Tag: Legal News

  • Bombay High Court का बड़ा आदेश: ₹23.89 करोड़ जमा करो वरना पानी बंद! Sahara Star Hotel केस में बड़ा ट्विस्ट

    Bombay High Court का बड़ा आदेश: ₹23.89 करोड़ जमा करो वरना पानी बंद! Sahara Star Hotel केस में बड़ा ट्विस्ट

    Bombay High Court ने Sahara Star Hotel को पानी सप्लाई बहाल करने के लिए ₹23.89 करोड़ जमा करने का आदेश दिया। BMC Property Tax Dispute में बड़ा खुलासा, जानिए पूरी खबर।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी एवं मायानगरी मुंबई शहर में एक हाई-प्रोफाइल कानूनी मामले ने सबका ध्यान खींच लिया है, जहां Bombay High Court ने Sahara Star Hotel को बड़ा झटका देते हुए साफ कहा है कि अगर पानी सप्लाई चाहिए तो पहले ₹23.89 करोड़ जमा करने होंगे। यह मामला BMC और Sahara Hospitality Limited के बीच Property Tax Dispute को लेकर चल रहा है, जिसमें कोर्ट ने अहम अंतरिम राहत भी दी है।

    ⚖️ Court का सख्त रुख: पहले पैसे जमा करो, फिर मिलेगा पानी

    Bombay High Court की डिवीजन बेंच, जिसमें Chief Justice Shree Chandrashekar और Justice Aarti Sathe शामिल थे, ने अपने आदेश में कहा कि कंपनी को 4 हफ्तों के अंदर ₹23,89,31,590 जमा करने होंगे।

    कोर्ट ने साफ कहा:
    👉 “Undertaking फाइल करते ही पानी सप्लाई तुरंत बहाल की जाए”

    सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ने undertaking जमा कर दी है, जिसके बाद होटल की water supply बहाल भी कर दी गई है।

    🏨 Sahara Star Hotel: मुंबई के प्राइम लोकेशन पर स्थित लग्जरी प्रॉपर्टी

    Bombay-High-Court-issues-major-order-Deposit-23-89-crore-cut-water-supply-Sahara-Star-Hotel-case

    Sahara Star Hotel
    मुंबई एयरपोर्ट के पास स्थित यह 5-star होटल Sahara Group की flagship property मानी जाती है। यहां बड़ी-बड़ी corporate events, celebrity functions और international guests का आना-जाना लगा रहता है।

    🧾 क्या है पूरा Property Tax Dispute मामला?

    यह पूरा विवाद BMC द्वारा किए गए Property Tax Reassessment से जुड़ा हुआ है। Sahara Hospitality Limited का आरोप है कि:

    • 2026 में retrospective reassessment किया गया
    • एक property को कई हिस्सों में बांटकर tax लगाया गया
    • 2019 से पुराने dues को जोड़कर भारी रकम मांगी गई

    👉 कंपनी का दावा है कि:

    • ₹69.19 करोड़ का demand notice
    • ₹181.96 करोड़ तक की attachment notices (penalties सहित)

    बिना proper hearing के जारी किए गए।

    🏛️ BMC का पक्ष: Illegal Construction और Inspection का हवाला

    Brihanmumbai Municipal Corporation
    BMC ने कोर्ट में कहा कि:

    • यह reassessment inspection के बाद किया गया
    • होटल परिसर में unauthorized construction मिला
    • Special Notice जारी किया गया था, लेकिन कंपनी ने जवाब नहीं दिया

    इस आधार पर BMC ने tax demand को सही ठहराया।

    👨‍⚖️ Petitioner का तर्क: ‘Civil Death’ जैसी स्थिति बन गई थी

    Senior Advocate Chetan Kapadia ने Sahara की तरफ से दलील दी कि:

    • पानी काटना कंपनी के लिए “civil death” जैसा है
    • 2001 से जुड़े arrears पहली बार 2026 में मांगे गए
    • इससे business operations पूरी तरह ठप हो गए

    📑 Court ने दिए ये बड़े Interim Relief

    कोर्ट ने Sahara को राहत देते हुए:

    • 5 demand notices पर stay लगाया
    • Attachment orders को भी रोका

    📅 जिन dates के notices पर रोक लगी:

    • 1 January
    • 12 February
    • 16 February
    • 23 February (दो notices)

    📂 Case Details (पूरा कानूनी रिकॉर्ड)

    • Case Title: Sahara Hospitality Limited vs Municipal Corporation of Greater Mumbai
    • Case Number: Writ Petition (L) No. 11536 of 2026

    👨‍💼 Appearance:

    • Petitioner: Chetan Kapadia, Pooja Jain
    • State: Mohit Jadhav
    • BMC: Pralhad Paranjpe, Oorja Dhond, Komal Punjabi

    🔍 अब आगे क्या होगा?

    कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 6 हफ्तों बाद तय की है। तब तक:

    • Sahara को ₹23.89 Cr जमा करना होगा
    • BMC कोई coercive action नहीं ले सकेगी

    यह केस आने वाले समय में Mumbai Property Tax System पर बड़ा असर डाल सकता है।

    🔗 Related Useful Links:


    FAQ Section

    ❓ Sahara Star Hotel का पानी क्यों काटा गया था?

    👉 BMC ने property tax dues के चलते water supply काट दी थी।

    ❓ कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

    👉 ₹23.89 करोड़ जमा करने के बाद पानी सप्लाई बहाल करने का आदेश दिया।

    ❓ क्या कंपनी को कोई राहत मिली?

    👉 हां, 5 demand notices और attachment orders पर stay मिला है।

    ❓ कुल विवादित राशि कितनी है?

    👉 करीब ₹69.19 करोड़ (demand) और ₹181.96 करोड़ (attachment notices)।

    ❓ अगली सुनवाई कब है?

    👉 लगभग 6 हफ्तों बाद।

  • Redevelopment Case में Builder को झटका: अधूरी बिल्डिंग पर Refund नहीं मिलेगा – Bombay HC

    Redevelopment Case में Builder को झटका: अधूरी बिल्डिंग पर Refund नहीं मिलेगा – Bombay HC

    Bombay High Court ने बड़ा फैसला देते हुए कहा कि अधूरी Redevelopment Project पर Builder Refund नहीं मांग सकता। Transit Rent भी वापस नहीं मिलेगा। जानिए पूरा केस।

    मुंबई: शहर में चल रहे Redevelopment Projects के लिए एक बड़ा और अहम फैसला सामने आया है। Bombay High Court ने साफ कर दिया है कि अगर कोई Builder अधूरी बिल्डिंग बनाकर प्रोजेक्ट छोड़ देता है या Agreement रद्द हो जाता है, तो वह अपने खर्च का Refund नहीं मांग सकता। यह फैसला शहर की कई हाउसिंग सोसायटी और डेवलपर्स के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है।

    ⚖️ क्या है पूरा मामला?

    यह मामला गोरेगांव की Goregaon Pearl Cooperative Housing Society से जुड़ा है।

    • सोसायटी ने 2007 में SSD Escatics Pvt Ltd को Redevelopment का काम दिया
    • प्रोजेक्ट में 3 विंग का पुनर्विकास होना था
    • देरी के चलते दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया

    बाद में समझौते के तहत Builder को 30 अक्टूबर 2018 तक प्रोजेक्ट पूरा करना था, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया।

    Agreement क्यों हुआ Terminate?

    सोसायटी ने 3 जून 2018 को:

    • Development Agreement रद्द कर दिया
    • Builder पर Terms & Conditions तोड़ने का आरोप लगाया

    मामला Arbitration में गया, जहां Arbitrator ने:

    • सोसायटी के पक्ष में फैसला दिया
    • Builder को ₹7.17 करोड़ देने का आदेश दिया

    इसके बाद Builder हाई कोर्ट पहुंचा।

    🧑‍⚖️ High Court ने क्या कहा?

    जस्टिस Sandeep Marne ने साफ कहा:

    • Builder ने Timeline और Agreement का उल्लंघन किया
    • Project समय पर पूरा नहीं किया
    • इसलिए Agreement Termination सही है

    कोर्ट ने Arbitrator के फैसले को बरकरार रखा।

    💸 ₹18.09 करोड़ Refund की मांग खारिज

    Builder ने दावा किया था कि:

    • उसने ₹18.09 करोड़ खर्च किए
    • एक बिल्डिंग 21 फ्लोर तक और दूसरी 7 फ्लोर तक बनाई

    लेकिन कोर्ट ने कहा:

    • अधूरी Structure सोसायटी के किसी काम की नहीं
    • इसे “Benefit” नहीं माना जा सकता

    इसलिए Refund का दावा पूरी तरह खारिज कर दिया गया।

    📜 Contract Act की Section 64 पर कोर्ट की टिप्पणी

    Builder ने Indian Contract Act का हवाला दिया था

    कोर्ट ने कहा:

    • Benefit तभी माना जाएगा जब वह पूरी तरह usable हो
    • अधूरी बिल्डिंग को Benefit नहीं माना जा सकता

    🏠 Transit Rent भी वापस नहीं मिलेगा

    Builder ने ₹20.43 करोड़ का भी Refund मांगा, जिसमें शामिल था:

    • Transit Rent
    • Corpus Fund
    • Brokerage

    लेकिन कोर्ट ने कहा:

    • Transit Rent सोसायटी के लोगों के अस्थायी रहने के लिए दिया जाता है
    • इसे “Unjust Enrichment” नहीं माना जा सकता

    👉 इसलिए यह पैसा भी वापस नहीं मिलेगा।

    ⚠️ Court की सख्त टिप्पणी

    कोर्ट ने साफ कहा:

    👉 “अगर Builder की गलती से Agreement खत्म हुआ और फिर उसे Refund दे दिया जाए, तो यह उसकी गलती का इनाम होगा।”

    👉 इससे पहले से परेशान सोसायटी के लोगों पर और बोझ पड़ेगा।

    🏙️ Mumbai Redevelopment Projects पर असर

    इस फैसले के बाद:

    • Builders पर समय पर काम पूरा करने का दबाव बढ़ेगा
    • Housing Societies को ज्यादा अधिकार मिलेंगे
    • Redevelopment Disputes में यह Judgment मिसाल बनेगा

    🔗 Related Government / Official Website Links:


    FAQ Section

    Q1. कोर्ट ने Builder को Refund क्यों नहीं दिया?
    👉 क्योंकि बिल्डिंग अधूरी थी और सोसायटी के उपयोग में नहीं आ सकती थी।

    Q2. क्या Transit Rent वापस मिल सकता है?
    👉 नहीं, कोर्ट ने साफ कहा कि यह Refundable नहीं है।

    Q3. यह मामला किस सोसायटी से जुड़ा है?
    👉 Goregaon Pearl CHS, मुंबई।

    Q4. Builder ने कितना Refund मांगा था?
    👉 ₹18.09 करोड़ + ₹20.43 करोड़।

    Q5. इस फैसले का असर क्या होगा?
    👉 Builders पर दबाव बढ़ेगा और Societies को मजबूत अधिकार मिलेंगे।

  • मुंबई के वकील ने NHRC से की शिकायत, कहा– “खतरनाक पटाखे बन गए ज़हर”

    मुंबई के वकील ने NHRC से की शिकायत, कहा– “खतरनाक पटाखे बन गए ज़हर”

    मुंबई के वकील हितेंद्र गांधी ने मानवाधिकार आयोग (NHRC) से मांग की है कि कार्बाइड आधारित खतरनाक पटाखों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि ये पटाखे लोगों की सेहत, पर्यावरण और जानवरों के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं।

    मुंबई: जाने-माने वकील हितेंद्र गांधी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को एक याचिका दाखिल की है जिसमें उन्होंने कार्बाइड बेस्ड (Carbide-Based) खतरनाक पटाखों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
    उनका कहना है कि ये पटाखे न सिर्फ लोगों की सेहत और पर्यावरण के लिए खतरनाक हैं, बल्कि जानवरों और बच्चों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन चुके हैं।

    गांधी ने NHRC से आग्रह किया है कि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय अध्ययन कराया जाए, सार्वजनिक एडवाइजरी जारी की जाए, और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कड़े कदम उठाए जाएं — ताकि दिवाली की धार्मिक भावना बनी रहे, पर सेहत और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

    🌫️ दिवाली के बाद बढ़ता प्रदूषण, बिगड़ती हवा की गुणवत्ता

    वकील की याचिका में कहा गया है कि सरकारी मॉनिटरिंग स्टेशन और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) हर साल दिवाली के बाद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक तत्वों में तेज़ उछाल दिखाते हैं।
    कई शहरों में दिवाली की रातों के बाद हवा की स्थिति “Very Poor” से “Severe” कैटेगरी तक पहुंच जाती है।

    हालांकि ग्रीन क्रैकर्स को लागू करने की सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पहले से मौजूद है, लेकिन वकील का कहना है कि अभी भी गैर-प्रमाणित और जहरीले पटाखे खुलेआम बिक रहे हैं

    🚫 “ग्रीन पटाखे” के बावजूद नहीं थमा जहरीले धुएं का असर

    हितेंद्र गांधी का कहना है कि “ग्रीन पटाखे” के नियमों के बावजूद गैर-लाइसेंसशुदा फायरवर्क्स और कार्बाइड बेस्ड पटाखों की बिक्री जारी है।
    इनसे निकलने वाला धुआं न सिर्फ इंसानों के लिए सांस संबंधी खतरे पैदा करता है बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और जानवरों पर भी सीधा असर डालता है।

    🐶 जानवरों पर भी गहरा असर

    याचिका में बताया गया है कि पशु कल्याण संस्थाएं और वेटरनरी क्लीनिक दिवाली के बाद घायल और डरे हुए जानवरों की संख्या में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज करते हैं।
    कई शहरों में सैकड़ों पालतू और आवारा जानवर धमाकों और धुएं के कारण घायल या भाग जाते हैं।
    यह स्थिति हर साल मानवता और करुणा की भावना को ठेस पहुंचाती है।

    💣 कार्बाइड गन — नया खतरा बनते “घरेलू बम”

    हितेंद्र गांधी ने अपनी याचिका में “कार्बाइड गन” या घरेलू विस्फोटक उपकरणों की भी चर्चा की है।
    इन गैरकानूनी और असुरक्षित पटाखों के कारण भोपाल से बेंगलुरु तक 130 से ज्यादा लोग, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

    इन “कार्बाइड गनों” के वीडियो सोशल मीडिया पर आसानी से मिल जाते हैं और कोई भी इन्हें घर पर बना सकता है।
    यह चलन अब सार्वजनिक सुरक्षा संकट (Public Safety Crisis) बन चुका है।

    ⚖️ “मानवाधिकार का उल्लंघन” – याचिका में गंभीर आरोप

    वकील ने कहा,

    “ये घटनाएं सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का सीधा हनन हैं — खासकर जीवन, स्वास्थ्य और गरिमा के अधिकार का।”

    उन्होंने आयोग से अपील की है कि NHRC सरकार को सिफारिश करे कि

    • कार्बाइड आधारित पटाखों पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लगाया जाए,
    • Explosives Act और अन्य नियमों को सख्ती से लागू किया जाए,
    • और इस मामले पर जागरूकता अभियान चलाया जाए ताकि उत्सव का असली प्रकाश जीवन और करुणा के साथ जुड़ा रहे।

    ❓FAQs

    Q1. किसने NHRC में याचिका दाखिल की है?
    मुंबई के वकील हितेंद्र गांधी ने यह याचिका दाखिल की है।

    Q2. याचिका में क्या मांग की गई है?
    कार्बाइड आधारित पटाखों पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध, और सुरक्षा नियमों की सख्त पालना की मांग की गई है।

    Q3. क्या “ग्रीन क्रैकर्स” से प्रदूषण कम हुआ है?
    नहीं, वकील का कहना है कि ग्रीन क्रैकर्स के बावजूद प्रदूषण स्तर में सुधार नहीं आया।

    Q4. जानवरों पर क्या असर पड़ता है?
    तेज धमाकों और धुएं से जानवर डर जाते हैं, कई घायल या भाग जाते हैं।

    Q5. “कार्बाइड गन” क्या है?
    यह एक असुरक्षित घरेलू विस्फोटक उपकरण है जो दिवाली में धमाके के लिए बनाया जाता है, और इससे कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।

  • Bombay High Court ने Shilpa Shetty और Raj Kundra की Phuket जाने की अर्जी ठुकराई, LOC रहेगा लागू

    Bombay High Court ने Shilpa Shetty और Raj Kundra की Phuket जाने की अर्जी ठुकराई, LOC रहेगा लागू

    Bombay High Court ने Shilpa Shetty और उनके पति Raj Kundra की Phuket ट्रिप के लिए विदेश यात्रा की अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने गंभीर मामलों की लंबित जांच का हवाला देते हुए यह फैसला सुनाया।

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई: बॉलीवुड एक्ट्रेस Shilpa Shetty और बिज़नेसमैन Raj Kundra की तीन दिन की फैमिली वेकेशन ट्रिप के लिए दी गई अर्जी को बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने खारिज कर दिया है। कपल ने कोर्ट से Thailand के Phuket जाने की परमिशन मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने साफ इनकार कर दिया।

    गंभीर केस का हवाला देते हुए अर्जी खारिज

    इस केस की सुनवाई चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंकड की बेंच ने की।
    सरकार के वकील ने कहा कि जब तक Economic Offences Wing (EOW) की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक विदेश यात्रा की इजाज़त नहीं दी जा सकती।

    • केस बिज़नेसमैन Deepak Kothari की शिकायत पर दर्ज हुआ था।
    • आरोप है कि शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा ने उनकी कंपनी में 60 करोड़ रुपये निवेश करने के लिए कहा और फिर पैसा डाइवर्ट कर लिया।
    • कोर्ट ने कहा कि ऐसे “गंभीर आरोप” लंबित रहने के दौरान विदेश यात्रा की परमिशन देना उचित नहीं है।

    Lookout Circular (LOC) रहेगा लागू

    Mumbai Police की Economic Offences Wing ने पहले ही कपल के खिलाफ Lookout Circular (LOC) जारी कर रखा है। इसका मतलब है कि बिना कोर्ट की अनुमति के वे विदेश नहीं जा सकते।

    राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी ने दलील दी थी कि:

    • राज कुंद्रा को बिज़नेस के लिए बार-बार विदेश जाना पड़ता है।
    • शिल्पा शेट्टी की भी विदेश में प्रोफेशनल कमिटमेंट्स रहती हैं।
    • विदेश यात्रा पर रोक लगाना उनके Fundamental Rights का उल्लंघन है।

    लेकिन कोर्ट ने यह दलील मानने से इनकार कर दिया।

    EOW की जांच जारी

    जानकारी के मुताबिक, Raj Kundra पहले भी EOW के सामने पेश हो चुके हैं और उनसे पूछताछ की गई है।
    अब इस मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी। तब तक LOC लागू रहेगा और कपल विदेश यात्रा नहीं कर पाएगा।


    FAQ Section

    Q1. Shilpa Shetty और Raj Kundra को Phuket जाने की परमिशन क्यों नहीं मिली?
    Ans: Bombay HC ने कहा कि उनके खिलाफ गंभीर आर्थिक अपराध के केस पेंडिंग हैं, इसलिए विदेश यात्रा की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    Q2. यह केस किसकी शिकायत पर दर्ज हुआ है?
    Ans: बिज़नेसमैन दीपक कोठारी ने शिकायत की थी कि कपल ने उनकी 60 करोड़ रुपये की इन्वेस्टमेंट का गलत इस्तेमाल किया।

    Q3. क्या Lookout Circular अभी भी लागू है?
    Ans: हाँ, LOC जारी रहेगा और दोनों बिना कोर्ट की अनुमति विदेश नहीं जा सकते।

    Q4. अगली सुनवाई कब होगी?
    Ans: अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।