महाराष्ट्र के उल्वे में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही बार डांसर पर उसके 40 वर्षीय पार्टनर ने हमला कर दिया। महिला ने उल्वे पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया है। जानें पूरी खबर विस्तार से।
महाराष्ट्र: नवी मुंबई के उल्वे इलाके से एक चौंकाने वाली वारदात सामने आई है। शुक्रवार (19 सितंबर) को 24 वर्षीय बार डांसर महिला पर उसके लिव-इन रिलेशनशिप के पार्टनर ने बेरहमी से हमला कर दिया। आरोपी की पहचान 40 वर्षीय रूपेश विलंकर के तौर पर हुई है, जो पिछले आठ साल से पीड़िता के साथ रह रहा था।
नया घर देखने पर भड़का आरोपी
पुलिस के मुताबिक, पीड़िता उसी दिन उल्वे सेक्टर-23 में नया फ्लैट देखने गई थी। जब वह घर लौटी, तो आरोपी ने गुस्से में आकर गालियां देना शुरू कर दिया। बहस इतनी बढ़ गई कि विलंकर ने महिला की पिटाई कर दी।
पुलिस शिकायत और जांच
हमले के बाद महिला सीधे उल्वे पुलिस स्टेशन पहुंची और शिकायत दर्ज कराई। उल्वे पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मारपीट और गाली-गलौज की धाराओं में केस दर्ज किया है। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अर्जुन रजाने ने बताया कि,
“महिला के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज है और जांच जारी है।”
इमारत के पड़ोसियों ने बताया कि दोनों के बीच अक्सर झगड़े होते रहते थे। एक निवासी ने कहा,
“हमने कई बार दोनों को झगड़ते सुना है। इस बार मामला गंभीर हो गया और महिला जोर-जोर से रो रही थी। इसके बाद फिर से चीख-पुकार सुनाई दी।”
मेडिकल जांच जारी, आरोपी फरार
पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। वहीं, आरोपी रूपेश विलंकर अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस की टीम उसकी तलाश कर रही है और इलाके में कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
❓ FAQ सेक्शन
Q1. यह घटना कब हुई? ➡️ घटना शुक्रवार, 19 सितंबर की है।
Q2. पीड़िता कौन है और उसकी उम्र कितनी है? ➡️ पीड़िता 24 वर्षीय बार डांसर है, जो पिछले आठ साल से आरोपी के साथ रह रही थी।
Q3. आरोपी कौन है और उसके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है? ➡️ आरोपी का नाम रूपेश विलंकर (40 वर्ष) है। उसके खिलाफ मारपीट और गाली-गलौज की धाराओं में केस दर्ज हुआ है।
Q4. क्या आरोपी गिरफ्तार हो चुका है? ➡️ रविवार तक आरोपी फरार है, लेकिन पुलिस उसकी तलाश में है।
मुंबई कांदिवली (पूर्व) ठाकुर विलेज इलाके में अवैध फेरीवालों और ऑटो रिक्शा स्टैंड के कारण ट्रैफिक जाम और गंदगी से लोग परेशान। डेंगू-मलेरिया का खतरा बढ़ा, नागरिकों ने शिकायतें दर्ज कराई लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई जैसे महानगर में हर दिन लाखों लोग सफर करते हैं। लेकिन यहां की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है सड़क पर कब्जा जमाए हुए अवैध फेरीवाले और ट्रैफिक जाम। कांदिवली (पूर्व) का ठाकुर विलेज और समता नगर इलाका भी इन समस्याओं से बुरी तरह जूझ रहा है।
यहां अप्पर आयुक्त कार्यालय से लेकर ठाकुर कॉलेज के सामने तक की सड़क पर पचासों फेरीवाले रोजाना अवैध दुकानें लगाते हैं। सड़कें पूरी तरह कब्जाई जाती हैं, जिससे स्थानीय लोग और राहगीर परेशान हैं।
गंदगी और बीमारी का खतरा
फेरीवालों के कारण इलाके में गंदगी इतनी बढ़ गई है कि डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि सड़क किनारे सब्ज़ियां, फल और खाने-पीने का सामान गंदगी के बीच बेचा जाता है। इससे न सिर्फ संक्रमण फैलने का खतरा है बल्कि बच्चों और बुज़ुर्गों की सेहत भी दांव पर लग रही है।
एक स्थानीय निवासी ने बताया: “हर तरफ कचरा और बदबू फैली रहती है। बारिश में तो हालत और खराब हो जाती है। चारों तरफ पानी भरने के बाद मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। अगर अभी कार्रवाई नहीं हुई तो इलाके में डेंगू और मलेरिया के केस तेजी से बढ़ेंगे।”
फेरीवालों के साथ-साथ यहां ऑटो रिक्शा वालों ने भी अपने-अपने अनधिकृत स्टैंड बना लिए हैं।
सड़क के दोनों ओर ऑटो खड़े रहते हैं।
इससे यातायात बाधित होता है और कभी-कभी तो रास्ता पूरी तरह जाम हो जाता है।
लोगों को ऑफिस, स्कूल और अस्पताल पहुंचने में दिक्कत आती है।
एक कॉलेज स्टूडेंट ने शिकायत करते हुए कहा: “सुबह-शाम ट्रैफिक इतना बढ़ जाता है कि कॉलेज पहुंचने में आधा घंटा ज्यादा लग जाता है। पुलिस और बीएमसी को रोजाना यह जाम दिखता है, लेकिन फिर भी कोई कदम नहीं उठाया जाता।”
शिकायतें हुईं लेकिन कार्रवाई नहीं
स्थानीय नागरिकों ने इस समस्या को लेकर कई बार शिकायतें दर्ज कराई हैं।
सहायक आयुक्त, आर/दक्षिण वार्ड
डीएमसी संजय कुर्हाडे
सहायक आयुक्त मनीष सालवे
को लिखित में शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
लोगों का आरोप है कि अधिकारी सिर्फ शिकायतें सुनते हैं, लेकिन कार्रवाई करने में बिल्कुल भी रुचि नहीं दिखाते।
नागरिकों का आक्रोश – जिम्मेदार कौन?
इलाके के लोगों का कहना है कि
जब तक अवैध फेरीवालों और ऑटो वालों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक समस्या बनी रहेगी।
बीएमसी और पुलिस दोनों की जिम्मेदारी है कि वे मिलकर इलाके को फेरीवालों और जाम से मुक्त कराएं।
लेकिन अधिकारियों का रवैया देखकर लगता है कि उन्हें जनता की परेशानी से कोई मतलब नहीं है।
एक बुज़ुर्ग महिला ने कहा: “हमारे घर के सामने रोजाना फेरीवाले दुकान लगाते हैं। गली में चलना भी मुश्किल हो गया है। कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं। आखिर हमें ही क्यों भुगतना पड़ रहा है?”
खतरनाक हालात – कभी भी हो सकता है हादसा
स्थानीय लोग डर के साए में जी रहे हैं।
जाम की वजह से एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी इमरजेंसी गाड़ियां भी फंस जाती हैं।
कहीं भी अनचाही दुर्घटना हो सकती है।
भीड़ और अव्यवस्था से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ गया है।
वरिष्ठ निरीक्षक की जिम्मेदारी
अब लोगों की नज़रें अतिक्रमण एवं निर्मूलन विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक नंदकुमार आवारे पर टिकी हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि वे जल्द से जल्द कार्रवाई करेंगे और इलाके को अवैध फेरीवालों और ऑटो वालों से मुक्त कराएंगे।
मुंबई के अन्य इलाकों की कहानी भी ऐसी ही
गौर करने वाली बात यह है कि सिर्फ कांदिवली ही नहीं, बल्कि मुंबई के कई हिस्सों – दहिसर, बोरीवली, मलाड और अंधेरी – में भी यही समस्या देखी जाती है। जहां-जहां लोकल ट्रेन स्टेशन और कॉलेज हैं, वहां अवैध फेरीवालों का कब्जा आम बात है।
इससे साफ है कि यह समस्या सिर्फ एक इलाके की नहीं, बल्कि पूरे मुंबई शहर की है।
लोगों की मांग – कड़ी कार्रवाई हो
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि:
1. अवैध फेरीवालों के खिलाफ तुरंत निर्मूलन अभियान चलाया जाए। 2. ऑटो रिक्शा वालों को सिर्फ निर्धारित स्टैंड पर खड़ा करने का आदेश दिया जाए। 3. गंदगी साफ करने के लिए बीएमसी की सफाई टीम को रोजाना तैनात किया जाए। 4. इलाके में पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए ताकि दोबारा अवैध कब्जा न हो।
कांदिवली (पूर्व) का यह मुद्दा आज की मुंबई की असलियत बयान करता है।
अवैध फेरीवाले और ऑटो वाले
प्रशासन की लापरवाही
और आम जनता की परेशानी
यह सिर्फ एक लोकल समस्या नहीं है, बल्कि एक ऐसा सवाल है जो हर मुंबईकर के दिल में है – “जनता की शिकायतें कब सुनी जाएंगी और कार्रवाई आखिर कब होगी?”
मुंबई मोनोरेल 20 सितंबर 2025 से अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेगी। MMRDA ने बताया कि CBTC सिग्नलिंग सिस्टम, नए ट्रेन रेक्स और फ्लेट ओवरहॉल के लिए यह कदम जरूरी है। पूरी जानकारी यहां पढ़ें।
मुंबई: माया नगरी मुंबई के शहर वासियों के लिए बड़ी खबर है। मुंबई मोनोरेल 20 सितंबर 2025 से पूरी तरह बंद रहेगी। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) ने बताया कि यह बंदी इसलिए जरूरी है ताकि नए ट्रेन रेक्स, एडवांस्ड CBTC सिग्नलिंग और फ्लेट रिफर्बिशमेंट का काम बिना रुकावट पूरा किया जा सके।
❓ क्यों बंद की जा रही है मोनोरेल?
यह बंदी पूरा 19.74 किमी रूट (चेंबूर से संत गाडगे महाराज चौक) पर लागू होगी।
अभी तक अपग्रेड और टेस्टिंग का काम सिर्फ रात में 3.5 घंटे की विंडो में हो रहा था, लेकिन यह टाइम बहुत कम है।
अब लगातार 24×7 अपग्रेड वर्क चलेगा ताकि सिस्टम जल्दी से चालू हो सके।
🔧 कौन-कौन से अपग्रेड होंगे?
नए ट्रेन रेक्स (Rolling Stock)
कुल 10 नए ट्रेन रेक्स Make in India प्रोजेक्ट के तहत लाए जा रहे हैं।
8 रेक्स मुंबई पहुँच चुके हैं, 9वां टेस्टिंग में है और 10वां असेंबली में है।
एडवांस्ड CBTC सिग्नलिंग सिस्टम
यह पहली बार मुंबई मोनोरेल में लगेगा।
सिस्टम हैदराबाद में डिवेलप हुआ है और इसका वर्किंग टेस्ट लगभग पूरा है।
फ्लेट रिफर्बिशमेंट और स्टाफ ट्रेनिंग
पुराने रेक्स की पूरी मरम्मत और अपग्रेड होगी।
ट्रेनिंग सेफ्टी और ऑपरेशन के हिसाब से होगी ताकि आने वाले मेट्रो प्रोजेक्ट्स में भी फायदा मिले।
सोमवार सुबह मुंबई मोनोरेल वडाला के पास अचानक रुक गई। 17 यात्री कुछ देर तक फंसे रहे। MMRDA ने सुरक्षित निकाला और 9.30 बजे तक सेवाएं सामान्य हुईं।
मुंबई: सोमवार सुबह करीब 7:15 बजे मुंबई मोनोरेल का एक ट्रेन रैक वडाला के पास, Antop Hill Bus Depot और GTBN स्टेशन के बीच अचानक रुक गया। इसमें मौजूद 17 यात्री करीब आधे घंटे तक फंसे रहे। कारण था – पावर सप्लाई फेलियर।
सभी यात्री सुरक्षित निकाले गए
MMRDA (मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी) के प्रवक्ता ने बताया कि सुबह 7:45 बजे तक सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। फंसे यात्रियों को चेम्बूर से आई दूसरी ट्रेन में शिफ्ट किया गया। राहत की बात यह रही कि किसी भी यात्री को चोट नहीं आई।
फायर ब्रिगेड और टेक्निकल टीम मौके पर
सावधानी के लिए मुंबई फायर ब्रिगेड भी मौके पर पहुंची। इस बीच टेक्निकल टीम ने खराब ट्रेन को तोड़कर हटाने और टो करने का काम किया। अधिकारियों ने बताया कि इस रैक की डिटेल जांच की जाएगी ताकि असली वजह पता चल सके।
घटना के दौरान संत गाडगे महाराज चौक से वडाला के बीच मोनोरेल एक ही ट्रैक पर चलाई गई, जिससे थोड़ी देरी हुई।
वहीं, वडाला से चेम्बूर के बीच सेवाएं सामान्य चलती रहीं।
सुबह 9:30 बजे तक पूरे 20 किमी कॉरिडोर (चेम्बूर-वडाला-संत गाडगे महाराज चौक) पर सेवाएं सामान्य कर दी गईं।
बार-बार हो रहे हैं मोनोरेल में अड़चन
मुंबई मोनोरेल, जो देश की इकलौती मोनोरेल सेवा है, 2014 से फेज़ में शुरू हुई थी। लेकिन तब से इसमें कई बार रुकावटें आई हैं। खासतौर पर भारी बारिश के दौरान। पिछले महीने भी बारिश में दो मोनोरेल अलग-अलग जगह फंस गई थीं और यात्रियों को रेस्क्यू करना पड़ा था।
बारिश से शहर बेहाल
इसी बीच, मुंबई में रविवार सुबह से ही 100 मिमी से ज्यादा बारिश हुई।
दादर टीटी सर्कल पर पानी आधा से एक फुट तक भर गया।
खार सबवे (वाकोला) और पानबाई स्कूल के पास slip road पर भी आधा से एक फुट पानी जमा हुआ।
अंधेरी सबवे (वेस्ट) को 1 से 1.5 फुट पानी भरने की वजह से सुबह कुछ देर बंद करना पड़ा और ट्रैफिक को गोकुले ब्रिज पर डायवर्ट किया गया।
IMD ने जारी किया रेड अलर्ट
सुबह 8:30 बजे IMD (मौसम विभाग) ने मुंबई और आसपास के इलाकों के लिए रेड नाउकास्ट अलर्ट जारी किया। चेतावनी में कहा गया कि अगले 3 घंटे तक भारी से बहुत भारी बारिश, बिजली चमकने, तेज हवाएं (30-40 किमी प्रति घंटा) और तूफानी मौसम की संभावना है।
मुंबई DRT-III में नेशनल लोक अदालत के दौरान 122 मामले निपटाए गए और ₹34.69 करोड़ की रिकवरी हुई। इस प्रक्रिया में बैंक अफसरों, वकीलों और स्टाफ ने अहम भूमिका निभाई।
मुंबई:डेब्ट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल-III (DRT-III) में शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन हुआ। इस लोक अदालत में कुल 122 मामलों का निपटारा किया गया और बैंकों को करीब ₹34.69 करोड़ की रिकवरी हासिल हुई।
ये लोक अदालत स्रीकला सुरेश, इंचार्ज प्रेसीडिंग ऑफिसर के मार्गदर्शन में हुई। कार्यक्रम का संचालन पूरी तरह से सौहार्दपूर्ण माहौल में किया गया।
पैनल और मेंबर्स की अहम भूमिका
कार्यवाही की अध्यक्षता पूर्व प्रेसीडिंग ऑफिसर वी.एन. लोथे पाटिल ने की। उनके साथ पैनल में सुधांशु एस. साहू (डिप्टी जनरल मैनेजर, केनरा बैंक) और एडवोकेट सुनील हम्ब्रे मौजूद थे।
इनके सहयोग से कई जटिल मामले आसानी से सुलझे, जिससे बैंक और उधारकर्ताओं दोनों को राहत मिली।
122 मामले निपटाए गए, ₹34.69 करोड़ की रिकवरी
इस लोक अदालत में बैंकों के लंबे समय से पेंडिंग पड़े केसों का समाधान हुआ। इसमें अधिकतर मामले लोन रिकवरी और सेटलमेंट से जुड़े थे।
122 मामलों के समाधान के बाद ₹34.69 करोड़ की राशि रिकवर हुई। इसे बैंकिंग सेक्टर के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
DRT-III मुंबई के रजिस्ट्रार संजय जायसवाल ने सभी अफसरों, स्टाफ और लिटिगेंट्स का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन को सफल बनाने में पूरी टीम ने कड़ी मेहनत की।
उन्होंने खासतौर से स्टाफ मेंबर्स का नाम लेकर आभार जताया –
लोक अदालत को लेकर एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये एक ऐसा मंच है, जहां लंबे समय से पेंडिंग केस जल्दी और आपसी सहमति से सुलझाए जाते हैं। इससे अदालतों पर केसों का बोझ कम होता है और आम लोगों व बैंकों दोनों को राहत मिलती है।
मुंबई जैसे बड़े शहर में जहां बैंकिंग ट्रांजैक्शन और लोन से जुड़े विवाद बहुत आम हैं, वहां इस तरह की पहल बेहद कारगर साबित होती है।
मुंबई DRT-III की इस लोक अदालत ने दिखा दिया कि अगर सही माहौल और सहयोग मिले तो जटिल से जटिल केस भी आसानी से सुलझ सकते हैं। इस बार का नतीजा ₹34.69 करोड़ की रिकवरी के साथ काफी सकारात्मक रहा। उम्मीद है कि आगे भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे और बैंकिंग सेक्टर में पेंडिंग केसों का बोझ कम होगा।
ठाणे की घोडबंदर रोड पर गड्ढों और ट्रैफिक जाम से परेशान नागरिकों ने शुक्रवार को आनंद नगर सिग्नल पर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने गड्ढों में सिर डालकर सरकार का ध्यान खींचा।
ठाणे: मुंबई और ठाणे के बीच सबसे व्यस्त सड़कों में से एक घोडबंदर रोड पर गड्ढों और ट्रैफिक जाम से परेशान नागरिकों ने शुक्रवार को अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन आनंद नगर सिग्नल पर हुआ, जहां लोगों ने सड़क पर बने गड्ढों में सिर डालकर और पैर ऊपर उठाकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
गड्ढों में सिर डालकर किया विरोध
प्रदर्शनकारियों ने इस प्रतीकात्मक आंदोलन से यह संदेश दिया कि ठाणेकर रोजाना किस मुश्किल का सामना कर रहे हैं। गड्ढों की वजह से ट्रैफिक का बुरा हाल है, जिससे लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं। नागरिकों ने मांग की कि तुरंत सड़क की मरम्मत की जाए और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार किया जाए।
रोजमर्रा की जिंदगी पर असर
घोडबंदर रोड हजारों लोगों के लिए अहम कनेक्टिविटी रूट है। लेकिन, जगह-जगह गड्ढों और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से यहां से गुजरना खतरनाक हो गया है। यात्रियों का कहना है कि ट्रैफिक जाम और गड्ढों ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और कामकाज पर सीधा असर डाला है।
गड्ढों और ट्रैफिक की वजह से इस रूट पर हादसों का खतरा हमेशा बना रहता है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करेगा तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
भारी वाहन हादसा: ट्रैफिक पुलिस घायल
इसी बीच, बुधवार को घोडबंदर रोड के गौमुख घाट इलाके में दो कंटेनर ट्रकों की टक्कर में एक बड़ा हादसा हुआ। इस दौरान ड्यूटी पर मौजूद ट्रैफिक पुलिस अधिकारी नाइक तडवी गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके सिर और पैर में चोट आई, जिसके बाद उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
ट्रकों की टक्कर से घंटों जाम
हादसे के बाद ट्रैफिक कई किलोमीटर तक जाम हो गया। गाड़ियों की लंबी कतारें मिरारोड के फाउंटेन हॉटेल और नवघर तक देखी गईं। यह हादसा तब हुआ जब एक ट्रक का ड्राइवर कंट्रोल खो बैठा और सामने से आ रहे दूसरे कंटेनर से भिड़ गया।
नागरिकों की नाराजगी और उम्मीदें
प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि अब उनकी सहनशक्ति खत्म हो गई है। बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ठाणेकर उम्मीद कर रहे हैं कि इस प्रदर्शन के बाद प्रशासन गंभीरता से समस्या का हल निकालेगा।
बीएमसी ने मुंबई के एम/ईस्ट वार्ड में झोपड़पट्टी पुनर्विकास के लिए 26 प्रोजेक्ट्स पर दोबारा एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है। डेडलाइन 30 सितंबर तय।
मुंबई: शहर के झोपड़पट्टियों में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने एम/ईस्ट वार्ड (मानखुर्द, देवनार और गोवंडी) इलाके में 26 स्लम रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए फिर से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है।
🔹 पिछली बार क्यों अटका था मामला?
बीएमसी ने 10 मई को पहली बार 64 नगर पालिका प्लॉट्स पर पुनर्विकास का प्रस्ताव मांगा था। लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते 17 प्लॉट होल्ड पर रखे गए। बचे हुए 47 प्लॉट्स पर सिर्फ 29 प्रोजेक्ट्स को ही 100 ऑफर मिले। सबसे बड़ी समस्या ये रही कि 8 प्लॉट्स के लिए केवल 1-1 डेवलपर ने ही बोली लगाई थी।
🔹 अब नया फोकस एम/ईस्ट वार्ड पर
इस बार बीएमसी ने खास तौर पर मानखुर्द, देवनार और गोवंडी जैसे इलाकों पर फोकस किया है। ये इलाका कम आय वर्ग और भारी अतिक्रमण के लिए जाना जाता है। नई योजना के तहत करीब 8.37 लाख वर्गमीटर जमीन और लगभग 49,000 झोपड़ी संरचनाओं को रीडेवलपमेंट में शामिल किया जाएगा।
🔹 डेडलाइन और प्रक्रिया
EOI डॉक्यूमेंट उपलब्ध होगा: 15 सितंबर से
अंतिम तारीख: 30 सितंबर
जिम्मेदारी ठेकेदारों की:
झोपड़ी सर्वे
प्लानिंग
परमिट्स
टेनेमेंट निर्माण
मेंटेनेंस
सभी प्रोजेक्ट्स को DCPR-2034 की रेगुलेशन 33(10) के तहत लागू किया जाएगा।
पहले आए ऑफर्स ज्यादातर अंधेरी, बोरीवली और वर्ली जैसे पश्चिमी इलाकों के लिए थे। जबकि पूर्वी उपनगर जैसे मुलुंड और एम/ईस्ट वार्ड के लिए डेवलपर्स की दिलचस्पी बेहद कम रही। इसीलिए बीएमसी ने अब फिर से खास तौर पर इन इलाकों पर जोर दिया है।
मुंबई डिवीजन में सेंट्रल रेलवे ने 7 लाख से ज्यादा बिना टिकट यात्रियों से ₹30 करोड़ वसूले हैं। अप्रैल-अगस्त 2025 में रेलवे ने कुल ₹100 करोड़ से अधिक जुर्माना वसूला।
मुंबई:सेंट्रल रेलवे ने बिना टिकट और अवैध रूप से यात्रा करने वालों पर बड़ी कार्रवाई की है। रेलवे की टिकट चेकिंग टीमों ने वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल से अगस्त 2025) के बीच 17.19 लाख यात्रियों को पकड़ा और उनसे रिकॉर्ड ₹100.50 करोड़ का जुर्माना वसूला।
केवल मुंबई डिवीजन की बात करें तो, यहां 7.03 लाख यात्रियों को पकड़कर करीब ₹29.17 करोड़ का जुर्माना वसूला गया।
अगस्त 2025 में दिखा सख्ती का असर
अगस्त 2025 में रेलवे की चेकिंग टीमों ने अकेले महीने भर में 2.76 लाख यात्रियों को पकड़ा, जबकि अगस्त 2024 में यह संख्या 2.34 लाख थी। यानी इसमें 18% की बढ़ोतरी हुई है।
इस दौरान अगस्त 2025 में कुल ₹13.78 करोड़ का जुर्माना वसूला गया, जो अगस्त 2024 के ₹8.85 करोड़ से 55% ज्यादा है।
डिवीजनवार आंकड़े (अप्रैल-अगस्त 2025)
रेलवे ने बिना टिकट यात्रा करने वालों के खिलाफ सभी डिवीजनों में कार्रवाई की। इसमें वसूली का आंकड़ा इस प्रकार है:
सेंट्रल रेलवे ने बताया कि बिना टिकट यात्रियों को पकड़ने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाई जाती हैं। इसमें शामिल हैं:
स्टेशन चेक
एम्बुश चेक
फोर्ट्रेस चेक
इंटेंसिव चेक
मेगा टिकट चेकिंग ड्राइव
ये अभियान मेल/एक्सप्रेस, पैसेंजर, स्पेशल ट्रेनों के साथ-साथ मुंबई और पुणे लोकल ट्रेनों में भी चलाए जाते हैं।
टिकट फ्रॉड पर रोक: QR कोड बुकिंग बंद
रेलवे ने यह भी कदम उठाया कि UTS मोबाइल ऐप के जरिए स्टैटिक QR कोड से टिकट बुकिंग को बंद कर दिया गया है। वजह यह थी कि कई यात्री इस सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे रेलवे को राजस्व का नुकसान हो रहा था।
अब इस फैसले से पेपरलेस टिकटिंग सिस्टम के दुरुपयोग पर रोक लग गई है।
रेलवे की अपील
सेंट्रल रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे वैध टिकट खरीदकर ही यात्रा करें। बिना टिकट यात्रा करने पर न केवल जुर्माना लगता है बल्कि बार-बार पकड़े जाने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
रेलवे का कहना है कि यात्रियों की सुविधा और सम्मानजनक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए यह ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी जारी रहेगी।
CSMT स्टेशन के नीचे ब्रिटिश काल का गुप्त कैश वॉल्ट मिला। यह वॉल्ट 2002 तक रेलवे की नकदी रखने के लिए इस्तेमाल होता था।
मुंबई: एशिया के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के नीचे एक ऐसा रहस्य छिपा था, जिसे अब जाकर उजागर किया गया है। स्टेशन की भूमिगत सुरंग से जुड़ा यह गुप्त कैश वॉल्ट करीब 25 से 30 फीट गहराई पर बना है।
यह वॉल्ट ब्रिटिश दौर में बना था और इसे रेलवे की नकदी रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। खास बात यह है कि इस कमरे का इस्तेमाल साल 2002 तक किया जाता रहा।
2002 तक यहां रखा जाता था रेलवे का पैसा
यह गुप्त वॉल्ट ब्रिटिश आर्किटेक्ट फ्रेडरिक विलियम स्टीवंस की मूल डिज़ाइन का हिस्सा था, जिन्होंने 1888 में विक्टोरिया टर्मिनस (आज का CSMT) बनाया।
करीब एक सदी तक यह कमरा रेलवे का सबसे बड़ा फाइनेंशियल स्ट्रॉन्ग रूम रहा। यहां रोज़ाना रेलवे से जुड़ी नकदी सुरक्षित रखी जाती थी और बाद में उसे रिज़र्व बैंक में जमा कराया जाता था। इस वॉल्ट में दो बड़े सेफ रखे गए थे, जिनमें करोड़ों की रकम सुरक्षित रहती थी।
इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग और डिजिटल फाइनेंशियल सिस्टम आने के बाद इस वॉल्ट का इस्तेमाल धीरे-धीरे बंद हो गया और 2002 के बाद यह पूरी तरह से भुला दिया गया।
यह पहली बार नहीं है जब मुंबई की ज़मीन के नीचे ऐसे रहस्य सामने आए हैं। इससे पहले भी कई बार ब्रिटिश काल की छिपी हुई संरचनाएं सामने आ चुकी हैं:
2010 : मुंबई के जनरल पोस्ट ऑफिस (GPO) के नीचे 200 साल पुरानी पत्थर की सुरंग मिली थी। माना जाता है कि इसे फ्रेंच आक्रमण की आशंका से बचने के लिए बनाया गया था।
2016 : महाराष्ट्र राजभवन में प्री-World War I का 15,000 स्क्वायर फीट का विशाल बंकर मिला। इसमें 13 कमरे थे, जिनमें हथियार और जरूरी सामान रखा जाता था। 2019 में इसे म्यूज़ियम में बदल दिया गया।
2018 : JJ हॉस्पिटल में 132 साल पुराना भूमिगत कक्ष मिला, जिसने शोधकर्ताओं को चौंका दिया।
क्या मुंबई है ‘चैंबर ऑफ सीक्रेट्स’?
इतिहासकार मानते हैं कि ब्रिटिश राज के दौरान मुंबई को सुरक्षा, व्यापार और सैन्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भूमिगत नेटवर्क से जोड़ा गया था।
आज जब बार-बार ऐसी खोजें हो रही हैं—CSMT का वॉल्ट, राजभवन का बंकर, JJ हॉस्पिटल का चैंबर—तो सवाल उठता है कि शायद मुंबई आज भी रहस्यों का शहर है, जिसकी असली तस्वीर अभी सामने आना बाकी है।
विरासत और पर्यटन की संभावनाएं
इतिहासकारों का कहना है कि अगर इन जगहों को सही तरीके से संरक्षित कर हेरिटेज टूरिज्म का हिस्सा बनाया जाए, तो मुंबई न सिर्फ इतिहास प्रेमियों के लिए, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी और ज्यादा आकर्षक बन सकती है।
CSMT, जो पहले से ही यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है, अगर इस वॉल्ट को म्यूज़ियम के तौर पर जनता के लिए खोला जाए तो यह स्टेशन की शान को और बढ़ा सकता है।
मुंबई: अंधेरी इलाके के एक पिज्जा आउटलेट पर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। एक 23 वर्षीय स्टूडेंट ने आरोप लगाया कि उसने वेज पनीर टाको ऑर्डर किया था लेकिन उसे डिलीवरी में चिकन टाको सर्व कर दिया गया। मामला इतना बढ़ा कि पुलिस तक पहुंच गया और अब आउटलेट मैनेजर और एक स्टाफ पर केस दर्ज किया गया है। Mumbai: FIR lodged for serving chicken taco instead of veg
📌 कैसे शुरू हुआ मामला?
जानकारी के मुताबिक, स्टूडेंट जो डेटा साइंस की पढ़ाई कर रहा है, 26 अगस्त की रात करीब 9 बजे उसने ऑनलाइन क्लासेस के दौरान घर पर पिज्जा आउटलेट से खाना मंगवाया। उसने वेज पनीर टाको और मैक्सिकन टाको ऑर्डर किया।
जब ऑर्डर आया, उसने पहला बाइट लिया तो उसे स्वाद कुछ अजीब लगा। तुरंत जांच करने पर पता चला कि टाको में पनीर नहीं बल्कि चिकन था। चूंकि वह सख्त शाकाहारी है, यह गलती उसे बहुत अखर गई। Mumbai: FIR lodged for serving chicken taco instead of veg
📞 मैनेजर से शिकायत और माफी
स्टूडेंट ने तुरंत आउटलेट मैनेजर को फोन किया। मैनेजर ने इस गलती के लिए माफी मांगी और आश्वासन दिया कि ऐसा दोबारा नहीं होगा। लेकिन स्टूडेंट ने इसे सिर्फ “माफ़ी” तक सीमित नहीं रखा और कानून का सहारा लेने का फैसला किया।
मुंबई जैसे महानगर में जहां वेज और नॉनवेज खाने वालों की बड़ी तादाद है, वहां इस तरह का मिक्सअप गंभीर विवाद खड़ा कर सकता है। कई लोग धार्मिक और व्यक्तिगत कारणों से नॉनवेज नहीं खाते। ऐसे में गलती से भी नॉनवेज परोसना एक बड़ी लापरवाही मानी जाती है। Mumbai: FIR lodged for serving chicken taco instead of veg
⚖️ सोशल मीडिया पर चर्चा
यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग स्टूडेंट के फैसले का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ का कहना है कि यह आउटलेट की मानवीय गलती हो सकती है। लेकिन ज्यादातर यूज़र्स का कहना है कि फूड इंडस्ट्री में इतनी लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। Mumbai: FIR lodged for serving chicken taco instead of veg
विश्वासघात का मामला
यह घटना सिर्फ एक स्टूडेंट और पिज्जा आउटलेट का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे फूड इंडस्ट्री के लिए चेतावनी है कि ग्राहक की डिमांड और उनकी डाइटरी प्राथमिकताओं का सम्मान करना बेहद ज़रूरी है। छोटी-सी गलती भी विश्वास तोड़ सकती है और कानूनी कार्रवाई तक ले जा सकती है। Mumbai: FIR lodged for serving chicken taco instead of veg