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  • बॉम्बे हाईकोर्ट: संविधान झुग्गीवासियों का रक्षक, उन्हें सम्मान, सुरक्षा और जीवन के बुनियादी मानकों के साथ जीने का अधिकार

    बॉम्बे हाईकोर्ट: संविधान झुग्गीवासियों का रक्षक, उन्हें सम्मान, सुरक्षा और जीवन के बुनियादी मानकों के साथ जीने का अधिकार

    सरकार झुग्गी-झोपड़ियों पर जबरन तोड़क कार्रवाई नहीं कर सकती। बॉम्बे हाईकोर्ट में हुए ऐतिहासिक फैसले में न्यायाधीशों ने स्पष्ट कह दिया, कि संविधान झुग्गीवासियों की रक्षा करता है, उन्हें सम्मान, सुरक्षा और जीवन के बुनियादी मानकों के साथ जीने का समान अधिकार है। Bombay High Court: Constitution is the protector of slum dwellers, they have right to live with dignity, security and basic standards of living

    मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि भारत का संविधान एक ‘जीवंत ढांचा’ है, साथ ही कहा कि झुग्गी-झोपड़ियों या अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले लोगों को संविधान के तहत संरक्षण दिया जाता है। हाईकोर्ट ने विकास नियंत्रण और संवर्धन विनियमन (DCPR) 2034 के विनियमन 17(3)(डी)(2) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, जो DCPR 2034 के तहत ‘खुले स्थान’ के रूप में आरक्षित भूमि पर अतिक्रमण किए गए झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों के पुनर्वास का प्रावधान करता है। Bombay High Court: Constitution is the protector of slum dwellers, they have right to live with dignity, security and basic standards of living

    वास्तविकताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते

    जस्टिस अमित बोरकर और ज‌स्टिस सोमशेखर सुंदरसन की खंडपीठ ने इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कहा, कि मुंबई में खुले स्थानों को बनाए रखने का एकमात्र समाधान कानूनों को सख्ती से लागू करना और अतिक्रमण करने वालों – झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों को बेदखल करना है। जजों ने आदेश में कहा, “निश्चित रूप से, जनसंख्या दबाव, आर्थिक असमानता और शहरी गरीबी से मुक्त एक आदर्श दुनिया में, इस दृष्टिकोण को मजबूत संवैधानिक समर्थन मिल सकता है। लेकिन यह न्यायालय मुंबई में शहरी जीवन की वास्तविकताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकता। Bombay High Court: Constitution is the protector of slum dwellers, they have right to live with dignity, security and basic standards of living

    परिस्थितियों को समझना होगा

    संविधान केवल एक सैद्धांतिक दस्तावेज नहीं है; यह एक जीवंत ढांचा है, और यह जिन अधिकारों की गारंटी देता है, खासकर अनुच्छेद 21 के तहत, उन्हें वास्तविक, रोजमर्रा की परिस्थितियों के प्रकाश में समझा जाना चाहिए। यह सच है कि स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार जीवन के अधिकार का हिस्सा है। लेकिन यह भी उतना ही सच है, और सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्धारित किया है कि आश्रय और पर्याप्त आवास का अधिकार भी अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित मानव सम्मान और व्यक्तिगत सुरक्षा का एक हिस्सा है।” Bombay High Court: Constitution is the protector of slum dwellers, they have right to live with dignity, security and basic standards of living

    हालांकि वह वैध नहीं है पर निंदा नहीं की जानी चाहिए

    अपने 191-पृष्ठ के फैसले में, न्यायाधीशों ने कहा कि झुग्गी-झोपड़ियों या अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले लोग संविधान के संरक्षण से बाहर नहीं हैं। जस्टिस बोरकर की ओर से लिखे गए आदेश में कहा गया है, “उनके पास भूमि का कानूनी स्वामित्व नहीं हो सकता है, लेकिन उन्हें सम्मान, सुरक्षा और जीवन के बुनियादी मानकों के साथ जीने का समान अधिकार है। जब वे अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि तत्काल आवश्यकता और मजबूरी के कारण भूमि पर कब्जा करते हैं, तो उनके कृत्य की, हालांकि वह वैध नहीं है, निंदा नहीं की जानी चाहिए, बल्कि उसे सहानुभूति के साथ देखा जाना चाहिए। संविधान अपने मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक सिद्धांतों के माध्यम से यह मानता है कि गरीबी और असमानता संरचनात्मक समस्याएं हैं, और राज्य से उन्हें कम करने के लिए सकारात्मक कदम उठाने के लिए कहता है।” Bombay High Court: Constitution is the protector of slum dwellers, they have right to live with dignity, security and basic standards of living

    गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार

    जजों ने कहा कि पर्यावरण अधिकारों और आवास अधिकारों को एक दूसरे के विरोधी के रूप में मानने का याचिकाकर्ताओं का तर्क एक गलती होगी। पीठ ने कहा, “दोनों अनुच्छेद 21 का हिस्सा हैं और दोनों ही गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार की रक्षा करते हैं। जिस तरह प्रदूषित हवा और पानी मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं, उसी तरह असुरक्षित, भीड़भाड़ वाले और अस्वास्थ्यकर रहने की स्थिति भी नुकसान पहुंचाती है। हरे-भरे स्थानों की इस तरह से रक्षा करना कानूनन गलत और सिद्धांत रूप में अनुचित होगा, जिससे हजारों परिवार बेघर हो जाएं और उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया या विकल्प न मिलें। इस तरह की कार्रवाई अनुच्छेद 21 की रक्षा करने के बजाय उसका उल्लंघन कर सकती है।” Bombay High Court: Constitution is the protector of slum dwellers, they have right to live with dignity, security and basic standards of living

    पुनर्वास की अनुमति

    ये टिप्पणियां विकास नियंत्रण एवं संवर्धन विनियमन (DCPR) 2034 के विनियमन 17(3)(डी)(2) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए की गईं, जो झुग्गी-झोपड़ियों द्वारा अतिक्रमण की गई मूल रूप से आरक्षित खुली भूमि का उपयोग झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों के पुनर्वास के लिए करने की अनुमति देता है। विनियमन ऐसी भूमि के केवल 65 प्रतिशत के उपयोग की अनुमति देता है, यदि उक्त भूमि 500 ​​वर्ग मीटर से अधिक है और यह अनिवार्य करता है कि उक्त भूमि का 35 प्रतिशत हिस्सा खुली जगह, पार्क, उद्यान और/या मनोरंजन के मैदान आदि के लिए आरक्षित रखा जाना चाहिए। Bombay High Court: Constitution is the protector of slum dwellers, they have right to live with dignity, security and basic standards of living

    संविधान झुग्गीवासियों की रक्षा करता है

    हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि उनके निर्णय को शहर में खुली जगहों को कम करने के लिए राज्य को खुली छूट देने के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने स्पष्ट कर दिया, कि संविधान झुग्गीवासियों की रक्षा करता है, उन्हें सम्मान, सुरक्षा और जीवन के बुनियादी मानकों के साथ जीने का समान अधिकार है। Bombay High Court: Constitution is the protector of slum dwellers, they have right to live with dignity, security and basic standards of living

  • मुख्यमंत्री ने SRA परियोजना के लिए मोबाइल एप लॉन्च किया।

    मुख्यमंत्री ने SRA परियोजना के लिए मोबाइल एप लॉन्च किया।

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण के लिए गुरुवार को “SRA Brihanmumbai” मोबाइल ऐप्लिकेशन को लॉन्च किया। इसके तहत नागरिकों को बिल्डर, आर्किटेक्ट और परियोजनों से प्रभावित व्यक्तियों को योजना की जानकारी मिल सकेगी। Chief Minister launched mobile app for SRA project

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    Mumbai SRA News:
    गुरुवार को राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य अतिथिगृह “सह्याद्री” में झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) की समीक्षा बैठक ली। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मुंबई झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) के लिए “SRA Brihanmumbai” नामक मोबाइल ऐप्लिकेशन लॉच किया। इस ऐप से नागरिकों को बिल्डरों को, आर्किटेक्ट वर्ग को और परियोजनाओं से प्रभावित व्यक्तियों को योजना की जानकारी मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने एसआरए के अधिकारियों को वेबसाइट पर नागरिकों के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। आप इस ऐप्लिकेशन को यहां से भी डायरेक्ट Download कर सकते हैं। Chief Minister launched mobile app for SRA project

    पहाडों पर बने झोपडों का पुनर्वसन

    इसी बैठक के दौरान मुंबई समेत राज्य के दूसरे शहरों में पहाड़ों पर बनी झोपड़पट्टियों के पुनर्वसन के लिए भी स्वतंत्र नीति बनाने को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र झोपड़ा धारकों को उनके मौजूदा निवास के पास ही पुनर्वसन किया जाना चाहिए। बैठक में उपमुख्यमंत्री तथा गृहनिर्माण मंत्री एकनाथ शिंदे, प्रदेश गृहनिर्माण राज्यमंत्री पंकज भोयर, राज्य की मुख्य सचिव सुजाता सौनिक, गृहनिर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम गुप्ता, झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेंद्र कल्याणकर आदि उपस्थित थे। Chief Minister launched mobile app for SRA project

    एसआरए खरीदेगी जमीन

    बैठक में एसआरए की इमारतों के लिए जमीन खरीदने का फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुंबई समेत बड़े शहरों में पहाड़ों पर काफी झोपड़े बने हुए हैं। ऐसी झोपड़पट्टियां बारिश के दिनों में भूस्खलन और पत्थर गिरने से धोकादायक हो जाते हैं। इसलिए पहाड़ों पर बनी झोपड़पट्टियों के पुनर्वसन के लिए अलग से नीति बनाएं और जरूरत पड़ने पर जमीन भी खरीदें। Chief Minister launched mobile app for SRA project

    दिसंबर तक पूरा होगा बायोमेट्रिक सर्वेक्षण

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बायोमेट्रिक पद्धति पर आधारित घर-घर सर्वेक्षण का काम दिसंबर तक पूरा हो जाना चाहिए। झोपड़पट्टी के जो घर बंद हैं, ऐसे घरों का रिकॉर्ड तैयार किए जाने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि मुंबई महानगर पालिका के सेवानिवृत्त अधिकारियों का सेल तैयार करें। इसके माध्यम से समूह विकास (क्लस्टर) योजना को गति मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि घाटकोपर के रमाबाई आंबेडकर नगर झोपड़पट्टी पुनर्वसन के काम को गति से पूरा किया जाना अतिआवश्यक है। उन्होंने आदेश देते हुए यह भी कहा, कि “समुद्र के पास की जगह का पुनर्वसन के लिए उपयोग करें।” Chief Minister launched mobile app for SRA project

    पुणे के नागरिकों को पुनर्वसन का आदेश

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि पुणे शहर के परियोजना से प्रभावित नागरिकों को स्थायी रूप से पुनर्वसन करें। उन्हें किराया अथवा अन्य विकल्प खोजकर घर देने की व्यवस्था करें। उन्होंने कहा कि पुणे शहर के नदी किनारे बसे झोपड़ा धारकों को बाढ़ का सामना करना पड़ता है। ऐसे झोपड़ों का गृहनिर्माण विभाग की योजना के जरिए पुनर्वसन करें। Chief Minister launched mobile app for SRA project

  • Mumbai: प्रॉपर्टी विवाद को लेकर छोटी बहन की हत्या, 50 वर्षीय गिरफ्तार

    Mumbai: प्रॉपर्टी विवाद को लेकर छोटी बहन की हत्या, 50 वर्षीय गिरफ्तार

    विलेपार्ले में एक प्रॉपर्टी विवाद को लेकर 50 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी ही छोटी बहन के पेट में चाकू घोंपकर हत्या कर दी है। बेरोजगार आरोपी उसी बहन के साथ रहता था। पुलिस ने किया गिरफ्तार। (Mumbai 50 year old arrested for murder of younger sister over property dispute)

    मुंबई- विलेपार्ले पश्चिम में प्रॉपर्टी विवाद को लेकर एक महिला की हत्या कर दी गई। हत्यारा कोई और नही उसी का बड़ा भाई था। जो पीड़ित परिवार के साथ ही अपने बच्चों को लेकर रहता था। उनका भरण-पोषण भी मृतक 45 वर्षीय महिला ही कर रही थी। पेशे से शिक्षिका के भाई ने विवाद के चलते महिला के पेट में चाकू घोंप दिया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। (Mumbai 50 year old arrested for murder of younger sister over property dispute)

    SRA प्रोजेक्ट बना जान का दुश्मन

    पुलिस ने 50 वर्षीय आरोपी आशीष करंदीकर को गिरफ्तार किया है। जो पेशे से बेरोजगार और पीड़िता अनव्या करंदीकर-पिंगनकर के साथ ही रहता था। अनव्या एक निजी स्कूल में शिक्षिका थी। बताया जाता है कि इलाके मे एसआरए प्रोजेक्ट का काम चल रहा है। इसी को लेकर परिवार के बीच विवाद चल रहा था। (Mumbai 50 year old arrested for murder of younger sister over property dispute)

    प्रॉपर्टी को लेकर बहस

    गौरतलब है कि अनव्या आरोपी के बच्चों की देखभाल भी कर रही थी। पुलिस के अनुसार, 45 वर्षीय अनव्या, उसका पति आशीष और भाई-बहन की मां विले पार्ले पश्चिम में एक चॉल में रहते थे। अधिकारियों ने बताया कि चॉल के पुनर्विकास को लेकर चर्चा चल रही थी, जिसके कारण अक्सर दोनों के बीच बहस हुआ करती थी। (Mumbai 50 year old arrested for murder of younger sister over property dispute)

    चाकू से कई वार

    सुबह करीब 8.15 बजे उनके बीच फिर से झगड़ा हुआ और गुस्से में आकर आशीष ने कथित तौर पर अनव्या के पेट में चाकू से कई वार कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे जुहू के कूपर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। (Mumbai 50 year old arrested for murder of younger sister over property dispute)

  • महाराष्ट्र सरकार की कुटिल साजिश अदानी को दिया नमक की जमीन

    महाराष्ट्र सरकार की कुटिल साजिश अदानी को दिया नमक की जमीन

    महाराष्ट्र सरकार एक कुटिल साजिश के तहत धारावी प्रकल्प के साथ सरकारी नमक की जमीन भी सौंप दे रही है। इसके खिलाफ मुंबई कांग्रेस प्रमुख एवं पूर्व शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ ने आवाज उठाई। (Maharashtra government’s devious conspiracy gave salt land to Adani)

    इस्माईल शेख
    मुंबई
    – कांग्रेस सांसद एवं पूर्व शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ ने बुधवार को महाराष्ट्र सरकार पर धारावी झुग्गी-बस्ती के पुनर्विकास की आड़ में मुंबई महानगर क्षेत्र में पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील 1,500 एकड़ नमक की जमीन अदाणी समूह को सौंपने की ‘कुटिल साजिश’ रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई के लोगों की जमीन हड़पने के लिए इस व्यापारिक समूह का इस्तेमाल किया जा रहा है। (Maharashtra government’s devious conspiracy gave salt land to Adani)

    धारावी प्रोजेक्ट ..

    धारावी पुनर्विकास प्रोजेक्ट आवासीय एवं कमर्शियल इकाइयों के निर्माण के लिए अदाणी समूह और राज्य सरकार के बीच एक पार्टनरशिप है। पूर्व शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ ने कांजुरमार्ग क्षेत्र का दौरा करने और अधिकारियों के साथ चर्चा करने के बाद आरोप लगाते हुए कहा, ‘राज्य सरकार ने धारावी पुनर्विकास परियोजना की आड़ में एमएमआरडीए में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील 1,500 एकड़ नमक की जमीन अदाणी समूह को सौंपने की एक कुटिल साजिश रची है।’ (Maharashtra government’s devious conspiracy gave salt land to Adani)

    ग्लोबल वार्मिंग का खतरा ..

    उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि ”भ्रष्ट” सरकार व्यापारिक घराने को लाभ पहुंचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। उन्होंने इसके साथ ही गरीब झोपड़ा धारकों के हितों पर आवाज बुलंद करते हुए पात्रता मानदंड की परवाह किए बिना धारावी झुग्गी-बस्ती के सभी निवासियों के पुनर्वास की मांग की है। उन्होंने कहा, ‘मुंबई का भविष्य बिक्री के लिए नहीं है। नमक वाली भूमि के पुनर्ग्रहण से संभावित रूप से बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो सकता है।’ (Maharashtra government’s devious conspiracy gave salt land to Adani)

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