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  • Mumbai: दही हांडी उत्सव के दौरान एक की मौत 30 घायल, 15 अस्पताल में भर्ती

    Mumbai: दही हांडी उत्सव के दौरान एक की मौत 30 घायल, 15 अस्पताल में भर्ती

    मुंबई शहर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर दही हांडी उत्सव के दौरान कई जगहों पर गोविदा पथक हादसों के शिकार हो गए हैं। इनमें से एक की मौत और 30 घायलों की जानकारी मिल रही है। Mumbai: One dead, 30 injured, 15 hospitalised during Dahi Handi festival

    मुंबई: शनिवार 16 अगस्त, कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुंबई में एक की मौत 30 घायल और 15 गोविदा का अस्पताल में इलाज चल रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक, मानखुर्द में दही हांडी बांधते समय एक 32 वर्षीय व्यक्ति की गिरकर मौत हो गई है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में दही हंडी फोड़ने के चक्कर में 30 गोविंदा घायल हो गए, जिनमें से से 15 लोगों को अस्पताल भर्ती कराया गया है। Mumbai: One dead, 30 injured, 15 hospitalised during Dahi Handi festival

    Mumbai बीएमसी के अधिकारियों क्या कहा?

    मुंबई के उपनगर मानखुर्द में शनिवार दोपहर एक 32 वर्षीय ‘गोविंदा’ की दही हांडी बांधते समय गिरने से मौत हो गई। जबकि शहर के अलग-अलग हिस्सों में मानव पिरामिड बनाते समय 30 अन्य गोविंदा घायल हो गए। बृहन्मुंबई महानगर पालिका के अधिकारियों ने कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर इसकी जानकारी दी। Mumbai: One dead, 30 injured, 15 hospitalised during Dahi Handi festival

    पहली मंजिल से गिर कर मौत

    मानखुर्द के महाराष्ट्र नगर मे मृत व्यक्ति की पहचान जगमोहन शिवकिरण चौधरी के रूप में हुई है। बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि जगमोहन अपने घर की पहली मंजिल की खिड़की की ग्रिल से एक रस्सी पर दही हांडी यानी दही से भरी हुई मिट्टी की मटकी बांध रहा था। इसी दौरान वह अचानक नीचे गिर पड़ा। चौधरी को तुरंत नगरपालिका द्वारा संचालित शताब्दी गोवंडी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। Mumbai: One dead, 30 injured, 15 hospitalised during Dahi Handi festival

    कहां-कहां हुई घटना?

    मुंबई, ठाणे और आस-पास के इलाकों में भारी बारिश के बीच मनाए गए इस वर्ष के दही हांडी उत्सव में 30 गोविंदा घायल हुए हैं। इनमें से 15 को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि बाकी घायलों का इलाज कर छुट्टी दे दी गई। अधिकारियों के अनुसार, इन 30 घायलों में 18 दक्षिण मुंबई से हैं, जबकि 6-6 लोग शहर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों से हैं। Mumbai: One dead, 30 injured, 15 hospitalised during Dahi Handi festival

    आस्था और भक्ति भाव

    दही हांडी का त्योहार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूरे महाराष्ट्र में मनाया जाता है। इसमें ‘गोविंदाओं’ की टीमें इंसानी पिरामिड बनाकर मटकी तक पहुंचने और उसे फोड़ने की कोशिश करते हैं। इसी दौरान कई हादसे होते रहते हैं लेकिन आस्था और भक्ति भाव में गोविंदा पथक इस प्रथा को बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाते आ रहे हैं। Mumbai: One dead, 30 injured, 15 hospitalised during Dahi Handi festival

  • डरा रहा इजराईल ईरान घमासान

    डरा रहा इजराईल ईरान घमासान

    इजराईल के यहूदी जर्मनी से हिटलर की तानाशाही और लाखों यहूदियों को पकड़कर ज्वलनशील चैंबर में बंद कर जलाए जाने के डर से अपना जीवन बचाने के लिए भाग खड़े हुए। दुनिया के किसी देश ने उन्हें पनाह नहीं दी। लेकिन चूंकि फिलिस्तीन उस समय ब्रिटेन का उपनिवेश था तब अंग्रेजों ने उन्हें फिलिस्तीन में शरण दिया। लेकिन यहूदियों ने धीरे धीरे फिलिस्तीनी इलाकों पर कब्जा करना शुरू कर दिया।
    प्रसिद्ध और संपन्न नगर गाजा पर इतनी अधिक बमबारी की जिसमें अस्पताल तक नहीं छोड़ा। दूध मुहे बच्चों का भी नरसंहार किया। गाजा पर अब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टेढ़ी नजर है। वे गाजा को हड़पना और वहां इजराईल की सहायता से व्यापारिक संकुल बनाना चाहते हैं। जिस तरह भारत में मुसलमानों को किरायेदार कहा जा रहा है उसी तरह यहूदी तो किरायेदार भी नहीं शरणार्थी हैं। जैसे कश्मीर से भगाए गए पंडित खानाबदोश हालत में ट्रांजिट कैंपों में नरकीय जीवन जीने को अभिशप्त कर दिए गए हैं।
    हिंदू वादी सरकार पिछले ग्यारह वर्षों में कश्मीरी पंडितों को घाटी में बसाने की बात करती रही, लेकिन कुछ किया नहीं। अनाथ बनाकर छोड़ दिया। बीमारी, अभाव और गंदगी में घुट-घुट कर मरने के लिए।
    कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण करने का आरोप लगाने वाली हिंदूवादी सरकार और हिंदू राष्ट्र निर्माण के लिए प्रयत्नशील आरएसएस ने उन कश्मीरी पंडितों की ओर झांकने की जहमत तक नहीं उठाई। फिर उनके लिए आवाज कैसे उठाती?
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप की दोगली अनीति देखिए। एक तरफ वे ईरान को परमाणु संपन्न देश नहीं बनने के लिए वार्ता कर रहे हैं, तो वहीं इजराईल को ईरानी परमाणु प्रोजैक्ट पर हमला करने को भी कह रहे हैं। परमाणु वार्ता संपन्न हुई नहीं कि इजराईल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर दो सौ बम वर्षक विमान भेजकर आधा दर्जन ठिकानों पर बम गिरा कर दो वैज्ञानिकों, सेना के कमांडरों की हत्या कर दी।
    स्वाभाविक है ईरान बदले की भावना से इजराईल पर हमला करता रहा। जिस तरह भारत को आत्मरक्षार्थ आतंकवादी पाकिस्तान पर हमला करने का अधिकार है। उसी तरह ईरान को भी इजराईल पर हमला करने का मौलिक अधिकार मिल जाता है। ईरान ने इजराईल पर इतनी अधिक बमबारी की, कि उसके परमाणु ठिकानों और सेना का संहार कर दिया। इस वज़ह से इजराईल के पास सैनिकों की कमी हो गई है। जिस कारण वह सेना में नई भरती करने को मजबूर हो गया है।
    इजराईल अपने नुकसान को हमेशा छुपाता रहता है। नए सैनिक भरती करने से ही पता चल जाता है कि ईरान ने उसे कितनी क्षति पहुंचाई है? धूर्त अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार ईरान पर इजराईली हमले में उनका कोई हाथ नहीं है। ईरानी हमले से डर कर अमेरिका ने अरब देशों से अपने सैनिक हटा लिए हैं। दियागोगरसिया में अमेरिका ने अपना सैनिक बेस बनाया हुआ है। ईरान के पास सात सौ किलोमीटर दूर तक मार करने के लिए मिसाइल की कमी है। इसलिए दियागोगरसिया पर हमला नहीं कर पा रहा। इसका मतलब यह नहीं कि ईरान चीन और रूस से लंबी दूरी तक मारक मिसाइल नहीं ले सकता। जिस दिन ईरान ने रूस और चीन से लंबी दूरी तक मार करने की मिसाइल खरीद ली, उसी दिन अमेरिकी बेस पर हमला करके अमेरिका को भारी क्षति पहुंचा सकता है।
    जो डोनॉल्ड ट्रंप बारंबार भारत और पाकिस्तान को एक ही तराजू से तौलते हुए सीज फायर का ऐलान करते हुए बार-बार कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान पर व्यापार का दबाव डालकर सीजफायर करा दिया है। दर्जनों बार यही दोहराते रहने वाला धूर्त ट्रंप अब कहने लगा, कि उसने दबाव डालकर सीजफायर नहीं कराया।
    धूर्त ट्रंप की जुबान का क्या भरोसा? वह तो भारत को चीन के खिलाफ एक मोहरा मानता है। दूसरी तरफ भारत को विकसित होते देख उसकी छाती पर सांप लौटने लगता है। भारत को कमजोर करने के लिए ट्रंप पाकिस्तान को सैन्य हथियारों और विभिन्न स्रोतों से अरबों डॉलर्स कर्ज दिलाकर पाकिस्तान पर आजमान करते हुए चीन के प्रभाव को कम करना चाहता है।
    भारत को बारंबार अपमानित करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहा। अमेरिकी सेना की 250 वी वर्षगांठ पर पाकिस्तान को आमंत्रित कर भारत को फिर से अपमानित किया है। पता नहीं मोदी की कौन सी दुखती रग वह जब चाहे दबा देता है और भारत के प्रधानमंत्री सरेंडर हो जाते हैं। बड़बोले ट्रंप की किसी बात का जवाब ही नहीं दे सकते। शायद मोरल ही नहीं है वर्ना शक्ति संपन्न राष्ट्र भारत के प्रधानमंत्री होते हुए भी क्यों ट्रंप की घुड़की सहन करते हैं?
    राहुल गांधी इसी बात पर नरेंद्र का सरेंडर कहकर तंज कसते हैं। ईरान और इजराईल का घमासान ट्रंप क्यों नहीं रुकवा देते? रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से चल रहे युद्ध को रुकवाने की हैसियत क्यों नहीं है ट्रंप में?
    ट्रंप के दोगलेपन और कुटनीतियों के कारण उनके खिलाफ अमेरिकी जनता उठ खड़ी हो चुकी है। सड़कों पर उतरकर अमेरिकी नागरिक ट्रंप का विरोध करने लगे हैं। उनकी चुनाव में जीत दिलाने में हजारों करोड़ डॉलर लुटा देने वाले अरबपति मस्क भी ट्रंप को गद्दी से उतारने में लगे हैं। संभव है कि जिस बिल को ट्रंप ब्यूटीफुल कहते हुए तारीफों के पुल बांधते हैं सीनेट से पास ही नहीं हो सके। क्योंकि यदि मस्क ने सीनेटरों को ट्रंप के विरोध में लाने के लिए रिपब्लिकन के दो तीन और सीनेटरों को ट्रंप के खिलाफ लाने में सफल हुए तो बिल सीनेट में पास नहीं हो सकेगा। जबकि चार सीनेटर ट्रंप की नीतियों की आलोचना प्रबल तरीके से करके ट्रंप को चेतावनी दे दी है। अगर सीनेट से ट्रंप को ब्यूटीफुल बिल पास नहीं हो सका तो अविश्वास प्रस्ताभ लाकर ट्रंप को उनके पद से हटाया जा सकता है।
    बहरहाल भारत के सामने चुनौती है। हमारे भारत देश के ईरान और इजराईल दोनों से रिश्ते अच्छे हैं इसलिए भारत को दोनों के साथ संबंध बनाए रखने होंगे, ताकि कोई विरोधी नहीं हो जाए। भारत को रूस के राष्ट्रपति को रूस चीन भारत संगठन पर भी पुनः विचार करना होगा, जो डोकलाम में चीनी भारतीय सैनिकों के बीच झड़प के बाद पटरी से उतर गई थी।
    तेहरान में बमों के धमाके सुनाई देने की बात पर ट्रंप को अंदेशा हो गया है कि अब ईरान इजराईल और अमेरिकी बेस पर परमाणु हमला कर सकता है। इसी डर से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जी 7 देशों की मीटिंग छोड़कर अमेरिका जाने की योजना ही नहीं बनाई बल्कि अमेरिकी सुरक्षा तंत्र को एलर्ट कर दिया है।
    अमेरिका जाकर ट्रंप इमरजेंसी मीटिंग करेंगे इसलिए सभी अधिकारियों को तैयार रहने का आदेश दे दिया है। इजराईली हमले का करारा जवाब देने की योजना ईरान ने बना ली है। कब और कैसे जवाबी हमला ईरान करेगा यह जल्द ही मालूम होगा। ट्रंप ने ईरान के साथ वार्ता के लिए अपने सहयोगी स्टॉफ को एलर्ट कर दिया है। ट्रंप को भय है कि रूस चीन और नॉर्थ कोरिया के हस्तक्षेप के बाद विश्वयुद्ध छिड़ना तय है।

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  • मुम्बई में सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट

    मुम्बई में सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट

    इस जटिल प्रक्रिया ने नई आशा का संचार किया है, जो बल्ड ग्रुप के भिन्नताओं पर नियंत्रण पाने में प्रत्यारोपण की संभावनाओं को उजागर करता है। देश में हजारों मरीज डायलिसिस पर निर्भर हैं। (Successful Kidney Transplant in Mumbai)

    मुम्बई: देशभर में हजारों मरीज डायलिसिस पर निर्भर हैं। इसी बीच, मुम्बई के नानावटी अस्पताल ने एक अनोखी चिकित्सा उपलब्धि हासिल की है। विले पार्ले स्थित नानावटी मैक्स अस्पताल ने चेंबूर के सुश्रुत अस्पताल के सहयोग से मुम्बई का पहला मल्टी-हॉस्पिटल थ्री-पेयर डोमिनो किडनी ट्रांसप्लांट किया है। इस जटिल प्रक्रिया ने गुर्दे की बीमारी से ग्रसित तीन मरीजों को नई आशा दी है, जो रक्त समूह असंगति को दूर करने में युग्मित विनिमय प्रत्यारोपण की क्षमता को दर्शाती है। (Successful Kidney Transplant in Mumbai)

    सर्जरी की एक जटिल प्रक्रिया में छह विभिन्न चरण शामिल थे, जिसमें नानावटी मैक्स अस्पताल में दो अंग पुनर्प्राप्ति और प्रत्यारोपण किए गए, जबकि सुश्रुत अस्पताल में एक सेट किया गया। इस समन्वित प्रयास ने तीन अलग-अलग परिवारों के तीन दाताओं और तीन प्राप्तकर्ताओं को एक साथ लाया, जिससे एक डोमिनो श्रृंखला बनी, जिसने असंगत रक्त समूहों में सफल प्रत्यारोपण को संभव बनाया। (Successful Kidney Transplant in Mumbai)

    डायलिसिस से परेशान

    पहला प्राप्तकर्ता, मुम्बई के भिंडी बाजार का 36 वर्षीय व्यक्ति था, जो पिछले दो वर्षों से डायलिसिस करवा रहा था। उसकी माँ एक संभावित दाता थीं और उनके मैच होने की संभावना अच्छी थी। लेकिन जब डॉक्टरों ने एक स्वैप प्रक्रिया का सुझाव दिया, जिससे कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी, तो उनकी माँ ने निस्वार्थता से 57 वर्षीय महिला को अपनी किडनी दान करने के लिए सहमति दे दी, जो दो साल से प्रतीक्षा सूची में थी और उसे नियमित डायलिसिस की आवश्यकता थी। (Successful Kidney Transplant in Mumbai)

    57 साल की महिला के पति ने अपनी किडनी दान करने का फैसला किया, लेकिन उनके अलग-अलग बल्ड ग्रुप के कारण यह संभव नहीं हो पाया। ओ-पॉजिटिव डोनर होने के नाते, सही मिलान खोजना काफी मुश्किल था। फिर एक स्वैप व्यवस्था के जरिए, महिला के पति ने रत्नागिरी के 25 वर्षीय डायलिसिस तकनीशियन को अपनी किडनी दान की, जो क्रोनिक किडनी रोग से जूझ रहे मरीजों की मदद कर रहा था। (Successful Kidney Transplant in Mumbai)

    युवा तकनीशियन को दो महीने पहले किडनी फेल होने का पता चला, जब उसके सहकर्मियों ने उसके स्वास्थ्य में गिरावट देखी। उसके परिवार में कोई उपयुक्त दाता नहीं था और पैसे की कमी के कारण उसकी जान बचाने की संभावना बहुत कम थी, जब तक कि डोमिनो ट्रांसप्लांट ने एक संभावित समाधान नहीं दिया। (Successful Kidney Transplant in Mumbai)

    सबसे वडी समस्या

    इस श्रृंखला का समापन करते हुए, एक 50 वर्षीय तकनीशियन की मां ने 36 वर्षीय भिंडी बाजार निवासी को अपनी किडनी दान की। यह समन्वित आदान-प्रदान का अंतिम चरण था। यह प्रत्यारोपण प्रक्रिया मंगलवार, 18 मार्च 2025 को सफलतापूर्वक संपन्न हुई, और सभी मरीज अब स्वस्थ हो रहे हैं। डॉ. जतिन कोठारी ने कहा, “किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोमिनो दृष्टिकोण उन मरीजों के लिए सहायक होता है, जिन्हें अन्यथा शव के अंगों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। कई लोगों के लिए, यह एकमात्र आशा की किरण होती है, खासकर जब परिवारों में दाता का मिलान नहीं हो पाता।” (Successful Kidney Transplant in Mumbai)

    क्या करना चाहिए?

    डॉ. कोठारी ने शहर या राज्य के अस्पतालों में दाता और प्राप्तकर्ता के बीच बेहतर तालमेल के लिए एक केंद्रीकृत रजिस्ट्री की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एक एकीकृत रजिस्ट्री बनाने से हमें एक बड़ी डोमिनो श्रृंखला तैयार करने में मदद मिलेगी, जिससे हम अधिक जरूरतमंद मरीजों की सहायता कर सकेंगे।” मैक्स हेल्थकेयर के निदेशक और मुख्य परिचालन अधिकारी (पश्चिमी क्षेत्र) डॉ. विवेक तलौलीकर ने इस प्रक्रिया में टीमवर्क और सटीकता की सराहना की। उन्होंने कहा, “यह तीन-जोड़ी डोमिनो प्रत्यारोपण हमारी गुर्दे की देखभाल और मरीज-केंद्रित समाधानों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अस्पतालों में डोमिनो श्रृंखला को बढ़ाने से अनोखे प्रत्यारोपण की संख्या में कमी आएगी, जिससे मरीजों पर नैदानिक और वित्तीय दबाव दोनों कम होंगे।” (Successful Kidney Transplant in Mumbai)

    इस तीन-जोड़ी डोमिनो प्रत्यारोपण की सफलता नानावटी मैक्स अस्पताल की गुर्दे की देखभाल और नवीन प्रत्यारोपण समाधानों में नेतृत्व को उजागर करती है। अस्पताल अंग दान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है और संभावित दाताओं को अंगों की उपलब्धता में महत्वपूर्ण अंतर को कम करने के लिए प्रेरित करता है। युग्मित विनिमय प्रत्यारोपण की क्षमता को प्रदर्शित करते हुए, यह मील का पत्थर अंतिम चरण के गुर्दे की विफलता से ग्रस्त रोगियों के लिए परिणामों में सुधार और जीवन रक्षक उपचारों की पहुंच को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। (Successful Kidney Transplant in Mumbai)

  • अब गर्भवती महिला 25 हफ्ते बाद भी गर्भपात करा सकती है- Bombay High Court

    अब गर्भवती महिला 25 हफ्ते बाद भी गर्भपात करा सकती है- Bombay High Court

    बॉम्बे हाई कोर्ट ने 25 हफ्ते बाद भी एक गर्भवती महिला को अपने पसंदीदा नीजी अस्पताल में गर्भपात की मंजूरी दे दी है। हालांकि MTP कानून इसकी इजाजत नहीं देता। (Now pregnant woman can get abortion even after 25 weeks- Bombay High Court)

    मुम्बई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक 35 वर्षीय महिला को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) नियमों में कुछ तकनीकीताओं के बावजूद अपनी 25-सप्ताह की गर्भावस्था को अपनी पसंद के निजी अस्पताल में समाप्त करने की अनुमति दे दी, जो निजी संस्थानों को 24 सप्ताह से अधिक के गर्भधारण के लिए ऐसी प्रक्रियाएं करने से रोकता है। (Now pregnant woman can get abortion even after 25 weeks- Bombay High Court)

    भ्रूण के दिल की धड़कन

    महिला मुंबई के मालाड इलाके में अपने चुने हुए निजी अस्पताल में गर्भपात कराना चाहती थी, और उसने गर्भपात के तरीकों के संबंध में केंद्र द्वारा तय किए गए दिशानिर्देशों को अपनाने के लिए प्रक्रिया करने वाले एक डॉक्टर से अनुमति मांगी। राज्य सरकार ने भी केंद्र के इन दिशानिर्देशों को अपनाया है और ऐसी स्थिति में भ्रूण की दिल की धड़कन को रोकने का प्रावधान किया है। (Now pregnant woman can get abortion even after 25 weeks- Bombay High Court)

    न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे और न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले की पीठ ने निजी अस्पतालों से जुड़े एमटीपी नियमों के कानूनी मुद्दे पर विचार किया। हालांकि, इमर्जेंसी को देखते हुए, पीठ ने याचिकाकर्ता को निजी अस्पताल से एक हलफनामा प्राप्त करने का निर्देश दिया, जिसमें कहा गया हो कि उनके पास प्रक्रिया करने के लिए सभी सुविधाएं हैं। (Now pregnant woman can get abortion even after 25 weeks- Bombay High Court)

    MTP नियम क्या कहता है?

    वर्तमान एमटीपी नियम निजी संस्थानों को केवल 24 सप्ताह तक के गर्भपात करने की अनुमति देता है। नियमों के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो निजी अस्पतालों को 24-सप्ताह की सीमा से ज्यादा वाले गर्भ को समाप्त करने के लिए मंजूरी लेने की अनुमति देता हो, इस वजह से याचिकाकर्ता अपनी पसंद के अस्पताल में गर्भपात की प्रक्रिया को सुरक्षित करने में असमर्थ हो गई थी। (Now pregnant woman can get abortion even after 25 weeks- Bombay High Court)

    गर्भवती की जान बचाना जरूरी

    याचिकाकर्ता के वकील, मीनाज़ काकालिया ने तर्क दिया कि महिला को अस्पताल चुनने की अनुमति दी जानी चाहिए और केंद्र सरकार द्वारा जारी मार्गदर्शन बिंदुओं के अनुसार अपनी पसंद की गर्भपात प्रक्रिया से गुजरने में सक्षम होना चाहिए। उन्होंने 20 सप्ताह से अधिक के गर्भपात से जुड़े मामलों के लिए मार्गदर्शन बिंदु का उल्लेख किया, जो भ्रूण को जीवित प्रसव से बचाने के लिए यदि आवश्यक हो तो भ्रूण के दिल की धड़कन को रोकने की अनुमति देता है। काकालिया ने आगे बताया, कि “यह प्रक्रिया ऑपरेशन गर्भपात प्रक्रिया के हिस्से के रूप में उपलब्ध होनी चाहिए।” इसके साथ ही उन्होंने अनुरोध किया, कि “अदालत निजी चिकित्सा व्यवसायी को इन दिशानिर्देशों का पालन करने की अनुमति दे।” (Now pregnant woman can get abortion even after 25 weeks- Bombay High Court)

    सरकारी सर जे जे ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स और ग्रांट मेडिकल कॉलेज के एक मेडिकल बोर्ड ने महिला के मामले की समीक्षा की थी और पाया था कि भ्रूण कुछ विसंगतियों से ग्रस्त था। अभी के लिए, अस्पताल के हलफनामे में कहा गया है कि उनके पास गर्भपात के लिए आवश्यक मंजूरी है और उनके पास आक्रामक प्रक्रियाओं सहित सोनोग्राफी करने के लिए सभी सुविधाएं हैं, और उन्हें एमटीपी नियमों के अनुसार पूर्व-गर्भाधान और प्रसवपूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन पर प्रतिबंध) अधिनियम, 2003 के तहत लाइसेंस प्राप्त है। (Now pregnant woman can get abortion even after 25 weeks- Bombay High Court)

    कोर्ट ने क्या कहा?

    पीठ ने अपने आदेश में कहा, “याचिकाकर्ता की प्रजनन स्वतंत्रता के अधिकार, शरीर पर उसकी स्वायत्तता और पसंद के अधिकार, याचिकाकर्ता की चिकित्सा स्थिति को ध्यान में रखते हुए और मेडिकल बोर्ड के निष्कर्षों और राय पर विचार करने के बाद, हम याचिकाकर्ता को गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति देते हैं। याचिकाकर्ता ने अपनी इच्छा का संकेत दिया है कि प्रसव प्रक्रिया आदि उसकी अपनी पसंद के अस्पताल में की जाएगी। हम उसे ऐसा करने की अनुमति देते हैं।” (Now pregnant woman can get abortion even after 25 weeks- Bombay High Court)

    पीठ ने कहा कि वह एमटीपी नियमों में खामियों से संबंधित काकालिया द्वारा उठाए गए बड़े मुद्दे को बाद की तारीख में विचार के लिए खुला छोड़ देगी और सुनवाई 10 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी। (Now pregnant woman can get abortion even after 25 weeks- Bombay High Court)