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  • मोहम्मद अली रोड पर BMC की बड़ी कार्रवाई, अवैध फेरीवाले और अतिक्रमण हटाए

    मोहम्मद अली रोड पर BMC की बड़ी कार्रवाई, अवैध फेरीवाले और अतिक्रमण हटाए

    मुंबई के मोहम्मद अली मार्ग और इब्राहिम मर्चेंट रोड पर बीएमसी के बी वार्ड ने अवैध फेरीवालों और फुटपाथ पर बने अनधिकृत निर्माण हटाए। 7 दुकानें, 12 ओटे और 2 लावारिस वाहन हटाए गए।

    मुंबई: सबसे व्यस्त और संवेदनशील व्यावसायिक इलाकों में गिने जाने वाले मोहम्मद अली मार्ग और इब्राहिम मर्चेंट मार्ग पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने बड़ी कार्रवाई की है। BMC के ‘बी’ प्रशासकीय विभाग ने फुटपाथों पर किए गए अनधिकृत निर्माण और अवैध फेरीवालों को हटाते हुए इलाके को अतिक्रमण मुक्त किया। इस कार्रवाई से पैदल यात्रियों और वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    BMC ‘बी’ वार्ड की सख्त कार्रवाई

    दिनांक 2 फरवरी 2026 को बीएमसी के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई—

    • अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) डॉ. अश्विनी जोशी के निर्देश पर
    • उप आयुक्त (परिमंडल-1) चंदा जाधव के मार्गदर्शन में
    • सहायक आयुक्त (बी विभाग) योगेश देसाई के नेतृत्व में

    अंजाम दी गई।

    क्यों ज़रूरी थी यह कार्रवाई?

    मोहम्मद अली मार्ग और इब्राहिम मर्चेंट मार्ग—

    • भेंडी बाजार
    • मस्जिद बंदर
    • भायखला
    • नागदेवी
    • मांडवी

    जैसे प्रमुख इलाकों को जोड़ने वाले मुख्य रास्ते हैं। इन सड़कों पर—

    • फुटपाथों पर अवैध दुकानें
    • बढ़ाए गए ओटे
    • लोहे-पत्रे के शेड
    • फेरीवालों का जमावड़ा

    होने से यातायात और पैदल चलने वालों को भारी परेशानी हो रही थी।

    अवैध निर्माण और फेरीवालों पर चला बुलडोज़र

    बीएमसी की इस कार्रवाई में—

    • 7 अनधिकृत दुकानें हटाई गईं
    • 12 अवैध ओटे तोड़े गए
    • पत्रे और लोहे के शेड हटाए गए
    • 10 बोलार्ड निकाले गए
    • 2 लावारिस वाहनों पर कार्रवाई की गई

    पूरा ऑपरेशन आधुनिक मशीनरी की मदद से किया गया।

    भारी मशीनरी और पुलिस बंदोबस्त तैनात

    अतिक्रमण हटाने के लिए—

    • 4 अतिक्रमण निर्मूलन वाहन
    • 2 जेसीबी मशीनें
    • अन्य तकनीकी उपकरण

    लगाए गए थे।
    इसके साथ ही, मौके पर 40 से अधिक बीएमसी अधिकारी-कर्मचारी और पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था, जिससे किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो।

    स्थानीय नागरिकों ने जताया संतोष

    कार्रवाई के बाद स्थानीय दुकानदारों, रहवासियों और राहगीरों ने राहत की सांस ली। नागरिकों का कहना है कि—

    • अब फुटपाथ चलने लायक हुए हैं
    • ट्रैफिक की समस्या कम होगी
    • इलाके की सुरक्षा और सफ़ाई बेहतर होगी

    BMC का साफ संदेश

    महानगरपालिका प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि—

    “शहर में अनधिकृत फेरीवालों और बढ़ी हुई निर्माण गतिविधियों के खिलाफ आगे भी नियमित रूप से कार्रवाई जारी रहेगी।”


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. बीएमसी ने यह कार्रवाई कब की?
    👉 2 फरवरी 2026 को।

    Q2. किन इलाकों में अतिक्रमण हटाया गया?
    👉 मोहम्मद अली मार्ग और इब्राहिम मर्चेंट मार्ग।

    Q3. कितनी अवैध दुकानें हटाई गईं?
    👉 कुल 7 अनधिकृत दुकानें।

    Q4. क्या आगे भी ऐसी कार्रवाई होगी?
    👉 हां, बीएमसी ने नियमित कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।

  • दिंडोशी में पानी संकट पर बड़ी राहत, 3 लाख लीटर की टंकी के काम का शुभारंभ

    दिंडोशी में पानी संकट पर बड़ी राहत, 3 लाख लीटर की टंकी के काम का शुभारंभ

    दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र की महानगरपालिका, नागरी निवारा और म्हाडा वसाहत में लंबे समय से चली आ रही पानी की समस्या के समाधान के लिए 3 लाख लीटर क्षमता की नई पानी टंकी के निर्माण का काम शुरू हो गया है।

    मुंबई: दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले हजारों नागरिकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। महानगरपालिका वसाहत, संतोष नगर, श्रीकृष्ण नगर, नागरी निवारा और म्हाडा वसाहत में लंबे समय से कम दबाव और अनियमित पानी आपूर्ति की समस्या से जूझ रहे लोगों को अब स्थायी समाधान मिलने जा रहा है। शिवसेना के प्रयासों से यहां 3 लाख लीटर क्षमता की सहायक पानी टंकी (AST) के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया है, जिससे इलाके की पानी किल्लत हमेशा के लिए दूर होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    चुनाव में दिया गया वादा अब ज़मीन पर उतरा

    शिवसेना के वरिष्ठ नेता, आमदार और पूर्व महापौर सुनिल प्रभु ने विधानसभा और मुंबई महानगरपालिका चुनाव के दौरान दिंडोशी क्षेत्र के नागरिकों को यह भरोसा दिलाया था कि पानी की पुरानी समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा। अब उसी वादे को पूरा करते हुए यह अहम परियोजना शुरू की गई है।

    कहां बनेगी 3 लाख लीटर की पानी टंकी?

    यह नई सहायक पानी टंकी—

    • दिंडोशी वसाहत
    • संतोष नगर
    • सेक्टर C, G, L, H, M और D
    • ए–1 स्वीट के पास
    • दिंडोशी वसाहत स्थित महानगरपालिका के भूखंड पर

    निर्मित की जा रही है, जिससे आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों को सीधा फायदा मिलेगा।

    क्यों थी दिंडोशी में पानी की बड़ी समस्या? (पार्श्वभूमी)

    दिंडोशी वसाहत का एक बड़ा हिस्सा भौगोलिक रूप से ऊंचाई पर स्थित है। इसी वजह से यहां—

    • कई सालों से कम दबाव में पानी आता था
    • पानी की सप्लाई सिर्फ सुबह सीमित समय के लिए होती थी
    • ऑनलाइन पंपिंग सिस्टम होने के बावजूद ऊंचे हिस्सों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचता था

    इससे महिलाओं, बुजुर्गों और नौकरीपेशा लोगों को रोज़ाना भारी परेशानी झेलनी पड़ती थी।

    महापालिका रिपोर्ट में क्या सामने आया? (तकनीकी जानकारी)

    बीएमसी के जल अभियंता विभाग की जांच में यह तथ्य सामने आए—

    • मौजूदा टंकी की क्षमता: 1.25 लाख लीटर
    • टंकी का निर्माण वर्ष: 2007
    • पंपिंग सिस्टम: ऑनलाइन पंपिंग + गुरुत्वाकर्षण
    • ज़ोन–I: सेक्टर D, H, M
    • ज़ोन–II: सेक्टर C, G, L

    पानी की समयसीमा बढ़ाने के बावजूद ऊंचे इलाकों में दबाव की समस्या बनी रही।

    तीन साल की मेहनत के बाद मिली मंज़ूरी

    आमदार सुनिल प्रभु, नगरसेवक तुलशीराम शिंदे और एडवोकेट सुहास वाडकर ने पिछले तीन वर्षों तक लगातार बीएमसी जल अभियंता विभाग के साथ बैठकें कर इस मुद्दे को आगे बढ़ाया।

    • 4 दिसंबर 2024 को AST टंकी का प्रस्ताव रखा गया
    • 6 जनवरी 2025 को संयुक्त बैठक में परियोजना को मंज़ूरी मिली

    नई पानी टंकी की प्रमुख विशेषताएं

    • लाभार्थी आबादी: 17,690 नागरिक
    • रोज़ाना पानी की मांग: 8 लाख लीटर
    • टंकी क्षमता: 3,00,000 लीटर
    • पंप: 2 (एक कार्यरत, एक स्टैंडबाय)
    • पंप क्षमता: 3300 लीटर प्रति मिनट
    • परियोजना लागत: ₹1.77 करोड़
    • काम शुरू: 15 दिसंबर 2025
    • अनुमानित पूर्णता: 14 नवंबर 2027

    हजारों परिवारों को होगा सीधा फायदा

    इस नई टंकी के शुरू होने से—

    • ऊंचे इलाकों में पूरा दबाव मिलेगा
    • पानी की सप्लाई नियमित होगी
    • सुबह-सुबह पानी भरने की मजबूरी खत्म होगी
    • महिलाओं और बुजुर्गों को बड़ी राहत मिलेगी

    क्या बोले आमदार सुनिल प्रभु?

    आमदार सुनिल प्रभु ने कहा—

    “दिंडोशी के ऊंचाई वाले इलाकों की पानी समस्या सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि आम लोगों के रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी हुई थी। हमने 3 लाख लीटर की सहायक पानी टंकी मंज़ूर करवाई है। यह प्रोजेक्ट पूरा होते ही यहां की पानी समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। हम जो कहते हैं, उसे करके दिखाते हैं।”

    कार्यक्रम में कौन-कौन रहा मौजूद?

    इस शुभारंभ कार्यक्रम में—

    • नगरसेवक तुलशीराम शिंदे
    • एडवोकेट सुहास वाडकर
    • शाखाप्रमुख संदीप जाधव
    • संपत मोरे
    • सामाजिक कार्यकर्ता संपतदादा उतेकर
    • बीएमसी के अभियंता
    • शिवसैनिक, महिला-पुरुष पदाधिकारी
    • बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक

    मौजूद रहे। काम शुरू होते ही इलाके में खुशी और उत्साह का माहौल देखा गया।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. दिंडोशी में कितनी क्षमता की पानी टंकी बन रही है?
    👉 3 लाख लीटर क्षमता की सहायक पानी टंकी।

    Q2. इस परियोजना से कितने लोगों को फायदा होगा?
    👉 करीब 17,690 नागरिकों को।

    Q3. टंकी कब तक पूरी होगी?
    👉 नवंबर 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है।

    Q4. सबसे ज़्यादा फायदा किन इलाकों को मिलेगा?
    👉 संतोष नगर, श्रीकृष्ण नगर, नागरी निवारा और म्हाडा वसाहत के ऊंचाई वाले इलाके।

  • विक्रोली में अंजुमन इत्तेहाद तंबोलियन जमात की नई बॉडी गठित, रहमान भाई बने अध्यक्ष

    विक्रोली में अंजुमन इत्तेहाद तंबोलियन जमात की नई बॉडी गठित, रहमान भाई बने अध्यक्ष

    मुंबई के विक्रोली में अंजुमन इत्तेहाद तंबोलियन जमात की नई कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन किया गया। अध्यक्ष रहमान भाई ने संगठन को मज़बूत करने और समाज सेवा को आगे बढ़ाने की बात कही।

    बॉबी शेख
    मुंबई: विक्रोली इलाके में अंजुमन इत्तेहाद तंबोलियन जमात की नई बॉडी का गठन सर्वसम्मति से किया गया। इस मौके पर रहमान भाई को अध्यक्ष चुना गया। कार्यक्रम में समाजसेवा, आपसी एकता और सभी धर्मों के लोगों की मदद को आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया। इस अवसर पर विक्रोली से शिंदे गुट के नगरसेवक राजेश पंढरीनाथ सोनावले भी मौजूद रहे और उन्होंने नई समिति को शुभकामनाएँ दीं।

    कार्यक्रम का आयोजन और माहौल

    विक्रोली में आयोजित इस कार्यक्रम में जमात के वरिष्ठ सदस्य, युवा साथी और समाज के कई गणमान्य लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। पूरे आयोजन में भाईचारे और एकजुटता का माहौल देखने को मिला। नई बॉडी के गठन को लेकर समाज में उत्साह साफ़ दिखाई दिया।

    रहमान भाई का अध्यक्ष पद पर पहला बयान

    नव-निर्वाचित अध्यक्ष रहमान भाई ने कहा कि यह ज़िम्मेदारी उनके लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है।
    उन्होंने कहा,

    “मैं संगठन के सभी वरिष्ठ सदस्यों, सहयोगियों और जमात के हर सदस्य के साथ मिलकर काम करूंगा। हमारी कोशिश रहेगी कि भविष्य की योजनाओं और प्रभावी कार्यप्रणाली से संगठन को और मज़बूत किया जाए।”

    उन्होंने यह भी बताया कि अंजुमन इत्तेहाद तंबोलियन जमात हमेशा से समाज सेवा में आगे रही है।

    समाज सेवा में जमात की भूमिका

    रहमान भाई ने बताया कि जमात ने बिना किसी धर्म या जाति का भेद किए हमेशा ज़रूरतमंद लोगों की मदद की है।
    इनमें शामिल हैं:

    • शादी-ब्याह से जुड़ी समस्याएँ
    • कर्ज़ और आर्थिक परेशानियाँ
    • आवास और रहने की दिक्कतें
    • आपातकालीन मदद और सामाजिक सहयोग

    उन्होंने कहा कि आगे भी यह सिलसिला और मज़बूती से जारी रहेगा।

    नगरसेवक राजेश सोनावले का संबोधन

    इस कार्यक्रम में विक्रोली से शिंदे गुट के नगरसेवक राजेश पंढरीनाथ सोनावले ने भी सभा को संबोधित किया।
    उन्होंने कहा,

    “हमारी पार्टी हर समुदाय का सम्मान करती है। तंबोलियन जमात का यह कार्यक्रम समाज के लोगों की मदद करता है और हम भी उसी सोच के साथ काम करते हैं।”

    उन्होंने नई समिति को बधाई देते हुए कहा कि उनकी पार्टी हमेशा सभी वर्गों के लोगों की सेवा के लिए तैयार है।

    नई समिति के प्रमुख सदस्य

    इस मौके पर नई समिति के कई सदस्य मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से:

    • राशिद भाई तंबोलियन
    • ताजुद्दीन भाई तंबोलियन
    • मुनीर भाई तंबोलियन
    • और अन्य समाजसेवी सदस्य शामिल थे

    सभी ने मिलकर संगठन को आगे ले जाने का संकल्प लिया।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. अंजुमन इत्तेहाद तंबोलियन जमात की नई बॉडी कहाँ बनी?
    👉 मुंबई के विक्रोली इलाके में।

    Q2. नई बॉडी के अध्यक्ष कौन चुने गए?
    👉 रहमान भाई को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया।

    Q3. इस कार्यक्रम में कौन-कौन मौजूद था?
    👉 जमात के सदस्य, वरिष्ठ समाजसेवी और नगरसेवक राजेश पंढरीनाथ सोनावले।

    Q4. जमात किस तरह की समाज सेवा करती है?
    👉 शादी, कर्ज़, आवास और ज़रूरतमंद लोगों की हर संभव मदद।

  • कांदिवली शताब्दी अस्पताल में बिना रजिस्ट्रेशन लैब टेक्नीशियन, मरीजों की सुरक्षा पर सवाल

    कांदिवली शताब्दी अस्पताल में बिना रजिस्ट्रेशन लैब टेक्नीशियन, मरीजों की सुरक्षा पर सवाल

    कांदिवली के शताब्दी अस्पताल में पांच लैब टेक्नीशियन बिना महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन के काम करते पाए गए. शिकायत के बाद MPC ने कार्रवाई के निर्देश दिए. पूरी रिपोर्ट पढ़ें.

    मुंबई: कांदिवली पश्चिम स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल (शताब्दी अस्पताल) में मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अस्पताल में कम से कम पांच लैब टेक्नीशियन ऐसे पाए गए हैं, जो महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल (MPC) में रजिस्टर्ड नहीं हैं, इसके बावजूद वे इमरजेंसी लैब में भी सेवाएं दे रहे थे. एक शिकायत के बाद MPC ने संज्ञान लेते हुए अस्पताल प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है.

    कैसे सामने आया पूरा मामला?

    यह मामला तब उजागर हुआ जब स्वास्थ्य कार्यकर्ता और अधिवक्ता तुषार भोसले ने “आपले सरकार” पोर्टल के जरिए महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि शताब्दी अस्पताल में बिना वैध रजिस्ट्रेशन वाले लैब टेक्नीशियन मरीजों के सैंपल, जांच और इमरजेंसी मामलों को संभाल रहे हैं, जो कानून और मरीजों की सुरक्षा—दोनों के खिलाफ है.

    शिकायत मिलने के बाद MPC ने अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया.

    MPC के निर्देश के बाद अस्पताल का आदेश

    पैरामेडिकल काउंसिल के निर्देश के बाद शताब्दी अस्पताल प्रशासन ने एक आंतरिक आदेश जारी कर स्पष्ट किया कि सभी लैब टेक्नीशियन के लिए MPC रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा.

    हालांकि, इस आदेश का विरोध अस्पताल के कुछ स्थायी और वरिष्ठ कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है, जो वर्षों से सेवा में हैं लेकिन जरूरी योग्यता और मान्यता प्राप्त डिग्री के अभाव में रजिस्ट्रेशन नहीं करा पा रहे.

    अस्पताल प्रशासन की दुविधा

    अस्पताल प्रशासन इस समय असमंजस में है. एक ओर कानून का पालन करना जरूरी है, तो दूसरी ओर लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों का भविष्य भी सवालों में है.

    इस मुद्दे पर मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अजय गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में कुल 18 लैब टेक्नीशियन कार्यरत हैं, जिनमें कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ भी शामिल है. इनमें से पांच टेक्नीशियन फिलहाल महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड नहीं हैं.

    पांच टेक्नीशियन ने किया आवेदन, फिर भी अड़चन

    डॉ. अजय गुप्ता के अनुसार,

    • सभी पांच टेक्नीशियन ने MPC रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर दिया है
    • प्रत्येक ने ₹2,000 की निर्धारित फीस जमा की है
    • आवेदन की रसीद भी उन्हें मिल चुकी है

    लेकिन समस्या यह है कि इनमें से कुछ के पास BSc माइक्रोबायोलॉजी की डिग्री है या वे ऐसे संस्थानों से पासआउट हैं, जो MPC की मान्यता सूची में शामिल नहीं हैं. इसी वजह से उनके रजिस्ट्रेशन पर अंतिम फैसला अटका हुआ है.

    DMLT अनिवार्य, कानून साफ

    स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के मुताबिक,
    ब्लड बैंक टेक्नीशियन और लैब टेक्नीशियन के लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त DMLT (डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी) अनिवार्य है.

    अतीत में कई भर्तियां इन नियमों को दरकिनार कर की गईं, जिसका खामियाजा अब कर्मचारियों और अस्पताल—दोनों को भुगतना पड़ रहा है.

    कानूनी चेतावनी: अपराध है बिना रजिस्ट्रेशन काम करना

    इस मामले पर शिकायतकर्ता अधिवक्ता तुषार भोसले ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा:

    “कानून के मुताबिक लैब टेक्नीशियन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, भले ही इसके लिए उन्हें अब DMLT करना पड़े. बिना रजिस्ट्रेशन प्रैक्टिस करना संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है. महाराष्ट्र स्टेट पैरामेडिकल एक्ट पूरे राज्य में लागू है, जिसमें BMC भी शामिल है. इस पर कोई भ्रम नहीं है.”

    उन्होंने बताया कि MPC ने इस बाबत BMC आयुक्त को भी अनिवार्य रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं और CMS ने भी समर्थन में सर्कुलर जारी किया है.

    मरीजों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल

    बिना रजिस्टर्ड टेक्नीशियन द्वारा इमरजेंसी लैब सेवाएं संभालना सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ माना जा रहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में जरा-सी चूक भी गंभीर परिणाम ला सकती है.


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. शताब्दी अस्पताल में कितने लैब टेक्नीशियन बिना रजिस्ट्रेशन के पाए गए?
    👉 कुल पांच लैब टेक्नीशियन MPC में रजिस्टर्ड नहीं थे.

    Q2. क्या वे इमरजेंसी सेवाओं में काम कर रहे थे?
    👉 हां, आरोप है कि वे इमरजेंसी लैब में भी कार्यरत थे.

    Q3. लैब टेक्नीशियन के लिए कौन-सी योग्यता जरूरी है?
    👉 सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त DMLT अनिवार्य है.

    Q4. क्या बिना रजिस्ट्रेशन काम करना अपराध है?
    👉 हां, यह संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है.

    Q5. अस्पताल प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
    👉 MPC के निर्देश पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है और सभी पांच टेक्नीशियन ने आवेदन किया है.

  • मालेगांव में बड़ा उलटफेर: AIMIM को रोकने के लिए कांग्रेस-बीजेपी ने मिलाया हाथ

    मालेगांव में बड़ा उलटफेर: AIMIM को रोकने के लिए कांग्रेस-बीजेपी ने मिलाया हाथ

    मालेगांव नगर निगम में AIMIM को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस और बीजेपी ने अप्रत्याशित गठबंधन कर ‘भारत विकास आघाड़ी’ बनाई है. जानिए पूरा समीकरण, संख्या बल, मेयर रेस और राजनीतिक मायने.

    मालेगांव: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर ऐसा मोड़ आया है जिसने सबको चौंका दिया है. मालेगांव नगर निगम में AIMIM को सत्ता से बाहर रखने के लिए कांग्रेस और बीजेपी ने आपसी विरोध भुलाकर हाथ मिला लिया है. दोनों दलों के पार्षदों ने मिलकर ‘भारत विकास आघाड़ी’ नाम से नया मोर्चा बनाया है, जिससे मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. इस पूरे घटनाक्रम ने मालेगांव की स्थानीय राजनीति में बड़ा उलटफेर पैदा कर दिया है.

    मालेगांव में कैसे बना कांग्रेस-बीजेपी गठबंधन?

    आमतौर पर राष्ट्रीय और राज्य राजनीति में एक-दूसरे के कट्टर विरोधी माने जाने वाले कांग्रेस और बीजेपी का साथ आना अपने-आप में बड़ी राजनीतिक घटना है. मालेगांव नगर निगम चुनाव के नतीजों के बाद जब AIMIM की भूमिका मजबूत होती दिखी, तब कांग्रेस और बीजेपी ने रणनीतिक तौर पर गठबंधन का रास्ता चुना.

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    कांग्रेस के 3 और बीजेपी के 2 पार्षदों ने मिलकर कुल 5 सदस्यों का एक औपचारिक गुट बनाया, जिसे ‘भारत विकास आघाड़ी’ नाम दिया गया. इस आघाड़ी का नेतृत्व कांग्रेस पार्षद एजाज बेग को सौंपा गया है.

    AIMIM को सत्ता से दूर रखने की रणनीति

    इस गठबंधन का सीधा उद्देश्य AIMIM की बढ़ती राजनीतिक पकड़ को सीमित करना बताया जा रहा है. गौरतलब है कि हाल ही में अकोट में बीजेपी और AIMIM के बीच हुए अल्पकालिक गठबंधन को लेकर काफी विवाद हुआ था, जिसके बाद बीजेपी को वहां से समर्थन वापस लेना पड़ा.

    अब मालेगांव में बीजेपी का कांग्रेस के साथ जाना यह साफ संकेत देता है कि स्थानीय निकायों में सत्ता संतुलन के लिए वैचारिक मतभेदों को फिलहाल पीछे रखा जा रहा है.

    मालेगांव नगर निगम: पूरा संख्या बल समीकरण

    पार्टीपार्षदों की संख्या
    इस्लाम पार्टी35
    AIMIM21
    शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट)18
    समाजवादी पार्टी05
    कांग्रेस03
    बीजेपी02
    कुल पार्षद84

    संख्या बल के हिसाब से इस्लामिक पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन गठबंधन राजनीति ने समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है.

    मेयर की कुर्सी पर कौन?

    इस बार मालेगांव नगर निगम में महापौर पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित है. ऐसे में सबसे बड़ी पार्टी इस्लाम पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक आसिफ शेख की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है.

    राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आसिफ शेख अपने परिवार से ही उम्मीदवार उतार सकते हैं और उनकी भाभी नसरीन शेख को मेयर बनाए जाने की पूरी संभावना है.

    डिप्टी मेयर को लेकर बढ़ी सियासी हलचल

    जहां मेयर पद को लेकर इस्लाम पार्टी मजबूत स्थिति में है, वहीं उपमहापौर पद के लिए जोड़-तोड़ तेज हो गई है. भारत विकास आघाड़ी की कोशिश है कि डिप्टी मेयर पद पर अपनी पकड़ बनाई जाए, जिससे निगम की सत्ता में संतुलन बना रहे.

    मेयर-डिप्टी मेयर चुनाव की प्रक्रिया क्या है?

    नियमों के मुताबिक:

    • मेयर आरक्षण घोषित होने के 8 से 12 दिन के भीतर चुनाव जरूरी
    • नगर निगम की विशेष बैठक बुलाई जाएगी
    • बैठक का एजेंडा 3 दिन पहले सभी पार्षदों को भेजा जाएगा

    इसी बैठक में मेयर और उपमहापौर का औपचारिक चुनाव होगा.

    राजनीतिक मायने और आगे की तस्वीर

    मालेगांव का यह घटनाक्रम साफ दिखाता है कि स्थानीय राजनीति में विचारधारा से ज्यादा सत्ता गणित हावी हो गया है. कांग्रेस-बीजेपी का यह गठबंधन भले ही संख्या में छोटा हो, लेकिन इसका प्रतीकात्मक असर बड़ा है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य दल भी इसी तरह नए समीकरण गढ़ते हैं.


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. क्या कांग्रेस और बीजेपी ने आधिकारिक गठबंधन किया है?
    👉 नगर निगम स्तर पर दोनों दलों के पार्षदों ने मिलकर ‘भारत विकास आघाड़ी’ बनाई है.

    Q2. इस गठबंधन का मुख्य मकसद क्या है?
    👉 AIMIM को सत्ता से दूर रखना और निगम की सत्ता में संतुलन बनाना.

    Q3. मालेगांव में सबसे बड़ी पार्टी कौन-सी है?
    👉 इस्लाम पार्टी, जिसके पास 35 पार्षद हैं.

    Q4. मेयर पद किसके लिए आरक्षित है?
    👉 सामान्य महिला वर्ग के लिए.

    Q5. मेयर चुनाव कब होगा?
    👉 आरक्षण घोषित होने के 8–12 दिनों के भीतर विशेष बैठक में.

  • भांडुप में रिडेवलपमेंट विवाद हिंसक, बुजुर्ग पर हमला; बिल्डर पर FIR

    भांडुप में रिडेवलपमेंट विवाद हिंसक, बुजुर्ग पर हमला; बिल्डर पर FIR

    मुंबई के भांडुप में रिडेवलपमेंट विवाद ने हिंसक रूप लिया। 65 वर्षीय बुजुर्ग पर जानलेवा हमला, बिल्डर और उसके साथियों पर BNS 2023 की धाराओं में FIR दर्ज।

    बॉबी शेख
    मुंबई: भांडुप इलाके में चल रहे एक पुनर्विकास विवाद ने गंभीर मोड़ ले लिया है। सनबीम सोसाइटी के 65 वर्षीय निवासी रमेश प्रकाश मोहन पर कथित तौर पर जानलेवा हमला किया गया। आरोप है कि एक बिल्डर और उसके सहयोगियों ने कोर्ट के आदेशों के खिलाफ चल रहे काम का विरोध करने पर बुजुर्ग पर हमला किया। इस मामले में भांडुप पुलिस ने बिल्डर विनोद शर्मा समेत तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    🏘️ कहां का है मामला?

    यह पूरा मामला भांडुप स्थित सनबीम सोसाइटी और उससे जुड़े बादल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के पुनर्विकास प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि सोसाइटी के कुछ सदस्य और बिल्डर के बीच लंबे समय से काम को लेकर विवाद चल रहा था।

    ⚠️ घटना का पूरा विवरण

    पीड़ित रमेश प्रकाश मोहन के अनुसार,
    29 जनवरी 2026, दोपहर के समय वह बादल बिल्डिंग के पास चल रहे निर्माण कार्य को देखने पहुंचे थे। उसी दौरान एक सफेद कार मौके पर रुकी। कार से बिल्डर विनोद शर्मा अपने दो साथियों अब्दुल, नरेंद्र कटारिया के साथ बाहर आया

    आरोप है कि:

    • विनोद शर्मा ने लकड़ी की छड़ी से रमेश मोहन के सिर पर वार किया
    • उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई
    • अचानक हुए हमले से बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए

    ⚖️ रिडेवलपमेंट विवाद ही बना हमले की वजह

    पीड़ित का कहना है कि:

    • सोसाइटी के पुनर्विकास में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा था
    • उन्होंने इसका खुलकर विरोध किया
    • मामला कोर्ट तक पहुंचा, जहां से
      👉 Status Quo (यथास्थिति बनाए रखने) का आदेश दिया गया

    इसके बावजूद काम जारी रहने से नाराज़ होकर, आरोपियों ने दबाव बनाने के लिए यह हमला किया।

    👮 पुलिस ने किन धाराओं में केस दर्ज किया?

    भांडुप पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है:

    • धारा 118(2) – खतरनाक हथियार से गंभीर चोट
    • धारा 115(2) – स्वेच्छा से चोट पहुँचाना
    • धारा 351(3) – आपराधिक धमकी
    • धारा 352 – शांति भंग करने के इरादे से अपमान
    • धारा 3(5) – साझा इरादा (कॉमन इंटेंशन)

    🏥 पीड़ित का इलाज जारी

    हमले में घायल रमेश प्रकाश मोहन को:

    • मुलुंड के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है
    • सिर में गंभीर चोटें आई हैं
    • फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में इलाज चल रहा है

    🔍 जांच की जिम्मेदारी किसके पास?

    इस पूरे मामले की जांच:

    • पुलिस सब-इंस्पेक्टर केतकी जगताप कर रही हैं
    • आरोपियों से पूछताछ और
    • घटनास्थल के आसपास लगे CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं

    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. यह घटना कहां हुई?
    ➡️ मुंबई के भांडुप इलाके में, बादल बिल्डिंग के पास।

    Q2. पीड़ित कौन हैं?
    ➡️ 65 वर्षीय रमेश प्रकाश मोहन, सनबीम सोसाइटी के निवासी।

    Q3. हमला क्यों किया गया?
    ➡️ रिडेवलपमेंट के नियमों के उल्लंघन का विरोध करने के कारण।

    Q4. पुलिस ने किन पर केस दर्ज किया है?
    ➡️ बिल्डर विनोद शर्मा और उनके दो सहयोगियों पर।

    Q5. पीड़ित की हालत कैसी है?
    ➡️ अस्पताल में इलाज चल रहा है, हालत स्थिर बताई जा रही है।

  • अंधेरी इर्ला रोड पर BMC की सख्त कार्रवाई, 200 अवैध फेरीवाले हटाए

    अंधेरी इर्ला रोड पर BMC की सख्त कार्रवाई, 200 अवैध फेरीवाले हटाए

    मुंबई के अंधेरी पश्चिम स्थित राम गणेश गडकरी मार्ग पर BMC ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 200 अवैध फेरीवालों और फुटपाथों पर बने अनधिकृत निर्माण हटाए। कूपर अस्पताल जाने वाले रास्ते को किया गया साफ।

    मुंबई: फुटपाथ, अतिक्रमण और अवैध फेरीवालों के खिलाफ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने सख्त रुख अपनाया है। अंधेरी (पश्चिम) के राम गणेश गडकरी मार्ग (इर्ला रोड) इलाके में बीएमसी के के पश्चिम वार्ड ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 200 अवैध फेरीवालों और फुटपाथों पर बने अनधिकृत निर्माणों को हटाया है। यह कार्रवाई 29 जनवरी 2026 को की गई।

    कूपर अस्पताल जाने वाले रास्ते पर अतिक्रमण बना था मुसीबत

    राम गणेश गडकरी मार्ग, जो स्वामी विवेकानंद रोड और गुलमोहर रोड को जोड़ता है, साथ ही डॉ. आर. एन. कूपर अस्पताल के प्रवेश मार्ग से जुड़ा हुआ है।
    इस सड़क और फुटपाथों पर लंबे समय से अवैध फेरीवालों और बढ़े हुए निर्माणों के कारण:

    • एम्बुलेंस की आवाजाही में दिक्कत
    • मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी
    • पैदल चलने वालों को भारी परेशानी

    जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ रही थीं।

    आयुक्त के निर्देश पर हुई कार्रवाई

    यह पूरी कार्रवाई महानगरपालिका आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगराणी के निर्देश पर की गई।
    उप आयुक्त (परिमंडल-4) भाग्यश्री कापसे के मार्गदर्शन में और
    सहायक आयुक्त (के पश्चिम) चक्रपाणी अल्ले के नेतृत्व में निष्कासन अभियान चलाया गया।

    200 से ज्यादा अवैध फेरीवाले हटाए गए

    अभियान के दौरान:

    • करीब 200 अनधिकृत फेरीवालों को हटाया गया
    • फुटपाथों पर बने अवैध बढ़ी हुई दुकानों और ढांचों को तोड़ा गया
    • सड़क और फुटपाथों को पैदल चलने लायक बनाया गया

    इससे पूरे इलाके में यातायात और पैदल आवाजाही काफी हद तक सुचारु हो गई है।

    BMC-takes-strict-action-on-Andheri-Irla-Road-removes-200-illegal-hawkers-news

    भारी मशीनरी और पुलिस बंदोबस्त तैनात

    कार्रवाई को सफल बनाने के लिए बीएमसी ने:

    • 4 अतिक्रमण हटाने वाले वाहन
    • 3 जेसीबी मशीनें
    • अन्य आवश्यक उपकरण

    तैनात किए थे।
    इसके अलावा करीब 100 बीएमसी अधिकारी-कर्मचारी और पर्याप्त पुलिस बल मौके पर मौजूद था, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।

    स्थानीय नागरिकों ने जताया संतोष

    इस कार्रवाई के बाद स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने राहत की सांस ली है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से इस इलाके में अव्यवस्था थी, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही थी।

    बीएमसी प्रशासन ने साफ किया है कि भविष्य में भी अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ ऐसी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. कार्रवाई कहां हुई?
    अंधेरी पश्चिम के राम गणेश गडकरी मार्ग (इर्ला रोड) पर।

    Q2. कितने फेरीवाले हटाए गए?
    करीब 200 अवैध फेरीवाले।

    Q3. कार्रवाई क्यों की गई?
    एम्बुलेंस और पैदल यात्रियों को हो रही परेशानी के कारण।

    Q4. कौन सा विभाग शामिल था?
    बीएमसी का के पश्चिम वार्ड।

    Q5. क्या आगे भी ऐसी कार्रवाई होगी?
    हां, बीएमसी ने नियमित कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।

  • Mumbai: आर्थर रोड जेल में कैदी का उत्पात, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी पर हमला

    Mumbai: आर्थर रोड जेल में कैदी का उत्पात, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी पर हमला

    Mumbai के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले आर्थर रोड जेल में एक कैदी ने पुलिसकर्मी पर हमला कर दिया। घटना के बाद जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

    मुंबई: आर्थर रोड कारागृह, जिसे देश की सबसे सुरक्षित जेलों में गिना जाता है, वहां से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जेल के अंदर ही एक कैदी ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना के बाद पूरे जेल परिसर में हड़कंप मच गया है और जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    कैदी ने दी गालियां, रोकने पर किया हमला

    जानकारी के मुताबिक, लोकेंद्र उदयसिंह रावत नाम का कैदी इस वक्त आर्थर रोड जेल में सजा काट रहा है। जेल के मुख्य गेट के पास खुली जगह में कुछ पुलिसकर्मी तैनात थे। इसी दौरान रावत वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को गालियां देने लगा

    स्थिति को संभालने के लिए मौके पर मौजूद पुलिस सिपाही वाघ ने उसे समझाने और रोकने की कोशिश की, लेकिन बात उलटी पड़ गई। रावत ने अचानक वाघ पर हमला कर दिया और उन्हें बुरी तरह पीट दिया।

    बीच-बचाव करने आए पुलिसकर्मियों पर भी हमला

    जब पुलिस सिपाही वाघ के साथ मारपीट हो रही थी, तब अन्य पुलिसकर्मी बीच-बचाव के लिए दौड़े। लेकिन रावत इतना आक्रामक हो चुका था कि उसने अन्य पुलिसकर्मियों पर भी हमला करने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद आखिरकार उसे काबू में किया गया।

    इस अचानक हुई घटना से पूरे आर्थर रोड जेल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    घायल पुलिसकर्मी अस्पताल में भर्ती

    हमले में गंभीर रूप से घायल हुए पुलिस सिपाही वाघ को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें कई जगह चोटें आई हैं, हालांकि उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

    कैदी के खिलाफ नया मामला दर्ज

    इस मामले में जेल प्रशासन की शिकायत पर लोकेंद्र रावत के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने और पुलिस पर हमला करने का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि

    • कैदी इतना आक्रामक क्यों हुआ
    • जेल के भीतर सुरक्षा में कोई चूक तो नहीं हुई
    • क्या पहले से किसी तरह की शिकायत या चेतावनी मौजूद थी

    Mumbai के सबसे सुरक्षित जेल में सुरक्षा पर सवाल

    आर्थर रोड जेल को हाई-सिक्योरिटी जेल माना जाता है। 26/11 हमले का आतंकी अजमल कसाब भी इसी जेल में बंद था। ऐसे में इस तरह की घटना ने जेल प्रशासन और पुलिस सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इससे पहले भी जेल के अंदर कैदियों के बीच झगड़े हो चुके हैं, लेकिन सीधे पुलिसकर्मी पर हमला होना बेहद गंभीर मामला है।

    अनुशासन और सख्ती की जरूरत

    पूर्व अधिकारियों का मानना है कि जेल के अंदर अनुशासन और सख्ती बेहद जरूरी है। अगर कैदी खुलेआम पुलिस पर हमला करने लगें, तो यह न सिर्फ जेल स्टाफ बल्कि पूरे सिस्टम की सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है।

    अब देखना होगा कि इस घटना के बाद

    • जेल प्रशासन क्या कदम उठाता है
    • सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाते हैं
    • दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. घटना कहां हुई है?
    मुंबई की आर्थर रोड कारागृह में।

    Q2. हमलावर कौन है?
    लोकेंद्र उदयसिंह रावत नाम का कैदी।

    Q3. घायल पुलिसकर्मी की हालत कैसी है?
    उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, हालत स्थिर है।

    Q4. क्या कैदी के खिलाफ नया केस दर्ज हुआ है?
    हां, सरकारी काम में बाधा और पुलिस पर हमले का मामला दर्ज किया गया है।

    Q5. क्या जेल प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं?
    हां, इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

  • कांदीवली के वडार पाड़ा में भव्य आरोग्य शिविर, सैकड़ों लोगों को मिली मुफ्त स्वास्थ्य जांच

    कांदीवली के वडार पाड़ा में भव्य आरोग्य शिविर, सैकड़ों लोगों को मिली मुफ्त स्वास्थ्य जांच

    कांदिवली (पूर्व) के वडार पाड़ा में 26 जनवरी को सागर सेवा फाउंडेशन की ओर से भव्य आरोग्य शिविर का आयोजन किया गया, जहां रक्तदान, आंखों की जांच, डायबिटीज, ईसीजी सहित कई मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं दी गईं।

    मुंबई: कांदिवली (पूर्व) स्थित वडार पाड़ा में 26 जनवरी, स्थापना दिवस और गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर एक भव्य आरोग्य शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर जय बजरंगबली गोविंदा पथक (रजि.) सागर सेवा फाउंडेशन की ओर से आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों मरीजों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला। शिविर का आयोजन गणेश कृपा को.ऑप.हौ.सो. लि., हनुमान नगर, वडार पाड़ा रोड नंबर-2 के परिसर में किया गया।

    स्थापना दिवस पर समाजसेवा की मिसाल

    26 जनवरी को सागर सेवा फाउंडेशन के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित इस आरोग्य शिविर का मुख्य उद्देश्य कांदिवली (पूर्व) और आसपास के इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों तक जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना था। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग शिविर स्थल पर पहुंचे और मुफ्त जांच एवं इलाज का लाभ लिया।

    इन स्वास्थ्य सुविधाओं का मिला मुफ्त लाभ

    इस भव्य आरोग्य शिविर में मरीजों को कई तरह की निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं, जिनमें प्रमुख रूप से:

    • रक्तदान शिविर
    • आंखों की मुफ्त जांच
    • जरूरतमंदों को मुफ्त चश्मा वितरण
    • सीवीसी खून की जांच (सफेद और लाल रक्त कणिकाएं)
    • डायबिटीज जांच
    • ब्लड प्रेशर (BP) चेकअप
    • ईसीजी टेस्ट
    • फ्री जनरल हेल्थ चेकअप

    एक ही जगह पर इतनी सारी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने से स्थानीय नागरिकों में काफी उत्साह देखा गया।

    आयोजन में आयोजक और डॉक्टर्स की अहम भूमिका

    इस शिविर का सफल आयोजन श्री समीर शंकर उत्तेकर के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम को जीवन ज्योति होम हेल्थ केयर सर्विसेस एंड डायग्नोस्टिक तथा डॉ. राहुल एस. विश्वकर्मा के सौजन्य से सफल बनाया गया। मेडिकल टीम ने पूरे दिन मरीजों की जांच कर उन्हें जरूरी सलाह और मार्गदर्शन दिया।

    कांदीवली के स्थानीय नागरिकों की जबरदस्त भागीदारी

    आरोग्य शिविर में वडार पाड़ा, हनुमान नगर और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कई लोगों ने कहा कि इस तरह के शिविर गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं, क्योंकि निजी अस्पतालों में जांच कराना हर किसी के बस की बात नहीं होती।

    आगे भी ऐसे आयोजनों की उम्मीद

    सागर सेवा फाउंडेशन और जय बजरंगबली गोविंदा पथक द्वारा किए गए इस आयोजन की स्थानीय स्तर पर काफी सराहना की जा रही है। लोगों को उम्मीद है कि भविष्य में भी इसी तरह के स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कांदिवली और अन्य इलाकों में किया जाएगा।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. आरोग्य शिविर कहां आयोजित किया गया था?
    👉 गणेश कृपा को.ऑप.हौ.सो. लि., हनुमान नगर, वडार पाड़ा रोड नंबर-2, कांदिवली (पूर्व)।

    Q2. शिविर का आयोजन किस संस्था ने किया?
    👉 जय बजरंगबली गोविंदा पथक (रजि.) सागर सेवा फाउंडेशन।

    Q3. कौन-कौन सी जांच मुफ्त की गई?
    👉 आंखों की जांच, खून की जांच, डायबिटीज, बीपी, ईसीजी और जनरल हेल्थ चेकअप।

    Q4. शिविर कब आयोजित हुआ?
    👉 26 जनवरी, स्थापना दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर।

    Q5. क्या भविष्य में ऐसे शिविर फिर लगेंगे?
    👉 आयोजकों के अनुसार आगे भी समाजहित में ऐसे कार्यक्रम किए जाएंगे।

  • UGC नियमों पर देशभर में सवर्ण विरोध, सरकार की मंशा पर उठे सवाल

    UGC नियमों पर देशभर में सवर्ण विरोध, सरकार की मंशा पर उठे सवाल

    UGC के नए नियमों को लेकर देशभर में सवर्ण समाज का विरोध तेज़। शिक्षण संस्थानों में भेदभाव, सरकार की नीयत और राजनीति पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

    मुंबई: UGC के नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध की आवाज़ें तेज़ हो गई हैं। खासतौर पर सवर्ण समाज के छात्रों और शिक्षाविदों का कहना है कि यह नियम शिक्षा व्यवस्था में संतुलन के बजाय टकराव और भेदभाव को बढ़ावा देगा। देश भर के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीति से प्रेरित कदम बताया है।

    UGC नियमों पर क्यों भड़का विरोध

    नए यूजीसी नियमों को लेकर आरोप है कि इससे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रशासनिक निर्णयों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा। विरोध करने वालों का कहना है कि इससे शैक्षणिक स्वायत्तता प्रभावित होगी और छात्रों के बीच अविश्वास का माहौल बनेगा।
    सवर्ण संगठनों का दावा है कि नियमों की भाषा और संरचना ऐसी है, जिससे एक विशेष वर्ग को निशाना बनाए जाने की आशंका बढ़ जाती है।

    हिंदू एकता बनाम राजनीतिक ध्रुवीकरण

    आलोचकों का कहना है कि “हिंदू एकता” जैसे नारों का इस्तेमाल सामाजिक एकजुटता के बजाय वोटों के ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है। उनका आरोप है कि वास्तविक मुद्दों—जैसे शिक्षा, रोजगार, महंगाई और स्वास्थ्य—से ध्यान हटाकर समाज को आपस में बांटा जा रहा है।

    शिक्षा व्यवस्था पर नियंत्रण का आरोप

    लेखक सुरेंद्र राजभर का कहना है कि विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों और नीतियों के जरिए शिक्षा पर वैचारिक नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है। उनका सवाल है कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन स्वतंत्र रूप से निर्णय ले पाएगा या फिर हर फैसले में सरकारी दखल बढ़ेगा।

    कानूनों के दुरुपयोग की आशंका

    विरोध करने वालों ने यह भी चिंता जताई कि यदि शिकायतों की जांच और झूठी शिकायत करने वालों पर कार्रवाई की व्यवस्था कमजोर हुई, तो इसका दुरुपयोग हो सकता है। उनका कहना है कि इससे छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है और शिक्षा का माहौल डर का बन सकता है।

    सरकार से जवाबदेही की मांग

    यूजीसी नियमों के खिलाफ उठ रही आवाज़ें अब केवल सवर्ण समाज तक सीमित नहीं हैं। कई शिक्षाविद, छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता सरकार से पारदर्शिता और संवाद की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी बदलाव से पहले सभी पक्षों से चर्चा जरूरी है।


    FAQ

    Q1. यूजीसी के नए नियमों का विरोध क्यों हो रहा है?
    नियमों से शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    Q2. विरोध कौन कर रहा है?
    मुख्य रूप से सवर्ण समाज के छात्र, शिक्षाविद और कुछ सामाजिक संगठन।

    Q3. सरकार पर क्या आरोप हैं?
    आरोप है कि शिक्षा नीतियों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ और सामाजिक ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है।

    Q4. आगे क्या मांग की जा रही है?
    नियमों पर पुनर्विचार, सभी वर्गों से संवाद और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग।