सुरेंद्र राजभर मुंबई- कमाल की बात है। 15 दिनों में 54000 गड्ढे भरना। किसी अजूबे से कम नहीं है। मुंबई महानगर पालिका का दावा है, कि उसने मात्र 15 दिनों में ही महानगर के तीन एक्सप्रेस हाईवे सहित कुल 54000 गड्ढे भर दिए। बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने दावे किए थे कि मानसून के पूर्व ही उसने पहले ही छः हजार गड्ढे भर दिए थे।
ऐसे में बृहन्मुंबई महानगर पालिका का दावा है, कि इससे अब कम गड्ढे पड़ेंगे लेकिन 54 हजार छोटे बड़े गड्ढे उभरना सारे दावे की पोल खोल देते हैं। मनपा यह भी दावा करती है, कि इस बार उसने जनता की शिकायतों का इंतजार नहीं किया। यानी वह कहना चाहती है, कि “अब मुंबईकरों को शिकायत कर जगाने की जरूरत ही नहीं है।” यानी बृहन्मुंबई महानगर पालिका बिना मुंबईकरों के जगाए जागती नहीं थी। सोई रहती थी। इस बार नींद से अपने आप जाग गई। सौ बार शिकायतें करने के बाद भी सोई रहने वाली बृहन्मुंबई महानगर पालिका प्रशासन अब जगाए जाने का इंतजार नहीं की। खुद जग गई और रिकार्ड समय में 54000 हजार गड्ढे भर कर मुंबईकरों पर एहसान कर दिया।
Indian fasttrack newsरास्तों की मरम्मत करते मनपा अधिकारी की प्रतिकारात्मक फाइल तस्वीर
क्या है सवाल..? बृहन्मुंबई महानगर पालिका
इतनी जल्दी और भारी मात्रा में गड्ढे भरने के दावे पर भी सवाल उठेंगे ही। जैसा कि बृहन्मुंबई महानगर पालिका बहाना करती है, कि भारी वर्षा और ट्रैफिक के कारण गड्ढे भारी मात्रा में पड़ते हैं। तो सवाल यह है कि आरसीसी (RCC) की सड़कों में भी गड्ढे क्यों पड़ते हैं? साधारण सी बात है डांबर का शत्रु है पानी और जल भराव से गड्ढे पड़ेंगे ही, लेकिन सड़क बनाने की विधि में प्लास्टिक के उपयोग तक विज्ञान पहुंच गया है। लेकिन मनपा अत्याधुनिक तकनीकी का प्रयोग क्यों नहीं करती। हर बार वही गिट्टी डालकर कोरम पूर्ति करना क्या उचित है? चलो इस बार शायद चुनावी वर्ष में बृहन्मुंबई महानगर पालिका अपने आप जागी।मुंबईकरों को जगाना नहीं पड़ा। इसके लिए बृहन्मुंबई महानगर पालिका बधाई की पात्र है।
आरोप तय कर दंडात्मक कार्रवाई करें अन्यथा आपकी साख पर भी बट्टा लगेगा।
मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल।
नोटिस के संदर्भ में स्पीकिंग ऑर्डर देकर गैरकानूनी निर्माण।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- गोरेगांव पी/ दक्षिण वार्ड को सर्वाधिक भ्रष्टाचारी होने का तमगा दिया जाए तो अतिशयोक्ति न होगी। इस वार्ड के सभी आला अफसर भ्रष्टाचार के पंक में पूरी तरह डूबे हैं। इन्हें किसी भी तरह का भय नहीं। चाहे जितना न्यूज लिखे, आरटीआई डाली जाए। इनकी कानों में जूं नहीं रेंगती।
फरियाद तो सुने मनपा आयुक्त ..
खुद ही बांधकाम कराते हैं। तोड़ने की नोटिस भेजते हैं और फिर नोटिस के संदर्भ में स्पीकिंग ऑर्डर देकर गैरकानूनी निर्माण कर्ता से लाखों रुपए वसूलकर उसे स्टे आर्डर लेने की सलाह देते हैं और कोर्ट में बीएमसी विधि विभाग के अधिकारी वकील मौन साध लेता है। स्टे के खिलाफ नहीं बोलता, जिससे तुरंत ही गैरकानूनी बांधकम करने वाले को कोर्ट से स्टे मिल जाता है।
नोटिस के संदर्भ में स्पीकिंग ऑर्डर देकर गैरकानूनी निर्माण।
ताजा मामला गोरेगांव (पूर्व) शौर्य कंपाउंड, नियर बंजारा पाड़ा, इन बिटवीन शेटेलाइट गार्डन फेस -।।, अरुण कुमार वैद्य मार्ग, का है।जहां गैरकानूनी ढंग से 6000 चौरस फूट के जी + १ (दो मंजिला) के व्यापारिक गाले का निर्माण बना लिया जिसकी एवज में कथित रूप से लाखों की रिश्वत दी गई। जिससे वार्ड ऑफिसर(प्रभारी) राजेश आक्रे, उपायुक्त विश्वास शंकरवार ने आपस में बांट लिया। दिखाने के लिए 354 (ए) की नोटिस दे दिया। बता दे कि मनपा अधिनियम 1888 के तहत 354 (ए) कि नोटिस देने के 24 घंटे के भीतर तोड़क कार्रवाई जरूरी है। लेकिन अवैध व्यापारिक गाले का बांधकाम जी+१ (दो मंजिला) कुल 6000 वर्गफुट का गैरकानूनी निर्माण करने वाले ठेकेदार आशिफ फतेह मोहम्मद खान को तुरंत कोर्ट से स्टे लेने की मौखिक सलाह दी ताकि तोड़क कार्रवाई न करनी पड़े।
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सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे यानी तोड़क कार्रवाई न होने से गैरकानूनी निर्माण बच जाए। मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल से हमारी मांग है की पी/ दक्षिण वार्ड के सभी बड़े अधिकारियों का तुरंत ट्रांसफर कर इनके भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच पारदर्शी तरीके से कराकर आरोप तय कर दंडात्मक कार्रवाई करें अन्यथा आपकी साख पर भी बट्टा लगेगा।
आयुक्त के आदेश के बावजूद पी/दक्षिण के अधिकारियों द्वारा स्टूडियोज को नही हटाकर दे रहे हैं अर्हपूर्ण संरक्षण।
रिश्वत की ताल पर नाच रहा, मनपा का पी/दक्षिण विभाग।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- बॉलीवुड फिल्मों व सीरियलों की शूटिंग हेतु बृहन्मुंबई महानगर पालिका के पी/दक्षिण वार्ड के कार्यक्षेत्र में बनाए गए अस्थाई स्टूडियो के मालिकों ने मनपा द्वारा परमिशन रद्द किए जाने के उपरांत भी पी/ दक्षिण वार्ड के जिम्मेदार अधिकारियों से अर्थपूर्ण सेटिंग कर निःसंकोच चलाए जा रहे हैं। जबकि मनपा ने उन्हें तत्काल हटाने की नोटिस महीनो पहले जारी कर दी थी। मगर मनपा अधिकारियों की आदत के अनुसार उक्त तीन स्टूडियोज को अर्थपूर्ण संरक्षण देकर न ही तोड़क कार्रवाई की गई है और ना ही स्टूडियो मालिकों के विरुद्ध भूमि पर अतिक्रमण करने का अपराध मनपा प्रशासन द्वारा कराया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गोरेगांव (पूर्व) आरे कॉलोनी, रॉयल पॉम हॉटल के पास रूबी बिल्डिंग के पीछे स्थित मनपा द्वारा शूटिंग के लिए तीन स्टूडियो बनाने की अस्थायी परमिशन ली गई थी, जो काफी पहले ही मनपा आयुक्त द्वारा रद्द कर दी गई थी। तीनों में प्रत्येक स्टूडियो 20, हजार वर्गफिट क्षेत्र पर बनाया गया है। प्रत्येक स्टूडियो का मासिक भाड़ा 90 लाख रुपए है, जिसे परमिशन रद्द किए जाने के उपरांत अब निजी तौर पर मनपा के अधिकारियों द्वारा वसूला जाता है, जो मनपा के कोष में नहीं जाता है। ऐसा मनपा सूत्रों ने बताया है।
Indian fasttrack newsमनपा पी/दक्षिण विभाग के भ्रष्टाचार की तस्वीर
रिश्वत का खेल क्या कहता है?
उक्त संबंध में मनपा के सहाय्यक आयुक्त राजेश आक्रे, परिमंडल -4 के उपायुक्त (डीएमसी) विश्वास शंकरवार पत्रकारों व शिकायत कर्ताओं को बताने या लिखित जवाब देने में टालमटोल करते हैं। इसकी शिकायत एक शिकायत कर्ता द्वारा दिनांक:13/06/2023 को किए जाने के बाद मनपा पी/दक्षिण के सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहाय्यक अभियंता ने एक पत्रक क्र.सआ पीद/ बी -53/7855 के माध्यम से शिकायतकर्ता को बतलाया है, कि आयुक्त के आदेश के साथ ही साथ दो स्टूडियो के मालिकों ने अदालत से स्टे – ऑर्डर ले लिया है।
बताया जा रहा है, कि मनपा प्रशासन द्वारा मनपा के विधि विभाग को स्टे-ऑर्डर शीघ्र हटवाने का आदेश दिया था। किंतु विधि विभाग (legal department) की कार्रवाई का कोई भी ले आउट नही आया है। यह भी बताया गया है, कि स्टूडियो की परमिशन रद्द किए जाने के बाद से ही स्टूडियो का भाड़ा आधिकारिक तौर पर नही वसूला जाता हैं। यानि कि 90 लाख × 3 = 2,70,00,000 (दो करोड़ 70 लाख मात्र) का भाड़ा, क्या मनपा के कोष में जमा किया जा रहा है? या मनपा के प्रशासनिक अधिकारियों की जेब में पहुंच रहा है? यह सवाल सर्व जागरूक नागरिकों का है। जिसका जवाब देने में मनपा अधिकारी टालमटोल कर रहे हैं।
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जबकि आयुक्त द्वारा परमिशन रद्द किए जाने के उपरांत सभी स्टूडियोज को हटवा देना या डिमोलिशन कर देना चाहिए था। दो स्टूडियोज का स्टे – ऑर्डर जनहित के परिप्रेक्ष्य में निश्चित ही, मा. न्यायालय द्वारा हटा दिया गया होता, यदि मनपा प्रशासन विधिवत अपना पक्ष प्रस्तुत किया होता? किंतु मनपा पी/दक्षिण के अधिकारियों को तो प्रतिमाह 4 करोड़ 50 लाख की मलाई चाभनी थी ! शिकायत कर्ताओं ने भी स्टूडियो और मालिको व भ्रष्ट मनपा अधिकारियों के विरुद्ध न्यायालय जाने का मन बनाया है।
उद्धव ठाकरे ने मातोश्री पर पार्टी के पदाधिकारियों के साथ बैठक की और जरूरी निर्देश दिए। उद्धव ने कहा कि हम लोकसभा चुनाव का सामना महा विकास अघाड़ी के रूप में करना चाहते हैं। ऐसा करते समय पार्टी को कुछ सीटों पर समझौता करना होगा, इसके लिए तैयार रहें। uddhav thakrey
लोकसभा चुनाव के लिए सभी 48 सीटों के संभावित उम्मीदवारों को तैयार रहने का आदेश।
उद्धव ठाकरे की ताकीद, यह चुनाव महा विकास आघाडी के रूप में ही लड़ना है।
लोकसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर स्थानीय नेताओं के साथ समीक्षा बैठक।
नितिन तोरस्कर (मंत्रालय प्रतिनिधि) मुंबई- राज्य में होने वाले चुनाव को लेकर शिवसेना उद्धव ठाकरे का सबसे बड़ा बयान। लोकसभा चुनाव के लिए सभी 48 लोकसभा क्षेत्र के संभावित उम्मीदवारों को तैयार रहने का आदेश उद्धव ठाकरे ने दिया है। उन्होंने यह ताकीद भी दी है, कि हमें यह चुनाव महा विकास आघाडी के रूप में ही लड़ना है, इसलिए टिकट की जिद मत करो, लेकिन चुनाव लड़ने की तैयारी रखो। उद्धव ठाकरे इन दिनों लोकसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर अलग-अलग लोकसभा सीटों को लेकर स्थानीय नेताओं के साथ समीक्षा बैठक कर रहे हैं।
उद्धव ठाकरे की समीक्षा बैठक..
गुरुवार को उद्धव ठाकरे ने नासिक, अहमदनगर और दिंडोरी लोकसभा सीटों के लिए समीक्षा बैठक की। यह बैठक मुंबई उनके घर मातोश्री पर हुई। इस बैठक में चुनावी तैयारियों के अलावा पार्टी संगठन की ताकत बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। खास बात यह रही कि इस बैठक में बूथ प्रमुखों समेत अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी विचार विमर्श हुआ। इसी तरह उन्होंने बुधवार को भी नंदुरबार, धुले, जलगांव और रावेर लोकसभा सीटों की समीक्षा की थी।
Indian fasttrack newsमुंबई स्थित शिवसेना पार्टी के मातोश्री की तस्वीर
पार्टी में बगावत के बाद उद्धव ठाकरे ने नासिक और अहमदनगर की सीट पर हर हालत में जीत के लिए तैयारी करने को कहा है। उद्धव ठाकरे ने कहा, कि अहमदनगर की सीट इस बार किसी भी हालत में बीजेपी को नहीं जीतने देना है। इस सीट पर फिलहाल राधाकृष्ण विखे पाटील के बेटे सुजय विखे पाटील सांसद हैं।
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इंडिया की बैठक पर हुई चर्चा..
गुरुवार को दिन भर अपनी पार्टी के संगठन और चुनावों की तैयारी के लिए बैठकों के बाद उद्धव ठाकरे के घर पर विपक्ष के नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में आगामी 31 अगस्त को मुंबई में होने वाली विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की बैठक के लिए कांग्रेस, एनसीपी के नेता मातोश्री पर जमा हुए। बैठक में कांग्रेस की तरफ से प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले, पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवरा, प्रदेश कांग्रेस के कार्याध्यक्ष पूर्व मंत्री नसीम खान, अतुल लोंढे एनसीपी की तरफ से नरेंद्र वर्मा, आदिती नलावडे और शिवसेना की तरफ से खुद उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और संजय राउत शामिल थे।
आर/दक्षिण विभाग के सक्षम अधिकारी है भ्रष्टाचार में लिप्त।
कर रहें हैं मोटी कमाई…
अवैध निर्माण को दे रहें हैं संरक्षण..
उड़ रही मुख्यमंत्री के आदेशों की धज्जियां..
सुरेंद्र राजभर मुंबई- महाराष्ट्र सरकार के मुखिया ने आदेश दिया है, कि मुंबई में अब और अवैध निर्माण पर जीरो टॉलरेंस अपनाया जाए। झोपड़ों की भरमार से जीवनोपयोगी सुविधाओं से मुंबईकर वंचित होते हैं। किंतु कौन सुनता – मानता है मुख्यमंत्री का आदेश? भ्रष्ट मनपा अधिकारी दौलत कमाने के लिए अवैध निर्माण को संरक्षण दे रहे है और उसके बदले हो रही लाखों रुपयों की वसूली। जी हां!आइए चन्द गैरकानूनी बांधकाम का जायजा लेते हैं।
हम कांदिवली (पूर्व) आकुर्ली रोड़ स्थित गोविंद सेठ चाल, जूना खदान, अटल बिहारी वाजपेई हॉल के पास, वडार पाड़ा रोड क्रमांक -१, वार्ड क्रमांक २९, में विगत कई वर्षों से रिक्त पड़े भूखंड (open plot) पर ४ रूम का अवैध बांधकाम हो रहा है। बताया जा रहा है, कि उक्त अवैध बांधकाम को दो बार तोड़ा जा चुका है। किसी तरह की घाही नहीं दिख पड़ती आश्वस्त से लग रहें मजदूर मिस्त्री और भूमाफिया। उसने बताया कि लाखों रुपए गैरकानूनी बांधकाम करने की एवज में आर/दक्षिण वार्ड को वे दे चुके हैं।
Indian fasttrack newsभ्रष्ट अधिकारियों की फाइल तस्वीर
दुसरा है कांदिवली (पश्चिम) देवबाई चाल, कांदिवली गांवठान, कांदिवली गांवठन रोड स्थित रिक्त भूखंड (open plot) पर ५ मकान के आवासीय परिसर का गैरकानूनी निर्माण कार्य बिना किसी वैध अनुमति के इमारत विभाग के अभियंताओं की मिलीभगत से किया जा रहा है। स्थानीय जनता की माने तो सहाय्यक अभियंता प्रमोद ब्राम्हणकर स्वंय इस गैरकानूनी बांधकाम को पहले होने दिया। अब ऐसे में ५ (पांच) मकान के आवासीय परिसर का जमीनी सतह से पूर्ण हो चुके बांधकाम को दिनांक: 24/05/2023 को 354(A) की नोटिस जारी कर अभियंता ने स्वयं भ्रष्टाचार में लिप्त होने का अपना परिचय दिया है।
नोटिस देकर तीन महीने हो गए हैं, लेकिन कार्रवाई जीरो! जरा रुको गैरकानूनी बांधकाम का सिलसिला अभी थमा नहीं है। 354(A) की नोटिस के तुरंत बाद ही ठीक उसी बांधकाम को ग्राउंड +1 (दो मंजिला) के शक्ल में गैरकानूनी निर्माण कार्य को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। ताकि नोटिस धारक उक्त नोटिस के आधार पर बकायदा कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखने में सफल हो सके और वह बड़ी आसानी से कोर्ट का स्टे ऑर्डर ला सके। यहां भी वही कहानी दोहराई गई।
तीसरा है कांदिवली (पश्चिम) ईरानी वाड़ी,रोड नंबर – ४, नियर शिवशंभु मंदिर स्थित रामनारायण पांडे चाल में रिक्त भूखंड (open plot) पर 200 वर्गफिट के अंतर्गत एक व्यापारिक गाले का गैर कानूनी तरीके से निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस गैरकानूनी बांधकाम का ठेकेदार है अजय पांडे। जिसके चेहरे पर जंग जीतने की खुशी झलक रही है। सहाय्यक अभियंता ने बताया कि परिमंडल -७ की उपायुक्त, भाग्यश्री कापसे बेहद प्रभावशाली महिला अधिकारी है। जिनका संबंध राज्य के नेताओं से है। उनका संरक्षण भी। यह भी ज्ञात हुआ कि अपने पद और पॉवर का नाजायज फायदा उठाते हुए मैडम ने सहाय्यक आयुक्त ललित तलेकर, डीओ अभय जगताप पर दबाव बनाकर गैरकानूनी बांधकाम कराती और संरक्षण देती हैं। लाखों में खेलती है।
Live video on Indian fasttrack news channelकांदिवली के अवैध निर्माण की तस्वीर
राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से अपील ..
इस काले कारोबार में सहाय्यक आयुक्त और डीओ लिप्त है। ये दोनो भी भ्रष्टाचार के माध्यम से खुद भी मालामाल हो रहे हैं। अब ऐसे में ठेकेदार और अवैध निर्माण कर्ता, भूमाफिया मूंछों पर ताव देते हुए कहता है, कि यहां का वार्ड और नेता उसके साथ है कोई कितनी भी कंप्लेंन करें! मेरा कुछ भी नही उखड़ेगा। वाह मानना होगा गैरकानूनी बांधकाम करने वाले ठेकेदार और भूमाफिया की हेकड़ी को जिसके सामने आर/दक्षिण, वार्ड के जिम्मेदार अधिकारी या तो विवश है या उनकी जेबें गर्म हो चुकी हैं। राज्य के मुखिया से हमारी मांग है कि निष्पक्ष पारदर्शी जांच पूरे मुंबई शहर में कराएं। अवैध बांधकाम की सूची बनवाएं। अवैध निर्माण तोड़ने, उसका वीडियो बनवाकर शिकायत कर्ताओं को भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करें। साथ ही भूमाफियाओं और ठेकेदारों को कानूनी ढंग से दंडित करने की पहल करें।
स्टैंप पेपर पर दस्तखत कराकर जानलेवा धमकी देकर छोड़ा विधायक प्रकाश सुर्वे के बेटे राज सुर्वे ने।
ली थी मनोज मिश्रा से अपहरण की सुपारी।
इस्माइल शेख मुंबई- नेता हो या अभिनेता, सबको आवश्यक है। किंतु यदि वे अपने सामाजिक उत्तरदायित्वों को निभाते हुए, अपनी संतानों को अच्छे संस्कार नहीं देते हैं तो उनकी संताने शॉर्ट कट का रास्ता अपनाकर असामाजिक व अनैतिक कार्य करने लगती है। ऐसा ही एक मामला विधायक प्रकाश सुर्वे के साथ भी घटित हुआ है, जहां उनके बेटे राज सुर्वे, उसके साथी विक्की शेट्टी सुपारी देने वाले मनोज मिश्रा व उनके 10,12 अज्ञात गुंडे टाइप साथियों के विरुद्ध म्यूजिक कंपनी के मालिक राजकुमार सिंह ने वनराई पुलिस थाने में प्राथमिकी नामजद एफआईआर दर्ज कराई है। (शिवसेना कार्यालय अपहरण की सुपारी)
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पुलिस में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार गोरेगांव (पूर्व) में चिंतामणि क्लासिक बिल्डिंग इको हाउस के पास, विश्वेश्वर नगर रोड़ के फ्लैट नंबर 302, 303, 403 तीसरा व चौथे मजले पर’ ग्लोबल म्यूजिक जंक्शन प्रा. लि. नाम की कंपनी का कार्यालय है। वहीं आरोपी मनोज मिश्रा (30) वर्ष वाय – 503, एग्जीबिशन रोड़, गन अपार्टमेंट चौक के समीप ही पटना, बिहार की भी आदिशक्ति प्रा. लि. नाम की म्यूजिक कंपनी है। मनोज मिश्रा ने उसके 1.5 करोड़ फॉलोअर्स बताया है। उसे पैसे की आवश्यकता थी अपनी आदिशक्ति कंपनी को बढ़ाने के लिए, इसलिए उसने ग्लोबल म्यूजिक जंक्शन के सीईओ राजकुमार सिंह से अपनी कंपनी ‘ आदिशक्ति प्रा. लि. डिजिटल लाइसेंस पर वर्ष 2019 में ओटीटी प्लेटफार्म के संबंध में आवश्यक करार पत्र लेकर राजकुमार सिंह ने एक वर्ष का ही करार किया था। (शिवसेना कार्यालय अपहरण की सुपारी)
Indian fasttrack newsविधायक प्रकाश सुर्वे की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ फाइल तस्वीर
अपहरण की सुपारी ..
किंतु कंपनी का व्यवहार अच्छा रहा। इसी कारण वर्ष – 2021 में मनोज मिश्रा ने यूट्यूब चैनल के लिए 8 करोड़ रुपए एडवांस में लिया और 5 वर्ष का करारनामा लिखा, जिसका लॉकिंग पीरियड 3 वर्ष का था। यह करारनामा वर्ष – 2026 में अपने पांच वर्ष पूर्ण करता। चैनल डेवलपमेंट के लिए मनोज मिश्रा ने कंटेंट न बनाकर उक्त पैसे को अन्यत्र खर्च किया, जिससे राजकुमार सिंह को मिलने वाले नियमित लाभ में कमी आने लगी। (शिवसेना कार्यालय अपहरण की सुपारी)
शिकायत के मुताबिक यूट्यूब चैनल का कंटेंट बनाने के लिए मनोज मिश्रा ने और पैसे की मांग की, जिसे राजकुमार सिंह ने इनकार कर दिया। किंतु मनोज मिश्रा ने वर्ष -2022 से करारनामा रद्द करने के लिए राजकुमार सिंह पर दबाव डालने लगा। राजकुमार सिंह ने समझौते के लिए उससे कहा कि वह उसे जून व जुलाई 2023, में एक करोड़ रुपए उसकी कंपनी के बैंक खाते में दे चुका है। वह उसका पैसा वापस करके करार रद्द कर सकता है।किंतु मनोज मिश्रा ने ऐसा न करते हुए, पद्माकर, राज सुर्वे को करार रद्द कराने की सुपारी दे दी। दिनांक – 09/08/2023 को 10 – 15 लोग राजकुमार सिंह के कार्यालय में आए और उसे विधायक प्रकाश सुर्वे के कार्यालय में ले गए, फिर कुछ दूर स्थित एक अन्य बिल्डिंग में ले गए, जहां उसके मोबाइल पर वनराई पुलिस का फोन आया, किंतु अपहरण कर्ताओं के दबाव के कारण राजकुमार सिंह ने पुलिस को जवाब नहीं दे पाया। फिर अपहरण कर्ताओं ने राजकुमार सिंह को दहिसर स्थित एक कार्यालय में लाया गया। जहां पद्माकर, राज सुर्वे पहले से ही मौजूद था। (शिवसेना कार्यालय अपहरण की सुपारी)
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उसने जानलेवा धमकियां दी। उसके साथी विकी शेट्टी ने मनोज मिश्रा द्वारा लाए गए 100 / – के स्टैंप पेपर पर राजकुमार सिंह से जबरन करारनामा रद्द करने के लिए दस्तखत कराया और राजकुमार सिंह को जानलेवा धमकियां देते हुए, पुलिस में न जाने की ताकीद कर छोड़ दिया। फिर राजकुमार सिंह ने वनराई पुलिस स्टेशन जाकर मनोज मिश्रा, पद्माकर, राज सुर्वे, विकी शेट्टी व 10,12 अज्ञात लोगों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुंबई एयरपोर्ट से फरार होने की कोशिश कर रहे मनोज मिश्रा व उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। अब देखना यह है कि पुलिस विधायक प्रकाश सुर्वे के बेटे राज सुर्वे को भी गिरफ्तार करती है या नहीं? (शिवसेना कार्यालय अपहरण की सुपारी)
जहरीला दूध : महाराष्ट्र सरकार को जनता के स्वास्थ्य और जिंदगी की परवाह ही नहीं। सच तो यह है कि सरकारी मशीनरी फेल हो चुकी है। सरकारी उपेक्षा, उदासीनता और अकर्यमण्यता का इससे बड़ा सबूत और क्या हो सकता है।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- महाराष्ट्र राज्य में खेतिहरों (किसानों) और पशुपालकों द्वारा मात्र 14 हजार करोड़ लीटर दूध उत्पादित किया जाता है, लेकिन बिक्री है 64 हजार करोड़ लीटर। सरकार को बताना चाहिए कि उत्पादन के अलावां 50 हजार करोड़ लीटर दूध आता कहां से है? सरकार बताए कि ये पचास हजार करोड़ लीटर अधिक दूध कैसे बनता है? यूरिया से या दूसरे केमिकल से? यह नकली जहरीला दूध बनाने वाले कौन हैं? (जहरीला दूध)
क्या सरकार ने इन्हें नकली जहरीला दूध बनाने का लाइसेंस दिया है? स्वास्थ्य मंत्रालय, कृषि पशुधन मंत्रालय कहां सोया है? क्या सांख्यिकी का ज्ञान है? क्या मार्केट में मिलने वाले दूध के असली नकली होने की जांच व्यवस्था सरकार ने की है? यदि की है तो फिर बाजार में पचास हजार करोड़ लीटर जहरीला दूध कैसे बेचा जाता है? क्या सरकार का दायित्व नहीं है, कि केमिकल से बने जहरीले दूध निर्माता लोगों का पता है सरकार को। सच तो यह है कि महाराष्ट्र सरकार को जनता के स्वास्थ्य और जिंदगी की परवाह ही नहीं है। सच तो यह है कि सरकारी मशीनरी फेल हो चुकी है। सरकारी उपेक्षा, उदासीनता और अकर्यमण्यता का इससे बड़ा सबूत और क्या हो सकता है। (जहरीला दूध)
ऐसा नहीं है कि सरकार और राज्य के 288 खासदारों (सांसद) को यह तथ्य मालूम नहीं है लेकिन कोई बोलता ही नहीं। सब चुप हैं। विषैले दूध से जनता बीमार पड़ रही है। जो दूध स्वास्थ्य वर्धक होता है वही दूध जहरीला बेचकर जनता को मारा जा रहा है। (जहरीला दूध) महाराष्ट्र राज्य सरकार के मानसून सत्र मे यह जहरीले दूध बनाने और बेचने का मामला अकेले उठाने वाले माननीय विधायक एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्य मंत्री बच्चू कडू जी ही हैं। अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता लेकिन अकेला आइना असली सूरत तो दिखा सकता है। माननीय विधायक बच्चू कडू जी को कोटि कोटि बधाई। (जहरीला दूध)
Mumbai BEST Strike : बसों की हड़ताल को लेकर मुंबईकर काफी परेशान हो गए हैं। प्राइवेट कर्मियों की हड़ताल ने मुंबई के कामकाज को प्रभावित कर दिया है।
वी बी माणिक मुंबई- प्राइवेट बस कर्मियों द्वारा हड़ताल पर जाने से मुंबई करों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल के मुताबिक, मुंबई (Mumbai) में बेस्ट (BEST) की प्राइवेट बस ड्राइवरों की मांग है, कि उनको भी परमानेंट नौकरी दी जाय। जैसे बेस्ट के ड्राइवर और कंडक्टरो के वेतन के बराबर इनको भी वेतन और सारी सुविधाएं मिलनी चाहिए। पर निजी कंपनियों द्वारा बेस्ट प्रशासन के साथ पहले से ही एग्रीमेंट हो चुका है, कि इनको बेस्ट विभाग में नही लिया जाएगा। तो फिर ये प्राइवेट कर्मी मुंबई में जगह-जगह तोड़फोड़ और बेस्ट बसों के ड्राइवरों के साथ मारपिट, गाली गलौज कैसे कर सकते हैं?
Mumbai BEST Strike हड़ताल..
हड़ताल (Strike) से मुंबईकर परेशान है, क्योंकि इनको यात्रा करने के लिए बसे नही मिल रही है। एसी बसें रूटों पर नही चल रही है। यहां तक कि डिपो से बसे बाहर नही निकल रही है। इस पर बेस्ट प्रशासन ने पुलिस में शिकायत भी किया है। फिर भी पुलिस मूक दर्शक बनी हुई है। मालवणी पुलिस ने दिखावे के लिए केवल दो पुलिस की गाड़ी सुरक्षा के लिए दिया है। पर कार्रवाई के लिए नही।
Indian fasttrack newsकांदिवली स्टेशन स्थित BEST बस की तस्वीर
बृहन्मुंबई (Mumbai) विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन (BEST) से संबंधित निजी बस चालकों का रविवार को पांचवें दिन भी हड़ताल (Strike) जारी रहा। इसमें परिचालकों की कमी के कारण लगभग 704 बसें सड़कों से नदारद रहीं। हड़ताल के कारण शहर के 18 बस डेपो पर प्रभाव देखा गया जबकि शहर में बेस्ट 27 डिपो से बसों का संचालन करती है। बड़ी शर्मनाक स्थिति पुलिस और नेताओं ने बना रखा है इस पर सारी बेस्ट की सारी यूनियन कान में तेल डालकर सो रही है। क्या राज्य सरकार इस पर जल्दी फरमान देगी या मुंबईकरों को आग में झोंकने के लिए तैयार है। आपको जानकारी देते हुए बता दे कि ये पूरा विभाग मनपा (BMC) के अंतर्गत ही आता है।
घटिया सड़क निर्माण की भी उत्तम जांच रिपोर्ट लगाता है दुय्यम अभियंता अमोल जाधव।
दुय्यम अभियंता अमोल जाधव के कार्यो की जांच कराने की मांग।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- यदि जलवाहिनी में मध्य रास्ते पर सुराख हो तो उससे पानी बहकर जाया हो जाता है। तथा गंतव्य तक उतना पानी नहीं पहुंच पाता, जितना की उद्धिस्ट होता है। यही दृष्टांत शत प्रतिशत लागू होता है। मनपा आर/दक्षिण में दुय्यम अभियंता के रूप में कार्यरत अमोल जाधव का, जो मनपा के परिरक्षण (maintenence) हेतु जारी की गई निधि को उद्दिष्ट कार्य में नहीं पहुंचने देते और जलवाहीनी के सुराख की भांति निधि को निजी स्वार्थों के चलते ठेकेदारों की मदद से बंदरबाट कर लेते हैं।
अभियंता अमोल जाधव का कारनामा ..
ऐसी जानकारी संवाददाता को दुय्यम अभियंता अमोल जाधव के प्रिय ठेकेदार ने दूरभाष पर प्रदान की है। बताया गया है, कि दुय्यम अभियंता अमोल जाधव मनपा आर/दक्षिण के परिरक्षण विभाग में कार्यरत हैं। तथा वे ठेकेदारों के प्रिय पात्र है, क्योंकि वह ठेकेदारों को खाने और खिलाने की भरपूर सुविधा देते हैं, कि उनकी इच्छानुसार काम का परसेंटेज व जारी की गई निधि के आधार पर तय रहती है।अब ठेकेदार काम घटिया करे या बढ़िया, किंतु उसे जारी की गई धनराशि तत्काल मिल जाती है।
Indian fasttrack newsसब- इंजीनियर अमोल जाधव की फाइल तस्वीर
यही कारण है कि दोगुनी काली कमाई करने के लिए सड़कों के दुरुस्तीकरण के निर्माण में या गड्ढों को भरने के लिए घटिया कांक्रीट, तारकोल (डांबर) या सीमेंट का उपयोग करते हैं ताकि सड़क की लागत से अधिकतम धनराशि बचाई जा सके।भले ही सड़क का निर्माण एक तरफ से पूरा हो और दूसरी तरफ पुनः टूटना – फूटना शुरू हो जाय,किंतु दुय्यम अभियंता अमोल जाधव घटिया सड़क के निर्माण की भी गलत रिपोर्ट लगा देता है और ठेकेदारों को लाभ पहुंचाता है।
ज्ञात हो कि कुछ वर्ष पूर्व भ्रष्टाचार के आरोप में इसके खिलाफ अपराधिक मामला भी दर्ज हुआ है और वर्तमान में वह जमानत पर रिहा किया गया है और अपनी ड्यूटी पर आर/दक्षिण विभाग में कार्यरत हैं।ठेकेदारों को ठेके का टेंडर दिलवाने में अमोल जाधव काफी मदद करता है, इसीलिए उसे मनपा कर्मियों द्वारा सड़क इंजीनियर भी कहा जाता है। उसकी देखरेख में बनाई गई सड़के, बनाए जाने के साथ ही टूटने – फूटने व ऊबड़ खाबड़ होने लगती हैं। दुय्यम अभियंता अमोल जाधव के भ्रष्ट कारनामों की जांच कराकर उसके द्वारा सड़क निर्माणों में किए गए भ्रष्टाचारों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई किए जाने की मांग स्थानीय नागरिकों ने मनपा के शीर्ष अधिकारियों से की है।
उपायुक्त विश्वास शंकरवार की लापरवाही से मिल रहा अवैध निर्माणों को अभयदान।
डीओ. राजन प्रभु, वार्ड ऑफिसर किरण दिघावकर ने आपस में बांट लिया। Malad BMC
सुरेंद्र राजभर मुंबई- मालाड, पी/नॉर्थ वार्ड को सर्वाधिक भ्रष्टाचारी होने का तमगा दिया जाए तो अतिशयोक्ति न होगी। इस वार्ड के सभी आला अफसर भ्रष्टाचार के पंक में पूरी तरह डूबे हैं। इन्हे किसी भी तरह का भय नही। चाहे जितनी न्यूज प्रकाशित की जाए। इनकी कानों में जूं नहीं रेंगती। खुद ही बांधकाम कराते है। तोड़ने की नोटिस भेजते हैं और फिर नोटिस के संदर्भ में स्पीकिंग ऑर्डर देकर गैरकानूनी निर्माण कर्ता से लाखों रुपए वसूलकर उसे स्टे आर्डर लेने की सलाह देते हैं और कोर्ट में बीएमसी विधि विभाग के अधिकारी वकील मौन साध लेता है। स्टे के खिलाफ नही बोलता, जिससे तुरंत ही गैरकानूनी बांधकाम करने वाले को कोर्ट से स्टे मिल जाता है। (BMC, अभयदान)
Indian fasttrack newsअवैध निर्माण को दिया गया नोटिस और डिओ. राजन प्रभु के साथ मालाड पी/उत्तर विभाग सहायक आयुक्त किरण दिघावकर की तस्वीर
अवैध निर्माणों को अभयदान.. BMC.
ताजा मामला मालाड (पश्चिम) गेट नंबर -३, रूम नंबर – ५२४, अब्दुल हमीद रोड, मुंबई -९५ का है। जहां गैरकानूनी ढंग से २००० चौरस फूट के ग्राउंड+२ (तीन मंजिला) के व्यापारिक गालों का निर्माण बना लिया, जिसकी एवज में कथित रुप से लाखों की रिश्वत दी गई। जिसे डीओ. राजन प्रभु, वार्ड ऑफिसर किरण दिघावकर ने आपस में बांट लिया है। इस तरह की बयानबाजी मनपा गलियारों से आ रही है। जिसकी वजह से उक्त अवैध निर्माण पर किसी प्रकार की कार्यवाही का न होना ही इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। (BMC, अभयदान)
वहीं देखा जाय तो परिमंडल – ४ के उपायुक्त विश्वास शंकरवार को मिली शिकायतों पर बरती जा रही लापरवाही भी अवैध निर्माणों के लिए अभयदान साबित हो रही है। दिखाने के लिए ३५४(ए) की नोटिस भेज दिया। जिसके नोटिस की संदर्भ संख्या १७०७१२ है। फिर गैरकानूनी निर्माण करने वाले को बुलाकर कोर्ट से स्टे लेने को कहा। बात बढ़े नही, भ्रष्टाचार का खुलासा न हो, इसके लिए अभियंता को जबरन छुट्टी पर भेज दिया। (BMC, अभयदान)
बता दें, कि मनपा अधिनियम १८८८ के तहत ३५४(ए) की नोटिस देने के २४ घंटे के भीतर तोड़क कार्रवाई करने का जरूरी प्रावधान है लेकिन अवैध व्यापारिक गालों का बांधकाम ग्राउंड+२(तीन मंजिला) कुल २००० चौरस फूट का निर्माण कराने वाले अवैध निर्माण कर्ता को तुरंत कोर्ट से स्टे लेने की मौखिक सलाह दी, ताकि तोड़क कार्रवाई न करनी पड़े। “सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे” यानी तोड़क कार्रवाई न होने से गैरकानूनी निर्माण बच जाए। (BMC, अभयदान)
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बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) आयुक्त (Commissioner) इकबाल सिंह चहल से हमारी मांग है, कि पी/नॉर्थ, वार्ड (P/North, ward) के सभी आला अधिकारियों का तुरंत ट्रांसफर कर इनके भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच पारदर्शी तरीके से कराकर आरोप तय कर दंडात्मक कार्रवाई कराए अन्यथा आपकी साख पर भी बट्टा लगेगा। (BMC, अभयदान)