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  • 2016 Encounter Case: मुंबई कोर्ट ने हरियाणा के 5 पुलिसकर्मियों समेत 7 आरोपियों को किया बरी

    2016 Encounter Case: मुंबई कोर्ट ने हरियाणा के 5 पुलिसकर्मियों समेत 7 आरोपियों को किया बरी

    Mumbai Court Verdict: 2016 Sandeep Gadoli Encounter Case में 5 Haryana Cops और 2 अन्य आरोपी बरी। Andheri East होटल एनकाउंटर केस में बड़ा फैसला।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर से एक बड़ा Encounter Case Verdict सामने आया है। साल 2016 के चर्चित Sandeep Gadoli Encounter Case में कोर्ट ने हरियाणा पुलिस के 5 कर्मियों समेत कुल 7 आरोपियों को बरी कर दिया है। यह मामला मुंबई के अंधेरी ईस्ट के एक होटल में हुए कथित फर्जी एनकाउंटर से जुड़ा था।

    Sandeep-Gadoli-Encounter-Case
    संदीप गदोली की फाइल तस्वीर

    ⚖️ कोर्ट का बड़ा फैसला

    मुंबई की सेशन कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत काले ने सभी आरोपियों को Section 302 (murder) समेत अन्य धाराओं से बरी कर दिया।
    कोर्ट ने सबूतों के आधार पर आरोप साबित न होने पर यह फैसला सुनाया। हालांकि विस्तृत आदेश अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    📍 क्या था पूरा मामला

    यह घटना 7 फरवरी 2016 की है, जब गुरुग्राम पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने गैंगस्टर संदीप गडोली को अंधेरी ईस्ट के एक होटल में मुठभेड़ में मार गिराया।
    गडोली पर ₹1 लाख का इनाम था और उसके खिलाफ 1999 से अब तक 40 से ज्यादा FIR दर्ज थीं।

    👮‍♂️ किन-किन पर थे आरोप

    इस मामले में पुलिस ने कुल 8 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें:

    • 5 हरियाणा पुलिसकर्मी
    • गडोली की कथित गर्लफ्रेंड दिव्या पाहुजा
    • उनकी मां
    • गैंगस्टर का राइवल वीरेंद्र गुज्जर

    शामिल थे।

    आरोपी पुलिसकर्मियों में

    • प्रद्युमन यादव (तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर)
    • विक्रम सिंह
    • जितेंद्र यादव
    • दीपक काकरान
    • परमजीत अहलावत

    के नाम शामिल थे।

    🕵️‍♂️ साजिश का आरोप क्या था

    प्रोसिक्यूशन के मुताबिक, गैंगस्टर वीरेंद्र गुज्जर की गडोली से पुरानी दुश्मनी थी।
    आरोप था कि उसने पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर गडोली को जाल में फंसाया।

    बताया गया कि दिव्या पाहुजा के जरिए गडोली को होटल में बुलाया गया और फिर उसे फर्जी एनकाउंटर में मार दिया गया।

    🔫 कैसे किया गया एनकाउंटर

    प्रोसिक्यूशन ने दावा किया कि आरोपियों ने होटल में illegal firearms का इस्तेमाल कर गडोली को गोली मारी और बाद में खुद को बचाने के लिए झूठे सबूत पेश किए।

    📊 सबूत और गवाह

    इस केस में प्रोसिक्यूशन ने

    • 43 गवाह
    • CCTV फुटेज
    • कॉल रिकॉर्ड
    • बैलिस्टिक रिपोर्ट

    जैसे मजबूत तकनीकी सबूत कोर्ट के सामने पेश किए थे, ताकि यह साबित किया जा सके कि यह एक planned conspiracy murder था।

    ⚠️ दिव्या पाहुजा केस का अपडेट

    इस केस की अहम कड़ी मानी जा रही दिव्या पाहुजा की 2024 में हरियाणा के एक होटल में हत्या हो गई थी।
    वह उस समय जमानत पर बाहर थीं। उनकी मौत के बाद उनके खिलाफ केस स्वतः समाप्त (abated) हो गया।

    🛡️ बचाव पक्ष का क्या कहना था

    आरोपियों के वकील विलास नाइक और विग्नेश अय्यर ने कोर्ट में कहा कि
    यह पूरा मामला “false and malicious allegations” पर आधारित है।

    डिफेंस के मुताबिक, यह केस गडोली के परिवार के दबाव में दर्ज कराया गया था, जिन पर खुद extortion और murder जैसे गंभीर केस चल रहे हैं।

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    ❓ FAQ (Frequently Asked Questions)

    Q1. संदीप गडोली कौन था?
    वह एक कुख्यात गैंगस्टर था, जिस पर ₹1 लाख का इनाम था और 40 से ज्यादा केस दर्ज थे।

    Q2. यह एनकाउंटर कब हुआ था?
    7 फरवरी 2016 को अंधेरी ईस्ट के एक होटल में।

    Q3. कोर्ट ने आरोपियों को क्यों बरी किया?
    सबूतों के आधार पर आरोप साबित नहीं हो सके।

    Q4. दिव्या पाहुजा का क्या हुआ?
    2024 में हरियाणा के एक होटल में उनकी हत्या हो गई थी।

  • Mumbai Court का बड़ा फैसला: मां की हत्या में बेटे को Life Imprisonment

    Mumbai Court का बड़ा फैसला: मां की हत्या में बेटे को Life Imprisonment

    Mumbai Session Court ने Dahisar में मां की हत्या के मामले में आरोपी बेटे को IPC Section 302 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई। Court ने Circumstantial Evidence के आधार पर दोषी ठहराया, Police Confession को सबूत नहीं माना।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर से एक सनसनीखेज Crime News सामने आई है। मुंबई की सेशन कोर्ट ने अपनी मां की हत्या करने वाले बेटे को Life Imprisonment की सजा सुनाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि Circumstantial Evidence के आधार पर यह साबित होता है कि आरोपी ही हत्या के लिए जिम्मेदार है।

    🏛️ Court का फैसला: “Homicidal Death हुई, आरोपी जिम्मेदार”

    Additional Sessions Judge M Mohiuddin ने 24 फरवरी के अपने Judgment में कहा कि मृतका ललिता शेनॉय की मौत आरोपी की कस्टडी में हुई और यह Homicidal Death है।

    कोर्ट के मुताबिक:

    • घटना के समय घर में सिर्फ आरोपी मौजूद था
    • Crime Scene से Blood-Stained Items बरामद हुए
    • आरोपी यह नहीं बता सका कि मां को चोटें कैसे आईं

    जज ने कहा कि आरोपी द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण झूठा प्रतीत होता है, जो उसके खिलाफ मजबूत परिस्थिति जन्य साक्ष्य (Circumstantial Evidence) है।

    📍 Dahisar की Chawl में रहता था आरोपी

    यह मामला मुंबई के Dahisar इलाके का है। आरोपी अपनी मां के साथ एक Chawl में रहता था।

    कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार:

    • घटना के समय घर में कोई अन्य परिवार सदस्य मौजूद नहीं था
    • पड़ोसियों ने बताया कि मां-बेटे के बीच कभी-कभी झगड़ा होता था

    📞 सुबह पुलिस को दी थी “Unknown Person” वाली जानकारी

    हत्या की रात के बाद अगली सुबह आरोपी ने पुलिस को फोन कर बताया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसकी मां की हत्या कर दी है।

    जब पुलिस मौके पर पहुंची तो मां अपने कमरे में मृत पाई गई। कमरे से कई खून से सने सामान बरामद हुए, जिनमें शामिल थे:

    • Paper Cutter
    • खून से सने कपड़े
    • Pillow Cover

    🧾 कथित कबूलनामा, लेकिन Court ने नहीं माना

    कोर्ट ने नोट किया कि आरोपी ने पुलिस के सामने कथित रूप से कबूल किया था कि:

    • उसने मां को 30 Sleeping Tablets दीं
    • तकिए से मुंह दबाया
    • Paper Cutter से गला काटा

    उसने कहा कि झगड़े के बाद उसने “हमेशा के लिए बहस खत्म करने” के लिए यह कदम उठाया।

    लेकिन Indian Evidence Act की Section 25 और Bhartiya Nagrik Suraksha Sanhita की Section 23 के तहत पुलिस के सामने दिया गया Confession अदालत में मान्य नहीं होता।

    इसलिए कोर्ट ने आरोपी के बयान पर भरोसा नहीं किया और फैसला Circumstantial Evidence के आधार पर सुनाया।

    🔬 Forensic Report और Medical Evidence

    जांच के दौरान पुलिस ने कमरे से कई सामान जब्त किए:

    • Paper Cutter
    • Blood-Stained Clothes
    • Pillow
    • Mattress का टुकड़ा

    Forensic Tests में कुछ सामान पर Human Blood की पुष्टि हुई। Medical Examination में पाया गया कि मौत गर्दन पर गहरे कट (Deep Incised Neck Injuries) के कारण हुई।

    हालांकि Paper Cutter पर आरोपी के Fingerprints नहीं मिले, लेकिन कोर्ट ने कहा कि घटना के समय घर में और कोई नहीं था।

    ❗ आरोपी का “Unnatural Conduct” भी बना सबूत

    कोर्ट ने आरोपी के व्यवहार पर भी सवाल उठाए।

    जज ने कहा:

    • अगर कोई अज्ञात व्यक्ति हत्या करता, तो आरोपी शोर मचाता
    • पड़ोसियों को बुलाता
    • मां को अस्पताल ले जाने की कोशिश करता

    लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया और सुबह तक चुप रहा। कोर्ट ने इसे “Unnatural Conduct” मानते हुए आरोपी के खिलाफ मजबूत परिस्थिति माना।

    ⚖️ सजा और जुर्माना

    कोर्ट ने आरोपी को Indian Penal Code की Section 302 के तहत Murder का दोषी ठहराया।

    सजा:

    • Life Imprisonment
    • ₹5,000 Fine
    • Fine नहीं भरने पर 3 महीने की अतिरिक्त सजा

    कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी 29 नवंबर 2018 से न्यायिक हिरासत में है और Code of Criminal Procedure की Section 428 के तहत जेल में बिताया गया समय सजा में Adjust किया जाएगा।

    👩‍⚖️ कौन थे वकील?

    • आरोपी की ओर से Advocate Shashikant Damodarlal Chandak (Legal Aid) और Kanchan Chandak पेश हुए।
    • राज्य की ओर से Additional Public Prosecutor PS Rathod ने पैरवी की।

    ❓ FAQ Section

    1. आरोपी को किस धारा में सजा मिली?

    IPC Section 302 (Murder) के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

    2. क्या आरोपी का Confession कोर्ट में माना गया?

    नहीं, Indian Evidence Act और BNSS Act के तहत पुलिस के सामने दिया गया Confession मान्य नहीं होता।

    3. सजा क्या है?

    Life Imprisonment और ₹5,000 जुर्माना।

    4. घटना कब की है?

    आरोपी को 29 नवंबर 2018 को गिरफ्तार किया गया था और तभी से वह न्यायिक हिरासत में है।

  • अवैध संबंध के शक में पत्नी की हत्या, मालाड केस में आरोपी को उम्रकैद

    अवैध संबंध के शक में पत्नी की हत्या, मालाड केस में आरोपी को उम्रकैद

    मुंबई के मालाड इलाके में पत्नी की हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी पति को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अवैध संबंध के शक में हुए इस अपराध को कोर्ट ने ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानने से इनकार किया।

    मुंबई: मालाड इलाके में अवैध संबंध के शक में पत्नी की हत्या करने वाले 42 वर्षीय शख्स को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। दिंडोशी सत्र न्यायालय ने इस मामले में मृत्युदंड की मांग को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में नहीं आता। घटना के वक्त दंपति की नाबालिग बेटी और एक पड़ोसी मौके पर मौजूद थे।

    क्या है मालाड पूरा मामला

    अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी श्रवणकुमार राउत को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था। इसी शक के चलते दोनों के बीच झगड़ा हुआ, जो देखते ही देखते हिंसक हो गया।
    यह घटना मालाड स्थित उनकी दुकान में हुई, जहां आरोपी ने सब्जी काटने वाले चाकू से पत्नी पर जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल महिला की मौके पर ही मौत हो गई।

    बेटी और पड़ोसी के सामने हुई वारदात

    कोर्ट में पेश गवाहों के मुताबिक, घटना के समय दंपति की किशोर बेटी और पास में रहने वाला एक पड़ोसी वहां मौजूद था। दोनों ने झगड़े और हमले को अपनी आंखों से देखा।
    अभियोजन ने इन बयानों को अहम सबूत के तौर पर पेश किया, जिससे आरोपी के खिलाफ मामला मजबूत हुआ।

    मृत्युदंड की मांग, लेकिन कोर्ट ने किया इनकार

    सरकारी वकील रविंद्र सावल ने आरोपी के लिए फांसी की सजा की मांग की थी।
    हालांकि, दिंडोशी कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नंदकिशोर मोरे ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अपराध गंभीर जरूर है, लेकिन यह ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामलों में शामिल नहीं किया जा सकता।
    इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई।

    कोर्ट का अहम संदेश

    अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि शक और घरेलू विवाद किसी की जान लेने का अधिकार नहीं देते।
    यह फैसला समाज के लिए एक सख्त संदेश है कि घरेलू हिंसा और चरित्र पर शक के नाम पर की गई हत्या को कानून किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. आरोपी को कौन-सी सजा सुनाई गई है?
    👉 अदालत ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

    Q2. क्या कोर्ट ने मृत्युदंड दिया?
    👉 नहीं, कोर्ट ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला नहीं मानते हुए मृत्युदंड से इनकार किया।

    Q3. घटना कहां हुई थी?
    👉 यह वारदात मुंबई के मालाड इलाके में आरोपी की दुकान में हुई थी।

  • ट्रैफिक पुलिस से बदसलूकी का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार

    ट्रैफिक पुलिस से बदसलूकी का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार

    अंधेरी में सीट बेल्ट चेक के दौरान ट्रैफिक कॉन्स्टेबल से गाली-गलौज और मारपीट के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी परिवार को राहत देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा— FIR रद्द हुई तो पुलिस का मनोबल टूटेगा।

    मुंबई: ट्रैफिक पुलिसकर्मी के साथ बदसलूकी और मारपीट के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अंधेरी के एक बुजुर्ग दंपति और उनके बेटे के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग को अदालत ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि मामले में सबूत मौजूद हैं और ऐसी स्थिति में केस रद्द करना पुलिस बल का मनोबल तोड़ने जैसा होगा।

    ⚖️ हाईकोर्ट का अहम फैसला

    इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति संदीप डी. पाटिल की खंडपीठ ने की। अदालत ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का समर्थन करने वाले वीडियो सबूत और गवाहों के बयान मौजूद हैं। ऐसे में आरोपियों को ट्रायल का सामना करना ही होगा।

    अदालत ने टिप्पणी की कि
    👉 “अगर ऐसे मामलों में FIR रद्द की गई, तो यह समाज और पुलिस व्यवस्था के लिए गलत संदेश होगा।”

    🚦 कब और कहां हुआ था विवाद?

    यह घटना 13 अगस्त 2024 को
    📍 MHADA कॉलोनी जंक्शन, अंधेरी में हुई थी।

    उस समय ट्रैफिक पुलिस कांस्टेबल

    • गणेश सोनावणे
    • भारत चौधरी

    सीट बेल्ट चेकिंग की ड्यूटी पर तैनात थे।

    🚗 सीट बेल्ट न पहनने पर शुरू हुआ विवाद

    कांस्टेबल सोनावणे ने देखा कि एक कार में आगे की सीट पर बैठी महिला ने सीट बेल्ट नहीं पहनी थी। उन्होंने गाड़ी रोककर ई-चालान काटने की प्रक्रिया शुरू की।

    इसी दौरान पुलिस के अनुसार:

    • महिला और उसके पति ने गंदी गालियां देना शुरू कर दिया
    • ड्राइवर ने कांस्टेबल को जान से मारने की धमकी दी
    • महिला ने कथित तौर पर
      👉 कांस्टेबल को थप्पड़ मारा
      👉 सीने में मुक्का मारा

    👨‍👩‍👦 कौन हैं आरोपी?

    बाद में आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई:

    • कपिल भगवानप्रसाद आनंद (70)
    • साधना आनंद (60)
    • उनका बेटा अद्वैत आनंद (30)

    तीनों लोकhandwala कॉम्प्लेक्स, अंधेरी के निवासी हैं।

    📹 वीडियो बना मजबूत सबूत

    पुलिस ने अदालत को बताया कि
    👉 पूरी घटना कांस्टेबल भारत चौधरी ने मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड की थी।
    यह वीडियो चार्जशीट का हिस्सा है।

    हाईकोर्ट ने वीडियो फुटेज और गवाहों के बयान देखने के बाद कहा कि
    👉 “यह ऐसा मामला है जिसमें आरोपियों को ट्रायल कोर्ट में मुकदमे का सामना करना होगा।”

    🛑 FIR रद्द करने की मांग खारिज

    परिवार की ओर से दलील दी गई थी कि

    • उन्हें झूठा फंसाया गया है
    • ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं

    लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि
    👉 सबूत साफ तौर पर आरोपों की पुष्टि करते हैं।

    👮‍♂️ पुलिस और समाज को लेकर कोर्ट की टिप्पणी

    हाईकोर्ट ने कहा कि
    👉 अगर पुलिसकर्मियों पर हमले के मामलों में नरमी बरती गई,
    👉 तो पुलिसकर्मी डर के माहौल में ड्यूटी करने को मजबूर होंगे,
    जो कानून-व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।


    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. यह मामला किस इलाके का है?
    👉 अंधेरी, MHADA कॉलोनी जंक्शन।

    Q2. FIR क्यों दर्ज की गई थी?
    👉 ट्रैफिक पुलिस से गाली-गलौज, मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में।

    Q3. हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?
    👉 FIR रद्द करने से इनकार, ट्रायल जारी रखने का आदेश।

    Q4. पुलिस के पास क्या सबूत हैं?
    👉 मोबाइल वीडियो रिकॉर्डिंग और गवाहों के बयान।

  • मुंबई NDPS केस: 115 किलो गांजा रखने वाले दो आरोपियों को 15 साल की सजा, दो सप्लायर बरी

    मुंबई NDPS केस: 115 किलो गांजा रखने वाले दो आरोपियों को 15 साल की सजा, दो सप्लायर बरी

    मुंबई की विशेष एनडीपीएस अदालत ने 115 किलो गांजा रखने के मामले में दो आरोपियों को 15 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई। गांजे की कीमत ₹28.75 लाख बताई गई। दो सप्लायरों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

    मुंबई: एक विशेष एनडीपीएस (NDPS) अदालत ने 115 किलो गांजा रखने के मामले में दो आरोपियों को 15 साल की कठोर कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। जब्त गांजे की कीमत करीब ₹28.75 लाख बताई गई है।
    दोषी पाए गए आरोपियों के नाम इस्माइल शेख (पवई) और इमरान अंसारी (मुम्ब्रा) हैं, जिन्हें पुलिस ने जनवरी 2022 में घाटकोपर बस डिपो के पास से गिरफ्तार किया था।
    अदालत ने दो अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।

    🚨 पुलिस को मिली थी गांजा डिलीवरी की गुप्त जानकारी

    कांदिवली यूनिट की एंटी-नारकोटिक्स सेल (ANC) को 23 जनवरी 2022 को सूचना मिली कि दो व्यक्ति घाटकोपर बस डिपो के पास गांजा बेचने पहुंचने वाले हैं।
    सूत्रों ने वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर और आरोपियों का पूरा विवरण भी दिया था। इसके बाद पुलिस ने मौके पर जाल बिछाया।

    🚗 घाटकोपर बस स्टॉप पर कार से मिली 115 किलो गांजा

    पुलिस ने होंडा एकॉर्ड कार को रोका और तलाशी में 115 किलो गांजा बरामद किया।
    पकड़े गए आरोपियों इस्माइल शेख और इमरान अंसारी को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
    पुलिस के अनुसार, बरामद माल की बाजार कीमत लगभग ₹28.75 लाख है।

    🔬 फॉरेंसिक जांच में गांजा की पुष्टि

    बरामद किए गए पदार्थ का नमूना फॉरेंसिक लैब भेजा गया, जहां रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि यह पदार्थ गांजा (कैनाबिस) ही था।
    पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि यह खेप अल्ताफ शेख (अंधेरी निवासी) ने सप्लाई की थी।

    ⚖️ दो सप्लायरों को सबूतों के अभाव में मिली राहत

    पुलिस ने अल्ताफ शेख और चक्रपाणि गौड़ा (ओडिशा निवासी) को अक्टूबर 2022 में गुजरात से गिरफ्तार किया था।
    हालांकि, अदालत में अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ ठोस सबूत पेश नहीं कर सका।
    नतीजतन, विशेष एनडीपीएस अदालत ने दोनों को बरी कर दिया।

    👨‍⚖️ कोर्ट ने कहा – “समाज में नशे के कारोबार पर कड़ी सजा जरूरी”

    अदालत ने अपने आदेश में कहा कि नशे के व्यापार में लिप्त अपराधियों को सख्त सजा देना समाज और युवाओं के भविष्य के लिए आवश्यक है।
    इस्माइल शेख और इमरान अंसारी को अदालत ने 15 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है।

    📊 केस से जुड़ी अहम जानकारी:

    • 📍 स्थान: घाटकोपर, मुंबई
    • 📅 गिरफ्तारी की तारीख: 23 जनवरी 2022
    • ⚖️ कोर्ट: विशेष एनडीपीएस कोर्ट, मुंबई
    • 🚓 जब्त गांजा: 115 किलो
    • 💰 कीमत: ₹28.75 लाख
    • 👨‍⚖️ सजा: 15 साल की कैद (2 आरोपी)
    • 🙅‍♂️ बरी: 2 सप्लायर

    FAQ सेक्शन

    Q1. एनडीपीएस केस में कौन-कौन दोषी पाए गए?
    👉 इस्माइल शेख (पवई) और इमरान अंसारी (मुम्ब्रा) को दोषी करार दिया गया है।
    Q2. पुलिस ने कितनी मात्रा में गांजा जब्त किया था?
    👉 कुल 115 किलो गांजा, जिसकी कीमत लगभग ₹28.75 लाख बताई गई।
    Q3. सप्लायरों का क्या हुआ?
    👉 अल्ताफ शेख और ओडिशा के चक्रपाणि गौड़ा सबूतों के अभाव में बरी कर दिए गए।
    Q4. गिरफ्तारी कब हुई थी?
    👉 23 जनवरी 2022 को घाटकोपर बस डिपो के पास से दोनों आरोपी गिरफ्तार किए गए थे।
    Q5. अदालत ने क्या सजा सुनाई?
    👉 दोनों दोषियों को 15 साल की कठोर कैद और जुर्माने की सजा दी गई है।

  • Mumbai: नाबालिग बेटी से यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार पिता बरी — गवाही और सबूतों में मेल नहीं

    Mumbai: नाबालिग बेटी से यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार पिता बरी — गवाही और सबूतों में मेल नहीं

    मुंबई की पॉक्सो कोर्ट ने 35 वर्षीय व्यक्ति को नाबालिग बेटी से यौन शोषण के आरोप से बरी किया। अदालत ने कहा कि न तो पीड़िता और न ही उसकी मां ने कोई पुख्ता बयान दिया, जबकि मेडिकल रिपोर्ट में भी शोषण के निशान नहीं मिले।

    मुंबई: एक स्पेशल POCSO कोर्ट ने 35 वर्षीय पिता को नाबालिग बेटी के यौन शोषण के आरोप से बरी कर दिया, जिसे 2022 में गिरफ्तार किया गया था।
    अदालत ने साफ कहा कि गवाही और सबूतों में कोई मेल नहीं मिला, इसलिए आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

    🔹 क्या था मामला

    मामला कांदिवली पुलिस स्टेशन का है, जहाँ पीड़िता ने अपने पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
    शिकायत में कहा गया था कि लड़की की मां घरों में नौकरानी का काम करती है, जबकि पिता शराब के नशे में घर आते हैं।
    घटना के समय पीड़िता छठी कक्षा में पढ़ती थी

    लड़की का आरोप था कि गणपति उत्सव से कुछ दिन पहले, पिता शराब पीकर घर आए, दरवाज़ा बंद कर दिया और उसे कपड़े उतारने को कहा।
    वहां उन्होंने कथित तौर पर यौन शोषण किया और धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो जान से मार देंगे।
    उसने आगे कहा कि कुछ दिन बाद फिर उसने साथ सोने के लिए कहा और जब मां ने उसकी रोने की आवाज सुनी, तो मामला खुला।
    इसके बाद मां-बेटी ने जाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    🔹 अदालत में पलटी गवाही

    मामला जब अदालत पहुंचा, तो पीड़िता ने अपने बयान में कहानी बदल दी
    उसने कहा कि पिता ने सिर्फ मोबाइल चलाने और पढ़ाई न करने पर उसे और भाइयों को पीटा था
    यौन शोषण की कोई बात उसने अपने बयान में नहीं कही।
    यहां तक कि उसकी मां ने भी कहा कि पति ने कोई गलत काम नहीं किया

    🔹 डिफेंस की दलील और कोर्ट का निर्णय

    बचाव पक्ष की ओर से एडवोकेट सुवर्णा अवध वास्ट और राहुल डिंगणकर ने दलील दी कि
    पीड़िता और मां दोनों के बयानों में कोई पुख्तापन नहीं है और
    मेडिकल रिपोर्ट में भी किसी प्रकार की चोट या शोषण के निशान नहीं मिले

    कोर्ट ने माना कि कोई भी सबूत या गवाही आरोपों की पुष्टि नहीं करती
    इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया

    🔹 अदालत का अवलोकन

    न्यायाधीश ने कहा —

    “मां और बेटी दोनों ने बयान में शोषण का जिक्र नहीं किया।
    मेडिकल रिपोर्ट में भी किसी प्रकार की अंदरूनी या बाहरी चोट नहीं पाई गई।
    ऐसे में अदालत आरोपी को दोषी नहीं ठहरा सकती।”

    ⚖️ POCSO कोर्ट का रुख साफ: सबूत के बिना सज़ा नहीं

    पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत नाबालिगों से जुड़ी यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर
    तेज़ कार्रवाई और सख्त सज़ा का प्रावधान है।
    लेकिन अदालतों का यह भी मानना है कि
    यदि गवाहों और मेडिकल साक्ष्य में मेल नहीं बैठता,
    तो किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

    🟨 मुख्य बिंदु एक नजर में

    • आरोपी पिता की उम्र: 35 वर्ष
    • मामला दर्ज: कांदिवली पुलिस स्टेशन, 2022
    • कोर्ट: स्पेशल POCSO कोर्ट, मुंबई
    • नतीजा: गवाही और सबूतों में विरोधाभास के कारण बरी
    • मेडिकल रिपोर्ट: किसी भी प्रकार की चोट नहीं पाई गई

    FAQ सेक्शन

    Q1. आरोपी को किस मामले में गिरफ्तार किया गया था?
    → अपनी नाबालिग बेटी से यौन शोषण के आरोप में।
    Q2. कोर्ट ने उसे क्यों बरी किया?
    → क्योंकि पीड़िता और उसकी मां के बयान आरोपों से मेल नहीं खाते थे और कोई मेडिकल सबूत नहीं मिला।
    Q3. मामला किस पुलिस स्टेशन में दर्ज था?
    → कांदिवली पुलिस स्टेशन, मुंबई।
    Q4. पॉक्सो कानून क्या है?
    → यह कानून नाबालिगों के साथ यौन अपराधों पर कड़ी सज़ा और सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

  • दिल्ली की एक महिला से ढाई करोड़ रुपये की ठगी, मुंबई का वकील गिरफ्तार

    दिल्ली की एक महिला से ढाई करोड़ रुपये की ठगी, मुंबई का वकील गिरफ्तार

    मुंबई सत्र न्यायालय ने वकील विनय कुमार खातू की जमानत याचिका खारिज कर दी, जिन पर 74 वर्षीय क्लाइंट से 2.57 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। इसके पहले भी एड्वोकेट पर IAS अधिकारी बनकर लोगों को धोखा देने के मामले दर्ज हैं। A Delhi woman was duped of Rs 2.5 crore, a Mumbai lawyer was arrested

    मुंबई: सत्र न्यायालय ने वकील विनय कुमार खातू की जमानत याचिका खारिज कर दी है। खातू पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली की रहने वाली 74 वर्षीय महिला क्लाइंट के साथ धोखाधड़ी की है। आरोप है कि विनय कुमार खातू ने बॉम्बे हाईकोर्ट के जाली आदेश दिखाकर महिला से 2.57 करोड़ रुपये की ठगी की। न्यायालय ने कहा, कि अगर इस मामले में विनय कुमार खातू को जमानत दी जाती है, तो समाज में गलत संदेश जाएगा। A Delhi woman was duped of Rs 2.5 crore, a Mumbai lawyer was arrested

    एड्वोकेट के खिलाफ कई मामले दर्ज

    सत्र न्यायाधीश वीजी रघुवंशी ने कहा कि यह अदालत खातू के पुराने रिकॉर्ड को नजरअंदाज नहीं कर सकता। पहले भी विनय कुमार खातू पर IAS अधिकारी बनकर लोगों को धोखा देने के दो मामले दर्ज हैं। अगर अदालत खातू के पक्ष में फैसला सुनाती है, तो यह समाज के लिए गलत संदेश होगा। उन्होंने कहा, “आरोपों की गंभीरता और खातू के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए, मैं उन्हें जमानत नहीं दे सकता।” A Delhi woman was duped of Rs 2.5 crore, a Mumbai lawyer was arrested

    वॉट्सएप पर भेजे फर्जी दस्तावेज

    जज ने यह भी कहा कि अगर कोई WhatsApp चैट पर भरोसा करता है, तो उसे यह भी देखना होगा कि आरोपी ने अकाउंटेंट के साथ चैट में हाईकोर्ट से स्टे मिलने की बात कही थी। यह भी साफ है कि जाली आदेशों की तारीख के बाद बड़ी रकम उसके दोस्तों और सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर की गई थी। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी पर आपराधिक विश्वासघात और जाली दस्तावेज बनाने के आरोप भी लगाए गए हैं। A Delhi woman was duped of Rs 2.5 crore, a Mumbai lawyer was arrested

    जज ने कहा कि सिविल कोर्ट के फैसले को भी एक मूल्यवान सुरक्षा माना जा सकता है। अदालती फैसले अक्सर कानूनी अधिकारों और जिम्मेदारियों को बनाते या बदलते हैं। इसलिए, ये फैसले मूल्यवान सुरक्षा की परिभाषा में आते हैं। A Delhi woman was duped of Rs 2.5 crore, a Mumbai lawyer was arrested

    क्या है पूरा मामला ?

    पीड़ित महिला, उर्मिला ताल्यार खान, अलीबाग में एक जमीन के विवाद में फंसी हुई थीं। निचली अदालत ने उनके खिलाफ फैसला सुनाया था, जिसके बाद ताल्यार खान ने जिला अदालत में अपील की थी। उनके वकील सुनवाई के लिए नहीं आए, जिसके कारण 13 मार्च, 2018 को उनकी अपील खारिज हो गई। उस समय दिल्ली में रहने के कारण, उन्हें इस बारे में 2022 तक पता ही नहीं चला, क्योंकि उनके वकील ने उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं दी थी। A Delhi woman was duped of Rs 2.5 crore, a Mumbai lawyer was arrested

    दो करोड़ रुपये किया ट्रांसफर

    आरोप है कि ताल्यार खान की मुलाकात एक व्यापारी के जानकार के जरिए विनय कुमार खातू से हुई थी। उन्होंने खातू को छह मामलों के लिए वकील रखा, जिसमें जमीन विवाद की अपील और उनके पति के खिलाफ मुकदमा भी शामिल था। खातू ने कथित तौर पर प्रति मामले 10 लाख रुपये की भारी फीस ली। आरोप है कि उन्होंने अपने दोस्त के खाते से आरोपी से जुड़े लोगों के खातों में 2 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए हैं। A Delhi woman was duped of Rs 2.5 crore, a Mumbai lawyer was arrested

    एड्वोकेट ने दी सफाई

    एड्वोकेट विनय कुमार खातू की सलाह पर, उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में दूसरी अपील दायर की, जिसमें चार साल की देरी को माफ करने और स्टे ऑर्डर के लिए आवेदन किया गया था। फिलहाल आरोपों को नकारते हुए, आरोपी ने कहा कि उन्हें 19 अक्टूबर, 2024 को गिरफ्तार किया गया था। वकील ने कहा कि उनसे कुछ भी बरामद करने की जरूरत नहीं है। सबूतों से छेड़छाड़ की कोई संभावना नहीं है। A Delhi woman was duped of Rs 2.5 crore, a Mumbai lawyer was arrested