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  • मालेगांव ब्लास्ट के सभी आरोपी कैसे हो गए बरी? जांच एजेंसियों के खिलाफ जनहित याचिका की तैयारी

    मालेगांव ब्लास्ट के सभी आरोपी कैसे हो गए बरी? जांच एजेंसियों के खिलाफ जनहित याचिका की तैयारी

    महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितम्बर 2008 को हुए बम धमाके के आरोप में गिरफ्तार 7 अभियुक्तों को विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। इसमें जांच एजंसियों की चूक प्रकाश में आते ही हाईकोर्ट के वकील नितिन सातपुते ने जनहित याचिका दायर करने का फैसला किया है। अदालत ने यह भी कहा, “सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है।” How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies

    मुंबई: देश के बड़े आतंकी हमले में शुमार मालेगांव ब्लास्ट का मामला मुंबई की विशेष एनआईए अदालत में खत्म हो चुका है। आखिरकार 17 सालों बाद फैसला आता है कि गिरफ्तार 7 अभियुक्तों के खिलाफ जांच एजेंसियां सबूत पेश करने में विफल साबित हुई। जबकि सरकारी वकील अविनाश रसाल ने बताया, कि सुनवाई के दौरान कुल 324 गवाहों से पूछताछ की गई थी। जिनमें से 34 गवाह मुकर गए। अदालत ने सभी मुख्य अभियुक्त बीजेपी की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत 7 लोगों को बरी कर दिया। इसमें जांच एजंसियों की गलतियों के खिलाफ एडवोकेट नितिन सातपुते ने जनहित याचिका दायर करने का फैसला किया है।

    अगर हेमंत करकरे होते तो, ..

    शुक्रवार को एडवोकेट नितिन सातपुते ने बताया कि “मालेगांव बम विस्फोट कांड का फैसला निराशाजनक है। शहीद हेमंत करकरे जैसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी ने उचित जाँच के बाद मामला दर्ज किया था। लेकिन बाद में क्या हुआ, यह सभी जानते हैं। अगर शहीद हेमंत करकरे आज हमारे बीच होते, और इस तरह का फैसला सामने आता, तो सही माना जाता। लेकिन इस वक्त जांच एजंसियों की गलतियों पर पूरे देश को शक हो रहा है। इसके साथ ही जिन्होंने नतीजे आने से पहले ही प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सांसद बना दिया, उसी विचारधारा के लोग आज देश और प्रदेश में सत्ता में हैं।” How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies

    आरोपी बन गई सांसद

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    उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि “यह स्पष्ट है कि आज के परिणामों में उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही जिन्होंने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सांसद बनाया और अब क्या महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी? ये भी एक बड़ा सवाल है। आज के फैसले से साफ़ हो गया है कि सबूत होने पर भी आरोपी बरी हो जाते हैं। तो क्या न्याय धर्म के आधार पर हो रहा है?” इसके साथ ही मामले को लेकर विशेष अदालत के न्यायाधीश एके लाहोटी ने सभी अभियुक्तों को निर्दोष करार देते हुए कहा, “यह एक अत्यंत गंभीर मामला है जिसमें नागरिकों की जान गई। लेकिन अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए निर्णायक सबूत पेश नही कर पाई।”

    क्या था मालेगांव बम धमाके का मामला?

    29 सितम्बर 2008 को मालेगांव के व्यस्त भिकू चौक के पास एक मोटरसाइकिल में बम धमाका हुआ था। जिस वक्त लोग पास की मस्जिद में नमाज़ के लिए इकट्ठा हो रहे थे। इस विस्फोट में 92 लोग घायल हो गए और 7 लोगों की मौत हो गई। इस आतंकी हमले में “आरडीएक्स” विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ लेकिन जांच एजेंसियां उसका स्त्रोत सिद्ध नही कर पाई। यहां तक कि 14 लोगों की गिरफ्तारी में मुख्य अभियुक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के साथ पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकर द्विवेदी के खिलाफ मकोका के तहत मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनके खिलाफ साज़िश रचने से लेकर विस्फोट हासिल करने और कई लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराने जैसे गंभीर आरोप लगे थे।

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    मुकदमा खड़ा ही गलत तरीके से किया गया।

    इसमें साल 2008 में एंटी टेरेरिजम स्कॉड (ATS) ने शुरूआती जांच के दौरान कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। एटीएस ने मामले को गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को सौपने से पहले दो चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद एनआईए ने 2016 में एक पूरक आरोप पत्र दाखिल किया था। लेकिन 31 जुलाई को अदालत के फैसले मे सामने आया कि सभी साक्षों और गवाहों के आधार पर जो मुकदमा खड़ा हुआ, वह अभियुक्तों का दोष साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

    सबूत ही नहीं मिला

    अदालत ने कहा, कि आरोप लगाया गया था, कि विस्फोट पुरोहित ने कश्मीर से हासिल किया था। लेकिन इसका कोई सबूत नही दिया और यह भी प्रमाणित नहीं किया कि किसी भी अभियुक्त के घर बम तैयार किया गया था। जिस मोटरसाइकिल पर विस्फोट रखा गया था, उसका साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से ठोस सबूतों के साथ संबंध सिद्ध नहीं हो सका। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies

    कहां हुई थी साज़िश?

    जांच एजेंसियों का कहना था कि इस घटना से पहले एक बड़ी साजिश रची गई थी। जिसके तहत इंदौर, उज्जैन, पुणे जैसे अलग-अलग जगहों पर इन सभी अभियुक्तों की बैठकें हुईं और वहीं साज़िश रची गई। लेकिन अदालत ने कहा, बैठकों के कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिले। कहा, कि भले ही अभियुक्तों के बीच कुछ आर्थिक लेन-देन के सबूत पेश किए गए, लेकिन यह साबित नहीं हो सका, कि वह पैसे किसी हिंसक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हुआ। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies

    सबूतों के साथ छेड़छाड़

    अदालत ने यह भी कहा, कि अभियुक्तों और उनके संबंधित लोगों के कॉल रिकार्ड निकालते समय जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके लिए जरूरी अनुमति भी नहीं ली गई। अदालत ने यह भी कहा, कि “सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है।” अदालत ने कहा, “कुल मिलाकर सरकारी पक्ष विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने में असफल रहा और केवल संदेह के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। भले ही यह गंभीर अपराध हो, लेकिन सबूतों के अभाव में अभियुक्तों को संदेह का लाभ देना पड़ रहा है।” ऐसा कहते हुए अदालत ने सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies

    जांच एजेंसियों ने की आरोपियों की मदद

    उच्च न्यायलय के वकील नितिन सातपुते ने आरोप लगाते हुए कहा, की जाँच एजेंसी ने जानबूझकर जाँच में चूक की है, जानबूझकर पर्याप्त सबूत नहीं जुटाए हैं और दोषपूर्ण आरोपपत्र दायर किया है ताकि मालेगांव बम विस्फोट मामले में आरोपियों की मदद की जा सके, उन्हें बचाया जा सके, उनकी रक्षा की जा सके। उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए जिसने किसी के इशारे पर सभी आरोपियों को बचाने के लिए ठीक से जाँच नहीं की, जिसके परिणामस्वरूप विशेष अदालत के न्यायाधीश लखोटी ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। मैं इन जाँच एजेंसियों के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने जा रहा हूँ। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies

  • Maharashtra: कैदियों के लिए बड़ी खबर जमानत याचिका पर जल्द होगी सुनवाई

    Maharashtra: कैदियों के लिए बड़ी खबर जमानत याचिका पर जल्द होगी सुनवाई

    बॉम्बे हाईकोर्ट में अरुण भेलके द्वारा दायर की गई याचिका में उसकी पत्नी कंचन नानावरे को 2014 में गिरफ्तार किया गया था। नानावरे को 2020 में एक गंभीर बीमारी का पता चला, लेकिन उसे जमानत नहीं दी गई और उसकी मौत हो गई। (Maharashtra Big news for prisoners, bail petition will be heard soon)

    इस्माईल शेख
    मुंबई
    बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीर बीमारी से ग्रस्त कैदियों के जेल में बंद रहने पर चिंता जताई है। इन कैदियों को चिकित्सा के लिए जमानत दी जाए या उन्हें नजरबंदी में रखा जाए इसको लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की अदालत ने महाराष्ट्र सरकार से विचार करने को कहा है। (Maharashtra Big news for prisoners, bail petition will be heard soon)

    कैदियों से मुलाकात

    न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने सोमवार को कहा कि वे रविवार को पुणे की यरवदा केंद्रीय कारागार गए थे और वहां के कैदियों में खासकर महिलाओं से मुलाकात की और हालात का जायजा लिया। अदालत ने अगस्त 2010 में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई एक सलाहकार रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिसमें गंभीर बीमार कैदियों के इलाज की नीति पर चर्चा की गई थी। (Maharashtra Big news for prisoners, bail petition will be heard soon)

    केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में क्या है?

    केंद्रीय गृह मंत्रालय की सलाहकार रिपोर्ट के अनुसार, कोई भी कैदी जो किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त पाया जाता है, उसे चिकित्सा कारणों से जमानत, पैरोल, फर्लो (अवकाश), या घर में नजरबंदी या परिवार के सदस्यों की निगरानी में रखा जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में, ऐसे कैदियों को जेल में ही विशेष चिकित्सा देखभाल दी जा सकती है। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार से इस मुद्दे पर और सलाहकार रिपोर्ट के कार्यान्वयन पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। (Maharashtra Big news for prisoners, bail petition will be heard soon)

    क्या है मामला?

    यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में अरुण भेलके द्वारा दायर की गई याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया है, जिनकी पत्नी कंचन नानावरे के साथ 2014 में गंभीर कानून विरोधी गतिविधियों के तहत गिरफ्तार किया गया था और उन्हें यरवदा जेल में बंद किया गया था। याचिका के अनुसार, नानावरे को 2020 में एक गंभीर बीमारी का पता चला, लेकिन उन्हें जमानत नहीं दी गई। (Maharashtra Big news for prisoners, bail petition will be heard soon)

    जब उन्होंने चिकित्सा कारणों से जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया, तो उन्हें मेडिकल बोर्ड के पास भेज दिया गया, जिसने ‘हृदय और फेफड़े’ का प्रत्यारोपण करने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, किसी भी आदेश के पारित होने से पहले ही, जनवरी 2021 में उनकी पत्नी की मौत हो गई, जबकि उन्होंने जेल में लगभग सात साल बिताए थे। इसके बाद उनके पति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें राज्य से 2010 की सलाहकार रिपोर्ट और महाराष्ट्र प्रोविजन (सजा की समीक्षा) नियमों के तहत दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने की मांग की, ताकि भविष्य में कोई और कैदी गंभीर बीमारी के बावजूद कठिनाइयों का सामना न करे। (Maharashtra Big news for prisoners, bail petition will be heard soon)

    अगली सुनवाई कब है ?

    भेलके की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गायत्री सिंह ने अदालत को बताया कि नियमों के तहत जेल अधीक्षक को एक गंभीर रूप से बीमार कैदी को उसके रिश्तेदारों के पास सौंपने का अधिकार होता है, ताकि वह अपने अंतिम दिन अपने परिवार के साथ बिता सके। उनकी दलालों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि याचिका की अगली सुनवाई जनवरी 2025 में होगी। (Maharashtra Big news for prisoners, bail petition will be heard soon)