्लाइमेट नेटवर्क C40 ने तैयार किया है।

    ⚡ सबसे ज्यादा बिजली खाते हैं BMC अस्पताल

    रिपोर्ट के मुताबिक BMC की बिजली खपत का बंटवारा इस तरह है:

    • 🏥 म्युनिसिपल अस्पताल – 9.8%
    • 🏢 म्युनिसिपल ऑफिस – 3.8%
    • 🏫 म्युनिसिपल स्कूल – 1.2%
    • 🎭 ऑडिटोरियम – 1%

    यानी अस्पताल और ऑफिस सबसे ज्यादा बिजली खर्च कर रहे हैं, इसलिए पहले इन्हीं पर फोकस किया जाएगा।

    🏫 किन-किन इमारतों का हुआ एनर्जी ऑडिट?

    स्टडी के तहत कई प्रमुख भवनों में एनर्जी ऑडिट वॉकथ्रू किया गया:

    स्कूल

    • LK Waghji Mumbai Public School
    • Chhatrapati Shivaji Maharaj Nag. School No.1
    • Sodawala Municipal School

    अस्पताल

    • KEM Hospital
    • Nair Hospital

    वार्ड ऑफिस

    • R/Central Ward Office
    • H/West Ward Office

    ऑडिटोरियम

    • Kalidas Natyagriha
    • Prabodhankar Natyagriha

    🏗️ नए BMC भवनों के लिए 5 बड़ा फॉर्मूला

    नई म्युनिसिपल बिल्डिंग को Net-Zero Carbon बनाने के लिए रिपोर्ट में पांच अहम सुझाव दिए गए हैं:

    1. Passive Design (प्राकृतिक रोशनी और हवा का इस्तेमाल)
    2. Active Energy Efficient सिस्टम
    3. Low-Carbon Construction Material
    4. Renewable Energy Integration (Rooftop Solar)
    5. Clean Energy Procurement

    💡 पुराने भवनों में कम खर्च वाले उपाय

    BMC के बजट दबाव को देखते हुए रिपोर्ट ने लो-कॉस्ट एनर्जी सेविंग उपाय सुझाए हैं:

    • पारंपरिक लाइट की जगह LED
    • सामान्य पंखों की जगह BLDC Fans (30-40% कम बिजली खपत)
    • पुराने AC की जगह Energy Efficient AC
    • Green Cess Revenue का इस्तेमाल

    🔄 फेज़ वाइज पंखों की बदली

    • पहले चरण में 6–10 साल पुराने पंखे बदले जाएंगे
    • दूसरे चरण में 5 साल से कम पुराने पंखे

    💰 क्लाइमेट बजट में सोलर के लिए सिर्फ 0.1%

    रिपोर्ट बताती है कि BMC के कुल कैपिटल बजट का 32.18% हिस्सा क्लाइमेट संबंधित गतिविधियों में जाता है।
    लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ 0.1% (करीब 32.5 करोड़ रुपये) ही Rooftop Solar और LED रेट्रोफिट के लिए रखा गया है।

    🎯 2030 और 2040 के टारगेट

    2050 के अंतिम लक्ष्य से पहले चरणबद्ध योजना बनाई गई है:

    • 2030 तक: बेसलाइन ऑडिट और लो-कॉस्ट उपाय पूरे करना
    • 2040 तक: 50% भवनों को Rooftop Solar और एनर्जी एफिशिएंसी से Net-Zero की ओर लाना
    • 2050 तक: सभी पुराने भवन Net-Zero Energy, नए भवन Net-Zero Carbon

    🏥 Nair Hospital और BMC R/Central Ward में पायलट प्रोजेक्ट

    ऊर्जा खपत ज्यादा होने के कारण पायलट प्रोजेक्ट इन दो जगहों पर शुरू होगा:

    • Nair Hospital
    • R/Central Ward BMC Office

    प्रस्तावित बदलाव:

    • AC का तापमान नियंत्रण
    • पुराने पंखों की बदली
    • AC अपग्रेड
    • Rooftop Solar Installation

    ⏳ Payback Period

    • Nair Hospital: 2.5 से 5 साल
    • R/Central Ward Office: 6 से 10 साल

    📊 क्यों अहम है यह योजना?

    मुंबई जैसे महानगर में बढ़ते बिजली बिल, कार्बन उत्सर्जन और क्लाइमेट चेंज के खतरे को देखते हुए यह योजना शहर को ग्रीन और सस्टेनेबल बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

    अगर यह मॉडल सफल रहा तो इसे BMC की सभी इमारतों में लागू किया जाएगा।


    ❓ FAQ Section

    Q1: BMC की कितनी बिजली खपत म्युनिसिपल भवनों में होती है?

    करीब 14.7% बिजली खपत स्कूल, अस्पताल, ऑफिस और ऑडिटोरियम में होती है।

    Q2: सबसे ज्यादा बिजली कौन-सा विभाग खर्च करता है?

    म्युनिसिपल अस्पताल 9.8% बिजली खर्च करते हैं।

    Q3: Net-Zero Energy और Net-Zero Carbon में क्या फर्क है?

    Net-Zero Energy में जितनी ऊर्जा खपत होती है, उतनी ही रिन्यूएबल ऊर्जा से बनाई जाती है।
    Net-Zero Carbon में निर्माण से लेकर संचालन तक कार्बन उत्सर्जन शून्य के करीब लाया जाता है।

    Q4: पायलट प्रोजेक्ट कहाँ शुरू होगा?

    Nair Hospital और R/Central Ward Office में।

    Q5: क्या इससे बिजली बिल कम होगा?

    हाँ, LED, BLDC Fan और Solar Rooftop से बिजली बिल में भारी कमी संभव है।

  • BMC चुनाव 2025: आयुक्त गगराणी ने लोअर परळ और कांदिवली में प्रशिक्षण केंद्रों का लिया जायज़ा

    BMC चुनाव 2025: आयुक्त गगराणी ने लोअर परळ और कांदिवली में प्रशिक्षण केंद्रों का लिया जायज़ा

    BMC चुनाव 2025-26 की तैयारियों के तहत महानगरपालिका आयुक्त व जिला चुनाव अधिकारी भूषण गगराणी ने लोअर परळ और कांदिवली के चुनाव प्रशिक्षण केंद्रों का निरीक्षण किया। ईवीएम, मॉक पोल और मतदान प्रक्रिया की समीक्षा की गई।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2025-26 को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड में है। मतदान से पहले चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए महानगरपालिका आयुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री. भूषण गगराणी ने 30 दिसंबर 2025 को लोअर परळ और कांदिवली स्थित चुनाव प्रशिक्षण केंद्रों का दौरा किया। उन्होंने प्रशिक्षण सत्रों में शामिल होकर ईवीएम संचालन, मॉक पोल और मतदान के दिन अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं की बारीकी से समीक्षा की।

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    15 जनवरी को मतदान, तैयारियों में तेजी

    बीएमसी की सार्वत्रिक चुनाव प्रक्रिया के तहत गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को मतदान होना है। इसी को ध्यान में रखते हुए मतदान केंद्राध्यक्षों और मतदान अधिकारियों के प्रशिक्षण का पहला चरण शुरू कर दिया गया है।
    इस प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी तकनीकी या प्रशासनिक चूक के पूरी हो।

    मुंबई BMC के 7 प्रमुख केंद्रों पर चल रहा प्रशिक्षण

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    महानगरपालिका क्षेत्र में परिमंडलवार कुल 7 प्रमुख स्थानों पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं—

    • अण्णाभाऊ साठे सभागृह, भायखला
    • न. म. जोशी मार्ग महानगरपालिका स्कूल, लोअर परळ
    • लोकमान्य टिळक महानगरपालिका अस्पताल सभागृह, शीव पूर्व
    • बालगंधर्व सभागृह, बांद्रा पश्चिम
    • मास्टर दीनानाथ मंगेशकर नाट्यगृह, विले पार्ले
    • महाकवि कालिदास नाट्यगृह, मुलुंड पश्चिम
    • प्रबोधनकार केशव सीताराम ठाकरे नाट्यगृह, कांदिवली पश्चिम

    लोअर परळ और कांदिवली केंद्रों की विशेष समीक्षा

    आयुक्त भूषण गगराणी ने विशेष रूप से—

    • लोअर परळ के न. म. जोशी मार्ग महानगरपालिका स्कूल
    • कांदिवली पश्चिम स्थित प्रबोधनकार ठाकरे नाट्यगृह

    में चल रहे प्रशिक्षण सत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रशिक्षण में मौजूद अधिकारियों से सीधा संवाद किया और पूरी प्रक्रिया का विस्तार से फीडबैक लिया।

    ईवीएम, मॉक पोल और मतदान प्रक्रिया पर फोकस

    निरीक्षण के दौरान आयुक्त गगराणी ने—

    • इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM)
    • बैलेट यूनिट (BU) और कंट्रोल यूनिट (CU) की कनेक्टिविटी
    • मॉक पोल की नियमबद्ध प्रक्रिया
    • मतदान के दिन अपनाए जाने वाले सुरक्षा व प्रशासनिक नियम

    से जुड़ी जानकारी विस्तार से ली। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    चुनाव अधिकारियों की मौजूदगी

    इस मौके पर चुनाव विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जिनमें—

    • विशेष कार्य अधिकारी (चुनाव) विजय बालमवार
    • उप आयुक्त (परिमंडल 7) संजय कु-हाडे
    • उप आयुक्त (परिमंडल 2) प्रशांत सपकाळे
    • सहायक आयुक्त (जी दक्षिण) स्वप्नजा क्षीरसागर
    • सहायक आयुक्त (आर मध्य) प्रफुल तांबे

    शामिल रहे।

    क्यों अहम है यह प्रशिक्षण?

    बीएमसी चुनाव देश के सबसे बड़े और सबसे महंगे नगर निगम चुनावों में गिने जाते हैं।
    करीब 50 हजार से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी इस पूरी प्रक्रिया में शामिल होते हैं। ऐसे में प्रशिक्षण के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि—

    • मतदान बिना विवाद के हो
    • तकनीकी गड़बड़ी से बचा जाए
    • मतदाताओं का भरोसा बना रहे

    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. बीएमसी चुनाव 2025 का मतदान कब होगा?
    👉 15 जनवरी 2026 को मतदान होगा।

    Q2. प्रशिक्षण किन अधिकारियों के लिए है?
    👉 मतदान केंद्राध्यक्ष, मतदान अधिकारी और चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारी।

    Q3. ईवीएम से जुड़ा प्रशिक्षण क्यों जरूरी है?
    👉 ताकि मॉक पोल, मतदान और सीलिंग की प्रक्रिया बिना गलती के पूरी हो सके।

    Q4. कितने केंद्रों पर प्रशिक्षण चल रहा है?
    👉 मुंबई में कुल 7 अलग-अलग केंद्रों पर।

  • कांदीवली पश्चिम: मनपा अभियंता पंकज पाचर्ने पर चार मंजिला अवैध गाला निर्माण और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

    कांदीवली पश्चिम: मनपा अभियंता पंकज पाचर्ने पर चार मंजिला अवैध गाला निर्माण और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

    कांदीवली के शांति नगर में चार मंजिला अवैध गाला निर्माण की कहानी; आरोप है कि मनपा के भ्रष्ट कनिष्ठ अभियंता पंकज पाचर्ने निर्माण कराने वालों से वसूली करते हैं, शिकायत करने वालों को धमकाया जाता है। क्या वॉर्ड ऑफिसर आरती गोळेकर और डीएमसी संजय कुर्हाड़े इस पर कानूनी कार्रवाई करेंगे?

    मुंबई: शांति नगर, गली नंबर-2, कांदीवली (पश्चिम) मुंबई – 400067 में ग्राउंड प्लस तीन (चार मंजिला) बड़ा कॉमर्शियल गाला लगभग तैयार हो चुका है, जो स्थानीय लोगों और प्रशासनिक मानकों की चिंता का विषय बन गया है। आरोप है कि यह सभी निर्माण कार्य मनपा के इमारत व कारखाना विभाग के भ्रष्ट कनिष्ठ अभियंता पंकज पाचर्ने की विशेष कृपा से किया गया है। विभागीय कार्रवाई न होने के कारण शिकायतकर्ता और निवासियों में भारी नाराज़गी है।

    अवैध गाला निर्माण के आरोप

    स्थानीय लोगों का कहना है कि इस गाले का निर्माण शुरुआत से ही नियमों का उल्लंघन करते हुए हुआ है। भूमि स्वामित्व, नक्शे की मंजूरी, निर्माण परमिट — इन सभी की आधिकारिक ऑनलाइन-रिकॉर्ड या कागज़ी अनुमति नहीं मिली है या यदि मिली है, तो विकल्पों एवं प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है।

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    अवैध निर्माण की तस्वीर
    • निर्माण अनुमति और परमिट: स्थानीय निवासियों द्वारा आरोप लग रहे हैं कि इमारत का नक्शा और निर्माण परमिट मानसून, भू-परिमाण, इमारत सुरक्षा आदि नियमों के अनुरूप नहीं हैं।
    • एनओसी एवं विभागीय निगरानी: इमारत व कारखाना विभाग या अन्य संबंधित विभागों द्वारा कोई सार्वजनिक सूचना नहीं आई कि कार्रवाई होगी। शिकायतों पर मौखिक प्रतिक्रियाएँ तो मिलीं, लेकिन लिखित शिकायत का क्या हुआ, इसकी जानकारी नहीं है।

    भ्रष्टाचार के आरोप और वसूली की कथाएँ

    स्थानीयों और शिकायतकर्ताओं ने जो कहानी बयान की है, उसके मुताबिक:

    • विशेष कृपा — लोगों का आरोप है कि अभियंता पंकज पाचर्ने इन अवैध गाला ठेकेदारों को संरक्षण देते हैं, और इसके बदले में मनमानी रकम लेते हैं।
    • वसूली का तरीका: यदि कोई स्थानीय मौखिक रूप से शिकायत करता है, तो अभियंता लिखित शिकायत की सलाह देते हैं और फिर शिकायत दर्ज कराते समय शिकायतकर्ता का नाम-पता ठेकेदारों को दे दिया जाता है।
    • धमकियाँ और डर: शिकायतकर्ता कहते हैं कि नाम पता निकल जाने से उन्हें जान-माल का खतरा रहता है, जिससे लोग शिकायत करने से डरते हैं।
    • कार्रवाई नहीं: शिकायत की लिखित प्रति ठेकेदार को दिखा कर वसूली की जाती है, लेकिन विभागीय कार्रवाई नहीं होती, न तो मुआवज़ा होता है, न विधिक प्रक्रिया पूरी होती है।

    प्रभावित लोग और सामाजिक प्रतिक्रिया

    यहां के स्थानीय निवासी, दुकानदार और मिडिल-क्लास परिवार जिन्होंने इन इलाकों में invest किया है या किराये पर रहते हैं, वे प्रभावित हैं:

    • रिहायशी जीवन पर असर: भू-संवर्धन, सड़क रोक, धूल-गंदगी, संसाधनों की कमी जैसे समस्याएँ बढ़ी हैं।
    • भय और असुरक्षा: नाम-पता फँस जाने की आशंका लोगों को बाधित करती है कि वे खुलकर आवाज़ नहीं उठा सकें।
    • आलोचना सार्वजनिक स्तर पर: सामाजिक मीडिया, स्थानीय सभाएँ, मोहल्ले की मीटिंग्स हो रही हैं, जहाँ लोग विभाग और मनपा सहित जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब चाहते हैं।

    जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं?

    • पंकज पाचर्ने, इमारत व कारखाना विभाग, कनिष्ठ अभियंता, आर/दक्षिण वॉर्ड, कांदीवली (पश्चिम) — मुख्य आरोपों में आ रहा है कि उन्होंने यह अवैध गाला निर्माण अनुमति के बिना कराया है, संरक्षण दिया है और रकम वसूली की है।
    • वॉर्ड ऑफिसर आरती गोळेकर — क्या इन शिकायतों की जानकारी उन्हें है, और उन्होंने किन जांच निर्देश दिए हैं?
    • डीएमसी संजय कुर्हाड़े — मनपा के उच्च पदस्थ अधिकारी, जिनसे जवाबदेही की उम्मीद की जाती है कि वे इस मामले में आधिकारिक कार्रवाई initiate करें।

    कानूनी और प्रशासनिक स्थिति

    • विधि-विचार: अगर शिकायतकर्ता लिखित शिकायत कर दें, तो इसके आधार पर विभागीय जांच हो सकती है। लेकिन आरोप है कि शिकायत करते ही नाम पता सार्वजनिक हो जाता है।
    • आरोपों की जांच: निवासियों का कहना है कि कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई; मनपा ने कोई आधिकारिक नोटिस जारी नहीं किया; विभाग ने सार्वजनिक सूचना नहीं दी।
    • न्यायालय और अन्य संस्थाएँ: अगर मनपा या विभाग कार्रवाई नहीं करते हैं, तो निवासियों को कानूनी रास्ते अपनाने पड़ सकते हैं — RTI, प्रशासनिक याचिकाएँ, सार्वजनिक मामले (public interest litigation) आदि।

    क्या किया जाना चाहिए? सुझाव और अपेक्षित कार्रवाई

    • तत्काल विभागीय जांच: मनपा प्रशासन को चाहिए कि वे इस मामले की निष्पक्ष जांच करें, कनिष्ठ अभियंता पंकज पाचर्ने सहित सभी दोषियों का पता लगाएं।
    • नाम-पता की सुरक्षा: शिकायतकर्ताओं की पहचान गोपनीय रखी जानी चाहिए; धमकियों की शिकायत पर सुरक्षा सुनिश्चित हो।
    • परमिट एवं नक्शों का सार्वजनिक खुलापन: इमारतों के नक्शे, अनुमति दस्तावेज़ सार्वजनिक हों ताकि नागरिक देख सकें कि क्या नियमों का उल्लंघन हुआ है।
    • दंडात्मक कार्रवाई: यदि जांच में दोष सिद्ध होता है, तो अभियंता के खिलाफ विभागीय, पुलिस या एंटी-करप्शन ब्यूरो के तहत कार्रवाई हो; संभव हो तो अभियोजन हो।
    • स्थानीय निगरानी समिति: मोहल्ले के नागरिकों को शामिल कर एक निगरानी या शिकायत मंच बने जो समय-समय पर कार्रवाई रिपोर्ट मांगे।

    निष्कर्ष

    भ्रष्टाचार न सिर्फ व्यक्तिगत दोष है, बल्कि सामाजिक और विकासात्मक बाधा है। यदि मनपा विभाग ऐसे मामलों के खिलाफ सख्त कदम उठाए, तो लोग यह विश्वास कर पाएँगे कि अधिकार व्यवस्था उनकी सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करती है। कांदीवली के इस मामले में जवाबदेही की लकीर स्पष्ट होनी चाहिए — वरना स्थानीय लोगों के विश्वास की नींव हिल जाएगी।


    FAQ सेक्शन

    1. प्रश्न: क्या यह गाला कानूनी अनुमति के बिना बनाया गया है?
      उत्तर: शिकायतकर्ताओं का दावा है कि अनुमति और परमिट नियमों के अनुरूप नहीं है, किश्तों में वसूली हुई है, और विभागीय प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।
    2. प्रश्न: अभियंता पंकज पाचर्ने पर क्या ठोस साक्ष्य हैं?
      उत्तर: अब तक स्थानीय लोगों की शिकायतें, लिखित/मौखिक विवरण हैं; विभागीय रिकॉर्ड की जांच और दस्तावेज़ों की पुष्टि ज़रूरी है।
    3. प्रश्न: शिकायत करने वालों को डर क्यों लगता है?
      उत्तर: शिकायतकर्ता कहते हैं कि उनका नाम-पता ठेकेदारों को दे दिया जाता है, जिससे जान-माल का संकट हो सकता है, इसलिए लोग लिखित शिकायत नहीं करते हैं।
    4. प्रश्न: विभागीय कार्रवाई कब होगी?
      उत्तर: अभी तक कोई सार्वजनिक सूचना नहीं आई कि कार्रवाई चल रही है। यदि मनपा प्रशासन सचमुच जवाबदेह है, तो जल्द जांच शुरू होगी।
    5. प्रश्न: नागरिक क्या कर सकते हैं?
      उत्तर: लिखित शिकायत करें, RTI आवेदन करें; स्थानीय प्रशासन और मीडिया को जानकारी दें; यदि ज़रूरत हो तो न्यायालय में याचिका दाखिल करें।
  • सरकार को लोगों के खान-पान तय करने का अधिकार नहीं है। 15 अगस्त मांस प्रतिबंध पर देशभर में हंगामा

    सरकार को लोगों के खान-पान तय करने का अधिकार नहीं है। 15 अगस्त मांस प्रतिबंध पर देशभर में हंगामा

    महाराष्ट्र के साथ-साथ तेलंगाना के नगरपालिकाओं ने 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मांस की दुकानें और बूचड़खानों को बंद करने का निर्देश जारी किया है। इसको लेकर देशभर में विपक्षी नेता हंगामा कर रहे हैं। तेलंगाना हाईकोर्ट ने तो नगर पालिका प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है।

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    15 अगस्त को सरकार द्वारा मांस की दुकानों को बंद करने को लेकर जारी फैसले के खिलाफ देशभर में हंगामा हो रहा है। महाराष्ट्र में नागपुर, नासिक, मालेगांव, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) और कल्याण-डोंबिवली के साथ-साथ तेलंगाना के नगर पालिका अपने अधिकार क्षेत्र के बूचड़खानों और मांस की दुकानों को 15 अगस्त के दिन बंद रखने का निर्देश जारी किया है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी नेताओं के हंगामे के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार खुद आश्चर्य जता रहे हैं। राज ठाकरे ने तो यहां तक कह दिया, कि सरकार को लोगों के खान-पान तय करने का अधिकार नहीं है। हम देश की स्वतंत्रता का पर्व मना रहे हैं। The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    मनसे का विरोध

    गुरुवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने स्वतंत्रता दिवस पर राज्य में कुछ नगर पालिका द्वारा मांस की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों का खान-पान नहीं निर्धारित करना चाहिए। राज ने मुंबई में संवाददाताओं से कहा कि नगर पालिकाओं को इस तरह का प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है।

    स्वतंत्रता दिवस पर लगा प्रतिबंध

    उन्होंने कहा, “सरकार और महानगर पालिका को यह तय नहीं करना चाहिए कि किसको क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिये। एक तरफ हम स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं और हमें क्या खाना चाहिए, यह चुनने की कोई आजादी नहीं है। स्वतंत्रता दिवस पर किसी भी तरह का प्रतिबंध लगाना सरकार का आम जनता के खिलाफ एक विरोधाभास है।” The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    तेलंगाना हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

    इसके साथ ही महाराष्ट्र से सटे तेलंगाना राज्य के ओल्ड हैदराबाद सिटी की नगरपालिका ने भी 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस पर मीट की दुकानें और बूचड़खाने बंद रखने के आदेश जारी किया है। शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने इसपर नाराजगी जताते हुए कहा, कि “यह धर्म का मामला नहीं है और न ही यह राष्ट्रीय हित का मामला है।” The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    आल इंडिया मजलिसे इत्तेहादूल मुस्लिमिन (AIMIM) चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को ओल्ड हैदराबाद सिटी के आदेश को असंवैधानिक बताया। कहा कि गोश्त खाने से 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस का क्या लेना-देना है। इस फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र में हंगामे के बीच शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे और राज्य के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने फैसले को गलत बताया है। The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    ओवैसी ने क्या कहा?

    सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘गोश्त खाने और स्वतंत्रता दिवस में क्या रिश्ता है। तेलंगाना में 99 प्रतिशत लोग गोश्त खाते हैं। ओवैसी ने इस फैसले को लोगों की स्वतंत्रता, निजता, आजीविका, संस्कृति, पोषण और धर्म के अधिकारों का उल्लंघन करने वाला फैसला बताया है।’

    तेलंगाना हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

    तेलंगाना में यह मामला हाईकोर्ट तक जा पहुंचा है। तेलंगाना हाई कोर्ट ने ग्रेटर हैदराबाद महानगर पालिका (जीएचएमसी) से स्वतंत्रता दिवस पर मांस की दुकानों और बूचड़खानों को बंद रखने के उसके आदेश के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। तेलंगाना सरकार के इस आदेश के खिलाफ लगाई गई याचिका में कहा गया है कि यह आदेश मनमाना है। अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(जी) (किसी भी पेशे को अपनाने का अधिकार) का उल्लंघन करता है। हाईकोर्ट के जस्टिस विजयसेन रेड्डी इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं।

    महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

    महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा, “मैंने टीवी पर खबर देखी, श्रद्धा का प्रश्न होता है तो इस तरह बंदी लगाई जाती है। आषाढ़ी एकादशी, महावीर जयंती जैसे अवसरों पर यह निर्णय लिया जा सकता है। अगर हम कोकण में जाएं तो वहां हर सब्जी में सूखी मछली डालकर पकाया जाता है। ऐसी बिना कारण के खाने पीने की चीजों पर रोक लगाना ठीक नहीं है। अगर भावनात्मक मुद्दा हो तो उस समय के लिए बंदी लगाई जाए तो लोग समझ सकते हैं। लेकिन, 15 अगस्त को महाराष्ट्र में बंदी लगाना उचित नहीं है। मैं इस बारे में जानकारी लूंगा।

    खस्ताहाल सड़कों पर ध्यान दें।

    आदित्य ठाकरे ने मांस बिक्री बंदी के फैसले पर कहा, “ये हमारी च्वाइस है कि स्वतंत्रता दिवस पर हम क्या खाएं और क्या नहीं खाएं।कल्याण-डोंबिवली महापालिका कमिश्नर को इस मामले में दखल देने का अधिकार नहीं है। नागरिकों पर शाकाहार का फैसला थोपने के बजाय, खस्ताहाल सड़कों और बदहाल नागरिक सेवाओं को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।” The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

  • भ्रष्ट आचरण की पहचान है मनपा का आर/ दक्षिण विभाग…!

    भ्रष्ट आचरण की पहचान है मनपा का आर/ दक्षिण विभाग…!

    • कौन करेगा गलत कार्यों की जांच?
    • जल विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों ने दुकान मालिक पर मेहरबानी कर भ्रष्टाचार पूर्वक जोड़ा नल कनेक्शन।
    • क्या उच्चअधिकारी करेंगे पानी पुरवठा विभाग की गैर कानूनी जल जोड़नी की जाँच?

    मुंबई: भ्रष्टाचार का घुन मनपा को खाने लगा है। लापरवाह अफसर अपने कर्तव्य निर्वहन के स्थान पर गैरकानूनी तरीके से जल विभाग द्वारा नल कनेक्शन दिया जा रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग भी अछूता नहीं बचा, जिसने टी एंड कोल्ड्रिंक के नाम पर चल रहे शॉप को 394 का लाइसेंस देकर अपने भ्रष्टाचार का जीता जागता उदाहरण पेश कर दिया। जबकि टी की टपरी का स्टॉल फुटपाथ पर है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 394 का लाइसेंस किसकी अथॉरिटी पर दिया गया? मनपा आयुक्त या आर/ दक्षिण विभाग के डीएमसी या फिर MOH, वैद्यकीय आरोग्य अधिकारी की अथॉरिटी का इस्तेमाल हुआ है कुछ पता नही। R/South department of BMC is the identity of corrupt practices

    मनपा ने खोया अपना लक्ष्य

    यह सवाल आम जनता के बीच यक्ष प्रश्न की तरह मुहं बाये खड़ा है। जिस मनपा का गठन मुंबईकरों की सुविधा बढ़ाने के लिए लिए हुआ था। वहीं “असुविधा के लिए खेद है ” कि तर्ज पर मनपा अपना लक्ष्य खो चुकी है। एक ऐसा ही भ्रष्टाचार का मामला शॉप नियर आकांक्षा बिल्डिंग त्रिकम दास रोड पर 14 अगस्त 1993 में मालिक अब्दुल रहमान द्वारा 15/10 के झोपड़े को 90000 में सेवालाल रामलाल रामदेव मौर्या को रजिस्ट्री की गई। 1976 के सेंसस में भी 15गुने दस फीट दर्ज किया गया।

    कभी कुछ तो कहीं कुछ

    यहां जल विभाग द्वारा पानी के कनेक्शन की अनुमति 25/09/2017 को उसी पते पर दी गई है। इसकी जानकारी RTI के माध्यम से उजागर हुआ। जबकि उपर्युक्त व्यक्ति को बिजली का कनेक्शन नियर आकांक्षा आर्केड के पते पर दिया गया। जो आकांक्षा आर्केड सीएचएस वडा पाव त्रिकम दास रोड के पते का है। फर्जी तरीके से आकांक्षा सोसायटी द्वारा मौर्या फास्ट-फूड टी एंड कोल्ड्रिंक्स का प्रीमाइस में होने का पत्र बीएमसी आर/ दक्षिण वार्ड को 12/03/2018 को लिखित दिया गया। बीएमसी रोड ओपनिंग परमिशन 13/04/2018 को मौर्या फास्ट फूड को लेंथ ऑफ फ्रेंच 6.5 मीटर बताया गया है।

    लायसेंस विभाग की अनदेखी

    यह पत्र बीएमसी स्वास्थ्य विभाग द्वारा मौर्या टी एंड कोल्ड्रिंक को चाय बेचने का लाइसेंस 28/12/2017 को दो वर्षों के लिए दिया गया लेकिन शॉप आकांक्षा आर्केड का कैसे लिखा गया? जबकि शॉप आकांक्षा आर्केड बिल्डिंग से अलग है। गुमास्ता लाइसेंस मौर्या फास्ट फूड सेंटर के नाम पर वड़ा पाव दर्ज है। सवाल यह है कि एक ही व्यक्ति को वड़ा पाव का लाइट आकांक्षा आर्केड और एप्लिकेशन फॉर्म में नियर आकांक्षा आर्केड कैसे लिखा जा सकता है? वड़ा पाव का लाइट बिल आकांक्षा आर्केड बिल्डिंग का है तो 394 का लाइसेंस मौर्या टी एंड कोल्ड्रिंक शॉप को कैसे सहमति दी गयी?

    कैसे मिला NOC ?

    वहीं नेचर ऑफ बिजनेस में सिर्फ चाय की दुकान है तो वड़ा पाव कैसे बिक रहा है? जब सेंसस में 150 वर्गफुट है तो गुमास्ता में 120 फूट कैसे है? जबकि झोपड़े की रजिस्ट्री में 150 फिट है। फार्म p आकांक्षा आर्केड लिखा है तो B/F विभाग की NOC जो केवल चाल में लिया जाता है तो बिल्डिंग में कैसे NOC जारी किया गया? आकांक्षा बिल्डिंग सेक्रेटरी का पत्र बीएमसी आर/ दक्षिण को 12/03/2018 में लिखा। लेकिन बीएमसी रोड ओपनिंग परमिशन 6.5 मीटर फूट लेंथ ऑफ फ्रेंच बीएमसी स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिर्फ टी एंड कोल्ड्रिंक बेचने का लाइसेंस 28/12/2017 को दिया गया।

    एंटी करप्शन से जांच का अनुरोध

    यहां पर कागजात में घपलेबाजी की गई है। लेकिन शिकायत पत्र पर कोई जांच नहीं की गई क्यों?
    स्पष्ट है बीएमसी की मिलीभगत से भ्रष्टाचार किया गया है। ज्ञात हो कि बीएमसी ने चंद सिक्के घूस लेकर कॉमर्शियल वाटर कनेक्शन पास कर दिया जिसका संज्ञान बीएमसी नही ले रही। डीएमसी और वार्ड ऑफिसर की मिलीभगत से धोख़ाधड़ी की गई है। बीएमसी स्वास्थ विभाग के द्वारा 394 एवं जल विभाग द्वारा नल कनेक्शन की अनियमितताओं के भ्रष्टाचार की जांच एंटी curruption विभाग से किये जाने का अनुरोध है। R/South department of BMC is the identity of corrupt practices

  • नगरपालिका का समर कैंप 11 साल के बच्चे की मौत, ठेकेदार समेत 6 पर केस दर्ज

    नगरपालिका का समर कैंप 11 साल के बच्चे की मौत, ठेकेदार समेत 6 पर केस दर्ज

    Mumbai News: मुंबई के नजदीक महानगर पालिका के एक स्विमिंग पूल में 11 वर्षीय बच्चे की डूबने से मौत हो गई है। इसमे ठेकेदार समेत 6 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। बच्चा पूल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा था। लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। (11 year old child died in Nagarpalika’s summer camp, case filed against 6 including contractor)

    Mumbai News: समर कैम्प में स्विमिंग सीखने गए 11 साल के बच्चे की पूल में डूबने से मौत हो गई है. यह घटना रविवार 21 अप्रैल लगभग सवेरे 10:30 बजे की है। मृतक छात्र का नाम ग्रंथ मुथा बताया गया है। जिस स्विमिंग पूल में हादसा हुआ, वह मीरा भाईंदर महानगरपालिका (MBMC) का है। इस मामले में 6 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। नवघर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ठेकेदार समेत 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। (11 year old child died in Nagarpalika’s summer camp, case filed against 6 including contractor)

    किस पर करें भरोसा?

    नवघर पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी नारायण सुभाष नायक, हिंगोला सीमांचल नायक, प्रथमेश मोहन कदम, अर्जुन लक्ष्मण कदम, साहस चैरिटेबल ट्रस्ट के ठेकेदार और प्रबंधन वर्ग एवं अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज किया गया है। ग्रन्थ मुथा ने अपने दोस्त के साथ एक स्विमिंग पूल में तैराकी सीखने के लिए 15 दिन के समर कैंप में एडमिशन लिया था। उनकी सात दिन की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी थी। हालांकि, ग्रंथ दोपहर के बैच में स्विमिंग के लिए गया और डूब गया। (11 year old child died in Nagarpalika’s summer camp, case filed against 6 including contractor)

    इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि जब वह डूब रहा था, तब पूल में मौजूद किसी भी कोच या प्रबंधन को इस बात का पता नहीं चला। जब ग्रन्थ का शव पानी से बाहर आया तो उसे तुंगा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। (11 year old child died in Nagarpalika’s summer camp, case filed against 6 including contractor)

    पिता ने लगाया आरोप

    इस घटना के बाद ग्रंथ के पिता ने आरोप लगाया कि ठेकेदार और कैंप आयोजकों की लापरवाही के कारण उनके बेटे की जान चली गई। इस शिकायत के आधार पर नवघर पुलिस ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है इस दुर्घटना ने महानगर पालिका द्वारा प्रायोजित तैराकी केंद्र में सुरक्षा उपायों पर सवाल खड़े कर दिए है। (11 year old child died in Nagarpalika’s summer camp, case filed against 6 including contractor)

  • Mumbai BMC: मुंबईकरो पर एक और कचरा टैक्स लगाने की तैयारी

    Mumbai BMC: मुंबईकरो पर एक और कचरा टैक्स लगाने की तैयारी

    मुंबई अंतरराष्ट्रीय शहर होने के बावजूद स्वच्छता सर्वेक्षण में नवी मुंबई जैसे पास के दूसरे शहरों से पीछे रह रहा है। हर बार मनपा के सफाई का अस्तर गिरता जा रहा है। इसके बावजूद बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) मुंबईकरो पर एक और अतिरिक्त कचरा टैक्स का बोझ डालने की तैयारी कर रही है। वहीं भाजपा मुंबईकरों पर नया टैक्स लगाने का विरोध कर रही है। (Questions are being raised on the decision of the Municipal Corporation to impose garbage tax)

    इस्माईल शेख
    मुंबई– बृहन्मुंबई महानगर पालिका (Mumbai BMC)  द्वारा मुंबईकरों पर कचरा शुल्क के रूप में न्यूनतम 100 रूपए से लेकर 1 हजार रुपये तक का टैक्स वसूलने का निणर्य लिया है। मनपा लोगों से घरो के क्षेत्रफल के अनुसार कचरा टैक्स (Garbage tax) लेने के निणर्य पर विचार कर रही है। मनपा के इस निणर्य पर भाजपा की ओर से मनपा नेता (BMC Leader) रहे विनोद मिश्रा विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा, कि “मनपा लोगो को अच्छी तरह से साफ़ सफाई की सुविधा नहीं दे पा रही है। हर बार मनपा का सफाई का अस्तर गिरता जा रहा है। मुंबई अंतरराष्ट्रीय शहर होने के बावजूद स्वच्छता सर्वेक्षण में नवी मुंबई जैसे पास के दूसरे शहरों से पीछे रह रहा है।” इसी कड़ी में मनपा के निर्णय को लेकर शिवसेना नेता और पूर्व स्थाई समिति अध्यक्ष ने भी नाराजगी जताई है। (Questions are being raised on the decision of the Municipal Corporation to impose garbage tax)

    क्या है मामला?

    मिल रही जानकारी के मुताबिक, बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) कचरे का निपटारा करने में बढ़ते खर्च और मुंबई के लोगों को साफ़ सफाई की अच्छी सुविधा देने के नाम पर मुंबई के लोगो पर अतिरिक्त कचरा टैक्स लगाने का निणर्य लिया है। मनपा के इस निणर्य का भाजपा के नेताओं द्वारा विरोध किया जा रहा है। भाजपा नेताओं ने कहा है कि मुंबईकरो पर एक नया टैक्स लगाने का निणर्य कम से कम इस समय नही लिया जाना चाहिए। जबकि इस समय मनपा में निर्वाचित प्रतिनिधि है ही नही। शहर में चुनाव होने अभी बाकी है और चुनावी नतीजों के बाद ही मनपा प्रतिनिधि का चयन किया जाना है। जनप्रतिनिधि को सुनने के बाद ही मनपा को फैसला करना चाहिए। नही तो ये मुंबईकरो के खिलाफ होगा। (Questions are being raised on the decision of the Municipal Corporation to impose garbage tax)

    क्यों हो रहा है मनपा का विरोध?

    विनोद मिश्रा ने कहा, मनपा में आने वाले नए अधिकारी नया नया प्रयोग करते है। अधिकारी मनपा को अपनी पाठशाला बना लेते है। मुबंई का सफाई का स्तर दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा है। मनपा सिर्फ ठेकेदारों में बंध कर रह गई है। उन्होंने कचरा टैक्स लगाए जाने का विरोध करते हुए मनपा को कचरा विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार को दूर कर अपना पैसा बचाने पर जोर देना को कहा है। उन्होंने कहा, मुबंई की जनता पर टैक्स का नया बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। मनपा के पूर्व विरोधी नेता रहे भाजपा मुंबई उपाध्यक्ष रविराजा ने मनपा द्वारा कचरे पर टैक्स लगाए जाने के समय को लेकर विरोध जताया है। रविराजा ने कहा कि मनपा में कोई चुनी हुई सरकार नहीं है ऐसे में इस तरह का निणर्य लेना उचित नहीं होगा। (Questions are being raised on the decision of the Municipal Corporation to impose garbage tax)