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  • टीचर ने 10 साल की बच्ची को बेरहमी से पीटा

    टीचर ने 10 साल की बच्ची को बेरहमी से पीटा

    एक ट्यूशन क्लास में महिला टीचर ने मामूली बात पर दस साल की बच्ची की पिटाई कर दी। इस पिटाई में लड़की के कान पर मार लगने की वजह से वो गंभीर रूप से घायल हो गई है। बच्ची का एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा है। जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। (Teacher brutally beats 10 year old girl, Nalasopara News)

    न्यूज़ डेस्क
    पालघर-
    नालासोपारा के एक ट्यूशन क्लास में महिला टीचर ने मामूली बात पर दस साल की बच्ची की पिटाई कर दी। लड़की के कान पर मार लगने की वजह से वो गंभीर रूप से घायल हो गई है। लड़की का एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। मुंबई से सटे पालघर जिले के नालासोपारा में ये घटना सामने आई है। (Teacher brutally beats 10 year old girl, Nalasopara News)

    कान के नीचे मारा थप्पड़

    मिली जानकारी के मुताबिक, दस साल की छात्रा रत्ना सिंह नाम की टीचर के पास पढ़ने के लिए जाती है। इसी बीच क्लास  में प्राइवेट ट्यूशन पढ़ाने वाली शिक्षिका रत्ना सिंह ने मामूली बात पर छात्रा के कान के नीचे जोर से थप्पड़ मार दी। इसमें लड़की के कान में बंधी बाली का किल उसके गर्दन में घुस गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गई। लड़की के माता पिता ने गंभीर रूप से घायल अवस्था में लड़की को एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया है। जहां उसका इलाज चल रहा है। (Teacher brutally beats 10 year old girl, Nalasopara News)

    माता पिता ने की कार्यवाही की मांग

    बताया जा रहा है की इस पिटाई में लड़की के दिमाग के साथ-साथ सांस की नली में भी गंभीर चोट आई है और बच्ची का इलाज प्राइवेट अस्पताल के आईसीयू में चल रहा है। खबर यह भी है कि पिछले 8 दिनों से बच्ची वेंटीलेटर पर है। बच्ची के माता पिता ने ट्यूशन टीचर के खिलाफ शिकायत दर्ज कार्यवाही की मांग की है। पुलिस अपराधिक मामला दर्ज कर शिक्षिका के खिलाफ नोटिस जारी किया है। (Teacher brutally beats 10 year old girl, Nalasopara News)

  • बच्चों की नींद पूरी नहीं होने का बताया कारण

    बच्चों की नींद पूरी नहीं होने का बताया कारण

    महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस ने स्कूलों के अपने समय में बदलाव करने की अपील की है, ताकि बच्चें पूरी नींद ले सकें। राज्यपाल ने कहा है कि बच्चों को सुबह जल्दी उठना पड़ता है। ऐसे में उनकी नींद पूरी नहीं हाेती है। ऐसे में उनकी नींद पूरी नहीं होती है।

    इस्माईल शेख
    मुंबई
    – स्टूडेंट्स को पूरी नींद मिले इसके लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस ने एज्युकेशन अधिकारियों से स्कूलों का समय बदलने पर विचार करने को कहा है। महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, कि कोविड के बाद से हर किसी की नींद का तरीका बदल गया है। खासकर बच्चे जो आधी रात के बाद ही सोते हैं, लेकिन उन्हें स्कूल जाने के लिए जल्दी उठना पड़ता है, जिससे उनकी नींद का न्यूनतम कोटा खत्म हो जाता है। इसका खयाल करते हुए, उन्होंने स्कूलों और शिक्षा अधिकारियों से इस पहलू पर ध्यान देने के अलावा ‘पुस्तक-रहित’ स्कूलों, ‘ई-कक्षाओं’ को बढ़ावा देने और छात्र समुदाय पर शिक्षा के बोझ को कम करने के लिए उनकी गुणवत्ता के अनुसार स्कूलों की रैंकिंग करने का आह्वान किया है।

    महाराष्ट्र के राज्यपाल ने क्या कहा ..

    राज्यपाल रमेश बैस ने यह बातें राजभवन में स्कूल शिक्षा विभाग की विभिन्न पहलुओं के शुभारंभ के मौके पर कहीं। बैस ने जब ये बातें कहीं तो कार्यक्रम में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मंत्री दीपक केसरकर, मंगल प्रभात लोढ़ा और गिरीश महाजन के अलावा प्रमुख सचिव शिक्षा रणजीत सिंह देयोल भी मौजूद थे। बृहन्मुंबई महानगर पालिका द्वारा संचालित नए स्कूल भवनों का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल और सीएम ने संयुक्त रूप से माई स्कूल, ब्यूटीफुल स्कूल, स्टोरी-टेलिंग सैटरडे, एंजॉयेबल रीडिंग, एडॉप्ट स्कूल एक्टिविटी, माई बैकयार्ड और क्लीननेस मॉनिटर जैसी पहल की शुरुआत की।

    राज्यपाल,

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    लाइब्रेरी को गोद लेने की जरूरत
    राज्यपाल ने इस बात पर भी खेद व्यक्त किया कि राज्य में सैकड़ों सार्वजनिक पुस्तकालय हैं, लेकिन अधिकांश पुराने हैं, इसलिए उन सभी को पुनर्जीवित करने और परिसर में कंप्यूटर और इंटरनेट प्रदान करके ‘लाइब्रेरी एडॉप्शन’ शुरू करने की आवश्यकता जताई है। बैस ने आग्रह करते हुए कहा, कि यह आवश्यक था क्योंकि छात्र न केवल किताबों के माध्यम से बल्कि इंटरनेट, सोशल मीडिया और अन्य स्रोतों के माध्यम से भी अपना ज्ञान प्राप्त करते हैं जो उनके आईक्यू स्तर को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इसलिए शिक्षकों को भी शैक्षणिक मामलों में नए चीजों को सीखते रहना चाहिए। उन्होंने छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए कम शैक्षणिक होमवर्क और “खेल और रचनात्मक गतिविधियों पर जोर के साथ शिक्षा को और अधिक मनोरंजक बनाने का आह्वान किया।

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